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सिंहस्थ में प्रदेश भर से पुलिसकर्मियों की की जाएगी तैनाती, पहले से ही 26 हजार बल कम

भोपाल वर्ष 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ में सुरक्षा के लिए पुलिस मुख्यालय ने तैयारी प्रारंभ कर दी है। यहां 25 हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे, लेकिन इसके साथ बड़ी चुनौती भी है। प्रदेश में पहले से ही पुलिस में आरक्षक से उप पुलिस अधीक्षक स्तर तक के 26 हजार पद रिक्त हैं। ऐसे में सिंहस्थ के दौरान प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति को कैसे संभालेंगे, इस पर भी मंथन किया जा रहा है। इसके लिए आने वाले वर्षों में प्रतिवर्ष आरक्षकों की भर्ती करने की तैयारी है। हालांकि, सिंहस्थ की दृष्टि से भर्ती के लिए वर्ष 2025 और 2026 का ही समय बचा है। कारण, 2027 में भर्ती शुरू होने के बाद भी यह पुलिसकर्मी नहीं मिल पाएंगे। वर्ष 2025 में लगभग सात हजार पदों के लिए पुलिस मुख्यालय ने भर्ती की तैयारी प्रारंभ कर दी है। लगभग इतने ही पदों पर भर्ती वर्ष 2026 में करने पर विचार चल रहा है।     बता दें कि प्रदेश में एक लाख 26 हजार स्वीकृत पुलिस बल है।     यह आवश्यकता से आधा भी नहीं है। इसमें भी 26 हजार रिक्त हैं।     प्रतिवर्ष तीन हजार पुलिसकर्मी सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जबकि प्रतिवर्ष भर्ती नहीं हो रही है।     इस कारण इतने पद रिक्त हैं।  

सहायक प्राध्यापक भर्ती प्रक्रिया के तीसरे चरण की परीक्षा अगले सप्ताह इंदौर में

 इंदौर सहायक प्राध्यापक भर्ती प्रक्रिया के तीसरे चरण की परीक्षा अगले सप्ताह आयोजित की जाएगी। बीस विषयों के 109 पदों के लिए मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) ने 17 नवंबर को परीक्षा रखी है। इसमें प्रदेश भर से 3000 से ज्यादा अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। आयोग ने सिर्फ इंदौर में ही परीक्षा केंद्र बनाए हैं। आठ केंद्रों पर परीक्षा होगी। अभ्यर्थी प्रवेश पत्र 16 नवंबर तक डाउनलोड कर सकते हैं। आयोग ने परीक्षा से जुड़ी गाइडलाइन जारी कर दी है। केंद्रों पर अभ्यर्थियों को एक घंटा पहले पहुंचना होगा। 17 नवंबर को आठ से अधिक केंद्रों पर परीक्षा रखी गई है। 20 विषयों में 109 पदों पर भर्ती आयोग के अनुसार जीव रसायन, आर्गेनिक रसायन, भौतिक रसायन, नृत्य, पर्यावरण, भूगर्भ शास्त्र, मराठी, सैन्य विज्ञान, संगीत, संगीत वाद्य, संगीत गायन, चित्रकला , दर्शन शास्त्र, मनोविज्ञान, संस्कृत, संस्कृत व्याकरण, संस्कृत साहित्य, सांख्यिकी , उर्दू, वेद सहित 20 विषयों में 109 पद हैं। अधिकांश विषयों में दो से पांच पद रिक्त हैं। अभ्यर्थियों को दो पेपर देना होंगे। तीन हजार अभ्यर्थी आयोग के ओएसडी रवींद्र पंचभाई का कहना है कि तीन हजार अभ्यर्थियों के लिए इंदौर में ही केंद्र बनाए हैं। एक ही सत्र में परीक्षा होगी।दूसरे चरण का परिणाम अंतिम सप्ताह मेंसहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा तीन चरण में करवाना तय हुआ था। 36 विषयों में 1679 पद रिक्त हैं। पहले चरण आठ विषय के रिजल्ट आ चुके हैं। अब चार अगस्त को हुई दूसरे चरण की परीक्षा के परिणाम का इंतजार किया जा रहा है। इसमें रसायन शास्त्र, अर्थशास्त्र, भूगोल, विधि, भौतिक शास्त्र, राजनीति शास्त्र, समाज शास्त्र, प्राणीशास्त्र विषय में 744 पद रखे थे। अभी तक चार विषय की माडल आंसर की आ चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक दूसरे चरण का परिणाम नवंबर के अंतिम सप्ताह तक जारी होगा। हालांकि अभी तक सहायक प्राध्यापक में चयनित उम्मीदवारों के साक्षात्कार को लेकर तारीख नहीं तय हुई है।

विजयपुर उपचुनाव में पुलिस कस्टडी में BJP-कांग्रेस प्रत्याशी

विजयपुर  मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले की विजयपुर विधानसभा सीट पर बुधवार सुबह 7 बजे से मतदान शुरु हो चुका है। यहां सुबह 9 बजे तक 17.86 फीसदी वोट डाले जा चुके हैं। इसी कड़ी में भाजपा प्रत्याशी रामनिवास रावत ने अपने गांव सुनवई में वोट डाला, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश मल्होत्रा को पुलिस कस्टडी में अपने गांव के मतदान केंद्र पर वोट डालना पड़ा। बताया जा रहा है कि कांग्रेस प्रत्याशी को नजर बंद किया गया है। बता दें कि, श्योपुर पुलिस ने कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश मल्होत्रा को नजर बंद कर दिया है। हालांकि, पुलिस की ओर से अबतक इस संबंध में कोई अधिकृत बयान सामने नहीं आया है कि आखिर कांग्रेस प्रत्याशी को पुलिस कस्टडी में क्यों रखा गया है। लूत्रों की मानें तो क्षेत्र में बढ़ रहे तनाव को मद्देनजर रखते हुए ये फैसला लिया गया है। वहीं कांग्रेसियों में इससे आक्रोश देखने को मिल रहा है। उनका कहना है कि अगर स्थिति इतनी ही तनावपूर्ण है तो कांग्रेस प्रत्याशी के साथ भाजपा प्रत्याशी को भी नजरबंद किया जाना चाहिए। ये आयोग का दोहरा चरित्र दर्शाता है। वहीं, दूसरी ओर अंधूपुरा पोलिंग बूथ कुछ मतदाताओं द्वारा शिकायत भी की गई है कि उन्हें मतदान नहीं करने दिया जा रहा। रामनिवास रावत के गृह ग्राम में झड़प भाजपा प्रत्याशी रामनिवास रावत के गृह गांव सुनवई में सुरक्षा कर्मियों और ग्रामीणों के बीच झड़प हो गई। पोलिंग बूथ पर कुछ युवक घुसकर जबरन वोट डालने का प्रयास करने लगे। सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान उनकी झड़प युवकों समेत ग्रामीणों से हो गई। इससे गांव में तनाव पैदा हो गया। सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस और प्रशासन के अफसर भी पहुंचे। शाम 6 बजे तक चलेगा मतदान भाजपा व कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन चुकी विजयपुर विधानसभा सीट के लिए बुधवार सुबह 7 बजे से मतदान चल रहा है। हालांकि, शुरुआत में पोलिंग बूथों पर मतदाताओं की कमी देखने को मिली, लेकिन 8 बजे के बाद से मतदाताओं की संख्या में बढ़ोतरी होने लगी। विजयपुर सीट के सभी पोलिंग बूथों पर सुबह 9 बजे तक औसत 17.86 फीसदी वोट डाले जा चुके हैं। इनमें पुरुष मतदाताओं का फीसद 17.47 रहा, जबकि महिला मतदाताओं का फीसद 18.29 है। बता दें कि, शाम 6 बजे तक मतदाता वोटिंग के लिए अपने मतदान केंद्र पहुंच सकते हैं। विजयपुर में पुलिस अलर्ट  विजयपुर विधानसभा सीट के कई मतदान केंद्रों को पुलिस ने अतिसंवेदनशील घोषित किया है, क्योंकि यहां पर बूथ केप्चरिंग की आशंका जताई जा रही है. ऐसे में पुलिस यहां पूरी तरह से अलर्ट नजर आ रही है. कई पोलिंग बूथों से मतदाताओं को मतदान करने से रोकने का आरोप भी लगा है. हालांकि पुलिस ने अब तक सभी जगह आराम से मतदान होने की बात कही है. वहीं इस बीच बीजेपी और कांग्रेस के कार्यकर्ता भी हर एक पोलिंग बूथ पर जमे हुए हैं.  विजयपुर में बीजेपी कांग्रेस में कड़ी टक्कर  दरअसल, विजयपुर विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में बीजेपी और कांग्रेस में कड़ी टक्कर दिख रही है. विजयपुर विधानसभा सीट पर 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली थी, लेकिन कांग्रेस रामनिवास रावत कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए, जिससे यहां उपचुनाव हो रहा है. रामनिवास रावत बीजेपी की तरफ से चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि कांग्रेस ने मुकेश मल्होत्रा को प्रत्याशी बनाया है. मुकेश मल्होत्रा ने 2023 का चुनाव निर्दलीय लड़ा था, लेकिन इस बार कांग्रेस ने उन्हें प्रत्याशी बनाया है. 

पूर्व भाजपा विधायक मानेकर को मिली महाराष्ट्र चुनाव में अमरावती जिला की दरियापुर विधानसभा क्षेत्र की जवाबदारी

Former BJP MLA Manekar got the responsibility of Dariyapur assembly constituency of Amravati district in Maharashtra elections. हरिप्रसाद गोहेआमला। आगमी दिनों में महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होना है ऐसे में भाजपा प्रदेश संगठन द्वारा जिले से भी कार्यकर्ताओं और भाजपा पूर्व विधायकों को महाराष्ट्र चुनाव की जवाबदेही दी है। गौरतलब हो की आमला पूर्व विधायक चैतराम मानेकर को पार्टी द्वारा अमरावती जिला की दरियापुर विधानसभा क्षेत्र की जवाबदारी पार्टी द्वारा दी गई है।जो दरियापुर विधानसभा क्षेत्र में पहुंच भाजपा प्रत्याशी एवं पार्टी के लिए कार्य कर प्रत्याशी के समर्थन में डोर टू डोर जनसंपर्क करेंगे । आमला पूर्व विधायक चैतराम मानेकर से प्राप्त जानकारी अनुसार उन्होंने हमारे प्रतिनिधि से चर्चा के दौरान बताया मुझे पार्टी संगठन से महाराष्ट्र चुनाव में अमरावती जिले की दरियापुर विधानसभा क्षेत्र की जवाबदारी दी है जिसके पालनार्थ में आज बुधवार दिनांक 13/11/2024 को महाराष्ट्र चुनाव के लिए रवाना हो गया हु। मेरे द्वारा अमरावती जिला के दरियापुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी एवं पार्टी के समर्थन में प्रचार प्रसार किया जायेगा ।

लाखों बेटियों को बालिका वधू बनने से बचा रही मुख्यमंत्री लाडली लक्ष्मी योजना

भोपाल मध्यप्रदेश में बाल विवाह (Child Marriage) रोकथाम के लिये कई महत्वपूर्ण कदम उठाये गये हैं. इसमें मुख्यमंत्री लाडली लक्ष्मी योजना (Ladli Laxmi Yojana) की अहम भूमिका है. इस योजना का प्रभाव यह है कि समाज में बेटियों के प्रति नज़रिया बदल रहा है. लोग अब अपनी बेटियों की शिक्षा और कल्याण को प्राथमिकता देने लगे हैं. यह बाल विवाह को रोकने के लिये एक सकारात्मक कदम साबित हो रहा है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार वर्ष 2019-21 में मध्यप्रदेश में 20 से 24 वर्ष की महिलाओं में से 18 वर्ष से पहले विवाह की दर 23.1 प्रतिशत थी. यह दर पिछले वर्ष की तुलना में कम हुई है. NFHS-4 में वर्ष 2015-16 के दौरान यह दर 32.4 प्रतिशत थी. लाडली लक्ष्मी योजना से आए ये सकारात्मक बदलाव लाडली लक्ष्मी जैसी योजनाओं के कारण बालिकाओं का स्कूल में अधिक समय तक रहना संभव हुआ है. देर से विवाह के कारण माध्यमिक शिक्षा में नामांकन में वृद्धि हुई है. विवाह और मातृत्व में देरी से, किशोर गर्भावस्था के जोखिमों में कमी आयी है, जो राज्य में मातृ और शिशु स्वास्थ्य में सुधार लाने में सहायक है. प्रदेश में बाल विवाह न हो, इसके लिये योजना में प्रारंभ से ही यह प्रावधान है कि बालिका के 21 वर्ष पूर्ण होने पर दिया जाने वाला लाभ उस स्थिति में देय होगा, जब बालिका का विवाह 18 वर्ष से पहले न हुआ हो. मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना प्रारंभ करने का मुख्य उद्देश्य लिंगानुपात में सुधार, बाल विवाह की रोकथाम, बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन और बालिकाओं के प्रति समाज के व्यवहार में परिवर्तन को प्रोत्साहित करना था. योजना में बालिकाओं की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिये छात्रवृत्ति के रूप में कक्षा-6वीं में 2 हजार रुपये, कक्षा-9वीं में 4 हजार, कक्षा-11वीं एवं 12वीं में 6-6 हजार की आर्थिक सहायता का प्रावधान है. बालिकाओं की उच्च शिक्षा सुनिश्चित हो सके, इसके लिये 12वीं कक्षा के बाद व्यावसायिक एवं स्नातक पाठ्यक्रम में शिक्षा प्राप्त करने के लिये 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दिये जाने का प्रावधान है.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में विद्यार्थियों के 21वीं शताब्दी के कौशल उन्नयन पर जोर दिया

भोपाल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में विद्यार्थियों के 21वीं शताब्दी के कौशल उन्नयन पर जोर दिया गया है। इसके लिये प्रदेश के सरकारी हाई स्कूल और हायर सेकेण्ड्री स्कूलों में प्रति सप्ताह शनिवार को बाल सभा में कन्टीन्यूअस एण्ड कम्प्रेंसिव लर्निंग एण्ड एवोल्युशन (सीसीएलई) प्रोग्राम को समाहित किया गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थी आनंदमयी वातावरण में शिक्षा प्राप्त कर सक्रिय नागरिक के रूप में राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निवर्हन कर सकें। सीसीएलई कार्यक्रम में स्कूलों में सतत् और व्यापक शिक्षा के माध्यम से पूरे वर्ष विभिन्न सह शैक्षिक और सह पाठ्यक्रम पर केन्द्रित कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। पिछले वर्ष स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेशभर के 600 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया। मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित शिक्षकों ने प्रत्येक जिले में चयनित 2 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रकार प्रदेश में करीब 14 हजार 250 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया। विद्यार्थियों की गतिविधियों पर आंतरिक मूल्यांकन का अधिभार भी सुनिश्चित किया गया है। बालसभा कालखंड में शिक्षक और विद्यार्थी दोनों ही एक आनंदपूर्ण वातावरण में शिक्षण गतिविधियों में भाग ले रहे हैं। इससे विद्यार्थियों को सुनने, बोलने, पढ़ने एवं लिखने की योग्यताएं प्राप्त होती हैं। कौशल के अंतर्गत गतिविधियां बाल सभा कालखंड में विद्यार्थियों से निंबध लेखन, समाचार पत्र लेखन, कहानी, कविता, नाट्य लेखन और वार्षिक पत्रिका का निर्माण कराया जा रहा है। इसके साथ ही वाद-विवाद, कहानी, कविता वाचन, साक्षात्कार अभ्यास, तार्किक क्षमता, आकृति परीक्षण, संगीत, नृत्य, चित्रकला, क्रॉफ्ट, मूर्तिकला जैसी गतिविधियां प्रमुखता से कराई जा रही हैं। इन गतिविधियों में शामिल विद्यार्थियों को उनकी उपस्थिति के आधार पर अंक भी दिये जाने का प्रावधान भी रखा गया है। वर्ष के कैलेण्डर के अनुसार, जो विषय तय किये गये हैं, उनमें स्वास्थ्य, ट्रेफिक नियम, स्वस्थ दिनचर्या, योग, खेल एवं आहार प्रमुख हैं। इसी के साथ गौरवमयी भारत विषय में भारतीय इतिहास, महान विभुतियों के ग्रंथ, भारत के स्वतंत्रता संग्राम को शामिल किया गया है। प्रखर भारत थीम में भारतीय विज्ञान, पर्यावरण, आपदा प्रबंधन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को शामिल किया गया है। विद्यार्थियों को बाल सभा में संविधान के प्रावधान, संसदीय प्रणाली, राष्ट्रीय प्रतीक, पंचायती राज और नागरिकों के संवैधानिक अधिकार के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी जा रही है।  

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सुशासन के लिए संकल्पबद्ध मध्यप्रदेश सरकार ने प्रशासन को जनोन्मुखी बनाया

भोपाल नागरिकों को अधिसूचित सेवाएँ प्रदाय करने की कानूनी गारंटी देने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है। प्रदेश में 25 सितम्बर 2010 से लोक सेवाओं के प्रदाय की गारंटी अधिनियम प्रभावशील है। वर्तमान में अधिनियम अंतर्गत 748 सेवाएँ अधिसूचित की जा चूंकि है। इन सेवाओं में लोक सेवा केन्द्रों के माध्यम से नागरिकों के लिए 342 सेवाएँ ऑनलाईन प्रदाय की जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सुशासन के लिए संकल्पबद्ध मध्यप्रदेश सरकार ने प्रशासन को जनोन्मुखी बनाया हैं। नागरिकों की सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए समाधान एक दिन तत्काल सेवा, सीएम हेल्पलाईन 181 कॉल सेन्टर, महिला हेल्पलाईन, सीएम जन सेवा, दिव्यांग हेल्पलाईन आदि का क्रियान्वयन जनोन्मुखी प्रशासन के गवाही देते है। मध्यप्रदेश सरकार ने नागरिक अधिकारों को सशक्त बनाने और सेवा प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए सुशासन की दिशा में समय-समय पर अनेक कदम उठाएँ है। मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदाय की गारंटी अधिनियम 2010 के बेहतर क्रियान्वयन के लिए पृथक से लोक सेवा प्रबंधन विभाग का गठन किया गया। वर्ष 2013 में राज्य लोक सेवा अभिकरण की स्थापना की गई। राज्य लोक सेवा अभिकरण में लोक सेवा प्रदाय गारंटी अधिनियम के क्रियान्वयन के साथ-साथ लोक सेवा केन्द्रों की स्थाना और संचालन का सीएम हेल्पलाईन कॉल सेंटर का संचालन और सीएम डेशबोर्ड का संचालन भी शामिल है। लोकसेवा केन्द्रों के माध्यम से नगारिकों को एक समयावधि में सेवाएँ प्रदाय करने के लिए सभी तहसीलों में 439 लोकसेवा केन्द्रों की स्थापना की गई है, जिनके माध्यम से विभिन्न विभागों की अधिसूचित सेवाएँ नागरिकों को प्रदाय की जा रही हो। अधिनियम के अंतर्गत विभाग की अधिसूचित सेवा “जाति प्रमाण पत्र प्रदाय” अभियान के तहत लोकसेवा केन्द्रों द्वारा प्रदेश भर के स्कूलों के छात्र-छात्राओं को जाति प्रमाण पत्र प्रदान करने का अभियान सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस अभियान में अब तक लगभग 1 करोड़ 40 लाख डिजिटल हस्ताक्षरित रंगीन प्रमाण-पत्र प्रदान किए जा चुके है। प्रदेश में लोकसेवा गारंटी अंतर्गत अधिसूचित समस्त सेवाओं में 10 करोड़ 62 लाख आवेदनों का अब तक निराकरण किया जा चुका है। लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2010 अंतर्गत सेवाओं की प्रदाय की गारंटी हैं। प्रत्येक सेवा को प्रदाय करने की एक समयावधि भी तय की गई है। इसमें समय पर सेवा नहीं देने पर जिम्मेदार अधिकारी पर जुर्माना लगाने का प्रावधान भी है। अधिकारी वर्ग प्रतिदिन 250 रूपये से लेकर अधिकतम 5000 हजार रूपये तक की जुर्माना राशि जमा करने का प्रावधान है। समाधान एक दिन तत्काल प्रदाय सेवा नागरिकों को केवल एक दिन की समयावधि में सेवा उपलब्ध कराने की मंशा से मध्यप्रदेश शासन ने फरवरी 2018 में “समाधान एक दिन तत्काल सेवा” व्यवस्था शुरू की। इस व्यवस्था में आवेदक द्वारा दोपहर पूर्व तक दिए गए आवेदन का निराकरण दोपहर पश्चात कर दिया जाता है। इस सेवा में डिजिटल हस्ताक्षरित प्रमाण पत्र व्हाटसअप, ई-मेल के माध्यम से भी आवेदकों को भेजे जा रहे है, जिससे आवेदक अपनी सुविधा अनुसार प्रमाण-पत्र समाधान एक दिन तत्काल सेवा व्यवस्था में अब तक दो करोड़ 63 लाख से अधिक आवेदन निराकृत किए गए है। समाधान एक दिन में दी जाने वाली 32 सेवाओं में आय प्रमाण-पत्र, स्थानीय निवासी प्रमाण-पत्र, ट्रेड लाइसेंस, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत सम्मिलित पात्र परिवारों को डुप्लीकेट पात्रता पर्ची जारी चालू खसरा, बी-1 खतौनी चालू नक्शा, खसरा की प्रतिलिपि (खाते के समस्त), अभिलेखागार प्रतिलिपि, राजस्व प्रकरण में आदेश की प्रतिलिपि, भू-अधिकार पुस्तिका का प्रथम बार प्रदाय, जिला स्तरीय रिकॉर्ड रूम से पारित आदेश/अंतरिम आदेश आदि की सत्यप्रतिलिपि इत्यादि कई सुविधाएँ प्रदान की जाती है। संयुक्त राष्ट्र संघ से मिली सराहना मध्यप्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम अपनी तरह का पहला विशेष अधिनियम है जो निर्धारित समय-सीमा में नागरिकों को सार्वजनिक सेवाओं के प्रदान की गारंटी देता है। इसे वर्ष 2012 में अधिनियम को यूएनपीएसए पुरूस्कार प्राप्त हुआ। “लोक सेवाओं के वितरण में सुधार वर्ग में इस अधिनियम को संयुक्त राष्ट्र का वर्ष 2012 को लोक सेवा पुरूस्कार भी प्राप्त हुआ है।  

MP में जनवरी से एक लाख पदों पर भर्ती, मुख्य सचिव अनुराग जैन ने विभागों से मांगी जानकारी

 भोपाल  प्रदेश में एक लाख सरकारी पदों पर भर्ती की प्रक्रिया जनवरी 2025 से प्रारंभ होगी। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने सभी मंत्रियों को स्वयं इस कार्य को देखने और समय सीमा के भीतर प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए कहा है तो मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सभी विभागों से रिक्त पदों की जानकारी मांगी है। प्रदेश में इस समय लगभग सात लाख नियमित कर्मचारी हैं। रिक्त पदों की पूर्ति नहीं होने के कारण विभाग आउटसोर्स या फिर संविदा कर्मचारियों से काम चला रहे हैं। इससे काम की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री ने रिक्त पदों को प्राथमिकता से भरने का निर्णय लिया है। रिक्त पदों की मांगी गई जानकारी मुख्य सचिव कार्यालय ने सभी विभागों को पत्र जारी कर 2024 में रिक्त पदों की जानकारी मांगी है। साथ ही यह भी पूछा है कि अगस्त 2022 तक किस श्रेणी के कितने पदों की भर्ती की गई। परिणाम इनके जारी हुए या नहीं और चयनित अभ्यर्थियों ने पदभार ग्रहण किया है या नहीं। 31 मार्च 2025 तक कितने पद किस संवर्ग के रिक्त हो जाएंगे।वित्त विभाग को प्रस्ताव भेजकर भर्ती के लिए कब स्वीकृति ली गई। लक्ष्य है कि साल 2025 के अंत तक नियुक्तियाँ प्रारंभ हो जाए रिपोर्ट के मुताबिक मुख्य सचिव ने सभी विभागों से यह जानकारी भी साझा करने को कहा है कि गत 31 मार्च 2024 तक कितने पद के संबद्ध के रिक्त हो जाएंगे और वित्त विभाग को प्रस्ताव भेज कर भर्ती के लिए कब स्वीकृति ली गई. मालूम हो, जनवरी से ही भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की प्लानिंग की गई है ,लक्ष्य है कि साल 2025 के अंत तक नियुक्तियाँ प्रारंभ हो जाए. उधर, भर्ती प्रक्रिया को लेकर मुख्य सचिव राज्य लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन मंडल के अधिकारियों के साथ बैठक भी कर चुके हैं। सूत्रों का कहना है कि सरकार जनवरी से भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ कर देगी और। लक्ष्य यह है कि वर्ष 2025 के अंत तक नियुक्तियां प्रारंभ हो जाएं। बजट 2025-26 में किया जाएगा प्रावधान इधर, जानकारी सामने आ रही है कि साल 2025-26 के बजट की प्रक्रिया भी शुरु हो गई है। इसमें कर्मचारियों के वेतन-भत्ते के लिए प्रावधान किया जाएगा। एक लाख पदों की भर्ती के हिसाब से बजट का प्रावधान रखा जाएगा।

मध्य प्रदेश विधानसभा उपचुनाव 2024: बुधनी और विजयपुर में आज मतदान, दोनों ही दलों ने झोंकी ताकत

बुधनी / विजयपुर मध्यप्रदेश के दो विधानसभा क्षेत्रों बुधनी और विजयपुर में हो रहे उपचुनाव के तहत कल मतदान होगा, जिसके लिए निर्वाचन आयोग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।मध्यप्रदेश मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की ओर से सोशल मीडिया पर दी गई जानकारी के अनुसार बुधनी विधानसभा उप निर्वाचन के लिए एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, बांसापुर से आज सुबह मतदान दलों को निर्वाचन सामग्री का वितरण किया गया। वहीं विजयपुर के लिए शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज श्योपुर से मतदान दलों को निर्वाचन सामग्री का वितरण हुआ। दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में कल सुबह सात बजे से शाम पांच बजे के बीच मतदान होगा। 23 नवंबर को मतों की गणना होगी। श्योपुर जिले की विजयपुर विधानसभा उपचुनाव में मतदान शुरू,  वहीं प्रशासन की ओर से मतदान के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 327 मतदान केंद्रों की होगी लाइव स्ट्रीमिंग इस बार सभी 327 मतदान केंद्र कैमरों की निगरानी में रहेंगे और वेबकास्टिंग के माध्यम से कंट्रोल कमांड सेंटर पर लाइव स्ट्रीमिंग होगी। वहीं क्रिटिकल मतदान केंद्रों पर सशस्त्र बल तैनात रहेगा, साथ ही सुरक्षा के लिए पूरे क्षेत्र में 2 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे। 327 केंद्रों पर 2 लाख 54 हजार मतदाता मतदान करेेगे। चुनाव की तैयारियों को लेकर सोमवार को कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी किशोर कुमार कन्याल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें प्रेक्षक संजीव गडकर और पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन भी मौजूद रहे। शांतिपूर्ण मतदान के लिए सभी व्यवस्थाएं पूरी-कलेक्टर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कलेक्टर कन्याल ने बताया कि विजयपुर विधानसभा में निर्विघ्न, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण मतदान के लिए सभी व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली गई है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन के दौरान विघ्न फैलाने वाले अराजक तत्वों पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने बताया कि विधानसभा में 164 मतदान केंद्र क्रिटिकल के रूप में चिन्हित किए गए हैं। क्रिटिकल सहित सभी केदं्रों की वेबकास्टिंग होगी। 8 मतदान केंद्र शेडो एरिया (मोबाइल नेटवर्क विहीन) में है, यहां वायरलेस सिस्टम लगाए गए हैं। मतदान केन्द्रों पर सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध सुनिश्चित किए गए हैं, किसी भी स्थिति में सेक्टर अधिकारी 15 मिनट से कम समय में मतदान केंद्र पर रेस्पोंड करेंगे। कुल 44 सेक्टर अधिकारी और 16 कार्यपालिक मजिस्ट्रेट बनाए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए तैनात होंगे 2 हजार जवान-एसपी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन ने बताया कि सभी मतदान केन्द्रों पर सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। चिन्हित मतदान केन्द्रों पर आम्र्ड फोर्स तैनात किया जाएगा। इसके लिए केंद्रीय सशस्त्र सुरक्षा बलों की 5 कंपनी, एसएएफ की 7 कंपनियां मिली है। वहीं जिला पुलिस बल के 650 जवान तैनात रहेंगे। अन्य जिलों से पुलिस के 250 जवान और होमगार्ड के 100 जवान मिले हैं। साथ ही 300 विशेष पुलिस अधिकारी भी नियुक्त किए जा रहे हैं। 47 सेक्टर पुलिस मोबाइल बनाई गई है, जो हर 5-6 मतदान केन्द्रों को कवर करेंगी। 27 क्यूआरटी टीमें भी मतदान दिवस पर तैनात रहेंगी। सुरक्षा व्यवस्था के लिए लगभग 2 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात होंगे। वहीं श्योपुर जिले के विजयपुर में मुख्य तौर पर भाजपा प्रत्याशी रामनिवास रावत और कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा चुनावी मैदान में हैं। इन दोनों समेत यहां से कुल 11 प्रत्याशी चुनावी समर में उतरे हैं। विजयपुर में मतदाताओं की संख्या दो लाख 54 हजार 817 है। दोनों विधानसभा क्षेत्रों पर कल शाम छह बजे चुनाव प्रचार थम गया, जिसके बाद अब प्रत्याशी केवल घर-घर जाकर संपर्क कर रहे हैं। प्रचार के अंतिम दिन बुधनी में जहां केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मोर्चा स्वयं संभाला, वहीं विजयपुर में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी भी लगातार मतदाताओं के बीच पहुंचने में जुटे रहे। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में विजयपुर सीट से कांग्रेस के रामनिवास रावत जीते थे। लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया। उन्हें इसके बाद राज्य में वन मंत्री बनाया गया। कुछ समय बाद उन्होंने विधानसभा से भी त्यागपत्र दे दिया। इसके बाद विजयपुर विधानसभा सीट खाली हो गई और यहां उपचुनाव कराना पड़ा। वहीं बुधनी से 2023 का विधानसभा चुनाव राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जीते थे। बाद में लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने उन्हें विदिशा से सांसद पद का टिकट दिया, जिस पर जीत हासिल करने के बाद उन्हें केंद्र में मंत्री बनाया गया। इसके चलते उन्होंने बुधनी विधानसभा से इस्तीफा दे दिया।

इंदौर संभाग में शामिल रहे जिलों को निमाड़ संभाग का तमगा मिलने वाला है, तैयारी तेज

भोपाल प्रदेश के मौजूदा 10 संभागों की संख्या में बढ़ोतरी की तैयारी तेज हो गई है। इस कवायद में प्रदेश के अंतिम छोर तक बसे जिलों को एक नई पहचान देने के प्रयास किए जा रहे हैं। मिर्ची, कपास और गन्ने की खेती के लिए प्रसिद्ध इस इलाके में बड़ी पर्वत शृंखला भी मौजूद है। अब तक इंदौर संभाग में शामिल रहे इन जिलों को निमाड़ संभाग का तमगा मिलने वाला है। प्रदेश में एक नया संभाग बढ़ाने की कवायद शुरू हो चुकी है। नए सिरे से किए जा रहे जिला सीमाओं के सीमांकन के दौरान अब निमाड़ को भी नया संभाग बनाने की तैयारी की जा रही है। जानकारी के मुताबिक, इस नए संभाग में खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर और बड़वानी जिलों को शामिल किया जाएगा। अब तक इंदौर संभाग में शामिल इन जिलों की संभागीय मुख्यालय से दूरी अधिक होने के चलते नया संभाग गठित किया जा रहा है। निमाड़ कई मामलों में प्रसिद्ध पश्चिम और दक्षिण क्षेत्रों में बंटे निमाड़ की जमीन बहुत उपजाऊ मानी जाती है। यह क्षेत्र खासकर कपास, गन्ना और मिर्च उत्पाद के लिए पूरे प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में ख्याति रखता है। इसके अलावा इस क्षेत्र की पर्वत शृंखला भी देशभर में पहचानी जाती है। पीथमपुर होगा इंदौर का धार जिले में शामिल लेकिन मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर स्थित पीथमपुर को अब नई पहचान इंदौर जिले का हिस्से का होने की मिलने वाली है। औद्योगिक क्षेत्र में मौजूद बड़ी फैक्ट्रियों का फायदा पिछड़े जिले धार को देने की शुरुआती मंशा रही, लेकिन रेलवे, वायुयान से लेकर शहरी सुविधाओं की वजह से कॉरपोरेट को हमेशा इंदौर ही पसंद रहा। इसके अलावा कर्मचारियों, अधिकारियों और मजदूरों को भी इंदौर से पीथमपुर आवाजाही आसान रही है, उसके चलते इस औद्योगिक क्षेत्र का फायदा अब तक धार की बजाए इंदौर को ही मिलता रहा है। नए बदलाव के दौरान अब पीथमपुर, इंदौर जिले का हिस्सा बन जाएगा। बुधनी और सांची की दिक्कतें दूर जिला मुख्यालय से दूरी के साथ मौजूद कुछ नगर अब पड़ोसी जिले में शामिल होने वाले हैं। कई किलोमीटर दूर सीहोर जिले में शामिल बुदनी अब नई व्यवस्था में नर्मदापुरम के साथ दिखाई देगा। इसी तरह सांची को भी रायसेन से हटाकर विदिशा जिले में शामिल किया जाएगा। गौरतलब है कि यह दोनों नगर अपनी मौजूदगी से महज चंद किलोमीटर दूर स्थित जिला मुख्यालय की बजाए दूरस्थ जिलों में शामिल हैं। जिसके चलते जरूरी कामों के लिए लोगों लंबी दूरी की यात्रा करना पड़ती है। बनेंगे नए जिले मप्र स्थापना के समय कुल 48 जिलों का साथ रखने वाले प्रदेश में अब कुल 55 जिले हो चुके हैं। अब नए सिरे से किए जा रहे सीमांकन के साथ इस संख्या में कुछ नए जिलों का समावेश होने वाला है। इनमें विदिशा जिले से कटकर सिरोंज नया जिला बनाया जाएगा। नर्मदापुरम में शामिल पिपरिया भी अब नया जिला बनने वाला है। इसी तरह सागर जिले में शामिल बीना भी नए जिले का आकार लेगा। बदलाव यह भी होंगे     सतना की चित्रकूट बनेगी नई तहसील।     बैतूल का मुलताई होगा पांढुर्णा में शामिल।     धार जिले का कुक्षी होगा बड़वानी जिले में शामिल।     जबलपुर संभाग का नरसिंहपुर होगा नर्मदापुरम में शामिल।     जबलपुर संभाग का डिंडोरी जिला होगा शहडोल में शामिल।  

सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिये आयोजित हो रही है बाल सभा

भोपाल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में विद्यार्थियों के 21वीं शताब्दी के कौशल उन्नयन पर जोर दिया गया है। इसके लिये प्रदेश के सरकारी हाई स्कूल और हायर सेकेण्ड्री स्कूलों में प्रति सप्ताह शनिवार को बाल सभा में कन्टीन्यूअस एण्ड कम्प्रेंसिव लर्निंग एण्ड एवोल्युशन (सीसीएलई) प्रोग्राम को समाहित किया गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थी आनंदमयी वातावरण में शिक्षा प्राप्त कर सक्रिय नागरिक के रूप में राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निवर्हन कर सकें। सीसीएलई कार्यक्रम में स्कूलों में सतत् और व्यापक शिक्षा के माध्यम से पूरे वर्ष विभिन्न सह शैक्षिक और सह पाठ्यक्रम पर केन्द्रित कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। पिछले वर्ष स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेशभर के 600 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया। मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित शिक्षकों ने प्रत्येक जिले में चयनित 2 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रकार प्रदेश में करीब 14 हजार 250 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया। विद्यार्थियों की गतिविधियों पर आंतरिक मूल्यांकन का अधिभार भी सुनिश्चित किया गया है। बालसभा कालखंड में शिक्षक और विद्यार्थी दोनों ही एक आनंदपूर्ण वातावरण में शिक्षण गतिविधियों में भाग ले रहे हैं। इससे विद्यार्थियों को सुनने, बोलने, पढ़ने एवं लिखने की योग्यताएं प्राप्त होती हैं। कौशल के अंतर्गत गतिविधियां बाल सभा कालखंड में विद्यार्थियों से निंबध लेखन, समाचार पत्र लेखन, कहानी, कविता, नाट्य लेखन और वार्षिक पत्रिका का निर्माण कराया जा रहा है। इसके साथ ही वाद-विवाद, कहानी, कविता वाचन, साक्षात्कार अभ्यास, तार्किक क्षमता, आकृति परीक्षण, संगीत, नृत्य, चित्रकला, क्रॉफ्ट, मूर्तिकला जैसी गतिविधियां प्रमुखता से कराई जा रही हैं। इन गतिविधियों में शामिल विद्यार्थियों को उनकी उपस्थिति के आधार पर अंक भी दिये जाने का प्रावधान भी रखा गया है। वर्ष के कैलेण्डर के अनुसार, जो विषय तय किये गये हैं, उनमें स्वास्थ्य, ट्रेफिक नियम, स्वस्थ दिनचर्या, योग, खेल एवं आहार प्रमुख हैं। इसी के साथ गौरवमयी भारत विषय में भारतीय इतिहास, महान विभुतियों के ग्रंथ, भारत के स्वतंत्रता संग्राम को शामिल किया गया है। प्रखर भारत थीम में भारतीय विज्ञान, पर्यावरण, आपदा प्रबंधन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को शामिल किया गया है। विद्यार्थियों को बाल सभा में संविधान के प्रावधान, संसदीय प्रणाली, राष्ट्रीय प्रतीक, पंचायती राज और नागरिकों के संवैधानिक अधिकार के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी जा रही है।  

म.प्र. मसाला फसलों के उत्पादन में देश में पहले स्थान पर, वर्ष 2023-24 में 54 लाख मीट्रिक टन उत्पादन

भोपाल मध्यप्रदेश मसाला फसलों का उत्पादन करने वाला देश का प्रथम राज्य बन गया है। वर्ष 2023-24 में प्रदेश के किसानों ने रिकार्ड 8 लाख 32 हजार 419 हैक्टयर में मसाला फसलों की बोनी कर, 54 लाख टन से अधिक मसाला फसलों का उत्पादन किया, जो एक रिकार्ड है। उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा किसान भाइयों को कृषि के साथ उद्यानिकी फसलों को भी अपनाने के लिये विशेष रूप से प्रेरित किया जा रहा है, इसके परिणाम स्वरूप गत वर्ष प्रदेश में 13 हजार 110 हैक्टेयर उद्यानिकों फसलों का विस्तार कर 42,730 किसानों को 44 करोड़ 85 लाख रूपये का अनुदान प्रदान किया गया है। बाजार में मसाला फसलों, हल्दी, लहुसन, हरी और लाल मिर्च, अदरक, धनिया, मैंथी, जीरा और सौंफ की फसलों की बढ़ती माँग से भी कृषक इनके उत्पादन के प्रति आकर्षित हो रहे है। विगत चार वर्षों में मसाला फसलों के उत्पादन में 2 लाख 16 हजार मैट्रिक टन की वृद्धि हुई है। मसाला फसलों के बुबाई रकबा भी बढ़ा है। वर्ष 2021-22 में 8 लाख 23 हजार 918 हैक्टेयर में बोनी की गई थी जो वर्ष 2023-24 में बढ़कर 8 लाख 82 हजार 419 हैक्टेयर हो गई है। परिणाम स्वरूप मसाला फसलों का वर्ष 2021-22 में कुल उत्पादन 46 लाख 74 हजार 807 मैट्रिक टन था, जो वर्ष 2023-24 में बढ़कर 54 लाख 167 मैट्रिक टन हो गया है। मसाला फसलों से अच्छी आय अर्जित कर रहे है किसान भाई इसका एक उदाहरण टीकमगढ़ जिले के ग्राम आलमपुरा के कृषक मोनू खान का हैं, जिन्होंने इस वर्ष 12 हैक्टेयर में शिमला मिर्च, टमाटर और हरी मिर्च की फसल लगाई है। कृषक खान का कहना है कि प्रतिदिन 30 से 35 क्विंटल शिमला मिर्च बाजार में बेच रहे है, जिससे उन्हें अच्छी खासी आमदनी हो रही है। इससे भी अधिक प्रेरणा दायक कहानी है खरगौन जिले के भीकनगांव ब्लॉक के कृषक राजेश कालड़ा की, जिन्होंने 12 एकड़ में केवल हरी मिर्च लगाई है, जिसकी तुड़ाई और सुखाने का काम अभी चल रहा है। श्री राजेश का कहना है कि मिर्च की फसल 4 माह में विक्रय योग्य हो जाती है। इस वर्ष उन्हें 30 से 35 लाख रूपये की आय संभावित है। मसाला फसल लेने वाले इस तरह के प्रगतिशील किसान भाईयों की सफलता का ही परिणाम है कि मध्यप्रदेश में किसानों का ध्यान परम्परागत खेती के साथ या स्थान पर उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे है। हरी मिर्च के उत्पादन में मध्यप्रदेश देश में द्वितीय स्थान रखता है। गत चार वर्षों में मिर्च के उत्पादन पर नजर डालें तो, वर्ष 2020-21 में 50,933 हैक्टेयर में हरी मिर्च की बौनी की गई थी। इसमें 8 लाख एक हजार 971 मीट्रिक टन मिर्च का उत्पादन हुआ था, वर्ष 2023-24 में मिर्च उत्पादन का रकबा बढ़कर 64 हजार 116 हैक्टेयर तथा उत्पादन 10 लाख 17 हजार 874 मीट्रिक टन हो गया है, जो प्रदेश में कुल मसाला उत्पादन क्षेत्र का लगभग 16 प्रतिशत रहा है।  

कुपोषण से मुक्ति के लिये झाबुआ में अभिनव पहल

भोपाल   प्रदेश सरकार कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। विभिन्न नवाचारों और प्रयासों से कुपोषण के खिलाफ पिछले 20 वर्षों में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में झाबुआ जिले मे कुपोषण से मुक्ति के लिये अभिनव पहल की गई है। कुपोषण मुक्त झाबुआ बनाने के लिये प्रोजेक्ट के तौर पर तीन माह में गंभीर तीव्र कुपोषण (एसएएम) से ग्रसित बच्चों को सामान्य पोषण स्तर पर लाने का लक्ष्य रखा गया है। कुपोषण मुक्ति के प्रोजेक्ट को आकर्षक और आसानी से समझने के उद्देश्य से 15 दिवस के स्वास्थ्य परीक्षण शिविर के दौरान “मोटी आई” यानि (स्वस्थ बच्चे की माता) की जोड़ी बना कर जागरूक किया जा रहा है। झाबुआ मे लगभग 2 शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें गंभीर तीव्र कुपोशित 1613 बच्चों का चिन्हांकन किया गया। प्रत्येक कुपोषित बच्चे की माता के साथ “मोटी आई” की जोड़ी बनाकर कुपोषण से लडने की समझाईश और जागरूकता के लिये काउंसलिंग की जाती है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन और शिशु रोग विशेषज्ञ की अनुशंसा के अनुरूप ‘विशेष लड्डू’ और ‘चिक्की’ को प्राथमिक तौर पर फोर्थ मील के रूप में बच्चों को दिया जा रहा है। जिले मे आयुष विभाग द्वारा कुपोषित बच्चों की मालिश कराये जाने का प्रशिक्षण आंगनवाड़ी सहायिका को दिया जाता है।  

इंदौर से कोलकाता के बीच 10 दिसंबर से शुरू होगी, नियमित शुरू होने से यात्रियों को सुबह की उड़ान का अतिरिक्त विकल्प मिलेगा

इंदौर इंदौर से कोलकाता के बीच 10 दिसंबर से सुबह की उड़ान शुरू होने वाली है। इंडिगो एयरलाइंस ने सीधी उड़ान की घोषणा करते हुए बुकिंग शुरू कर दी है। नियमित शुरू होने से यात्रियों को सुबह की उड़ान का अतिरिक्त विकल्प मिलेगा। अब तक इंडिगो एयरलाइंस द्वारा रात में सवा 8 बजे कोलकाता की उड़ान शुरू की जा रही थी। सुबह की उड़ान शुरू होने से यात्रियों को कनेक्टिंग उड़ान की सुविधा भी मिल सकेगी। देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से विमान कंपनियों द्वारा नई उड़ानों की घोषणा की गई है। 10 दिसंबर से इंडिगो एयरलाइंस द्वारा कोलकाता की उड़ान शुरू की जा रही है। यह सुबह 6.55 बजे कोलकाता से रवाना होकर 9.20 को इंदौर पहुंचेगी और वापसी में इंदौर से सुबह 10 बजे कोलकाता के लिए रवाना होगी। अभी रात में है एक फ्लाइट वर्तमान में इंडिगो कंपनी द्वारा रात में एक उड़ान का संचालन इंदौर-कोलकाता के बीच किया जा रहा है। यह कोलकाता से शाम 5.30 बजे रवाना होकर रात 7.55 बजे इंदौर पहुंचती है। वापसी में फ्लाइट इंदौर से रात 8.25 बजे कोलकाता के लिए रवाना होती है। ट्रैवल एजेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष हेमेंद्र सिंह जादौन ने बताया कि सुबह की उड़ान शुरू होने से कनेक्टिंग फ्लाइट पकड़ने वाले यात्रियों को फायदा होगा। वहीं, यात्रियों को कोलकाता जाने के लिए रात तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। एयर इंडिया एक्सप्रेस भी 15 दिसंबर से शुरू करेगी उड़ान इंदौर से कोलकाता के बीच एयर इंडिया एक्सप्रेस भी 15 दिसंबर से उड़ान शुरू करने जा रही है। कंपनी ने पहले ही घोषणा करते हुए बुकिंग शुरू कर दी है। आईएक्स 2643 फ्लाइट शाम 6.30 बजे कोलकाता से रवाना होकर रात 8.20 बजे इंदौर पहुंचेगी। वापसी में आईएक्स 2644 फ्लाइट रात 9.10 बजे इंदौर से रवाना होकर रात 11.20 बजे कोलकाता पहुंचेगी। इंदौर के यात्रियों को कोलकाता के लिए अब तक सिर्फ एक उड़ान की सुविधा मिल रही थी। ऐसे में कई बार यात्रियों को अधिक किराया चुकाना पड़ता था। अब दिसंबर से तीन उड़ानों की सुविधा मिलेगी। इसके बाद यात्रियों के पास कोलकाता के लिए अतिरक्त विकल्प उपलब्ध होगा। यह रहेगा उड़ान का शेड्यूल कोलकाता से इंदौर – फ्लाइट 6 ई 6378 कोलकता से सुबह 6.55 बजे रवाना होगी और 9.20 बजे इंदौर पहुंचेगी। इंदौर से कोलकाता – फ्लाइट 6 ई 6379 इंदौर से सुबह 10 बजे रवाना होगी और दोपहर 12.10 बजे कोलकाता पहुंचेगी।

संस्कार स्कूल के सामने सड़क पर गायों का झुंड बैठा हुआ था, टहलने गए रिटायर फौजी को गाय ने मारी सींग, मौत

भिंड सुबह टहलने निकले रिटायर फौजी को झुंड में बैठी गाय ने सींग मार दिया। स्वजन उपचार के लिए ग्वालियर ले गए, यहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। गोरमी के रहने वाले 43 वर्षीय लाखन सिंह परमार आर्मी से रिटायर थे। वह 10 नवंबर की सुबह छह बजे घर से टहलने के लिए निकले थे। संस्कार स्कूल के सामने सड़क पर गायों का झुंड बैठा हुआ था। जैसे ही परमार झुंड के बगल से निकले वैसे ही दो गाय ने सींग मार दिए। जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। स्वजन उपचार के लिए ग्वालियर ले गए। यहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। नगर में बाजार क्षेत्र सहित सकरी गलियों में बेसहारा पशुओं का घूमना लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। इनके आपस में झगड़ने के कारण कई बुजुर्ग-महिलाएं एवं बच्चे भी इनकी चपेट में आने के कारण चोटिल हो जाते हैं। कभी-कभार तो बच्चे इन बेसहारा पशुओं के आपसी झगड़े को देख काफी भयभीत हो जाते हैं। बाजार की सड़क पर बेसहारा मवेशी बैठे रहने की वजह से ट्रैफिक व्यवस्था तो बिगड़ती ही है। साथ ही हादसा होने की आशंका भी बनी रहती है। इस ओर नगर पालिका को ध्यान देना चाहिए।   मवेशियों को पकड़ने के लिए अभियान लोगों का कहना है कि नगर में बेसहारा टहलने वाले मवेशियों को पकड़ने के लिए नगर पालिका कोई अभियान भी नहीं चला रही है। इसके साथ ही बेसहारा मवेशी पकड़ने के लिए कोई वाहन और अमला भी नहीं है। वहीं अगर नपा मवेशी को पकड़ भी ले तो उन्हें रखने के लिए कांजी हाउस की व्यवस्था नहीं है।

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