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बजट 2026: इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, PM E-Drive स्कीम को मिले 1,500 करोड़ रुपये

 नईदिल्ली  इस बार के बजट को लेकर जहां आम आदमी इस बात से निराश है, उसे कुछ ख़ास नहीं मिला. वहीं कुछ सेक्टर को राहत भी मिली है. बजट 2026 में सरकार ने साफ कर दिया है कि EV सिर्फ भविष्य की बात नहीं, बल्कि आज की जरूरत है. पीएम ई-ड्राइव (PM E-DRIVE) योजना को एक बार फिर बजट में तगड़ा सपोर्ट मिला है. 1,500 करोड़ रुपये का नया ऐलान बताता है कि सरकार अब इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को धीमे नहीं, बल्कि पूरी रफ्तार से आगे बढ़ाना चाहती है. केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 में इलेक्ट्रिक वाहन सेक्टर को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. वित्त वर्ष 2027 के लिए सरकार ने पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत 1,500 करोड़ रुपये का ऐलान किया है. यह योजना देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मांग बढ़ाने और लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर प्रेरित करने में अहम भूमिका निभा रही है. बजट दस्तावेजों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में पीएम ई-ड्राइव योजना के लिए 993 करोड़ रुपये दिए गए थे. वहीं वित्त वर्ष 2026 में इसका बजट अनुमान 4,000 करोड़ रुपये रखा गया था, जिसे बाद में रिवाइज़्ड कर के 1,300 करोड़ रुपये कर दिया गया. अब वित्त वर्ष 2027 के लिए सरकार ने 1,500 करोड़ रुपये का आवंटन किया है. PM E-Drive ने किया FAME को रिप्लेस बता दें कि, 10,900 करोड़ रुपये की पीएम ई-ड्राइव योजना की शुरुआत 1 अक्टूबर 2024 में हुई थी. इस योजना ने पहले चल रही फेम योजना (FAME Scheme) को रिप्लेस किया था. जिसे आमतौर पर लोग फेम सब्सिडी भी कहते हैं. इसके तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया, ट्रक, बस और एंबुलेंस की खरीद पर सब्सिडी दी जाती है. इसके साथ ही देशभर में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को डेवलप करने पर भी जोर दिया जा रहा है. सरकार द्वारा दी जाने वाली इस सब्सिडी से इलेक्ट्रिक वाहनों की अपफ्रंट कीमत कम हो जाती है. जिससे खरीदार पर कम बोझ पड़ता है. अब नई राशि के प्रावधान के साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों के खरीदारों को बड़ी राहत मिलेगी. सरकार चाहती है कि, इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति लोगों का रूझान बढ़े और लोग पारंपरिक (पेट्रोल-डीजल) वाले वाहनों के बजाय ईवी की तरफ मुखर हो. किस व्हीकल कैटेगरी में कितना फंड कुल बजट में से 2,679 करोड़ रुपये इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए रखे गए हैं. इलेक्ट्रिक बसों के लिए 4,391 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इलेक्ट्रिक ट्रक और इलेक्ट्रिक एंबुलेंस के लिए 500-500 करोड़ रुपये तय किए गए हैं. इसके अलावा देशभर में पब्लिक ईवी चार्जिंग स्टेशन डेवलप करने के लिए 2,000 करोड़ रुपये का फंड अलग से रखा गया है. 30 दिसंबर तक इस योजना के तहत कुल 21.24 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों को सब्सिडी दी जा चुकी है. खास बात यह है कि L5 कैटेगरी के इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों का टार्गेट तय समय से पहले ही पूरा कर लिया गया है. 26 दिसंबर 2025 को 2.88 लाख यूनिट का टार्गेट हासिल होने के बाद इलेक्ट्रिक तिपहिया L5 वाहनों पर सब्सिडी बंद कर दी गई है. 30 दिसंबर 2025 तक 18.40 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को सब्सिडी दी गई, जबकि इस स्कीम का कुल टार्गेट 24.79 लाख यूनिट का है. वहीं ई-रिक्शा और ई-कार्ट की बात करें तो 39,034 यूनिट के टार्गेट के मुकाबले अब तक 5,267 वाहनों को सब्सिडी दी जा चुकी है. हाल ही में सरकार ने पीएम ई-ड्राइव योजना की अवधि दो साल बढ़ाकर मार्च 2028 तक कर दी है. हालांकि इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों पर मिलने वाली सब्सिडी को 31 मार्च 2026 तक धीरे-धीरे खत्म करने की योजना है. चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए हाल ही में दिशानिर्देश जारी किए गए थे, लेकिन अभी तक इसके तहत प्रोत्साहन राशि नहीं बांटी गई है. योजना के तहत 22,100 फास्ट चार्जर चारपहिया वाहनों के लिए, 1,800 चार्जर इलेक्ट्रिक बसों के लिए और 48,400 चार्जर दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए लगाए जाने का टार्गेट है. इसके लिए 2,000 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है. इलेक्ट्रिक वाहनों की स्लो डिमांड के पीछे एक बड़ा कारण चार्जिंग इंफ्रा भी है. ज्यादातर नए वाहन खरीदार सिर्फ इस बात से EV खरीदने से कतराते हैं क्योंकि उनका मानना है कि, देश में चार्जिंग इंफ्रा उस स्तर की नहीं है. दूसरी ओर रेंज एंजॉयटी भी एक बड़ा कारण है.  

योगी सरकार ने चल-अचल संपत्ति छुपाने वाले कर्मचारियों के वेतन पर लगाई रोक

लखनऊ   राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद 68,236 राज्यकर्मियों ने अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण अब तक घोषित नहीं किया है। इस लापरवाही के चलते इन कर्मचारियों को जनवरी माह का वेतन फरवरी में नहीं मिलेगा। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल के आदेशानुसार सभी राज्यकर्मियों को 31 जनवरी तक मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा अपलोड करना अनिवार्य था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने समयसीमा का पालन नहीं किया, जिससे यह संकेत मिलता है कि उन्हें वेतन रोके जाने की कोई चिंता नहीं है। सरकार अब और कड़े कदम भी उठा सकती है मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति विवरण अपलोड न करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सरकार अब और कड़े कदम भी उठा सकती है। योगी आदित्यनाथ सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के तहत राज्यकर्मियों की संपत्ति का विवरण जुटाने को लेकर प्रशासन पूरी तरह गंभीर है। उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के नियम-24 के तहत प्रदेश के कुल 8,66,261 राज्यकर्मियों को वर्ष 2025 तक की अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण 31 जनवरी तक पोर्टल पर देना अनिवार्य था। इसके लिए विभागों के नोडल अधिकारी और आहरण-वितरण अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि जो कर्मचारी तय समयसीमा तक विवरण अपलोड न करें, उनका वेतन रोक दिया जाए। इन सभी का वेतन रोका जाएगा  रात तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, संपत्ति विवरण न देने वालों में सबसे अधिक 34,926 तृतीय श्रेणी के कर्मचारी हैं। इसके अलावा 22,624 चतुर्थ श्रेणी, 7,204 द्वितीय श्रेणी और 2,628 प्रथम श्रेणी के अधिकारी शामिल हैं। वहीं ‘अन्य’ श्रेणी के 1,612 कर्मचारियों में से 854 ने भी संपत्ति का विवरण नहीं दिया है। इन सभी का वेतन रोका जाएगा।  

मंच पर सिंधिया के सामने ही BJP MLA ने कर दी पूर्व CM कमलनाथ की तारीफ, जानिए आखिर क्या हुआ

BJP MLA praised former CM Kamal Nath on stage in front of Scindia, find out what happened. अशोकनगर । केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने उस वक्त विचित्र स्थिति बन गई जब बीजेपी विधायक काम के लिए पूर्व सीएम कमलनाथ की तारीफ कर दी। बीजेपी विधायक जगन्नाथ रघुवंशी ने महाराज के सामने ही कह दिया कि आप भी कमलनाथ की तरह एक ट्रेन चलवा दीजिए। दरअसल केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने संसदीय क्षेत्र के दौरे पर हैं। इसी कड़ी में वो सोमवार को अशोकनगर जिले में दिव्यांग जनों के लिए सहायक उपकरण वितरण कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस दौरान वाक्या पेश आया। मंच से भाजपा विधायक ने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के काम की तारीफ कर की। सिंधिया के सामने आग्रह करते हुए कहा कि एक ट्रेन दिल्ली से लिए चलवा दीजिए, यही हमारे लिए बड़ी सौगात होगी। अशोकनगर की गहन दिशा बैठक के दौरान केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जिले के समग्र विकास, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जनसेवा की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई, पेयजल, अधोसंरचना, रोजगार, उद्योग और नगरीय विकास से जुड़ी योजनाओं की वस्तुस्थिति पर चर्चा हुई तथा विभिन्न विभागों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए। चंदेरी विधायक जगन्नाथ सिंह रघुवंशी कमलनाथ के काम के हुए मुरीदकेंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिव्यांगों को ट्राई साइकिल, इलेक्ट्रिक गाड़ी, व्हीलचेयर, कृत्रिम अंग वितरण किए । इसी बीच चंदेरी के भाजपा विधायक जगन्नाथ सिंह रघुवंशी ने अचानक मंच पर कमलनाथ की तारीफ कर दी। रघुवंसी ने कहा कि कांग्रेस के एक पूर्व मुख्यमंत्री हैं कमलनाथ जी, अपने क्षेत्र से एक ट्रेन छिंदवाड़ा से दिल्ली के लिए चलवाई थी।

नई ड्यूटी नियमावली: 75,000 रुपये से अधिक कीमत वाले सामान पर यात्रियों को देना होगा शुल्क

नई दिल्ली बीते एक फरवरी को आम बजट में कई ऐसे ऐलान हुए हैं। बजट-डे पर एक अहम ऐलान लगेज यानी सामान को लेकर हुआ है। केंद्र सरकार ने भारत में ‘ड्यूटी फ्री’ आयातित सामान लाने की लिमिट बदल दी है। ड्यूटी फ्री लगेज की लिमिट पहले के मुकाबले बढ़ाई गई है। पहले यह 50,000 रुपये था जिसे अब बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब 75 हजार रुपये से ज्यादा के सामान पर ड्यूटी चार्ज लगेगा। बता दें कि सरकार ने सामान नियम, 2026 को नोटिफाई किया है। इसके तहत भारत में भूमि मार्ग के अलावा किसी भी अन्य मार्ग से आने वाले भारतीय नागरिकों या भारतीय मूल के पर्यटकों को 75,000 रुपये तक का ड्यूटी फ्री सामान लाने की अनुमति होगी। कितने आभूषण लाने की होगी छूट नये नियम दो फरवरी की मध्यरात्रि से प्रभावी हो जाएंगे और एक दशक पुराने सामान संबंधी नियम की जगह लेंगे। नये नियमों के तहत भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों (शिशु को छोड़कर) को 25,000 रुपये तक के मूल्य का ‘ड्यूटी फ्री’ सामान लाने की इजाजत होगी। पहले यह सीमा नियम के तहत 15,000 रुपये थी। इसके अलावा, जो भारतीय नागरिक या भारतीय मूल के लोग एक साल से अधिक समय से विदेश में रह रहे हैं, उनके लिए गहनों (ज्वेलरी) को लेकर अलग नियम बनाए गए हैं। 40 ग्राम तक की ज्वैलरी बिना ड्यूटी लाने की इजाजत भारत लौटने पर महिला यात्री 40 ग्राम तक की ज्वैलरी बिना ड्यूटी ला सकती हैं। वहीं, पुरुष यात्री (या महिला के अलावा अन्य) 20 ग्राम तक की ज्वैलरी बिना ड्यूटी ला सकते हैं। यह ज्वैलरी यात्री के वैध सामान का हिस्सा होनी चाहिए। ज्वैलरी में सोना, चांदी, प्लेटिनम या अन्य कीमती धातुओं से बने आभूषण शामिल हैं, चाहे उनमें रत्न जड़े हों या नहीं। सरकार का कहना है कि बैगेज नियम, 2026 आज के समय में बढ़ती यात्रा और लोगों की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं।

संघ और दिल्ली से मंथन के बाद MP में नियुक्तियों की बड़ी सूची, निगम-मंडलों में होगी जल्द बदलाव

भोपाल  मध्यप्रदेश में लंबे समय से अटकी पड़ी राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर अब बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। निगम–मंडलों, प्राधिकरणों और आयोगों में नियुक्तियों की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। सत्ता और संगठन ने दिल्ली के निर्देश पर नामों की विस्तृत सूची तैयार कर ली है, जिस पर संघ से भी मंथन किया जा चुका है। सूत्रों के मुताबिक सूची दिल्ली भेज दी गई है और वहां से हरी झंडी मिलते ही नियुक्ति आदेश जारी किए जाने की तैयारी है। दरअसल, विधानसभा और लोकसभा चुनाव को करीब दो साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक राजनीतिक नियुक्तियां नहीं होने से पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही थी। इस असंतोष को देखते हुए जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में 12 प्रमुख निगम मंडलों, प्राधिकरणों और आयोगों में नियुक्तियों की योजना बनाई गई थी। नाम भी तय हो गए थे, लेकिन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव की घोषणा के चलते प्रक्रिया बीच में ही अटक गई। दिल्ली का साफ संदेश—छोटी नहीं, बड़ी सूची लाओ सूत्र बताते हैं कि नियुक्तियों में हो रही देरी की शिकायत भोपाल से लेकर दिल्ली तक पहुंची। इसके बाद दिल्ली से साफ संदेश आया कि अब 10–12 नामों से काम नहीं चलेगा, बल्कि एकमुश्त बड़ी सूची भेजी जाए ताकि अधिकतर निगम मंडलों, प्राधिकरणों और आयोगों में एक साथ नियुक्तियां की जा सकें। सीएम हाउस में हुई मैराथन बैठक राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास पर मैराथन बैठक हुई, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित संगठन और सरकार के कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे। बैठक में निगम–मंडलों और प्राधिकरणों के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पदों के लिए प्रस्तावित नामों पर गहन चर्चा के बाद सूची को अंतिम रूप दिया गया।अब सबकी निगाहें दिल्ली से मिलने वाली अंतिम मंजूरी पर टिकी हैं। जैसे ही हरी झंडी मिलेगी, मध्यप्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों का लंबा इंतजार खत्म हो जाएगा और सत्ता–संगठन में नई ऊर्जा का संचार होगा।  

शम्भूलाल का संघर्ष और सफलता: दृष्टिहीन होते हुए भी हासिल किया पोस्ट मास्टर का पद

 आगर मालवा जीवन में जब मुसीबतें आती हे तो कई हिम्मत वाले इंसान भी अपना हौसला खो देते हैं. मगर हम आज आपको एक ऐसे युवा की कहानी बताने जा रहे हैं, जिसने अपने ऊपर आने वाली कठिनाइयों से ना सिर्फ लड़ाई की बल्कि वो सब कर दिखाया. जिसे देखकर हर कोई दंग है. युवक के इस हिम्मत की आसपास के क्षेत्र में भी चर्चा हो रही है.  दरअसल हम बात कर रहे हैं आगर मालवा जिले के ग्राम महुड़िया निवासी युवक शम्भूलाल विश्वकर्मा की. शम्भूलाल दृष्टिहीन हैं. उन्हें केवल एक या दो इंच की दूरी से ही दिखाई देता है. बस शम्भूलाल इसी से अपना काम चलाता है. शम्भूलाल इतनी दूरी से देखकर ही पोस्ट ऑफिस के सारे काम कर लेते हैं. मां भी दृष्टिहीन और पिता भी लकवाग्रस्त मोबाइल चलाना भी इनके लिए जैसे बाए हाथ का खेल है. इतनी ही दूरी से मोबाइल में लॉगिन करना, पासवर्ड डालना आदि सभी काम शम्भूलाल कर लेते हैं. शम्भूलाल बेहद ही गरीब परिवार से आते हैं. उनके पिता भी लकवाग्रस्त हैं. जिसके कारण वे पलंग पर लेटे-लेटे अपना जीवन गुजार रहे हैं. शम्भूलाल की मां भी जन्म से दृष्टिहीन हैं और वो भी अपने घर का काम किसी तरह करती हैं. शम्भूलाल को जितना भी समय मिलता है वे अपने पिता के पास बैठकर पिता का हौसला बढ़ाते हैं और मां के काम में भी थोड़ा हाथ बढ़ाते हैं. शम्भूलाल गांव में ही पढ़ाई करते थे. मगर परिवार की स्थिति के चलते उन्होंने जिला मुख्यालय पर आकर पढ़ाई करने का निर्णय लिया. पहले शम्भूलाल एक स्कूल में पढ़ने गए, मगर वहां उनके अनुरूप पढ़ाई नहीं थी. फिर शम्भूलाल आगर मालवा के एक निजी स्कूल में पढ़ाई करने गए. 10वीं में मिले 87 प्रतिशत अंक और फिर लगी नौकरी यहां उन्होंने बारहवीं तक पढ़ाई की. आश्चर्य की बात यह थी की शम्भूलाल ने दसवीं की परीक्षा में 87% अंक अर्जित किए. इसी दौरान स्कूल के अध्यापक ने शम्भूलाल को बताया कि दृष्टिहीन लोगों के लिए पोस्ट ऑफिस में भर्ती निकली है. जिसके बाद शम्भूलाल ने इस भर्ती के लिए आवेदन किया और उनका चयन हो गया. शम्भूलाल जिले के बाहर नौकरी करते थे. वहां अन्य सहयोगियों की मदद से एक गरीब कन्या से उनका विवाह भी हो गया और अब शम्भूलाल के घर एक छोटा सा बच्चा भी है. शम्भूलाल ने अपनी सोच और मेहनत से अपनी जिंदगी बदल दी व पोस्ट मास्टर बन गए.

MP हाईवे पर 21 करोड़ खर्च, फिर भी हर दिन 33 दुर्घटनाएं और 10 जानें जाती हैं, हादसों का सिलसिला नहीं थम रहा

भोपाल. मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों को बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार पानी की तरह पैसा बहा रही है। बावजूद इसके नेशनल हाईवेज की जमीनी हकीकत आज भी डरावनी है। लोकसभा में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से पेश किए गए ताजा आंकड़ों ने एक चौंकाने वाला विरोधाभास उजागर किया है।  प्रदेश में जहां हाईवे के रखरखाव और विकास पर हर दिन औसतन 21 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। आंकड़ों की मानें तो एमपी के हाईवे पर हर दिन औसतन 33 सड़क हादसे हो रहे हैं, जिनमें रोजाना 10 से 11 लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। पांच साल में खर्च हुए 38 हजार 700 करोड़ सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार, साल 2020-21 से लेकर 2024-25 तक MP में हाईवे के विकास और मरम्मत के लिए कुल 38 हजार 700 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। इसका मतलब है कि सरकार हर साल औसतन 7 हजार 740 करोड़ राष्ट्रीय राजमार्गों के चौड़ीकरण, डवलपमेंट और सुरक्षा कार्यों पर खर्च कर रही है। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद सड़कों पर सुरक्षित सफर की गारंटी नहीं मिल पा रही है। लोकसभा में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के लिखित उत्तर से सामने आया है कि मध्य प्रदेश में हर दिन औसतन करीब ₹21 करोड़ हाईवे मेंटेनेंस और विकास पर खर्च हो रहे हैं , इसके बावजूद रोजाना औसतन 33 सड़क हादसे हुए और 10 से 11 लोग अपनी जान गवां रहे हैं। हर साल कितना खर्च हो रहा है? सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार 2020-21 से 2024-25 तक कुल हाइवे मेंटेनेंस व विकास बजट (MP): लगभग ₹38,700 करोड़ यानी औसतन ₹7,740 करोड़ हर साल है। सरकार के मुताबिक यह राशि राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव, चौड़ीकरण, उन्नयन और सड़क सुरक्षा पर खर्च की गई। 12 हजार से ज्यादा हादसे हर साल लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों को देखें तो एमपी में 2021 से लेकर 2025 तक पांच सालों में 61,176 दुर्घटनाएं हुई और इन हादसों में 19,416 मौतें हुईं। हर साल औसतन एमपी में 12,235 हादसे हो रहे हैं और 3,883 मौतें प्रति वर्ष हो रहीं हैं। हर दिन ₹21 करोड़ खर्च, फिर चूक कहां? केंद्र सरकार के अनुसार यह बजट सड़क चौड़ीकरण, मरम्मत व रखरखाव, सुरक्षा कार्य, और नई परियोजनाओं पर खर्च किया गया। बीते पांच साल में मध्य प्रदेश को 4,000 किमी से ज्यादा राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं भी सौंपी गईं। इसके बावजूद हादसों की संख्या यह सवाल खड़ा करती है कि क्या मेंटेनेंस की गुणवत्ता, हाइवे डिजाइन और सुरक्षा इंतजाम जमीन पर उतने प्रभावी हैं? सरकार ने गिनाईं वजहें लोकसभा में दिए जवाब में मंत्रालय ने हादसों के लिए तेज रफ्तार, लापरवाही, ओवरलोडिंग, सड़क व वाहन की स्थिति को जिम्मेदार बताया। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लैक स्पॉट सुधार, साइनज, लाइटिंग, सर्विस रोड और निगरानी पर खर्च की वास्तविक असरदार मॉनिटरिंग भी जरूरी है। डेवलपमेंट और मेंटेनेंस पर खर्च हुई राशि(करोड़ रुपए) वर्ष खर्च 2020–21 8,250 2021–22 9,006 2022–23 6,210 2023–24 7,447 2024–25 7,799 पांच साल में 19 हजार से ज्यादा मौतें लोकसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच मध्य प्रदेश के हाईवे पर कुल 61 हजार 176 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन हादसों ने प्रदेश को गहरे जख्म दिए हैं। इनमें 19 हजार 416 लोगों की मौत हो गई। अगर इसका सालाना औसत निकालें, तो प्रदेश में हर साल 12 हजार 235 हादसे हो रहे हैं। साथ ही 3 हजार 883 लोग काल के गाल में समा रहे हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि करोड़ों के निवेश के बाद भी हाईवे डेथ ट्रैप बने हुए हैं। मध्य प्रदेश: राष्ट्रीय राजमार्ग दुर्घटना रिपोर्ट (2021-2025) साल कुल हादसे (Total Accidents) कुल मौतें (Total Deaths) 2021 11,030 3,389 2022 13,860 4,025 2023 14,561 4,476 2024 13,937 4,644 2025 7,788 2,882 कुल (Total) 61,176 19,416 करोड़ों के खर्च के बाद चूक कहां? केंद्र सरकार का दावा है कि बीते पांच सालों में मध्य प्रदेश को चार हजार किलोमीटर से ज्यादा लंबी नई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं सौंपी गईं। बजट का बड़ा हिस्सा सुरक्षा इंतजामों और मरम्मत पर खर्च हुआ। लेकिन हादसों की बढ़ती संख्या ने मेंटेनेंस की गुणवत्ता और हाईवे डिजाइन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि क्या साइन बोर्ड, लाइटिंग और सर्विस रोड जैसे सुरक्षा इंतजाम कागजों से उतरकर जमीन पर प्रभावी रूप से लागू हो पा रहे हैं?  

Budget 2026 में एमपी के रेलवे नेटवर्क को 7500 करोड़ का समर्थन, इस मंडल को मिलेगा विशेष गिफ्ट

ग्वालियर देश के आम बजट के साथ रेलवे का बजट (Railway Budget 2026) भी पेश किया गया है। इसमें रेल मुसाफिरों की सुरक्षा पर फोकस रहा है। रेल हादसों को रोकने के लिए मुख्य रेल मार्गों पर कवच (ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम) लगाने के काम को तेज किया जाएगा। रेल अधिकारियों का कहना है इससे रेल एक्सीडेंट की आशंका को काफी हद तक खत्म किया जाएगा। इसके अलावा रेल बजट में इस बार गेज कन्वर्जन की राशी को 4284 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 4600 करोड़ रुपए किया है और सिग्नलिंग और टेलीकॉम सिस्टम को पुख्ता करने के लिए 7500 रुपए खर्च होंगे। इसमें कवच सुरक्षा भी शामिल है। क्या है ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम रेल अधिकारियों का कहना है ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम एक आधुनिक कवच प्रणाली है। इस पर करीब 2012 से प्रयोग चल रहा है। इसे अनुसंधान, अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) ने तैयार किया है। इससे रेल दुर्घटनाओं की गिनती में कमी आएगी। पिंक बुक से सामने आएंगी सौगातें ग्वालियर, आगरा, झांसी, सहित दूसरे स्टेशन को रेल बजट में क्या सौगात मिली है इसका खुलासा पिंक बुक के जारी होने पर सामने आएगा। रेल अधिकारियों के मुताबिक पिंक बुक 2 फरवरी को जारी किए जाने की उम्मीद है। झांसी मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंहका कहना है पिंक बुक जारी होने पर पता चलेगा कि एनसीआर को कितना बजट मिला है इसमें ग्वालियर को क्या सहूलियतें मिलीं हैं। मिलेगा फायदा, यह भी उम्मीद     केंद्र सरकार ने बजट में 20 हजार से अधिक पशु डॉक्टरों की उपलब्धता की बात है। जिले में पशु चिक्तिसकों की काफी कमी है। स्थिति यह है कि प्रदेश की सबसे गोशाला में भी पशु नहीं है,ऐसे में जिले को भी डॉक्टर मिलने से काफी फायदा मिलेगा।     वीजीएफ/पुंजीगत सहायता के माध्यम से प्रत्येक जिले में एक महिला छात्रावास बनाया जाएगा। इससे जिले को महिला छात्रावास मिल सकेगा।     बजट में 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 महाविद्यालयों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर प्रयोगशालाओं की स्थापना होगी। इसमें जिले में भी दो माध्यमिक विद्यालयों व एक महाविद्यालयों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर प्रयोगशालाएं खोलने की उम्मीद है।     ग्वालियर जिले में भी उच्च शिक्षा एसटीईएम संस्थानों में महिला छात्रावास बनाया जाएगा। 

C+1 फॉर्मूला: भारत का बड़ा कदम, रेड कारपेट पर स्वागत, यही बनेगा सोने की चिड़ीया का भविष्य

नई दिल्ली ज‍ियोपॉल‍िट‍िक्‍स में अब खेल इकोनॉमी के जर‍िये खेला जा रहा है. आपको याद होगा, जब कोव‍िड आया तो पूरा का पूरा सप्‍लाई चेन ह‍िलने लगा. यूक्रेन संकट ने आग में घी का काम क‍िया.दुन‍िया को समझ नहीं आया क‍ि अब जाएं तो जाएं कहां.ज‍िन देशों के साथ वे कारोबार कर रहे थे,वे फंस चुके थे. रही सही कसर अमेर‍िकी टैर‍िफ ने पूरी कर दी. अब दुन‍िया को डर लग रहा क‍ि अगर चीन पर अमेर‍िकी सख्‍ती बढ़ी, ताइवान पर हमला हुआ तो मुश्क‍िल होगी. इसल‍िए ज्‍यादातर देश ‘चीन + 1’ (C+1) फार्मूला अपना रहे हैं. भारत यह भांप चुका है. इसील‍िए बजट में सरकार ने ऐसे देशों, ऐसी कंपन‍ियों के ल‍िए रेड कारपेट ब‍िछा द‍िए हैं. मोबाइल, लैपटॉप और सेमीकंडक्टर बनाने वाली कंपनियों को टैक्स में छूट दी गई है. ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के लिए नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम को बजट से ताकत दी है ताकि विदेशी कंपनियां चीन छोड़कर भारत आएं. मैसेज साफ है क‍ि अगर ताइवान या चीन में संकट आता है, तो भारत दुनिया की बैकअप फैक्ट्री बनने के ल‍िए पूरी तरह तैयार है. और यहीं से फ‍िर सोने की च‍िड़‍िया बनने का रास्‍ता खुलेगा. 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने का एक्सप्रेसवे दुनिया की 40% मैन्युफैक्चरिंग पर चीन का कब्जा है. यहीं से पूरी दुन‍िया में जरूरत की बहुत सारी चीजें जा रही हैं. लेकिन साल 2026 ‘टर्निंग पॉइंट’होने जा रहा है. शी जिनपिंग की विस्तारवादी नीतियों और ब्लैक बॉक्स जैसी अर्थव्यवस्था से तंग आकर ग्लोबल कंपनियां अब एक ऐसे देश की तलाश में हैं, जो न केवल लोकतांत्रिक हो बल्कि जिसके पास चीन को टक्कर देने वाला स्केल भी हो.भारत ने इसी ‘चीन प्लस वन’ (C+1) मौके को भुनाने के लिए अपना ‘रेड कारपेट’ बिछा दिया है. यह सिर्फ एक नीति नहीं, बल्कि 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने का वह एक्सप्रेसवे है जो भारत को फिर से ‘विश्व गुरु’ की गद्दी पर बैठाएगा. दुनिया को आखिर भारत की जरूरत क्यों है?     सप्लाई चेन का वेपनाइजेशन: कोरोना काल में चीन ने मेडिकल सप्लाई रोककर दुनिया को अपनी ताकत दिखाई. दुनिया समझ गई कि एक ही सप्लायर पर निर्भर रहना आत्मघाती है. अब एपल (Apple) और सैमसंग (Samsung) जैसी कंपनियों को अपनी सुरक्षा के लिए भारत जैसा भरोसेमंद पार्टनर चाहिए.     बूढ़ा होता चीन: चीन की वर्किंग पॉपुलेशन तेजी से घट रही है. वहां मजदूरी महंगी हो गई है. दूसरी ओर, भारत के पास 65% युवा आबादी है, जो अगले 30 साल तक दुनिया को सबसे सस्ती और कुशल लेबर दे सकती है.     ताइवान का साया: दुनिया की 90% एडवांस चिप्स ताइवान में बनती हैं. चीन की ताइवान पर नजर ने वैश्विक टेक कंपनियों को डरा दिया है. उन्हें एक ऐसा ‘बैकअप’ चाहिए जो युद्ध की स्थिति में भी ग्लोबल सप्लाई चेन को चालू रख सके. चीन की राह रुकी, तो भारत को कैसे होगा बंपर फायदा?     इलेक्ट्रॉनिक्स का नया गढ़: बजट 2026 में मोबाइल और लैपटॉप कंपोनेंट्स पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाना एक सोची-समझी चाल है. भारत अब केवल असेंबली नहीं, बल्कि कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग का हब बन रहा है. 2025 तक भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट 120 बिलियन डॉलर पार करने का अनुमान है.     सेमीकंडक्टर: चीन की दुखती रग: चीन चिप वॉर में अमेरिका से पिछड़ रहा है. भारत ने इसका फायदा उठाते हुए 1.5 लाख करोड़ रुपये का ‘सेमीकंडक्टर मिशन’ शुरू किया है. टाटा और माइक्रोन (Micron) जैसी कंपनियों के प्लांट भारत को उस लिस्ट में खड़ा कर देंगे, जहाँ आज केवल ताइवान और चीन हैं.     केमिकल सेक्टर में ‘प्रिवी’ जैसे खिलाड़ियों का दबदबा: चीन में पर्यावरण नियमों की सख्ती के कारण वहां के केमिकल प्लांट बंद हो रहे हैं. इसका सीधा फायदा प्रिवी स्पेशलिटी और आरती इंडस्ट्रीज जैसी भारतीय कंपनियों को मिल रहा है, जो ग्लोबल सप्लाई चेन में चीन की जगह ले रही हैं. कंपनियों को क्या मिल रहा है? PLI स्कीम: जितना बनाओगे, उतना पैसा पाओगे. 14 से ज्यादा सेक्टरों में सरकार कंपनियों को कैश इंसेंटिव दे रही है. यह चीन की सब्सिडी का भारतीय जवाब है. नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम: पहले भारत में जमीन से लेकर बिजली तक के लिए 50 दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे. अब एक ही पोर्टल पर सारी क्लीयरेंस मिल रही है. ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ अब केवल कागजों पर नहीं, जमीन पर दिख रहा है. इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश: बजट 2026 में इंफ्रास्ट्रक्चर पर 11.11 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है. पीएम गतिशक्ति के तहत नए पोर्ट्स और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बन रहे हैं, ताकि भारत से माल भेजना चीन से भी सस्ता पड़े.

जबलपुर में 300 करोड़ का फ्लाईओवर बनेगा, MP बजट में जाम को कम करने की दिशा में बड़ा कदम

 जबलपुर   जबलपुर शहर के गढ़ा क्षेत्र में त्रिपुरी चौक, मेडिकल तिराहा और मेडिकल कॉलेज के सामने रोजाना लगने वाले भीषण जाम से राहत दिलाने के लिए लगभग ढाई से तीन किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर के निर्माण की तैयारी की जा रही है। लोक निर्माण विभाग की ओर से इसका प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। राज्य सरकार के बजट (MP Budget 2026) में स्वीकृति मिलने की स्थिति में यह जबलपुर शहर का सातवां फ्लाईओवर होगा। इस फ्लाईओवर के बन जाने से गढ़ा, त्रिपुरी चौक और मेडिकल क्षेत्र के रहवासियों को रोजाना लगने वाले जाम से बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही ए्बुलेंस, फायर ब्रिगेड सहित अन्य इमरजेंसी सेवाओं को भी जाम में फंसना नहीं पड़ेगा। ऐसा हो सकता है फ्लाईओवर का स्वरूप करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित इस फ्लाईओवर (Flyover Construction) की एक रैंप आईसीएमआर के सामने उतारे जाने की संभावना है, जबकि दूसरा रैंप सूपाताल क्षेत्र में बनाया जा सकती है। इसके अतिरिक्त साइड रैंप संजीवनी नगर और धनवंतरी नगर चौराहा की ओर उतारे जाने की योजना है। इससे मेडिकल मार्ग पर यातायात का दबाव काफी हद तक कम होगा और मरीजों, डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ व मेडिकल छात्रों को सुगम आवागमन मिलेगा। वर्तमान में त्रिपुरी चौक से पंडा की मढिय़ा होते हुए इमरती तालाब और गंगा नगर तिराहा तक प्रतिदिन जाम की स्थिति बनी रहती है। इस मार्ग से गुजरने वाली 40 से अधिक कॉलोनियों के रहवासी लंबे समय से यातायात अव्यवस्था से परेशान हैं। दो फ्लाईओवर चालू, एक निर्माणाधीन शहर में मदनमहल-दमोहनाका और कटंगा फ्लाईओवर पहले ही चालू हो चुके हैं, जबकि सगड़ा फ्लाईओवर निर्माणाधीन है। पेंटीनाका फ्लाईओवर का काम रक्षा विभाग से एनओसी मिलते ही शुरू होना है। बंदरिया तिराहासा ईं मंदिर फ्लाईओवर को पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है, वहीं विजयनगर-धनवंतरी नगर फ्लाईओवर को बजट की मंजूरी मिलना बाकी है। इसके अलावा रेलवे पुल नंबर-2 से रद्दी चौकी फ्लाईओवर का प्राकलन तैयार किया जा रहा है और आईएसबीटी से आईटीआई फ्लाईओवर परियोजना पाइपलाइन में है, जिसके लिए केन्द्रीय रिजर्व निधि से फंड मिलना प्रस्तावित है। इन सबके बीच गढ़ा क्षेत्र में प्रस्तावित फ्लाईओवर शहर का सातवां फ्लाईओवर होगा।

उज्जैन के सप्त सागरों की स्थिति पर एनजीटी का सख्त रुख, पर्यावरणीय संकट को लेकर उठाई आवाज

उज्जैन उज्जैन की धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यावरणीय पहचान माने जाने वाले ‘सप्त सागर’ लगातार उपेक्षा, अतिक्रमण और प्रदूषण का शिकार हो रहे हैं। इस गंभीर स्थिति पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाते हुए मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव को सीधे दखल देने को कहा है। ट्रिब्यूनल ने साफ कहा है कि आदेशों की अवहेलना और पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सेंट्रल जोन बेंच के न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि स्थानीय प्रशासन न तो पूर्व आदेशों का समुचित पालन कर पाया और न ही समय पर संतोषजनक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि पर्यावरण संरक्षण जैसे संवेदनशील मामलों में प्रशासनिक शिथिलता गंभीर परिणाम ला सकती है। अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई सुनवाई में सामने आया कि खसरा नंबर 1281 में दर्ज गोवर्धन सागर (कुल रकबा 36 बीघा) के 18.5 बीघा से अधिक हिस्से पर अवैध कब्जा हो चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस भूमि पर किसी भी न्यायालय का कोई स्टे नहीं है, इसके बावजूद अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। आगामी सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए एनजीटी ने शासन-प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि सप्तसागर के संरक्षण और पुनर्जीवन का कार्य मिशन मोड में किया जाए। ट्रिब्यूनल ने प्रमुख सचिव (पर्यावरण) को मासिक निगरानी कर रिपोर्ट पेश करने और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सभी सात सागरों के पानी की गुणवत्ता की जांच कर हेल्थ रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। पवित्र सरोवर बने नालियां आवेदक प्रशांत मौर्य और बाकिर अली रंगवाला की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने माना कि उज्जैन के रुद्रसागर, पुष्कर सागर, क्षीरसागर, गोवर्धन सागर, रत्नाकर सागर, विष्णु सागर और पुरुषोत्तम सागर, सभी की हालत दयनीय हो चुकी है। उज्जैन मास्टर प्लान-2021 के संदर्भ में ट्रिब्यूनल ने गंभीर टिप्पणियां करते हुए कहा कि तालाबों को कचरा डंपिंग यार्ड में तब्दील कर दिया गया है। शहर का अनुपचारित सीवेज सीधे इन जल निकायों में प्रवाहित हो रहा है। अवैध निर्माणों और गंदे पानी के कारण जल गुणवत्ता बेहद खराब हो चुकी है, जिससे स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं। जारी रहेगी सुनवाई एनजीटी ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई 20 फरवरी 2026 को होगी, जिसमें कलेक्टर और नगर निगम को की गई कार्रवाई की विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। अगली सुनवाई में प्रशासन को यह बताना होगा कि जमीनी स्तर पर आखिर क्या बदला। संकेत साफ है कि महाकाल की नगरी में आस्था के साथ अब पर्यावरणीय जवाबदेही भी कसौटी पर है। एनजीटी ने गेंद पूरी तरह शासन-प्रशासन के पाले में डाल दी है। एनजीटी के मुख्य निर्देश ये     अतिक्रमण हटाना : खसरा नंबर 1281 (गोवर्धन सागर) सहित सभी सातों सागरों से तत्काल और पूर्ण अतिक्रमण हटाने के निर्देश।     सीवेज पर पूर्ण रोक : बिना उपचारित (अनट्रीटेड) गंदा पानी और सीवेज किसी भी जल निकाय में बहाने पर पूरी तरह रोक।     मुख्य सचिव की सीधी भूमिका : राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश कि वे स्वयं हस्तक्षेप कर कलेक्टर और नगर निगम से प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित कराएं।     मासिक निगरानी तंत्र : प्रमुख सचिव (पर्यावरण) हर महीने प्रगति की निगरानी कर रिपोर्ट ट्रिब्यूनल में पेश करेंगे।     जल गुणवत्ता की जांच : मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सभी सात सागरों के पानी के नमूने लेकर हेल्थ रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश।     अनुपालन रिपोर्ट अनिवार्य : कलेक्टर और नगर निगम को 20 फरवरी 2026 की अगली सुनवाई से पहले की गई कार्रवाई की विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।  

फिर 5200 करोड़ रूपए कर्ज ले रही मोहन सरकार, सिर्फ एक वित्तीय वर्ष में ले चुकी 62,300 करोड़

Mohan Bhagwat government is taking another ₹5,200 crore loan, having already borrowed ₹62,300 crore in just one financial year. Mohan Government : मोहन सरकार एक बार फिर 5200 करोड़ का कर्ज ले रही है। साल 2026 में सरकार दूसरी बार ऋण लेने जा रही है। जबकि चालू वित्तीय वर्ष में ये कर्ज 57,100 करोड़ लिया जा चुका हैं। इस तरह नया कर्ज मिलाकर इसी चालू वर्ष में कुल 62,300 करोड़ रुपए का हो जाएगा। Mohan Government :मध्य प्रदेश की मोहन सरकार एक बार फिर 5200 करोड़ का कर्ज लेने जा रही है। साल 2026 में सरकार दूसरी बार ऋण लेने जा रही है। जबकि चालू वित्तीय वर्ष में ये कर्ज 57,100 करोड़ लिया जा चुका हैं। इस तरह नया कर्ज लेने के बाद अब ये इसी चालू वर्ष में कुल 62,300 करोड़ रुपए का हो जाएगा। बता दें कि, राज्य सरकार साल 2026 में ही दूसरी बार कर्ज ले रही है। इस बार 7 फरवरी को 5200 करोड़ की राशि मिलेगी, जिसकी पहली किस्त 1200 करोड़ रुपए 7 साल के लिए ब्याज समेत भुगतान की तारीख 4 फरवरी 2033 तारीख की है। 2000 करोड़ का कर्ज 17 साल के लिए लिया जा रहा है जो 4 फरवरी 2043 तक के लिए है। जबकि, तीसरी किस्त 2000 करोड़ रुपए 22 साल की अवधि में ब्याज के साथ चुकता किया जाएगा। सिर्फ एक चालू वर्ष में ही 62,300 करोड़ कर्जआपको बता दें कि, मध्य प्रदेश सरकार ने चालू वित्त वर्ष में 57,100 करोड़ का कर्ज ले चुकी है। 5200 करोड़ का कर्ज लेने के बाद यह आंकड़ा 62,300 करोड़ रुपए पहुंच जाएगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 में कब-कब लिया गया कर्ज

3 फरवरी राशिफल: ग्रह-नक्षत्रों के योग से चमकेगी इन राशियों की किस्मत

मेष राशि- मेष राशि वालों के लिए समय कुल मिलाकर ठीक रहने वाला है। काम करने का मन बना रहेगा और आप चीज़ों को अपने तरीके से आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे। हालांकि जल्दबाजी में कोई फैसला लेने से बचना जरूरी है, वरना छोटी सी बात बिगड़ सकती है। घर में माहौल सामान्य रहेगा और किसी करीबी का साथ आपको राहत देगा। पैसों के मामले में स्थिति ठीक रहेगी, लेकिन फालतू खर्च से बचना समझदारी होगी। सेहत सामान्य रहेगी, बस थकान हो तो आराम जरूर करें। वृषभ राशि- वृषभ राशि वालों के लिए धैर्य रखना सबसे जरूरी रहेगा। जो काम काफी समय से अटके पड़े हैं, उनमें अब धीरे-धीरे हलचल दिख सकती है। मेहनत रंग लाएगी, बस बीच में हिम्मत न हारें। पैसों की स्थिति संतुलित रहेगी, जरूरतें पूरी होंगी। घर-परिवार का माहौल शांत रहेगा और अपनों के साथ समय बिताने से मन हल्का होगा। खाने-पीने में लापरवाही न करें। मिथुन राशि- मिथुन राशि वालों के लिए बातचीत और लोगों से जुड़ना फायदेमंद रहेगा। काम से जुड़ी कोई नई जिम्मेदारी या जानकारी मिल सकती है। दिमाग तेज चलेगा और आप चीज़ों को जल्दी समझ पाएंगे। पैसों को लेकर ज्यादा तनाव नहीं रहेगा, लेकिन बेवजह खर्च करने से बचें। रिश्तों में साफ बात करेंगे तो गलतफहमियां दूर होंगी। खुद को जरूरत से ज्यादा बिजी न रखें। कर्क राशि- कर्क राशि वालों का मन थोड़ा भावुक रह सकता है। छोटी-छोटी बातें आपको ज्यादा सोचने पर मजबूर कर सकती हैं। परिवार का साथ मिलेगा और घर का माहौल आपको संभाले रखेगा। काम की रफ्तार थोड़ी धीमी रह सकती है, लेकिन चिंता की बात नहीं है। खर्च सोच-समझकर करें। नींद और आराम पूरा न होने पर चिड़चिड़ापन हो सकता है। सिंह राशि- सिंह राशि वालों पर काम की जिम्मेदारी बढ़ सकती है। लोग आपसे उम्मीद लगाएंगे और आपकी बातों को ध्यान से सुनेंगे। मेहनत का फायदा मिलेगा, बस अहंकार से बचें। पैसों में सुधार के संकेत हैं, लेकिन खर्च भी साथ-साथ बढ़ सकता है। घर में किसी बात पर बहस से बचें। सेहत सामान्य रहेगी, लेकिन तनाव न पालें। कन्या राशि- कन्या राशि वालों के लिए प्लान बनाकर चलना फायदेमंद रहेगा। काम में ध्यान देंगे तो अच्छे नतीजे मिलेंगे। जो लोग नौकरी या पढ़ाई में हैं, उनके लिए समय ठीक है। पैसों में संतुलन बना रहेगा और थोड़ी बचत भी हो सकती है। घर के लोग साथ देंगे। सेहत के मामले में लापरवाही न करें, छोटी दिक्कत भी बढ़ सकती है। तुला राशि- तुला राशि वालों को हर मामले में बैलेंस बनाकर चलना पड़ेगा। काम और घर दोनों को साथ संभालना होगा। कोई पुराना काम पूरा हो सकता है, जिससे राहत मिलेगी। पैसों की स्थिति सामान्य रहेगी। रिश्तों में सामने वाले की बात समझने की कोशिश करें। मन को शांत रखने के लिए खुद को थोड़ा समय दें। वृश्चिक राशि- वृश्चिक राशि वालों की मेहनत लोगों को दिखेगी। काम में भरोसा बढ़ेगा और किसी काम की तारीफ भी मिल सकती है। पैसों से जुड़ी कोई अच्छी खबर मिल सकती है। रिश्तों में बात साफ रखें, मन में कुछ न रखें। ज्यादा सोचने से बचें, वरना बेवजह तनाव बढ़ेगा। धनु राशि- धनु राशि वालों के लिए कुछ नया सीखने और आगे बढ़ने का समय है। काम में नए मौके मिल सकते हैं या नई योजना बन सकती है। खर्च थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन हालात संभाल में रहेंगे। घर का माहौल सहयोग वाला रहेगा। कहीं आने-जाने या यात्रा की बात भी बन सकती है। सेहत ठीक रहेगी। मकर राशि- मकर राशि वालों को जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ना होगा। काम में स्थिरता रहेगी और धीरे-धीरे चीजें आपके पक्ष में आती दिखेंगी। पैसों को लेकर सतर्क रहना जरूरी है, उधार देने से बचें। घर की कोई जिम्मेदारी बढ़ सकती है। थकान महसूस हो तो खुद को आराम दें। कुंभ राशि- कुंभ राशि वालों के दिमाग में नए आइडिया आते रहेंगे। काम में बदलाव या कुछ नया करने का मन बनेगा। पैसों की स्थिति धीरे-धीरे सुधर सकती है। दोस्तों या जान-पहचान वालों से मदद मिलेगी। सेहत के लिए रोज़ का रूटीन ठीक रखना जरूरी रहेगा। मीन राशि- मीन राशि वालों का मन थोड़ा संवेदनशील रह सकता है। काम में रफ्तार धीमी रहेगी, लेकिन सब ठीक चलता रहेगा। खर्च जरूरत के हिसाब से करें। परिवार के लोग भावनात्मक सहारा देंगे। खुद को जरूरत से ज्यादा थकाने से बचें और आराम को समय दें।

PDA की राजनीति ढोंग, असली एजेंडा परिवारवाद : मुख्यमंत्री योगी

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के ‘पीडीए’ नारे पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि विपक्षी दल को ‘पीडीए’ से ज्यादा ‘परिवार’ की चिंता है। योगी ने तंज कसते हुए कहा, “पीडीए तो बहाना है, असली लक्ष्य तो ‘परिवार’ है…!” मुख्यमंत्री ने केंद्रीय बजट में पीडीए को नजरअंदाज करने के सपा प्रमुख के आरोप पर सवाल उठाते हुए कहा, “जो लोग यह दावा करते हैं, उनसे यह पूछा जाना चाहिए कि जब सरकार ने उत्तर प्रदेश के छह करोड़ लोगों सहित पूरे देश में 25 करोड़ लोगों को गौरव और सम्मान के साथ आगे बढ़ने में मदद की, तो उनके कार्यकाल में ऐसा क्यों नहीं हो सका? पीडीए का मुद्दा तब भी जरूर रहा होगा।” उन्होंने कहा, “मैं पूछना चाहता हूं कि उस समय पीडीए पर चर्चा क्यों नहीं हुई? अपनी पार्टी (सपा) के शासनकाल में उन्हें (अखिलेश को) सिर्फ परिवार की ही चिंता क्यों थी?” योगी समेत भाजपा के शीर्ष नेताओं ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर वंशवादी राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को परिवार के रूप में देखने का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। हमारा मुख्य उद्देश्य गरीबों, युवाओं और किसानों की सहायता करना है। हमारा लक्ष्य उच्च श्रेणी की अवसंरचना सुनिश्चित करना है, जो आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से बनाई गई है।” मुख्यमंत्री ने कहा, “यह दृष्टिकोण बजट में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है, लेकिन दूरदृष्टिहीन लोग, भविष्य की कोई योजना न रखने वाले लोग ऐसी निरर्थक बातों में उलझे रहते हैं।” योगी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता व कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा बजट की आलोचना को भी खारिज कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए बढ़ाए गए आवंटन से उत्तर प्रदेश को मदद मिलेगी, जो देश में रक्षा विनिर्माण का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि इससे राज्य के साथ-साथ निवेशकों को भी लाभ होगा। योगी ने कहा कि केंद्रीय बजट के आधार पर प्रदेश सरकार फरवरी में बजट प्रस्तुत करेग और डबल इंजन सरकार के इस बजट का लाभ देश की सबसे बड़ी आबादी को प्राप्त होगा।

मौसम पूर्वानुमान में क्रांति: NVIDIA के AI से 500 गुना तेजी से मिलेगा तूफान का अलर्ट

मौसम का सटीक अनुमान लगाने के लिए वैज्ञानिक अलग-अलग तकनीकों का इस्‍तेमाल करते हैं। भविष्‍य में आर्टिफ‍िशियल इंटेलिजेंस यानी AI इस काम में भी मददगार होगा। AI की मदद से तूफान की भविष्‍यवाणी और सटीकता से की जाएगी जिससे जानमाल का नुकसान कम करने में मदद मिलेगी। यह सब संभव होगा दिग्‍गज कंपनी एनवीड‍िया (Nvidia) के नए एआई मॉडल से, जिसका नाम Earth-2 है। कहा जा रहा है कि सुपरकंप्‍यूटर से भी फास्‍ट इन एआई मॉडलों की मदद से मौसम भी भविष्‍यवाणी और जलवायु परि‍वर्तन का अनुमान लगाना पूरी तरह से बदल सकता है। इनमें से कुछ का इस्‍तेमाल शुरू भी हो गया है। क्‍या है Earth-2 दुनिया की दिग्‍गज टेक कंपनी एनवीड‍िया ने Earth-2 नाम से एआई मॉडलों को पेश किया है। इन मॉडलों में CorrDiff, FourCastNet3, Medium Range, Nowcasting, Global Data Assimilation और PhysicsNeMo जैसे फ्रेमवर्क शामिल हैं। इनमें से PhysicsNeMo को AI-फिजिक्स मॉडलों को ट्रेनिंग देने और उन्हें बेहतर बनाने के लिए लाया गया है। ये सभी मॉडल- सैटेलाइट और रडार व मौसम स्‍टेशनों से मिली जानकारी को एक जगह इंटीग्रेट करके हमारे वायुमंडल की स्‍थि‍त‍ि का सटीक आकलन करते हैं। जेनरेट‍िव एआई का इस्‍तेमाल Earth-2 एआई मॉडलों के कई फ्रेमवर्क जेनरेट‍िव एआई का इस्‍तेमाल करते हैं। इससे भविष्‍यवाणी करना ज्‍यादा फास्‍ट हो जाता है। दावा है कि मौजूदा तकनीक से 500 गुना फास्‍ट यह एआई मॉडल मौसम की भविष्‍यवाणी कर सकते हैं। अलग-अलग मॉडलों के अलग-अलग काम Earth-2 एआई मॉडलों में जितने भी फ्रेमवर्क हैं, उनके अलग-अलग काम हैं। टेक रडार की रिपोर्ट के अनुसार, CorrDiff फ्रेमवर्क, जनरेटिव AI आर्किटेक्चर का इस्‍तेमाल करके महाद्वीप के लेवल से जुड़े अनुमानों को रीजनल अनुमानों में बदल देता है। इसी तरह से FourCastNet3 का काम हवा, टेंपरेचर और नमी का सटीक अनुमान लगाना है। दावा है कि यह ट्रेड‍िशनल मॉडल से 60 गुना तेज भविष्‍यवाणी करता है। इसी तरह से PhysicsNeMo मॉडल का काम AI-फिजिक्स मॉडलों को ट्रेन करना है। रिपोर्ट के अनुसार, मौसम की भविष्‍यवाणी करने वाले संगठनों और वैज्ञानिक रिसर्च, दोनों के लिए यह उपयोगी है। इसके आगे सुपरकंप्‍यूटर भी फेल Earth-2 इतना एडवांस और होशियार है कि यह वायुमंडल में हो रहे बदलावों को चंद सेकंड में भांप लेता है। इस काम को करने में सुपरकंप्‍यूटरों को घंटों लग जाते हैं। अगर किसी बदलाव को कुछ सेकंड में भांप लिया जाए तो लोगों तक अलर्ट जल्‍दी भेजा जा सकता है। एनवीड‍िया के कुछ फ्रेमवर्क का इस्‍तेमाल कई देशों के मौसम विभाग पहले से कर रहे हैं। इस्राइल में हो रहा इस्‍तेमाल इस्राइल की मौसम बताने वाली सर्विस में CorrDiff का उपयोग किया जा रहा है। जैसाकि हमने बताया, यह महाद्वीप स्‍तर होने वाली हलचलों को से क्षेत्रीय आकलन करके एक अनुमान बना देता है। इस्राइल बहुत जल्‍द Nowcasting को भी अपनाने वाला है, जिसके बाद एक द‍िन में 8 बार मौसम की भविष्‍यवाणी हाई-रेजॉलूशन ग्राफ‍िक्‍स से की जा सकेगी। इस्राइल के अलावा, ताइवान के मौसम विज्ञानी भी एनवीड‍िया के कई फ्रेमवर्क्‍स को इस्‍तेमाल कर रहे हैं।

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