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बांग्लादेश में धर्म नहीं बदलने पर हिंदू नेता की पीट-पीटकर बेरहमी से हत्या

ढाका  बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही है। अब उत्तरी बांग्लादेश के दिनाजपुर जिले में हिंदू समुदाय के एक प्रमुख नेता को घर से अगवा किया गया और बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। बांग्लादेश के मीडिया आउटलेट में ये जानकारी दी गई है। ‘डेली स्टार’ अखबार ने पुलिस और परिवार के हवाले से बताया कि ढाका से लगभग 330 किलोमीटर दूर उत्तर पश्चिम में दिनाजपुर के बसुदेबपुर गांव के निवासी भाबेश चंद्र रॉय का शव बृहस्पतिवार को बरामद किया गया। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भाबेश चंद्र इलाके में हिंदू समुदाय के प्रमुख नेता थे, जो बांग्लादेश पूजा उद्यापन परिषद की बिराल इकाई के उपाध्यक्ष भी थे। हिंदू नेता को घर से किया गया अगवा रॉय की पत्नी शांतना ने ‘द डेली स्टार’ को बताया कि उन्हें (रॉय) शाम करीब 4:30 बजे एक फोन आया। उन्होंने (शांतना) दावा किया कि अपराधियों ने घर पर उनकी मौजूदगी की पुष्टि करने के लिए यह फोन किया था। लगभग 30 मिनट बाद, दो मोटरसाइकिल पर चार लोग आए और कथित तौर पर भाबेश को परिसर से अगवा कर ले गए। इसमें बताया गया कि रॉय को नाराबारी गांव ले जाया गया, जहां उनके साथ क्रूरता से मारपीट की गई। कई प्रत्यक्षदर्शियों ने भी हमलावरों को भाबेश को अगवा करके ले जाते देखा। पिटाई के बाद घर के बाहर छोड़ गए हमलावर रिपोर्ट के अनुसार, बाद में हमलावरों ने भाबेश को एक वैन में लाकर उसके घर के बाहर डाल दिया। उन्हें तुरंत बिराल उपजिला स्वास्थ्य परिसर ले जाया। इसके बाद उन्हें दिनाजपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बिराल पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी ने कहा कि पुलिस संदिग्धों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए काम कर रही है। बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा जारी बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाओं को रोकने में मोहम्मद यूनुस की सरकार नाकाम रही है। ढाका स्थित एक मानवाधिकार संगठन ऐन ओ सालिश केंद्र (AsK) ने पिछले महीने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि बांग्लादेश भर में हिंदू समुदाय के घरों, मंदिरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ की कुल 147 घटनाओं की रिपोर्ट है। इन घटनाओं में करीब 408 घरों में तोड़फोड़ की गई, जिसमें आगजनी के 36 मामले शामिल हैं। इसके अलावा अल्पसंख्यक समुदाय के व्यापारिक प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ की 113 घटनाएं, अहमदिया संप्रदाय के मंदिरों और मस्जिदों पर हमले की 32 घटनाएं और 92 मंदिरों में मूर्तियों को तोड़ने की 92 घटनाएं सामने आई हैं। सितंबर 2024 में देश के प्रमुख बंगाली दैनिक प्रथम अलो ने बताया कि अवामी लीग सरकार के पतन के बाद पूरे देश में अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर हिंदू समुदाय पर हमलों की कई घटनाएं हुई हैं। कई इलाकों में हिंदुओं के घरों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और पूजा स्थलों पर अभी भी हमले हो रहे हैं।

अगर कल सरकार न्यायपालिका में दखल देती है तो अच्छा नहीं होगा, शक्तियों का बंटवारा अच्छी तरह से परिभाषित :मंत्री रिजिजू

नई दिल्ली वक्फ संशोधन कानून और पॉकेट वीटो मामले को लेकर छिड़ी बहस के बीच भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने कहा है कि अगर कानून बनाना सुप्रीम कोर्ट का ही काम रह गया है, तो फिर संसद भवन को बंद कर देना चाहिए. उन्होंने सोशल मीडिया पर शेयर एक पोस्ट में यह बयान दिया. क्या बोले निशिकांत दुबे? झारखंड की गोड्डा सीट से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने एक्स पर लिखा, ‘कानून यदि सुप्रीम कोर्ट ही बनाएगा तो संसद भवन बंद कर देना चाहिए.’ इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में वक्फ कानून पर सुनवाई से पहले केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा था कि मुझे पूरा भरोसा है कि सुप्रीम कोर्ट विधायी मामले में दखल नहीं देगा. हमें एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए. अगर कल सरकार न्यायपालिका में दखल देती है तो अच्छा नहीं होगा. शक्तियों का बंटवारा अच्छी तरह से परिभाषित है. केंद्रीय मंत्री न्यायपालिका और कार्यपालिका की शक्तियों की याद दिलाते है, तो वक्फ पर बनी जेपीसी के अध्यक्ष रहे जगदंबिका पाल सुप्रीम सुनवाई के अंतरिम आदेश से पहले ही वक्फ कानून पर अपना फैसला सुनाते हुए बड़ा ऐलान करते हैं. उन्होंने कहा कि अगर कानून में एक भी गलती निकली, तो वे अपने सांसदी पद से इस्तीफा दे देंगे. सुप्रीम कोर्ट में वक्फ मामले पर सुनवाई बता दें कि 16 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की तरफ से अपील की गई कि वक्फ कानून के खिलाफ दायर याचिकाओं के मामले में अतंरिम आदेश जारी करने से पहले उनकी दलील सुनी जाएं. कोर्ट ने केंद्र सरकार की अपील को सुनते हुए अतंरिम आदेश पारित नहीं किया. 17 अप्रैल को सुनवाई के दौरान एक बार फिर वक्फ कानून के अतंरिम आदेश से पहले विवाद के मुद्दों पर विस्तार से सुनवाई की दलील पेश की गई. जवाब देने के लिए एक हफ्ते की मोहलत मांगी गई और एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने अतंरिम आदेश की तारीख आगे बढ़ा दी, लेकिन वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों की एंट्री और ‘वक्फ बाय यूजर’ संपत्तियों में किसी तरह के बदलाव पर केंद्र का जवाब आने तक रोक लगा दी. पॉकेट वीटो मामले पर आमने-सामने केंद्र और कोर्ट दूसरी ओर तमिलनाडु विधानसभा से पारित 10 विधेयकों को वर्षों से राज्यपाल आरएन रवि की मंजूरी ना मिलने पर सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते बड़ा फैसला सुनाया था. उसके बाद अब केंद्र सरकार इसी हफ्ते सुप्रीम कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर कर सकती है. केंद्र सरकार का मानना है कि समय-सीमा तय कर देने से संवैधानिक अराजकता बढ़ेगी. तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि के रोके हुए 10 बिलों को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दे दी है. अब इस मामले में केंद्र सरकार राष्ट्रपति और राज्यपाल के अधिकार क्षेत्र यानी अघोषित ‘पॉकेट वीटो’ (Pocket Veto) के मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रही है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा? इस निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राष्ट्रपति को राज्यपाल द्वारा विचार के लिए प्रेषित विधेयकों पर विचार करने का संदर्भ मिलने की तिथि से तीन महीने के भीतर निर्णय लेना चाहिए. कोर्ट ने अपने निर्णय में यह भी स्पष्ट लिखा कि राज्यपाल के पास ‘पॉकेट वीटो’ यानी किसी भी फाइल को अनिश्चित काल तक अपने पास लंबित रखने का अधिकार नहीं है. इस टिप्पणी से असहमत केंद्र सरकार का मानना है कि इससे राज्यपाल की संवैधानिक भूमिका सीमित हो जाती है.  

अमेरिका में मास्टर डिग्री की पढ़ाई कर रही गुंटूर की छात्रा की टेक्सास के डेंटन सिटी में हिट-एंड-रन की घटना में मौत

गुंटूर  आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले की 23 साल की छात्रा वंगावोलु दीप्ति की टेक्सास के डेंटन सिटी में एक हिट-एंड-रन घटना में मौत हो गई। यह घटना उनकी मास्टर डिग्री पूरी होने से कुछ हफ्ते पहले हुई। 12 अप्रैल की सुबह हुई इस दुर्घटना में एक तेज रफ्तार सेडान ने दीप्ति और उनकी दोस्त स्निग्धा को टक्कर मार दी और मौके से फरार हो गई। दीप्ति को गंभीर चोटें आईं और 15 अप्रैल को उन्होंने अस्पताल में दम तोड़ दिया। डेंटन पुलिस मामले की जांच कर रही है और जनता से मदद की अपील की है। कैसे हुआ हादसा? दीप्ति 2023 में नरसाराओपेट इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक करने के बाद अमेरिका में नॉर्थ टेक्सास विश्वविद्यालय में कंप्यूटर और सूचना विज्ञान में मास्टर कर रही थीं। दीप्ति और स्निग्धा 12 अप्रैल की सुबह कैरिल अल लागो ड्राइव पर टहल रही थीं। तभी एक तेज रफ्तार कार ने उन्हें टक्कर मार दी। यह एक रिहायशी इलाका है। टक्कर लगने के बाद कार चालक वहां से भाग गया। दीप्ति को सिर में गंभीर चोटें आईं। स्निग्धा को भी चोटें आईं। लेकिन वे जानलेवा नहीं थीं। इलाज के दौरान तोड़ा दम घटना के बाद आपातकालीन सेवा वाले तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने दोनों को अस्पताल पहुंचाया। दीप्ति को आईसीयू में रखा गया। लोगों ने क्राउडफंडिंग के जरिए लगभग 80,000 डॉलर जुटाए। ताकि उनका इलाज हो सके। लेकिन 15 अप्रैल को दीप्ति ने दम तोड़ दिया। स्निग्धा का इलाज अभी भी चल रहा है। डेंटन पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे कार को ढूंढने में मदद करें। जमीन बेचकर बेटी को भेजा था विदेश दीप्ति के परिवार वाले इस खबर से बहुत दुखी हैं। उन्होंने बताया कि उनकी आखिरी बात 10 अप्रैल को हुई थी। दीप्ति ने अपने माता-पिता को मई में होने वाले दीक्षांत समारोह में आने के लिए कहा था। उनके पिता हनुमंत राव एक छोटे व्यापारी हैं। उनकी मां रमादेवी एक गृहिणी हैं। उन्होंने अपनी बेटी को विदेश में पढ़ाने के लिए अपनी जमीन का एक हिस्सा बेच दिया था। सोमवार को घर पहुंचेगा शव दीप्ति का पार्थिव शरीर शनिवार को हवाई जहाज से लाया जाएगा और सोमवार को घर पहुंचेगा। जूनियर केंद्रीय मंत्री पेम्मासानी चंद्रशेखर के कार्यालय ने अमेरिका में अधिकारियों के साथ मिलकर काम किया। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि दीप्ति को तुरंत चिकित्सा सहायता मिले। अब वे उनके डेडबॉडी को वापस लाने की व्यवस्था कर रहे हैं।

अमेरिका क्रीमिया पर रूसी नियंत्रण को मान्यता दे सकता है, यूक्रेन शांति समझौते के तहत सहमति के संकेत

 वॉशिंगटन अमेरिका अब रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौते के हिस्से के रूप में क्रीमिया पर रूस के नियंत्रण को मान्यता देने को तैयार हो सकता है. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है. यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोनों देशों के बीच सीजफायर स्थापित करने के लिए बातचीत कर रहे हैं. 2014 में रूस ने क्रीमिया पर सैन्य कार्रवाई कर कब्जा कर लिया था और वहां एक विवादास्पद जनमत संग्रह कराया था. इस जबरन अधिग्रहण को अमेरिका समेत ज्यादातर देशों ने खारिज कर दिया था. क्रीमिया को रूस का हिस्सा मान लेना, अंतरराष्ट्रीय नियमों से हटकर होगा, जो बलपूर्वक क्षेत्र कब्जा करने को अमान्य मानते हैं. वार्ता की धीमी गति से अमेरिका नाखुश राष्ट्रपति ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो शांति वार्ता की धीमी प्रगति से नाराज बताए जा रहे हैं. शुक्रवार को दोनों नेताओं ने संकेत दिया कि अगर जल्द ही कोई परिणाम नहीं निकला, तो अमेरिका वार्ता से अलग हो सकता है. वार्ता को लेकर ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘यह मामला जितना लंबा खिंचेगा, हमारे इसमें शामिल रहने का औचित्य उतना ही कमजोर होता जाएगा.’ उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि दोनों पक्ष जल्द समाधान की दिशा में नहीं बढ़ते हैं, तो अमेरिका पीछे हट जाएगा. जेलेंस्की बोले- किसी भी हाल में रूस को नहीं देंगे जमीन यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोदिमीर जेलेंस्की ने किसी भी तरह से रूस को यूक्रेनी जमीन सौंपने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. उन्होंने बार-बार कहा है कि क्रीमिया समेत किसी भी क्षेत्र को रूस का हिस्सा मानना अस्वीकार्य है. गुरुवार को कीव में बोलते हुए उन्होंने अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ पर रूस समर्थक रुख अपनाने का आरोप लगाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी. जेलेंस्की ने कहा, ‘हम कभी भी यूक्रेनी जमीन को रूसी नहीं मान सकते. जब तक सीजफायर नहीं होता, हमारी जमीन पर कोई बातचीत नहीं हो सकती.’  

घाटी में मध्यम तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस हुए, लोग दफ्तरों से बाहर निकल आए और खुले मैदान में जाकर खड़े हो गए

श्रीनगर कश्मीर में शनिवार दोपहर भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं. जिसके बाद लोग डर गए और अपने दफ्तर-घर छोड़कर बाहर निकल आए. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, घाटी में मध्यम तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस हुए हैं. लोग दफ्तरों से बाहर निकल आए और खुले मैदान में जाकर खड़े हो गए.अफगानिस्तान-ताजिकिस्तान सीमा क्षेत्र में भूकंप का केंद्र रहा. भूकंप की गहराई धरती से 86 किलोमीटर पर थी. एक दिन पहले उत्तरी चिली में 5.7 तीव्रता का भूकंप आया था. 15 अप्रैल को अमेरिका में कैलिफोर्निया के सैन डिएगो काउंटी में भूकंप आया था. इसकी तीव्रता 5.2 रही थी. भूकंप के कारण होने वाले कंपन को कैमरा में कैद किया गया था. दक्षिणी कैलिफोर्निया में भूकंप से किसी के घायल होने या कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ था. 13 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश के मंडी में भूकंप आया था. इसकी धरती से 5 किमी गहराई थी. इसकी तीव्रता 3.4 रही थी. 12 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पुंछ और राजौरी जिले के कुछ हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे. भूकंप की तीव्रता 5.8 रही थी. इसकी धरती से गहराई 10 किमी थी. भूकंप का केंद्र पाकिस्तान रहा था.

उत्तराखंड के चमोली में गहरी खाई में गिरी कार… 5 की मौत,तेज आंधी और बारिश के चलते हुआ हादसा

चमोली  उत्तराखंड के चमोली में एक बड़े हादसे में पांच लोगों की दर्दनाक मौत का मामला सामने आया है। शुक्रवार देर शाम करीब सात बजे चमोली जिले के बिरही-निजमूला मोटर मार्ग पर गाड़ी गांव के पास कोरेलधार में कार खाई में गिर गई। हादसे के कारणों को लेकर जांच चल रही है। पुलिस और बचाव टीमें दुर्घटनास्थल पर पहुंची, लेकिन भारी बारिश के चलते राहत और बचाव कार्यों में दिक्कतें आने की भी सूचना आई हैं। हालांकि, पुलिस और प्रशासन की टीम ने सभी मृतकों के शवों को बरामद कर लिया है। बारात की कार गिरी बिरही-निजमूला मोटर मार्ग पर गाड़ी गांव के पास कोरेलधार में बारात की कार गिरने का मामला सामने आया। खाई में कार गिरने के बाद हड़कंप मच गया। शादी वाले घर में कोहराम मच गया। मरने वालों को लेकर सूचना आ रही है कि सभी निजमूला क्षेत्र से किसी शादी से लौटकर दशोली विकासखंड के हरमनी गांव जा रहे थे। वापसी के दौरान ही यह हादसा हो गया। हादसे का पता तब चला, जब बरात में शामिल एक वाहन की खोजबीन की गई। गाड़ी को खोजने निकले लोगों ने खाई में गाड़ी को गिरा पाया। इसके बाद प्रशासन और पुलिस को घटना की सूचना दी गई। जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। आज होगा पोस्टमार्टम बिरही-निजमूला मोटर मार्ग पर गहरी खाई में गिरी कार से पुलिस की टीम ने मृतकों के शवों को रेस्क्यू कर लिया है। इसके बाद उनके शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। एसडीआरएफ और पुलिस की टीम ने पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन को चलाया।

कांगो में आग लगने के बाद पलटी नाव, दर्दनाक हादसे में कम से कम 150 लोगों की मौत; कई अब भी लापता

कांगो अफ्रीकी देश कांगो में ईंधन लेकर रही एक बड़ी नाव में विस्फोट की वजह से आग लगने और पलटने से कम से कम 143 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई दर्जन लोग लापता हो गए। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक यह घटना राजधानी मबंडाका के पास रूकी और कांगो नदी के संगम पर मंगलवार को हुई। इस जगह पर यह दुनिया की सबसे गहरी नदी है। नाव तय सीमा से ज्यादा लोगों को लेकर यात्रा कर रही थी, तभी अचानक हुए विस्फोट से उस पर आग लग गई, जिससे अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया और नाव पलट गई। जांच के लिए पहुंचे प्रतिनिधि मंडल के प्रमुख जोसेफिन लोकुम के मुताबिक इस घटना के बाद लोगों की तलाश जारी थी। हमने बुधवार को 131 शवों को बरामद किया, जबकि गुरुवार और शुक्रवार को हमें 12 शव और मिले हैं। इन शवों में से कई की हालत बहुत खराब है और कई बुरी तरह से जले हुए हैं। घटना की जानकारी देते हुए लोकुमु ने बताया कि शुरुआती जांच में अभी यह सामने आया है कि एक महिला ने नाव पर ही भोजन पकाने के लिए आग जलाई थी। वहां से थोड़ी ही दूरी पर बहुत ही ज्वलनशील ईंधन रखा हुआ था.. आग के संपर्क में आते ही ईंधन में तेज विस्फोट हो गया, जिससे तत्काल ही कई लोगों की मौत हो गई। विस्फोट की वजह से वहां पर भगदड़ मच गई और नाव पलट गई। स्थानीय नागरिक समाज के नेता जोसेफ लोकोंडो ने कहा कि हमारी टीम ने शवों को दफनाने में मदद की है। मरने वालों संख्या फिलहाल 145 है.. कई लोगों की मौत जलने की वजह से हुई है तो कई लोग डूबने की वजह से मारे गए। फिलहाल स्थानीय लोग और प्रशासन मदद के लिए अपना काम कर रहा है। हम शवों की तलाश कर रहे हैं। घटना के तुरंत बाद आसपास मौजूद कई नावों ने लोगों को बचाने का प्रयास भी किया था। कई लोगों को वहां से बचाकर अस्पताल में भी भर्ती कराया गया था। नाव पर कितने लोग सवार थे इस सवाल का जवाब देते हुए लोकुम ने कहा कि हमें सही संख्या पता नहीं है.. लेकिन इतना तय है कि नाव पर क्षमता से ज्यादा लोग सवार थे। फिलहाल जितने शव हमें मिल चुके हैं लगभग उतने ही लोगों के और लापता होने का अनुमान है। आपको बता दें कि अफ्रीकी देश में सड़कों की अवसंरचना की भारी कमी है। इसीलिए यहां पर आम जनता एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए पानी की बड़ी-बड़ी नावों का सहारा लेती है। इसलिए यहां की झीलों और कांगो नदी में अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं।

भारत 2047 तक दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर … जर्मनी और जापान को पीछे छोड़ देगी इंड‍ियन इकोनॉमी

नई दिल्‍ली जाने-माने निवेशक मार्क मोबियस का मानना है कि भारत में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ताकत है। अगर भारत अपनी मजबूत नीतियों पर टिका रहता है तो वह यह लक्ष्य हासिल कर सकता है। मोबियस ने ट्रेड वॉर पर कहा कि दुनिया की अर्थव्यवस्था में कुछ दिक्कतें आ सकती हैं। लेकिन, अगले कुछ महीनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप कई देशों के साथ व्यापार समझौते करेंगे। इससे बाजार शांत हो जाएगा और बड़ी मंदी का खतरा टल जाएगा। उन्होंने भारत से क्वालिटी कंट्रोल जैसी बाधाओं को हटाने और अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौता करने की सलाह दी है। नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रमण्यम ने भी कहा है कि भारत अगले तीन सालों में जर्मनी और जापान को पीछे छोड़ देगा। 2047 तक भारत दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। ये दावे ऐसे समय किए गए हैं जब ट्रंप की टैरिफ नीतियों से पूरी दुनिया में हलचल है। मार्क मोबियस के अनुसार, भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। कुछ सालों में भारत 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। अभी अमेरिका, चीन, जर्मनी और जापान ही भारत से आगे हैं। आईएमएफ के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था 4.3 ट्रिलियन डॉलर की है। यह जापान (4.4 ट्रिलियन डॉलर) और जर्मनी (4.9 ट्रिलियन डॉलर) से थोड़ी ही कम है। अनुमान है कि भारत इस साल जापान से और 2027 तक जर्मनी से आगे निकल जाएगा। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ऐसे आएगी तेजी मोबियस ईएम ऑपर्च्युनिटीज फंड चलाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर भारत आयात पर लगी रोक हटा दे तो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तेजी आएगी। इससे अर्थव्यवस्था और भी मजबूत होगी। उन्होंने भारतीय शेयर बाजार के बारे में कहा कि अमेरिकी टैरिफ लगने से पहले भी भारतीय शेयर बाजार में गिरावट आई थी। मोबियस ने कहा, ‘बाजार में रिकवरी जरूर आएगी। ऐसे में अच्छे शेयरों को एवरेज करने का यह सही समय है। अगर किसी निवेशक के पास शेयर पहले से हैं तो उसे होल्ड करने का यह सबसे अच्छा समय है।’ इसका मतलब है कि अगर आपके पास पहले से शेयर हैं तो उन्हें अभी बेचना नहीं चाहिए। हाल ही में भारतीय शेयर बाजार में तेजी आई है। पिछले पांच दिनों में सेंसेक्स और निफ्टी करीब 4 फीसदी बढ़ चुके हैं। 3 साल में जर्मनी और जापान से आगे निकल जाएगा भारत उधर, नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रमण्यम ने भी भारत की आर्थिक तरक्की के बारे में कई बातें कही हैं। उन्होंने कहा कि भारत अगले तीन सालों में जर्मनी और जापान से आगे निकल जाएगा। 2047 तक भारत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। सुब्रमण्यम ने कहा कि भारत के पास युवा लोगों की बड़ी संख्या है। यह भारत के लिए अच्छी बात है। भारत दुनिया के लिए काम करने वाले लोगों का भरोसेमंद स्रोत बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत शिक्षा का केंद्र बन सकता है। उन्होंने भारतीय कंपनियों से दुनिया में सबसे आगे रहने का लक्ष्य रखने को कहा है। मार्क मोबियस ने भारत के बारे में कुछ चिंताएं भी जताईं। उन्होंने कहा कि भारत में क्वालिटी कंट्रोल जैसी कई बाधाएं हैं। अगर भारत इन बाधाओं को हटा दे तो यह और भी तेजी से तरक्की कर सकता है। उन्होंने अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौता करने की भी सलाह दी है। इससे दोनों देशों को फायदा होगा। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता करने की बात चल रही है। दोनों देश 2025 से पहले टैरिफ कम करने पर काम कर रहे हैं। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ेगा। मोबियस ने ट्रेड वार के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि दुनिया की अर्थव्यवस्था में कुछ दिक्कतें आ सकती हैं। लेकिन, डोनाल्‍ड ट्रंप कई देशों के साथ व्यापार समझौते करेंगे। इससे बाजार शांत हो जाएगा और बड़ी मंदी का खतरा टल जाएगा।

हिंदू प्रिंसिपल को पीटा गया, झूठे आरोप लगाकार इस्तीफा देने पर किया मजबूर

ढाका बांग्लादेश के एक हाई स्कूल के हिंदू प्रिंसिपल को कथित तौर पर बंधक बनाया गया और बेबुनियाद आरोपों के आधार पर अपने पद से इस्तीफा देने को मजबूर किया गया। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि चटगांव के भटियारी हाजी तोबारक अली चौधरी (टीएसी) हाई स्कूल के कार्यवाहक प्रधानाचार्य कांति लाल आचार्य पर खालिदा जिया के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और उसके संबद्ध संगठनों के सदस्यों ने त्यागपत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव डाला। प्रिंसिपल की बेटी भावना आचार्य ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि उनके पिता को बिना किसी आरोप के पद छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, “मेरे पिता कांति लाल आचार्य 35 साल से भटियारी हाजी तोबारक अली हाई स्कूल में पढ़ा रहे हैं। बुधवार को मेरे पिता को बिना किसी सिद्ध आरोप के जबरन कार्यवाहक प्रिंसिपल के पद से हटा दिया गया। मेरे पिता ने क्या अपराध किया है? यह नहीं बताया गया।” भावना आचार्य ने लिखा, “ताजा घटना से पहले मेरे पिता को स्कूल जाने से मना किया गया। उनसे कहा गया कि अगर वे स्कूल गए तो उन्हें अपमानित किया जाएगा। इसके जवाब में मेरे पिता ने कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है और कोई अपराध नहीं किया है। उन्होंने कहा कि अगर आप मुझे अपने पद से हटने के लिए कहेंगे तो मैं बिना किसी हिचकिचाहट के पद छोड़ दूंगा लेकिन मैं फिर भी स्कूल जाऊंगा लेकिन भागूंगा नहीं। उन्होंने अपने अपराध का सबूत लाने के लिए कहा।” भावना ने बताया कि उनके पिता को जबरन एक कागज पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया। कागज में लिखा था कि वे भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण स्वेच्छा से इस्तीफा दे रहे हैं। उनके मुताबिक, “मेरे पिता ने निडरता से कहा कि उन्होंने कोई भ्रष्टाचार नहीं किया है और वे उस पन्ने पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे, इस्तीफा दे देंगे। इस पर लोगों ने मेरे पिता की पिटाई कर दी। बाद में एक और पर्चा लिखा गया जिसमें कहा गया कि उन्होंने निजी कारणों से इस्तीफा दिया है।” भावना ने निराशा व्यक्त करते हुए आगे कहा, “यह शिक्षक का अपमान है! हम दुनिया के एकमात्र नीच राष्ट्र हैं जो हर स्तर पर शिक्षकों को निशाना बना रहे हैं और उन्हें इस अपमानजनक स्थिति में डाल रहे हैं।” बांग्लादेश के प्रमुख बंगाली दैनिक प्रथम आलो से बात करते हुए कांति लाल आचार्य ने कहा कि स्कूल में हुई घटना के बाद से वह बीमार पड़ गए हैं, डरे हुए हैं और उनका पूरा परिवार भी उनके लिए चिंतित है। घटना के बारे में पूछे जाने पर उपजिला कार्यकारी अधिकारी फखरुल इस्लाम ने प्रोथोम अलो को बताया कि चटगांव शिक्षा बोर्ड के अधिकारियों ने घटना की जांच के लिए एक समिति गठित की है। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि शिक्षक पर हमला करने वाले बीएनपी सदस्यों ने दावा किया था कि बांग्लादेश एक इस्लामिक राज्य होना चाहिए, जहां गैर-मुस्लिम प्रधानाध्यापकों की कोई जगह नहीं। पिछले साल अगस्त में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार के पतन के बाद से बांग्लादेश में हिंसा और कानून व्यवस्था के लगातार खराब होने का सिलसिला जारी है।मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर अक्सर अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव बरतने और उन्हें सुरक्षा न देने का आरोप लगाया जाता है। भारत ने बांग्लादेश की स्थिति पर बार-बार चिंता जताई है और उम्मीद जताई है कि यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार हिंसा के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी। इस महीने की शुरुआत में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैंकॉक में बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान यूनुस के साथ अपनी बैठक के दौरान हिंदुओं सहित बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया था।

मुर्शिदाबाद हिंसा के दौरान बेघर हुए पीड़ित परिवारों ने बंगाल के राज्यपाल से की मुलाकात, पीड़ित परिवारों की सुनी आपबीती

मालदा पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस शुक्रवार को मुर्शिदाबाद और मालदा में हिंसा प्रभावित परिवारों से मुलाकात करने पहुंचे। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य समाज में शांति स्थापित करना है। मालदा दौरे पर मीडिया से बात करते हुए राज्यपाल ने कहा, “हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति को जल्द से जल्द सामान्य बनाना है और समाज में शांति स्थापित करना है। मैं यहां शिविरों में रह रहे लोगों की शिकायतों को सुनूंगा, उनकी भावनाओं, संवेदनाओं और जरूरतों को समझूंगा। फिर मैं प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करूंगा, जल्द से जल्द उनकी शिकायतों का निवारण करूंगा। मैं पहले शिविर में रह रहे लोगों के अनुभव साझा करूंगा, फिर बाद में कोई प्रतिक्रिया दूंगा।” मुर्शिदाबाद हिंसा के दौरान बेघर हुए पीड़ित परिवारों ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस से मुलाकात की थी। उन्होंने पीड़ित परिवारों की आपबीती सुनी। मुलाकात के बाद राज्यपाल ने मीडिया से कहा था, “मुर्शिदाबाद के पीड़ित खासकर महिलाएं मुझसे मिलने आईं। उन्होंने अपने संघर्ष की कहानियां सुनाईं, जो बहुत ही दुखद थीं। मैं खुद स्थिति का जायजा लेने के लिए वहां जाऊंगा। इसके बाद ही मैं भविष्य की कार्रवाई पर निर्णय ले सकूंगा। मेरा दृष्टिकोण पूरी तरह निष्पक्ष होगा। अब केंद्रीय बलों की मौजूदगी से स्थिति नियंत्रण में है।” पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने मीडिया से बात करते हुए कहा था, “हमने राज्यपाल से मिलकर कुछ खास मांगें रखीं। पहली मांग क्षतिग्रस्त घरों और दुकानों के पुनर्निर्माण की है, जिसे मुख्यमंत्री ने पहले ही स्वीकार कर लिया है। हमने ये मांगें राज्य के डीजीपी के समक्ष भी रखी हैं।” उन्होंने बताया कि राज्यपाल ने आश्वासन दिया है कि वह इन सभी मांगों पर ध्यान देंगे और उचित प्राधिकारी से इस पर चर्चा करेंगे। राज्यपाल ने पहले ही केंद्रीय गृह मंत्री को जमीनी स्तर की स्थिति से अवगत करा दिया है। उन्होंने राजभवन में एक शांति कक्ष भी खोला है। उल्लेखनीय है कि वक्फ कानून में संशोधनों के खिलाफ राज्य के कई जिलों में हिंसक विरोध-प्रदर्शन हुए हैं। राज्य पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मुर्शिदाबाद जिले में हुई हिंसा मामले में अब तक 200 से ज्यादा गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।

चार भारतीय नागरिक म्यांमार-थाईलैंड सीमा के म्यावड्डी क्षेत्र में साइबर घोटाले के नेटवर्क में फंस गए थे, अब हुई घर वापसी

यांगून भारत सरकार म्यांमार-थाईलैंड बॉर्डर के म्यावाड्डी क्षेत्र में फंसे चार भारतीय नागरिकों की वापसी सुनिश्चित की है। यांगून स्थित भारतीय दूतावास ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। चार भारतीय नागरिक म्यांमार-थाईलैंड सीमा के म्यावड्डी क्षेत्र में साइबर घोटाले के नेटवर्क में फंस गए थे। हाल ही में उन्हें म्यांमार के अधिकारियों ने रिहा कर दिया और ह्पा-आन से यांगून लाया गया। यांगून में भारतीय दूतावास ने शुक्रवार को एकस पर पोस्ट किया, “हमने कल म्यांमार प्राधिकारियों की ओर से इन चार भारतीय नागरिकों के लिए म्यावाड्डी परिसर से एग्जिट परमिट और यांगून के माध्यम से उनकी स्वदेश वापसी की सुविधा प्रदान की।’ पोस्ट में कहा गया, “हम म्यांमार/थाईलैंड में बॉर्डर इमिग्रेशन के बिना ऐसी नौकरी की पेशकश और प्रवेश/निकास के खिलाफ दृढ़ता से सलाह देते हैं, यह भविष्य में प्रवेश को प्रतिबंधित कर सकता है।” पिछले सप्ताह, 32 भारतीय नागरिकों – [जो सभी म्यावड्डी घोटाले के शिकार थे] – को म्यांमार-थाईलैंड सीमा क्षेत्र में माई सोत के माध्यम से वापस स्वेदश भेजा गया। यांगून स्थित भारतीय दूतावास ने ऐसी नौकरी की पेशकश के खिलाफ अपनी सलाह पर दोहराई और आगाह किया है कि म्यांमार/थाईलैंड में बॉर्डर इमिग्रेशन के बिना प्रवेश या निकास अवैध है और इससे भविष्य में प्रवेश पर प्रतिबंध लग सकता है। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा, “भारत सरकार, म्यांमार समेत विभिन्न दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में फर्जी नौकरी की पेशकश के साथ बहकाए गए भारतीय नागरिकों की रिहाई और स्वदेश वापसी के लिए लगातार कोशिश कर रही है। इन लोगों को म्यांमार-थाईलैंड बॉर्डर के साथ के क्षेत्रों में संचालित घोटाला केंद्रों में साइबर अपराध और अन्य धोखाधड़ी गतिविधियों में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया।” इससे पहले मार्च में, म्यांमार और थाईलैंड स्थित भारतीय दूतावासों ने स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय करके थाईलैंड के माई सोत से भारतीय वायुसेना के विमान के जरिए 283 भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की थी। विदेश मंत्रालय ने दोहराया, “भारत सरकार इस तरह के रैकेट के बारे में समय-समय पर जारी की गई सलाह और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी चेतावनी को दोहराना चाहती है। भारतीय नागरिकों को एक बार फिर सलाह दी जाती है कि वे विदेश में स्थित मिशनों के जरिए विदेशी नियोक्ताओं की साख की पुष्टि करें और नौकरी की पेशकश स्वीकार करने से पहले भर्ती करने वाले एजेंटों और कंपनियों के पिछले रिकॉर्ड की जाँच करें।”

संजय निरुपम ने कहा- सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर ट्रस्टों के समानांतर वक्फ बोर्ड को देखने की कोशिश की, जो गलत है

मुंबई शिवसेना नेता संजय निरुपम ने सुप्रीम कोर्ट में वक्फ बोर्ड से संबंधित सुनवाई पर शुक्रवार को अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर ट्रस्टों के समानांतर वक्फ बोर्ड को देखने की कोशिश की, जो “गलत” है। निरुपम ने मिडिया से बात करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सवाल किया कि क्या मंदिर ट्रस्टों में गैर-हिंदुओं को सदस्य बनाया जा सकता है। उनका कहना है कि मंदिर प्रबंधन समितियां और मस्जिद की इंतजामिया कमेटियां समान हैं। शिवसेना नेता ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट का यह दृष्टिकोण संविधान में दी गई धार्मिक स्वतंत्रता का गलत विश्लेषण करता है। मंदिर ट्रस्ट में गैर-हिंदुओं को शामिल करने का कोई कानून या परंपरा नहीं है। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड कोई धार्मिक संगठन नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को वक्फ बोर्ड में नई नियुक्तियों और वक्फ संपत्तियों के डीनोटिफिकेशन पर 5 मई को होने वाली अगली सुनवाई तक रोक लगा दी थी। निरुपम ने कहा कि कुछ लोग गलतफहमी फैला रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून पर पूरी तरह रोक लगा दी है, जो गलत है। जब कोई मामला कोर्ट में विचाराधीन होता है, तो सरकार उस पर कोई कदम नहीं उठाती। इसे “सब ज्यूडिस” यानी न्यायिक प्रक्रिया में होने वाला मामला कहते हैं। केंद्र सरकार को सात दिन के भीतर कोर्ट में जवाब देना है। निरुपम ने जोर देकर कहा कि वक्फ कानून बनाते समय संविधान में दी गई धार्मिक स्वतंत्रता को प्रभावित नहीं किया गया। बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार स्पष्ट है। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ के नाम पर कुछ लोग लूट मचा रहे हैं और इसका गलत फायदा उठा रहे हैं। उनका कहना है कि वक्फ बोर्ड का उद्देश्य गरीब मुस्लिम विधवाओं और बच्चों को लाभ पहुंचाना है, लेकिन इसका दुरुपयोग हो रहा है। केंद्र सरकार अदालत में इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करेगी। निरुपम ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट को धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करने की बजाय संवैधानिक दायरे में रहना चाहिए।”

वक्फ यह संवैधानिक कानून है, धार्मिक नहीं, यह मुल्क का कानून है: मुख्तार अब्बास नकवी

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने शुक्रवार को वक्फ कानून का विरोध करने वालों पर तंज कसा। उन्होंने कहा है कि वक्फ कानून किसी मजहब का कानून नहीं है। भाजपा नेता ने वीडियो बयान में कहा कि वक्फ की लूट पर वैधानिक छूट चाहने वाली लूट की लंपट लामी लामबंद हुई है। उन्होंने कहा कि वक्फ कानून धार्मिक कानून नहीं है। यह संवैधानिक कानून है, यह मुल्क का कानून है। यदि आप मुल्क के कानून में भी मजहब के हिसाब से एंट्री और नो एंट्री का बोर्ड लगाएंगे, तो यह न समाज के लिए अच्छा है और न ही संवैधानिक सिद्धांत के लिए अच्छा है, बल्कि समाज के बिखराव और टकराव की भावनाओं को बढ़ाने वाला है। उन्होंने आगे कहा कि अफसोस की बात है कि कुछ लोग हर सांप्रदायिक फसाद में सियासी मफाद की तलाश करते हैं। उन्होंने कहा कि वक्फ का जो संशोधन हुआ है, यह धार्मिक आस्था के संरक्षण और प्रशासनिक व्यवस्था के सुधार का है। यह मजहब का नहीं, मुल्क का कानून है। बता दें कि मुख्तार अब्बास नकवी ने बुधवार को वक्फ कानून को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कांग्रेस पार्टी पर जुबानी हमला बोला था। उन्होंने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए ममता सरकार पर आरोप लगाया था कि वह राज्य में बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा को नजरअंदाज कर रही हैं और क्रिमिनल-कम्युनल-क्रूर कारीगरों के हाथों की कठपुतली बन चुकी हैं। नकवी ने कांग्रेस और गांधी परिवार पर भी जुबानी हमला बोला था। नेशनल हेराल्ड केस में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद कांग्रेस की ओर से किए जा रहे विरोध प्रदर्शन पर भी नकवी ने टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस कुनबे की करतूतों को क्रांति का ताबूत बनाकर पेश करने की कोशिश कर रही है। यह जो कार्रवाई हो रही है, वह किसी राजनीतिक द्वेष का हिस्सा नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार पर आधारित वैधानिक प्रक्रिया है। कोर्ट ने पहले ही इस पर निर्देश दिए हुए हैं।

ट्रंप के टैरिफ से अर्थव्यवस्था कमजोर होगी, महंगाई बढ़ेगी लेकिन, उथल-पुथल के बीच IMF ने दी राहत

वाशिंगटन अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने गुरुवार को वैश्विक व्यापार में मची उथल-पुथल के बीच राहत भरी खबर दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका में बढ़ते टैरिफ से वैश्विक अर्थव्यवस्था कमजोर होगी और इस वर्ष महंगाई भी बढ़ेगी लेकिन ये वैश्विक मंदी का कारण नहीं बनेंगे। उन्होंने ये भी कहा कि बढ़ते व्यापारिक तनाव और वैश्विक व्यापार प्रणाली में हो रहे बड़े बदलावों के चलते IMF अपनी आर्थिक विकास दर के पूर्वानुमानों में गिरावट करेगा, लेकिन वैश्विक मंदी की आशंका नहीं है। आईएमएफ के अगले सप्ताह जारी किए जाने वाले अनुमानों के आधार पर उन्होंने यह बात कही। जॉर्जीवा ने कहा कि अमेरिका की ओर से लगाए गए नए टैरिफ और चीन तथा यूरोपीय संघ की ओर से की गई जवाबी कार्रवाई ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था को झकझोर दिया है। इससे व्यापार नीति में “अत्यधिक अनिश्चितता” और वित्तीय बाजारों में “बेहद अस्थिरता” देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा, “व्यवधानों की कीमत चुकानी पड़ती है… हमारे नए विकास अनुमान में महत्वपूर्ण गिरावट शामिल होगी लेकिन मंदी नहीं होगी।” जॉर्जीवा ने बृहस्पतिवार को कहा कि अमेरिकी प्रशासन द्वारा शुल्क की दरों में की गई वृद्धि ने वैश्विक अनिश्चितता को बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘आयात शुल्क वैश्विक वृद्धि को धीमा कर देंगे और महंगाई बढ़ेगी लेकिन ये दुनिया भर में मंदी का कारण नहीं बनेंगे।’’ जॉर्जीवा ने कहा कि वैश्विक व्यापार प्रणाली में बड़े बदलावों से विश्व अर्थव्यवस्था के जुझारूपन की परीक्षा ली जा रही है जिससे वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल मचने का खतरा है। IMF की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ नीति और वैश्विक बाजार में हलचल के चलते दुनिया भर के केंद्रीय बैंकर और वित्त मंत्री वाशिंगटन की बैठक में भाग लेने वाले हैं। उन्होंने कहा कि शुल्क अनिश्चितता का कारण बनते हैं, जो महंगा पड़ सकता है। सप्लाई चैन की जटिलता से कई देशों में शुल्क के कारण एक-एक वस्तु की लागत प्रभावित हो सकती है। व्यापार बाधाओं में वृद्धि से भी वृद्धि पर तत्काल प्रभाव पड़ता है, तथा यद्यपि इससे घरेलू उत्पादन में वृद्धि हो सकती है लेकिन इसे ऐसा होने में समय लगता है। हालांकि, आईएमएफ प्रमुख ने अमेरिकी प्रशासन की कुछ चिंताओं को भी दोहराया। उन्होंने देशों से शुल्क कम करने और व्यापार में अन्य बाधाओं को कम करने का आह्वान किया। आईएमएफ का पूर्ण आकलन अगले मंगलवार को जारी किया जाएगा। आर्थिक स्थिति और बाजार पर चिंता जॉर्जीवा ने कहा कि विश्व की वास्तविक अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत है—मजबूत श्रम बाजार और स्थिर वित्तीय प्रणाली अभी भी है। लेकिन उन्होंने यह भी आगाह किया कि अगर आर्थिक मंदी को लेकर नकारात्मक धारणाएं बनीं, तो इसका असर वास्तविक आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा, “संकट के दौर में मैंने यह सीखा है कि धारणा जितनी महत्वपूर्ण होती है, उतनी ही हकीकत भी होती है। अगर धारणा नकारात्मक हो जाए, तो वह अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है।” टैरिफ का असर और संभावित महंगाई IMF ने जनवरी में 2025 और 2026 के लिए वैश्विक विकास दर 3.3% रहने का अनुमान लगाया था। अब यह संस्था मंगलवार को अपना नया ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक’ जारी करेगी। जॉर्जीवा ने यह नहीं बताया कि नए अनुमानों में कितनी गिरावट होगी, लेकिन उन्होंने चेताया कि यह गिरावट “महत्वपूर्ण” होगी। महंगाई को लेकर उन्होंने कहा कि टैरिफ से कुछ देशों में उपभोक्ता और उत्पादक कीमतों में इजाफा हो सकता है, जबकि कहीं-कहीं खर्च में कटौती से महंगाई घट भी सकती है। कुल मिलाकर, कुछ देशों के लिए महंगाई बढ़ने का अनुमान है। अमेरिका और चीन से की सहयोग की अपील जॉर्जीवा ने कहा कि व्यापार तनाव कोई नया नहीं है; अमेरिका, चीन और अन्य देशों के बीच शुल्क और गैर-शुल्क बाधाएं पहले से बनी हुई थीं, लेकिन अब स्थिति और बिगड़ गई है। उन्होंने आग्रह किया कि अमेरिका और चीन, जो विश्व की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं, मिलकर एक निष्पक्ष और नियम-आधारित व्यापार व्यवस्था के लिए समाधान खोजें, क्योंकि इससे छोटे देशों पर भी असर पड़ता है। उन्होंने कहा, “संरक्षणवाद दीर्घकाल में उत्पादकता को नुकसान पहुंचाता है, खासकर छोटे देशों में। उद्योगों को प्रतिस्पर्धा से बचाने की कोशिश नवाचार और उद्यमिता को भी नुकसान पहुंचाती है।” IMF की सिफारिशें IMF प्रमुख ने देशों से आग्रह किया कि वे मौद्रिक नीति में लचीलापन बनाए रखें, वित्तीय बाज़ारों की निगरानी करें, और आर्थिक सुधारों को जारी रखें। विकासशील देशों को अपने विनिमय दरों में लचीलापन बनाए रखने की सलाह दी गई, जबकि समृद्ध देशों से कमजोर देशों को सहायता बनाए रखने की अपील की गई। उन्होंने कहा, “हमें अधिक लचीली वैश्विक अर्थव्यवस्था की जरूरत है, न कि विभाजन की ओर बहाव की। सभी देशों, बड़े हों या छोटे, को इस अनिश्चित दौर में वैश्विक अर्थव्यवस्था को मज़बूत बनाने में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।”

यूपी-बिहार समेत कई राज्यों में बारिश, आंधी तूफान व बिजली कड़कने की चेतावनी जारी की गई, 70 की स्पीड से चलेंगी तेज हवाएं

नई दिल्ली देशभर में पड़ रही गर्मी के बीच उत्तर भारत के कई राज्यों में मौसम ने करवट ली है। यूपी-बिहार समेत कई राज्यों में बारिश, आंधी तूफान व बिजली कड़कने की चेतावनी जारी की गई है। हालांकि, राजस्थान में अभी हीटवेव चल रही है और 20 अप्रैल के बाद खत्म होने के आसार हैं। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र और उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में 18-20 अप्रैल के बीच बारिश, आंधी तूफान का अलर्ट है। इसके अलावा, जम्मू कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश में 18 और 19 अप्रैल को भारी बारिश होने वाली है। 20 अप्रैल को भी बरसात देखने को मिलेगी। इस दौरान कई राज्यों में 70 की स्पीड से तेज हवाएं भी चलने वाली हैं। पिछले 24 घंटे के मौसम की बात करें तो पश्चिम बंगाल, सिक्किम, ओडिशा, झारखंड, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में आंधी तूफान देखा गया। गंगीय पश्चिम बंगाल, उत्तरी ओडिशा, पूर्वी उत्तर प्रदेश में ओले गिरे। ओडिशा, नगालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा में भारी बरसात हुई। पूर्वी राजस्थान, पश्चिमी राजस्थान में हीटवेव की स्थिति देखी गई। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की वजह से जम्मू कश्मीर, लद्दाख में 18-21 अप्रैल, हिमाचल प्रदेश में 19 अप्रैल, उत्तराखंड में 18 और 20 अप्रैल को बारिश, आंधी तूफान का अलर्ट है। साथ ही, 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चलने वाली हैं। जम्मू कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश में 18, 19 और उत्तराखंड में 19 अप्रैल को ओले गिरने की चेतावनी जारी की गई है। अन्य राज्यों की बात करें तो पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश में 18 अप्रैल को आंधी तूफान, बारिश, बिजली कड़कने की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान यहां 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं भी चलेंगी। वहीं, 19 और 20 अप्रैल को भी इन राज्यों में आंधी पानी देखने को मिलेगा। पश्चिमी राजस्थान में 18 और 19 अप्रैल को धूल भरी आंधी चलने का अनुमान है। पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो सब हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम में 18 व 19 अप्रैल, गंगीय पश्चिम बंगाल, झारखंड, साउथईस्ट बिहार, उत्तरी ओडिशा में 18 अप्रैल, अरुणाचल प्रदेश में 22-24 अप्रैल, असम, मेघालय में 18, 19 और 21-24 अप्रैल, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में 24 अप्रैल को भारी बरसात होने जा रही है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल, सिक्किम में 18 अप्रैल, ओडिशा में 18 और 21 अप्रैल को आंधी पानी देखने को मिलेगा। साथ ही 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं भी चलेंगी। उत्तर पश्चिम भारत के तापमान में अगले 24 घंटे तक कोई बदलाव नहीं आएगा, लेकिन फिर तीन दिनों तक तीन डिग्री तक गिरावट देखने को मिलेगी। उसके बाद फिर से पारा चढ़ेगा और दो से तीन डिग्री सेल्सियस गर्मी और बढ़ जाएगी। मध्य भारत की बात करें तो अगले पांच दिनों तक अधिकतम तापमान दो से तीन डिग्री सेल्सियस बढ़ सकता है। पूर्वी भारत के मौसम की बात करें तो इसमें तीन से पांच डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होने जा रही है।

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