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आतिशी ने कहा- 8 मार्च तक महिलाओं को खाते में पैसे भेजने का था वादा, एक बहाना बना सकती है BJP

नई दिल्ली दिल्ली की कार्यवाहक मुख्यमंत्री आतिशी ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार अपने वादों को पूरा नहीं करना चाहती है और इसके लिए आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने का बहाना बना सकती है। उन्होंने आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के दौरान दिल्ली की आर्थिक स्थिति मजबूत किए जाने का दावा करते हुए कहा कि भाजपा ने 8 मार्च तक सभी महिलाओं के खातों में 2500 रुपए की पहली किस्त भेजने का वादा किया था, लेकिन इसे पूरा करने का उनका इरादा नहीं है। भाजपा ने दिल्ली में सरकार बनने पर ‘महिला समृद्धि योजना’ लागू करने का वादा किया है। आतिशी ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, ‘भाजपा ने दिल्ली चुनाव में कई वादे किए। उन्होंने मोदी की गारंटी नाम से पर्चा बांटा जिसमें पहला वादा है कि दिल्ली की हर महिला को 2500 रुपए मासिक दिए जाएंगे। भाजपा ने बार-बार कहा कि पहली कैबिनेट में महिलाओं को ढाई हजार मासिक आर्थिक सहायता देने का निर्णय होगा और 8 मार्च तक दिल्ली की हर महिला के खाते में पहली किस्त आ जाएगी। भाजपा के सूत्रों के हवाले से हमें पता चला है कि ना सिर्फ ढाई हजार बल्कि बाकी सारे वादे जो भाजपा ने किए थे उनको पूरा करने का उनका कोई इरादा नहीं है।’ कार्यवाहक मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा में विधायकों के बीच लड़ाई झगड़ा चल रहा है कि कौन किस विभाग का मंत्री बनेगा कि कौन कितनी लूट कर सकता है। आतिशी ने कहा कि भाजपा आम आदमी पार्टी की सरकार पर ठीकरा फोड़कर बहाना बनाएगी और वादे पूरे नहीं करेगी। उन्होंने कहा, ‘उन्होंने (भाजपा) प्लान बनाया है कि अपने वादे ना पूरा करने का ठीकरा वो आम आदमी पार्टी पर फोड़ेंगे और कहेंगे कि हम इसलिए वादे पूरे नहीं कर पाए क्योंकि दिल्ली सरकार के पास पैसे नहीं है। क्योंकि आम आदमी पार्टी की सरकार ने दिल्ली सरकार को वित्तीय संकट में डाल दिया। ये बहाना करके अपनी लूट को छिपाने की कोशिश करेंगे, अपने वादे तोड़ने के बहाने बनाएंगे।’ दिल्ली की आर्थिक हालत पर क्या बोलीं आतिशी आतिशी ने 2015 से 2025 के बीच दिल्ली आर्थिक हालत में आए बदलाव की चर्चा की और दावा किया कि यह मजबूत स्थिति में है। उन्होंने कहा कि 2014-15 में इसका बजट 31 हजार करोड़ रुपए का था जो 2024-25 में बढ़कर 77 हजार करोड़ रुपए का हो गया। 10 साल में इसमें 46 हजार करोड़ का इजाफा हुआ, ढाई गुना से वृद्धि ज्यादा हो गई। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने कर्जे में भी भारी कमी की है। उन्होंने कहा कि जीडीपी डेब्ट रेशियो 2014 में 6.6 फीसदी था, 2023 में 3.9 पर्सेंट हो गया और 2025 में जब सरकार छोड़कर जा रहे हैं तो मात्र 3 फीसदी है। आम आदमी पार्टी की सरकार ने पुरानी सरकार का कर्जा भी चुकाया। आतिशी ने कहा कि 2022 में सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया था कि दिल्ली देश का एकमात्र रेवेन्यू सरप्लस सरकार है, जब से दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सरकार बनी। एक इनकनॉमिक बूम करके अरविंद केजरीवाल की सरकार भाजपा को सौंप रही है। आप नेता ने कहा, ‘भाजपा ने जो वादे किए थे, मैं उम्मीद करती हूं कि वे आर्थिक बहाने ना बनाकर अपने वादे पूरे करे, खासकर हर महिला को ढाई हजार मासिक देने का जो उन्होंने वादा किया है, जो पहली कैबिनेट में पास होना है और 8 मार्च तक बैंक के खाते में आना है। हम उम्मीद करते हैं कि भाजपा अपने वादों को पूरा करेगी।’

महाराष्ट्र कांग्रेस को मिला नया अध्यक्ष, हर्षवर्धन सपकाल को सौंपी गई जिम्मेदारी

मुंबई   महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में करारी हार की जिम्मेदारी लेते हुए नाना पटोले ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. महाराष्ट्र कांग्रेस को अब नाना पटोले की जगह नया अध्यक्ष भी मिल गया है. हर्षवर्धन सपकाल महाराष्ट्र कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए हैं. हर्षवर्धन सपकाल के नाम के ऐलान के साथ ही प्रदेश अध्यक्ष को लेकर चल रहे कयासों का दौर थम गया है. हर्षवर्धन को महाराष्ट्र कांग्रेस की कमान सौंपा जाना कांग्रेस पार्टी के प्रदेश की सियासत में ‘स्ट्रैटेजी शिफ्ट’ की तरह देखा जा रहा है. हर्षवर्धन सपकाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के दांव के पीछे क्या है? 4 पॉइंट में समझा जा सकता है. 1- मराठा दांव हर्षवर्धन सपकाल मराठा समुदाय से आते हैं. मराठा समुदाय की आबादी सूबे में अनुमानों के मुताबिक करीब 28 फीसदी है. करीब 52 फीसदी ओबीसी आबादी के बाद सूबे का यह दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला वर्ग सियासी वर्चस्व के लिहाज से सबसे आगे है. मराठवाड़ा और पश्चिमी महाराष्ट्र, केवल दो रीजन ही देखें तो मराठा प्रभाव वाले इन इलाकों में ही विधानसभा की कुल 288 में से 116 सीटें हैं. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस महाराष्ट्र की 48 में से 13 सीटों पर जीत के साथ सूबे की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी तो इसके पीछे मराठा समुदाय की भूमिका अहम मानी गई थी. विधानसभा चुनाव में विपक्ष की हार के बाद भी मराठा समुदाय के वोट बंटने को कारण बताया गया. अब कांग्रेस ने हर्षवर्धन सपकाल को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है तो इसे मराठा वोटबैंक पर पकड़ मजबूत करने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. 2- गठबंधन पर निर्भरता कम करना महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष मराठा समाज से बनाए जाने के दांव को मराठा वोट के लिए गठबंधन कम करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है. महाराष्ट्र में मराठा वोट के लिए कांग्रेस लंबे समय से शरद पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी पर ही निर्भर रही है. गठबंधन में उद्धव ठाकरे की शिवसेना के आ जाने के बाद कांग्रेस मराठा वोट को लेकर और अधिक निश्चिंत हो गई थी. लोकसभा चुनाव में इसके अच्छे नतीजे भी देखने को मिले लेकिन विधानसभा चुनाव में परिणाम उलट रहे. इसके बाद उद्धव ठाकरे की पार्टी ने निकाय चुनाव अकेले लड़ने का ऐलान कर दिया तो शरद पवार भी कांग्रेस की आलोचना करते नजर आए, खासकर दिल्ली चुनाव लड़ने के फैसले की. विधानसभा चुनाव में खराब नतीजों के लिए भी ठीकरा कांग्रेस के खराब प्रदर्शन पर ही फोड़ा गया. अब कांग्रेस की कोशिश भविष्य की प्रेशर पॉलिटिक्स के लिहाज से खुद को तैयार करने की है.    3- ओबीसी से आगे का प्लान मराठा वोटबैंक को साधने की जिम्मेदारी एमवीए में एनसीपी (एसपी) और शिवसेना (यूबीटी) जैसे दल उठाते रहे और कांग्रेस ओबीसी को फोकस कर चलती रही है. पार्टी के पिछले प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले भी ओबीसी समुदाय से ही आते हैं जिसकी महाराष्ट्र की कुल आबादी में भागीदारी करीब 52 फीसदी होने के अनुमान हैं. ओबीसी वोटबैंक पर बीजेपी की पकड़ मजबूत मानी जाती है, खासकर 2014 में नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय राजनीति में उभार के बाद से. अब कांग्रेस नेतृत्व को भी यह समझ आ गया है कि महाराष्ट्र की राजनीति में बीजेपी जैसे मजबूत प्रतिद्वंद्वी से मोर्चा लेना है तो बस ओबीसी वोटबैंक के सहारे रहने की बजाय वोट बेस का विस्तार करना ही होगा. नए प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल मराठा समुदाय से आते हैं और आदिवासी समाज में भी मजबूत पकड़ रखते हैं. 4- अनुशासित कैडर कार्ड महाराष्ट्र में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे नाना पटोले ने सियासी सफर की शुरुआत कांग्रेस से ही की थी. 2009 के आम चुनाव में वह पार्टी से बगावत कर बतौर निर्दलीय ही गोंदिया भंडारा सीट से प्रफुल्ल पटेल के खिलाफ चुनाव मैदान में उतर गए. बाद में बीजेपी के टिकट पर नाना ने 2014 के चुनाव में प्रफुल्ल पटेल को पटखनी भी दी. 2018 में वह बीजेपी में छोड़ अपनी पुरानी पार्टी में लौट आए और कांग्रेस ने भी उन्हें उद्धव ठाकरे सरकार के समय विधानसभा अध्यक्ष से लेकर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष तक की जिम्मेदारी सौंप दी. अब कांग्रेस ने हर्ष सपकाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर कार्यकर्ताओं को भी एक संदेश दिया है. कौन हैं हर्षवर्धन सपकाल हर्षवर्धन सपकाल महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले से आते हैं 25 साल से अधिक समय से सियासत में सक्रिय हैं. 1999 में सबसे युवा जिला परिषद अध्यक्ष रहे हर्षवर्धन 2014 में बुलढाणा सीट से विधानसभा भी पहुंचे थे. वह कांग्रेस के पंचायती राज प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और पार्टी के राष्ट्रीय सचिव के साथ ही गुजरात, पंजाब और मध्य प्रदेश के सह प्रभारी भी रह चुके हैं. जापान इंटरनेशनल कॉरपोरेशन की ओर से 1996 में 21वीं सदी में वैश्विक मैत्री अभियान के तहत आयोजित अंतरराष्ट्रीय युवा सम्मेलन में भारतीय युवाओं के डेलिगेशन का नेतृत्व करने वाले हर्षवर्धन संत गाडगे बाबा ग्राम स्वच्छता अभियान से भी जुड़े रहे हैं.  

कंगना रनौत ने मनाली में अपना रेस्ट्रॉन्ट खोला है, खुद को कहा बेवकूफ, बोलीं- मैं स्टॉक्स नहीं खरीदती

मंडी कंगना रनौत ने मनाली में अपना रेस्ट्रॉन्ट खोला है, जिसका नाम द माउंटेन स्टोरी है। 14 फरवरी को इसका उद्घाटन हो चुका है। कंगना ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि वह स्टॉक्स या रेंटल से पैसे नहीं कमातीं। उन्हें लोगों से कनेक्ट रहना पसंद है। यही वजह है कि रेस्ट्रॉन्ट खोला। कंगना ने कहा कि वह बेवकूफ बनकर रहना चाहती हैं। नहीं खरीदती हूं स्टॉक्स कंगना मीडिया से बातचीत में अपने रेस्ट्रॉन्ट के बारे में बोलीं, ‘यह मेरे लिए भी गिफ्ट है, लोगों से जुड़ने का एक और जरिया। मैं राइटर हूं, फिल्म बनाती हूं, मैं अभिनेत्री भी हूं। यह भी मेरा खुद को एक्सप्रेस करने का तरीका है। अगर हम एक-दूसरे के साथ जुड़ते नहीं तो जीवन में क्या ही रखा है।’ कंगना आगे बोलती हैं, ‘मैं उनमें से नहीं हूं कि स्टॉक्स खरीद लिए या कोई रेंटल इनकम। मुझे पसंद ही नहीं। मुझे लगता है कि मैं ज्यादा से ज्यादा लोगों से घुलना-मिलना चाहती हूं। मेरी लाइफ के फंडाज कुछ ज्यादा ही बेवकूफ टाइप हैं, तो मैं वेसी ही हूं। बेवकूफ बनके रहना पसंद है मुझे।’ रेस्ट्रॉन्ट पुराना सपना रेस्ट्रॉन्ट खोलने का सपना कंगना ने काफी पहले से देख रखा था। इस बात का जिक्र वह एक राउंड टेबल के दौरान कर चुकी हैं। जब कंगना ने अपना रेस्ट्रॉन्ट खोलने की खबर इंस्टाग्राम पर डाली तो पुराना वीडियो भी शेयर किया था। इसमें वह बता रही थीं कि दुनियाभर का खाना खाया है और अच्छी कुक हैं। वह एक छोटा और सा कैफेटेरिया खोलना चाहती हैं। वहां मौजूद दीपिका ने कहा था कि वह उनकी पहली क्लाइंट होंगी। कंगना ने नया रेस्ट्रॉन्ट खोलने वाले पोस्ट में दीपिका को टैग किया था।

महाराष्ट्र कांग्रेस का संगठन में किया बड़ा बदलाव, हर्षवर्धन सपकाल को बनाया नया प्रदेश अध्यक्ष

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद कांग्रेस ने संगठन स्तर पर बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने नाना पटोले की जगह हर्षवर्धन सपकाल को महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। इसके अलावा विजय वडेट्टीवार को तत्काल प्रभाव से महाराष्ट्र में कांग्रेस विधायक दल का नेता नियुक्त किया गया है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद कांग्रेस ने संगठन स्तर पर बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने नाना पटोले की जगह हर्षवर्धन सपकाल को महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। इसके अलावा विजय वडेट्टीवार को तत्काल प्रभाव से महाराष्ट्र में कांग्रेस विधायक दल का नेता नियुक्त किया गया है। हर्षवर्धन पश्चिमी विदर्भ क्षेत्र से आते हैं। उन्हें राहुल गांधी का करीबी माना जाता है। कौन हैं हर्षवर्धन सपकाल? हर्षवर्धन सपकाल का जमीनी स्तर से राजनीति से जुड़े हैं। उन्होंने राजनीतिक सफर में जिला परिषद सदस्य से लेकर विधायक तक की भूमिका संभाली है। वह 1999 से 2002 तक जिला परिषद के अध्यक्ष रहे। उस समय वे महाराष्ट्र के सबसे युवा अध्यक्ष के रूप में जाने जाते थे। वह 2014 से 2019 के बीच कांग्रेस से विधायक भी रहे। पार्टी ने आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति की है। इसलिए नए अध्यक्ष के सामने इन चुनावों को जीतने की बड़ी चुनौती होगी। हर्षवर्धन सपकाल वर्तमान में कांग्रेस के राजीव गांधी पंचायत राज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उन्होंने महात्मा गांधी और विनोबा भावे की विचारधाराओं पर आधारित ग्राम स्वराज्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सपकाल को सर्वोदय विचारों पर आधारित राष्ट्र निर्माण युवा शिविरों के आयोजन, ग्राम स्वच्छता अभियानों में सक्रिय भागीदारी और आदर्श ग्राम आंदोलन का अनुभव है। पटोले ने चुनाव के बाद की थी इस्तीफे की पेशकश महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद नाना पटोले ने प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी। पार्टी नेतृत्व ने उनके इस्तीफे को मंजूर कर लिया था। पिछले साल के आखिर में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 16 विधानसभा सीटों पर ही जीत मिली थी। इसके बाद से ही उनके नेतृत्व पर सवाल उठना शुरू हो गए थे।

प्रयागराज महाकुंभ में स्नान को लेकर जारी राजनीतिक बयानबाजी के बीच एक बार फिर दिग्विजय सिंह और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय आमने-सामने

इंदौर  प्रयागराज महाकुंभ में स्नान को लेकर जारी राजनीतिक बयानबाजी के बीच एक बार फिर दिग्विजय सिंह और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय आमने-सामने हैं. दरअसल दिग्विजय सिंह द्वारा महाकुंभ को आस्था का इवेंट बनाने संबंधी बयान पर कैलाश विजयवर्गीय ने पलटवार किया है. बुधवार को इंदौर में कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, ”दिग्विजय सिंह प्रयागराज में स्नान करने गए यह बड़ी और खुशी की बात है. लेकिन गंगा नदी से निकलते ही उन्होंने फिर वैसा ही बयान दिया. ऐसे बयान देने वाले लोगों के बारे में कहा गया है कि ऐसे लोगों पर कितनी ही गंगा नदी डाल दो उन पर कोई असर नहीं होने वाला. कम से कम गंगा से निकलकर तो कुछ अच्छा बोलना चाहिए.” इतनी भीड़ आएगी अंदाजा नहीं था विजयवर्गीय ने प्रयागराज महाकुंभ की व्यवस्थाओं को लेकर कहा कि, ”वहां व्यवस्थाएं जबरदस्त हैं. लेकिन इतनी जनता आ जाएगी इसका अंदाजा किसी को नहीं था.” उन्होंने कहा, ”अनुमान के मुताबिक, 20 से 25 करोड़ लोग आने का अनुमान सबको था. लेकिन अब तक वहां 50 करोड़ से ज्यादा लोग स्नान कर चुके हैं. यह विश्व का सबसे बड़ा सनातन समागम है. इसकी खूबियां भी लोगों को दिखाई देना चाहिए. क्योंकि विश्व में इतना बड़ा मानव समूह कहीं भी दिखाई नहीं देता.”         आज प्रयागराज में मेरे पिता दिग्विजय सिंह जी के साथ महाकुंभ माघ पूर्णिमा के पावन दिन पर त्रिवेणी संगम में स्नान करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। माँ गंगा यमुना सरस्वती, सूर्यदेव भगवान, हमारे पितरों व देवी देवताओं का आशीर्वाद और असीम कृपा सदैव बनी रहे। सज्जन सिंह पर बोले कैलाश विजयवर्गीय गौरतलब है कि, दिग्विजय सिंह माघ पूर्णिमा के दिन अपने पुत्र जयवर्धन सिंह के साथ प्रयागराज महाकुंभ में स्नान करने पहुंचे थे. जहां उन्होंने कहा था कि, ”भाजपा को महाकुंभ जैसे आस्था के विषय को इवेंट नहीं बनना चाहिए.” इधर कैलाश विजयवर्गीय ने सिख दंगों के मामले में दोषी ठहराए गए कांग्रेस नेता सज्जन सिंह मामले में कहा सिखों के खिलाफ हिंसा के कारण ही उस दौरान सिख समाज को हिंदू धर्म से अलग करने का प्रयास किया गया. लिहाजा ऐसे मामले के दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होना चाहिए.”

बीजेपी के नए अध्यक्ष की दौड़ से बाहर हुए पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा

भोपाल सिविल एविएशन और स्टील विभाग के केंद्रीय मंत्री और गुना सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष के लिए आखिरी दांव चल दिया है। अब कुछ ही दिनों में प्रदेश अध्यक्ष के नाम का ऐलान संभव है। बुधवार रात भोपाल पहुंचे सिंधिया ने तीन प्रमुख नेताओं से मुलाकात की। इसके बाद चर्चा चल पड़ी है कि एमपी के पूर्व मंत्री और पूर्व दतिया विधायक डॉ. नरोत्तम मिश्रा भाजपा अध्यक्ष नहीं बनाए जाएंगे। दरअसल, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया रात को भोपाल पहुंचे और सबसे पहले नरोत्तम मिश्रा के आवास पर जाकर मुलाकात की। इसके बाद सिंधिया मध्यप्रदेश के राजस्व विभाग के मंत्री करण सिंह वर्मा के आवास जाकर भी मिले। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान कृषि एवं पंचायत विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी मुलाकात करने पहुंचे। सियासी सरगर्मियां तेज बता दें, कि नरोत्तम और शिवराज से सिंधिया ने कुछ दिनों पहले भी मुलाकात की थी। लेकिन करण सिंह वर्मा से मुलाकात के बाद सरगर्मी तेज हेा गई है। करण सिंह वर्मा प्रदेश के सबसे ईमानदार मंत्रियों में गिने जाते हैं। इसके अलावा सिंधिया राज्यपाल मंगुभाई पटेल से मिलने राजभवन भी पहुंचे। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का दावा सिंधिया से हुई मुलाकात के बाद स्वयं नरोत्तम मिश्रा ने मीडिया से कहा कि मैं प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में नहीं हूं। पार्टी काम देती रहे मैं काम करता रहूंगा। मिश्रा ने कहा कि संगठन की प्रक्रिया है। मंडल हो गए, जिला हो गए, फिर प्रदेश होंगे। इसके लिए पहले दिल्ली निपटे। क्रम के अनुसार हो रही चयन प्रक्रिया भाजपा के संगठन पर्व के तहत सबसे पहले बूथ अध्यक्ष चुने गए। उसके बाद मंडल अध्यक्षों का निर्वाचन हुआ, इसके बाद सभी 60 संगठनात्मक जिलों को अध्यक्ष मिले। अब प्रदेश अध्यक्ष के लिए नाम सामने आना बचा हुआ है। केंद्रीय गृहमंत्री से मिले वर्तमान एमपी भाजपा अध्यक्ष मध्यप्रदेश के वर्तमान भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिले थे। इसके पहले उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल भी दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिल चुके हैं। बुधवार को खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय संगठन व पार्टी नेतृत्व के नेताओं से चर्चा की है।

मुश्किल में मध्य प्रदेश के उपनेता प्रतिपक्ष, अब भ्रष्टाचार के मामले में खुली फाइल, भोपाल में ISBT प्रोजेक्ट में गड़बड़ी के आरोप

भोपाल मध्यप्रदेश में पूर्व परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा की काली कमाई और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह सहित कई नेताओं पर हमलावर रहे हेमंत कटारे ईओडब्ल्यू के लपेटे में आ गए हैं। मध्यप्रदेश विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे के साथ ही उनकी पत्नी, भाई योगेश कटारे और बहू समेत 7 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। EOW ने दर्ज की एफआईआर दरअसल, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने उन पर एफआईआर दर्ज की है। यह मामला भोपाल के आईएसबीटी प्रोजेक्ट में प्लॉट आवंटन में गड़बड़ी से जुड़ा बताया जा रहा है। इसके अलावा भोपाल विकास प्राधिकरण (बीडीए) के तत्कालीन सीईओ केपी राही, ओएसडी मनोज वर्मा, मेसर्स हाई स्पीड मोटर्स और अन्य पर भी ईओडब्ल्यू ने एफआईआर दर्ज की है। इन सभी पर आरोप है कि इन अधिकारियों ने साठगांठ कर कटारे परिवार को नियम विरुद्ध प्लॉट का आवंटन किया। जांच एजेंसी के पास यह शिकायत भोपाल के हर्षवर्धन नगर निवासी सीआर दत्ता द्वारा की गई है। शिकायत के आधार पर ईओडब्ल्यू ने जांच की और भोपाल विकास प्राधिकरण (बीडीए) के नियमों के खिलाफ जाकर एक निजी कंपनी को जमीन आवंटन का मामला उजागर किया। बताया जा रहा है कि हेमंत कटारे, योगेश कटारे, मीरा कटारे और रुचि कटारे पर धारा 120 वी, 420, 468, 471 भादंवि के तहत एफआईआर दर्ज की है।   वहीं, इस मामले में बातचीत करते हुए हेमंत ने कहा कि मुझ पर और मेरे परिवार पर लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं। उन्होंने सरकार पर ब्लेकमेल करने का आरोप भी मढ़ा। हेमंत ने कहा कि जब मैं पहली बार विधायक बना तब भी मुझे पर 6 झूठे प्रकरण दर्ज हुए थे। बाद में कोर्ट ने सभी आरोपों को खारिज भी कर दिया था। उनका दावा है कि वे इस मामले में कोर्ट जाएंगे और दोष मुक्त साबित होंगे।   आपको बता दें कि पिछले दिनों हेमंत कटारे ने पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह पर काफी हमलावर रहे थे। इसके बाद भूपेंद्र सिह ने हेमंत कटारे पर आरोप लगाते हुए जांच के लिए मुख्यमंत्री और डीजीपी को पत्र लिखा था।  

भाजपा राजधानी को ‘मिनी’ भारत के रूप में दिखाना चाहती ,नए मंत्रिमंडल में दो उपमुख्यमंत्री रखने के विकल्प पर भी विचार कर रही

नई दिल्ली दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी किसे मुख्यमंत्री बनाएगी इसे लेकर तमाम तरह की चर्चा चल रही है। कई लोगों के नाम सीएम रेस में चल रहे हैं। पार्टी ने साफ किया है कि 14 फरवरी के बाद मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला लिया जाएगा। जवाहर लाल नेहरू में ग्रैंड शपथग्रहण समारोह होगा। इसी बीच भाजपा राजधानी को ‘मिनी’ भारत के रूप में दिखाना चाहती है। इसके लिए नए मंत्रिमंडल में दो उपमुख्यमंत्री रखने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। पार्टी नेताओं ने बुधवार को यह जानकारी दी। विभिन्न जातियों को साधने में मदद मिलेगी पार्टी के कुछ नेताओं ने कहा कि दिल्ली सरकार में दो उपमुख्यमंत्री रखने के कदम से पार्टी को विभिन्न जातियों, समुदायों और क्षेत्रीय पृष्ठभूमि के विधायकों को समायोजित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, ‘इसकी बहुत संभावना है क्योंकि ऐसा कई अन्य राज्यों में भी किया गया है, जहां विभिन्न पृष्ठभूमि के नेताओं को समायोजित करने के लिए उपमुख्यमंत्री बनाए गए हैं। पार्टी शासित राज्यों मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में ऐसा किया गया है।’ रविवार को बैठक संभव यह प्रस्ताव राष्ट्रीय नेतृत्व के विचाराधीन है, जो इस पर अंतिम फैसला लेगा, साथ ही मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के नामों को भी अंतिम रूप देगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीकेंड पर विदेश यात्रा से स्वदेश लौटने के बाद भाजपा के सरकार गठन की प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना है। पार्टी नेताओं ने बताया कि सदन के नेता का चुनाव करने के लिए भाजपा विधायक दल की बैठक रविवार को होने की संभावना है, जो दिल्ली का अगला मुख्यमंत्री होगा। पीएम ने दिल्ली को कहा था ‘मिनी इंडिया’ दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा की शानदार जीत के बाद भाजपा मुख्यालय में अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली को ‘मिनी भारत’ का प्रतिबिंब बताया था। दिल्ली भाजपा के एक शीर्ष नेता ने कहा, ‘पंजाबी, सिख, पूर्वांचली, उत्तराखंडी, वैश्य, जाट समेत समाज के विभिन्न वर्गों से भाजपा नेता अब विधायक बन गए हैं, जिन्हें हमारी सरकार में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री बनाने का विचार पार्टी की इस प्रक्रिया में मदद करेगा। मुख्यमंत्री पद के दावेदारों के रूप में भाजपा विधायकों के कई नाम चर्चा में हैं। पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘अगर भाजपा का मुख्यमंत्री एक समुदाय से होगा, तो उपमुख्यमंत्री के पद का प्रयोग उन अन्य लोगों के दावों को संतुलित करने के लिए किया जा सकता है, जिनके समुदाय जैसे कि महिला, सिख, जाट या बनिया ने पार्टी को दिल्ली में इतनी शानदार जीत दिलाई है।’ रोहिणी के विधायक विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में भाजपा सरकार जल्द ही छठे दिल्ली वित्त आयोग का गठन करेगी जो चार साल से लंबित है। सीएम रेस में किस-किसके नाम सीएम रेस में कई लोगों के नाम चल रहे हैं। जिनमें प्रवेश वर्मा शामिल हैं जिन्होंने नई दिल्ली सीट से आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल को हराया है। इसके अलावा दिल्ली भाजपा के पूर्व प्रमुख विजेंद्र गुप्ता और सतीश उपाध्याय, मनजिंदर सिंह सिरसा, पवन शर्मा, आशीष सूद, रेखा गुप्ता और शिखा राय जैसे वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं। पार्टी नेताओं ने करनैल सिंह और राज कुमार भाटिया जैसे कुछ नवनिर्वाचित विधायकों को भी शीर्ष पद का संभावित दावेदार बताया है।

कौन बनेगा दिल्ली का मुख्यमंत्री? रेस में Manoj Tiwari समेत ये नाम आगे..

नई दिल्ली दिल्ली में 26 साल बाद सत्ता में लौटी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुख्यमंत्री किसे बनाएगी? यह सवाल अब भी कायम है। भाजपा की ओर से इसको लेकर किसी तरह का संकेत नहीं दिया गया है। लेकिन कई नाम मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। अटकलें इस बात की भी तेज है कि इस बार भाजपा दिल्ली में एक पूर्वांचली को मुख्यमंत्री बना सकती है। खासकर किसी ऐसे नेता को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है जिनकी जड़ें बिहार में हैं। ऐसा करके भाजपा एक एक साथ दो निशाने साध सकती है। पूर्वांचलियों को रिटर्न गिफ्ट दिल्ली में पूर्वांचली वोटर्स की एक बड़ी आबादी है। इस बार बड़ी संख्या में पूर्वांचली वोटर्स ने भाजपा का साथ दिया है, जो पिछले 2-3 चुनावों में आम आदमी पार्टी के साथ रुख कर चुके थे। भाजपा ने इस बार झुग्गी और कच्ची कॉलोनियों में बेहतर प्रदर्शन किया है, जहां पूर्वांचली वोटर्स की संख्या ज्यादा है। झुग्गी बस्ती की बहुलता वाले 18 विधानसभा में से 10 पर भाजपा ने जीत हासिल की है। वहीं 10 सीटों पर कच्ची कॉलोनियों के वोटर्स हार जीत तय करते हैं और इनमें से 7 पर कमल खिला है। इस हिसाब से देखें तो 17 सीटें जितवाने में पूर्वांचलियों ने भाजपा की मदद की है। इसके अलावा अन्य सीटों पर भी उनकी कम या ज्यादा मौजूदगी है। ऐसे में भाजपा किसी पूर्वांचली को सीएम बनाकर रिटर्न गिफ्ट दे सकती है और आगे के चुनावों के लिए भी अपना बेस मजबूत कर सकती है। दिल्ली से बिहार को साध सकती है भाजपा कुछ जानकारों का मानना है कि भाजपा जिस तरह महीन राजनीति करती है और एक चुनाव के खत्म होते ही दूसरे चुनाव की तैयारी में जुट जाती है, उसको देखते संभव है कि दिल्ली से ही वह बिहार को साधने की कोशिश करे, जहां कुछ महीने बाद विधानसभा चुनाव होने जा रहा है। सूत्रों की मानें तो भाजपा राजधानी दिल्ली में बिहार के किसी नेता को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाकर ना सिर्फ दिल्ली में मौजूद पूर्वांचलियों को खुश कर सकती है बल्कि इसका असर 1000 किलोमीटर दूर भी होने की उम्मीद है। भाजपा को आगामी बिहार चुनाव में इसका फायदा मिल सकता है। बिहार से बड़ी संख्या में लोग दिल्ली में रोजगार और बेहतर शिक्षा, इलाज की तलाश में दिल्ली आते जाते रहे हैं। बिहार में ऐसे कम ही परिवार आपको मिलेंगे जिसका कोई सदस्य दिल्ली में ना रहता हो। ऐसे में यदि दिल्ली में किसी बिहारी को सीएम बनाया जाता है तो एक सकारात्मक संदेश बिहार के हर परिवार तक पहुंचेगा। बिहारी बना सीएम तो किनका लग सकता है दांव? दिल्ली में भाजपा में पूर्वांचल खासकर बिहार से आने वाले कई बड़े नेता हैं। लेकिन संभव है कि जीते हुए किसी विधायक में से ही पार्टी मुख्यमंत्री बनाएगी। ऐसा होने पर अभय वर्मा, डॉ. पंकज कुमार सिंह और चंदन कुमार चौधरी की लॉटरी लग सकती है। इनमें सबसे मजबूत दावेदार अभय वर्मा को माना जा रहा है जो मूलरूप से दरभंगा के रहने वाले हैं। पेशे से वकील अभय वर्मा दिल्ली भाजपा के उपाध्यक्ष भी हैं। वह आप की लहर में भी लक्ष्मी नगर विधानसभा से चुनाव जीतने में कामयाब रहे थे। इस बार उन्होंने बीबी त्यागी को 11542 वोटों से मात दी है। वहीं, खगड़िया के रहने वाले चंदन चौधरी ने संगम विहार से जीत हिसाल की है। उन्होंने यहां आम आदमी पार्टी के दिनेश मोहनिया को मात दी है। पक्सर से आने वाले डॉ. पंकज कुमार सिंह ने विकासपुरी विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की है। उन्होंने पहली बार यहां कमल खिलाया है। पंकज के पिता बाबू राज मोहन सिंह दिल्ली में एडिशनल कमिश्नर रह चुके हैं।

जिनका सनातन से कोई लेना देना नहीं, वो महाकुंभ में डुबकी नहीं लगायेंगे : उषा ठाकुर

इंदौर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के कुंभ में स्नान नहीं करने पर पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा, ‘राहुल गांधी ने अपने पिता का सरनेम छुपा लिया. खान होकर गांधी लिखते हैं. इसलिए राहुल गांधी प्रयागराज महाकुंभ में स्नान नहीं करने गए. ये तो खान हैं, जहां उन्हें जाना है वो तो वहींं जाएंगे.’ वहीं समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा दिए गए बयान पर पलटवार करते हुए उषा ठाकुर ने कहा कि झूठे लोगों को सब झूठ लगता है. दरअसल, अखिलेश यादव ने 144 साल बाद महाकुंभ को लेकर कहा था बीजेपी ने झूठा प्रचार किया है. उषा ठाकुर ने कहा कि अखिलेश यादव वामपंथी विचार धारा से ग्रस्त हैं. इसलिए बेतुकी बातें करते रहते हैं. हिंदू समाज इन्हें समझ चुका है आने वाले समय में जनता मुंह तोड़ जवाब देगी. इसके अलावा पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुए इंडिया गॉट लैटेंट के वीडियो को लेकर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि रणवीर अल्लाहबादिया ने अक्षम अपराध किया है. उन्हें कठोरतम दंड मिलना चाहिए. ये लोग वामपंथी घृणित विचारधार के हैं. टुकड़े-टुकड़े गैंग के उत्तराधिकारी हैं रणवीर. देशद्रोह, सनातन द्रोह और संस्कृति द्रोह का काम रणवीर अल्लाहबादिया ने किया है. इस जैसे दुष्टों को सजा जरूर मिलना चाहिए. वहीं इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी अखिलेश और राहुल गांधी के महाकुंभ ना जाने को लेकर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, ‘वे स्नान करने क्यों नहीं गए ,ये तो वही तय करें. भगवान इनको सद्बुद्धि दें. मां गंगा सबके पाप हरती हैं. अवसर मिलेगा तो कुछ छींटे हम डाल देंगे.’

आप पार्टी के मुखिया केजरीवाल करेंगे विपक्ष की भूमिका का फैसला, आतिशी या कोई और?

नई दिल्ली दिल्ली में विधानसभा चुनाव के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को जहां मुख्यमंत्री और मंत्रियों पर फैसला लेना है तो दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी (आप) के मुखिया अरविंद केजरीवाल को भी एक अहम निर्णय लेना है। सरकार गठन के बाद दिल्ली में पहले विधानसभा सत्र की शुरुआत से पहले अरविंद केजरीवाल को विपक्ष के चेहरे की तलाश करनी होगी। लगातार तीन बार दिल्ली में सरकार बना चुकी ‘आप’ पहली बार विपक्ष में बैठने जा रही है। ऐसे में पार्टी को नेता विपक्ष के लिए चेहरा तय करना होगा। विधानसभा चुनाव में 22 सीटों पर सिमट गई पार्टी के अधिकतर बड़े चेहरे चुनाव हार गए हैं। खुद अरविंद केजरीवाल नई दिल्ली सीट से चुनाव हार गए तो मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन, सौरभ भारद्वाज, राखी बिड़लान के लिए भी विधानसभा के दरवाजे बंद हो गए हैं। ऐसे में अरविंद केजरीवाल को अब 22 विधायकों में से किसी एक ऐसे चेहरे की तलाश करनी होगी जो ना सिर्फ नेता विपक्ष के तौर पर ना सिर्फ जनता बल्कि पार्टी के हितों को भी साध सके। राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह जिम्मेदारी आतिशी मार्लेना को मिल सकती है, जिनपर अरविंद केजरीवाल ने हाल के दिनों में सबसे अधिक भरोसा जताया है। पहले जहां मंत्री बनाकर उन्हें डेढ़ दर्जन विभागों की जिम्मेदारी दी गई तो बाद में मुख्यमंत्री भी बनाया। आतिशी ने भाजपा के पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी को कालकाजी सीट से हराया है। आतिशी ना सिर्फ अरविंद केजरीवाल की भरोसेमंद हैं, बल्कि वाकपटु भी हैं, जो नेता विपक्ष के लिए सबसे अहम योग्यता है। रेस में कुछ और भी नाम आतिशी के अलावा कुछ अन्य नाम भी रेस में बताए जा रहे हैं। पूर्व मंत्री और आप के संस्थापक सदस्य गोपाल राय भी प्रमुख दावेदार हैं। बाबरपुर से तीसरी बार जीते गोपाल राय दिल्ली प्रदेश के संयोजक भी हैं। उत्तर प्रदेश के मऊ में पैदा हुए गोपाल राय के जरिए पार्टी पूर्वांचली कार्ड भी खेल सकती है। पूर्वांचली दावेदारों में संजीव झा का भी नाम शामिल है। वहीं, कोंडली से विधायक और युवा दलित चेहरे कुलदीप कुमार (मोनू) भी केजरीवाल की पसंद हो सकते हैं। एमसीडी में एक सफाई कर्मचारी के बेटे कुलदीप के जरिए दलितों को साधा जा सकता है।

दिल्ली चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद हलचल तेज, जेपी नड्डा ने 10 विधायकों से की मुलाकात

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद भाजपा के 10 नवनिर्वाचित विधायकों ने मंगलवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। इन विधायकों में विजेंद्र गुप्ता, रेखा गुप्ता, अरविंदर सिंह लवली, अजय महावर, सतीश उपाध्याय, शिखा राय, अनिल शर्मा और डाॅ. अनिल गोयल, कपिल मिश्रा और कुलवंत राणा शामिल हैं। इस विधायकों में 3 से 4 चेहरे मुख्यमंत्री पद के दावेदार बताए जा रहे है। दिल्ली चुनाव में पार्टी की जीत के बाद भाजपा ने सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ऐसे में भाजपा विधायकों की जेपी नड्डा से मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है। इससे पहले कुछ नवनिर्वाचित विधायकों ने दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना से भी मुलाकात की। अरविंद केजरीवाल को हराने वाले नई दिल्ली के विधायक प्रवेश वर्मा, कैलाश गहलोत और अरविंदर सिंह लवली समेत जीते हुए तमाम विधायकों ने एलजी वीके सक्सेना से मुलाकात की थी। वहीं सोमवार शाम भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात की। सूत्रों ने मुताबिक दोनों नेताओं की इस बैठक में दिल्ली के अगले सीएम को लेकर चर्चा हुई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं के अनुसार दिल्ली में नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे से लौटने के बाद आयोजित किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी फिलहाल फ्रांस और अमेरिका के दौरे पर हैं। मिली जानकारी के मुताबिक जल्द ही भाजपा विधायक दल की बैठक होगी। जिसमें नवनिर्वाचित विधायक विधायक दल के नेता का चयन करेंगे। 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा के चुनाव में भाजपा को 48 सीटों पर जीत मिली है, जबकि आप को 22 सीटें मिली हैं। कांग्रेस का खाता नहीं खुला है।

बीजेपी पार्टी में बागी सुर अपना रहे तीनों नेताओं को दिया नोटिस

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी बागी नेताओं के खिलाफ ऐक्शन मोड में है। हरियाणा सरकार में मंत्री अनिल विज को नोटिस जारी किया जा चुका है। यही हाल कर्नाटक में पार्टी विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल का है। हालांकि, पार्टी में बागी सुर अपना रहे नेताओं की संख्या दो पर सीमित नहीं है। इनमें राजस्थान सरकार में मंत्री किरोड़ी लाल मीणा और महाराष्ट्र में विधायक पंकजा मुंडे का नाम भी शामिल है। किरोड़ी लाल मीणा भाजपा की राजस्थान इकाई के अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीणा को ‘फोन टैप’ किये जाने का का आरोप लगाने पर कारण बताओ नोटिस भेजा है। पार्टी की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस में कहा गया है कि मीणा ने सार्वजनिक रूप से यह आरोप लगाकर सरकार की ‘छवि धूमिल’ की है कि उनका फोन टैप किया जा रहा है। नोटिस में कहा गया है, ‘आप (किरोडी लाल मीणा) भाजपा के सदस्य हैं और पार्टी टिकट पर सवाई माधोपुर क्षेत्र से विधायक चुने गए हैं। आप (मीणा) राजस्थान सरकार में मंत्री भी हैं। हाल में आपने मंत्रिपरिषद से अपने इस्तीफे की खबर अखबार में छपने के लिए उपलब्ध कराई। आपने सार्वजनिक बयान देकर भाजपा सरकार पर फोन टैप कराने का आरोप भी लगाया, जो कि असत्य है।’ पंकजा मुंडे पंकजा भाजपा के बड़े नेताओं में शुमार रहे दिवंगत गोपीनाथ मुंडे की बेटी हैं। वह फिलहाल महाराष्ट्र सरकार में पर्यावरण मंत्री हैं। ऐसा माना जाता है कि राज्य की सत्ता में देवेंद्र फडणवीस का कद बढ़ने के साथ ही पंकजा दरकिनार महसूस करने लगी थीं। हाल ही में उन्होंने बयान दे दिया था कि उनके पिता के समर्थक चाहें तो नई पार्टी बना सकते हैं। रविवार को पंकजा ने कहा, ‘मेरे पिता गोपीनाथ मुंडे को प्यार करने वाले लोगों की संख्या इतनी है कि वह खुद का राजनीतिक दल बना सकते हैं।’ इसके साथ ही अटकलों का दौर शुरू हो गया था कि वह भाजपा से दूरी बना सकती हैं। हालांकि, सोमवार को ही उन्होंने इससे इनकार किया है। अनिल विज मंत्री अनिल विज को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और प्रदेश इकाई के प्रमुख मोहन लाल बडोली पर बार-बार निशाना साधने को लेकर सोमवार को ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया। प्रदेश भाजपा प्रमुख बडोली ने विज को जारी नोटिस में कहा, ‘‘आपको सूचित किया जाता है कि आपने हाल ही में पार्टी (प्रदेश) अध्यक्ष (बडोली) और मुख्यमंत्री पद के खिलाफ सार्वजनिक बयान दिए हैं। ये गंभीर आरोप हैं और पार्टी की नीति और आंतरिक अनुशासन के खिलाफ हैं।’’ बडोली ने कहा कि विज को नोटिस भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देशानुसार जारी किया जा रहा है। इसमें कहा गया, ‘हम आपसे तीन दिन के भीतर इस विषय पर लिखित स्पष्टीकरण देने की अपेक्षा करते हैं।’ कारण बताओ नोटिस में विज से कहा गया कि उनका ‘कदम न केवल पार्टी की विचारधारा के खिलाफ है, बल्कि यह ऐसे समय में आया, जब पार्टी पड़ोसी राज्य (दिल्ली) में चुनाव प्रचार कर रही थी।’ नोटिस में कहा गया, ‘चुनाव के समय, एक सम्मानित मंत्री पद पर रहते हुए, आपने यह जानते हुए भी ये बयान दिए हैं कि इससे पार्टी की छवि धूमिल होगी। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है।’ अंबाला छावनी से सात बार के विधायक विज (71) लगातार सैनी पर निशाना साध रहे थे। बसनगौड़ा पाटिल यतनाल भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने सोमवार को असंतुष्ट भाजपा विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल को एक नया कारण बताओ नोटिस जारी किया और उनसे पूछा कि ‘आश्वासन देने के बाद भी उसका उल्लंघन करने’ पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए। यतनाल ने भाजपा की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र और उनके पिता एवं पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पाके खिलाफ बगावत कर दी है। यतनाल को भेजे पत्र में केंद्रीय अनुशासन समिति के सदस्य सचिव ओम पाठक ने कहा, ‘पार्टी ने आपके द्वारा लगातार दिए जा रहे तीखे बयान और पार्टी अनुशासन के उल्लंघन को संज्ञान में लिया है, जो भारतीय जनता पार्टी के संविधान और उसके नियमों में निहित अनुशासन संहिता का स्पष्ट उल्लंघन है।’ उन्होंने कहा, ‘पहले के कारण बताओ नोटिस के जवाब में आपने अच्छे व्यवहार और आचरण का आश्वासन दिया था, लेकिन आप अपने ही आश्वासनों का उल्लंघन और अवहेलना जारी रखे हुए हैं। कृपया कारण बताएं कि पार्टी को आपके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं करनी चाहिए। आपका स्पष्टीकरण इस नोटिस के मिलने के 72 घंटे के भीतर नीचे हस्ताक्षरकर्ता तक पहुंच जाना चाहिए।’

पंजाब में पार्टी में बढ़ते असंतोष को देखते हुए आप पार्टी संयोजक केजरीवाल ने यह बैठक बुलाई

नई दिल्ली अरविंद केजरीवाल के साथ बैठक के लिए भगवंत मान अपनी पूरी कैबिनेट के साथ दिल्ली पहुंच गए हैं। पंजाब में पार्टी में बढ़ते असंतोष को देखते हुए AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने यह बैठक बुलाई है। दिल्ली के कपूरथला हाउस में यह बैठक होगी। वहीं विपक्षी दल कांग्रेस का कहना है कि अरविंद केजरीवाल भगवंत मान को मुख्यमंत्री पद से हटाने की कोशिश कर रहे हैं। इस बैठक के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 10 फरवरी को होने वाली कैबिनेट मीटिंग भी टाल दी थी जो अब 13 फरवरी को बुलाई गई है। वहीं, आम आदमी पार्टी के पंजाब प्रधान अमन अरोड़ा के किसी हिंदू के भी पंजाब का मुख्यमंत्री बनने के बयान से इन आशंकओं को बल मिला है जिस में उन्होंने कहा था कि जो आदमी डिजर्व करता है, उसे जिम्मेदारी मिलनी चाहिए। देश में सिर्फ 2 फीसदी सिख, फिर भी डॉ. मनमोहन सिंह पीएम बने, तो किसी ने एतराज नहीं किया।  उधर, नेता प्रति पक्ष कांग्रेस के प्रताप सिंह बाजवा ने 30 विधायक उनके संपर्क में होने की बात कह कर पंजाब से लेकर दिल्ली तक खलबली मचा दी है। प्रताप बाजवा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल पंजाब के सीएम बनेंगे। हाल ही में लुधियाना वेस्ट से आप के विधायक गुरप्रीत गोगी का निधन हुआ है। यह सीट खाली हो है। केजरीवाल यहां से उपचुनाव लड़ेंगे। दिल्ली में हार के बाद आम आदमी पार्टी का पूरा बोझ पंजाब पर पड़ेगा। मुख्यमंत्री भगवंत मान और दिल्ली के नेताओं के बीच अंदरुनी जंग होगी और कई विधायक आम आदमी पार्टी से बगावत कर सकते हैं। इनमें से 30 कांग्रेस के संपर्क में हैं। आप के सांसद कंग बोले, यह रूटीन मीटिंग केजरीवाल के दिल्ली में मीटिंग लेने पर आप सांसद मालविंदर कंग ने कहा कि दिल्ली में संगठनात्मक मीटिंग है। केजरीवाल हमारी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक हैं। इस तरह की बैठकें किसी भी पार्टी की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं।कांग्रेस के तो अपने विधायक उनसे दूर हैं, तो हमारे 30 कैसे संपर्क में होंगे। वहीं, आप के प्रवक्ता नील गर्ग ने कहा कि ये रूटीन मीटिंग है। पंजाब के विधायकों व मंत्रियों ने दिल्ली चुनाव में प्रचार किया था। ऐसे में पार्टी नेताओं से फीडबैक लेगी। यह पार्टी की मर्जी है कि मीटिंग चंडीगढ़ में करें या दिल्ली। दिल्ली में हुए नुकसान की भरपाई की कोशिश दिल्ली के बाद पंजाब ही ऐसा राज्य है, जहां आम आदमी पार्टी ने सरकार बनाई है। हरियाणा में खाता तक नहीं खुला था। गुजरात में पार्टी दूसरे नंबर पर रही थी। अब दिल्ली हाथ से छिन गई तो अब अरविंद केजरीवाल पंजाब के जरिए ही अपनी पॉलिटिक्स चलाएंगे। पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव हैं और पार्टी अभी तक उन वादों को पूरा नहीं कर सकी है जो उसने सत्ता में आने के लिए पंजाब की जनता से किए थे। मतलब दिल्ली में हुए नुकसान की भरपाई की कोशिश की जाएगी क्योंकि अगर पंजाब हाथ से निकला तो आम आदमी पार्टी के वजूद पर संकट खड़ा हो जाएगा। कांग्रेस को मध्यावधि चुनाव की आशंका क्यों? दिल्ली के नतीजों के बाद पंजाब कांग्रेस खुश नजर आ रही है। उसका कहना है कि अब पंजाब में भी आम आदमी पार्टी का यही अंजाम होगा। पंजाब में भी शराब पॉलिसी का घोटाला निकलेगा। ये वही पॉलिसी है, जिसमें केजरीवाल और मनीष सिसोदिया फंसे थे। इसी साल पंजाब में धान खरीद में एमएसपी घोटाला किया। पंजाब सरकार में केजरीवाल के दखल से पार्टी में बिखराव होगा और विधायक टूटेंगे और कांग्रेस में आयेंगे। ऐसे में पंजाब में समय से पहले चुनाव हो सकते हैं।

संजय राउत ने दिल्ली के इलेक्शन रिजल्ट में 5,8 और 48 वाला संयोग खोजते हुए सवाल उठाया

चंडीगढ़ दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों से आम आदमी पार्टी को झटका लगा है तो वहीं देश के अन्य हिस्सों में भी विपक्षी दल इससे हैरान हैं। उद्धव ठाकरे सेना के नेता संजय राउत तो 8 तारीख से ही लगातार नतीजों को लेकर टिप्पणी कर रहे हैं। अब उन्होंने दिल्ली चुनाव में एक अलग और मजेदार संयोग खोज निकाला है। उन्होंने दिल्ली के इलेक्शन रिजल्ट में 5,8 और 48 वाला संयोग खोजते हुए सवाल उठाया है। इसके अलावा उन्होंने इसे हरियाणा से भी जोड़ा है। संजय राउत ने एक्स पर लिखा, ”हरियाणा में वोटिंग। 5 तारीख को गिनती 8 तारीख को भाजपा को सीट आई 48। दिल्ली में भी वोटिंग- 5 तारीख को गिनती 8 तारीख को भाजपा को सीट आई वही 48। गजब संयोग है!’ संजय राउत ने यह संयोग गिनाते हुए कोई टिप्पणी तो नहीं की, लेकिन उन्होंने इशारा जरूर किया। इससे पहले संजय राउत ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद ईवीएम पर सवाल उठाया था। उनका कहना था कि भाजपा को हर चुनाव में ईवीएम के चलते जीत मिल रही है और अब चुनाव व्यवस्था में बदलाव करने की जरूरत है। उनका कहना था कि यदि बैलेट पेपर से इलेक्शन कराया जाए तो भाजपा कहीं भी जीत नहीं पाएगी। इसी तरह दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने ईवीएम पर तो नहीं, लेकिन चुनाव आयोग पर सवाल उठाए थे। इलेक्शन के दौरान अरविंद केजरीवाल ने सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त पर हमला किया था। उनका कहना था कि राजीव कुमार आखिर केंद्र सरकार से रिटायरमेंट के बाद क्या पद चाहते हैं, जिसके लिए वह इस तरह से चुनाव आयोग का संचालन कर रहे हैं। केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि फर्जी वोटर जोड़े गए हैं, जबकि उन मतदाताओं के नाम ही हटा दिए गए हैं, जो आम आदमी पार्टी के समर्थक हैं।

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