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आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिलने के बाद कुलगाम में मुठभेड़ जारी, 1 जवान शहीद

श्रीनगर जम्मू कश्मीर के कुलगाम जिले में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ जारी है। इस मुठभेड़ में एक सुरक्षा कर्मी शहीद हो गया है। मोदरगाम गांव में आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिलने के बाद सीआरपीएफ, सेना और स्थानीय पुलिस द्वारा शुरू किए गए संयुक्त अभियान के बाद मुठभेड़ शुरू हुई। तलाशी अभियान के दौरान, आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके जवाब में सुरक्षा बलों ने भी गोलीबारी की। जैसे ही सुरक्षा बल गांव में पहुंचे, स्थिति तेजी से बिगड़ गई और आतंकवादियों को पकड़ने के लिए उन्होंने तुरंत घेराबंदी कर दी। शुरुआती गोलीबारी में एक सुरक्षाकर्मी घायल हो गया था। घायल सुरक्षा कर्मी को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इलाके को घेर लिया गया है और सुरक्षा बलों द्वारा आतंकवादियों को पकड़ने के लिए ऑपरेशन जारी है। कश्मीर जोन पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “कुलगाम जिले के मोदरगाम गांव में मुठभेड़ शुरू हो गई है। पुलिस और सुरक्षा बल काम पर हैं। आगे की जानकारी बाद में दी जाएगी।” इस क्षेत्र में हाल ही में आतंकवादी गतिविधियों में वृद्धि देखी गई है। पिछले महीने ही, सुरक्षा बलों ने डोडा जिले के गंडोह इलाके में तीन आतंकवादियों को सफलतापूर्वक मार गिराया था।  

मोहन सरकार की उधारी को लेकर CAG ने किया आगाह, विभाग कागजों पर बना रहे योजना

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार के बजट प्रबंधन पर बड़े सवाल उठ गए हैं। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक सीएजी ने प्रदेश सरकार के बजटीय प्रबंधन को खराब माना है, साथ ही उस पर कई गंभीर प्रश्न भी खड़े किए हैं। कैग ने सरकार को राजस्व व्यय को पूरा करने के लिए पूंजीगत प्राप्तियों उधारी से बचने के लिए आगाह किया है। वहीं स्वयं के राजस्व में वृद्धि करने का सुझाव भी दिया है। विधानसभा में प्रस्तुत की गई सीएजी की रिपोर्ट में वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2022-23 तक बजट बनाने से लेकर व्यय की निगरानी और उपयोग को लेकर प्रश्न उठाए गए हैं। कैग ने गंभीर आपत्ति जताते हुए सलाह दी है कि अवास्तविक प्रस्ताव, व्यय निगरानी तंत्र के ठीक से काम नहीं करने और योजनाओं का क्रियान्वयन ठीक से नहीं होने के कारण बजट का संतुलन सही नहीं होता। क्या कहती है सीएजी रिपोर्ट रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रबंधन ठीक न हो ने से कई विभाग तो व्यय ही नहीं कर पाते हैं। वहीं कई विभागों के पास काम करने के लिए बजट ही नहीं रहता है। कैग की रिपोर्ट के अनुसार फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में तीन लाख 21 हजार करोड़ रुपये के बजट में से 50 हजार 543 करोड़ (15.71 प्रतिशत ) रुपये बच गए थे। इसमें 22 हजार 984 करोड़ रुपये विभागों द्वारा वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन शासन को लौटाए गए, पर बाकी राशि समर्पित नहीं करने से लैप्स हो गई। सीएजी ने यहां बताई खामियां आपदा राहत, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, सहकारिता, ग्रामीण विकास, जनजातीय कार्य और अनुसूचित जाति कल्याण विभाग में 6 हजार 744 करोड़ रुपये एकमुश्त राशि का प्रावधान किया गया था। जिसमें 64 प्रतिशत राशि का उपयोग नहीं हो पाया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि केंद्र से देरी से राशि जारी होने और एजेंसियों द्वारा आवंटित कार्य में देरी से यह स्थिति बनी है। साल 2022-23 में शुरू की गई 50 करोड़ रुपये से अधिक बजट प्रावधान वाली 18 नई योजनाओं में 6 हजार 117 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया था, जिसमें तीन हजार 498 करोड़ रुपये खर्च नहीं हो सके हैं। वहीं साल 2018-19 से वित्तीय वर्ष 2022-23 के बीच 30 गैर-परिचालन योजनाओं के लिए 10 हजार 344 करोड़ रुपये बजट का प्रावधान कर दिया गया। इन रुपयों का भी उपयोग नहीं हो सका है। कृषि बजट में से किसान कल्याण एवं कृषि विकास के लिए आवंटित बजट में से वित्तीय वर्ष 2018-19 में 42 प्रतिशत, 2019-20 में 33 प्रतिशत, 2021-22 में 3.7 प्रतिशत और 2023-24 में 14 प्रतिशत राशि खर्च नहीं हुई है। उधार को लेकर दिया सुझाव कैग ने सलाह दी है कि नए उधार लेने से पहले राज्य शासन जरूरत आधारित उधार लेने और मौजूदा नकदी शेष का उपयोग करने पर विचार करें। राजस्व व्यय को पूरा करने के लिए उधारी से बचना चाहिए। वहीं शासन को स्वयं के राजस्व में वृद्धि करनी चाहिए। बजट तैयार करने की प्रक्रिया ऐसी हो कि बजट अनुमानों और वास्तविक के बीच का अंतर कम किया जा सके। सीएजी ने यहां बताई खामियां     आपदा राहत, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, सहकारिता, ग्रामीण विकास, जनजातीय कार्य और अनुसूचित जाति कल्याण विभाग में छह हजार 744 करोड़ रुपये एकमुश्त राशि का प्रावधान किया गया था, जिसमें 64 प्रतिशत राशि का उपयोग नहीं हो पाया। केंद्र से देरी से राशि जारी होने और एजेंसियों द्वारा आवंटित कार्य में देरी से यह स्थिति बनी।     वित्तीय वर्ष 2022-23 में शुरू की गई 50 करोड़ रुपये से अधिक बजट प्रावधान वाली 18 नई योजनाओं में छह हजार 117 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया था, जिसमें तीन हजार 498 करोड़ रुपये खर्च नहीं हो सके।     वित्तीय वर्ष 2018-19 से वित्तीय वर्ष 2022-23 के बीच 30 गैर-परिचालन योजनाओं के लिए 10 हजार 344 करोड़ रुपये बजट का प्रावधान कर दिया गया, जो उपयोग नहीं हो सका।     कृषि बजट में से किसान कल्याण एवं कृषि विकास के लिए आवंटित बजट में से वित्तीय वर्ष 2018-19 में 42 प्रतिशत, 2019-20 में 33 प्रतिशत, 2020-21 में 3.7 प्रतिशत, 2021-22 में 3.7 प्रतिशत और 2023-24 में 14 प्रतिशत राशि खर्च नहीं हुई। विद्युत वितरण कंपनियों में 1700 करोड़ से अधिक का घाटा 31 मार्च 2023 की स्थित में राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के 73 में से 41 उपक्रम निष्क्रिय थे। बाकी 32 ने 95 हजार 645 करोड़ का कारोबार दर्ज किया, जो प्रदेश के जीडीपी का 7.23 प्रतिशत था। इस वर्ष मप्र वेयर हाउस कारपोरेशन ने 208 करोड़ रुपये, मप्र पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने 141 करोड़ रुपये, वन विकास निगम ने 59 करोड़ रुपये का लाभ कमाया, लेकिन ऊर्जा क्षेत्र के तीन सार्वजनिक उपक्रमों ने 1779 करोड़ रुपये की हानि की। मप्र पूर्व क्षेत्र, मध्य क्षेत्र और पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनियां घाटे में रहीं। बजटीय प्रबंधन को लेकर सीएजी ने ये की अनुशंसाएं     विधानसभा द्वारा अनुमोदित अनुदान से अधिक व्यय विधानसभा की इच्छा का उल्लंघन है, इसलिए इसे गंभीरता से लेने और जल्द से जल्द नियमित करने की आवश्यकता है।     नए उधार लेने से पहले राज्य शासन आवश्यकता आधारित उधार लेने और मौजूदा नकदी शेष का उपयोग करने पर विचार करें।     राजस्व व्यय को पूरा करने के लिए पूंजीगत प्राप्तियों (उधारी) से बचना चाहिए। स्वयं के राजस्व में वृद्धि करनी चाहिए। बजट तैयार करने की प्रक्रिया ऐसी हो कि बजट अनुमानों और वास्तविक के बीच का अंतर कम किया जा सके।     भारी नुकसान उठा रहे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कामकाज की समीक्षा की जानी चाहिए और लाभ के लिए मजबूत रणनीति की रणनीति बनानी चाहिए।

सुरक्षाबलों को उड़ाने लगा रहे थे IED, छत्तीसगढ़-सुकमा में सात नक्सलियों से भारी विस्फोटक बरामद

सुकमा. सुकमा में लगातार नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एक बार फिर से सुकमा पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। जवानों को निशाना बनाने की फिराक में आईईडी लगाने जा रहे सात नक्सलियों को घेराबंदी कर जवानों ने गिरफ्तार किया है। मामले की पुष्टि करते हुए सुकमा एसपी किरण चौहान ने बताया कि थाना चिंतलनार क्षेत्र से 07 नक्सलियों को गिरफ्तार करने में मिली पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। गिरफ्तार नक्सलियों से भारी मात्रा में विस्फोटक पदार्थ बरामद किया गया। गिरफ्तार सभी नक्सली थाना चिंतलनार क्षेत्र के है निवासी। बता दें कि सुकमा जिले में नक्सलियों के खिलाफ नक्सल उन्मूलन अभियान चलाया जा रहा है इसी कड़ी में पुलिस को ये सफलता मिली है। पकड़े गये संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ करने पर अपना नाम कमशः 01. कुहराम भीमा पिता हुंगा उम्र-लगभग 24 वर्ष निवासी सुरपनगुड़ा, नीलापारा, थाना चिंतलनार, 02. हेमला गुड्डी पिता स्व. नंदा उम्र-लगभग 20 वर्ष निवासी सुरपनगुड़ा, एर्रापारा, थाना चिंतलनार, 03. मिड़ियम गंगा पिता मल्ला उम्र-लगभग 27 वर्ष निवासी सुरपनगुड़ा, नीलापारा, थाना चिंतलनार, 04. सुण्डाम भीमा पिता लखमा उम्र- लगभग 37 वर्ष निवासी सुरपनगुड़ा, एर्रापारा, थाना चिंतलनार, 05. माड़वी जोगा पिता हांदा उम्र-लगभग 22 वर्ष निवासी सुरपनगुड़ा, एर्रापारा, थाना चिंतलनार,06. नुप्पो मंगा पिता गंगा उम्र-लगभग 37 वर्ष निवासी सुरपनगुड़ा, एर्रापारा, थाना चिंतलनार, 07. हेमला नंदा पिता स्व. हिड़मा उम्र-लगभग 21 वर्ष निवासी सुरपनगुड़ा, नीलापारा, थाना चिंतलनार का होना तथा सभी नक्सल संगठन में सुरपनगुड़ा आरपीसी अंतर्गत मिलिशिया सदस्य के पद पर कार्य करना बताये। पकड़े गये संदिग्ध व्यक्तियों के द्वारा रखे गये थैले की चेकिंग करने से क्रमशः- 01.कुहराम भीमा के कब्जे के थैले से देशी बी.जी.एल सेल 02 नग, 02. हेमला गुड्डी के कब्जे के थैले से 01 नग बी.जी.एल. सेल, 03. मीड़ियम गंगा कब्जे के थैले से 01 नग टिफिन बम लगभग 02 कि.ग्रा, 03. सुण्डाम भीमा कब्जे के थैले से बारुद 100 ग्राम, 02 नग इंजेक्शन सीरिज्, 05 नग पेंसिल सेल, 06. नुप्पो मंगा कब्जे के थैले से 10 नग इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, इलेक्ट्रिक स्वीच, इलेक्ट्रिक वॉयर, 07. हेमला नंदा कब्जे के थैले से 10 नग जिलेटीन रॉड बमरामद किया गया। उपरोक्त सामाग्री को रखे जाने के संबंध में गहन पूछताछ करने पर बड़े नक्सलियों के कहने पर सुरक्षा बलों को नुकसान पहूंचाने की नीयत से रखना बताया गया।

लाखों महिलाओं के लिए बड़ी खुशखबरी, सरोगेसी से मां बनी इंप्लॉयी मैटर्निटी लीव की हकदार: हाईकोर्ट

भुवनेश्वर सरोगेसी से मां बनने वाली को महिला कर्मचारी को मैटरनिटी लीव पर कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सरोगेसी से मां बनने वाली महिला कर्मचारी भी मैटरनिटी लीव की पूरी हकदार है। कोर्ट ने कहा कि यह न सिर्फ महिला के लिए लाभदायक है, बल्कि नवजात शिशु के स्वास्थ्य के लिए भी काफी बेहतर होगा। ओडिशा हाई कोर्ट में जस्टिस संजीब कुमार पाणिग्रही की सिंगल बेंच ने एक महिला कर्मचारी के केस में यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि संविधान के आर्टिकल 21 के तहत जीवन का अधिकार, मां बनने के अधिकार के साथ-साथ बच्चों के पूरे विकास का भी अधिकार देता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर सरकार एडॉप्टिव मां को मैटरनिटी लीव दे सकती है तो सरोगेसी से मां बनने वाली कर्मचारी को इससे वंचित रखना गलत होगा। यह है मामला इस मामले में याचिकाकर्ता गोपाबंधु एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन में ज्वॉइंट डायरेक्टर (अकाउंट्स) है। याचिकाकर्ता 20 अक्टूबर 2018 को सरोगेसी से मां बनी थी। उसने 25 अक्टूबर 2018 से 22 अप्रैल 2019 तक के लिए मैटरनिटी लीव के लिए अप्लाई किया था। इसके साथ ही महिला ने 23 अप्रैल 2019 से 9 सितंबर 2019 के लिए ईएल भी अप्लाई किया था। उसने 10 सितंबर 2019 को वापस ज्वॉइन कर लिया गया था। महिला की छुट्टी का आवेदन सैंक्शन के लिए फाइनेंस डिपार्टमेंट में भेजा गया था। फाइनेंस डिपार्टमेंट के अंडर सेक्रेटरी ने महिला का आवेदन लौटा दिया था। साथ ही अधिकारियों से निवेदन किया था कि वह गवर्नमेंट सर्वेंट्स रूल्स के तहत इस तरह की छुट्टियां अप्लाई की जा सकती हैं या नहीं। ऐसा भी संकेत दिया गया था कि रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी या सरोगेसी के जरिए मां बनने पर छुट्टी का कोई प्रावधान नहीं है। कोर्ट पहुंची महिला कर्मचारी इसके बाद महिला ने हाई कोर्ट का रुख किया था। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने नोट किया कि ओडिशा सर्विस कोड के रूल 194 के तहत महिला कर्मचारी 180 दिनों की मैटर्निटी लीव की हकदार है। इतना ही नहीं, अगर महिला कर्मचारी किसी एक साल तक के बच्चे को गोद लेती है तो उस स्थिति में इस छुट्टी को एक साल के लिए बढ़ाया भी जा सकता है। हालांकि चौंकाने वाली बात यह थी कि इसमें सरोगेसी से मां बनने को लेकर कोई प्रावधान नहीं था। इसके बाद कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा श्रीमती चंदा केसवानी बनाम स्टेट ऑफ राजस्थान मामले में सुनाए गए फैसले का रेफरेंस लिया। इस फैसले के मुताबिक अगर सरोगेसी असिस्टेंट रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशंस) ऐक्ट, 2021 के तहत की गई है तो महिला कर्मचारी को मैटरनिटी लीव से इनकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कही यह बात जस्टिस पाणिग्रही ने बॉम्बे हाई कोर्ट के डॉ. मिसेज हेमा विजय मेनन वर्सेस स्टेट ऑफ महाराष्ट्र से भी रेफरेंस लिया। जस्टिस पाणिग्रही ने अपने फैसले में कहा कि सरोगेसी से मां बनने वाली कर्मचारी को भी मैटरनिटी लीव मिलनी चाहिए। इससे सभी नई मांओं को समानता का भाव मिलेगा और समर्थन मिलेगा। कोर्ट ने आगे कहा कि इसके अलावा बच्चे के जन्म के बाद के शुरुआती महीने बेहद अहम होते हैं। इस दौरान बच्चा अपनी मां से घुलता-मिलता है। उसके अधिक देख-रेख की काफी ज्यादा जरूरत होगी। यह बच्चे के विकास के लिए बेहद अहम है। पूरी तरह से अनुचित- हाईकोर्ट हाईकोर्ट ने आगे कहा कि यदि सरकार गोद लेकर मां बनने वाली महिला को मातृत्व अवकाश दे सकती है तो उस माता को मातृत्व अवकाश से वंचित करना पूरी तरह से अनुचित होगा जिसे किराये की कोख देने वाली महिला के गर्भ में संतान पाने को इच्छुक दंपति के अंडाणु या शुक्राणु से तैयार भ्रूण के अधिरोपण के बाद इस प्रक्रिया से बच्चा मिला हो. हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी कि सभी नई माताओं के प्रति समान बर्ताव एवं सहायता सुनिश्चित करने के लिए उन (महिला) कर्मियों को भी मातृत्व अवकाश दिया जाए, भले ही वह किसी भी तरह मां क्यों न बनी हों. सरकार को निर्देश उड़ीसा हाईकोर्ट ने कहा कि इन माताओं को मातृत्व अवकाश देने से यह सुनिश्चित होता है कि उनके पास अपने बच्चे के लिए स्थिर एवं प्यार भरा माहौल तैयार करने के लिए जरूरी वक्त होता है और जच्चा एवं बच्चा की देखभाल और वेलफेयर को बढ़ावा मिलता है. कोर्ट ने राज्य सरकार को इस आदेश की सूचना मिलने के तीन महीने के अंदर याचिकाकर्ता को 180 दिन का मातृत्व अवकाश प्रदान करने का निर्देश दिया.

मोदी सरकार का बजट 23 जुलाई को, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सातवीं बार पेश करेंगी

नई दिल्ली देश में 18वीं लोकसभा के गठन के बाद अब मोदी सरकार अपने तीसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश करने जा रही है. केंद्रीय बजट 2024 की तारीखों का ऐलान भी हो गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 23 जुलाई को संसद में बजट पेश करेंगी. दरअसल, 18वीं लोकसभा का पहला सत्र समाप्त हो चुका है. इसमें नवनिर्वाचित सांसदों का शपथ ग्रहण हुआ और लोकसभा व राज्यसभा की संयुक्त बैठक हुई थी, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संबोधित किया था. अब सबकी निगाहें बजट सत्र पर टिकी हैं. 22 जुलाई से 12 अगस्त तक संसद सत्र चलेगा. 1 फरवरी 2024 को पेश हुआ था अंतरिम बजट इस साल अप्रैल में लोकसभा चुनाव होने थे, लिहाजा सरकार ने 1 फरवरी को अंतरिम बजट पेश किया था। यह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का छठा बजट था। इसमें गरीब, महिला, युवा और अन्‍नदाता, यानी किसान फोकस में दिखे। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बजट सत्र की जानकारी अपने एक्स हैंडल पर दी. उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, “भारत सरकार की संस्तुति पर भारत की माननीय राष्ट्रपति ने बजट सत्र, 2024 के लिए संसद के दोनों सदनों को 22 जुलाई, 2024 से 12 अगस्त, 2024 तक बुलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है (संसदीय कार्य की अनिवार्यताओं के अधीन). केंद्रीय बजट 2024-25, 23 जुलाई, 2024 को लोकसभा में पेश किया जाएगा.” टैक्सपेयर्स को मिल सकती है राहत केंद्रीय बजट 2024 की तारीखें घोषित होने के साथ ही, इस बात की काफी उम्मीदें और अटकलें लगाई जा रही हैं कि वित्त मंत्री मोदी 3.0 सरकार के तहत टैक्सपेयर्स के लिए कुछ लाभों की घोषणा कर सकती हैं. वहीं समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने दो सरकारी अधिकारियों के हवाले से बताया कि केंद्र सरकार केंद्रीय बजट में ग्रामीण आवास के लिए राज्य सब्सिडी बढ़ाने की तैयारी कर रही है, जिसमें पिछले साल की तुलना में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि होने की उम्मीद है, जो 6.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो जाएगी. निर्मला सीतारमण के नाम दर्ज होगा अनोखा रिकॉर्ड बता दें कि इस साल दो बार बजट पेश हो रहा है. 1 फरवरी 2024 को अंतरिम बजट पेश किया गया था. लेकिन अब नई सरकार का गठन होने के बाद पूर्ण केंद्रीय बजट पेश होने जा रहा है. इस बार बजट पेश करने के साथ ही वर्तमान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम एक अनोखा रिकॉर्ड दर्ज हो जाएगा. कारण, ऐसा करके वह लगातार सात केंद्रीय बजट पेश करने वाली पहली वित्त मंत्री बन जाएंगी. इस मामले में वह मोरारजी देसाई को पीछे छोड़ देंगी. देसाई ने लगातार छह बजट पेश किए थे.   फुल और अंतरिम बजट होता क्या है? इनमें क्या अंतर है? केंद्रीय बजट देश का सालाना फाइनेंशियल लेखा-जोखा होता है। यूं कहें कि बजट किसी खास वर्ष के लिए सरकार की कमाई और खर्च का अनुमानित विवरण होता है। बजट के जरिए सरकार यह तय करने का प्रयास करती है कि आगामी वित्त वर्ष में वह अपनी कमाई की तुलना में किस हद तक खर्च कर सकती है। सरकार को हर वित्त वर्ष की शुरुआत में बजट पेश करना होता है। भारत में वित्त वर्ष का पीरियड 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है। वहीं अंतरिम बजट सरकार को आम चुनावों का फैसला होने और नई सरकार बनने के बाद फुल बजट की घोषणा करने तक, देश को चलाने के लिए धन उपलब्ध कराता है। अंतरिम बजट शब्द आधिकारिक नहीं है। आधिकारिक तौर पर इसे वोट ऑन अकाउंट कहा जाता है।

महाकाल-लोक की तर्ज पर अब दमोह के जागेश्वरनाथ धाम को विकसित करने का निर्णय लिया: डॉ. मोहन यादव

भोपाल बुंदेलखण्ड के दमोह जिले के बांदकपुर में स्थित जागेश्वरनाथ धाम अब महाकाल-लोक की तर्ज पर विकसित होगा। पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री श्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा अनुसार महाकाल-लोक की तर्ज पर अब दमोह के जागेश्वरनाथ धाम को विकसित करने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में आज पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विधानसभा कक्ष में समीक्षा की गई। मंत्री श्री लोधी ने कहा कि बांदकपुर स्थित जागेश्वरनाथ धाम में विराजित शिवलिंग वर्षों से लोगों के श्रद्धा और आश्चर्य का केन्द्र बना हुआ है। यह शिवलिंग हर साल बढ़ता जा रहा है। इसके पीछे के कारण अब तक अज्ञात बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि जागेश्वरनाथ धाम में मंदिर परिसर का पुनर्विकास, एकात्म क्षेत्र, ध्यान और योग केन्द्र, उल्लास क्षेत्र तथा प्रवेश और निकास द्वार का निर्माण किया जायेगा। श्रद्धालु जागेश्वरनाथ लोक में भगवान शिव के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों की प्रतीकात्मक प्रतिमाओं एवं भगवान भोलेनाथ से जुड़े प्राचीन मंदिरों का चित्रों के माध्यम से दर्शन कर सकेंगे। साथ ही उनसे जुड़ी मान्यताओं एवं इतिहास संबंधी जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे। मंत्री श्री लोधी ने कार्य-योजना की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को उत्तम इन्फ्रा-स्ट्रक्चर, पार्किंग व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधा अनुसार सरल एवं सुगम दर्शन व्यवस्था, लाइट एण्ड साउण्ड-शो की प्लानिंग संबंधी निर्देश दिये। आपको बता दें कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महाकाल-लोक की तर्ज पर दमोह के जागेश्वरनाथ धाम में भी एक लोक को विकसित करने का निर्णय लिया था। यह मध्य प्रदेश के अजूबों में से एक होने के साथ तीर्थ स्थल है। यहां विराजित शिवलिंग सालों से लोगों के लिए आश्चर्य का विषय बना हुआ है। इस तीर्थ स्थल की प्रसिद्धि देश के कोने-कोने में फैली हुई है। इसी के चलते चारों धाम की यात्रा करने वाले श्रद्धालु इस पवित्र तीर्थ पर दर्शन करने जरूर पहुंचते हैं। आश्चर्य है यहां का शिवलिंग बांदकपुर स्थित जागेश्वरनाथ धाम में विराजित जागृत शिवलिंग एक स्वयंभू शिवलिंग है। यह वर्षों से लाखों लोगों की श्रद्धा और आश्चर्य का केन्द्र रहा है। आश्चर्य की बात है कि यह रहस्यमयी शिवलिंग हर साल बढ़ता जा रहा है। इसके पीछे के कारण अब तक अज्ञात बने हुए हैं। यह विकास कार्य किये जाएंगे लाखों लोगों की आस्था के केंद्र जागेश्वरनाथ धाम में मंदिर परिसर का पुनर्विकास, एकात्म क्षेत्र, ध्यान और योग केन्द्र, उल्लास क्षेत्र तथा प्रवेश और निकास द्वार का निर्माण किया जायेगा। श्रद्धालु जागेश्वरनाथ लोक में भगवान शिव के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों की प्रतीकात्मक प्रतिमाओं एवं भगवान भोलेनाथ से जुड़े प्राचीन मंदिरों का चित्रों के माध्यम से दर्शन कर सकेंगे। सभी ज्योतिर्लिंगों की मिलेगी जानकारी इसके साथ ही भक्त सभी ज्योतिर्लिंगों से जुड़ी मान्यताओं एवं इतिहास संबंधी जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए यहां उत्तम इन्फ्रा-स्ट्रक्चर, पार्किंग व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधा अनुसार सरल एवं सुगम दर्शन व्यवस्था, लाइट एण्ड साउण्ड-शो की प्लानिंग भी की जा रही है।  

सोशल मीडिया पर फर्जी आईडी बनाकर साइबर ठगी, राजस्थान-अलवर में दो बदमाश गिरफ्तार

अलवर. साइबर ठगी के खिलाफ एसपी आनंद शर्मा के निर्देशन में चलाए जा रहे ऑपरेशन एंटी वायरस के तहत अलवर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो बदमाशों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि एनईबी थाने के ट्रांसपोर्ट नगर से पुलिस ने 2 साइबर ठगों आरिफ व वसीम को गिरफ्तार किया है। आरोपी सोशल मीडिया पर फर्जी आईडी बनाकर अनजान नंबरों पर ठगी को अंजाम देते थे। आरोपी सोशल मीडिया पर फर्जी आईडी बनाकर पुलिस अधिकारियों की फोटो लगाकर, ओएलएक्स और सेक्सटोरशन कर ठगी की वारदात को अंजाम देते थे। पुलिस ने आरोपी के पास से 4 एन्ड्रॉयड मोबाइल बरामद किए हैं। पुलिस को जब्त मोबाइल में पुलिस अधिकारियों की फोटो और ठगी की चैट सहित अन्य कई सामग्रियां मिली हैं। आरोपियों से पुलिस पूछताछ की जा रही है, जिसमें और अधिक साइबर ठगी की वारदातें खुलने की पूरी संभावना है।

हाथरस भगदड़ पर मायावती बोली- गरीबों को ‘भोले बाबा’ जैसे बाबाओं के अंधविश्वास के बहकावे में न आना चाहिए

हाथरस उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती ने शनिवार को लोगों को सलाह दी कि वे अपने दुखों को दूर करने के लिए हाथरस के भोले बाबा जैसे अनेकों और बाबाओं के अंधविश्वास व पाखंडवाद के बहकावे में न आएं। साथ ही उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पूर्व सीएम मायावती ने अपने एक्स अकाउंट तीन पोस्ट किए। मायावती ने कहा, “देश में गरीबों, दलितों और पीड़ितों आदि को अपनी गरीबी और अन्य सभी दुःखों को दूर करने के लिए हाथरस के भोले बाबा जैसे अनेकों और बाबाओं के अंधविश्वास व पाखंडवाद के बहकावे में आकर अपने दुःख व पीड़ा को और नहीं बढ़ाना चाहिए, यही सलाह है।” मायावती ने कहा, “बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के बताए हुए रास्तों पर चलकर इन्हें सत्ता खुद अपने हाथों में लेकर अपनी तकदीर खुद बदलनी होगी। इन्हें अपनी पार्टी बीएसपी से ही जुड़ना होगा, तभी ये लोग हाथरस जैसे काण्डों से बच सकते हैं, जिसमें 121 लोगों की हुई मृत्यु अति-चिन्ताजनक है।” मायावती ने आगे कहा कि हाथरस कांड में, बाबा भोले सहित अन्य जो भी दोषी हैं, उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे अन्य और बाबाओं के विरुद्ध भी कार्रवाई होनी जरूरी। इस मामले में सरकार को अपने राजनीतिक स्वार्थ में ढीला नहीं पड़ना चाहिए, ताकि आगे लोगों को अपनी जान ना गंवानी पड़े। बता दें कि हाथरस में भगदड़ दो जुलाई को स्वयंभू संत और उपदेशक नारायण साकार हरि उर्फ ‘भोले बाबा’ के सत्संग के दौरान हुई थी। इसमें 121 लोगों की मौत हो गई थी, जिसमें ज्यादातर महिलाएं शामिल थीं। एफआईआर के अनुसार, कार्यक्रम में 2.50 लाख से अधिक लोग शामिल हुए थे, जबकि प्रशासन ने केवल 80 हजार लोगों को ही अनुमति दी थी। एफआईआर के अनुसार, सत्संग आयोजकों ने सबूत छिपाकर तथा बाबा के अनुयायियों की चप्पलें और अन्य सामान पास के खेतों में फेंक कर कार्यक्रम में मौजूद लोगों की वास्तविक संख्या को छिपाने की कोशिश की थी। ऐसा बताया जा रहा है कि भगदड़ तब मची जब कई श्रद्धालु उपदेशक के पैरों की मिट्टी लेने के लिए दौड़े थे। उनका मानना था कि इससे उनकी सभी बीमारियां ठीक हो सकती हैं।  

राहुल ने कहा भारतीय जनता पार्टी में कोई भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पसंद नहीं करता

अहमदाबाद  कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी अहमदाबाद दौरे पर है। राहुल ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा की अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या से चुनाव लड़ते तो अयोध्या उनका राजनितिक करियर खत्म कर देती। राहुल ने कहा भारतीय जनता पार्टी में कोई भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पसंद नहीं करता है। विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, “…भाजपा की पूरी मूवमेंट राम मंदिर, अयोध्या की थी। शुरुआत आडवाणी जी ने की थी, रथयात्रा की थी… कहा जाता है नरेंद्र मोदी जी ने उस रथयात्रा में आडवाणी जी की मदद की थी। मैं संसद में सोच रहा था कि उन्होंने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की और प्राण प्रतिष्ठा में अडानी-अंबानी जी दिख गए लेकिन गरीब व्यक्ति नहीं दिखा… संसद में मैंने अयोध्या के सांसद से पूछा कि, ये भाजपा ने अपनी पूरी राजनीति चुनाव के पहले इन्होंने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की… लेकिन INDIA गठबंधन अयोध्या में चुनाव जीत गया, यह क्या हुआ? इससे पहले कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ बजरंग दल के विरोध प्रदर्शन किया है। JCP नीरज कुमार बडगुजर ने कहा, यहां पुलिस को तैनात किया गया है और संपूर्ण शांति है…जो कार्यकर्ता(बजरंग दल के) विरोध प्रदर्शन करने निकले थे, उनको पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। गुजरात के कांग्रेस प्रभारी मुकुल वासनिक (Mukul Wasnik) ने राहुल गांधी के दौरे को लेकर कहा कि वह यहां के लोगों को राहत पहुंचाने आए हैं. बता दें कि लोकसभा चुनाव के नतीजे आने और विपक्ष का नेता बनने के बाद से राहुल गांधी ने कई अहम मुद्दे सरकार के सामने उठाए हैं. इसके अलावा वह हाथरस हादसे के पीड़ितों से मिलने भी गए थे. मुकुल वासनिक ने कहा, ”लोकसभा चुनाव के नतीजे के बाद यह माना जा रहा था कि बीजेपी और राज्य सरकार अपने काम करने के तरीके में बदलाव करेगी. लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है. वह नफरत की राजनीति कर रहे हैं. गुजरात में कई घटनाएं हुई हैं जिससे लोग दुखी हैं. राहुल गांधी गुजरात के लोगों को राहत पहुंचाने आए हैं.” हमारी एक दो गलती के कारण वाराणसी से जीते पीएम मोदी – राहुल राहुल गांधी ने अहमदाबाद में कार्य़कर्ताओं को संबोधित करते हुए दावा किया, ”अयोध्या में कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बीजेपी को हराया है. अयोध्या के एमपी ने बताया कि यहां तीन बार सर्वे हुआ था कि नरेंद्र मोदी वाराणसी से नहीं लड़ना चाहते थे. वह अयोध्या से लड़ना चाहते थे, सर्वेयर ने कहा कि अगर आप यहां से लड़ेंगे तो हार जाएंगे. आप अयोध्या में मत लड़िए नहीं तो आपका राजनीतिक करियर अयोध्या में खत्म हो जाएगा. इसलिए अय़ोध्या से नहीं बल्कि वाराणसी से लड़े. हमने एक दो गलती कर दी वर्ना वह वाराणसी से हार जाते.” राहुल गांधी से मिल अपनी बात रखेंगे पीड़ित – शक्ति सिंह बताया जा रहा है कि राहुल मोरबी ब्रिज और राजकोट गेम जोन हादसे के पीड़ितों से मुलाकात करेंगे. राहुल गांधी के गुजरात दौरे को लेकर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शक्ति सिंह गोहिल ने भी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि राहुल गांधी कार्यकर्ताओं से बैठक करेंगे. शक्ति सिंह ने कहा कि राहुल गांधी न्याय के लिए लड़ते हैं. लोगों ने बीजेपी पर भरोसा जताया था लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिला. इसलिए वे लोग राहुल गांधीा के सामने अपनी बात रखना चाहते हैं.

जांजगीर में पांच तो कोरबा में कुएं में उतरने से चार की गई जान, छत्तीसगढ़ में कुएं बने नौ लोगों के काल

जांजगीर-चांपा. छत्तीसगढ़ में कुआं काल बना हुआ है। शुक्रवार को प्रदेश के अलग-अलग दो जिलों में कुएं में उतरने से नौ लोगों की मौत हो गई है। जांजगीर-चांपा में पिता और दो बेटे समेत पांच, तो कोरबा जिले में पिता-पुत्री समेत चार लोगों की मौत हुई है। इस हादसे के बाद परिवार में मातम छाया हुआ है। दरअसल, बरसात के दिन आने पर कुएं की साफ-सफाई करने के लिए उतरे हुए थे। कुएं में गैस रिसाव के चलते उनकी मौत हो गई, इन्हें बचाने के लिए एक-एक कर उतरे नौ लोगों की मौत हो गई है। कुएं में जहरीली गैस की वजह से सभी का दम घुटने लगा, जिससे उनकी मौके पर मौत हो गई। जांजगीर-चांपा जिले के बिर्रा थाना अंतर्गत आने वाले ग्राम किकिरदा में उस वक्त मातम छह गया, जब गांव के ही कुएं में पांच लोगों की मौत हो गई। दरअसल, कुएं में गिरी लकड़ी को निकालने के लिए एक व्यक्ति कुएं में उतर गया। कुएं से निकल रही जहरीली गैस से उसकी मौत हो गई। उसे बचाने के लिए पड़ोस में रह रहे चार लोग एक-एक कर उतरे। वहां जहरीली गैस की वजह से उनकी भी मौत हो गई। मृतकों का नाम रामचंद्र जायसवाल 60 वर्ष, पड़ोसी रमेश पटेल 50 वर्ष, रमेश पटेल के दो बेटे जितेंद्र पटेल 25 वर्ष, राजेंद्र पटेल 20 वर्ष, एक और पड़ोसी टिकेश्वर चंद्रा 25 वर्ष बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि टिकेश चंद्रा की तीन महीने पहले ही शादी हुई थी। रमेश पटेल खेती किसानी का काम करता था, उसके पुत्र जितेंद्र पटेल की दो साल पहले शादी हुआ था, उसका 5 माह का बच्चा है। वहीं राजेंद्र पटेल ने अपनी 10वहीं तक की पढ़ाई की है, जिसके बाद अपने पिता के साथ खेती किसानी में हाथ बटाया करता था। दूसरी ओर कोरबा जिले के कटघोरा थानांतर्गत ग्राम जुराली के डिपरा पारा में चार लोगों की कुआं में डूबने से मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक कुंआ में ग्रामीण के गिरने के बाद उसे बचाने के लिए बेटी कुंआ में कूद गयी। इसके बाद परिवार के ही दो अन्य लोग कुआं में नीचे उतरे, लेकिन सभी की मौत हो गई। जुराली निवासी शिवचरण पटेल कुएं की सफाई कर रहा था इस दौरान वह नीचे गिर गया। उसे देखकर उसकी बेटी सपीना नीचे उतरी, जहां उसकी भी मौत हो गई। दोनों को कुएं में गिरा हुआ देख मनबोध पटेल, जरूर पटेल नीचे उतरे। थोड़ी देर बाद उनकी भी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि कुएं में गैस रिसाव के चलते चारों की मौत हुई है। 

योगी सरकार के मंत्री का बड़ा बयान, कहा – हिन्दू देवी-देवताओं के नाम पर मुस्लिम दुकान पर न लिखें

मुजफ्फरनगर सावन के महीने में होने वाली कांवड़ यात्रा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं. इस यात्रा को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन लगातार तैयारियों में जुटे हुए हैं. कांवड़ यात्रा से पहले उत्तर प्रदेश के मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने मुजफ्फरनगर में कांवड़ शिविर संचालकों के साथ बैठक की.  इस बैठक के बाद कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि कांवड़ मेले में जो मुस्लिम लोग हिंदू देवी देवताओं के नाम पर अपनी दुकान चलाते हैं वो ऐसा ना करें. कपिल देव अग्रवाल ने कहा, ‘कांवड़ मेले में मुस्लिम लोग हिंदू देवी देवताओं के नाम पर अपनी दुकान चलाते हैं. वह अपनी दुकान चलाएं हमें कोई आपत्ति नहीं है लेकिन वह हिंदू देवी देवताओं के नाम पर दुकान का नाम ना रखें क्योंकि बाहर से आने वाले कावड़िये वहां पर बैठकर चाय पानी पीते हैं और जब उन्हें पता चलता है तो उसमें विवाद का कारण बनता है. इसलिए इस मामले में पारदर्शिता होनी जरूरी है. जिससे बाद में कोई विवाद का कारण ना बन सके.’ सरकार ने दिए ये दिशा-निर्देश आपको बता दें कि कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) प्रशांत कुमार ने आगामी कांवड़ यात्रा और मुहर्रम के सुरक्षा प्रबंधों को लेकर अधिकारियों के साथ एक बैठक की और उन्हें अलग-अलग दिशा- निर्देश दिए. कांवड़ यात्रा व मुहर्रम के जुलूस मार्गों को लेकर उन्होंने कहा कि डिजिटल वॉलिंटियर्स और सिविल डिफेंस का सहयोग लेकर सुरक्षा प्लान बनाया जाए. डीजीपी ने कहा कि किसी नई परंपरा की अनुमति न दी जाए और कावड़ यात्रा के मार्गों की पहली से जांच कर लें. इसके अलावा उन्होंने मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों और हॉटस्पॉट पर अतिरिक्त पुलिस बलों की तैनाती का आदेश दिया. पुलिस महानिदेशक ने कहा कि गड़बड़ी करने वाले तत्वों पर कड़ी नजर रखी जाए और संवेदनशील जगहों पर अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाए. संवेदनशील जगहों पर बढ़ेगी सुरक्षा इसके अलावा अधिकारियों को आदेश दिया कि जुलूस मार्गों पर लगे सीसीटीवी को एक्टिव रखा जाए और रेलवे स्टेशन तथा बस अड्डे पर सुरक्षा बढ़ाई जाए. अधिकारियोंसे कहा गया कि जोन सेक्टर स्कीम लागू कर अति संवेदनशील स्थलों पर चेकिंग को बढ़ाई जाए. डीजीपी ने इंटरनेट मीडिया की 24 घंटे निगरानी करने का भी निर्देश दिया जाए. सभी मार्गो के सर्वे का काम पूरा हरिद्वार से गंगाजल लेकर लाखों-करोड़ों की तादात में शिव भक्त मुजफ्फरनगर होते हुए हरियाणा, राजस्थान ,दिल्ली और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों की ओर प्रस्थान करते हैं, जिसे लेकर मुजफ्फरनगर जनपद कावड़ मेले के दौरान एक मुख्य बिंदु बन जाता है। इस बार के कावड़ मेले को सकुशल संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन ने भी सभी कावड़ मार्गों का सर्वे पूरा कर लिया है, जिसके बारे में जानकारी देते हुए मुजफ्फरनगर एसएसपी अभिषेक सिंह ने बताया कि हरिद्वार के बाद मुजफ्फरनगर में 219 किलोमीटर का कावड़ मार्ग है, जिसके चलते इस बार हर 2 किलोमीटर पर एक सिपाही की तैनाती की जाएगी और तकरीबन 2000 सीसीटीवी कैमरो की निगरानी में इस कावड़ मेल को संपन्न कराया जाएगा। सुरक्षा को देखते हुए लगाए गए सीसीटीवी मुज़फ्फरनगर एसएसपी अभिषेक सिंह ने कहा कि कावड़ शिविर संचालक और भंडारा संचालकों के साथ बैठक हुई है। बैठक में इस बात पर ज्यादा जोर दिया गया है जो कावड़ संचालक है, अपने यहां पर खास तौर पर फायर के बारे में काफी ध्यान रखें। अपने कावड़ शिविरों को इस प्रकार लगाएं कि सड़क पर जाम की स्थिति न बने। इसके साथ किसी भी प्रकार की कोई दुर्घटना न हो। उन्होंने कहा कि यहां इस समय 8 कावड़ मार्ग है, जिनका सर्वे किया जा चुका है, इन क्षेत्रों को अलग-अलग जोन में बांटा गया है। गंग नहर पटरी मार्ग पर हर 2 किलोमीटर पर एक सिपाही की तैनाती है होगी। 219 किलोमीटर के मार्ग पर तकरीबन 1800 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि जो कावड़ यात्री आ रहे हैं, जो वाहनों पर डीजे लगाए हैं और उनकी हाइट 20-20 फिट है, उन्हें बाईपास से निकाला जाएगा। उन्होंने अनुरोध कि वाहनों पर बनाए गए पंडाल को लिमिटेड साइज में बनाएं, ताकि किसी प्रकार की कोई भी दुर्घटना न हो। उन्होंने कहा कि कानून को पालन सभी को करना होगा।    

हरियाली बढ़ाने के उपाए , प्रदेश में रोपे जाएंगे 5.50 करोड़ पौधे, भोपाल में एक दिन में 12 लाख पौधारोपण का लक्ष्य- मुख्यमंत्री

 भोपाल भोपाल के जंबूरी मैदान में सीएम ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत आंवला का पौधा लगाया।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के जंबूरी मैदान में शनिवार को आंवले का पौधा रोपा। इसी के साथ उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की शुरुआत की। उन्होंने कहा, ‘पूरे प्रदेश में 5.5 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे।’ भोपाल में ही 12 लाख पौधे लगाए जाने हैं। जंबूरी मैदान में हुए कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा, प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा, मंत्री विश्वास सारंग, कृष्णा गौर, राज्यमंत्री राधा सिंह, विधायक रामेश्वर शर्मा, भगवान दास सबनानी, महापौर मालती राय, जिला अध्यक्ष सुमित पचौरी भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि अभियान जन सहयोग से सफल होगा। अभियान के लिए जन भागीदारी जुटाई जा रही है। प्रदेश के दो बड़े नगरों में अभियान से अनेक संगठन जुड़ रहे हैं, जहां इंदौर जिले में 51 लाख पौधे लगाने का संकल्प लिया गया है। वहीं राजधानी भोपाल में जिले के विभिन्न स्थानों पर एक दिन में 12 लाख पौधे रोपे जाएंगे।  भोपाल जिले में 12 हजार पौधे मां के सम्मान में लगाए जाएंगे। शेष पौधे भी विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर लगेंगे। भोपाल में राष्ट्रवादी विचारक, शिक्षाविद और भारतीय जनसंघ के संस्थापक डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर छह जुलाई को अभियान के अंतर्गत पौधे लगाने का कार्य शुरू किया जाएगा। हरियाली महोत्सव के तहत आयोजित इस वृहद पौधारोपण कार्यक्रम में जंबूरी मैदान पर कुल 25 प्रजातियों के लगभग 5000 पौधे रोपे गए। जिलेभर में आज विभिन्न क्षेत्रों में 12 लाख पौधे मां के नाम रोपे जा रहे हैं। वेदों में बताई वृक्षों की महत्ता पौधारोपण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि वेदों में वृक्षों में अलग प्रकार के महत्ता पाई गई है। 10 वृक्षों के बराबर एक कुआं होता है। 10 पुत्रों के बराबर एक वृक्ष होता है। एक पेड़ मां के नाम से अद्भुत प्रयोग है। आज का दिन हम सभी को एक अलग दौर में लेकर जा रहा है। इस मौके पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा, मंत्री विश्वास सारंग, राज्यमंत्री कृष्णा गौर, विधायक रामेश्वर शर्मा, विधायक भगवानदास सबनानी, महापौर मालती राय, नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी समेत अन्य गणमान्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। नगर निगम द्वारा आज शहर में कुल एक लाख 20 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। बता दें कि पहले यह आयोजन कलियासोत मैदान पर होने वाला था, लेकिन वर्षा के कारण अब जंबूरी मैदान के पास करने का निर्णय लिया गया। नगर निगम द्वारा जंबूरी मैदान के अलावा कलियासोत मैदान, भेल दशहरा मैदान, एयरपोर्ट रोड, गांधी नगर सहित विभिन्न स्थानों पर कुल एक लाख 20 हजार पौधे लगाए जा रहे हैं। इनके अलावा जहां हरियाली कम है और कालोनियों के साथ ही अतिक्रमण से मुक्त कराई गई शासकीय भूमि पर भी पौधे लगाए जा रहे हैं। इसके लिए एसडीएम और तहसीलदारों को भी जिम्मेदारी दी गई है। वन विभाग करेगा सर्वाधिक पौधारोपण डीएफओ आलोक पाठक ने बताया कि उनको नौ लाख पौधे लगाने का लक्ष्य मिला है। इसके लिए उन्होंने एक दिन पहले ही वनभूमि पर तैयारियां कर ली थीं। गड्ढे खोदने के साथ ही तार फेंसिंग भी कर ली गई। पौधों का इंतजाम भी कर लिया गया। इनमें आम, नीम, बरगद, पीपल सहित अनके किस्म के पौधे लगाए जा रहे हैं। कलेक्टर ने की अपील कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि पौधारोपण अभियान से सामाजिक संगठन, शैक्षणिक संस्थाएं और व्यापारियों सहित आमजनों को भी जोड़ा गया है। उन्होंने लोगों से पौधारोपण करने की अपील की और कहा कि पौधे लगाने के बाद नागरिक अपनी फोटो ‘मेरी लाइफ पोर्टल’ में भी अपलोड कर सकते हैं। विद्यार्थियों को दें विरासत की जानकारी मुख्यमंत्री ने कहा कि पौधारोपण अभियान के साथ युवाओं को जोड़कर उन्हें पर्यावरण का महत्व बताना प्रशंसनीय है। इसके साथ ही विद्यार्थियों को विरासत से जोड़ने का कार्य भी किया जाए। भोपाल जिला पर्यटन परिषद और अन्य संस्थाएं विद्यार्थियों को पुरातात्विक महत्व के स्थानों, विज्ञान संग्रहालय और अन्य संग्रहालयों की सैर करवाएं। भोपाल में ऐसे जीवंत प्रयास होने चाहिए, जिससे राजधानी का एक माडल बने और अन्य स्थानों पर उसकी चर्चा हो। एक पेड़ मां के नाम अभियान के लिए जन अभियान परिषद, अखिल विश्व गायत्री परिवार और अन्य संस्थाओं का पूरा सहयोग लिया जाए। भोपाल में 350 स्थल किए चिह्नित कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि भोपाल में 350 स्थान पौधारोपण के लिए चिह्नित किए गए हैं। इनमें मुख्य रूप से कलियासोत डैम, आदमपुर खंती, कीरत नगर, केम्पा वृक्षारोपण मुंगालियाकोट, समरधा जंगल रेंज और कलारा बैरसिया भी शामिल हैं। कुल 480 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधे लगाने का लक्ष्य है। एक पेड़ मां के नाम और हरित महोत्सव अभियान को भोपाल में एक वृक्ष भोपाल के नाम से भी प्रचारित किया जा रहा है, इसके अंतर्गत व्यापक पौधारोपण होगा।

हृदय शल्य चिकित्सक मसूद पेजेशकियन ईरान के अगले राष्ट्रपति, कट्टरपंथी जलीली की हार

तेहरान ईरान के राष्ट्रपति चुनाव का नतीजा आ गया है. रिफॉर्मिस्ट मसूद पेजेशकियान ने राष्ट्रपति का चुनाव जीता है. उन्होंने कट्टरपंथी माने जाने वाले उम्मीदवार सईद जलीली को मात दी है. चुनाव में उन्होंने ईरान को पश्चिमी देशों से जोड़ने का वादा किया था, जो दशकों से अमेरिकी नेतृत्व के साथ टकराव में है. चुनाव में सुधारवादी नेता पेजेशकियान को 16.3 मिलियन वोट पड़े हैं, जबकि हार्डलाइनर यानी कट्टरपंथी उम्मीदवार सईद जलीली को 13.5 मिलियन वोट मिले. पेजेशकियान पेशे से एक हार्ट सर्जन हैं और लंबे समय से सांसद रहे हैं. उनके समर्थकों में खुशियों का माहौल है, जिन्होंने देश की सत्ता में बड़े बदलाव का नेतृत्व किया है. वोट काउंटिंग के दौरान ही उनके समर्थक सड़क पर सेलिब्रेशन के लिए उतर आए थे. मसलन, इस चुनाव में ईरान के पूर्व परमाणु निगोशियेटर के रूप में मशहूर सईद जलीली, सुप्रीम लीडर के करीबी माने जाते हैं, जिन्हें हार का सामना करना पड़ा है. पेजेशकियान की जीत के बाद ईरान में कुछ बहुत बड़ा बदलाव होगा, इसकी उम्मीद कम ही है, क्योंकि खुद पेजेशकियान वादा कर चुके हैं कि उनके कार्यकाल में देश के शिया धर्मतंत्र में कोई आमूलचूल बदलाव नहीं किया जाएगा. ईरान में सुप्रीम लीडर की बात पत्थर की लकीर मानी जाती है. पेजेशकियान भी उन नेताओं में एक हैं, जो सुप्रीम लीडर को देश के सभी मामलों में आखिरी मध्यस्थ मानते हैं. वह पश्चिम के साथ ईरान के बेहतर संबंध की वकालत करते रहे हैं, जिनके प्रतिबंधों से देश का आज खस्ता हाल है. ईरान चुनाव के रनऑफ में पेजेशकियान और जलीली के बीच कड़ी टक्कर मानी जा रही थी. पेजेशकियान उन कुछ उम्मीदवारों में शामिल थे, जिन्होंने ईरान को दुनिया के लिए खोलने का वादा किया था. मसलन, खासतौर पर पश्चिमी देशों के साथ संबंध को पुनर्स्थापित करने का वादा किया था. हालांकि, जलीली ने ईरान के लिए रूस और चीन को बेहतर बताया था. ईरान राष्ट्रपति चुनाव में मतदाताओं की करीब 50 फीसदी हिस्सेदारी दर्ज की गई.  पेजेशकियन ने दिवंगत राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की जगह लेने के अपने अभियान के दौरान अन्य उदारवादी और सुधारवादी हस्तियों के साथ गठबंधन किया था। रईसी खमेनेई के कट्टरपंथी अनुयायी थे, जिनकी मई में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। उनके मुख्य अधिवक्ता पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद ज़रीफ़ रहे हैं, जिन्होंने 2015 में विश्व शक्तियों के साथ ईरान का परमाणु समझौता कराया था, जिसके तहत परमाणु कार्यक्रम में भारी कटौती के बदले में प्रतिबंध हटा दिए गए थे। ईरान के लोग इस उम्मीद में सड़कों पर उतर आए कि इस समझौते से उनका देश आखिरकार अंतरराष्ट्रीय समुदाय में शामिल हो जाएगा। लेकिन 2018 में, तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एकतरफा तरीके से अमेरिका को समझौते से अलग कर लिया, जिससे पूरे मध्य पूर्व में हमलों की एक श्रृंखला शुरू हो गई। ईरान अब यूरेनियम को हथियार-स्तर के स्तर तक समृद्ध कर रहा है, जबकि उसके पास इतना बड़ा भंडार है कि अगर वह चाहे तो कई बम बना सकता है।

पाकिस्तान ने जेट विमानों को परमाणु मिसाइलों से लैस किया ?भारत के लिए नई मुसीबत !

नई दिल्ली पाकिस्तानी वायुसेना ने अपने फाइटर जेट JF-17 Thunder में न्यूक्लियर क्रूज मिसाइल Ra’ad लगाया है. हवा से लॉन्च की जाने वाली यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है. पाकिस्तान ने अपने पुराने मिराज फाइटर जेट के बजाय चीन से मिले नए JF-17 फाइटर को अत्याधुनिक हथियारों से लैस कर रही है. पाकिस्तान अपने हवाई परमाणु हथियारों को मजबूत कर रही है. Ra’ad मिसाइल को जेएफ-17 थंडर फाइटर जेट के विंग्स के नीचे लगाया गया है. यानी अब पाकिस्तान इस नए फाइटर जेट के जरिए किसी भी समय परमाणु हमला कर सकता है. पाकिस्तानी सेना राड मिसाइल को हत्फ-8 के नाम से बुलाती है. यह एक सबसोनिक एयर लॉन्च्ड क्रूज मिसाइल है. इस मिसाइल को पाकिस्तान ने 2012 में वायुसेना में शामिल किया था. इस मिसाइल की लंबाई 4.85 मीटर है. इसका व्यास 0.5 मीटर है. यह मिसाइल अपने साथ 450 किलोग्राम वजन का पारंपरिक या परमाणु हथियार ले जा सकती है. इस मिसाइल की रेंज 550 किलोमीटर है.   लंबी दूरी के परमाणु मिशन आसानी से कर सकता है पाकिस्तान यानी पाकिस्तान अब लंबी दूरी के मिशन में परमाणु हमला आसानी से कर सकता है. JF-17 को चीन और पाकिस्तान ने मिलकर बनाया है. इसकी तुलना भारत के एलसीए तेजस से की जाती है. जेएफ-17 फाइटर जेट का नया वैरिएंट यानी ब्लॉक-3 को जे-20 फाइटर जेट की स्टेल्थ टेक्नोलॉजी दी गई है. साथ ही उसे थोड़ा हल्का बनाया गया है. लगातार अपनी मिसाइलों को अपग्रेड कर रहा है पाकिस्तान पाकिस्तान के पास हवा से जमीन पर दागने के लिए हत्फ-8 मिसाइल है. जिसमें परमाणु हथियार लगा सकते हैं. इसके अलावा शाहीन-1 और शाहीन-2 मिसाइलें भी हैं. ये इंटरमीडियट रेंज की बैलिस्टिक मिसाइलें हैं. इसके अलावा मीडियम रेंज की गौरी मिसाइल है. जमीन से लॉन्च होने वाली क्रूज मिसाइल बाबर भी है. भारत के लिए खतरा कितना… ये बता पाना मुश्किल ये सभी मिसाइलें परमाणु हमला करने में सक्षम हैं. इन सबकी अलग-अलग रेंज है. पाकिस्तान लगातार चीन और अन्य देशों की मदद से इन्हें अपग्रेड करता जा रहा है. लेकिन भारत के लिए कितना खतरा है ये बता पाना बेहद मुश्किल है. Ra’ad मिसाइल की अधिकतम स्पीड 980 km/hr की है. यह मिसाइल भौगोलिक स्थिति के अनुसार उड़ान भरने में सक्षम है. कितना बेहतर है पाकिस्तान का JF-17 भारत के राफेल से JF-17 Thunder Block 3 एक अत्याधुनिक, हल्के वजन का, हर मौसम में उड़ान भरने वाला मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट है. यह हवा से हवा में और हवा से जमीन पर लड़ाई करने के लिए बनाया गया है. आइए आपको बताते हैं कि भारत के Rafale और JF-17 Thunder Block 3 में क्या खास है… राफेल की कॉम्बैट रेडियस 3800 KM है. कॉम्बैट रेंज 1850 km है. जबकि JF-17 Thunder Block 3 की कुल रेंज 3500 से 3840 km है. लेकिन कॉम्बैट रेंज 1500-1800 km है. कॉम्बैट रेंज राफेल की ज्यादा है. ॉअपने बेस स्टेशन से जितनी दूर विमान जाकर सफलतापूर्वक हमला कर लौट सकता है, उसे कॉम्बैट रेडियस कहते हैं. रेट ऑफ क्लाइंब, स्पीड, तोप, परमाणु मिसाइल, ज्यादा हथियार की क्षमता राफेल हवा में 304.8 मीटर प्रति सेकेंड की गति से ऊपर जाता है. जबकि JF-17 Thunder Block 3 की रेट ऑफ क्लाइंब 300 मीटर प्रति सेकेंड है. राफेल में तीन तरह की मिसाइलें लगेंगी. हवा से हवा में मार करने वाली मीटियोर मिसाइल. हवा से जमीन में मार करने वाल स्कैल्प मिसाइल. तीसरी है हैमर मिसाइल. राफेल में लगी मीटियोर मिसाइल 150 km, स्कैल्प मिसाइल 300 km तक मार कर सकती है. हैमर का उपयोग कम दूरी के लिए किया जाता है. चीन के JF-17 जेट में 6 तरीके की हवा से हवा में मार करने वाली, 5 तरीके की हवा से जमीन पर मान करने वाली मिसाइल और 5 तरीके की एंटी-शिप मिसाइल लगाई जा सकती है.    भारतीय राफेल की गति 2450 km/hr है. पाकिस्तान के JF-17 थंडर फाइटर जेट की स्पीड 2450 से 2469 km//hr है. राफेल ओमनी रोल लड़ाकू विमान है. यह पहाड़ों पर कम जगह में उतर सकता है. इसे समुद्र में चलते हुए युद्धपोत पर उतार सकते हैं. राफेल चारों तरफ निगरानी रखने में सक्षम है. जबकि, पाकिस्तानी जेट मल्टीरोल फाइटर जेट है. यह इन सुविधाओं में कितना ताकतवर है, इसके बारे में किसी तरह की जानकारी पाकिस्तान या चीन की तरफ से साझा नहीं की गई है.   भारतीय Rafale में 1×30 मिमी की GIAT30/M791 ऑटोकैनन तोप लगी है, जो 125 राउंड की मैगजीन के साथ आती है. यह 2500 राउंड प्रति मिनट की दर से फायरिंग कर सकती है. जबकि JF-17 में 1×23 मिमी की GSg-23-3 मल्टी बैरल गन लगी है. जो 1700 राउंड प्रति मिनट की दर से फायरिंग करता है. हथियारों के मामले में पाकिस्तानी फाइटर जेट ज्यादा बेहतर, लेकिन हथियार ही नहीं हैं अगर बात करें कि किस फाइटर जेट में ज्यादा बेहतर हथियारों का मिश्रण हो सकता है तो पाकिस्तान का फाइटर जेट जीत जाएगा. लेकिन उसके पास इतनी वैराइटी के हथियार ही नहीं है. वह भले ही 5-6 मिसाइलों का मिश्रण बना ले लेकिन Rafale में लगने वाली हवा से हवा में मार करने वाली MBDA MICA EM और IR, MBDA Meteor, Magic आसमान सुरक्षित कर देंगी. राफेल की हवा से जमीन में मार करने वाली मिसाइलें ज्यादा ताकतवर हैं. ये हैं- MBDA Apache, MBDA Storm Shadow/Scalp-EG, AASM-Hammer, GBU-12 Paveway Series, AS-30L, Mark 82. भारतीय राफेल में इसके अलावा दो बेहद खास हथियार लगाए जा सकते हैं. ये हैं MBDA AM 39-Exocet हवा से शिप पर लॉन्च होने वाली मिसाइल. और परमाणु मिसाइल ASMP-A. यानी पाकिस्तानी JF-17 Thunder Block 3 फाइटर जेट को चुटकियों में नेस्तानाबूत करने की क्षमता और ताकत रखता है हमारा राफेल.  

सुनीता विलियम्स को अंतर‍िक्ष में लेकर गए बोइंग के स्टारलाइनर कैप्सूल में सकता है विस्फोट?

वॉशिंगटन  भारतीय मूल की अमेरिकी एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विल्मोर स्पेस में फंसे हुए हैं। सुनीता और विल्मोर को अपने मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पर एक सप्ताह बिताने के बाद 13 जून को धरती पर लौटना था लेकिन बोइंग स्टारलाइनर में खराबी के चलते उनकी वापसी नहीं हो पा रही है। अब ये भी सवाल उठने लगा है कि क्या अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को ले जा रहे बोइंग के स्टारलाइनर कैप्सूल में विस्फोट हो सकता है। यह सवाल तब सामने आया जब नासा ने विस्फोट न कराने के लिए एयरोस्पेस कंपनी की सराहना की। नासा ने बोइंग की प्रशंसा की है क्योंकि कैप्सूल पर आईएसएस की यात्रा करने वाले अंतरिक्ष यात्री तब तक वहां रह सकेंगे, जब तक बोइंग को समस्याओं को ठीक करने में समय लगेगा। इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह चेतावनी दी गई थी कि बोइंग कैप्सूल में समस्याएं हो सकती हैं और लिफ्टऑफ से पहले यह पता चला कि हीलियम लीक हो गया था। इन सभी नकारात्मक परिस्थितियों के बावजूद नासा जून की शुरुआत में पहले क्रू स्टारलाइनर लॉन्च के साथ आगे बढ़ा। आईएसएस की अपनी यात्रा में लीक बढ़ी और वहां पहुंचने के बाद डॉकिंग में परेशानी का सामना करना पड़ा। इससे पहले 2019 में अपनी पहली परीक्षण उड़ान के दौरान यह अपनी अपेक्षित कक्षा तक पहुंचने में विफल रहा था। इसके बारे में बाद में पता चला कि ऑनबोर्ड घड़ी गलत तरीके से सेट की गई थी और इसके कारण स्टारलाइनर के थ्रस्टर्स गलत समय पर चालू हो गए। नासा ने कहा- बैटरियां चार्ज हो रही हैं नासा के वाणिज्यिक क्रू कार्यक्रम के प्रबंधक स्टीव स्टिच ने स्पेस डॉट कॉम को बताया कि बैटरियां चार्ज हो रही हैं। हम उन बैटरियों और कक्षा में उनके प्रदर्शन को देख रहे हैं। उन्हें स्टेशन द्वारा रिचार्ज किया जा रहा है। इंजीनियरों ने बोइंग अंतरिक्ष यान में कई समस्याएं पाई हैं और नासा अभी भी ये बताने की स्थिति में नहीं है कि दोनों एस्ट्रोनॉट की वापसी कब होगी। हालांकि राहत की बात ये है कि अभी तक दोनों एस्ट्रोनॉट स्वस्थ हैं। बोइंग का स्टारलाइनर कैप्सूल 5 जून को अमेरिका के समयानुसार सुबह 10 बजकर 52 मिनट पर फ्लोरिडा के केप कैनवेरल स्पेस फोर्स स्टेशन से चालक दल के साथ अपनी पहली उड़ाने के लिए रवाना हुआ था। ये नौ दिवसीय मिशन तब पटरी से उतर गया जब हीलियम लीक ने उनकी वापसी की तारीख को अनिश्चित बना दिया है। अंतरिक्ष रहस्यों से भरी दुनिया है. नासा की भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स अपने साथी बैरी विल्मोर के साथ अंतरिक्ष में फंस गई हैं. लेकिन सवाल ये है कि आखिर सुनीता विलियम्स स्पेस में कैसे फंसी हैं और उनकी धरती पर वापसी कैसे होगी. आज हम आपको बताएंगे कि अंतरिक्ष में फंसने पर किसी भी एस्ट्रोनॉट्स की धरती पर वापसी कैसे होती है.   स्पेस अंतरिक्ष के रहस्यों को सुलझाने के लिए अधिकांश देशों के वैज्ञानिक लग हुए हैं. जिसके लिए वो अलग-अलग प्रोजेक्ट करते हैं. अभी बीते जून में भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स अपने साथी बैरी विल्मोर के साथ स्पेस में गई थी. लेकिन बोइंग स्टारलाइनर में खराबी आने की वजह से दोनों अंतरिक्ष यात्री वापस लौट नहीं पाए हैं. अंतरिक्ष यान दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर पांच जून को लेकर गया था. स्पेस में खतरा अंतरिक्ष में जाने वाले अंतरिक्षयात्रियों के ऊपर कई तरह के खतरे होते हैं. स्पेस का कोई भी प्रोजेक्ट 100 फीसदी सुरक्षित नहीं होता है. अंतरिक्ष यात्रा के दौरान, उल्कापिंड, स्पेस मलबा भी एक खतरा है. हालांकि अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स स्पेस स्टेशन में दो बार लंबा समय बिता चुकी हैं. लेकिन इस बार वो स्पेस में फंस गई हैं. उनके स्पेसक्राफ्ट में खराबी के कारण धरती पर वह नहीं आ पाई हैं. इस कारण वह अभी भी स्पेस स्टेशन में मौजूद हैं. नासा के मुताबिक मिशन को 45 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है. अब सवाल है कि आखिर इस दौरान एस्ट्रोनॉट्स के शरीर पर क्या असर पड़ेगा? और सुनीता विलियम्स और उनके साथ धरती पर कैसे लौटेंगे.  शरीर पर क्या असर? स्पेस में ज्यादा दिनों तक रहने पर शरीर के तरल पदार्थ माइक्रोग्रैविटी में ऊपर की ओर बढ़ते हैं. इस कारण हमारे शरीर के फिल्टर सिस्टम यानी किडनी को समस्याओं का सामना करना पड़ता है. इस दौरान शरीर में मौजूद तर ऊपर की ओर जाते हैं, जिससे चेहरे पर सूजन आ जाती है. गुर्दे उचित द्रव संतुलन बनाए रखने के लिए संघर्ष करते हैं, जिससे संभावित रूप से डिहाइड्रेशन या फ्लूइड ओवरलोड होता है. माइक्रोग्रेविटी के कारण हड्डियों में कैल्शियम का उत्सर्जन बढ़ने से गुर्दे में पथरी का खतरा बढ़ जाता है. धरती पर कब लौंटेगी सुनीता स्पेस से वापस धरती पर सुनीता विलियम्स और उनके साथी कब लौटेंगे, इसको लेकर नासा की तरफ से कोई बयान जारी नहीं किया गया है. नासा के मुताबिक इस मिशन को 45 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है. अनुमान के मुताबिक सुनीता और उनके साथी की वापसी जुलाई महीने के अंत तक हो सकती है. नासा की टीम लगातार सभी तकनीकी खामियों को दूर करने और उनको समझने का प्रयास कर रही हैं. 

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