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16 सालों में सबसे कम बचा गेहूं का स्टॉक, ज्यादा दाम पर भी सरकारी खरीद 29% कम

नई दिल्ली गेहूं एक साल में 8% महंगा हुआ है। पिछले 15 दिन में ही कीमतें 7% बढ़ चुकी हैं, जो अगले 15 दिन में 7% और बढ़ सकती हैं। दरअसल, गेहूं के सरकारी भंडारों में हर वक्त तीन महीने का स्टॉक (138 लाख टन) होना चाहिए। मगर इस बार खरीद सत्र शुरू होने से पहले यह सिर्फ 2023 में यह 84 लाख टन, 2022 में 180 लाख टन और 2021 में 280 लाख टन स्टॉक था। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से दुनिया में गेहूं का सरकारी स्टॉक घटता जा रहा है। हालांकि, सरकार अभी तक कुल 264 लाख टन गेहूं खरीद चुकी है, लेकिन सरकारी लक्ष्य 372 लाख टन का है। खरीद का समय भी 22 जून तक बढ़ा दिया है, लेकिन खरीद केंद्रों में नगण्य गेहूं ही आ रहा है। ऐसे में ‘मुफ्त अनाज योजना’, बीपीएल की जरूरतें पूरी करने के लिए तत्काल गेहूं का आयात करना पड़ सकता है। गेहूं के दाम काबू करने के लिए पिछले साल सरकार द्वारा रिकॉर्ड 100 लाख टन गेहूं बेचने के कारण इसके भंडार में कमी आई है। गेहूं की आपूर्ति कमजोर होने के बाद भी भारत सरकार आयात को बढ़ावा देने के लिए आयात पर लागू 40 फीसदी शुल्क हटाकर रूस जैसे देश से इसका आयात करने के विरोध में रही। सरकार ने आयात करने के बजाय भंडार में मौजूद गेहूं आटा मिल व बिस्कुट निर्माता जैसे बड़े उपभोक्ताओं को बेचा। अधिकारी ने कहा कि सरकार ने बड़ी मात्रा में सरकारी भंडार से गेहूं की बिक्री करने के बाद भी इसके भंडार को बफर से नीचे नहीं गिरने दिया। सरकार ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि गेहूं का स्टॉक 100 लाख टन से नीचे न जा पाए। केंद्र सरकार के बफर नियम के मुताबिक 1 अप्रैल को गेहूं का स्टॉक 74.6 लाख टन या इससे अधिक होना ही चाहिए। मुंबई के एक डीलर ने कहा कि सरकार ने अगले सीजन में गेहूं का स्टॉक बफर नियम से अधिक रखने को सुनिश्चित करने के लिए इस साल किसानों से 300 से 320 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है। भारत सरकार साल 2022 व 2023 में गेहूं खरीद के लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाई क्योंकि ज्यादा गर्मी के कारण गेहूं की पैदावार कम हुई। भारत ने 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर गेहूं की आपूर्ति कमजोर पड़ने से इसकी निर्यात मांग बढ़ने के बीच गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। डीलर ने कहा कि अगर सरकार जरूरी मात्रा में गेहूं खरीदने में विफल रही तो शुल्क मुक्त गेहूं के आयात पर विचार कर सकती है। व्यापारियों का कहना है कि अगर सरकार 40% शुल्क हटाती है तो वे आयात शुरू कर देंगे। नई दिल्ली के एक व्यापारी राजेश पहाड़िया जैन ने कहा कि लगभग 3 मिलियन मीट्रिक टन आयात पर्याप्त होना चाहिए। उन्होंने कहा कि रूस सबसे संभावित गेहूं सप्लायर हो सकता है। उन्होंने कहा, “एक बार सरकार शुल्क हटा देती है, तो निजी व्यापार गेहूं का आयात शुरू कर सकता है।” नई दिल्ली स्थित डीलर ने कहा कि अक्टूबर में त्यौहारी सीजन के लिए मांग चरम पर होने के बाद आयात से कीमतों में उछाल टल जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर भारत 30 लाख से 50 लाख मीट्रिक टन आयात करता है तो इससे देश को अपने भंडार से बड़ी मात्रा में गेहूं बेचने की जरूरत खत्म हो जाएगी। लगातार पांच रिकॉर्ड फसलों के बाद, तापमान में तेज वृद्धि ने 2022 और 2023 में भारत की गेहूं की फसल को कम कर दिया, जिससे दुनिया के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक को निर्यात पर प्रतिबंध लगाना पड़ा। एक प्रमुख उद्योग निकाय का अनुमान है कि इस साल की फसल भी 112 मिलियन मीट्रिक टन के सरकारी अनुमान से 6.25% कम होगी। घरेलू कीमतें राज्य द्वारा निर्धारित न्यूनतम खरीद दर 2,275 रुपये प्रति 100 किलोग्राम से ऊपर बनी हुई हैं, और हाल ही में इनमें वृद्धि शुरू हो गई है। अप्रैल में गोदामों में गेहूं का स्टॉक घटकर 7.5 मिलियन मीट्रिक टन रह गया, जो 16 वर्षों में सबसे कम है। सरकार को कीमतों को नियंत्रित करने के लिए आटा मिलों और बिस्किट निर्माताओं को रिकॉर्ड 10 मिलियन टन से अधिक गेहूं बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा। सरकारी अधिकारी ने कहा, “आयात शुल्क हटाने से हमें यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि हमारा अपना भंडार 10 मिलियन टन के मनोवैज्ञानिक बेंचमार्क से नीचे न गिरे।” भारत को राज्य के गेहूं के स्टॉक को फिर से भरने के लिए संघर्ष करना पड़ा है। अप्रैल में कटाई शुरू होने के बाद से, सरकार 30 मिलियन से 32 मिलियन के लक्ष्य के मुकाबले केवल 26.2 मिलियन मीट्रिक टन ही खरीद पाई है। ऐसा तब हुआ जब उसने व्यापारिक घरानों को खरीद से परहेज करने की सलाह दी थी ताकि राज्य के भंडारक भारतीय खाद्य निगम को बड़ी मात्रा में खरीद करने में सक्षम बनाया जा सके। नई दिल्ली स्थित डीलर ने कहा कि सरकार की खरीद 27 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक होने की संभावना नहीं है। दुनिया के सबसे बड़े खाद्य कल्याण कार्यक्रम के तहत भारत को लगभग 18.5 मिलियन मीट्रिक टन गेहूं की जरूरत है। भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने सत्ता में आने पर कार्यक्रम के लाभार्थियों को 10 किलो मुफ्त अनाज की मासिक आपूर्ति का वादा किया है।  

मध्यप्रदेश भरेगा पर्यटन की नयी उड़ान, आज से “पीएमश्री पर्यटन वायु सेवा” की शुरुआत

भोपाल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में पर्यटन और व्यापार को नई ऊंचाई पर पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आज 13 जून को “पीएमश्री पर्यटन वायु सेवा” का शुभारंभ होगा, जिससे राज्य के विभिन्न पर्यटन स्थलों के बीच की दूरी कम होगी और सफर और भी आनंददायी बन जाएगा। 8 शहरों को मिलेगा हवाई सेवा का लाभ: दरअसल इस नई वायु सेवा के तहत प्रदेश के 8 प्रमुख शहरों – भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, उज्जैन, ग्वालियर, सिंगरौली और खजुराहो को हवाई मार्ग से जोड़ा जाएगा। जानकारी के मुताबिक दो 6 सीटर एयरक्राफ्ट इन शहरों के बीच उड़ान भरेंगे, जिससे इन स्थानों के बीच की दूरी और समय में कमी आएगी। इसके साथ ही इसकी शुरुआत करते हुए इसकी पहली फ्लाइट भोपाल-जबलपुर-रीवा-सिंगरौली की होगी। पीएमश्री पर्यटन वायु सेवा के शेड्यूल की जानकारी इस प्रकार है: सोमवार: भोपाल से इंदौर: सुबह 6:15 से 7:10 बजे और शाम 4:00 से 4:55 बजे भोपाल से जबलपुर: सुबह 6:15 से 9:55 बजे (एक स्टॉप) भोपाल से रीवा: सुबह 6:15 से 1:10 बजे (दो स्टॉप) मंगलवार: भोपाल से ग्वालियर: सुबह 8:15 से 10:05 बजे भोपाल से उज्जैन: दोपहर 1:00 से 1:55 बजे भोपाल से इंदौर: दोपहर 1:00 से 2:40 बजे (एक स्टॉप) बुधवार: भोपाल से जबलपुर: सुबह 7:45 से 9:15 बजे गुरुवार: भोपाल से रीवा: सुबह 7:45 से 11:05 बजे (एक स्टॉप) भोपाल से सिंगरौली: सुबह 7:45 से दोपहर 12:00 बजे (दो स्टॉप) शुक्रवार: भोपाल से जबलपुर: सुबह 7:45 से 9:15 बजे भोपाल से खजुराहो: सुबह 7:45 से 11:30 बजे (एक स्टॉप) शनिवार: भोपाल से ग्वालियर: सुबह 8:15 से 10:05 बजे रविवार: भोपाल से उज्जैन: सुबह 6:00 से 6:55 बजे भोपाल से इंदौर: सुबह 9:00 से 11:25 बजे (एक स्टॉप) पर्यटन और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा: दरअसल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इस फैसले से नई वायु सेवा सिर्फ पर्यटन के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि उद्योग, व्यापार, स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति और कला के प्रचार-प्रसार में भी लाभदायक होगी। इससे राज्य के प्रमुख शहरों के बीच आवागमन सुगम होगा और विभिन्न क्षेत्रों में विकास को गति मिलेगी। शुभारंभ समारोह: “पीएमश्री पर्यटन वायु सेवा” का शुभारंभ समारोह भोपाल में आज 13 जून को आयोजित होगा। इसके बाद 15 जून को ग्वालियर और 16 जून को उज्जैन से हवाई यात्रा की शुरुआत होगी। इस वायु सेवा के माध्यम से पर्यटकों और व्यवसायियों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी, जिससे मध्यप्रदेश में पर्यटन और व्यापार की संभावनाएं और बढ़ेंगी।

बकरीद से पहले प्याज की मांग बढ़ी, आगे चलकर और क्यों बढ़ सकती हैं कीमतें

नई दिल्ली देश में प्याज के दाम में तेज बढ़ोतरी देखी जा रही है. पिछले 15 दिनों की बात करें तो प्याज की कीमतों में 30-50 फीसदी तक का इजाफा हो चुका है. देश में इस समय प्याज की आवक यानी इसकी सप्लाई कम हो रही है जबकि ईद उल-अज़हा (बकरीद) के आने से पहले प्याज की मांग में जोरदार इजाफा हो चुका है. अब केंद्र सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वो प्याज के बढ़ते दामों पर लगाम लगाने के लिए कुछ कदम उठाए. महाराष्ट्र के लासलगांव मंडी में प्याज के दाम खूब चढ़े महाराष्ट्र के नासिक की लासलगांव मंडी में प्याज के औसत थोक भाव में खूब इजाफा आ चुका है. सोमवार को यहां औसत थोक भाव 26 रुपये प्रति किलो पर थे जबकि पिछले महीने की 25 तारीख को ये रेट 17 रुपये प्रति किलो पर थे. हालांकि महाराष्ट्र में सबसे अच्छी क्वालिटी के प्याज के रेट राज्य के कई होलसेल मार्केट में 30 रुपये प्रति किलो के भाव को पार कर गए हैं. चूंकि इनका ट्रेड वॉल्यूम कुल प्याज की बिक्री में कम रहता है तो इनके दाम का औसत कुल भाव में ज्यादा असर नहीं दर्शाता है. क्यों बढ़ रही प्याज की कीमतें प्याज के रेट में हालिया तेजी मुख्य रूप से डिमांड और सप्लाई के बीच अंतर की वजह से आई है. जून से मंडियों और बाजारों में जो प्याज आ रहा है वो उस स्टॉक से है जो किसानों और ट्रेडर्स ने रखा हुआ था. हालांकि किसानों को ऐसी आशंका है कि साल 2023-24 की रबी फसल में गिरावट आ सकती है जिसके बाद उन्हें प्याज के रेट में बढ़ोतरी की उम्मीद है. किसानों को उम्मीद है कि केंद्र सरकार अब प्याज पर एक्सपोर्ट ड्यूटी हटा सकती है और इसी अनुमान के दम पर स्टॉकिस्ट और किसान प्याज का भंडारण कर रहे हैं. उन्हें लगता है कि एक्सपोर्ट ड्यूटी हटने के बाद प्याज के दाम काफी ऊपर जा सकते हैं और इस समय पर वो अपनी प्याज की अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद कर रहे हैं. एक्सपोर्ट में फिलहाल बनी हुई है सुस्ती प्याज के निर्यात पर 40 फीसदी एक्सपोर्ट ड्यूटी की वजह से फिलहाल इसकी गति धीमी बनी हुई है. चूंकि आगामी 17 जून को ईद उल-अज़हा (बकरीद) का त्योहार मनाया जाएगा तो ट्रेडर्स का दावा है कि घरेलू मांग कुछ और समय तक तेजी जारी रहेगी. महाराष्ट्र से आने वाली प्याज के लिए मांग लगातार बढ़ रही है, खासकर दक्षिणी राज्यों से डिमांड ज्यादा है. कितना हुआ प्याज में इजाफा नासिक की लासलगांव मंडी में सोमवार को प्याज का औसत थोक मूल्य 26 रुपए प्रति किलोग्राम था, जबकि 25 मई को यही दाम 17 रुपए प्रति किलोग्राम थे. बेहतरीन क्वालिटी वाले प्याज की कीमत, जिसकी कुल कारोबार मात्रा में हिस्सेदारी छोटी है, राज्य के कई थोक बाजारों में 30 रुपए को पार कर गई है. हालिया कीमतों में इजाफे का प्रमुख कारण मांग और सप्लाई में अंतर है. जून से बाजारों में आने वाला प्याज किसानों और व्यापारियों द्वारा रखे गए स्टॉक से आता है. किसान अपने स्टॉक को कम निकाल रहे हैं, क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि 2023-24 की रबी फसल में संभावित गिरावट के कारण कीमतें बढ़ेंगी. दिल्ली में महंगी हुई प्याज राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर में लगातार प्याज की कीमतें बढ़ती जा रही है। प्याज की कीमत बीते 10 दिनों से बढ़ने लगी है। बीते 10 दिनों के मुताबिक 12 से 15 रुपये तक प्याज की कीमत बढ़ गई है। वहीं जून के महीने में भी प्याज किसान और व्यापारियों के पास उपलब्ध स्टॉक से आती है। किसान अब अपने स्टॉक को भी कम बेच रहे है, जिस कारण प्याज की कीमत बढ़ने लगी है। किसानों का मानना है कि रबी फसल 2023-24 में गिरावट आने के बाद प्याज की कीमत बढ़ जाएगी। वहीं प्याज की कीमत में 40% एक्सपोर्ट फीस बढ़ गई है, जिस कारण इसका निर्यात कम होने लगा है। व्यापारियों ने दावा किया है कि आगामी 17 जून को होने वाली ईद अल अज़हा के लिए प्याज की घरेलू मांग बढ़ गई है। दक्षिण में बढ़ी मांग प्याज की मांग महाराष्ट्र के अलावा दक्षिण के राज्यों मे भी काफी अधिक बढ़ी है। कीमत में आई बढ़ोतरी के पीछे मूल कारण किसान और स्टॉकिस्ट का मानना है कि केंद्र सरकार जल्द ही इस पर से निर्यात शुल्क को खत्म कर सकती है। क्या कहते हैं सरकारी आंकड़ें मिनिस्ट्री कंज्यूमर अफेयर्स की वेबसाइट के अनुसार प्याज कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है. अगर बात जून ही करें तो प्याज की औसत कीमतों में ही 1.86 रुपए प्रति किलोग्राम का इजाफा देखने को मिल चुका है. 31 मई को प्याज के औसत दाम 32.12 रुपए प्रति किलोग्राम देखने को मिले थे. जोकि 10 जून को बढ़कर 33.98 रुपए प्रति किलोग्राम हो चुके हैं. वहीं देश की राजधानी दिल्ली में प्याज की कीमत में तो और भी इजाफा देखने को मिला है. 31 मई को दिल्ली में प्याज की सरकारी कीमत 30 रुपए प्रति किलोग्राम थी. जोकि 10 जून को 42 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई है. इसका मतलब है कि जून के महीने में दिल्ली में प्याज की कीमत में 12 रुपए का इजाफा हो चुका है.

गाड़ी में पानी से भी लग सकती हैआग, भूलकर भी न रखें ये सामान!

नईदिल्ली देश में गर्मी लगातार बढ़ती ही जा रही है और ऐसे में मोबाइल और कार ब्लास्ट होने के मामले भी सामने आ रहे हैं। हर रोज किसी न किसी गाड़ी में आग लगने या मोबाइल ब्लास्ट की खबरें सामने आ रही है। कई सारे लोग ऐसे भी है जो कार में पानी की बोतल भर कर रखते हैं लेकिन यह आदत मुसीबत बन सकती है। इसके कारण गाड़ी में ब्लास्ट हो सकता है। आईए जानते हैं, आपको कार के अंदर कौन-सी चीजें नहीं रखनी चाहिए और इनसे क्या नुकसान होता है? कार में प्लास्टिक की बोतल रखना पड़ेगा महंगा अगर आप अपनी गाड़ी को धूप में खड़ा कर रहे हैं और इसमें प्लास्टिक की पानी की बोतल रखी है तो उसे तुरंत ही बाहर निकाल दें। अगर आप पानी पीकर खाली बोतल भी गाड़ी में रखते हैं तो आपको बड़ा नुकसान हो सकता है। प्लास्टिक बोतल कार में मैग्नीफाइंग ग्लास की तरह काम करती है। धूप की डायरेक्ट रोशनी बोतल पर पड़ती है और वो रिएक्ट करती ही, जिसकी वजह से कार की सीट में आग लग सकती है। अगर आपकी कार में कोल्डड्रिंक की बोतल है तो भी आपको नुकसान पंहुचा सकती है। इसके तापमान बढ़ने के कारण फटने के चांस बढ़ जाते है। कभी ना रखें सैनिटाइजर और लाइटर इतनी धूप में गाड़ी खड़ी करते समय आपको इसमें लाइटर नहीं रखना चाहिए क्योंकि गर्मी के कारण इसमें आग लगने का चांस बढ़ जाता है। इसके अलावा हैंड सेनीटाइजर में अल्कोहल होती है और तेज गर्मी में वह भी आग पकड़ लेती है जिससे आपकी गाड़ी में आग लग सकती है। ऐसा सूरज की तेज रोशनी पड़ने के कारण हो सकता है। गैस एयरोसोल या स्प्रे कैन को कार में रख कर ना छोड़े। टेंपरेचर बढ़ने के कारण कैन के अंदर प्रेशर बहुत तेजी से बढ़ सकता है, इससे गाड़ी में आग लग सकती है। इसके साथ ही कार में कोई भी ज्वलनशील चीजे रखने से बचें।

अगले महीने कजाकिस्तान में पीएम मोदी और शहबाज शरीफ होंगे आमने-सामने

नई दिल्ली  दिसम्बर 2015की उस घटना को लगभग एक दशक होने वाले हैं जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विमान अचानक लाहौर में उतरा था। उस समय मोदी ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात की थी। प्रधानमंत्री मोदी की लाहौर यात्रा ने तब विश्लेषकों को हैरान कर दिया था। इसे दोनों देशों के बीच संबंधों की सुधार की दिशा में बड़ा कदम बताया गया था लेकिन 2015 से 2024 का एक बड़ा वक्त गुजरा और दोनों देशों के रिश्ते ठंडे बस्ते में चले गए। 2019 में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद खत्म होने के बाद से तो यह बिल्कुल बंद ही हैं। अब नरेंद्र मोदी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद पाकिस्तान की तरफ से रिश्तों को फिर से शुरू करने की कोशिश हुई है। सोमवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पीएम मोदी को बधाई दी, लेकिन सबका ध्यान खींचा उनके बड़े भाई और पाकिस्तान के तीन बार प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ के एक्स पर लिखे संदेश ने, जिसमें उन्होंने भारत के साथ दोस्ती का साफ संदेश भेजा। नवाज शरीफ ने लिखा, ‘मोदी जी को तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर मैं गर्मजोशी से बधाई पेश करता हूं। हाल के चुनावों में आपके जीत आपके नेतृत्व में जनता के विश्वास को दर्शाती है।’ नवाज ने बढ़ाया दोस्ती का हाथ नवाज शरीफ ने आगे लिखा, ‘आइए हम क्षेत्र में नफरत को उम्मीद से बदलकर यहां बसने वाले दो अरब लोगों के भविष्य को संवारें।’ इसके जवाब में पीएम मोदी ने लिखा, ‘आपके बधाई संदेश के लिए शुक्रिया। भारत के लोग हमेशा शांति, सुरक्षा और प्रगतिशील विचारों के पक्षधर रहे हैं। अपने लोगों का कल्याण और सुरक्षा हमेशा हमारी प्राथमिकता होना चाहिए।’ पाकिस्तान ने हाल के दिनों में भारत के संबंधों को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया है। इसी साल मार्च में पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने भारत के साथ व्यापारिक संबंधों की बहाली का संकेत दिया था। डार ने कहा था कि पाकिस्तान इस बारे में गंभीरता से विचार कर रहा है। दोनों नेताओं के बीच संदेशों के मायने पीएम मोदी और नवाज शरीफ के एक दूसरे को भेजे संदेशों ने एक नई बहस छेड़ दी है। पाकिस्तान से आए प्रेम के संदेश को इसलिए भी खास समझा जाना चाहिए कि शहबाज शरीफ भले ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री हैं लेकिन पीएमएल-एन के सबसे बड़े नेता आज भी नवाज शरीफ ही हैं। हालांकि, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ इसे प्रेम का संदेश नहीं मानते। आसिफ ने जियो न्यूज के एक कार्यक्रम में कहा कि ‘नरेंद्र मोदी को बधाई देना एक औपचारिक संदेश था और कूटनीतिक स्तर पर ऐसा किया जाता है। शहबाज शरीफ जब प्रधानमंत्री बने थे तो उन्होंने भी हमें मुबारकबाद दी थी।’ आसिफ ने कहा कि ‘हमने कौन सा उन्हें मोहब्बतनामा लिख दिया?’ भारत-पाकिस्तान में बन सकती है बात हालांकि, कुछ लोग इसके उलट मानते हैं। पत्रकार सुधींद्र कुलकर्णी ने बीबीसी से बात में नवाज शरीफ और पीएम मोदी के बीच संदेशों की अदला-बदली को एक महत्वपूर्ण प्रगति बताया। कुलकर्णी ने कहा कि नवाज शरीफ ने मोदी की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। इसके साथ ही वे दोनों नेताओं के बीच अच्छे व्यक्तिगत संबंधों की भी याद दिलाते हैं। मोदी ने अपने पहले कार्यकाल के शपथ ग्रहण समारोह में नवाज शरीफ को न्योता भेजा था, जिसमें बतौर पाकिस्तान पीएम वह शामिल भी हुए थे। पाकिस्तान में भी दोनों नेताओं की बातचीत को लेकर तमाम लोगों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि रिश्तों में जमी बर्फ पिघलने में समय लग सकता है। कजाकिस्तान में दोनों पीएम होंगे आमने-सामने भारत और पाकिस्तान दोनों तरफ के लोगों का मानना है कि पड़ोसी देशों के बीच सबसे बड़ी रुकावट कश्मीर की समस्या है। हालांकि, यह भी कहना है कि सीधे संबंध शुरू करने से पहले दोनों देशों में उच्चायुक्तों की तैनाती और अफगानिस्तान ट्रांजिट खोलने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। इसके साथ ही अभी यह नहीं पता है कि पाकिस्तान की सेना इस बारे में क्या सोचती है, क्योंकि पीएम शहबाज ने बधाई संदेश को बहुत ठंडा रखा था। भाई नवाज के उलट शहबाज शरीफ की छवि पाकिस्तानी सेना से संबंध बनाकर रखने वाली है। फिलहाल विश्लेषकों की नजर जुलाई में कजाकिस्तान में होने वाली शंघाई ओऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) की बैठक हैं, जहां मोदी और शहबाज शरीफ आमने-सामने होने वाले हैं। यह भी ध्यान देने की जरूरत है कि यह पीएम मोदी का तीसरा कार्यकाल है और वह इतिहास में ऐसे प्रधानमंत्री के रूप में याद किया जाना चाहेंगे जिसने पाकिस्तान से समस्या को लेकर खास प्रयास किया था। ऐसे में मोदी इस दिशा में कुछ ठोस करने की कोशिश जरूर करेंगे।

भाजपा का अगला अध्यक्ष कौन, यूपी में साख लौटाना बड़ी चुनौती, विनोद, संतोष, ठाकुर, ओम माथुर, और स्मृति ईरानी के नाम चर्चा में

नई दिल्ली  नरेंद्र मोदी सरकार के तीसरी बार शपथ ग्रहण लेने के बाद अब भाजपा के नए अध्यक्ष की चर्चा शुरू हो गई है। अध्यक्ष कौन बनेगा इसकी अटकलें तेज हो गई हैं। 2019 लोकसभा चुनाव के बाद जगत प्रकाश नड्डा जनवरी 2020 में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे। नड्डा का बतौर बीजेपी अध्यक्ष कार्यकाल जनवरी 2023 में खत्म हो गया। हालांकि, लोकसभा चुनाव को देखते हुए उनके कार्यकाल को जून 2024 तक बढ़ा दिया गया था। चुनाव बाद नड्डा को नरेंद्र मोदी सरकार की कैबिनेट में जगह दी गई है। माना जा रहा है कि बीजेपी के एक व्यक्ति एक पद की नीति के तहत पार्टी जल्द ही अपना नया अध्यक्ष तय करेगी। हाल ही में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयानों के बाद माना जा रहा है कि अध्यक्ष पद के चुनाव में अब संघ की ही चलेगी। विनोद, अनुराग, ओम और स्मृति के नामों की चर्चा नड्डा के बाद पहले तो अध्यक्ष पद के लिए मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और हरियाणा के पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर के नाम भी चर्चा में थे। मगर, इन तीनों को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने के बाद अब इनकी चर्चाओं पर विराम लग गया है। अब भाजपा अध्यक्ष पद की दौड़ में पार्टी महासचिव विनोद तावड़े, बीएल संतोष, अनुराग ठाकुर, के लक्षमण, ओम माथुर, सुनील बंसल के अलावा स्मृति ईरानी के नाम भी आगे चल रहे हैं। मोहन भागवत के बयान के बाद बीजेपी अध्यक्ष के चुनाव में संघ की भूमिका की चर्चा तेज हो गई है इस बार भाजपा अध्यक्ष के चुनाव में संघ की चलेगी दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर राजीव रंजन गिरि के अनुसार, भाजपा भले ही राजनीतिक पार्टी हो, मगर संगठन में हमेशा संघ की ही चलती है। क्योंकि इसे चलाने वाले लोग ज्यादातर संघ से ही जुड़े होते हैं। मोहन भागवत ने हाल ही में बयान दिया था कि एक सच्चा सेवक मर्यादा का पालन करता है। जिसमें मैंने किया का भाव नहीं होता, अहंकार नहीं होता, केवल वही व्यक्ति सही अर्थों में सेवक कहलाने का अधिकारी होता है। माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व को लेकर भागवत यह बयान बेहद मायने रखता है। ऐसे में आगामी वक्त में पार्टी अध्यक्ष के चुनाव में संघ की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है। भाजपा को आरएसएस का राजनीतिक संगठन माना जाता है, ऐसे में संघ अब नहीं चाहेगा कि आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन खराब हो। विनोद तावड़े प्रभावशाली महासचिव, संघ से जुड़ाव महाराष्ट्र सरकार में मंत्री रह चुके तावड़े को बीएल संतोष के बाद सबसे ज्यादा प्रभावशाली महासचिव माना जाता है। उनके पास दो दशक का संगठन का अनुभव है। वह बचपन से ही संघ से जुड़े हुए हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अपनी राजनीति की शुरुआत करने वाले तावड़े के नाम पर इसलिए भी मुहर लग सकती है, क्योंकि इसी साल महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में विधानसभा चुनाव होने हैं। लक्ष्मण का नाम ओबीसी दावेदारों में आगे नड्डा के बाद भाजपा अध्यक्ष की इस रेस में बीजेपी ओबीसी मोर्चा चीफ के लक्ष्मण का नाम भी चर्चा में हैं। तेलंगाना से आने वाले लक्ष्मण बेहद कर्मठ और जुझारू जाने जाते हैं। दक्षिण के राज्यों में आंध्र प्रदेश के बाद तेलंगाना पर बीजेपी सबसे ज्यादा ध्यान दे रही है। बंसल की अगुवाई में ओडिशा में बीजेपी का परचम बीजेपी अध्यक्ष की रेस में सुनील बंसल का नाम भी सामिल है, जो वर्तमान में महासचिव हैं। अमित शाह के चहेते बंसल पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और ओडिशा जैसे तीन राज्यों के इंचार्ज भी हैं। उन्हीं की अगुवाई में बीजेपी ने ओडिशा में शानदार प्रदर्शन किया और नवीन पटनायक सरकार को चारों खाने चित कर दिया। बीएल संतोष पर्दे के पीछे के रणनीतिकार भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष आरएसएस के बड़े प्रचारक भी रह चुके हैं। बीएल संतोष को बीजेपी में यह पद तब मिला, जब 13 वर्षों से यह पद संभाल रहे रामलाल की विदाई हुई। बीएल संतोष को परदे के पीछे रणनीति बनाने में माहिर माना जाता है। ओम माथुर गुजरात के प्रभारी, पीएम मोदी के चहेते राजस्थान से राज्यसभा सदस्य और भैरों सिंह शेखावत के शिष्य ओम माथुर भी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की दौड़ में हैं। पीएम मोदी के चहेते माथुर को चेहरे पर मुस्कुराहट के साथ अपनी बात कहने के लिए जाना जाता है। ओम माथुर आरएसएस के सक्रिय प्रचारक रहे हैं और पीएम मोदी के गृह राज्य गुजरात के प्रभारी भी रह चुके हैं। अनुराग ठाकुर को यूथ विंग के अध्यक्ष पद का अनुभव हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर से सांसद अनुराग ठाकुर का नाम भी भाजपा अध्यक्ष पद के लिए चर्चा में है। हमीरपुर लोकसभा सीट से पांच बार के सांसद अनुराग ठाकुर को इस बार मोदी मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी गई है। इससे भी उनको पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चाओं ने जोर पकड़ा। अनुराग ठाकुर यूथ बीजेपी के अध्यक्ष के रूप में काम कर चुके हैं। वह बीसीसीआई के संयुक्त सचिव भी रह चुके हैं। स्मृति ईरानी का नाम भी रेस में, पहली महिला अध्यक्ष संभव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी कई सभाओं में महिला वोटर्स की वकालत करते आ रहे हैं। उन्होंने अपनी लगातार तीन बार की जीत में महिलाओं की भूमिका भी मानी है। वहीं, भाजपा ने संगठन में भी महिला सदस्यों की संख्या बढ़ाने के लिए व्यापक संपर्क अभियान की योजना बनाने जा रही है। वैसे भी महिला आरक्षण अधिनियम लागू हो गया तो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित होंगी। इस बार अध्यक्ष पद के लिए स्मृति ईरानी के नाम की भी चर्चा है। अमेठी की पूर्व सांसद रहीं स्मृति को इस बार कैबिनेट में जगह नहीं मिली है, ऐसे में भाजपा अध्यक्ष के लिए उनका नाम भी आगे चल रहा है। अगर, ऐसा होता है तो वह भाजपा की पहली महिला अध्यक्ष बन सकती हैं। अध्यक्ष पद से पहले राज्यों में होंगे संगठन चुनाव भाजपा अपने नए अध्यक्ष के चुनाव से पहले नए सदस्यता अभियान की शुरुआत करेगी और उसके बाद राज्यों में संगठन के चुनाव कराएगी। दरअसल, तय नियमों के मुताबिक अध्यक्ष चुनने से पहले कम से कम 50 फीसदी राज्यों … Read more

अमस में बाल विवाह को रोकने के लिए असम सरकार की नई पहल, लड़कियों को देगी वजीफा, सीएम सरमा ने किया एलान

गुवाहाटी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को घोषणा की है कि सरकार बाल विवाह रोकने के उद्देश्य से अगले पांच वर्षों में 11वीं कक्षा से स्नातकोत्तर तक की सभी लड़कियों को मासिक वजीफा प्रदान करेगी। सरमा ने कहा कि योजना को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। अनुमान है कि लगभग 10 लाख लड़कियों को प्रोत्साहन राशि देने के लिए पांच वर्षों में 1,500 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि विवाहित लड़कियों को यह लाभ नहीं मिलेगा। एकमात्र अपवाद वे विवाहित लड़कियां होंगी, जो पीजी पाठ्यक्रमों में शामिल हो चुकी हैं। सरमा ने कहा कि इस योजना का एकमात्र उद्देश्य लड़की की शादी में देरी करना है, ताकि वह आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो सके और अपने और अपने परिवार के लिए कमाई शुरू कर सके। उन्होंने कहा कि इस योजना से लड़कियों के सकल नामांकन अनुपात में काफी वृद्धि होगी। यह राशि कक्षा 11 और 12 में पढ़ने वाली लड़कियों के लिए हर महीने 1,000 रुपये, डिग्री वालों के लिए 1,250 रुपये और पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाली लड़कियों के लिए 2,500 रुपये होंगी। मंत्रियों, विधायकों और सांसदों की बेटियों और निजी कालेजों में पढ़ने वाली छात्राओं को छोड़कर, वित्तीय पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना सभी लड़कियों को योजना में शामिल किया जाएगा। जून और जुलाई में गर्मी की छुट्टियों के दौरान कोई पैसा नहीं दिया जाएगा।

राज्य सरकार ने ‘अमृतकाल: छत्तीसगढ़ विजन@2047 के लिए जनप्रतिनिधियों और आम लोगों से सुझाव मांगे

रायपुर राज्य सरकार ने ‘अमृतकाल: छत्तीसगढ़ विजन @ 2047 के लिए जनप्रतिनिधियों और आम लोगों से सुझाव मांगे हैं। सभी मंत्रियों और विधायकों को पत्र लिखकर विजन डाक्यूमेंट तैयार करने सुझाव देने का आग्रह किया है। ये सुझाव 30 जून तक मंगाए गए हैं। सुझाव लिखित में या फिर वेब पोर्टल मोर सपना-मोर विकसित छत्तीसगढ़ के जरिए दिए जा सकते हैं। वित्त एवं योजना मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि विकसित भारत की तर्ज पर विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने के लिए विजन डाक्यूमेंट 2047 तैयार किया जा रहा है। राज्य सरकार ने ‘‘अमृतकालः छत्तीसगढ़ विजन @ 2047’’ से संबंधित विजन डाक्यूमेंट तैयार करने का जिम्मा राज्य नीति आयोग को सौंपा है। इस संबंध में आयोग सभी विभागों व विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से विचार-विमर्श भी कर रहा है। जनप्रतिनिधियों एवं आम नागरिकों से भी विकसित छत्तीसगढ़ की उनकी परिकल्पना साझा करने के लिए आयोग ने एक वेब पोर्टल ‘मोर सपना-मोर विकसित छत्तीसगढ़ तैयार किया है, जिसके जरिए वे अपने सुझाव दे सकते हैं। चौधरी ने मंत्रियों और विधायकों को लिखे पत्र में कहा है कि विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना के संबंध में अपना सुझाव 30 जून 2024 तक सदस्य-सचिव, राज्य नीति आयोग, नीति भवन, नवा रायपुर को या फिर आयोग के वेब पोर्टल शमोर सपना-मोर विकसित छत्तीसगढ़ के जरिए भेज सकते हैं। एक नवंबर को जारी होगा डाक्यूमेंट राज्य स्थापना दिवस पर विजन डाक्यूमेंट-2047 जारी किया जाएगा। इससे पहले विभागों की समीक्षा बैठक आयोजित की जा चुकी है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में विभागीय बैठक में सभी विभागों से सुझाव आमंत्रित करने की प्रक्रिया जारी है, जिसमें वन, पर्यावरण, स्वास्थ्य, शिक्षा, अधोसंरचना, यातायात, खेल, कौशल विकास,ग्रामीण विकास, आदिवासी क्षेत्रों में विकास, जनजाति विकास, पंचायत, महिला एवं बाल विकास, पशुधन, धर्मस्व एवं संस्कृति आदि विभागों से सुझाव मिलना शुरू हो चुका है। बजट में की गई थी घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने की परिकल्पना की है। इस परिकल्पना को साकार करने विधानसभा के बजट सत्र 2024 में घोषणा की गई थी कि राज्य स्थापना दिवस एक नवंबर 2024 को राज्य का विजन डाक्यूमेंट ‘अमृतकालः छत्तीसगढ़ विजन @ 2047’जारी कर प्रदेश को समर्पित किया जाएगा। इस विजन डाक्यूमेंट में छत्तीसगढ़ के विकास पर बात की जाएगी। 2047 छत्तीसगढ़ को किस तरह विकास की दिशा आगे ले जा सकते हैं। इस पर सुझाव दिए जा सकते हैं।

CG Board Exam 2024: छत्तीसगढ़ बोर्ड अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत नए शैक्षिक सत्र से दो बार आयोजित करेगा परीक्षाएं

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ बोर्ड ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत नए शैक्षिक सत्र से एक नया कानून लागू करने का निर्देश दिया है। इस आदेश के अनुसार नए शैक्षिक सत्र से अब बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन एक वर्ष में दो बार किया जाएगा। इस नए नियम से फेल स्टूडेंट्स को सबसे ज्यादा फायदा मिलने वाला है। वे एक बार फेल होने पर बेहतर तैयारी के साथ उसी वर्ष पास हो सकेंगे और उनका साल बर्बाद होने से बच जाएगा। इसके साथ ही स्टूडेंट्स इससे अपने रिजल्ट में सुधार भी कर पाएंगे। आपको बता दें अभी तक केवल कम्पार्टमेंट लगने वाले स्टूडेंट्स ही दोबारा परीक्षा में भाग ले सकते थे जिसमें अब बदलाव हुआ है। दो बार बोर्ड परीक्षा आयोजित करने वाला छत्तीसगढ़ बना पहला राज्य छत्तीसगढ़ बोर्ड देशभर में पहला राज्य बनने वाला है जो इस सत्र से ही वर्ष में दो बार बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन करने जा रहा है। अभी तक देश में किसी भी राज्य ने दो बार बोर्ड परीक्षा आयोजित करने का नियम लागू नहीं किया था। छत्तीसगढ़ बोर्ड के साथ केवल सीबीएसई बोर्ड इस शैक्षिक सत्र से देशभर में दो बार बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन करने की घोषणा कर चुका है। कब आयोजित होंगी परीक्षाएं छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, रायपुर की ओर से यह जानकारी भी दी गई है कि किस महीने में बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन किया जाएगा। जारी की गई सूचना के मुताबिक प्रथम चरण की बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन मार्च माह में किया जायेगा वहीं दूसरी बार बोर्ड परीक्षाएं जून-जुलाई माह में आयोजित की जाएंगी। रजिस्टर्ड स्टूडेंट्स ही ले सकेंगे एग्जाम में भाग स्टूडेंट्स ध्यान रखें कि पहले चरण की बोर्ड परीक्षाओं में भाग लेने वाले रजिस्टर्ड छात्र ही दूसरे चरण की परीक्षाओं में भाग ले सकेंगे। नए स्टूडेंट्स इन परीक्षाओं में शामिल नहीं हो पायेंगे।

आगामी विधानसभा चुनाव के लिए ऐक्टिव AAP सरकार, ‘गांवों के विकास पर खर्च करेंगे 900 करोड़’, समस्याओं पर मंथन

नई दिल्ली लोकसभा चुनाव में शिकस्त झेलने वाली दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार विधानसभा की जंग के लिए तैयारी में जुट गई है। एक तरफ जहां गांवों में 900 करोड़ की लागत से युद्धस्तर पर विकास कार्य किए जाएंगे तो दूसरी तरफ हर विधानसभा क्षेत्र में जनता की समस्याओं को दूर करने की कवायद चल रही है। दिल्ली सरकार के मंत्री गोपाल राय ने कहा कि अक्टूबर तक सभी कामों को पूरा कर लिया जाएगा। ‘गांवों के विकास पर खर्च करेंगे 900 करोड़’ गोपाल राय ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनकी सरकार गांवों के विकास पर तेजी से काम करने जा रही है। उन्होंने कहा, ‘लोकसभा चुनाव की वजह से दो महीने से नए काम नहीं हो पा रहे थे। आचार संहिता खत्म होते ही दिल्ली सरकार ने अपनी गति बढ़ा दी है। दिल्ली में गांवों की बड़ी संख्या है। इनके विकास के लिए केजरीवाल सरकार ने 2024-25 के बजट में पहली बार 900 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। सरकार ने दिल्ली के सभी गांवों के विकास के लिए 900 करोड़ रुपए की लागत से काम करवाने के लिए युद्धस्तर पर तैयारी शुरू की है। खासतौर पर सड़कों को प्राथमिकता दी जाएगी।’ हर विधानसभा की समस्याओं पर मंथन गोपाल राय ने कहा कि 19 जून को सभी विधायकों की बैठक बुलाई गई है। इसमें जमीन पर समस्याओं और समाधान को लेकर चर्चा की जाएगी। बैठक में सभी क्षेत्रों में चल रहे कामों की समीक्षा की जाएगी और जहां भी दिक्कत होगी, उन्हें ठीक किया जाएगा। 27-28 जून को दिल्ली सरकार के सभी विभाग सचिवालय में कैंप लगाएंगे, जिससे सभी कागजी काम निपटाए जा सकें और विकास कार्यों को तेजी से बढ़ाया जा सके। 15 जून तक ऐक्शन प्लान बनाने को कहा गोपाल राय ने बताया कि आचार सहिंता लागू होने से पहले बोर्ड की मीटिंग में 1387 प्रस्ताव दिल्ली के विधायकों ने रखे थे। बोर्ड ने इन सभी प्रस्तावों को पास कर दिया था। आज बोर्ड और एजेंसियों को 15 जून तक ऐक्शन प्लान तय करने का निर्देश दे दिया है। इस बार सभी कामों को पूर्ण करने के लिए अक्टूबर तक का ही समय है। यह बेहद कम समय है लेकिन सभी कामों को पूरा कर लिया जाएगा।    

18 जून को मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार काशी आ रहे, किसानों को देंगे सौगात

वाराणसी पीएम नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद पहली बार 18 जून को अपने संसदीय क्षेत्र काशी आ रहे हैं। इस दौरान यहां बाबा विश्वनाथ और मां गंगा का दर्शन पूजन करने के साथ ही काशी से ही देशभर के किसानों को सम्मान निधि की 17वीं किस्त जारी करेंगे। वह अपने एक दिवसीय प्रवास के दौरान आयोजित सम्मेलन में पांच किसानों को सम्मानित भी करेंगे। बनारस जनपद के भी दो लाख 67 हजार 665 किसान सीधे लाभान्वित होंगे। पीएम मोदी 18 जून को काशी में आभार यात्रा पर आ रहे हैं। तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद वह अपने संसदीय क्षेत्र का प्रथम दौरा किसान को समर्पित करेंगे। वह किसान सम्मेलन में सम्मानित होने वाले कृषकों से संवाद भी करेंगे। किसान सम्मेलन के लिए भाजपा ने जगह की तलाश शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री 18 को काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती में भी शामिल होंगे। साढ़े चार घंटे का होगा प्रवास प्राथमिक सूचना के मुताबिक प्रधानमंत्री 18 जून को अपराह्न लगभग 4.30 बजे बाबतपुर एयरपोर्ट पर आएंगे। यहां से सीधे किसान सम्मेलन को संबोधित करने जाएंगे। करीब सवा घंटे तक कार्यक्रम में भाग लेने के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर आएंगे। दर्शन-पूजन के बाद गंगा आरती देखेंगे। फिर सड़क मार्ग से बाबतपुर एयरपोर्ट लौटेंगे। रात लगभग नौ बजे विशेष विमान से दिल्ली जाएंगे। सम्मेलन के लिए राजातालाब में देखे चार स्थल   किसान सम्मेलन के लिए मंगलवार को भाजपा पदाधिकारियों और डीएम एस. राजलिंगम ने राजातलाब के चार-पांच गांवों में जगह देखी। इनमें राजातालाब मंडी के पीछे, रखौना, मेहंदीगंज मड़ई, मेंहदीगंज रिंग रोड आदि स्थल शामिल हैं। अभी किसी स्थान को फाइलन नहीं किया गया है। भाजपा काशी क्षेत्र प्रवक्ता नवरतन राठी ने बताया कि रोहनिया और सेवापुरी विधानसभा क्षेत्र के मध्य किसान सम्मेलन आयोजित होगा। निरीक्षण के दौरान क्षेत्रीय अध्यक्ष दिलीप पटेल, जिलाध्यक्ष एवं एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा, प्रवीण सिंह गौतम, अरविन्द पटेल आदि रहे। कार्यकर्ता करेंगे मोदी का भव्य स्वागत मोदी के काशी आगमन को लेकर भाजपा कार्यकर्ता उत्साहित हैं। उन्होंने हर हर महादेव के उद्घोष के साथ जोरदार अगवानी करने का निर्णय लिया है। पीएम के स्वागत के संबंध में भाजपा की जिला और महानगर इकाई ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। प्रधानमंत्री के यात्रा मार्ग में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल, विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी व सौरभ श्रीवास्तव की अगुवाई में स्वागत होगा।  

छत्तीसगढ़-बलौदा बाजार हिंसा के बाद दीपक सोनी कलेक्टर और विजय अग्रवाल बनाए गए नए एसपी

बलौदा बाजार. छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में सतनामी समाज के आंदोलन के दौरान कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव किया गया था। इस दौरान उमड़े भीड़ ने कलेक्ट्रेट कार्यालय में तोड़फोड़ आगजनी जैसे घटनाओं को अंजाम दिया था। इस पर अब राज्य शासन ने एक्शन लिया है। मंगलवार की देर रात राज्य सरकार ने आदेश जारी कर बलौदाबाजार जिले के कलेक्टर और एसपी को हटा दिया है। इनके जगह पर 2011 बीच के आईएएस दीपक सोनी को कलेक्टर के रूप में नियुक्त किया है। वहीं 2012 बैच के आईएएस विजय अग्रवाल को एसपी बनाया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, 2009 बैच के आईएएस कुमार लाल चौहान कलेक्टर जिला बलौदाबाजार-भाटापारा को अस्थाई रूप से आगामी आदेश पर्यंत विशेष सचिव, मंत्रालय के पद पर पदस्थ किया गया है। वहीं 2011 बैच के आईएएस दीपक सोनी रजिस्ट्रार सहकारी संस्थाएं तथा अतिरिक्त प्रभार आयुक्त मनरेगा को अस्थाई रूप से आगामी आदेश पर्यंत कलेक्टर जिला बलौदाबाजार-भाटापारा के पद पर पदस्थ किया गया है। साथ ही गृह विभाग की ओर से बलौदाबाजार के एसपी सदानंद कुमार को उप पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस मुख्यालय रायपुर के पद पर पदस्थ किया गया है। 2012 बैच के आईएएस विजय अग्रवाल एसपी अंबिकापुर को अस्थाई रूप से आगामी आदेश पर्यंत एसपी बलौदाबाजार-भाटापारा के पद पर पदस्थ किया गया है। साथ ही 2018 बैच आईएएस योगेश पटेल को अंबिकापुर के एसपी बनाया गया है।

कोर्ट PFI सदस्यों को नहीं मिली राहत, अदालत ने कहा- भारत को इस्लामिक देश बनाने की रची साजिश

मुंबई बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने  पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के तीन कथित सदस्यों को जमानत देने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि उन्होंने 2047 तक भारत को इस्लामिक देश में बदलने की साजिश रची थी. जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस श्याम चांडक की बेंच ने रजी अहमद खान, उनैस उमर खैय्याम पटेल और कय्यूम अब्दुल शेख की जमानत याचिका खारिज कर दी. उन पर 14 जून, 2022 को मालेगांव में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया कार्यालय के उद्घाटन में शामिल होने और फिर मुस्लिम समुदाय के मुद्दों को उठाने और किसी भी तरीके को अपनाकर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए मुस्लिम समुदाय की एकता की जरूरत का मुद्दा उठाने का आरोप लगाया गया था. बेंच ने अपने आदेश में कहा कि आरोपियों ने आपराधिक बल का इस्तेमाल करके सरकार को डराने की साजिश रची. कोर्ट ने कहा, “एफआईआर में खुद ही सब कुछ साफ है. उन्होंने 2047 तक भारत को इस्लामिक देश बनाने की साजिश रची. वे न केवल प्रचारक हैं, बल्कि अपने संगठन के विजन-2047 दस्तावेज को लागू करने का इरादा रखते हैं.” कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपियों ने आपराधिक बल का इस्तेमाल करके सरकार को डराने के लिए समान विचारधारा वाले लोगों को अपने साथ शामिल होने के लिए उकसाया. इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि अपीलकर्ताओं ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर व्यवस्थित रूप से ऐसी गतिविधियां की हैं, जो राष्ट्र के हित और अखंडता के लिए हानिकारक हैं. नासिक की कोर्ट ने खारिज की थी याचिका करीब डेढ़ साल से जेल में बंद आरोपियों की जमानत याचिका नासिक की एक अदालत ने खारिज कर दी थी. इसके बाद आरोपियों ने अपने वकील अशोक मुंदरगी, मिहिर देसाई और हसनैन काजी के जरिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. अभियोजन पक्ष के मामले को देखने के बाद, बेंच ने पाया कि आरोपियों ने सोशल मीडिया ग्रुप पर ‘विजन-2047’ नाम से एक डॉक्यूमेंट शेयर किया था. बेंच ने कहा, “विजन-2047 दस्तावेज को देखने से पता चलता है कि यह भारत को इस्लामिक देश में बदलने की एक भयावह साजिश है.” अपने 15 पेज के आदेश में बेंच ने कहा कि यह अपीलकर्ताओं द्वारा उनके षड्यंत्र के तहत किए गए जघन्य कृत्य को अंजाम देने की साजिश है, जो भारत सरकार को डराने या उसके खिलाफ युद्ध छेड़ने की कोशिश करने की साजिश है. बेंच ने प्रथम दृष्टया आरोपियों के खिलाफ सबूत पाया, जिसमें अभियोजन पक्ष ने कहा था कि आरोपियों का उद्देश्य अन्य धर्मों और भारत सरकार के प्रति नफरत को बढ़ावा देना और भारतीयों के बीच विभाजन पैदा करना था, जिससे भारत की एकता और अखंडता के लिए समस्या पैदा हो. आरोप है कि आरोपियों ने मुस्लिम समुदाय के लोगों के मन में नफरत पैदा करने और उन्हें भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए उकसाने के लिए विभिन्न बैठकें की थी. UAPA के तहत दर्ज हुआ था केस आतंकवाद निरोधक दस्ते ने भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक साजिश, धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था.

छत्तीसगढ़-बलरामपुर में नवदंपती ने कमरा बंद कर खाया जहर

बलरामपुर-रामानुजगंज. बलरामपुर-रामानुजगंज रामचंद्रपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत डिंडो में एक नवदंपती ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। घटना से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। उन्होंने यह कदम क्यों उठाया इसका अभी पता नहीं चल पाया है। दंपती की मौत के बाद परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। मिली जानकारी के अनुसार, डिंडो के राकेश गुप्ता उम्र 28 वर्ष की शादी करीब चार वर्ष पूर्व ग्राम मेंढारी की अंजू गुप्ता से हुई थी। राकेश भाजपा युवा मोर्चा में मंडल सनावल का पदाधिकारी भी था और वह अंबिकापुर के निजी चिकित्सालय में भी कार्य करता था। वह पत्नी और तीन साल के बच्चे के साथ अंबिकापुर में ही रहता था। मंगलवार को वह पत्नी और बच्चे के साथ अपने गांव आया। अपने माता-पिता को बच्चे को सौंपकर पति-पत्नी कमरे में चले गए। जहां उन्होंने कमरा बंद कर तेज आवाज में टीवी चालू करके जहर खा लिया। जिससे दोनों की स्थिति बिगड़ गई। बताया जा रहा है कि अंजू की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं राकेश की वाड्रफनगर हॉस्पिटल ले जाने के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना से पूरे गांव में शोक की लहर है। उनके द्वारा यह कदम क्यों उठाया गया अब तक इसका पता नहीं चल सका है।

ओडिशा में पहली बार भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री ने ली शपथ, मोहन चरण माझी ओडिशा CM

नई दिल्ली मोहन चरण माझी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में ओडिशा में पहली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह ओडिशा के भुवनेश्वर के जनता मैदान में आयोजित किया गया था। माझी के साथ दो उपमुख्यमंत्रियों – कनक वर्धन सिंह देव और प्रवती परिदा ने भी शपथ ली। ओडिशा के राज्यपाल रघुबर दास ने राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री को उपमुख्यमंत्री के साथ शपथ दिलाई। अमित शाह- राजनाथ सिंह समेत मौजूद रहे ये नेता 24 साल तक ओडिशा के मुख्यमंत्री रहे बीजू जनता दल (बीजेडी) के नेता नवीन पटनायक भी मंच पर मौजूद थे। इस समारोह में भारतीय जनता पार्टी के कई हाई-प्रोफाइल नेता भी मौजूद थे, जिनमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, अश्विनी वैष्णव और नितिन गडकरी, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल थे। दर्शकों ने गर्मजोशी से स्वागत किया जब माझी जनता मैदान पहुंचे, तो वहां मौजूद दर्शकों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्हें भीड़ का अभिवादन करते भी देखा गया। हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में जोरदार प्रदर्शन के बाद ओडिशा में यह पहली भाजपा सरकार है, जिसने बीजू जनता दल (बीजद) को हराकर, बीजद के 24 साल पुराने शासन को समाप्त कर दिया। मांझी ने कहा कि ओडिशा की ‘अस्मिता’ (गौरव) की रक्षा करना नई सरकार की प्राथमिकता होगी। संथाली जनजाति से ताल्लुक रखने वाले 52 वर्षीय मांझी राज्य के क्योंझर जिले के हैं। मंगलवार को चुने गए विधायक दल के नेता उन्हें मंगलवार को ओडिशा में भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया। 1997-2000 तक सरपंच के रूप में अपना करियर शुरू करने वाले माझी 2000 में पहली बार क्योंझर से राज्य विधानसभा के लिए चुने गए। 2004 में उन्हें फिर से चुना गया। 2005 से 2009 तक, वह बीजद-भाजपा गठबंधन सरकार में सरकारी उप मुख्य सचेतक थे। 2019 में वे फिर से विधायक चुने गए। हाल ही में हुए चुनावों में माझी ने बीजेडी की मीना माझी को 11,577 मतों से हराकर सीट बरकरार रखी। ओडिशा विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 147 में से 78 सीटें जीतीं।

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