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भारत के ‘रतन’ की कहानी, टाटा कंपनी को बना दिया इंटरनेशनल ब्रांड

नई दिल्ली रतन टाटा नाम किसी पहचान का मोहताज नहीं है. भारत के दिग्‍गज उद्योगपति रतन टाटा का बुधवार रात को निधन हो गया. मुंबई के अस्‍पताल में उन्होंने 86 साल की उम्र में अंतिम सांस ली. रतन टाटा की शख्सियत देखें तो वो सिर्फ एक बिजनेसमैन ही नहीं, बल्कि एक सादगी से भरे नेक और दरियादिल इंसान, लोगों के लिए आदर्श और प्रेरणास्रोत भी थे. वे साल 1991 से 2012 तक टाटा ग्रुप के चेयरमैन रहे और इस दौरान उन्होंने बिजनेस सेक्टर में कई कीर्तिमान स्थापित करते हुए देश के सबसे पुराने कारोबारी घरानों में से एक टाटा समूह को बुलंदियों तक पहुंचाया. उन्होंने टाटा को इंटरनेशनल ब्रांड बना दिया. रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर, 1937 को नवल और सूनू टाटा के घर हुआ था. उन्होंने 1962 में कॉर्नेल विश्वविद्यालय से वास्तुकला में स्नातक की डिग्री प्राप्त की. इसके बाद 1975 में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में एडवांस मैनेजमेंट कार्यक्रम पूरा किया. उनके पिता नवल टाटा एक सफल उद्योगपति थे और उन्होंने टाटा समूह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. वहीं रतन टाटा की मां सोनी टाटा एक गृहिणी थीं. 1962 में टाटा ग्रुप में सहायक के रूप में हुआ थे शामिल रतन टाटा 1962 में टाटा इंडस्ट्रीज में सहायक के रूप में टाटा ग्रुप में शामिल हुए थे. बाद में उसी वर्ष टाटा इंजीनियरिंग एंड लोकोमोटिव कंपनी (जिसे अब टाटा मोटर्स कहा जाता है) के जमशेदपुर संयंत्र में छह महीने की ट्रेनिंग ली. विभिन्न कंपनियों में सेवा देने के बाद उन्हें 1971 में नेशनल रेडियो एंड इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी का प्रभारी निदेशक नियुक्त किया गया. 1981 में, उन्हें समूह की अन्य होल्डिंग कंपनी टाटा इंडस्ट्रीज का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जहां वे इसे समूह रणनीति थिंक टैंक और उच्च-प्रौद्योगिकी व्यवसायों में नए उपक्रमों के प्रवर्तक में बदलने के लिए जिम्मेदार थे. वे 1991 से 28 दिसंबर, 2012 को अपनी सेवानिवृत्ति तक टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के अध्यक्ष थे. इस दौरान वे टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा पावर, टाटा ग्लोबल बेवरेजेज, टाटा केमिकल्स, इंडियन होटल्स और टाटा टेलीसर्विसेज सहित प्रमुख टाटा कंपनियों के अध्यक्ष थे. वे भारत और विदेशों में विभिन्न संगठनों से भी जुड़े हुए थे. रतन टाटा मित्सुबिशी कॉर्पोरेशन और जेपी मॉर्गन चेस के अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड में भी थे. वे सर रतन टाटा ट्रस्ट और एलाइड ट्रस्ट्स, और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और एलाइड ट्रस्ट्स के अध्यक्ष थे. वे टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च की प्रबंधन परिषद के अध्यक्ष थे. वह कॉर्नेल विश्वविद्यालय और दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के न्यासी बोर्ड में भी कार्य करते थे. रतन टाटा की उपलब्धियां 1. टाटा समूह के अध्यक्ष के रूप में 1991-2012 तक सेवा. 2. जैगुआर लैंड रोवर की खरीद (2008). 3. कोरस की खरीद (2007). 4. टाटा स्टील की वैश्विक पहुंच बढ़ाना. 5. टाटा मोटर्स की सफलता. 6. टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की वैश्विक पहुंच बढ़ाना. 7. टाटा समूह की वैश्विक ब्रांड वैल्यू में वृद्धि. रतन टाटा के प्रमुख पुरस्कार और सम्मान 1. पद्म विभूषण (2008) 2. पद्म भूषण (2000) 3. ऑनररी नाइट कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर (2009) 4. इंटरनेशनल हेरिटेज फाउंडेशन का लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड (2012) परोपकार और सामाजिक कार्य रतन टाटा को उनकी परोपकार और समाज सेवा के कार्यों के लिए व्यापक रूप से सराहा जाता है. उनके नेतृत्व में टाटा ट्रस्ट और टाटा फाउंडेशन ने शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, और तकनीकी नवाचारों के क्षेत्र में बड़ा योगदान दिया है.

मेनोपॉज का महिलाओं के यौन जीवन या यौन स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ता है

मुंबई मेनोपॉज महिलाओं के जीवन में होने वाला एक प्राकृतिक बदलाव है। जब एक महिला को लगातार 12 महीनों तक मासिक धर्म नहीं आता, तो इस स्थिति को मेनोपॉज के रूप में जाना जाता है। आमतौर पर महिलाओं को 45 से 50 साल की उम्र तक मेनोपॉज की अवस्था आ जाती है। जिसकी वजह से महिलाओं को कई तरह के शारीरिक और मानसिक बदलावों का सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं, इस स्थिति का महिलाओं के यौन जीवन या यौन स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ता है। इस दौरान महिलाओं की यौन इच्छा में कमी आ सकती है। ऐसे में मेनोवेदा की फाउंडर और मेनोपॉज कोच तमन्ना सिंह से जानते हैं आखिर मेनोपॉज का महिलाओं के जीवन और सेक्सुअल हेल्थ पर क्या असर पड़ता है। मेनोपॉज महिलाओं के यौन स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है? मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। इन्हीं हार्मोनल बदलावों की वजह से, महिलाओं को अपने यौन जीवन में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। दरअसल, मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर गिरने लगता है। जिसकी वजह से वजाइन में ड्राइनेस की समस्या, वजाइना में दर्द और असुविधा का भी अनुभव होने लगता है। इन समस्याओं की वजह से महिला को यौन क्रियाओं में मुश्किल महसूस हो सकती है। जिससे महिलाओं में यौन इच्छा में कमी हो सकती है। मेनोपॉज के दौरान यौन स्वास्थ्य में बदलाव होने पर क्या करें? मेनोपॉज के दौरान यौन स्वास्थ्य प्रभावित होने पर महिलाओं को तनाव महसूस हो सकता है। जिसकी वजह से उनके आत्मविश्वास की कमी आ सकती है। ऐसे में महिला को अपने पार्टनर से खुलकर बातचीत करनी चाहिए, उन्हें अपनी समस्या के बारे में बताएं। -मेनोपॉज के दौरान महिला को अपनी स्थिति को लेकर डॉक्टर से भी कंसल्ट करना चाहिए। डॉक्टर कुछ दवाइयों की मदद से यौन जीवन में आने वाली समस्याओं को दूर कर सकते हैं। -यौन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी की मदद भी ली जा सकती है। -मेनोपॉज के दौरान महिला को अपनी डाइट का खास ख्याल रखना चाहिए। हेल्दी खाना खाएं और अनहेल्दी फूड्स से दूरी बनाकर रखें। -मेनोपॉज के दौरान तनाव और चिंता से बाहर निकलने के लिए मेडिटेशन जरूर करें। -फिट और हेल्दी बने रहने के लिए योग और एक्सरसाइज जरूर करें। रजोनिवृत्ति में योनि संबंधी लक्षण मासिक धर्म की अनियमितता, नए दर्द और पीड़ा, मनोदशा में बदलाव, कामेच्छा में कमी और संज्ञानात्मक क्षमता में कमी इस समय आम शिकायतें हैं जिनकी गंभीरता और दैनिक जीवन पर प्रभाव अलग-अलग डिग्री के साथ होते हैं ( बीएमएस अगस्त, 2023 )। रजोनिवृत्ति के दौरान एस्ट्रोजन के स्तर में उतार-चढ़ाव और गिरावट के कारण कुछ लोग कुछ दिनों में सामान्य कार्य करने में असमर्थ हो जाते हैं, वे उदास महसूस करते हैं, उनमें आत्मविश्वास या प्रेरणा की कमी होती है तथा वे एक सप्ताह से दूसरे सप्ताह तक दिन में लाल चकत्ते और रात में पसीने से तर-बतर हो जाते हैं। सलाह मेनोपॉज के दौरान, यौन स्वास्थ्य में आने वाले बदलाव बेहद सामान्य हैं। इसलिए आपको इनके प्रति जानकारी रखना बेहद जरूरी है। मेनोपॉज के दौरान अगर आपको कुछ असामान्य लक्षणों का अनुभव हो, तो मेनोपॉज एक्सपर्ट से जरूर संपर्क करें।

रतन टाटा का 86 साल की उम्र में निधन, PM मोदी ने दी श्रद्धांजलि

मुंबई अरबपति कारोबारी और बेहद ही दरियादिल इंसान रतन टाटा का निधन हो गया है. वह 86 वर्ष के थे. उन्हें उम्र संबंधी मेडिकल कंडीशन के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन टाटा अब इस दुनिया में नहीं रहे. 86 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया. उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांस ली. कुछ दिनों पहले उन्हें उम्र संबंधी मेडिकल कंडीशन के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उनके स्वास्थ्य को लेकर खबरें चल रही थी और इस बारे में उन्होंने एक बयान जारी कर बताया भी था कि उनकी तबीयत ठीक है और सामान्य चेक-अप के लिए अस्पताल में हैं. उन्होंने अपने स्वास्थ्य को लेकर “गलत सूचना” न फैलाने की सलाह दी थी. रतन टाटा ने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांस ली. प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है. भारतीय इतिहास में रतन टाटा का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा. भारत में जब भी उद्योगपतियों का जिक्र होगा. सबसे पहले रतन टाटा का नाम लिया जाएगा. उन्होंने अपने जीवन की सार्थक यात्रा में बहुत से ऐतिहासिक काम किए. रतन टाटा की शख्सियत देखें तो वो सिर्फ एक बिजनेसमैन ही नहीं, बल्कि एक सादगी से भरे नेक और दरियादिल इंसान, लोगों के लिए आदर्श और प्रेरणास्रोत भी थे. वे साल 1991 से 2012 तक टाटा ग्रुप के चेयरमैन रहे और इस दौरान उन्होंने बिजनेस सेक्टर में कई कीर्तिमान स्थापित करते हुए देश के सबसे पुराने कारोबारी घरानों में से एक टाटा समूह को बुलंदियों तक पहुंचाया. उन्होंने टाटा को इंटरनेशनल ब्रांड बना दिया. रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर, 1937 को नवल और सूनू टाटा के घर हुआ था. उन्होंने 1962 में कॉर्नेल विश्वविद्यालय से वास्तुकला में स्नातक की डिग्री प्राप्त की. इसके बाद 1975 में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में एडवांस मैनेजमेंट कार्यक्रम पूरा किया. उनके पिता नवल टाटा एक सफल उद्योगपति थे और उन्होंने टाटा समूह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. वहीं रतन टाटा की मां सोनी टाटा एक गृहिणी थीं. रतन टाटा 1962 में टाटा इंडस्ट्रीज में सहायक के रूप में टाटा ग्रुप में शामिल हुए थे. बाद में उसी वर्ष टाटा इंजीनियरिंग एंड लोकोमोटिव कंपनी (जिसे अब टाटा मोटर्स कहा जाता है) के जमशेदपुर संयंत्र में छह महीने की ट्रेनिंग ली. विभिन्न कंपनियों में सेवा देने के बाद उन्हें 1971 में नेशनल रेडियो एंड इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी का प्रभारी निदेशक नियुक्त किया गया. 1981 में, उन्हें समूह की अन्य होल्डिंग कंपनी टाटा इंडस्ट्रीज का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जहां वे इसे समूह रणनीति थिंक टैंक और उच्च-प्रौद्योगिकी व्यवसायों में नए उपक्रमों के प्रवर्तक में बदलने के लिए जिम्मेदार थे. वे 1991 से 28 दिसंबर, 2012 को अपनी सेवानिवृत्ति तक टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के अध्यक्ष थे. इस दौरान वे टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा पावर, टाटा ग्लोबल बेवरेजेज, टाटा केमिकल्स, इंडियन होटल्स और टाटा टेलीसर्विसेज सहित प्रमुख टाटा कंपनियों के अध्यक्ष थे. वे भारत और विदेशों में विभिन्न संगठनों से भी जुड़े हुए थे. रतन टाटा मित्सुबिशी कॉर्पोरेशन और जेपी मॉर्गन चेस के अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड में भी थे. वे सर रतन टाटा ट्रस्ट और एलाइड ट्रस्ट्स, और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और एलाइड ट्रस्ट्स के अध्यक्ष थे. वे टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च की प्रबंधन परिषद के अध्यक्ष थे. वह कॉर्नेल विश्वविद्यालय और दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के न्यासी बोर्ड में भी कार्य करते थे.

हरियाणा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस ने ईवीएम और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर फिर सवाल उठाए

नई दिल्ली राहुल गांधी ने एक बार कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की असली ताकत उनका इकबाल है और एक दिन वह उस इकबाल को खत्म करके रहेंगे। इसके लिए उन्होंने कोशिशें भी खूब की। राफेल सौदे को लेकर ‘चौकीदार चोर है’ का अभियान हो या हिंडनबर्ग रिपोर्ट को लेकर ‘मोदानी’ का हमला या फिर अंबानी-अडानी की जेब में सरकार वाला नैरेटिव…राहुल गांधी ने हर मुमकिन कोशिश की लेकिन कामयाबी नहीं मिली। राहुल गांधी मोदी का इकबाल खत्म भले न कर पाए लेकिन ऐसा लगता है कि उनकी पार्टी अब संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को ध्वस्त करने के खतरनाक खेल में जुट गई है। हरियाणा चुनाव में हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ने और चुनाव आयोग पर हमले से कांग्रेस असल में यही कर रही। उस ईवीएम पर सवाल उठा रही जो एक बार नहीं बल्कि कई बार, बार-बार अग्निपरीक्षा में पास हुई है। बेदाग साबित हुई है। सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट मिली। चुनाव आयोग ने हैकिंग का ओपन चैलेंज तक दिया लेकिन कोई सामने नहीं आया। जीत गए तो ईवीएम ठीक, हार गए तो सारा दोष ईवीएम का! मंगलवार को दो राज्यों के चुनाव नतीजे आए। जम्मू-कश्मीर और हरियाणा। जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस-नैशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन की जीत हुई तो हरियाणा में बीजेपी की। लेकिन दोनों परिणामों को लेकर कांग्रेस की प्रतिक्रिया में जमीन-आसमान का फर्क था। जहां जीते वहां तो लोकतंत्र की जीत। राज्य के साथ ‘अन्याय’ और ‘अपमान’ का जनता का करारा जवाब। तरह-तरह के लच्छेदार जुमले। लेकिन जहां हार गए, वहां जनादेश का सम्मान तो दूर, उसे न स्वीकार करने का अहंकार। जीत गए तो ईवीएम ठीक, हार गए तो सारा दोष ईवीएम का। हरियाणा चुनाव के लिए मंगलवार सुबह 8 बजे जब काउंटिंग शुरू हुई तो शुरुआती रुझानों में कांग्रेस बहुमत के आंकड़े को पार कर चुकी थी। लेकिन 1-2 घंटे बाद ही रुझान पलट गए। बीजेपी आगे हो गई। एक बार आगे हुई तो फिर अंतिम नतीजे आने तक आगे ही रही। पिछड़ने के बाद से ही कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। पहले काउंटिंग के आंकड़ों के कथित धीमे अपडेट का मुद्दा उठाया। वक्त के साथ जब रुझान निर्णायक मोड़ पर पहुंच गए तब कांग्रेस ने ईवीएम पर ही सवाल उठाना शुरू कर दिया। जनादेश को स्वीकार करने के बजाय कांग्रेस ने काउंटिंग की प्रक्रिया पर सवाल उठा दिए। ईवीएम पर उंगली उठाई। साजिश का आरोप लगाने लगे। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मतगणना के वक्त कई ईवीएम में 99 प्रतिशत बैटरी चार्ज मिली। जिन ईवीएम की बैटरी 60-70 प्रतिशत चार्ज थीं वहां कांग्रेस के अच्छे प्रदर्शन का दावा किया। जहां 99 प्रतिशत बैटरी चार्ज थी वहां बीजेपी की जीत का दावा किया. लेकिन चुनाव आयोग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ईवीएम बैटरी की क्षमता और नतीजों में कोई संबंध ही नहीं है। आत्ममंथन के बजाय ईवीएम का रोना! कांग्रेस ने हार को स्वीकार कर आत्ममंथन और समीक्षा के बजाय बहानेबाजी का आसान रास्ता चुना लेकिन ऐसा करते हुए वह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की महान लोकतांत्रिक प्रक्रिया और उसकी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा रही है। हरियाणा में इस बार कांग्रेस के प्रदर्शन में सुधार हुआ है। 90 विधानसभा सीटों वाले राज्य में 2019 में 31 सीट जीतने वाली कांग्रेस ने इस बार 37 सीटों पर जीत हासिल की। वोट शेयर में भी जबरदस्त इजाफा हुआ। पिछली बार कांग्रेस का वोटशेयर 28 प्रतिशत था तो इस बार 39 प्रतिशत यानी 11 प्रतिशत ज्यादा रहा। लेकिन प्रदर्शन में ये सुधार सत्ता तक नहीं पहुंचा पाया। ऐसा क्यों हुआ, उसकी समीक्षा के बजाय पार्टी चुनावी प्रक्रिया पर ही लांछन लगाने लगी है। वैसे कांग्रेस या विपक्षी दल ऐसा पहली बार नहीं कर रहे। इससे पहले भी अपनी-अपनी सुविधा के हिसाब से पार्टियां ईवीएम पर चुप्पी या हो-हल्ला मचाती रही हैं। ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल तो सबसे पहले बीजेपी ने ही उठाए थे। 2009 की हार के बाद लाल कृष्ण आडवाणी ने ईवीएम पर संदेह किया था। बीजेपी के एक और नेता जीवीएल नरसिम्हा राव ने तो बाकायदे किताब लिखकर ईवीएम पर संदेह जताया था। लेकिन ईवीएम एक बार नहीं, कई बार अग्निपरीक्षा से गुजरी और हर बार बेदाग निकली। जब देश की सबसे बड़ी अदालत से ईवीएम और चुनाव आयोग को क्लीन चिट मिल गई तब इस पर चल रहा विवाद खत्म हो जाना चाहिए था। हर अग्निपरीक्षा में बेदाग साबित हुई है ईवीएम निहित स्वार्थ के तहत चुनाव आयोग और ईवीएम को लांछित करने की कोशिशों पर सुप्रीम कोर्ट एडीआर जैसे समूहों को लताड़ लगा चुका है। इसी साल अप्रैल में जब लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया चल रही थी तब सर्वोच्च अदालत ने पिछले 70 सालों से स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग की तारीफ की और साथ में इस पर दुख जताया कि ‘निहित स्वार्थी समूह’ देश की उपलब्धियों को कमजोर कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ईवीएम पर 8 बार परीक्षण किया गया और ये हर बार बेदाग निकली। ईवीएम को लेकर कई बार मामले हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पहुंचे लेकिन हर बार उसकी विश्वसनीयता असंदिग्ध मिली। वीवीपैट पर्चियों और ईवीएम में दर्ज वोटों के मिलान में कभी कोई विसंगति नहीं दिखी। अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कई राज्यों में ईवीएम में दर्ज वोट और वीवीपैट का मिलान हुआ। सब सही पाया गया और ईवीएम बेदाग साबित हुई। सात साल पहले 2017 में तो चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों या किसी भी व्यक्ति या संगठन को ईवीएम हैक करके दिखाने का खुला चैलेंज दिया था। तब सिर्फ 2 पार्टियों ने ही चैलेंज स्वीकार किया था- एनसीपी और सीपीएम। तय तारीख को दोनों पार्टियों के नेता चुनाव आयोग के दफ्तर तो पहुंचे लेकिन चैलेंज में हिस्सा लेने की हिम्मत नहीं हुई। हां, आम आदमी पार्टी ने जरूर दिल्ली विधानसभा के भीतर प्रहसन किया। विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर जुगाड़ के डिब्बों को ईवीएम का नाम देकर कथित तौर पर हैक करके दिखाया गया। पार्टी ने असली ईवीएम के बजाय ‘जुगाड़ डिब्बे’ का इस्तेमाल करके सस्ती पब्लिसिटी का हथकंडा अपनाया। चुनाव आयोग कार्रवाई न कर दे, इसलिए विधानसभा के विशेष सत्र की आड़ ली गई। हार-जीत होती रहेगी, जनता में … Read more

अनैतिकता को कानून का जामा पहनाने के लिए किया गया कोई अनुबंध भी अनैतिक ही माना जाएगा: अदालत

ग्वालियर  ‘भारतीय समाज और विधि के अनुसार शादी एक पवित्र बंधन है और शादी के होते हुए किसी दूसरे के साथ संबंध रखना अनैतिक है। इस अनैतिकता को कानून का जामा पहनाने के लिए किया गया कोई अनुबंध भी अनैतिक ही माना जाएगा।’ यह टिप्पणी मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिला न्यायालय के न्यायाधीश ने दुष्कर्म के मामले को झूठा पाने पर आरोपित को बरी करते हुए कही। न्यायाधीश ने कहा कि कानून महिलाओं को अपराध से सुरक्षित करता है और अपराधी को सजा देता है, लेकिन कोई अगर अनैतिक संव्यवहार करे, चाहे महिला हो या पुरुष, वह व्यवहार कानून की दृष्टि में अवैध ही होगा। दुष्कर्म का झूठा आरोप लगाने का यह था मामला     एक तलाकशुदा महिला द्वारा अभिषेक राजौरिया पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया गया था। इसकी सुनवाई के दौरान कोर्ट में यह तथ्य सामने आया कि महिला उस व्यक्ति के साथ लिव इन रिलेशन में रह रही थी।     इसके साथ ही महिला ने युवक के साथ एक अनुबंध किया था, जिसमें युवक को उस महिला को हर महीने एक तय रकम देना थी। जैसे ही महिला को रकम मिलना बंद हुई, वैसे ही उसने युवक पर दुष्कर्म का झूठा मुकदमा कर दिया।     सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि महिला 2015 में किसी अन्य व्यक्ति के साथ भी ऐसा कर चुकी है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने बचाव पक्ष के तर्कों और तथ्यों से सहमति जताते हुए युवक को दोषमुक्त कर दिया। महिला ने पुलिस के सामने गढ़ी थी यह झूठी कहानी महिला ने पड़ाव थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसकी शादी वर्ष 1999 में हुई थी। पति शराब पीता था तो उसने पति को तलाक दे दिया और अपने पिता के साथ रहने चली गई। महिला के साथ उसकी एक 16 वर्ष और एक 11 वर्ष आयु की बेटी भी रहती है। इस दौरान महिला की पहचान अभिषेक नामक युवक से हुई। दोनों के बीच दोस्ती हुई तो महिला ने उससे काम दिलवाने की बात कही। युवक ने जून 2016 में काम दिलवाने के बहाने महिला को एक होटल में बुलाया और दुष्कर्म कर दिया। इसके बाद कई बार उसने महिला को शादी का झांसा देकर संबंध बनाए। जब महिला ने शादी के लिए दबाव डाला तो युवक उसे टालने लगा। अप्रैल 2019 में महिला को पता चला कि युवक ने किसी और से शादी कर ली है। इसके बाद महिला ने उसके खिलाफ मामला दर्ज करवाया।

घातक ड्रोन बनेगा राफेल का पूरक, दोनों मिलकर युद्ध के मैदान में काम करेंगे

पेर‍िस  फ्रांस का लड़ाकू विमान राफेल पूरी दुनिया में सफलता के नए प्रतिमान गढ़ रहा है। भारत से लेकर कतर तक ने फ्रांस को जमकर ऑर्डर दिए हैं। इससे राफेल बनाने वाली कंपनी डसाल्‍ट एविएशन की चांदी हो गई है। अब फ्रांसीसी कंपनी राफेल मल्‍टी रोल जेट की अगली पीढ़ी F5 बना रही है जो हवा में ही ‘शाही बॉडीगार्ड’ से लैस होगा। दरअसल, फ्रांसीसी कंपनी चाहती है कि हवा में राफेल के साथ एक मानवरहित ड्रोन विमान भी उड़ान भरे। यह ड्रोन राफेल के पायलट के इशारे पर काम करेगा और दुश्‍मन को तबाह करने में मदद करेगा। फ्रांस के रक्षा मंत्री सेबेस्टिअन लेकोर्नू ने राफेल के घर कहे जाने वाले सेंट डिजिअर एयरबेस पर इस ड्रोन का ऐलान किया। यह ड्रोन पहले के nEUROn UCAV प्राजेक्‍ट के आधार पर तैयार किया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक nEUROn UCAV का ट्रायल के दौरान पायलट वाले लड़ाकू विमानों के साथ पहले ही इस्‍तेमाल किया जा रहा है। डसॉल्‍ट कंपनी के सीईओ एरिक ट्रैप्पियर ने कहा, ‘यह रेडार की पकड़ में नहीं आने वाला लड़ाकू ड्रोन विमान साल 2033 तक फ्रांसीसी एयर फोर्स को तकनीकी और ऑपरेशनल बढ़त दिलाएगा।’ यह ड्रोन विमान कई तरह की क्षमताओं से लैस होगा और इसे शामिल किया जाएगा। इस ड्रोन का अभी कोई नाम नहीं रखा गया है और यह राफेल का पूरक होगा। यह ड्रोन और राफेल दोनों मिलकर युद्ध के मैदान में काम करेंगे। राफेल F5 जेट का ड्रोन क्‍यों है बेहद खास ? इस यूएवी के अंदर ही एक आंतरिक पेलोड होगा। इस ड्रोन में ऑटोनॉमस कंट्रोल और राफेल का पायलट इसे आसानी से उड़ा सकेगा। डसॉल्‍ट ने बताया कि यह ड्रोन विमान कई गुणों से लैस होगा और भविष्‍य में आने वाले खतरों को ध्‍यान में रखकर इसे आगे भी विकसित किया जा सकेगा। कंपनी ने इस किलर ड्रोन के बारे में कोई और जानकारी नहीं दी है। बता दें कि फ्रांस एक परमाणु हथियार संपन्‍न राष्‍ट्र है और वह अब राफेल की मदद से परमाणु प्रतिरोधक क्षमता रखता है। इससे पहले मिराज फाइटर परमाणु बम गिराने के लिए तैयार किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक भविष्‍य में किलर ड्रोन परमाणु मिशन के दौरान आकाश में आने वाले खतरों को दूर करेगा और इसके बाद राफेल आराम से एटम बम गिरा सकेगा। राफेल का एफ-5 वर्जन नए ड्रोन के साथ साल 2060 तक फ्रांस की वायुसेना में बना रह सकेगा। राफेल के एफ-5 वर्जन के लिए शुरुआती अध्‍ययन हो चुका है और साल 2026-27 में इसका पूरा विकास शुरू हो जाएगा। इससे आने वाले समय में यह राफेल नए ड्रोन के साथ उड़ान भर सकेगा। आने वाले दिनों में फ्रांस राफेल को ASN4G से लैस करने जा रही है जो फ्रांसीसी वायुसेना का स्‍टैंडऑफ न्‍यूक्लियर वेपन है। भारत को भी हो सकता है बड़ा फायदा इस नए राफेल नई क्रूज मिसाइल, एयर टु-एयर मिसाइल और नई एंटी शिप हाइपरसोनिक मिसाइल लगाने की भी योजना है। राफेल एफ-5 संस्‍करण दुश्‍मन के एयर डिफेंस सिस्‍टम को मुख्‍य रूप से निशाना बनाएगा। नए राफेल को इस तरह से बनाया जाएगा कि वह दुश्‍मन की नजर में नहीं आए और अगर हमला हो तो बचाव भी कर सके। फ्रांस अगर यह नया राफेल बनात है तो इससे भारत को भी बड़ा फायदा हो सकता है। भारत 100 से ज्‍यादा लड़ाकू विमान खरीदना चाहता है और इससे पहले भारतीय वायुसेना में राफेल को शामिल किया जा चुका है। भारत अब नौसेना के लिए भी राफेल खरीद रहा है। ऐसे में भविष्‍य में भारत को भी इस परमाणु बम गिराने वाले ड्रोन से लैस राफेल का ऑफर मिल सकता है।

अडानी की नेटवर्थ में 4.35 अरब डॉलर की तेजी आई, नेटवर्थ 101 अरब डॉलर पहुंच गई

नई दिल्ली  लगातार छह दिन की गिरावट के बाद घरेलू शेयर बाजार में तेजी लौटी। शुरुआत में मार्केट में भारी उतारचढ़ाव दिख रहा था लेकिन हरियाणा विधानसभा चुनावों की मतगणना आगे बढ़ने के साथ ही शेयर मार्केट में तेजी दिखने लगी। इस तेजी से सबसे ज्यादा फायदे में गौतम अडानी रहे। अडानी ग्रुप के चेयरमैन की नेटवर्थ में  4.35 अरब डॉलर यानी करीब 36,505 करोड़ रुपये की तेजी आई। इसके साथ ही वह दुनिया के अमीरों की लिस्ट में दो स्थान की छलांग लगाते हुए 16वें नंबर पर पहुंच गए हैं। ब्लूमबर्ग बिलिनेयर इंडेक्स के मुताबिक उनकी नेटवर्थ 101 अरब डॉलर पहुंच गई है। अडानी  एनवीडिया के फाउंडर और सीईओ जेंसन हुआंग के बाद सबसे ज्यादा कमाई करने वाले शख्स रहे। हुआंग की नेटवर्थ में 4.36 अरब डॉलर की तेजी आई। अडानी की नेटवर्थ में इस साल 16.3 अरब डॉलर की तेजी आई है। देश की सबसे वैल्यूएबल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी की नेटवर्थ में भी  तेजी रही। उनकी नेटवर्थ 2.12 अरब डॉलर की तेजी के साथ 106 अरब डॉलर पहुंच चुकी है। इस साल उनकी नेटवर्थ में 9.90 अरब डॉलर की तेजी आई है और वह दुनिया के अमीरों की लिस्ट में 14वें नंबर पर हैं। अंबानी और अडानी की नेटवर्थ में अब केवल 5 अरब डॉलर का फासला रह गया है। कौन-कौन है टॉप 10 में इस बीच एलन मस्क 259 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ दुनिया के अमीरों की लिस्ट में पहले नंबर पर बने हुए हैं। फेसबुक की पेरेंट कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म के सीईओ मार्क जकरबर्ग 210 अरब डॉलर के साथ दूसरे नंबर पर हैं। जेफ बेजोस ($206 अरब) तीसरे, बर्नार्ड अरनॉल्ट ($191 अरब) चौथे, लैरी एलिसन पांचवें ($185 अरब), बिल गेट्स ($161 अरब) छठे, लैरी पेज ($149 अरब) सातवें, स्टीव बाल्मर ($144 अरब) आठवें, वॉरेन बफे ($143 अरब) नौवें और सर्गेई ब्रिन ($140 अरब) दसवें नंबर पर हैं।

भारत अमेरिका से खरीद रहा MK-54 लाइटवेट टॉरपीडो, डील से भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंध और मजबूत होंगे

नई दिल्ली भारतीय नौसेना की गिनती दुनियाभर की टॉप 10 नेवी में होती है। अब इसकी ताकक औरबढ़ने वाली है। दरअसलभारत अमेरिका से 53 MK-54 लाइटवेट टॉरपीडो खरीदने वाला है। जिनकी कीमत 175 मिलियन डॉलर है। ये टॉरपीडो भारत के नए MH-60R सीहॉक हेलीकॉप्टरों के लिए हैं। बाइडन प्रशासन का कहना है कि यह सौदा दोनों देशों के रिश्ते मजबूत करेगा। इससे भारत की सुरक्षा भी बेहतर होगी। बढ़ेगी नौसेना की ताकत अमेरिका का कहना है कि भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए अहम है। नए टॉरपीडो से भारत की नौसेना और मजबूत होगी। वे पनडुब्बियों से होने वाले खतरों से निपटने में सक्षम होंगे। भारत ने मार्च में छह MH-60R सीहॉक हेलीकॉप्टर शामिल किए थे। ये हेलीकॉप्टर हेलफायर मिसाइल, MK-54 टॉरपीडो और प्रेसिजन-किल रॉकेट से लैस हैं। अगले साल तक भारत को 24 और सीहॉक मिलेंगे। ये सभी हेलीकॉप्टर फरवरी 2020 में हुए 15,157 करोड़ रुपये के सौदे का हिस्सा हैं। सीहॉक हेलीकॉप्टर काफी आधुनिक हैं। इनमें मल्टी-मोड रडार और नाइट-विजन उपकरण भी हैं। ये हेलीकॉप्टर युद्धपोतों से संचालित हो सकते हैं। नौसेना अधिकारियों का कहना है कि सीहॉक दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम हैं। यह सौदा भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को दर्शाता है। दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर चिंतित हैं। MK-54 टॉरपीडो भारत की नौसेना को एक मजबूत बढ़त देंगे। कितने पावरफुल होते हैं MK-54 लाइटवेट टॉर्पीडो एक प्रकार का स्वचालित पनडुब्बी रोधी हथियार है, जिसे पानी के अंदर चलने वाले लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। ये टॉर्पीडो आधुनिक तकनीक से लैस होते हैं और उच्च गति से चलते हैं। इन्हें हल्का होने के कारण विभिन्न प्रकार के प्लेटफॉर्म जैसे कि हेलीकॉप्टर, विमान और जहाज से लॉन्च किया जा सकता है।

86 की उम्र में रतन टाटा का मुंबई में निधन, शोक में देश

नई दिल्ली देशभर में शोक की लहर दौड़ गई है. भारत के दिग्‍गज उद्योगपति रतन टाटा का निधन बुधवार की शाम को हो गया. उन्‍होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्‍पताल में अंतिम सांस ली. रतन टाटा 86 साल के थे. पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत खराब थी. दरअसल, बुधवार की शाम में उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ने की खबर आई थी. जिसके कुछ घंटे बाद ही खबर आई कि उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया है. रतन टाटा का जाना देश के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है. हालांकि उन्हें देश कभी भूल नहीं पाएगा. उन्होंने देश के एक से बढ़कर एक काम किए. टाटा ग्रुप को ऊंचाईयों पर पहुंचाने में रतन टाटा की सबसे बड़ी भूमिका रही. इन्‍होंने देश और आम लोगों के लिए कई ऐसे काम किए, जिसके लिए उन्‍हें हमेशा याद किया जाता रहेगा. रतन टाटा एक दरियाद‍िली इंसान थे और मुसीबत में देश के लिए हमेशा तैयार रहते थे. दो दिन पहले ही कहा था- मैं बिल्‍कुल ठीक हूं इससे पहले सोमवार को भी रतन टाटा की तबीयत बिगड़ने की खबर आई थी, जिसके कुछ ही घंटों बाद खुद रतन टाटा के एक्‍स (ट्विटर) हैंडल से एक पोस्‍ट शेयर किया गया था. इस पोस्‍ट में लिखा था कि मेरे लिए चिंता करने के लिए सभी का धन्‍यवाद! मैं बिल्‍कुल ठीक हूं. चिंता की कोई बात नहीं, मैं बढ़ती उम्र से जुड़ी बीमारियों की रूटीन जांच के लिए अस्‍पताल आया हूं. लेकिन देश को ये दर्द रहेगा कि वो इस बार अस्पताल से लौट नहीं पाए, और हमेशा के लिए अंतिम यात्रा पर निकल पड़े. 28 दिसंबर को हुआ था जन्‍म अरबपति कारोबारी और बेहद दरियादिल इंसान रतन टाटा 86 साल के थे, 28 दिसंबर 1937 को उनका जन्म हुआ था. वे साल 1991 से 2012 तक टाटा ग्रुप के चेयरमैन रहे और इस दौरान उन्होंने बिजनेस सेक्टर में कई कीर्तिमान स्थापित करते हुए देश के सबसे पुराने कारोबारी घरानों में से एक टाटा समूह को बुलंदियों तक पहुंचाया. रतन टाटा की शख्सियत को देखें, तो वो सिर्फ एक बिजनेसमैन ही नहीं, बल्कि एक सादगी से भरे नेक और दरियादिल इंसान भी थे. वो देश के लिए हमेशा आदर्श और प्रेरणास्रोत रहेंगे. वे अपने समूह से जुड़े छोटे से छोटे कर्मचारी को भी अपना परिवार मानते और उनका ख्याल रखने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ते, इसके कई उदाहरण मौजूद हैं. 1991 में बने थे चेयरमैन गौरतलब है कि रतन टाटा को 21 साल की उम्र में साल 1991 में ऑटो से लेकर स्टील तक के कारोबार से जुड़े समूह, टाटा समूह का चेयरमैन बनाया गया था. चेयरमैन बनने के बाद रतन टाटा ने टाटा ग्रुप को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया. उन्होंने 2012 तक इस समूह का नेतृत्व किया, जिसकी स्थापना उनके परदादा ने एक सदी पहले की थी. 1996 में टाटा ने टेलीकॉम कंपनी टाटा टेलीसर्विसेज की स्थापना की और 2004 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को मार्केट में लिस्‍ट कराया था.  

पीएम मोदी की कैबिनेट में पंजाब के लिए बड़ा फैसला लिया, सीमावर्ती इलाकों में सड़क बनाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी

पंजाब आज पीएम मोदी की कैबिनेट में पंजाब के लिए बड़ा फैसला लिया गया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने जब से सत्ता संभाली है, उनके एजेंडे में 2 मुख्य बातें रही हैं। पहला, हाशिये पर पड़े लोगों को समाज की मुख्यधारा में लाना और दूसरा, देश के बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय बनाना। केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लिए गए फैसलों में पंजाब के लिए बड़ा ऐलान किया गया है। पंजाब और पाकिस्तान की सीमा से लगे अन्य राज्यों में सड़क व्यवस्था सुधारने के लिए आज मोदी कैबिनेट ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने सीमावर्ती इलाकों में 2280 किमी लंबी सड़क बनाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। इस प्रोजेक्ट के लिए मोदी सरकार ने 4400 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम मंजूर की है। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया है। उनका मानना है कि मजबूत बुनियादी ढांचा देश की सुरक्षा और विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान (Pakistan) के सीमावर्ती इलाके दशकों से हर मौसम के लिए उपयुक्त सड़क नेटवर्क की कमी से जूझ रहे हैं। सीमावर्ती इलाकों में विश्वस्तरीय सड़क नेटवर्क होने से परिवहन में काफी आसानी होगी। आपातकालीन स्थिति में जहां तुरंत मौके पर पहुंचना आसान होगा, वहीं जरूरी सामान की आपूर्ति भी आसानी से हो सकेगी। 

दिवाली से पहले Home Loan लेने वालों को बड़ी राहत, आरबीआई गवर्नर डॉ. शक्तिकांत दास ने EMI पर बड़ा फैसला

नई दिल्ली नेशनल डेस्क आरबीआई गवर्नर डॉ. शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में हुई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की पिछली 9 बैठकों में ब्याज दरों को स्थिर रखने का निर्णय लिया गया है। बुधवार को तीन दिवसीय मीटिंग के बाद भी समिति ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। फरवरी 2023 में आखिरी बार रेपो रेट में संशोधन किया गया था, जब इसे 6.50% पर लाया गया था, और तब से यह दर स्थिर बनी हुई है। रेपो रेट में बदलाव न होने से आम जनता के होम लोन, ऑटो लोन और अन्य कर्जों पर ब्याज दरों में कोई असर नहीं पड़ेगा। रेपो रेट वही दर है, जिस पर केंद्रीय बैंक अन्य बैंकों को अल्पकालिक कर्ज प्रदान करता है, जिससे यह देशभर में उधारी की लागत को प्रभावित करता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के मद्देनजर रेपो रेट में कोई बदलाव न करने का फैसला इसलिए लिया है, क्योंकि दरों में कटौती से रुपये की कमजोरी बढ़ सकती है। रुपये के कमजोर होने से आयात की लागत बढ़ेगी और भारतीय कंपनियों के लिए इनपुट लागत भी प्रभावित हो सकती है। ग्रोथ पर रहेगा फोकस RBI का मुख्य फोकस आर्थिक विकास पर है, और दिसंबर या फरवरी में होने वाली आगामी मौद्रिक नीति समितियों (MPC) में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स (BPS) की कटौती की संभावना अधिक है। मौजूदा समीक्षा बैठक सोमवार से शुरू हुई थी, और आज RBI दरों पर अपना फैसला सुनाएगा। 2023 के बाद से RBI ने दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, जबकि उससे पहले दरों में तेजी से वृद्धि हुई थी।

हिजबुल्लाह इजरायल के सामने गाजा की शर्त भी छोड़ने के लिए राजी है, युद्धविराम की अपील, 15 दिनों में ही घुटनों पर आया

तेल अवीव/ लेबनान गाजा में एक साल से चल रहे भीषण रक्तपात के बावजूद जहां हमास आतंकियों ने सबकुछ गंवाने के बाद भी हार नहीं मानी, इजरायल ने महज 15 दिनों में ही हिजबुल्लाह को घुटनों पर ला दिया है। हिजबुल्लाह के उपनेता नईम कासिम ने इजरायल से युद्धविराम की अपील की है। हिजबुल्लाह इजरायल के सामने गाजा की शर्त भी छोड़ने के लिए राजी है। इजरायली सेना ने कुछ ही दिनों में हिजबुल्लाह के कई टॉप लीडर्स का खात्मा कर दिया है। हसन नसरल्लाह के बाद उसके उत्तराधिकारी सफीइद्दीन को भी मार डाला है। इसके अलावा हथियारों का जखीरा, सैकड़ों कमांडरों और आतंकियों का भी खात्मा हो चुका है। इजरायल ने साउथ लेबनान में भी काफी बढ़त हासिल कर ली है। जमीनी लड़ाई के दौरान इजरायली सेना ने कई इलाकों पर अपना कब्जा भी कर लिया है। हिजबुल्लाह ने युद्धविराम की अपील की इज़रायल द्वारा लेबनान-इज़राइली सीमा पर जमीनी सेना भेजकर और बेरूत और अन्य जगहों पर हवाई हमले जारी रखने के बीच हिजबुल्लाह अब लेबनान में युद्धविराम के लिए राजी हो गया है। हिजबुल्लाह ने युद्धविराम के लिए गाजा में संघर्ष विराम की शर्त भी छोड़ दी है। हिजबुल्लाह के उप नेता नईम कासिम ने कहा, “हम युद्धविराम हासिल के लिए किए जा रहे राजनीतिक प्रयासों का समर्थन करते हैं। एक बार जब युद्धविराम मजबूती से स्थापित हो जाए तो कूटनीति के जरिए अन्य बातों पर भी सहमति पूरी कर ली जाएगी। इस वक्त हमारे लिए लेबनान वासियों की जान से ज्यादा बढ़कर कुछ नहीं है।” क़ासिम ने मंगलवार को अपने टेलीविज़न भाषण में यह बात कही। अमेरिका और अरब देशों ने शुरू की गुप्त वार्ता आज इजरायली टेलीविजन चैनल 12 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका और अरब राज्यों ने मध्य पूर्व में चल रहे तमाम युद्ध को रोकने के लिए ईरान के साथ गुप्त वार्ता शुरू कर दी है। ‘एक्सियोस’ ने तीन अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने बुधवार सुबह इजरायल के प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर भी बात की। बाइडेन और नेतन्याहू के बीच ईरान से चल रहे संघर्ष को लेकर भी चर्चा की गई। समाचार आउटलेट ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा कि बाइडेन और नेतन्याहू ने लेबनान और गाजा में युद्ध पर भी चर्चा की है। बता दें कि इजरायल ने गाजा में हमास से भीषण युद्ध के बीच लेबनान आतंकियों हिजबुल्लाह से सीधी लड़ाई का ऐलान किया था। इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की युद्ध कैबिनेट ने उत्तरी सीमा पर लेबनान में आतंकियों की कमर तोड़ने और सीमा पर इजरायलियों को बार-बार के हमलों से बचाने की कसम खाई। इसके बाद 17 और 18 सितंबर को पेजर और वॉकी-टॉकी हमले से हिजबुल्लाह पर आक्रमण शुरू हुआ। हालांकि लेबनान में सीधी लड़ाई 23 सितंबर को शुरू की गई। इस दिन इजरायली सेना ने लेबनान में आतंकियों के खिलाफ सीधे हवाई हमले शुरू किए। नसरल्लाह के बाद उसके उत्तराधिकारी भी मारे इजरायली सेना ने लगातार और सटीक हमलों से हिजबुल्लाह को बुरी तरह चोट पहुंचानी शुरू की। 27 सितंबर को उसके चीफ हसन नसरल्लाह को एक हवाई हमले में मार डाला। फिर उसके उत्तराधिकारी सफीइद्दीन को और इसके अलावा हिजबुल्लाह के कई विंग कमांडरों को ढेर कर दिया। 23 सितंबर को शुरू की जंग में इजरायल ने हिजबुल्लाह को बुरी तरह पछाड़ दिया है। युद्ध रणनीति के तहत इजरायली सेना ने हवाई हमलों के बाद कुछ दिन पहले ही लेबनान में जमीनी हमला शुरू किया है। बुलडोजर और टैंकरों के साथ आईडीफ ने साउथ लेबनान में घुसपैठ की और हिजबुल्लाह के ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए। हिजबुल्लाह के सिर्फ कमांडर और लीडर ही नहीं हथियारों के जखीरे भी अधिकांश नष्ट किए जा चुके हैं।

मोदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस किसी भी तरीके से हिंदू समाज में आग लगाए रखना चाहती है, महाराष्ट्र चुनाव से पहले चेताया

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि मुसलमानों की जाति की बात आते ही कांग्रेस के मुंह पर ताला लग जाता है लेकिन हिंदू समाज की बात आते ही वह चर्चा जाति से ही शुरू करती है क्योंकि वह जानती है कि हिंदू जितना बंटेगा, उतना ही उसका फायदा होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस किसी भी तरीके से हिंदू समाज में आग लगाए रखना चाहती है और भारत में जहां भी चुनाव होते हैं, वह इसी फार्मूले को लागू करती है। महाराष्ट्र में 7,600 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली विभिन्न विकास परियोजनाओं की वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से आधारशिला रखने के बाद अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि ‘समाज को तोड़ने’ की इस कोशिश को राज्य की जनता नाकाम करेगी। उन्होंने इस सरकारी कार्यक्रम में महाराष्ट्र के लोगों से देश के विकास को सर्वोपरि रखते हुए और एकजुट होकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके गठबंधन ‘महायुति’ के पक्ष में मतदान करने की अपील की। हरियाणा के चुनाव परिणामों का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि इसने बता दिया है कि आज देश का मिजाज क्या है। उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस का पूरा इकोसिस्टम, अर्बन नक्सल का पूरा गिरोह… जनता को गुमराह करने में जुटा था लेकिन उसकी सारी साजिशें ध्वस्त हो गईं। उन्होंने दलितों के बीच झूठ फैलाने की कोशिश की लेकिन दलित समाज ने उनके खतरनाक इरादों को भांप लिया। दलितों को एहसास हो गया कि कांग्रेस उनका आरक्षण छीन कर अपने वोट बैंक को बांटना चाहती है।’’ उन्होंने कहा कि हरियाणा के दलित वर्ग ने भाजपा का रिकॉर्ड समर्थन किया तो अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) ने भी भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि किसानों और नौजवानों को ‘भड़काने’ में भी कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन हरियाणा की जनता ने दिखा दिया कि वह अब कांग्रेस और अर्बन नक्सल के नफरत के षड्यंत्र का शिकार नहीं होने वाली है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘कांग्रेस पूरी तरह से सांप्रदायिक और जातिवाद का चुनाव लड़ती है। हिंदू समाज को तोड़कर उसे अपनी जीत का फॉर्मूला बनाना, यही कांग्रेस की राजनीति का आधार है। कांग्रेस भारत के ‘सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय’ की परंपरा का दमन कर रही है, सनातन परंपरा का दमन कर रही है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस की नीति है, हिंदुओं की एक जाति को दूसरी जाति से लड़ाओ। कांग्रेस जानती है कि जितना हिंदू बंटेगा, उतना ही उसका फायदा होगा। कांग्रेस किसी भी तरीके से हिंदू समाज में आग लगाए रखना चाहती है, ताकि वो उस पर राजनीतिक रोटियां सेंकती रहे। भारत में जहां भी चुनाव होते हैं, वहां कांग्रेस यही फॉर्मूला लागू करती है।’’ प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि ‘हमेशा बांटों और सत्ता पाओ’ के फार्मूले पर चलने वाली कांग्रेस ने बार-बार यह सिद्ध किया है कि वह एक ‘गैर-जिम्मेदार’ दल बन गया है। उन्होंने कहा, ‘‘वह अभी भी देश को बांटने के लिए नए-नए विमर्श गढ़ रही है…कांग्रेस के एक भी नेता ने आज तक कभी नहीं कहा कि हमारे मुस्लिम भाई-बहनों में कितनी जातियां होती हैं। मुस्लिम जातियों की बात आते ही कांग्रेस के नेता मुंह पर ताला लगाकर बैठ जाते हैं।’’उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन जब हिंदू समाज की बात आती है तो कांग्रेस उनकी चर्चा जाति से ही शुरू करती है। कांग्रेस की नीति है हिंदुओं की एक जाति को दूसरी जाति से लड़ाओ। कांग्रेस जानती है जितना हिंदू बंटेगा, उतना ही उसका फायदा होगा। भारत में जहां भी चुनाव होते हैं, वहां कांग्रेस यही फार्मूला लागू करती है।’’ मोदी ने कहा कि कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए इतनी बेचैन है कि हर रोज नफरत की राजनीति कर रही है और कांग्रेस की पुरानी पीढ़ी के नेता भी बेबस और असहाय हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस नफरत फैलाने की सबसे बड़ी फैक्ट्री बनने वाली है, यह गांधी जी(महात्मा गांधी) ने आजादी के बाद ही समझ लिया था। इसीलिए गांधी जी ने कहा था कांग्रेस को खत्म कर देना चाहिए। कांग्रेस खुद खत्म नहीं हुई लेकिन आज देश को खत्म करने पर तुली हुई है। इसलिए हमें सावधान और सतर्क रहना है।’’ मोदी ने कहा, ‘‘मेरा पक्का विश्वास है कि समाज को तोड़ने की आज जो कोशिश हो रही है, इसे महाराष्ट्र के लोग नाकाम करके रहेंगे। महाराष्ट्र के लोगों को देश के विकास को सर्वोपरि रखते हुए एकजुट होकर भाजपा और महायुति के लिए वोट करना है।’’ महाराष्ट्र की 288 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव अगले महीने संभावित हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी वीरपुर को कॉलेज, सीएचसी का उन्नयन और पेंटुल पुल निर्माण कार्य सहित मिली कई सौगातें

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का अभिनंदन करते हुए कहा कि वनों के विकास के लिए जरूरी कदम उठाए गए हैं। वनों के अंदर जो निवास करते हैं, जो प्रकृति के साथ तालमेल करते हैं, उनकी सभी जरूरतें पूरी करेंगे। वनोपज बेचने का अधिकार उन्हें दिया गया है। राज्य में पेसा एक्ट का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वनों के विकास के लिए राज्य सरकार सजग है। आज 57 करोड़ रुपये से अधिक के कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन किया गया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में वन क्षेत्र निवासियों का चहुँमुखी विकास किया जा रहा है। वन ग्राम में वनोपज बेचने का अधिकार वन ग्राम निवासियों को दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह बात श्योपुर के वीरपुर में संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के प्रशिक्षण और जागरुकता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही। कार्यक्रम में वनाधिकार पट्टे भी वितरित किये गये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में उद्योगों के विकास के लिए रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव निंरतर होंगी। ये कॉन्क्लेव लाभकारी सिद्ध हो रही हैं। बेरोजगार युवाओं को रोजगार दिलवाने का दायित्व हमारा है। हमारे युवा एग्री, आईटी आदि क्षेत्रों में प्रगति करें, इसके लिए सरकार पूरी मदद करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकास के मामले में सरकार किसानों, गरीबों के साथ है। जनजातीय समाज को विशेष लाभ दिया जा रहा है। वीरपुर में कॉलेज खोला जाएगा। वीरपुर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का उन्नयन किया जाएगा। यहाँ मौजूद अस्पताल को उन्नत करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन क्षेत्र में विकास के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। वन क्षेत्र में रहने वाले भाई-बहन प्रकृति के बीच संतुलन बनाते हुए “जियो और जीने दो” की भावना को चरितार्थ करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकास के मामले में सरकार हमेशा जनता के साथ है। गरीब, किसान, महिलाओं और ग्राम के आखिरी छोर के व्यक्ति के साथ सरकार खड़ी है। स्वास्थ्य सुविधाओं में विस्तार किया गया है। एयर एम्बुलेंस के माध्यम से गाँव के बीमार व्यक्ति को शहरों के बड़े अस्पताल पहुँचाया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर आगरा और दिल्ली तक भेजने की व्यवस्था भी की जाएगी। विमान में डॉक्टर, नर्स सहित जीवन-रक्षा के लिए आवश्यक उपकरणों और दवाई की उपलब्धता रखी जाएगी। यह गरीबों का भला करने वाली सरकार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रोजगार के सभी क्षेत्रों में प्रयास करने के साथ ग्रामीण स्तर पर दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए ग्राम निवासियों को अनुदान दिया जाएगा। गेहूँ और सोयाबीन की तरह ही दूध के उत्पादन पर भी बोनस दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर श्योपुर को जनजातीय प्रमाण-पत्र बनाने और उनके वितरण कार्य को तेजी से किये जाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि गाँव में बसने के लिए आबादी के लिए आवश्यकता और सुविधा अनुसार नवीन आबादी का क्षेत्र निर्मित किया जाए।  चंबल नदी पर बनेगा पेंटुल पुल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वीरपुर के क्षेत्रीय विकास के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जायेगी। वीरपुर में नंदी गाँव से गवघाट तक चंबल नदी पर पेंटुल पुल बनाया जाएगा। इससे राजस्थान की करौली माता और सवाई-माधोपुर तक आवागमन की सुविधा मिलेगी। वन समिति सदस्यों के बच्चों को स्कूल बैग वितरित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कन्या-पूजन से कार्यक्रम की शुरुआत की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिक्षा को प्रोत्साहन देने के लिए 80 लाख रूपये की लागत से वन समिति सदस्यों के 13 हज़ार 700 बच्चों को स्कूल बैग वितरित किये। विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश निरंतर प्रगति-पथ पर आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में श्योपुर को प्रदेश का अग्रणी जिला बनाया जाएगा। खजुराहो सांसद श्री वी.डी. शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में गरीबों को मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिये निरंतर कार्य किये जा रहे हैं। सरकार जन-कल्याणकारी योजनाओं से आर्थिक एवं सामाजिक बदलाव लाने की दिशा में सतत कार्य कर रही है। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा एवं श्योपुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री राकेश शुक्ला ने कहा कि जिले को सरकार की ओर से लगातार विकास कार्यों की सौगात मिल रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार मानते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में जिला निरंतर विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री रामनिवास रावत ने संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के जागरूकता सम्मेलन के आयोजन पर प्रसन्नता जताई और मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार विकास के लिये निरंतर कार्य कर रही है। भूमि-पूजन और लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधि-विधान से पूजन कर 57 करोड़ 42 लाख रूपये के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया। इसमें 18 करोड़ 94 लाख रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं 38 करोड़ 48 लाख रुपये के विकास कार्यों का भूमि-पूजन और शिलान्यास किया गया। इसमें पीएम जन-मन योजना में श्योपुर विकासखण्ड के 6 ग्रामों में मल्टीपर्पस सेंटर निर्माण लागत 3 करोड़ 60 लाख, विजयपुर एवं कराहल विकासखण्ड क्षेत्र के 18 ग्रामों में मल्टीपर्पस सेंटर का निर्माण कार्य लागत 10 करोड़ 80 लाख और तहसील विजयपुर में 30 बिस्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र को 100 बिस्तरीय सिविल अस्पताल में उन्नयन निर्माण कार्य लागत 24 करोड़ 8 लाख रुपये के कार्य शामिल हैं। कार्यक्रम में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री ऐदल सिंह कंषाना, अध्यक्ष सहरिया विकास प्राधिकरण राज्य मंत्री दर्जा श्री तुरसनपाल बैरया, उपाध्यक्ष सहरिया विकास अभिकरण राज्य मंत्री दर्जा श्री सीताराम आदिवासी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती गुड्डीबाई आदिवासी, पूर्व विधायकगण और प्रशासनिक अधिकारियों सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

आप पार्टी ने किया बड़ा ऐलान, दिल्ली में आप पार्टी का कांग्रेस संग नहीं होगा गठबंधन, दिल्ली में अकेले लड़ेंगे चुनाव

नई दिल्ली हरियाणा में मिली करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस पर उसके सहयोगी दल तंज कस रहे हैं। इसी बीच आम आदमी पार्टी (आप) ने साफ कर दिया है कि वह आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव अकेले लड़गी। पार्टी कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करेगी। आप की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने बुधवार को कहा कि पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी। समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कक्कड़ ने कहा, ‘हम दिल्ली विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेंगे। एक तरफ अति आत्मविश्वासी कांग्रेस है और दूसरी तरफ अहंकारी भारतीय जनता पार्टी। हम अपना सिर झुकाकर रखेंगे और पिछले 10 सालों में किए अपने काम को खुद बोलने देंगे। हम कड़ी मेहनत करेंगे।’ दिल्ली में विधानसभा चुनाव 2025 की शुरूआत में होने की उम्मीद है। 2020 के विधानसभा चुनाव में आप ने 70 में से 62 सीटें जीती थीं और भाजपा को आठ सीट मिली थी। कक्कड़ के बयान ने उन सभी संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें माना जा रहा था कि आप और कांग्रेस मिलकर दिल्ली विधानसभा चुनाव में उतर सकते हैं। अब चुनावी समर में कांग्रेस को बीजेपी और आप से कड़ा मुकाबला करना होगा। माना जा सकता है कि यह घोषणा कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है क्योंकि 2013 से उसका कोई नेता दिल्ली विधानसभा नहीं पहुंचा है। हरियाणा चुनाव को लेकर कांग्रेस और आप के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत हुई थी जिसका कोई परिणाम नहीं निकला था। इससे पहले, आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हरियाणा चुनाव के नतीजों से मिली ‘सबसे बड़ी सीख’ यह है कि कभी भी अति आत्मविश्वासी नहीं होना चाहिए। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अगले साल होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनावों के लिए कड़ी मेहनत करने का अनुरोध किया। उन्होंने मंगलवार को दिल्ली में आप पार्षदों को संबोधित करते हुए कहा, ‘चुनाव नजदीक आ रहे हैं। चुनावों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। आज के चुनाव से सबसे बड़ी सीख यह मिली है कि कभी भी अति आत्मविश्वासी नहीं होना चाहिए। हर चुनाव, हर सीट मुश्किल होती है।’

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