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दो बार की ट्रेनिंग के बाद भी मतदान का समय नहीं बता पाए कर्मचारी, 98 हो गए फेल.

ECI; Sahara Samachaar; Bhopal; MP Electios;

Even after two rounds of training, the employee failed to specify the voting time, resulting in 98 failures. पहले दिन चुनाव कराने 3276 कर्मचारियों ने दी परीक्षा, दोबारा लेना पड़ेगी ट्रेनिंग. भोपाल के 9018 कर्मचारियों की तीन दिन चलेगी ट्रेनिंग, ट्रेनिंग में फिर गायब रहे सौ अधिकारी-कर्मचारी साकिब कबीरभोपाल। जिले की बैरसिया, नरेला, उत्तर, मध्य, दक्षिण पश्चिम, गोविंदपुरा और हुजूर विधानसभा में विधायक का चुनाव कराने के लिए अधिकारी और कर्मचारियों की दूसरे दौर की ट्रेनिंग दी जा रही है। जिसके तहत सातों विधानसभा के 9 हजार 18 कर्मचारियों को ट्रेनिंग सोमवार से शुरु कर दी गई है। पहले दिन की ट्रेनिंग में 3 हजार 276 कर्मचारी पहुंचे, जिनकी ट्रेनिंग होने के बाद परीक्षा ली गई। इस परीक्षा में 98 कर्मचारी फेल हो गए। जो पेपर में दिए गए 25 में से आठ सवालों के जवाब तक नहीं दे पाए। दो बार ट्रेनिंग लेने वाले अधिकारी-कर्मचारी परीक्षा में मतदान का समय और ईवीएम मशीन को क्लियर करने का तरीका तक नहीं बता पाए। अब मंगलवार को इन कर्मचारियों को दोबारा से ट्रेनिंग लेकर परीक्षा देना पड़ेगी।सोमवार को दूसरे दौर की ट्रेनिंग का सुबह 8 बजे से पहला सत्र शुरू हुआ, जो दोपहर 2 बजे तक चला। इस दौरान उन्हें ईवीएम, मॉक पोल, वोटिंग, मतदान सामग्री लेने से लेकर जमा कराने तक की बारिकियां सिखाई गई। इसके बाद कर्मचारियों ने परीक्षा दी। इसके जरिए यह पता लगाया गया कि कर्मचारियों ने ट्रेनिंग को कितनी गंभीरता से लिया है। दोपहर 2 बजे के बाद दूसरा सत्र शुरू हो गया, जो शाम 7 बजे तक चला। मोतीलाल विज्ञान कॉलेज और महारानी लक्ष्मीबाई कॉलेज में प्रत्येक सत्र में 900-900 कर्मचारियों को चुनाव से जुड़ी हर जानकारी दी जा रही है। 105 मास्टर ट्रेनर्स कर्मचारियों को ट्रेनिंग दे रहे हैं। मंगलवार और बुधवार को भी कर्मचारियों को दो सत्र में ट्रेनिंग देकर परीक्षा ली जाएगी। पी-2 और पी-3 के लिए यह फाइनल ट्रेनिंगपी-2 और पी-3 यानी मतदान कराने वाले कर्मचारियों के लिए यह फाइनल ट्रेनिंग है। इसके बाद उन्हें प्रशिक्षण नहीं मिलेगा। इसलिए उन्हें चुनाव आयोग की बुकलेट भी दी जाएगी। पीओ यानी पीठासीन अधिकारी और पी-1 यानी मतदान अधिकारी को एक बार फिर 13 और 14 नवंबर को फाइनल ट्रेनिंग दी जाएगी। कर्मचारियों को नहीं पता मॉकपोल का समयवोटिंग से पहले यदि कंट्रोल यूनिट, बैलेट यूनिट या वीवीपेट मशीन खराब हो जाए तो आप क्या करेंगे? मतदान से जुड़े इस तरह के 25 प्रश्न कर्मचारियों से ट्रेनिंग के बाद पूछे गए। कई कर्मचारी रियल मतदान शुरु होने के पहले मॉकपोल का समय भी नहीं बता पाए। इस बार सुबह सात से शाम छह बजे तक मतदान किया जाएगा। जिला पंचायत सीईओ ऋतुराज सिंह ने बताया कि जो कर्मचारी इस परीक्षा में फेल होंगे, उन्हें दोबारा से ट्रेनिंग लेकर परीक्षा देना पड़ेगी।

तीन दिन में 113 टीम 2510 बुजुर्ग और दिव्यांगों के घर जाकर डलवाएंगी वोट.

Postal Ballot; Elections; ECI; Sahara Samachaar;

In three days, 113 teams will visit the homes of 2510 senior citizens and disabled individuals to get their votes cast. दस दिन पहले कराई कर्मचारियों, बुजुर्ग और दिव्यांगों की वोटिंग. आज से सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक जाएंगी टीमपोस्टल बैलेट से मतदान करेंगे बुजुर्ग और दिव्यांग. साकिब कबीरभोपाल। पहली बार निर्वाचन आयोग ने अस्सी से अधिक उम्र वाले बुजुर्ग और दिव्यांगों को पोस्टल बैलेट से घर से ही मतदान करने की सुविधा मुहैया कराई है। जिसके तहत सात, आठ और 9 नवंबर को सुबह 9 से शाम पांच बजे तक मतदान दल इन लोगों के घर पहुंचकर वोट डलवाएंगे। जिसके लिए विधानसभा में उम्मीदवारों के हिसाब से पोस्टल बैलेट जारी कर दिए गए हैं। मंगलवार से जिले की सातों विधानसभा में 113 मतदान दल घर-घर जाकर मतदान कराएंगे। पोस्टल बैलेट में उम्मीदवार के चुनाव चिन्ह पर सील लगाकर पेटी में डाला जाएगा। इन पेटियों को ट्रेजरी में जमा किया जाएगा। जो मतगणना के दिन खोली जाएंगी। जिले में 80 से 100 साल के बीच भोपाल में 23 हजार 506 मतदाता है, जबकि 147 मतदाता शतायु हैं। इसके साथ ही जिले में 7 हजार 579 दिव्यांग मतदाता हैं। बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं को इस बार घर पर ही पोस्टल बैलेट से मतदान करने की सुविधा दी गई थी। जिसके तहत 2311 बुजुर्गों ने घर से मतदान करने का आवेदन किया, जबकि 199 दिव्यांगों ने घर से मतदान करने की सहमति दी। मंगलवार से गुरुवार तक इन लोगों से वोटिंग कराई जाएगी। इस केटेगरी के 28 हजार 575 मतदाताओं ने पोस्टल बैलेट से मतदान करने का आवेदन ही नहीं किया है। अब इन लोगों को 17 नवंबर को सुबह 7 से शाम छह बजे तक ही मतदान करना पड़ेगा। मतदान की गोपनीयता रहेगी बरकरारजिला निर्वाचन अधिकारी आशीष सिंह ने बताया कि पहली बार बुजुर्ग और दिव्यांगों को पोस्टल बैलेट से मतदान कराया जा रहा है। घर जाकर वोटिंग कराने वाला दल इस बात का ध्यान रखेगा कि मतदान करने वाला बुजुर्ग या दिव्यांग पूरी गोपनीयता के साथ वोट डालें। पोस्टल बैलेट पर सील लगाने के बाद उसे मत पेटी में डालकर सुरक्षित रखा जाएगा।

विधानसभा क्षेत्र में गांव-गांव तक स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क पहुंची है। – रामेश्वर शर्मा

Rameshwar Sharma; Bhopal; Huzur; BJP; Sahara Samachaar;

In the Assembly, health, education, and roads have reached from village to village. – Rameshwar Sharma उदित नारायणभोपाल। गांव गरीब और किसान कल्याण के लिए विगत 18 वर्षों में जो काम भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किया है उतना काम पहले किसी सरकार ने नहीं किया इस कारण से सम्पूर्ण प्रदेश सहित हुजूर विधानसभा क्षेत्र में गांव-गांव तक स्वास्थ्य शिक्षा और सड़क पहुंची है। इसलिए हम आपका वोट अधिकार के साथ एक बार फिर मांगने आए हैं। अतः 17 नवंबर के दिन कमल का बटन दबाकर हुजूर और मध्य प्रदेश में भाजपा को पुनः विजयी बनाना है। यह बात जनसंपर्क के दौरान भाजपा प्रत्याशी रामेश्वर शर्मा ने कही। भाजपा प्रत्याशी रामेश्वर शर्मा ने अपने कार्यकाल में किए गए कार्यों का विस्तार से उल्लेख करते हुए कहा कि मेरा प्रयास रहता है कि विकासपरक सोच के साथ जन भावनाओं का सम्मान करते हुए आगे बढ़ा जाए। यही वजह है कि आज जनता का आशीर्वाद निरंतर मुझ पर बना हुआ है। क्षेत्र का विकास मेरी पहली प्राथमिकता है। मैंने एक सेवक के रूप में हुजूर परिवार का मन जीता है। इसलिए अब परिवारजन मुझे विजयी बनाएगें। इन स्थानों पर रहा जनसंपर्कहुजूर भाजपा प्रत्याशी रामेश्वर शर्मा विधानसभा क्षेत्र में जनसंपर्क के दौरान विभिन्न स्थानों पर नागरिकों से भेंट कर अन्य चुनावी गतिविधियों में भी शामिल हो रहे हैं। इसी क्रम में सोमवार को उनके द्वारा फंदा मंडल कार्यालय का शुभारंभ, वार्ड क्रं. 83 व 84 बूथ की बैठक के साथ साथ अन्य बैठकों में सम्मिलित हुए। सोमवार को इन स्थानों पर हुआ जनसम्पर्क हुजूर प्रत्याशी रामेश्वर शर्मा ने रविवार को क्षेत्र के नवीन बस्ती, बैरागढ़ कलां, फंदा, तूमड़ा, वैभव मैरिज गार्डन, महाबली नगर, कोलार, श्रद्धा मैरिज गार्डन, सीटीओ, प्रताप वार्ड, वार्ड क्र. 01, अर्जुन वार्ड, गोंडबस्ती, नई बस्ती सेक्टर -3 (बंजारा बस्ती), शहीद भगत सिंह, ऋषि विलास कालोनी, पतंजली कालोनी, द ब्लेयर कालोनी, कटारा हिल्स, भगवती नगर, स्वामी विवेकानंद परिसर, गौरीशंकर परिसर, सिल्वर स्टेट, पार्क सिटी, रजत गोल्डन नेस्ट, गोल्ड विला, स्प्रिंगवैली ड्यू, स्प्रिंगवैली जुनिपर, स्प्रिंगवैली, प्राईड सिटी, आमरीन होम्स, सागर गोल्डन पॉम, एटलांटिस सिटी, हेवंस लाईफ, कस्तूरी रॉयल पार्क, सिग्नेचर 360, पवित्र परिसर, सिग्नेचर सिटी, श्री कृष्णा हाईटस, रामायण साउथ एवेन्यू, त्रिभुवन विहार, रामायण साउथ एवेन्यू फेस-1 स्थानों पर जनसंपर्क कर नागरिकजनों से भाजपा को जिताने की अपील की।

प्रदेश की 62 सीटों पर कांग्रेस और भाजपा में कांटे की टक्कर.

Congress; BJP; Kamalnath; Sahara Samachaar;

Congress and BJP are in a tough competition on 62 seats in the state उदित नारायणभोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। Un प्रदेश में इस बार चुनावी बिसात पर किसकी होगी जीत और कौन रहेगा खाली हाथ.?, यह सवाल प्रदेश ही नहीं देश भर के जेहन में हैं। प्रदेश की 230 सीटों पर हो रहे चुनाव में भाजपा अभी कांग्रेस की तुलना में ज्यादा मजबूत नजर आ रही है। दोनों की मजबूत सीटों की बात की जाए तो भाजपा में यह संख्या 98 है। वहीं, कांग्रेस 70 सीटों पर बढ़त बनाए दिख रही है। दोनों में अभी 28 सीटों का अंतर है। बड़ी बात यह है कि फिलहाल 62 सीटें ऐसी हैं जहां भाजपा और कांग्रेस दोनों ही कांटे के मुकाबले में है। निश्चित रूप ये इन्ही सीटों पर जीत और हार से ही सत्ता का निर्धारण होगा।कुल सीट- 230भाजपा- 98कांग्रेस- 70कांटे की टक्कर वाली सीट- 62 कांटे की लड़ाई वाली इन सीटों पर दोनों ही दलों के बागी प्रत्याशियों के साथ बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी भी निर्णायक भूमिका में हैं। बसपा और सपा तो इनमें से कुछ सीटों पर सिर्फ खेल बिगाडने की नहीं बल्कि जीतने की भी स्थिति में आ सकती हैं। हालांकि, दोनों दलों के बागी जीतने की स्थिति में न होकर सिर्फ पार्टी को नुकसान पहुंचाते दिखाई दे रहे हैं। हमारी टीम के आंकड़ों के अनुसार, भाजपा की इन सीटों पर जीत दर्ज करने की स्थिति में हैइंदौर 1, इंदौर 2, इंदौर 4, महू, सांवेर, उज्जैन दक्षिण, पंधाना, बागली, रतलाम शहर, जावरा, आलोट, मंदसौर, मल्हारगढ, सुवासरा, गरोठ, मनासा, सुसनेर, खंडवा, हरसूद, मन्धाता, नेपानगर, खरगोन, पानसैमल, राजपुर, जोबट, पेटलावद, धरमपुरी, देवास, मनावर, सतना, नागौद, रामपुर बाघेलान, रीवा, सिरमौर, मनगंवा, पुष्पराजगढ, धौहनी, जैतपुर, देवसर, मानपुर, अनूपपुर, सागर, खुरई, नरियावली, रहली, जतारा, एक ओर भाजपा जहां सत्ता में वापसी के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। वहीं, कांग्रेस भी मैदानी मोर्चें पर सब कुछ दांव पर लगाए है। कुल मिलाकर सियासी दल ही नहीं सियासी पंडित भी यह मानकर चल रहे हैं कि इस बार प्रदेश में लड़ाई कांटे की है। बीजेपी की बढ़त वाली सीटेमलहरा, महाराजपुर, दमोह, पथरिया, हटा, पन्ना, गुनौर, पवई, ग्वालियर ग्रामीण, ग्वालियर, बमौरी, पिछोर, करैरा, दतिया, भांडेर, सेवढा, भिंड, मेहगांव, सुमावली, दिमनी, अंबाह, विजयराघवगढ बहोरीबंद शाहपुर देवास बालाघाट लांजी परसवाडा वारासिवनी कटंगी बरघाट गोटेगांव जबलपुर कैंट बरगी, पाटन नरसिंहपुर नरेला हुजूर, गोविंदपुरा बैरसिया सिलवानी सांची कुरवाई सिरोंज शमसाबाद सारंगपुर बुधनी सोहागपुर पिपरिया सिवनी मालवा बैतूल भैंसदेही आमला।वहीं, इन सीटों पर जनता जर्नादन कांग्रेस का हाथ मजबूत करती नजर आ रही है- कांग्रेस की जीत की संभावना वाली सीटराउ, देपालपुर, तराना, नागदा खाचरौद, सैलाना, नीमच शाजापुर, कालापीपल, भगवानपुरा, कसरावद, भीकनगांव, बडवानी, सेंधवा, झाबुआ, थांदला, कुक्षी, गंधवानी, सोनकच्छ, रैगांव, अमरपाटन, मउगंज, चुरहट, सिंगरौली, चितरंगी, ब्यौहारी, बांधवगढ, कोतमा, बंडा, टीकमगढ़, पृथ्वीपुर, खरगापुर, चंदली, राजनगर, जबेरा, ग्वालियर पूर्व, भितरवार, चाचौड़ा, राघौगढ़, मुंगावली, चंदेरी, पोहरी, विजयपुर, अटेर, लहार, जौरा, डबरा, बड़वारा, डिंडोरी, बिछिया, मंडला, बैहर, सिवनी, केवलारी, तेंदुखेडा, गाडरवाडा, छिंदवाडा, पांर्ढुना, परासिया, सौंसर, जबलपुर पूर्व, जबलपुर पश्चिम, पनागर,लखनादौन, उदयपुरा, राजगढ, खिलचीपुर, ब्यावरा, आष्टा, मुलताई, घोडाडोंगरी। इन सीटों पर फाइटइंदौर- 3, इंदौर -5, उज्जैन उत्तर, बडनगर, घट्टिया, महिदपुर, रतलाम ग्रामीण, जावद, शुजालपुर, आगर, खातेगांव, बुरहानपुर, महेश्वर, बड़वाह, राजपुर, अलीराजपुर, धार, बदनावर, हाटपिपल्या, चित्रकूट, मैहरसेमरिया, त्योंथर, देवतालाब, गुढ़, सीधी, सिंहावल, देवरी, बीना, सुरखी, निवाडी, छतरपुर, बिजावर, ग्वालियर दक्षिण, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, कोलारस, गोहद, मुरैना, सबलगढ, श्योपुर, बड़वारा, चौरई, जबलपुर उत्तर, सिहोरा, अमरवाडा, भोपाल उत्तर, भोपाल दक्षिण पश्चिम, भोपाल मध्य, भोजपुर, विदिशा, गंजबासौदा, नरसिंहगढ, सीहोर, इछावर, होशंगाबाद, हरदा, टिमरनी।

DFO श्योपुर के विरुद्ध RTI में जानकारी को विधि विरुद्ध तरीके से रोकने के लिए RTI Act के तहत ₹25000 जुर्माने/अनुशासनिक कार्रवाई.

RTI; Sahara Samachaar; Sheopur; State Information;

A penalty of ₹25,000 under the RTI Act for unlawfully obstructing information in response to an RTI against the DFO of Sheopur. भोपाल, श्योपुर DFO श्री सी एस चौहान के विरुद्ध RTI में जानकारी को विधि विरुद्ध तरीके से रोकने के लिए RTI Act u/s 20 के तहत ₹25000 जुर्माने/अनुशासनिक कार्रवाई का Show Cause Notice, SCN जारी किया गया। वन विभाग, श्योपुर में एक कर्मचारी के सेवानिवृत्ति/नियुक्ति आदेश शैक्षणिक योग्यता की जानकारी मांगी थी। वन विभाग ने पहले जानकारी को रोका फिर कहा कि नियुक्ति के आदेश कार्यालय में नहीं है। RTI जानकारी आवेदक को उपलब्ध कराई गई। शासकीय दस्तावेजों का कार्यालय से गायब हो जाना गंभीर विषय है आयोग द्वारा सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के तहत जांच शुरू की गई है।स्टेट इनफार्मेशन कमिश्नर श्री राहुल सिंह ने यह जानकारी अपने X हैंडल से ट्वीट कर दी.

BJP को लगा बड़ा झटका, पूर्व विधायक ने थामा कांग्रेस का हाथ.

Congress; BJP; Kamalnath; Sahara Samachaar;

BJP suffered a major setback as a former legislator joined the Congress party. मनीष त्रिवेदी – सहरा समाचारमुरैना। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में सभी दलों में नेताओं का पार्टी छोड़ने का क्रम लगातार चला आ रहा है। चुनावो में अब ज्यादा दिन नहीं रह गए है. चम्बल क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी को एक और झटका लगा, मुरैना जिले की अंबाह विधानसभा से पूर्व विधायक व भाजपा के प्रदेश कार्य समिति सदस्य कमलेश सुमन ने शनिवार को अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। इसी बीच श्री सुमन ने भोपाल में पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के सामने कांग्रेस की सदस्यता ले ली है। इस्तीफे के बाद अंबाह विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी कमलेश जाटव की मुश्किलें बढ़ती है या घटती है, या आगे क्या समीकरण बनते है. यह तो वक़्त ही बताएगा.

प्रत्याशी के समर्थन में बैठक करने पर एफआईआर दर्ज.

FIR; Bhopal; Sahara Samachaar;

Filing an FIR for holding a meeting in support of a candidate. साकिब कबीरभोपाल। रिटर्निंग अधिकारी एवं एसडीएम हुजुर आशुतोष शर्मा द्वारा बैरागढ़ क्षेत्र के कई मतदान केन्द्रों का निरीक्षण किया गया। इस दौरान उनके साथ हुजूर विधानसभा के सामान्य प्रेक्षक तलत परवेज भी साथ रहे। निरीक्षण के दौरान नवयुवक सभा स्कूल बैरागढ़ में बूथ क्र. 60, 61, 62, 63 एवं 64 का निरीक्षण किया गया एवं आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु रिटर्निंग अधिकारी हुजूर को निर्देशित किया। निरीक्षण के दौरान नवयुवक सभा स्कूल के कैम्पस के अंदर हॉल में अनाधिकृत रूप से 25 से 30 लोग उपस्थित थे । ये एक प्रत्याशी के समर्थन में बैठक कर रहे थे। उनके पास वहां उपस्थित होने की कोई वैधानिक अनुमति न होना एवं ऐसी गतिविधि आदर्श आचरण संहिता का उल्लंघन है। अतः उक्त प्रकरण पर निर्वाचन नियमों के अनुरूप आवश्यक कार्यवाही करने आरओ हुजूर द्वारा थाना प्रभारी, थाना, बैरागढ़ को नवयुवक सभा स्कूल में बिना अनुमति के एकत्रित/मीटिंग आयोजित करने के संबंध में कार्यवाही करने के लिए थाना प्रभारी को निर्देशित किया। उक्त पत्र के पालन में थाना प्रभारी द्वारा नवयुवक सभा स्कूल के सह सचिव दिनेश वाधवानी, कैलाश साधवानी, सूरज यादव (अध्यक्ष ऑटो यूनियन संघ), भूपेन्द्र गुर्जर (विहिप) एवं 20 अज्ञात व्यक्तियों के विरूद्ध आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के कारण प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफ.आई.आर.) दर्ज की। प्रेक्षक द्वारा आरओ हुजूर को निर्देशित किया गया कि क्षेत्र का सघन निरीक्षण अपनी टीम के द्वारा कराया जाना सुनिश्चित करें एवं पुनः उक्त प्रकार की परिस्थिति निर्मित होने पर तत्काल नियमानुसार आदर्श आचार संहिता उल्लंघन की कार्यवाही करें। एसडीएम हुजुर आशुतोष शर्मा ने ने सभी राजनीतिक दलों एवं अभ्यर्थियों से अपील की है कि आचार संहिता का पालन करें अन्यथा कार्यवाही की जाएगी

96 प्रत्याशी चुनावी मैदान में, 25 साल से कांग्रेस का गढ़ बनी उत्तर विधानसभा में चाचा भतीजा का मुकाबला, निर्दलीय भी, आप भी काटेगी कांग्रेस का वोट.

MP Elections; Elections; MP; Congress; BJP; App; Sahara Samachaar;

With 96 candidates in the electoral arena, a face-off between uncle and nephew in the Uttar Legislative Assembly, a stronghold of the Congress for 25 years. Independents are also in the fray. AAP also cut the Congress vote. नाम वापसी के लास्ट दिन तक 21 ने नाम वापस लिए, 7 उत्तर से, अब आज से चुनव प्रचार पकड़ेगा और जोर, जोर आजमाइश का दौर शाकिब कबीरभोपाल, 25 साल से कांग्रेस का गढ़ बनी उत्तर विधानसभा सीट में विधायक आरिफ अकील के चुनाव न लड़ने से यहां घर में ही फूट पड़ गई। आरिफ के भाई आमिर अकील जो अब तक अपने भाई का चुनाव मैनेजमेंट संभालते थे, वे खुद अपने भतीजे आतिफ अकील के खिलाफ खड़े हो गए हैं। वहीं एक और निर्दलीय नासिर इस्लाम और आप पार्टी के मौ. सउद भी यहां चुनाव लड़ रहे हैं। आरिफ अकील के हटने और इन लोगों के खड़े होने से इस सीट के समीकरण गड़बड़ा गए हैं। इसका फायदा भाजपा को मिल सकता है। हुजूर का संकट खत्म: जितेंद्र डागा के नाम वापस लेने से हुजूर विधानसभा का संकट खत्म हो गया है। डागा कहीं न कहीं कांग्रेस का ही वो काटते। इनके बैठने के बाद यहां कांग्रेस प्रत्याशी नरेश ज्ञानचंदानी ने राहत की सांस ली है। नाम वापसी के बाद नरेश की आंखों में आंसू आ गए। मैदान में 96 प्रत्याशी, 41 निर्दलीय, 21 ने नाम वापस, 12 रिजेक्टसात विधानसभा सीट पर 17 नवंबर को होने वाले मतदान के लिए 96 प्रत्याशी मैदान मेें हैं। नाम वापसी के आखिरी दिन 19 लोगों ने नाम वापस लिए हैं। सबसे ज्यादा 7 नाम उत्तर से वापस हुए हैं। इसके बाद 4 नाम दक्षिण पश्चिम से। दो दिनों में 21 ने नाम वापस लिए हैं और 12 के फॉर्म रिजेक्ट हुए हैं। इसमें भाजपा, कांग्रेस, सपा, बसपा, आप और अन्य दलों व 41 निर्दलीय प्रत्याशी हैं। अब ये फाइनल तस्वीर- बैरसिया- 9 प्रत्याशी, 1 निर्दलीयउत्तर- 15 प्रत्याशी, 8 निर्दलीयनरेला- 23 प्रत्याशी, 14 निर्दलीयदक्षिण पश्चिम- 11 प्रत्याशी, 5 निर्दलीयभोपाल मध्य- 15 प्रत्याशी, 8 निर्दलीयगोविंदपुरा-17 प्रत्याशी , 4 निर्दलीयहुजूर- 6 उम्मीदवार, 1 निर्दलीय इन्होंने लिए नाम वापस- इस विधानसभा में निरस्त हुएहुजूर-3गोविंदपुरा-2उत्तर-1दक्षिण-2मध्य-3नरेला-1ल

मध्य प्रदेश के 10 जिलों में बनाए गए 103 सहायक मतदान केन्द्र।

103 auxiliary polling stations created in 10 districts of Madhya Pradesh. 1550 से अधिक मतदाता संख्या वाले मतदान केंद्रों पर भारत निर्वाचन आयोग के अनुमोदन पर बने सहायक मतदान केंद्र। संतोष सिंह तोमर भोपाल। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए 10 जिलों के 1550 से अधिक मतदाता संख्या वाले मतदान केंद्रों पर 103 सहायक मतदान केन्द्र बनाने के अनुमोदन प्रदान करने के बाद मध्य प्रदेश निर्वाचन आयोग ने इसे अमली जामा पहना दिया। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन ने बताया कि मध्य प्रदेश के 10 जिलों में 1550 से अधिक मतदाता संख्या वाले मतदान केंद्रों पर 103 सहायक मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इसमें भोपाल, छतरपुर, देवास, ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर, कटनी, मुरैना, नरसिंहपुर और उज्जैन जिला शामिल है। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा प्रदेश में विधानसभा निर्वाचन 2023 के लिये 1550 से अधिक मतदाताओं वाले 103 मतदान केन्द्रों के लिए सहायक मतदान केन्द्र बनाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है। इन विधानसभा क्षेत्रों में बनाए गए हैं सहायक मतदान केंद्र। भोपाल जिले के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 151-नरेला के 2, 152-भोपाल दक्षिण-पश्चिम के 2, 153-भोपाल मध्य के 2, 154-गोविंदपुरा के 4, 155-हुजूर के 5 मतदान केंद्र। छतरपुर जिले के विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 51-छतरपुर के 1 सहायक मतदान केंद्र। देवास जिले के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक- 171-देवास के 1 सहायक मतदान केंद्र। ग्वालियर जिले के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक-14-ग्वालियर ग्रामीण के 1, 15-ग्वालियर के 1, 19- डबरा (अ.जा.) के 1। इंदौर जिले के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र 203-देपालपुर के 1, 204-इंदौर-1 के 2, 205-इंदौर-2 के 5, 207-इंदौर-4 के 1, 208-इंदौर-5 के 23, 209-डॉ. अम्बेडकर नगर – महू के 9, 210 राऊ के 27 और 211-सांवेर (अ.जा.) के 7 मतदान केद्र। जबलपुर जिले के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 97-जबलपुर पूर्व के 1, 99-जबलपुर केन्ट के 1 मतदान केंद्र। कटनी जिले के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 93-मुड़वारा के 1 मतदान केंद्र। मुरैना जिले के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 04-जौरा के 1 मतदान केंद्र। नरसिंहपुर जिले के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक- 121-गाडरवारा के 1 के मतदान केंद्र। उज्जैन जिले के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक-212-नागदा खाचरौद के 1, 216-उज्जैन उत्तर एवं 217- उज्जैन दक्षिण के 1-1 मतदान केन्द्र को सहायक मतदान केन्द्र बनाया गया है

कुर्सी देखकर चमकने लगती हैं कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की आंखें : ज्योतिरादित्य सिंधिया.

Jyotraditya Scindia; Minister; BJP; Sahara Samachaar;

Jyotiraditya Scindia says, “The chairs seem to shine in Kamal Nath and Digvijaya Singh’s eyes.” केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने मैहर, सुरखी, सांची और बदनावर में जनसभा को किया संबोधित उदित नारायणभोपाल। मप्र में सवा साल तक रही कांगेस की कमलनाथ सरकार ने सेवा भाव की जगह सत्ता का भाव पाल लिया था। जब कांग्रेस की सरकार आई तो बड़े भाई और छोटे भाई ने मिलकर वल्लभ भवन को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया । प्रदेश में उद्योग नहीं लाए, ट्रांसफर-पोस्टिंग का उद्योग शुरू करके भ्रष्टाचार का खेल खेला। कमलनाथ के पास अपने मंत्रियों से मिलने का समय नहीं होता था, वह बोलते थे ‘चलो, चलो, समय नहीं है’, तो वह जनता की क्या सोचते। कांग्रेस झूठ और लूट की पार्टी है, इस पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता। जब भी दिग्विजय जी और कमलनाथ को कुर्सी दिखती है उनकी आँखें चमकने लगती है। यह बात केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को मैहर, सुरखी, सांची और बदनावर में जनसभा को संबोधित करते हुए कही। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जनसभा में कहा कि आजादी के बाद 55 वर्ष हमने कांग्रेस की सरकार देखी। उस कांग्रेस ने 2003 तक आपके और मेरे मध्यप्रदेश को बीमारू राज्य बना कर छोड़ दिया था। कांग्रेस के बीमारू मध्यप्रदेश को भाजपा सरकार ने बदला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के एक पूर्व मुख्यमंत्री दूसरे पूर्व मुख्यमंत्री को कहते हैं कि गाली खाने के लिए तुम्हें पावर ऑफ अटॉर्नी दे दी है। टिकट वितरण के मामले में कहते हैं कि जाओ पूर्व मुख्यमंत्री के कपड़े फाड़ो। कांग्रेस के एक महासचिव ने कहा कि ये जोड़ी जय-वीरू की जोड़ी है। मैं नहीं कह रहा, कांग्रेस महासचिव खुद कहते हैं कि ये चोर हैं। क्या ऐसे लोगों को आप सत्ता देंगे? ये किसी भी तरह सत्ता पाना चाहते हैं।

नाम वापसी के बाद मुख्य मुकाबला भाजपा व कांग्रेस के बीच, दोनों पाटियों के लिए बागी बने सिरदर्द।

Congress; BJP; Sahara Samachaar;

After the withdrawal of nominations, the main contest will be between BJP and Congress, rebels will become a headache for both the parties. उदित नारायणभाेपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में नामांकन वापसी के बाद कुल 3367 प्रत्याशी चुनाव मैदान में बचे हैं। इसमें भाजपा व कांग्रेस ने सभी 230 विधानसभा सीटाें पर प्रत्याशी खड़े किए हैं, जबकि अन्य क्षेत्रीय दलों के प्रत्याशी व निर्दलीय चुनाव मैदान में हैं। इन्हीं प्रत्याशियों के बीच अब कांटे की टक्कर होगी। हालांकि मुख्य मुकाबला भाजपा व कांग्रेस के बीच ही है। इन्हीं दोनों पार्टियों के बागी जरूर मैदान में अपनी ही पार्टी के प्रत्याशियों के लिए मुसीबत बन रहे हैं। प्रदेश में 21 अक्टूबर से नामांकन की प्रकि्रया शुरू हुई थी। यह 30 अक्टूबर तक चली। इस दौरान 3832 प्रत्याशियों ने कुल 4359 नामांकन फार्म भरे थे। इसमें स्क्रूटनी में 528 प्रत्याशियों के नामांकन आधी-अधूरी जानकारी व अन्य कारणों से निरस्त हो गए थे। बाकी बचे प्रत्याशियों में से करीब 992 ने 2 नवंबर को नामांकन वापसी के अंतिम दिन अपने नाम वापस ले लिए। बाकी बचे प्रत्याशियों के बीच मुकाबला है। 17 नवंबर काे इन सभी प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला ईवीएम मशीनों में कैद हो जाएगा। मतगणना 3 दिसंबर को होगी। नाम वापसी के पहले तक की जानकारी के अनुसार सबसे अधिक अनूपपुर में 46 प्रत्याशी थे। भिंड के अटेर से 43 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया था। नामांकन दोपहर 3 बजे तक वापस किए गए, किंतु चुनाव आयोग की आधी अधूरी तैयारी की वजह से देर रात 8 बजे तक इसकी जानकारी नहीं मिल पाई। रात 8 बजे तक में 383 प्रत्याशियों ने अपना नामांकन वापस ले लिया था। चार बागी विधायकों को मनाने में कांग्रेस नेता नाकाम नाम वापसी के अंतिम दिन पिछले 24 घंटे में 15 बागियों को कांग्रेस ने बैठा दिया। जबकि कांग्रेस के चार पूर्व विधायक नहीं माने। कांग्रेस के पूर्व विधायक अंतर सिंह दरबार, सिवनी-मालवा के पूर्व विधायक ओम प्रकाश रघुवंशी को नहीं मना पाई। टिकट नहीं मिलने से नाराज आलोट से पूर्व विधायक प्रेमचंद गुड्डू, गोटेगांव से पूर्व विधायक शेखर चौधरी अब निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। इसीतरह महू के पूर्व विधायक नेता रहे अंतर सिंह दरबार निर्दलीय रूप से चुनाव लड़ेंगे। आज उन्होंने प्राथमिक तौर पर इस्तीफा कांग्रेस पार्टी को दे दिया है। आखिरी समय तक किया बागियों को मनाने की कोशिश-कांग्रेस के बागियों ने चुनाव का पूरा समीकरण बिगाड़ दिया है। कमलनाथ और दिग्विजय सिंह ने एक साथ बैठक करके बागी नेताओं को समझाया था। सूत्रों ने बताया कि दिग्विजय सिंह ने कई बागियों से व्यक्तिगत संपर्क किया और कई प्रत्याशियों को भाेपाल भी बुलाया था। उन्होंने फोन पर भी समझाया, इसके बाद भी कई बागी नहीं माने। बागी नेता बिगाड़ सकते हैं भाजपा का खेल भाजपा में भी करीब-करीब वही स्थिति है। नामांकन वापसी के बाद बागी नेता कई जगहों पर खेल बिगाड़ने पर आमादा हो गए हैं। भाजपा में सबसे बड़ी बगावत निमाड़ में हुई-भाजपा के दिग्गज नेता नंद कुमार सिंह चौहान के बेटे हर्ष सिंह चौहान ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने बुरहानपुर से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। भाजपा के कई नेताओं ने उन्हें मनाने की भी कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने। हर्ष ने बुरहानपुर से टिकट मांगी थी, किंतु पार्टी ने सर्वे आदि के आधार पर पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस को टिकट देकर चुनाव मैदान में उतार दिया। बताते हैं कि हर्ष चौहान के पिता भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व. नंद कुमार चौहान व श्रीमती चिटनीस के बीच काफी समय तक अंदरूनी आपसी लड़ाई रही। इसके लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तक ने हस्तक्षेप किया था। इसके बाद मामला सुलझा था। पिछली बार श्रीमती चिटनीस ने सीधे तौर पर आरोप लगाया था कि उन्हें हराने के लिए नंद कुमार चौहान जिम्मेदार हैं। अब चूंकि नंद कुमार चौहान नहीं हैं। किंतु दोनों के बीच की यह अंदरूनी लड़ाई नई पीढ़ी तक आ चुकी है। जबकि विंध्य क्षेत्र में विधायक नारायण त्रिपाठी ने भाजपा से बगावत करने के बाद नई पार्टी का गठन कर लिया और करीब 30 से अधिक सीटों पर चुनाव प्रत्याशी मैदान में उतारकर चुनावी समर में भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विधायक नारायण त्रिपाठी की वजह से भाजपा का बड़ा नुकसान होता नजर आ रहा है। भोपाल उत्तर सीट पर कांग्रेस में बड़ी बगावत भोपाल उत्तर सीट पर पहली बार आरिफ अकील की नहीं चल पा रही है। उन्होंने भोपाल उत्तर से कांग्रेस पार्टी से अपने बेटे आतिफ अकील को टिकट दिलवा दिया। इससे उनके सगे भाई आमीर अकील बागी होकर मैदान में कूद गए। आमीर को मनाने की भी कोशिश हुई, किंतु वे नहीं माने। चुनाव आयोग ने आज नामांकन वापसी के बाद आमिर अकील काे हॉकी- बॉल चुनाच चिन्ह आवंटित किया है। मनावर से पूर्व मंत्री रंजना बघेल ने नाम वापस लिया-भाजपा पूर्व मंत्री रंजना बघेल का नामांकन पत्र वापस कराने में कामयाब हो गई। मनावर से श्रीमती रंजना ने टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर नामांकन पत्र दाखिल कर दिया था। उनके मैदान में कूद जाने की वजह से मनावर का समीकरण बदलने लगा था। इससे भाजपा को खासा नुकसान हो सकता था। किंतु अब चुनाव मैदान से उनके हटने के बाद भाजपा व कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है।  मतदान से ठीक 15 दिन पहले भाजपा को लगा झटका पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की फायर ब्रांड नेत्री उमा भारती की बड़ी बहन के पोते इंजी. दुष्यंत लोधी ने भाजपा छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उन्हें सदस्यता दिलाई। बताते हैं कि लोधी टीकमगढ़ में भाजपा के बड़े नेता हैं। वे लोधी क्षत्रिय समाज की युवा इकाई के प्रदेश महामंत्री भी हैं। दुष्यंत और उनके पिता का टीकमगढ़ और लोधी समाज में खासा प्रभाव माना जाता है। वे टीकमगढ़ विधानसभा से भाजपा से टिकट मांग रहे थे। किंतु स्थानीय समीकरण के हिसाब से उन्हें टिकट नहीं दिया। इस वजह से उन्होंने भाजपा से इस्तीफा दे दिया। भाजपा छोड़ने के बाद दुष्यंत ने भाजपा पर लोधी समाज की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है।

भोपाल में 120 चार्जिंग स्टेशन बनाने का काम ठंडे बस्ते में।

Smart City Bhopal; Bhopal; Smartcity; Sahara Samachaar;

The work of making 120 charging stations in Bhopal is on hold. शहर में लगना थे 120 इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन, बना एक भी नहीं।स्मार्ट सिटी विभाग को लगाना थे चार्जिंग स्टेशन, प्रस्ताव पड़ा ठंडे बस्ते में।दस हजार से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन दौड़ रहे हैं भोपाल शहर की सड़कों पर। उदित नारायणभोपाल। राजधानी में 10 हजार से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन चल रहे हैं और इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके बाद भी चार्जिंग स्टेशन नहीं बन पा रहे हैं। सरकार द्वारा चार्जिंग स्टेशन बनाने का काम भोपाल की स्मार्ट सिटी कंपनी को सौंपा गया था, लेकिन अभी उसके अपने ऑफिस के अलावा दूसरी जगह चार्जिंग स्टेशन नहीं बन पाए। स्मार्ट सिटी कंपनी ने 120 स्टेशन बनाने की तैयारी भी कर ली थी।इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन की डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है। क्योंकि चार पहिया के बाद अब दो पहिया वाहन भी मार्केट में आ गए हैं। सरकार द्वारा भी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए जागरुकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसलिए सरकार ने स्मार्ट सिटी कंपनी को चार्जिंग स्टेशन बनाने को कहा था। स्मार्ट सिटी कंपनी अधिकारियों के अनुसार चार्जिंग स्टेशन बनाना हैए लेकिन आर्थिक रूप से अभी ठीक नहीं है। यही कारण है कि चार्जिंग स्टेशन बनाने का काम रुका हुआ है। वाहन चालकों कई बार परेशान हो चुके वाहन चालक रजनीश उपाध्याय के अनुसार एक साल हुए इलेक्ट्रिक वाहन खरीदे, लेकिन चार्जिंग स्टेशन कम होने के कारण काफी परेशानी हो रही है। राजधानी में भी तीन पेट्रोल पंप पर सुविधा है जिन पर भीड़ रहती है। पुष्पेंद्र सिंह के अनुसार उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहन इसलिए खरीदा थाए क्योंकि स्मार्ट सिटी ने चार्जिंग स्टेशन जल्दी बनाने को कहा था। अभी तक स्मार्ट सिटी का भेल दशहरा मैदान के सामने के अलावा एक भी स्टेशन नहीं है। जबकि अटल पथ, न्यू मार्केट, वन विहार रोड, सहित अन्य स्थानों पर यह स्टेशन बनना थे।

पुलिस की वाहन चेकिंग बनी जनता के लिए परेशानी।

MP Police; Bhopal; Sahara Samachaar;

Vehicle checking by police has become a problem for the public. चुनावी माहौल में पुलिस की कड़ी वाहन चेकिंग,इसमें पिस रहे आम आदमी। चेकिंग के नाम पर वाहन चालकों को 15 से 30 मिनट तक रोका जा रहा है। उदित नारायणभोपाल। चुनाव आचार संहिता लागू होने के साथ ही ट्रैफिक पुलिस सड़कों पर कहीं भी खड़े होकर वाहन चेकिंग के नाम पर लोगों को परेशान किया जा रहा है। इस मामले को लेकर यातायात पुलिस के अला-अधिकारियों का कहना है कि चुनाव आयोग की गाइड लाइन पर चेकिंग की जा रही है। जिससे कोई भी असामाजिक तत्व विधानसभा चुनाव को प्रभावित न कर सके। दरअसल कई बार ऐसा देखने को मिला है कि कई उम्मीदवार चुनाव में मतदाताओं को पैसे व शराब का प्रोलभन देकर अपने पक्ष में वोटिंग कराने के लिए करते है। इन सबको रोकने के लिए ट्रैफिक पुलिस द्वारा सड़कों पर वाहनों की चेकिंग की जा रही है। पुलिस को कई बार वाहनों से पैसे व शराब लेते जाते हुए। लोग पकड़ में भी आ चुके है। अब ऐसे लोगों पर नजर उनकी धरपकड़ के नाम पर सड़कों पर चेकिंग की जा रही है। लेकिन इसमें आम आदमी पिस रहे है। उन्हें चेकिंग के नाम पर 15 से 30 मिनट तक रोका जा रहा है। इससे वह अपने आफिस,ट्रेन पकड़ने व अन्य कामों में लेट हो रहे है। ट्रैफिक व्यवस्था चेकिंग में लगे अधिकारी/कर्मचारियों द्वारा वाहनों को रोककर उनके पेपर देखे जाते हैं। गाड़ी में रखे सामान की बारीकी से चेकिंग इसके लिए चार पहिया वाहनों चालकों को पीछे डिग्गी भी खोलकर दिखानी पड़ रही है। जिसके चलते कई बार लोगों को परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है। तो वहीं इस सबके चलते कई बार जाम की स्थिति भी बन रही है। जिससे आमजन को परेशान हो रहे है। तो वहीं दुर्घटनाओं की आशंका बनी रही है। पुलिस दे रही केस बनाने की धमकी चेकिंग के दौरान वाहन चालकों व पुलिस अधिकारियों के बीच कई बार तीखी बहस बाजी भी हो रही है। इस दौरान कई बार पुलिस द्वारा चुनाव आचार संहिता लागू होने पर सहयोग नहीं करने पर केस बनाने की धमकी तक दे रहे है। पुलिस की वाहन चेकिंग में फंसे वाहन चालक मुबीन खान ने बताया कि मैं दोपहर करीब 12:30 बजे रानीकमलापति स्टेशन के सामने वाली सड़क से निकल रहा था। यहां पर यातायात पुलिस चेकिंग कर रही थी। जिन्होंने जांच के लिए रोक लिया। गाड़ी के कागज आदि दिखाने के बाद भी करीब 20 मिनट तक रोककर रखा गया। इसके चलते मैं आफिस के लिए लेट हो गया। जिससे खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। ट्रैफिक एडिशनल डीसीपी विक्रम रघुवंशी ने कहा कि निश्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग की गाइड लाइन पर वाहनों की चेकिंग की जा रही है। जिसमें गाड़ियों में कोई पैसे, शराब आदि तो नहीं ले जा रही है। इस सबको को चेक किया जा रहा है। इसके लिए वाहनों की डिग्गी खोलकर चेक करना पड़ता है। जिससे कई बार थोड़ा टाइम तो लगता है। इसकी डेली रिपोर्ट चुनाव आयोग को जाती है। जिसमें कितने वाहनों की चेकिंग की गई और क्या कार्रवाई की गई।

विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों को जारी हुआ चुनाव चिन्ह – अब मतदाताओं के पास जूते, चप्पल, मोजे, बिस्किट, फूलगोभी लेकर जाएंगे उम्मीदवार.

MP Elections; Candidates; Sahara Samachaar;

In the assembly elections, election symbol for independent candidates has been issued – now candidates will go to voters with symbols like shoes, slippers, shoes, biscuits, and cauliflower. किसी चिंह्न पर एक से ज्यादा दावे की स्थिति में अंतिम फैसला लेंगे रिटर्निंग आॅफिसर Udit Narayanभोपाल – विधानसभा चुनाव के लिए निर्दलीय प्रत्याशी भी आज नामांकन प्रक्रिया खत्म होने के बाद घर-घर जाएंगे और जूते, चप्पल, मोजे, बिस्किट, फूलगोभी जैसे चुनाव चिन्ह्न से मतदाताओं को रिझाएंगे। निर्वाचन आयोग ने निर्दलियों के लिए 204 चुनाव चिंह्न तय किए हैं। बता दें, देश के सात राजनीतिक और 24 राज्यों में राज्य स्तरीय पार्टियों को 59 चुनाव चिंह्न आरक्षित किए हैं, लेकिन गैर मान्यता प्राप्त 2044 दलों और निर्दलीयों के लिए चुनाव आयोग मुक्त चुनाव चिंह्न जारी करेगा।जूते, चप्पल, जुराबे, मोजे, बिस्कुट, फूलगोभी, शिमला मिर्च, हरी मिर्च, पेट्रोल पंप, गले की टाई समेत कुल 204 चिंह्न चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों को बांटने के लिए छांट लिए हैं। आयोग की ओर से जारी 198 प्रतीक गैर मान्यता प्राप्त छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों को चुनाव चिंह्न के तौर पर बांटे जाएंगे। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए 17 नवंबर को मतदान होना है। ऐसे में राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और पंजीकृत पार्टियों के प्रत्याशी अपने दल के चिंह्न पर चुनाव मैदान में उतर रहे हैं। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव आयोग निर्दलीय प्रत्याशियों को चुनाव चिंह्न आवंटित करेगा। प्रत्याशी भी चुनाव चिंह्न को लेकर बेहद संजीदा नजर आ रहे हैं। वहीं, निर्वाचन आयोग का स्पष्ट नियम है कि प्रत्याशी चुनाव चिंह्न के लिए कोई तीन विकल्प दे सकेगा, लेकिन किसी चिंह्न पर एक से ज्यादा दावे की स्थिति में अंतिम फैसला रिटर्निंग आॅफिसर का होगा। अब तक 42 पार्टियों को मिले चुनाव चिह्न- निर्वाचन आयोग ने अब तक 42 पार्टियों को सभी 230 विधानसभा में एक जैसे चुनाव चिंह्न आवंटित कर दिए हैं। राष्ट्रीय सर्वजन विकास पार्टी को पेट्रोल पंप, जन कल्याण पार्टी को अंगूर, राष्ट्रीय जन क्रांति पार्टी को लिफाफा, भारतीय बहुजन क्रांति दल को टेलीविजन, जन अधिकार पार्टी को डोली, भारतीय अवाम ताकत को ब्रश, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को आरी, भारत रक्षक पार्टी को बल्लेबाज, नागरिक अधिकार शक्ति सेवा पार्टी को मेज, भारतीय जनसंपर्क पार्टी को फूलगोभी, जनतावादी कांग्रेस पार्टी को फोन चार्जर, अखिल भारतीय हिंद क्रांति पार्टी को बोतल और संपूर्ण समाज पार्टी को अंगूठा चुनाव चिन्ह्न आवंटित किए गए हैं।

मौसम के चलते पुलिस की वर्दी में हुआ परिवर्तन, अब अंगोला और जर्सी में नजर आएंगे जवान.

MP Police; Uniform; Bhopal; Madhya Pradesh; Sahara Samachaar;

Due to the weather conditions, there has been a change in the police uniform, they are in Angola and Jersey. Udit Narayanभोपाल – मध्य प्रदेश में मौसम के बदलते मिजाज को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने पुलिसकर्मियों की वर्दी में बदलाव किया है अब पुलिसकर्मी अंगोला और जर्सी में नजर आएंगे पुलिस मुख्यालय की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं।पुलिस मुख्यालय ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि शीतकालीन वर्दी का प्रयोग किया जाए सभी पुलिस अधिकारियों को भी इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं की गाइडलाइन का पालन कराया जाए। बता दे की मध्य प्रदेश में रात के वक्त पर लगातार नीचे गिर रहा है। इससे मौसम में बदलाव हुआ है। पुलिस कर्मियों के स्वास्थ्य को ध्यान पर रखते हुए पुलिस मुख्यालय ने आदेश जारी किया है।

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