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मंत्रियों के नामों पर मंथन, ऐसी हो सकती है मोहन कैबिनेट.

A Brainstorming on the names of ministers, this could be the Mohan Cabinet. मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री का फेस तय करने के बाद भाजपा अब मंत्रियों के नामों पर मंथन कर रही है। भोपाल। मुख्यमंत्री का कार्यभार संभालने के बाद डा. मोहन यादव ने कैबिनेट विस्तार के लिए मंत्रियों के नाम तय करने की कवायद आरंभ कर दी है। ऐसा माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव तक कैबिनेट में मंत्रियों की संख्या सीमित रहेगी। नियमानुसार 35 सदस्यों की कैबिनेट हो सकती है लेकिन पहले विस्तार में इसमें 18-20 मंत्रियों को ही शामिल किया जाएगा। दरअसल, इसकी वजह यह है कि लोकसभा चुनाव के बाद रिक्त पद विधायकों के प्रदर्शन के आधार पर भरे जाएंगे। मुख्यमंत्री चयन की तरह समानांतर रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिग्गज नेता अपनी कवायद कर रहे हैं। वे अपनी सूची भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश को सौंपेंगे। मुख्यमंत्री और संगठन की पसंद की भी सूची तैयार होगी। इसके बाद हाईकमान इसकी हरी झंडी देगी। चर्चाओं का दौर जारीपार्टी हाईकमान दो विकल्पों पर विचार कर रहा है कि मंत्रिमंडल का विस्तार मलमास के पहले किया जाए या फिर उसके बाद। संगठन के स्तर पर राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश, प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा आदि के बीच इस मुद्दे पर चर्चाओं का दौर चला है। दावेदार भी इनसे मिल रहे हैं। हालांकि, माना यही जा रहा है कि मंत्रियों के नाम दिल्ली से ही तय होंगे। कुछ लोग यह भी अनुमान लगा रहे हैं कि मलमास की वजह से अभी नए मंत्रियों की शपथ नहीं होगी। क्या बोले प्रदेश अध्यक्ष?भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा भी फिलहाल नए मंत्रियों की शपथ के कार्यक्रम से अनभिज्ञ हैं। वे कहते हैं कि पार्टी सामूहिक निर्णय पर भरोसा करती है और इस बारे में भी आगे बातचीत होगी।

कैमाहा बैरियल प्रभारी प्राची शर्मा के आते ही बैरियल बना लूट का अड्डा.

Upon the arrival of the barrier supervisor Prachi Sharma, the barrier ground became a hub of looting. उत्तर प्रदेश से आने वाले भारी वाहनों की काटी फर्जी चेक पोस्ट बनाकर₹3500 की रसीद नियम अनुसार कैमाहा चेक पोस्ट पर ही बना सकते हैं बेरियल लेकिन उगाई करने के लिए जगह-जगह बना रखे हैं चेक पॉइंट कहीं पर भी खड़े होकर काटी जा रही फर्जी तरीके से रसीद दें! कांग्रेस नेता मोहम्मद अली ने कहा कि जल्द ही ग्वालियर कमिश्नर के नाम ज्ञापन देकर कैमहा चेक पोस्ट प्रभारी प्राची शर्मा का जलाया जाएगा पुतला! उदित नारायण छतरपुर! छतरपुर जिले में हाल फिलहाल ही चेक पोस्ट को लेकर मारपीट की खबर सामने आई थी जहां पर बेरियल बालों के साथ लोगों ने मारपीट की थी वहीं पर कैमाहा बेरियल प्रभारी प्राची शर्मा के द्वारा जगह-जगह चेक पोस्ट बनाकर अवैध वसूली की जा रही है उत्तर प्रदेश से आने वाले खाली ट्रैकों की ₹3500 की रसीद जबरन काटी जा रही है! जिससे ट्रक वालों में काफी आक्रोश दिखाई दे रहा है कैमरा चेक पोस्ट के द्वारा जगह-जगह चेक पॉइंट बना रखे हैं! जहां पर उनके शासकीय कर्मचारी और गुर्गे लगातार फर्जी तरीके से उगाई करने में जुटे हुए हैं! जिसके वीडियो भी समय-समय पर वायरल होते नजर आते हैं ऐसा ही वीडियो अभी हाल फिलहाल में वायरल हुआ है! जहां पर कैमाहा चेक पोस्ट प्रभारी प्राची शर्मा के द्वारा चेकप्वाइंट बनाकर अपने शासकीय ऑफ प्राइवेट गुर्गों के द्वारा अवैध वसूली कराई जा रही है! जिसमे ट्रक चालक ने बताया कि वह खाली ट्रक लेकर जा रहा था और उसे जबरन रोककर उसकी ₹3500 की रसीद काट दी गई इसको लेकर ट्रक संचालको मैं भारी आक्रोश है! वहीं पर कांग्रेस नेता मोहम्मद अली भारतीय ने कहा कि कैमाहा चेकपोस्ट प्रभारी प्राची शर्मा के द्वारा जो अवैध वसूली की जा रही है उसको लेकर बहुत जल्द ग्वालियर कमिश्नर के नाम एक शिकायती ज्ञापन देंगे उसके बाद कैमाहा चेक पोस्ट प्रभारी का पुतला भी दहन करेंगे इस तरह की प्रभारी के होते हुए पूरे विभाग का नाम खराब होता है अब देखना होगा की शिकायत होने के बाद कैमाहा चेक पोस्ट प्रभारी प्राची शर्मा के ऊपर क्या कार्रवाई की जाती है! इस संबंध में जब परिवाहन आयुक्त से बात करनी चाही, तो उनसे कोई जवाब नही मिला

संसद मामला : पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने किया हमलावरों का समर्थन, भाजपा ने किया विरोध.

Parliament Case: Former Minister Sajjan Singh Verma expressed support for the attackers; BJP opposed the statement. कहा-देश की युवाओं की बात को संसद तक पहुंचाने की कोशिश की भोपाल। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने संसद में हुए हमले को लेकर हमलावरों का समर्थन किया है। सज्जन सिंह वर्मा का कहना है कि जो हमलावर सदन के अंदर दाखिल हुए थे उन्होंने अपने विरोध की आवाज उठाई थी। बेरोजगारी सहित कई मुद्दों को लेकर अब उनके पास कोई चारा नहीं था। इसलिए सदन के अंदर दाखिल होकर ऐसा कदम उठाया है। आज देश की यही स्थिति बन रही है। उन्होंने देश की युवाओं की बात को संसद तक पहुंचाने की कोशिश की है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी ने कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा के बयानों पर किया पलटवारभाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व विधायक सज्जन सिंह वर्मा के संसद के सुरक्षा घेरे को तोड़कर उत्पात मचाने वालों का समर्थन करने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कांग्रेस नेता को नसीहत देते हुए कहा कि कांग्रेसी सदैव जिहादी, अपराधी और अराजक मानसिकता का समर्थन करते हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या इनके विचारों का समर्थन सोनिया गांधी व राहुल गांधी भी करते हैं, इसे स्पष्ट करना चाहिए। अग्रवाल ने अपने ट़्वीटर एक्स हैंडल पर किए गए ट्वीट में कहा कि इनके दुर्जन विचारों को सुनिए…। उन्होंने लिखा कि वर्मा संसद के सुरक्षा घेरे को तोड़कर उत्पात मचाने वालों का समर्थन कर रहे हैं। आखिर क्यों कांग्रेसी सदैव जिहादी, अपराधी और अराजक मानसिकता का समर्थन करती है। क्या इनके विचारों का समर्थन सोनिया गांधी और राहुल गांधी भी करते हैं उन्हें स्पष्ट करना चाहिए।

मप्र के विपक्ष का नेता दिल्ली में तय करेगा पार्टी सुप्रीमो, रिपोर्ट भेजी.

The opposition leader of Madhya Pradesh will decide the party supremo in Delhi, as per the sent report. उदित नारायण भोपाल। मध्यप्रदेश में कांग्रेस विधायक दल की पहली बैठक भोपाल स्थित प्रदेश कार्यालय में गुरुवार को हुई। चुरहट विधायक अजय सिंह ने कहा कि बैठक में एक लाइन का प्रस्ताव पारित हुआ है कि नेता प्रतिपक्ष का फैसला दिल्ली हाईकमान करेगा। करीब 40 मिनट की बैठक में दिग्विजय सिंह ने लोकसभा चुनाव के बारे में विधायकों को सक्रिय होने के लिए कहा। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला और स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने विधायकों से वन टू वन चर्चा की। सुरजेवाला ने कहा कि आर्ब्जवर भंवर जीतेंद्र सिंह ने बैठक में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ शामिल नहीं हुए।कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने बताया कि कमलनाथ का कार्यक्रम छिंदवाड़ा जिले में पहले से तय है। पार्टी के प्रदेश प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला, स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष भंवर जितेंद्र सिंह, पूर्व उट दिग्विजय सिंह बैठक में पहुंचे। दिग्विजय सिंह ने मीडिया के सवालों पर बस इतना कहा कि कैबिनेट का गठन हो गया क्या। भाजपा के ओबीजी मुख्यमंत्री बनाने के साथ ही सामान्य और अनुसूचित जाति वर्ग से एक-एक डिप्टी सीएम बनाए हैं। ऐसे में कांग्रेस में आदिवासी विधायक को नेता प्रतिपक्ष पद देने पर विचार हो रहा है। हालांकि, कांग्रेस में ओबीसी चेहरे के तौर पर विजयपुर विधायक रामनिवास रावत और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व सतना विधायक सिद्धार्थ कुशवाह के नाम भी चर्चा में हैं। वहीं, संसदीय मामलों में अनुभवी नेताओं के तौर पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल भैया, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष और अमरपाटन से विधायक राजेंद्र कुमार सिंह को लेकर भी अंदरखाने विचार हो रहा है। भाजपा को विधायक याद दिलाएंगे संकल्पबैठक के बाद रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि हाईकमान का संदेश विधायकों को दिया गया है। उन्हें लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए कहा गया है। साथ ही विपक्ष में बैठने वाले विधायक जनता के प्रहरी के तौर पर काम करेंगे। सदन के भीतर जनता के मुद्दों को उठाने की जिम्मेदारी निभाएंगे। जनता के लिए सरकार का समर्थन भी करेंगे। इसके अलावा भाजपा को विधायक संकल्प पत्र को पूरा करने के लिए भी आगाह करते रखेंगे। आदिवासी नेताओं में इनके नाम शामिल

विधानसभा में सुरक्षा घेरा सख्त. (M.P)

Tight security cordon in the Legislative Assembly Madhya Pradesh. अब विधायक केवल एक बाहरी व्यक्ति को दिलवा सकेंगे दीर्घा में प्रवेश विधानसभा में बगैर पास और वैध पहचान पत्र के कोई बाहरी व्यक्ति प्रवेश नहीं कर सकता। गेट के अलावा दीर्घा में प्रवेश से पहले जांच। बिना पहचान पत्र नहीं कर सकता कोई प्रवेश।खान-पान की सामग्री भी दीर्घा में ले जाना मना है।गेट पर होती है तगड़ी सुरक्षा जांच। भोपाल। देश की राजधानी दिल्ली में संसद पर आतंकी हमले की बरसी के दिन ही दो युवक सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए लोकसभा की दर्शक दीर्घा से सदन में कूदकर स्मोक बम सरीखी सामग्री से धुआं छोड़ने की घटना को देखते हुए विधानसभा सचिवालय भी हरकत में आ गया है। गुरुवार को प्रमुख सचिव एपी सिंह ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की और निर्देश दिए कि अब विधायक केवल एक ही बाहरी व्यक्ति को दर्शक दीर्घा में प्रवेश दिला पाएंगे। दो स्तर पर जांच होगी और कोई भी ऐसी सामग्री ले जाने की अनुमति नहीं होगी, जिसे सुरक्षा को कोई खतरा हो। इसी माह होगा विधानसभा सत्र मध्य प्रदेश में 16वीं विधानसभा का गठन हो चुका है। दिसंबर में पहला सत्र प्रस्तावित है। लोकसभा की सुरक्षा में सेंध की घटना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर समीक्षा की गई। अभी विधानसभा अध्यक्ष या सदस्य अपने क्षेत्र के लोगों को विधानसभा की कार्यवाही देखने के लिए प्रवेश पत्र जारी करवाते हैं। इसमें बैठक व्यवस्था के अनुसार सदस्यों की अनुशंसा पर प्रवेश पत्र जारी किए जाते हैं, लेकिन अब विधायक के स्वजन के अलावा वे केवल एक बाहरी व्यक्ति की ही अनुशंसा कर सकेंगे। विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह ने बताया कि सत्र के पहले एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। विधानसभा परिसर और दीर्घा में प्रवेश से पहले जांच होगी। अभी ऐसी व्यवस्था मप्र विधानसभा में आगंतुकों के लिए विधानसभा सचिवालय द्वारा प्रवेश पत्र जारी किए जाते हैं। यह विधानसभा अध्यक्ष या विधायक की अनुशंसा पर ही जारी किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त उनके पास आधार कार्ड या अन्य फोटोयुक्त पहचान पत्र होना अनिवार्य रहता है। प्रवेश पत्र में ही इस बात का उल्लेख होता है कि संबंधित व्यक्ति किस दीर्घा में जाकर बैठ सकता है। दो जगह सुरक्षा जांच विधानसभा में पहुंचने वाले व्यक्ति को दो जगहों पर सुरक्षा जांच से गुजरना होता है। पहले परिसर के बाहरी द्वार पर तैनात सुरक्षाकर्मी उनकी जांच करते हैं। इसके बाद दीर्घा में प्रवेश से पहले फिर उनकी जांच होती हैं। यहां उनके जूते-चप्पल, बेल्ट उतरवा रखवा लिए जाते हैं। खाने-पीने की कोई चीज अपने साथ नहीं ले जा सकते हैं। मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति तो रहती है, पर उसे बंद करके रखना होता है। सत्र के दौरान राज्य पुलिस के अधीन होती है सुरक्षा व्यवस्था विधानसभा के अपर सुरक्षा सचिव उमेश शर्मा ने बताया कि सत्र के दौरान विधानसभा परिसर की पूरी सुरक्षा व्यवस्था राज्य पुलिस बल के हवाले रहती है। सामान्य दिनों में राज्य के विशेष सशस्त्र बल के 27 जवान तैनात रहते हैं। वहीं, विधानसभा का सुरक्षा अमला, जिसमें लगभग सौ जवान हैं, भी परिसर के भीतर तैनात रहता है।

व्यापारी की शिकायत पर नयाब तहसीलदार ने हटाया अवैध अतिक्रमण.

The Deputy Tehsildar, in response to the businessman’s complaint, removed the unauthorized encroachment. मामला शिवाजी मार्केट में अवैध अतिक्रमण का. The matter involves unauthorized encroachment in Shivaji Market. आमला। नगर के जनपद चौक स्थित शिवाजी कमलेक्स से सटी सरकारी भूमि पर स्थाई टीन शेड रख व्यक्ति द्वारा अवैध रूप से अतिक्रमण किया गया था । किए गए अवैध अतिक्रमण से शिवाजी मार्केट के व्यापारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था । जिस बात की शिकायत व्यापारी मंगलेश कामतकार ने तहसीलदार आमला को कर बताया में आमला निवासी हूं एवं जपनद पंचायत द्वारा आबंटीत दुकान में अपना व्यवसाय संचालित करता आ रहा हूं मेरी छत्रपति शिवाजी काम्पेलेक्स में हार्डवेयर की दुकान है। दुकान करीब 6 सालो से संचालीत है। 2. किसी व्यक्ति द्वारा रात्रि 12 से 1 बजे के बिज में दिनांक 13/12/2023 को आवेदक की दुकान के सामने एक पक्का टिन सेड लाकर रख दिया गया है, जिसेसे अपनी दुकान लगाने में परेशानी हो रही है। प्राप्त शिकायत को संज्ञान में लेकर बुधवार नायब तहसीलदार आमला एस. बी. समेलिक ने राजस्व अमले एवं नगर पालिका आमला के संयुक्त दल द्वारा मौके पर पहोंच अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की। मिली जानकारी अनुसार तहसीलदार ने मौके पर शिकायत कर्ता एवं अन्य व्यापारियों के समक्ष पंचनामा बना ठेला जप्ती की कार्यवाही की ।

चहेते ठेकेदारों को लाभ देने के लिए ताक पर नियम कानून, नगर पालिका परिषद् के हाल.

The current regulations on municipal councils are aimed at providing benefits to the preferred contractors. एक करोड रुपए से अधिक की निविदा का नहीं हो रहा राष्ट्रीय प्रकाशन, बटोरने में लगे अध्यक्ष और सीएमओ. The national tender for amounts exceeding one crore rupees is not currently being processed due to the efforts of the chairman and CEO involved in scrutinizing it. छतरपुर! नगर पालिका परिषद छतरपुर में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग मध्य प्रदेश शासन भोपाल के किसी भी नियम को नहीं माना जा रहा है। अध्यक्ष और अफसरों की लाट साबी ऐसी है कि नियमों को ही ताक पर रख दिया जाता है। अपने चहेते ठेकेदारों को लाभ देने के लिए पोर्टल पर निविदा ऑनलाइन कर दी जाती है परंतु अखबारों में उसका राष्ट्रीय प्रकाशन नहीं करवाया जाता है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग मध्य प्रदेश शासन भोपाल के नियम है कि एक करोड़ से अधिक रुपए की निविदा को प्रतिष्ठित किसी अंग्रेजी समाचार पत्र में राष्ट्रीय प्रकाशन करवाना होता है लेकिन नगर पालिका परिषद छतरपुर में भर्राशाही का है कि राष्ट्रीय प्रशासन तो छोड़ वह प्रादेशिक प्रकाशन भी नहीं करवाते हैं। जिले के जागरूक लोगों के द्वारा जल्द ही इस संबंध में भोपाल में वरिष्ठ अफसर से मामले में हस्तक्षेप की मांग की जा रही है। नगर पालिका परिषद छतरपुर में अध्यक्ष और सीएमओ बटोरने में लगे हैं।

बुंदेलखंड में भाजपा के सभी दिग्गज जीते, कांग्रेस 5 सीटों में सिमटी.

In Bundelkhand, all stalwarts of the BJP emerged victorious, while Congress was confined to 5 seats. हारते-हारते सुरखी में जीत गए गोविंद राजपूत ,राजनगर में 302 के प्रकरण के बावजूद जीते अरविंद. Amidst setbacks, Govind Rajput secured victory, while Arvind emerged triumphant in Rajnagar despite the 302 case. भोपाल। विधानसभा चुनाव के नतीजों ने पूरे प्रदेश की तरह बुंदेलखंड में भी सभी को चौंका दिया। यहां भाजपा के सभी दिग्गज चुनाव जीत गए। प्रदेश के परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पिछड़ रहे थे लेकिन अंतत: उन्होंने लगातार तीसरी जीत दर्ज कर ली। छतरपुर जिले के राजनगर भाजपा प्रत्याशी अरविंद पटैरिया के खिलाफ मतदान के दिन ही हत्या का प्रकरण दर्ज हो गए था। उनकी गिरफ्तारी की मांग को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने राजनगर थाने के सामने रात भर धरना दिया था लेकिन अरविंद भी चुनाव जीतने में सफल रहे। हालात ये है कि कांग्रेस 26 में से मात्र 5 सीटें हासिल कर सकी जबकि भाजपा ने 21 सीटें जीत कर सबको चौंका दिया। सागर में मंत्रियों की तिकड़ी जीतीसागर जिले की 8 विधानसभा सीटों में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया। सरकार में शामिल जिले के तीनों मंत्री गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह और गोविंद सिंह राजपूत जीत दर्ज करने में सफल रहे। गोपाल और भूपेंद्र ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की। भार्गव क्षेत्र में प्रचार के लिए निकले तब भी लगभग 73 हजार वोटों के अंतर से चुनाव जीते। कांग्रेस ने भाजपा से बीना सीटी छीनी तो भाजपा ने कांग्रेस की दो सीटें देवरी और बंडा छुड़ा लीं। देवरी में कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे हर्ष यादव चुनाव हार गए। कुल मिलाकर भाजपा 7 सीटें जीती जबकि कांगेस एक सीट पर सिमट गई। छतरपुर में कांग्रेस के तीनों विधायक हारेछतरपुर जिले की 6 में से 5 सीटेँ भाजपा ने जीत लीं। यहां कांग्रेस के तीनों विधायक छतरपुर से आलोक चतुर्वेदी, महाराजपुर से नीरज दीक्षित और राजनगर से विक्रम सिंह नातीराजा चुनाव हार गए। कांग्रेस सिर्फ एक सीट जीती। कांग्रेस को यहां पूर्व विधायक और जिले के कद्दावर नेता शंकरप्रताप सिंह मुन्ना राजा को अलग-थलग करने का नुकसान हुआ। मलेहरा में कांग्रेस की रामसिया भारती ने भाजपा के प्रद्युम्न सिंह लोधी को हरा दिया। मुन्ना राजा ने सिर्फ रामसिया का प्रचार किया था। प्रद्युम्न 2018 का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर जीते थे लेकिन बाद में वे भाजपा में शामिल हो गए थे। टीकमगढ़, निवाड़ी में कांग्रेस का बेहतर प्रदर्शनबुंदेलखंड अंचल के टीकमगढ़ और निवाड़ी जिले ही ऐसे रहे जहां कांग्रेस ने पांच में से तीन सीटें जीत कर बेहतर प्रदर्शन किया। टीकमगढ़ जिले की जतारा में ही हरिशंकर खटीक भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते शेष दो सीटें टीकमगढ़ और खरगापुर कांग्रेस ने छीन लीं। टीकमगढ़ में पूर्व मंत्री यादवेंद्र सिंह ने भाजपा के राकेश गिरि को हरा दिया। यहां भाजपा को पार्टी के बागी केके श्रीवास्तव ने नुकसान पहुंचाया। खरगापुर में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के भतीजे राहुल लोधी चुनाव हार गए। उन्हें कांग्रेस की चंदारानी गौर ने शिकस्त दी। निवाड़ी की दो सीटों में से प्रथ्वीपुर में कांग्रेस के नितेंद्र सिंह राठौर जबकि निवाड़ी में भाजपा के अनिल जैन चुनाव जीते। इस तरह यहां मुकाबला बराबरी का रहा। पन्ना, दमोह में नहीं खुला कांग्रेस का खातापन्ना और दमोह जिले में कांग्रेस का खाता ही नहीं खुला। भाजपा ने सभी 7 सीटें जीत लीं। दमोह में जयंत मलैया बड़े अंतर से जीते और पन्ना में सरकार के खनिज मंत्री ब्रजेंद्र प्रताप सिंह भी चुनाव जीत गए। पन्ना जिले की पवई सीट में कांग्रेस के पूर्व मंत्री मुकेश नायक को पराजय का सामना करना पड़ा। गुनौर सीट पिछली बार कांग्रेस के पास थी जिसे इस बार भाजपा के राजेश वर्मा ने छीन लिया। इस तरह बुंदेलखंड में एक तरह से कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया।

मुख्यमंत्री की ताजपोशी के बाद नए मुख्य सचिव को लेकर चर्चाएं शुरू.

Discussions have commenced on the appointment of the new Chief Secretary following the swearing-in of the Chief Minister. अनुराग जैन, विवेक अग्रवाल व हरिरंजन राव मप्र लौटेंगे, मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी. Anurag Jain, Vivek Agrawal, and Hariranjan Rao will return to Madhya Pradesh, taking on significant responsibilities. भोपाल। प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के रूप में डॉ. मोहन यादव की ताजपोशी के साथ नए मुख्य सचिव को लेकर चर्चाएं प्रारंभ हो गई है। इसके साथ ही यह चचर्चा भी है कि केंद्रीय भूतल परिवहन सचिव अनुराग जैन प्रदेश लौट सकते हैं। यदि अनुराग जैन प्रदेश लौटते हैं तो श्रीमती बीरा राणा के बाद उन्हें प्रदेश का मुख्य सचिव बनाया जाएगा। अतिविश्वसनीय सूत्रों के अनुसार श्रीमती राणा का कार्यकाल पूरा होने के एक माह पूर्व यानी फरवरी 2024 के अंतिम या मार्च के प्रथम सप्ताह में राज्य सरकार किसी वरिष्ठ अधिकारी को मंत्रालय मेंओएसडी नियुका कर देगी। ओएसडी ही श्रीमती राणा की सेवानिवृत्ति पर 31 मार्च 2024 को राज्य के प्रशासनिक मुखिया का पदभार संभाल लेगा। सूत्रों का कहना है कि अनुराग जैन यदि प्रदेश नहीं लौटते तो अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य च चिकित्सा शिक्षा मोहम्मद सुलेमान, अपर मुख्य सचिव गृह डॉ. राजेश राजौरा या अपर मुख्य सचिव नर्मदा घाटी विकास एसएन मिश्रा में से किसी एक को मुख्य सचिव बनाया जा सकता है। अंतिम फैसला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लेना है। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ अतिरिक्त सचिव वित्त विवेक अग्रवाल तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में पदस्थ अतिरिक्त सचिव हरिरंजन राव भी प्रदेश लौट सकते हैं। यदि अग्रवाल व राव प्रदेश लौटते हैं तो उन्हें महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। दोनों मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह जिले उजजैन में कलेक्टर रह चुके हैं। मुख्यमंत्री यादव जब पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष थे, तब हरिरंजन राव निगम के एमडी थे।

गोपाल भार्गव बने एमपी के प्रोटेम स्पीकर.

Gopal Bhargav becomes the Protem Speaker of Madhya Pradesh. राज्यपाल ने दिलाई शपथ; सबसे सीनियर और नौ बार के विधायक हैं भार्गव The Governor administered the oath; Bhargav is the most senior and a nine-time legislator. भाजपा के सबसे सीनियर व रहली से नौ बार के विधायक गोपाल भार्गव ने गुरुवार को प्रोटेम स्पीकर पद की शपथ ली। सुबह 11 बजे राजभवन में गवर्नर मंगुभाई पटेल उनको शपथ दिलाई। बाद में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर विधायकों को शपथ प्रोटेम स्पीकर दिलाएंगे। यहां स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर भी शपथ लेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस करेंगे। इसके बाद एसीएस की बैठक लेंगे। वे इससे पहले विधानसभा स्पीकर और प्रोटेम स्पीकर के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में शामिल हुए। सीएम ने पहली कैबिनेट बैठक में बुधवार को खुले में मांस की बिक्री और तेज आवाज में बजने वाले लाउड स्पीकर को लेकर अहम फैसले किए। पूर्व सीएम उमा भारती ने गुरुवार को इनकी तारीफ की है। ऐसी है प्रोटेम स्पीकर की व्यवस्था प्रोटेम स्पीकर का जिक्र संविधान के अनुच्छेद 180(1) में है। इसमें प्रावधान है कि जब विधानसभा अध्यक्ष या उपाध्यक्ष का पद रिक्त हो तो कार्यालय के कर्तव्यों का पालन ऐसे विधानसभा सदस्य द्वारा किया जाना चाहिए जिसे राज्यपाल नियुक्त कर सकते हैं। आमतौर पर सदन के सबसे वरिष्ठ सदस्य को प्रोटेम स्पीकर चुना जाता है। इस मामले में वरिष्ठता सदन में सदस्यता से देखी जाती है न कि सदस्य की उम्र से तय की जाती है। संवैधानिक परंपरा के अनुसार प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति के लिए कोई विशिष्ट संवैधानिक या वैधानिक प्रावधान नहीं है।

मंत्रिमंडल विस्तार में नहीं चलेगा पट्ठावाद, चौंकाने वाले हो सकते मंत्रियों के नाम.

The expansion of the cabinet, here are the names of the ministers who could be surprising. हर अंचल से बनाए जाएंगे 4 से 6 तक मंत्री- खाली रखे जा सकते हैं आधा दर्जन मंत्री पद, मंत्रिमंडल में जातीय संतुलन साधने की तैयारी उदित नारायण भोपाल। जिस प्रकार मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्रियों के चयन में रसूखदार नेताओं की नहीं चली, ठीक इसी तर्ज पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के मंत्रिमंडल का गठन होगा। लोकसभा चुनाव की दृष्टि से इसमें क्षेत्रीय और जातीय संतुलन तो साधा जाएगा लेकिन पट्ठावाद बिल्कुल नहीं चलेगा। अर्थात रसूखदार नेताओं का समर्थक होने के कारण किसी को मंत्री नहीं बनाया जाएगा। सूत्रों के अनुसार पहले चरण में 26-27 मंत्रियों को शामिल कर शपथ दिलाई जाएगी और आधा दर्जन से ज्यादा मंत्री पद खाली रखे जाएंगे। हमेशा की तरह नेतृत्व मंत्रिमंडल के गठन में भी सभी को चौंका सकता है। मोहन-वीडी लेकर जाएंगे संभावित मंत्रियों की सूचीमंत्रिमंडल के गठन पर भी केंद्रीय नेतृत्व की मुहर लगेगी। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा संभावित मंत्रियों की सूची लेकर दिल्ली जाएंगे। वहां नेतृत्व के साथ सूची पर डिस्कशन होगा। नाम जोड़े और घटाएं जाएंगे। इसके बाद फायनल सूची के अनुसार मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी।वरिष्ठ और नए के बीच होगा संतुलनमंत्रिमंडल के गठन में भी मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्रियों का फार्मूला अपनाया जा सकता है। इसके तहत वरिष्ठ और नए विधायकों के बीच संतुलन साधा जा सकता है। कुछ वरिष्ठों के साथ नए मंत्री ज्यादा बनाए जा सकते हैं। जैसे 8-9 वरिष्ठ मंत्रियों के साथ 16-18 नए विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है। चंबल-ग्वालियर अंचल से ये बन सकते मंत्रीभाजपा सूत्रों के अुनसार अंचलों में मिली सीटों के संख्या के आधार पर मंत्रियों की संख्या तय हो सकती है। इस आधार पर चंबल- ग्वालियर, बुंदेलखंड, विंध्य और मध्य अंचल से 4-4 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इनमें जातीय संतुलन भी साधा जाएगा। जैसे, चंबल-ग्वालियर से नेता प्रतिपक्ष को हराने वाले अंबरीश शर्मा, जनता के बीच सक्रिय प्रद्युम्न सिंह तोमर, केपी सिंह को हराने वाले देवेंद्र कुमार जैन और घनश्याम सिंह को हराने वाले प्रदीप अग्रवाल को मंत्री बनाया जा सकता है। नरेंद्र सिंह तोमर पहले ही विधानसभा अध्यक्ष घोषित किए जा चुके हैं। बुंदेलखंड, विंध्य में ये हो सकते चेहरेबुंदेलखंड और विंध्य से मंत्रिमंडल में वरिष्ठ और कनिष्ठ के बीच संतुलन के तहत चेहरे तय किए जाएंगे। बुंदेलखंड से नरयावली विधायक प्रदीप लारिया, छतरपुर की ललिता यादव और जबेरा के धर्मेंद्र लोधी को मौका मिल सकता है। इनके अलावा वरिष्ठों में गोपाल भार्गव, भूपेेंद्र सिंह, गोविंद सिंह राजपूत, जयंत मलैया और बृजेंद्र प्रताप सिंह में से 1 अथवा 2 को मौका मिल सकता है। विंध्य अंचल से सीधी की रीति पाठक, जयसिंह नगर की मनीषा सिंह, मऊगंज से प्रदीप पटेल और रामपुर बघेलान से जीते विक्रम सिंह को मौका मिल सकता है। इस अंचल के राजेंद्र शुक्ला पहले ही उप मुख्यमंत्री बन चुके हैं। महाकौशल से बनाए जा सकते हैं 5 मंत्रीमहाकौशल अंचल में भाजपा को इस बार 38 में से 21 सीटें मिली हैं। यह कमलनाथ का भी इलाका है। इसलिए यहां से 5 मंत्री बनाए जा सकते हें। इनमें बहोरीबंद के प्रणव पांडे, नरसिंहपुर के प्रहलाद पटेल और बैतूल के हेमंत खंडेलवाल को मौका मिल सकता है। इनके अलावा जबलपुर के राकेश सिंह और गाडरवारा के उदयप्रताप सिंह में से किसी एक को मौका मिल सकता है। ये दोनों पूर्व सांसद हैं। इसी प्रकार शहपुरा के ओम प्रकाश धुर्वे और मंडला की संपतिया उइके में से किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता है। मालवा-निमाड़ से बन सकते सर्वाधिक मंत्रीमालवा- निमाड़ अंचल में सर्वाधिक 66 सीटें हैं। भाजपा ने इनमें से 48 सीटें जीती हैं। इसलिए यहां से सर्वाधिक मंत्री बनाए जा सकते हैं। इंदौर से तुलसीराम सिलावट के अलावा कैलाश विजयवर्गीय और रमेश मैंदोला में से किसी एक काे मंत्री बनाया जा सकता है। इनके अलावा सज्जन सिंह वर्मा को हराने वाले राजेश सोनकर, दीपक जोशी को हराने वाले आशीष शर्मा, हरसूद के विजय शाह, नेपानगर की मंजू राजेंद्र दादू मंत्री बन सकते हैं। भोपाल के आसपास भी कम दावेदार नहींप्रदेश के मध्य अंचल अर्थात भोपाल के आसपास मंत्री पद के दावेदारों की संख्या कम नहीं है। इस बार रामेश्वर शर्मा, विश्वास सारंग, कृष्णा गौर, विष्णु खत्री में से दो मंत्री बन सकते हैं। रायसेन जिले में प्रभुराम चौधरी और सुरेंद्र पटवा में से किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता है। इनके अलावा सीहोर के सुदेश राय और खिलचीपुर में पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह को हराने वाले हजारीलाल दांगी मंत्री बनाए जा सकते हैं। संभावित मंत्रियों की यह सूची सूत्रों पर आधारित है क्योंकि नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी क्या करेगी, कोई नहीं जानता।

भाजपा: अचर्चित चेहरों के हाथ कमान सौंपने में जोखिम मे नि:संदेह.

BJP: Taking the risk in entrusting key responsibilities to lesser-known faces without hesitation. उदित नारायण इन अप्रत्याशित फैसलों के भीतर कई राजनीतिक संदेश छुपे हैं, जो भाजपा के स्वयंभू नेताओं के लिए तो हैं ही, उन विपक्षी नेताओं के लिए भी हैं, जो मात्र सीट बंटवारे और वोटों के कागजी गणित के भरोसे आगामी लोकसभा चुनाव में मोदी को पटखनी देने का अरमान पाले हुए हैं। भारतीय जनता पार्टी और उसके शीर्ष नेतृत्व ने हिंदी भाषी तीन राज्यों में भारी जीत के बाद जिन अचर्चित चेहरों के हाथों में सत्ता की कमान सौंपी है, उससे ‘चौंकना’ शब्द भी फीका लगने लगा है। यह कुछ वैसा ही था कि कोई जादूगर अपनी जेब में हाथ डाले और नोट किसी भीड़ में छिपे शख्स की जेब से निकले।मोदी- शाह ने मीडिया के तमाम अटकलों को बेकार साबित कर दिया है। लेकिन इन अप्रत्याशित फैसलों के भीतर कई राजनीतिक संदेश छुपे हैं, जो भाजपा के स्वयंभू नेताओं के लिए तो हैं ही, उन विपक्षी नेताओं के लिए भी हैं, जो मात्र सीट बंटवारे और वोटों के कागजी गणित के भरोसे आगामी लोकसभा चुनाव में मोदी को पटखनी देने का अरमान पाले हुए हैं। विधानसभा चुनावों में भाजपा के जीते हुए मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ राज्यों में ‘कौन बनेगा मुख्यमंत्री’ की रेस असली हार्स रेस से भी ज्यादा रोमांचक होने लगी थी। दावेदारी और राजयोग में अदृश्य मुकाबला चल रहा था। मीडिया की आंखें और राजनीतिक भविष्यवाणियां उन्हीं चंद चेहरों के आसपास मंडरा रही थीं, जिन्हें परंपरागत रूप से कुर्सी की दौड़ में प्रथम पंक्ति में माना जाता रहा था। ऐसे कुछ नाम जो सीएम या फिर वो भी नहीं तो कम से कम डिप्टी सीएम पद की शपथ लेने के लिए नए सूट सिलवा चुके थे। लेकिन हाय री किस्मत!भाजपा आलाकमान ने इन फैसलों से छह संदेश दिए हैं। पहला तो कोई खुद को पार्टी से ऊपर न समझे, दूसरा भाजपा में संघ अभी भी पूरी तरह ताकतवर है, तीसरा भाजपा में कोई साधारण कार्यकर्ता भी शीर्ष पद तक पहुंच सकता है, चौथा भाजपा ने आने वाले 15 साल तक राजनीति करने वाले नए खून की फौज तैयार कर दी है, पांचवां सोशल इंजीनियरिंग में भाजपा सभी राजनीतिक दलो से मीलों आगे है और छठा, इस बदलाव के जरिए भाजपा ने आगामी लोकसभा चुनाव की जमीन भी तैयार कर दी है और तकरीबन मुद्दे भी तय कर दिए हैं। मप्र में डा. मोहन यादव, छग में विष्णुदेव साय और राजस्थान में भजनलाल शर्मा बाकी दुनिया के लिए भले ही अचर्चित चेहरे रहे हों, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा को उनकी कार्यक्षमता पर भरोसा है। अब यह इन तीनो पर है कि मिले हुए अवसर को कामयाबी में वो कितना बदल पाते हैं। खुद को कितना साबित कर पाते हैं। हालांकि यह जोखिम तो हर उस प्रयोग में रहता है, जो राजनीति की प्रयोगशाला में पहली बार किया जाता है। मप्र में जब पहली बार शिवराज को मुख्यमंत्री पद की कमान सौंपी गई थी तब कई लोगों ने उनकी नेतृत्व क्षमता और देसी छवि पर तंज कसा था, लेकिन वक्त के साथ शिवराज ने खुद को न सिर्फ साबित किया बल्कि अपरिहार्य बन गए। उन्होंने अपनी राजनीति की नई इबारत लिखी। इमोशनल पॉलिटिक्स का नया सिलेबस तय किया और पूरे 18 साल तक सीएम पद पर जमे रहे।हालांकि, पहली पारी के सीएम शिवराज और चौथी पारी के सीएम शिवराज में काफी अंतर था । उनका अपना आभा मंडल और काकस तैयार हो गया था। इस दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को भी यथासंभव किनारे लगाया और शायद इसकी इंतिहा हो चुकी थी। यही स्थिति राजस्थान में वसुंधरा राजे की थी। राजे तो पहले से राज परिवार से हैं। लिहाजा कुर्सी पर विराजना उनके लिए नैसर्गिक अधिकार था। उन्होंने खुद को पार्टी और राज्य का भाग्य विधाता मान लिया था। अलबत्ता छग के 15 साल सीएम रहे और बाद में भाजपा में ही हाशिए पर डाल दिए गए डॉ रमनसिंह ने खुली बगावत के रास्ते पर जाने से खुद को बचाया और कुछ बेहतर पाने की आस जिंदा रखी।कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा में इस तरह क्षत्रप संस्कृति को समाप्त पर ‘ एक हाईकमान कल्चर’ को लागू कर भाजपा ने बहुत बड़ा जोखिम लिया है, जो भविष्य में आत्मघाती भी हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चेहरे पर ही पार्टी का पूरी तरह आश्रित हो जाना संगठन की आंतरिक कमजोरी को दर्शाता है। यानी जब मोदी भी नहीं रहेंगे, तब क्या होगा? इसके अलावा इन तीन राज्यों में बिल्कुल ताजा चेहरों की ताजपोशी के साथ राजनीतिक और जातीय समीकरण भी साधने की कोशिश है। छग में आदिवासी चेहरे विष्णुदेव साय को सीएम बनाकर समूचे आदिवासी समुदाय को यह संदेश दिया गया है कि आदिवासी भी हिंदू ही हैं और वो हमारे लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं। इसी तरह मप्र में बिल्कुल अप्रत्याशित चेहरे डॉ. मोहन यादव को सीएम बनाकर यूपी और बिहार के यादवों को भी संदेश दिया गया है कि वो क्षेत्रीय पार्टियों के मोह से उबरें और भाजपा से जुड़ें। मप्र और राजस्थान में दलित डिप्टी सीएम बनाकर बहनजी मायावती और उनकी पार्टी के समर्थकों को संदेश है कि भाजपा में दलितों के लिए भी पूरी जगह है। दिलचस्प बात यह है कि विस चुनाव के दौरान तीनों राज्यों में कांग्रेस पूरे समय ओबीसी जातिजनगणना का मुद्दा उठाती रही, लेकिन जिस तेलंगाना में वह स्पष्ट बहुमत के साथ चुनाव जीती, वहां उसने किसी ओबीसी के बजाए रेवंत रेड्डी के रूप में एक अगड़े को ही मुख्यमंत्री बनाया। 26 विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की आगामी बैठक 19 दिसंबर को होनी है। उसमें लोकसभा सीटों के बंटवारे के किसी फार्मूले पर बात होती है या नहीं, यह देखने की बात है। लेकिन हो भी गया तो थके चेहरों और सतही जोश से लोकसभा चुनाव की जंग कैसे जीती जाएगी, यह देखने की बात है। बहरहाल चुनाव रणविजय शास्त्र की क्लास में भाजपा से कुछ तो सबक लेने ही चाहिए।

शपथ के दौरान स्टेडियम के बाहर Shivraj के चाहने वालों ने काफिला रोका, मामा मामा के नारे लगाए.

During the swearing-in ceremony, supporters of Shivraj outside the stadium stopped the procession, chanting slogans in favor of Mama (referring to Shivraj Singh Chouhan).

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