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सऊदी अरब में हज यात्रा पर गर्मी का कहर, गर्मी के चलते 22 हज यात्रियों की हुई मौत

Auspicious times of 7 days from Sawan Monday to Tulsidas Jayanti, know

रियाद  सऊदी अरब में होने वाली दुनिया की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में से एक हज यात्रा पर इस बार भीषण गर्मी का कहर टूटा है। हज यात्रा के दौरान गर्मी के चलते इस बार कम से कम 22 श्रद्धालुओं की मौत हुई है। मृतकों की संख्या बढ़ने के चलते सऊदी अरब सरकार की हज यात्रा की तैयारियों के दावों की पोल खुल गई। आलम यह था कि तीर्थयात्रियों के शवों को सड़क के किनारे चिलचिलाती धूप में पड़े हुए थे। रविवार को जॉर्डन की समाचार एजेंसी ने बताया था कि हज यात्रा पर गए देश के 14 श्रद्धालुओं की लू लगने से मौत हुई है। सऊदी अरब के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि गर्मी लगने के 2700 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं। सऊदी सरकार की आलोचना एक वीडियो भी वायरल हुआ है जिसमें कई शव सड़क के डिवाइडर और फुटपाथ पर रखे देखे जा सकते हैं। हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र सोर्स से पुष्टि नहीं हुई है। मिस्र की 61 वर्षीय तीर्थयात्री अजा हामिद ब्राहिम ने समचार एजेंसी एएफपी को बताया कि उन्होंने सड़क के किनारे पड़ी हुई लाशें देखीं। ऐसा लग रहा था कि जैसे कयामत का दिन आ गया है। बड़ी संख्या में मौतों और उसके बाद शवों को लेकर हो रही बदइंतजामी को लेकर सोशल मीडिया पर लोग सऊदी अरब की आलोचना कर रहे हैं। ताहा सिद्दीकी ने सड़क किनारे शवों का वीडियो शेयर करते हए सवाल किया कि ‘क्या इसके लिए सऊदी शासन को जिम्मेदार ठहराया जाएगा? वे इस्लामिक पर्यटन को प्रमोट करते हैं और इससे अरबों कमाते हैं।’ जॉर्डन की समाचार एजेंसी ने रविवार को बताया कि हज यात्रा पर गए सऊदी गए देश के 14 लोगों की लू लगने से मौत हुई है. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें सड़क किनारे और डिवाडर शव पड़े दिख रहे हैं. फिलहाल, इन वीडियो की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है. मिस्र की 61 वर्षीय हजयात्री अजा हामिद ब्राहिम ने एएफपी को बताया कि सड़क किनारे पड़ी हुई लाशों को उन्होंने देखा, ऐसा लगता है जैसे सऊदी में कयामत आ गई है. सऊदी में सड़क किनारे पड़े शव सऊदी अरब में बड़ी संख्या में हो रही मौतें और उसके बाद शवों की बदइंतजामी को लेकर सोशल मीडिया पर लोग सऊदी अरब की आलोचना कर रहे हैं. ताहा सिद्दीकी नाम से एक्स हैंडल पर सड़क किनारे पड़े शवों का वीडियो शेयर किया गया है, साथ ही सवाल किया गया है कि ‘क्या इसके लिए सऊदी शासन को जिम्मेदार ठहराया जाएगा? जबकि सऊदी इस्लामिक पर्यटन को प्रमोट करता है और अरबों की कमाई करता है.’ काबा के पास तापमान 50 के पार सऊदी मौसम सेवा के अनुसार, सोमवार को मक्का की ग्रैंड मस्जिद में तापमान 51.8 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। इस जगह पर तीर्थयात्री काबा की परिक्रमा करते हैं। ग्रैंड मस्जिद के पास स्थित मीना में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस था। इस जगह पर हज यात्रियों ने तीन कंक्रीट की दीवारों पर शैतान को पत्थर मारने की रस्म अदा की। यहां गर्मी और भीड़ ने स्थिति को विकट बना दिया था। तीर्थयात्री गर्मी से बचने के लिए अपने सिर पर पानी की बोतलें उड़ेल रहे थे। शैतान को पत्थर मारने की रस्म को हज यात्रा के अंतिम चरण माना जाता है। इसके बाद श्रद्धालुओं की हज यात्रा समाप्त हो जाती है। कई देशों ने की मौत की पुष्टि जॉर्डन के विदेश मंत्रालय ने रविवार को कहा कि 14 जॉर्डनी तीर्थयात्रियों की अत्यधिक गर्मी की वजह से मौत हो गई, जबकि 17 अन्य लापता हैं। ईरान ने 5 हजयात्रियों की मौत की सूचना दी है लेकिन कारण नहीं बताया है। सेनेगल ने तीन की मौत की जानकारी दी है। सऊदी अरब में मौजूद इंडोनेशिया के एक स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी ने बताया है कि हज के दौरान 136 इंडोनेशियाई तीर्थयात्रियों की मौत हुई है, जिनमें कम से कम तीन हीटस्ट्रोक से मारे गए हैं। इस बार भारत से 1 लाख 75 हजार यात्री पवित्र हज यात्रा के लिए सऊदी अरब पहुंचे हैं। ग्रैंड मस्जिद का तापमान 51.8 डिग्री सेल्सियस सऊदी के मौसम विभाग ने बताया कि सोमवार को मक्का की ग्रैंड मस्जिद का तापमान 51.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. इस जगह पर हजयात्री परिक्रमा करते हैं. वहीं ग्रैंड मस्जिद के पास स्थित मीना का तापमान 46 डिग्री सेल्सियस रहा. इस जगह पर हज यात्री तीन कंक्रीट की दीवारों पर शैतान को पत्थर मारने की रस्म अदा करते हैं. इस जगह पर लोगों को गर्मी की वजह से बोतल से सिर पर पानी डालते देखा गया. शैतान को पत्थर मारने की रस्म को हज यात्रा का अंतिम चरण माना जाता है, इसके बाद हजयात्रा समाप्त हो जाती है. सऊदी में भारत के एक हज यात्री की मौत दूसरी तरफ जॉर्डन के विदेश मंत्रालय ने रविवार को बताया कि अधिक गर्मी की वजह से 14 जॉर्डनी हज यात्रियों की मौत हुई है, जबकि 17 अन्य लापता हैं. ईरान ने 5 हज यात्रियों की मौत होने की जानकारी दी है. सऊदी अरब में स्थित इंडोनेशिया के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि उनके देश के 136 हज यात्रियों की मौत हुई है, इनमें से तीन की गर्मी की वजह से मौत हुई है. इस बार भारत 1 लाख 75 हजार हज यात्री सऊदी पहुंचे हैं. तेलंगाना के एक हज यात्री की मौत होने की खबर आई है, इसको लेकर नामपल्ली स्थित हज हाउस पर लोगों ने प्रदर्शन किया है.  

स्कूल चलें हम अभियान 2024: प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में CM डॉ. मोहन यादव ने बच्चों का किया स्वाग

India became the first country to run a train on water

भोपाल गर्मियों की छुट्‌टियों के बाद आज से मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूल खुल गए हैं। आज से तीन दिन 20 जून तक प्रदेश भर में प्रवेशोत्सव मनाया जाएगा।भोपाल के सुभाष एक्सीलेंस स्कूल के प्रवेशोत्सव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमने 369 सीएम राइज स्कूलों को शुरू कर दिया है। हम सीएम राइज स्कूलों की समीक्षा करने वाले हैं। एमपी में 416 पीएम श्री स्कूलों की सुविधा सरकार देने जा रही है। स्कूल चलें हम अभियान 2024 के तहत 18 जून से तीन दिवसीय राज्य स्तरीय प्रवेश उत्सव आयोजित किया जा रहा है। 18 जून से 20 जून तक चलने वाले इस अभियान के तहत मंगलवार 18 जून को सुबह सीएम डॉ. मोहन यादव शासकीय सुभाष उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्रवेश उत्सव आयोजन का हिस्सा बने। सीएम यादव ने “प्रवेश उत्सव” कार्यक्रम में नवप्रवेशित विद्यार्थियों का विद्यालय में स्वागत किया। सीएम ने अपने X हैंडल पर एक पोस्ट शेयर करके लिखा है- आज भोपाल के शासकीय सुभाष उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से राज्यस्तरीय “स्कूल चलें हम अभियान” 2024 का शुभारंभ किया। प्रदेशभर में छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं। हमारे बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो, हम इनके सपनों में नए रंग भरें, यही हमारा प्रयास है। सीएम डॉ. मोहन यादव ने शासकीय सुभाष उत्‍कृष्‍ट उच्‍चतर माध्‍यमिक विद्यालय, भोपाल में आयोजित “प्रवेशोत्सव कार्यक्रम” में सुपर-100 योजना के अंतर्गत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने वाले 5 विद्यार्थियों को प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया एवं उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।     आज भोपाल के शासकीय सुभाष उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से राज्यस्तरीय “स्कूल चलें हम अभियान” 2024 का शुभारंभ किया।     प्रदेशभर में छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं। हमारे बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो, हम इनके सपनों में नए रंग भरें, यही हमारा प्रयास है।… pic.twitter.com/mmAHoxocVG     — Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) June 18, 2024 18 जून को प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों में आयोजित ‘प्रवेश उत्सव’ के दौरान सांसद, विधायक और अन्य जन प्रतिनिधि भी स्कूल पहुंच रहे हैं और प्रवेश उत्सव का हिस्सा बन रहे हैं। विद्यालय स्तर पर आयोजित स्कूल चलें हम अभियान कार्यक्रम में विद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों एवं जन प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया। इस अवधि में गांव/गांव में चिन्हित स्कूल न जाने वाले बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिलाया जायेगा तथा उनके अभिभावकों का स्कूल स्तर पर स्वागत किया जायेगा। प्रवेशोत्सव के दिन स्कूलों में विशेष भोजन का वितरण किया जायेगा। अभियान के दूसरे दिन यानी 19 जून को सभी स्कूलों में शिक्षक-अभिभावक बैठक आयोजित की जायेगी। इस दौरान स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह द्वारा अभिभावकों को संबोधित पत्र वितरित किया जायेगा। इन बैठकों में अभिभावकों के साथ स्कूल की गतिविधियों पर चर्चा की जाएगी, जिसमें मुख्य रूप से कक्षावार विषय विभाजन, शैक्षणिक कैलेंडर, अध्ययन-अधिगम प्रक्रिया, अभिभावक-शिक्षक बैठक, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों, स्कूल में उपलब्ध सुविधाओं आदि के बारे में जानकारी दी जाएगी। नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें वितरित की जाएंगी। मुख्यमंत्री के जीवन से लें प्रेरणा- कुंवर विजय शाह इस अवसर पर  स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि ‘आज नए शिक्षण सत्र की शुरुआत हो रही है। 20 जून में हम सब अभिभावकों के साथ संवाद करेंगे। आमतौर पर पालकों का स्कूल के साथ संवाद कम होता है। लेकिन हम चाहते है पालक और स्कूल के बीच की दूरियां कम हो। हम सीएम राइस स्कूल का कॉन्सेप्ट लेकर आए हैं। इन स्कूलों में प्राइवेट स्कूल की तरह सुविधाएं दे रहे हैं।’ मंत्री कुंवर शाह ने कहा कि जो कहते हैं अभाव में पढ़ाई नहीं हो सकती उन्हें मोहन यादव जी का जीवन पढ़ना चाहिए। कार्यक्रम में उदय प्रताप सिंह, कुंवर विजय शाह सहित विश्वास सारंग, कृष्णा गौर समेत अन्य गणमान्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। 

राहुल गांधी के यूपी में वापसी , वायनाड छोड़ रायबरेली से ही सांसद बनना क्यों चुना?

लखनऊ राहुल गांधी लोकसभा चुनाव 2024 में दो सीटों से लड़े थे। एक केरल की वायनाड सीट थी, तो दूसरी यूपी की रायबरेली सीट थी। दोनों सीटों पर राहुल गांधी को जीत मिली थी। सोमवार को राहुल गांधी ने वायनाड सीट से इस्तीफा दे दिया है। अब यहां पर उपचुनाव होगा। कांग्रेस की ओर से उप चुनाव में प्रियंका गांधी को प्रत्याशी बनाया गया है। यह उनका राजनीतिक डेब्यू है, जिसको लेकर कांग्रेस अलर्ट हो गई है। आखिर राहुल गांधी ने वायनाड सीट को छोड़कर रायबरेली को ही क्यों चुना, जबकि वायनाड सीट पर 2019 में जीत मिली थी और अमेठी में हार गए थे, तो इसके पीछे कई सियासी मायने हैं। खोई जमीन बनाने पर कांग्रेस का फोकस उत्तर प्रदेश में 2024 के लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन ने शानदार जीत दर्ज की। इस जीत के बाद न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगा, बल्कि यूपी की राजनीति में कई तरह की चर्चाओं का जन्म हुआ। यूपी में सबसे ज्यादा 80 लोकसभा सीटे हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को महज एक सीट पर संतोष करना पड़ा था, तो वहीं 2022 के विधानसभा चुनाव में काफी जद्दोजहद के बावजूद यूपी की सिर्फ दो विधानसभा सीटों पर जीत मिली थी, लेकिन इस बार के लोकसभा चुनाव में सपा के साथ चुनाव लड़कर कांग्रेस ने छह सीटें जीती हैं, जिसके बाद यूपी में अपनी खोई हुई राजनीति को मजबूत करने में कांग्रेस जुट गई है। यूपी में कांग्रेस ने बढ़ाई सक्रियता वैसे कांग्रेस पार्टी की यूपी में सक्रियता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता कि लोकसभा चुनाव में गांधी परिवार यूपी में बेहद सक्रिय नजर आया। प्रियंका गांधी, राहुल गांधी, राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ सोनिया गांधी ने भी जनता से इंडिया गठबंधन के पक्ष में मतदान की अपील की। यहीं नहीं सोनिया ने अपने बेटे (राहुल गांधी) को रायबरेली की जनता को सौंपने की बात भी कही और बेटे के लिए प्रचार भी किया था। यूपी में मिली जीत के बाद से कांग्रेस ने यूपी में और सक्रियता बढ़ा दी है। जीत के बाद राहुल गांधी ने रायबरेली में आभार सभा की। 2027 का यूपी विधानसभा चुनाव भी सपा के साथ मिलकर लड़ने के संकेत दिए हैं। अगर ऐसा होता है, तो कांग्रेस को यूपी में फिर संजीवनी मिल जाएगी। वहीं, अगर सपा की ओर से विधानसभा चुनाव में बात नहीं बनी, तो कांग्रेस उसकी तैयारी अभी से कर दी है। 1952 से रायबरेली पर गांधी परिवार का कब्जा कांग्रेस पार्टी के इस फैसले के बाद कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। पहला ये कि राहुल गांधी ने उस सीट को चुना जहां से गांधी परिवार 1952 से जीतता आ रहा। रायबरेली से राहुल के दादा फिरोज गांधी, दादी इंदिरा गांधी और मां सोनिया गांधी पहले भी इस सीट से सांसद रह चुके हैं। इंदिरा के पति फिरोज गांधी ने 1952 में पहली बार इस सीट पर जीत दर्ज की थी। इंदिरा गांधी ने 1967 से 1977 के बीच 10 साल तक इस सीट का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि, 1977 में इंदिरा गांधी को हार मिली थी। 2004 से सोनिया ने संभाली रायबरेली की कमान 1980 में इंदिरा गांधी ने दो सीटों रायबरेली और अविभाजित आंध्र प्रदेश में मेडक से चुनाव लड़ा। दोनों सीटों पर जीत दर्ज की। इंदिरा गांधी ने रायबरेली सीट छोड़ दी और मेडक को बरकरार रखा था। 1980 के बाद से गांधी परिवार के वफादार अरुण नेहरू, शीला कौल और कैप्टन सतीश शर्मा ने 2004 तक रायबरेली से जीत हासिल की। इनके बाद सोनिया गांधी यहां से लड़ती रहीं और 2019 तक यहीं से सांसद रहीं। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में सोनिया ने इस सीट को राहुल के जिम्मे सौंपकर यहां से प्रतिधिनित्व करने का मौका दिया, क्योंकि ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और पारिवारिक विरासत रायबरेली, गांधी परिवार के लिए हमेशा से एक मजबूत गढ़ रहा है। यूपी में बीजेपी को कड़ी चुनौती देना चाहते हैं राहुल राहुल गांधी का यह कदम न केवल उनकी व्यक्तिगत सियासी यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है, बल्कि यह भारतीय राजनीति के लिए भी एक बड़ा संदेश है। यूपी, देश का सबसे बड़ा राज्य है और यहां की सियासत का राष्ट्रीय राजनीति पर गहरा प्रभाव है। राहुल गांधी का यूपी में रहकर राजनीति करना बीजेपी के लिए भी एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि यूपी में बीजेपी की स्थिति काफी मजबूत है और इस मजबूती को 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी के जरिए तोड़ने की कोशिश करेगी। वहीं, परिवार और पार्टी के वरिष्ठ नेता भी चाह रहे थे कि राहुल रायबरेली का प्रतिनिधित्व करें। इसके अलावा रायबरेली की जीत इस लिहाज से भी बड़ी है कि परिवार ने अमेठी की खोई सीट भी हासिल कर ली। माना जा रहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर यहा फैसला लिया गया है। केरल के वायनाड के बजाय उत्तर प्रदेश की रायबरेली लोकसभा सीट से सांसद रहना क्यों चुना, हम इसके पांच कारण आपको बता रहें हैं… 1) यूपी में खोई जमीन पाने की उम्मीद 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में छह सीटें जीतीं. 2019 में उसे सिर्फ रायबरेली सीट पर जीत मिली थी. इंडिया ब्लॉक ने यूपी में 43 सीटें जीतीं, जिनमें से 37 समाजवादी पार्टी ने जीतीं. यह एनडीए के लिए एक बड़ा झटका था, जिसने 2019 में यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से 62 सीटें जीती थीं. 2024 के चुनाव में, एनडीए सिर्फ 36 सीटें जीतने में कामयाब रही, जबकि बीजेपी को 33 सीटें हासिल हुईं. वोट शेयर के मामले में सबसे बड़ी हार मायावती के नेतृत्व वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को हुई. इसका वोट शेयर 19% से घटकर 9% र​ह गया.  ये वोट मुख्य रूप से समाजवादी पार्टी के साथ-साथ कांग्रेस को भी मिले। अगर एसपी ने बीएसपी के वोट शेयर का 6-7% हासिल किया, तो कांग्रेस को 2-3% का फायदा हुआ. कांग्रेस को उम्मीद है कि वह उत्तर प्रदेश में दलित, मुस्लिम और ब्राह्मण वोटों का फायदा उठा सकती है. राहुल गांधी द्वारा वायनाड के बजाय रायबरेली सीट चुनने का पहला कारण यही नजर आता है.  2) रणनीति बदलाव और आक्रामक रुख 2024 लोकसभा चुनाव के नतीजे से उत्साहित … Read more

न्यू जलपाईगुड़ी रेल दुर्घटना के पीछे मानवीय चूक, खराब सिग्नल को जिम्मेदार माना, हादसे से जुड़े दस बड़े अपडेट्स पर एक नजर

 न्यू जलपाईगुड़ी पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग के न्यू जलपाईगुड़ी में सोमवार को बड़ी रेल दुर्घटना हुई. अगरतला से सियालदाह जाने वाली कंचनजंगा एक्सप्रेस को एक मालगाड़ी ने पीछे से टक्कर मार दी थी. हादसे में मालगाड़ी के लोको पायलट और पैसेंजर ट्रेन के गार्ड सहित नौ लोगों की मौत हुई है जबकि 47 लोग घायल हुए हैं. इस घटना के पीछे मानवीय चूक से लेकर खराब सिग्नल को जिम्मेदार माना गया. इस ट्रेन हादसे से जुड़े दस बड़े अपडेट्स पर एक नजर:- 1) कंचनजंगा एक्सप्रेस त्रिपुरा के अगरतला से सियालदाह जा रही थी. रंगापानी स्टेशन क्रॉस करने के बाद सुबह 8.55 बजे पीछे से आ रही एक मालगाड़ी ने ट्रेन को टक्कर मार दी. ट्रेन के भीतर चीख-पुकार मच गई. ये टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दो डिब्बे पटरी से उतर गए जबकि एक डिब्बा मालगाड़ी के इंजन के ऊपर अधर में लटक गया. घटना में नौ लोगों की मौत हो गई जबकि 47 घायल हो गए. 2) इस हादसे की सूचना मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन सहित रेलवे, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ राहत एवं बचाव कार्यों के लिए मौके पर पहुंचा. लेकिन लगातार हो रही बारिश की वजह से बचाव कार्य में भारी दिक्कत हुई. 3) बंगाल के रानीपतरा रेलवे स्टेशन और चत्तर हाट जंक्शन के बीच ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम सोमवार सुबह 5.50 बजे से खराब था. इसी जगह मालगाड़ी ने कंचनजंगा एक्सप्रेस को टक्कर मारी थी. 4) ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम फेल होने की वजह से रंगापानी के स्टेशन मास्टर ने कंचनजंगा एक्सप्रेस को TA-912 नाम का एक लिखित नोट यानी मेमो जारी किया. सुबह 8.20 बजे कंचनजंगा एक्सप्रेस को ये मेमो जारी किया गया था. मालगाड़ी को सुबह 8.35 बजे यही मेमो जारी किया गया था. दोनों ट्रेनों को रंगापानी स्टेशन मास्टर ने TA-912 नोट जारी किया था. 5) यह नोट सिग्नलिंग सिस्टम काम नहीं करने की स्थिति में लोको पायलट को सभी रेड सिग्नल क्रॉस करने की मंजूरी देता है. अगर मालगाड़ी को ‘टीए 912′ नहीं दिया गया था तो चालक को प्रत्येक खराब सिग्नल पर ट्रेन को एक मिनट के लिए रोकना था तथा 10 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से आगे बढ़ना था. इस नोट में कहा गया है कि लोको पायलट को फाटकों पर नजर रखनी होगी. गेट बंद होने पर ही लोको पायलट ट्रेन को ले जा सकता है. अगर गेट खुला है तो उसे पहले ही ट्रेन रोकनी होगी. 5) रेलवे बोर्ड ने इस रेल दुर्घटना के लिए अपने शुरुआती बयान में मालगाड़ी के चालक को जिम्मेदार ठहराया था. रेलवे बोर्ड की चेयरमैन जया वर्मा सिन्हा ने कहा था कि मालगाड़ी के चालक ने सिग्नल की अनदेखी की थी, जिस वजह से ये दुर्घटना हुई थी. 6) लोको पायलट संगठन ने रेलवे के इस बयान पर सवाल उठाया है कि चालक ने रेल सिग्नल का उल्लंघन किया. भारतीय रेलवे लोको रनिंगमैन संगठन (आईआरएलआरओ) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय पांधी ने कहा कि लोको पायलट की मौत हो जाने और सीआरएस जांच लंबित होने के बाद लोको पायलट को ही जिम्मेदार घोषित करना आपत्तिजनक है. 7) इस हादसे में नौ लोगों की मौत हुई है, जिनमें से अभी तक चार की पहचान नहीं हो सकी है. वही सभी घायलों के नामों की लिस्ट भी जारी कर दी गई है. 8) रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कंचनजंगा एक्सप्रेस हादसे के पीड़ितों के लिए घोषित राहत राशि बढ़ाने का ऐलान किया था. इसके तहत मृतकों के परिजनों को दस लाख रुपये की राहत राशि, गंभीर रूप से घायलों को ढाई लाख जबकि मामूली रूप से घायल हुए लोगों को पचास हजार रुपये की राहत राशि दी जाएगी. 9) कंचनजंगा ट्रेन हादसे के बाद बड़े पैमाने पर ट्रेनों के टाइमटेबल में बदलाव किया गया था. हादसे के बाद प्रभावित रूट पर 19 ट्रेनों को डायवर्ट या रद्द कर दिया गया था.   10) हादसे के बाद से ट्रैक को दुरुस्त करने का काम किया जा रहा है. अब ट्रैक के सही करने के लिए स्लीपर बिछाने का काम किया जा रहा है. ट्रैक का काम पूरा होने के बाद ओएचई वायर का काम शुरू किया जाएगा.  

बजट से पहले 77000 पार शेयर बाजार… इस 5 शेयरों में तूफानी तेजी

मुंबई भारतीय शेयर बाजार आज यानी 18 जून को खुलते ही नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है. मजबूत वैश्विक संकेतों के चलते शेयर बाजार  में चौतरफा खरीदारी देखी जा रही है. जिसके चलते शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स (BSE Sensex) 200 अंकों से अधिक की बढ़त के साथ 77,327 के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. वहीं,निफ्टी (Nifty50) भी पहली बार 23,500 के स्तर को पार कर 23,574 के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया. सुबह 9:43 बजे सेंसक्स 280.77 अंक(0.36%) की तेजी के साथ 77,273.55 के लेवल पर और निफ्टी 86.05 अंक (0.37%)की बढ़त के साथ 23,551.65 के लेवल पर कारोबार कर रहा था. निफ्टी के टॉप गेनर्स शेयरों में अदाणी एंटरप्राइजेज,अदाणी पोर्ट्स, एमएंडएम, विप्रो, और ओएनजीसी शामिल रहे, जबकि मारुति सुजुकी, टीसीएस, डिविस लैब्स, डॉ रेड्डीज लैब्स और एचडीएफसी लाइफ टॉप लूजर्स रहे. सेक्टोरल आधार पर बात करें तो ज्यादातर सेक्टरल इंडेक्स हरे निशान में खुले हैं. निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी मिडस्मॉल हेल्थकेयर को छोड़कर आईटी, पीएसयू, ऑटो, एफएमसीजी,सहित बाकी सभी सेक्टरल इंडेक्स आज बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं. नए हाई लेवल पर पहुंचा सेंसेक्स-निफ्टी बीते सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 76,992.77 के लेवल पर क्लोज हुआ था. वहीं मंगलवार को इसने 77,235 के स्तर पर ओपन होकर कारोबार शुरू किया और कुछ ही मिनटों में 77,326.80 का हाई लेवल छू लिया. सेंसेक्स की तरह ही NSE Nifty भी रॉकेट की तरह भागा और 100 अंक से ज्यादा उछलकर 23,573.85 का नया ऑल टाइम हाई लेवल छू लिया. इससे पहले शुक्रवार को ये एनएसई इंडेक्स 23,465 के लेवल पर क्लोज हुआ था. हालांकि, ऑल टाइम हाई लेवल छूने के बाद इसकी रफ्तार मामूली धीमी जरूर पड़ी, लेकिन फिर भी सुबह 9.50 बजे तक सेंसेक्स 321 अंक या 0.42 फीसदी की उछाल के साथ 77,312.90 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था. वहीं इस दौरान BSE के 30 में से 25 शेयर हरे निशान पर थे, जबकि पांच शेयरों में गिरावट थी.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज और कल उत्तर प्रदेश और बिहार के दौरे पर रहेंगे

PWD Minister's attempt to cheat by creating fake Facebook ID

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 18-19 जून को उत्तर प्रदेश और बिहार का दौरा करेंगे। इस दौरान वह पीएम किसान की 17वीं किस्त के तहत 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी करेंगे, स्वयं सहायता समूहों की 30,000 से अधिक महिलाओं को कृषि सखियों के रूप में प्रमाण पत्र प्रदान करेंगे और बिहार में नालंदा विश्वविद्यालय परिसर का उद्घाटन करेंगे। पीएमओ के मुताबिक, प्रधानमंत्री 18 जून को शाम लगभग पांच बजे अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पीएम किसान सम्मान सम्मेलन में भाग लेंगे।शाम करीब सात बजे प्रधानमंत्री दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती देखेंगे और रात करीब आठ बजे काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा और दर्शन भी करेंगे।लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद मोदी की वाराणसी की यह पहली यात्रा है। शपथ लेने के बाद, प्रधानमंत्री ने किसान कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए पीएम किसान निधि की 17 वीं किस्त जारी करने के लिए अपनी पहली फाइल पर हस्ताक्षर किए थे। पीएमओ ने कहा कि इस प्रतिबद्धता को जारी रखते हुए, प्रधानमंत्री प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ (पीएम-किसान) के तहत लगभग 9.26 करोड़ लाभार्थी किसानों को 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की 17 वीं किस्त जारी करेंगे। अब तक 11 करोड़ से अधिक पात्र किसान परिवारों को पीएम-किसान के तहत 3.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक का लाभ मिला है। इस दौरान, प्रधानमंत्री कृषि सखियों के रूप में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की 30,000 से अधिक महिलाओं को प्रमाण पत्र भी प्रदान करेंगे। पीएमओ ने कहा कि ‘कृषि सखी कन्वर्जेंस प्रोग्राम’ (केएससीपी) का उद्देश्य कृषि सखियों को प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रदान करके ग्रामीण महिलाओं को कृषि सखी के रूप में सशक्त बनाकर ग्रामीण भारत को बदलना है। यह प्रमाणन पाठ्यक्रम ‘लखपति दीदी’ कार्यक्रम के उद्देश्यों से जुड़ा है। अगले दिन बुधवार को सुबह लगभग 9.45 बजे प्रधानमंत्री नालंदा का दौरा करेंगे। वह सुबह करीब 10.30 बजे बिहार के राजगीर में नालंदा विश्वविद्यालय के परिसर का उद्घाटन करेंगे और एक सभा को भी संबोधित करेंगे। विश्वविद्यालय की कल्पना भारत और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (ईएएस) देशों के बीच संयुक्त सहयोग के रूप में की गई है। उद्घाटन समारोह में 17 देशों के मिशन प्रमुखों सहित कई प्रतिष्ठित लोग भाग लेंगे। परिसर में 40 कक्षाओं के साथ दो शैक्षणिक ब्लॉक हैं जिनकी कुल बैठने की क्षमता लगभग 1900 है। इसमें दो सभागार हैं जिनमें प्रत्येक में 300 सीटों की क्षमता है। इसमें लगभग 550 छात्रों की क्षमता वाला एक छात्र छात्रावास है। इसमें इंटरनेशनल सेंटर, एम्फीथिएटर सहित कई अन्य सुविधाएं भी हैं। पीएमओ ने कहा कि यह परिसर एक ‘नेट जीरो’ ग्रीन कैंपस है। यह सौर संयंत्र, घरेलू और पेयजल उपचार संयंत्र, अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग के लिए जल पुनर्चक्रण संयंत्र, 100 एकड़ जल निकायों और कई अन्य पर्यावरण अनुकूल सुविधाओं से लैस है। विश्वविद्यालय का इतिहास से गहरा संबंध है। लगभग 1600 साल पहले स्थापित मूल नालंदा विश्वविद्यालय को दुनिया के पहले आवासीय विश्वविद्यालयों में से एक माना जाता है। साल 2016 में, नालंदा के खंडहरों को संयुक्त राष्ट्र विरासत स्थल के रूप में घोषित किया गया था। तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद मंगलवार को वाराणसी आएंगे नरेन्द्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्‍द्र मोदी मंगलवार को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी आ रहे हैं जहां वह विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। भाजपा के एक पदाधिकारी ने बताया कि मोदी 18 जून को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में किसान सम्मेलन को संबोधित करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री देश के 9.60 करोड़ किसानों के खाते में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 17 वीं क़िस्त के तहत 20 हजार करोड़ से ज्यादा की राशि अंतरित करेंगे। भाजपा की जिला इकाई के मीडिया प्रभारी अरविंद मिश्रा ने बताया कि नरेन्द्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अपने क्षेत्र के मतदाताओं का आभार जताने मंगलवार को काशी आ रहे हैं। मिश्रा ने बताया कि प्रधानमंत्री मंगलवार की शाम को बाबतपुर हवाई अड्डा पहुंचेंगे जहां से वह हेलीकॉप्टर से मिर्जामुराद के मेंहदीगंज में किसान संवाद कार्यक्रम स्थल पहुंचेंगे। वहां किसानों को संबोधित करने के साथ ही वह देश के 9.60 करोड़ किसानों के खाते में डीबीटी के तहत 20 हजार करोड़ से ज्यादा की ‘पीएम किसान सम्मान निधि योजना’ की 17वीं किस्त जारी करेंगे। उन्होंने बताया कि मोदी कृषि सखियों के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त स्वयं सहायता समूह के 30 हजार से ज्‍यादा सदस्यों को सर्टिफिकेट देंगे और काशी से ‘डिजिटल किसान क्रेडिट कार्ड’ (केकेसी) की शुरूआत करेंगे। प्रधानमंत्री ना केवल किसानों से संवाद करेंगे बल्कि उनके उगाए उत्‍पादों को देखने स्टॉल पर जाएंगे और 21 प्रगतिशील किसानों से मुलाकात भी करेंगे। मिश्रा ने बताया कि किसान सम्मेलन के बाद प्रधानमंत्री मोदी काल भैरव और काशी विश्वनाथ मंदिर एवं गंगा घाट जाएंगे। प्रधानमंत्री के काशी दौरे के दौरान काशी की जनता और भाजपा के नेता और कार्यकर्ता रास्‍ते में जगह-जगह ढोल नगाड़ों और गुलाब की पंखुड़ियों से प्रधानमंत्री का भव्‍य स्‍वागत करेंगे। हाल में संपन्‍न हुए लोकसभा चुनावों में मोदी ने वाराणसी संसदीय सीट से हैट्रिक लगाते हुए तीसरी बार जीत हासिल की है।    

टीम के हेड कोच के रूप में गौतम गंभीर की नियुक्ति पक्की, BCCI ने मानी सभी शर्तें

नई दिल्ली  भारतीय मेंस क्रिकेट टीम के हेड कोच के रूप में पूर्व सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर की नियुक्ति लगभग पक्की हो गई है। वर्तमान कोच राहुल द्रविड़ का अनुबंध मौजूदा टी-20 विश्व कप के बाद खत्म हो जाएगा। ऐसे में पूरी संभावना है कि जून के आखिरी हफ्ते में बीसीसीआई गंभीर की नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा कर देगा। मीडिया सूत्रों की माने तो गौतम गंभीर अपनी शर्तों पर हेड कोच बनने के लिए तैयार हुए हैं। उन्होंने बीसीसीआई के सामने कुछ डिमांड रखी, जिसे बोर्ड ने स्वीकार किया उसके बाद ही 2007 और 2011 वर्ल्ड कप चैंपियन प्लेयर ने हामी भरी। गौतम गंभीर की 5 शर्त     टीम इंडिया पर चाहिए पूरा कंट्रोल     सपोर्ट कोचिंग स्टाफ चुनने की आजादी     CT25 सीनियर प्लेयर्स का आखिरी मौका     टेस्ट की टीम इंडिया पूरी तरह अलग     2027 वर्ल्ड कप के लिए रोडमैप तैयार गौतम गंभीर की पांच शर्त गंभीर की एंट्री से इन 4 प्लेयर्स की छुट्टी 42 वर्षीय गौतम गंभीर की देखरेख, मेंटॉरशिप में ही कोलकाता नाइटराइडर्स 10 साल का सूखा खत्म करने में कामयाब रहा था और 2014 के बाद पहली बार और कुल तीसरी बार आईपीएल ट्रॉफी जीती थी। अब जब गौतम गंभीर टीम इंडिया के हेड कोच बनने जा रहे हैं तो इतना तय है कि टीम में बड़े बदलाव होंगे। आक्रामक रवैये वाले दिल्ली के इस पूर्व खिलाड़ी के आने के बाद इन चार खिलाड़ियों की छुट्टी तय है। विराट कोहली- तीनों फॉर्मट में रनों का अंबार लगा चुके विराट कोहली भारत के सर्वकालिक महान खिलाड़ियों में शुमार हैं। 2008 में अपने इंटरनेशनल करियर की शुरुआत करने वाले विराट ने भारत को कई मैच जिताए हैं। गौतम गंभीर का मानना है कि अब विराट को सिर्फ टेस्ट और वनडे फॉर्मेट पर ही फोकस करना चाहिए। टी-20 में नए खिलाड़ियों को मौका मिलने की जरूरत है। रोहित शर्मा- मौजूदा भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने भारत के लिए 2007 में डेब्यू किया था। विराट की कप्तानी छोड़ने के बाद उन्हें कैप्टन बनाया गया। फिलहाल वह तीनों फॉर्मेट में भारत की अगुवाई कर रहे हैं। वैसे भी बीते कई साल से टी-20 फॉर्मेट में हिटमैन का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा है। ऐसे में आप देखेंगे कि गंभीर के आने से शायद रोहित शर्मा अब तीनों फॉर्मेट नहीं खेल पाए। रविंद्र जडेजा- बीते कई साल से रविंद्र जडेजा वाइट बॉल फॉर्मेट में भारतीय टीम में बिना प्रदर्शन के ही सिलेक्ट होते जा रहे हैं। 2022 टी-20 विश्व कप, 2023 वनडे विश्व कप, मौजूदा टी-20 विश्व कप पिछले हर बड़े टूर्नामेंट में जड्डू ने निराश किया है। बाएं हाथ का यह स्पिन ऑलराउंडर सिर्फ टेस्ट ही खेलने के लायक है और वो भी स्वदेशी पिच पर। ऐसे में गौतम गंभीर के कार्यकाल में फ्लॉप हो रहे जडेजा का करियर खत्म हो सकता है। मोहम्मद शमी- आखिरी नाम अमरोहा एक्सप्रेस मोहम्मद शमी का है। भारतीय तेज गेंदबाज के लिए गौतम गंभीर के पास स्पष्ट प्लान है। गंभीर शमी को टेस्ट में लगातार खिलाना चाहते हैं। साथ ही 2027 वनडे विश्व कप भी उनके रडार में है। ऐसे में अब वर्कलोड मैनेजमेंट के चलते शायद मोहम्मद शमी आपको अब टी-20 टीम से बाहर होते दिख सकते हैं।

भारतीय बैंकों के मुनाफे में पिछले 10 वर्षों में 4 गुना का इजाफा हुआ

 नई दिल्ली भारतीय बैंकों के मुनाफे में पिछले 10 वर्षों में 4 गुना का इजाफा हुआ है। इसके साथ ही खराब लोन की संख्या में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। ये जानकारी इन्वेस्टमेंट ग्रुप सीएलएसए की रिपोर्ट में दी गई है।रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले एक दशक में भारतीय बैंक की बैलेंस शीट काफी मजबूत हुई है और मुनाफा चार गुना तक बढ़ गया है। रिपोर्ट में कहा गया कि नॉन-परफॉर्मिंग लोन (नेट एनपीएल), जो पहले भारतीय बैंकिंग सेक्टर पर एक बड़ा बोझ था, यह बीते एक दशक में काफी नीचे चला गया है। इससे एसेट्स क्वालिटी में काफी सुधार हुआ है और बैंकों की कैपिटल पॉजिशन भी काफी अच्छी हो गई है। डिपॉजिट वृद्धि दर लोन वृद्धि दर जितनी ही होनी चाहिए। यह वित्त वर्ष 2012-22 के दौरान पिछले दो वर्षों में यह औसतन 10 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत हो गई है। रिपोर्ट में कहा गया कि बीते पांच वर्षों में सरकारी बैंकों ने निजी बैंकों की अपेक्षा काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। हालांकि, पिछले एक दशक में चालू खाते के मामलों में निजी बैंकों ने सरकारी बैंकों को पछाड़ दिया है और गैर-जमा उधार में भी कमी आई है। सीएलएसए रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछले दो वर्षों में सभी सब-सेगमेंट और संभवतः कॉरपोरेट बॉन्ड प्रतिस्थापन से कुछ बदलावों के कारण सेक्टर में लोन वृद्धि दर अपने दशकीय औसत 10 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत हो गई है। लंबे समय से लोन वृद्धि दर और डिपॉजिट वृद्धि दर में तालमेल बना रहा है। पिछले 5 से 7 वर्षों में कॉरपोरेट क्रेडिट की क्वालिटी में सुधार हुआ है। बैंकिंग सेक्टर को ₹3 लाख करोड़ का मुनाफा वित्त वर्ष 2023-24 में देश के बैंकिंग क्षेत्र ने ₹3 लाख करोड़ से अधिक का मुनाफा कमाया है। इस दौरान निजी और सरकारी, दोनों ही बैंकों का मुनाफा बढ़ा है। वित्त वर्ष 2023 में देश के बैंकिंग क्षेत्र के मुनाफे 39% की वृद्धि देखी गई है। पीएम मोदी ने बैंकिंग क्षेत्र की इस उपलब्धि को सराहा है।  एक रिपोर्ट के अनुसार, देश के सरकारी क्षेत्र के बैंक ने वित्त वर्ष 2023-24 में ₹1.4 लाख करोड़ का मुनाफा कमा चुके है। यह वित्त वर्ष 2022-23 से 34% अधिक है। इन बैंकों ने 2022-23 के दौरान ₹1.04 लाख करोड़ का मुनाफ़ा कमाया था। ऐसा दूसरी बार हो रहा है, जब सभी सरकारी बैंक का मुनाफा ₹1 लाख करोड़ के पार गया हो। सरकारी बैकों के अलावा निजी क्षेत्र के बैंकों को भी खूब मुनाफा हुआ है। रिपोर्ट बताती है कि 2023-24 में देश के निजी बैंकों को ₹1.7 लाख करोड़ का मुनाफा हुआ। इनके मुनाफे में सरकारी बैंकों से अधिक वृद्धि हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में इनका मुनाफा ₹1.2 लाख करोड़ था। मुनाफे की इन खबरों के बीच सबसे बड़ी उपलब्धि सरकारी बैकों के हिस्से में ही है। सरकारी बैंकों ने भारी घाटे से ₹1 लाख करोड़ से अधिक के मुनाफे का सफ़र तय किया है। पिछले समय से तुलना की जाए तो सरकारी बैंक लगातार घाटे में जा रहे थे और उन्हें अपना कामकाज चलाने के लिए हर साल केंद्र सकरार मदद करती थी। अब यह मामला पूरी तरह बदल चुका है। सरकारी बैकों ने वित्त वर्ष 2017-18 में ₹85,000 करोड़ से अधिक का घाटा झेला था। इसके बाद शुरू हुई प्रक्रिया के कारण बैकों को अब मुनाफा होने लगा है। मोदी सरकार में बैंकों के बुरे कर्जों को निपटाने, नए कर्जे सोच समझ कर देने और बैंकों के एकीकरण के कारण यह मुनाफा हुआ है। दूसरी तरफ निजी क्षेत्र के बैंक भी आगे बढ़ रहे हैं। देश में बढती आर्थिक गतिविधि और लगातार बढ़ते उद्योग धन्धों के कारण निजी क्षेत्र के बैंकों का कारोबार बढ़ रहा है। ऐसे में उनके कर्ज पोर्टफोलियो भी बढ़ रहे हैं, बिना सरकारी दबाव के कारण वह अब कर्जदारों की जाँच करके लोन दे रहे हैं। इससे उनका भी लाभ बढ़ा है।

उम्र कैद की सजा, 10 करोड़ का जुर्माना, बुलडोजर एक्शन… योगी ला रहे पेपर लीक रोकने का तगड़ा कानून

लखनऊ उत्तर प्रदेश में पेपर लीक मामलों ने लगातार सरकार की परेशानी बढ़ाई है। युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ और इससे उनमें पनपते आक्रोश को देखते हुए सरकार का ध्यान इस गंभीर चिंता पर गया है। इस समस्या को दूर करने के लिए योगी सरकार अब कड़े कानून लाने जा रही है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर युवाओं से कहा है कि यूपी में होने वाली भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक रोकने के लिए जल्द ही नया कानून लाने जा रहे हैं। किसी भी कीमत पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ स्वीकार नहीं करेंगे। दरअसल, यूपी में लोकसभा चुनाव से पहले हुए सिपाही भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने का मामला खासा गरमाया था। अब सीएम योगी ने कहा है कि युवाओं के खिलाफ काम करने वाले नकल माफियाओं पर सख्त कार्रवाई होगी। अगर वे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करेंगे तो हम भी उनके साथ कोई नरमी नहीं बरतेंगे। गृह और न्याय एवं कानून विभाग को भी संभालने वाले सीएम योगी ने साफ कर दिया है कि नकल रोधी कानून का प्रारूप तैयार हो रहा है। यूपी पुलिस कॉन्स्टेबल परीक्षा में करीब 40 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे। पेपर लीक केस ने विपक्ष को एक मौका दे दिया। सरकार को घेर लिया गया। भाजपा की लोकसभा चुनाव में यूपी में करारी हार के बाद समीक्षा बैठक में युवाओं की नाराजगी का मुद्दा सामने आया है। पेपर लीक से होने वाले प्रभाव का भी चुनावी रिजल्ट पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है। लगातार पेपर लीक मामलों से युवाओं में नाराजगी बढ़ी थी। ऐसे में सीएम योगी आदित्यनाथ ने पेपर लीक मामलों में नया और सख्त कानून बनाने का ऐलान कर युवाओं के मन में भरोसा बढ़ाने की कोशिश शुरू कर दी है। इसी क्रम में नकल रोधी कानून को अब अमली जामा पहनाए जाने की तैयारी है। कानून के मसौदे में क्या-क्या? सीएम योगी आदित्यनाथ की ओर से घोषणा के बाद माना जा रहा था कि न्याय एवं विधि विभाग और गृह विभाग मिलकर नकल रोधी कानून का मसौदा तैयार करेंगे। कानून का मसौदा तैयार किए जाने के बाद इसे सीएम योगी आदित्यनाथ के समक्ष रखा जाएगा। अब खबर है कि मसौदा बनकर लगभग तैयार है। सीएम योगी स्वयं इस संबंध में साफ कर चुके हैं। नकल रोधी कानून तैयार करते समय अन्य राज्यों के कानून की भी समीक्षा की गई। उम्मीद की जा रही है कि उत्तर प्रदेश का नकल रोधी कानून अन्य राज्यों से काफी कड़ा होगा। अगर यूपी सरकार राजस्थान मॉडल को अपनाती है तो यूपी में तैयार किए जा रहे कानून में पेपर लीक के आरोपियों को उम्र कैद की सजा और 10 करोड़ रुपये जुर्माना का दंड लागू किया जा सकता है। नकल माफियाओं पर गैंगस्टर जैसे एक्ट लगाए जा सकते हैं। नकल रोधी कानून अगर गैंगस्टर के दायारे में आए तो नकल माफियाओं की संपत्ति पर बुलडोजर भी चल सकता है। आर्थिक नुकसान की भरपाई उनकी संपत्तियों को जब्त कर की जा सकती है। वैसे सीएम योगी आदित्यनाथ ने पेपर लीक को रोकने के लिए तत्काल अधिकारियों को कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। परीक्षा केंद्रों के निर्धारण पर सतर्कता सीएम योगी आदित्यनाथ ने नकल रोकने के लिए परीक्षा केंद्रों के निर्धारण पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि चयन परीक्षाओं के लिए राजकीय माध्यमिक स्कूल, डिग्री कॉलेज, विश्वविद्यालय, पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों के परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे। इसके अलावा स्वच्छ रिकॉर्ड वाले वित्तपोषित शैक्षिक संस्थानों में ही केंद्र बनाने का निर्देश दिया गया है। सीएम ने साफ कहा है कि परीक्षा केंद्र वहीं बने, जहां सीसीटीवी की व्यवस्था हो। परीक्षा केंद्र शहरी क्षेत्र में बनाए जाएं। परीक्षा केंद्रों में महिलाओं और दिव्यांगों की सहूलियत का विशेष ध्यान रखा जाए। ऐडेड कॉलेज में केंद्र बनाए जाने की स्थिति में साफ किया गया है कि इनके प्रबंधक परीक्षा व्यवस्था में कहीं भी शामिल न हों। कमजोर है नकल रोधी कानून यूपी में अभी लागू नकल रोधी कानून काफी कमजोर है। इसके तहत आरोपी को आसानी से जमानत मिल जाती है। यूपी में वर्ष 1998 में बने नकल रोधी कानून के तहत कार्रवाई होती है। इसमें 1 से 7 साल की सजा और 10 हजार रुपये जुर्माने तक का प्रावधान है। दरअसल, यूपी में पिछले 7 साल में हुई 8 भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं। सबसे पहले योगी सरकार में पेपर लीक का मामला 2017 में आया था। यूपी एसआई भर्ती परीक्षा 25- 26 जुलाई 2017 को हुई थी। 3307 पदों के लिए निकली वैकेंसी में करीब 1 लाख 20 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे। इस परीक्षा का पेपर लीक हो गया था। वहीं, 2018 में यूपीपीसीएल की ओर हुई जेई भर्ती परीक्षा, नलकूप ऑपरेटर भर्ती परीक्षा और आरओ- एआरओ भर्ती परीक्षा का भी पेपर लीक हुआ। वहीं, यूपीएसएसएससी की जुलाई 2018 में हुई 14 विभागों की वैकेंसी का पेपर भी लीक हो गया था। इसमें 67 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे। वहीं, 17-18 फरवरी 2024 को हुई यूपी पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा का भी पेपर लीक हुआ। 60,244 पदों के लिए आई वैकेंसी में 40 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे। इनके अलावा यूपीएसएसएससी पीईटी और यूपीटेट के पेपर भी लीक हुए। इन पेपर लीक के कारण सरकार की छवि पर प्रभाव पड़ा है। केंद्र भी बना रहा है कानून केंद्र सरकार की ओर से पेपर लीक और नकल पर लगाम लगाने के लिए 5 फरवरी को लोकसभा में एक विधेयक पेश किया गया। इसमें परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वालों को कम से कम 3 साल और अधिकतम 10 साल की जेल की सजा और एक करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान। है यह बिल लोकसभा से पास हो चुका है। राज्यसभा में इसे पेश किए जाने की तैयारी है। इसके बाद राष्ट्रपति के पास इसे भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून का रूप लेगा। भर्ती प्रक्रिया बनाई जाएगी पारदर्शी सीएम योगी ने साफ किया है कि भर्ती प्रक्रिया में व्यापक बदलाव करते हुए पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाएगा। भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की आशंका हर स्तर पर खत्म की जाएगी। यह युवाओं के भविष्य का मामला है। … Read more

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की नई थ्योरी सामने आई- इसमें कहा गया है कि संभवतः एलियन हमारे बीच रह रहे हैं

वॉशिंगटन  हमारा ब्रह्मांड बेहद विशाल है। इंसानों के मन में हमेशा से सवाल रहा है कि क्या सिर्फ पृथ्वी पर ही जीवन है, या दूसरे ग्रहों पर भी जीवन है। इसे लेकर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन ने हम सभी को हैरान कर दिया है। इसमें कहा गया है कि संभव है कि एलियन मनुष्यों के साथ गुप्त रूप से रह रहे हैं। सुनने में ये किसी साइंस-फिक्शन फिल्म जैसा लग सकता है। शोधकर्ताओं ने साफ कहा है कि उनका पेपर एक निश्चित दावे की जगह एक विचार प्रयोग के रूप में है। दशकों से एलियन की खोज में वैज्ञानिक लगे हुए हैं। लेकिन अभी भी इसका सही जवाब नहीं मिल पाया है। पेपर के मूल में अनुमान लगाया गया है कि यूएफओ का देखा जाना, उन एलियन से जुड़ा हो सकता है जिन्होंने हमारे ग्रह पर खुद को छिपाने की कला में महारत हासिल कर ली है। वह हो सकता है हमारे बीच में घूम रहे हों। शोधकर्ताओं के मुताबिक ये जीव आपस में घुलने मिलने के लिए इंसानों का भेष धारण कर सकते हैं। हो सकता है कि ये पृथ्वी के भविष्य से आए हों या बुद्धिमान डायनासोर के वंशज हों। शोध में इस बात की संभावना जताई गई है कि एलियन अंडर ग्राउंड या फिर हमारे चंद्रमा पर रहे होंगे। दोस्तों से मिलने आते हैं एलियन! हार्वर्ड विश्वविद्यालय के मानव उत्कर्ष प्रोग्राम ने आगे कहा कि यूएफओ विदेशी अंतरिक्ष यान हो सकते हैं जो पृथ्वी पर रहने वाले अपने मित्रों से मिलने आते हैं। इस स्टडी का उद्देश्य यूएफओ देखे जाने से जुड़ा एक वैकल्पिक अपरंपरागत स्पष्टीकरण प्रदान करना था। इसने ऐसी थ्योरी बताई, जो संभवतः इनसे जुड़ी हो सकती है। शोधकर्ताओं ने पेपर में क्रिप्टोटेरेस्ट्रियल शब्द का इस्तेमाल किया है। इसका मतलब ऐसे काल्पनिक जीवों से होता है, जो इंसानों के बीच रहते हैं, लेकिन उनका किसी को पता नहीं होता। एलियन से जुड़ी चार थ्योरी आई सामने     पहले सिद्धांत का मानना है कि अत्यधिक उन्नत प्राचीन मानव सभ्यता, जो बाढ़ जैसी विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं से काफी हद तक नष्ट हो गई थी वह अभी भी किसी रूप में मौजूद हो सकती है।     दूसरे विचार के हिसाब से एक गैर मानव समाज संभवतः जमीन के नीचे रहता है और संभवतः स्थलीय प्राणियों से विकसित हुआ है। ये प्राणी बुद्धिमान डायनासोर या वानरों जैसे दिखने वाले होमिनिड के वंशज हो सकते हैं।     तीसरे विचार के मुताबिक एलियन चंद्रमा या किसी और ग्रह पर विकसित हुए और वहां से धरती पर आ गए। ये प्राणी मानव समाज में रहते हुए लोगों की नजरों से छिपे रह सकते हैं।     चौथी थ्योरी के मुताबिक ये प्राणी पृथ्वी पर रहने वाले स्वर्गदूतों से मिलते जुलते हैं, जिनका मनुष्यों से तकनीक की जगह जादुई संबंध है। जैसे परियों या बौनों की कहानियों में सुना होगा।

यूपी में 90 फीसदी हैं पसमांदा मुस्लिम, BJP की योजनाओं के बावजूद नहीं दिया साथ

लखनऊ लोकसभा में उत्तर प्रदेश की 33 सीटों पर सिमटने ने एनडीए की जीत का स्वाद फीका कर दिया। पीएम नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठ तो गए लेकिन अकेले दम पर बहुमत हासिल करने के भाजपा का सपना अधूरा रह गया। अब पार्टी की तरफ से समीक्षा और पड़ताल शुरू कर दी गई है। जो एक वर्ग भाजपा के साथ नहीं आया, उसमें पसमांदा मुसलमान प्रमुख हैं। बीते कुछ साल से भाजपा मिशन मोड पर इस समुदाय को आकर्षित करने के लिए काम कर रही थी लेकिन एक प्रतिशत तबके ने ही समर्थन किया। आखिर पसमांदा मुस्लिमों ने साथ क्यों नहीं दिया, यह बड़ा सवाल है। पसमांदा का मतलब भी समझिए पसमांदा एक फारसी शब्द है, जो पस और मांदा से मिलकर बना है। पस का अर्थ- पीछे होता है और मांदा का अर्थ- छूट जाना होता है। जिसके मायने हैं- काफ़िले या जत्थे का वह व्यक्ति जो यात्रा करते समय पीछे रह गया हो। ऐसे में मुस्लिमों में सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े तबके को पसमांदा कहा जाता है। उत्तर प्रदेश में पसमांदा मुस्लिमों की तादाद 80 से 90 प्रतिशत तक मानी जाती है। बाकी के उच्च वर्ग के मुसलमान हैं। कौन होते हैं पसमांदा मुस्लिम? इसमें मोटे तौर पर ओबीसी और पिछड़ी वंचित जातियां शामिल होती हैं। धोबी, अंसारी, बुनकर, नाई, रंगरेज, धुनिया, फकीर, गुजर, राइन आदि-आदि। मुस्लिमों के अजलाफ और अरज़ाल वर्ग का समुदाय इसमें आता है। भाजपा की तरफ से इन पसमांदा लाभार्थियों तक पहुंच बनाने का प्रयास चल रहा है। भाजपा ने यूपी के पिछले विधानसभा चुनाव में इस रणनीति को अपनाने की कोशिश की। इसके बाद स्थानीय निकाय और अब लोकसभा में भी दांव चला गया। BJP का फोकस पसमांदा जुलाई 2022 में हैदराबाद में हुई भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पसमांदा मुसलमानों में भी पैठ बनाने की कोशिश पर जोर देने पर बात हुई। खुद पीएम मोदी ने कई बार मंच से मुस्लिमों के इस वर्ग को लेकर बयान दिया। उन्होंने इस बार 22 अप्रैल को अलीगढ़ में संबोधन करते हुए जोर देकर कहा कि सपा और कांग्रेस जैसे दलों ने मुस्लिमों के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक उन्नति के लिए कुछ नहीं किया। पूर्वांचल का पसमांदा गढ़ प्रधानमंत्री आवास योजना और राशन कार्ड सहित तमाम योजनाओं का फायदा लाखों की तादाद में पसमांदा मुस्लिमों को मिला। बुनकर समुदाय के लिए भी विशेष लाभकारी योजनाएं लाई गईं। लेकिन बीजेपी को इसका फायदा नहीं मिला। पूर्वांचल में गाजीपुर, मऊ, आजमगढ़ के इलाके पसमांदा मुस्लिमों के गढ़ माने जाते हैं। लेकिन यहां एकतरफा वोट सपा-कांग्रेस गठबंधन को पड़े। घोसी लोकसभा में सबसे अधिक पसमांदा मुस्लिम हैं लेकिन यहां सपा प्रत्याशी राजीव राय ने जीत हासिल की। पश्चिम में हल्का-फुल्का समर्थन पश्चिमी यूपी में पसमांदा मुसलमान कुछ संख्या में भाजपा की तरफ जरूर आए लेकिन कैराना, मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर में यह संख्या नाकाफी रही। कई जगहों पर तो समुदाय के कुल वोट का एक फीसदी भी भाजपा को नहीं मिला। बूथ लेवल पर हुए विश्लेषण में पसमांदा मुस्लिम बहुल इलाकों में 10 फीसदी वोट हासिल हुए। इससे अधिक वोट तो उच्च वर्ग के मुस्लिमों, जैसे- मुस्लिम राजपूत, जाट, त्यागी, अशराफ, पठान और तुर्क समुदाय से हासिल हुए। मंत्री और MLC भी बनाए गए 2022 के विधानसभा चुनाव में 8 प्रतिशत पसमांदा मुस्लिमों ने भाजपा का साथ दिया था। इसके बाद योगी सरकार में दानिश आजाद अंसारी को मंत्री बनाकर भगवा दल ने एक नया दांव चला। इसके साथ ही अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर तारिक मंसूर को विधान परिषद भेजा। दोनों ही पसमांदा समुदाय से आते हैं। भाजपा यूपी अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने कहा कि तमाम प्रयास और योजनाओं के बावजूद आखिर क्यों साथ नहीं मिला, इसके कारण तलाशे जा रहे हैं।  

मध्य प्रदेश में देरी से आएगा मॉनसून, IMD ने नई तारीख बताकर बढ़ा दी टेंशन

भोपाल समय से पहले ही दस्तक देने वाला मॉनसून अब धीमा पड़ता नजर आ रहा है। भीषण गर्मी से जूझ रहे मध्य प्रदेश के इसके इंतजार में कुछ और दिन बिताने होंगे। वहीं, छिटपुट बारिश ने राज्य के कई हिस्सों में उमस बढ़ा दी है। कहा जा रहा है कि अरब सागर और कमजोर पड़ने के कारण मॉनसून धीमा हो गया है। हालांकि, राजधानी भोपाल में बारिश से कुछ राहत मिलने के आसार हैं। आमतौर पर मध्य प्रदेश में मॉनसून की दस्तक 15 जून के आसपास हो जाती है, लेकिन राज्य में अब तक इसकी एंट्री नहीं हुई है। कहा जा रहा है कि मॉनसून फिलहाल गुजरात में अटका हुआ है और इसकी वजह अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में सिस्टम का कमजोर पड़ना है। अब संभावनाएं जताई जा रही हैं की मॉनसून राज्य में 19-20 जून को आ सकता है। राज्य में बालाघाट और डिंडोरी के जरिए मॉनसून की दस्तक हो सकती है। फ्री प्रेस जर्नल के अनुसार, भोपाल में मौसम विभाग में वरिष्ठ वैज्ञानिक दिव्या ई सुरेंद्रन ने कहा, ‘अभी के लिए राज्य में प्री मॉनसून गतिविधियां ही चलती रहेंगी। भोपाल, इंदौर और जबलपुर मंडलों में सोमवार को बारिश के आसार हैं। जबकि, निवाड़ी और छतरपुर जैसे जिले लू का सामना करते रहेंगे।’ कहां पहुंचा मॉनसून IMD ने बताया है कि महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा, तटीय आंध्र प्रदेश और उत्तर पश्चिम बंगाल की खाड़ी, बिहार के कुछ और हिस्सों में मॉनसून के बढ़ने के लिए स्थिति अनुकूल नजर आ रही हैं। विभाग ने सोमवार को बताया है कि अगले 5 दिनों के दौरान मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़ में छिटपुट या मध्यम बारिश हो सकती है। इस दौरान तेज हवाएं भी चल सकती हैं। आज इन जिलों में होगी बारिश मौसम विभाग के अनुसार आज झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, सीधी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला और बालाघाट, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, आगर मालवा, राजगढ़, शाजापुर, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, बैतूल, नर्मदापुरम, रायसेन, विदिशा, सीहोर, कटनी, उमरिया, शहडोल, डिंडोरी, अनूपपुर में हवा आंधी के साथ बारिश की संभावना है.  कुछ जिलों में चढ़ा पारा  इधर हवा-आंधी बारिश के बावजूद प्रदेश के कई जिलों में तापमान भी अपने तीखे तेवर दिखा रहा है, यहां पारा 40 डिग्री के पार चल रहा है. शनिवार को प्रदेश में खजुराहो सबसे गर्म रहा, यहां तापमान 45.2 डिग्री दर्ज किया गया. जबकि बिजावर, छतरपुर में 45.0, सीधी में 44.4, रीवा में 44.2, सिंगरौली में 44.1, सतना में 44.1, नौगांव में 44.0, शहडोल में 43.6, दमोह में 43.5 और ग्वालियर में 43.3 डिग्री दर्ज किया गया है.

छत्तीसगढ़-दुर्ग में परिणय सूत्र में बंधे 250 दिव्यांग जोड़ों को सीएम विष्णुदेव साय ने दिया आशीर्वाद

Be careful, dengue can become fatal…Most larvae found in utensils

दुर्ग. प्रदेश के सीएम विष्णुदेव साय आज अखिल भारतीय निर्धन दिव्यांग सामूहिक आदर्श विवाह समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। दुर्ग के बाफना टोल प्लाजा के पास स्थित अग्रसेन भवन में समाजसेवी संस्था आस्था बहुउद्देशीय कल्याण संस्थान द्वारा आयोजित इस सामूहिक आदर्श विवाह में सभी समाज के 250 दिव्यांग जोड़े परिणय सूत्र में बंधे। इस दिव्यांग विवाह समारोह में छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड के अलावा अन्य राज्यों के भी दिव्यांगजन शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने परिणय सूत्र में बंधे दिव्यांग नव दंपत्तियों को उनके सुखमय दाम्पत्य जीवन के लिए आशीर्वाद दिया। इस मौके पर दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल, विधायक  ललित चंद्राकर और नगर निगम दुर्ग के महापौर धीरज बाकलीवाल समेत अन्य जनप्रतिनिधि शामिल हुए। सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि आस्था बहुउद्देशीय कल्याण संस्थान का यह आयोजन पुण्य का कार्य है। संस्था लगातार जनकल्याण का कार्य कर रही है। चाहे वह लावारिश लाशों को सद्गति देने का कार्य हो, रक्तदान कार्य हो या दिव्यांगजनों का वैवाहिक कार्यक्रम हो। संस्था से जुड़े सभी पदाधिकारी पुण्य के कार्य में सहभागी हैं। उन्होंने आदर्श विवाह में सम्मिलित होने पहुंचे हुए नवदम्पत्तियों के परिजनों को भी बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर सीएम ने अपने करकमलों से आस्था बहुउद्देशीय कल्याण संस्थान के विकास में उल्लेखनीय योगदान करने वालों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। आस्था बहुउद्देशीय कल्याण संस्थान के संरक्षक दुर्ग सांसद विजय बघेल ने कहा कि यह संस्था विगत 19 वर्ष से दिव्यांगजनों आदर्श विवाह करते आ रही हैं। अब तक 1890 दिव्यांग जोड़े का विवाह संपन्न करायी जा चुकी है। आज यहां पर लगभग 250 से अधिक जोड़ों का विवाह कार्यक्रम संपन्न हुआ है। उन्होंने बताया कि यह संस्था अब तक 1789 लावारिश लाशों को सद्गति प्रदान कर चुकी हैं। इस सामूहिक विवाह में राजनांदगांव, कोरबा, जशपुर, सूरजपुर, सरगुजा जिलों से आए युवक-युवतियों ने संस्था द्वारा कराए जा रहे आदर्श सामूहिक विवाह को सराहा। सामूहिक विवाह में युवतियों को संस्था द्वारा गृहस्थी का सामान थाली, चम्मच, गिलास, पानी टंकी, लोटा, कटोरी उपहार स्वरूप प्रदान किया गया। साथ ही मंगलसूत्र, पायल, बिछिया, साड़ी आदि उपहार के रूप भेट किए गए।

प्रदीप मिश्रा और प्रेमानंद महाराज के बीच मतभेद दूर, मंत्री विजयवर्गीय ने फोन पर कराई सुलह

Kerala: Landslide caused devastation, 24 people died

भोपाल  राधारानी पर टिप्पणी को लेकर कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा वृंदावन के संतों के निशाने पर थे। चर्चित संत प्रेमानंद महाराज जी ने इस टिप्पणी के बाद प्रदीप मिश्रा को आक्रोश में बहुत कुछ कहा था। प्रेमानंद महाराज जी ने यहां तक कह दिया था कि तुम किसी काम के नहीं रहोगे। इसके बाद पंडित प्रदीप मिश्रा सफाई दे रहे थे। साथ ही उनसे माफी मांग रहे थे। अब मीडिया में खबरें आ रही हैं कि इस विवाद का पटाक्षेप हो गया है। मध्य प्रदेश सरकार के कद्दावर मंत्री ने प्रेमानंद महाराज जी और कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की सुलह कराई है। प्रदीप मिश्रा और प्रेमानंद महाराज में फोन पर बात मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मध्य प्रदेश के कद्दावर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने तीन दिन पहले ओंकारेश्वर में कथा के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा से बात की थी। दोनों की मुलाकात होटल के कमरे में हुई थी। मुलाकात के दौरान दोनों के बीच राधारानी विवाद पर भी बात हुई थी। इसके बाद कैलाश विजयवर्गीय ने दोनों में सुलह की पहल की। उन्होंने प्रेमानंद महाराज जी से फोन पर प्रदीप मिश्रा से बात कराई। इसके बाद महाराज जी का गुस्सा शांत हुआ है। नर्क जाओगे तुम दरअसल, राधारानी को लेकर वीडियो आने के बाद वृंदावन के संत प्रेमानंद जी महाराज गुस्से से तमतमा गए थे। वह इस टिप्पणी को लेकर तू तड़ाक पर उतर आए थे। साथ ही कह दिया था कि राधा जी के बारे में ऐसी बात करते हो, तुम्हें नर्क में जाने से कोई नहीं बचा पाएगा। साथ ही गुस्से में प्रेमानंद जी महाराज ने कहा था कि तुम्हारा सत्यानाश हो गया। श्रीजी के चरणों में आकर साष्टांग दंडवत माफी मांगो। ये था पूरा विवाद पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा था कि राधा जी बरसाने की नहीं है। वह उनके पिता जी का कचहरी था। वह साल में एक बार कचहरी आती थीं। उनके पति का नाम अनय घोष है। वह रावल गांव की रहने वाली थीं। साथ ही प्रदीप मिश्रा ने कहा था कि वह भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी नहीं है। इसी वीडियो के सामने आने के बाद विवाद की शुरुआथ हुई थी। प्रदीप मिश्रा ने मांगी थी माफी वीडियो सामने आने के बाद प्रदीप मिश्रा का जगह-जगह विरोध होने लगा। साथ ही वृंदावन के संतों में भी उनके खिलाफ नाराजगी बढ़ने लगी। इसके बाद एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में प्रदीप मिश्रा ने प्रेमानंद महाराज जी से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि यह वीडियो 14 साल पुराना है, जिसे तोड़ मरोड़कर परोसा जा रहा है। प्रेमानंद महाराज के तल्ख तेवर के आगे प्रदीप मिश्रा बैकफुट पर थे और लगातार सफाई दे रहे थे। दोनों के बीच हो गई सुलह अब बताया जा रहा है कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की पहल के बाद दोनों संतों में सुलह हो गई है। प्रेमानंद महाराज जी के आक्रोश वाले वीडियो एक्स से हटे हैं। वहीं, प्रदीप मिश्रा ने भी चुप्पी साध ली है। ऐसे में अब मामला ठंडा होने की संभावना है। अब दोनों ही तरफ से कोई प्रतिक्रिया या नया वीडियो सामने नहीं आया है।

छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी की वजह से स्कूल 25 तक बंद: शिक्षा मंत्री

रायपुर. छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी को देखते हुए शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने राज्य के सभी स्कूलों में  गर्मी की छुट्टियां बढ़ा दी है। अब 25 जून तक राज्य के सभी सरकारी और गैर सरकारी स्कूल बंद रहेंगे। 26 जून से खुलेंगे। शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिये हैं। शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में गर्मी और हीटवेव के कारण ये फैसला लिया गया है। प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में गर्मी अपने पीक पर है। ज्यादातर लोग गर्म होते मौसम से परेशान हैं। लू और धूप से आम लोगों को दिक्कत हो रही है। बच्चों को गर्मी में होने वाली परेशानी को देखते हुए ये फैसला लिया गया है। अभिभावकों में भी बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बनी हुई है। अग्रवाल ने बताया कि बड़ी संख्या में अभिभावकों का ग्रीष्मकालीन अवकाश बढ़ाने के निवेदन आ रहे थे, जिसके चलते सरकार ने ग्रीष्मकालीन अवकाश को 26 जून तक बढ़ाने का फैसला लिया है। संबंधित अधिकारियों को जरूरी दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं। बच्चों को गर्मी में होने वाली परेशानी को देखते हुए ये फैसला लिया गया है। अभिभावकों में भी बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बनी हुई है। गौरतलब है कि ग्रीष्मकालीन अवकाश बढ़ाने के बड़ी संख्या में अभिभावकों का निवेदन आ रहे थे, जिसके चलते सरकार ने ग्रीष्मकालीन अवकाश को 26 जून तक बढ़ाने का फैसला लिया गया है। शिक्षा मंत्री के आदेश पर लिया गया फैसला बृजमोहन अग्रवाल ने आगे कहा प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में मानसून नहीं पहुँचने की वजह से गर्मी अपने चरम पर है. कई क्षेत्र में लू और धूप से आम लोगों को दिक्कत हो रही है. बच्चों को गर्मी में होने वाली परेशानी को देखते हुए ये फैसला लिया गया है. अभिभावकों में भी बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बनी हुई है. CM साय ने भी X पर जारी किया पोस्ट मंत्री अग्रवाल ने बताया कि, बड़ी संख्या में अभिभावकों का ग्रीष्मकालीन अवकाश बढ़ाने के निवेदन आ रहे थे. जिसके चलते सरकार ने गर्मी की छुट्टियों को 25 जून तक बढ़ाने का फैसला लिया है. जिसके लिए संबंधित अधिकारियों को जरूरी दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं. इसे लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर लिखा भीषण गर्मी में बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्कूल खोलने की तारीख को 18 जून से एक हफ्ता आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं.  

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