LATEST NEWS

MP हाईकोर्ट ने कहा धार कार्ड में लिखी उम्र नहीं मानी जाएगी सही, आयु नहीं पहचान का दस्तावेज है कार्ड

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति जीएस आहलूवालिया की एकलपीठ ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया कि आधारकार्ड आयु नहीं बल्कि पहचान का दस्तावेज है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने आदेश की प्रति राज्य के मुख्य सचिव को भेजने की व्यवस्था दे दी। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि मुख्य सचिव सभी जिला कलेक्टरों को इस संबंध में अवगत करा दें। यह मामला नरसिंहपुर अंतर्गत सिंहपुर पंचायत निवासी सुनीता बाई साहू की याचिका से संबंधित था। याचिकाकर्ता का कहना था कि उसके पति मोहनलाल साहू की करंट लगने से मृत्यु हो गई थी। लिहाजा, शासकीय योजना अंतर्गत आर्थिक सहायता के लिए आवेदन किया गया था। किंतु वह आवेदन इस आधार पर निरस्त कर दिया गया कि दिवंगत पति की आयु 64 वर्ष से अधिक थी। जबकि आधार कार्ड में दर्ज आयु के अनुसार मृत्यु के समय पति की आयु 64 वर्ष से कम थी। राज्य शासन की ओर से स्पष्ट किया गया कि जनपद पंचायत ने संबंधित दस्तावेजों के आधार पर पाया था कि मृतक की आयु 64 वर्ष से अधिक थी। इसके अलावा 2023 में जारी एक परिपत्र में भी यह साफ किया गया था कि आधार कार्ड का उपयोग पहचान के लिए किया जाना चाहिए न कि जन्मतिथि सत्यापन के लिए। ऐसा इसलिए क्योंकि वह जन्मतिथि का प्रमाण-पत्र नहीं है। मप्र हाई कोर्ट सहित देश के अन्य हाई कोर्ट भी अपने पूर्व आदेशों में यह रेखांकित कर चुके हैं कि आधार कार्ड पहचान पत्र है न कि जन्मतिथि का प्रमाण पत्र। चेक-कैंट बोर्ड वार्षिक वेतनवृद्धि के लाभ पर निर्णय ले : हाई कोर्ट हाई कोर्ट ने कैंट बोर्ड, जबलपुर को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता कर्मी को वार्षिक वेतनवृद्धि का लाभ प्रदान करने पर निर्णय लें। न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता को 10 दिन के भीतर कैंट सीईओ को फ्रेश अभ्यावेदन प्रस्तुत करने कहा। कोर्ट ने सीईओ को निर्देश दिए हैं कि अभ्यावेदन पर विचार कर 30 दिन के भीतर उचित निर्णय पारित करें। जबलपुर निवासी याचिकाकर्ता सुरेश कुमार डुमार की ओर से अधिवक्ता सौरभ तिवारी व मौसम पासी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता कैंट बोर्ड में सफाई कर्मचारी के रूप में पदस्थ है। याचिकाकर्ता 2001 से वार्षिक वेतनवृद्धि पाने का हकदार है। याचिकाकर्ता को उत्कृष्ट कर्मचारी का अवार्ड भी मिला है। इस संबंध में कैंट बोर्ड में अभ्यावेदन प्रस्तुत किया गया। जब कोई कार्रवाई नहीं की गई तो याचिका दायर की गई।  

‘वन्य जीव और पर्यावरण भी नष्ट हो रहा, अब बचा क्या है?’, छत्तीसगढ़-बिलासपुर हाईकोर्ट की फटकार

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में वन्य जीव के संरक्षण को लेकर लगी याचिका पर आज सुनवाई हुई। जिसमें प्रदेश में हुई बाघ की मौत को भी संज्ञान में लिया गया। वन्यजीवों के मौत के मामले में मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी को अहम माना जा रहा है। दरअसल छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा की डीबी में सुनवाई हुई जिसमें कोर्ट ने वन्यजीवों की मौत और पर्यावरण की अनदेखी पर बेहद कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि वन्य जीव नष्ट हो रहे हैं, पर्यावरण भी नष्ट हो रहे हैं अब बचा क्या? मुख्य न्यायाधीश की डीबी ने कहा कि वन्य जीव नहीं बचा पाएंगे और जंगल नहीं बच पाएंगे तो कैसे चलेगा? वन्यजीव है तो जंगल हैं, छत्तीसगढ़ में कम से कम यही सब है। जिसके जवाब में महाधिवक्ता ने कहा कि मामले में कड़ी कार्रवाई की जा रही है। कोर्ट ने बाघ की मौत को लेकर भी टिप्पणी की है। कहा यह दूसरी मौत है, टाइगर हिंदुस्तान में जल्दी मिलता नहीं, यहां है तो संरक्षण नहीं कर पा रहे हैं। दरअसल 8 नवंबर 2024 को सरगुजा के कोरिया वन मंडल के पास खनखोपड़ नाला के किनारे बाघ का शव मिला, जिसे वन विभाग ने आधिकारिक तौर पर जहर खुरानी की घटना बताया है, जिसकी जांच जारी है। हाईकोर्ट ने एफिडेविट के माध्यम से कार्रवाई के बारे में पूछा। जिस पर शासन का पक्ष महाधिवक्ता ने रखा। हाईकोर्ट ने APCCF को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत रूप से शपथपत्र का जवाब तलब किया है। कोर्ट ने पूछा है कि वन्यजीवों के संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? मामले में अगली सुनवाई आगामी 21 नवंबर को निर्धारित की है।

हाई कोर्ट ने 12 जजों के स्थानांतरण आदेश जारी किए गए, मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत ने दिया आदेश

जबलपुर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत के आदेश पर 12 जजों के स्थानांतरण आदेश जारी किए गए हैं। जिला सत्र न्यायाधीश, इंदौर ओमप्रकाश रजक को जिला एवं सत्र न्यायााधीश, पाटन, जबलपुर के रिक्त पद पर स्थानांतरित किया गया है। लीगल सर्विस अथार्टी, खंडवा के सचिव यशवंत मालवीय को ओमप्रकाश रजक के स्थान पर इंदौर में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में स्थानांतरित किया गया है।इसी प्रकार प्रधान जिला सत्र न्यायाधीश सतना अजय श्रीवास्तव को इंदौर में भगवती प्रसाद शर्मा के स्थान पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में स्थानांतरित कियाा गया है। मप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के सदस्य सचिव रत्नेश चंद्र बिसेन को प्रधान जिला सत्र न्यायाधीश, सतना अजय श्रीवास्तव के स्थान पर ट्रांसफर किया गया है। अतुल कुमार खंडेलवाल , प्रधान न्यायाधीश, फैमिली कोर्ट, सागर को प्रधान न्यायाधीश फैमिली कोर्ट, भोपाल में भौरेलाल प्रजापति के स्थान पर ट्रांसफर किया गया है। हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल धरमिंदर सिंह के अनुसार सात सिविल जज, सीनियर डिवीजन को भी स्थानांतरित किया गया है, इसमें शिवराज सिंह गवाली पन्ना से इंदौर, मोहम्मद नियामत हुसैन रिजवी आस्टा-सीहोर से ग्वालियर, द्वारका प्रसाद रतलाम से जबलपुर, निधि शाक्यवार पन्ना से इंदौर, अमरीश भारद्वाज इंदौर से सिवनी, श्वेता खरे ग्वालियर से जबलपुर और जगमोहन सिंह परासिया-छिंदवाड़ा से जबलपुर स्थानांतरित किए गए हैं।

हाई कोर्ट ने कहा- पुरुष को कमाने-पढ़ने का मौका और महिला को नहीं, यह गलत बात

प्रयागराज महिला और पुरुष की शादी की न्यूनतम उम्र में अंतर होना पितृसत्तात्मक व्यवस्था की एक निशानी है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक केस की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि भारत में पुरुष के लिए शादी की न्यूनतम आयु 21 वर्ष है और महिला के लिए यह 18 वर्ष है। यह कुछ और नहीं बल्कि पितृसत्तात्मक व्यवस्था की एक निशानी है। जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस डी. रमेश की बेंच ने कहा कि पुरुषों को शादी के लिए तीन वर्ष का अतिरिक्त समय इसलिए दिया गया है क्योंकि वे पढ़ाई कर सकें और आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त कर पाएं। अदालत ने कहा कि महिलाओं के लिए स्थिति उलट है और उन्हें इस तरह का कोई अवसर नहीं मिलता है। बेंच ने कहा, ‘पुरुषों को शादी के लिए न्यूनतम आयु में तीन वर्ष का अधिक समय देना और महिलाओं को इससे इनकार करना समानता के विपरीत है। यह पितृसत्तात्मक व्यवस्था की निशानी है और मौजूदा कानून भी इसे ही आगे बढ़ा रहे हैं। इस व्यवस्था में यह मान लिया गया है कि पुरुष को आयु में बड़ा होना चाहिए और वह ही परिवार की आर्थिक व्यवस्था देखे। वहीं महिलाओं को लेकर माना गया है कि वे सेकेंड पार्टी रहें और उन्हें पहले के जितना दर्जा न मिले। यह वयवस्था किसी भी मायने में बराबरी वाली नहीं है।’ अदालत ने यह टिप्पणियां एक केस की सुनवाई के दौरान की, जिसमें शश्स ने फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की थी। परिवार न्यायालय ने उस व्यक्ति की शादी को खारिज करने से इनकार कर दिया था। शख्स का कहना था कि उसका बाल विवाह हुआ था और वह इस शादी से सहमत नहीं है। उसका कहना था कि 2004 में विवाह हुआ था और तब उसकी आयु महज 12 साल ही थी, जबकि पत्नी की आयु 9 साल थी। 2013 में शख्स ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत शादी को खारिज करने की मांग की थी। शख्स ने जब केस दाखिल किया था, तब भी उसकी आयु 10 साल, 10 महीने और 28 दिन ही थी। क्या कहता है बाल विवाह को लेकर बना कानून इस प्रावाधन के तहत यदि बाल विवाह हुआ तो उसमें शामिल दो में से कोई भी एक सदस्य शादी खारिज करने की मांग कर सकता है। यही नहीं इसके अनुसार यदि बाल विवाह वाले दोनों सदस्य बालिग होने के दो वर्ष बाद भी ऐसी अपील करते हैं तो उसे माना जा सकता है। इसी मामले में जब पति अदालत पहुंचा तो उसकी पत्नी ने विरोध किया। उसका कहना था कि पति ने जब अपनी शादी को खारिज कराने की मांग की तो वह बालिग था। उसकी उम्र 18 साल से अधिक हो चुकी थी। वह 2010 में ही बालिग हो गया था। यही तर्क जब उसने हाई कोर्ट में दिया तो अदालत ने पुरुष और स्त्री की शादी की न्यूनतम उम्र में अंतर होने पर सवाल उठाया।

विद्युत एमडी से माँगा जवाब, छत्तीसगढ़-रायगढ़ में हाथियों की मौत पर हाईकोर्ट सख्त

बिलासपुर. बिजली करंट की चपेट में आने से हाथियों की मौत के मामले को हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। सचिव ऊर्जा विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 20 नवंबर को होगी। दरअसल रायगढ़ के घरघोड़ा वनक्षेत्र में बिजली के करंट की चपेट में आने से हाथियों की मौत हुई थी मौत। अखबार में प्रकाशित खबर का हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया था। तमनार वन परिक्षेत्र के सामारुमा कम्पाटमेंट 856 पीएफ, घरघोड़ा उप वन मंडल चुहकीमार जंगल में सनसनीखेज घटना सामने आया है। जिसमें 11 केवी धारा प्रवाहित करंट की चपेट में आने से एक हाथी का बच्चा, 1 मादा एवं एक युवा हाथी दर्दनाक मौत हो गई। जब तड़के सुबह जब ग्रामीण जन जंगल की ओर गए तब उन्हें हाथी एक दूसरे के इर्दगिर्द में मृत अवस्था मे मिले।

हाईकोर्ट ने आयुक्त से मांगा शपथ पत्र, छत्तीसगढ़-बिलासपुर के व्यापार विहार में कचरा डंप

बिलासपुर. बिलासापुर के व्यापार विहार में कचरा डंप करने के मामले में हाईकोर्ट ने संज्ञान लेकर नगर निगम से जवाब मांगा है। सोमवार को चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में निगम की ओर से बताया गया कि कचरा उठवाकर अधिकांश क्षेत्र को साफ कर लिया गया है। ठेका कंपनी को भी चेतावनी दी गई है। कोर्ट ने निगम आयुक्त को संबंधित दस्तावेज के साथ शपथ पत्र पर जानकारी प्रस्तुत करने कहा है। बता दें कि निगम ने व्यापार विहार तारामंडल के पीछे दो करोड़ रुपये की लागत से ऑक्सीजोन का निर्माण कराया था। यहां पर्याप्त पेड़-पौधे लगातार लोगों को प्रदूषण मुक्त वातावरण देने की योजना थी, लेकिन यहां नगर निगम द्वारा कचरा डंप किया जाने लगा। डोर-टू-डोर कचरा जमा करने वाली रामके कंपनी के लिए यह एरिया डंपिंग जोन बनता जा रहा था। तिफरा, सिरगिट्टी, व्यापार विहार और अन्य क्षेत्रों का लाखों टन कचरा यहां की लगभग 10 एकड़ जमीन पर डंप हो रहा था। आज मामले में सुनवाई के दौरान निगम की ओर से बताया गया कि कचरा साफ करने के लिए अभियान चलाया गया है और लगभग 50 हाइवा कचरा उठा लिया गया है। पूरा क्षेत्र लगभग साफ हो गया है। हाईकोर्ट ने निगम के जवाब से संतुष्टि जताई और आयुक्त को मामले में शपथ पत्र प्रस्तुत करने कहा। उल्लेखनीय है कि शहर से कचरा उठाने का ठेका नगर निगम ने हैदराबाद की रामके कंपनी को दे रखा है। कंपनी को शहर से कचरा उठाकर 15 किलोमीटर दूर ग्राम कछार ले जाकर अपशिष्ट प्रबंधन करना है,लेकिन इसमें ज्यादा खर्च होने की वजह से कंपनी कचरा यहीं व्यापार विहार में ही डंप कर रही है।

कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग पर MP हाईकोर्ट की रोक, सरकारों, यूट्यूब, X को जारी किया नोटिस

 भोपाल मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग यानी सीधा प्रसारण वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर अवैध रूप से साझा करने, एडिट करने, इस्तेमाल करने और बदलाव करने पर सोमवार को रोक लगा दी। अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफार्मों से ऐसे वीडियो हटाने के अनुरोध वाली एक याचिका पर केंद्र और राज्य सरकारों और हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी नोटिस जारी किया। क्या दी दलील? दमोह के एक कारोबारी डॉ. विजय बजाज ने अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग के वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर अवैध रूप से साझा करने, एडिट करने और उसे प्रसारित करने के खिलाफ एक याचिका दायर की थी। विजय बजाज की पैरवी करने वाले वकील उत्कर्ष अग्रवाल ने कहा कि यह मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की कार्यवाही के सीधा प्रसारण से संबंधी नियमों का उल्लंघन है। कमाई करने वालों से वसूली जाए रकम याचिका में अदालत से यह भी अनुरोध किया गया है कि अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर अवैध रूप से साझा करके इन वीडियो पर मिली व्यूवरशिप (देखने वाले लोगों की संख्या) के जरिये धन कमाने वालों से उक्त धन की वसूली के लिए भी निर्देश जारी किया जाए। कॉपीराइट का उल्लंघन करके अवैध रूप से अपलोड किए गए कुछ वीडियो विशेष रूप से प्रस्तुत किए गए। यूट्यूब और एक्स को नोटिस मुख्य न्यायाधीश एसके कैत और न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई की। वकील उत्कर्ष अग्रवाल ने बताया कि याचिका की सुनवाई के दौरान यूट्यूब और एक्स को नोटिस जारी किया गया है। अग्रवाल ने कहा कि याचिका की सुनवाई के दौरान इसने मेटा प्लेटफॉर्म इंक, यूट्यूब और ट्विटर को नोटिस जारी किए। विस्तृत आदेश के अपलोड होने का इंतजार है। हाई कोर्ट के पास लाइव स्ट्रीमिंग की कॉपीराइट इन नियमों में स्पष्ट प्रविधान है कि लाइव स्ट्रीमिंग के सभी कापीराइट हाई कोर्ट के पास हैं। इन नियमों के अंतर्गत किसी भी प्लेटफार्म पर लाइव स्ट्रीमिंग का मनमाना उपयोग, शेयर, ट्रांसमिट या अपलोड करना प्रतिबंधित है। इसके बावजूद निर्धारित नियमों का उल्लंघन करते हुए कई सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर लाइव स्ट्रीमिंग की क्लिपिंग को एडिट करके अपलोड करके आर्थिक लाभ उठाया जा रहा है। हाई कोर्ट के सुनवाइयों की मीम्स, शार्ट्स यही नहीं हाई कोर्ट के आदेशों के मीम्स, शार्ट बनाए जाते हैं और न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं व शासकीय अधिकारियों पर अभद्र व आपत्तिजनक टिप्पणियां की जाती हैं। अब तक जिन भी लोगों ने हाई कोर्ट लाइव स्ट्रीमिंग का दुरुपयाेग कर सोशल मीडिया के माध्यम से धनार्जन किया है, उनसे वसूली की जाए। अभी तक जितनी भी क्लिपिंग सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अपलोड की गई हैं, उन्हें डिलीट करने का भी आदेश पारित किया जाए।

बेकसूर होने के बावजूद जेल में काटे 14 साल, हाईकोर्ट ने पुलिस जांच की निंदा करते हुए कहा…

 जबलपुर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने साल 2008 में एक शख्स की हत्या के मामले में दो महिलाओं को बरी कर दिया। हालांकि इन दो महिलाओं में से एक सूरज बाई को 14 साल तक जेल काटनी पड़ी। इसके साथी न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की खंडपीठ ने निचली अदालत से अभियोजन पक्ष के गवाहों के खिलाफ झूठी गवाही और साक्ष्य देने के लिए कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया। सूरज बाई पर अपनी रिश्तेदार भूरी बाई की मदद से अपने देवर की हत्या करने और शव को पेड़ से लटकाकर घटना को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश का आरोप लगाया गया था। अदालत ने उन्हें पिछले हफ्ते राहत दी। अदालत ने 16 अक्टूबर को दोषसिद्धि के खिलाफ उनकी अपील को स्वीकार करते हुए अपने आदेश में सूरज बाई को जेल से तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया। हालांकि भूरी बाई पहले से ही जमानत पर बाहर थीं। हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने मामले को बेहद लापरवाही से लिया। निचली अदालत को यह समझना चाहिए कि वह किसी के जीवन और उसकी आजादी के बारे में फैसला कर रही है। किसी को भी कानून के ठोस सिद्धांतों के बिना सजा नहीं दी जानी चाहिए। खंडपीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों को आंख मूंदकर स्वीकार करना सबूतों को परखने का उचित तरीका नहीं है। जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस विशाल मिश्रा की अदालत ने कहा- इस मामले में एक महिला 14 साल से जेल में है। यही नहीं दूसरी को अपने नाबालिग बच्चों के साथ जेल में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा है। गवाहों ने जानबूझकर गलत बयान दिया। पुलिस ने मामले की ठीक से जांच भी नहीं की। इससे अभियोजन पक्ष के गवाहों को याचिकाकर्ता महिलाओं को फंसाने का मौका मिल गया।

स्टेट बार और सदस्य की ओर से जवाब प्रस्तुत नहीं, हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई, कॉस्ट लगाने की चेतावनी दी

जबलपुर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने एमपी स्टेट बार काउंसिल के चैंबर आवंटन प्रकरण को गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट ने स्टेट बार और सदस्य जगन्नाथ त्रिपाठी को चेतावनी दी है कि यदि दो सप्ताह में जवाब पेश नहीं किया गया तो 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। जुर्माना राशि जमा करने पर ही जवाब स्वीकार किया जाएगा। जुर्माना एमपी लीगल एड के कोष में जमा करनी होगी। प्रकरण की अगली सुनवाई 18 नवंबर वाले सप्ताह में होगी। याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी अधिवक्ता ग्रीष्म जैन की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि स्टेट बार के सदस्य जगन्नाथ त्रिपाठी ने मनमाने तरीके से आवंटित चैंबर का 54 माह तक लाभ उठाया है। इस अवधि के बिजली बिल का भी उनके द्वारा भुगतान नहीं किया गया है। हाईकोर्ट ने नियम विरुद्ध आवंटन पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके बावजूद, दिवंगत हो चुके या जज बन चुके वकीलों के रिश्तेदारों को चैंबर आवंटित कर दिए गए हैं। सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता की ओर से यह दलील दी गई कि चार माह गुजर चुके हैं, लेकिन स्टेट बार और सदस्य जगन्नाथ त्रिपाठी की ओर से अब तक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया है। इस जानकारी को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई और उपरोक्त आदेश जारी किए।  

मस्जिद में राम नाम के नारे लगाने वाले आरोपियों के खिलाफ केस खारिज, Karnataka HC ने की टिप्पणी

बेंगलुरु कर्नाटक हाईकोर्ट ने मस्जिद के अंदर ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने के आरोप में दो लोगों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इससे किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंची है। आपको बता दें कि कोर्ट का यह यह आदेश पिछले महीने पारित किया गया था।  वेबसाइट पर अपलोड किया गया। शिकायत के अनुसार, दक्षिण कन्नड़ जिले के दो लोग पिछले साल सितंबर में एक रात एक स्थानीय मस्जिद में घुस गए और “जय श्री राम” के नारे लगाए। इसके बाद स्थानीय पुलिस ने उन पर भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। दोनों के खिलाफ धारा 295 ए (धार्मिक विश्वासों को ठेस पहुंचाना), 447 (आपराधिक अतिक्रमण) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोपियों ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को खारिज करने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनके वकील ने तर्क दिया कि मस्जिद एक सार्वजनिक स्थान है और इसलिए इसमें अपराध का कोई मामला नहीं बनता है। वकील ने यह भी तर्क दिया कि ‘जय श्री राम’ का नारा लगाना आईपीसी की धारा 295 ए के तहत परिभाषित अपराध की आवश्यकता को पूरा नहीं करता है। ‘बार एंड बेंच’ ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा, “कोर्ट ने कहा कि यह समझ में आता है कि अगर कोई ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाता है तो इससे किसी वर्ग की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचेगी। जब शिकायतकर्ता खुद कहता है कि इलाके में हिंदू-मुस्लिम सौहार्द के साथ रह रहे हैं तो इस घटना का किसी भी तरह से कोई नतीजा नहीं निकल सकता।” क र्नाटक सरकार ने याचिकाकर्ताओं की याचिका का विरोध किया और उनकी हिरासत की मांग करते हुए कहा कि मामले में आगे की जांच की जरूरत है। हालांकि अदालत ने माना कि अपराध का सार्वजनिक व्यवस्था पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा। कोर्ट ने कहा, “सर्वोच्च न्यायालय का मानना ​​है कि कोई भी कार्य आईपीसी की धारा 295 ए के तहत तब तक अपराध नहीं माना जाएगा, जब तक कि उससे शांति स्थापित करने या सार्वजनिक व्यवस्था को नष्ट करने पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। ऐसा नहीं होता है तो उन्हें आईपीसी की धारा 295 ए के तहत अपराध नहीं माना जाएगा।”

भूपेश बघेल के करीबी को बड़ा झटका, छत्तीसगढ़-बिलासपुर हाईकोर्ट से केके श्रीवास्तव की जमानत याचिका ख़ारिज

बिलासपुर. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी रहे केके श्रीवास्तव को बिलासपुर हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। 15 करोड़ के धोखाधड़ी मामले में चीफ जस्टिस की अदालत ने श्रीवास्तव की अग्रिम जमानत याचिका ख़ारिज कर दी है। बता दें कि, फरार चल रहे श्रीवास्तव को पुलिस ने भगोड़ा करार दे दिया है। श्रीवास्तव पर आरोप है कि उन्होंने दिल्ली की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत 500 करोड़ रुपये का ठेका दिलाने का झांसा दिया था। इस वादे के एवज में रावत एसोसिएट्स के मालिक अर्जुन रावत ने 10 से 17 जुलाई 2023 के बीच 15 करोड़ रुपये श्रीवास्तव को दिए थे। हालांकि कंपनी को कोई काम नहीं मिला, जिससे ठगी का मामला सामने आया। इसके बाद कंपनी की ओर से तेलीबांधा थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया गया। तब से पुलिस श्रीवास्तव और उनकी पत्नी कंचन श्रीवास्तव की तलाश कर रही है। केके श्रीवास्तव गिरफ्तारी से बचने के लिए, हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। श्रीवास्तव की याचिका पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने पिछले दिनों सुनवाई करते हुए इस पर कड़ी टिप्पणी की थी। चीफ जस्टिस ने इस मामले में टिप्पणी करते हुए इसे ‘बहुत बड़ी ठगी’ ( ह्यूज फ्राड) करार दिया था। आज केके श्रीवास्तव की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व चीफ़ जस्टिस मुरलीधरन ने पैरवी की।

करंट से हाथियों की मौत पर जारी की है गाइड लाइन, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में वन विभाग का शपथ पत्र

बिलासपुर. हाथियों की बिजली करंट से हो रही मौत को लेकर दूसरी बार दायर की गई जनहित याचिका पर वन विभाग ने हाईकोर्ट में शपथपत्र दिया है। इसमें कहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी अब भारत सरकार द्वारा हाथियों को बिजली करंट से बचाने के लिए कार्य करेगी। इसके लिए बिजली कंपनी ने निर्देश भी जारी किये हैं। सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने याचिका निराकृत करते हुए निर्देश दिए कि केंद्र सरकार की गाइडलाइंस का शब्दतः और मूल भावना में पालन किया जाये। रायपुर के नितिन सिंघवी ने इस मुद्दे पर जनहित याचिका दायर की थी। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार की वर्ष 2016 की गाइडलाइंस के अनुसार हाथी जैसे वन्य प्राणियों को बिजली करंट से बचाने के लिए हाथी की सूंड जहां तक जा सकती है, उससे ऊंचाई तक विद्युत लाइन रखनी है। गौरतलब है कि पीछे के पांव पर खड़े होने पर और सूंड ऊपर उठाने पर एक व्यस्क हाथी की लंबाई 20 फीट तक हो सकती है। विद्युत लाइन की ऊंचाई 20 फीट करने के साथ और भी कई कार्य गाइडलाइंस के अनुसार बिजली कंपनी हाथियों के मूवमेंट वाले वन क्षेत्र में विद्युत लाइन की ऊंचाई 20 फीट करने और विद्युत तारों को कवर्ड कंडक्टर में बदलने या अंडरग्राउंड केबल बिछाने के लिए कार्य करेगी। कंपनी समय-समय पर झुकी हुई बिजली की लाइनों और बिजली के खंभों को ठीक करने के साथ 3 से 4 मीटर तक बारबेट वायर लगाएगी ताकि वन्य प्राणी सुरक्षित रहें। हाथी विचरण क्षेत्र में बिजली कंपनी जंगली जानवरों के शिकार के लिए फैलाए जाने वाले स्थान एवं फसलों और घरों की सुरक्षा के लिए बनाए गए घेरे में करंट, अस्थाई पंप और अवैध विद्युत कनेक्शन की जांच करेगी। प्रोटेक्टेड एरिया अर्थात नेशनल पार्क, टाइगर रिजर्व, अभयारण्य, एलिफेंट कॉरिडोर में वन विभाग के साथ वर्ष में दो बार संयुक्त सर्वे किया जाएगा। अपर वन मुख्य सचिव एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की बैठक 26 जून 2024 को अपर मुख्य सचिव वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अध्यक्षता में ऊर्जा विभाग, विद्युत वितरण कंपनी और वन विभाग के अधिकारियों की बैठक में निर्णय लिया गया कि हाथियों को बिजली करंट से बचाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर जारी गाइडलाइंस का पालन किया जाएगा। बैठक में निर्देश दिए गए कि ऊर्जा विभाग बिजली के 11 केवी, 33 केवी लाइन एवं एलटी लाइन के झुके हुए तारों को कसने का काम, तार की ऊंचाई बढ़ाने का काम तथा वन क्षेत्र, हाथी रहवास, हाथी विचरण क्षेत्र में भूमिगत बिजली की लाइन बिछाने अथवा इंसुलेटेड केबल लगाने का कार्य करेंगे। इसके बाद प्रधान मुख्य संरक्षक (वन्यप्राणी) द्वारा सितम्बर में ली गई बैठक में बिजली कंपनी ने बताया कि पंप कनेक्शन के लिए केबल कार्य लगाने का कार्य जारी है।

हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, छत्तीसगढ़-शराब घोटाला में त्रिपाठी और ढिल्लन को जमानत नहीं

बिलासपुर। हाई कोर्ट ने शराब घोटाला मामले में आरोपी अरुणपति त्रिपाठी और त्रिलोक सिंह ढिल्लन की ज़मानत याचिका को खारिज कर दिया है. आरोपियों ने ईओडब्लू द्वारा शराब घोटाला मामले में दर्ज एफआइआर को लेकर जमानत याचिका दायर थी, जिस पर जस्टिस अरविंद वर्मा की कोर्ट में सुनवाई हुई, दोनों पक्षों को सुन बीते माह हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिस पर ऑर्डर जारी किया गया है. दरअसल, ईडी ने शराब घोटाले मामले में मई 2023 में आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और शराब वितरण कंपनी सीएसएमसीएल के पूर्व एमडी अरुण पति त्रिपाठी को गिरफ्तार किया था. पूछताछ कर ईडी की विशेष अदालत ने जेल भेज दिया था. उन्होंने विशेष अदालत में जमानत अर्जी लगाई, जहां अर्जी खारिज होने पर हाईकोर्ट में जमानत अर्जी लगाई. हाईकोर्ट ने पहली बार जमानत खारिज कर दिया, लेकिन दूसरी बार में बेल दे दिया था. इसी दौरान EOW ने शराब घोटाले और नकली होलोग्राम पर केस दर्ज कर जांच शुरू की, जिसके तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई. EOW की गिरफ्तारी के बाद एपी त्रिपाठी और कारोबारी त्रिलोक ढिल्लन ने हाईकोर्ट में अलग अलग जमानत अर्जी लगाई. याचिकाकर्ताओं ने ईडी और एसीबी की कार्रवाई को झूठा बताते हुए कहा, कि इस केस में उन्हें पहले से बेल मिल गई है. अब उसी केस पर EOW ने दूसरी FIR किया है, जो अवैधानिक है. मामले में सुनवाई के दौरान ज़मानत याचिका का विरोध करते हुए कोर्ट में तर्क दिया गया था, कि यह गंभीर आर्थिक अपराध है, राज्य के साथ सीधा छल है. सरकारी रेवेन्यू सरकार के ख़ज़ाने में जमा होने के बजाय सिंडिकेट की जेब में गया, यह एक संगठित अपराध गिरोह है.

शंभू बॉर्डर खुलवाने के लिए हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिये गए: हाईकोर्ट

चंडीगढ़ किसान आंदोलन के कारण 5 महीने से बंद शंभू बॉर्डर के मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को बॉर्डर से बैरिकेड हटाने के आदेश दिए हैं और एक हफ्ते के भीतर शंभू बॉर्डर खोलने को कहा है। शंभू बॉर्डर खुलवाने के लिए हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिये गए। इसके साथ ही अदालत ने हरियाणा सरकार से कहा है कि वह किसानों को दिल्ली की तरफ जाने दें। लोकतंत्र में किसानों को हरियाणा में घुसने या घेराव करने से नहीं रोका जा सकता हाईकोर्ट ने कहा कि शंभू बॉर्डर पर स्थिति शांतिपूर्ण है। किसानों की मांग केंद्र सरकार से है इसलिए उन्हें दिल्ली की तरफ जाने की छूट दे देनी चाहिए। सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने कहा कि अगर वे शंभू बॉर्डर से बैरिकेड हटा देते हैं तो किसान अंबाला में घुस जाएंगे और एसपी ऑफिस का घेराव करेंगे क्योंकि उन्होंने ऐसी घोषणा कर रखी है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि वर्दी वालों को घबराना नहीं चाहिए। लोकतंत्र में किसानों को हरियाणा में घुसने या घेराव करने से नहीं रोका जा सकता। किसान नेताओं ने कियाफैसले का स्वागत वहीं हाई कोर्ट के इस फैसले का किसानों ने स्वागत किया है। किसान नेता मनजीत राय ने कहा कि हमें अभी आदेश की कॉपी नहीं मिली, लेकिन इस फैसले का स्वागत करते हैं। हम बार-बार पूछ रहे हैं कि किस संविधान और कानून के तहत सड़क पर दीवारें बनाई गईं। सरकार ने लोकतंत्र को दरकिनार कर यह सड़कें बंद की थी। यह आम जनता, किसानों और व्यापारियों की राजधानी जाने की भावनाओं की जीत है। उन्होंने कहा कि हम यहां नहीं बैठना चाहते, हम दिल्ली जाना चाहते हैं। हम इस बारे में मीटिंग कर अगली रणनीति तय करेंगे। भुखमरी के कगार पर आ गए दुकानदार, व्यापारी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट वासु रंजन शांडिल्य ने हाईकोर्ट में शंभू बॉर्डर खुलवाने को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। शांडिल्य ने जनहित याचिका में बताया कि 5 महीने से नेशनल हाईवे 44 बंद पड़ा है। अंबाला के दुकानदार, व्यापारी, रेहड़ी फड़ी वाले भुखमरी के कगार पर आ गए हैं। शंभू बॉर्डर बंद होने के कारण सरकारी बसों को रूट डायवर्ट किया हुआ है, जिससे तेल का खर्च बढ़ रहा है। अंबाला व शंभू के आसपास के मरीज बॉर्डर बंद होने के कारण दिक्कत में है। एंबुलेंस के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अंबाला व पटियाला जिला का छोटा बड़ा काम बंद हो चुका है। यह हाईवे पंजाब हिमाचल, जम्मू कश्मीर को जोड़ता है। इसके बंद होने से न सरकारों को भी नुकसान हो रहा है। याचिका में पंजाब व हरियाणा सरकार सहित किसान नेता स्वर्ण सिंह पंढेर व जगजीत सिंह डल्लेवाल को भी पार्टी बनाया था। 

हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को बताया जवाबदेह, छत्तीसगढ़-बिलासपुर में हाइटेन्शन तारों से आ रहा करेंट

बिलासपुर. बिलासपुर के रतनपुर क्षेत्र के गांवों के खेतों में करंट आने के मामले में मंगलवार को हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि किसी भी कंपनी को सिर्फ लाइसेंस देकर आप जवाबदेही से बच नहीं सकते। कोर्ट ने शासन को शपथपत्र में जवाब देने के निर्देश देते हुए बुधवार 10 जुलाई को अगली सुनवाई निर्धारित की है। हाईटेंशन बिजली तार के कारण कई गांवों में ग्रामीणों और मवेशियों की जान को खतरा है। भयभीत ग्रामीणों ने हजारों एकड़ में इसके चलते खेती बंद कर दी है। प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने जनहित याचिका के तौर पर इसकी सुनवाई शुरू की है। सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश ने हाईटेंशन तार बिछाने वाली सरकारी कंपनी पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन, यहां इस काम को पूरा करने वाली जबलपुर ट्रांसपोर्टेशन कंपनी से इन जगहों पर इंजीनियरों को भेजकर पूरी जांच कराने का निर्देश दिया था। इसकी रिपोर्ट व्यक्तिगत शपथपत्र पर कोर्ट में प्रस्तुत करने का भी आदेश कोर्ट ने दिया था। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायाधीश रविन्द्र अग्रवाल की डीबी में केंद्र शासन की ओर से कहा गया कि, हमने पावर ग्रिड को सिर्फ लाइसेंस दिया है। उन्होंने अगर कहा होता तो हम इस जगह पर पहले सर्वे कराकर जांच रिपोर्ट जारी करते। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि, आप सिर्फ लाइसेंस देकर जवाबदेही से बच नहीं हो सकते। साथ ही कहा कि जानकारी दें कि हाईटेंशन विद्युत लाइन होने के चलते रतनपुर क्षेत्र के लगभग आठ गांवों के खेतों में हाईटेंशन तार के नीचे और टॉवरों के आसपास करंट के झटके महसूस किए जा रहे हैं। बचने के लिए लोग रबड़ के बूट, जूते पहन रहे हैं, इसके बावजूद हर रोज ग्रामीणों को करंट लग रहा है। मवेशियों और बच्चों को इससे ज्यादा खतरा है। इस समस्या से कछार, लोफंदी, भरारी, अमतरा, मोहतराई, लछनपुर, नवगंवा, मदनपुर अधिक प्रभावित हैं। इन गांवों में 20 से अधिक टावर होने की वजह से जमीन में करंट दौड़ रहा है। यहां के किसानों का मुख्य व्यवसाय सब्जी की खेती है। हाईटेंशन लाइन के कारण बार-बार करंट लगता है। यही वजह है कि अधिकांश किसानों ने टॉवर वाली जमीन पर खेती करना छोड़ दिया है।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet