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पचमढ़ी से भी सर्द रहा राजगढ़, पारा 8 डिग्री पर, भोपाल सामान्य के करीब.

Rajgarh is colder than Pachmarhi, with the temperature at around 8 degrees Celsius, while Bhopal is close to normal. भोपाल। प्रदेशभर में रात के वक्त सर्दी का असर बढ़ रहा है। रविवार-सोमवार की रात पचमढ़ी, ग्वालियर और राजगढ़ की रात सबसे ठंडी रही। प्रदेश में सबसे ज्यादा सर्द रात राजगढ़ में रही। यह पचमढ़ी से भी ठंडी दर्ज हुई है। यहां न्यूनतम पारा 8.4 डिग्री रहा, जबकि पचमढ़ी में तापमान 9.2 डिग्री, ग्वालियर में 9.8 डिग्री रहा। भोपाल में रात का पारा आधा डिग्री बढ़कर 12 डिग्री पर आ गया। यह सामान्य से केवल दशमलव दो डिग्री अधिक है। वहीं, इंदौर में 14.6 डिग्री, उज्जैन में 13.2 डिग्री और जबलपुर में तापमान 12 डिग्री दर्ज किया गया। उमरिया, नौगांव, दतिया भी सर्द रहे। प्रदेश में रात के तापमान में लगातार गिरावट होने से कई शहरों में कोहरे का असर भी बढ़ गया है। इससे ग्रामीण अंचलों में दृश्यता पर भी असर रहा। रविवार को ज्यादातर शहरों में तापमान 25-26 डिग्री के आसपास रहा। भोपाल में अलसुबह कोहरे का असर बढऩे से विजिबिलिटी 500 मीटर पर सिमट गई, जो सुबह 8 बजे के बाद 1000 मीटर पर पहुंची। शहर में बदली हवा से बढ़ा सर्दी का अहसासराजधानी में बीते एक सप्ताह से अधिक समय से मौसम का मिजाज बदला रहा। तीन दिन से मौसम साफ हो रहा है, जिससे प्रदेश में हवाओं का रुख बदलने लगा है। सोमवार को शहर में आने वाली हवाओं का रुख उत्तरी रहने से दिन में भी मामूली ठंडक घुली रही। मौसम विशेषज्ञ एके शुक्ला के अनुसार अभी तापमान में और गिरावट होगी। अब हवाओं का रुख उत्तरी हो रहा है, जिससे सर्दी बढ़ेगी। शीतलहर और तीव्र शीतलहर के लिए एक से डेढ़ सप्ताह का इंतजार करना पड़ सकता है। कहां कितना गिरा पारासोमवार को प्रदेश में सबसे अधिक रात के तापामन में गिरावट दतिया में 2.3 की रही। रात का पारा 10.5 डिग्री रहा, जो नॉर्मल से एक डिग्री अधिक है। भोपाल, गुना, रायसेन, बैतूल, छिंदवाड़ा, जबलपुर, खजुराहो, मंडला, रीवा, सतना, सीधी, मलाजखंड आदि में रात का पारा 11 से 12 डिग्री के बीच पहुंच गया है। इन शहरों में पारे में औसतन एक डिग्री की गिरावट रही।

नतीजे के आठवें दिन मिला प्रदेश को नया मुख्यमंत्री, मोहन यादव के नाम पर लगी मुहर.

On the eighth day of the results, the state got a new Chief Minister, with the seal of approval on the name of Mohan Yadav. भोपाल। भारतीय जनता पार्टी ने आठ दिन मंथन करने के बाद सबको चौंका दिया है। बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में सोमवार को नवनिर्वाचित विधायकों ने नए मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव के नाम पर मोहर लगाई। यादव उज्जैन दक्षिण से विधायक हैं। इसके अलावा जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला उपमुख्यमंत्री होंगे। केंद्र में कृषि मंत्री रहे नरेंद्र सिंह तोमर स्पीकर होंगे। हालांकि उप मुख्यमंत्री और स्पीकर के नाम की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है। विधायक दल की बैठक में पर्यवेक्षक मनोहर लाल खट्टर, डॉ. के. लक्ष्मण और आशा लकड़ा मौजूद रहे। सीएम शिवराज सिंह ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा, जिसका सभी विधायकों ने समर्थन किया। मोहन यादव को भरोसा नहीं हुआ तो पहले खड़े नहीं हुए। बाद में खड़े होकर हाथ जोड़े। मोहन यादव उज्जैन दक्षिण से विधायक हैं और ओबीसी वर्ग से आते हैं। जगदीश देवड़ा मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ से विधायक हैं। देवड़ा एससी वर्ग से आते हैं। जबकि राजेन्द्र शुक्ला रीवा सीट से विधायक हैं और ब्राह्मण वर्ग से आते हैं। आठ दिन की कवायत, 15 मिनट में तय हुआ सीएमभाजपा प्रदेश कार्यालय पर शाम 4.11 बजे विधायक दल की बैठक शुरू हुई थी। मात्र 15 मिनट में नए मुख्यमंत्री बनाने की सारी प्रक्रिया पूरी कर ली गई। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने विधायक दल की बैठक की जानकारी दी। पर्यवेक्षक और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर खट्टर ने 6 मिनट के भाषण में सिर्फ इतना कहा कि भाजपा एक अनुशासित पार्टी है। केंद्रीय नेतृत्व के फैसले को सभी को स्वीकार करना चाहिए। यह परंपरा है। जिसके बाद सीएम के नाम का ऐलान कर दिया गया। शिवराज ने दिया इस्तीफा, मोहन ने पेश किया सरकार का प्रस्तावनए सीएम के नाम का ऐलान होने के बाद शिवराज सिंह चौहान राजभवन पहुंचे। जहां उन्होंने राज्यपाल मंगुभाई पटेल को सीएम पद से अपना इस्तीफा सौंपा। उनका इस्तीफा तत्काल मंजूर भी हो गया। शिवराज सिंह ने नए सीएम को बधाई भी दी। उन्होंने कहा मध्यप्रदेश को नया मुख्यमंत्री मिल गया है। उन्हें बहुत बहुत बधाई, उनका अभिनंदन। इधर कुछ देर बाद मोहन यादव राजभवन पहुंचे। यहां उन्होंने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया। इस दौरान उनके साथ शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र सिंह तोमर, कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल और वीडी शर्मा मौजूद रहे। साथ ही तीनों पर्यवेक्षक मनोहर लाल कट्टर, डॉ के. लक्ष्मण और आशा लकड़ा भी साथ रहे। विधायकों का फोटो सेशन हुआ, रेस में थे कई नामबीजेपी विधायक दल की बैठक से पहले सभी नवनिर्वाचित विधायकों का फोटो सेशन हुआ। जिसमें मोहन यादव आगे से तीसरी पंक्ति में बैठे थे। फोटो सेशन के बाद बैठक शुरू हुई। जिसमें सीएम के रूप में मोहन यादव के नाम का ऐलान हो गया। एमपी सीएम पद की रेस में कई दिग्गज नाम शामिल थे। जिसमें प्रह्लाद पटेल, नरेंद्र सिंह तोमर, वीडी शर्मा, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कैलाश विजयवर्गीय जैसे कई नाम शामिल थे। जिसमें केंद्रीय मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बीजेपी ने सबको चौंकाते हुए मोहन यादव को नया मुख्यमंत्री बनाया है। भाजपा का तंत्र ऐसा, छोटे से छोटे कार्यकर्ता को बड़ी जवाबदारी : यादवनए सीएम मोहन यादव ने कहा कि भाजपा का तंत्र ही ऐसा है कि छोटे से छोटे कार्यकर्ता को बड़ी जवाबदारी मिलती है। हमारी ट्रेनिंग भी ऐसी होती है कि पार्टी जो काम दे दे उसको बहुत सहजता से लेते हैं। मैं तो पीछे की पंक्ति में बैठकर अपना काम कर रहा था। अचानक घोषणा हुई। मैं सबका आभार मानता हूं। विकास के काम को आगे बढ़ाना ही मेरी प्राथमिकता होगी। यादव ने कहा कि मैं पार्टी का एक छोटा सा कार्यकर्ता हूं। प्यार और सहयोग के लिए पार्टी की स्टेट लीडरशिप और केंद्रीय लीडरशिप का बहुत बहुत धन्यवाद। मैं अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह से निभाऊंगा। 6 दिसंबर को रात 11 बजे 15 मिनट में तय हो गया था नामबताया जा रहा है कि यादव का मुख्यमंत्री के लिए नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा के नई दिल्ली स्थित निवास पर 6 दिसंबर को रात 11 बजे ही तय हो गया था। इस दौरान केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव भी वहां मौजूद थे। भूपेंद्र यादव ने ही डॉ. मोहन यादव की रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को दी थी। इसके बाद तीन दौर की बैठक में डॉ. यादव का नाम तय किया गया। वे संघ के करीबी माने जाते हैं। बीजेपी ने ओबीसी चेहरे के तौर पर मोहन यादव को आगे किया है।भाजपा के एक नेता ने बताया कि 6 दिसंबर को मोहन यादव सड़क मार्ग से भोपाल से उज्जैन जा रहे थे। शाम करीब 7 बजे जब वे आष्टा पहुंचे, तब उन्हें तत्काल दिल्ली आने के लिए गया। डॉ. यादव वापस भोपाल आए और रात 9 बजे की फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे। उनकी नड्डा से केवल 15 मिनट की मुलाकात हुई। वे अगले दिन यानी 7 दिसंबर को सुबह भोपाल लौट आए। तब यह कयास लगाए जा रहे थे कि डॉ. यादव को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है।

बीजेपी-कांग्रेस के 96 विधायक चुनाव हारे, सभी को एमएलए रेस्ट हाउस के फ्लेट छोड़ना होंगे.

Ninety-six legislators from both the BJP and Congress lost the elections; all of them will have to vacate their flats in the MLA Rest House. 24 विधायकों को बंगले खाली छोड़ना होगा, 10 दिन में बंगले छोड़ने का नोटिस जारी. Twenty-four legislators will have to vacate their bungalows; a notice for vacating the bungalows within ten days has been issued. भोपाल। मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव हारे पूर्व मंत्रियों और विधायकों को 10 दिन में बंगला खाली करना होगा। इसके लिए विधानसभा की ओर से 130 विधायकों को बंगले खाली करने के नोटिस जारी कर दिए गए हैं। ताकि चुनाव जीतकर आए विधायकों को अध्यक्षीय पूल के बंगले आवंटित किए जा सकें। अभी चुनाव जीतने के बाद अधिकांश विधायकों को आवास नहीं मिला है। आवास नहीं मिलने से कई नेता होटल या फिर रिश्तेदार के घरों पर रुके हुए हैं। प्रदेश में 15वीं विधानसभा के विघटित होने और 16वीं विधानसभा के गठन की अधिसूचना के बाद यह कार्रवाई शुरू की गई है। यह सामान्य प्रक्रिया है, पर अधिकतर देखने में आया है कि हारे हुए विधायक बंगले खाली करने में अपनी ओर से पहल कम ही करते हैं। बीजेपी-कांग्रेस के 96 विधायक चुनाव हार गए हैं। वहीं, 34 विधायक ऐसे हैं जिनके दोनों दलों में टिकट कटे थे। उन्हें अब बंगला खाली करना होगा। इधर, गृह विभाग ने शासन स्तर पर बी टाइप-14 और सी टाइप- 8 बंगलें खाली कराए जाने की सूची तैयार की है। इसका फैसला नई सरकार के गठन के बाद होगा। विधानसभा में अध्यक्षीय पूल के 34 बंगले हैं। इनमें से 22 विधायकी का चुनाव हार गए। 2 के टिकट कट गए। इस तरह 24 विधायकों से बंगले खाली छोड़ना होगा। 24 के अलावा 96 वे ऐसे सदस्य हैं जिनकी चुनाव हारने की वजह से विधायकी चली गई है। उनसे भी एमएलए रेस्ट हाउस में मिले आवास 10 दिन में खाली कराए जाना है। चुनाव हार चुके विधायक बाला, सिंघार सहित कई के रहेंगे सुरक्षित

230 में से 175 विधायकों ने ही कराया पंजीयन, 55 अभी भी लापता.

Out of 230, 175 legislators have completed the registration, while 55 are still missing. भोपाल। सोलहवीं विधानसभा के नवनिर्वाचित सदस्य कैलाश विजयवर्गीय, राकेश सिंह, रीति पाठक, कुंवर विजय शाह एवं सुशील तिवारी विधानसभा पहुंचे। उन्होंने प्रमुख सचिव अवधेश प्रताप सिंह से कक्ष में चर्चा की। प्रमुख सचिव ने नव निर्वाचित सदस्यों का स्वागत किया। इसके बाद सदस्यों ने स्वागत कक्ष पहुंचकर निर्वाचन प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर नवीन विधानसभा गठन संबंधी समस्त आवश्यकताएं पूर्ण कीं। सोमवार को 25 सदस्यों का विधानसभा पहुंचे। अब तक कुल 175 सदस्य विधानसभा पहुंचे चुके हैं। 230 विधानसभा सदस्यों में से अभी भी 55 पंजीयन से वंचित हैं। रविवार को आने वाले अन्य सदस्यों में जय सिंह मरावी, दिलीप जायसवाल, राधारविंद्र सिंह, मनोज पटेल, अशोक ईश्वरदास रोहाणी, धीरेंद्र बहादुर सिंह एवं गायत्री राजे पवांर विधानसभा पहुंचे थे। सोमवार को अन्य आने वाले सदस्यों में महेंद्र यादव, माधव सिंह, हरदीप सिंह डंग, चिंतामणि मालवीय, प्रणय पांडे, मुकेश टंडन, आशीष गोविंद शर्मा, तेज बहादुर सिंह, नरेंद्र सिंह कुशवाह, बाला बच्चन, निर्मला भूरिया, महादेव वर्मा (मधु वर्मा), अमर सिंह यादव, मालिनी गौड़, बालकृष्ण पाटीदार, मोंटू सोलंकी, सेना महेश पटेल, हरिबाबू राय, राजेश सोनकर एवं गोलू शुक्ला ने विधानसभा पहुंचकर अपने निर्वाचन प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण कीं।

चुनाव में पेंडिंग तहसील दफ्तरों के डेढ़ हजार केस निपटेंगे.

In the elections, approximately 2,000 pending cases from tehsil offices will be resolved. भोपाल। जिले में विधानसभा चुनाव के चलते सभी आठ तहसीलों में पिछले डेढ़ महीने से काम ठप हो गए थे। इसी के चलते सीमांकन, नामांतरण, जाति, मूलनिवासी, राशन कार्ड सहित जमीन संबंधी लगभग डेढ़ हजार प्रकरण लंबित हो गए हैं। यह केस चुनाव के दौरान लंबित हो गए थे। ऐसे में कलेक्टर आशीष सिंह ने सोमवार को बैठक लेते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया है कि जल्द से जल्द लंबित मामलों का निराकरण किया जाए। कलेक्टर ने विकसित भारत संकल्प यात्रा संबंधी तैयारियों को लेकर भी सभी विभाग के अधिकारियों से चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विभाग अपनी तैयारियां पूरी कर लें। इस दौरान शिविर लगाकर लक्षित और पात्र लाभार्थियों को आवश्यक सेवाएं सुलभ कराएं। बैरसिया, गोविंदपुरा, कोलार, हुजूर, टीटीनगर, संत हिरदाराम नगर, एमपीनगर और शहर वृत्त के सभी एसडीएम, डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक को विधानसभा चुनाव के दौरान अलग-अलग जिम्मेदारी सौंप रखी थी। इसी के चलते तहसीलों में लोगों के कार्य और पेशियां लंबित हो गई थी। अब चुनाव खत्म होते ही कलेक्टर ने बैठक लेकर सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि समय सीमा सहित अन्य सभी लंबित प्रकरण जल्द से जल्द निराकृत किए जाएं। कलेक्टर ने सभी राजस्व अधिकारियों को उनके न्यायालयों में नियमित सुनवाई कर लंबित प्रकरणों में कमी लाने के निर्देश दिए हैं।

सिंधिया परिवार को कोर्ट से झटका.

The Scindia family faces a setback in court. करोड़ों रुपए की जमीन बेचने पर रोक लगाई भोपाल। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके परिवार को कोर्ट से एक बड़ा झटका लगा है। सिंधिया परिवार एक संपत्ति को अपनी बताकर बिक्री कर रहा था, जिस पर कोर्ट ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है सिंधिया परिवार कई प्रकार के प्रॉपर्टी डिस्प्यूट में उलझा हुआ है। ऐसी ही एक संपत्ति विवाद में न्यायालय का फैसला सुनाया है। न्यायालय में निर्णय हुआ है कि महल गांव में यशवंत राव राणे की जमीन को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, उनकी माताजी माधवी राजे सिंधिया, उनकी बहन चित्रांगदा राजे और नारायणन बिल्डर्स एवं डेवलपर प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर, अपनी संपत्ति बताकर बेच रहे हैं। न्यायालय ने इस पर रोक लगा दी है। ग्वालियर में रियासत काल में सिंधिया परिवार के शाही महल जयविलास पैलेस का परिसर बहुत विशाल था। इसमें शिकारगाह, हैलीपेड, कृषिभूमि आदि भी थी, लेकिन स्वतंत्रता के पश्चात सिंधिया परिवार ने इसके आसपास की भूमि में पॉश कॉलोनियां विकसित कर जगह बेच दी, जो सिंध विहार, चेतकपुरी, वसंत विहार, चेतकपुरी आदि कॉलोनियां के नाम से जानी जाती हैं। सिंधिया परिवार ने ग्वालियर में चेतकपुरी के सामने महल गांव में सर्वे नंबर 1211/1, 1211/2 एवं 1211/3 की कुल 6 बीघा 4 विस्वा जमीन नारायण बिल्डर एंड डेवलपर को बेचने का सौदा किया तो इसके स्वामित्व को लेकर एक वाद दायर किया गया। यशवंत राव राने के परिवार ने इस जमीन को अपना बताते हुए इसका भूस्वामी बताया और सिंधिया परिवार के विक्रय अनुबंधों को अवैद्य बताते हुए की जा रही बिक्री पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी। द्वादशम सत्र न्यायालय के विद्वान न्यायाधीश अजय सिंह ने इस मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद इस केस में अपना निर्णय सुनाया है। उन्होंने याचिकाकर्ता यशवंत राव राणे को इस जमीन का स्वामी घोषित कर दिया है। इसी के साथ आदेश दिया है कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, उनकी माताजी माधवी राजे सिंधिया, उनकी बहन चित्रांगदा राजे और नारायणन बिल्डर्स एवं डेवलपर प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर, जमीन का विक्रय नहीं कर सकते हैं। ग्वालियर के जिला कलेक्टर एवं नगर निगम ग्वालियर के कमिश्नर को आदेश का पालन करने के लिए कहा गया है।

नए मुख्यमंत्री के साथ मंत्रिमंडल में शामिल होंगे नए चेहरे, कई पुराने मंत्रियों का घटेगा कद.

New cabinet will include new faces along with the new Chief Minister, and several old ministers will see a reduction in their stature. मंत्रिमंडल में शामिल नेताओं में से 15 से ज्यादा नामों में फेरबदल होने की संभावना उदित नारायण भोपाल। प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान होेने के बाद अब नए मंत्रियों के नामों को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। सीएम की घोषणा के साथ ही मंत्रीमंडल को लेकर भी कवायत तेज हो गई है। लोगों में उत्सुकता है कि इस बार प्रदेश के कौन-कौन विधायक होंगे, जिन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। ऐसे में इस बार मंत्रीमंडल में कुछ नए और कुछ पुराने चेहरों के शामिल होने की संभावना ज्यादा है। बताया जा रहा है कि वर्तमान में मंत्रीमंडल में शामिल नेताओं में से 15 से ज्यादा नामों में फेरबदल होने की संभावना जताई जा रही है। 13 दिसंबर को होने वाले संभावित शपथग्रहण के एक दो दिन बाद ही मंत्रीमंडल का गठन होने के संकेत हैं। यह हैं संभावित नामसंभावित नामों की बात करें तो इसमें सुमावली विधायक एंदलसिंह कंसाना, ग्वालियर विधायक प्रद्युम्न सिंह तोमर, गुना विधायक पन्नालाल शाक्य, खुरई विधायक भूपेंद्र सिंह, सुरखी विधायक गोविंद राजपूत, जतारा विधायक हरीशकंर खटीक, छतरपुर विधायक ललिता यादव, जबेरा विधायक धर्मेंद्र लोधी, पन्ना विधायक ब्रजेंद्र प्रताप सिंह, सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह, विधायक रीति पाठक, मनीषा सिंह, अनूपपुर विधायक बिसाहूलाल सिंह, विजयराघवगढ़ विधायक संजय पाठक, अजय विश्नोई, जबलपुर विधायक राकेश सिंह, संपतिया उइके, योगेश पंडाग्रे, प्रभुराम चैधरी, नारायण सिंह पंवार, अरुण भीमावद, राजेश सोनकर, आशीष शर्मा, विजय शाह, अर्चना चिटनीस, निर्मला भूरिया, रमेश मेंदोला, उषा ठाकुर, तुलसी सिलावट, चेतन कश्यप, हरदीप डंग, इंदरसिंह परमार, भोपाल से विधायक रामेश्वर शर्मा और कृष्णा गौर के नाम शामिल हो सकते हैं। इनकी जगह हुई खालीइस बार विधानसभा चुनाव में शिवराज सिंह चैहान के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल के दस से अधिक मौजूदा मंत्री पराजित हुए हैं। राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को भी हार का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा जिन अन्य प्रमुख मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा उनमें अटेर से अरविंद भदोरिया, हरदा से कमल पटेल और बालाघाट से गौरीशंकर बिसेन शामिल हैं। इनके अलावा हारने वाले मंत्रियों में बड़वानी से प्रेम सिंह पटेल, बमोरी से महेंद्र सिंह सिसोदिया, बदनावर से राजवर्धन सिंह दत्तीगांव, ग्वालियर ग्रामीण से भारत सिंह कुशवाह, अमरपाटन से रामखेलावन पटेल, पोहरी से सुरेश धाकड़ और परसवाड़ा से रामकिशोर कावरे शामिल हैं। एक अन्य मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के भतीजे राहुल सिंह लोधी को खरगापुर से हार का सामना करना पड़ा।

मध्य प्रदेश के बड़े दलित नेता को मिली बड़ी जिम्मेदारी, जगदीश देवड़ा को बनाया गया उप मुख्यमंत्री।

Big Dalit Politician Jagdish Devda got Big opportunity as Deputy Chief Minister of Madhya Pradesh. संतोष सिंह तोमर भोपाल। मध्य प्रदेश में 11 दिसंबर को भाजपा विधायक दल की बैठक हुई। भाजपा विधायक दल की बैठक में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का एलान होने के साथ ही राज्य में दो उप मुख्यमंत्री बनाने का फैसला हुआ है। मल्हारगढ़ से विधायक जगदीश देवड़ा और उज्जैन दक्षिण से विधायक राजेंद्र शुक्ला मध्य प्रदेश के नए उप मुख्यमंत्री बनाए गए हैं। यूं तो जगदीश देवड़ा मध्य प्रदेश की राजनीति में किसी परिचायक मौहताज नहीं हैं। फिर भी आपको बता दें कि जगदीश देवड़ा वर्तमान शिवराज सरकार में वित्त मंत्री का जिम्मा संभाल रहे थे ।वह मल्हारगढ़ विधानसभा सीट से विधायक हैं। देवड़ा लगातार सातवीं बार जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। थावरचंद गहलोत के बाद एक बड़े दलित चेहरे देवड़ा मध्यप्रदेश में थावरचंद गहलोत के बाद एक बड़े दलित चेहरे जगदीश देवड़ा को मध्य प्रदेश का उप मुख्यमंत्री बनाया गया है। 1993 में पहली बार विधायक बनने के बाद से अपने लगभग 33 वर्ष के लंबे राजनीतिक कार्यकाल में जगदीश देवड़ा 7वीं बार विधायक बने हैं। थावरचंद गहलोत के राज्यपाल बनने के बाद से जगदीश देवड़ा को मध्य प्रदेश बीजेपी में बड़े दलित चेहरे के रूप में देखा जा रहा था। उसके चलते अब उन्हें उप मुख्यमंत्री के तौर पर बड़ी जिम्मेदारी मिली है। देवड़ा को उप मुख्यमंत्री बनाने के बाद उनके समर्थकों में खुशी का माहौल है। मल्हारगढ़ क्षेत्र में भी जश्न का माहौल है। विवादों से दूर, संघठन में मजबूत पकड़ रखते हैं देवड़ा मल्हारगढ़ विधानसभा सीट से जगदीश देवड़ा विधायक हैं। वह शिवराज सरकार में वित्त मंत्री हैं। जगदीश देवड़ा 66 साल की उम्र में भी फिट हैं। शांत स्वभाव को जगदीश देवड़ा पार्टी के कद्दावर नेता हैं। साथ ही वह विवादों से दूर रहते हैं। उनकी सजगता की वजह से ही वित्त जैसे महत्वपूर्ण विभाग की कमान उनके हाथों में है। संगठन और सरकार में उनकी अच्छी पकड़ है। दरअसल, जगदीश देवड़ा का जन्म एक जुलाई 1957 को हुआ है। वह मूल रूप से नीमच जिले के रामपुरा के रहने वाले हैं। एमए के बाद उन्होंने एलएलबी किया है। जगदीश देवड़ा की शादी रेणु देवड़ा से हुई है। राजनीति के साथ-साथ जगदीश देवड़ा वकालत भी करते हैं। उनके दो पुत्र हैं। साथ ही सामाजिक कार्यों से भी जुड़े रहते हैं। वहीं, खेलकूद में भी उनकी विशेष रुचि है। इसके साथ ही वे एथलेटिक्स चैंपियन भी रहे हैं। छात्र जीवन से ही राजनीतिक पारी की शुरुआत जगदीश देवड़ा वर्तमान में मंदसौर के मल्हारगढ़ विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक हैं। मध्य प्रदेश के नवनियुक्त उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा का ताल्लुक प्रदेश की अनुसूचित जाति से है। पेशे से जगदीश देवड़ा समाजसेवी और वकील हैं। छात्र जीवन से ही राजनीति में उनकी दिलचस्पी थी। वर्ष 1979 में वह शासकीय महाविद्यालय रामपुरा से छात्र संघ के अध्यक्ष रहे हैं। साथ ही विक्रम विश्वविद्यालय में सीनेट के सदस्य रहे हैं। इसके बाद उन्होंने भाजयुमो से जुड़कर सियासी करियर को रफ्तार दी है। वर्ष 1993 में बीजेपी ने उन्हें चुनाव लड़ने का मौका दिया। पहली बार में ही वह चुनाव जीत गए और विधायक बन गए। तब से लेकर अब तक वे लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं।इसके बाद विधानसभा में कई समितियों के सदस्य रहे। इसके साथ ही कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी उन्होंने पूरी ईमानदारी और निष्ठा पूर्वक निभाई। जगदीश देवड़ा भाजपा संगठन और सरकार के भरोसेमंद चेहरे हैं। तीन बार मंत्री और एक बार बने प्रोटेम स्पीकर मध्य प्रदेश की दसवीं विधानसभा में जगदीश देवड़ा वर्ष 1993 विधायक निर्वाचित हुए। वर्ष 2003 विधानसभा चुनाव में लगातार जीत दर्ज करने पर उन्हें प्रदेश में राज्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद साल 2008 में शिवराज सरकार में जदीश देवड़ा को परिवहन, जेल, योजना सहित कई महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार सौंप कर कैबिनेट मंत्री बनाया गया। वर्ष 2020 में बनी शिवराज सरकार में उन्हें वित्तमंत्री बनाया गया। इसके साथ ही 15वीं विधानसभा में उन्हें प्रोटेम स्पीकर भी चुना गया था लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने प्रोटेम स्पीकर का पद छोड़ दिया था। 7वीं बार जीते जगदीश देवड़ा जगदीश देवड़ा ने मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार में तीन बर मंत्री रहते हुए कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी निभाई। 66 साल के नवनियुक्त उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा का नाम मध्य प्रदेश तेज तर्रार और कद्दावर नेताओं में शुमार होता है। मध्य प्रदेश के मालवी रीजन में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। इस क्षेत्र में भाजपा ने विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया है। वर्ष 1993 से लेकर आज तक वे लगातार चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंच रहे हैं। वर्ष 2023 विधानसभा चुनाव में उन्होंने मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ सीट से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी श्यामलाल जोकचंद को 59,024 वोटों के अंतर से हरा कर मध्य प्रदेश के विधानसभा में 7वीं बार अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है।

अब नहीं सोना पड़ेगा बेंच पर, जेपी अस्पताल में बनेगा रैन बसेरा.

A Renbaseara will be built in J P Hospital. प्रस्ताव तैयार, परिसर में मंदिर के पास की जगह तय भोपाल। जेपी अस्पताल शहर का तीसरा सरकारी अस्पताल है, जहां रैन बसरे की सुविधा होगी। अब तक हमीदिया अस्पताल व एम्स में दूर दराज से आने वाले लोगों के लिए यह व्यवस्था थी। प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार रोजाना जेपी में 60 से 80 मरीज भर्ती होते हैं। अस्पताल में वार्ड में एक मरीज के साथ एक परिजन के ही रुकने की अनुमति होती है। जिसके कारण रात में कई परिजन फर्श व बेंच पर सोते नजर आते हैं। ठंड के मौसम इसके चलते वे भी बीमार हो सकते हैं। इसी को देखते हुए रैन बसेरा बनाने का फैसला लिया गया है। परिसर में मौजूद हनुमान मंदिर के रैन बसेरा बनाना तय किया गया है। जिसका प्रस्ताव भी विभाग को भेज दिया गया है। मंजूरी मिलते ही इसका निर्माण शुरू किया जाएगा। नई व्यवस्था का परिजनों को ठंड से बचाने के लिए अलाव जलाया जाएगा। यह व्यवस्था तब तक रहेगी, जब तक शीतलहर का प्रकोप रहेगा। जेपी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पताल में रूकने वाले परिजनों की सुविधा के लिए रैन बसेरा बनाया जाएगा। जमीन का चयन कर प्रस्ताव विभाग को भेज दिया गया है। मंजूरी मिलते ही रैन बसेरा तैयार किया जाएगा।

सेहत के लिए फायदेमंद है कांटेदार सत्यानाशी पौधा, कई औषधीय गुणों से है भरपूर.

The thorny devil’s snare plant is beneficial for health, possessing numerous medicinal properties. हमारे आसपास कई तरह के पेड़ पौधे ऐसे होते हैं, जो कई सारे औषधीय गुना से भरपूर रहते हैं। There are many types of trees and plants around us that are abundant in various medicinal properties. हालांकि, कई बार अपने आसपास मौजूद चीजों को हम बेकार या फिर जंगली समझकर तोड़ देते हैं या उखाड़ कर फेंक देते हैं। ऐसा ही दिखने वाला एक कांटेदार पौधा सत्यानाशी फूल का होता है जो कई तरह की औषधीय गुणों से भरपूर है। हमारे आसपास मौजूद पार्क, गार्डन और सड़क के किनारे पर कई तरह के पेड़ पौधे और फूल उगे हुए दिखाई देते हैं। कई पेड़ पौधे ऐसे होते हैं, जिनके बारे में लोगों को जानकारी नहीं होती है और वह इन्हें जंगली और बेकार समझ लेते हैं। ऐसा ही एक पौधा पीले रंग ला सत्यानाशी फूल है, जिस अक्सर ही बेकार समझ कर फेंक दिया जाता हैं। इस पौधे में बहुत सारे कांटे होते हैं, यही वजह है कि इसे बेकार समझा जाता है। आपको बता दें कि ये कांटेदार फूल का पौधा सेहत के लिहाज से बहुत फायदेमंद है। इसे खुसबसूरती के साथ अगर गमले में लगाया जाए तो ये देखने में भी सुंदर दिखेगा और इससे होने वाले फायदे का लाभ भी उठाया जा सकता है। चलिए आज आपको इस पौधे से जुड़ी कुछ खास बातें बताते हैं। कैसा होता है सत्यानाशी पौधासत्यानाशी पौधा देखने में बहुत खूबसूरत होता है और अक्सर ही खाली जमीन पर उग जाता है। इस पौधे में कई तरह की औषधि गुण मौजूद है और यह आपको अक्सर सड़क किनारे या निर्जन स्थान पर देखने को मिल जाएगा। इस पौधे में फूल, पत्ते, डाली सभी जगह पर कांटेदार पौधे होते हैं और इसे बहुत ही सावधानी के साथ तोड़ना पड़ता है। पीले रंग के स्कूल के अंदर बैंगनी रंग के बीच दिखाई देते हैं। सबसे खास बात यह है कि जब भी आप किसी पौधे या फूल को तोड़ते हैं तो उसमें से सफेद रंग का दूध निकलता है। लेकिन जब आप सत्यानाशी पौधे को तोड़ेंगे तो इसमें से आपको पीले रंग का दूध निकलता हुआ दिखाई देगा। सत्यानाशी पौधे के फायदेकांटेदार और बेकार सा दिखने वाला यह पौधा कई गुणों से भरपूर है और इससे बहुत तरह के फायदे होते हैं। जिन लोगों को अक्सर खांसी चलने या फिर सांस चलने की शिकायत होती है, वह अगर इसकी जड़ को पानी में उबालकर काढ़े की तरह पिएंगे तो उन्हें बहुत फायदा होगा।सत्यानाशी के तेल में गिलोय का जूस मिलाकर पीने से पीलिया जैसे रोग से मुक्ति मिलती है।पेट दर्द की समस्या को दूर करने में भी यह पौधा काफी कारगर है बस आपको इसके दूध में घी मिलाकर पीना होगा और दर्द से आराम मिल जाएगा। कैसे लगाए पौधासत्यानाशी पौधे को आप अपने घर में कैक्टस प्लांट की तरह ही लगा सकते हैं। जब इसमें फूल खिलेंगे तो यह बहुत ही खूबसूरत दिखाई देगा। इसे लगाने के लिए बस आपको पके हुए बीज की आवश्यकता होगी। आप इन्हें मिट्टी में मिला दें और बस पौधा उगने लगेगा। इस पौधे को कुछ खास देखभाल की जरूरत नहीं होती है। लगाते वक्त ही थोड़ी ऑर्गेनिक खाद इसकी मिट्टी में मिला दें। बीज के जरिए पौधा उगाने के अलावा आप छोटा सा पौधा लाकर भी इसे लगा सकते हैं। दिन में दो-तीन बार इसे पानी देने के अलावा आप धूप या छांव में कहीं भी इसे रख सकते हैं। दाद-खाज-खुजली से छुटकारा (What stops itching fast)स्किन रोगों के लिए सत्यानाशी का प्रयोग (Prickly Poppy use to Treat Skin Disease)सत्यानाशी का पौधा आपको आसानी से पार्क या सड़क के किनारे लगा दिख जाएगा। यह एक कांटेदार पौधा होता है, जिस पर पीले रंग के फूल होते हैं। सत्यानाशी पंचांग के रस में हल्का नमक डालकर सेवन करने से स्किन संबंधी रोगों में लाभ होता है। इसके लिए आपको रोजाना सत्यानाशी पंचांग के रस का 1 या 2 चम्मच सेवन करना होगा। दाद का इलाज (ringworm treatment)एंटीफंगल गुणों से भरपूर सत्यानाशी का पौधा दाद के इलाज में भी फायदेमंद साबित होता है। सत्यानाशी की पत्तियों का रस या तेल को दाद वाली जगह पर लगाने से दाद के लक्षण धीरे धीरे हल्के होने लगते हैं और इसका इंफेक्शन फैलना भी बंद हो जाता है। खुजली के लिए सत्यानाशी का उपयोग (uses of Prickly Poppy for itching)खुजली की समस्या में इंसान परेशान हो जाता है, ज्यादा खुजली के कारण स्किन पर रैशेज भी आ जाते हैं और कई बार खून भी निकलने लगता है। फोड़े, फुंसी, खुजली और जलन के लिए सत्यानाशी फायदा करता है। इसके लिए आप सत्यानाशी पंचांग का रस या पीला दूध लगाएं। इसे लगाने से आपको खुजली से राहत मिलेगी।

पुलिस ने सट्टा पत्ती के साथ एक व्यक्ति को पकड़ा.

The police apprehended an individual with playing cards in connection with illegal gambling. बिलहरी चौकी क्षेत्र से पुलिस ने एक को व्यक्ति सट्टा पत्ती के साथ पकड़ा हुई कार्यवाहीThe police from the Bilhari Checkpost area apprehended an individual engaged in illegal gambling activities with playing cards and took appropriate action. Special Correspondent, Sahara Samachaar, Katniकटनी, जिले के रीठी तहसील क्षेत्र के बिलहरी चौकी क्षेत्र में बिलहरी पुलिस ने एक व्यक्ति को सट्टा पत्ती के साथ पकड़ा है जहां पुलिस ने कार्यवाही की है बता दे की पुलिस ने कार्यवाही में सट्टा पत्ती सहित कुछ नगदी रुपए भी जप्त किया है, बता दें यह पूरा मामला कटनी जिले के रीठी तहसील क्षेत्र के बिलहरी चौकी क्षेत्र का है जहा पुलिस ने एक व्यक्ति को सट्टा पत्ती के साथ पकड़ा है लगातार बिलहरी पुलिस के द्वारा अवैध काम करने वालो पर कार्यवाही की जा रही है,इसी क्रम में आज बिलहरी पुलिस ने एक व्यक्ति को बिलहरी चौकी क्षेत्र से सट्टा पत्ती के साथ पकड़ा है,

रिहयासी इलाके में तेंदुए की दस्तक, इलाके में दहशत का माहोल।

Intrusion of a Leopard in the Residential Area, Atmosphere of Terror Prevails in the Locality. वन अमला लगा सर्चिंग में । मामला उप नगरी बोड़खी का ।Forest Department Amala engaged in searching. The case is of the sub-town Bodhki. हरिप्रसाद गोहेआमला । सुबह छः बजे नगर के उपनगरी बोडखी आमला बैतूल मुख्य सड़क से हथिया निवास की ओर जाते तेंदुए को देखे जाने की खबर से क्षेत्र में दहशत का माहोल है । मिली जानकारी अनुसार उक्त घटना क्रम वहा स्थित आकृति सुपर मार्केट के सीसी टीवी कैमरे में कैद हुआ । तेंदुए की जंगल से शहरी क्षेत्र में प्रवेश पर लोग तरह तरह के कयास लगा रहे है । जानकारी अनुसार लोगों ने तेंदुए को देखा खेतों में पग मार्क भी मिले है। वहीं किसी भी अप्रिय घटना की खबर नहीं है । बहरहाल तेंदुए की आमद की सूचना वन विभाग को मिली है । वन परिक्षेत्र अधिकारी आमला रामस्वरूप उईके ने बताया वन अमले को सर्चिग के लिए लगाया गया है। साथ ही प्राप्त विडियो फुटेज को भी दिखवाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार शहर से सटा हुआ चिखलार,धाराखोह, मरामझिरी ये ऐसे इलाके हैं जिसके बाद मैदानी स्तर के कर्मचारियों को सतर्क करने के साथ साथ ग्रामीणों को भी सावधान रहने की नसीहतें दी जाती हैं। उत्तर वन मंडल के अंतर्गत आने वाले जंगल का बहुत बड़ा हिस्सा सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से सटा होने के कारण सारणी, चोपना सहित बैतूल शहर से सटे जंगलों में शेर तेंदुए का कभी कभी मूवमेंट हो जाता है, लेकिन विभागीय कर्मचारियों की इस पर पूरी नजर रहती है।

मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला हैं अजेय, हर बार चुनाव जीते और मंत्री भी बने।

The Deputy Chief Minister of Madhya Pradesh is Rajendra Shukla; he is invincible in every election and has also become a minister each time. मध्य प्रदेश में डॉ. मोहन यादव मुख्यमंत्री जबकि राजेंद्र शुक्ला, जगदीश देवड़ा के साथ उप मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेंगे। In Madhya Pradesh, Dr. Mohan Yadav is the Chief Minister, while Rajendra Shukla and Jagdish Devda will assume the positions of Deputy Chief Ministers. संतोष सिंह तोमर भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री का नाम आखिरकार फाइनल हो गया है। बीजेपी ने डॉ. मोहन यादव का नाम मुख्यमंत्री के लिए चुनकर एक बार फिर सबको चौंका दिया है। उज्जैन दक्षिण से विधायक मोहन यादव मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री होंगे। वहीं राजेन्द्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा को उत्तर प्रदेश सरकार की तर्ज पर उप मुख्यमंत्री पद पर बैठाया गया है। राजेंद्र शुक्ला मध्यप्रदेश के रीवा से विधायक हैं और विंध्य के कद्दावर नेता के तौर पर उन्हें जाना जाता है। राजेंद्र शुक्ला लगातार चुनाव जीतकर चार बार कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। विंध्य के बड़े नेता हैं अजेय विधायक राजेंद्र शुक्ला रीवा विधानसभा क्षेत्र से विधायक राजेंद्र शुक्ला को विंध्य क्षेत्र से ब्राह्मण समाज के बड़े चैहरे और कद्दावर नेता के तौर पर जाना जाता है। अपने चुनावी कैरियर में वह 2003 से लेकर अब तक अजेय रहे हैं। खास बात है कि वह ऐसे विधायक हैं जिन्हें हर बार चुनाव जीतने पर मंत्री पंद मिला है। वर्ष 2003 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर उमा भारती की सरकार में मंत्री बने। इसके बाद बाबूलाल गौर सरकार में भी उन्हें मंत्री पद मिला। शिवराज सिंह चौहान की सरकार में भी वह राज्य में कैबिनेट मंत्री रहे। बता दें कि वह अब तक लगातार चार बार मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके हैं। वर्ष 2003 से लेकर अब तक राजेंद्र शुक्ला लगातार रीवा से चुनाव जीतते आए हैं। छात्र नेता के रूप में शुरू हुआ राजनैतिक जीवन मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री की कुर्सी पाने वाले राजेंद्र शुक्ला ब्राह्मण समाज से आते हैं। उनकी ब्राह्मण वोटर्स पर मजबूत पकड़ मानी जाती है। पेशे से इंजीनियर राजेंद्र शुक्ला का जन्म वर्ष 1964 को रीवा में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1986 से छात्र नेता के तौर पर राजनैतिक जीवन की शुरुआत कर दी थी। वर्ष 1986 में राजेंद्र शुक्ला सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में छात्र संघ के अध्यक्ष रहे थे। राजेंद्र शुक्ला ने वर्ष 1998 में पहला विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन वह कांग्रेस के पुष्पराज सिंह से 1394 वोटों से हार गए। वर्ष 2003 में रीवा सीट से एक बार फिर बीजेपी ने राजेंद्र शुक्ला को उम्मीदवार बनाया है, इस बार उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी पुष्पराज हराकर पहली मध्य प्रदेश विधानसभा में अपनी जगह बनाई। इससे पहले रीवा सीट से पुष्पराज सिंह ने लगातार तीन बार जीत दर्ज की थी। राजेंद्र शुक्ला ने साल 2003 में रीवा से जीत दर्ज कर उनके विजय रथ पर ब्रेक लगा दिया। इसके बाद उन्होंने यहां से साल 2003 के अलावा साल 2008, 2013, 2018 और 2023 विधानसभा चुनाव में जीत दर्जी की है कैबिनेट मंत्री से लेकर उप मुख्यमंत्री तक का सफर वर्ष 2003 में पहली बार रिकॉर्ड वोटों से विधानसभा चुनाव जीतने वाले राजेंद्र शुक्ला को आवास और पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का पद दिया गया। वर्ष 2008 में वह रीवा विधानसभा क्षेत्र से दूसरी बार जीते। और इस बार उन्हें ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्री बनाकर मंत्रीपरिषद में शामिल किया गया। वर्ष 2013 की बात करें तो मध्य प्रदेश की 14वीं विधानसभा में चुनाव जीतकर आने वाले राजेंद्र शुक्ला को उद्योग नीति और निवेश संवर्धन मंत्री बनाया गया। इसके साथ ही उन्होंने जनसंपर्क विभाग भी संभाला।बता दें कि वर्ष 2018 में भी राजेंद्र शुक्ला रीवा से विधायक चुने गए थे लेकिन मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी थी जो की अपना पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी और वर्ष 2020 में यह सरकार गिर गई। जिसके बाद एक बार फिर भाजपा सत्ता में आई। इस बार भी राजेंद्र शुक्ला लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री के दायित्व के साथ एक बार फिर यानी कुल चौथी बार शिवराज मंत्रिमंडल में जगह मिली। इसके साथ ही वर्तमान में पांचवी बार चुनाव जीतकर मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए हैं। सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं विधायक सरकार राजेंद्र शुक्ला राजेंद्र शुक्ला की X (ट्विटर) प्रोफाइल देखें तो पता चलता है कि वह  सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं हैं। उन्हें 65000 से ज्यादा लोग X पर फॉलो करते हैं। इसके साथ ही विधायक राजेंद्र शुक्ला फेसबुक पर भी काफी एक्टिव रहते हैं। यहां भी उनके फॉलोवर बहुत बड़ी तादाद में हैं।

22 जनवरी को होगा राम मंदिर का उद्घाटन, इससे पहले गर्भ गृह की फोटो आई सामने.

The inauguration of the Ram Temple will take place on January 22, and before this, a photo of the sanctum sanctorum has been revealed. अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य जोरों पर है। जिसका उद्घाटन आने वाले नए साल यानी साल 2024 में 22 जनवरी को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाएगा। The construction work of the Ram Temple in Ayodhya is in full swing. Its inauguration is set to take place on January 22, 2024, by the Prime Minister of the country, Narendra Modi, in the upcoming new year.” इसके प्राण प्रतिष्ठा समारोह की तैयारी भी तेज हो चुकी है। मंदिर के लोकार्पण को लेकर पुलिस अलर्ट मोड पर है। जगह-जगह सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। वहीं, आने वाले श्रद्धालुओं के लिए उचित व्यवस्था की जा रही है। इसी बीच मंदिर के गर्भगृह की पहली तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई है। बता दें कि इन तस्वीरों को विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष और महासचिव चंपत राय ने अपने ऑफिशियल पेज एक्स (ट्वीटर पहले) पर शेयर किया है। महासचिव ने लिखी ये बातेंदरअसल, राम मंदिर ट्रस्च के महासचिव चंपत राय ने फोटोज शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, “भगवान श्री रामलला का गर्भ गृह स्थान लगभग तैयार हो चुका है। हाल ही में लाइटिंग और फिटिंग का काम भी पूरा कर लिया गया है। जिसकी कुछ तस्वीरें साझा कर रहा हूं।” इस तस्वीरों में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि दीवार और गुंबद पर शानदार नकाशी की गई है जो भक्तों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। कितना प्रतिशत कार्य हो चुका है पूरा?मंदिर के निर्माण कार्य को लेकर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने बताया कि 95% कार्य पूरा कर लिया गया है और बाकी के कार्य 31 दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। बता दें कि 22 जनवरी को मंदिर परिसर समेत पूरे शहर में बड़ी-बड़ी स्क्रीन लगाई जाएगी। जिसका सीधा लाइव प्रसारण किया जाएगा। इस दौरान भजन, हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का भी प्रसारण होगा। इस भव्य समारोह के लिए स्पेशल ट्रेनें भी चलाई जाएगी ताकि भक्तों को किसी प्रकार की परेशानी न उठानी पड़े। वहीं, मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए पुजारी को ट्रेनिंग भी दी जा रही है। राम भक्त इस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस दौरान देश ही नहीं, बल्कि पूरे विश्वभर से श्रद्धालु पहुंचेंगे।

आखिर अनुच्छेद 370 क्या था, सरकार ने इसे क्यों हटाया, फैसले के बाद घाटी में क्या बदला?

What is Article 370, Why Government remove article 370, after removal what are the changes in Ghati. धारा 370 भारतीय संविधान का एक विशेष अनुच्छेद था, जो जम्मू-कश्मीर को भारत में अन्य राज्यों के मुकाबले विशेष अधिकार प्रदान करता था। Article 370 was a special provision in the Indian Constitution that granted specific privileges to the region of Jammu and Kashmir, distinguishing it from other states in India. इसे भारतीय संविधान में अस्थायी और विशेष उपबन्ध के रूप में भाग 21 में शामिल किया गया था। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को हटाने के केंद्र सरकार के निर्णय पर आज सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने कहा है कि 5 अगस्त 2019 का निर्णय वैध था और यह जम्मू कश्मीर के एकीकरण के लिए था। बता दें कि 2019 में जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाला अनुच्छेद-370 खत्म कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कारण चार साल बाद यह अनुच्छेद फिर चर्चा फिर में आ गया है। इससे पहले कोर्ट में अनुच्छेद-370 हटाने को चुनौती दी गई थी। इससे जुड़ी 20 से ज्यादा याचिकाएं कोर्ट में थीं जिसको लेकर सोमवार को फैसला आया है। आइये जानते हैं कि अनुच्छेद 370 क्या है? सरकार ने इसे क्यों हटाया? अनुच्छेद-370 के बारे में5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद-370 खत्म कर दिया था। यह कानून जम्मू-कश्मीर में करीब सात दशक से चला आ रहा था। दरअसल, अक्तूबर 1947 में कश्मीर के तत्कालीन महाराजा हरि सिंह ने भारत के साथ एक विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें कहा गया कि तीन विषयों के आधार पर यानी विदेश मामले, रक्षा और संचार पर जम्मू और कश्मीर भारत सरकार को अपनी शक्ति हस्तांतरित करेगा। इतिहासकार प्रो. संध्या कहती हैं, ‘मार्च 1948 में, महाराजा ने शेख अब्दुल्ला के साथ प्रधानमंत्री के रूप में राज्य में एक अंतरिम सरकार नियुक्त की। जुलाई 1949 में, शेख अब्दुल्ला और तीन अन्य सहयोगी भारतीय संविधान सभा में शामिल हुए और जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति पर बातचीत की, जिससे अनुच्छेद-370 को अपनाया गया।’ अनुच्छेद-370 के प्रावधान क्या थे? जम्मू-कश्मीर का संविधान 17 नवंबर 1956 को अपनाया गया और 26 जनवरी 1957 को लागू हुआ था। 5 अगस्त 2019 को भारत के राष्ट्रपति ने एक आदेश जारी करके जम्मू और कश्मीर के संविधान को निष्प्रभावी बना दिया था। इसे ‘संविधान (जम्मू और कश्मीर के लिए आवेदन) आदेश, 2019 (सीओ 272)’ नाम दिया गया था। अनुच्छेद-370 हटने के बाद क्या हालात हैं?2019 में जब अनुच्छेद-370 खत्म किया गया था, तब पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ने कुछ हद तक स्थिति बिगाड़ने की कोशिश की थी। घुसपैठ के जरिए हिंसा कराने की खूब कोशिश हुई, लेकिन सुरक्षाबलों ने सभी को नाकाम कर दिया गया। केंद्र सरकार ने विशेष तौर पर जम्मू कश्मीर के विकास पर फोकस करना शुरू कर दिया। अब हर बजट में जम्मू कश्मीर के लिए विशेष प्रावधान किए जाते हैं, ताकि यहां के लोगों को मुख्य धारा से जोड़ा जा सके। अनुच्छेद-370 खत्म होने के बाद पहली बार ऐसा हुआ जब जम्मू-कश्मीर संयुक्त राष्ट्र के दागी लिस्ट से बाहर हुआ। पिछले कुछ समय में राज्य में पर्यटन में भारी बढ़ोतरी देखी गई है। जहां घाटी में दशकों बाद सिनेमा खुलने लगे हैं तो, वहीं पत्थरबाजी की घटनाएं और बंद के आव्हान लगभग शून्य हो चुके हैं। राज्य में निवेश की संभवनाएं लगातार बढ़ रही हैं और हर क्षेत्र में विकास के नए द्वार खुल रहे हैं।

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