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पांचवीं -आठवीं की परीक्षा के राज्य शिक्षा केंद्र ने जारी की रूपरेखा एवं अंक योजना

भोपाल   माध्यमिक शिक्षा मंडल की पांचवीं और आठवीं की वार्षिक परीक्षा के प्रश्नपत्रों की रूपरेखा और अंक योजना जारी हो गई है। इस परीक्षा में परीक्षार्थियों को प्रश्नों के छोटे-छोटे उत्तर अधिक देने होंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि इस परीक्षा में वस्तुनिष्ठ, रिक्त स्थान भरो और अति लघु उत्तरीय प्रश्न अधिक पूछे जाएंगे। वहीं दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों की संख्या बेहद कम होगी।    मंडल की यह वार्षिक परीक्षा 24 फरवरी से शुरू होकर पांच मार्च तक चलेगी।     इस परीक्षा के लिए प्रदेश में 12 हजार केंद्र बनाए गए हैं।     दोनों कक्षाओं के करीब 24 लाख विद्यार्थी शामिल होंगे।     इस सबंध में राज्य शिक्षा केंद्र ने दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।     परीक्षा परिणाम के लिए अधिभार अंक भी निर्धारित कर दिया गया है।     इसके मुताबिक अर्द्धवार्षिक परीक्षा के लिए अधिभार अंक 20, वार्षिक परीक्षा लिखित अधिभार अंक 60 और वार्षिक परीक्षा प्रोजेक्ट कार्य के लिए अधिभार अंक 20 निर्धारित किए गए हैं।  प्रत्येक विषय में दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों की संख्या चार होगी। वहीं पांच बहु विकल्पीय प्रश्न, पांच रिक्त स्थान भरो और छह अति लघुउत्तरीय प्रश्न पूछे जाएंगे।     लघु उत्तरीय प्रश्नों की संख्या भी छह होगी। राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा निर्धारित ब्लू प्रिंट के आधार पर प्रश्न-पत्र तैयार होंगे।     सरकारी स्कूलों के लिए प्रश्न-पत्र राज्य स्तर से तैयार कराए जाएंगे, जबकि निजी स्कूल निर्धारित ब्लू प्रिंट के आधार पर प्रश्न-पत्रों को स्वयं तैयार कराएंगे।     सरकारी स्कूलों में भाषा विषय (हिंदी, अंग्रेजी व संस्कृत) की राज्य स्तर के एससीईआरटी पाठ्यपुस्तक से और निजी स्कूलों में एनसीईआरटी से प्रश्न पूछे जाएंगे। वहीं अन्य विषयों के प्रश्नपत्र एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक से पूछे जाएंगे। भोपाल जिले के 68 हजार विद्यार्थी शामिल होंगे भोपाल जिले में दोनों कक्षाओं की परीक्षा में करीब 68 हजार विद्यार्थी शामिल होंगे। इसमें पांचवीं के 34,213 और आठवीं के 34,773 विद्यार्थी होंगे। जिले में करीब 250 केंद्र बनाए गए हैं। 33 प्रतिशत से कम अंक लाने पर होंगे फेल प्रत्येक विषय की लिखित परीक्षा व आंतरिक मूल्यांकन में अलग-अलग न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा। प्रत्येक विषय के बाह्य एवं आंतरिक मूल्यांकन में न्यूनतम अर्हकारी अंक प्राप्त नहीं करने वाले परीक्षार्थी को फिर से परीक्षा देनी होगी। उसमें भी पास नहीं हुए तो उसी कक्षा में दोबारा पढ़ना होगा। परीक्षा अंक की योजना     छमाही परीक्षा-अधिभार 20 अंक     वार्षिक परीक्षा(लिखित) – 60 अंक     आंतरिक मूल्यांकन (प्रोजेक्ट कार्य) -20 अंक लिखित परीक्षा के प्रश्नों का पैटर्न ऐसा होगा     बहु विकल्पीय प्रश्न-पांच अंक (पांच प्रश्न)     रिक्त स्थान की पूर्ति वाले प्रश्न-पांच अंक (पांच प्रश्न)     अति लघुउत्तरीय प्रश्न -12 अंक (छह प्रश्न)     लघु उत्तरीय प्रश्न -18 अंक (छह प्रश्न)     दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-20 अंक (चार प्रश्न)  

फिर नन्हें चीतों की किलकारी से गूंजा कूनो, दो शावकों के जन्म पर सीएम मोहन यादव ने दी बधाई

Kuno National Park: कूनो राष्ट्रीय उद्यान में दो शावकों के जन्म पर सीएम मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में चीतों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है. इस परियोजना से जुड़े सभी अधिकारियों, चिकित्सकों और फील्ड स्टाफ को बधाई. चीतों के कुनबे के बढ़ने से प्रदेश के पर्यटन को नई उड़ान मिल रही है. सीएम मोहन यादव ने कहा, ”मुझे यह जानकारी साझा करते हुए अत्यंत आनंद की अनुभूति हो रही है कि मध्यप्रदेश की धरती पर चीतों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है. आज मादा चीता वीरा ने 2 नन्हें शावकों को जन्म दिया है, मध्यप्रदेश की धरती पर चीता शावकों का स्वागत है एवं प्रदेशवासियों को इन नन्हें शावकों के आगमन पर हार्दिक बधाई प्रेषित करता हूं. प्रोजेक्ट से संबंधित सभी अधिकारियों, चिकित्सकों एवं फील्ड स्टाफ को बधाई, जिनके अथक परिश्रम के परिणामस्वरूप आज मध्यप्रदेश को ‘चीतों की धरती’ के नाम से भी जाना जाता है”. सीएम मोहन यादव ने कहा, ”प्रदेश में चीतों का कुनबा निरंतर बढ़ने से प्रदेश के पर्यटन को नई उड़ान मिल रही है जिससे रोजगार के नये द्वार खुल रहे हैं. हम चीतों के साथ ही समस्त वन्यजीवों के संरक्षण, संवर्धन एवं पुनर्स्थापन हेतु सदैव तत्पर हैं”.

स्वतंत्रता के बाद मध्यप्रदेश को रेल सुविधाओं के लिए पहली बार हुआ बड़ी राशि का आवंटन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में पेश केन्द्रीय बजट में मध्यप्रदेश के लिए रेलवे सुविधाओं के लिए 14 हजार 745 करोड़ रुपए के बजट आवंटन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त कर मध्यप्रदेश के नागरिकों की ओर से धन्यवाद दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार मध्यप्रदेश को रेलवे से संबंधित विकास कार्यों के लिए इतनी अधिक राशि का अवंटन हुआ है। केन्द्रीय रेल मंत्री ने मध्यप्रदेश में शत-प्रतिशत रेल विद्युतिकरण पर प्रसन्नता व्यक्त की है। मध्यप्रदेश से रेल मंत्रालय को पूरा सहयोग मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गत वर्ष मध्यप्रदेश को इंदौर- मनमाड रेल लाइन और इंदौर से दाहोद गुजरात तक धार होकर जाने वाली रेल परियोजना की स्वीकृति के कार्य हुए हैं। मध्यप्रदेश के नागरिकों को सभी दिशाओं में रेल नेटवर्क, यात्रियों के लिए माल भाड़े से जुड़ी सुविधा, रेल्वे ब्रिज और स्टेशनों के विकास की सौगात निरंतर मिल रही है। यह उत्साहवर्धक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है रेल बजट 2025-26 प्रदेश के सामाजिक और आर्थिक विकास के साथ यात्री सुविधाओं के विस्तार में मील का पत्थर साबित होगा। इस वर्ष मध्य प्रदेश को रेलवे बजट में अभूतपूर्व सौगातें मिली हैं। इस बजट से न केवल रेलवे नेटवर्क का विस्तार होगा बल्कि राज्य में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। रेलवे के आधुनिकीकरण और यात्री सुविधाओं के विस्तार से मध्यप्रदेश के आर्थिक विकास को एक नई दिशा मिलेगी। इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी और केन्द्रीय रेल मंत्री वैष्णव का मैं हृदय से धन्यवाद एवं आभार व्यक्त करता हूं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के लिए घोषित रेल बजट 2025-26 में राज्य को रेल अवसंरचना विकास के लिए अभूतपूर्व सौगातें दी गई हैं। इस बजट में 14,745 करोड़ रुपये का भारी भरकम बजटीय आवंटन किया गया है, जो राज्य के रेल नेटवर्क के विस्तार और आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रेल बजट 2025-26 में 31 नई रेल परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है, जिनकी कुल लंबाई 5,869 किलोमीटर है और इन पर 1,04,987 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी और यात्री सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार होगा। 80 रेलवे स्टेशन विकसित होंगे अमृत स्टेशन के रूप में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यात्रियों की सुविधा के लिए मध्य प्रदेश के 80 स्टेशनों को ‘अमृत स्टेशन’ के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिन पर 2,708 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन स्टेशनों में अकौड़िया, आमला, अनुपपुर, अशोकनगर, बालाघाट, बनापुरा, बरगवां, ब्योहारी, बेरछा, बैतूल, भिंड, भोपाल, बिजुरी, बीना, ब्यावरा, छिंदवाड़ा, डबरा, दमोह, दतिया, देवास, गाडरवारा, गंजबासौदा, घोड़ाडोंगरी, गुना, ग्वालियर, हरदा, हरपालपुर, इंदौर जंक्शन, इटारसी जंक्शन, जबलपुर, जुन्नारदेव, करेली, कटनी जंक्शन, कटनी मुड़वारा, कटनी साउथ, खाचरोद, खजुराहो जंक्शन, खंडवा, खिरकिया, लक्ष्मीबाई नगर, मैहर, मक्सी जंक्शन, मंडला फोर्ट, मंदसौर, एमसीएस छतरपुर, मेघनगर, मुरैना, मुलताई, नागदा जंक्शन, नैनपुर जंक्शन, एमसीएस छतरपुर, मेघनगर, मुरैना, मुलताई, नागदा जंक्शन, नैनीपुर जंक्शन, नर्मदापुरम (होशंगाबाद), नरसिंहपुर, नेपनागर, नीमच, ओरछा, पांढुर्ना, पिपरिया, रतलाम, रीवा, रुथियाई, सांची, संत हिरदाराम नगर, सतना, सागर, सीहोर, सिवनी, शहडोल, शाजापुर, श्यामगढ़, श्योपुर कलां, शिवपुरी, श्रीधाम, शुजालपुर, सिहोरा रोड, सिंगरौली, टीकमगढ़, उज्जैन, उमरिया, विदिशा और विक्रमगढ़ आलोट स्टेशन शामिल हैं। स्टेशन पुनर्विकास परियोजनाओं के तहत रानी कमलापति, ग्वालियर, खजुराहो, सतना, इंदौर, बीना और जबलपुर जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों के पुनर्विकास पर 1,950 करोड़ रुपये की लागत से कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य में रेलवे सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। ‘कवच’ तकनीक के अंतर्गत 3,572 किलोमीटर रेल मार्ग पर सुरक्षा कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 1,422 किलोमीटर पर कार्य प्रगति पर है। यह तकनीक ट्रेन संचालन के दौरान दुर्घटनाओं को रोकने में मदद करेगी और यात्रियों की सुरक्षा को और मजबूत बनाएगी। मध्यप्रदेश में विद्युतीकरण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की गई है। राज्य में 2,808 किलोमीटर रेल मार्ग का विद्युतीकरण पूरा किया जा चुका है, जिससे मध्यप्रदेश 100 प्रतिशत विद्युतीकृत राज्य बन चुका है। इसके अलावा, राज्य में 2,456 किलोमीटर नई पटरियों का निर्माण किया गया है, जो डेनमार्क के पूरे रेल नेटवर्क के बराबर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यात्रियों के बेहतर अनुभव के लिए मध्यप्रदेश में 4 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है, जो राज्य के 14 जिलों को जोड़ती हैं और इन जिलों में 18 स्टॉपेज हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए 69 लिफ्ट, 41 एस्केलेटर और 408 स्टेशनों पर वाई-फाई की सुविधा भी प्रदान की गई है।  

सीजीएमएससी में अब दवा घोटाला : 144 तरह की दवाएं 100 गुना महंगी खरीदी

रायपुर  छत्तीसगढ़ दवा निगम (सीजीएमससी) में उपकरण और रिएजेंट घोटाले के बाद अब दवा खरीदी में भी घोटाला सामने आया है। वहीं, जिस अधिकारी ने इसकी खरीदी की है, उसी को इस पूरे मामले की जांच का जिम्मा दे दिया गया है। दरअसल, सीजीएमएससी ने बिना जांच किए ही 100 गुना अधिक दाम पर 100 करोड़ रुपये की दवाएं लोकल कंपनी 9 एम फार्मा से खरीदी थीं। इन्हीं दवाओं की खरीदी राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कार्पोरेशन (आरएमएससीएल) ने आधे से भी कम दाम में की है। यह सब लोकल दवा कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया है। इस पूरे मामले की जांच के निर्देश स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने दिए थे। वहीं, दवा निगम द्वारा जीएम टेक्निकल (मेडिसिन) हिरेन पटेल को इसकी जांच की जिम्मेदारी दी गई थी, जबकि उन्हीं के द्वारा उक्त खरीदी की गई है। इसी बीच स्वास्थ्य मंत्री के जांच के निर्देश के 10 दिन बाद ही कंपनी को पूरा भुगतान भी कर दिया गया। बता दें कुछ इसी तरह रिएजेंट और उपकरण खरीदी में मोक्षित कार्पोरेशन को सीजीएमएससी के अधिकारियों ने फायदा पहुंचाया था। 10 दिन में मांगी थी जांच रिपोर्ट, तीन माह बीते सामाजिक कार्यकर्ता श्याम अवतार केडिया की शिकायत पर स्वास्थ्य मंत्री ने 25 अक्टूबर 2024 को प्रबंध संचालक को जांच कर 10 दिन मे रिपोर्ट देने का निर्देशित किया था। प्रबंध संचालक ने आरोपित महाप्रबंधक तकनीकी हिरेन पटेल को ही जांच करने के लिए निर्देशित कर दिया। इसके पूर्व एएनजी लाइफ साइंसेस कंपनी के आयकर विभाग के नोटिस की अवहेलना वाले मामले मे भी इन्हीं आरोपित अधिकारी को अपनी ही जांच करने के निर्देश प्रबंध संचालक द्वारा दे दिए थे। यह है तकनीकी महाप्रबंधन की जिम्मेदारी ऐसे में क्रय समिति में मौजूद तकनीकी महाप्रबंधक (मेडिसिन) हिरेन पटले की जिम्मेदारी थी कि अन्य दवा निगम की प्रचलित दरों का मिलान करें। उक्त कंपनी द्वारा भरी गई सिंगल बिड के तर्कसंगत होने की पुष्टि करें। मगर, अधिकारियों ने बिना जांचे ही मनमाने दर पर रेट कांट्रेक्ट कर दिया। कंपनी से कुल 132 करोड़ की खरीदी गई। उक्त उपकरण और दवाएं 20 करोड़ अधिक में खरीदी हुई। यह पूरा मामला पूरी खरीदी में शासन को 20 करोड़ 39 लाख रुपये से ज्यादा राशि का नुकसान पहुंचा दिया गया। नईदुनिया को मिले दस्तावेजों मुताबिक, जिन दवाओं की खरीदी राजस्थान मेडिकल कार्पोरेशन ने सस्ते में की है, उन्हीं दवाओं को सीजीएमएससी ने 50 से 160 प्रतिशत अधिक दाम में खरीदा है। सीजीएमएससी ने 144 दवाएं राजस्थान दवा निगम से 20 से 35 प्रतिशत अधिक दाम में खरीदी हैं। सिंगल बिडर में हो गई खरीदी शिकायतकर्ता ने बताया कि नाइन एम इंडिया लिमिटेड एक स्थानीय उत्पादक है। उसके कुल 181 आइटम की दरों का मिलान किया गया। इसमें से 122 दर ऐसे आइटम के हैं, जिनमें केवल 9 एम इंडिया लिमिटेड ने ही अकले रेट भरे थे। यहां नियमों की अनदेखी करते हुए सिंगल बिड (सिंगल विक्रेता) में ही खरीदी हो गई।

शक्कर कारखाना चालू होने तक जारी रहेगा आंदोलन: पंकज उपाध्याय

The movement will continue till the sugar factory becomes operational: Pankaj Upadhyay कैलारस शक्कर कारखाने को लेकर प्रशासन एवं आंदोलनकारीयौ में ठनी हुई है सरकार लगातार किसानों एवं जनता को लगातार गुमराह कर रही है वहीं शक्कर कारखाना चलाओ संघर्ष समिति निरंतर आंदोलन कर रही है विगत 21 जनवरी को कैलारस शक्कर कारखाने की भूमि के निलामी के विरोध में विधायक पंकज उपाध्याय के नेतृत्व में चार दिवसीय धरना दिया गया एवं दिनांक 21 जनवरी को सत्याग्रह एवं जेल भरो आंदोलन किया गया जिसमें हजारों की संख्या में किसानो युवाओं एवं आम जनों ने हिस्सा लेकर अपने गिरफ्तारी दी  प्रशासन ने भारी दबाव के कारण नीलामी टाल दी परंतु दिनांक 7 फरवरी को पुनः शक्कर कारखाने की भूमि की नीलामी निकली है इसके विरोध में एक बार फिर से किसान युवा आंदोलित होकर नीलामी वाले दिन विरोध प्रदर्शन करेंगे संघर्ष समिति ने आह्वान किया है कि शक्कर कारखाने पर एक दिवसीय भूख हड़ताल की जावेगी एवं आमजन अपने-अपने घरों पर काले झंडे लगाकर विरोध दर्ज करें शक्कर कारखाने पर हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया कि आंदोलन निरंतर जारी रखा जाएगा सरकार जब तक कारखाना प्रारंभ करने की मांग नहीं मान लेती एवं नीलामी नहीं रुकती तब तक संघर्ष जारी रहेगा समिति ने जनता जनार्दन से निवेदन किया है कि जौरा कैलारस एवं संपूर्ण मुरैना चंबल के अचल के लोग दिनांक 7 फरवरी को काले कपड़े पहन कर अपना विरोध दर्ज कारण एवं अपने घरों पर काले झंडे लगाए एवं बड़ी संख्या में भूख हड़ताल में पहुंचकर अपना विरोध प्रदर्शित करें बैठक में मुख्य रूप से पूर्व विधायक महेश दत्त मिश्रा किसान संघ के अशोक तिवारी गयाराम धाकड़ Bsp नेता नंदलाल खरे मुरारी लाल अमर नरहरि शर्मा बल्लभ यादव रामहेत जाटव काला जी अशोक जाटव ओम प्रकाश शाक्य परसराम जादौन ध्रुव यादव वीर सिंह कुशवाह सकलेचा जी ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विनोद दुबे मोहन रसोईया सत्येंद्र सोलंकी संतोष सोलंकी नीरज जाटव मोनू सिकरवार कल्लु सिकरवार सरपंच रिंकू मुद्गल पार्षद मोहित शुक्ला रफीक खान सोनू खान एदल गुर्जर के साथ बड़ी संख्या में किसान एवं आमजन मौजूद थे

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गोताखोर पलक शर्मा को स्वर्ण पदक जीतने पर दी बधाई

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उत्तराखंड में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेल: 2025 में एक्यूएटिक्स खेल के स्प्रिंग बोर्ड डाइविंग इवेंट में मध्यप्रदेश की प्रतिभाशाली गोताखोर पलक शर्मा द्वारा तीसरा स्वर्ण पदक जीतने पर बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर इंदौर की पलक शर्मा को मंगलकामनाएं देते हुए कहा कि वह इसी तरह भविष्य में भी सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर देश और मध्यप्रदेश का नाम गौरवान्वित करती रहें।  

Starlink के लिए Vodafone की सफलता बनी चुनौती

नई दिल्ली Vodafone ने हाल ही में सैटेलाइट कम्युनिकेशन की दुनिया में बड़ा कदम उठाते हुए एक साधारण 4G/5G स्मार्टफोन से दुनिया की पहली सैटेलाइट वीडियो कॉल की है। यह उपलब्धि Elon Musk की Starlink के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। यह वीडियो कॉल Wales Mountains के एक दूरस्थ क्षेत्र से की गई, जहां पर कोई भी स्थलीय मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं था। Vodafone की CEO Margherita Della Valle के अनुसार, इस कॉल के लिए स्मार्टफोन में कोई भी हार्डवेयर अपग्रेड की जरूरत नहीं पड़ी, जो कि सैटेलाइट कनेक्टिविटी में एक बड़ा तकनीकी उछाल है। 2026 तक पूरे यूरोप में लॉन्च होगी सेवा Vodafone की यह उपलब्धि डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है। कंपनी 2026 तक पूरे यूरोप में इस सैटेलाइट सेवा को शुरू करने की योजना बना रही है। वहीं, Starlink भी अपने सैटेलाइट-आधारित सर्विस पर काम कर रही है, लेकिन Vodafone के इस ब्रेकथ्रू ने कंपनी के लिए नई चुनौती पेश कर दी है। Starlink इस समय T-Mobile के साथ मिलकर अमेरिका में अपनी डायरेक्ट-टू-सेल टेक्नोलॉजी का परीक्षण कर रही है, जबकि Vodafone पहले ही अपनी सैटेलाइट वीडियो कॉलिंग सेवा को सफलतापूर्वक प्रदर्शित कर चुका है, जो संचार के भविष्य में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। Starlink के लिए बढ़ा दबाव Elon Musk की Starlink फिलहाल T-Mobile के साथ मिलकर डायरेक्ट-टू-सेल सैटेलाइट सेवा के परीक्षण में जुटी है। यह सेवा लॉन्च होने के बाद उपयोगकर्ताओं को बिना किसी ग्राउंड नेटवर्क के सैटेलाइट कॉलिंग की सुविधा देगी, खासतौर पर आपात स्थितियों में यह बहुत उपयोगी होगी। Apple और कुछ Android डिवाइसेज़ में इस सेवा का इंटीग्रेशन किया जा चुका है, लेकिन इसका ग्लोबल रोलआउट अभी बाकी है। Starlink भारत जैसे बाजारों में अपनी सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवा शुरू करने की तैयारी में है, जहां इसे हाल ही में सरकार से मंजूरी मिल चुकी है। हालांकि, Vodafone की इस शुरुआती सफलता से Elon Musk की कंपनी पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है। भविष्य में बढ़ेगी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी की होड़ जैसे-जैसे सैटेलाइट टेक्नोलॉजी आगे बढ़ रही है, Vodafone की BlueBird सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवा और Starlink के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज होगी। ये दोनों कंपनियां दुनिया में कनेक्टिविटी को नए स्तर पर ले जाने की दिशा में काम कर रही हैं। आने वाले समय में ग्लोबल कम्युनिकेशन के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, जहां कोई भी व्यक्ति दुनिया के किसी भी कोने से आसानी से कनेक्ट रह सकेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव हरदा जिले को देंगे 316.20 करोड़ रूपये के विकास कार्यों की सौगात

मुख्यमंत्री डॉ. यादव हरदा जिले को देंगे 316.20 करोड़ रूपये के विकास कार्यों की सौगात नर्मदा तट पर घाट निर्माण कार्य का करेंगे लोकार्पण भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंगलवार 4 फरवरी को हरदा जिले की टिमरनी तहसील के ग्राम छिपानेर स्थित चिचोटकुटी में 316 करोड़ 20 लाख रूपये के निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन करेंगे। इनमें 130.32 करोड़ रूपये लागत 21 कार्यों का भूमि पूजन और 185.87 करोड़ रूपये लागत के 97 कार्यों का लोकार्पण किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ग्राम चिचोटकुटी में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा नर्मदा नदी के तट पर 11.07 करोड़ रूपये लागत से बनवाये गये घाट निर्माण का लोकार्पण भी करेंगे। कार्यक्रम में जिले के प्रभारी और सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग भी उपस्थित रहेंगे।  

एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड स्कीम में कृषकों को 3 प्रतिशत ब्याज की छूट

भोपाल एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड स्कीम केन्द्र सरकार द्वारा संचालित एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य देश में कृषि अवसंरचना का विकास एवं विस्तार करना है। इस योजना के माध्यम से कृषक, कृषि अवसंरचना निर्माण के लिये बैंक से प्राप्त राशि रुपये 2 करोड़ तक के ऋण पर 3 प्रतिशत ब्याज छूट का लाभ सात वर्षों के लिए से सकते है। इस योजना के अंतर्गत वेयरहाउस, साइलोस, कस्टम हायरिंग सेंटर, कोल्ड स्टोरेज, सॉर्टिंग व ग्रेडिंग इकाई, प्राथमिक प्र-संस्करण इकाई, एयरोफोनिक फार्मिंग, हायड्रोफोनिक फार्मिंग, वर्टिकल कार्मिंग, मशरूम फार्मिंग, स्मार्ट प्रिसीजन फार्मिंग के लिये अवसंरचना निर्माण की जा सकती हैं। योजनांतर्गत मध्यप्रदेश को वर्ष 2025-26 तक 7440 करोड़ रूपये का लक्ष्य दिया गया है। जिसके विरुद्ध 7,804 करोड़ रूपये के कुल 10.860 प्रकरण स्वीकृत किए जा चुके हैं, जो कि देश के सभी राज्यों में सर्वाधिक है। इसके अतिरिक्त कुल 10.047 प्रकरणों में 5978 करोड़ रूपये का डिसबर्समेंट किया जा चुका है जो अन्य राज्यों की अपेक्षा कहीं अधिक है। केन्द्र सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 में मध्यप्रदेश को 500 करोड़ रूपये का लक्ष्य दिया गया था जिसके विरुद्ध 1240 करोड़ रूपये के कुल 2152 प्रकरण स्वीकृत किये जा चुके हैं जो कि आवंटित लक्ष्य का 248 प्रतिशत है। साथ ही कुल 1745 प्रकरणों में 721 करोड़ रूपये का डिसबर्समेंट किया जा चुका है। केन्द्र सरकार की इस महत्वाकांशी योजना का देश में सर्वोत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिए मध्यप्रदेश को वर्ष 2021-22, 2022-23 एवं 2023-24 में “अवार्ड” से सम्मानित भी किया गया है।  

परीक्षाओं में इस साल दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों की संख्या होगी कम, वस्तुनिष्ठ और अति लघु उत्तरीय प्रश्नों की संख्या पहले से बढ़ेगी

भोपाल  माध्यमिक शिक्षा मंडल की पांचवी और आठवीं की वार्षिक परीक्षा के प्रश्नपत्रों की रूपरेखा और अंक योजना जारी हो गई है। इस परीक्षा में परीक्षार्थियों को प्रश्नों के छोटे-छोटे उत्तर अधिक देने होंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि इस परीक्षा में वस्तुनिष्ठ, रिक्त स्थान भरो और अति लघु उत्तरीय प्रश्न अधिक पूछे जाएंगे। वहीं दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों की संख्या बेहद कम होगी।     मंडल की यह वार्षिक परीक्षा 24 फरवरी से शुरू होकर पांच मार्च तक चलेगी।     इस परीक्षा के लिए प्रदेश में 12 हजार केंद्र बनाए गए हैं।     दोनों कक्षाओं के करीब 24 लाख विद्यार्थी शामिल होंगे।     इस सबंध में राज्य शिक्षा केंद्र ने दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।     परीक्षा परिणाम के लिए अधिभार अंक भी निर्धारित कर दिया गया है।     इसके मुताबिक अर्द्धवार्षिक परीक्षा के लिए अधिभार अंक 20, वार्षिक परीक्षा लिखित अधिभार अंक 60 और वार्षिक परीक्षा प्रोजेक्ट कार्य के लिए अधिभार अंक 20 निर्धारित किए गए हैं।     प्रत्येक विषय में दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों की संख्या चार होगी। वहीं पांच बहु विकल्पीय प्रश्न, पांच रिक्त स्थान भरो और छह अति लघुउत्तरीय प्रश्न पूछे जाएंगे।     लघु उत्तरीय प्रश्नों की संख्या भी छह होगी। राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा निर्धारित ब्लू प्रिंट के आधार पर प्रश्न-पत्र तैयार होंगे।     सरकारी स्कूलों के लिए प्रश्न-पत्र राज्य स्तर से तैयार कराए जाएंगे, जबकि निजी स्कूल निर्धारित ब्लू प्रिंट के आधार पर प्रश्न-पत्रों को स्वयं तैयार कराएंगे।     सरकारी स्कूलों में भाषा विषय (हिंदी, अंग्रेजी व संस्कृत) की राज्य स्तर के एससीईआरटी पाठ्यपुस्तक से और निजी स्कूलों में एनसीईआरटी से प्रश्न पूछे जाएंगे। अन्य विषयों के प्रश्नपत्र एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक से पूछे जाएंगे। भोपाल जिले के 68 हजार विद्यार्थी शामिल होंगे भोपाल जिले में दोनों कक्षाओं की परीक्षा में करीब 68 हजार विद्यार्थी शामिल होंगे। इसमें पांचवीं के 34,213 और आठवीं के 34,773 विद्यार्थी होंगे। जिले में करीब 250 केंद्र बनाए गए हैं। 33 प्रतिशत से कम अंक लाने पर होंगे फेल प्रत्येक विषय की लिखित परीक्षा व आंतरिक मूल्यांकन में अलग-अलग न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा। प्रत्येक विषय के बाह्य एवं आंतरिक मूल्यांकन में न्यूनतम अर्हकारी अंक प्राप्त नहीं करने वाले परीक्षार्थी को फिर से परीक्षा देनी होगी। उसमें भी पास नहीं हुए तो उसी कक्षा में दोबारा पढ़ना होगा। परीक्षा अंक की योजना     छमाही परीक्षा-अधिभार 20 अंक     वार्षिक परीक्षा(लिखित) – 60 अंक     आंतरिक मूल्यांकन (प्रोजेक्ट कार्य) -20 अंक लिखित परीक्षा के प्रश्नों का पैटर्न ऐसा होगा     बहु विकल्पीय प्रश्न-पांच अंक (पांच प्रश्न)     रिक्त स्थान की पूर्ति वाले प्रश्न-पांच अंक (पांच प्रश्न)     अति लघुउत्तरीय प्रश्न -12 अंक (छह प्रश्न)     लघु उत्तरीय प्रश्न -18 अंक (छह प्रश्न)     दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-20 अंक (चार प्रश्न)  

अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का दर्जा मिलने की तैयारी के पहले ही भोपाल के राजा भोपाल एयरपोर्ट पर लगातार यात्रियों की संख्या में बढ़ोत्तरी

भोपाल  अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का दर्जा मिलने की तैयारी के पहले ही भोपाल के राजा भोपाल एयरपोर्ट पर लगातार यात्रियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है. जनवरी माह में राजा भोज एयरपोर्ट पर यात्रियों की ट्रेवलिंग का नया रिकॉर्ड बना है. जनवरी माह में भोपाल एयरपोर्ट से 1 लाख 51 हजार 139 यात्रियों ने हवाई यात्रा की है, जो अब तक की सबसे बड़ी संख्या है. इसके पहले पिछले साल दिसंबर माह में 1 लाख 50 हजार 946 यात्रियों ने इस एयरपोर्ट पर मूवमेंट किया था. एयरपोर्ट अथॉरिटी यात्रियों की बढ़ती संख्या से खुश हैं. उनके मुताबिक आने वाले समर सीजन में यात्रियों की यह संख्या और बढ़ेगी. वहीं एयर इंडिया एक्सप्रेस की चार उड़ानें शुरू होने जा रही है. जनवरी 2025 में 1152 हवाई फेरे राजा भोज एयरपोर्ट के डायरेक्टर रामजी अवस्थी बताते हैं, ” एयरपोर्ट से उड़ानों की संख्या बढ़ी है. अभी भोपाल से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद, जयपुर, लखनऊ, रायपुर, उदयपुर, पुणे, रीवा और गोवा के लिए उड़ानें हैं. जनवरी 2025 में भोपाल एयरपोर्ट से कुल 1152 फ्लाइट्स आईं-गईं, जिसमें 1 लाख 51 हजार 139 यात्रियों ने यात्रा की. यानी हर रोज करीबन 4875 पैसेंजर्स का मूवमेंट हो रहा है. पिछले छह माह का रिकॉर्ड देखें तो 8 लाख 6 हजार 620 यात्रियों का भोपाल एयरपोर्ट पर मूवमेंट रहा है. जनवरी में भोपाल पहुंचीं 576 फ्लाइटें एयरपोर्ट अथॉरिटी के अधिकारियों के मुताबिक, ” जनवरी माह में देश के दूसरे शहरों से राजा भोज भोपाल एयरपोर्ट पर 576 फ्लाइट पहुंचीं और इन्हीं फ्लाइट्स से भोपाल एयरपोर्ट के यात्रियों ने दूसरे शहरों के लिए उड़ान भरी है. ऐसे यात्रियों की संख्या 78 हजार 170 थी. वहीं बाकी पैसेंजर्स इन्हीं फ्लाइटों से भोपाल पहुंचे. उड़ानों के फेरे बढ़ने के साथ भोपाल एयरपोर्ट से आने-जाने वाले यात्रियों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी हुई है.” गर्मियों की छुट्टियों में बढ़ेंगे यात्री और नई उड़ानें उधर मार्च के महीने में भोपाल एयरपोर्ट से यात्रियों की ट्रेवलिंग का नया रिकॉर्ड बनने की उम्मीद है. मार्च में स्कूलों की छुट्टियां शुरू होने के बाद से भोपाल एयरपोर्ट से यात्रियों की संख्या बढ़ने की पूरी संभावना बताई जा रही है. इसके साथ ही नई फ्लाइट्स शुरू होने की भी उम्मीद है. अभी भोपाल एयरपोट से 12 शहरों का कनेक्शन हो चुका है. अभी यहां फ्लाइट्स की कुल संख्या 36 है, जो समर सीजन में 50 तक पहुंच सकती है. इंटरनेशनल फ्लाइट्स की तैयारियां जोरों पर जल्द ही इकोनॉमिक एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया एक्सप्रेस भी भोपाल से जुड़ने जा रही है. राजाभोज एयरपोर्ट सलाहकार समिति के सदस्य मनोज सिंह कहते हैं, ” जल्द ही भोपाल से इंटरनेशनल फ्लाइट शुरू होने जा रही है. इसकी तैयारी की जा रही है. भोपाल एयरपोर्ट के इंफ्रस्ट्रक्चर को लेकर काम किया जा रहा है.”

विश्लेषण: प्रयागराज महाकुम्भ 2025 मेले में हुई त्रासदी के बाद उठ रहे हैं कई सवाल

Analysis: Many questions are being raised after the tragedy at the Prayagraj Maha Kumbh 2025 fair सम्पादकीय लेख भोपाल। यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के समर्थक चाहे जितनी कोशिश कर लें, कुम्भ मेले में हुई त्रासदी के पीछे उनके प्रशासन की लापरवाही और कुप्रबंधन को छिपाया नहीं जा सकता। जैसे-जैसे नए विवरण सामने आ रहे हैं, हादसे की भयावहता बढ़ती ही जा रही है। यह भी पता चला है कि 29 जनवरी की सुबह पहली भगदड़ के बाद, कुछ ही घंटों के भीतर थोड़ी दूरी पर दूसरी भगदड़ भी हुई थी। इसके अलावा कुम्भ में कुछ मर्तबा आगजनी की घटनाएं भी हुई हैं, जिनमें सरकार द्वारा श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से बनाए गए दर्जनों आलीशान टेंट जलकर राख हो गए। आधिकारिक तौर पर मृतकों की संख्या 30 बताई गई है। लेकिन मौनी अमावस्या के दिन स्नान के लिए जिस पैमाने पर भीड़ उमड़ी थी, उसके मद्देनजर यह संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। कपड़ों, जूतों, कम्बलों और अन्य निजी सामानों के अवशेष हर जगह बिखरे पड़े थे, जो इस बात के जीवंत साक्ष्य थे कि भीड़ में कुचलने के भय से श्रद्धालु अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने पर मजबूर हो गए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस त्रासदी के कुछ ही घंटों के भीतर एक्स पर अपनी शोक संवेदनाएं व्यक्त कर दी थीं, लेकिन उत्तर प्रदेश प्रशासन बहुत समय तक यही दिखावा करता रहा कि कुछ हुआ ही नहीं है। इसके बाद मोदी ने यूपी सीएम से चार बार फोन पर बात की, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी एक्स पर पोस्ट किया, तब जाकर यूपी प्रशासन को अपनी चुप्पी तोड़ने और सच्चाई स्वीकारने के लिए मजबूर होना पड़ा। हादसे के पूरे 17 घंटे बाद, 29 जनवरी को शाम 7 बजे उन्होंने भगदड़ की जिम्मेदारी लेते हुए बयान जारी किया और ऐसी घटना दोबारा होने से रोकने के इंतजाम करने का वादा किया। उसके बाद से, यूपी सरकार ने भीड़ को सफलतापूर्वक प्रबंधित करने का प्रत्यक्ष अनुभव रखने वाले दो वरिष्ठ अधिकारियों को ड्यूटी पर लगाया है, अतिरिक्त बल तैनात किए हैं और वाहनों और श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए नए सिरे से यातायात योजना बनाई है, लेकिन नुकसान पहले ही हो चुका था। जोशीमठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने हादसे के बाद योगी के इस्तीफे की मांग की है और उन पर इस मामले में देश को गुमराह करने का आरोप लगाया। अन्य प्रमुख संतों और साधुओं ने सार्वजनिक रूप से तो कुछ नहीं कहा, लेकिन माना जा रहा है कि कई लोग मन ही मन शंकराचार्य की भावनाओं को समर्थन करते हैं और वे इस बात से नाराज हैं कि मौनी अमावस्या का पवित्र दिन तीर्थयात्रियों के शवों से दागदार हो गया। शंकराचार्य ने कहा कि अगर उन्हें भगदड़ और उसके परिणामस्वरूप हुई मौतों के बारे में पता होता, तो वे मृतकों के लिए उपवास करते और आनुष्ठानिक रूप से तीर्थस्नान नहीं करते। यूपी के सीएम के रूप में आठ साल के अपने कार्यकाल में योगी ने खुद को हिंदुत्व के एक प्रखर चेहरे के रूप में स्थापित कर दिया है। इससे न केवल उन्हें संघ का समर्थन मिला जिसने लोकसभा चुनावों में यूपी में भाजपा की करारी हार के बावजूद हर परिस्थिति में उनका साथ दिया बल्कि उन्हें खुद को देश भर में एक लोकप्रिय नेता के रूप में स्थापित करने में भी मदद मिली। आज वे मोदी के बाद भाजपा के दूसरे सबसे लोकप्रिय प्रचारक हैं। लेकिन कुम्भ हादसे के बाद एक सक्षम प्रशासक के रूप में उनकी छवि को झटका लगा कुम्भ का निर्बाध आयोजन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की साख को मजबूत कर सकता था। किंतु प्रयागराज में हुए हादसे के बाद अब यूपी प्रशासन से सवाल पूछे जा रहे हैं। यह किसी से छुपा नहीं है कि यूपी की भाजपा में अंतर्कलह है। है। ऐसा इसलिए भी है, क्योंकि वे कुम्भ शुरू होने से पहले और बाद में लगभग हर दूसरे दिन प्रयागराज का दौरा कर रहे थे, वे व्यक्तिगत रूप से वहां की व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे थे और इस पर बारीकी से नजर रखे हुए थे कि कुम्भ के प्रबंधन के लिए जो प्रशासनिक मशीनरी उन्होंने लगाई थी, वह सुचारु रूप से काम कर रही है या नहीं। बीवीआईपी के लिए विशेष व्यवस्था, उनकी गाड़ियों की अनियंत्रित आवाजाही और आम श्रद्धालुओं को नदी तक पहुंचने के लिए 20 किलोमीटर से अधिक पैदल चलना, खाने-पीने की चीजों की ऊंची लागत आदि को लेकर भी अनेक श्रद्धालुओं में गुस्सा है। दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक समागम का निर्बाध आयोजन हिंदुत्व के प्रतीक और कुशल प्रशासक के रूप में योगी की साख को मजबूत करता, किंतु प्रयागराज में अफसरों की लापरवाही से हुए हादसे के बाद अब उनके नेतृत्व वाले प्रशासन से सवाल पूछे जा रहे हैं। यह किसी से छुपा नहीं है कि यूपी की भाजपा में अंतर्कलह है। 26 फरवरी को मेला समाप्त होने के बाद यूपी की राजनीति में बहुत कुछ देखने को मिल सकता है।

राज्य आनंद संस्थान और राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान के बीच हुआ एमओयू

भोपाल राज्य आनंद संस्थान और राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान के बीच मैनिट परिसर में मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैडिंग (समझौता ज्ञापन) किया गया। एमओयू के तहत दोनों पक्ष तीन वर्षों तक एक-दूसरे के सहयोगी के रूप में कार्य कर विभिन्न गतिविधियों का क्रियान्वयन करेंगे। एमओयू का उद्देश्य 1. एक दूसरे के सहयोगी के रूप में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् में सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों पर आधारित कार्यक्रम एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के प्रस्तावों के अनुरूप वि‌द्यार्थियों में मानवीय मूल्य संवर्धन के लिये अध्ययन/कार्यक्रमों का क्रियान्वयन। 2. दोनों पक्षों के प्राध्यापक/कर्मचारियों/विद्यार्थियों का क्षमतावर्धन कर उनके माध्यम से अपनी-अपनी योजनाओं की पहुँच समाज के अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुँचाना। 3. प्राध्यापक एवं विद्यार्थियों को नैतिकता, आत्म-चिंतन एवं सकारात्मक मानसिकता के विकास के लिये प्रशिक्षण एवं यथासंभव आवश्यक सहयोग प्रदान करना। 4. प्राध्यापक एवं विद्यार्थियों को स्वयंसेवी पहल के लिये एक सहयोग मंच प्रदान कर आनंद एवं इससे जुड़े कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना। 5. ज्ञान और संसाधन के प्रसार हेतु अन्य दीर्घकालिक मार्ग की खोज तथा सहयोग के बिन्दुओं को तलाशकर साझा रणनीति क्रियान्वयन।     प्रथम पक्ष के दायित्व 1. प्रथम पक्ष की प्रक्रिया के तहत चयनित ‌द्वितीय पक्ष के प्राध्यापकों के लिये प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा। साथ ही प्रथम पक्ष संकाय विकास कार्यक्रम भी आयोजित करेगा ताकि प्राध्यापकों को स्वतंत्र रूप से सत्र का संचालन करने के लिये प्रशिक्षित किया जा सके। 2. प्रथम पक्ष सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों के पाठ्यक्रम निर्माण में ‌द्वितीय पक्ष की सहायता करेगा। 3. प्रथम पक्ष नियमित अंतराल पर पारस्परिक रूप से तय कार्यक्रम के अनुसार द्वितीय पक्ष के प्राध्यापक एवं वि‌द्यार्थियों के लिए आनंद के कार्यक्रमों का आयोजन करेगा। 4. प्रथम पक्ष विद्यार्थियों के लिये सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों पर आधारित कार्यक्रम आयोजित करेगा, जो या तो पूरे 7 दिनों तक लगातार आयोजित किये जायेंगे अथवा तीन माह के लिए 10 सत्रों की अवधिवार पाठ्यक्रम बनाया जाएगा। 5. प्रथम पक्ष प्राध्यापक एवं विद्यार्थियों के विकास, संस्थागत क्षमता निर्माण, अनुसंधान और नवाचार से संबंधित गतिविधियों में ‌द्वितीय पक्ष के ज्ञान सहभागी के रूप में कार्य करेगा एवं तद्‌नुसार संयुक्त कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने और उन्हें संचालित करने के लिये अपनी विशेषज्ञता प्रदान करेगा। 6. प्रथम पक्ष सभी निर्धारित कार्यक्रमों के लिए एक ऑनलाइन पंजीयन लिंक प्रदान करेगा और नामांकित/चिह्नित प्रतिभागियों को दिये गये लिंक के माध्यम से ऑनलाइन पंजीयन करेगा।     द्वितीय पक्ष के दायित्व : 1. द्वितीय पक्ष आनंद से संबंधित संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालायें और सम्‌मेलन आयोजित करने में प्रथम पक्ष को यथासंभव सहयोग प्रदान करेगा। 2. प्रथम पक्ष ‌द्वारा तैयार पाठ्य-पुस्तक अध्ययन सामग्री आदि को द्वितीय पक्ष अपनी आवश्यकतानुसार मुद्रित करवायेगा तथा प्रतिभागियों को उपलब्ध कराएगा। 3. द्वितीय पक्ष परस्परिक रूप तय समय सारणी के अनुसार आनंद से जुड़े कार्यक्रमों के लिये प्राध्यापक एवं विद्यार्थियों को नामांकित करेगा। 4. द्वितीय पक्ष आनंदसे जुड़े कार्यक्रमों में नामांकित प्रतिभागियों का नियमित अंतराल पर निरीक्षण करेगा तथा उनकी क्षमता व समझ के आधार पर उन्हें अगले स्तर के कार्यक्रमों के लिये चिहिन्त/नामांकित करेगा। 5. द्वितीय पक्ष अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रथम पक्ष द्वारा आयोजित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों/आनंद शिविरों/प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आदि में सम्मिलित होने के लिए प्रोत्साहित करेगा तथा उन्हें आवश्यक अनुमति प्रदान करेगा। 6. प्रथम पक्ष द्वारा प्रदत्त प्रारूप में कार्यक्रम के पूर्व और पश्चात आवश्यकतानुसार मूल्यांकन/प्रथम रिपोर्ट द्वितीय पक्ष द्वारा तैयार किया जायेगा। 7. द्वितीय पक्ष, प्रथम पक्ष के कार्यक्रमों के संचालन के लिये आवश्यक सुविधाएँ एवं संसाधन उपलब्ध कराएगा।  

इंदौर में गीले कचरे से बायो सीएनजी तैयार करने की इकाई

भोपाल प्रदेश में नगरीय निकायों को वर्ष 2027 तक कचरा प्रबंधन में आत्मनिर्भर बनाने के लिये नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा प्रभावी प्रयास किये जा रहे हैं। गीले कचरे को कंपोस्टिंग के लिये कटनी और सागर शहर में अत्याधुनिक स्वचालित इकाइयां लगाई गई हैं, जहां 16 शहरों से कचरा लाकर उसे कंपोस्ट में बदला जा रहा है। इंदौर में गीले कचरे से बायो सीएनजी तैयार करने के लिये 550 टन प्रतिदिन क्षमता की गोबरधन इकाई लगाई गई है। रीवा और जबलपुर में कचरे से बिजली बनाने की इकाइयाँ भी संचालित हो रही है। इनमें प्रतिदिन 950 टन कचरे का प्र-संस्करण किया जाकर 18 मेगावॉट बिजली पैदा की जा रही है। प्रदेश के 10 नगरीय निकायों के लिये क्लस्टर आधार पर 1018.85 टन प्रतिदिन क्षमता की इकाइयों के लिये केन्द्र सरकार से स्वीकृति मिल गयी है। इंदौर-उज्जैन में 607 टन कचरे से बिजली बनाने की यूनिट्स का काम प्रस्तावित है। इनके प्रारंभ होने से 12.15 मेगावॉट बिजली प्राप्त होगी।  

केन्द्र सरकार ने दी मंजूरी, एमपी के 10 शहरों में ‘कचरे’ से बनेगी ‘बिजली’

electricity will be produced from waste in 10 urban bodies of mp नगरीय विकास विभाग ने घरेलू कचरे के निस्तारण के मामले में बड़े जुर्माने से बचने के लिए प्रयास शुरू किए हैं। इसके तहत कहीं कचरे से सीएनजी बनाने के प्लांट लगाए जा रहे हैं तो कहीं कंपोस्टिंग के प्लांट लग रहे हैं। इसी सिलसिले में अब मध्यप्रदेश के 10 शहरों में कचरे से बिजली बनाने के प्लांट लगाए जा रहे हैं। इन्हें केन्द्र से अनुमति मिल गई है। यह वर्ष 2026 तक शुरू होने की संभावना है। सरकार ने प्रदेश में नगरीय निकायों को वर्ष 2027 तक कचरा प्रबंधन में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य तय किया है। यहां पहले से बनाई जा रहीरीवा, जबलपुर में कचरे से बिजली बनाने की यूनिट संचालित हैं। प्रतिदिन 950 टन कचरे का प्र-संस्करण कर 18 मेगावॉट बिजली पैदा की जा रही है। लीगेसी वेस्ट खत्म करने में मिलेगी मदद एनजीटी ने 2022 में सॉलिड वेस्ट प्रबंधन में लापरवाही के लिए 3 हजार करोड़ का जुर्माना लगाया था। तत्कालीन सीएस ने छह माह में प्रबंधन करने का शपथ-पत्र दिया था। इसके बाद जुर्माना स्थगित किया गया, लेकिन अब भी निकायों की डंपिंग साइट पर 25 लाख टन से ज्यादा लीगेसी वेस्ट जमा है। बिजली प्लांट बनने से वेस्ट भी खत्म करने में मदद मिलेगी। जुर्माने से बचा जा सकेगा। हाल ही में गीले कचरे की कंपोस्टिंग के लिए कटनी, सागर में स्वचालित यूनिट लगाई गई हैं। इन 10 नई इकाइयों को अनुमति 10 नगरीय निकायों के लिए क्लस्टर आधार पर 1018.85 टन प्रतिदिन क्षमता की इकाइयों के लिए मंजूरी मिली है। इन निकायों में सांची, हरदा, नया हरसूद, शाहगंज, आलीराजपुर, देपालपुर, उन्हेल, बाबई, धारकोटि और इंदौर शामिल हैं। इनमें आसपास के स्थानों को भी जोड़ा गया है। जहां कचरा कम निकलता है वहां समीपस्थ अन्य शहरों को जोड़ा गया है। इंदौर-उज्जैन को मिलाकर 607 टन कचरे से बिजली बनाने की यूनिट्स का काम प्रस्तावित है। इसके शुरू होने से 12.15 मेगावाट बिजली बन सकेगी।

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