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दिल्ली के मुख्यमंत्री के पद को लेकर महिला विधायक को भी मौका दिया जा सकता

नई दिल्ली  दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली प्रचंड जीत के बाद सीएम फेस को लेकर मंथन जारी है। दिल्ली के मुख्यमंत्री को लेकर जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है उनमें प्रवेश साहिब सिंह वर्मा, विजेंद्र गुप्ता और सतीश उपाध्याय जैसे नाम शामिल है। हालांकि इस बीच खबर यह भी आ रही है कि इस पद के लिए महिला विधायक को भी मौका दिया जा सकता है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 70 में से 48 सीटों पर जीत दर्ज कर सत्ता की चाबी हासिल की है। भाजपा ने बिना मुख्यमंत्री के चेहरे के दिल्ली में चुनाव लड़ा था। ऐसे में अब चुनाव जीतने के बाद अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसको लेकर चर्चा जोरों पर हैं। इंडिया टुडे के रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में अगला मुख्यमंत्री नवनिर्वाचित 48 विधायकों में से ही चुना जाएगा। सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री पद के लिए महिला विधायक को मौका दिया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में डिप्टी सीएम भी बनाया जा सकता है और मंत्रिमंडल में भी दलितों और महिलाओं की भागीदारी का खास ध्यान रखा जा सकता है। बता दें, भाजपा की तरफ से इस बार 4 महिलाएं दिल्ली की विधायक बनी हैं। इनमें रेखा गुप्ता, शिखा राय, पूनम शर्मा और नीलम पहलवान के नाम शामिल हैं। रेखा गुप्ता ने शालीमार बाग से , शिखा रॉय ने ग्रेटर कैलाश से, पूनम शर्मा ने वजीपुर और नीलम पहलवान ने नजफगढ़ विधानसभा सीट से जीत दर्ज की है। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मुलाकात की थी जिसमें दिल्ली सरकार के स्वरूप को लेकर चर्चा हुई। भाजपा नेताओं के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगले सप्ताह विदेश दौरे से लौटने के बाद भाजपा सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है और उसके बाद शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा।

आम आदमी पार्टी की मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी जैसी योजनाओं के बारे में लोगों के मन में सवाल उठ रहे, क्या ख़त्म होगी ये योजना

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में आम आदमी पार्टी (AAP) को जोरदार झटका लगा। जहां पार्टी ने 2020 में 62 सीटें जीती थी, वहीं 2025 के चुनाव में सिर्फ 22 सीटों पर ही सिमट गई। इस चुनावी हार के बाद, भाजपा ने दिल्ली में अपनी वापसी की है और अब इस बात पर चर्चा हो रही है कि दिल्ली की मौजूदा योजनाओं का भविष्य क्या होगा। खासकर आम आदमी पार्टी की मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी जैसी योजनाओं के बारे में लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं। भा.ज.पा ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी का घोषणा पत्र जारी किया था, जिसमें कई अहम वादे किए गए थे। भाजपा ने कहा था कि वह दिल्ली में मौजूदा योजनाओं को जारी रखेगी, लेकिन इन योजनाओं में भ्रष्टाचार को खत्म कर प्रभावी बनाने का काम करेगी। वहीं, भाजपा ने कुछ नई योजनाओं की भी घोषणा की है जो दिल्लीवासियों के लिए खास हो सकती हैं। महिला समृद्धि योजना भा.ज.पा ने दिल्ली की महिलाओं के लिए एक बड़ी योजना का ऐलान किया है। इसके तहत गरीब परिवारों की महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसके अलावा, भाजपा ने मुख्यमंत्री मातृत्व सुरक्षा योजना का भी वादा किया है। इसके तहत गर्भवती महिलाओं को 21,000 रुपये और छह पोषण किट दिए जाएंगे। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार भा.ज.पा ने दिल्ली में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का वादा भी किया है। भाजपा सरकार ने कहा कि वह आयुष्मान भारत योजना को लागू करेगी, जिसमें 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलेगा। इसके अलावा, दिल्ली सरकार ने 70 वर्ष से ऊपर के नागरिकों के लिए एक अतिरिक्त कवर देने का वादा किया है, जिससे इन नागरिकों को 5 लाख रुपये का मुफ्त इलाज मिलेगा। मुफ्त बिजली और पानी योजना का भविष्य अरविंद केजरीवाल की मुफ्त बिजली और पानी योजना दिल्ली के लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है। लेकिन भाजपा के सत्ता में आने के बाद यह सवाल उठता है कि क्या भाजपा इस योजना को जारी रखेगी या इसे खत्म कर देगी। भाजपा ने अपने घोषणापत्र में साफ कहा है कि वह मौजूदा योजनाओं को जारी रखेगी। हालांकि, इन योजनाओं को भ्रष्टाचार मुक्त और प्रभावी बनाने की कोशिश की जाएगी। गरीबों के लिए विभिन्न योजनाएं भा.ज.पा ने गरीब परिवारों के लिए कई योजनाओं का ऐलान किया है। इसके तहत गरीब परिवारों की महिलाओं को 500 रुपये में LPG सिलेंडर मिलेगा और होली व दीपावली के अवसर पर एक सिलेंडर मुफ्त दिया जाएगा। इसके अलावा, गरीब छात्रों को शिक्षा के लिए मुफ्त शिक्षा देने का वादा किया गया है। भाजपा ने यह भी कहा है कि वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को सशक्त बनाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। वरिष्ठ नागरिकों और विशेष वर्ग के लिए योजनाएं भा.ज.पा ने दिल्ली के वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी कई योजनाएं बनाई हैं। 60-70 वर्ष के नागरिकों के लिए पेंशन 2,000 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये की जाएगी, और 70 वर्ष से ऊपर के वरिष्ठ नागरिकों, विधवाओं, दिव्यांगों और निराश्रितों के लिए पेंशन ₹2,500 से बढ़ाकर ₹3,000 की जाएगी। इसके अलावा, भाजपा ने स्ट्रीट वेंडर्स और घरेलू कामगारों के लिए भी कल्याण बोर्ड की स्थापना करने का वादा किया है। इसके तहत ₹10 लाख तक का जीवन बीमा, ₹5 लाख तक का दुर्घटना बीमा और उनके बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति दी जाएगी। भा.ज.पा की योजना: गरीब किसानों के लिए भी बड़ी राहत भा.ज.पा ने दिल्ली में किसानों के लिए भी अपनी योजना का ऐलान किया है। इसके तहत दिल्ली में सभी पात्र किसानों का शत-प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित किया जाएगा। इसके अलावा, पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को 9,000 रुपये वार्षिक सहायता दी जाएगी, जो पहले 6,000 रुपये थी।

जल्द हो जनगणना, पात्र व्यक्तियों को खाद्य सुरक्षा कानून के तहत गारंटीकृत लाभ मिल सके, सोनिया ने RS में उठाई मांग

नई दिल्ली कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पार्टी संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सोमवार को जल्द से जल्द जनगणना कराने की मांग उठाई ताकि सभी पात्र व्यक्तियों को खाद्य सुरक्षा कानून के तहत गारंटीकृत लाभ मिल सके। राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए उन्होंने यह भी कहा कि खाद्य सुरक्षा विशेषाधिकार नहीं बल्कि नागरिकों का एक मौलिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार द्वारा पेश किया गया राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम एक ऐतिहासिक पहल थी, जिसका उद्देश्य 140 करोड़ आबादी के लिए खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना था। उन्होंने कहा कि इस कानून ने लाखों कमजोर परिवारों को भुखमरी से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, खासकर कोविड 19 महामारी के संकट के दौरान तथा साथ ही इसी अधिनियम ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को आधार प्रदान किया। गांधी ने कहा कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत 75 प्रतिशत ग्रामीणों के साथ ही 50 प्रतिशत शहरी आबादी सब्सिडी वाले खाद्यान्न प्राप्त करने की हकदार है। उन्होंने कहा कि हालांकि लाभार्थियों के लिए कोटा अब भी 2011 की जनगणना के आधार पर निर्धारित किया जाता है, जो अब एक दशक से अधिक पुरानी है। उन्होंने कहा, ‘स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार जनगणना में 4 साल से अधिक की देरी हुई है। मूल रूप से यह 2021 के लिए निर्धारित थी लेकिन अब भी इस बात पर कोई स्पष्टता नहीं है कि जनगणना कब आयोजित की जाएगी।’ गांधी ने कहा कि बजट आवंटन से पता चला है कि जनगणना इस वर्ष भी आयोजित किए जाने की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा, ‘इस प्रकार लगभग 14 करोड़ पात्र भारतीयों को खाद्य सुरक्षा कानून के तहत उनके उचित लाभों से वंचित किया जा रहा है। यह जरूरी है कि सरकार जल्द से जल्द जनगणना पूरा करने को प्राथमिकता दे और यह सुनिश्चित करे कि सभी पात्र व्यक्तियों को खाद्य सुरक्षा कानून के तहत गारंटीकृत लाभ प्राप्त हों।’ उन्होंने कहा, ‘खाद्य सुरक्षा कोई विशेषाधिकार नहीं है, एक मौलिक अधिकार है।’

कौन होगा दिल्ली का नया मुख्यमंत्री? ‘दावेदारों’ के नाम पर चर्चा तेज

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे आ चुके हैं, और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) को बड़े अंतर से हराकर 70 में से 48 सीटें जीत ली हैं. आप को केवल 22 सीटों पर संतोष करना पड़ा. अब सवाल यह है कि दिल्ली का मुख्यमंत्री कौन बनेगा? भाजपा के पास कई विकल्प हैं, और पार्टी के भीतर इसको लेकर चर्चा तेज है. सबसे आगे प्रवेश वर्मा प्रवेश वर्मा, जो पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय साहिब सिंह वर्मा के बेटे हैं, इस चुनाव में अरविंद केजरीवाल को नई दिल्ली विधानसभा सीट से हराकर चर्चा में आए हैं. उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है. प्रवेश ने न केवल केजरीवाल को हराया, बल्कि पार्टी के भीतर भी उनकी पकड़ मजबूत है. अशीष सूद और पवन शर्मा अशीष सूद, जो जनकपुरी सीट से जीते हैं, भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं. उन्हें दक्षिण दिल्ली नगर निगम में प्रशासनिक अनुभव है और वर्तमान में वे गोवा और जम्मू-कश्मीर इकाई के प्रभारी भी हैं. दूसरी ओर, पवन शर्मा ने उत्तम नगर सीट से 1,03,613 वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की है. वे असम इकाई के सह-प्रभारी हैं और मुख्यमंत्री पद के लिए उनका नाम भी चर्चा में है. इन नामों पर भी चर्चा भाजपा के पूर्व दिल्ली अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता और सतीश उपाध्याय भी मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं. गुप्ता ने रोहिणी सीट से लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की है, जबकि उपाध्याय ने मालवीय नगर सीट से 39,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल की. उपाध्याय का आरएसएस के साथ मजबूत रिश्ता है, जो उनकी दावेदारी को और मजबूत करता है. ये महिला उम्मीदवार भी दावेदार भाजपा केंद्रीय नेतृत्व महिला उम्मीदवार को भी मौका दे सकता है. रेखा गुप्ता और शिखा रॉय दो ऐसे नाम हैं जो इस रेस में शामिल हो सकते हैं. शिखा रॉय ने ग्रेटर कैलाश सीट पर आप के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज को 3,188 वोटों के अंतर से हराया है. वहीं, रेखा गुप्ता ने शालीमार बाग सीट पर आप की बंदना कुमारी को 29,000 से अधिक वोटों के अंतर से पराजित किया. क्या कहते हैं सीनियर लीडर? अगर भाजपा विधायक दल से बाहर किसी को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला करती है, तो पूर्वी दिल्ली के सांसद और केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा और उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी का नाम भी चर्चा में है. तिवारी पूर्वांचल के प्रमुख चेहरे हैं और उनकी लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें भी मौका मिल सकता है. हालांकि, भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश के पिछले अनुभवों को देखते हुए मुख्यमंत्री पद के लिए अटकलें लगाना मुश्किल है. पार्टी का फैसला अक्सर आखिरी पल में ही सामने आता है.

दिल्ली की जनता ने 10 साल तक आम आदमी पार्टी के कुशासन को झेला है और अब उन्हें इससे मुक्ति मिलेगी: शाहनवाज हुसैन

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव में 27 साल बाद मिली ऐतिहासिक जीत से उत्साहित भाजपा के वरिष्ठ नेता शाहनवाज हुसैन ने दावा किया कि अब राष्ट्रीय राजधानी विकास की पटरी पर दौड़ेगी। दिल्ली की जनता ने 10 साल तक आम आदमी पार्टी के कुशासन को झेला है और अब उन्हें इससे मुक्ति मिलेगी। शाहनवाज हुसैन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जनता केजरीवाल के शासन से त्रस्त हो चुकी थी। लेकिन अब दिल्ली ने भाजपा को चुना है। अब दिल्ली में तेजी से विकास कार्य होंगे क्योंकि अब दिल्ली-एनसीआर में भाजपा की सरकार है। यूपी-हरियाणा में पहले से ही भाजपा की सरकार थी, जहां पर विकास कार्य हो रहे हैं। लेकिन 10 साल दिल्ली विकास कार्यों में पीछे रही है। अब दिल्ली में भाजपा की सरकार बन गई है और अब नोएडा-गुरुग्राम की तरह ही दिल्ली भी तरक्की के रास्ते पर चलेगी। दिल्ली में भाजपा को मिली इस जीत को शाहनवाज हुसैन ने ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा कि यह जीत पीएम मोदी जी की जीत है। लोगों ने उन पर भरोसा दिखाया है। मोदी ने जो गारंटी दी है, वह पूरी की जाएगी। यमुना नदी की सफाई को लेकर भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा, “केजरीवाल ने दिल्ली के लोगों को ठगने का प्रयास किया था जब उन्होंने ये कहा कि हरियाणा की सरकार ने यमुना नदी में जहर मिलाया है। लेकिन दिल्ली की जनता ने उनके झूठ को पकड़ लिया। हरियाणा में भाजपा की सरकार है और दिल्ली में भी भाजपा की सरकार है। हम यमुना की सफाई का काम करेंगे। अहमदाबाद की तरह यमुना में रिवर फ्रंट बनाने का काम करेंगे। इसके अलावा ट्रैफिक जाम की समस्या को भी ठीक करेंगे।” सीएम फेस के सवाल पर उन्होंने कहा कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व तय करेगा कि दिल्ली का मुख्यमंत्री कौन होगा। बता दें कि दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम 8 फरवरी को घोषित किए गए। भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला है। भाजपा के खाते में 48 सीट आई हैं और 10 साल से सत्ता में काबिज आम आदमी पार्टी को 22 सीटों से संतोष करना पड़ा है।

पंजाब में पैदा हो सकते हैं दिल्ली जैसे हालात, आप पार्टी को लड़नी होगी अस्तित्व की लड़ाई

नई दिल्ली दिल्ली में करारी हार के बाद पंजाब में भी आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। 10 साल राजधानी में काबिज रहने के बाद अरविंद केजरीवाल ने भी कभी नहीं सोचा होगा कि चुनाव में जनता उन्हे इस तरह का झटका देगी। केजरीवाल खुद अपनी सीट पर हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से हार गए। वहीं पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और मंत्री सौरभ भारद्वाज को भी कड़ी शिकस्त झेलनी पड़ी। 2013 के बाद दिल्ली में पहली बार AAP को हार का मुंह देखना पड़ा। इसमें बड़ा फैक्टर एंटी इनकंबेंसी भी है जिसका सामना पंजाब में भी करना पड़ेगा। ऐसे में आम आदमी पार्टी को अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़नी है। 62 से सीधे 22 पर AAP आम आदमी पार्टी ने पिछले विधानसभा चुनाव में 62 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं इस बार उसे मात्र 22 सीटों पर संतष करना पड़ा है। पार्टी का वोट शेयर भी 10 फीसदी कम होकर 43.57 प्रतिशत हो गया है। दिल्ली में ऐसी भी 14 सीटें थीं जिनपर जीत हार का फैसला बेहद कम अंतर से हुआ। इन सीटों पर 5 हजार से कम के अंतर से जीत हार हुई। वहीं अरविंद केजरीवाल ने दोपहर में ही अपनी हार स्वीकार कर ली। इसके बाद रविवार को आतिशी ने भी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। मिडिल क्लास की नाराजगी पड़ी भारी जानकारों का कहना है कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी को मिडिल क्लास की नाराजगी का सामना करना पड़ा। वहीं बीजेपी ने ‘शीश महल’ का नाम लेकर चुनाव प्रचार किया जो कि मिडल क्लास का मुद्दा बन गया। वहीं दिल्ली के लोगों ने उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के बीच खींचतान को भी देखा है। ऐसे में डबल इंजन की सरकार के प्रति लोगों ने भरोसा जता दिया। इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि आम आदमी पार्टी ने गरीबों के वोट से पकड़ खो दी है। इस चुनाव में भी गरीबों ने आम आदमी पार्टी का खुलकर साथ दिया है। आम आदमी पार्टी अब भी एमसीडी पर काबिज है। 250 मे से 134 सीटें आम आदमी पार्टी के पास हैं। ऐसे में दिल्ली के लोगों के साथ AAP का जुड़ाव खत्म नहीं होने वाला है। वहीं आम आदमी पार्टी की हालत बीजेपी जैसी नहीं हुआ है। अब भी विधानसभा में उसके 22 सदस्य होंगे। आम आदमी पार्टी विधानसभा में सक्रिय विपक्ष की भूमिका निभा सकती है। वहीं पंजाब की बात करें तो वहां आम आदमी पार्टी के लिए लोकसभा चुनाव के दौरान ही खतरे की घंटी बज गई थी। वहीं दिल्ली का चुनाव आम आदमी पार्टी को फिर सावधान कर रहा है। यह भी चर्चा है कि पंजाब में भी कई AAP विधायक असंतुष्ट हैं। ऐसे में पंजाब पर पकड़ बनाए रखने के लिए आम आदमी पार्टी को जमीन पर उतरना पड़ेगा। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती भ्रष्टाचार के आरोपों से पार पाने की है। पीएम मोदी ने साफ कह दिया है कि दिल्ली में भ्रष्टाचार की चांज करवाई जाएगी।

दिल्ली विधानसभा चुनावों में केजरीवाल के हारते ही टेंशन में उद्धव और शरद पवार, जानें महाराष्ट्र में आप की हार का क्या असर

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी (AAP) की हार ने महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) और राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (NCP) को भी तगड़ा झटका दिया है। दिल्ली चुनाव में भाजपा की जीत ने न केवल राजधानी में बल्कि महाराष्ट्र में भी उत्सव का माहौल बना दिया। महाराष्ट्र में हालांकि आप का कभी बड़ा चुनावी आधार नहीं रहा, लेकिन शिवसेना (UBT) और NCP (एसपी) ने केजरीवाल में एक मजबूत और प्रतिबद्ध नेता देखा था। जो BJP के केंद्रीय नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठाने का साहस रखते थे। उद्धव ठाकरे, शरद पवार और AAP के नेता अक्सर INDIA गठबंधन में एक साथ दिखते थे, ताकि अपने-अपने राज्यों में भाजपा का मुकाबला किया जा सके। अरविंद केजरीवाल का महाराष्ट्र से जुड़ाव 2011-12 में देशव्यापी भ्रष्टाचार विरोधी अभियान से जुड़ा हुआ है। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने पुणे जिले के रालेगांव से इसका नेतृत्व किया था। उस समय अरविंद केजरीवाल, शांति भूषण, प्रशांत भूषण, किरण बेदी, मेधा पाटकर, स्वामी अग्निवेश, और अन्य सामाजिक कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे और लोकपाल विधेयक को पारित करने की मांग कर रहे थे। अब अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल के बीच मतभेद बढ़ चुके हैं। अन्ना ने दिल्ली विधानसभा चुनावों में AAP के खिलाफ वोट डालने की अपील की थी। उन्होंने कहा था, “एक नेता को हमेशा निस्वार्थ और ईमानदार होना चाहिए। अगर आपको लोगों का समर्थन चाहिए तो ये आवश्यक गुण हैं।” केजरीवाल को शिवसेना और NCP ने एक मजबूत और प्रतिबद्ध नेता के रूप में देखा था। कई मौके पर शरद पवार और उद्धव ठाकरे ने AAP की मदद की और इसके नेताओं ने भी BJP के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और रैलियों में भाग लिया। जब बीजेपी ने ‘ऑपरेशन लोटस’ के तहत शिवसेना और NCP को तोड़ा, AAP के नेता केंद्र और महाराष्ट्र दोनों जगहों पर BJP के खिलाफ मोर्चा खोलने में आगे थे। केजरीवाल ने जब केंद्र द्वारा एक कानून लाकर ग्रुप A अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग को नियंत्रित करने की कोशिश की तब वह उद्धव ठाकरे से समर्थन मांगने के लिए मातोश्री गए थे। AAP की दिल्ली विधानसभा चुनावों में हार ने शिवसेना (UBT) और NCP (SP) को न केवल चौंका दिया, बल्कि यह उन दोनों दलों के लिए एक बड़ा निराशा का कारण बन गया। शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने कहा, “BJP ने दिल्ली विधानसभा चुनावों में वही रणनीति अपनाई जो उसने महाराष्ट्र में अपनाई थी, जैसे केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से केजरीवाल को परेशान करना, पार्टी नेताओं को गिरफ्तार करना और फर्जी मतदाता सूची बनाना।” शिवसेना और NCP का अगला कदम? महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में हार के बाद क्षेत्रीय दलों ने उम्मीद जताई थी कि AAP BJP के खिलाफ मजबूत रहेगी, लेकिन दिल्ली में हार के बाद वह उम्मीद टूट गई। अब मुंबई और महाराष्ट्र में आगामी स्थानीय चुनावों, विशेष रूप से बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) चुनावों को लेकर उद्धव ठाकरे के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। यह चुनाव उनके राजनीतिक नेतृत्व और पार्टी की पहचान के लिए एक ‘करो या मरो’ स्थिति होगी। BJP की विजय पर आत्मविश्वास बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुधीर मुनगंटीवार ने कहा, “बीजेपी एक जीत की लकीर पर है। हरियाणा और महाराष्ट्र में सफलता के बाद दिल्ली में भी जीत हासिल हुई है। यह साफ संकेत है कि लोग पार्टी और नरेंद्र मोदी तथा अमित शाह के नेतृत्व में विश्वास करते हैं। हम बिहार विधानसभा चुनाव भी जीतेंगे।”

दिल्ली चुनाव में हार के बाद अब कांग्रेस की नजर पश्चिम बंगाल पर है, ममता बनर्जी की TMC से मुकाबला करने के लिए तैयार

नई दिल्ली कांग्रेस नेता राहुल गांधी अंततः अपनी राजनीति की राह पर चलने लगे हैं। दिल्ली चुनाव में हार के बाद अब कांग्रेस की नजर पश्चिम बंगाल पर है। पार्टी वहां ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) से मुकाबला करने के लिए तैयार है। राहुल गांधी ने 2004 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा था और उन्हें युवाओं के मामलों का प्रभारी नियुक्त किया गया था। तब उन्होंने ‘एकला चलो रे’ के सिद्धांत पर विश्वास किया था, यानी पार्टी को अकेले ही खड़ा होना चाहिए। यह सिद्धांत सोनिया गांधी के नेतृत्व में बने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) से बिल्कुल अलग था। हालांकि यह कांग्रेस के लिए गठबंधन राजनीति का एक प्रयोग था। राहुल का हमेशा मानना ​​था कि पार्टी तब ही बढ़ सकती है जब वह अकेले चुनाव लड़े। राहुल गांधी ने अपनी पार्टी के नेताओं से यह अक्सर कहा था कि अकेले खड़े होने से लंबी अवधि में फायदा होगा, भले ही चुनाव हार जाएं। लेकिन कई चुनावी विफलताओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हराने की इच्छा ने उन्हें गठबंधन राजनीति को स्वीकार करने के लिए मजबूर किया। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद राहुल गांधी को यह एहसास हुआ कि जहां INDIA गठबंधन के अन्य दल मजबूत हो रहे हैं, वहीं कांग्रेस पिछड़ती जा रही है। सीधे मुकाबले में बीजेपी के साथ कांग्रेस का जीतना अब संभव नहीं लग रहा था। हरियाणा और महाराष्ट्र में हार के बाद राहुल गांधी ने यह विचार किया कि अब कांग्रेस को अकेले ही चुनावी मैदान में उतरना होगा और अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली AAP को चुनौती देने का इरादा बनाना पड़ा। दिल्ली विधानसभा चुनाव में AAP की हार के बाद और समाजवादी पार्टी तथा नेशनल कांफ्रेंस द्वारा कांग्रेस पर आरोप लगाए जाने के बाद कांग्रेस ने भी अपनी रणनीति में बदलाव किया है। अब पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को चुनौती देने की योजना बनाई जा रही है। यहां ममता बनर्जी की पार्टी ने कांग्रेस को बार-बार नजरअंदाज किया है। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी बंगाल में पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलकर उन्हें यह विश्वास दिलाना चाहते हैं कि ममता बनर्जी के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी। कांग्रेस ने यह स्पष्ट किया है कि राज्य स्तर पर सहयोगियों के खिलाफ संघर्ष का मतलब राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन खत्म करना नहीं है, बल्कि यह सिर्फ पार्टी की महत्त्वाकांक्षाओं का हिस्सा है। इसे उसके अन्य सहयोगी आसानी से पचा नहीं पा रहे हैं। राहुल गांधी ने इस विचार को स्वीकार किया कि अगर कांग्रेस ने राज्य दर राज्य हार मान ली, तो इसका राष्ट्रीय स्तर पर असर पड़ेगा और बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस एक ठोस विकल्प नहीं बन पाएगी। इस समय राहुल गांधी का मानना है कि कांग्रेस के सभी राज्य इकाइयों को एक नई दिशा की आवश्यकता है और यही उनके अगले कदम का उद्देश्य है।

फाउंडर मेंबर प्रशांत भूषण ने कहा- शीशमहल बनवा लिया, लग्जरी कार में घूमने लगे, यह AAP के अंत की शुरुआत

नई दिल्ली दिल्ली में लगातार दो बार रिकॉर्ड बहुमत हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी (आप) को इस बार बड़ी शिकस्त का सामना करना पड़ा। पार्टी 70 में से महज 22 पर जीत हासिल कर पाई। ना सिर्फ पार्टी हारी बल्कि इसके मुखिया अरविंद केजरीवाल, उनके दाएं-बाएं हाथ मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन समेत कई बड़े चेहरे अपनी सीट भी नहीं बचा पाए। आप के इस हाल पर जहां भाजपा-कांग्रेस की ओर से तंज कसा जा रहा है तो कभी अरविंद केजरीवाल के बेहद करीबी रहे लोग भी उन पर सवाल उठा रहे हैं। आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य रहे प्रशांत भूषण ने तो इस हार को पार्टी के अंत की शुरुआत बताया है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और उनके पिता शांति भूषण की आम आदमी पार्टी के गठन में अहम भूमिका था। लेकिन कुछ ही सालों में मतभेद के बाद उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया था। प्रशांत भूषण ने अब दिल्ली चुनाव नतीजों को लेकर अरविंद केजरीवाल को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की हार के लिए केजरीवाल ही मुख्यतौर पर जिम्मेदार हैं। प्रशांत भूषण ने गठन के समय पार्टी के उद्देश्यों और मौजूदा स्थिति का जिक्र करते हुए एक्स पर लिखा, ‘एक पार्टी जो वैकल्पिक राजनीति के लिए बनी और जिससे पारदर्शी, जवाबदेह और लोकतांत्रिक होने की उम्मीद थी, जल्द ही अरविंद ने उसे सुप्रीमो के दबदबे वाली, गैर पारदर्शी और भ्रष्ट पार्टी में बदल दिया, जिसने लोकपाल को आगे नहीं बढ़ाया और अपना ही लोकपाल हटा दिया।’ प्राशंत भूषण ने कथित शीशमहल और लग्जरी कारों में घूमने का आरोप लगाकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘उन्होंने (केजरीवाल) अपने लिए 45 करोड़ रुपए का शीशमहल बनाया और लग्जरी कारों में सफर करने लगे। आम आदमी पार्टी की तरफ से गठित एक्सपर्ट कमिटी की 33 डिटेल पॉलिसी रिपोर्ट को यह कहते हुए कूड़ेदान में डाल दिया कि समय पर नीतिया अपनाई जाएंगी। उन्होंने लगा कि झूठ और प्रोपेगेंडा से राजनीति की जा सकती है। यह आप के अंत की शुरुआत है।’

दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का एक बार फिर सफाया, 67 उमीदवार नहीं बचपाये अपनी जमानत

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 70 में से 67 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. वह 70 सदस्यीय विधानसभा में लगातार तीसरी बार अपना खाता खोलने में नाकाम रही है. हालांकि, कांग्रेस के वोट शेयर में 2.1% का मामूली सुधार हुआ है. जबकि उनके कई प्रमुख नेताओं को करारी हार का सामना करना पड़ा. वहीं. कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया है कि वो लोगों का विश्वास फिर से जीतेंगे और 2030 में अपनी सरकार बनाएंगे. दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का एक बार फिर सफाया गया. पार्टी के अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. कांग्रेस के सिर्फ तीन उम्मीदवार अपनी जमानत बचाने में कामयाब रहे. जिनमें कस्तूरबा नगर से अभिषेक दत्त जो दूसरे स्थान पर रहने वाले एकमात्र कांग्रेसी नेता हैं. इस लिस्ट में नांगलोई जाट से रोहित चौधरी और बादली से देवेंद्र यादव शामिल हैं. ज्यादातर कांग्रेस उम्मीदवार बीजेपी या आप के बाद तीसरे स्थान पर रहे, लेकिन कुछ सीटों में कांग्रेस के उम्मीदवार एआईएमआईएम के उम्मीदवारों से भी पीछे रहे. जिसमें मुस्लिम बहुल क्षेत्र शामिल हैं. ये उम्मीदवार रहे तीसरे नंबर पर दिल्ली कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव खुद बादली सीट पर तीसरे स्थान पर रहे, महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा कालकाजी में तीसरे स्थान पर रहीं और पूर्व मंत्री हारून यूसुफ बल्लीमारान में तीसरे स्थान पर थे, जिसका उन्होंने 1993 से 2013 के बीच पांच बार प्रतिनिधित्व किया था. कांग्रेस ने बिगाड़ा आप का खेल कांग्रेस के वोट शेयर में मामूली सुधार ने आप आदमी पार्टी को भारी नुकसान पहुंचाया है. कांग्रेस आप के लिए खेल बिगाड़ने में कामयाब रही, जिसे अनुसूचित जाति और मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भारी नुकसान उठाना पड़ा, जहां कांग्रेस ने आप की कीमत पर मामूली बढ़त हासिल की और भाजपा को फायदा हुआ. चुनाव में आप के वोट शेयर में 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. आम आदमी पार्टी को 43.19 प्रतिशत वोट मिले हैं, जबकि 2020 के चुनाव में 53.6 प्रतिशत वोट शेयर मिला था. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के वोट शेयर में 2.1 प्रतिशत का सुधार हुआ है, लेकिन ये वोट शेयर सीट में तब्दील नहीं हो पाया. पार्टी को 2020 के विधानसभा चुनावों में 4.3 प्रतिशत के मुकाबले 2025 के चुनाव में 6.39 प्रतिशत वैध वोट मिले हैं. साल 2008 में कांग्रेस का वोट शेयर 40.31 प्रतिशत (पिछली बार जब कांग्रेस ने दिल्ली में सरकार बनाई थी) था. कांग्रेस का ये प्रतिशत साल 2013 में गिरकर 24.55 प्रतिशत पहुंच गया, 2015 में 9.7 प्रतिशत और 2020 में 4.3 प्रतिशत पर पहुंच गया था.वहीं, AAP ने कांग्रेस के वोट शेयर में सेंध लगाकर 2013 में 29.6 प्रतिशत, 2015 में 54.6 प्रतिशत और 2020 में 53.6 प्रतिशत वोट हासिल किया था.   पार्टी के एक नेता ने कहा, ‘हमने जो खोया था, उसका कुछ हिस्सा वापस पा लिया है. ये लड़ाई जारी रहेगी.’ कांग्रेस नेताओं को लगता है कि अब ये एक लंबी और कठिन लड़ाई है, क्योंकि पार्टी लगभग 5.8 लाख वोट हासिल करने में सफल हो सकती है, जो 2020 में 3.95 वोट से थोड़ा अधिक है. लेकिन 2015 में 8.67 लाख वोट और 2013 में 1.93 करोड़ वोट से बहुत दूर है जब उसने 8 सीटें जीती थीं. 2008 में कांग्रेस को 2.49 करोड़ वोट मिले थे, जब उसने 43 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी. इसके इतर कांग्रेस का पतन और उसकी बिगड़ती स्थिति का असर इंडिया ब्लॉक की एकता जुटता पर पड़ेगा, क्योंकि इंडिया ब्लॉक में पहले ही कांग्रेस बैकफुट पर है. कांग्रेस के साझेदार वैचारिक मुद्दों और चुनावी तालमेल को लेकर अलग-अलग राय रखते रहे हैं. बिहार में विधानसभा चुनावों में इंडिया ब्लॉक के साझेदारों के बीच तनातनी दिख सकती है. हरियाणा और महाराष्ट्र के बाद दिल्ली में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन से विपक्षी गुट में उसकी प्रमुख स्थिति और भी कम हो जाएगी. इसलिए जबकि कांग्रेस और AAP ने दिल्ली, चंडीगढ़ और हरियाणा में 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए गठबंधन किया था, लेकिन उन्होंने दिल्ली में अकेले लड़ने का फैसला किया.

चुनाव आयोग द्वारा भाजपा 48 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, केजरीवाल, सिसोदिया समेत इन दिग्गजों को मिली हार

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे शनिवार को घोषित कर द‍िए गए। 27 साल के बाद भाजपा दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने की ओर बढ़ रही है। चुनाव आयोग के मुताबिक, भाजपा 48 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी है। वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) 22 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर है। आइए जानते हैं दिल्ली की प्रमुख सीटों का पर‍िणाम। नई दिल्ली विधानसभा सीट से दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल हार गए हैं। भाजपा के प्रवेश वर्मा ने केजरीवाल को 4,089 वोटों से मात दी है, जबकि कांग्रेस के संदीप दीक्षित तीसरे नंबर पर रहे हैं। कालकाजी विधानसभा सीट से दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने कांटे के मुकाबले में जीत हासिल की है। उन्होंने भाजपा के रमेश बिधूड़ी को 3,521 वोटों से हराया है, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी अलका लांबा तीसरे स्‍थान पर रही हैं। इसके अलावा जंगपुरा विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार मनीष सिसोदिया को कांटे के मुकाबले में 675 वोटों से हार मिली है। भाजपा के तरविंदर सिंह मारवाह ने यहां जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस के फरहाद सूरी तीसरे स्थान पर रहे। शकूर बस्ती विधानसभा सीट से ‘आप’ के सत्येंद्र जैन को 20,998 वोटों से हार का सामना करना पड़ा है। उन्हें भाजपा के करनैल सिंह ने हराया है, जिन्हें 56,869 वोट मिले हैं। ग्रेटर कैलाश विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के सौरभ भारद्वाज को 3,188 से हार मिली है। भाजपा की शिखा ने उन्हें हराया है, जबकि कांग्रेस के गर्व‍ित सिंघवी तीसरे स्थान पर रहे हैं। पटपड़गंज विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के अवध ओझा को 28,072 वोट से हार मिली है। भाजपा के रविंदर सिंह नेगी ने ‘आप’ प्रत्याशी को हराया है। वहीं, कांग्रेस के अनिल कुमार 16,549 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे। करावल नगर विधानसभा सीट से भाजपा के कपिल मिश्रा ने 23,355 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की है। उन्होंने आम आदमी पार्टी के मनोज त्यागी को हराया है, जो दूसरे नंबर पर रहे। रोहिणी विधानसभा सीट से भाजपा के विजेंद्र गुप्ता ने 37,816 के मार्जिन से जीत हासिल की है। उन्होंने ‘आप’ के उम्मीदवार प्रदीप मित्तल को हराया है, जिन्हें 32,549 वोट मिले हैं। बल्लीमारान विधानसभा सीट से ‘आप’ के इमरान हुसैन को 29,823 वोटों से जीत मिली है। भाजपा के कमल बागरी 27,181 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। बाबरपुर विधानसभा सीट से ‘आप’ के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष गोपाल राय को 18, 994 वोटों से जीत मिली है। यहां दूसरे नंबर पर भाजपा और तीसरे नंबर पर कांग्रेस रही है। गांधी नगर विधानसभा सीट से भाजपा के अरविंदर सिंह लवली ने जीत दर्ज की है। अरविंदर सिंह लवली ने ‘आप’ के नवीन चौधरी को 12,748 वोटों से हराया है। बिजवासन विधानसभा सीट से भाजपा के कैलाश गहलोत ने जीत दर्ज की है। उन्होंने ‘आप’ के सुरेंद्र भारद्वाज को हराया है। दिल्ली भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सतीश उपाध्याय को मालवीय नगर सीट से जीत मिली है। उन्होंने ‘आप’ के सोमनाथ भारती को कांटे की लड़ाई में महज 2,131 वोटों से हराया है। सुल्तानपुर माजरा विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के मुकेश अहलावत को जीत मिली है। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी करम सिंह करमा को 17,126 के बड़े मार्जिन से हराया है। भाजपा के मनजिंदर सिंह सिरसा ने राजौरी गार्डन सीट पर जीत दर्ज की है। उन्होंने ‘आप’ की धनवती चंदेला को 18,190 हराया है। राजेंद्र नगर सीट से ‘आप’ के दुर्गेश पाठक को कांटे के मुकाबले में 1,231 वोट से हार मिली है। उन्हें भाजपा के उमंग बजाज ने हराया है, जिन्हें 45,440 वोट मिले हैं। मुस्तफाबाद सीट पर भाजपा के मोहन सिंह बिष्ट को 17,578 के मार्जिन के साथ जीत मिली है। यहां ‘आप’ के आदिल अहमद खान दूसरे और एआईएमआईएम के ताहिर हुसैन तीसरे स्‍थान पर रहे। ‘आप’ की राखी बिड़ला को मादीपुर सीट पर 10,899 वोटों से हार मिली है। उन्हें भाजपा के कैलाश गंगवाल ने हराया है। ओखला विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के मौजूदा विधायक अमानतुल्लाह खान 33, 225वोटों से आगे हैं। दूसरे नंबर पर एआईएमआईएम के शिफा उर रहमान हैं।

दिल्ली उनके झूठ, छल और प्रपंच से मुक्त होकर प्रगति और प्रतिष्ठा के नए युग में अपनी यात्रा आरंभ कर रही: जे पी नड्डा

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जे पी नड्डा ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) की हार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण, अंत्योदय व विकासपरक नीतियों पर जनता-जनार्दन के अटूट समर्थन की जीत करार दिया। उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘‘आप-दा’ सरकार ने दिल्ली में भ्रष्टाचार, कुशासन, और तुष्टीकरण की सारी सीमाएं लांघ दी थीं। आज दिल्ली उनके झूठ, छल और प्रपंच से मुक्त होकर प्रगति और प्रतिष्ठा के नए युग में अपनी यात्रा आरंभ कर रही है। यह जनादेश ‘विकसित दिल्ली-विकसित भारत’ के हमारे संकल्प को साकार स्वरूप प्रदान करेगा।”   यह जनता- जनार्दन के अटूट समर्थन की जीत- नड्डा जेपी नड्डा ने कहा, ‘‘‘आप-दा’ मुक्त दिल्ली! आज दिल्ली विधानसभा चुनाव के परिणाम में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड विजय आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण, अंत्योदय व विकासपरक नीतियों पर जनता- जनार्दन के अटूट समर्थन की जीत है।” भाजपा अध्यक्ष ने इस ‘प्रचंड विजय’ के लिए प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार जताया और समस्त भाजपा कार्यकर्ताओं तथा दिल्लीवासियों का अभिनंदन किया। दिल्ली में भाजपा 27 साल बाद दिल्ली की सत्ता में वापसी करने जा रही है। 48 सीट पर निर्णायक बहुमत की ओर भाजपा भाजपा दिल्ली की 70 में से 48 सीट पर निर्णायक बहुमत की ओर बढ़ती दिख रही है जबकि आम आदमी पार्टी 22 सीट पर सिमटने के कगार पर है। एक बार फिर कांग्रेस राष्ट्रीय राजधानी में अपना खाता खोलती नहीं दिख रही है। अब तक के आंकड़ों के मुताबिक, भाजपा को करीब 47 प्रतिशत और आप को 43 प्रतिशत वोट मिले हैं। आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, मंत्री सौरभ भारद्वाज सहित सत्तारूढ़ दल के कई अन्य प्रमुख नेता चुनाव हार गए हैं।

दिल्ली विधानसभा चुनावों में लेफ्ट पार्टियां जिन छह सीटों पर चुनाव लड़ रही थीं, वहां उन्हें NOTA से भी कम वोट मिले

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनावों में लेफ्ट पार्टियां (वाम दल) जिन छह सीटों पर चुनाव लड़ रही थीं, वहां उन्हें NOTA (नन ऑफ द एबव) से भी कम वोट मिले. यह चुनाव उनके लिए पूरी तरह निराशाजनक साबित हुआ. सीपीआई (एम), सीपीआई और सीपीआई (एमएल) लिबरेशन ने कुल मिलाकर 2,158 वोट हासिल किए, जबकि NOTA को 5,627 वोट मिले. यानी इन सीटों पर लोगों ने वाम दलों को वोट देने से बेहतर कोई उम्मीदवार नहीं चुनने (NOTA) का विकल्प चुना.   कैसा रहा प्रत्याशियों का प्रदर्शन? करावल नगर CPI(M) उम्मीदवार अशोक अग्रवाल को 457 वोट मिले. NOTA को 709 वोट मिले. बीजेपी के कपिल मिश्रा ने 1,07,367 वोट पाकर जीत दर्ज की. बदरपुर CPI(M) के जगदीश चंद को 367 वोट मिले. NOTA को 915 वोट मिले. AAP के राम सिंह नेताजी ने 1,12,991 वोट से जीत दर्ज की.   विकासपुरी CPI के शेजो वर्गीस को 580 वोट मिले. NOTA को 1,127 वोट मिले. बीजेपी के पंकज कुमार सिंह ने 1,03,955 वोट से जीत दर्ज की. पालम CPI के दिलीप कुमार को 326 वोट मिले. NOTA को 1,119 वोट मिले. बीजेपी के कुलदीप सोलंकी ने 82,046 वोट से जीत दर्ज की. नरेला CPI(ML) के अनिल कुमार सिंह को 328 वोट मिले. NOTA को 981 वोट मिले. बीजेपी के राज करण खत्री ने 87,215 वोट से जीत दर्ज की. कोंडली CPI(ML) के अमरजीत प्रसाद को सिर्फ 100 वोट मिले. NOTA को 776 वोट मिले. AAP के कुलदीप कुमार ने 61,792 वोट से जीत दर्ज की. लेफ्ट पार्टियों के लिए बड़ा झटका इस चुनाव में लेफ्ट पार्टियों का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा. जिन उम्मीदवारों को लोगों की समस्याओं पर लड़ने के लिए खड़ा किया गया था, उन्हें जनता ने पूरी तरह नकार दिया. इससे यह साफ है कि दिल्ली में लेफ्ट पार्टियों का प्रभाव लगभग खत्म हो गया है.

हम कोई एनजीओ नहीं हैं, हम एक राजनीतिक पार्टी हैं : सुप्रिया श्रीनेत

 नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव में आज वोटों की गिनती हो रही है. जैसे-जैसे वोट खुल रहे हैं परिणाम भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में आ रहे हैं और आम आदमी पार्टी पिछड़ रही है. जैसे-जैसे नतीजे आ रहे हैं एक के बाद एक इंडिया ब्लॉक के नेता कांग्रेस और AAP पर निशाना साध रहे हैं. कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत से जब इसे लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि AAP को जीत दिलाना हमारी जिम्मेदारी नहीं है. ‘हम कोई एनजीओ नहीं हैं’ उनसे पूछा गया, आम आदमी पार्टी और इंडिया ब्लॉक के अन्य सहयोगियों की तरफ से बार-बार यह सवाल उठाया जा रहा है कि अगर कांग्रेस साथ होती तो ये नहीं होता. सुप्रिया श्रीनेत ने जवाब दिया, ‘आम आदमी पार्टी को जिताने का ठीकरा हमने नहीं उठाया है. आम आदमी पार्टी को जिताना हमारा जिम्मेदारी नहीं है. हम कोई एनजीओ नहीं हैं, हम एक राजनीतिक पार्टी हैं.’ उन्होंने कहा, ‘हमने आकलन किया और हमें लगा कि हमारी सियासी जमीन है और हमें अपने दम पर चुनाव लड़ना चाहते थे. वो कुछ भी कहें हमें उससे कोई फर्क नहीं पड़ता. मुझे लगता है कि हमने एक स्पिरिटेड कैंपेन किया. AAP अपनी विफलताओं की वजह से हारी है.’ केजरीवाल और सिसोदिया हारे अभी तक के नतीजों के अनुसार, अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया दोनों ही अपनी-अपनी सीटें हार चुके हैं. बीजेपी 48 सीटों पर आगे चल रही है जबकि AAP 22 सीटों पर आगे है. वहीं कांग्रेस तो खाता खोलने में भी नाकाम रही है. साथियों ने उठाए सवाल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ‘महाभारत’ सीरियल का एक सीन शेयर करते हुए उमर अब्दुल्ला ने सिर्फ इतना लिखा, ‘और लड़ो आपस में!’… साफ है कि उनका इशारा दिल्ली में कांग्रेस और AAP के अलग-अलग चुनाव लड़ने के फैसले पर है. शुरुआती रुझानों पर शिवसेना (यूबीटी) संजय राउत ने कहा, ‘दिल्ली में भी महाराष्ट्र पैटर्न लागू हुआ. वोटर लिस्ट में धांधली हुई है. चुनाव आयोग चुपचाप बैठा था. अगर कांग्रेस और AAP का गठबंधन हुआ होता तो अच्छा होता. हम पहले दिन से कह रहे थे कि AAP और कांग्रेस के बीच गठबंधन होना चाहिए था. बीजेपी को हराने के लिए साथ आना चाहिए था.’  

शराब की दुकानों पर ध्यान केंद्रित करने और धन-दौलत के चक्कर में पड़ने के कारण मिली हार: अन्ना हजारे

नई दिल्ली पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक गुरु एवं सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने कहा है कि शराब की दुकानों पर ध्यान केंद्रित करने और धन-दौलत के चक्कर में पड़ने के कारण उनकी (केजरीवाल) हार हुई है। अन्ना हजारे ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के रूझानों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “मैं पहले से कह रहा हूं कि चुनाव लड़ते समय एक उम्मीदवार का चरित्र अच्छा होना चाहिए। उनके विचार अच्छे होने चाहिए और छवि पर कोई दाग नहीं होना चाहिए। जीवन में त्याग होना चाहिए और अपने अपमान को पीने की शक्ति होनी चाहिए।” उन्होंने कहा, “मैंने उन्हें (श्री केजरीवाल) बार-बार इस बारे में बताया, लेकिन उन्हें समझ नहीं आया। इस बीच शराब का मुद्दा आया। शराब क्यों आई, लालच और पैसे के कारण।” उन्होंने कहा, “वह शराब और पैसे में उलझ गये, जिसके कारण उनकी छवि खराब हुई, इसलिए उन्हें चुनाव में कम वोट मिले और आम आदमी पार्टी (आप) चुनाव हार रही है।” गौरतलब है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव की मतगणना के शुरुआती रूझानों में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलता हुआ नजर आ रहा है और 12 साल बाद आप की दिल्ली की सत्ता से विदाई हो रही है।  

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