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लाल हुआ शेयर बाजार, Sensex 900 अंक टूटा, Nifty ने लगाया गोता

मुंबई शेयर बाजार शुक्रवार को फिर क्रैश (Stock Market Crash) हो गया. हालांकि, सप्ताह के आखिरी दिन इसकी चाल बदली-बदली नजर आई. दरअसल, मार्केट ओपन पर होने पर जहां सेंसेक्स (Sensex) शुरुआती कारोबार में 300 अंक टूट गया, कुछ देर में उछलकर हरे निशान पर कारोबार करने लगा, लेकिन ये खुशी भी कुछ ही देर के लिए थी, आखिरी कारोबारी घंटे में अचानक फिर से बड़ी गिरावट आ गई और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स देखते ही देखते 900 अंक से ज्यादा फिसल गया. मार्केट क्लोज होने पर गिरावट थोड़ी कम हुई और सेंसेक्स 703 अंक की गिरावट लेकर 81,793.16  पर बंद हुआ. . पहले गिरा, फिर उठा और फिर टूटा बीते कारोबारी दिन बड़ी गिरावट देखने के बाद शेयर मार्केट (Share Market) ने शुक्रवार को सुस्ती के साथ शुरुआत की. अपने पिछले बंद 82,497.10 की तुलना में BSE Sensex 200 अंक से ज्यादा टूटकर 82,244.25 के लेवल पर ओपन हुआ और कुछ ही मिनटों में ये 389.58 अंक फिसलकर 82,107.06 के लेवल पर आ गया. लेकिन इसके बाद दोपहर 12 बजे के आस-पास ये गिरावट तेजी में तब्दील हो गई और 30 शेयरों वाला सेंसेक्स जोरदार  उछाल के साथ 83,368 के लेवल पर पहुंच गया, लेकिन दिन के इस हाई लेवल पर पहुंचने के बाद बाजार की चाल अचानक फिर बदल गई. आखिरी घंटे में सेंसेक्स 900 अंक फिसला Share Market में आखिरी कारोबारी घंटे में सेंसेक्स ऐसा टूटा कि थमने का नाम ही नहीं लिया. खबर लिखे जाने तक दोपहर के 2.40 बजे पर Sensex 913.64 अंक या 1.11 फीसदी की बड़ी गिरावट के साथ 81,583 के लेवल पर आ गया. हालांकि, मार्केट क्लोज होते होते ये गिरावट कुछ कम हुई और सेंसेक्स 703 अंक की गिरावट लेकर 81,793.16 पर क्लोज हुआ. दूसरी ओर NSE Nifty ने भी कमजोर शुरुआत की और अपने पिछले बंद 25,250.10 की तुलना में गिरकर 25,281.90 पर कारोबार शुरू किया. आखिरी कारोबारी घंटे में ये इंडेक्स भी बुरी तरह टूटा और खबर लिखे जाने तक निफ्टी 260.25 अंक गिरकर 24,990 के लेवल पर पहुंच गया. जबकि मार्केट बंद होने पर निफ्टी 200.25 अंक फिसलकर 25,049.85 के लेवल पर बंद हुआ. गुरुवार को बाजार में आया था भूचाल   बीते कारोबारी दिन गुरुवार को शेयर बाजार ने बड़ी गिरावट देखी थी. ईरान और इजरायल के बीच जंग (Iran-Israel War) के हालातों के बीच मिडिल ईस्ट के तनाव का असर साफ देखने को मिला था. BSE Sensex ने 995 अंक टूटकर 83,270 के लेवल पर कारोबार शुरू किया था और मार्केट बंद होने तक टूटता ही चला गया था. अंत में सेंसेक्स 1769.19 अंक या 2.10 फीसदी की गिरावट लेकर 82,497.10 के लेवल पर क्लोज हुआ था. सेंसेक्स में इस कदर गिरावट का असर बीएसई के मार्केट कैप पर भी दिखाई दिया और ये 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा टूट गया. लार्जकैप में इन 10 शेयरों का बुरा हाल M&M                 3.56%    3017.60 रुपये Bajaj Fin          3.49%    7173.45 रुपये Nestle India      3.09%    2592.55 रुपये Asian Paints     2.91%    3058 रुपये Ultratech         2.69%    11407.05 रुपये Reliance          1.26%    2779.80 रुपये Adani Ports    1.26%    1407 रुपये ICICI Bank      1.34%    1239 रुपये HDFC Bank    1.44%    1658 रुपये HUL                1.83%    2842.40 रुपये मिडकैप और स्मालकैप में ये स्टॉक टूटे MidCap कैटेगरी में सबसे ज्यादा गिरावट M&M Finance Share में आई और ये 6.95 फीसदी गिरकर 299.75 रुपये पर आ गया, इसके अलावा Godrej Properties Share 5.68 फीसदी गिरकर 2893.90 रुपये पर, जबकि GoDigit Share 4.92 फीसदी फिसलकर 379.15 रुपये पर ट्रेड कर रहा था. स्मालकैप में Vakrangee Share 9.98 फीसदी गिरकर 30.76 रुपये पर और Reliance Infra Share 7.81 फीसदी फिसलकर 301.40 रुपये पर आ गया.

उन्नत बीजों की कमी पूरा करने के लिए 65 नए बीज केंद्र बनाए जाएंगे- शिवराज

भोपाल कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को भोपाल में प्रेसवार्ता में कहा कि केंद्र सरकार ने गुरुवार को दो बड़े फैसले लिए हैं। भारत  की कुल खाद्य तेल की आवश्यकता  2022-23 में 29.2 मिलियन टन थी, लेकिन हमारे यहां ऑइल सीड से खाद्य तेल का उत्पादन 12.7 बिलियन ही हो पाता है। बाकी की मांग पूरा करने के लिए हमको विदेशों पर या आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। इसको लेकर फैसला किया गया है कि आयात पर निर्भरता खत्म करके हम खाद्य तेलों में कैसे आत्मनिर्भर बने। इसलिए राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन तिहलन बनाया गया है। शिवराज ने कहा कि 10 हजार 103 करोड़ 38 लाख रुपए की लागत से हमारे यहां अभी जो ऑइल सीड्स हैं उनका उत्पादन काफी कम है और इसलिए सरकार उन्नत बीज किसानों को देगी। आईसीएमआर यह बीज बनाएगा। पहले ब्रीडर सीड्स बनाएंगे। उसे फाउंडेशन सीड फिर सरटीफाइड सीड बनाकर किसानों को फ्री में उपलब्ध कराए जाएंगे। पूरे देश में इसके लिए 600 कलस्टर बनाए जाएंगे। 347 जिले के 21 राज्यों में जहां भी ऑइल सीड्स का उत्पादन होता है उन राज्यों को विशेष रूप से लिया गया है, किसानों को इन कलस्टर में फ्री में बीज, उनको ट्रैनिंग, नई टेक्नोलॉजी कैसे खेती करे जिससे ज्यादा उत्पादन हो और वो जो उत्पादित करेंगे उसकी 100 % खरीदी की जाएगी, ऐसी सुविधाएं इस मिशन के अंतर्गत किसानों को दी जाएगी । बीच भंडारण इकाइयां भी बनाई जाएंगी हर साल 10 लाख हेक्टर पूरे देश में खेती की जाएगी। 7 साल में 70 लाख हेक्टर एरिया इस योजना के अंतर्गत दिया जाएगा, उन्नत बीजों की कमी पूरा करने के लिए 65 नए बीज केंद्र बनाए जाएंगे, 100 हमारे बीज केंद्र बनेंगे, बीजों को सुरक्षित रखने के लिए 50 बीज भंडारण इकाइयां भी बनाई जाएंगी और राज्यों पर हम ज्यादा ध्यान दे रहे हैं जहाँ केवल एक फसल लेते हैं खरीफ की, इंटरक्रॉपिंग का भी उपयोग करेंगे, अलग-अलग फसलों के बीच में ये बीज, फसलें लगाई जा सकती हैं और पूरी खरीद किसानों से करेंगे, एक ये बड़ा फैसला कल हुआ है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार प्याज, दाल और चावल का बफर स्टॉक बना रही है। इनके दाम बढ़ने पर सरकार सस्ते में में उपलब्ध कराएगी।   किसान सम्मान निधि की राशि होगी कल ट्रांसफर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को महाराष्ट्र से किसानों के खाते में किसान सम्मान निधि की राशि ट्रांसफर करेंगे। उन्होंने बताया कि किसान सम्मान निधि के तहत 20 हजार करोड़ रुपए की राशि खातों में डाली जाएगी। कृषि मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने दो नई योजनाएं पीएम-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और कृषि उन्नत योजना शुरू की है। उन्होंने बताया कि योजनाओं में एक लाख हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे। प्रदेश सरकारें योजनाओं को अपने अनुसार चुन सकेगी। शिवराज ने कहा कि उनकी सरकार कृषि उत्पादन बढ़ाने, लागत कम करने और किसानों को उनकी फसल का ठीक दाम देने के साथ प्राकृतिक खेती पर फोकस कर रही है। कृषि मंत्री ने कहा कि इंपोर्ट ड्यूटी बढ़कर 27 प्रतिशत हो गई है। यह सूरजमुखी, मूंगफली और सायाबीन पर लागू है। इससे दाम बढ़ने से किसानों को फायदा होगा। सोयाबीन के दाम  500 रुपए बढ़ गए है। रिमोर्ट डिजिटल से फसल नुकसान का आकलन शिवराज ने बताया कि केंद्र ने डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन की शुरुआत की है। इसके तहत रिमोर्ट डजिटल से फसल के नुकसान का आकलन किया जाएगा। इस तकनीक से आकड़ों में हेरफेर नहीं हो सकेगी। फसल की बुआई पर डिजिटल फोटो अपडेट होंगे। इसके लिए ड्रोन के साथ पांच बैटरी उपलब्ध कराई जाएगी। शिवराज सिंह चौहान ने जम्मू कश्मीर और हरियाणा चुनाव को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर और हरियाणा में भाजपा सरकार बना रही है। दोनों जगह भाजपा के पक्ष में माहौल बना है।  

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सार्थक पहल से लगातार विकास परियोजनाओं का हो रहा आगाज

जशपुर के विकास को मिल रही नई उड़ान, तीव्र गति से हो रहा विकास कार्य 06 महीनों में लोक निर्माण विभाग के 113.19 करोड़ रुपयों की 43 सड़क निर्माण कार्यों की मिली स्वीकृति मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सार्थक पहल से लगातार विकास परियोजनाओं का हो रहा आगाज रायपुर  जशपुर जिले के विकास को नई उड़ान दिलाने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर नई विकास परियोजनाओं का आगाज हो रहा है। जिसके द्वारा जिले के विकास को गति मिल रही है। पिछले 06 माह में लोक निर्माण विभाग की 113.19 करोड़ रुपयों की 43 सड़क निर्माण परियोजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति मिल गयी है।         जशपुर जिले के सभी विकासखंडों में आधारभूत संरचना के विकास के लिए मुहिम चलाई जा रही है ताकि जिले के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं की पहुंच को बढ़ाया जा सके। इसके लिए आवश्यक है कि उन क्षेत्रों में आधारभूत संरचनाओं का विकास किया जाए। इसके लिए आवश्यकता वाले क्षेत्रों की पहचान कर उनके लिए तीव्र गति से तकनीकी विश्लेषण द्वारा डीपीआर निर्माण कर तकनीकी स्वीकृति एवं प्रशासकीय स्वीकृति के लिए प्रयास किये जा रहे हैं। जिसका परिणाम है कि विगत 06 माह में 43 सड़क निर्माण कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति मिलने के साथ निविदा प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी गयी है। कलेक्टर द्वारा मुख्यमंत्री साय की मंशानुरूप सभी सड़क निर्माण कार्यों की निविदा प्रक्रिया जल्द से जल्द पूर्ण कर आगामी 01 वर्ष में सभी को पूर्ण कराने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिया गया हैं।        लोक निर्माण विभाग से मिली जानकारी के अनुसार के पत्थलगांव के अंतर्गत 73.30 करोड़ रुपयों के 25 सड़क मार्गों का निर्माण किया जाना है। जिसमें 10.94 करोड़ की लागत के एन.एच.43 से बिच्छीकानी ढुढरूपारा से जमरगी तक 8 किमी सड़क मार्ग, 7.98 करोड़ रूपए लागत के बगीया से सूजीबहार तक के 8.70 किमी सड़क मार्ग, 5.57 करोड़ रूपए लागत के लैलूंगा, कोतबा से लवाकेरा तक के 5.18 किमी सड़क मार्ग, 4.28 करोड़ लागत के 3.5 किमी के कांसांबेल मुसकुटी तक सड़क मार्ग, 4.03 करोड़ रूपए लागत के बाबूसाजबहार से गोलीडीह नदी तक सड़क मार्ग, 3 करोड़ रूपए लागत के 1.2 किमी के करजटोली से रजौटी तक सड़क मार्ग सहित 25 सड़क मार्गों का निर्माण कराया जाएगा।         लोक निर्माण विभाग के जशपुर के कार्यपालन अभियंता विरेन्द्र कुमार चौधरी ने बताया कि जशपुर में 39.89 करोड़ रुपयों के 18 सड़क मार्गों का निर्माण किया जाना है। जिसके लिए प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। जिसमें 3.39 करोड़ लागत के चांडीडांड हत्ता हल्काटोली तक के 2.36 किमी सड़क मार्ग, 4.75 करोड़ लागत के एस.एच 17 मुख्य मार्ग से ढोगाअम्बा जामचुआ तक 3.26 किमी सड़क मार्ग, 3.6 करोड़ रूपए लागत के बनकोम्बों से घटमुंडा तक के 3.4 किमी सड़क मार्ग, 2.57 करोड़ रूपए लागत के बालाछापर आरा सकरडेगा से छोटाबनई तक के 2.4 किमी सड़क मार्ग, 2.45 करोड़ रूपए लागत के एन.एच. 43 खड़सा से कोमड़ो तक के 1.94 किमी सड़क मार्ग, 2.38 करोड़ रूपए लागत के भुड़केला से लवानदी पुल तक के 2.10 किमी सड़क मार्ग, 2.33 करोड़ रूपए लागत के खरवाटोली से बांधाटोली तक के 2 किमी सड़क मार्ग, 2.25 करोड़ रूपए लागत के बालाछापर आरा सकरडेगा से कारीताला तक के 2 किमी सड़क मार्ग, 2.29 करोड़ रूपए लागत के बहराखैर से जुड़वाईन तक के 1.63 किमी सड़क मार्ग सहित 18 मार्गों का निर्माण कराया जाएगा।

रायपुर नगर निगम की सामान्य सभा, BJP पार्षदों का हंगामा, विपक्ष ने महापौर को कहा झूठा

रायपुर छत्‍तीसगढ़ की रायपुर नगर निगम की सामान्य सभा एक बार फिर हंगामे का शिकार हो गई, जब भाजपा पार्षदों ने लाइट मेट्रो ट्रेन के मुद्दे पर जमकर विरोध किया। जैसे ही सभा शुरू हुई, विपक्षी पार्षदों ने लाइट मेट्रो ट्रेन से जुड़े सवालों को लेकर आक्रोश व्यक्त किया। भाजपा पार्षदों ने महापौर का फर्जी मेट्रो MoU का बोर्ड लेकर सभापति के डायस पर चढ़ गए और मेयर से रायपुर की जनता से माफी की मांग करने लगे। इस मुद्दे पर बहस इतनी बढ़ गई कि सदन में माहौल गर्म हो गया। महापौर पर आरोप, सभापति से तीखी नोकझोंक सभा की शुरुआत में ही भाजपा पार्षद अमर बंसल और सभापति प्रमोद दुबे के बीच तीखी बहस छिड़ गई। बंसल ने महापौर को “झूठा” करार दिया और महापौर के बोर्ड को हटाने की मांग की। इसके जवाब में सभापति प्रमोद दुबे ने कहा कि बंसल नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, जिससे सदन में और अधिक तनाव बढ़ गया। लाइट मेट्रो ट्रेन के सवाल पर हंगामा नेता प्रतिपक्ष और विपक्ष के पार्षदों ने सवाल उठाया कि महापौर ने लाइट मेट्रो ट्रेन के सवाल को अचानक से क्यों हटा दिया। उन्होंने महापौर से इस मुद्दे पर जवाब दिलवाने की मांग की और महापौर पर आरोप लगाया कि वे जनता से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं कर रहे हैं। विपक्ष ने महापौर को “झूठा महापौर” कहते हुए जवाबदेही की मांग की, जिससे सदन का माहौल और अधिक गरमा गया। सदन स्थगित, पार्षदों का प्रदर्शन सभापति प्रमोद दुबे ने स्थिति को संभालने के लिए सदन को 10 मिनट के लिए स्थगित कर दिया, लेकिन इससे पहले विपक्षी पार्षद सभापति की टेबल तक पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। सभापति ने कहा कि सदन की मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है और उन्होंने पार्षदों से अपील की कि वे नियमों का पालन करें। महापौर द्वारा 8 पार्षदों के प्रश्न निरस्त हंगामे के बीच, महापौर ने 8 पार्षदों के सवालों को निरस्त कर दिया, जिससे विपक्ष का आक्रोश और बढ़ गया। विपक्षी पार्षदों ने सवालों को निरस्त किए जाने का विरोध किया और इसे जनता की आवाज़ दबाने की कोशिश करार दिया। सामान्य सभा में बार-बार हो रहे विवाद रायपुर नगर निगम की सामान्य सभा में लगातार विवाद और हंगामे होते रहे हैं, जिससे नगर के विकास से जुड़े कई मुद्दे प्रभावित हो रहे हैं। इस बार लाइट मेट्रो ट्रेन का मुद्दा प्रमुख विवाद का कारण बना है, जिसे लेकर भाजपा और कांग्रेस के पार्षदों के बीच तीखी बहस हुई।

रतलाम में बालम ककड़ी खाने से 5 साल के बच्चे की मौत, दो बहनें आईसीयू में भर्ती

रतलाम  जिले के जड़वासा कलां गांव में बालम ककड़ी खाने से एक ही परिवार के 5 लोग बीमार हो गए। इनमें से 5 वर्षीय बालक की मौत हो जबकि मां और दो बेटियों का मेडिकल कॉलेज में उपचार जारी है। जानकारी के अनुसार जड़वासा कलां निवासी किसान मांगीलाल पाटीदार (36), पत्नी कविता, बेटी दक्षिता (11), साक्षी (8) और बेटे क्रियांश (5) को बुधवार सुबह अचानक उल्टियां होने लगी। उन्हें रतलाम के एक निजी हॉस्पिटल में लाया गया था। यहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई थी और सभी गांव लौट गए थे। बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात 3 बजे कविता, दक्षिता, साक्षी और क्रियांश की फिर से तबीयत बिगड़ गई। इससे परिजन ने चारों को शासकीय मेडिकल कॉलेज भर्ती कराया। यहां तड़के 4 बजे डॉक्टर ने क्रियांश को मृत घोषित कर दिया। दक्षिता और साक्षी की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। दोनों का आईसीयू में जबकि मां कविता का जनरल वार्ड में उपचार जारी है। बालम ककड़ी खाने से बिगड़ी तबीयत परिजन ने बताया कि मांगीलाल ने सोमवार को सैलाना-धामनोद रोड से बालम ककड़ी खरीदी थी। सभी ने शाम को बालम ककड़ी खाई। आशंका है कि ककड़ी खाने के कारण फूड पॉइजनिंग होने से सभी की तबीयत बिगड़ी। मांगीलाल के भाई रवि के अनुसार भाभी कविता और दोनों भतीजियों का उपचार जारी है। डॉक्टर भी प्रथमदृष्टया फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई है। फूड पॉइजनिंग के बाद भर्ती कराए गए थे रतलाम मेडिकल कॉलेज के ऐपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. गौरव बोरीवाल ने बताया कि पांचों मरीज फूड पॉइजनिंग के कारण बीमार होकर‎ आए थे। सही ‎इलाज मिलने में लंबा गैप होने से भी ‎स्थिति बिगड़ी। क्रियांश का ब्लड सैम्पल लिया है‎, जांच करवाई जाएगी। मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. विनय शर्मा ने कहा कि प्रथम दृष्टया बच्चे की मौत‎ फूड पॉइजनिंग से हुई है। मां‎ और दो बेटियों को इलाज किया जा रहा है। पुलिस ‎चौकी को इन्वेस्टिगेशन के‎ लिए लिखकर दिया था। वहीं, पुलिस चौकी प्रभारी सुनील राघव ने‎ बताया कि फिलहाल इस तरह का ‎मामला नहीं आया है। जानकारी ‎आएगी तो पड़ताल की जाएगी। कीटनाशक का छिड़काव करते हैं किसान ऐपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. गौरव बोरीवाल ने बताया, ‘किसान फल और सब्जियों में लगने वाले कीड़ों को मारने के लिए ‎कीटनाशक का छिड़काव करते हैं, जो इनको अच्छी तरह धोने से ही साफ हो पाता‎ है। ककड़ी में पित्त भी होता है, जिसे उसके दोनों सिरों को काटने के बाद ‎रगड़कर निकाला जाता है। ककड़ी देखकर खरीदें कि कहीं यह ज्यादा पुरानी तो नहीं है। फल और ‎सब्जी को काटते समय चेक करें क्योंकि इनमें कई बार कीड़े भी निकलते‎ हैं। क्या है बालम ककड़ी बालम ककड़ी मध्य भारत का मौसमी विशेष खीरा है। मध्य भारत के कुछ हिस्सों में आम तौर पर पाई जाने वाली विशाल ककड़ी की मौसमी किस्म, बालम ककड़ी एक ताज़ा देशी सामग्री है जो हाइड्रेटिंग है और कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करती है इसे कब खाना चाहिये खीरा दिन या रात के किसी भी समय खाया जा सकता है क्योंकि यह शरीर को संतुलित करने में मदद करता है और शरीर में पानी की मात्रा को बनाए रखने में मदद करता है। अगर आपका पाचन कमजोर या खराब है तो आपको रात में इसका सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि खीरे के बीज पचने में भारी होते हैं।

SC ने किया नई SIT का गठन, CBI और FSSAI के अधिकारी भी होंगे शामिल

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने तिरुपति लड्डू बनाने में जानवरों की चर्बी के इस्तेमाल के आरोपों की जांच के लिए शुक्रवार को एक स्वतंत्र विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह करोड़ों लोगों की आस्था का सवाल है। कोर्ट ने इस पूरे मामले की जांच के पांच सदस्यीय एसआईटी गठित करने का आदेश दिया जिसमें सीबीआई, पुलिस और FSSAI के अधिकारी शामिल होंगे। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तिरुपति लड्डू विवाद पर सुप्रीम कोर्ट से कहा कि यदि आरोपों में थोड़ी भी सच्चाई है तो यह अस्वीकार्य है। तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को सुझाव दिया कि एसआईटी जांच की निगरानी केंद्र सरकार के किसी वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की जाए। 30 सितंबर को इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मेहता से यह तय करने में सहायता करने को कहा था कि राज्य द्वारा नियुक्त एसआईटी द्वारा जांच जारी रहनी चाहिए या किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच की जानी चाहिए। तिरुपति मंदिर में प्रसाद के लड्डू बनाने में जानवरों की चर्बी के कथित इस्तेमाल के मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच के अनुरोध वाली याचिका समेत अन्य दूसरी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम अदालत को राजनीतिक युद्धक्षेत्र के रूप में इस्तेमाल नहीं होने देंगे। पिछले महीने की शुरुआत में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने दावा किया था कि राज्य में पिछली जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान तिरुपति में लड्डू तैयार करने में पशु चर्बी का उपयोग किया गया था, जिससे एक बड़ा राजनीतिक विवाद पैदा हो गया था। सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के सार्वजनिक बयान पर सवाल उठाया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि लैब रिपोर्ट बिल्कुल स्पष्ट नहीं है। कोर्ट ने पूछा कि इस बात का क्या सबूत है कि तिरुपति मंदिर में लड्डू बनाने में दूषित घी का इस्तेमाल किया गया था। अदालत को राजनीतिक लड़ाई का अखाड़ा नहीं बना सकते कोर्ट ने कहा कि हम अदालत को राजनीतिक लड़ाई के अखाड़े में तब्दील होने की इजाजत नहीं दे सकते. नई SIT में CBI के दो अधिकारी, आंध्र प्रदेश सरकार के दो प्रतिनिधि और FSSAI का एक सदस्य शामिल है. SIT जांच की निगरानी CBI डायरेक्टर करेंगे. इसके साथ ही स्पष्ट हो गया है कि तिरुपति बालाजी का प्रसाद बनाने में प्रयोग होने वाले घी में मिलावट के आरोपों की जांच राज्य सरकार की SIT नहीं करेगी. जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस के वी विश्वनाथन की पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि SIT की क्षमता को लेकर उन्हें कोई संदेह नहीं है. हम चाहते हैं कि सेंट्रल पुलिस फोर्स के किसी सीनियर अधिकारी को जांच की निगरानी सौंप दी जाए. मैंने मुद्दे की जांच की. इसमें एक बात स्पष्ट है कि यदि इस आरोप में सच्चाई का कोई अंश है तो यह अस्वीकार्य है. देशभर में भक्त हैं. खाद्य सुरक्षा भी जरूरी है. मुझे एसआईटी के सदस्य जो जांच कर रहे है उन पर कोई आपत्ति नही है. वहीं, इससे पहले आंध्र प्रदेश सरकार के वकील ने कहा कि अगर SIT में किसी अधिकारी को कोर्ट जोड़ना चाहता है तो हमे कोई दिक्कत नहीं है. याचिकाकर्ता की ओर से कपिल सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि कल फिर इसको लेकर बयान जारी किया गया. सिब्बल ने मांग की कि कोर्ट इस मामले की जांच का जिम्मा SIT के बजाए किसी स्वतंत्र जाँच एजेंसी को सौप दे. इस पर कोर्ट ने कहा कि ये करोड़ों लोगों की आस्था का मामला है. हम नहीं चाहते कि ये सियासी ड्रामा बन जाए. कोर्ट ने सुझाव दिया कि पांच लोगों की SIT बनाई जा सकती है, जिसमें सीबीआई के दो अधिकारी और FSSAI का एक सदस्य शामिल हो. यानी इस मामले की जांच के लिए स्वतंत्र जांच एजेंसी हो, जिसमें सीबीआई के दो आधिकारी, राज्य सरकार के दो अधिकारी और एक अधिकारी FSSAI से होगा.

सुक्खू सरकार की ‘टॉयलेट एक प्रेम कथा’, जिस पर हो-हल्ला होने के बाद अब देना पड़ेगा TAX

शिमला हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार अब राज्य में टॉयलेट सीट टैक्स वसूल करने की तैयारी में है। लोगों पर अब उनके घरों में मौजूद टॉयलेट सीट्स की संख्या के आधार पर टैक्स चुकाना होगा। दरअसल, वित्तीय संकट से जूझ रही राज्य सरकार ने हाल ही में इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। सीवरेज और पानी के बिल से जुड़ी सरकारी अधिसूचना में कहा गया है कि शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अपने घर में बने टॉयलेट की हर एक सीट के लिए 25 रुपये का शुल्क देना होगा। सीवरेज बिल के साथ यह अतिरिक्त शुल्क जल शक्ति विभाग के खाते में ट्रांसफर किया जाएगा। सरकारी अधिसूचना में कहा गया है कि सीवरेज बिल पानी के बिल का 30 प्रतिशत होगा। नोटिफिकेशन के अनुसार, जो लोग अपने सोर्स से पानी का उपयोग करते हैं और केवल सरकारी विभाग से सीवरेज कनेक्शन का उपयोग करते हैं, उन्हें हर महीने प्रति टॉयलेट सीट 25 रुपये का शुल्क देना होगा। विभाग ने इसे लेकर आदेश सभी मंडल अधिकारियों को जारी कर दिए हैं। इससे पहले पहाड़ी राज्य में पानी के बिल जारी नहीं किए जाते थे। बीजेपी सरकार ने घोषणा की थी कि अगर वह सत्ता में आई तो मुफ्त पानी दिया जाएगा। लेकिन हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने अब हर कनेक्शन पर 100 रुपये महीने पानी का बिल जारी करने का आदेश दिया है। इसकी शुरुआत अक्टूबर से हो गई है। शहरी क्षेत्रों में रहने वालों को इन नए सरकारी शुल्कों का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि आमतौर पर लोग अपने घरों में कई टॉयलेट बनवाते हैं और अब प्रत्येक टॉयलेट सीट पर शुल्क लगाया जाएगा। हिमाचल प्रदेश में कुल 5 नगर निगम, 29 नगर पालिकाएं और 17 नगर पंचायतें हैं, जिनमें कुल मिलाकर लगभग 10 लाख लोग रहते हैं। सरकार के नए आदेश से राज्य की एक बड़ी आबादी पर असर पड़ने की उम्मीद है। टॉयलेट टैक्स को लेकर बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पर हमला बोला है। उन्होंने कहा, ‘जहां भी कांग्रेस आई, वहां महंगाई लाई, बर्बादी लाई। अब हिमाचल प्रदेश में, अपने वादों से राज्य को दिवालिया बनाने के बाद, हम देख रहे हैं कि कैसे लोगों पर लगातार टैक्स लगाया जा रहा है। यहां तक ​​कि कांग्रेस पार्टी ने टॉयलेट को भी नहीं बख्शा। कांग्रेस पार्टी बहुत सारे वादे करती है, लेकिन वे कभी उन्हें पूरा नहीं करते। वे बस राज्यों को दिवालिया बनाते हैं और इस तरह के टैक्स लगाते हैं।’ कई मीडिया आउटलेट्स ने ऐसी खबरें प्रकाशित की थीं कि सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली हिमाचल प्रदेश सरकार ने पहाड़ी राज्य में टॉयलेट सीट टैक्स लगाने का फैसला किया है. इस नई नीति के तहत हिमाचल प्रदेश के लोगों से उनके घरों में टॉयलेट सीटों की संख्या के आधार पर हर महीने 25 रुपये सीवरेज टैक्स लिया जाएगा. हालांकि, सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने इन खबरों का खंडन किया है. यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि हिमाचल प्रदेश वर्तमान में वित्तीय संकट का सामना कर रहा है. पिछले महीने राज्य कर्मचारियों का वेतन और पेंशनर्स की पेंशन समय पर नहीं ​जारी किया जा सकता था और इसमें 5 दिन की देरी हुई थी. अगस्त में सीएम सुक्खू ने ऐलान किया था कि वह और राज्य के मुख्य संसदीय सचिव अगले दो महीने तक अपना वेतन और भत्ते नहीं लेंगे.  उन्होंने विधानसभा के अन्य सदस्यों से भी अपील की थी कि वे स्वेच्छा से अपना वेतन और भत्ते छोड़कर इस आर्थिक संकट से निपटने में राज्य की मदद करें.

रानी दुर्गावती को जन-कल्याणकारी व्यवस्था को सुशासन का एक उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है

भोपाल वीरांगना रानी दुर्गावती महिला शासकों के भारतीय स्वर्णिम इतिहास का एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर है। रानी दुर्गावती ने 16वीं शताब्दी में गोंडवाना राज्य की शासक के रूप में अपने साहस और नेतृत्व के लिए ख्याति प्राप्त की। उनकी जन-कल्याणकारी व्यवस्था को सुशासन का एक उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। रानी ने एक संतुलित, न्यायपूर्ण और विकासात्मक प्रणाली के रूप में शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए गोंडवाना को एक मजबूत और समृद्ध साम्राज्य बनाया। वीरांगना रानी दुर्गावती के शासन में गोंड संस्कृति ने देश की सांस्कृतिक विरासत को और समृद्ध किया है। उन्होंने अपनी पारंपरिक प्रथाओं से पर्यावरण के संवर्धन और संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाई है। आज़ादी के प्रति असीम प्रेम और किसी की अधीनता स्वीकार न करने की जिद और जुनून गोंड समाज की पहचान रही है। रानी दुर्गावती गोंड समुदाय के पराक्रम, भारतीय वीरता और शूरता की साक्षात् प्रतिमूर्ति थीं। मुगल साम्राज्य की अधीनता स्वीकार न करने वाली रियासतों के लिए मुगल काल में सुरक्षित रहना बहुत कठिन माना जाता था, क्योंकि विशाल मुगल सेना के सामने युद्ध भूमि में सामना करना बहुत चुनौतीपूर्ण था। ऐसे समय में गोंडवाना साम्राज्य की संरक्षिका के रूप रानी दुर्गावती के कार्य एवं अपूर्व वीरता के साथ राज्य के विकास में किया गया अभूतपूर्व योगदान सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। रानी दुर्गावती के कार्यों और वीरता का गुण-गान आज भी जनजातीय क्षेत्रों में विभिन्न बोलियों और कई भाषाओं में किया जाता है, जो भावी पीढ़ियों के लिये प्रेरणास्पद है। रानी दुर्गावती का संघर्ष मुगलों के खिलाफ था और वे जनजातीय संस्कृति और विरासत की सुरक्षा के प्रति कृत-संकल्पित थीं। उन्होंने मुगलों के खिलाफ एक सशक्त प्रतिरोध का आधार तैयार किया, जिसने देश के दूसरे क्षेत्रों में रहने वाले राजा-महाराजा और अधीनता स्वीकार न करने वाले अनेक समूहों को मुगल सत्ता के खिलाफ लगातार लड़ने के लिए प्रेरित किया। वर्तमान जबलपुर उनके साम्राज्य का केंद्र था। रानी ने करीब 16 वर्ष तक शासन किया। उन्होंने अपने कार्य-काल में अनेक मंदिर, मठ, कुएं, बावड़ियां तथा धर्मशालाएं बनवाईं। लोक कल्याणकारी कार्यों के लिए रानी की कीर्ति दूर-दूर तक फ़ैल गई। रानी दुर्गावती के गढ़ मंडला पर मुगल सूबेदार बाजबहादुर की बुरी नजर थी, लेकिन युद्ध में रानी दुर्गावती ने उसकी पूरी सेना का सफाया कर दिया और फिर वह कभी पलटकर नहीं आया। मुगल सेना के कई हमलों को नाकाम करने वाली रानी दुर्गावती का खौफ दिल्ली की मुगल सत्ता को भी प्रभावित करने लगा। रानी दुर्गावती को अपनी रणनीतिक योग्यता, पारम्परिक सैन्य संसाधन और सैन्य शक्ति पर इतना विश्वास था कि वे विशाल मुगल सेना से कभी विचलित नहीं हुईं। रणक्षेत्र में रानी ने मुगलों की अपेक्षा में बेहद छोटी सेना होने के बाद भी असीम वीरता का परिचय दिया। इस कारण मुगल सेना युद्ध मैदान से भाग खड़ी हुई। रानी दुर्गावती ने मुगलों के खिलाफ अपनी भूमि की रक्षा के लिए जिस अद्वितीय साहस का परिचय दिया, वह भारत की मातृशक्ति के पराक्रम, शौर्य और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। रानी दुर्गावती को भारतीय इतिहास की सर्वाधिक प्रसिद्ध महारानियों और बेहतर प्रशासकों में शुमार किया जाता है। उन्होंने जिस कुशलता से राज संभाला, उसकी प्रशस्ति इतिहासकारों ने भी की है। आईन-ए-अकबरी में अबुल फ़ज़ल ने लिखा है कि “दुर्गावती के शासनकाल में गोंडवाना इतना सुव्यवस्थित और समृद्ध था कि प्रजा लगान की अदायगी-स्वर्ण मुद्राओं और हाथियों से करती थी।” रानी दुर्गावती ने गोंडवाना की स्थिरता, विकास तथा कानून-व्यवस्था बनाये रखने के लिए प्रभावी न्याय प्रणाली की स्थापना की। उन्होंने स्व-शासन को बढ़ावा देते हुए गांवों को मजबूत किया, जिससे किसान खुशहाल हुए। रानी दुर्गावती ने कृषि, व्यापार और हस्तशिल्प को बढ़ावा दिया। उन्होंने कृषि सुधारों और सिंचाई योजनाओं को लागू किया, जिससे खाद्य उत्पादन बढ़ा। रानी दुर्गावती ने शिक्षा और संस्कृति के विकास पर अधिक जोर दिया। उन्होंने साहित्य, कला और संगीत को प्रोत्साहित किया, जिससे गोंडवाना की सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा मिला। रानी दुर्गावती की नेतृत्व क्षमता, साहस और बलिदान, राजनैतिक समझ, सामाजिक न्याय को सुदृढ़ करने के कार्य, सांस्कृतिक समृद्धि और राज्य में स्थिरता बनाये रखने की कोशिशें अतुलनीय थी। जन-कल्याण के प्रति इसी प्रतिबद्धता और मातृभूमि की सुरक्षा के संकल्प ने रानी दुर्गावती को एक महान नेतृत्वकर्ता और शासक के रूप में इतिहास में अमर बना दिया। उनका जीवन और न्यायपूर्ण शासन आज भी प्रेरणा का ऊर्जा स्रोत है।  

छत्‍तीसगढ़ में राज्य स्थापना दिवस पर स्कूल-कॉलेज और सरकारी कर्मियों की रहेगी छुट्टी, एक नवंबर को अवकाश की घोषणा

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर 1 नवंबर, शुक्रवार को प्रदेश में स्थानीय अवकाश घोषित किया है। इस दिन प्रदेश के सभी स्कूल-कॉलेजों और सरकारी कार्यालयों में छुट्टी रहेगी। राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है, जिसमें कहा गया है कि 1 नवंबर को सभी सरकारी संस्थानों और कार्यालयों में अवकाश रहेगा। हालांकि, यह अवकाश बैंकों और कोषालयों पर लागू नहीं होगा, वहां सामान्य कामकाज जारी रहेगा। राज्योत्सव का आयोजन छत्तीसगढ़ के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में राज्य सरकार ने 5 नवंबर को जिलास्तरीय एकदिवसीय राज्योत्सव मनाने का भी निर्णय लिया है। इसके अलावा, राजधानी रायपुर में मुख्य राज्योत्सव समारोह 4 या 5 नवंबर को आयोजित किया जा सकता है। मुख्य आयोजन की तारीख की घोषणा जल्द ही की जाएगी। स्थापना दिवस की महत्ता 1 नवंबर का दिन छत्तीसगढ़ के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस दिन 2000 में राज्य का गठन हुआ था। राज्य स्थापना दिवस पर हर साल विविध सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाता है। इस वर्ष भी राज्योत्सव का आयोजन पूरे जोश और उत्साह के साथ किया जाएगा, जिसमें छत्तीसगढ़ के विकास, समृद्धि और संस्कृति को सम्मानित किया जाएगा। राज्य सरकार ने इस आयोजन के लिए सभी आवश्यक तैयारियों को अंतिम रूप देने के निर्देश दे दिए हैं।

नवरात्रि में झूमेंगे बाजार होगा 50 हजार करोड़ से अधिक का व्यापार

मुंबई देश में  नवरात्र का त्योहार प्रारंभ हो गया है। 10 दिन चलने वाले नवरात्रि फेस्टिवल का जहां धार्मिक महत्व है, वहीं इसके चलते जो कारोबार होगा, उससे अर्थव्यवस्था को भी पंख लग जाएंगे। यानी अर्थव्यवस्था में अच्छा खासा उछाल देखने को मिलेगा। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री और दिल्ली की चांदनी चौक सीट से भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि दिल्ली सहित देश भर में अगले एक महीने तक त्योहारों की धूम रहेगी। 10 दिन के नवरात्र एवं रामलीला, डांडिया एवं गरबा उत्सवों से 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार होगा। दिल्ली में ही लगभग 5 हजार करोड़ रुपये के व्यापार होने की उम्मीद है।   खंडेलवाल के मुताबिक, नवरात्रि, रामलीला, गरबा तथा डांडिया जैसे उत्सव, जो हर वर्ष देश भर में दस दिन तक मनाए जाते हैं, इनके चलते इस बार देशभर में व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता हुआ दिखाई दे रहा है। एक अनुमान के अनुसार, अगले दस दिनों में देश भर में लगभग 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार होने की संभावना है। अकेले दिल्ली में ही लगभग 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार होगा। इन उत्सवों के दौरान बाजारों में रौनक बढ़ने की उम्मीद है। जहां एक तरफ व्यापारियों को काफी फायदा होगा तो वहीं दूसरी ओर, लाखों लोगों को अस्थायी रोजगार भी मिलेगा। पिछले वर्ष दस दिन का यह व्यापार लगभग 35 हजार करोड़ रुपये का था। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री खंडेलवाल ने बताया कि त्योहारों में खरीदी की विशेष बात यह है कि बिक्री किए जाने वाले अधिकांश उत्पाद, भारतीय ही होंगे। अब लोगों का चीन से बने सामानों से मोहभंग हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर ‘वोकल फॉर लोकल’ तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान ने देश भर में भारतीय सामानों की गुणवत्ता को बढ़ाया है। भारत में बना सामान, अब किसी भी विदेशी सामान से बेहतर है। यही कारण है कि उपभोक्ताओं का रुझान अब भारतीय वस्तुओं की खरीदी पर ही है। देश भर में नवरात्र, रामलीला, गरबा एवं डांडिया जैसे 1 लाख से अधिक छोटे-बड़े कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इनमें विभिन्न प्रकार के धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम शामिल हैं। बड़े पैमाने पर देश भर में भक्ति संगीत के कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं। इन उत्सवों के जरिए लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होते हैं। नवरात्र के समापन पर विजयदशमी, दुर्गा विसर्जन, करवा चौथ, धनतेरस, दीपावली, भाई दूज, छठ पूजा एवं तुलसी विवाह के बाद ही त्योहारों की यह श्रृंखला समाप्त होगी। अकेले दिल्ली में छोटी बड़ी लगभग एक हजार से अधिक रामलीलाएं आयोजित की जाती हैं। दुर्गा पूजा के लिए सैकड़ों पंडाल लगते हैं। मूल रूप से गुजरात में होने वाले डांडिया और गरबा के कार्यक्रम बड़े पैमाने पर अब दिल्ली सहित देश भर में आयोजित होने लगे हैं। करोड़ों लोग त्योहारों की खुशियां मनाते हैं। ऐसा माना जाता है कि त्योहार मनाने से घरों में सौभाग्य एवं संपन्नता का वास होता है। खंडेलवाल ने बताया, इस त्योहारों के सीजन में कपड़े एवं परिधान खासकर पारंपरिक परिधान जैसे साड़ी, लहंगा, और कुर्ते की मांग नवरात्र और रामलीला के दौरान काफी बढ़ती है। पूजा और धार्मिक आयोजनों के लिए लोग नए कपड़े खरीदते हैं। इसके चलते इस श्रेणी में व्यापार में उछाल देखने को मिलता है। बड़े पैमाने पर पूजा सामग्री की मांग भी होती है। पूजन के लिए आवश्यक वस्तुएं जैसे फल, फूल, नारियल, चुनरी, दीपक, अगरबत्ती और अन्य पूजन सामग्रियों की भारी मांग रहती है। खाद्य एवं मिठाई अन्य वस्तुएं हैं, जिनको त्योहारों के दौरान लोग खरीदते हैं। हलवा, लड्डू, बर्फी और अन्य मिठाइयों की खपत इस दौरान बढ़ जाती है। बड़ी मात्रा में फलों और फूलों की भी मांग रहती है। त्योहारों में घर और पूजा पंडालों को सजाने के लिए साज-सज्जा के सामान, जैसे दीयों, बंदनवार, रंगोली सामग्री और लाइटिंग की मांग बढ़ती है। नवरात्र और रामलीला उत्सव न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि व्यापारिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत लाभकारी होते हैं। खंडेलवाल ने कहा कि इन दस दिनों में पंडाल बनाने के लिए टेंट हाउस, सजाने के लिए सजावटी कंपनियां आदि को खूब काम मिलता है। इस मौके पर देश भर में बड़ी मात्रा में मेले तथा उत्सव संबंधी हजारों आयोजन होते हैं। इनमें लाखों लोग भाग लेते हैं। खंडेलवाल ने कहा, यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक एकता और व्यापारिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहित करते हैं।

प्रदेश के पर्यटन मंत्री ने कहा- महाकुंभ को भव्य बनाने के लिए ‘डिजिटल कुंभ संग्रहालय’ बनाने की तैयारी कर रहा

लखनऊ उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में अगले साल आयोजित होने वाले महाकुंभ को भव्य बनाने के लिए सरकार जल्द डिजिटल कुंभ संग्रहालय बनाएगी। प्रदेश के पर्यटन मंत्री ठाकुर जयवीर सिंह ने बृहस्पतिवार को बताया कि पर्यटन विभाग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विचार के अनुरूप प्रयागराज में ‘डिजिटल कुंभ संग्रहालय’ बनाने की तैयारी कर रहा है। यहां श्रद्धालु डिजिटल माध्यमों से समुद्र मंथन देख सकेंगे। इसके अलावा, कुंभ, महाकुंभ सहित अन्य धार्मिक-आध्यात्मिक स्थलों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। उन्होंने बताया कि डिजिटल कुंभ संग्रहालय के लिए 21.38 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं जिनमें से छह करोड़ रुपये की धनराशि जारी कर दी गई है। लगभग 10 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में बनने वाले इस संग्रहालय में एक साथ 2000 से 2500 लोग भ्रमण कर सकेंगे। सिंह ने बताया कि परियोजना के तहत डिजिटल संग्रहालय में समुद्र मंथन की 14 रत्नों वाली गैलरी बनाई जाएगी। डिजिटल माध्यम से समुद्र मंथन के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी। डिजिटल स्क्रीन सहित अन्य माध्यमों से प्रयागराज महाकुंभ-कुंभ, हरिद्वार, नासिक, उज्जैन कुंभ आदि के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। इसके अलावा, लैंडस्केपिंग विकसित की जाएगी। टिकट काउंटर भी बनाया जाएगा। पर्यटन मंत्री ने बताया कि श्रद्धालु अगर मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के वनवास के समय उनके प्रवास स्थल यानी चित्रकूट के दर्शन करना चाहते हैं तो इसके लिए ‘चित्रकूट टूरिज्म ऐप’ तैयार किया गया है। इस मोबाइल ऐप्लीकेशन पर दर्शनीय स्थलों का नाम, महत्व, दर्शन के समय समेत समग्र जानकारी मिल जाएगी। उन्होंने बताया कि ऐप्लीकेशन में ‘फेस्टिवल और इवेंट’ पर क्लिक करने पर महाकुंभ, चित्रकूट महोत्सव, रामनवमी, राष्ट्रीय रामायण मेला आदि की विस्तार से जानकारी मिलेगी। साथ ही, महाकुंभ में विशेष स्नान की तिथियां, महत्व आदि के बारे सूचना दी गई है।  

Ladli Behna Yojana: लाड़ली बहनों को नवरात्रि पर मिलेगी बड़ी खुशखबरी, तारीख हुई घोषित, आ गया अपडेट!

भोपाल  मध्यप्रदेश में लाड़ली बहनों के लिए फिर खुशखबरी आ रही है। इस बार अक्टूबर में बहुत सारे त्यौहार पड़ रहे है, जिनको लेकर प्रदेश की लाड़ली बहनें काफी उत्साहित है। इसी खुशी को दोगुना करेगी लाड़ली बहना योजना की 17 वीं किस्त।  बता दें कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना मध्य प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के लिए शुरू की गई एक बड़ी योजना है। इसके तहत हर महीने की 10 तारीख 1.29 करोड़ लाभार्थी बहनों को 1250 रुपए दिए जाते है। लाड़ली बहना योजना पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में शुरू की गई थी। कब आएगी 17 वीं किस्त जानकारी के लिए बता दें कि 17 वीं किस्त दशहरे से पहले आने वाली है। वैसे तो ये किस्त 10 अक्टूबर को जारी की जाएगी। इसके तहत फिर 1.29 करोड़ लाभार्थी बहनों के खाते में 1250 रुपए भेजे जाएंगे। इससे पहले सागर से सीएम मोहन यादव ने 9 सितंबर को 16वीं किस्त के 1574 करोड़ रुपए जारी किए थे। वहीं दूसरी ओर माना ये भी जा रहा है कि इस बार भी नवरात्रि को देखते हुए अक्टूबर में समय से पहले किस्त जारी हो सकती है। इस बारे में सीएम अपने बयान में कई बार कह चुके है कि हर महीने की 10 तारीख को बहनों के बैंक खाते में राशि जमा हो जाएगी और यदि छुट्टी अथवा अन्य किसी कारण से ऐसा संभव नहीं हुआ तो पहले जमा हो जाएगी। इससे पहले सितंबर में 10 की बजाय किस्त 9 सितंबर जारी की गई थी। हालांकि इस बारे में अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लाडली बहना योजना 17 किस्त का पैसा कब आएगा? सभी महिलाओं का इंतजार जल्द समाप्त होने वाला है, क्योंकि मध्य प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के बैंक खाते में 17वीं किस्त का पैसा ट्रांसफर किया जाने वाला है। मुख्यमंत्री मोहन यादव जी द्वारा निर्धारित समय पर किस्त का पैसा ट्रांसफर किया जा रहा है जिसमें 10 अक्टूबर 2024 तक बहनों के बैंक खाते में 1250 रुपए की राशि स्थानांतरित कर दी जाएगी। लाडली बहना योजना 17 किस्त मैं कितना पैसा मिलेगा? लाडली बहनों के लिए लगातार किस्तों में पैसा प्रदान किया जा रहा है। उसी प्रकार आगे आने वाली किस्त में महिलाओं के लिए कितना पैसा मिलेगा यह जानकारी तलाश कर रही महिलाओं के लिए काफी अच्छा मौका प्रदान किया जा रहा है। बता दें मुख्यमंत्री मोहन यादव जी द्वारा बहुत जल्द महिलाओं के लिए ₹1500 प्रतिमाह देने की घोषणा की जाने वाली है। यदि आप भी इस योजना से पंजीकृत महिला है, तो आपके लिए 17वीं किस्त में 1250 रुपए मिलने वाले हैं। लेकिन मोहन यादव जी द्वारा कोई नया अपडेट जारी करते हुए आपकी किस्त में इजाफा किया जा सकता है। लाडली बहना योजना 17वीं किस्त न्यू अपडेट 2024 मध्य प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के हित में कई प्रकार की कल्याणकारी योजनाओं का ऐलान किया गया है और महिलाओं को लाभ दिलाया जा रहा है। यदि आप भी 17वीं किस्त का इंतजार कर रही महिला है तो यहां पर काफी बड़ा अपडेट सामने आया है। अपडेट के मुताबिक बताया जा रहा है कि महिलाओं के लिए किस्त मिलने की डेट से कुछ दिन पहले पैसा दिए जाने की उम्मीद है तो आपके लिए केवल इंतजार करना होगा, कुछ ही दिनों पश्चात आपके बैंक खाते में 1250 रुपए की राशि ट्रांसफर होने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी और आपको यह पैसा मिल सकेगा। लाडली बहना योजना तीसरा चरण कब शुरू होगा? मध्य प्रदेश की लाखों महिलाएं लाडली बहन योजना से वंचित है यदि आप पात्र होकर ऐसी योजना से लाभ नहीं ले पा रही है तो आपके लिए काफी अच्छा मौका अक्टूबर 2024 में मिलने की उम्मीद बताई जा रही है। मध्य प्रदेश में सीएम मोहन यादव जी द्वारा बहनों के लिए किस्त का पैसा ट्रांसफर किया जाएगा। उसके साथ ही ऐलान किया जा सकता है कि महिलाओं के लिए फिर से आवेदन का मौका मिले और वह सभी महिलाएं जो कि इस योजना से लाभ नहीं ले पा रही है वह लाभ उठा सके। लाडली बहना योजना 17 किस्त 2024 स्थिति कैसे देखें? लाडली बहना योजना के तहत किस्त की स्थिति देखने हेतु आपको दिए गए निर्देशों का पालन करना होगा, जो कुछ इस प्रकार है:-     सबसे पहले लाडली बहना योजना का पोर्टल खोलें।     होम पेज पर जाएं।     यहां पर आवेदन की स्थिति विकल्प का चयन करें।     समस्त जानकारी जो की मांगी जा रही है वह दर्ज करते हुए सबमिट करें।     सबमिट करते ही समस्त किस्तों का विवरण एवं आने वाली किस्त से जुड़ी जानकारी प्रदर्शित हो जाएगी। मध्य प्रदेश में बहनों का इंतजार जल्द समाप्त होने वाला है क्योंकि आगे आने वाली किस्त का पैसा महिलाओं के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। यदि आप इस योजना से पंजीकृत महिला है, तो आपके बैंक खाते में जल्द पैसा ट्रांसफर होने वाला है, जिसकी पूरी अपडेट आपके लिए यहां पर दी जा चुकी है अधिक जानकारी आपके लिए नवीनतम खबरों के माध्यम से प्रदान कर दी जाएगी।

देश में फेफड़ा ट्रांसप्लांट में महिलाओं की संख्या पुरुषों के बराबर, अंग दान करने वालों में 63 प्रतिशत महिलाएं

भोपाल आज से नवरात्र प्रारंभ हो गए हैं। नौ दिन तक अलग-अलग रूप में देवी की शक्ति के रूप में आराधना की जाएगी। ऐसी ही हमारे देश की नारी शक्ति है जो समर्पण का अप्रतिम उदाहरण बन रही है। नेशनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन (नोटो) द्वारा जनवरी से दिसंबर, 2023 के बीच देशभर में हुए अंग दान और अंग प्रत्यारोपण के आंकड़े इसका प्रमाण प्रस्तुत कर रहे हैं। कुल किडनी प्रत्यारोपण करवाने वालों में महिलाएं 37 प्रतिशत, लिवर में 30 प्रतिशत, हार्ट में 24 प्रतिशत और पैंक्रियाज में 26 प्रतिशत हैं। फेफड़ा ट्रांसप्लांट में जरूर महिलाओं की संख्या लगभग पुरुषों के बराबर है। बता दें, देश में वर्ष 2013 में 4,990 अंग दान हुए थे जो लगातार बढ़ते हुए 2023 में 18,378 हो गए हैं। दिल्ली सबसे आगे वर्ष 2023 में जीवित व्यक्ति के अंग दान के बाद प्रत्यारोपण के मामले में सबसे आगे दिल्ली रहा। यहां 4,275 अंग प्रत्यारोपित हुए। इसके बाद तमिलनाडु में 1,833, महाराष्ट्र में 1,493, केरल में 1,376 और बंगाल में 1,021 अंग प्रत्यारोपित हुए। ब्रेन डेथ लोगों के अंग दान के मामले में सबसे आगे तेलंगाना है। हालांकि, इनके अंगों के प्रत्यारोपण तमिलनाडु में सर्वाधिक 595 किए गए। इसके बाद क्रमश: तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात हैं। जिन राज्यों में प्रत्यारोपण की सुविधाएं कम हैं वे पिछड़े हैं। मध्य प्रदेश में अब तक कुल 60 ब्रेन डेथ अंग दान हुए हैं। दो तरह से होता है अंग दान ब्रेन स्टेम डेथ अंग दान जब व्यक्ति का ब्रेन काम करना बंद कर देता हैं पर हृदय कुछ देर तक काम करता रहता है। उस अवस्था में छह अंग (हार्ट, लिवर, किडनी, फेफड़ा, पैंक्रियाज और छोटी आंत) दान किए जा सकते हैं। लिविंग अंग दान जब जीवित व्यक्ति अंग दान करता है तो उसे लिविंग अंग दान कहा जाता है। जैसे एक किडनी या फिर लिवर का अंश। महिलाएं पुरुषों की तुलना में ज्यादा भावुक     लिविंग अंग दान में महिलाओं द्वारा पुरुषों से अधिक अंग दान किए जाने की वजह सामाजिक, आर्थिक और भावनात्मक है। आमतौर पर पुरुष कामकाजी होते हैं। ऐसे में परिवार के अधिकतर लोगों की धारणा रहती है यदि महिला की किडनी मिलान हो रही है तो किसी पुरुष की नहीं ली जाए। महिलाएं पुरुषों की तुलना में ज्यादा भावुक होती हैं। वह न केवल सहजता से अंग दान के लिए तैयार होती हैं, बल्कि देने के लिए जिद भी करती हैं। सामाजिक पक्ष यह है कि जब अंग लगाकर उनकी जान बचाने की बात आती है तो कई बार वे खुद किसी स्वजन का अंग लेने से मना कर देती हैं या फिर स्वजन उनके उपचार में कम गंभीरता दिखाते हैं।  – डॉ. राकेश भार्गव, सदस्य, अंगदान राज्य प्राधिकार समिति  

इराक के लोग नसरल्लाह की याद में अपने बच्चों का नाम भी नसरल्लाह ही रख रहे हैं

 दमिश्क हाल ही में लेबनान में एक इजरायली हवाई हमले में हिजबुल्लाह के नेता हसन नसरल्लाह की मौत के बाद, इराक में नवजात बच्चों के नाम “नसरल्लाह” रखने का एक नया चलन देखने को मिला है। इराक के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देश भर में लगभग 100 बच्चों का नाम नसरल्लाह रखा गया है। नसरल्लाह पिछले तीन दशकों से आतंकी संगठन हिजबुल्लाह का नेतृत्व कर रहा था। उसे कई लोगों द्वारा इजरायली और पश्चिमी प्रभाव के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक माना जाता था। उनकी लोकप्रियता इराक में विशेष रूप से देश के अधिकांश शिया समुदाय के बीच मजबूत थी। अब इराक के लोग नसरल्लाह की याद में अपने बच्चों का नाम भी नसरल्लाह ही रख रहे हैं। लोगों का कहना है कि वे ऐसा “प्रतिरोध के शहीद के सम्मान में” कर रहे हैं। नसरल्लाह की हत्या ने इराक में गुस्से की लहर पैदा कर दी, जिसके परिणामस्वरूप बगदाद और अन्य शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने इजरायल की कार्रवाई की निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार दिया। इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने नसरल्लाह को “धर्म के मार्ग पर एक शहीद” बताया। हिजबुल्लाह नेता की याद में तीन दिन का राजकीय शोक मनाया गया, जिसमें देश भर में श्रद्धांजलियां आयोजित की गईं। नसरल्लाह का इराक से गहरा संबंध है, जो धार्मिक और राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़ा है। उसका जन्म 1960 में साधारण परिवार में हुआ था, और उसने इराक के नजफ शहर में एक शिया सेमिनरी में इस्लाम की पढ़ाई की थी। यहीं पर उसके राजनीतिक विचारों ने आकार लिया। 1982 में इजरायल के लेबनान में आक्रमण के बाद, हिजबुल्लाह का जन्म हुआ और नसरल्लाह इसमें शामिल हुआ। इस समूह की स्थापना ईरान की क्रांतिकारी गार्ड्स के समर्थन से की गई थी, जो प्रारंभ में इजरायली बलों के खिलाफ एक मिलिशिया के रूप में कार्यरत था। 1992 में अपने पूर्ववर्ती और गुरु अब्बास मुसावी की हत्या के बाद नसरल्लाह ने हिजबुल्लाह का नेतृत्व संभाला। अगले तीन दशकों में, उसने इस समूह को एक क्षेत्रीय शक्ति में बदल दिया, जो सीरिया से यमन तक के संघर्षों पर प्रभाव डाल रहा था और गाजा में फलस्तीनियों को प्रशिक्षण दे रहा था। नसरल्लाह के नेतृत्व में, हिजबुल्लाह की शक्ति ने सैन्य और राजनीतिक दोनों स्तरों पर वृद्धि की। इस संगठन ने हमास जैसे समूहों और इराक और यमन में मिलिशियाओं को मिसाइलें और रॉकेट प्रदान किए, जो इजरायल और उसके सहयोगियों के खिलाफ एक व्यापक “प्रतिरोध का धारा” का हिस्सा थे।

लेबनानी विदेश मंत्री का दावा… मरने से पहले युद्धविराम पर सहमत था नसरल्लाह

तेहरान इजरायली हवाई हमले में मारा गया हिजबुल्लाह प्रमुख नसरल्लाह अपनी मौत से पहले इजरायल के साथ युद्धविराम चाहता था। लेबनान के विदेश मंत्री अब्दुल्ला बौ हबीब ने कहा है कि नसरल्लाह हवाई हमले में मारे जाने के कुछ दिन पहले ही युद्धविराम के लिए मान गए थे। उन्होंने कहा कि अपने युद्धविराम के इस फैसले के बारे में उन्होंने अमेरिकी और फ्रांसीसी प्रतिनिधियों को भी बता दिया था। सीएनएन को दिए अपने इंटरव्यू में हबीब ने कहा कि हिजबुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह 21 दिनों के सीजफायर के लिए मान गए थे। लेबनानी संसद के स्पीकर नबीह बेरी ने नसरल्लाह से मुलाकात की थी, जिसमें उन्होंने जंग रोकने के लिए अपनी सहमति जताई थी। इसके बाद बेरी ने अमेरिकी और फ्रांसीसी प्रतिनिधियों को यह जानकारी दी थी कि हिजबुल्लाह युद्धविराम के लिए तैयार है। लेबनानी विदेशमंत्री ने यह दावा किया कि हमें यह सूचना मिली थी कि इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू भी सीजफायर के लिए तैयार हैं, लेकिन बाद में उन्होंने अपना मन बदल लिया और हमारी जमीन पर हमला करना जारी रखा। दरअसल, 27 सितंबर को हुए इस हमले के पहले न्यूयॉर्क में बाइडन और मैक्रों की मुलाकात हुई थी, जिसके बाद अमेरिका और उसके सहयोगियों ने मिलकर 25 सितंबर को 21 दिनों के सीजफायर को लेकर अपना प्लान रखा था। लेकिन नेतन्याहू ने इस प्लान को खारिज कर दिया और पूरी ताकत के साथ लड़ाई जारी रखने का आदेश दिया, विशेषज्ञों के मुताबिक पेजर और अन्य संचार संसाधनों में हुए विस्फोट के बाद हिजबुल्लाह बैकफुट पर था, नेतन्याहू नहीं चाहते थे कि उसे संभलने का कोई भी मौका दिया जाए। हमले के वक्त अपने दहियाह के खुफिया बंकर में था नसरल्लाह हबीब ने बताया कि हमले के वक्त नसरल्लाह दहियाह के दक्षिणी इलाके में एक बंकर में था उसी वक्त वह इजरायली हवाई हमले का शिकार हो गए। इससे पहले जब हिजबुल्लाह ने नसरल्लाह की मौत की पुष्टि की थी तो उनकी तरफ से यह नहीं बताया गया था कि नसरल्लाह की मौत का कारण क्या है। रॉयटर्स के मुताबिक उसके शरीर पर कोई घाव नहीं था, उसके शरीर को देखकर ऐसा लगता है कि विस्फोट की तीव्रता से अंदरूनी चोट की वजह से उसकी मौत हुई। ईरान के सर्वोच्च नेता ने दी थी लेबनान छोड़ने की सलाह रॉयटर्स ने बुधवार को एक रिपोर्ट में बताया था कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने इजरायली हमले में मारे जाने के कुछ दिन पहले ही नसरल्लाह को लेबनान से भाग जाने की चेतावनी दी थी। पेजर हमलों में हिजबुल्लाह के सदस्यों की मौत के बाद खामेनेई ने एक दूत के साथ नसरल्लाह को ईरान आने के लिए कहा था,जिसमें खुफिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा गया था कि इज़राइल के पास हिजबुल्लाह के भीतर गुर्गे थे और वह उसे मारने की योजना बना रहा था। ईरान के एक अधिकारी ने कहा कि खामेनेई ने दूत के रूप में एक वरिष्ठ ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कमांडर, ब्रिगेडियर जनरल अब्बास निलफोरुशान थे, जो बंकर में नसरल्लाह के साथ मारे गए थे।

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