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मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय की पहल रंग लाई, रायपुर में जर्जर पुल का निर्माण कार्य शुरू

रायपुर : मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय की पहल से जर्जर पुल के निर्माण की शुरुआत वर्षों से जोखिम उठाकर गुजर रहे राहगीरों को मिलेगी सुरक्षित आवागमन की सुविधा रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देश पर जशपुर जिले में सिंगीबहार से कछुआकानी मुख्य मार्ग पर स्थित जर्जर पुल के निर्माण कार्य की शुरुआत कर दी गई है। लंबे समय से पुल की जर्जर स्थिति के कारण क्षेत्र के लोग जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर थे। मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय के संज्ञान में मामला आने के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित विभाग को निर्माण कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए। बताया गया है कि सिंगीबहार–कछुआकानी मार्ग क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है, जो छत्तीसगढ़ को पड़ोसी राज्यों झारखंड और ओडिशा से जोड़ने में अहम भूमिका निभाता है। पुल के खराब होने के कारण इस मार्ग से गुजरने वाले ग्रामीणों, किसानों और मजदूरों को लंबे समय से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया को जानकारी मिलने के बाद अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। निर्देश मिलते ही संबंधित विभाग ने स्थल पर पहुंचकर पुल निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया है। निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद क्षेत्रवासियों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सकेगी। पुल निर्माण कार्य शुरू होने से क्षेत्र में खुशी का माहौल है। स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों पुरानी समस्या का अब समाधान होने जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पुल बनने से आवागमन सुरक्षित होने के साथ ही आसपास के गांवों के विकास और व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

बस्तर में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट, छत्तीसगढ़ में मौसम लेगा करवट

रायपुर छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ रही गर्मी के बीच मौसम विभाग ने दक्षिण छत्तीसगढ़ के लिए बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। विशेष रूप से बस्तर संभाग के कई जिलों में शुक्रवार से मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार 13 से 15 मार्च के बीच बस्तर क्षेत्र में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। यदि बारिश होती है तो तापमान में हल्की गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बिहार और झारखंड के बीच समुद्र तल से करीब 0.9 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक ट्रफ लाइन सक्रिय है। इसी सिस्टम के प्रभाव से छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में बादल छाने और बारिश होने के संकेत मिल रहे हैं। जगदलपुर, बीजापुर समेत बस्तर संभाग के अधिकांश जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। मौसम विभाग का अनुमान है कि इन इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक की स्थिति भी बन सकती है। प्रदेश में बढ़ रही गर्मी फिलहाल प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान तेजी से बढ़ रहा है। राजनांदगांव में अधिकतम तापमान करीब 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि रायपुर और बिलासपुर संभाग के अधिकांश जिलों में पारा लगभग 37 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। वहीं न्यूनतम तापमान के मामले में अंबिकापुर सबसे ठंडा रहा, जहां तापमान करीब 13.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग का अनुमान है कि राज्य में मार्च के दूसरे और तीसरे पखवाड़े में गर्मी और तेज हो सकती है। कई जिलों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना जताई गई है।

कलेक्टर का बड़ा कदम: भोपाल में भू-जल स्तर गिरने पर नए नलकूप खनन पर प्रतिबंध, पूरे जिले को जल अभावग्रस्त घोषित

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में लगातार गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 के तहत आदेश जारी करते हुए पूरे भोपाल जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिया है। इसके साथ ही जिले में नए निजी और अशासकीय नलकूपों के खनन पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। भू-जल के अत्यधिक दोहन से संकट गहराया लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री ने प्रशासन को जानकारी दी कि जिले में कृषि और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भू-जल स्रोतों का अत्यधिक उपयोग हो रहा है। इसके कारण नलकूपों और पेयजल स्रोतों का जल स्तर तेजी से गिरता जा रहा है। यदि यह स्थिति जारी रही तो आगामी गर्मियों में भोपाल जिले में गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न होने की आशंका जताई गई है। बिना अनुमति नहीं हो सकेगा बोरिंग मशीन का प्रवेश जारी आदेश के अनुसार जिले की राजस्व सीमाओं में बिना अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की अनुमति के कोई भी बोरिंग मशीन प्रवेश नहीं कर सकेगी और नए निजी नलकूपों का खनन नहीं किया जा सकेगा। हालांकि सार्वजनिक सड़कों से गुजरने वाली मशीनों को इस प्रावधान से छूट दी गई है। अवैध बोरिंग पर जब्ती और एफआईआर प्रशासन ने राजस्व और पुलिस अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि यदि कोई बोरिंग मशीन अवैध रूप से जिले में प्रवेश करती है या प्रतिबंधित स्थानों पर नलकूप खनन का प्रयास करती है तो उसे तुरंत जप्त किया जाए और संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज की जाए। विशेष परिस्थितियों में मिल सकेगी अनुमति कलेक्टर ने सभी अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को निर्देश दिया है कि यदि किसी क्षेत्र में अपरिहार्य परिस्थिति हो तो उचित जांच के बाद नलकूप खनन की अनुमति दी जा सकती है। आदेश उल्लंघन पर सख्त सजा आदेश का उल्लंघन करने पर मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 के तहत दो हजार रुपये तक का जुर्माना, दो वर्ष तक का कारावास या दोनों का प्रावधान है। सरकारी योजनाओं पर नहीं लागू होगा प्रतिबंध यह आदेश सरकारी योजनाओं के तहत किए जाने वाले नलकूप खनन पर लागू नहीं होगा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग आवश्यकतानुसार योजनाओं के अंतर्गत नलकूप खनन का कार्य जारी रख सकेगा। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवश्यकता पड़ने पर निजी जल स्रोतों को सार्वजनिक पेयजल व्यवस्था के लिए अधिग्रहित किया जा सकता है।

विधानसभा में राजस्व विभाग की 3502 करोड़ से अधिक की अनुदान मांगों को मिली स्वीकृति

मंत्री  टंक राम वर्मा के राजस्व विभाग की 3502 करोड़ रुपए से अधिक की अनुदान मांगें विधानसभा में पारित राजस्व सेवाओं में डिजिटल पारदर्शिता और आपदा प्रबंधन को मिलेगा नया बल मुंगेली जिला के विजयपुर और सरगुजा जिला के देवगढ को उप तहसील बनाने की घोषणा रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा के विभागों के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु कुल 4 हजार 808 करोड़ 73 लाख 96 हजार रुपए की अनुदान मांगें पारित कर दी गईं। इसमें भू-राजस्व एवं जिला प्रशासन के लिए 2,206 करोड़ 2 लाख 97 हजार रुपए, राजस्व विभागीय व्यय के लिए 20 करोड़ 62 लाख 64 हजार रुपए, पुनर्वास के लिए 2 करोड़ 94 लाख 50 हजार रुपए, प्राकृतिक आपदाओं एवं सूखाग्रस्त क्षेत्रों में राहत हेतु 1,272 करोड़ 99 लाख 2 हजार रुपए तथा उच्च शिक्षा विभाग के लिए 1,306 करोड़ 14 लाख 83 हजार रुपए शामिल हैं।      अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी, सरल और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में 3,502 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है, ताकि नागरिकों को त्वरित और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिल सकें।      राजस्व मंत्री  वर्मा ने बताया कि राज्य सरकार भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण, डिजिटल सेवाओं के विस्तार और नागरिक सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। डिजिटल ऋण पुस्तिका, भू-अभिलेखों का डिजिटलीकरण, ऑटो डायवर्जन तथा लोक सेवा गारंटी जैसी व्यवस्थाओं से राजस्व सेवाओं में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी है l उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भी सरकार पूरी तरह सजग है। बाढ़, सूखा, अतिवृष्टि और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों को त्वरित सहायता देने के लिए राहत और पुनर्वास व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और पूर्व चेतावनी प्रणाली के माध्यम से आपदाओं के प्रभाव को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं।       राजस्व प्रशासन में हुए प्रमुख बदलाव      मंत्री ने बताया कि प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत राज्य में जिलों, तहसीलों और राजस्व ढांचे का विस्तार किया गया है। राज्य गठन के समय जहां 16 जिले थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 33 हो गई है। इसी प्रकार राजस्व अनुविभाग, तहसील, राजस्व निरीक्षक मंडल और पटवारी हल्कों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे प्रशासनिक कार्यों में तेजी आई है। ऑटो डायवर्सन और डिजिटल किसान किताब    मंत्री  वर्मा ने बताया कि सरकार ने भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन करते हुए ऑटो डायवर्सन प्रणाली लागू की है, जिसके तहत आवेदन के 15 दिनों के भीतर भूमि का उपयोग परिवर्तन स्वतः हो जाता है। इससे नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिली है। इसके साथ ही डिजिटल किसान किताब की सुविधा भी शुरू की गई है, जिससे किसानों को भूमि स्वामित्व, ऋण स्थिति और अन्य जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध हो रही है। इससे बैंक से फसल ऋण लेने में भी सुविधा मिल रही है। भूमिहीन मजदूरों को आर्थिक संबल       मंत्री ने बताया कि दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत भूमिहीन खेतिहर मजदूरों और पारंपरिक ग्रामीण व्यवसाय से जुड़े परिवारों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। वर्ष 2025-26 में लगभग 4.96 लाख हितग्राहियों को लाभ देने के लिए 496 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए थे, जबकि वर्ष 2026-27 के लिए 605 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। आधुनिक तकनीक से कृषि निगरानी       राजस्व मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने उपहार (UPHAR) योजना के माध्यम से कृषि क्षेत्र की निगरानी और सलाहकारी प्रणाली विकसित करने का निर्णय लिया है। इसमें सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग और ड्रोन तकनीक के जरिए फसल क्षेत्र, उत्पादन अनुमान और आपदा से होने वाले नुकसान का आंकलन किया जाएगा। इस योजना के लिए 25 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। स्वामित्व योजना से ग्रामीणों को भूमि अधिकार    राजस्व मंत्री ने कहा कि स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी को भूमि का अधिकार देने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। राज्य में लगभग 10.50 लाख हितग्राहियों को अधिकार अभिलेख देने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से अब तक 1.60 लाख लोगों को अधिकार पत्र वितरित किए जा चुके हैं। पंजीयन के साथ स्वतः नामांतरण      मंत्री ने बताया कि राज्य में जमीन की खरीदी-बिक्री के बाद स्वतः नामांतरण (ऑटो म्यूटेशन) की व्यवस्था लागू की गई है। पंजीयन होते ही जमीन का नामांतरण क्रेता के नाम पर स्वतः हो जाता है, जिससे नागरिकों को लंबी प्रक्रिया और परेशानियों से राहत मिली है।    आपदा प्रबंधन के लिए मजबूत प्रावधान           वर्मा ने बताया कि सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए वित्तीय प्रावधान भी किए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) में 588 करोड़ रुपए, राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDRF) में 50 करोड़ रुपए तथा राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि (SDMF) में 147 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।        मंत्री  वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य डिजिटल राजस्व प्रशासन, पारदर्शी व्यवस्था और प्रभावी आपदा प्रबंधन के माध्यम से नागरिकों को बेहतर सेवाएं प्रदान करना है।

नाबालिग पीड़िता को गर्भपात की इजाजत नहीं, गुजरात हाई कोर्ट ने 26 हफ्ते के भ्रूण का मामला खारिज किया

अहमदाबाद  गुजरात हाई कोर्ट ने वडोदरा की एक रेप पीड़िता द्वारा अपने 26 हफ्ते के भ्रूण का गर्भपात कराने के लिए दिए गए आवेदन को मंजूर करने से इनकार कर दिया. मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर विचार करते हुए, हाई कोर्ट ने नाबालिग को गर्भपात की अनुमति नहीं दी। वडोदरा की एक नाबालिग ने गुजरात हाई कोर्ट में गर्भपात के लिए आवेदन किया था, क्योंकि वह इस प्रेग्नेंसी को जारी नहीं रखना चाहती थी, जबकि भ्रूण 26 हफ्ते का है. इस आवेदन की सुनवाई के दौरान, हाई कोर्ट ने वडोदरा के SSG अस्पताल के मेडिकल बोर्ड को नाबालिग की मेडिकल स्थिति का पता लगाने के लिए जांच करने का आदेश दिया. हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार, 11 मार्च को नाबालिग की मेडिकल जांच की गई और उसके बाद मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश की। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, यह पाया गया कि इस चरण में नाबालिग के लिए गर्भपात कराना चिकित्सकीय रूप से ज्यादा खतरनाक है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस चरण में गर्भपात कराने में बच्चे को जन्म देने की तुलना में अधिक जोखिम है। मेडिकल बोर्ड ने आगे कहा कि अगर बच्चा जीवित पैदा होता है, तो उसे सांस लेने में तकलीफ और रक्तस्राव जैसी गंभीर मेडिकल समस्याएं हो सकती हैं, और ऐसी स्थिति में, बच्चे को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखने की जरूरत पड़ सकती है। नाबालिग के भविष्य के लिए दिए अहम आदेश मेडिकल बोर्ड की इस राय को ध्यान में रखते हुए, गुजरात हाई कोर्ट ने नाबालिग को गर्भपात की अनुमति देने से इनकार कर दिया. इसके साथ ही, हाई कोर्ट ने नाबालिग के हितों और भविष्य को ध्यान में रखते हुए कुछ अहम आदेश भी दिए हैं. कोर्ट ने कहा है कि बच्चे को जन्म देने के लिए अस्पताल द्वारा नाबालिग को उचित मेडिकल देखभाल में मदद की जानी चाहिए. बच्चे के जन्म के बाद, नाबालिग की इच्छा जानने के बाद उसे किसी बच्चा गोद लेने वाली एजेंसी को सौंपने की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए. अगर नाबालिग अपने परिवार के साथ नहीं रहना चाहती है, तो उसे किसी महिला आश्रय गृह में रखने की व्यवस्था की जानी चाहिए। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि नाबालिग की डिलीवरी का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी. इसके अलावा, राज्य सरकार बच्चे के जन्म के बाद छह महीने तक नाबालिग और बच्चे की देखभाल और इलाज का खर्च भी उठाएगी. अदालत ने आदेश दिया है कि नाबालिग के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उसे व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाए और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) उसकी आगे की शिक्षा की व्यवस्था के संबंध में निर्णय ले। हाई कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि DLSA के सचिव इस पूरी प्रक्रिया पर लगातार नजर रखें, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इसका ठीक से पालन हो रहा है। इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील भौमिक शाह ने बताया कि नाबालिग की स्थिति और उसकी इच्छाओं को अदालत के सामने रखा गया था. हालांकि, अदालत ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला लिया, क्योंकि रिपोर्ट में गर्भपात से जुड़े चिकित्सीय जोखिमों की बात कही गई थी. उन्होंने आगे कहा कि अदालत ने नाबालिग के स्वास्थ्य, सुरक्षा और भविष्य को ध्यान में रखते हुए, उसे जरूरी सहायता और सुरक्षा प्रदान करने के लिए राज्य सरकार को विस्तृत निर्देश भी दिए हैं।

उच्च शिक्षा विभाग को मिला 1306 करोड़ से ज्यादा का बजट, विधानसभा में अनुदान मांगें पारित

छत्तीसगढ़ विधानसभा में उच्च शिक्षा विभाग की 1306 करोड़ से अधिक की अनुदान मांगें पारित शिक्षा सामाजिक, आर्थिक और बौद्धिक विकास की आधारशिला  25 महाविद्यालयों के नए भवन बनेंगे रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा के उच्च शिक्षा विभाग के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 1306 करोड़ रुपये से अधिक की अनुदान मांगें पारित कर दी गई। अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए मंत्री  वर्मा ने कहा कि शिक्षा किसी भी राज्य के सामाजिक, आर्थिक और बौद्धिक विकास की आधारशिला है। सरकार का लक्ष्य प्रदेश के प्रत्येक विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराना है। मंत्री  वर्मा ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत कुल 37 योजनाएं संचालित की जा रही हैं। यह बजट प्रावधान प्रदेश में उच्च शिक्षा के विस्तार, गुणवत्ता सुधार और अधोसंरचना विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।      मंत्री ने बताया कि वंचित क्षेत्रों के लिए वित्तीय संसाधनों में भी वृद्धि की गई है। वर्ष 2025-26 में अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्रों के लिए 230.36 करोड़ रुपये का प्रावधान था, जिसे बढ़ाकर 2026-27 में 249.61 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसी प्रकार अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्रों के लिए 103.10 करोड़ रुपये के प्रावधान को बढ़ाकर 120.23 करोड़ रुपये किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश को वर्ष 2047 तक विकसित राज्य बनाने के लक्ष्य के तहत सरकार ने GYAN (गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी) को विकास का प्रमुख स्तंभ बनाया है। वर्ष 2024-25 में राज्य में महाविद्यालयों की संख्या 335 थी, जो 2025-26 में बढ़कर 343 हो गई है। इसी वर्ष 8 नए स्नातक महाविद्यालय स्थापित किए गए हैं, जिनमें संगीत, विधि और शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय भी शामिल हैं। नए विषय और महाविद्यालय स्थापना        दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की सुविधा बढ़ाने के लिए जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी- भरतपुर के खड़गवा में बी.एड. (आईटीईपी) तथा बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सुहेला में नए महाविद्यालय की स्थापना के लिए 1.30 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरगुजा विश्वविद्यालय में नए विषय शुरू करने तथा रामचंद्रपुर और घरघोड़ा महाविद्यालय को स्नातकोत्तर महाविद्यालय में उन्नयन के लिए 1.40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। 25 नए महाविद्यालय भवन बनेंगे     मंत्री  वर्मा ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रदेश के 25 महाविद्यालयों के लिए नए भवन निर्माण हेतु 2500 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। इसके अलावा 6 महाविद्यालयों में अतिरिक्त कक्ष निर्माण के लिए 4.05 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ऑडिटोरियम, छात्रावास और बाउंड्रीवाल निर्माण     उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि कोहका-नेवरा-तिल्दा में ऑडिटोरियम निर्माण, भानुप्रतापपुर में छात्रावास निर्माण और धमतरी महाविद्यालय के छात्रावास में बाउंड्रीवाल निर्माण के लिए कुल 1.80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे दूरदराज के विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध होगा। 36 महाविद्यालय बनेंगे उत्कृष्टता केंद्र     मंत्री ने कहा कि राज्य के चयनित महाविद्यालयों को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना के तहत 36 शासकीय महाविद्यालयों को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा। वर्ष 2025-26 में 25 महाविद्यालयों को और वर्ष 2026-27 में 5 महाविद्यालयों के लिए प्रति महाविद्यालय 3 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। NAAC मूल्यांकन पर जोर      उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तरीय गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ का गठन किया गया है। अब तक 200 शासकीय महाविद्यालयों और 5 राज्य विश्वविद्यालयों का NAAC द्वारा सफलतापूर्वक मूल्यांकन कराया जा चुका है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का क्रियान्वयन     मंत्री  वर्मा ने बताया कि राज्य में 335 शासकीय, 321 अशासकीय महाविद्यालयों, 8 राजकीय विश्वविद्यालयों और 18 निजी विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू की गई है। इसके तहत बहुविषयक शिक्षा, मल्टी एंट्री-मल्टी एग्जिट प्रणाली और कौशल आधारित पाठ्यक्रमों को बढ़ावा दिया गया है। 42 स्किल एन्हांसमेंट कोर्स और 108 जनरिक इलेक्टिव व एबिलिटी एन्हांसमेंट कोर्स विकसित किए गए हैं। PM-USHA योजना के तहत सुदृढ़ीकरण        प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA) के अंतर्गत 12 शासकीय महाविद्यालयों को प्रति महाविद्यालय 5 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है। वहीं 3 विश्वविद्यालयों को प्रति विश्वविद्यालय 20 करोड़ रुपये का अनुदान मिला है। इसके अलावा बस्तर स्थित शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय को MERU (Multidisciplinary Education and Research Universities) योजना के तहत 100 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है।     लैंगिक समावेशन और समानता पहल (Gender Inclusion and Equity Initiative) के तहत राजनांदगांव, सरगुजा, धमतरी, बलौदाबाजार और कबीरधाम जिलों को महिला शिक्षा और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण के लिए प्रति जिला 10 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है।      मंत्री  वर्मा ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण, समतामूलक और रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि उनका सर्वांगीण विकास के साथ राज्य के समग्र विकास को गति मिल सके।

महंगी गैस पर कांग्रेस का विरोध: खाली सिलिंडर लेकर किया प्रदर्शन, फूंका सरकार का पुतला

जयपुर देशभर में लोग एलपीजी गैस सिलिंडर की कमी से परेशान हैं। ईरान–इस्राइल युद्ध के कारण गैस की सप्लाई प्रभावित होने की चर्चा के बीच कई जगह गैस एजेंसियों पर लंबी लाइनें देखी जा रही हैं। इसी मुद्दे को लेकर राजस्थान में कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किया। शुक्रवार को कांग्रेस ने पूरे राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया। इसी क्रम में जयपुर के चांदपोल इलाके में कांग्रेस कार्यकर्ता इकट्ठा हुए और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार का पुतला भी जलाया। साथ ही गैस सिलिंडर की प्रतीकात्मक शवयात्रा भी निकाली गई।  अजमेर में चूल्हा जलाकर जताया विरोध अजमेर में भी रसोई गैस की कमी और बढ़ती कीमतों के विरोध में कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन किया। शहर जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता खाली गैस सिलिंडर ठेले पर रखकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और उन्हें सड़क पर रखकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया। वहीं महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्ट्रेट के बाहर चूल्हा जलाकर प्रतीकात्मक रूप से खाना बनाते हुए महंगाई और गैस सिलिंडर की किल्लत के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार से गैस सिलिंडर की कीमतों में कमी करने और आम लोगों को राहत देने की मांग की। इस मौके पर राजस्थान सरकार के पूर्व चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने कहा कि देश में महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है और आम लोगों का जीवन कठिन होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे हो गए हैं कि लोगों को गैस सिलिंडर लेने के लिए लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से थाली और ताली बजाने की अपील की थी, लेकिन अब जनता को गैस सिलिंडर के लिए फिर से लाइनों में लगना पड़ रहा है। यह सरकार की नीतियों की विफलता को दिखाता है। वहीं किशनगढ़ से कांग्रेस विधायक डॉ. विकास चौधरी ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महंगाई कम करने का वादा करके सत्ता में आए थे, लेकिन इसके बावजूद महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि आज आम आदमी की हालत बहुत खराब हो चुकी है और घरेलू गैस सिलिंडर के लिए भी लोगों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के पास महंगाई को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस नीति नहीं है, जिससे आम जनता को परेशानी हो रही है।   श्रीगंगानगर में भी जोरदार विरोध श्रीगंगानगर में भी गैस सिलिंडर की किल्लत और बढ़ती कीमतों के विरोध में कांग्रेस ने जिला कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन किया। एनएसयूआई और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूंका। प्रदर्शन के दौरान महिलाएं और युवा कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस जिलाध्यक्ष रूपिंदर सिंह कुन्नर ने कहा कि 56 इंच की छाती वाले प्रधानमंत्री ने अमेरिका के सामने घुटने टेक दिए हैं। इसका नतीजा अब देश में गैस सिलिंडर की भारी कमी के रूप में सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि इस समय शादी-ब्याह का सीजन चल रहा है, लेकिन लोग गैस सिलिंडर के लिए परेशान हैं और गैस एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण देशभर में यह संकट पैदा हुआ है। जिलाध्यक्ष ने कहा कि यह प्रदर्शन सरकार को चेतावनी देने के लिए किया गया है। अगर जल्द ही राजस्थान और देश में गैस की कीमतों और किल्लत को कम नहीं किया गया तो कांग्रेस उग्र आंदोलन करेगी। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए कलेक्ट्रेट के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। इस मौके पर एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष ईशानवीर सिंह मान, पूर्व विधायक राजकुमार, सूरतगढ़ विधायक डूंगरराम गेदर सहित कई कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।  

भाला फेंक में सुमित अंतिल का जलवा, 69.25 मीटर थ्रो से जीता स्वर्ण पदक

नई दिल्ली पैरा एथलीट सुमित अंतिम ने नई दिल्ली 2026 वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रैंड प्रिक्स के दूसरे दिन शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता। प्रतियोगिता में अन्य भारतीय एथलीट ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए पदक जीते। आज दिन का सबसे खास पल पुरुषों की जेवलिन थ्रो एफ 43/ एफ 44/ एफ64 थी, जिसमें पैरालंपिक चैंपियन सुमित अंतिल ने सभी भारतीयों के पोडियम को लीड किया। अंतिल ने 69.25 मीटर के दमदार थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि पुष्पेंद्र सिंह ने 56.91मी के साथ रजत और पूनम राम ने 49.48मी के साथ कांस्य पदक जीता। जीत के बाद, सुमित अंतिल ने कहा, “इस बार हमारे पास कई टूर्नामेंट हैं। मैं आने वाले कॉम्पिटिशन में अच्छा परफॉर्म करने की कोशिश करूंगा। यह मेरे लिए ऑफ-सीजन लोडिंग फेज है। मुझे ऐसे थ्रो की उम्मीद नहीं थी; मुझे लगभग 67–68मी की उम्मीद थी, लेकिन आज थ्रो 69.25मी पर अच्छा था। इसलिए मैं खुश हूं, और मेरी टीम भी खुश है।” उन्होंने कहा, “मैं अपनी टेक्निक नहीं बदल रहा हूं क्योंकि हम जानते हैं कि हम अपनी ट्रेनिंग में सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। अभी, हमें बस सही कंडीशन चाहिए जहां थ्रो बिल्कुल सही जगह पर हो। इसीलिए मैं टूर्नामेंट में हिस्सा ले रहा हूं ताकि मुझे कहीं न कहीं वे कंडीशन मिल सकें। मेरा टारगेट एशियन गेम्स हैं, और मेरा गोल 75m है। मैंने अभी तक प्रैक्टिस में इसे हासिल नहीं किया है, और किसी एथलीट ने अभी तक ऐसा नहीं किया है, लेकिन मैं उस मार्क तक पहुंचने के लिए टेक्निक या ताकत में जो भी सुधार हो सकते हैं, उन पर काम कर रहा हूं।” पुरुषों की 400 मीटर दौड़ टी 13 में भी भारत का दबदबा रहा, जिसमें सुबोध भट्ट ने 51.88 सेकंड में स्वर्ण जीता, उसके बाद प्रियांशु कौशिक ने 53.19 सेकंड में रजत और अवनिल कुमार ने 56.91 सेकंड में कांस्य पदक जीता। पुरुषों की 400 मी दौड़ टी 46/ टी 47 में, भाविककुमार दीन भरवाड़ ने 49.89 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण जीता, जबकि साथी भारतीय जसबीर 50.09 सेकंड में रजत पदक जीतने के लिए उनके ठीक पीछे रहे। सर्बिया के इवान क्वेतकोविक ने 50.93 सेकंड के साथ कांस्य पदक जीता। पुरुषों की 400 मी दौड़ टी53/ टी 54 की व्हीलचेयर कैटेगरी में भारत ने अपना दबदबा बनाए रखा, जिसमें मनोजकुमार सबपति ने 54.33 सेकंड में स्वर्ण, अनिल कुमार ने 57.57 सेकंड में रजत और मणिकंदन जोथी ने 1:01.94 के समय के साथ कांस्य पदक जीता। महिलाओं के इवेंट्स में भी भारतीय एथलीटों ने शानदार प्रदर्शन किया। महिलाओं की 400मी दौड़ टी 11/ टी12 में, तेजलबेन अमराजी डामोर ने 57.53 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण जीता, ललिता किलाका ने 1:07.92 के समय के साथ रजत जीता, और शालिनी चौधरी ने 1:16.79 के समय के साथ कांस्य पदक जीतकर एक और भारतीय पोडियम स्वीप पूरा किया। फील्ड इवेंट्स में, लक्ष्मी ने महिलाओं की शॉट पुट एफ 36/ एफ 37/ एफ 40 में 7.76 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण जीता, जबकि अकुताई सीताराम उलभगत ने 5.49मी. के साथ रजत और भूटान की चिमी डेमा ने 5.27मी. के साथ कांस्य जीता। भारत ने पुरुषों की लॉन्ग जंप टी 42/ टी 63 में भी पोडियम पर कब्जा किया, जिसमें शैलेश कुमार ने 5.47 मीटर की जंप के साथ स्वर्ण जीता, रामसिंहभाई गोविंदभाई पढियार ने 4.68मी के साथ रजत और सोलाईराज जगन्नाथन ने 3.23मी के साथ कांस्य पदक जीता। पुरुषों की शॉट पुट एफ46 में भी एक और क्लीन स्वीप हुआ, जहाँ रोहित कुमार ने 14.35 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण जीता, देवेंद्र सिंह गुर्जर ने 13.97मी. के साथ सिल्वर और लोकेश अकुला ने 10.92मी. के साथ कांस्य पदक जीता। भारत ने थ्रोइंग इवेंट्स में अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा, जिसमें साहिल सलीम सैय्यद ने पुरुषों की डिस्कस थ्रो एफ 51/एफ55 में 36.83 मीटर के साथ स्वर्ण जीता, इसके बाद सुखचैन ने रजत (30.49मी) और सुधीर ने कांस्य (28.78मी) जीता। पुरुषों की जेवलिन थ्रो एफ 12/ एफ 13 में, मनजीत ने 57.86 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण जीता, प्रतीक अमृतराव पाटिल ने 50.43मी के साथ रजत जीता, और इरफान दीवान ने 45.39मी के साथ कांस्य जीता, जिससे भारत के लिए एक और पोडियम स्वीप पूरा हुआ। पुरुषों की जेवलिन थ्रो एफ 40/ एफ41 में भी भारत का दबदबा रहा, जिसमें सुनील कुमार ने 32.58 मीटर के साथ स्वर्ण जीता, प्रिंस कुमार ने 31.23मी. के साथ रजत जीता, और कथिर धनसेकरन ने 18.73मी के साथ कांस्य जीता। दूसरे प्रदर्शनों में, मोहित पाल ने पुरुषों की 400मी. दौड़ टी 12 में 54.39 सेकंड के समय के साथ गोल्ड जीता, जबकि लकी यादव ने 1:04.27 के साथ रजत जीता। कॉम्पिटिशन के दौरान इंटरनेशनल एथलीटों ने भी प्रभावित किया। पुरुषों की 400मी. दौड़ टी-20 में, रूस ने तीनों पदक जीते, जिसमें सर्गेई मकारोव सबसे आगे रहे, जिन्होंने 49.20 सेकंड में स्वर्ण जीता। वहीं, रूस की नतालिया साईंचिना ने महिलाओं की 400मी दौड़ टी 20 में 1:00.52 सेकंड का समय लेकर स्वर्ण जीता।  

इंतजार खत्म होने वाला! राजस्थान बोर्ड 10वीं का रिजल्ट जल्द, rajeduboard.rajasthan.gov.in पर करें चेक

जयपुर rajeduboard.rajasthan.gov.in पर घोषित होने वाला है। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10वीं की परीक्षाएं 28 फरवरी को खत्म हो गई थी। अब कॉपी चेकिंग का काम तेजी से चल रहा है। बताया जा रहा है कि इस बार राजस्थान बोर्ड 10वीं का रिजल्ट (Rajasthan Board 10th Result 2026) काफी पहले जारी होगा। इस बार 10वीं का परिणाम 20 मार्च तक जारी होने की संभावना है। ऐसे में कुछ दिनों में 10 लाख स्टूडेंट्स का इंतजार खत्म होने वाला है। दरअसल अगले साल से 10वीं की बोर्ड परीक्षा साल में दो बार आयोजित होगी। पहली परीक्षा फरवरी और दूसरी परीक्षा मई में होगी। शासन सत्र को समय पर शुरू कराना चाहता है। बोर्ड सचिव गजेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार की मंशा के अनुसार परिणाम जल्द जारी करने की तैयारी की जा रही है, ताकि विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई की योजना बनाने में समय मिल सके। आरबीएसई 10वीं परीक्षा के लिए 1068078 स्टूडेंट्स परीक्षा के लिए पंजीकृत थे। 12वीं में 909087, प्रवेशिका परीक्षा में 7811 और वरिष्ठ उपाध्याय परीक्षा में 4122 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। वर्तमान में लगभग 30 हजार 915 शिक्षक उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य में लगे हुए हैं। बोर्ड का प्रयास है कि सभी प्रक्रियाएं पूर्ण कर 20 मार्च तक परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया जाए। नतीजों की घड़ी नजदीक आते ही स्टूडेंट्स के दिलों की धड़कनें भी तेज हो गई है। राजस्थान बोर्ड 10वीं रिजल्ट की घोषणा के साथ राज्य के करीब 10 लाख विद्यार्थियों का इंतजार खत्म होगा। विद्यार्थी उपरोक्त आरबीएसई वेबसाइट्स के अलावा लाइव हिंदुस्तान वेबसाइट livehindustan.com/career/results/rajasthan-board-result पर भी 10वीं का रिजल्ट चेक कर सकेंगे। राजस्थान बोर्ड 10वीं रिजल्ट अगले सप्ताह की शुरुआत में घोषित होने की संभावना है। राजस्थान बोर्ड, अजमेर परिणाम तैयार करने के काम में जुटा है। कैसे चेक करे राजस्थान बोर्ड 10वीं का परिणाम – सबसे पहले rajeduboard.rajasthan.gov.in पर जाएं। – Secondary Exam Result 2026 के लिंक पर क्लिक करें। – रिजल्ट पेज खुलने पर अपना रोल नंबर डालें। सब्मिट करें। – आपका रिजल्ट स्क्रीन पर आ जाएगा। इसका प्रिंट आउट लेना न भूलें। राजस्थान बोर्ड 10वीं 12वीं पासिंग मार्क्स नियम राजस्थान बोर्ड 10वीं 12वीं की परीक्षा देने वाले स्टूडेंट्स को पास होने के लिए हर विषय में कम से कम 33 फीसदी अंक हासिल करने होते हैं। एग्रीगेट मार्क्स भी कम से कम 33 प्रतिशत होने चाहिए। राजस्थान बोर्ड परीक्षा में 1 या 2 विषयों में 33 से कम अंक आने पर स्टूडेंट्स को सप्लीमेंट्री परीक्षा देने का मौका मिलेगा। मार्क्स से असंतुष्ट स्टूडेंट्स को स्क्रूटनी यानी मार्क्स रीवेरिफिकेशन के लिए भी आवेदन करने का मौका मिलेगा। जिनके दो से ज्यादा विषयों में 33 से कम मार्क्स आएंगे, वे फेल करार दिए जाएंगे। पिछले साल कैसा रहा था आरबीएसई 10वीं का रिजल्ट पिछले साल (2025) आरबीएसई 10वीं परीक्षा में कुल 93.60 फीसदी स्टूडेंट्स पास हुए थे। राजस्थान बोर्ड 10वीं परिणाम 2025 29 मई को आया था। लड़कों का पास प्रतिशत 93.16 फीसदी और लड़कियों का 94.08 फीसदी रहा था। राजस्थान बोर्ड 10वीं परीक्षा 2025 में शामिल हुए कुल 1071460 विद्यार्थियों में से 546370 विद्यार्थी फर्स्ट डिविजन में पास हुए, जबकि 376774 छात्र सेकेंड डिविजन से और 79519 विद्यार्थी थर्ड डिविजन से पास हुए थे। 10वीं रिजल्ट के बाद ऑरिजनल मार्कशीट कहां से मिलेगी राजस्थान बोर्ड के छात्रों को अपने संबंधित स्कूलों से आरबीएसई कक्षा 10वीं की ऑरिजनल मार्कशीट एकत्र करनी होगी। इन मार्कशीट का उपयोग उन्हें आगे करना होगा। रिजल्ट के दिन स्टूडेंट्स सिर्फ प्रोविजनल मार्कशीट ही डाउनलोड कर सकेंगे। राजस्थान बोर्ड कक्षा 10वीं के मार्कशीट में लिखी होंगी ये डिटेल्स- उम्मीदवार का नाम रोल नंबर माता पिता का नाम स्कूल का नाम विषय विषयवार अंक कुल अंक प्राप्त अंक ओवरऑल ग्रेड 12वीं का रिजल्ट इसी माह बोर्ड प्रशासन का प्रयास है कि 12वीं आट्‌र्स, साइंस व कॉमर्स का रिजल्ट भी मार्च में ही जारी कर दिया जाए। बोर्ड ने इसके लिए भी तैयारी शुरू कर दी है।

प्राकृतिक आपदाओं से मुकाबले में मदद, छत्तीसगढ़ को केंद्र से 15.70 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फंड

प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में केंद्र का अतिरिक्त सहयोग छत्तीसगढ़ को मिली 15.70 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता रायपुर  प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित राज्यों की मदद के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय समिति ने वर्ष 2025 के दौरान आई बाढ़, फ्लैश फ्लड, बादल फटने, भूस्खलन और चक्रवाती तूफान ‘मोन्था’ जैसी आपदाओं से प्रभावित राज्यों के लिए 1,912.99 करोड़ रुपये की अतिरिक्त केंद्रीय सहायता को मंजूरी दी है। इस निर्णय के तहत छत्तीसगढ़ को 15.70 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में केंद्र के इस अतिरिक्त सहयोग के लिए केंद्रीय गृह मंत्री का आभार माना है।                 केंद्र सरकार द्वारा यह सहायता राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) से जारी की जाएगी, ताकि प्रभावित राज्यों में राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके। समिति के निर्णय के अनुसार छत्तीसगढ़ को 15.70 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता स्वीकृत की गई है।               केंद्र सरकार ने कहा है कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भारत सरकार प्राकृतिक आपदाओं के समय राज्यों के साथ मजबूती से खड़ी है और हर संभव सहयोग प्रदान कर रही है। आपदा की स्थिति में प्रभावित राज्यों को त्वरित राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है।             गौरतलब है कि यह अतिरिक्त सहायता राज्यों को पहले से उपलब्ध कराए गए संसाधनों के अतिरिक्त है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान केंद्र सरकार ने राज्यों को आपदा प्रबंधन के लिए बड़ी राशि पहले ही जारी कर दी है। State Disaster Response Fund (SDRF) के तहत 28 राज्यों को 20,735.20 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जबकि National Disaster Response Fund (NDRF) के तहत 21 राज्यों को 3,628.18 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है।                  इसके अलावा आपदा जोखिम को कम करने और दीर्घकालिक सुरक्षा उपायों को मजबूत बनाने के लिए State Disaster Mitigation Fund (SDMF) से 23 राज्यों को 5,373.20 करोड़ रुपये तथा National Disaster Mitigation Fund (NDMF) से 21 राज्यों को 1,189.56 करोड़ रुपये भी जारी किए गए हैं।

MP में ऑनलाइन सिलेंडर बुकिंग बंद, सर्वर डाउन और वेटिंग बढ़ी; गैस की किल्लत बढ़ी

भोपाल मध्य प्रदेश में इन दिनों एलपीजी गैस सिलेंडर की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। सर्वर डाउन होने के कारण ऑनलाइन बुकिंग लगभग ठप हो गई है। इसके चलते भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर समेत प्रदेश के कई शहरों में लोग गैस सिलेंडर बुक नहीं कर पा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि बड़े शहरों में सिलेंडर की वेटिंग 7 से 8 दिन तक पहुंच गई है, जबकि छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है। गैस एजेंसियों और गोदामों के बाहर सुबह से शाम तक लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं। इस बीच कई जगहों से सिलेंडर की कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आ रही हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं की परेशानी और बढ़ गई है। एजेंसियों पर सुबह से लग जाती हैं कतारें  हालात यह हैं कि कई गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लग रही हैं और लोग सीधे एजेंसी पहुंचकर समाधान खोजने की कोशिश कर रहे हैं। इस समस्या का असर सिर्फ घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि होटल और रेस्टॉरेंट कारोबार भी इससे बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। प्रदेश में मोटे अनुमान के अनुसार लगभग 50 हजार होटल और रेस्टॉरेंट संचालित होते हैं, जिनमें से कई के सामने गैस खत्म होने की स्थिति बन गई है। बताया जा रहा है कि पिछले चार दिनों से कई व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को कॉमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति नहीं हो पाई है।  ऑनलाइन बुकिंग ठप, एजेंसियों पर बढ़ी भीड़ प्रदेश में गैस बुकिंग का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन माध्यम से होता है, लेकिन सर्वर में आई तकनीकी समस्या के कारण उपभोक्ता सिलेंडर बुक नहीं कर पा रहे हैं। भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों में भी गैस एजेंसियों पर लोगों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। कई उपभोक्ता सीधे एजेंसियों पर पहुंचकर बुकिंग और सिलेंडर की जानकारी लेने को मजबूर हैं। गैस वितरकों के अनुसार, सर्वर की समस्या के कारण सप्लाई चेन भी प्रभावित हुई है, जिससे वितरण में देरी हो रही है। भोपाल होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष तेजकुल पाल सिंह पाली के मुताबिक, भोपाल के करीब 2 हजार होटल-रेस्टॉरेंट को 4 दिन में एक भी सिलेंडर नहीं मिला। कई होटल्स ऐसे हैं, जहां पर 24 से 48 घंटे तक भी बमुश्किल निकल पाएंगे। एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि होटल, रेस्टॉरेंट, कॉलेज की कैंटीन को भी इमरजेंसी सेवा में शामिल किया जाए, क्योंकि भोपाल में ही करीब 2 लाख स्टूडेंट्स को यहां से भोजन मिलता है। उनके सामने बड़ी दिक्कत खड़ी हो जाएगी। अधिकांश और होटल-रेस्टॉरेंट ठप पड़े भोपाल होटल एसोसिएशन से जुड़े प्रतिनिधियों के अनुसार केवल भोपाल शहर में ही करीब दो हजार होटल और रेस्टॉरेंट को पिछले कुछ दिनों में एक भी सिलेंडर नहीं मिला है। ऐसे कई प्रतिष्ठान हैं, जहां उपलब्ध गैस स्टॉक अधिकतम एक या दो दिन ही चल पाएगा। स्थिति को देखते हुए होटल व्यवसायियों ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया है कि होटल, रेस्टॉरेंट और कॉलेज कैंटीन जैसी सेवाओं को आपातकालीन श्रेणी में रखा जाए, क्योंकि बड़ी संख्या में छात्र और अन्य लोग भोजन के लिए इन संस्थानों पर निर्भर रहते हैं।  कारोबारियों ने सीएम को बताई परेशानी इस संबंध में कारोबारी प्रतिनिधियों ने राज्य के सीएम डॉ. मोहन यादव से भी मुलाकात कर अपनी चिंता जाहिर की है। सीएम यादव ने समस्या के समाधान के लिए सकारात्मक आश्वासन दिया है। गैस की कमी के बीच लोग वैकल्पिक उपाय भी तलाशने लगे हैं। कई होटल और घरों में अब इंडक्शन चूल्हों और डीजल भट्ठियों का उपयोग बढ़ गया है। इस अचानक बढ़ी मांग का असर बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। भोपाल में इंडक्शन कुकर की बिक्री पहले की तुलना में कई गुना बढ़ गई है। जहां पहले रोजाना एक-दो ही इंडक्शन बिकते थे, अब इनकी बिक्री बहुत बढ़ गई है।   इंडक्शन के मूल्य में दिखी जबर्दस्त उछाल मांग बढ़ने के साथ ही इंडक्शन की कीमतों में भी उछाल देखने को मिल रहा है। कुछ समय पहले तक जो इंडक्शन लगभग 1800 से 2000 रुपये में मिल जाता था, उसकी कीमत अब 3500 रुपए या उससे अधिक तक पहुंच गई है। स्थानीय बाजार के साथ-साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी इनके दाम बढ़े हुए दिखाई दे रहे हैं। इस तरह एलपीजी बुकिंग में आई तकनीकी समस्या ने आम उपभोक्ताओं से लेकर होटल उद्योग तक सभी को प्रभावित किया है, जिससे प्रदेश में गैस आपूर्ति की स्थिति चर्चा का विषय बन गई है। होटल-रेस्टॉरेंट में गैस खत्म होने की स्थिति LPG संकट का सबसे ज्यादा असर होटल और रेस्टॉरेंट व्यवसाय पर पड़ा है। भोपाल होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष तेजकुल पाल सिंह पाली के अनुसार, शहर के करीब 2 हजार होटल और रेस्टॉरेंट को पिछले चार दिनों से एक भी कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिला है। उनका कहना है कि, कई होटल ऐसे हैं जहां सिर्फ 24 से 48 घंटे का ही गैस स्टॉक बचा है। अगर जल्द सप्लाई नहीं हुई तो होटल और रेस्टॉरेंट का संचालन प्रभावित हो सकता है। 2 लाख छात्रों के खाने पर संकट होटल और रेस्टॉरेंट एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि, होटल, रेस्टॉरेंट और कॉलेज कैंटीन को भी इमरजेंसी सेवाओं में शामिल किया जाए। एसोसिएशन का कहना है कि, भोपाल में करीब 2 लाख छात्र ऐसे हैं जो रोजाना होटल या कैंटीन से भोजन लेते हैं। अगर गैस की आपूर्ति बंद रही तो छात्रों के सामने भी भोजन की समस्या खड़ी हो सकती है। भोपाल और ग्वालियर में लंबा इंतजार राजधानी भोपाल में ऑनलाइन बुकिंग ठप होने के कारण एजेंसियों ने खुले मैदान से सिलिंडर वितरण शुरू कर दिया है। यहां पहले जहां रोज 200–300 सिलिंडर वितरित होते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर करीब 1500 से 2000 तक पहुंच गई है। उपभोक्ताओं को बुकिंग के बाद लगभग दस दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। ग्वालियर में पिछले तीन दिनों से फोन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से बुकिंग प्रभावित है। आठ मार्च को बुकिंग कराने वाले कई उपभोक्ताओं को अभी तक सिलिडर नहीं मिला है। इंडेन के डिस्ट्रीब्यूटर श्यामानंद शुक्ला के अनुसार सर्वर खराबी के कारण बुकिंग प्रभावित हुई है। वहीं एचपी के डिस्ट्रीब्यूटर प्रद्युम्न भदौरिया का कहना है कि घबराहट में बुकिंग अचानक … Read more

CM विष्णु ने किसानों के लिए बड़ा फैसला लिया, अफीम खेती और बिजली बिल राहत पर आदेश

रायपुर छत्तीसगढ़ में अफीम की खेती के रोज नए-नए केस सामने आ रहे हैं. पहले दुर्ग में अफीम की खेती का मामला सामने आया था. फिर बलरामपुर के कुसमी में अफीम की खेती पकड़ी गई. अब बलरामपुर के ही तुर्रापानी में दूसरी अवैध अफीम की खेती मिलने की जानकारी आई है. इससे राज्य में हड़कंप मच गया है. विपक्ष की तरफ से लगातार इस पर सवाल उठाए जा रहे हैं. इसी वजह से अब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसको लेकर सख्त रुख अपनाया है।  CM विष्णुदेव साय ने अपनाया कड़ा रुख मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ के सभी कलेक्टर्स को आदेश जारी किया है और उन्हें 15 दिनों के भीतर सर्वे रिपोर्ट देने को कहा है. उनकी तरफ से बताया गया है कि अवैध मादक पदार्थ को लेकर राज्य सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है. अवैध अफीम की खेती ना हो इसके लिए विस्तृत रिपोर्ट के साथ प्रमाण पत्र कलेक्टर सौंपेंगे।  मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना भी की शुरू इसके अलावा मुख्यमंत्री ने राजधानी रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना की शुरुआत की. यह योजना उन लोगों के लिए है, जो आर्थिक समस्याओं की वजह से बिजल का बिल नहीं चुका पाए. योजना के तहत लगभग 28 लाख 42 हजार उपभोक्ताओं को 757 करोड़ रुपये से अधिक की राहत मिलेगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली आज हर घर की आवश्यकता है और सरकार चाहती है कि किसी परिवार की रोशनी सिर्फ बिल बकाया होने के कारण बंद न हो।  बलरामपुर जिले के तुर्रापानी में दूसरी अवैध अफीम की खेती मिलने की जैसे ही सूचना मिली. पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया. बताया जा रहा है कि लगभग एक से डेढ़ एकड़ में अवैध अफीम की खेती मिली है. पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. जिले की संयुक्त टीम जांच में जुटी है।  दुर्ग में अफीम की खेती मामले में चौथा आरोपी हुआ गिरफ्तार अब राज्य प्रशासन अफीम की खेती को लेकर सतर्क हो गया है और पुलिस की तरफ से बड़ी कार्रवाई की जा रही है. दुर्ग में अफीम की खेती मामले में पुलिस ने चौथे आरोपी को राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया है. दुर्ग के ग्राम समोदा झेंझरी के मध्य खेत में अफीम की खेती की जा रही थी. लगभग 5 एकड़ 62 डिसमिल क्षेत्र में अफीम के पौधे लगाए थे. जब्त पौधों की कीमत करीब 8 करोड़ रुपए बताई जा रही है।   

बलरामपुर में अफीम की भारी खेप बरामद, मसाले के रूप में खेती की जा रही थी

बलरामपुर  छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के कोरंधा में पुलिस ने करीब ढाई एकड़ में लगी अफीम उखाड़कर जब्त की है। यहां से 285 बोरे अफीम के पौधे बरामद हुए, जिनका वजन 18 क्विंटल है। इनकी अनुमानित कीमत पौने दो करोड़ रुपए बताई जा रही है। मामला कोरंधा थाना क्षेत्र का है। दरअसल, बुधवार शाम को खजूरी गांव में अफीम की खेती का पता चला था। गुरुवार को प्रशासनिक अधिकारियों और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में फसल उखाड़कर जब्त की गई। तीन ट्रैक्टरों में 285 बोरे अफीम को कोरंधा थाना लाया गया। इस मामले में अफीम की खेती करने वाले 2 किसानों को हिरासत में लिया गया है। फिलहाल, हिरासत में लिए गए किसानों से पुलिस पूछताछ कर रही है। उनका कहना है कि वे अफीम को नहीं पहचानते थे। इस कारण उन्हें नहीं पता था कि यह गैर कानूनी है। जांच में सामने आया कि किसान ने हर साल 6 हजार रुपए देने की शर्त पर जमीन ली थी। बता दें कि कुसमी के बाद दूसरी बड़ी कार्रवाई है। झारखंड के मजदूर करते थे पहरेदारी अफीम की फसल दो किस्तों में बोई गई थी। इनमें सहादुर नगेशिया के खेत में लगी अफीम की फसल सूखने की कगार पर पहुंच चुकी है, उसके खेत में लगे अफीम के डोडों पर छह से सात चीरे लगे हुए मिले, जिससे स्पष्ट है कि उनसे काफी मात्रा में अफीम निकाली जा चुकी थी। टुईला राम के खेत में बोई गई अफीम की फसल में अभी डोडे लगे हुए हैं और कुछ पौधों में डोडे लग रहे हैं। कई डोडों में चीरा भी लगाया गया था और उनसे अफीम निकालने का काम किया जा रहा था। हालांकि, यहां से निकाली गई अफीम बरामद नहीं हो सकी है। दोनों किसानों ने बताया कि झारखंड के चार से पांच लोग अफीम की पहरेदारी सहित अन्य काम करते थे। खेतों में काम भी वही लोग करते थे। पुलिस के पहुंचने से पहले ही वे मौके से फरार हो गए। किसानों का कहना है कि वे अफीम की फसल को पहचानते नहीं थे, इसलिए उन्हें यह भी पता नहीं था कि इसकी खेती गैरकानूनी है। इसके अलावा अफीम की खेती के लिए पास के प्राकृतिक जल स्रोत से पानी खेतों तक पहुंचाया जाता था। इसके लिए पाइप लगाकर खेतों में सिंचाई की व्यवस्था की गई थी।

केजीबीवी में कई पदों पर वैकेंसी, महिलाओं से मांगे आवेदन

बलरामपुर उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में शिक्षा के क्षेत्र से जुड़कर समाज की बेटियों को सशक्त बनाने का एक बेहतरीन अवसर सामने आया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय, बलरामपुर ने जिले के विभिन्न कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों (KGBV) में शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ की भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की है। यह भर्ती विशेष रूप से महिला उम्मीदवारों के लिए है, जिसमें पीजीटी से लेकर रसोइया और चपरासी तक के कुल 51 पदों पर नियुक्तियां की जानी हैं। इन पदों पर चयन के माध्यम से न केवल रोजगार के अवसर मिलेंगे, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बालिकाओं की शिक्षा को भी नई दिशा मिलेगी। संविदा के आधार पर होगी नियुक्तियां और बढ़ेगा कार्यकाल बलरामपुर जिले के रेहरा बाजार, उतरौला और श्रीदत्तगंज ब्लॉकों में स्थित कस्तूरबा विद्यालयों के लिए ये नियुक्तियां पूरी तरह से संविदा (Contract) के आधार पर की जाएंगी। विज्ञापन के अनुसार, शुरुआत में यह अनुबंध 11 माह 29 दिन के लिए होगा। हालांकि, उम्मीदवार के कार्य प्रदर्शन और विद्यालय की आवश्यकताओं को देखते हुए इस कार्यकाल को हर साल नवीनीकृत या आगे बढ़ाया जा सकता है। यह उन महिलाओं के लिए एक शानदार शुरुआत हो सकती है जो शिक्षण या विद्यालय प्रशासन में अपना अनुभव बढ़ाना चाहती हैं। रिक्त पदों का विवरण और विषयों की जानकारी इस भर्ती प्रक्रिया के तहत कुल 51 रिक्तियों को भरा जाना है, जिनमें सबसे बड़ी संख्या पीजीटी (PGT) शिक्षकों की है। पीजीटी के लिए कुल 21 पद निर्धारित किए गए हैं, जिनमें हिंदी, अंग्रेजी, गणित, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और कंप्यूटर विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों के लिए 3-3 सीटें आवंटित हैं। इसके अलावा, लैब असिस्टेंट के 9 पद, कार्यालय अधीक्षक/लिपिक के 3 पद और केयरटेकर के 3 पद खाली हैं। विद्यालय के सुचारू संचालन के लिए रसोइया के 9 पदों और चपरासी व चौकीदार के कुल 6 पदों पर भी आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। योग्यता और वेतनमान का विस्तृत मानक विभिन्न पदों के लिए शैक्षणिक योग्यताएं अलग-अलग तय की गई हैं। पीजीटी पदों के लिए उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में स्नातकोत्तर (Post Graduation) की डिग्री होनी चाहिए, जिसके लिए 22,000 रुपये प्रति माह मानदेय दिया जाएगा। केयरटेकर पद के लिए स्नातकोत्तर के साथ बीएड (B.Ed.) होना अनिवार्य है और इसके लिए सबसे अधिक 24,200 रुपये का वेतन निर्धारित है। लैब असिस्टेंट के लिए विज्ञान वर्ग से 12वीं या 10वीं के साथ लैबोरेटरी टेक्निशियन में डिप्लोमा जरूरी है, जिसके लिए 7,147 रुपये मानदेय मिलेगा। लिपिक पद के लिए 12वीं पास होने के साथ कंप्यूटर सर्टिफिकेट और हिंदी-अंग्रेजी टाइपिंग में अच्छी गति होना अनिवार्य है, जिसका वेतन 12,430 रुपये है। वहीं, रसोइया, चपरासी और चौकीदार जैसे पदों के लिए न्यूनतम योग्यता केवल आठवीं पास रखी गई है। रसोइया को 6,433 रुपये और चपरासी/चौकीदार को 7,147 रुपये प्रति माह मानदेय के रूप में दिए जाएंगे। इन पदों के लिए आवेदन करने वाली महिला उम्मीदवारों की आयु 01 अप्रैल 2025 को न्यूनतम 25 वर्ष और अधिकतम 45 वर्ष के बीच होनी चाहिए, जबकि आरक्षित वर्गों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी। चयन प्रक्रिया मेरिट और साक्षात्कार पर आधारित बलरामपुर के इन विद्यालयों में चयन की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शिता पर आधारित होगी। अधिकांश पदों के लिए चयन शैक्षणिक योग्यता में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार की गई मेरिट सूची और उसके बाद होने वाले साक्षात्कार (Interview) के जरिए किया जाएगा। हालांकि, रसोइया, चपरासी और चौकीदार जैसे चतुर्थ श्रेणी के पदों के लिए चयन सीधे साक्षात्कार के आधार पर होगा। इस पूरी भर्ती प्रक्रिया की सबसे अच्छी बात यह है कि किसी भी वर्ग की महिला उम्मीदवार को कोई भी आवेदन शुल्क नहीं देना होगा, यानी आवेदन पूरी तरह से निशुल्क है। आवेदन भेजने की विधि और महत्वपूर्ण तिथि इच्छुक और योग्य महिला उम्मीदवारों को अपना आवेदन ऑफलाइन माध्यम से भेजना होगा। सबसे पहले अभ्यर्थी जिले की आधिकारिक वेबसाइट balrampur.nic.in से आवेदन पत्र का प्रारूप डाउनलोड करें और उसे सही-सही भरें। भरे हुए फॉर्म के साथ अपनी शैक्षणिक योग्यता, अनुभव, जाति प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की स्वप्रमाणित फोटोकॉपी संलग्न करें। इस पूरे आवेदन पैकेट को ‘कार्यालय, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, बलरामपुर, यूपी’ के पते पर केवल रजिस्टर्ड डाक या स्पीड पोस्ट के माध्यम से ही भेजें। ध्यान रहे कि आवेदन पत्र स्वीकार होने की अंतिम तिथि 18 मार्च 2026 है। इसके बाद प्राप्त होने वाले आवेदनों या अन्य किसी माध्यम (जैसे ईमेल या साधारण डाक) से भेजे गए आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते अपना आवेदन भेज दें ताकि डाक विभाग की देरी से बचा जा सके।  

सलकनपुर मेले में गैस संकट, घरेलू सिलेंडर पर बैन और कमर्शियल गैस की भारी कमी

सलकनपुर  जिले के सलकनपुर स्थित प्रसिद्ध विजयासन देवी मंदिर में आगामी चैत्र नवरात्रि मेले को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्थाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सख्त निर्देश जारी किए हैं। मौजूदा गैस संकट को देखते हुए मेला स्थल और मंदिर परिसर में घरेलू गैस सिलिंडर के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। वहीं कमर्शियल गैस सिलिंडर की सीमित उपलब्धता के कारण मेले में दुकान लगाने वाले व्यापारियों की मुश्किलें भी बढ़ती नजर आ रही हैं।  जिला कलेक्टर बालागुरू के. ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मेला क्षेत्र में किसी भी होटल, दुकान या प्रतिष्ठान में घरेलू गैस सिलिंडर का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन का कहना है कि भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में ज्वलनशील पदार्थों से दुर्घटना की आशंका को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। यदि किसी दुकान या होटल में घरेलू गैस सिलिंडर का उपयोग पाया गया तो उसे जब्त कर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही दुकानों में अग्नि सुरक्षा के मद्देनजर छोटे अग्निशमन यंत्र रखना भी अनिवार्य किया जाएगा। गैस संकट से बढ़ी परेशानी वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण एलपीजी आपूर्ति पर भी असर देखने को मिल रहा है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि एलपीजी की आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर घरेलू उपभोक्ताओं को दी जाए। इसके चलते कमर्शियल सिलिंडरों की उपलब्धता सीमित हो गई है। इस स्थिति का असर नवरात्रि मेले में दुकान लगाने वाले व्यापारियों पर भी पड़ रहा है। खाना बनाने और अन्य कार्यों के लिए उन्हें वैकल्पिक ईंधन की तलाश करनी पड़ रही है। बाजार में इन दिनों डीजल भट्टी की मांग बढ़ गई है, जिसकी कीमत करीब 12 से 15 हजार रुपये तक बताई जा रही है। कई व्यापारी इंडक्शन चूल्हा, इलेक्ट्रिक हीटर और लकड़ी की भट्टी जैसे विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं। स्थानीय व्यापारी अरविंद मालवीय और पंकज शर्मा का कहना है कि गैस सिलिंडर की कमी के कारण मेले में कारोबार करना मुश्किल हो सकता है। उनका कहना है कि पहले से ही बाजार में मंदी का माहौल है और ऐसे में गैस संकट से मेले का व्यापार प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। मेले की तैयारियां तेज चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू हो रही है। इस दौरान सलकनपुर स्थित विजयासन देवी मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने मेले की तैयारियां तेज कर दी हैं। कलेक्टर बालागुरू के. और पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार शुक्ला ने सलकनपुर पहुंचकर अधिकारियों की बैठक ली और मेला व्यवस्था को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश दिए। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में प्रवेश और निकास के अलग-अलग मार्ग, पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों की तैनाती की योजना बनाई गई है। इसके साथ ही स्वास्थ्य सुविधाओं को भी प्राथमिकता दी जा रही है। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में हेल्थ कैंप लगाए जाएंगे, जहां डॉक्टर और चिकित्सा स्टाफ मौजूद रहेगा। आपात स्थिति के लिए एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। श्रद्धालुओं की सहायता के लिए प्रमुख स्थानों पर हेल्प डेस्क और कंट्रोल रूम भी स्थापित किए जाएंगे। 

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