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मध्य प्रदेश सरकार पार्वती, कालीसिंध और चंबल (पीकेसी) परियोजना के तहत प्रदेश में 22 बांध बनाएगी

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार पार्वती, कालीसिंध और चंबल (पीकेसी) परियोजना के तहत प्रदेश में 22 बांध बनाएगी। इससे मध्य प्रदेश के चंबल और मालवा क्षेत्र के 13 जिलों को लाभ मिलेगा। इससे मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, भिंड और श्योपुर में पानी की उपलब्धता बढ़ेगी। औद्योगिक क्षेत्र वाले जिलों इंदौर, उज्जैन, धार, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास और राजगढ़ के औद्योगीकरण को बढ़ावा मिलेगा। पहले चरण में 13 बांध और दूसरे चरण में नौ बांध बनाए जाएंगे। दोनों चरणों का काम एक साथ किया जाएगा। इसको लेकर जल्द ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समीक्षा बैठक करेंगे। बता दें, मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच हुए समझौते के अनुसार पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना में कुंभराज काम्प्लेक्स, सीएमआरएस कॉम्प्लेक्स, लखुंदर बैराज, रणजीत सागर परियोजना तथा ऊपरी चंबल कछार में सात सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण होगा। 90 फीसदी राशि देगी केंद्र सरकार मध्य प्रदेश में इसके तहत गांधी सागर बांध की अपस्ट्रीम में चंबल, शिप्रा और गंभीर नदी पर प्रस्तावित छोटे बांधों का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना में 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार देगी और अपनी-अपनी सीमा में बनने वाले प्रोजेक्ट की लागत का सिर्फ 10 प्रतिशत मध्य प्रदेश और राजस्थान देंगे। परियोजना पांच वर्ष के भीतर पूरी होगी। इसकी लागत लगभग 75 हजार करोड़ रुपये है। इसमें मध्य प्रदेश में 35 हजार करोड़ रुपये के निर्माण कार्य करवाए जाएंगे। पार्वती-कालीसिंध और चंबल परियोजना में हम राजस्थान सरकार की तुलना में बांध बनाने के कार्य में थोड़ा पीछे हैं, लेकिन जल्द ही मध्य प्रदेश में बांध बनाने का काम शुरू होगा। अगले पांच साल में परियोजना का काम पूरा कर लिया जाएगा। – राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री कार्यालय लाखों किसानों का बदलेगा जीवन पार्वती, कालीसिंध और चंबल नदियों के जल बंटवारे में बांध बनने के बाद पीकेसी परियोजना से दोनों राज्यों के लाखों किसानों का जीवन बदलेगा। इस निर्णय से पर्यटन और उद्योग क्षेत्र में भी विकास के नए द्वार खुलेंगे। पेयजल की समस्या दूर होगी। सिंचाई क्षमता बढ़ेगी। नदियों के जल बंटवारे के निर्णय से पूर्वी राजस्थान और उत्तरी मध्य प्रदेश के जिले लाभान्वित होंगे। केंद्र सरकार के सहयोग से महत्वपूर्ण निर्णय होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने नदी जोड़ो अभियान प्रारंभ किया था। वर्ष 2003 में योजना बनी और नदी जोड़ो अभियान चला। परिस्थितियों के बदलने से दोनों राज्यों के हित में होने वाला यह निर्णय लंबित रहा लेकिन अब मध्य प्रदेश और राजस्थान इस विषय पर एकमत हैं।

नियमित हुईं 56 पैसेंजर ट्रेनें, अगले माह से होंगी संचालित, लोगों को मिलेगी राहत

 जबलपुर इटारसी-कटनी, जबलपुर-गोंदिया सहित 56 ट्रेनें अगले माह से फिर से नियमित यात्री गाड़ी के रूप में संचालित होंगी। इस संबंध में पश्चिम मध्य रेल ने आदेश जारी किए हैं। संबंधित ट्रेनों का परिचालन कोरोना काल से विशेष गाड़ी के रूप में किया जा रहा है। रेलवे के स्पेशल ट्रेन के लिए निर्धारित शून्य अंक को ट्रेनों के नंबर के आगे जोड़ा गया था। एक दिसंबर, 2025 से पैसेंजर ट्रेनों के सामने से शून्य का अंक हट जाएगा। नौ दिसम्बर को वैष्णोदेवी जाएगी तीर्थयात्रा स्पेशल ट्रेन माता वैष्णोदेवी के दर्शन करने के लिए तीर्थयात्रियों के जत्थे को लेकर विशेष ट्रेन आगामी नौ दिसम्बर को जबलपुर से कटरा के लिए रवाना होगी। मां वैष्णोदेवी यात्रा सेवा समिति मदनमहल की ओर से तीर्थयात्रियों के लिए यह स्पेशल ट्रेन बुक की गई है। यह ट्रेन दिल्ली, जम्मू होकर कटरा जाएगी वैष्णोदेवी के दर्शन के लिए यह ट्रेन दिल्ली, जम्मू होकर कटरा जाएगी। वहां से वैष्णोदेवी के लिए यात्री बस से जाएंगे। जम्मू व कटरा में यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था की गई है। जबलपुर से पुणे के लिए नियमित वायु सेवा और ट्रेन की जाए शुरू वहीं दूसरी ओर जबलपुर संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मंडल ने राज्यसभा सांसद विवेक कृष्ण तन्‍खा से भेंट की । इस दौरान प्रतिनिधि मंडल के पदाधिकारियों ने उन्हें जबलपुर पुणे सीधी वायु सेवा तथा जबलपुर पुणे नियमित ट्रेन चलाने की मांग को लेकर एक मांग पत्र सौंपा। जबलपुर के युवा पुणे में उच्च शिक्षा एवं रोजगार के लिए निवासरत समिति संयोजक हिमांशु खरे नेर बताया कि जबलपुर पुणे के मध्य सीधी वायु सेवा की आवश्यकता हो गई है। हजारों की संख्या में जबलपुर के युवा पुणे में उच्च शिक्षा एवं रोजगार के लिए निवासरत हैं एवं दोनों शहरों के बीच की दूरी को देखते हुए पूर्व की भांति वायु सेवा शीघ्र आरंभ हो। इसके लिए राज्यसभा सांसद विवेक कृष्ण तन्‍खा को समिति के प्रतिनिधि मंडल ने एक मांग पत्र सौंपा। पुणे के लिए सीधी वायु सेवा के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे विवेक तन्‍खा ने कहा कि जबलपुर की पहचान रानी दुर्गावती, ओशो, महर्षि महेश योगी एवं स्वामी स्वरूपानंद की वजह से जबलपुर को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पहचान प्राप्त हुई है। पुणे के लिए सीधी वायु सेवा बेहद आवश्यक है जिसके लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। विमान एवं ट्रेन की इस पहल से दोनों शहरों के नागरिकगण लाभान्वित होंगे विवेक तन्‍खा बोले-जबलपुर को आचार्य रजनीश ओशो ने अंतरराष्ट्रीय पहचान दी है तथा जबलपुर एवं पुणे में ओशो के बहुत बड़ी संख्या में अनुयायी रहते हैं। विमान एवं ट्रेन की इस पहल से दोनों शहरों के नागरिकगण लाभान्वित होंगे जिसके लिए समुचित प्रयास किए जाएंगे। विशेष नंबर : पैसेंजर ट्रेन : नियमित नंबर 05703/05704 जबलपुर–नैनपुर–जबलपुर 51703/51704 05705/05706 जबलपुर–नैनपुर–जबलपुर 51705/51706 05713/05714 जबलपुर–गोंदिया–जबलपुर 51707/51708 06619/06620 इटारसी–कटनी–इटारसी मेमू 61617/61618 06603/06604 बीना–कटनी मुड़वारा–बीना मेमू ट्रेन 61619/61620 06617/06618 कटनी–चिरमिरी–कटनी मेमू 61601/61602 06623/06624 कटनी–बरगवां–कटनी मेमू 61603/61604 06625/06626 कटनी–सतना–कटनी मेमू 61605/61606 06635/06636 सतना–मानिकपुर–सतना मेमू 61607/61608 06637/06638 सतना–मानिकपुर–सतना मेमू 61609/61610 06607/06608 बीना–गुना–बीना ट्रेन 61611/61612    

मध्यप्रदेश में सड़कों की गुणवत्ता को बेहतर बनाने लोक निर्माण विभाग आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर विशेष ध्यान दे रहा

भोपाल मध्यप्रदेश में सड़कों की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और यातायात को सुगम बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर विशेष ध्यान दे रहा है। विभाग ने सड़क निर्माण की अत्याधुनिक व्हाइट टॉपिंग तकनीक को अपनाने का निर्णय लिया है। इस दिशा में पायलट प्रोजेक्ट के तहत 21 जिलों में चयनित 41 मार्गों पर इस तकनीक को लागू किया जाएगा। इन मार्गों की कुल लंबाई 109.31 किलोमीटर है। योजना को नवंबर के अंत तक शुरू करने की तैयारी है, और इसे अगले 4 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वाइट टॉपिंग सड़क निर्माण की एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें पुरानी डामर सड़कों पर कंक्रीट की मोटी परत चढ़ाई जाती है। यह प्रक्रिया सड़कों को न केवल मजबूत और टिकाऊ बनाती है, बल्कि उनकी आयु 20 से 25 वर्षों तक बढ़ा देती है। इस तकनीक में सबसे पहले डामर सड़क की सतह को साफ किया जाता है, फिर 6 से 8 इंच मोटी कंक्रीट की परत डाली जाती है, जो भारी यातायात और खराब मौसम का सामना करने में सक्षम होती है। इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ इसकी टिकाऊपन है। वाइट टॉपिंग के कारण सड़कों को लंबे समय तक गड्ढामुक्त रखा जा सकता है, जिससे यातायात व्यवस्था अधिक सुगम होती है। साथ ही, यह पर्यावरण के अनुकूल भी है क्योंकि कंक्रीट की सतह डामर की तुलना में ठंडी रहती है। इसके अलावा, रख-रखाव की लागत में भी काफी कमी आती है। इस परियोजना के तहत सबसे अधिक 14 मार्गों पर कार्य भोपाल में किया जाएगा। अन्य जिलों में इंदौर में 3 मार्ग, ग्वालियर में 3 मार्ग, बुरहानपुर में 2 मार्ग, मंदसौर में 2 मार्ग, सागर में 2 मार्ग, आगर मालवा, उमरिया, खंडवा, गुना, छतरपुर, देवास, नर्मदापुरम, नीमच, बैतूल, मुरैना, रतलाम, रायसेन, रीवा, सतना और हरदा में 1-1 मार्ग पर वाइट टॉपिंग तकनीक लागू की जाएगी। विभाग ने इस कार्य को अगले 4 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इस पहल से सड़कों की गुणवत्ता में सुधार होगा और यातायात व्यवस्था अधिक सुगम होगी। इसके साथ ही यह परियोजना सड़कों को अधिक टिकाऊ और लंबे समय तक गड्ढामुक्त बनाए रखने में सहायक होगी।  

संसदीय कार्य विभाग ने विभागाध्यक्ष और कलेक्टर्स को जारी किया पत्र, प्रदेश में चलेगा जन-जागरूकता अभियान

भोपाल देश में 15 अगस्त 1947 को देश की आजादी के बाद तैयार किया गया संविधान 26 नवम्बर 1949 को अपनाया गया था। इसके बाद देश में 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू किया गया था। संविधान को अपनाने के 75 वर्ष पूरे होने पर संविधान की जानकारी के प्रति जन-जागरूकता के लिये 26 नवम्बर 2024 से वर्ष भर चलने वाला “हमारा संविधान-हमारा स्वाभिमान” अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में संसदीय कार्य विभाग ने शासन के समस्त विभागाध्यक्ष, संभागीय आयुक्त और कलेक्टर्स को पत्र जारी कर निर्देश जारी किये हैं। अभियान के दौरान जन-सामान्य को संविधान की प्रस्तावना, संविधान का निर्माण और देश के संविधान पर गर्व करने जैसे बिन्दुओं पर मुख्य रूप से जानकारी दी जायेगी। इसी दौरान जन-समुदाय के बीच में संविधान पर केन्द्रित कार्यक्रम भी आयोजित किये जायेंगे। वर्ष भर की गतिविधियों को एक डिजिटल प्लेटफार्म पर लाने के लिये वेबसाइट constitution75.com भी तैयार की गई है। वेबसाइट में गतिविधियों की तस्वीरें और वीडियो अपलोड किये जा सकेंगे। इस अभियान में युवाओं और स्कूल के बच्चों को अधिक से अधिक जोड़ने के लिये एक अन्य वेबसाइट https://www.mygov.in: पर संविधान विषय पर निबंध, प्रश्नोत्तरी एवं पोस्टर प्रतियोगिता की तस्वीरें साझा की जा सकती हैं। स्थापना दिवस पर आयोजन संविधान के स्थापना दिवस 26 नवम्बर 2024 को मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा। इस कार्यक्रमों में जन-प्रतिनिधि नागरिकों के बीच संविधान की प्रस्तावना को पढ़ेंगे। इसी दिन प्रदेश भर की ग्राम पंचायतों में भी सामुहिक रूप से संविधान प्रस्तावना का वाचन किया जायेगा। ग्राम पंचायतों को बाबा साहेब डॉ. बी.आर. अंबेडकर के योगदान का प्रचार करने के लिये मायभारत स्वयं सेवकों के माध्यम से संविधान स्वाभिमान यात्राएं आयोजित किये जाने के लिये भी कहा गया है। यह यात्राएं अनुसूचित जाति -अनुसूचित जनजाति घनत्व वाली आबादी में विशेष रूप से हो। यात्रा के दौरान बाबा साहेब की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित की जायेगी। ग्राम सभाओं में संविधान के अनुच्छेद-51(ए) में नागरिकों के मौलिक कर्त्तव्यों को पढ़कर सुनाया जायेगा।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज 10 हजार गायों की क्षमता वाली हाइटैक गौ-शाला का भूमि-पूजन करेंगे

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बरखेड़ी डोब, भोपाल में 10 हजार गायों की क्षमता वाली हाइटैक गौ-शाला का भूमि-पूजन आज प्रात: 10 बजे करेंगे। इस अवसर पर पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल भी उपस्थित रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में वर्तमान वर्ष (चैत्र माह से फाल्गुन माह तक) गौ-संरक्षण एवं गौ-संवर्धन वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए भोपाल के बरखेड़ी डोब में 10 हजार गायों की क्षमता वाली अत्याधुनिक गौ-शाला के निर्माण की योजना है। गौ-शाला लगभग 25 एकड़ क्षेत्र में बनाई जा रही है। इसमें गायों के आधुनिक तरीके से रख-रखाव के साथ ही उनके उपचार के लिए सभी संसाधनों से युक्त चिकित्सा वार्ड का भी निर्माण किया जाएगा। गौ-शाला में सीसी टीवी के माध्यम से निरंतर मॉनीटरिंग की व्यवस्था रहेगी। लगभग 15 करोड रुपए की लागत की गौ-शाला का निर्माण कार्य ग्रामीण यांत्रिकी विभाग द्वारा कराया जाएगा, वहीं नगर निगम एवं पशुपालन विभाग नोडल एजेंसी होंगे। गौ-शाला को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और जिला पंचायत द्वारा वित्तपोषण किया जाएगा। गौ-शाला का संचालन नगर निगम द्वारा किया जाएगा। गौ-शाला का निर्माण तीन चरणों में होगा, जिसमें प्रथम चरण में लगभग 2000 पशु क्षमता का निर्माण किया जाएगा। इस अत्याधुनिक गौ-शाला में गायों को भूसा, हरा घास, पशु आहार आदि कन्वेयर बेल्ट के माध्यम से पहुंचाया जाएगा। गौ-शाला में गायों के गोबर एवं मूत्र आदि से विभिन्न सामग्री तैयार की जाएगी और जैविक खाद निर्माण के लिए संयंत्र भी लगाया जाएगा। गौ-शाला में रहने वाले पशुओं एवं सड़कों पर घायल एवं बीमार होने वाले पशुओं के उपचार के लिए चिकित्सा वार्ड भी बनाया जा रहा है।

टीकमगढ़ प्रशासन ने ग्रामीणों की पीड़ा जानने ‘प्रशासन गांव की ओर’ नवाचार आरंभ किया

टीकमगढ़   ग्रामीण जिला मुख्यालय तक आकर परेशान न हों, इसलिए टीकमगढ़ प्रशासन ने उनकी पीड़ा जानने के लिए जनसुनवाई जैसे मंच को उनके द्वार तक पहुंचाने का नवाचार आरंभ किया। इसे नाम दिया ‘प्रशासन गांव की ओर’। नतीजा यह हुआ कि जिला मुख्यालय पर प्रत्येक मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई में शिकायती आवेदन 90 प्रतिशत तक कम हो गए। दिसंबर 2023 में शुरू किए इस नवाचार में कलेक्टर अवधेश शर्मा ने इसके लिए मातहत 324 अधिकारियों को प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया है। कलेक्टर करते हैं औचक निरीक्षण यह प्रतिनिधि जनसुनवाई करते हैं और शिकायतों को गूगल फॉर्म पर भरकर कलेक्टर के समक्ष पेश करते हैं। इतना ही नहीं इनकी समीक्षा साप्ताहिक टीएल बैठक में सबसे पहले की जाती है। मंगलवार को कभी भी कलेक्टर बिना बताए किन्हीं पांच गांव पहुंच जाते हैं। औचक निरीक्षण के भय से सभी अफसर हर जनसुनवाई में मौजूद रहते हैं। दरअसल कलेक्टर ने देखा कि गांव स्तर से लोग जिला मुख्यालय आते हैं और फिर आवदेन टाइप कराना सहित उनके कई खर्चे होते थे। इसके पूर्व भी ग्राम पंचायत स्तर पर कर्मचारियों से अपेक्षा थी कि निचले स्तर पर ही समस्याओं का निराकरण हो जाए, लेकिन मॉनीटरिंग की बेहतर व्यवस्था न होने से समस्याओं का निराकरण तेजी व गारंटी के साथ नहीं हो पाता था और लोगों को एक ही प्रकार की शिकायत के लिए ग्राम पंचायत स्तर से लेकर जिला मुख्यालय तक कई आवेदन देने पड़ जाते थे। जब तक ग्रामीण स्वयं कलेक्टर के हाथ में आवेदन नहीं थमा देते थे, तब तक उन्हें निराकरण होने का भरोसा नहीं रहता था। ऐसे में कलेक्टर ने इस नवाचार को शुरू किया। अन्य अधिकारी व जनप्रतिनिधि बने सहभागी अभियान में पंचायत स्तर पर ग्राम पंचायत सरपंच भी सक्रिय भूमिका में है। सांसद, विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य आदि को भी इस प्रक्रिया के बारे में अवगत कराते हुए इसमें सहभागी बनाया है, जो अधिकारी ग्राम पंचायत स्तर पर अपनी ड्यूटी के लिए जाते हैं। शासन की उनसे स्वयं क्षेत्र भ्रमण की अपेक्षा रहती है, जिसे मंगलवार की जनसुनवाई से जोड़कर इसका भी समाधान किया गया। साथ ही कार्यालय का संचालन विधिवत होता है, जिसमें कोई व्यवधान नहीं आता। पेपरलैस है पूरा सिस्टम सुनवाई का यह पूरा सिस्टम पेपरलैस है। इसमें क्विक रिस्पॉन्स मैकेनिज्म भी तैयार किया गया है, जिसमें एक सरल गूगल फॉर्म विकसित किया गया है, जिसमें महत्वपूर्ण मु्द्दे जैसे पीडीएस, पेयजल की समस्या, मध्याह्न भोजन, राजस्व, आवास, स्वच्छता की शिकायतों का फीडबैक लिया जाता है, जिसमें स्वयं कलेक्टर लाइव देखते हैं और संबंधित जिला अधिकारी के माध्यम से शिकायत का निराकरण कराते हैं। इसमें कलेक्टर समस्याओं की रिपोर्ट लेकर मौके पर निराकरण कराते हैं। क्विक रिस्पांस मैकेनिज्म के तहत खाद्य विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और स्वास्थ्य विभाग की टीम अलर्ट मोड पर रहती है, जिससे जनहित से जुड़ी मुख्य समस्याओं जैसे खाद्यान वितरण न होना, पेयजल की गंभीर समस्या होना या किसी संक्रामक बीमारी का उजागर होने पर उनका तत्काल निराकरण संभव हो पाता है। मंगलवार की शाम को किसी एक ब्लाक की सभी ग्राम पंचायतों के नोडल अधिकारियों और जिला अधिकारियों की बैठक लेकर प्रत्येक ग्राम पंचायत की समस्याओं का निराकरण और फालोअप कराते हैं। बिना मजदूरी छोड़े समस्या का हल, अब भरोसा भी मिला टीकमगढ़ जिले के सबसे दूरस्थ गांव जिला मुख्यालय से 90 से 100 किलोमीटर तक स्थित हैं। कलेक्टर की यह पहल पर्यावरण संरक्षण के लिए कारगर सिद्ध हुई है, क्योंकि वाहनों की उपयोग घटा है। लेकिन इससे भी बढ़कर यह उन लोगों के लिए बहुत बड़ी सुविधा लेकर आई है, जो स्वयं के वाहन न होने के कारण अपना पैसा और समय खर्च कर जिला मुख्यालय तक जाते थे। इससे उनका दिनभर की मजदूरी का भी नुकसान होता था। जिसकी अब बचत हुई। इन समस्याओं का हुआ निराकरण     जर्जर भवनों का चिन्हांकन करते हुए लोगों की सुरक्षा निर्धारित की। नदनवारा, गनेशगंज, पनियाराखेरा, चंद्रपुरा जैसे गांवों में भवनों में सुधार हुआ।     पलेरा के टपरियन चौहान में मध्यान्ह भोजन वितरण न होने की शिकायत पर तत्काल ही एक्शन लिया और फिर शाम को विशेष भोज कराया गया।     बनगाय, अहार, डूडाखेरा, बरमे, खरीला गांव में खाद्यान वितरण में गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर यहां अन्न उत्सव मनाते हुए खाद्यान वितरण कराया और फिर दुकान खुलने की मुनादी हुई।     वीरुऊ में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के नहीं पहुंचने की शिकायत मिली, तो कार्रवाई हुई और फिर तैनाती की गई।     जल स्त्रोत से गंदा पानी आने की शिकायत के बाद एक साथ 261 गांवों से पानी की जांच के लिए नमूने लिए गए।     जनसुनवाई खानापूर्ति न रह जाए और कलेक्टर तक अपनी बात पहुंचाने के लिए लोगों को टीकमगढ़ जिला मुख्यालय तक न आना पड़े। इसलिए कलेक्टर के प्रतिनिधि के रूप में नोडल अधिकारियों को नियुक्त कर दिया, जो प्रतिनिधि मुझे रिपोर्ट करते हैं और उन आवेदनों को देखने के बाद उन पर कार्रवाई होती है। इसकी समीक्षा भी हर दिन एक घंटे की जाती है। इसके बेहतर परिणाम भी आ रहे हैं।     – अवधेश शर्मा, कलेक्टर टीकमगढ़  

वृहद, मध्यम एवं सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं से मध्यप्रदेश में निरंतर सिंचाई का रकबा बढ़ रहा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार किसान हितैषी सरकार है, जो सबसे ज्यादा फिक्र अपने अन्नदाता की करती है। सरकार निरंतर हर खेत तक पानी पहुंचाने के कार्य कर रही है। जल संसाधन विभाग की विभिन्न वृहद, मध्यम एवं सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं से मध्यप्रदेश में निरंतर सिंचाई का रकबा बढ़ रहा है। सिंचाई की समुचित व्यवस्था हो जाने से अब किसान 2 फसलों के स्थान पर 3 फसल लेने लगे है। इससे उत्पादन में भी वृद्धि हुई है और किसान समृद्ध भी हो रहे है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में सिंचाई के रकबे में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। वर्ष 2003 में जहां प्रदेश का सिंचाई रकबा लगभग 3 लाख हेक्टेयर था, आज बढ़कर लगभग 50 लाख हेक्टेयर हो गया है। प्रदेश की निर्मित और निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं से प्रदेश में वर्ष 2025-26 तक सिंचाई का रकबा लगभग 65 लाख हेक्टेयर होने की संभावना है। सरकार ने वर्ष 2028-29 तक प्रदेश की सिंचाई क्षमता 1 करोड़ हैक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए प्रदेश में तीव्र गति से कार्य किया जा रहा है। सरकार ने विभाग के लिए बजट में भी पर्याप्त राशि का प्रावधान किया है। वर्ष 2024-25 के बजट में सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण एवं संधारण के लिए 13 हजार 596 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने बताया कि प्रदेश की सिंचाई परियोजनाओं में केन-बेतवा लिंक परियोजना एक महत्वाकांक्षी नदी जोड़ों राष्ट्रीय परियोजना है। इसमें केन नदी पर दौधन बांध, आनुषंगिक कार्य एवं लिंक नहर का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। इस परियोजना के अंतर्गत बेतवा कछार में बीना काम्पलेक्स, कोटा बैराज तथा लोअरओर परियोजनाओं का निर्माण किया जाना सम्मिलित है। परियोजना से मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, निवाड़ी एवं दमोह जिलों में माइक्रो इरिगेशन से केन कछार में 4.5 लाख हेक्टेयर, बेतवा कछार के विदिशा, रायसेन, सागर, शिवपुरी एवं दतिया जिलों में 2.06 लाख हेक्टेयर तथा उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के बांदा, महोबा और झांसी जिलों में 2.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के साथ पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना से उत्पन्न होने वाली 103 मेगावाट जल विद्युत तथा 27 मेगावाट सौर ऊर्जा पर पूरा अधिकार मध्यप्रदेश का होगा। परियोजना के द्वितीय चरण की डीपीआर राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण द्वारा वर्ष 2014 में तैयार की गई। इसके अंतर्गत मध्यप्रदेश द्वारा बेतवा कछार में अंतिम रूप से प्रस्तावित 3 परियोजनाएं: बीना परिसर से 96 हजार हेक्टेयर, कोटा बैराज से 20 हजार हेक्टेयर तथा लोअर ओर परियोजना से 90 हजार हैक्टेयर सिंचाई प्रस्तावित है। साथ ही परियोजनाओं से 66.7 मिलियन घन मीटर पेयजल एवं मांग आधार पर उद्योगों हेतु जल का प्रावधान रखा गया है। परियोजना की सभी वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त हो चुकी हैं। मध्यप्रदेश में द्वितीय चरण की परियोजना का कार्य प्रगति पर है। परियोजना के कार्यान्वयन के लिए मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश एवं केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय के बीच एक त्रिपक्षीय सहमति ज्ञापन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में हस्ताक्षरित किया गया। परियोजना के क्रियान्वयन के लिए केंद्रीय मंत्रि-परिषद द्वारा 44 करोड़ 605 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। परियोजना को 8 वर्षों में पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पार्वती-काली-सिंध-चंबल लिंक परियोजना एक अन्य महत्वपूर्ण परियोजना है, जिसके लिए मध्यप्रदेश, राजस्थान और केंद्र सरकार के बीच त्रिपक्षीय समझौता हुआ है। इस परियोजना से प्रदेश के 10 जिलों को लाभ मिलेगा। केन-बेतवा लिंक परियोजना, संशोधित पार्वती-कालीसिंध परियोजना और नर्मदा घाटी की अन्य प्रस्तावित महत्वपूर्ण परियोजनाओं से प्रदेश में 19 लाख 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा बढ़ेगी। प्रदेश में “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” के उद्देश्य की पूर्ति के लिए 133 वृहद् एवं मध्यम प्रेशराइज्ड सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली आधारित परियोजना निर्माणाधीन है। प्रदेश में 1320 करोड़ रुपए की लागत वाली चितरंगी दाब युक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना स्वीकृत हुई है। इस परियोजना से सिंगरौली जिले में 32 हजार 125 हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र विकसित होगा। इसी प्रकार 4197 करोड़ 58 लाख रुपए की लागत से जावद-नीमच दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना को भी स्वीकृत किया गया है। नीमच जिले में इस परियोजना से 18 हजार 600 हेक्टेयर में सिंचाई क्षेत्र विकसित होगा।  

उज्जैन पधार कर आचार्य सांदीपनि जी से शिक्षा प्राप्त करना सनातन संस्कृति की अद्वितीय घटना है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भगवान श्रीकृष्ण का मध्यप्रदेश की धरती उज्जैन पधार कर आचार्य सांदीपनि जी से शिक्षा प्राप्त करना सनातन संस्कृति की अद्वितीय घटना है। महाभारत जैसे भीषण युद्ध के बीच शास्त्र सम्मत मार्ग दिखाते हुए कर्मवाद की शिक्षा देने का उनका प्रयास और विश्व को श्रीमद् भगवद गीता की देन अद्वितीय है। शास्त्र के रूप में स्थापित भगवद गीता विद्वतजन, ऋषि मुनि से लेकर जन-सामान्य तक के मन में जिज्ञासा भी उत्पन्न करती है और समाधान भी प्रदान करती है। गीता को आचरण और व्यवहार में धारण कर मानव, अपने जीवन को कर्मवाद से जोड़कर सद्मार्ग का अनुसरण करते हुए सफलताएं प्राप्त कर सकता है। इस वर्ष गीता जयंती पर इस्कॉन के साथ मिलकर स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा भगवद गीता पर केंद्रित प्रतियोगिता कराने का निर्णय लिया गया है। गीता के श्लोकों का वाचन, अध्ययन-मनन और भगवद गीता में लोगों की रुचि बढ़ाने के उद्देश्य से यह अकादमिक अभियान चलाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों से अधिक से अधिक संख्या में इस प्रतियोगिता में भाग लेने की अपील की। स्कूल शिक्षा विभाग और विक्रमादित्य शोध पीठ द्वारा इस्कॉन के सहयोग से होगी प्रतियोगिता उल्लेखनीय है कि भगवद गीता आधारित मूल्य शिक्षा प्रतियोगिता, स्कूल शिक्षा विभाग और संस्कृति विभाग के विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा इस्कॉन के सहयोग से आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य छात्रों में स्थायी नैतिक मूल्यों का संचार करना, चरित्र निर्माण को प्रेरित करना और आज के युवाओं में व्याप्त विभिन्न व्यसनों के खतरों के बारे में जागरूकता फैलाना है। जिला स्तर पर 26 से 29 नवंबर तक होंगी प्रतियोगिताएं जिला स्तरीय प्रतियोगिता के अंतर्गत कक्षा-9 से 12 तक के छात्रों के लिए ऑनलाइन क्विज-प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। प्रत्येक कक्षा की प्रतियोगिता के लिये पृथक-पृथक दिवस निर्धारित किये गये हैं, जिसमें 26 नवंबर को कक्षा -9वीं, 27 नवंबर को कक्षा-10वीं, 28 नवंबर को कक्षा-11वीं और 29 नवंबर को कक्षा-12वीं के छात्रों के लिये क्विज प्रतियोगिता होगी। सभी परीक्षाएं स्कूल में दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक आयोजित की जाएंगी। भागीदारी के लिये लिंक 19 नवंबर तक उपलब्ध करवाई जायेगी। प्रत्येक जिले में कक्षा के शीर्ष प्रदर्शन करने वाले छात्र राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में 10 दिसंबर 2024 को उज्जैन में गीता महोत्सव के दौरान शामिल होंगे। राज्य स्तरीय विजेताओं को मुख्यमंत्री द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा। यह मूल्य शिक्षा प्रतियोगिता छात्रों के शैक्षिक पाठ्यक्रम को आवश्यक नैतिक मूल्यों जैसे सत्यनिष्ठा, सहानुभूति, सम्मान और उत्तरदायित्व से समृद्ध बनाने के लिए डिजाइन की गई है। साथ ही उन्हें व्यसनों के हानिकारक प्रभावों के प्रति जागरूक करना और जिम्मेदार एवं नैतिक रूप से जागरूक भविष्य के नागरिकों के रूप में उनके व्यक्तित्व के विकास का प्रयास भी इस पहल का लक्ष्य है।  

विजयपुर में मुरझाया कमल, मंत्री रामनिवास रावत को मिली करारी हार, कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा जीते

Lotus withered in Vijaypur, Minister Ramniwas Rawat got a crushing defeat, Congress’s Mukesh Malhotra won. श्योपुर। Vijaypur By-Election Result 2024: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की विजयपुर (Vijaypur) विधानसभा सीट पर कांग्रेस (Congress) ने कब्जा कर लिया है। भाजपा प्रत्याशी (BJP candidate) और सरकार में वनमंत्री (Forest Minister) रामनिवास रावत (Ramniwas Rawat) की बड़ी हार हुई है। मुकेश मल्होत्रा (Mukesh Malhotra) ने रावत को 7 हजार 228 वोटों से हरा दिया।

रिश्वतखोर ड्रग इंस्पेक्टर लोकायुक्त टीम के हफ्ते चढ़ा , मेडिकल स्टोर लाइसेंस के मांगे 26000

Bribery drug inspector attacks Lokayukta team, demands Rs 26,000 for medical store license मंदसौर ! मध्‍यप्रदेश के सरकारी विभागों में रिश्वत लेने के मामले बढ़ते जा रहे हैं। बिना पैसे खिलाए कोई काम नहीं होता है। हालांकि ऐसे मामलों की शिकायत मिलते ही लोकायुक्त भी गंभीरता से एक्शन लेती है। ताजा मामला एमपी के मंदसौर जिले में का है, जहां शुक्रवार को उज्‍जैन लोकायुक्‍त ने बड़ी कार्रवाई की है। लोकायुक्त ने ड्रग इंस्‍पेक्‍टर को 26 हजार रुपए की रिश्‍वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। ड्रग इंस्‍पेक्‍टर ने मेडिकल स्टोर का लाइसेंस बनाने के बदले रिश्वत मांगी थी। उज्जैन लोकायुक्त डीएसपी राजेश पाठक ने बताया कि फरियादी लखन पिता कृष्ण कुमार पाटीदार निवासी नारायणगढ़ रोड हरसोल ने शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में बताया कि उसे मेडिकल स्टोर का लाइसेंस बनवाना था। इसके बदले ड्रग इंस्पेक्टर जयप्रकाश कुम्हार 26 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहा था। जांच में शिकायत सही पाई जाने पर उज्जैन लोकायुक्त टीम ने शुक्रवार को मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष को रिश्वत के 26 हजार रुपए लेते रंगे हाथों पकड़ा है। साथ ही उसने ड्रग इस्पेक्टर के लिए रुपए लिए थे। इसलिए उनको भी अरेस्ट किया गया है। दलाल को रुपए लेने भेजा ड्रग इंस्पेक्टर जय प्रकाश ने फरियादी लखन को रुपए लेकर मंदसौर एसपी कार्यालय के सामने बुलाया। रुपए मनीष चौधरी को देने की बोला। इसके बाद फरियादी 26 हजार रुपए लेकर एसपी कार्यालय के सामने पहुंचा। यहां फरियादी को दलाल के रूप में मेडिकल एसोसिएशन का जिलाध्यक्ष मनीष चौधरी मिला। उसने जैसे ही ड्रग इंस्पेक्टर के नाम के रुपए लिए वैसे ही लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। भ्रष्‍टाचार में मामला दर्ज मामले में डीएसपी पाठक ने बताया कि ड्रग इंस्पेक्टर जयप्रकाश कुम्हार और उसके साथी मनीष चौधरी के खिलाफ भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज किया है। इसके साथ ही मामले में विभिन्‍न स्‍तर पर जांच जारी है।

400 के.व्ही. वोल्टेज या उससे अधिक वोल्टेज की ट्रांसमिशन लाइनों के मेंटेनेन्स में होता है बेयर हेंड टेक्निक के हॉट सूट का इस्तेमाल

भोपाल महाकौशल विज्ञान मेले में एम.पी. ट्रांसको के स्टाल में प्रदर्शित एक्सट्रा हाईटेंशन लाइनों के मेंटेनेन्स में उपयोग में आने वाली बेयर हेंड टेक्निक के हॉट सूट पर कुछ भ्रांतियां हैं। इस संबंध में एम.पी. पावर ट्रांसमिशन कंपनी यह स्पष्ट करती है कि बेयर हेंड टेक्निक के हॉट सूट का इस्तेमाल 400 के.व्ही. एवं उससे अधिक वोल्टेज लेवल की ट्रांसमिशन लाइनों के मेंटेनेन्स के लिये ही किया जाता है। एम.पी. पावर ट्रांसमिशन कंपनी 400 के.व्ही. लाइनों के लाइव मेंटेनेन्स में एरियल इंसूलेटेड वर्क प्लेटफार्म के साथ इस हॉट सूट का उपयोग कर ट्रांसमिशन लाइनों का मेंटेनेन्स करती है। सामान्यतः 220 एवं 132 के.व्ही. की ट्रांसमिशन लाइनों के मेंटेनेन्स में भी इस सूट का इस्तेमाल नही होता है। 220 के.व्ही. तथा 132 के.व्ही. की लाइव ट्रांसमिशन लाइनों का सुधार हॉट स्टिक तकनीक के माध्यम से किया जाता है, जिसका प्रशिक्षण केन्द्र सरकार के हॉट लाइन प्रशिक्षण संस्थान बैंगलुरू में दिया जाता है। इस हॉट लाइन स्टिक तकनीक से प्रशिक्षित कर्मियों को ही 400 के.व्ही. एवं अधिक वोल्टेज पर कार्य करने के लिए बेयर हेंड टेक्निक के माध्यम से हॉट सूट पहनकर सुधार कार्य हेतु प्रशिक्षण दिया जाता है।  

संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क में FADA वर्कशॉप, ऑटोमोटिव प्रोफेशनल्स नवीन तकनीक की लेंगे जानकारी

भोपाल संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क और फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) द्वारा “कन्वर्सेशन टू एक्सीलरेशन” थीम पर वर्कशॉप का आयोजन 23 नवंबर, शनिवार को किया जा रहा है। यह वर्कशॉप ऑटोमोटिव सेक्टर के प्रोफेशनल्स को उन्नत कौशल, नवीन विचारों और व्यावसायिक विकास रणनीतियों से सशक्त बनाने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। वर्कशॉप में उद्योग विशेषज्ञ, डीलर्स, और ऑटोमोटिव सेक्टर से जुड़े अन्य विशेषज्ञ भाग लेंगे, जो कौशल विकास और नवाचारो की जानकारी देंगे। वर्कशॉप “कन्वर्सेशन टू एक्सीलरेशन” संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ऑटोमोटिव सेक्टर के डीलर्स और प्रोफेशनल्स को विकास के पथ पर तेज़ी से आगे बढ़ाने का प्रयास है। वर्कशॉप में नवीनतम उद्योग ट्रेंड्स, व्यापार विस्तार के अवसर और तकनीकी कौशल पर चर्चा होगी।  

हाथियों के प्रबंधन का अध्ययन दल पहुँचा अन्नामलाई टाइगर रिजर्व

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर क्षेत्र संचालक संजय टाइगर रिज़र्व के नेतृत्व में अधिकारियों की 18 सदस्यीय टीम तमिलनाडु में मानव हाथी संघर्ष प्रबंधन अध्ययन दौरे पर तीसरे दिन टीम ने अन्नामलाई टाइगर रिजर्व का भ्रमण किया, अन्नामलाई के डीएफओ ने वालपराई क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष के प्रबंधन और इसे कम करने के तरीकों पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। अन्नामलाई के डीएफओ ने बताया कि पहाड़ी इलाकों और चाय बागानों की बहुलता वाले क्षेत्र में अनूठी चुनौतियां है, जिसमें संघर्ष की प्रकृति अन्य क्षेत्रों से भिन्न है। संघर्ष प्रबंधन रणनीतियों को विकसित करने में इलाके की जानकारी और हाथी का व्यवहार महत्वपूर्ण कारक है। वालपराई में इसके लिये जीएसएम-आधारित उन्नत अलर्ट सिस्टम, एनाइडर तकनीक और सौर फेन्स की एक संयोजित तकनीक उपयोग की जाती है। अन्नामलाई टाइगर रिजर्व ने हाँका न लगाने की नीति को अपनाया है और इन उपायों के माध्यम से पिछले 2 वर्षो में हाथियों से संबंधित मृत्यु को शून्य कर दिया गया है। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य जीव) ने बताया कि अध्ययन दल ने अन्नामलाई टाइगर रिजर्व के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय राघवन के साथ बातचीत की। श्री राघवन ने बचाव उपकरणों और वाहनों का प्रदर्शन किया। उन्होंने मानव-हाथी संघर्ष से निपटने के लिये इस्तेमाल की जाने वाली विधियों और हाथी नियंत्रण कक्ष के संचालन के बारे में जानकारी साझा की।  

शस्त्र लायसेंस निरस्ती के चलते उपभोक्ता ने जमा कराई 2 लाख 48 हजार रूपए से अधिक की बकाया राशि

भोपाल दतिया जिला मजिस्ट्रेट द्वारा शस्त्र लाइसेंस निरस्ती की कार्रवाई के सकारात्मक परिणाम आये हैं। इंदरगढ जिला दतिया निवासी बिजली उपभोक्ता श्री बहादुर सिंह ने दतिया न्यायाधीश की कार्रवाई के कारण 2 लाख 48 हजार से अधिक की बकाया राशि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के खाते में जमा कर दी है। यह राशि लंबे समय से उपभोक्ता द्वारा अदा नहीं की जा रही थी। महाप्रबंधक दतिया ने बताया कि उपभोक्ता श्री बहादुर सिंह के नाम विद्युत बिल की राशि 2 लाख 48 हजार 690 रुपए काफी समय से लंबित थी। बकायादार के पुत्र श्री स्‍पर्श यादव के नाम शस्त्र लाइसेंस था। जिला मजिस्ट्रेट द्वारा शस्त्र लाइसेंस निरस्तीकरण का नोटिस दिए जाने के पश्चात उपभोक्ता श्री बहादुर सिंह ने बिजली कंपनी के खाते में पूरी बकाया राशि जमा कर दी। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी कार्यक्षेत्र के भोपाल, नर्मदापुरम, ग्‍वालियर एवं चंबल संभाग अंतर्गत आने वाले 16 जिलों में जिला मजिस्ट्रेट द्वारा आर्म्‍स डीलर लाईसेंस एवं शस्‍त्र लाईसेंस की स्‍वीकृति एवं नवीनीकरण के लिए बिजली कंपनी से नोड्यूज प्राप्‍त किया जाना अनिवार्य किया गया है। कंपनी द्वारा गृह विभाग, म.प्र.शासन के आदेश के अनुसार कंपनी कार्य क्षेत्र के ऐसे शस्‍त्रधारी बिजली उपभोक्‍ता जिनके द्वारा बकाया विद्युत बिलों का समय पर भुगतान नहीं किया जा रहा है, सा‍थ ही ऐसे शस्‍त्रधारी बिजली उपभोक्‍ता जो अनधिकृत बिजली का उपयोग अथवा बिजली चोरी करते पाए जाएंगे उनके आर्म्‍स डीलर लाईसेंस और शस्‍त्र लाईसेंस को जिला कलेक्‍टर के माध्‍यम से निरस्‍त कराने की कार्यवाही की जा रही है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि जो भी शस्‍त्र लाईसेंसधारी उपभोक्‍ता अपनी बकाया बिल राशि जमा नहीं करते हैं तो उनके शस्‍त्र लाईसेंस तत्‍काल प्रभाव से निरस्‍त करवाने की कार्रवाई की जाएगी।  

भू-दृश्य बहाली पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम : मंत्री श्री पटेल

भोपाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास, श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि भू-दृश्य बहाली पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है । यदि इसे व्यापक रूप से अपनाया जाए, तो यह न केवल पर्यावरणीय संतुलन बहाल करेगा बल्कि सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी मदद करेगा। यह पर्यावरण संरक्षण तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह स्थानीय समुदायों के लिए आर्थिक विकास के अवसर भी पैदा करती है। इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होती है, जल संसाधनों का संरक्षण होता है और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलते हैं। मंत्री श्री पटेल ने शुक्रवार को निवास कार्यालय में “मध्यप्रदेश में भू-दृश्य बहाली का विस्तार” विषय पर बैठक में विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव श्री मलय श्रीवास्तव सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से जल, जंगल और जमीन संरक्षण के कार्य को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन संरक्षण मानव अस्तित्व के लिये आवश्यक है। हम संरक्षण कार्य को आजीविका के साथ जोड़कर दूरगामी परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने जमीन संरक्षण के लिए जैविक खेती को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि कृषकों को जैविक उत्पादन करने के लिए प्रेरित किया जाए, साथ ही उनके उत्पादों के विपणन के लिये समुचित व्यवस्था की जाए, जिससे कृषकों को निश्चित आय हो सके। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि जिन जिलों में भू-दृश्य बहाली के लिये कार्य किये गये है, उनकी विस्तृत इंपैक्ट रिपोर्ट तैयार की जायें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बदलते भू-दृश्य पर हमें कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश के कुछ जिलों का चयन किया गया है, आगामी समय में सभी जिलों में यह कार्य किया जाएगा। बैठक में बताया गया कि सीधी और बड़वानी जिले में भूदृश्य बहाली के लिए कई कार्य किये गये हैं। प्रदेश में वर्तमान मे 10 जिलों में इस परियोजना का विस्तार किया जा रहा है। भू-दृश्य बहाली (लैंडस्केप रिस्टोरेशन) आज के समय में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण विषय है। जलवायु परिवर्तन, भूमि क्षरण और जैव विविधता की कमी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए विश्व में इस दिशा में कई प्रयास हो रहे हैं। भू-दृश्य बहाली का उद्देश्य क्षतिग्रस्त और परित्यक्त क्षेत्रों को उनके प्राकृतिक स्वरूप में पुनः स्थापित करना है, ताकि वे फिर से पर्यावरणीय और आर्थिक गतिविधियों के लिए उपयोगी बन सकें। इस प्रक्रिया में जंगलों की पुनर्स्थापना, मिट्टी के कटाव को रोकना, जैव विविधता का संरक्षण और स्थायी कृषि प्रणालियों का विकास शामिल है। मध्यप्रदेश में वनीकरण और मिट्टी संरक्षण के लिए कई परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं।  

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