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ईरान-इजरायल युद्ध पर थरूर ने उठाए सवाल, सोनिया गांधी को दिखाया आईना और कहा- चुप्पी मोरल सरेंडर नहीं

नई दिल्ली  अमेरिका और इजरायल ने जबसे ईरान पर अटैक किया है, भारत की राजनीति में भी उबाल आ गया है. तमाम विपक्षी दल इस मामले में भारत की चुप्‍पी पर सवाल उठाते हुए सरकार की तीखी आलोचना कर रहे हैं. सोनिया गांधी ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्‍ला अली खामेनेई की एयर स्‍ट्राइक में मौत की निंदा न करने पर सरकार पर खूब खरी-खोटी सुनाई थी. उन्‍होंने ईरान की संप्रभुता को तार-तार करने के मामले में भारत की चुप्‍पी पर भी गंभीर सवाल उठाए थे. अब सोनिया गांधी को उनकी ही पार्टी के सीनियर लीडर और तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने आईना दिखाया है. थरूर का कहना है कि वेस्‍ट एशिया में छिड़ी जंग पर भारत की चुप्‍पी किसी भी तरह से मोरल सरेंडर यानी नैतिक आत्‍मसमर्पण नहीं है. कांग्रेस सांसद का कहना है कि भारत का साइलेंस एक रिस्‍पॉन्सिबल स्‍टेटक्राफ्ट (सोची-समझी और जिम्‍मेदार कूटनीति) है. वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष को लेकर भारत सरकार की चुप्पी पर देश में छिड़ी बहस के बीच कांग्रेस नेता शशि थरूर ने इसे नैतिक आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि रिस्‍पॉन्सिबल स्‍टेटक्राफ्ट करार दिया है. उन्होंने ‘इंडियन एक्‍सप्रेस’ अखबार में लिखे लेख में कहा कि भारत का यह रुख भावनात्मक प्रतिक्रिया के बजाय व्यावहारिक कूटनीतिक संतुलन को दर्शाता है. थरूर ने स्पष्ट किया कि वे खुद मानते हैं कि अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ किया गया सैन्य अभियान अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं है. यह संप्रभुता, आक्रामकता-विरोध और शांतिपूर्ण समाधान जैसे उन सिद्धांतों के खिलाफ है, जिनका भारत ऐतिहासिक रूप से समर्थन करता रहा है. इसके बावजूद उन्होंने सरकार की आलोचना करने से इनकार करते हुए कहा कि हर स्थिति में सार्वजनिक निंदा ही एकमात्र विकल्प नहीं होती. बता दें कि इसी समाचारपत्र में कुछ दिनों पहले सोनया गांधी ने लेख लिखकर सुप्रीम लीडर अयातुल्‍ला अली खामेनेई और ईरान की संप्रभुता पर आक्रमण की खुले शब्‍दों में निंदा न करने के लिए भारत सरकार की तीखी आलोचना की थी. ‘सिद्धांत और व्‍यवहारिकता के बीच संतुलन’ अब शशि थरूर ने कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा सिद्धांत और व्यवहारिकता के बीच संतुलन पर आधारित रही है. जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्ष नीति का हवाला देते हुए थरूर ने कहा कि यह नैतिक रुख से दूरी नहीं, बल्कि शीत युद्ध के दौरान राष्ट्रीय हितों की रक्षा का व्यावहारिक तरीका था. आज के बहुध्रुवीय विश्व (Multipolar World) में भारत मल्टी-अलाइनमेंट की नीति पर चल रहा है, जहां वह अलग-अलग शक्तियों के साथ संबंध बनाए रखते हुए अपने हितों को प्राथमिकता देता है. थरूर ने आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे यह भूल जाते हैं कि भारत ने अतीत में भी कई बार राष्ट्रीय हितों के चलते चुप्पी साधी है. 1956 में हंगरी, 1968 में चेकोस्लोवाकिया और 1979 में अफगानिस्तान में सोवियत हस्तक्षेप के दौरान भारत ने खुलकर विरोध नहीं किया था, क्योंकि उस समय सोवियत संघ भारत का प्रमुख रक्षा साझेदार था. शशि थरूर की दलील कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने तर्क दिया कि भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र बेहद अहम है, जहां से हर साल करीब 200 अरब डॉलर का व्यापार होता है. देश की ऊर्जा जरूरतें काफी हद तक इसी क्षेत्र पर निर्भर हैं और करीब 90 लाख भारतीय वहां काम करते हैं. ऐसे में किसी एक पक्ष के खिलाफ कड़ा सार्वजनिक रुख इन संबंधों को प्रभावित कर सकता है. थरूर ने अमेरिका के साथ भारत के रणनीतिक रिश्तों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि मौजूदा अमेरिकी नेतृत्व (खासकर डोनाल्‍ड ट्रंप) अक्सर अपने हितों के खिलाफ जाने वालों पर सख्त रुख अपनाते हैं. ऐसे में भारत के लिए रक्षा सहयोग, तकनीकी साझेदारी और चीन के बढ़ते प्रभाव जैसी चुनौतियों को देखते हुए अमेरिका के साथ संतुलित संबंध बनाए रखना जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि विदेश नीति ‘नैतिक भाषणबाजी’ का मंच नहीं, बल्कि वह क्षेत्र है जहां सिद्धांत और शक्ति के बीच संतुलन साधना पड़ता है. बिना पर्याप्त प्रभाव (leverage) के किसी बड़ी शक्ति की खुलकर आलोचना करना व्यावहारिक नहीं होता. चुप्‍पी का मतलब युद्ध का समर्थन नहीं थरूर के मुताबिक, भारत की चुप्पी का मतलब यह नहीं है कि वह युद्ध का समर्थन करता है, बल्कि यह एक रणनीतिक विकल्प है, जो देश को अपने हितों की रक्षा करते हुए कूटनीतिक संवाद के रास्ते खुले रखने में मदद करता है. उन्‍होंने कहा कि चुप्पी भी एक रणनीति हो सकती है, जो अनावश्यक टकराव से बचाते हुए शांति की दिशा में काम करने का अवसर देती है. उन्होंने आलोचकों को सलाह दी कि वे नैतिक आदर्शवाद और वास्तविक कूटनीतिक जरूरतों के बीच फर्क समझें. महात्मा गांधी और नेहरू के मूल्यों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी विरासत कठोर सिद्धांतों पर अड़े रहने की नहीं, बल्कि समय के अनुसार समझदारी से उन्हें लागू करने की रही है. अंत में थरूर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में भारत का संयम ही उसकी ताकत है. उन्‍होंने कहा कि संयम कमजोरी नहीं, बल्कि वह क्षमता है, जो हमें अपने मूल्यों का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में सक्षम बनाती है. सोनिया गांधी ने क्‍या कहा था? सोनिया गांधी ने लिखे लेख में कहा था कि 1 मार्च को ईरान ने पुष्टि की कि उसके सर्वोच्च नेता (अयातुल्लाह सैयद अली हुसैनी खामेनेई) की एक दिन पहले अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए टार्गेटेड हमलों में हत्या कर दी गई थी. वार्ता के बीच किसी मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष की हत्या अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक गंभीर दरार को दर्शाती है. उन्‍होंने आगे कहा था कि इस घटना से परे जो बात उतनी ही स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आती है, वह है नई दिल्ली की चुप्‍पी. बकौल सोनिया गांधी भारत सरकार ने इस हत्या या ईरानी संप्रभुता के उल्लंघन की निंदा करने से परहेज किया है. जब किसी विदेशी नेता की हत्या पर हमारे देश की ओर से संप्रभुता या अंतरराष्ट्रीय कानून के पक्ष में कोई स्पष्ट समर्थन नहीं दिखता और निष्पक्षता छोड़ दी जाती है, तो यह हमारी विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

सीएम ने सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर की दिन की शुरुआत, पूरे प्रदेश में धूमधाम से मनाए गए आयोजन

भोपाल  हिंदू नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, विक्रम संवत 2083 और गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर दिन की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए भारतीय संस्कृति और उज्जैन की गौरवशाली परंपरा को याद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन सदियों से धर्म, ज्ञान, विज्ञान और संस्कृति का प्रमुख केंद्र रहा है। सम्राट विक्रमादित्य द्वारा स्थापित परंपराएं आज भी समाज को प्रेरित कर रही हैं। उन्होंने बताया कि उज्जैन में आयोजित हो रहा विक्रमोत्सव अब राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय पंचांग और सभी प्रमुख पर्व विक्रम संवत पर आधारित हैं, जो हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसी क्रम में 19 मार्च 2026 को सृष्टि आरंभ दिवस और वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में सुबह 10 बजे सूर्य उपासना और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।  मंत्री प्रभार वाले जिलों में आयोजित कार्यक्रम में होंगे शामिल  राज्यभर में आयोजित कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ग्वालियर में मौजूद रहेंगे, जबकि उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा मंदसौर और राजेंद्र शुक्ला रीवा में कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इसके अलावा कई कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्री अपने-अपने आवंटित जिलों में कार्यक्रमों की अगुवाई करेंगे। विक्रमोत्सव–2026 का आयोजन 15 फरवरी से शुरू होकर 19 मार्च तक चलेगा। इस दौरान उज्जैन में विभिन्न सांस्कृतिक, साहित्यिक, धार्मिक और वैचारिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। देशभर से आए कलाकार, विद्वान और सांस्कृतिक साधक अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय परंपरा की समृद्ध झलक प्रस्तुत कर रहे हैं। भारतीय परंपरा को जन जन तक पहुंचाने का प्रयास  उत्सव के अंतर्गत संगीत, नृत्य, नाटक, लोककला और संगोष्ठियों के जरिए सम्राट विक्रमादित्य की परंपरा और भारतीय संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, विद्यार्थियों और पर्यटकों की भागीदारी से उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान और भी सशक्त रूप में उभरकर सामने आ रही है। बता दें कि विक्रमोत्सव 2025 को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें “लॉन्गस्टैंडिंग आईपी ऑफ द ईयर” और WOW अवॉर्ड शामिल हैं। आने वाले समय में यह उत्सव भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रसार का सशक्त माध्यम बनेगा। 

रामपुर, गोरखपुर, आगरा और प्रयागराज सहित 10 जिलों के अधिकारियों से सीएम योगी ने मांगी रिपोर्ट, अहम निर्देश दिए

लखनऊ यूपी में आने वाले दिनों में एक के बाद एक बड़े धार्मिक पर्वों को देखते हुए सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर साफ संदेश दिया कि कानून-व्यवस्था से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने प्रदेश के 10 संवेदनशील जिलों के अधिकारियों से हालिया घटनाओं पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई इस बैठक में प्रदेश के सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और पुलिस अधिकारी जुड़े. बैठक का फोकस साफ था कि त्योहारों के दौरान शांति, सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द हर हाल में बनाए रखना। 10 जिलों पर खास नजर, मांगी गई रिपोर्ट मुख्यमंत्री ने बदायूं, मुरादाबाद, रामपुर, गाजियाबाद, जालौन, गोरखपुर, आगरा, जौनपुर, प्रतापगढ़ और प्रयागराज में हाल के दिनों में हुई आपराधिक घटनाओं को गंभीरता से लिया. उन्होंने संबंधित जिलों के अधिकारियों से इन घटनाओं पर अब तक हुई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा तलब किया. सीएम ने दो टूक कहा कि अपराध की एक भी घटना पूरे माहौल को प्रभावित करती है, इसलिए हर शिकायत पर तुरंत और प्रभावी कार्रवाई जरूरी है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अपराधियों में पुलिस का खौफ दिखना चाहिए, तभी कानून का असर जमीन पर नजर आएगा। त्योहारों को लेकर सख्त निर्देश बैठक में खास तौर पर चैत्र नवरात्र, अलविदा की नमाज और ईद-उल-फितर को लेकर तैयारियों की समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन अवसरों पर किसी भी तरह की अव्यवस्था या तनाव की स्थिति पैदा न होने पाए. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार की उद्दंडता या माहौल बिगाड़ने की कोशिश को तुरंत रोका जाए और दोषियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए. प्रशासन को निर्देश दिया गया कि संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जाए। मंदिरों में व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के निर्देश चैत्र नवरात्र के दौरान देवी मंदिरों में भारी भीड़ को देखते हुए मुख्यमंत्री ने विशेष इंतजाम करने को कहा. उन्होंने साफ निर्देश दिए कि मंदिरों और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा, साफ-सफाई, पेयजल, रोशनी और स्वास्थ्य सुविधाओं की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए. भीड़ प्रबंधन को लेकर भी प्रशासन को अलर्ट किया गया है, ताकि किसी भी तरह की भगदड़ या अव्यवस्था की स्थिति न बने. प्रमुख मंदिरों के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने के भी निर्देश दिए गए हैं. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि धार्मिक आयोजनों में किसी भी नई परंपरा की अनुमति नहीं दी जाएगी. जो परंपराएं पहले से चली आ रही हैं, उन्हीं का पालन सुनिश्चित किया जाए. इसका मकसद यह है कि किसी भी नई गतिविधि के कारण विवाद की स्थिति पैदा न हो। लाउडस्पीकर और स्टंटबाजी पर सख्ती सीएम योगी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर की आवाज तय मानकों के भीतर ही रहनी चाहिए. यदि कहीं नियमों का उल्लंघन होता है, तो तुरंत कार्रवाई करते हुए लाउडस्पीकर हटाए जाएं. इसके साथ ही उन्होंने बाइक स्टंटबाजी पर भी सख्त नाराजगी जताई. अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सड़कों पर इस तरह की गतिविधियों को तुरंत रोका जाए और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए. बैठक में चेन स्नेचिंग की बढ़ती घटनाओं पर भी चिंता जताई गई. मुख्यमंत्री ने पीआरवी-112 वाहनों की गश्त बढ़ाने और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि पुलिस की मौजूदगी ऐसी होनी चाहिए कि अपराधी वारदात करने से पहले ही डर जाएं। एलपीजी सप्लाई पर भी सरकार सख्त मुख्यमंत्री ने एलपीजी गैस की आपूर्ति को लेकर भी अधिकारियों को निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर आम जनता पर नहीं पड़ना चाहिए. कहीं भी कृत्रिम कमी, जमाखोरी या कालाबाजारी की शिकायत मिलती है, तो दोषियों पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए। राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे की तैयारी अयोध्या और मथुरा-वृंदावन में राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई. मुख्यमंत्री ने संबंधित जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी तैयारियां तय प्रोटोकॉल के तहत पूरी की जाएं और किसी भी स्तर पर चूक न हो. मुख्यमंत्री ने निराश्रित गोवंश के संरक्षण को लेकर भी अधिकारियों को निर्देशित किया. उन्होंने कहा कि गो-आश्रय स्थलों में व्यवस्थाएं मजबूत की जाएं, समय पर धनराशि जारी हो और चारे सहित सभी जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए. बैठक से पहले पुलिस महानिदेशक ने जानकारी दी कि चैत्र नवरात्र, ईद और रामनवमी के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल पूरी तरह तैयार है. संवेदनशील इलाकों में फुट पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।  

मुकेश मल्होत्रा विजयपुर विधायक बने रहेंगे, लेकिन राज्यसभा में वोट का हक नहीं, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

श्योपुर मध्यप्रदेश के श्योपुर की विजयपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. इस सीट को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा की विधायकी को बरकरार रखते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया है. हाईकोर्ट ने उपचुनाव में दूसरे नंबर पर रहे रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया था. विधायक बने रहेंगे मल्होत्रा हाईकोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा के निर्वाचन को शून्य घोषित कर रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया था. इसके बाद मुकेश मल्होत्रा ने हाईकोर्ट में आवेदन देकर अपील के लिए समय मांगा था. इसके बाद हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि मुकेश मल्होत्रा के पास सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए 15 दिन का समय है. मुकेश मल्होत्रा को विधायकी बचाने के लिए 20 मार्च तक सुप्रीम कोर्ट से स्टे लाना होगा. अब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लगा दिया है तो मुकेश मल्होत्रा विधायक बने रहेंगे.  सुप्रीम कोर्ट में मुकेश मल्होत्रा का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने दलीलें पेश कीं, जिसके बाद अदालत ने मल्होत्रा को राहत दी। सुप्रीम कोर्ट की दो प्रमुख शर्तें जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की डबल बेंच ने मुकेश मल्होत्रा को विधायक के रूप में जारी रखने की अनुमति तो दी है, लेकिन अंतिम फैसला आने तक ये पाबंदियां भी लगाई हैं… वोटिंग राइट नहीं: मुकेश मल्होत्रा फिलहाल राज्यसभा के लिए मतदान नहीं कर सकेंगे। ऐसे में अब मुकेश जून में होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए वोट नहीं डाल पाएंगे। वेतन पर रोक: जब तक कोर्ट इस मामले में अपना अंतिम निर्णय नहीं सुना देता, तब तक उन्हें विधायक के रूप में मिलने वाला वेतन और भत्ते नहीं दिए जाएंगे। हालांकि, उन्हें विधायक निधि मिलेगी या नहीं…यह अभी साफ नहीं हुआ है। वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने बताया कि अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी। मुकेश और रामनिवास दोनों ने बदली थी पार्टी पूर्व राज्यमंत्री और आदिवासी नेता मुकेश मल्होत्रा ने 2 मई 2024 को कांग्रेस जॉइन की थी। उन्होंने मुरैना जिले में आयोजित प्रियंका गांधी की चुनावी सभा में सदस्यता ली। विधानसभा चुनाव–2023 में मुकेश मल्होत्रा विजयपुर सीट से निर्दलीय मैदान में उतरे थे, तब पूरे क्षेत्र के आदिवासियों ने उनका साथ दिया था। उन्हें 45 हजार वोट मिले थे। मुकेश विजयपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह पहले में बीजेपी में थे, तब सरकार ने उन्हें सहारिया प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया था। दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री बनाया था। विधानभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने 2023 के चुनाव से पहले भाजपा का साथ छोड़ दिया था। दरअसल, विजयपुर विधानसभा क्षेत्र में सहारिया आदिवासी समाज के 70 हजार से ज्यादा वोट हैं। कांग्रेस ने आदिवासी वोटों को ध्यान में रखकर मुकेश को उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया था।

भंडारा स्थलों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों व सार्वजनिक स्थानों पर सफाई, डस्टबिन और जनसुविधाओं का विस्तार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अयोध्या आगमन को भव्य बनाएगी योगी सरकार  -राम यंत्र स्थापना को लेकर नगर निगम ने कीं व्यापक तैयारियां -मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित अयोध्या बनाने हेतु विशेष अभियान –  राम जन्मभूमि मंदिर परिसर, घाटों व प्रमुख धार्मिक स्थलों पर विशेष स्वच्छता और सौंदर्यीकरण अभियान -प्रस्तावित मार्गों, अंडरपासों और चौराहों पर हाईटेक सफाई, एंटी स्मॉग गन व जल छिड़काव की व्यवस्था -श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, वाटर कूलर, वाटर कियोस्क और प्रकाश व्यवस्था की व्यापक सुविधा -आवारा पशुओं पर नियंत्रण, अतिक्रमण हटाने और भीड़भाड़ वाले स्थलों पर विशेष प्रबंधन योजना -भंडारा स्थलों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों व सार्वजनिक स्थानों पर सफाई, डस्टबिन और जनसुविधाओं का विस्तार अयोध्या राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अयोध्या आगमन को लेकर योगी सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। राष्ट्रपति 19 मार्च को हिंदू नववर्ष (वर्ष प्रतिपदा) और चैत्र नवरात्रि के पहले दिन वह रामनगरी पहुंचेंगी। यहां राम जन्मभूमि मंदिर परिसर में राम यंत्र की स्थापना करेंगी। साथ ही वैदिक अनुष्ठानों में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेंगी। यह दौरा राम मंदिर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ेगा, क्योंकि राम यंत्र की स्थापना मंदिर के द्वितीय तल पर होगी, जो आध्यात्मिक और वास्तुशास्त्रीय दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है।    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के व्यक्तिगत निर्देशन में अयोध्या को स्वच्छ, सुरक्षित, सुव्यवस्थित और भव्य बनाने का व्यापक अभियान चल रहा है। नगर निगम, जिला प्रशासन, पुलिस और अन्य विभाग मिलकर दिन-रात काम कर रहे हैं ताकि राष्ट्रपति के आगमन के साथ ही श्रद्धालुओं को भी कोई असुविधा न हो। अयोध्या को स्वच्छ और सुंदर बनाने का संकल्प अब और मजबूत हो गया है, क्योंकि यह दौरा केवल एक आधिकारिक यात्रा नहीं, बल्कि हिंदू नववर्ष के उत्सव और राम मंदिर की पूर्णता का प्रतीक बन रहा है। अयोध्या नगर निगम ने राष्ट्रपति के प्रस्तावित मार्गों, राम जन्मभूमि मंदिर परिसर, सरयू घाटों और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर विशेष स्वच्छता एवं सौंदर्यीकरण अभियान छेड़ा है। पूरे नगर निगम क्षेत्र में विशेष सफाई अभियान चल रहा है, जिसमें स्वीपिंग मशीनों से सड़कों की नियमित सफाई शामिल है। सरयू तट पर जेटिंग मशीनों से घाटों की गहन धुलाई की जा रही है, ताकि स्नान घाट पूरी तरह स्वच्छ और आकर्षक दिखें। एंटी स्मॉग गन कर रहा धूल नियंत्रण प्रमुख चौराहों और अंडरपासों जैसे एयरपोर्ट अंडरपास, महोवरा अंडरपास, साकेत पेट्रोल पंप अंडरपास, अयोध्या धाम मेला क्षेत्र आदि पर हाईटेक सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। धूल नियंत्रण के लिए एंटी-स्मॉग गन से पानी का छिड़काव किया जा रहा है, जिससे हवा स्वच्छ रहे और यात्रा आरामदायक हो। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है। नगर निगम क्षेत्र में कुल 81 वाटर कूलर लगाए गए हैं, जिनमें अयोध्या धाम क्षेत्र में 47 और फैजाबाद क्षेत्र में 31 शामिल हैं। इसके अलावा 25 वाटर कियोस्क स्थापित किए गए हैं। अयोध्या धाम में 18 और फैजाबाद में 7 स्थापित किए गए हैं। ये सभी 24×7 निःशुल्क शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराएंगे। सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थलों और भंडारा स्थलों पर वाटर टैंकर भी तैनात रहेंगे। फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने का अभियान तेज आवारा पशुओं, खासकर गोवंश, पर सख्त नियंत्रण के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। इन टीमों द्वारा आवारा पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में पहुंचाया जाएगा, ताकि सड़कों पर कोई बाधा न रहे। फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने का अभियान तेज है, जिससे पैदल यात्रियों को सुगम मार्ग मिले। बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन, धर्मशालाएं, रेस्टोरेंट, होमस्टे और अन्य भीड़भाड़ वाले स्थलों पर विशेष सफाई और प्रबंधन योजना लागू है। पॉलीथीन मुक्त अयोध्या बनाने के लिए जन-जागरूकता अभियान   नागेश्वर नाथ मंदिर, हनुमानगढ़ी और अन्य प्रमुख मठ-मंदिरों के आसपास उत्कृष्ट सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। भंडारा स्थलों पर नियमित सफाई, डस्टबिन की पर्याप्त व्यवस्था और जनसुविधाओं का विस्तार किया गया है। पॉलीथीन मुक्त अयोध्या बनाने के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। पब्लिक एड्रेस सिस्टम और वेरिएबल मैसेजिंग सिस्टम के माध्यम से देशभक्ति गीतों के साथ स्वच्छता, अतिक्रमण न करने और पॉलीथीन मुक्त रहने के संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं। घाट और अंडरपासों पर विशेष लाइटिंग प्रकाश व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। संत तुलसीदास घाट, सरयू स्नान घाट और विभिन्न अंडरपासों पर विशेष लाइटिंग की गई है, ताकि शाम के समय भी क्षेत्र सुरक्षित और आकर्षक लगे। सफाई कर्मचारियों की तैनाती राष्ट्रपति के आगमन के मद्देनजर प्रस्तावित मार्गों और आसपास के क्षेत्रों में लगभग 500 सफाई कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। ये कर्मचारी राष्ट्रपति के प्रस्थान तक निरंतर सफाई कार्य सुनिश्चित करेंगे। नगर निगम के अधिकारियों द्वारा उनकी ड्यूटी का पर्यवेक्षण किया जा रहा है, ताकि कोई चूक न हो। श्रद्धालु लेकर जाएंगे अच्छा अनुभव : नगर आयुक्त नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार ने बताया कि यह दौरा राम मंदिर की भव्यता को नई ऊंचाई देगा। प्रदेश सरकार का प्रयास है कि अयोध्या न केवल राष्ट्रपति के स्वागत में भव्य दिखे, बल्कि हर आने वाले श्रद्धालु को ‘रामनगरी’ की दिव्यता और स्वच्छता का अनुभव हो। हमारी कोशिश है कि रामनवमी पर आने वाले सभी श्रद्धालु अच्छा अनुभव लेकर जाएं। नगर निगम का विशेष सफाई और सजावट अभियान महामहिम राष्ट्रपति के आगमन के मद्देनजर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर नगर निगम अयोध्या ने व्यापक तैयारियां कीं हैं। एक सप्ताह के लिए विशेष सफाई अभियान चलाया गया, जिसमें सरयू तट से लेकर पूरे नगर क्षेत्र में सफाई, फॉगिंग एवं एंटी लार्वा का छिड़काव कराया गया। पेयजल की व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए सभी वाटर कियास्क, वाटर एटीएम, वॉटर टैंक की सफाई एवं मरम्मत कराकर इस दौरान आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के उपयोग लायक बनाया गया है। इसके साथ ही शहर के विभिन्न चौराहों, पार्को एवं महापुरुषों की मूर्तियों को सजाने का प्रबंध किया गया है। साढ़े आठ किलोमीटर लंबे आवागमन मार्ग को जगह-जगह फूलों, एवं हरियाली के प्रतीक पेड़-पौधों से सजाया गया है। स्वागत के लिए खड़े होने वाले नौनिहालों की सुविधा के लिए सफाई, पेयजल के विशेष इंतजाम किए गए हैं। देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालु अयोध्या की आध्यात्मिक आभा के साथ ही विकास, सफाई, पेयजल व्यवस्था सहित अन्य कार्यों के लिए हो रहे नवाचारों से प्रेरणा लें। इसका पूरा प्रयास किया जा रहा है। -महंत गिरीश पति त्रिपाठी, महापौर नगर निगम अयोध्या

धुरंधर 2 का प्रीव्यू हिट, पहली फिल्म की ओपनिंग को पछाड़ते हुए बना नया रिकॉर्ड!

मुंबई साढ़े तीन महीने के इंतजार के बाद ‘धुरंधर 2’ फाइनली थिएटर्स में पहुंच चुकी है. दिसंबर 2025 में ‘धुरंधर’ देखने के बाद से ही पब्लिक इसके सीक्वल के लिए तैयार बैठी थी, जिसका असर एडवांस बुकिंग पर नजर आया. ‘धुरंधर 2’ ने गुरुवार की रिलीज से पहले, बुधवार शाम को हुए प्रीव्यू शोज से ही बॉक्स ऑफिस पर तूफानी शुरुआत कर दी है. इसने आते ही ‘स्त्री 2’ का प्रीव्यूज का रिकॉर्ड मीलों पीछे छोड़ दिया है।  ‘धुरंधर 2’ का प्रीव्यू कलेक्शन 19 मार्च ‘धुरंधर 2’ की ऑफिशियल रिलीज डेट है, लेकिन इससे एक शाम पहले 18 मार्च की शाम को फिल्म के खास पेड प्रीव्यू शोज रखे गए थे. इन शोज को दर्शकों से शानदार रिस्पॉन्स मिला और एडवांस बुकिंग में ही प्रीव्यू शोज के लिए 42 करोड़ रुपये से ज्यादा ग्रॉस कलेक्शन हो चुका था. मगर ‘धुरंधर 2’ के प्रीव्यू शोज में कई जगह काफी पंगे हुए. हमारी अपनी जानकारी में कई थिएटर्स ने मेकर्स की तरफ से कंटेंट लेट डिलीवर होने की बात कही।  इस देरी की वजह से कई स्क्रीन पर फिल्म के शोज पूरी तरह कैंसिल रहे. कई स्क्रीन पर शोज इंटरवल से आगे नहीं बढ़ पाए, तो कई जगह स्क्रीन पर चलने वाले दो शोज में से एक चला और एक कैंसिल करना पड़ा. हालांकि, जहां भी फिल्म के शोज कैंसिल हुए वहां थिएटर्स ने दर्शकों को रिफंड देने में कोई कोताही नहीं बरती. इन रिफंड्स की वजह से फाइनल रिपोर्ट्स में कलेक्शन उससे कम नजर आएगा जितना अनुमान लगाया जा रहा था. फिर भी ये माना जा सकता है कि प्रीव्यू शोज से ‘धुरंधर 2’ ने कम से कम 35 करोड़ ग्रॉस कलेक्शन हर हाल में किया है। प्रीव्यू कलेक्शन से ‘धुरंधर 2’ ने बनाया रिकॉर्ड बॉलीवुड फिल्मों में प्रीव्यू शोज से सबसे ज्यादा कलेक्शन का रिकॉर्ड ‘स्त्री 2’ (2024) ने बनाया था. इसके प्रीव्यू शोज ने करीब 11 करोड़ ग्रॉस कलेक्शन किया था. यानी ‘धुरंधर 2’ ने प्रीव्यू शोज में इससे तीन गुना कलेक्शन किया है. अगर कैंसिल शोज के लिए बहुत ज्यादा रिफंड्स भी हुए हैं, तब भी फाइनल रिपोर्ट्स में ‘धुरंधर 2’ के प्रीव्यूज का कलेक्शन ‘स्त्री 2’ से कम से कम दोगुना तो जरूर नजर आएगा। प्रीव्यू शोज से ‘धुरंधर 2’ ने कितना तगड़ा कलेक्शन किया है, ये एक और बात से समझ आता है. दिसंबर 2025 में आई ‘धुरंधर’ के लिए भी क्रेज कम नहीं था और इस फिल्म ने ओपनिंग डे पर करीब 33 करोड़ ग्रॉस कलेक्शन किया था. ‘धुरंधर 2’ के सिर्फ प्रीव्यू शोज का कलेक्शन ही ‘धुरंधर’ के ओपनिंग डे से ज्यादा हुआ है। प्रीव्यू शोज से हुआ ये तगड़ा कलेक्शन बताता है कि ‘धुरंधर 2’ का क्रेज किस लेवल पर है. गुरुवार को फिल्म के रिलीज डे के लिए तगड़ी बुकिंग है और फर्स्ट डे कलेक्शन के कई रिकॉर्ड टूटने वाले हैं. ये क्रेज आदित्य धर की शानदार फिल्ममेकिंग के लिए है, जिन्होंने पहली फिल्म में ही दर्शकों को साढ़े तीन घंटे बांधकर रखा था. ‘धुरंधर 2’ पहली फिल्म से भी थोड़ी लंबी है, लेकिन जनता में इसका क्रेज ऐसा है कि लोग कमर कसकर थिएटर्स पहुंचने लगे हैं।    

Stock Market Crash: तेल युद्ध में सेंसेक्स 1900 अंक गिरा, जापान से कोरिया तक शेयर बाजार में कोहराम

मुंबई  शेयर बाजार में बीते तीन दिन से जारी तेजी पर ब्रेक (Stock Market Crash) लग गया है. मिडिल-ईस्ट में जारी जंग अब एक बड़े तेल युद्ध (Oil War) का रूप लेती जा रही है. खाड़ी देशों में मौजूद तेल-गैस फील्ड्स पर दनादन मिसाइल अटैक होने से इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल के दाम में आग लग गई है और अचानक Brent Crude Price 113 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. इसके चलते एशियाई शेयर बाजारों में कोहराम मचा नजर आया, तो भारतीय शेयर बाजार खुलने के साथ ही क्रैश हो गया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स इंडेक्स (BSE Sensex) गुरुवार को ओपनिंग के साथ ही 1900 अंक का गोता लगा गया. वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (Nifty) भी 550 अंक से ज्यादा टूटकर ओपन हुआ। खुलते ही क्रैश हुए सेंसेक्स-निफ्टी  सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होने पर बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 76,704 की तुलना में फिसलकर 74,750 पर ओपन हुआ और फिर शुरुआती कुछ मिनटों में ही ये गिरकर 74,685 तक टूट गया. सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलते एनएसई निफ्टी का भी ऐसा ही बुरा हाल नजर आया और ये अपने पिछले बंद 23,777 की तुलना में बड़ी गिरावट लेकर 23,197 पर खुला। विदेशी बाजारों में भी मचा कोहराम भारतीय शेयर बाजार में गिरावट के संकेत पहले से ही विदेशों से मिल रहे थे. दरअसल, ईरान के कतर में स्थित सबसे बड़े एलएनजी प्लांट पर हमले और खाड़ी देशों के काउंटर अटैक के चलते अचानक क्रूड की कीमत तेज रफ्तार से भागते हुए 113 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई. इससे बाजारों की चिंता बढ़ी और एशियाई बाजारों में कोहराम मच गया। जापान का निक्केई इंडेक्स 1500 अंक से ज्यादा टूटकर कारोबार कर रहा था, तो हांगकांग का हैंगसेंग 500 अंक से ज्यादा की गिरावट लिए नजर आया. साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स भी 1.50 फीसदी से ज्यादा फिसला. इसके अलावा अन्य विदेशी बाजार भी लाल रंग में रंगे हुए नजर आए। सबसे ज्यादा बिखरे ये 10 शेयर लंबी गिरावट के बाद शेयर बाजार में बीते तीन दिनों से रौनक देखने को मिल रही थी, लेकिन मिडिल ईस्ट युद्ध में वो भी साफ हो गई और फिर से निवेशकों में भगदड़ नजर आई. गुरुवार को शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा बिखरने वाले शेयरों को देखें, तो बीएसई लार्जकैप में शामिल HDFC Bank Share (4.50%), LT Share (3.50%), Eternal Share (3%), Bajaj Finance Share (2.80%), Axis Bank Share (2.75%), Asian Paints Share (2.60%), Kotak Bank Share (2.56%), M&M Share (2.40%), Adani Ports Share (2.35%) और IndiGo Share (2.30%) टूटकर कारोबार कर रहे थे। उछल पड़ा बाजार के डर का पैमाना शेयर बाजार में गुरुवार को आई इस बड़ी गिरावट के बीच सबसे ज्यादा बैंकिंग और ऑटो शेयर बिखरे हुए नजर आए हैं. Nifty Bank अपनी ओपनिंग के साथ ही करीब 3 फीसदी के आसपास टूट गया, तो वहीं निफ्टी ऑटो में भी लगभग इतनी ही गिरावट देखने को मिली है। खात बात ये है कि मिडिल-ईस्ट में Oil War तेज होने के चलते शेयर बाजार के डर के पैमाने यानी India VIX में अचानक उछाल आया है, जो बीते तीन दिनों से लगातार गिर रहा था. इसमें एकदम से 15% के आसपास का उछाल आ गया, जो बाजार में आने वाले दिनों में तगड़े उतार-चढ़ाव को दर्शाता है।

अमेरिकी आर्मी बेस में रुबियो और रक्षा मंत्री हेगसेथ के पास मंडराया संदिग्ध ड्रोन

वाशिंगटन पश्चिम एशिया में जंग जारी है. अमेरिका और इजरायल की सेनाएं ईरान के शहरों, सैन्य ठिकानों और ऑयल फील्ड्स पर बम के रूप में तबाही बरसा रही हैं. वहीं,  ईरान युद्ध के बीच अब एक ऐसी घटना हुई है, जिसे लेकर खाड़ी देशों से बहुत दूर अमेरिका में भी हड़कंप मच गया है. अमेरिकी सेना हाईअलर्ट पर आ गई है। दरअसल, अमेरिका के एक आर्मी बेस पर ड्रोन मंडराता दिखा है. यह ड्रोन जिस आर्मी बेस पर मंडरा रहा था, उस बेस पर तब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दो मजबूत और प्रभावशाली चेहरे मौजूद थे. वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पेटे हेगसेथ तब उसी बेस पर मौजूद थे। सऊदी का धैर्य समाप्त? ईरान को प्रिंस ने दी सख्त चेतावनी, मिसाइल-ड्रोन हमलों के बाद पश्चिम एशिया में जारी जंग अब एक नए मोड़ पर पहुंचती दिख रही है. ईरान के लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों से खाड़ी देशों की चिंता बढ़ गई है, और अब सऊदी अरब के सब्र का बांध भी टूटता नजर आ रहा है. सऊदी के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद ने ईरान को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि अब उनके देश और उसके सहयोगियों की “सहनशक्ति” खत्म हो रही है। रियाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रिंस फैसल ने साफ कहा कि ईरान को तुरंत अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना चाहिए. उन्होंने इशारों में यह भी जता दिया कि अगर हमले नहीं रुके, तो सऊदी अरब और उसके साझेदार जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगे। प्रिंस फैसल ने कहा, “हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि हमारे पास बहुत बड़ी क्षमता और ताकत है. अगर हम चाहें, तो उसका इस्तेमाल कर सकते हैं.” हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि कब और किन हालात में सऊदी जवाब देगा, लेकिन उनके बयान से साफ है कि अब स्थिति बेहद संवेदनशील हो चुकी है। ईरानी गैस फील्ड पर हमले के बाद मिडल ईस्ट में ‘तेल युद्ध’, क़तर और UAE का काउंटर अटैक ईरान पर यूएस-इज़रायल के हमले के बाद बीसवें दिन भी मिडिल ईस्ट में भयानक जंग जारी है. ईरान की टॉप लीडरशिप बड़ा नुक़सान हुआ है लेकिन तेहरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों और इज़रायल की तरफ़ लगातार मिसाइलें दाग रहा है. इधर से इज़रायल की तरफ़ से भी एयर स्ट्राइक जारी है. मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध अब सिर्फ सैन्य टकराव नहीं रहा, बल्कि बीते 24 घंटों में यह सीधे-सीधे ‘ऑयल वॉर’ में बदल गया है. क्योंकि इस जंग में एनर्जी ठिकानों पर सीधे हमले हो रहे हैं, जिसका असर दुनिया के कई अन्य इलाकों में भी पड़ा है. ऑयल की ग्लोबल सप्लाई भी बाधित हुई है और तेल की क़ीमतों में भारी उछाल आया है.

Gold-Silver ETFs में भारी क्रैश, 2 महीने में 40% रिटर्न घटा; निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?

मुंबई  कुछ महीने पहले गोल्‍ड-सिल्‍वर की खूब चर्चा हो रही थी. हर छोटा, बड़ा निवेशक सोना-चांदी खरीदने की बातें कर रहा था. उसमें भी ज्‍यादातर लोग सोना और चांदी को डिजिटल खरीदने की सलाह दे रहे थे, चाहे वह कमोडिटी एक्‍सपर्ट्स हो या ना… जिसका नतीजा ये रहा कि बहुत से निवेशकों ने अपने शेयरों में लगाया पैसा या फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट में लगाया पैसा निकालकर Gold-Silver ईटीएफ खरीदे। अगर जनवरी में खरीदे गए अभी भी इनके पास गोल्‍ड और सिल्‍वर के ईटीएफ हैं, तो अब ये फंस चुके हैं. क्‍योंकि जनवरी से लेकर अभी तक इन ETFs में भारी गिरावट देखने को मिली है. ये ईटीएफ अभी तक 40 फीसदी तक टूट चुके हैं. जबकि निवेशकों को उम्‍मीद थी कि ईरान-अमेरिका के बीच जंग शुरू होने के बाद इनमें तेजी आएगी, लेकिन ठीक इसके उल्‍टा हुआ है और इन मेटल्‍स के ईटीएफ में तेज गिरावट आई है। गोल्‍ड-सिल्‍वर ETFs में इतनी गिरावट क्‍यों आई?  ऐसा माना जाता है कि कोई भी जंग निवेशकों को सेफ असेट की ओर आकर्षित करती है, लेकिन ईरान-अमेरिका के बीच जंग ने सेफ असेट यानी सोना-चांदी के भाव को गिराया है. इसी कारण गोल्‍ड-सिल्‍वर ETFs में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है. एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि सोना और चांदी में गिरावट डॉलर में मजबूती के कारण हुआ है     होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण तेल की कीमतों में इजाफा देखने को मिला है. ब्रेंट क्रूड ऑयल अभी 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है. इस कारण ग्‍लोबल महंगाई का खतरा पैदा हुआ है. ऐसे में निवेशक सुरक्षित मुद्रा ‘डॉलर’ को मान रहे हैं, जिस कारण डॉलर में तेजी है.      मजबूत डॉलर और महंगाई, जंग के बीच भी सोने-चांदी में तेजी को रोक रहे हैं. वहीं फेडरल रिजर्व बैंक की ओर से भी रेट कटौती की उम्‍मीद नहीं दिखाई दे रही है, जो सोने-चांदी की कीमतों पर विपरीत असर डालते हैं. ऐसे में सोने-चांदी की चमक फीकी दिख रही है.      तीसरा बड़ा कारण, सोने-चांदी के ईटीएफ में तेजी रुक जाने से और बिकवाली के कारण निवेशक इन असेट को बेचकर बाहर निकल रहे हैं. ऐसे में Gold-Silver ETFs में डिस्‍काउंट्स है.  अब आगे क्‍या अनुमान है?  एक्‍सपर्ट्स की बातों को समराइज करें तो ये पता चलता है कि अगर अमेरिकी इकोनॉमी में मंदी का खतरा पैदा होता है तो सोने-चांदी के दाम में अच्‍छी तेजी आज सकती है, जिससे Gold-Silver ETFs के दाम में भी तेजी आ सकती है, लेकिन अगर अमेरिकी इकोनॉमी मजबूत होती है तो सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट आने से ये ईटीएफ के भाव भी गिरेंगे.  कमोडिटी एक्‍सपर्ट्स का यह भी मानना है कि ईरान-इजरायल जंग रुकने के बाद सोने और चांदी के भाव नीचे आ सकते हैं, जो एक बड़ा करेक्‍शन हो सकता है. वहीं कुछ एक्‍सपर्ट्स यह भी कह रहे हैं कि इस साल सोना-चांदी 15 से 20 फीसदी का रिटर्न दे सकते हैं.  रिकॉर्ड हाई से कितना टूटे गोल्‍ड-सिल्‍वर ईटीएफ?  Nippon India Silver ETF 29 जनवरी को 360 रुपये पर था, जहां से यह करीब 40 फीसदी गिरकर 235 रुपये पर कारोबार कर रहा है. Nippon India Gold ETF 29 जनवरी को अपने रिकॉर्ड हाई 148 रुपये से 15 फीसदी नीचे है और 127 रुपये पर कारोबार कर रहा है. इसी तरह, Tata Silver ETF 32%, ICICI सिल्‍वर ईटीएफ करीब 35 फीसदी, टाटा गोल्‍ड ईटीएफ और ICICI गोल्‍ड ईटीएफ 15% तक गिरे हैं.  रिकॉर्ड हाई से कितने सस्‍ते हुए सोना-चांदी?  MCX पर चांदी का रिकॉर्ड हाई लेवल 4.20 लाख रुपये प्रति किलो है और सोने का भाव 1.93 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम है. 18 मार्च को चांदी की कीमत 2.52 लाख रुपये है और सोना 1.55 लाख रुपये है. ऐसे में चांदी 1.68 लाख रुपये और सोना 38 हजार रुपये सस्‍ता है. 

यूपी-केरल में गहराया IAS संकट: देशभर में 1300 पद खाली, जानें किस राज्य का क्या हाल

नई दिल्ली देश इस समय भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी आईएएस की कमी से जूझ रहा है। मजूदा समय में देश में IAS के 1300 पद खाली हैं। आईएएस अधिकारियों की कमी के कारण प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। सबसे ज्यादा कमी उत्तर प्रदेश में 81 अधिकारियों की कमी है। जबकि दक्षिणी राज्य केरल भी 72 अफसरों की कमी से जूझ रहा है। यह स्थिति केंद्र और राज्यों की प्रशासनिक क्षमता पर असर डाल रही है। राज्यसभा की संसदीय समिति (Parliamentary Committee of Rajya Sabha) ने 25% रिक्त पदों को तुरंत भरने, डेटा आधारित भर्ती प्रक्रिया अपनाने और अफसरों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए वेलफेयर प्लान लागू करने की सिफारिश की है। राज्यसभा की संसदीय समिति ने सरकार से कहा है कि IAS कैडर की 25% रिक्तियां तुरंत भरी जाएं। केंद्र शासित प्रदेशों और दिल्ली में प्रशासनिक जिम्मेदारियां ज्यादा हैं। छोटे कैडर वाले राज्यों के लिए अलग भर्ती रणनीति बने। पूर्वोत्तर राज्यों जैसे नागालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा और सिक्किम में स्थिति और असंतुलित बताई गई है। समिति ने कहा है कि भर्ती प्रक्रिया डेटा आधारित हो. सेवानिवृत्ति और जरूरत को ध्यान में रखा जाए और वार्षिक भर्ती योजना साफ हो। साथ ही चंद्रमोली समिति की सिफारिशों को लागू करने की बात भी कही गई है। आईएएस अफसरों के लिए वेलफेयर प्लान की जरूरत है। रिपोर्ट में अफसरों के काम के दबाव पर भी चिंता जताई गई है। सुझाव दिए गए हैं कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए काउंसलिंग सिस्टम बने। लंबे समय तक अतिरिक्त जिम्मेदारी पर नजर रखी जाए और बार-बार ट्रांसफर से होने वाले तनाव को कम किया जाए। कुल पद और भर्ती की स्थिति कुल पद: 6,877 भरे हुए पद: 5,577 सीधी भर्ती के पद: 4,059 पदोन्नति के पद: 1,518 राज्यों में IAS पदों की स्थिति (चयनित आंकड़े) AGMUT: 542 पद, कमी 136 (25.09%) बिहार: 359 पद, कमी 56 (15.60%) गुजरात: 313 पद, कमी 58 (18.53%) हरियाणा: 215 पद, कमी 43 (20.00%) झारखंड: 224 पद, कमी 47 (20.98%) केरल: 231 पद, कमी 74 (32.03%) महाराष्ट्र: 435 पद, कमी 76 (17.47%) ओडिशा: 248 पद, कमी 63 (25.40%) राजस्थान: 332 पद, कमी 64 (19.28%) तमिलनाडु: 394 पद, कमी 51 (12.94%) उत्तर प्रदेश: 652 पद, कमी 81 (12.42%) पश्चिम बंगाल: 378 पद, कमी 75 (19.84%) कुल कमी: 1,300 (18.90%) रिपोर्ट में ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत तनाव प्रबंधन मॉड्यूल जोड़ने की भी बात रिपोर्ट में ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत तनाव प्रबंधन मॉड्यूल जोड़ने की भी बात कही गई है। इसके अलावा, प्रशासन में AI के इस्तेमाल को लेकर सुरक्षित और जवाबदेह सिस्टम बनाने की जरूरत बताई गई है। कुल मिलाकर, देश में IAS अफसरों की कमी अब एक बड़ा प्रशासनिक मुद्दा बनती जा रही है।

केदारनाथ और हेमकुंड साहिब यात्रा के लिए 160KM लंबा रोपवे नेटवर्क, 2026 में शुरू होंगे चार प्रोजेक्ट्स

 देहरादून उत्तराखंड में पर्यटन और तीर्थ यात्रा को आसान बनाने के लिए सरकार ने बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है। राज्यभर में 51 रोपवे प्रोजेक्ट्स विकसित किए जाएंगे, जिनकी कुल लंबाई करीब 160.75 किलोमीटर होगी। 2026 से शुरू होंगे मेगा प्रोजेक्ट्स इन परियोजनाओं में से कुछ पर काम तेजी से चल रहा है, जबकि केदारनाथ और हेमकुंड साहिब सहित 4 बड़े रोपवे प्रोजेक्ट्स पर 2026 से निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी है। इंटरहेडिंग के बाद पूरे क्रम में समझें तो, कई अन्य प्रोजेक्ट्स अभी DPR और प्री-फिजिबिलिटी स्टडी के चरण में हैं, जिन्हें उत्तराखंड रोपवे डेवलपमेंट लिमिटेड के जरिए आगे बढ़ाया जा रहा है। दुर्गम इलाकों तक आसान होगी पहुंच उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड के इंफ्रास्ट्रक्चर निदेशक दीपक खंडूरी के अनुसार, रोपवे उन क्षेत्रों तक पहुंच का बेहतर विकल्प हैं जहां सड़क बनाना कठिन है। इससे तीर्थ यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। देहरादून-मसूरी रोपवे जल्द होगा शुरू देहरादून से मसूरी तक बनने वाला 5.5 किलोमीटर लंबा रोपवे प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है। करीब 285 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस प्रोजेक्ट का लगभग 70% काम पूरा हो चुका है। इस रोपवे में 10 यात्रियों की क्षमता वाले 71 केबिन होंगे और सफर करीब 20 मिनट में पूरा होगा। इसे इस साल के अंत तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।     5.5 किलोमीटर का देहरादून-मसूरी रोपवे: देहरादून के पुरकुल से मसूरी के लाइब्रेरी चौक तक बनने वाला यह रोपवे राज्य के प्रमुख प्रोजेक्ट्स में शामिल है। करीब 285 करोड़ रुपए की लागत से इसका निर्माण किया जा रहा है। परियोजना का लगभग 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इसमें 10 यात्रियों की क्षमता वाले 71 केबिन लगाए जाएंगे और देहरादून से मसूरी तक का सफर करीब 20 मिनट में पूरा होगा। इसे इस साल के अंत तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।     0.93 KM का ठुलीगाड़-पूर्णागिरी मंदिर रोपवे: चंपावत जिले में पूर्णागिरी मंदिर तक पहुंच आसान बनाने के लिए यह रोपवे बनाया जा रहा है। करीब 35 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना का निर्माण कार्य जारी है। इसे 30 मई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।     4.9 किलोमीटर का तपोवन-कुंजापुरी रोपवे: टिहरी में प्रस्तावित इस रोपवे के लिए मई 2025 में एक स्विस तकनीकी कंपनी को तकनीकी सहयोग के लिए चुना गया है। करीब 4.9 किलोमीटर लंबे इस रोपवे के लिए फिलहाल भूमि सर्वेक्षण और अंतिम मार्ग तय करने का काम चल रहा है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।     3.38 किलोमीटर का जानकीचट्टी-यमुनोत्री मंदिर रोपवे: यमुनोत्री धाम तक पहुंच आसान बनाने के लिए यह रोपवे बनाया जा रहा है। करीब 167 करोड़ रुपए की लागत वाली इस योजना के लिए फरवरी 2023 में निर्माण एजेंसी के साथ समझौता किया गया था। मार्ग के एलाइनमेंट में बदलाव के प्रस्ताव के कारण फिलहाल शासन स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। लक्ष्य है कि निर्माण पूरा कर 1 सितंबर 2027 तक रोपवे शुरू कर दिया जाए।     12.9 किलोमीटर का गौरीकुंड-केदारनाथ रोपवे: रुद्रप्रयाग जिले में बनने वाले इस रोपवे का ठेका अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड को दिया गया है। इसके लिए 9 नवंबर 2025 को अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। 4081.28 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना में कंपनी राज्य सरकार को राजस्व का 42 प्रतिशत हिस्सा देगी। इसका निर्माण कार्य मई 2026 में शुरू कर मई 2032 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।     12.4 किलोमीटर का गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब रोपवे: चमोली जिले में बनने वाले इस रोपवे का जिम्मा विश्व समुद्र इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा गया है। 2730.13 करोड़ रुपए की लागत वाली इस योजना में कंपनी सरकार को 45 प्रतिशत राजस्व देगी। इसका निर्माण कार्य मई 2026 में शुरू कर मई 2032 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उत्तराखंड के लिए गेम-चेंजर साबित होंगे रोपवे उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड के इंफ्रास्ट्रक्चर निदेशक दीपक खंडूरी ने इन परियोजनाओं के दूरगामी फायदों पर प्रकाश डाला है। उनके अनुसार रोपवे के माध्यम से उन दुर्गम पहाड़ियों तक आसानी से पहुंचा जा सकेगा, जहां सड़क मार्ग बनाना भौगोलिक और पर्यावरणीय दृष्टि से कठिन है। केदारनाथ, यमुनोत्री और हेमकुंड साहिब जैसे कठिन ट्रेक वाले स्थानों पर बुजुर्गों और बीमार यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक सफर मिलेगा। पहाड़ों पर वाहनों के धुएं से प्रदूषण बढ़ रहा है। प्रमुख रोपवे प्रोजेक्ट्स की झलक केदारनाथ रोपवे गौरीकुंड से केदारनाथ तक 12.9 किमी लंबा रोपवे बनाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 4081 करोड़ रुपये है और इसका ठेका Adani Enterprises Limited को दिया गया है। निर्माण कार्य मई 2026 से शुरू होकर 2032 तक पूरा होगा। हेमकुंड साहिब रोपवे गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक 12.4 किमी लंबा रोपवे बनेगा। इसकी लागत करीब 2730 करोड़ रुपये है और इसे 2032 तक पूरा करने का लक्ष्य है। यमुनोत्री रोपवे जानकीचट्टी से यमुनोत्री मंदिर तक 3.38 किमी लंबा रोपवे प्रस्तावित है। इसे 2027 तक शुरू करने की योजना है। अन्य प्रोजेक्ट्स टिहरी में तपोवन-कुंजापुरी रोपवे और चंपावत में पूर्णागिरी मंदिर रोपवे पर भी काम जारी है। कई परियोजनाएं सर्वे और योजना के चरण में हैं। पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा रोपवे प्रोजेक्ट्स से न केवल यात्रा आसान होगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही, पहाड़ों में वाहनों की संख्या कम होने से प्रदूषण में कमी आएगी। PPP मॉडल पर हो रहा निर्माण ये सभी परियोजनाएं पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित की जा रही हैं। इसमें निजी कंपनियां निवेश करती हैं और संचालन करती हैं, जबकि सरकार को तय हिस्सा राजस्व के रूप में मिलता है। इंटरहेडिंग के बाद पूरे क्रम में समझें तो, किसी भी रोपवे प्रोजेक्ट से पहले प्री-फिजिबिलिटी स्टडी और डीपीआर तैयार की जाती है, जिसके बाद निर्माण प्रक्रिया शुरू होती है। उत्तराखंड के लिए गेम-चेंजर योजना विशेषज्ञों का मानना है कि ये रोपवे प्रोजेक्ट्स उत्तराखंड के लिए गेम-चेंजर साबित होंगे। खासतौर पर बुजुर्गों और बीमार यात्रियों के लिए केदारनाथ और हेमकुंड साहिब जैसे कठिन रास्तों की यात्रा अब आसान और सुरक्षित हो जाएगी।

मध्य प्रदेश की महिलाएं बनीं लखपति दीदी, पिछले साल के मुकाबले 4 स्थानों की उन्नति

भोपाल  मध्य प्रदेश महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार के 31 दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में ‘लखपति दीदी’ योजना के तहत 22,77,814 महिलाएं सालाना एक लाख रुपये या उससे अधिक आय अर्जित कर रही हैं। इसी के साथ मध्य प्रदेश देश में सबसे ज्यादा ‘लखपति दीदी’ वाली सूची में चौथे स्थान पर पहुंच गया है। उल्लेखनीय है कि एक वर्ष पहले राज्य इस सूची में आठवें स्थान पर था। यह जानकारी संसद में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में सामने आई है। क्या है ‘लखपति दीदी’ योजना यह योजना ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इसके तहत स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, बाजार से जोड़ने की सुविधा और बैंक ऋण उपलब्ध कराया जाता है, ताकि वे सालाना न्यूनतम ₹1 लाख की आय हासिल कर सकें। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने 15 अगस्त 2023 को इस योजना की घोषणा की थी। शुरुआत में इसका लक्ष्य 2 करोड़ महिलाओं को लखपति बनाना था, जिसे बाद में बढ़ाकर 3 करोड़ कर दिया गया। ड्रोन तकनीक से बढ़ी कमाई मध्य प्रदेश ने आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने में भी बढ़त दिखाई है। ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के तहत राज्य को 34 ड्रोन मिले हैं, जिससे यह देश में तीसरे स्थान पर है। राज्य के 89 स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। ये महिलाएं अब खेतों में ड्रोन के जरिए तरल उर्वरक और कीटनाशकों का छिड़काव कर रही हैं, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी हो रही है। ड्रोन वितरण के मामले में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्य आगे हैं, लेकिन मध्य प्रदेश तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। वहीं, ड्रोन ट्रेनिंग के मामले में भी राज्य शीर्ष पांच में शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक और वित्तीय सहायता का यह संयोजन ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति बदलने में अहम भूमिका निभा रहा है। मध्य प्रदेश की यह उपलब्धि सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव का संकेत भी देती है। बड़ी संख्या में महिलाएं अब स्वरोजगार से जुड़ रही हैं और परिवार की आय में योगदान दे रही हैं। नमो ड्रोन दीदी को सरकार ने दिए 34 ड्रोन आधुनिक खेती और तकनीक के क्षेत्र में भी मध्य प्रदेश की महिलाएं पीछे नहीं हैं। ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के तहत मध्य प्रदेश को 34 ड्रोन उपलब्ध कराए गए हैं, जो इसे देश में तीसरे स्थान (आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के बाद) पर खड़ा करता है। एमपी के 89 स्वयं सहायता समूहों (SHG) की महिलाओं ने ड्रोन से संबंधित प्रमाणित तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जिससे वे अब खेतों में लिक्विड फर्टिलाइजर (तरल उर्वरकों) और कीटनाशकों का छिड़काव ड्रोन के जरिए कर रहीं हैं। क्या है ‘लखपति दीदी’ योजना? इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत हरेक महिला सदस्य को कम से कम चार कृषि ऋतुओं या व्यावसायिक चक्रों के आधार पर सालाना 1 लाख रुपये की न्यूनतम आय सुनिश्चित करने में सक्षम बनाना है । 2023 में पीएम ने किया था योजना का ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2023 को लाल किले की प्राचीर से ‘लखपति दीदी’ योजना की घोषणा की थी, जिसका लक्ष्य शुरुआती चरण में 2 करोड़ महिलाओं को लखपति बनाना था (बाद में इसे बढ़ाकर 3 करोड़ कर दिया गया)। कैसे काम करती है योजना इस पहल के तहत महिलाओं को वित्तीय सहायता, बाजार लिंकेज, कौशल विकास प्रशिक्षण और बैंक ऋण की सुविधा प्रदान की जाती है । इसमें ‘नमो ड्रोन दीदी’ जैसी सहायक योजनाएं भी शामिल हैं, जो महिलाओं को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से आय बढ़ाने में मदद करती हैं। नमो ड्रोन दीदी: राज्यों में ड्रोन वितरण (Top 5) (योजना के तहत दिए गए 500 ड्रोनों के आधार पर) टॉप – 5 राज्य (जहां सबसे ज्यादा ड्रोन दिए गए)     आंध्र प्रदेश: 96     कर्नाटक: 82     तेलंगाना: 72     मध्य प्रदेश: 34     उत्तर प्रदेश: 32 नमो ड्रोन दीदी को ड्रोन ट्रेनिंग देने वाले टॉप – 5 राज्य     कर्नाटक: 145     उत्तर प्रदेश: 128     आंध्र प्रदेश: 108     हरियाणा: 102     मध्य प्रदेश: 89 (इन राज्यों में महिला लाभार्थियों/ SHG को ड्रोन चलाने का सर्टिफिकेट मिला)

जल गंगा संवर्धन अभियान को सफल बनाने में स्थानीय निकायों की भूमिका अहम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जल गंगा संवर्धन अभियान को सफल बनाने के लिए स्थानीय निकाय हों सक्रिय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विक्रम संवत और नव वर्ष त्योहारों पर दी बधाई मं‍त्रि-परिषद की बैठक के पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव का संबोधन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में आगामी 19 मार्च से राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान प्रारंभ हो रहा है। प्रदेश के नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में अभियान का यह तीसरा वर्ष है। कुओं, बावड़ियों, नदियों के पुनरुद्धार के अभियान से सभी वर्गों को जोड़ने के लिए नगरीय निकाय और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय निकाय सक्रिय भूमिका का निर्वहन करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक प्रारंभ होने के पहले महत्वपूर्ण विषयों पर मंत्रीगण को जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान से जन-जन को जोड़कर इसे जन आंदोलन का रूप दिया जाए। समाज के प्रत्येक वर्ग के साथ सामाजिक संस्थाओं को अभियान से जोड़ा जाए। युवाओं को विशेष भागीदारी का अवसर दिया जाए। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में 3000 से अधिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन किया जा चुका है। गत वर्ष ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए 86 हजार से अधिक खेत तालाब और 550 से अधिक अमृत सरोवर बनाए गए। भू-जल संवर्धन के लिए एक लाख से अधिक कुओं का पुनर्भरण कार्य भी प्रारंभ किया गया। नदियों की निर्मलता के लिए प्रदेश की 57 प्रमुख नदियों और 194 प्रदूषण जल स्रोतों की पहचान कर उनके शोधन की पहल की गई। लगभग 145 नदियों के उद्गम क्षेत्र में हरित विकास के लिए गंगोत्री हरित योजना भी प्रारंभ की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आशा व्यक्त की कि जन भागीदारी से इस अभियान को सफल बनाया जाएगा। जल महोत्सव की गतिविधियों को सफल बनाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जल महोत्सव की गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। आगामी 22 मार्च तक जल महोत्सव के तहत विभिन्न कार्य हो रहे हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की भी जल संरक्षण कार्यो में महत्वपूर्ण भूमिका है। ‘हर घर जल’ के लिए मध्यप्रदेश के हित में नई दिल्ली में हुआ महत्वपूर्ण करारनामा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि केंद्रीय जल शक्ति और पेयजल मंत्रालय के साथ नई दिल्ली में आज एक महत्वपूर्ण करारनामा हुआ है, जिसके अंतर्गत पेयजल योजना के लिए पाइप लाइन बिछाने और हर व्यक्ति तक जल पहुंचाने के लिए मध्यप्रदेश और राजस्थान 2 राज्यों का चयन हुआ है। यह मध्यप्रदेश के लिए प्रतिष्ठा की बात है। इस अवसर पर प्रदेश की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री मती संपतिया उईके मंगलवार को नई दिल्ली में उपस्थित थीं। स्वच्छ जल प्रदाय के लिए वर्ष 2028 तक जल जीवन मिशन की अवधि बढ़ाने और जल जीवन मिशन 2.0 पुनर्गठित कर लागू करने की स्वीकृति दी गई है,जिसका लाभ मध्यप्रदेश को मिलेगा और ग्रामीण पेयजल आपूर्ति की व्यवस्थाओं को सशक्त टिकाऊ बनाने में सहयोग मिलेगा। किसान कल्याण वर्ष में विभागों की गतिविधियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान कल्याण वर्ष-2026 में 17 विभाग के सहयोग से वर्ष भर होने वाली विभिन्न गतिविधियों का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में किसानों के हित में अभिनव पहल की जा रही है। कृषि को लाभ का धंधा बनाने के लिए राज्य सरकार बहु आयामी प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री का 4-लेन निर्माण स्वीकृति के लिए माना आभार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय कैबिनेट द्वारा हाल ही में 3839 करोड़ रुपए की लागत से एनएच 752 डी पर बदनावर पेटलावद थांदला टिमरवानी सेक्शन में 4-लेन निर्माण की स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ की दृष्टि से यह स्वीकृति अत्यंत महत्वपूर्ण है। बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ प्रदेश के अनेक जिलों को मिलेगा। इंदौर पीथमपुर उज्जैन देवास के औद्योगिक इलाकों तक पहुंच को सुगम बनाया जा सकेगा। धार और झाबुआ जनजातीय बहुल जिलों के आर्थिक विकास में भी सहयोग मिलेगा। भावांतर योजना में सरसों को जोड़े जाने से किसानों को मिलेगी मदद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के किसानों के लिए भावांतर योजना में सरसों को शामिल करने को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि 7 लाख से अधिक सोयाबीन उत्पादक किसानों को सरकार 1500 करोड. रुपए की राशि भावांतर योजना में दे चुकी है। अब सरसों उत्पादक किसानों को भी योजना का लाभ मिलेगा। मध्यप्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने किसानों के हित में सबसे पहले सफलतापूर्वक भावांतर जैसी महत्वपूर्ण योजना लागू की है। सर्वाइकल कैंसर को रोकेगी वैक्सीन, मध्यप्रदेश में चल रहा अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सर्वाइकल कैंसर से 14 वर्ष और उससे अधिक उम्र की बेटियों को बचाने के लिए टीका लगाने का अभियान प्रदेश में चल रहा है। सर्वाइकल कैंसर से बेटियों को बचाने के लिए निःशुल्क वैक्सीन लगाई जा रही है। यह टीका पूरी तरह सुरक्षित है और इससे हमारी बेटियां आजीवन सुरक्षित जीवन जिएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी मंत्रियों से कहा कि वे अपने प्रभार के जिलों में इस महत्वपूर्ण अभियान की सतत समीक्षा करें। विक्रम संवत् वर्षारंभ की बधाइयां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आगामी 19 मार्च को गुड़ी पड़वा और विक्रम संवत वर्ष आरंभ होने की सभी मंत्रीगण को बधाई दी और प्रदेशवासियों की खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय नववर्ष के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम भी हो रहे हैं निश्चित ही इनसे जन-जन जुड़ता है। यह अवसर हमारे लिए महत्वपूर्ण है।  

इंदौर में खुले हवा पर टैक्स, निगम वसूलेगा MOS टैक्स, 4000 तक की अतिरिक्त लागत हो सकती है

इंदौर मकान बनाते समय व्यक्ति भूखंड के कुछ हिस्से को इसलिए खाली छोड़ता है ताकि उस रास्ते घर में हवा-पानी आ सके, लेकिन अब नगर निगम ने इसी खाली रास्ते (मार्जिनल ओपन स्पेस) (एमओएस) पर कर लगाने की तैयारी कर ली है। अगर ऐसा हुआ तो संपत्तिधारकों पर 500 रुपये से लेकर चार हजार रुपये प्रतिवर्ष का अतिरिक्त बोझ बढ़ जाएगा। इधर कांग्रेस ने इस प्रस्तावित कर का विरोध शुरू कर दिया है। मंगलवार को कांग्रेस पार्षदों ने निगमायुक्त क्षितिज सिंघल के कार्यालय का घेराव किया। उन्होंने मांग की कि एमओएस कर को रोका ए। ऐसा नहीं किया गया तो कांग्रेस आमजन के समर्थन में सड़क पर उतरेगी। कांग्रेस ने प्रदर्शन करते हुए निगमायुक्त को ज्ञापन सौंपा और कर को वापस लेने की मांग की। कांग्रेस ने निगमायुक्त को सौंपा ज्ञापन नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष और इंदौर शहर कांग्रेस के अध्यक्ष चिंटू चौकसे के नेतृत्व में कांग्रेस पार्षदों और पार्टी के अन्य नेताओं के साथ निगमायुक्त कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के जरिए कांग्रेस ने मांग रखी कि, मकानों में छोड़े गए खुले स्थान (एमओएस) पर टैक्स लगाने का फैसला सरासर गलत है। इसे वापस लिया जाना चाहिए। निगम इस टैक्स की वसूली को नहीं रोकेगा तो कांग्रेस आमजन के साथ सड़कों पर उतरकर इसका विरोध करेगी। गांधीवादी तरीके से विरोध की तैयारी उन्होंने कहा कि, निगम के सहायक राजस्व अधिकारी जहां भी इस खुले स्थान के टैक्स को वसूलने के लिए जाएंगे, कांग्रेसी वहां पहुंचकर उनका विरोध करेंगे। हमारा विरोध पूरी तरह से गांधीवादी और शांतिपूर्ण रहेगा। नगर निगम के माध्यम से हर मकान के खुले स्थान पर संपत्ति कर लगाना मनमानी है। ऐसी मनमानी का कांग्रेस हर स्तर पर विरोध करेगी। ज्ञापन देने वालों में पार्षद दीपू यादव, सीमा सोलंकी, सेफू वर्मा , सोनीला मिमरोट, राजू भदोरिया, अमित पटेल, सुदामा चौधरी, राजेश चौकसे आदि शामिल थे। वर्ष 2020 में मिली थी अनुमति राज्य शासन ने वर्ष 2020 में स्थानीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एमओएस टैक्स की अनुमति दी थी। हालांकि पिछले पांच वर्ष से इसे लागू नहीं किया जा सका।  

इंदौर मेट्रो की स्पीड की जांच में सीएमआरएस का अहम टेस्ट, 80 की स्पीड पर चार बार ब्रेक टेस्ट

इंदौर  सुपर कॉरिडोर से लेकर रेडिसन तक  80 की स्पीड से मेट्रो दौड़ी। चार बार मेट्रो को दौड़ाकर ब्रेक स्पीड टेस्ट किया गया। इसमें मेट्रो को 80 की स्पीड पर पहुंचाने के बाद रोक कर जांच की गई। दरअसल यह प्रक्रिया कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी (सीएमआरएस) नीलाभ्र सेनगुप्ता के निरीक्षण की प्रक्रिया का हिस्सा थी। इसके साथ ही सीएमआरएस का निरीक्षण पूरा हो गया। निरीक्षण रिपोर्ट के बाद सीएमआरएस एनओसी जारी करेंगे। ऐसे में संभावना है कि मार्च के आखरी तक शहर में मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू हो जाएगा। यह प्रक्रिया कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी (सीएमआरएस) नीलाभ्र सेनगुप्ता के निरीक्षण की प्रक्रिया का हिस्सा थी। इसके साथ ही सीएमआरएस का निरीक्षण पूरा हो गया। निरीक्षण रिपोर्ट के बाद सीएमआरएस एनओसी जारी करेंगे। ऐसे में संभावना है कि मार्च के आखरी तक शहर में मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू हो जाएगा। सीएमआरएस नीलाभ्र सेनगुप्ता अपने छह सदस्यों के दल के साथ मेट्रो के ग्यारह किमी लंबे रूट का निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण के तीसरे दिन  मेघदूत, विजयनगर और रेडिसन चौराहे पर बने मेट्रो स्टेशन का निरीक्षण किया। प्रत्येक स्टेशन पर एक-एक घंटे रुके। इस दौरान निकासी गेट, लिफ्ट, एस्कलेटर, पार्किंग एरिया, स्टेशन रूम, दिव्यांगों के लिए मौजूद सुविधाओं का निरीक्षण किया। इसके साथ ही मेट्रो डिपो में कंट्रोल कमांड सेंटर, सिग्नल सेंटर, डिपो में स्टेब्लिंग यार्ड की रेल लाइन का निरीक्षण किया। सीएमआरएस ने एमआर-10 पर बने इलेक्ट्रिक सब स्टेशन का निरीक्षण भी किया। सभी ग्यारह स्टेशन का निरीक्षण पूरा हो चुका है। 80 की स्पीड में चेक हुए ब्रेक शाम से रात तक दौड़ाई मेट्रो सुपर कॉरिडोर के स्टेशन नंबर-2 से रेडिसन चौराहा तक वायडक्ट पर मेट्रो को 80 किमी प्रतिघंटा की गति से दौड़ाई। स्टेशन निरीक्षण के बाद शाम से रात तक चार बार मेट्रो को दौड़ाया गया और स्पीड ब्रेक टेस्ट किया गया। 17 किमी पर संचालन जल्द होगा शुरू सीएमआरएस द्वारा मेट्रो का चार दिनी निरीक्षण प्रस्तावित था, लेकिन यह कार्य तीन दिन में पूरा कर लिया गया। बुधवार को सीएमआरएस दिल्ली रवाना हो जाएंगे। निरीक्षण के आधार पर सुझावों के साथ निरीक्षण रिपोर्ट सौंपेंगे। इसके बाद मेट्रो प्रबंधन उनके बताए गए सुझावों को पूरा करके रिपोर्ट भेजेगा। इसके बाद सीएमआरएस द्वारा मेट्रो के 11.5 किलोमीटर हिस्से पर कमर्शियल रन शुरू करने की एनओसी जारी की जाएगी। यह संभावना जताई जा रही है कि 26 मार्च के बाद मेट्रो का संचालन रेडिसन चौराहे तक हो सकेगा। इंदौर के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर गांधी नगर स्टेशन से स्टेशन नंबर-2 तक करीब छह किमी में पहले ही संचालन किया जा रहा है। अब स्टेशन नंबर-2 से रेडिसन चौराहा तक 11 किमी हिस्से में मेट्रो का निरीक्षण पूरा हो चुका है। एनओसी जारी होते ही 17 किमी लंबे रूट पर मेट्रो का संचालन होने लगेगा। स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं का जायजा सीएमआरएस नीलाभ्र सेनगुप्ता अपने छह सदस्यों के दल के साथ मेट्रो के ग्यारह किमी लंबे रूट का निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण के तीसरे दिन मंगलवार को मेघदूत, विजयनगर और रेडिसन चौराहे पर बने मेट्रो स्टेशन का निरीक्षण किया। प्रत्येक स्टेशन पर एक-एक घंटे रुके। इस दौरान निकासी गेट, लिफ्ट, एस्कलेटर, पार्किंग एरिया, स्टेशन रूम, दिव्यांगों के लिए मौजूद सुविधाओं का निरीक्षण किया। इसके साथ ही मेट्रो डिपो में कंट्रोल कमांड सेंटर, सिग्नल सेंटर, डिपो में स्टेब्लिंग यार्ड की रेल लाइन का निरीक्षण किया। सीएमआरएस ने एमआर-10 पर बने इलेक्ट्रिक सब स्टेशन का निरीक्षण भी किया। सभी ग्यारह स्टेशन का निरीक्षण पूरा हो चुका है। रात के अंधेरे में मेट्रो का ट्रायल बना आकर्षण शाम से रात तक दौड़ाई मेट्रो सुपर कॉरिडोर के स्टेशन नंबर-2 से रेडिसन चौराहा तक वायडक्ट पर मेट्रो को 80 किमी प्रतिघंटा की गति से दौड़ाई। स्टेशन निरीक्षण के बाद शाम से रात तक चार बार मेट्रो को दौड़ाया गया और स्पीड ब्रेक टेस्ट किया गया। रात्रि में मेट्रो को वायडक्ट पर चलता देखकर विजय नगर और एमआर-10 क्षेत्र में रहने और गुजरने वाले रुककर देखने लगे। एनओसी मिलते ही शुरू होगा 17 किमी पर संचालन सीएमआरएस द्वारा मेट्रो का चार दिनी निरीक्षण प्रस्तावित था, लेकिन यह कार्य तीन दिन में पूरा कर लिया गया। बुधवार को सीएमआरएस दिल्ली रवाना हो जाएंगे। निरीक्षण के आधार पर सुझावों के साथ निरीक्षण रिपोर्ट सौंपेंगे। इसके बाद मेट्रो प्रबंधन उनके बताए गए सुझावों को पूरा करके रिपोर्ट भेजेगा। इसके बाद सीएमआरएस द्वारा मेट्रो के 11.5 किलोमीटर हिस्से पर कमर्शियल रन शुरू करने की एनओसी जारी की जाएगी। यह संभावना जताई जा रही है कि 26 मार्च के बाद मेट्रो का संचालन रेडिसन चौराहे तक हो सकेगा। इंदौर के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर गांधी नगर स्टेशन से स्टेशन नंबर-2 तक करीब छह किमी में पहले ही संचालन किया जा रहा है। अब स्टेशन नंबर-2 से रेडिसन चौराहा तक 11 किमी हिस्से में मेट्रो का निरीक्षण पूरा हो चुका है। एनओसी जारी होते ही 17 किमी लंबे रूट पर मेट्रो का संचालन होने लगेगा।  

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