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ढोलेवार कुंबी समाज एवं गुगनानी परिवार की पहल ने गौसेवा के नए आयाम रचे ।

The initiative of Dholewar Kumbi Samaj and Gugnani family created new dimensions of cow service. हरिप्रसाद गोहेआमला । गौसेवा और गौपूजा पीढ़ियों से सनातन संस्कृति की समृद्ध परम्पराओ का हिस्सा रहा है, आमला में इसी भाव को सहेजते हुए जनसहयोग से शहर की पहली गौशाला का निर्माण किया गया है। सहृदयी दानदाताओ व सहयोगियों के प्रयासों से यहां निरन्तर व्यवस्था को सुदृढ किया जा रहा है। इसी क्रम में रविवार का दिन भी श्री महावीर हनुमान गौशाला में उल्लेखनीय रहा। विस्तृत सांस्कृतिक विरासत,कृषि कार्यो से जुड़ाव एवं आधुनिक जगत से सामंजस्य बनाकर स्वयं की विशेष पहचान बनाने वाले ढोलेवार कुंबी समाज द्वारा रविवार को श्री महावीर हनुमान गौशाला,आमला में सेवा व सहयोग दिया गया। समाज के जिलाध्यक्ष,पदाधिकारीगण,वरिष्ठ जन एव युवा सदस्य उत्साह के साथ गौशाला पहुँचे, एवं अपना पूरा दिन गौसेवा को समर्पित किया, गौपूजा के साथ शुरुआत करते हुए उन्होंने गौमाताओं को हर चार खिलाया,व सफाई कार्यो में भी योगदान दिया। ढोलेवार कुंबी समाज ने गौसेवा के इस कार्य के प्रति जागरूकता दिखा कर एक उत्तम नवाचार किया है, जो कि इस बात का प्रमाण है कि ढोलेवार कुंबी समाज के मन मंदिर में कृषि, भूमि एवं गौमाताओं के प्रति कितनी अगाध श्रद्धा है। समाज के बुजुर्ग एवं युवा सदस्यों ने जिस उत्साह के साथ रविवार को गौसेवा के कार्य मे हाथ बटाया एवं आगे भी इसी तरह सहयोगी बनने का वचन दिया,वो अपने आप में बेहद अनुकरणीय है, अगर ढोलेवार कुंबी समाज की तरह ही अन्य समाज भी पहल करें तो गौसेवा का ये प्रकल्प बहुत जल्द एक नई ऊंचाई प्राप्त कर लेगा। इस नवाचार के लिए परोपकारी ढोलेवार कुंबी समाज वास्तविक प्रसंशा का हकदार है।इसके अलावा इस जागरूक समाज द्वारा 5100 रुपए की राशि भी सहयोग स्वरूप गौशाला को प्रदान की गई, एवं एक ट्राली गन्ने की बांड भी उनके द्वारा गौमाताओं के चारे के लिए लाई गई तथा आगे भी ऐसे ही सहयोग के साथ जुड़े रहने का संकल्प उनके द्वारा किया गया। जिस भाव से ढोलेवार कुंबी समाज ने गौसेवा का नया आयाम रचा उसी तरह एक परिवार द्वारा भी गौसेवा के साथ अपनत्व का मधुर संदेश दिया गया। जिले के प्रतिष्ठित गुगनानी परिवार का सहयोग भी आज बेहद प्रसंशनीय रहा, “नमन्ति फलिनो वृक्षा: , नमन्ति गुणिनो जना:” के विशुद्ध उदाहरण श्री दाताराम गुगनानी जी के परिवार के राजेश गुगनानी जी द्वारा आज उनकी ओर से स्वरूचि भोज का आयोजन गौशाला परिसर में किया गया, विनम्र, संवेदनशील, सरल हृदय व्यक्तित्व के धनी राजेश गुगनानी जी गौशाला के प्रारंभिक दौर से इस प्रकल्प के लिए सहयोग करते आ रहे है और काफी पहले उन्होंने वादा किया था कि गौशाला का संचालन जब सुव्यवस्थित रूप से शुरू हो जाएगा तब सभी सहयोगियों को उनके द्वारा भोजन करवाया जाएगा,एवं अपने वादे को पूर्ण करते हुए उन्होंने आज भोज का आयोजन किया,जिसमे लगभग 200 से अधिक गौसेवकों ने उनके द्वारा आयोजित भोज एवं उनके मधुर व्यवहार का स्वाद ग्रहण किया। गुगनानी परिवार के ही ज्येष्ठ पुत्र, कलम के धनी,एवं जिले में ही नही अपितु राष्ट्रीय स्तर पर अपने ज्ञान के बूते विशिष्ट पहचान बनाने वाले प्रवीण गुगनानी जी द्वारा गौशाला परिसर में गौमाताओ के लिए एवं विभिन्न उपयोग के लिए होने वाले बोर का सम्पूर्ण व्यय प्रदान करने की घोषणा की। सेवाभावी व्यक्तित्व से ओतप्रोत श्री प्रवीण गुगनानी जी को हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित अटल बिहारी साहित्य अकादमी सम्मान से सम्मानित किया गया है एवं उनके व्यक्तित्व की विराटता ही है कि उन्होंने प्राप्त एक लाख रुपये की राशि को भी साहित्य परिषद को भेंट कर दिया है, अब यहां उनके माध्यम से होने वाले बोर से गौमाताओं को निर्मल जल लगातार प्राप्त होते रहेगा। स्वरूचि भोज का कार्य जिस प्रेम से पूर्ण हुआ उससे राजेश गुगनानी भाव विभोर हुए एवं उन्होंने कहा कि भोज के दौरान एक विशेष अनुभूति मुझे हुई,ऐसा लगा जैसे गौसेवक नही अपितु साक्षात गोविंद भोजन का आनंद ले रहे हों।इसलिए अब मन है कि स्वरूचि भोज का ये कार्यक्रम अब अगले वर्ष मैं और ज्यादा बड़े पैमाने पर करूंगा,ताकि गोविंद की कृपा का ऐसा ही पात्र बना रहूं। सहयोग की इस धारा में शहर के प्रतिष्ठित व्यवसायी पंजाबराव देशमुख जी द्वारा भी विशेष सहयोगी भाव दिखाया एवं गौशाला में होने वाले बोर के लिये अपनी ओर से मोटर प्रदान करने की घोषणा की।गौशाला परिवार के सदस्यों ने बताया कि दानदाताओं व सहयोगियों के प्रयास ही है जिससे गौशाला में लगातार व्यवस्थाओ में वृद्धि की जा रही है। भूसे की पर्याप्त व्यवस्था के साथ हरे चारे के लिए भी यहां व्यवस्था की गई है, साथ ही बीमार व घायल गौमाताओ के उपचार की भी व्यवस्था लगातार शानदार होते जा रही है, वहीं हाल ही में रोशनी के लिए विशेष तरह की एलईडी लाइट्स परिसर में लगवाई गयी है, साथ ही गौशाला परिवार ने आह्वान किया कि सभी नगरवासी गौशाला अवश्य पधारें एवं गौसेवा के इस कार्य मे अपना योगदान अवश्य दें।

LPG सिलेंडर का दाम 1 जनवरी से बदल रहा! जानें आपकी जेब पर कितना पड़ेगा भारी

LPG GAS CYLINDER PRICE 2025 नए साल के मौके पर आपकी रसोई के बजट को या तो झटका लग सकता है या फिर बड़ी राहत भी मिल सकती है. दरअसल, हर महीने की एक तारीख को गैस कंपनियां एलपीजी के दामों का रिव्यू कर उन्हें घटाने बढ़ाने का फैसला लेती हैं. लंबे समय से कंपनियों द्वारा घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में परिवर्तन नहीं किया गया है. ऐसे में माना जा रहा है कि 1 जनवरी 2025 को LPG गैस के दामों में बदलाव हो सकता है. 2025 में कितने बढ़ सकते हैं घरेलू LPG सिलेंडर के दाम? नए साल की पहली तारीख को घरेलू LPG सिलेंडर के दाम घटेंगे या बढ़ेंगे, ये फैसला तो 1 जनवरी 2025 को ही होगा, लेकिन अगर कीमतें बढ़ती हैं तो इसमें आमतौर पर 50 से 100 रु का अंतर किया जाता है. बात करें पिछले जनवरी 2023 औरक जनवरी 2024 की तो नव वर्ष की पहली तारीखों को घरेलू गैस सिलेंडर समेत सभी गैस सिलेंडरों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया था. ऐसे में माना जा रहा है कि इस वर्ष घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ाई जा सकती हैं. 2024 में कितनी बढ़ी-घटीं एलपीजी की कीमतें? मार्च 2024 में घरेलू गैस सिलेंडर में और जुलाई 2024 में कर्मशियल गैस सिलेंडर की कीमतों में कटौती की गई थी. इसके बाद अगस्त, सितंबर और नवंबर 2024 में कर्मशियल एलपीजी की कीमतों को बढ़ाया गया. वहीं घरेलू गैस सिलेंडर के दाम मार्च 2024 से ही स्थिर बने हुए हैं. मध्यप्रदेश में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में 31 दिसंबर 2024 को 14.2kg वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 808 रु 50 पैसे हैं. मध्यप्रदेश में सिलेंडर का ये रेट मार्च 2024 से ही स्थिर हैं. यानी लगभग 9 महीनों से घरेलू गैस सिलेंडर के दामों ये बदलाव नहीं हुआ है. इससे पहले इसमें बदलाव मार्च 2024 में हुआ था, जब घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में 100 रु की कटौती की गई थी. मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों में घरेलू व कमर्शियल सिलेंडर के दाम शहर कीमतें (घरेलू सिलेंडर) कीमतें (कमर्शियल सिलेंडर) भोपाल 808 रु 50 पैसे 1824 रु जबलपुर 809 रु.50 पैसे 2036 रु 50 पैसे इंदौर 831 रु 1926 रु ग्वालियर 886 रु 2047 रु 50 पैसे

34 दागी आईएफएस 11 राज्य वन सेवा के अफसर की कुंडली मारकर बैठे हैं प्रमुख सचिव वन की बैठक में टारगेटेड अफसर का प्रकरण पर चलता मंथन

34 tainted IFS are sitting on the horoscope of 11 State Forest Service officers. Brainstorming on the issue of targeted officer in the meeting of the Chief Secretary Forest. उदित नारायणभोपाल। अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल जंगल महकमे के सेवानिवृत्ति सहित 34 दागी आईएफएस और 11 राज्य वन सेवा के अधिकारियों के कुंडली मारकर बैठे हैं। यानी दागी अफसरों की जांच प्रतिवेदन अंतिम निर्णय के लिए अपर मुख्य सचिव वन के पास लंबित है। वे उस पर निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। इसके कारण उन पर लगे आरोप के मामले में अफसर दोषी है अथवा नहीं, इस पर ऊहापोह की स्थिति बनी है। एसीएस को केवल एक लाइन का फैसला लेना है। इसके कारण सेवारत अधिकारी मानसिक प्रताड़ना के दौर से गुजर रहे हैं तो वहीं रिटायर्ड होने के बाद अफसर कार्यालय की परिक्रमा कर रहे हैं। इनमें से कुछ अवसर प्रमोशन की दहलीज पर खड़े हैं प्रशासन में बैठे अफसर की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। टीएल की बैठक में टारगेटेड अफसर का प्रकरण पर चलता मंथन और निर्णय किया जाता है।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार महिला प्रताड़ना के आरोप में दोषी करार दिए गए अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक मोहन मीणा का मामला जुलाई 23 से शासन के पास निर्णय के लिए बेचाराधीन है। पिछले दिनों बैतूल दौरे पर गए वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने पत्रकारों से अनौपचारिक चर्चा में बताया कि मोहन मीणा के मामले में शासन को कार्रवाई करनी है। सूत्र बताते हैं कि एसपी बैतूल के मांगने पर वन विभाग से विपासा कमेटी कमेटी की रिपोर्ट उन्हें भेज दी है। इसी प्रकार बालाघाट सर्किल में पदस्थ एपीएस सेंगर पर वर्ष 2022 में आरोप है कि उन्होंने भंडारा क्रय नियम का उल्लंघन कर निम्न गुणवत्ता की सामग्री की खरीदी थी। आरोप का निराकरण किया बिना ही मैनेजमेंट कोटा से इन्हें बालाघाट सर्किल का मुखिया बना दिया गया। सेंगर ने स्वयं को बचाने के लिए टीकमगढ़ वन मंडल के बाबू और उनके ट्रांसफर के बाद प्रभार लेने वाले डीएफओ अनुराग कुमार को कसूरवार बता दिया है। उत्तर बैतूल वन मंडल में पदस्थ आईएफएस देवांशु शेखर की जांच प्रतिवेदन भी शासन के पास जून 24 से लंबित है। सूत्रों की माने तो जांच प्रतिवेदन में उन्हें क्लीन चिट दे दिया गया है और शासन को सिर्फ निर्णय करना है। खंडवा डीएफओ प्रशांत कुमार सिंह के खिलाफ भी जांच प्रतिवेदन निर्णय के लिए शासन के पास विचाराधीन है। वन मुख्यालय में पदस्थ भारत सिंह बघेल पर मैं 2006 में आरोप लगे थे। वन विभाग में 26 जून को निर्णय के लिए शासन के पास प्रस्ताव भेजे हैं पर निर्णय नहीं हो पाया। प्रदेश में सबसे सीनियर डीएफओ एवं 1994 बैच विश्वनाथ एस होतगी का प्रकरण भी अक्टूबर 23 से शासन के पास अनिर्णय की स्थिति में है। इसके अलावा बृजेंद्र श्रीवास्तव और नवीन गर्ग के मामले में राज्य शासन ऊहापोह में है।ये आईएफएस रिटायर्ड हो गएशासन द्वारा आरोपित अफसरों के मामले में टाइम लिमिट में निर्णय नहीं होने की स्थिति में अजीत श्रीवास्तव, आरपी राय, एम कालीदुरई, सुशील कुमार प्रजापति, इंदु सिंह गडरिया, ओपी उचाड़िया, आर एस सिकरवार, डीएस कनेश, निज़ाम कुरैशी, वीएस प्यासी और जीपी वर्मा सेवानिवृत हो गए।रावसे के 11 अफसरों के मामले भी विचाराधीनआईएफएस अफसर की तरह ही राज्य वन सेवा के करीब 11 अधिकारियों के मामले में शासन निर्णय नहीं कर पा रहा है। जबकि वन विभाग ने जांच करवा कर उसका प्रतिवेदन भी शासन को भेज दिया है। इनमें राज्य वन सेवा के कुछ अधिकारियों के मामले है, जो आईएफएस बनने की दहलीज पर खडे है। उनके प्रकरण में शासन द्वारा निराकरण नहीं किए जाने से उनका प्रशासनिक भाग्य के सूरज का उदय नहीं हो पा रहा है। दागी अफसर की सूची में शामिल राहुल मिश्रा पर आरोप है कि उन्होंने बगैर सामग्री प्राप्त किए सीधे प्रमाणक पर हस्ताक्षर कर दिए। वन विभाग ने 30 अप्रैल 24 को निर्णय के लिए शासन के पास भेजा तब से अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। इसी प्रकार कैलाश वर्मा, आरएन द्विवेदी, श्रीमती मनीषा पुरवार, आरएस रावत, सुधीर कुमार पाठक, योगेंद्र पारधे, मनोज कटारिया, मणि शंकर मिश्रा, अजय कुमार अवस्थी और प्रियंका चौधरी के मामले भी शासन के पास निर्णय के लिए लंबित है। प्रियंका चौधरी पर आरोप है कि वरिष्ठ अफसर को मोबाइल पर अशब्द भरे मैसेज करना और टेलीफोन पर गाली-गलौज करना है।

MP में कई IAS को मिला नए साल का तोहफा : कोठारी, पी.नरहरि बने PS, 2009 और 2011 बैच के इन अफसरों को भी मिला प्रमोशन

Many IAS in MP got New Year gift: Kothari, P.Narhari became PS, these officers of 2009 and 2011 batch also got promotion. मध्यप्रदेश में 2025 से पहले कई आईएएस (भारतीय प्रशासनिक सेवा) अफसरों को वेतनमान (पे-मैट्रिक्स) के हिसाब से पदोन्नत किया गया है। इनमें सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी और पी. नरहरि को प्रमुख सचिव बनाया गया है। इस तरह का प्रमोशन पाने वाले अन्य अधिकारियों में 2009 से 2011 बैच के अफसरों के साथ ही 2016 बैच के 26 अफसर भी शामिल हैं। डॉ. नवनीत मोहन कोठारी और पी. नरहरि प्रमुख सचिव वेतनमान में पदोन्नत

सौरभ शर्मा की हो सकती है हत्या; सरकार मुहैया कराए सुरक्षा, जीतू पटवारी ने उठाई मांग

Saurabh Sharma may be murdered; Government should provide security, Jitu Patwari raised demand Saurabh Sharma Case: मध्यप्रदेश की सियासत में इन दिनों आरक्षक सौरभ शर्मा का नाम खूब चर्चा में हैं। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि सौरभ शर्मा की हत्या हो सकती है। क्योंकि उसके पकड़े जाने से कई बड़े चेहरों के नाम का खुलासा हो जाएगा। सरकार को उसे गिरफ्तारी देकर सुरक्षा देनी चाहिए साथ इस मामले का सच उजागर करना चाहिए। महाकाल मंदिर में घोटाला पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने कहा कि महाकाल मंदिर में जिन लोगों को प्रशासक बना रखा है। उन्होंने 1-1.50 करोड़ के ऑनलाइन ट्रांजैक्शन किए हैं। ये भ्रष्टाचार भोलेनाथ को भी नहीं छोड़ रहा है। पहले महाकाल लोक में करप्शन किया था। उसमें मुख्यमंत्री समेत कई लोगों पर उंगली उठी थी। इन्हें भगवान के दर्शन में भी पैसे चाहिए। ये भगवान के सबसे बड़े भक्त हैं। भोलेनाथ के ऑनलाइन दर्शन कराने के लिए अलग से पैसे दो और अपनी जेब में डालकर परिवार का पालन-पोषण करेंगे। बंगले बनाएंगे और प्लॉट खरीदेंगे। ये हैं बीजेपी और आरएसस से जु़ड़े हुए लोगों के नैतिक दायित्व। रिश्वत नहीं पहुंची तो हत्या हुई आगे पटवारी ने कहा कि देवास के सतवास थाने में 35 साल का बेटा। जिसके दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। बूढ़ी मां घर में अकेली है। एक 6 हजार की रिश्वत देने में देरी हुई तो इसमें हत्या कर दी। मैंने खुद ने जब इस पाठ का निरीक्षण किया तो कंधे बराबर जाली से लटके फांसी लेने का पुलिस का बयान आया या उन्होंने प्रचारित किया। जो सरासर गलत है। सीएम को मैंने कहा था कि पूरा थाना सस्पेंड करो मैसेज जाएगा कि अगर रक्षक भक्षक बनते हैं तो सरकार अलर्ट रहेगी। मुख्यमंत्री जी से मेरा आग्रह है कि 1 करोड़ रुपए परिवार को दो।पीसीसी चीफ ने आरोप लगाते हुए कहा कि NCRB की रिपोर्ट के अनुसार दलितों परल अत्याचार के मामलों में मध्यप्रदेश भारत में सबसे ऊपर है। यह स्थिति तब है। जब भाजपा प्रदेश में पिछले 20 सालों से सत्ता में हैं।

देवास पुलिस का ‘ऑपरेशन त्रिनेत्रम’, 10 लाख के CCTV कैमरों से अपराध पर लगेगी लगाम

Dewas Police’s ‘Operation Trinetram’, crime will be controlled with CCTV cameras worth Rs 10 lakh मध्य प्रदेश की देवास पुलिस ने अपराधों की रोकथाम के लिए ऑपरेशन त्रिनेत्रम शुरू किया है. इस अभियान के तहत लोगों ने 10 लाख रुपए खर्च किए हैं. अभी भी अभियान जारी है. इस अभियान का उद्देश्य देवास जिले में अपराधों की रोकथाम करना है. एसपी पुनीत गहलोद ने बताया कि यह अभियान के जरिए पूरे जिले में 275 कैमरे लगाए गए हैं. देवास एसपी पुनीत गहलोद ने बताया कि देवास जिले में ऑपरेशन त्रिनेत्रम के जरिए लोगों और व्यापारियों को सीसीटीवी कैमरा लगाने के लिए पुलिस द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है. इसी कड़ी में लगभग 10 लाख रुपए कीमत के 275 नए कैमरे पूरे जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्र में स्थापित किए गए. उन्होंने बताया कि कैमरा कानून व्यवस्था का पालन करने और अपराधों पर नियंत्रण रखने के लिए काफी महत्वपूर्ण माध्यम बनता जा रहा है. कैमरा स्थापित करने के लिए लोगों को जागरूक और प्रोत्साहित भी किया जा रहा है. इसके अलावा जो इस अभियान में आगे बढ़कर कैमरा लगा रहे हैं, उन्हें पुलिस सम्मानित भी कर रही है. यह अभियान 1 नवंबर से शुरू किया गया था. वैज्ञानिक साक्षी के रूप में अहम भूमिका पुलिस अधीक्षक में चर्चा के दौरान बताया कि सीसीटीवी कैमरा अपराध रोकने के साथ-साथ अपराध निराकरण एवं न्यायालयीन विचाराधीन प्रकरणों में वैज्ञानिक साक्ष्य के रूप में अहम भूमिका निभा रहा है. पुलिस द्वारा प्रतिदिन चौपाल के माध्यम से लोगों को अधिक से अधिक कैमरा स्थापित करने के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है, जिससे प्रभावित होकर लोगों द्वारा सकारात्मक सहयोग दिया जा रहा है. चोरी और गंभीर अपराधों पर नकेल पुलिस अधीक्षक ने बताया कि चोरी और गंभीर अपराधों में सीसीटीवी कैमरा लगने से कहीं ना कहीं कमी आती है. इसके अलावा जहां अपराध घटित होता है, वहां सबूत के रूप में कैमरे के फुटेज सामने आ जाते हैं, जिससे आरोपी को पकड़ने में पुलिस को मदद मिलती है. इसके अलावा इसे वैज्ञानिक साक्ष्य के रूप में न्यायालय भी काफी महत्व दे रही है, इसलिए लोगों को लगातार सीसीटीवी कैमरा लगाने के लिए जागरूक किया जा रहा है.

देवास में पुलिस हिरासत में दलित युवक की मौत, कांग्रेस जीतू पटवारी का तीखा हमला, पैसे की मांग का आरोप

Death of Dalit youth in police custody in Dewas, sharp attack by Congress’s Jitu Patwari, allegation of demanding money. देवास जिले के सतवास में पुलिस हिरासत में एक दलित युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जिसके बाद परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि पुलिस ने युवक से पैसे की मांग की थी, और जब रकम नहीं दी गई तो पुलिस की बर्बरता का शिकार बना युवक मौत की वजह बना। इस घटना के बाद पूरे देवास में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे पुलिस की बर्बरता करार दिया है। हिरासत में मौत का मामला मालागांव के रहने वाले 35 वर्षीय मुकेश लोंगरे को शनिवार दोपहर पुलिस ने एक महिला द्वारा दर्ज कराए गए मामले के तहत हिरासत में लिया था। लेकिन शाम होते-होते मुकेश की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पुलिस ने प्रारंभिक तौर पर दावा किया कि युवक ने आत्महत्या करने की कोशिश की, लेकिन उसके परिजनों का कहना है कि पुलिस ने उसे बिना किसी कारण हिरासत में लिया और उसके साथ बर्बरता की। पैसे की मांग का आरोप परिजनों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने मामले में धाराएं कम करने के एवज में 6,000 रुपये की मांग की थी। मुकेश के साथ थाने में मौजूद एक साथी को यह राशि देने के लिए घर भेजा गया था। जब वह पैसे लेकर लौटा, तब तक मुकेश की मौत हो चुकी थी। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने बिना उनकी जानकारी के मुकेश के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और शव के कमरे में बाहर से ताला लगा दिया, जिससे परिवार के लोग अंदर नहीं जा सके। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस घटना को लेकर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि देवास में पुलिस ने एक और दलित युवक की बेरहमी से हत्या कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन अब गुंडों से ज्यादा दलित समाज पर अत्याचार कर रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस घटना की जिम्मेदारी लेते हुए पूरे थाने के पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया जाए। सड़क पर उतरे लोग घटना के बाद स्थानीय लोग और मुकेश के परिजन सड़क पर उतर आए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। वे पुलिस प्रशासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इस घटना ने देवास जिले में पुलिस के खिलाफ गहरी नाराजगी को जन्म दिया है और लोग न्याय की उम्मीद में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। न्याय की मांग मुकेश के परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस की बर्बरता के कारण उनका परिवार टूट गया है। वे अब पुलिस के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे हैं और न्याय की उम्मीद लगाए हुए हैं। इस मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं, और लोगों की मांग है कि दोषियों को सजा मिले और इस तरह के अत्याचार को रोका जाए। इस घटना ने देवास जिले में पुलिस प्रशासन के खिलाफ गुस्से को और बढ़ा दिया है, और अब लोग सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज उठाने को तैयार हैं।

भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष वैभव पंवार ने की 13 दिवसीय ‘माँ बैनगंगा नदी दर्शन व अध्ययन यात्रा’

BJYM State President Vaibhav Panwar did 13-day ‘Maa Bainganga River Darshan and Study Tour’ सिवनी/बालाघाट। भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वैभव पंवार ने 15 दिसंबर 2024 को माँ बैनगंगा नदी के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से ‘माँ बैनगंगा नदी दर्शन व अध्ययन यात्रा’ का शुभारंभ किया। यह यात्रा सिवनी जिले के मुंडारा (परतापुर) में माँ बैनगंगा के उद्गम स्थल से आरंभ हुई। पंवार ने विविधत पूजन और आरती के बाद इस यात्रा को आगे बढ़ाया। यात्रा के दौरान लगभग 160 किलोमीटर की पदयात्रा की गई, जबकि शेष यात्रा सहयात्रियों के साथ बस से पूरी की गई। यह यात्रा मध्यप्रदेश के सिवनी-बालाघाट के अधिकांशतः गांवों से होते हुए महाराष्ट्र और तेलंगाना के कुछ जिलों की सीमाओं से होकर गुजरी। इस दौरान पंवार ने स्थानीय लोगों से चर्चा कर माँ बैनगंगा नदी के संरक्षण, घाटों के निर्माण और उससे जुड़ी सांस्कृतिक मान्यताओं पर संवाद किया। यात्रा का समापन तेलंगाना के गोदावरी किनारे स्थित संगम घाट पर पूजन के साथ हुआ। पंवार ने माँ बैनगंगा की पवित्रता और उसके महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह यात्रा नदी संरक्षण के प्रति जनजागृति फैलाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि“माँ बैनगंगा नदी केवल एक जलधारा नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, आस्था और पर्यावरणीय संतुलन की आधारशिला है। प्रकृति संरक्षण के लिए जनभागीदारी जरूरी उन्होंने कहा कि ‘माँ बैनगंगा नदी दर्शन व अध्ययन यात्रा’ के माध्यम से हमने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि नदियाँ केवल हमारे भौतिक जीवन का ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन का भी हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि इस यात्रा में हमें यह महसूस हुआ कि नदी संरक्षण केवल सरकार का काम नहीं, बल्कि हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। माँ बैनगंगा के संरक्षण और घाटों के निर्माण के लिए जनभागीदारी सुनिश्चित करना हमारा लक्ष्य है। आने वाली पीढ़ियों के लिए इस पवित्र धरोहर को संजोकर रखना हम सभी का कर्तव्य है।” 30 दिसंबर को होगा प्रसादी वितरण 30 दिसंबर 2024 को सोमवती अमावस्या के दिन मुंडारा (परतापुर) सिवनी में माँ बैनगंगा के उद्गम स्थल पर पूजन और प्रसादी का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेंगे।

नेशनल खेलकर गृह वापसी पर रेलवे स्टेशन आमला पहुंच किया स्वागत ।

He was welcomed at Amla Railway Station on his return home after playing National cricket. हरिप्रसाद गोहे  आमला । पैराडाइज स्कूल के छात्र मोहित ठाकरे जो की राष्ट्रीय वॉलीबॉल में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करने तेलंगाना गया था । वहां दिनांक 28.12.2024 को नेशनल खेल कर वापस आमला आने पर छात्र मोहित ठाकरे का रेलवे स्टेशन पर भव्य स्वागत किया गया । स्टेशन  पर पैराडाइज स्कूल के समस्त स्टाफ के साथ प्राचार्य अनुराग मालवीय, संतोष पांसे,  महेश देशमुख, राजेश नागले, सुनील करारे,  ममता पवार, मल्लिका पाल, पुष्पा पवार, आशा विश्वकर्मा उपस्थित थे । इस अवसर पर सी एम राइस स्कूल के प्रधान पाठक एवं राज्य स्तरीय वॉलीबॉल रेफरी  गणेश बारस्कर  का भी सम्मान संदीप देवडे,  आशीष माकोड़े द्वारा किया गया । सभी ने छात्र की सराहना की एवं भविष्य हेतु बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं दी । रेलवे स्टेशन से गाजे बजे के साथ छात्र को ग्राम रमली ले जाया गया जहां ग्राम के समस्त ग्रामीणों ने विशाल संख्या में पहुंचकर छात्र का स्वागत किया ।

एमपी गजब : मऊगंज में ‘धूम-3’ स्टाइल में चोरी: जुड़वा भाइ एक चोरी करता..दूसरा CCTV के सामने खड़ा रहता

MP Amazing: ‘Dhoom-3’ style theft in Mauganj: Twin brothers, one would steal and the other would stand in front of the CCTV. रीवा, मऊगंज। मध्यप्रदेश के नवगठित मऊगंज जिले में चोरी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस को भी हैरान कर दिया। चोरी करने का तरीका बॉलीवुड की मशहूर फिल्म धूम-3 से प्रेरित था, जिसमें जुड़वा भाइयों ने मिलकर पुलिस को चकमा दिया। लेकिन पुलिस की सतर्कता ने इस चालाकी का पर्दाफाश कर दिया। 22 दिसंबर की रात हुई थी चोरी यह मामला तब उजागर हुआ जब मऊगंज पुलिस ने 22 दिसंबर की रात चाकमोड़ निवासी सत्यभान सोनी के घर हुई चोरी के आरोपियों को गिरफ्तार किया। इस वारदात में घर से लाखों के जेवरात और नकदी चोरी हुई थी। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों—रविशंकर विश्वकर्मा, संजीव वर्मा, और जगन्नाथ केवट—को गिरफ्तार कर उनके पास से चोरी का सामान बरामद किया। जुड़वा भाइयों की अनोखी चालाकी जांच के दौरान खुलासा हुआ कि आरोपी संजीव वर्मा का जुड़वा भाई सौरभ वर्मा उसकी हर चोरी में शामिल था। दोनों भाइयों की शक्ल और कद-काठी एक जैसी होने का फायदा उठाते हुए उन्होंने पुलिस को गुमराह करने की योजना बनाई थी। जब संजीव चोरी करने जाता, तो सौरभ ठीक उसी वक्त एक जैसे कपड़े पहनकर किसी सीसीटीवी कैमरे के सामने अपनी उपस्थिति दर्ज कराता था। इस तरीके से, यदि चोरी के संदेह में पुलिस संजीव तक पहुंचती, तो सौरभ के सीसीटीवी फुटेज दिखाकर उनकी मौजूदगी किसी अन्य जगह साबित हो जाती थी। पुलिस ने किया पर्दाफाश हालांकि, पुलिस की गहन जांच और सावधानी ने इस अनोखी चालाकी का भंडाफोड़ कर दिया। मऊगंज पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके जुड़वा भाई वाली योजना का राज़ उजागर किया। आरोपियों के पास से चोरी हुए जेवरात और नकदी भी बरामद कर ली गई है। फिल्मी कहानी, लेकिन हकीकत में असफल यह मामला अपने आप में अनोखा है और इसे फिल्मी कहानी जैसा बताया जा रहा है। धूम-3 की कहानी में जुड़वा भाई अपने चालाक तरीकों से सभी को मात देते हैं, लेकिन मऊगंज में असल जिंदगी में जुड़वा भाइयों की चालाकी पुलिस के आगे टिक नहीं पाई। नवगठित मऊगंज पुलिस की सराहना इस सफलता के बाद मऊगंज पुलिस की सतर्कता और कार्यकुशलता की सराहना हो रही है। नवगठित जिले में यह मामला न केवल पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण था, बल्कि उनकी क्षमता को साबित करने वाला भी रहा। पुलिस की सतर्कता ने अपराधियों को पकड़कर एक बार फिर यह दिखा दिया कि कानून से बच पाना मुश्किल है। मऊगंज पुलिस की इस कामयाबी से स्थानीय लोग भी राहत महसूस कर रहे हैं, और यह घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

मध्यप्रदेश बीजेपी में जबर्दस्त खींचतान, मोहन-शर्मा-सिंधिया सबके पावर खत्म, हाईकमान का सीधा हस्तक्षेप

Tremendous tussle in Madhya Pradesh BJP, Sharma-Scindia lose power, direct intervention of high command भोपाल ! मध्यप्रदेश में संगठन चुनावों के दौरान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में भारी उथल-पुथल देखने को मिली। पार्टी के भीतर मंडल अध्यक्षों और जिला अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर खींचतान साफ झलकी। पार्टी ने पहले पारदर्शिता का दावा करते हुए कहा था कि नियुक्तियां किसी मंत्री, सांसद, विधायक, या जिलाध्यक्ष की पसंद से नहीं, बल्कि योग्यता के आधार पर होंगी। लेकिन व्यवहार में यह वादा अधूरा ही रहा। हाईकमान का नया निर्देश बीजेपी हाईकमान ने इस स्थिति से निपटने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे नेताओं का जिला अध्यक्षों के चयन में सीधा हस्तक्षेप समाप्त कर दिया गया है। हाईकमान ने स्पष्ट कर दिया है कि जैसे सांसद और विधायक के टिकट का निर्णय केंद्रीय नेतृत्व करता है, वैसे ही अब जिलाध्यक्षों का चयन भी दिल्ली से होगा। जिला अध्यक्षों के चयन प्रक्रिया में बदलाव मध्यप्रदेश में बीजेपी जिलाध्यक्षों की चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जिला स्तर पर चुनाव अधिकारियों ने तीन नामों का पैनल तैयार कर प्रदेश संगठन को सौंप दिया है। अब इन नामों पर अंतिम निर्णय हाईकमान करेगा। यह पहली बार है जब मध्यप्रदेश बीजेपी में जिलाध्यक्षों का निर्धारण सीधे दिल्ली से किया जाएगा। पारदर्शिता और योग्यता पर जोर इस बदलाव का उद्देश्य संगठन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। अब तक जिलाध्यक्षों का चयन स्थानीय नेताओं द्वारा किया जाता रहा, जिसमें कई बार सांसद और विधायकों ने अपनी पसंद के लोगों को ही प्राथमिकता दी। इससे योग्यता को दरकिनार किया गया। नई व्यवस्था के तहत काबिल और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को प्रमुख जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। मंडल अध्यक्षों के चुनाव में विवाद हाल ही में हुए मंडल अध्यक्षों के चुनावों में कई गड़बड़ियां सामने आईं। पार्टी द्वारा तय किए गए क्राइटेरिया, जैसे 45 साल की आयु सीमा, आपराधिक रिकार्ड न होना, और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल न होना, का पालन कई जगहों पर नहीं हुआ। कई मंडल अध्यक्षों की नियुक्तियों पर विवाद हुआ, और कुछ को चयन के तुरंत बाद हटा भी दिया गया। नई व्यवस्था से उम्मीदें मंडल अध्यक्षों के चुनाव में सामने आए विवादों और शिकायतों के बाद हाईकमान ने जिलाध्यक्षों के चयन को लेकर सख्ती दिखाई है। अब दिल्ली से चयन होने से पारदर्शिता और निष्पक्षता की उम्मीद बढ़ गई है। इससे कार्यकर्ताओं का विश्वास भी मजबूत होगा और पार्टी संगठन को नई दिशा मिलेगी। यह कदम मध्यप्रदेश बीजेपी के संगठन को न केवल मजबूती देगा, बल्कि योग्यता और पारदर्शिता के नए मानदंड भी स्थापित करेगा।

एमपी में बड़ा हादसा : हटा-पन्ना राजमार्ग पर बस और ट्रक की टक्कर में 25 घायल, दोनों वाहनों के चालक फरार

Major accident in MP: 25 injured in collision between bus and truck on Hata-Panna highway, drivers of both vehicles absconding जिले के हटा पन्ना राजमार्ग पर गैसाबाद में व्यारमा नदी पुल के पास शनिवार सुबह यात्री बस और ट्रक की आमने सामने टक्कर हो गई। हादसे में बस में सवार करीब 25 यात्री घायल हो गए और अफरा तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को हटा सिविल अस्पताल भिजवाया। घटना के बाद बस और ट्रक चालक मौके से भाग निकले। हादसे के बाद घायलों को बाहर निकालने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ा] क्योंकि बारिश हो रही थी] जिससे रेस्क्यू में समय भी लग गया। जानकारी के अनुसार बस क्रमांक एमपी 34 पी 0241 दमोह से पन्ना की ओर जा रही थी। ट्रक क्रमांक एमपी 33 एच 2852 सीमेंट लोड कर रीवा से सागर की तरफ जा रहा था। गैसाबाद में पुल के पास पहुंचते ही दोनों वाहनों की आमने सामने टक्कर हो गई। जिससे बस में सवार यात्री घायल हो गए और चीख पुकार मच गई। हादसे में दोनों वाहन भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। सूचना मिलते ही मौके पर गैसाबाद थाना प्रभारी प्रीति पांडे पुलिस बल के साथ पहुची गंभीर घायलो को 108 की मदद से हटा सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया वहीं कुछ घायल सिमरिया अस्पताल चले गए। मौके से ट्रक ड्राइवर व बस ड्राइवर भाग गए हैं। सिविल अस्पताल में घायलों का इलाज शुरू किया गया। एक घायल सतीश कुमार सूर्यवंशी ने बताया कि हादसा कैसे हुआ कुछ समझ नहीं आया। अचानक दोनों वाहन आपस में टकरा गए और यात्रियों ने चिल्लाना शुरू कर दिया। घायलों की जानकारी लेने के हटा तहसीलदार प्रवीण त्रिपाठी एसडीएम राकेश मरकाम भी पहुंच गए। एसडीएम ने बताया ट्रक और बस की टक्कर में 20 से अधिक यात्री घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए हटा सिविल अस्पताल लाया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है हादसा कैसे हुआ।

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का आलेख

Article by former Chief Minister of Madhya Pradesh Kamal Nath कमलनाथमध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार का एक साल का कार्यकाल 13 दिसंबर को पूरा हो गया। अब बीजेपी इस एक साल को स्वर्णिम कार्यकाल बताकर अपनी पीठ थपथपा रही है। लेकिन मोहन सरकार ने गरीबों, किसानों, युवाओं, महिलाओं, दलितों और सभी वर्गों के लोगों के लिए क्‍या किया है यह विचारणीय है। महिला सुरक्षा, दलित और आदिवासी सुरक्षा के मामले में मध्यप्रदेश का रिकॉर्ड और भी खराब हो गया है। स्वास्थ्य शिक्षा का हाल यह है कि मध्यप्रदेश की पहचान व्यापमं और नर्सिंग जैसे घोटालों से होने लगी है। समाज की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था, हर पहलू पर इतनी नाकामी क्यों हासिल हो रही है? इससे बढ़कर चिंता की बात यह है कि मध्य प्रदेश सरकार इन सारे विषयों पर एकदम चुप है। क्या जनता के विकास के ये सबसे महत्वपूर्ण पैरामीटर सरकार की प्राथमिकता से बाहर हो गए हैं? ऐसा लगता है कि मध्य प्रदेश की सरकार ने जमीनी सच्चाई से पूरी तरह पीठ फेर ली है और प्रदेश को उसके हाल पर छोड़ कर, खुद सिर्फ झूठी ब्रांडिंग से अपनी पीठ थपथपाने में व्यस्त हो गई है। हकीकत से मुंह फेर कर मोहन सरकार झूठे प्रचार-प्रसार में मस्‍त है। जबकि चुनावों के पहले बीजेपी ने बड़े-बड़े वादे कर जनता को गुमराह करने का काम किया। आज प्रदेश की जनता खुद सरकार से सवाल करना चाहती है कि वादों का क्‍या हुआ? सरकार कर्ज पर कर्ज लेकर अपनी गाड़ी को चला रही है। और सपने ऐसे दिखाए जा रहे हैं कि प्रदेश ने विकास के कई सोपान गढ़ लिए हैं। दलितों पर अत्‍याचार पिछले एक साल में प्रदेश में दलितों पर काफी अत्‍याचार हुए हैं। वह चाहे शिवपुरी की घटना हो या सागर की घटना हो। सारे प्रदेश में दलितों पर हो रहे अत्‍याचारों से यही लगता है कि यह साल दलित अत्‍याचार पर केन्द्रित रहा है। शिवपुरी के इंदरगढ़ में एक दलित युवक की लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। मध्यप्रदेश के सागर जिले के ग्राम बरोदिया नोनागिर में दलित युवती द्वारा छेड़छाड़ की शिकायत से गुस्साए गुंडों ने युवती के भाई की पिछले वर्ष अगस्त माह में हत्या कर दी थी। हत्या में बीजेपी नेताओं पर आरोप लगे। पीड़ित परिवार समझौते के लिये तैयार नहीं हुआ तो दो दिन पूर्व पीड़िता के चाचा की भी हत्या कर दी गई। मंदसौर जिले के एक गांव में एक महिला का पीछा करने के आरोप में दलित व्यक्ति को चेहरा काला करके, गले में जूतों की माला डालकर घुमाया गया। यह दोनों घटनाएं तो सिर्फ ऐसी थी जो सुर्खियों में ज्‍यादा रहीं लेकिन‍ ऐसी न जाने हजारों घटनाएं हैं जो रोज दलितों से साथ घटती रहीं। दुर्भाग्य की बात है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस तरह के विषयों पर कुछ भी कहने से बचते रहे और दलितों की सुरक्षा सुनिश्चित कराने में पूरी तरह नाकाम रहे। कर्ज के भरोसे सरकार मध्य प्रदेश में कर्ज दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। ऐसा कोई महीना नहीं बीतता है जब सरकार कर्ज न ले रही हो। सरकार पिछले 11 महीनों में 40 हजार 500 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है। राज्य यादव सरकार के एक साल पूरे होने के साथ कर्ज का आंकड़ा 52.5 हजार करोड़ तक पहुंचने वाला है। दिसंबर 2023 से अब तक सरकार ने 47.5 हजार करोड़ का कर्ज लिया है। साल 2024 के अंत तक राज्य पर कुल कर्ज 4 लाख करोड़ से अधिक हो जाएगा। पिछले 6 माह में हर महीने 05-05 हजार करोड़ का कर्ज लिया जा रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में अब तक 30 हजार करोड़ का कर्ज लिया जा चुका है। 31 मार्च 2025 तक मप्र सरकार का कर्ज 4.21 लाख करोड़ पहुंचेगा। मौजूदा वित्त वर्ष में सरकार अपनी जरूरतों के लिए लगभग 25 हजार करोड़ का अतिरिक्त कर्ज लेगी। पिछले साढ़े चार साल में मप्र सरकार पर कर्ज का बोझ सबसे तेजी से बढ़ा है। मार्च 2020 की स्थिति में सरकार पर लगभग 2.01 लाख करोड़ का ही कर्ज था, लेकिन पिछले साढ़े चार साल में यह दोगुना हो गया है। वादे पूरे करने में नाकाम मोहन सरकार सरकार अपने कार्यकाल का एक साल पूरा होने का जश्न मना रही है। लेकिन‍ अपने वादों को भूल गई है। चुनावों के समय जो वादे किये थे उन पर ध्‍यान ही नहीं है। लाडली बहनों को 3,000 रुपये की राशि देने का वादा, किसानों को उपज का दाम मिलना, युवाओं को रोजगार देने का वादा, महिलाओं को सुरक्षा देने का वादा, भ्रष्‍टाचार मुक्‍त प्रदेश बनाने का वादा ऐसे तमाम वादे थे जो एक साल में शुरू ही नहीं हुए हैं। किसान परेशान, जश्‍न में सरकार मध्य प्रदेश में खाद की कमी के कारण किसानों की आय पर भी काफी असर पड़ा है। किसानों ने खाद की कमी के कारण अपनी फसल ही नहीं बोई। किसानों को ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पहले साल के कार्यकाल में ऐसे मामले हैं जहां मोहन यादव की सरकार बैकफुट पर नजर आई। राज्य में कानून व्यवस्था को लेकर सवाल 13 दिसंबर 2023 को मोहन यादव राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। मोहन यादव के पहले कार्यकाल में मध्य प्रदेश में क्राइम के कई ऐसे मामले आए जिसके राज्य सरकार की किरकिरी हुई। वैसे तो प्रदेश को शांति का टापू कहा जाता है लेकिन प्रदेश में दिनोंदिन बढ़ रहे अपराधों ने मध्‍यप्रदेश को बदनाम किया है। अपराधों के आंकड़ों में लगातार इजाफा हो रहा है। क्‍या महिलाएं क्‍या बच्चियां, कोई सुरक्षित नहीं है। साइबर क्राइम भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। नौकरियों की घोषणा पर भर्ती नहीं राज्य के युवाओं को साधने के लिए मोहन यादव की सरकार ने एक लाख पदों पर भर्ती की घोषणा की थी। दिसंबर महीने से भर्ती शुरू होनी थी लेकिन कई विभाग ऐसे हैं जो यह रिपोर्ट तक नहीं दे पाए हैं कि उनके विभाग में कितने पद खाली हैं। बीते एक साल से भर्ती नहीं होने पर युवाओं में ओवरएज होने का डर है। नर्सिंग घोटाला से धूमिल हुई छवि राज्य में नर्सिंग घोटाले के बाद प्रदेश सरकार की छवि धूमिल हुई है। राज्य में कॉलेजों की संख्या कम की गई है। नर्सिंग घोटाले … Read more

क्या वेजिटेबल जूस में मिला सकते हैं फ्रूट्स, क्या यह सेहत के लिए हो सकता है खतरनाक?

lifestyle health mixing fruits and vegetables in juice can be dangerous to your health कुछ लोग ऐसे होते हैं जो कच्ची सब्जियों का जूस पीना पसंद करते हैं. फिटनेस फ्रिक वाले लोग हरी सब्जियों को ज्यादा से ज्यादा अपनी डाइट में शामिल करते हैं. ऐसे डाइट लेने वाले समर्थकों का दावा है कि कच्ची सब्ज़ियों में कई जरूरी विटामिन और खनिज होते हैं जो खाना पकाने के दौरान खत्म हो जाते हैं और ये इम्युनिटी को बढ़ाने और बीमारियों को रोकने के लिए बहुत बढ़िया हैं. यह बात सही हो सकती है लेकिन किसी भी चीज़ को हद से ज्यादा खाना सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. सर्दियां आ रही हैं और यह वह मौसम है जब हरी पत्तेदार सब्जियां काफी ज्यादा मार्केट में होती हैं और लोग हर संभव दिलचस्प तरीके से उन्हें अपने आहार में शामिल करके उनका अधिकतम लाभ उठाने की कोशिश करते हैं. कुछ लोग इस मौसम में कच्ची सब्जियों का जूस पीना भी पसंद करते हैं. लेकिन क्या ये सभी वाकई सेहतमंद और सुरक्षित हैं? आपको हरी सब्जियां किस तरह खानी चाहिए – उन्हें पकाकर या कच्चे रूप में खाकर. आयुर्वेद और आंत स्वास्थ्य कोच डॉ. डिंपल जांगडा ने अपने हालिया इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा है कि अधिक मात्रा में कच्चे खाद्य पदार्थों का सेवन करने से पेट में कुछ संक्रमण या अपच का खतरा हो सकता है. पके हुए भोजन की तुलना में कच्चे खाद्य पदार्थों को पचाना शरीर के लिए अधिक कठिन होता है, क्योंकि पके हुए भोजन पहले से ही गर्मी, मसालों और पकाने की विधि से टूट जाते हैं. वे अवशोषण के लिए अधिक जैविक रूप से उपलब्ध होते हैं और पाचन अग्नि पर तनाव को कम करते हैं. कुछ कच्चे खाद्य पदार्थों में एंटी-पोषक तत्व भी होते हैं जो वास्तव में खाद्य पदार्थों के पोषण अवशोषण को पूरी तरह से अवरुद्ध कर देते हैं.हल्का खाना पकाने की सलाह दी जाती है. विशेषज्ञ कहते हैं, यदि आप मतली, थकान, चक्कर आना, पेट फूलना, दस्त या आईबीएस जैसे लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं, तो आपका शरीर आपसे बात कर रहा है. आयुर्वेद बड़ी मात्रा में कच्चे खाद्य पदार्थों या ठंडे खाद्य पदार्थों का सेवन करने की सलाह नहीं देता है, क्योंकि वे परजीवियों का घर होते हैं, जिन्हें केवल धोने से नष्ट नहीं किया जा सकता है. कच्ची सब्ज़ियां जिनसे बचना चाहिए Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

UPI नहीं, कैश… इंदौर के व्यापारियों का ऐलान, दुकानों के बाहर क्यों लगाए ऐसे पोस्टर?

indore traders declare that they will not accept payments through upi posters put up outside shops stwma देश भर में साइबर फ्रॉड के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. इसी के तहत साइबर क्राइम टीम भी लगातार काम कर रही है. कई लोगों को गिरफ्तार भी किया है और कई लोगों के खिलाफ अभी भी लगातार जांच जारी है. इसमें सबसे बड़ी समस्या व्यापारियों के लिए सामने आती है. इंदौर ! मध्य प्रदेश के इंदौर में व्यापारियों ने UPI पेमेंट लेने से इनकार कर दिया है. कोई भी दुकानदार ग्राहक से यूपीआई के जरिए पेमेंट नहीं लेंगे. इसकी जानकारी वह अपने-अपने प्रतिष्ठानों पर पोस्टर लगाकर दे रहे हैं. दुकानदारों के इस निर्णय से ग्राहक परेशान हो रहे हैं. इस मामले को लेकर जिला कलेक्टर व्यापारियों से बात करेंगे. वहीं, यूपीआई पेमेंट ने लेने पर व्यापारियों का कहना है कि साइबर फ्रॉड के कारण वह परेशान हो रहे हैं, पुलिस भी उनके अकाउंट होल्ड कर देती है. पूरी दुनिया डिजिटलाइजेशन पर निर्भर हो चुकी है. अब हर चीज मोबाइल से ऑपरेट की जाती है. इसके कई फायदे भी हैं तो कई नुकसान भी. व्यापारियों का कहना है कि सबसे बड़ा नुकसान साइबर फ्रॉड है. उनका कहना है कि जब कोई बदमाश एक अकाउंट से पैसा लेकर दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर करता है और उसी अकाउंटस से वह किसी व्यापारी के यहां से खरीदारी करता है. जांच में वह अकाउंट पाया जाता है तो व्यापारी का भी अकाउंट सीज कर लिया जाता है. इस समस्या से परेशान इंदौर के व्यापारियों ने यूपीआई पेमेंट को अब ना कह दिया है. कैश और क्रेडिट कार्ड से लेंगे पेमेंट इंदौर के व्यापारी ग्राहक से कैश और क्रेडिट कार्ड के जरिए पेमेंट लेंगे. उन्होंने यूपीआई के जरिए पेमेंट लेने से इनकार कर दिया है. इसका फैसला राजवाड़ा के व्यापारी एसोसिएशन ने लिया है. व्यापारियों का कहना है कि अगर कोई ग्राहक उनकी दुकान पर आता है और वह यूपीआई पेमेंट करता है, जब पुलिस जांच में वह ग्राहक गुनाहगार निकलता है तो पुलिस व्यापारियों का अकाउंट भी सीज कर देती है. उसको खुलवाने में कई महीनों लग जाते हैं. तब तक व्यापारी का पैसा उसी अकाउंट में रखा रह जाता है. इस बीच न वो उसका इस्तेमाल कर सकता है और न पेमेंट निकाल सकता है, जिससे की कई व्यापारी परेशान हो जाते हैं. कलेक्टर करेंगे व्यापारियों से बात इस मामले में इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह ने शुक्रवार को बताया कि जैसे ही साइबर फ्रॉड की शिकायत आती है, पुलिस प्रशासन उस पर तुरंत कार्रवाई करता है. अगर एक दो ट्रांजेक्शन के कारण ऐसा हुआ है और यूपीआई पेमेंट को गलत कहना गलत हे. वहीं व्यापारियों द्वारा लगाए गए पोस्टरों पर कहा कि हम एक टीम भेजकर उनसे बातचीत करेंगे, क्योंकि डिजिटल इकोनॉमी भी बहुत आवश्यक है. उसमें अगर किसी चीज की कमी है तो उसको दूर किया जाना चाहिए

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