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गुंडे-अपराधी समझ लें, उनके लिए अब सुरक्षित नहीं है मध्यप्रदेश : विष्णुदत्त शर्मा.

Consider goons and criminals warned, Madhya Pradesh is not safe for them anymore: Vishnudatt Sharma. प्रदेश अध्यक्ष ने कहा: मोदी की गारंटी को पूरा करने प्रदेश सरकार ने बढ़ाया पहला कदम उदित नारायणभोपाल। गुंडे और अपराधी अब यह सोच लें कि मध्यप्रदेश उनके लिए सुरक्षित नहीं है और ऐसे लोगों के लिए प्रदेश में कोई स्थान नहीं है। सरकार के निर्णय से आदतन अपराधियों पर शिकंजा और कसेगा तथा वे कोई नया अपराध करने की स्थिति में नहीं होंगे। यह बात भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने कही। जनहितैषी निर्णयों के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनकी सरकार के प्रति आभार जताते हुए गुरूवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि 2003 में भाजपा सरकार को ऐसा मप्र मिला था, जो असुरक्षित था और जहां गुंडों-अपराधियों का बोलबाला था। भाजपा की सरकार ने गुंडों, अपराधियों और डकैतों की नकेल कसकर प्रदेश को सुरक्षित बनाया। इससे आगे बढ़कर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने निर्णय लिया है कि ऐसे आदतन अपराधियों के द्वारा पूर्व में किए गए अपराधों में प्राप्त जमानत को दंड प्रक्रिया संहिता सीआरपीसी की धारा 437 438 439 के तहत संबंधित न्यायालयों में आवेदन प्रस्तुत करके जमानत निरस्त करने की कार्रवाई की जाए। देश के अंदर अगर कोई गारंटी है, तो वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटीप्रदेश अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि देश के अंदर अगर कोई गारंटी है, तो वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी है। विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेश की जनता को यह विश्वास दिलाया था कि ’मोदी की गारंटी, हर गारंटी के पूरा होने की गारंटी’ है। प्रधानमंत्री के इस वादे को पूरा करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट मीटिंग में ही तेंदूपत्ता की दर 4000 रुपये प्रति मानक बोरा करने का निर्णय ले लिया है, जिसके लिए भाजपा के संकल्प पत्र में वादा किया गया था। राज्य सरकार का यह निर्णय मोदी की गारंटी को पूरा करने की दिशा में उठाया गया पहला कदम है। सरकार के इस निर्णय से उन आदिवासी भाईयों का सशक्तीकरण होगा, जो वनोपज एकत्र करके अपनी आजीविका चलाते हैं। जनता की तकलीफें दूर होंगी, मिलेंगी सुविधाएं प्रदेश अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार के निर्णयों से व्यवस्था पारदर्शी होगी और किसान भाईयों, ग्रामीणों, आम लोगों की परेशानियां कम होंगी। शर्मा ने कहा कि गुड गवर्नेंस का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए राज्य सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट में जो निर्णय लिए हैं, उनके लिए मैं मुख्यमंत्री और उनकी कैबिनेट को बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। मोदी की गारंटी को घर-घर पहुंचाएगी विकसित भारत संकल्प यात्राप्रदेश अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के मंत्र पर आगे बढ़ रही है। उनकी सरकार की योजनाओं के केंद्र में आम नागरिक, नौजवान, महिलाएं, किसान और गरीब होते हैं। इन योजनाओं के बारे में जनजागरूकता तथा इनका लाभ लोगों को दिलाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश एवं अन्य राज्यों में 16 दिसम्बर से विकसित भारत संकल्प यात्रा निकाली जा रही हैं। ये यात्राएं सभी ग्राम पंचायतों और नगरीय निकाय क्षेत्रों में भ्रमण करेंगी तथा यात्राओं में शामिल ’गारंटी रथ’ के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी घर-घर पहुंचेगी।

काशी के बाद अब मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में सर्वे को मंजूरी.

After Kashi, now approval for a survey in the Mathura Shri Krishna Janmabhoomi case. श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को अपना फैसला सुना दिया है. हाईकोर्ट ने विवादित परिसर का सर्वे कराने के आदेश दिया है.मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला आ गया है. मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद पर कोर्ट ने शाही ईदगाह मस्जिद के विवादित स्थल पर सर्वे को मंजूरी दे दी है. कोर्ट ने विवादित जमीन का सर्वे एडवोकेट कमिश्नर के जरिए कराए जाने की मांग को भी मंजूरी दे दी है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को अपना फैसला सुनाते हुए हिंदू पक्ष की याचिका को मंजूरी दे दी है. इस मामले में जस्टिस मयंक कुमार जैन की सिंगल बेंच दोपहर करीब दो बजे अपना फैसला सुनाया है. कोर्ट ने अपने फैसले में ज्ञानवापी विवाद की तर्ज पर मथुरा के विवादित परिसर का भी सर्वे एडवोकेट कमिश्नर के जरिए कराए जाने का आदेश दिया है. यह याचिका भगवान श्री कृष्ण विराजमान और सात अन्य लोगों द्वारा अधिवक्ता हरिशंकर जैन, विष्णु शंकर जैन, प्रभाष पांडेय और देवकी नंदन के जरिए दायर की गई थी. जिसमें दावा किया गया है कि भगवान कृष्ण की जन्मस्थली उस मस्जिद के नीचे मौजूद है और ऐसे कई संकेत हैं जो यह साबित करते हैं कि वह मस्जिद एक हिंदू मंदिर है .याचिका में किया गया था ये दावा हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन के अनुसार याचिका में दावा किया गया था कि वहां कमल के आकार का एक स्तंभ है जोकि हिंदू मंदिरों की एक विशेषता है और शेषनाग की एक प्रतिकृति है जो हिंदू देवताओं में से एक हैं और जिन्होंने जन्म की रात भगवान कृष्ण की रक्षा की थी.याचिकाकर्ताओं ने अनुरोध किया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सर्वेक्षण के बाद अपनी रिपोर्ट सौंपने के विशेष निर्देश के साथ एक आयोग का गठन किया जाये. इस पूरी कार्यवाही की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराने का भी अनुरोध किया गया है. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस वर्ष मई में मथुरा की अदालत में लंबित श्री कृष्ण जन्मभूमि- शाही ईदगाह मस्जिद विवाद से जुड़े सभी मुकदमे अपने पास स्थानांतरित कर लिए थे. प्रयागराज कोर्ट के इस फैसले पर ,राजेश मणि त्रिपाठी पक्षकार एवं राष्ट्रीय प्रमुख श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति दल,महेंद्र तिवारी राष्ट्रीय सह प्रमुख श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति दल और उदित नारायण संगठन प्रभारी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ ने खुशी जाहिर करते हुए माननीय न्यायलय का आभार ब्यक्त किया

विधानसभा में सुरक्षा घेरा सख्त. (M.P)

Tight security cordon in the Legislative Assembly Madhya Pradesh. अब विधायक केवल एक बाहरी व्यक्ति को दिलवा सकेंगे दीर्घा में प्रवेश विधानसभा में बगैर पास और वैध पहचान पत्र के कोई बाहरी व्यक्ति प्रवेश नहीं कर सकता। गेट के अलावा दीर्घा में प्रवेश से पहले जांच। बिना पहचान पत्र नहीं कर सकता कोई प्रवेश।खान-पान की सामग्री भी दीर्घा में ले जाना मना है।गेट पर होती है तगड़ी सुरक्षा जांच। भोपाल। देश की राजधानी दिल्ली में संसद पर आतंकी हमले की बरसी के दिन ही दो युवक सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए लोकसभा की दर्शक दीर्घा से सदन में कूदकर स्मोक बम सरीखी सामग्री से धुआं छोड़ने की घटना को देखते हुए विधानसभा सचिवालय भी हरकत में आ गया है। गुरुवार को प्रमुख सचिव एपी सिंह ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की और निर्देश दिए कि अब विधायक केवल एक ही बाहरी व्यक्ति को दर्शक दीर्घा में प्रवेश दिला पाएंगे। दो स्तर पर जांच होगी और कोई भी ऐसी सामग्री ले जाने की अनुमति नहीं होगी, जिसे सुरक्षा को कोई खतरा हो। इसी माह होगा विधानसभा सत्र मध्य प्रदेश में 16वीं विधानसभा का गठन हो चुका है। दिसंबर में पहला सत्र प्रस्तावित है। लोकसभा की सुरक्षा में सेंध की घटना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर समीक्षा की गई। अभी विधानसभा अध्यक्ष या सदस्य अपने क्षेत्र के लोगों को विधानसभा की कार्यवाही देखने के लिए प्रवेश पत्र जारी करवाते हैं। इसमें बैठक व्यवस्था के अनुसार सदस्यों की अनुशंसा पर प्रवेश पत्र जारी किए जाते हैं, लेकिन अब विधायक के स्वजन के अलावा वे केवल एक बाहरी व्यक्ति की ही अनुशंसा कर सकेंगे। विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह ने बताया कि सत्र के पहले एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। विधानसभा परिसर और दीर्घा में प्रवेश से पहले जांच होगी। अभी ऐसी व्यवस्था मप्र विधानसभा में आगंतुकों के लिए विधानसभा सचिवालय द्वारा प्रवेश पत्र जारी किए जाते हैं। यह विधानसभा अध्यक्ष या विधायक की अनुशंसा पर ही जारी किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त उनके पास आधार कार्ड या अन्य फोटोयुक्त पहचान पत्र होना अनिवार्य रहता है। प्रवेश पत्र में ही इस बात का उल्लेख होता है कि संबंधित व्यक्ति किस दीर्घा में जाकर बैठ सकता है। दो जगह सुरक्षा जांच विधानसभा में पहुंचने वाले व्यक्ति को दो जगहों पर सुरक्षा जांच से गुजरना होता है। पहले परिसर के बाहरी द्वार पर तैनात सुरक्षाकर्मी उनकी जांच करते हैं। इसके बाद दीर्घा में प्रवेश से पहले फिर उनकी जांच होती हैं। यहां उनके जूते-चप्पल, बेल्ट उतरवा रखवा लिए जाते हैं। खाने-पीने की कोई चीज अपने साथ नहीं ले जा सकते हैं। मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति तो रहती है, पर उसे बंद करके रखना होता है। सत्र के दौरान राज्य पुलिस के अधीन होती है सुरक्षा व्यवस्था विधानसभा के अपर सुरक्षा सचिव उमेश शर्मा ने बताया कि सत्र के दौरान विधानसभा परिसर की पूरी सुरक्षा व्यवस्था राज्य पुलिस बल के हवाले रहती है। सामान्य दिनों में राज्य के विशेष सशस्त्र बल के 27 जवान तैनात रहते हैं। वहीं, विधानसभा का सुरक्षा अमला, जिसमें लगभग सौ जवान हैं, भी परिसर के भीतर तैनात रहता है।

बुंदेलखंड में भाजपा के सभी दिग्गज जीते, कांग्रेस 5 सीटों में सिमटी.

In Bundelkhand, all stalwarts of the BJP emerged victorious, while Congress was confined to 5 seats. हारते-हारते सुरखी में जीत गए गोविंद राजपूत ,राजनगर में 302 के प्रकरण के बावजूद जीते अरविंद. Amidst setbacks, Govind Rajput secured victory, while Arvind emerged triumphant in Rajnagar despite the 302 case. भोपाल। विधानसभा चुनाव के नतीजों ने पूरे प्रदेश की तरह बुंदेलखंड में भी सभी को चौंका दिया। यहां भाजपा के सभी दिग्गज चुनाव जीत गए। प्रदेश के परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पिछड़ रहे थे लेकिन अंतत: उन्होंने लगातार तीसरी जीत दर्ज कर ली। छतरपुर जिले के राजनगर भाजपा प्रत्याशी अरविंद पटैरिया के खिलाफ मतदान के दिन ही हत्या का प्रकरण दर्ज हो गए था। उनकी गिरफ्तारी की मांग को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने राजनगर थाने के सामने रात भर धरना दिया था लेकिन अरविंद भी चुनाव जीतने में सफल रहे। हालात ये है कि कांग्रेस 26 में से मात्र 5 सीटें हासिल कर सकी जबकि भाजपा ने 21 सीटें जीत कर सबको चौंका दिया। सागर में मंत्रियों की तिकड़ी जीतीसागर जिले की 8 विधानसभा सीटों में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया। सरकार में शामिल जिले के तीनों मंत्री गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह और गोविंद सिंह राजपूत जीत दर्ज करने में सफल रहे। गोपाल और भूपेंद्र ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की। भार्गव क्षेत्र में प्रचार के लिए निकले तब भी लगभग 73 हजार वोटों के अंतर से चुनाव जीते। कांग्रेस ने भाजपा से बीना सीटी छीनी तो भाजपा ने कांग्रेस की दो सीटें देवरी और बंडा छुड़ा लीं। देवरी में कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे हर्ष यादव चुनाव हार गए। कुल मिलाकर भाजपा 7 सीटें जीती जबकि कांगेस एक सीट पर सिमट गई। छतरपुर में कांग्रेस के तीनों विधायक हारेछतरपुर जिले की 6 में से 5 सीटेँ भाजपा ने जीत लीं। यहां कांग्रेस के तीनों विधायक छतरपुर से आलोक चतुर्वेदी, महाराजपुर से नीरज दीक्षित और राजनगर से विक्रम सिंह नातीराजा चुनाव हार गए। कांग्रेस सिर्फ एक सीट जीती। कांग्रेस को यहां पूर्व विधायक और जिले के कद्दावर नेता शंकरप्रताप सिंह मुन्ना राजा को अलग-थलग करने का नुकसान हुआ। मलेहरा में कांग्रेस की रामसिया भारती ने भाजपा के प्रद्युम्न सिंह लोधी को हरा दिया। मुन्ना राजा ने सिर्फ रामसिया का प्रचार किया था। प्रद्युम्न 2018 का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर जीते थे लेकिन बाद में वे भाजपा में शामिल हो गए थे। टीकमगढ़, निवाड़ी में कांग्रेस का बेहतर प्रदर्शनबुंदेलखंड अंचल के टीकमगढ़ और निवाड़ी जिले ही ऐसे रहे जहां कांग्रेस ने पांच में से तीन सीटें जीत कर बेहतर प्रदर्शन किया। टीकमगढ़ जिले की जतारा में ही हरिशंकर खटीक भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते शेष दो सीटें टीकमगढ़ और खरगापुर कांग्रेस ने छीन लीं। टीकमगढ़ में पूर्व मंत्री यादवेंद्र सिंह ने भाजपा के राकेश गिरि को हरा दिया। यहां भाजपा को पार्टी के बागी केके श्रीवास्तव ने नुकसान पहुंचाया। खरगापुर में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के भतीजे राहुल लोधी चुनाव हार गए। उन्हें कांग्रेस की चंदारानी गौर ने शिकस्त दी। निवाड़ी की दो सीटों में से प्रथ्वीपुर में कांग्रेस के नितेंद्र सिंह राठौर जबकि निवाड़ी में भाजपा के अनिल जैन चुनाव जीते। इस तरह यहां मुकाबला बराबरी का रहा। पन्ना, दमोह में नहीं खुला कांग्रेस का खातापन्ना और दमोह जिले में कांग्रेस का खाता ही नहीं खुला। भाजपा ने सभी 7 सीटें जीत लीं। दमोह में जयंत मलैया बड़े अंतर से जीते और पन्ना में सरकार के खनिज मंत्री ब्रजेंद्र प्रताप सिंह भी चुनाव जीत गए। पन्ना जिले की पवई सीट में कांग्रेस के पूर्व मंत्री मुकेश नायक को पराजय का सामना करना पड़ा। गुनौर सीट पिछली बार कांग्रेस के पास थी जिसे इस बार भाजपा के राजेश वर्मा ने छीन लिया। इस तरह बुंदेलखंड में एक तरह से कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया।

मंत्रिमंडल विस्तार में नहीं चलेगा पट्ठावाद, चौंकाने वाले हो सकते मंत्रियों के नाम.

The expansion of the cabinet, here are the names of the ministers who could be surprising. हर अंचल से बनाए जाएंगे 4 से 6 तक मंत्री- खाली रखे जा सकते हैं आधा दर्जन मंत्री पद, मंत्रिमंडल में जातीय संतुलन साधने की तैयारी उदित नारायण भोपाल। जिस प्रकार मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्रियों के चयन में रसूखदार नेताओं की नहीं चली, ठीक इसी तर्ज पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के मंत्रिमंडल का गठन होगा। लोकसभा चुनाव की दृष्टि से इसमें क्षेत्रीय और जातीय संतुलन तो साधा जाएगा लेकिन पट्ठावाद बिल्कुल नहीं चलेगा। अर्थात रसूखदार नेताओं का समर्थक होने के कारण किसी को मंत्री नहीं बनाया जाएगा। सूत्रों के अनुसार पहले चरण में 26-27 मंत्रियों को शामिल कर शपथ दिलाई जाएगी और आधा दर्जन से ज्यादा मंत्री पद खाली रखे जाएंगे। हमेशा की तरह नेतृत्व मंत्रिमंडल के गठन में भी सभी को चौंका सकता है। मोहन-वीडी लेकर जाएंगे संभावित मंत्रियों की सूचीमंत्रिमंडल के गठन पर भी केंद्रीय नेतृत्व की मुहर लगेगी। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा संभावित मंत्रियों की सूची लेकर दिल्ली जाएंगे। वहां नेतृत्व के साथ सूची पर डिस्कशन होगा। नाम जोड़े और घटाएं जाएंगे। इसके बाद फायनल सूची के अनुसार मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी।वरिष्ठ और नए के बीच होगा संतुलनमंत्रिमंडल के गठन में भी मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्रियों का फार्मूला अपनाया जा सकता है। इसके तहत वरिष्ठ और नए विधायकों के बीच संतुलन साधा जा सकता है। कुछ वरिष्ठों के साथ नए मंत्री ज्यादा बनाए जा सकते हैं। जैसे 8-9 वरिष्ठ मंत्रियों के साथ 16-18 नए विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है। चंबल-ग्वालियर अंचल से ये बन सकते मंत्रीभाजपा सूत्रों के अुनसार अंचलों में मिली सीटों के संख्या के आधार पर मंत्रियों की संख्या तय हो सकती है। इस आधार पर चंबल- ग्वालियर, बुंदेलखंड, विंध्य और मध्य अंचल से 4-4 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इनमें जातीय संतुलन भी साधा जाएगा। जैसे, चंबल-ग्वालियर से नेता प्रतिपक्ष को हराने वाले अंबरीश शर्मा, जनता के बीच सक्रिय प्रद्युम्न सिंह तोमर, केपी सिंह को हराने वाले देवेंद्र कुमार जैन और घनश्याम सिंह को हराने वाले प्रदीप अग्रवाल को मंत्री बनाया जा सकता है। नरेंद्र सिंह तोमर पहले ही विधानसभा अध्यक्ष घोषित किए जा चुके हैं। बुंदेलखंड, विंध्य में ये हो सकते चेहरेबुंदेलखंड और विंध्य से मंत्रिमंडल में वरिष्ठ और कनिष्ठ के बीच संतुलन के तहत चेहरे तय किए जाएंगे। बुंदेलखंड से नरयावली विधायक प्रदीप लारिया, छतरपुर की ललिता यादव और जबेरा के धर्मेंद्र लोधी को मौका मिल सकता है। इनके अलावा वरिष्ठों में गोपाल भार्गव, भूपेेंद्र सिंह, गोविंद सिंह राजपूत, जयंत मलैया और बृजेंद्र प्रताप सिंह में से 1 अथवा 2 को मौका मिल सकता है। विंध्य अंचल से सीधी की रीति पाठक, जयसिंह नगर की मनीषा सिंह, मऊगंज से प्रदीप पटेल और रामपुर बघेलान से जीते विक्रम सिंह को मौका मिल सकता है। इस अंचल के राजेंद्र शुक्ला पहले ही उप मुख्यमंत्री बन चुके हैं। महाकौशल से बनाए जा सकते हैं 5 मंत्रीमहाकौशल अंचल में भाजपा को इस बार 38 में से 21 सीटें मिली हैं। यह कमलनाथ का भी इलाका है। इसलिए यहां से 5 मंत्री बनाए जा सकते हें। इनमें बहोरीबंद के प्रणव पांडे, नरसिंहपुर के प्रहलाद पटेल और बैतूल के हेमंत खंडेलवाल को मौका मिल सकता है। इनके अलावा जबलपुर के राकेश सिंह और गाडरवारा के उदयप्रताप सिंह में से किसी एक को मौका मिल सकता है। ये दोनों पूर्व सांसद हैं। इसी प्रकार शहपुरा के ओम प्रकाश धुर्वे और मंडला की संपतिया उइके में से किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता है। मालवा-निमाड़ से बन सकते सर्वाधिक मंत्रीमालवा- निमाड़ अंचल में सर्वाधिक 66 सीटें हैं। भाजपा ने इनमें से 48 सीटें जीती हैं। इसलिए यहां से सर्वाधिक मंत्री बनाए जा सकते हैं। इंदौर से तुलसीराम सिलावट के अलावा कैलाश विजयवर्गीय और रमेश मैंदोला में से किसी एक काे मंत्री बनाया जा सकता है। इनके अलावा सज्जन सिंह वर्मा को हराने वाले राजेश सोनकर, दीपक जोशी को हराने वाले आशीष शर्मा, हरसूद के विजय शाह, नेपानगर की मंजू राजेंद्र दादू मंत्री बन सकते हैं। भोपाल के आसपास भी कम दावेदार नहींप्रदेश के मध्य अंचल अर्थात भोपाल के आसपास मंत्री पद के दावेदारों की संख्या कम नहीं है। इस बार रामेश्वर शर्मा, विश्वास सारंग, कृष्णा गौर, विष्णु खत्री में से दो मंत्री बन सकते हैं। रायसेन जिले में प्रभुराम चौधरी और सुरेंद्र पटवा में से किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता है। इनके अलावा सीहोर के सुदेश राय और खिलचीपुर में पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह को हराने वाले हजारीलाल दांगी मंत्री बनाए जा सकते हैं। संभावित मंत्रियों की यह सूची सूत्रों पर आधारित है क्योंकि नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी क्या करेगी, कोई नहीं जानता।

आखिरी सांस तक आपके साथ खड़ा रहूंगा.

I will stand by you until my last breath. कमलनाथ ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के इस्तीफे को लेकर किया खुलासा छिंदवाड़ा। भले ही प्रदेश में कांग्रेस की सरकार नहीं बन पाई है, लेकिन पूर्व सीएम कमलनाथ अपने गढ़ छिंदवाड़ा में अपना किला बचाने में कामयाब रहे। लगभग 43 सालों से कमलनाथ छिंदवाड़ा की पहचान बनकर राजनीति में छाए हुए हैं। ऐसे में इस बार भी विधानसभा चुनाव में छिंदवाड़ा की सातों सीटों पर कांग्रेस को जीत मिली है। कमलनाथ अब छिंदवाड़ा दौरे पर हैं और वे हर विधानसभा क्षेत्र में जाकर आभार सभा कर रहे हैं। पांढुर्णा और सौंसर में बुधवार को कमलनाथ ने आभार सभा में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने पांढुर्णा में कहा कि वे आखिरी सांस तक छिंदवाड़ा की जनता के बीच रहेंगे, वह रिटायरमेंट नहीं ले रहे है। नहीं लेगें रिटायरमेंट कमलनाथ का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उनकों लेकर राजनीतिक गलियारो में यही चर्चा चल रही थी कि विधानसभा चुनाव में मिली हार के कारण उन्हें पीसीसी चीफ पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है। हालांकि आला कमान ने नाथ को दोबारा लोकसभा चुनाव तक की जवाबदारी दी है। ऐसे में कमलनाथ ने अपने गढ़ छिंदवाड़ा से आज इसको लेकर एक बड़ा बयान देकर यह साफ कर दिया है कि वे आने वाले समय में भी पूरी सक्रियता के साथ जनता के बीच रहेंगे और रिटायरमेंट नहीं लेंगे।आखिरी सांस तक जनता के साथ उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपनी आखिरी सांस तक जनता के साथ खड़े है। वह रिटायरमेंट नहीं ले रहे है। उन्होंने कहा कि छिंदवाड़ा की जनता का प्यार उन्हे पिछले 43 सालों से मिलता आ रहा है। आगे भी यह प्यार और स्नेह उन्हे मिलता रहेगा। उन्होंने कहा कि जिले के विकास के लिए वह कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। लोकसभा चुनाव का फूंका बिगुल कमलनाथ ने छिंदवाड़ा में मिली बंपर जीत के बाद अब लोकसभा चुनाव की तैयारियों का बिगुल फूंक दिया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से छिंदवाड़ा की जनता ने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का साथ दिया है। इसी तरह से लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस को यही प्यार और विश्वास लोकसभा चुनाव में भी मिलेगा। इस दौरान उनके साथ उनके बेटे नकुलनाथ भी मौजूद थे।

मुख्यमंत्री बनते ही प्रदेश में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी के आसार।

As soon as becoming the Chief Minister, signs of significant administrative changes in the state. सचिवालय से सबसे पहले हटाए जाएंगे पीएस रस्तोगी, मुख्य सचिव के लिए तीन नाम का भेजा जाएगा डीओपीटी में पैनल – मंत्रालय स्तर पर सचिव सेक्रेट्री सहित कई अन्य विभागों के अधिकारियों के भी होंगे ट्रांसफर – प्रदेश में कानून व्यवस्था की समीक्षा के साथ कई जिलों के पुलिस अधीक्षकों के भी होंगे तबादले।  *उदित नारायण*  भोपाल। मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वल्लभ भवन में अधिकारियों के साथ बैठक की। इस बैठक के साथ ही प्रशासनिक हमले में हड़कंप मच गया है। इसके पीछे की वजह है कि जनता से जुड़े हुए कामकाज करने वाले अधिकारियों की पूछ परख ज्यादा होगी। मुख्यमंत्री यादव ने स्पष्ट अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बिना भ्रष्टाचार की जनता से जुड़े हुए काम किए जाएं। सीएम के फरमान के बाद जरूर जल्द ही सर्जरी होगी सबसे पहले मुख्यमंत्री सचिवालय में लंबे समय तक पदस्थ रहे मनीष रस्तोगी को किसी और विभाग में पदस्थित किया जाएगा। मुख्यमंत्री सचिवालय में अनुभवी प्रमुख सचिव की पोस्टिंग होगी। जिन्हें कई विभागों में कामकाज का अनुभव रहा है। ऐसे में कई नाम सामने आ रहे हैं। वही मार्च में 2024 मौजूदा मुख्य सचिव वीरा राणा भी रिटायर होगी। इससे पहले सरकार की कोशिश होगी कि तीन सीनियर आईएएस अधिकारियों के नाम का पैनल डीओपीटी भेजा जाएगा। जिससे मध्य प्रदेश में 2 से 3 साल तक फिक्स मुख्य सचिव की पोस्टिंग हो सके। मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि दो से तीन विभाग में प्रमुख सचिव के पद खाली हैं अवसरों को प्रमोशन के साथ नई पोस्टिंग भी दी जाएगी मंत्रालय स्तर पर सचिव, डिप्टी सेक्रेटरी भी ट्रांसफर किए जाएंगे। कई सीनियर अधिकारियों की मीटिंग के बाद मंत्रालय में पदस्थ सक्रिय अधिकारियों को फ्रंट में लेकर आया जाएगा।  सबसे पहले नपेंगे बड़े जिले की कलेक्टर – सूत्र बताते हैं कि तत्कालीन कलेक्टर ने जनता की कई मांगों को लेकर तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री और मौजूदा मुख्यमंत्री मोहन यादव को काफी परेशान किया था मोहन यादव ने इस बात की जानकारी संगठन को भी दी थी लेकिन सीनियर आईएएस अधिकारी के दबाव में कलेक्टर को नहीं हटाया गया अब सरकार के हाथ में कमान मोहन यादव के हाथ में है ऐसे में माना जा रहा है कि एक बड़े जिले के कलेक्टर को भी सबसे पहले हटाया जाएगा। सूत्र बताते हैं कि सीएम बनने के बाद कलेक्टर और सीएम सचिवालय में पदस्थ रहे मनीष रस्तोगी तक उनसे मिलने नहीं गए। हालांकि मंत्रालय आने के बाद प्रमुख सचिव औपचारिकता के तौर पर मुलाकात की।  सचिवालय में शिफ्ट होंगे उच्च शिक्षा विभाग के कई ओएसडी – उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े हुए अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा मुख्यमंत्री पहले इसी विभाग के मंत्री थे। ऐसे में अपने भरोसेमंद और काबिल ओएसडी को सचिवालय में जगह देंगे। इसके पीछे का कारण है कि कैबिनेट की पहली बैठक में ही उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े हुए कई फैसलों पर अमल किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शिक्षा से जुड़े हुए कार्यों को पूरा करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पदस्थ सीएम सचिवालय में किया जाएगा।

पहला आदेश पर्यावरण के हित में ,सीएम मोहन.

The first order in the interest of the environment, CM Mohan. भोपाल। म.प्र. में धार्मिक स्थल एवं अन्य स्थानों पर म.प्र. कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के प्रावधानों तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय, माननीय उच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर जारी दिशा निर्देशों के अनुक्रम में राज्य शासन द्वारा निर्णय लिया गया है कि किसी भी प्रकार के धार्मिक स्थल अथवा अन्य स्थान में निर्धारित मापदण्ड के अनुरूपही ध्वनि विस्तारक यंत्रों (लाउडस्पीकर / डी.जे.) आदि का उपयोग किया जा सकेगा। ■ धार्मिक स्थल एवं अन्य स्थानों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों (लाउडस्पीकर / डी.जे.) को अवैधानिक रूप से और निर्धारित मापदंड से अधिक आवाज में बजाने पर लगेगा प्रतिबंध। ■ म.प्र. कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के प्रावधानों, माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय द्वारा जारी दिशा- निर्देशों के अनुक्रम में लिया गया निर्णय। ■ धर्म गुरुओं से संवाद और समन्वय के आधार लाउडस्पीकरों को हटाने का प्रयास किया जाएगा और ऐसे धार्मिक स्थलों की सूची बनाई जाएगी जहां उक्त नियमों/निर्देशों का अनुपालन नहीं किया जा रहा है। ■ ध्वनि प्रदूषण तथा लाउडस्पीकर आदि के अवैधानिक उपयोग की जांच के लिये सभी जिलों में उड़नदस्तों के गठन का निर्णय लिया गया है।• जिला स्तर पर साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी एवं इस संबध में 31 दिसंबर 2023 तक पालन प्रतिवेदन गृह विभाग को उपलब्ध कराना होगा। ■ ध्वनि प्रदूषण के मामलों की सतत निगरानी के लिए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अपराध अनुसंधान विभाग पुलिस मुख्यालय को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना को राज्यसभा से मिली मंजूरी, लोकसभा से पहले ही पास.

The establishment of the Central Tribal University received approval from the Rajya Sabha, passing before the Lok Sabha. संसद ने बुधवार को राज्यसभा से मंजूरी मिलने के बाद तेलंगाना में सम्मक्का सरक्का केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए एक विधेयक पारित कर दिया। संसद ने बुधवार को राज्यसभा से मंजूरी मिलने के बाद तेलंगाना में सम्मक्का सरक्का केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए उच्च सदन ने केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2023 को विपक्षी सदस्यों की अनुपस्थिति में ध्वनि मत से पारित कर दिया, जिन्होंने पहले लोकसभा में सुरक्षा उल्लंघन पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग को लेकर दबाव बनाने के लिए वॉकआउट किया था। केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2023 को पिछले हफ्ते लोकसभा ने मंजूरी दे दी थी। तेलंगाना में केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अनिवार्य केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत तेलंगाना में एक केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना अनिवार्य है। आंध्र प्रदेश में एक आदिवासी विश्वविद्यालय पहले ही स्थापित किया जा चुका है और परिसर ने काम करना शुरू कर दिया है, उन्होंने कहा, “अगर तेलंगाना सरकार ने सही समय पर सहयोग किया होता, तो यह विश्वविद्यालय अब तक सामने आ गया होता। उन्होंने एक कदम उठाया जमीन उपलब्ध कराने में काफी समय लग गया, इसलिए कार्यान्वयन में देरी हुई। केंद्रीय मंत्री ने सदन को आश्वासन दिया कि एक बार जब राष्ट्रपति विधेयक को मंजूरी दे देंगी, तो विश्वविद्यालय को जल्द से जल्द खोलने के लिए सभी प्रक्रियाएं तेजी से शुरू की जाएंगी ताकि यह आगे बढ़ सके और एक राष्ट्रीय संस्थान के रूप में कार्य कर सके। प्रधान ने विपक्षी सदस्यों के उन आरोपों का भी खंडन किया कि सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के माध्यम से इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश कर रही है।

भाजपा: अचर्चित चेहरों के हाथ कमान सौंपने में जोखिम मे नि:संदेह.

BJP: Taking the risk in entrusting key responsibilities to lesser-known faces without hesitation. उदित नारायण इन अप्रत्याशित फैसलों के भीतर कई राजनीतिक संदेश छुपे हैं, जो भाजपा के स्वयंभू नेताओं के लिए तो हैं ही, उन विपक्षी नेताओं के लिए भी हैं, जो मात्र सीट बंटवारे और वोटों के कागजी गणित के भरोसे आगामी लोकसभा चुनाव में मोदी को पटखनी देने का अरमान पाले हुए हैं। भारतीय जनता पार्टी और उसके शीर्ष नेतृत्व ने हिंदी भाषी तीन राज्यों में भारी जीत के बाद जिन अचर्चित चेहरों के हाथों में सत्ता की कमान सौंपी है, उससे ‘चौंकना’ शब्द भी फीका लगने लगा है। यह कुछ वैसा ही था कि कोई जादूगर अपनी जेब में हाथ डाले और नोट किसी भीड़ में छिपे शख्स की जेब से निकले।मोदी- शाह ने मीडिया के तमाम अटकलों को बेकार साबित कर दिया है। लेकिन इन अप्रत्याशित फैसलों के भीतर कई राजनीतिक संदेश छुपे हैं, जो भाजपा के स्वयंभू नेताओं के लिए तो हैं ही, उन विपक्षी नेताओं के लिए भी हैं, जो मात्र सीट बंटवारे और वोटों के कागजी गणित के भरोसे आगामी लोकसभा चुनाव में मोदी को पटखनी देने का अरमान पाले हुए हैं। विधानसभा चुनावों में भाजपा के जीते हुए मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ राज्यों में ‘कौन बनेगा मुख्यमंत्री’ की रेस असली हार्स रेस से भी ज्यादा रोमांचक होने लगी थी। दावेदारी और राजयोग में अदृश्य मुकाबला चल रहा था। मीडिया की आंखें और राजनीतिक भविष्यवाणियां उन्हीं चंद चेहरों के आसपास मंडरा रही थीं, जिन्हें परंपरागत रूप से कुर्सी की दौड़ में प्रथम पंक्ति में माना जाता रहा था। ऐसे कुछ नाम जो सीएम या फिर वो भी नहीं तो कम से कम डिप्टी सीएम पद की शपथ लेने के लिए नए सूट सिलवा चुके थे। लेकिन हाय री किस्मत!भाजपा आलाकमान ने इन फैसलों से छह संदेश दिए हैं। पहला तो कोई खुद को पार्टी से ऊपर न समझे, दूसरा भाजपा में संघ अभी भी पूरी तरह ताकतवर है, तीसरा भाजपा में कोई साधारण कार्यकर्ता भी शीर्ष पद तक पहुंच सकता है, चौथा भाजपा ने आने वाले 15 साल तक राजनीति करने वाले नए खून की फौज तैयार कर दी है, पांचवां सोशल इंजीनियरिंग में भाजपा सभी राजनीतिक दलो से मीलों आगे है और छठा, इस बदलाव के जरिए भाजपा ने आगामी लोकसभा चुनाव की जमीन भी तैयार कर दी है और तकरीबन मुद्दे भी तय कर दिए हैं। मप्र में डा. मोहन यादव, छग में विष्णुदेव साय और राजस्थान में भजनलाल शर्मा बाकी दुनिया के लिए भले ही अचर्चित चेहरे रहे हों, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा को उनकी कार्यक्षमता पर भरोसा है। अब यह इन तीनो पर है कि मिले हुए अवसर को कामयाबी में वो कितना बदल पाते हैं। खुद को कितना साबित कर पाते हैं। हालांकि यह जोखिम तो हर उस प्रयोग में रहता है, जो राजनीति की प्रयोगशाला में पहली बार किया जाता है। मप्र में जब पहली बार शिवराज को मुख्यमंत्री पद की कमान सौंपी गई थी तब कई लोगों ने उनकी नेतृत्व क्षमता और देसी छवि पर तंज कसा था, लेकिन वक्त के साथ शिवराज ने खुद को न सिर्फ साबित किया बल्कि अपरिहार्य बन गए। उन्होंने अपनी राजनीति की नई इबारत लिखी। इमोशनल पॉलिटिक्स का नया सिलेबस तय किया और पूरे 18 साल तक सीएम पद पर जमे रहे।हालांकि, पहली पारी के सीएम शिवराज और चौथी पारी के सीएम शिवराज में काफी अंतर था । उनका अपना आभा मंडल और काकस तैयार हो गया था। इस दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को भी यथासंभव किनारे लगाया और शायद इसकी इंतिहा हो चुकी थी। यही स्थिति राजस्थान में वसुंधरा राजे की थी। राजे तो पहले से राज परिवार से हैं। लिहाजा कुर्सी पर विराजना उनके लिए नैसर्गिक अधिकार था। उन्होंने खुद को पार्टी और राज्य का भाग्य विधाता मान लिया था। अलबत्ता छग के 15 साल सीएम रहे और बाद में भाजपा में ही हाशिए पर डाल दिए गए डॉ रमनसिंह ने खुली बगावत के रास्ते पर जाने से खुद को बचाया और कुछ बेहतर पाने की आस जिंदा रखी।कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा में इस तरह क्षत्रप संस्कृति को समाप्त पर ‘ एक हाईकमान कल्चर’ को लागू कर भाजपा ने बहुत बड़ा जोखिम लिया है, जो भविष्य में आत्मघाती भी हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चेहरे पर ही पार्टी का पूरी तरह आश्रित हो जाना संगठन की आंतरिक कमजोरी को दर्शाता है। यानी जब मोदी भी नहीं रहेंगे, तब क्या होगा? इसके अलावा इन तीन राज्यों में बिल्कुल ताजा चेहरों की ताजपोशी के साथ राजनीतिक और जातीय समीकरण भी साधने की कोशिश है। छग में आदिवासी चेहरे विष्णुदेव साय को सीएम बनाकर समूचे आदिवासी समुदाय को यह संदेश दिया गया है कि आदिवासी भी हिंदू ही हैं और वो हमारे लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं। इसी तरह मप्र में बिल्कुल अप्रत्याशित चेहरे डॉ. मोहन यादव को सीएम बनाकर यूपी और बिहार के यादवों को भी संदेश दिया गया है कि वो क्षेत्रीय पार्टियों के मोह से उबरें और भाजपा से जुड़ें। मप्र और राजस्थान में दलित डिप्टी सीएम बनाकर बहनजी मायावती और उनकी पार्टी के समर्थकों को संदेश है कि भाजपा में दलितों के लिए भी पूरी जगह है। दिलचस्प बात यह है कि विस चुनाव के दौरान तीनों राज्यों में कांग्रेस पूरे समय ओबीसी जातिजनगणना का मुद्दा उठाती रही, लेकिन जिस तेलंगाना में वह स्पष्ट बहुमत के साथ चुनाव जीती, वहां उसने किसी ओबीसी के बजाए रेवंत रेड्डी के रूप में एक अगड़े को ही मुख्यमंत्री बनाया। 26 विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की आगामी बैठक 19 दिसंबर को होनी है। उसमें लोकसभा सीटों के बंटवारे के किसी फार्मूले पर बात होती है या नहीं, यह देखने की बात है। लेकिन हो भी गया तो थके चेहरों और सतही जोश से लोकसभा चुनाव की जंग कैसे जीती जाएगी, यह देखने की बात है। बहरहाल चुनाव रणविजय शास्त्र की क्लास में भाजपा से कुछ तो सबक लेने ही चाहिए।

संसद की सुरक्षा में भारी चूक : दो घटनाएं, 4 गिरफ्तार, लोकसभा में धुआं ही धुआं.

Serious lapses in Parliament security: Two incidents, 4 arrested, chaos in the Lok Sabha दिल्ली: संसद पर हमले की बरसी के दिन ही संसद की सुरक्षा में बड़ी चूक देखने को मिली है. दरअसल, बुधवार दोपहर करीब एक बजे दो लोग लोकसभा में दर्शक दीर्घा से सदन के भीतर कूद पड़े और पीली गैस का स्प्रे करने लगे. इसके बाद इनमें से एक शख्स लोकसभा स्पीकर की कुर्सी की तरफ दौड़ने लगा. इन आरोपियों के सदन में कूदने के बाद वहां मौजूद सांसदों ने हिम्मत दिखाते हुए दोनों आरोपियों को सदन के अंदर ही पकड़ लिया. इस घटना को लेकर अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि घटना की जांच हो रही है. दोनों आरोपी पकड़े गए हैं और इनके पास से सभी तरह की सामग्री को जब्त कर लिया गया है. वहीं, संसद के बाहर नारेबाजी कर रही एक महिला और शख्स को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. हालांकि, बाद में इन सभी चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. दर्शक दीर्घा अगले आदेश तक के लिए बंद इस घटना के बाद दर्शक दीर्घा को अगले आदेश तक के लिए बंद कर दिया गया है. दरअसल, दोनों युवकों ने दर्शक दीर्घा के जरिए ही घटना को अंजाम दिया. दो गुट में आए थे आरोपी बता दें कि आरोपी शख्स ने सदन के अंदर फ्लोरोसेंट गैस का छिड़काव भी किया. खास बात ये है कि हमला करने वाले लोग दो अलग-अलग ग्रुप में आए थे. एक ग्रुप संसद के अंदर गया जबकि दूसरा ग्रुप संसद भवन की इमारत के बाहर ही रुका रहा. दिल्ली पुलिस ने बाहर मौजूद आरोपियों को पकड़ा लिया है जबकि अंदर घुसे शख्स को संसद भवन के अंदर ही पकड़ लिया गया है. संसद के अंदर जो 2 लोग पकड़े हैं ,उनमें एक नाम सागर शर्मा है और दूसरे का नाम मनोरंजन डी है. ये दोनों कर्नाटक के हैं. बीजेपी सांसद ने कही ये बात बीजेपी सांसद सत्यपाल सिंह ने एनडीटीवी से कहा कि लोकसभा में शून्यकाल की कार्यवाही के दौरान अचानक दो लड़के विजिटर्स गैलरी से नीचे कूद गए, उन्होंने पीले रंग की गैस भी छोड़ी. यह सिक्योरिटी लैप्स का मामला है. लोकसभा की सिक्योरिटी ब्रीच हुई है. हालांकि सांसदों ने तुरंत उन लड़कों को पकड़ लिया. “20 साल के थे दो युवक” वहीं कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि अचानक करीब 20 साल के दो युवक दर्शक दीर्घा से सदन में कूद पड़े और उनके हाथ में टिन के डिब्बे थे, जिनसे पीला धुआं निकल रहा था. उनमें से एक अध्यक्ष की कुर्सी की ओर भागने की कोशिश कर रहा था. उन्होंने नारे लगाए. यह धुआं जहरीला हो सकता था.संसद हमले की बरसी के दिन यह सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन है !

शपथ के दौरान स्टेडियम के बाहर Shivraj के चाहने वालों ने काफिला रोका, मामा मामा के नारे लगाए.

During the swearing-in ceremony, supporters of Shivraj outside the stadium stopped the procession, chanting slogans in favor of Mama (referring to Shivraj Singh Chouhan).

प्रदेश के नए उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला, शपथ ग्रहण समारोह, मोतीलाल नेहरू स्टेडियम भोपाल.

The new Deputy Chief Minister of the state, Rajendra Shukla, will take the oath at the Motilal Nehru Stadium in Bhopal during the swearing-in ceremony.

प्रदेश के नए उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, शपथ ग्रहण समारोह, मोतीलाल नेहरू स्टेडियम भोपाल.

The new Deputy Chief Minister of the state, Jagdish Devda, will take the oath at the Motilal Nehru Stadium in Bhopal during the swearing-in ceremony.

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