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मोदी-शाह के समीकरण में फिट बैठते हैं ये नेता, CM के लिए प्रहलाद सिंह पटेल की चर्चा तेज़.

Leaders align well with the Modi-Shah equation; discussions about Prahlad Singh Patel for the Chief Minister position are gaining momentum. उदित नारायण भोपाल। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के बाद अब मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि यहां भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर ही चुनाव लड़ा. अगले सीएम फेस के रूप में शिवराज सिंह चौहान पीछे ही रहे. बहरहाल अगले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ही होंगे या नहीं होंगे इस बात की चर्चा सियासी गलियारों मे तेज़ हो गयी है, क्योंकि यहां भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर ही चुनाव लड़ा. अगले सीएम फेस के रूप में शिवराज सिंह चौहान पीछे ही रहे. बहरहाल अगले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ही होंगे या नहीं होंगे, यह तो आने वाले एक दो दिनों में पता चल जाएगा, लेकिन इससे पहले सियासी गलियारों में नए चेहरों पर काफी चर्चा हो रही है. आगामी मुख्यमंत्री के रूप में जिन नामों पर चर्चा हो रही है, उनमें एक नाम प्रहलाद सिंह पटेल का भी है. पटेल को मध्य प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री का प्रबल दावेदार माना जा रहा है. उनके नाम की चर्चा उस वक्त ही शुरू हो गई थी, जब उन्हें भाजपा ने नरसिंहपुर विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाया था. अब प्रहलाद सिंह पटेल चुनाव जीत गए हैं. उन्होंने कांग्रेस के लखन सिंह पटेल को 31310 वोटों से हराया है प्रहलाद पटेल की गिनती मध्य प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं में होती है. वे केंद्रीय नेतृत्व के खास माने जाते हैं. इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि जब से दिल्ली में नरेंद्र मोदी की सरकार आई है प्रहलाद पटेल के पास कोई ना कोई मंत्रालय रहा है. साथ ही साथ अगर जातिगत समीकरण की बात करें तो वह ओबीसी वर्ग से आते हैं. ओबीसी में भी लोधी जाति से आते हैं,  पटेल की गिनती मध्य प्रदेश भाजपा के सीनियर नेताओं में होती है. पटेल ने पहले लोकसभा चुनाव 1989 में जीता था. उसके बाद 1996, 1999, 2014 और 2019 को मिलाकर कुल 5 लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं. मजे की बात यह है कि पटेल 2023 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीते है. पटेल के पास सियासत का लंबा अनुभव है और उनकी साफ सुथरी छवि, संगठन मे मजबूत पकड़ तथा उमा भारती के बाद प्रदेश के सबसे बड़े लोधी नेता और केंद्रीय नेतृत्व मे मजबूत पकड़ उनको अग्रिम पंक्ति मे खड़ा करती है सूत्रों की माने तो ओ बी सी मे शिवराज सिंह के बाद पटेल एकमात्र सर्वमान्य नेता है, अपने समाज के अतिरिक्त पटेल की आदिवासियों और पिछडो मे मजबूत पकड़ मानी जाती है आगामी 2024 के लिए पटेल की ताजपोसी मध्य प्रदेश के साथ साथ पडोसी राज्यों मे भी भा ज पा को मजबूती दे सकती है

सदन में दिखेगी इस बार नारी शक्ति, जनता ने चुनीं 26 महिला विधायक.

This time, women power will be visible in the assembly; the public has elected 26 female legislators. 5 जगह थीं आमने-सामने, 2018 के मुकाबले 2 फीसदी बढ़ा महिलाओं का मतदान भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में इस बार बीजेपी की प्रचंड जीत के साथ एक और खास बात हुई। इस बार मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में पहले के मुकाबले ज्यादा महिलाएं जीत कर सदन में पहुंचीं। सदन में इस बार 26 महिला विधायक पहुंचेंगी। इस बार महिला मतदाताओं का वोट परसेंटेज भी 2 फीसदी बढ़ा। 26 महिलाएं सदन में पहुंचीं मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में इस बार कुल 26 महिलाएं चुनी गई। इनमें भाजपा से 21 और कांग्रेस से 5 महिला विधायक हैं। इस बार कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में 29 और भाजपा ने 27 महिलाओं को टिकिट दिया था। प्रदेश में पांच सीट ऐसी थीं जहां बीजेपी औऱ कांग्रेस दोनों दलों से महिला प्रत्याशी आमने सामने थीं। यानि महिला का मुकाबला महिला से था। महिलाओं के वोट प्रतिशत में इजाफा इस बार विधानसभा चुनाव में ये बात भी खास रही कि पहले के मुकाबले ज्यादा महिलाओं ने मतदान किया। 2018 में 74.03 फीसदी महिलाओं ने मतदान किया था। 2023 में ये 76.03 फीसदी रहा। इस बार प्रदेश की 34 सीटें महिला मतदाता बहुल थीं।5 सीटों पर सीधा मुकाबला1-नेपानगर – भाजपा की मंजू दादू ने कांग्रेस की गेंदा बाई को हराया2-भीकनगांव में कांग्रेस की झूमा सोलंकी ने भाजपा की नंदा ब्राहणे को हराया3-धार में भाजपा की नीना वर्मा ने कांग्रेस की प्रभा गौतम को हराया4-पंधाना में भाजपा की छाया मोड़ ने कांग्रेस की रुपाली नंदू को हराया5-रैगाँव में भाजपा की प्रतिमा बागरी ने कांग्रेस की कल्पना वर्मा को हराया

लोकसभा चुनाव से पहले चलाएगी अभियान ‘हर बूथ पर मोदी’

The campaign ‘Modi at Every Booth’ will be launched before the Lok Sabha elections. 29 की 29 लोकसभा सीटें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की झोली में डालने का प्रयास करेंगे उदित नारायण भोपाल। भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए हर बूथ पर मोदी अभियान चलाने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। अब हमारा संकल्प है कि लोकसभा चुनावों में टास्क को पूरा करने के लिए बेहतर काम किया जाएगा। लोकसभा चुनाव में हम सब मेहनत परिश्रम से सभी बूथों को जीतेंगे। प्रदेश के 64 हजार 523 बूथ पर मोदी अभियान चलेगा और इसकी शुरुआत कर दी गई है। यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने सोमवार को प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कही। प्रदेश अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अमित शाह की कुशल रणनीति का आशीर्वाद के साथ संपूर्ण भारतीय जनता पार्टी का मप्र का हमारा नेतृत्व हम सब मिलकर के टीम स्पीड के साथ 29 की 29 लोकसभा सीटें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की झोली में डालने का प्रयास करेंगे। हारने वाले बूथों की होगी समीक्षा: प्रदेश अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि हम समीक्षा करने के बाद जिन बूथों पर भारतीय जनता पार्टी चुनाव हारी है, उन बूथों पर हम कैसे चुनाव जीतेंगे और जिन बूथों पर हम कम मतों से जीते हैं उनमें 10 प्रतिशत वोट शेयर कैसे बढ़ेगा, इस पर काम किया जाएगा। जनता ने हमें आशीर्वाद दिया प्रदेश अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि डबल इंजन की सरकार ने जो विकास और गरीब कल्याण का काम किया। उस विकास और गरीब कल्याण की गति को सुचारू बनाए रखने और विकसित मध्य प्रदेश को स्वर्णिम मध्य प्रदेश बनाने के हमारे संकल्प को पूरा करने के लिए जनता ने हमें आशीर्वाद दिया है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार विकास और गरीब कल्याण का काम करती आई है और आगे भी करती रहेगी। कार्यकर्ताओं ने आदर्श कार्यकर्ता के तौर पर काम कियाविष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि कार्यकर्ताओं ने आदर्श कार्यकर्ता के तौर पर अपनी भूमिका निभाकर शानदार काम किया है। पन्ना प्रमुख से लेकर के पन्ना समिति, बूथ समिति लेकर करके मंडल के कार्यकर्ता और जिले से लेकर प्रांत की टीम मिलकर एक साथ जुड़कर काम किया है। जो चुनाव किसी कारणवश बहुत कम अंतर से हार गए हैं पार्टी उनके साथ खड़ी है। शर्मा ने कहा कि असफलता यह साबित करती है की सफलता के प्रयास हमें और करने की जरूरत है।

आरजीपीवी पॉलिटेक्निक का पेपर कांड: शिकायत को दो माह बीते, कागजों में अटकी जांच, एफआईआर भी नहीं हुई.

The Paper scandal at RGPV Polytechnic: Two months have passed since the complaint; investigation stuck in paperwork, no FIR filed yet. – विवि की आंतरिक कमेटी ने अपनी रिपोर्ट प्रबंधन को सौंपी भोपाल। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) के पॉलिटेक्निक कॉलेज में सेमेस्टर परीक्षा के पेपर बेचे जाने के कथित मामले में जांच कागजों में अटक गई है। शिकायत के दो माह बाद भी अब तक कोई कार्यवाही नहीं हो सकी है। मामले में पुलिस को विश्वविद्यालय की ओर से सही और स्पष्ट जांच प्रतिवेदन का इंतजार है, वहीं विवि प्रबंधन का कहना है कि वह एक विस्तृत आवेदन भेज चुका है, जिसके साथ प्राप्त वीडियो भी संलग्न किया गया था। विवि की कमेटी ने प्रबंधन को सौंपी रिपोर्ट मामले की शिकायत मिलने पर जांच के लिए विवि ने कमेटी का गठन किया था। जिसने शिकायत और प्राप्त वीडियो के आधार पर रिर्पोट तैयार कर प्रबंधन को सौंप दी है। इस रिर्पोट में लिखा है कि यह गंभीर प्रकृति का आपराधिक प्रकरण है। इसलिए समिति के द्वारा जांच किया जाना व्यवहारिक नहीं है, इसलिए पुलिस जांच होना जरूरी है। यह है पूरा मामला: दरअसल, कुछ माह पूर्व आरजीपीवी के पॉलिटेक्निक में कॉन्ट्रेक्ट फैकल्टी द्वारा इंजीनियरिंग डिप्लोमा के स्टूडेंट्स को पांच हजार रुपए प्रति पेपर बेंचने का कथित मामला सामने आया था। इसका एक कथित वीडियो भी सामने आया है। इस विडियो में कॉन्ट्रैक्ट फैकल्टी छात्र से कैश लेता नजर आ रहा है। इस विडियो को बतौर प्रूफ रखते हुए पॉलिटेक्निक प्रबंधन के पास लिखित शिकायत पहुंची थी।शिकायत पर पॉलिटेक्निक के प्राचार्य ने जांच के लिए आतंरिक कमेटी बनाई। जांच के आधार पर सिविल ब्रांच के कॉन्ट्रेक्ट फैकल्टी गौरव जैन, हिमांशु राय और सुरभि श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया। एक अन्य फैकल्टी सतीश अहिरवार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। पुलिस में भी आवेदन किया गया था, लेकिन अब तक एफआईआर नहीं हुई है।

बलिदान दिवस: अमीरों का लुटेरा…गरीबों का मसीह ‘टंट्या भील’

मध्यप्रदेश का जननायक टंट्या भील आजादी के आंदोलन में उन महान नायकों में शामिल है जिन्होंने आखिरी सांस तक अंग्रेजी सत्ता की नाक में दम कर रखा था। टंट्या भील को आदिवासियों का रॉबिनहुड भी कहा जाता है, क्योंकि वो अंग्रेजों के भारत की जनता से लूटे गए माल को अपनी जनता में ही बांट देते थे। टंट्या भील को टंट्या मामा के नाम से भी जाना जाता है। आज यानी 4 दिसंबर को उनका बलिदान दिवस मनाया जा रहा है। आइए जानते हैं उनकी शौर्य गाथा को। बता दें कि इंदौर से लगभग 25 किलोमीटर दूर पातालपानी क्रांतिकारी टंट्या भील की कर्म स्थली है। यही वह जगह है जहां टंट्या भील अंग्रेजों की रेलगाड़ियों को तीर कामठी और गोफन के दम पर अपने साथियों के साथ रोक लिया करते थे। इन रेलगाड़ियों में भरा धन, जेवरात, अनाज, तेल और नमक लूट कर गरीबों में बांट दिया करते थे। टंट्या भील देवी के मंदिर में आराधना कर शक्ति प्राप्त करते थे और अंग्रेजों के खिलाफ बगावत कर आस पास घने जंगलों में रहा करते थे। टंट्या भील 7 फीट 10 इंच के थे और काफी शक्तिशाली थे, उन्होंने अंग्रेजों को थका दिया था। जानिए, कौन थे टंट्या मामा… इतिहासकारों की मानें तो साल 1842 खंडवा जिले की पंधाना तहसील के बडदा में भाऊसिंह के घर टंट्या का जन्म हुआ था। पिता ने टंट्या को लाठी-गोफन और तीर-कमान चलाने का प्रशिक्षण दिया। टंट्या ने धर्नुविद्या के साथ-साथ लाठी चलाने और गोफन कला में भी दक्षता हासिल कर ली। युवावस्था में अंग्रेजों के सहयोगी साहूकारों की प्रताड़ना से तंग आकर वह अपने साथियों के साथ जंगल में कूद गया। टंट्या मामा भील ने आखिरी सांस तक अंग्रेजी सत्ता की ईंट से ईंट बजाने की मुहिम जारी रखी थी। टंट्या मामा का जन्म 1840 में खंडवा के पास पंधाना तहसील के गांव बरदा में होना ऐतिहासिक तथ्यों से प्रमाणित है। उनकी क्रांतिकारी गतिविधियां 1878 से 1889 तक रहीं। साल 1889 में उन पर जबलपुर में मुकदमा चला और 4 दिसंबर 1889 को उन्हें फांसी दे दी गई। वे मातृभूमि के लिए शहीद कर दिए गए।

कमलनाथ के नेतृत्व में ऐतिहासिक हार ने ,कांग्रेस को उप्र की तरह रसातल में धकेल दिया

भोपाल। मप्र में कांग्रेस नेता जमीनी नब्ज से बेखबर कैबिनेट बना रहे थे. पीसीसी पर बधाई के होर्डिग लगा रहे थे. नकुलनाथ चुनावी अभियान में 7 दिसंबर को उनके पिता कमलनाथ के मुख्यमंत्री की शपथ समारोह के लिए निमंत्रण बांट रहे थे। कांग्रेस नेताओं में इतनी गलतफहमी कैसे आई, इस पर शोध की जरूरत है। कमलनाथ ने मध्यप्रदेश की कांग्रेस को यूपी के रास्ते पर डाल दिया है. यह ढलान उत्तर भारत में कांग्रेस के रहे-सहे वजूद को भी रसातल पर पहुंचा देगा। बुढ़ापे में CM की कुर्सी से प्यार कमलनाथ और कांग्रेस को ही ले डूबा। अगर किसी युवा को नेतृत्व का मौका दिया गया होता तो इतनी शर्मनाक हार शायद नहीं होती। कमलनाथ के इर्द-गिर्द सलाहकारों और दिग्विजय सिंह और सुरेश पचौरी जैसे चूके हुए नेताओं की प्रवीणता का ऐसा जाल बन गया था कि कमलनाथ को सच्चाई दिखाई ही नहीं पड़ रही थी। सपनों का महल ऐसा बना लिया गया था कि ‘जय जय कमलनाथ’ के अलावा कांग्रेसी विचारधारा के लोग भी नाशुक्रे लगने लगे थे। कमलनाथ की छिंदवाड़ा से जो राजनीति शुरू हुई थी, वह राजनीति छिंदवाड़ा से ही खत्म होती दिखाई पड़ रही है। अभी भी वक्त है। उम्र के आखिरी पड़ाव पर अगर सच्चाई स्वीकार कर ली जाएगी तो जिंदगी का आखिरी दौर सुकून से बीत सकेगा अन्यथा चाटुकारों और सलाहकारों की गलतफहमी तो सब कुछ समाप्त ही कर देती है। कांग्रेस की हार ने यह भी साबित कर दिया है कि 2018 में कांग्रेस को जो भी बहुमत मिला था उसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया का योगदान था। पार्टी की नहीं, कमलनाथ -दिग्विजय की हार बीजेपी के 18 साल की सरकार के बाद भी कांग्रेस की पराजय नहीं बल्कि कमलनाथ- दिग्विजय सिंह जोड़ी की ही हार है. मध्यप्रदेश को लेकर दो दिन पहले जब एग्जिट पोल आए थे, तब सबसे ज्यादा विवाद कांग्रेस द्वारा पैदा किया गया था। एग्जिट पोल वाली एजेंसी और उनके मालिकों को ऐसा साबित कर दिया गया था कि जैसे उन्होंने सरकार से पैसा लेकर एग्जिट पोल बीजेपी के पक्ष में दिखाया है। सोशल मीडिया में तो यहां तक लिखा गया कि एग्जिट पोल में बीजेपी की प्रचंड जीत दिखाने वाली एजेंसियों को सरकार के जनसंपर्क विभाग द्वारा करोड़ों रुपए की मदद दी गई है। विभाग के नाम पर चैनल की एक सूची भी सोशल मीडिया पर वायरल की गई। कांग्रेस और कांग्रेस समर्थित मीडिया से जुड़े लोग इस हद तक एक तरफा निर्णय सुना रहे थे कि जनसंपर्क के कुशल अधिकारियों की कार्य पद्धति को भी सवालों में खड़ा कर दिया था।

कटनी जिले की चारो विधानसभा सीटों से कांग्रेस का सूपड़ा साफ, भाजपा का कब्जा लहराया जीत का परचम.

Congress faced a clean sweep in all four assembly seats of Katni district, as the BJP waved the victory flag, securing control. भाजपा के संजय सत्येंद्र पाठक, संदीप जायसवाल, प्रणव पांडे व धीरेंद्र सिंह विजयी हुए कटनी। जिले चारों विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा ,जिले की चारों विधानसभा में भाजपा की प्रचण्ड विजय निश्चित हुई है। विजयराघवगढ़ से भाजपा प्रत्याशी संजय सत्येंद्र पाठक ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी नीरज सिंह बघेल से 24 हजार 346 मतों से विजय पाई। यहां भाजपा को 98010 मत तो कांग्रेस को 73654 मत प्राप्त हुए। बहोरीबंद से भाजपा के प्रणय पांडे को 98817 मत मिले तो कांग्रेस के सौरभ सिंह को 71195 मत मिले इस प्रकार भाजपा के प्रणय 23 हजार 622 मतों से विजयी हुए। बड़वारा से भाजपा के धीरेंद्र सिंह को 112916, तो कांग्रेस के बसंत सिंह को 61923 मत प्राप्त हुए। इस विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी रिकार्ड 50 हजार 993 मतों से विजयी हुए। मुड़वारा विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी को 89061 मत तो कांग्रेस प्रत्याशी मिथलेश जैन को 64 हजार 105 मत प्राप्त हुए इस प्रकार भाजपा प्रत्याशी संदीप जायसवाल 24 हजार 956 मतों से विजयी घोषित हुए।

ईव्हीएम एवं और मतगणना अभिलेखों का सीलिंग कार्य संपन्न

कलेक्टर जिला पंचायत सीईओ अन्य अधिकारियों ने किया चाय नाश्ता, संपूर्ण हुए शांतिपूर्ण मतदान ”विशेष संवाददाता कटनी” कटनी। जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर अवि प्रसाद के कुशल मार्गदर्शन और नेतृत्व में संपन्न हुए शांतिपूर्ण, मतगणना कार्य के उपरांत परिणाम घोषणा के तत्काल बाद ही जिले की सभी चारों विधानसभा क्षेत्र की ईवीएम मशीनों और मतगणना अभिलेखों का रात भर चला सीलिंग कार्य 4 दिसंबर की सुबह 7:30 बजे पूरा हुआ। इसके बाद कलेक्टर सहित सभी अधिकारियों ने झंडा बाजार पहुंच कर एक दुकान में जलपान किया। यहां अधिकारियों ने गरमागरम आलूबंडा और पोहा का नाश्ता किया। इस दौरान जिला पंचायत सीईओ शिशिर गेमावत, उपजिला निर्वाचन अधिकारी एवं अपर कलेक्टर साधना परस्ते, डिप्टी कलेक्टर प्रमोद कुमार चतुर्वेदी सहित रिटर्निंग अधिकारी मुड़वारा राकेश कुमार चौरसिया, रिटर्निंग अधिकारी बहोरीबंद प्रदीप मिश्रा और विजयराघवगढ के रिटर्निंग अधिकारी महेश मंडलोई सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

मप्र में कांग्रेस की हार के जिम्मेदार कमलनाथ, तीन राज्यों में हार के बाद बोले संजय राउत.

In Madhya Pradesh, Kamal Nath spoke after the losses in three states, said Sanjay Raut. कांग्रेस को इस पर आत्म मंथन करना चाहिए चुनाव से पहले महिलाओं को सीधे लाभ देने वाली योजनाओं से बीजेपी को फायदा हुआ मुंबई। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस की हार हो चुकी है। सिर्फ तेलंगाना ही ऐसा राज्य है जहां कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है। कांग्रेस की हार पर विभिन्न नेताओं और राजनीतिक पंडितों के बयान सामने आ रहे हैं। इसी क्रम में शिवसेना नेता और सांसद संजय राउत का भी बयान सामने आया है। हार पर कांग्रेस को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए संजय राउत ने मध्य प्रदेश में कांग्रेस की हार का जिम्मेदार कमलनाथ को बताया है। उन्होंने आगे कहा कि तेलंगाना में एआईएमआईएम फैक्टर और केसीआर काम नहीं आए। जहां तक राजस्थान की बात है, ये पारंपरिक चलन है। वहां हर 5 साल के बाद सरकार बदल जाती है। छत्तीसगढ़ की हार को लेकर संजय राउत ने कहा कि कांग्रेस को इस बात पर आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। मध्यप्रदेश में बीजेपी की जीत का श्रेय संजय राउत ने शिवराज सिंह चौहान को दिया है। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले महिलाओं को सीधे लाभ देने वाली योजनाओं से बीजेपी को बहुत फायदा हुआ। कांग्रेस ने चुनाव में क्षेत्रीय पार्टियों को किया नजर अंदाज सं‌‌जय राउत ने इस चुनाव में क्षेत्रीय पार्टियों की भूमिका पर कहा कि अगर कांग्रेस इंडिया अलायंस के साथियों को साथ लेकर लड़ती तो स्थिति कुछ बेहतर होती। सिर्फ राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जैसे लोगों के प्रचार करने से कुछ नहीं होगा। क्षेत्रीय पार्टियों को नजरअंदाज कर आप देश में राजनीति नहीं कर पाएंगे। पनौती शब्द को लेकर संजय राउत ने कहा कि अगर पनौती शब्द राहुल गांधी पर उल्टा पड़ा होता तो तेलंगाना में ऐसा कुछ क्यों नहीं हुआ। भाजपा का हश्र टीम इंडिया की तरह ही होगा संजय राउत ने बताया कि 6 दिसंबर को इंडिया एलायंस की बैठक बुलाई गई है। जहां कई बातों पर चर्चा की जाएगी। इंडिया एलायंस मजबूत है। जिस तरह से वर्ल्ड कप के दौरान टीम इंडिया ने लगातार 10 मुकाबले जीते लेकिन फाइनल में मुकाबला टीम इंडिया हार गई वैसा ही हश्र 2024 के चुनाव में भाजपा का होगा।

भारतीय जनता पार्टी की अभी तक 17 सीटों पर जीत कांग्रेस के पाले में सिर्फ 6 सीटें आयी और भारत आदिवासी पार्टी के खाते  में 1 सीट आयी.

Bhartiya Janta party won 17 seats, Congress 6 and Bharat Adiwasi Party won 1 Seat in Madhya Pradesh Vidhaansabha Elections. Manish Trivedi – Sahara Samachaar.भोपाल,  चुनाव आयोग से प्राप्त जानकारी के अनुसार अभी तक भारतीय जनता पार्टी ने १७ सीटों पर अपनी जीत दर्ज़ की है इसमें पन्ना से बृजेन्द्र प्रताप सिंह, मऊगंज से प्रदीप पटेल, रेवा से राजेंद्र शुक्ला, कोतमा से दिलीप जैस्वाल, अनूपपुर से विसाहु लाल सिंह, सिहोरा से संतोष वरकड़े, होशंगाबाद से सीता सरन शर्मा, बरस्या से विष्णु खत्री, शुजालपुर से इन्दर सिंह परमार, देवास से गायत्री राजे, खातेगांव से आशीष गोविन्द शर्मा, पदारना से छाया मोरे, नेपानगर से मंजू राजेंद्र दाऊ, बुरहानपुर से अर्चना चिटनीस, अलीराजपुर से चौहान नगर सिंह, बड़नगर से जीतेन्द्र उदय सिंह, रतलाम ग्रामीण से मथुरा लाल डामर, जौरा से राजेंद्र पांडेय और आलोट से चिंतामणि मालवीय ने अपनी जीत दर्ज की है. वही कांग्रेस पार्टी से शेओपुर से बाबू जंडेल, बिछिया से नारायण सिंह, निवास से चैनसिंह वरकड़े, अमरवाड़ा से कमलेश प्रताप सहाय, पांढुर्ना से नीलेश पुसाराम उइके और बड़वानी से राजन. मंडलोई. वही अभी तक प्राप्त जानकारी के अनुसार भारतीय आदिवासी पार्टी ने अपना खाता खोलने में सफलता प्राप्त की है. भारतीय आदिवासी पार्टी से सैलाना विधानसभा क्षेत्र से कमलेश्वर डोडियार ने अपनी जीत दर्ज की है. विजयी उम्मदवारो के लिस्ट देखने के लिए यहाँ क्लिक करैं 

लाड़ली बहनों ने कर दी शिवराज भइया की राह आसान।

भाजपा का 150 प्लस का दावा सच साबित होता हुआ नजर आ रहा है।कांग्रेस पार्टी और कमलनाथ के वादों पर जनता ने नहीं किया भरोसा। उदित नारायण भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की मतगणना जैसे जैसे आगे बढ़ रही है। वैसे ही प्रदेश के चुनाव परिणामों की तस्वीर साफ होती जा रही है। हालांकि अभी पूरी तरह किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी लेकिन अभी तक की मतगढना के दौरान मिल रहे रुझानों ने भाजपा नेताओं के 150 से अधिक सीटों पर चुनाव जीतने के दावे को सच कर दिया है और मध्य प्रदेश की जनता ने स्पष्ट कर दिया है की मध्य प्रदेश की आम जनता भाजपा के साथ है। इसके साथ ही सीएम शिवराज सिंह चौहान की लाड़ली बहनों ने भी अपने भाई की जीत के लिए मतदान में हिस्सा लिया और चुनाव परिणाम को भाजपा के पक्ष में लाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। मतदान के समय से लेकर बीती रात तक सभी राजनेतिक पार्टियों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के अपनी अपनी पार्टी की जीत और सरकार बनाने को लेकर बड़े बड़े दावे किए जा रहे थे। इस चुनाव प्रक्रिया के दौरान नेता अपने समर्थकों का मन समझने में ही मात खा रहे थे, तो जनता का मन पढ़ना तो वैसे भी आसान नहीं था और इसी का परिणाम है कि सभी के दावे रखे रह गए। जनता ने यह साफ कर दिया है कि किसी के भी कहने से कुछ नहीं होता जो कुछ होता है वह आम जनता की इच्छा से होता है और जनता ने भाजपा को अपना मत रूपी आशीर्वाद और समर्थन देकर इस बात को स्पष्ट कर दिया है। अभी तक की मतगणना में यह तो साफ हो गया है कि मध्य प्रदेश में फिर से भाजपा सरकार बनाने के लिए तैयार है बस अब देखना यह है की कुल कितनी सीटें स्पष्ट बहुमत के साथ भाजपा के खाते में आती हैं, वहीं दूसरी बात यह भी ध्यान देने योग्य है की मध्य प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के दिग्गज नेता जो चुनाव मैदान में उतरे थे उनमें से किसे जनता का आशीर्वाद मिलेगा और कौन क्लीन बोल्ड होगा। हम आपको याद दिला दें की सहारा समाचार ने मतदान के पूर्व ही स्पष्ट रूप से दावा किया था कि इस बार के चुनाव में दोनों ही दलों के द्वारा मैदान में उतारे गए दिग्गज नेताओं को लेने के देने पड़ेंगे। साथ ही कई परंपरागत सीटों पर चौंकाने वाले ऐसे परिणाम सामने आएंगे जिनका किसी ने भी अनुमान नहीं लगाया होगा। दूसरे दावे के अनुसार मध्य प्रदेश में फिर से भाजपा की सरकार बनने के चांस 65% और कांग्रेस पार्टी के सत्ता में आने के चांस 35% हैं। सहारा समाचार के यह दोनों ही दावे सत्य होते नजर आ रहे हैं। चुनाव परिणाम की तस्वीर साफ हो चुकी है परिणाम भी सामने आने लगे हैं। कुछ सीटों पर हार जीत भी डीक्लियर हो चुकी है। कुछ देर की बात है बहुत जल्द पूर्ण चुनाव परिणाम सामने आ जायेंगे।

बागली, विधानसभा सीट, मध्य प्रदेश चुनाव परिणाम (2023)

Bagali, Assembly Seat, Madhya Pradesh Election Result (2023) विधानसभा क्षेत्र 174 – Bagali (मध्य प्रदेश), के सामान्य निर्वाचन: प्रवृत्तियाँ और परिणाम दिसंबर-2023 राउंड के रूप में स्थिति। बीजेपी : आगे (Maru Bhawara BJP – 56320)कांग्रेस : पीछे (Gopal Bhosle INC- 47785)

अमरपाटन, विधानसभा सीट, मध्य प्रदेश चुनाव परिणाम (2023).

Amarpatan, Assembly Seat, Madhya Pradesh Election Result (2023) विधानसभा क्षेत्र 66 – Amarpatan (मध्य प्रदेश), के सामान्य निर्वाचन: प्रवृत्तियाँ और परिणाम दिसंबर-2023 राउंड के रूप में स्थिति। बीजेपी : पीछे (Ramkhelawan Patel BJP – 21028)कांग्रेस : आगे ( Dr Rajendra Kumar Singh INC – 24999)

लहार, विधानसभा सीट, मध्य प्रदेश चुनाव परिणाम (2023)

Lahar, Assembly Seat, Madhya Pradesh Election Result (2023) विधानसभा क्षेत्र 11 –Lahar (मध्य प्रदेश), के सामान्य निर्वाचन: प्रवृत्तियाँ और परिणाम दिसंबर-2023 राउंड के रूप में स्थिति। बीजेपी : आगे (Ambrish Sharma BJP – 26777)कांग्रेस : पीछे (Dr Govind Singh INC – 20493)

बुरहानपुर, विधानसभा सीट, मध्य प्रदेश चुनाव परिणाम (2023)

Burhanpur , Assembly Seat, Madhya Pradesh Election Result (2023) विधानसभा क्षेत्र 180 – Burhanpur (मध्य प्रदेश), के सामान्य निर्वाचन: प्रवृत्तियाँ और परिणाम दिसंबर-2023 राउंड के रूप में स्थिति। बीजेपी : आगे (Archana Chitnis BJP – 77854)कांग्रेस : पीछे (Thakur Surendra Singh INC – 57832)

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