प्रदेश के नए उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला, शपथ ग्रहण समारोह, मोतीलाल नेहरू स्टेडियम भोपाल.
The new Deputy Chief Minister of the state, Rajendra Shukla, will take the oath at the Motilal Nehru Stadium in Bhopal during the swearing-in ceremony.
The new Deputy Chief Minister of the state, Rajendra Shukla, will take the oath at the Motilal Nehru Stadium in Bhopal during the swearing-in ceremony.
The new Deputy Chief Minister of the state, Jagdish Devda, will take the oath at the Motilal Nehru Stadium in Bhopal during the swearing-in ceremony.
The new Chief Minister of the state, Mohan Yadav, will take the oath at the Motilal Nehru Stadium in Bhopal.
The Bharatiya Janata Party is ahead in entrusting responsibilities to new and dedicated Party Workers. अनुपम सचान, सहारा समाचार भोपाल..जब विधानसभा का चुनाव किसी मुख्यमंत्री के नाम के बगैर लड़ा जा रहा था तब यह चर्चा रही कि क्या इस बार भाजपा अपना मुख्यमंत्री कोई नया चेहरा लेकर आएगी मोहन यादव का मुख्यमंत्री पद पर आसीन होना, देश को व प्रदेश को कई संदेश देता है. एक तो यह कि भाजपा एक अनुशासित पार्टी है जिसका कोई भी कार्यकर्ता किसी भी पद तक अपने सम्मान एवं परिश्रम के आधार पर दायित्व पा सकता है भारतीय जनता पार्टी नए व समर्पित कार्यकुशल लोगों को जिम्मेदारी देने में अग्रिम है छत्तीसगढ़ के लिए चुने गए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जिन्होंने सरपंच बनने से लेकर लोकसभा और अब प्रदेश में मुख्य के पद को संभाला है यही संदेश देता है राजस्थान के लिए चुने गए मुख्य मंत्री भजन लाल शर्मा जो राजस्थान विधान सभा सांगानेर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं जब द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति पद को संभाला तब भी देश को यही संदेश मिला था राजनीति सत्ता का अहंकार नहीं सेवा का माध्यम है मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह की जो मृदुल छवि थी. वह छवि बरक़रार है और जैसा कुशल नेतृत्व उन्होंने किया, उसके प्रशंसक कम नहीं हैं यही उम्मीद अब प्रदेश की जनता करती है एबीवीपी से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करके वह संघटन में दी सेवाओं के अनुभव एवं उच्च शिक्षा मंत्री के बाद अब मोहन यादव मध्यप्रदेश को अपने विशिष्ट कौशल से देश प्रदेश को संपन्नता वह सुशासन से धड़कता हृदय देश बनाने में कोई कमी नहीं रखेंगे। भारत अब अच्छे से महसूस करता है कि यदि केंद्र में प्रखर राष्ट्रप्रेमी शासक आसीन हो तो प्रदेश में भी लीक से हटकर साम्प्रदायिक जातिवादी और क्षेत्रीय मानसिकता से ऊपर उठकर मुख्यमंत्री चुना जाता है। तुष्टीकरण की राजनीति से देश अब मुक्त हो चला है और युवाओं को राजनीति में आकर काम करना एक अच्छा विकल्प दिखने लगा है।
New opportunities for farmer and entrepreneur brothers and sisters.
The selection of the leader of the Madhya Pradesh Congress Legislative Party will take place after December 15. पार्टी नेता चाहते हैं कि कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश जाए कि सभी एकजुट हैं, इसलिए आम सहमति के आधार पर निर्णय पर जोर दिया जा रहा है। भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस विधायक दल के नेता का चयन 15 दिसंबर के बाद होगा। इसके लिए विधायक दल की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें केंद्रीय पर्यवेक्षक उपस्थित रहेंगे। पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, विधायक दल के मुख्य सचेतक रहे रामनिवास रावत, पूर्व मंत्री बाला बच्चन और उमंग सिंघार के नाम दावेदारों में प्रमुखता से सामने आए हैं। 66 सीटों पर जीती कांग्रेस230 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 66 उम्मीदवार चुनाव जीतकर पहुंचे हैं। दल का नेता विधायक चुनेंगे। इसके लिए विधायक दल की बैठक होगी। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों का कहना है कि केंद्रीय संगठन से विधायक दल के नेता का चयन करने के लिए पर्यवेक्षक भेजने का अनुरोध किया है। एकजुटता का संदेश देना चाहते हैंदरअसल, पार्टी नेता चाहते हैं कि कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश जाए कि सभी एकजुट हैं, इसलिए आम सहमति के आधार पर निर्णय पर जोर दिया जा रहा है। विधायक दल के नेता के लिए नेता प्रतिपक्ष के लिए पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। विंध्य अंचल में वैसे भी पार्टी की स्थिति कमजोर है। इस बार केवल पांच सीटें ही पार्टी जीत सकी है। उधर, जातीय समीकरणों के हिसाब से ओबीसी वर्ग से आने वाले रामनिवास रावत और आदिवासी वर्ग से बाला बच्चन और उमंग सिंघार के नाम भी दावेदारों में हैं। कमल नाथ प्रदेश संगठन में करेंगे परिवर्तनउधर, लोकसभा चुनाव को देखते हुए कमल नाथ अभी प्रदेश अध्यक्ष बने रहेंगे पर उनकी टीम यानी प्रदेश कांग्रेस संगठन में परिवर्तन होगा। दरअसल, विधानसभा चुनाव में कई पदाधिकारियों के निष्क्रिय रहने की शिकायतें हैं। पार्टी अध्यक्ष को संगठन की रचना और आगामी दिशा तय करने के लिए अधिकृत किया गया है।वहीं, प्रदेश कांग्रेस ने सभी चुनाव जीतने व हारने वाले उम्मीदवारों से संगठन की रिपोर्ट मांगी है। दरअसल, कुछ उम्मीदवारों ने संगठन का साथ नहीं मिलने और भितरघात की शिकायत की है। इसके अतिरिक्त जिला प्रभारी, संगठन मंत्री और पर्यवेक्षकों से भी चुनाव में संगठन पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर जानकारी मांगी गई है।
Bhajan Lal Sharma will be the new Chief Minister of Rajasthan. He is a legislator from the Sanganer constituency. जयपुर! राजस्थान के नए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा होंगे। भाजपा की तरफ से विधायक दल की बैठक के बाद उनके नाम का एलान किया है। रक्षामंत्री राजस्थान सिंह व पार्टी के दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में उनके नाम की घोषणा की गई। राजस्थान के नए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा होंगे। भाजपा की तरफ से विधायक दल की बैठक के बाद उनके नाम का एलान किया है। रक्षामंत्री राजस्थान सिंह व पार्टी के दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में उनके नाम की घोषणा की गई। भजन लाल शर्मा एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं जो वर्तमान में राजस्थान के मुख्यमंत्री और राजस्थान विधान सभा के सदस्य के रूप में सांगानेर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं । वह चार बार भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महासचिव भी रहे । 2023 के राजस्थान विधान सभा चुनाव के बाद , उन्हें सांगानेर विधानसभा क्षेत्र से विधायक के रूप में चुना गया। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के उम्मीदवार पुष्पेंद्र भारद्वाज को 48,081 वोटों के अंतर से हराकर अपना स्थान सुरक्षित किया।
Narendra Singh Tomar, the Union Minister, has been elected as the Speaker of the Madhya Pradesh Legislative Assembly. संतोष सिंह तोमर भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकार गठन को लेकर भोपाल में सोमवार को चली कई घंटों की बैठक के बाद पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष बनाने पर सहमति बनी है। ऐसे में अब पूर्व केंद्रीय मंत्री नए विधानसभा अध्यक्ष का पद संभालेंगे। भाजपा विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर मुहर लगी है। हालांकि इससे पहले नरेंद्र सिंह तोमर को मुख्यमंत्री की रेस में गिना जा रहा था, लेकिन अब पूरी तरह से मध्य प्रदेश की सियासी तस्वीर साफ हो चुकी है। नरेंद्र सिंह तोमर को बीजेपी ने इस बार दिमनी विधानसभा सीट से टिकट दिया था। जहां उन्होंने 24 हजार से अधिक वोटों के अंतर से बड़ी जीत दर्ज की है। विधानसभा के अध्यक्ष होंगे पूर्व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह पूर्व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को भाजपा ने विधानसभा का अध्यक्ष बनाने का फैसला किया है। श्री तोमर दिमनी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर आए हैं। उन्होंने अपने सबसे निकटतम प्रतिद्वंदी बसपा के प्रत्याशी को 24461 वोटों के अंतर से मात दी है। नरेंद्र सिंह तोमर को 79137 वोट मिले हैं। श्री तोमर केंद्र की मोदी सरकार में कृषि मंत्रालय समेत कई अन्य मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। साफ-सुथरी छवि वाले नेता होने के नाते नरेंद्र सिंह तोमर को इस विधानसभा का स्पीकर चुना गया है। छात्र जीवन से शुरू किया राजनीतिक सफर मध्य प्रदेश के नए स्पीकर चुने गए पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता नरेंद्र सिंह तोमर का जन्म मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के ओरेठी गांव में 12 जून 1957 को हुआ। श्री तोमर एक राजपूत क्षत्रीय परिवार से आते हैं। उन्होंने जीवाजी यूनिवर्सिटी से स्नातक तक की शिक्षा हासिल की हुई है। स्नातक की पढ़ाई के दौरान तोमर महाविद्यालय में छात्र संघ के अध्यक्ष भी रहे। इसके साथ ही वो ग्वालियर नगर निगम के पार्षद पद पर भी चुने गए, जिसके बाद वह पूरी तरह से राजनीति में सक्रिय हो गए। वर्ष 1977 में भाजपा ने उन्हें युवा मोर्चा का मंडल अध्यक्ष बना दिया। इसके बाद वर्ष 1984 में युवा मोर्चा के प्रदेश मंत्री बने और वर्ष 1991 में प्रदेश अध्यक्ष बने। वर्ष 2006 में नरेंद्र सिंह तोमर को फिर एक बार मध्य प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष चुना गया। इस राजनेतिक सफर के दौरान वे राज्यसभा सांसद भी रहे हैं। ग्वालियर से लड़ा था पहला विधानसभा चुनाव नरेंद्र सिंह तोमर ने अपना पहला विधानसभा चुनाव वर्ष 1993 ग्वालियर सीट से लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। इसके बाद वर्ष 1998 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी अशोक कुमार शर्मा को 26 हजार से अधिक वोटों के अंतर मात देकर विधानसभा में पहला कदम रखा था। इस दौरान उनको 50 हजार वोट मिले थे। उन्होंने अपना दूसरा विधानसभा का चुनाव वर्ष 2003 में लड़ा था, जिसमें उनको 63 हजार 592 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी बालेन्दु शुक्ला को 29 हजार 452 वोट मिले। तोमर ने यह चुनाव 34 हजार 140 वोटों के अंतर से जीता था। वर्ष 2003 से लेकर वर्ष 2007 तक श्री तोमर मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के पद पर रहे। 2009 से लगातार चुने गए लोकसभा के सांसद साल 2009 में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर पहली बार मुरैना से लोकसभा सदस्य निर्वाचित हुए थे। मुरैना संसदीय क्षेत्र से लोकसभा सदस्य निर्वाचित होने से पहले वो राज्यसभा के सदस्य थे। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी रामनिवास रावत को 1 लाख 97 वोटों से हराया था। वहीं, साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें ग्वालियर से टिकट दिया। इस दौरान उन्होंने 26 हजार से अधिक वोटों से जीत हासिल की। नरेंद्र सिंह तोमर केंद्र सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री, पंचायती राज मंत्री, खान मंत्री और संसदीय मामलों के मंत्री रहे हैं। इसके बाद वर्ष 2019 में उन्हें फिर एक बार मुरैना लोकसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारा गया और इस बार भी वोटों के बड़े अंतर से चुनाव जीतकर लगातार तीसरी बार लोकसभा में पहुंचे। जिसके बाद वो ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्रालय में रहे और उन्हें कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय का प्रभार दिया गया।
Congress has formed more committees than BJP, distributing more than 500 positions. भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस के 40 से अधिक प्रकोष्ठ और बांटे गए 500 से अधिक पद भी विधानसभा चुनाव में कोई कमाल नहीं दिखा पाए। विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने नए प्रकोष्ठों की झड़ी लगा दी थी कांग्रेस ने अपने पार्टी संविधान से अलग हटकर करीब 40 से अधिक प्रकोष्ठ बनाये हैं। चुनाव से पहले संगठन में नियुक्ति रेवड़ी की तरह बांटी गई। इतना ही नहीं इनमें अध्यक्ष, संयोजक और कार्यकारी अध्यक्ष जैसे पदों पर थोकबंद नियुक्तियां भी की गई थीं। लेकिन ये सभी प्रकोष्ठ चुनाव में कोई खास कमाल नहीं दिखा पाए। खास बात है कि प्रकोष्ठ बनाने में कांग्रेस ने तो भाजपा को भी पीछे कर दिया। वहीं चुनाव से पहले कांग्रेस ने सचिव, महासचिव और उपाध्यक्ष जैसे 500 से अधिक पदाधिकारी भी बनाए थे लेकिन वे भी चुनाव में पूरी तरह से बेअसर साबित हुए। कांग्रेस ने हर वर्ग को साधने के लिए प्रकोष्ठ का सहारा लिया था। इसके लिए पार्टी ने पुजारी से लेकर मेकेनिक जेसे प्रकोष्ठ का गठन किया था। इसके साथ ही आउटसोर्स, शिक्षक, केश शिल्पी, डॉक्टर, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, सद्भावना कोमी एकता और परिवहन जेसे कई अन्य प्रकोष्ठ भी बनाए गए थे। कांग्रेस कार्यालय में लगातार अलग-अलग प्रकोष्ठ और विभागों के सम्मेलन भी किए थे। प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ खुद इन्हें संबोधित करते थे। 105 महासचिव, उपाध्यक्षों की संख्या 50
On the eighth day of the results, the state got a new Chief Minister, with the seal of approval on the name of Mohan Yadav. भोपाल। भारतीय जनता पार्टी ने आठ दिन मंथन करने के बाद सबको चौंका दिया है। बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में सोमवार को नवनिर्वाचित विधायकों ने नए मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव के नाम पर मोहर लगाई। यादव उज्जैन दक्षिण से विधायक हैं। इसके अलावा जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला उपमुख्यमंत्री होंगे। केंद्र में कृषि मंत्री रहे नरेंद्र सिंह तोमर स्पीकर होंगे। हालांकि उप मुख्यमंत्री और स्पीकर के नाम की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है। विधायक दल की बैठक में पर्यवेक्षक मनोहर लाल खट्टर, डॉ. के. लक्ष्मण और आशा लकड़ा मौजूद रहे। सीएम शिवराज सिंह ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा, जिसका सभी विधायकों ने समर्थन किया। मोहन यादव को भरोसा नहीं हुआ तो पहले खड़े नहीं हुए। बाद में खड़े होकर हाथ जोड़े। मोहन यादव उज्जैन दक्षिण से विधायक हैं और ओबीसी वर्ग से आते हैं। जगदीश देवड़ा मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ से विधायक हैं। देवड़ा एससी वर्ग से आते हैं। जबकि राजेन्द्र शुक्ला रीवा सीट से विधायक हैं और ब्राह्मण वर्ग से आते हैं। आठ दिन की कवायत, 15 मिनट में तय हुआ सीएमभाजपा प्रदेश कार्यालय पर शाम 4.11 बजे विधायक दल की बैठक शुरू हुई थी। मात्र 15 मिनट में नए मुख्यमंत्री बनाने की सारी प्रक्रिया पूरी कर ली गई। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने विधायक दल की बैठक की जानकारी दी। पर्यवेक्षक और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर खट्टर ने 6 मिनट के भाषण में सिर्फ इतना कहा कि भाजपा एक अनुशासित पार्टी है। केंद्रीय नेतृत्व के फैसले को सभी को स्वीकार करना चाहिए। यह परंपरा है। जिसके बाद सीएम के नाम का ऐलान कर दिया गया। शिवराज ने दिया इस्तीफा, मोहन ने पेश किया सरकार का प्रस्तावनए सीएम के नाम का ऐलान होने के बाद शिवराज सिंह चौहान राजभवन पहुंचे। जहां उन्होंने राज्यपाल मंगुभाई पटेल को सीएम पद से अपना इस्तीफा सौंपा। उनका इस्तीफा तत्काल मंजूर भी हो गया। शिवराज सिंह ने नए सीएम को बधाई भी दी। उन्होंने कहा मध्यप्रदेश को नया मुख्यमंत्री मिल गया है। उन्हें बहुत बहुत बधाई, उनका अभिनंदन। इधर कुछ देर बाद मोहन यादव राजभवन पहुंचे। यहां उन्होंने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया। इस दौरान उनके साथ शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र सिंह तोमर, कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल और वीडी शर्मा मौजूद रहे। साथ ही तीनों पर्यवेक्षक मनोहर लाल कट्टर, डॉ के. लक्ष्मण और आशा लकड़ा भी साथ रहे। विधायकों का फोटो सेशन हुआ, रेस में थे कई नामबीजेपी विधायक दल की बैठक से पहले सभी नवनिर्वाचित विधायकों का फोटो सेशन हुआ। जिसमें मोहन यादव आगे से तीसरी पंक्ति में बैठे थे। फोटो सेशन के बाद बैठक शुरू हुई। जिसमें सीएम के रूप में मोहन यादव के नाम का ऐलान हो गया। एमपी सीएम पद की रेस में कई दिग्गज नाम शामिल थे। जिसमें प्रह्लाद पटेल, नरेंद्र सिंह तोमर, वीडी शर्मा, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कैलाश विजयवर्गीय जैसे कई नाम शामिल थे। जिसमें केंद्रीय मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बीजेपी ने सबको चौंकाते हुए मोहन यादव को नया मुख्यमंत्री बनाया है। भाजपा का तंत्र ऐसा, छोटे से छोटे कार्यकर्ता को बड़ी जवाबदारी : यादवनए सीएम मोहन यादव ने कहा कि भाजपा का तंत्र ही ऐसा है कि छोटे से छोटे कार्यकर्ता को बड़ी जवाबदारी मिलती है। हमारी ट्रेनिंग भी ऐसी होती है कि पार्टी जो काम दे दे उसको बहुत सहजता से लेते हैं। मैं तो पीछे की पंक्ति में बैठकर अपना काम कर रहा था। अचानक घोषणा हुई। मैं सबका आभार मानता हूं। विकास के काम को आगे बढ़ाना ही मेरी प्राथमिकता होगी। यादव ने कहा कि मैं पार्टी का एक छोटा सा कार्यकर्ता हूं। प्यार और सहयोग के लिए पार्टी की स्टेट लीडरशिप और केंद्रीय लीडरशिप का बहुत बहुत धन्यवाद। मैं अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह से निभाऊंगा। 6 दिसंबर को रात 11 बजे 15 मिनट में तय हो गया था नामबताया जा रहा है कि यादव का मुख्यमंत्री के लिए नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के नई दिल्ली स्थित निवास पर 6 दिसंबर को रात 11 बजे ही तय हो गया था। इस दौरान केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव भी वहां मौजूद थे। भूपेंद्र यादव ने ही डॉ. मोहन यादव की रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को दी थी। इसके बाद तीन दौर की बैठक में डॉ. यादव का नाम तय किया गया। वे संघ के करीबी माने जाते हैं। बीजेपी ने ओबीसी चेहरे के तौर पर मोहन यादव को आगे किया है।भाजपा के एक नेता ने बताया कि 6 दिसंबर को मोहन यादव सड़क मार्ग से भोपाल से उज्जैन जा रहे थे। शाम करीब 7 बजे जब वे आष्टा पहुंचे, तब उन्हें तत्काल दिल्ली आने के लिए गया। डॉ. यादव वापस भोपाल आए और रात 9 बजे की फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे। उनकी नड्डा से केवल 15 मिनट की मुलाकात हुई। वे अगले दिन यानी 7 दिसंबर को सुबह भोपाल लौट आए। तब यह कयास लगाए जा रहे थे कि डॉ. यादव को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है।
Ninety-six legislators from both the BJP and Congress lost the elections; all of them will have to vacate their flats in the MLA Rest House. 24 विधायकों को बंगले खाली छोड़ना होगा, 10 दिन में बंगले छोड़ने का नोटिस जारी. Twenty-four legislators will have to vacate their bungalows; a notice for vacating the bungalows within ten days has been issued. भोपाल। मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव हारे पूर्व मंत्रियों और विधायकों को 10 दिन में बंगला खाली करना होगा। इसके लिए विधानसभा की ओर से 130 विधायकों को बंगले खाली करने के नोटिस जारी कर दिए गए हैं। ताकि चुनाव जीतकर आए विधायकों को अध्यक्षीय पूल के बंगले आवंटित किए जा सकें। अभी चुनाव जीतने के बाद अधिकांश विधायकों को आवास नहीं मिला है। आवास नहीं मिलने से कई नेता होटल या फिर रिश्तेदार के घरों पर रुके हुए हैं। प्रदेश में 15वीं विधानसभा के विघटित होने और 16वीं विधानसभा के गठन की अधिसूचना के बाद यह कार्रवाई शुरू की गई है। यह सामान्य प्रक्रिया है, पर अधिकतर देखने में आया है कि हारे हुए विधायक बंगले खाली करने में अपनी ओर से पहल कम ही करते हैं। बीजेपी-कांग्रेस के 96 विधायक चुनाव हार गए हैं। वहीं, 34 विधायक ऐसे हैं जिनके दोनों दलों में टिकट कटे थे। उन्हें अब बंगला खाली करना होगा। इधर, गृह विभाग ने शासन स्तर पर बी टाइप-14 और सी टाइप- 8 बंगलें खाली कराए जाने की सूची तैयार की है। इसका फैसला नई सरकार के गठन के बाद होगा। विधानसभा में अध्यक्षीय पूल के 34 बंगले हैं। इनमें से 22 विधायकी का चुनाव हार गए। 2 के टिकट कट गए। इस तरह 24 विधायकों से बंगले खाली छोड़ना होगा। 24 के अलावा 96 वे ऐसे सदस्य हैं जिनकी चुनाव हारने की वजह से विधायकी चली गई है। उनसे भी एमएलए रेस्ट हाउस में मिले आवास 10 दिन में खाली कराए जाना है। चुनाव हार चुके विधायक बाला, सिंघार सहित कई के रहेंगे सुरक्षित
Out of 230, 175 legislators have completed the registration, while 55 are still missing. भोपाल। सोलहवीं विधानसभा के नवनिर्वाचित सदस्य कैलाश विजयवर्गीय, राकेश सिंह, रीति पाठक, कुंवर विजय शाह एवं सुशील तिवारी विधानसभा पहुंचे। उन्होंने प्रमुख सचिव अवधेश प्रताप सिंह से कक्ष में चर्चा की। प्रमुख सचिव ने नव निर्वाचित सदस्यों का स्वागत किया। इसके बाद सदस्यों ने स्वागत कक्ष पहुंचकर निर्वाचन प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर नवीन विधानसभा गठन संबंधी समस्त आवश्यकताएं पूर्ण कीं। सोमवार को 25 सदस्यों का विधानसभा पहुंचे। अब तक कुल 175 सदस्य विधानसभा पहुंचे चुके हैं। 230 विधानसभा सदस्यों में से अभी भी 55 पंजीयन से वंचित हैं। रविवार को आने वाले अन्य सदस्यों में जय सिंह मरावी, दिलीप जायसवाल, राधारविंद्र सिंह, मनोज पटेल, अशोक ईश्वरदास रोहाणी, धीरेंद्र बहादुर सिंह एवं गायत्री राजे पवांर विधानसभा पहुंचे थे। सोमवार को अन्य आने वाले सदस्यों में महेंद्र यादव, माधव सिंह, हरदीप सिंह डंग, चिंतामणि मालवीय, प्रणय पांडे, मुकेश टंडन, आशीष गोविंद शर्मा, तेज बहादुर सिंह, नरेंद्र सिंह कुशवाह, बाला बच्चन, निर्मला भूरिया, महादेव वर्मा (मधु वर्मा), अमर सिंह यादव, मालिनी गौड़, बालकृष्ण पाटीदार, मोंटू सोलंकी, सेना महेश पटेल, हरिबाबू राय, राजेश सोनकर एवं गोलू शुक्ला ने विधानसभा पहुंचकर अपने निर्वाचन प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण कीं।
New cabinet will include new faces along with the new Chief Minister, and several old ministers will see a reduction in their stature. मंत्रिमंडल में शामिल नेताओं में से 15 से ज्यादा नामों में फेरबदल होने की संभावना उदित नारायण भोपाल। प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान होेने के बाद अब नए मंत्रियों के नामों को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। सीएम की घोषणा के साथ ही मंत्रीमंडल को लेकर भी कवायत तेज हो गई है। लोगों में उत्सुकता है कि इस बार प्रदेश के कौन-कौन विधायक होंगे, जिन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। ऐसे में इस बार मंत्रीमंडल में कुछ नए और कुछ पुराने चेहरों के शामिल होने की संभावना ज्यादा है। बताया जा रहा है कि वर्तमान में मंत्रीमंडल में शामिल नेताओं में से 15 से ज्यादा नामों में फेरबदल होने की संभावना जताई जा रही है। 13 दिसंबर को होने वाले संभावित शपथग्रहण के एक दो दिन बाद ही मंत्रीमंडल का गठन होने के संकेत हैं। यह हैं संभावित नामसंभावित नामों की बात करें तो इसमें सुमावली विधायक एंदलसिंह कंसाना, ग्वालियर विधायक प्रद्युम्न सिंह तोमर, गुना विधायक पन्नालाल शाक्य, खुरई विधायक भूपेंद्र सिंह, सुरखी विधायक गोविंद राजपूत, जतारा विधायक हरीशकंर खटीक, छतरपुर विधायक ललिता यादव, जबेरा विधायक धर्मेंद्र लोधी, पन्ना विधायक ब्रजेंद्र प्रताप सिंह, सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह, विधायक रीति पाठक, मनीषा सिंह, अनूपपुर विधायक बिसाहूलाल सिंह, विजयराघवगढ़ विधायक संजय पाठक, अजय विश्नोई, जबलपुर विधायक राकेश सिंह, संपतिया उइके, योगेश पंडाग्रे, प्रभुराम चैधरी, नारायण सिंह पंवार, अरुण भीमावद, राजेश सोनकर, आशीष शर्मा, विजय शाह, अर्चना चिटनीस, निर्मला भूरिया, रमेश मेंदोला, उषा ठाकुर, तुलसी सिलावट, चेतन कश्यप, हरदीप डंग, इंदरसिंह परमार, भोपाल से विधायक रामेश्वर शर्मा और कृष्णा गौर के नाम शामिल हो सकते हैं। इनकी जगह हुई खालीइस बार विधानसभा चुनाव में शिवराज सिंह चैहान के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल के दस से अधिक मौजूदा मंत्री पराजित हुए हैं। राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को भी हार का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा जिन अन्य प्रमुख मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा उनमें अटेर से अरविंद भदोरिया, हरदा से कमल पटेल और बालाघाट से गौरीशंकर बिसेन शामिल हैं। इनके अलावा हारने वाले मंत्रियों में बड़वानी से प्रेम सिंह पटेल, बमोरी से महेंद्र सिंह सिसोदिया, बदनावर से राजवर्धन सिंह दत्तीगांव, ग्वालियर ग्रामीण से भारत सिंह कुशवाह, अमरपाटन से रामखेलावन पटेल, पोहरी से सुरेश धाकड़ और परसवाड़ा से रामकिशोर कावरे शामिल हैं। एक अन्य मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के भतीजे राहुल सिंह लोधी को खरगापुर से हार का सामना करना पड़ा।
Big Dalit Politician Jagdish Devda got Big opportunity as Deputy Chief Minister of Madhya Pradesh. संतोष सिंह तोमर भोपाल। मध्य प्रदेश में 11 दिसंबर को भाजपा विधायक दल की बैठक हुई। भाजपा विधायक दल की बैठक में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का एलान होने के साथ ही राज्य में दो उप मुख्यमंत्री बनाने का फैसला हुआ है। मल्हारगढ़ से विधायक जगदीश देवड़ा और उज्जैन दक्षिण से विधायक राजेंद्र शुक्ला मध्य प्रदेश के नए उप मुख्यमंत्री बनाए गए हैं। यूं तो जगदीश देवड़ा मध्य प्रदेश की राजनीति में किसी परिचायक मौहताज नहीं हैं। फिर भी आपको बता दें कि जगदीश देवड़ा वर्तमान शिवराज सरकार में वित्त मंत्री का जिम्मा संभाल रहे थे ।वह मल्हारगढ़ विधानसभा सीट से विधायक हैं। देवड़ा लगातार सातवीं बार जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। थावरचंद गहलोत के बाद एक बड़े दलित चेहरे देवड़ा मध्यप्रदेश में थावरचंद गहलोत के बाद एक बड़े दलित चेहरे जगदीश देवड़ा को मध्य प्रदेश का उप मुख्यमंत्री बनाया गया है। 1993 में पहली बार विधायक बनने के बाद से अपने लगभग 33 वर्ष के लंबे राजनीतिक कार्यकाल में जगदीश देवड़ा 7वीं बार विधायक बने हैं। थावरचंद गहलोत के राज्यपाल बनने के बाद से जगदीश देवड़ा को मध्य प्रदेश बीजेपी में बड़े दलित चेहरे के रूप में देखा जा रहा था। उसके चलते अब उन्हें उप मुख्यमंत्री के तौर पर बड़ी जिम्मेदारी मिली है। देवड़ा को उप मुख्यमंत्री बनाने के बाद उनके समर्थकों में खुशी का माहौल है। मल्हारगढ़ क्षेत्र में भी जश्न का माहौल है। विवादों से दूर, संघठन में मजबूत पकड़ रखते हैं देवड़ा मल्हारगढ़ विधानसभा सीट से जगदीश देवड़ा विधायक हैं। वह शिवराज सरकार में वित्त मंत्री हैं। जगदीश देवड़ा 66 साल की उम्र में भी फिट हैं। शांत स्वभाव को जगदीश देवड़ा पार्टी के कद्दावर नेता हैं। साथ ही वह विवादों से दूर रहते हैं। उनकी सजगता की वजह से ही वित्त जैसे महत्वपूर्ण विभाग की कमान उनके हाथों में है। संगठन और सरकार में उनकी अच्छी पकड़ है। दरअसल, जगदीश देवड़ा का जन्म एक जुलाई 1957 को हुआ है। वह मूल रूप से नीमच जिले के रामपुरा के रहने वाले हैं। एमए के बाद उन्होंने एलएलबी किया है। जगदीश देवड़ा की शादी रेणु देवड़ा से हुई है। राजनीति के साथ-साथ जगदीश देवड़ा वकालत भी करते हैं। उनके दो पुत्र हैं। साथ ही सामाजिक कार्यों से भी जुड़े रहते हैं। वहीं, खेलकूद में भी उनकी विशेष रुचि है। इसके साथ ही वे एथलेटिक्स चैंपियन भी रहे हैं। छात्र जीवन से ही राजनीतिक पारी की शुरुआत जगदीश देवड़ा वर्तमान में मंदसौर के मल्हारगढ़ विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक हैं। मध्य प्रदेश के नवनियुक्त उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा का ताल्लुक प्रदेश की अनुसूचित जाति से है। पेशे से जगदीश देवड़ा समाजसेवी और वकील हैं। छात्र जीवन से ही राजनीति में उनकी दिलचस्पी थी। वर्ष 1979 में वह शासकीय महाविद्यालय रामपुरा से छात्र संघ के अध्यक्ष रहे हैं। साथ ही विक्रम विश्वविद्यालय में सीनेट के सदस्य रहे हैं। इसके बाद उन्होंने भाजयुमो से जुड़कर सियासी करियर को रफ्तार दी है। वर्ष 1993 में बीजेपी ने उन्हें चुनाव लड़ने का मौका दिया। पहली बार में ही वह चुनाव जीत गए और विधायक बन गए। तब से लेकर अब तक वे लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं।इसके बाद विधानसभा में कई समितियों के सदस्य रहे। इसके साथ ही कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी उन्होंने पूरी ईमानदारी और निष्ठा पूर्वक निभाई। जगदीश देवड़ा भाजपा संगठन और सरकार के भरोसेमंद चेहरे हैं। तीन बार मंत्री और एक बार बने प्रोटेम स्पीकर मध्य प्रदेश की दसवीं विधानसभा में जगदीश देवड़ा वर्ष 1993 विधायक निर्वाचित हुए। वर्ष 2003 विधानसभा चुनाव में लगातार जीत दर्ज करने पर उन्हें प्रदेश में राज्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद साल 2008 में शिवराज सरकार में जदीश देवड़ा को परिवहन, जेल, योजना सहित कई महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार सौंप कर कैबिनेट मंत्री बनाया गया। वर्ष 2020 में बनी शिवराज सरकार में उन्हें वित्तमंत्री बनाया गया। इसके साथ ही 15वीं विधानसभा में उन्हें प्रोटेम स्पीकर भी चुना गया था लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने प्रोटेम स्पीकर का पद छोड़ दिया था। 7वीं बार जीते जगदीश देवड़ा जगदीश देवड़ा ने मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार में तीन बर मंत्री रहते हुए कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी निभाई। 66 साल के नवनियुक्त उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा का नाम मध्य प्रदेश तेज तर्रार और कद्दावर नेताओं में शुमार होता है। मध्य प्रदेश के मालवी रीजन में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। इस क्षेत्र में भाजपा ने विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया है। वर्ष 1993 से लेकर आज तक वे लगातार चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंच रहे हैं। वर्ष 2023 विधानसभा चुनाव में उन्होंने मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ सीट से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी श्यामलाल जोकचंद को 59,024 वोटों के अंतर से हरा कर मध्य प्रदेश के विधानसभा में 7वीं बार अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है।
The Deputy Chief Minister of Madhya Pradesh is Rajendra Shukla; he is invincible in every election and has also become a minister each time. मध्य प्रदेश में डॉ. मोहन यादव मुख्यमंत्री जबकि राजेंद्र शुक्ला, जगदीश देवड़ा के साथ उप मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेंगे। In Madhya Pradesh, Dr. Mohan Yadav is the Chief Minister, while Rajendra Shukla and Jagdish Devda will assume the positions of Deputy Chief Ministers. संतोष सिंह तोमर भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री का नाम आखिरकार फाइनल हो गया है। बीजेपी ने डॉ. मोहन यादव का नाम मुख्यमंत्री के लिए चुनकर एक बार फिर सबको चौंका दिया है। उज्जैन दक्षिण से विधायक मोहन यादव मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री होंगे। वहीं राजेन्द्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा को उत्तर प्रदेश सरकार की तर्ज पर उप मुख्यमंत्री पद पर बैठाया गया है। राजेंद्र शुक्ला मध्यप्रदेश के रीवा से विधायक हैं और विंध्य के कद्दावर नेता के तौर पर उन्हें जाना जाता है। राजेंद्र शुक्ला लगातार चुनाव जीतकर चार बार कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। विंध्य के बड़े नेता हैं अजेय विधायक राजेंद्र शुक्ला रीवा विधानसभा क्षेत्र से विधायक राजेंद्र शुक्ला को विंध्य क्षेत्र से ब्राह्मण समाज के बड़े चैहरे और कद्दावर नेता के तौर पर जाना जाता है। अपने चुनावी कैरियर में वह 2003 से लेकर अब तक अजेय रहे हैं। खास बात है कि वह ऐसे विधायक हैं जिन्हें हर बार चुनाव जीतने पर मंत्री पंद मिला है। वर्ष 2003 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर उमा भारती की सरकार में मंत्री बने। इसके बाद बाबूलाल गौर सरकार में भी उन्हें मंत्री पद मिला। शिवराज सिंह चौहान की सरकार में भी वह राज्य में कैबिनेट मंत्री रहे। बता दें कि वह अब तक लगातार चार बार मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके हैं। वर्ष 2003 से लेकर अब तक राजेंद्र शुक्ला लगातार रीवा से चुनाव जीतते आए हैं। छात्र नेता के रूप में शुरू हुआ राजनैतिक जीवन मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री की कुर्सी पाने वाले राजेंद्र शुक्ला ब्राह्मण समाज से आते हैं। उनकी ब्राह्मण वोटर्स पर मजबूत पकड़ मानी जाती है। पेशे से इंजीनियर राजेंद्र शुक्ला का जन्म वर्ष 1964 को रीवा में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1986 से छात्र नेता के तौर पर राजनैतिक जीवन की शुरुआत कर दी थी। वर्ष 1986 में राजेंद्र शुक्ला सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में छात्र संघ के अध्यक्ष रहे थे। राजेंद्र शुक्ला ने वर्ष 1998 में पहला विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन वह कांग्रेस के पुष्पराज सिंह से 1394 वोटों से हार गए। वर्ष 2003 में रीवा सीट से एक बार फिर बीजेपी ने राजेंद्र शुक्ला को उम्मीदवार बनाया है, इस बार उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी पुष्पराज हराकर पहली मध्य प्रदेश विधानसभा में अपनी जगह बनाई। इससे पहले रीवा सीट से पुष्पराज सिंह ने लगातार तीन बार जीत दर्ज की थी। राजेंद्र शुक्ला ने साल 2003 में रीवा से जीत दर्ज कर उनके विजय रथ पर ब्रेक लगा दिया। इसके बाद उन्होंने यहां से साल 2003 के अलावा साल 2008, 2013, 2018 और 2023 विधानसभा चुनाव में जीत दर्जी की है कैबिनेट मंत्री से लेकर उप मुख्यमंत्री तक का सफर वर्ष 2003 में पहली बार रिकॉर्ड वोटों से विधानसभा चुनाव जीतने वाले राजेंद्र शुक्ला को आवास और पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का पद दिया गया। वर्ष 2008 में वह रीवा विधानसभा क्षेत्र से दूसरी बार जीते। और इस बार उन्हें ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्री बनाकर मंत्रीपरिषद में शामिल किया गया। वर्ष 2013 की बात करें तो मध्य प्रदेश की 14वीं विधानसभा में चुनाव जीतकर आने वाले राजेंद्र शुक्ला को उद्योग नीति और निवेश संवर्धन मंत्री बनाया गया। इसके साथ ही उन्होंने जनसंपर्क विभाग भी संभाला।बता दें कि वर्ष 2018 में भी राजेंद्र शुक्ला रीवा से विधायक चुने गए थे लेकिन मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी थी जो की अपना पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी और वर्ष 2020 में यह सरकार गिर गई। जिसके बाद एक बार फिर भाजपा सत्ता में आई। इस बार भी राजेंद्र शुक्ला लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री के दायित्व के साथ एक बार फिर यानी कुल चौथी बार शिवराज मंत्रिमंडल में जगह मिली। इसके साथ ही वर्तमान में पांचवी बार चुनाव जीतकर मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए हैं। सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं विधायक सरकार राजेंद्र शुक्ला राजेंद्र शुक्ला की X (ट्विटर) प्रोफाइल देखें तो पता चलता है कि वह सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं हैं। उन्हें 65000 से ज्यादा लोग X पर फॉलो करते हैं। इसके साथ ही विधायक राजेंद्र शुक्ला फेसबुक पर भी काफी एक्टिव रहते हैं। यहां भी उनके फॉलोवर बहुत बड़ी तादाद में हैं।