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यूक्रेन को दी गई सैन्य मदद ऋण नहीं होगा, टैरिफ और ईरान के बाद एक और मोर्चे पर नरम पड़े डोनाल्ड ट्रंप

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक के बाद एक मोर्चे पर अपने रुख में बहलाव लाते हुए नरमी का परिचय दे रहे हैं। पहले उन्होंने रेसिप्रोकल टैरिफ पर 90 दिनों तक रोक लगा दी। इसके बाद उन्होंने ईरान पर भी नरमी बरतते हुए उसके परमाणु ठिकानों पर इजरायल के हमलों पर ब्रेक लगा दिया और अब उन्होंने युद्धग्रस्त यूक्रेन के मुद्दे पर नरमी दिखाई है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ट्रंप ने यूक्रेन के साथ होने वाले मिनरल्स डील में नरमी बरतते हुए इस बात पर अपनी सहमति दे दी है कि यूक्रेन को दी गई सैन्य मदद ऋण नहीं होगा। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि यूक्रेन-यूएस मिनरल्स डील के नवीनतम ड्राफ्ट पर बातचीत जारी है। इसमें ट्रम्प प्रशासन यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य सहायता को ऋण के रूप में नहीं मानने पर सहमत हो गया है। हालांकि, उस राशि को बिना ब्याज के चुकाना जरूरी होगा। बहरहाल, न तो अमेरिका और न ही यूक्रेनी अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है। इस बीच, यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने कहा है कि मिनरल्स डील की सराहना की है और कहा है कि मामले में अच्छी प्रगति हुई है। 4 फीसदी ब्याज की मांग नहीं बता दें कि इससे पहले अमेरिका और यूक्रेन के बीच जो मिनरल्स डील हो रही थी, उसमें ट्रंप ने यूक्रेन की ऊर्जा और अन्य प्राकृतिक संसाधनों पर पूर्ण नियंत्रण की बात कही थी और इसके अलावा अब तक की अमेरिकी सहायता के पुनर्भुगतान पर 4 फीसदी ब्याज की मांग की गई थी। हालांकि, यूक्रेन ने इन शर्तों का विरोध किया था और कहा था कि ये शर्तें हिंसक हैं, जो यूक्रेन को अमेरिकी उपनिवेश में तब्दील कर देगा। अमेरिका ने शर्तों में दी ढील, लेकिन बाधाएं बरकरार बातचीत से परिचित एक वरिष्ठ अधिकारी ने AFP को बताया कि अमेरिका-यूक्रेन खनिज सौदे के नए मसौदे में यूक्रेन को दी जाने वाली अमेरिकी सहायता को कर्ज के रूप में मान्यता नहीं दी गई है। हालांकि,इसे चुकाना होगा। रिपोर्ट के अनुसार, इस सौदे को अंतिम रूप देने में अभी भी कुछ बड़ी बाधाएं बनी हुई हैं क्योंकि पिछले ड्राफ्ट की ही तरह नए मसौदे में भी अमेरिका यूक्रेन को कोई सुरक्षा गांरटी नहीं देना चाह रहा है। ब्लूमबर्ग के अनुसार, ट्रम्प प्रशासन चाहता है कि यूक्रेन को अब तक दी गई सहायता, जो लगभग 90 अरब डॉलर है, को संयुक्त कोष में योगदान के रूप में माना जाए, जिसे यूक्रेन के प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के लिए बनाया जाएगा। इसका मतलब यह हुआ कि यूक्रेन को अधिकांश धनराशि इसी कोष में डालनी होगी। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंन्ट ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि इसी सप्ताह यूक्रेन संग खनिज डील पर दस्तखत हो जाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल में छात्रों की पढ़ाई बाधित नहीं हो इस वजह से उन्हें अपने पद पर बने रहने की इजाजत दी

कोलकाता सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले में अपनी नौकरी गंवाने वाले बेदाग सहायक शिक्षकों को अपने पद पर बने रहने की अनुमति दी है। देश की सर्वोच्च अदालत ने छात्रों की पढ़ाई बाधित नहीं हो इस वजह से उन्हें अपने पद पर बने रहने की इजाजत दी है। हालांकि, राज्य सरकार को कड़ी शर्तों के तहत 31 मई 2025 तक नई भर्ती की प्रक्रिया शुरू करनी होगी और 31 दिसंबर 2025 तक यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी। यह आदेश भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने बेदाग अध्यापकों द्वारा शैक्षणिक वर्ष के अंत तक या नई भर्ती प्रक्रिया पूरी होने तक सेवा में बने रहने के लिए दायर आवेदन पर पारित किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल कक्षा 9-10 और 11-12 के सहायक शिक्षकों पर लागू होगा। साथ ही यह भी कहा गया कि यह आदेश भविष्य में उन्हें कोई विशेष अधिकार नहीं देगा और नई नियुक्ति में उन्हें कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिलेगा। ममता सरकार को सख्त निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार के स्कूल सेवा आयोग (WBSSC) और प्राथमिक शिक्षा बोर्ड को निर्देश दिया है कि वे 31 मई तक नई भर्ती का विज्ञापन जारी करें और इसकी पुष्टि करते हुए हलफनामा कोर्ट में दाखिल करें। आपको बता दें कि 3 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने 2016 की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि यह प्रक्रिया घोटाले और हेराफेरी से पूरी तरह दूषित थी, जिसे सुधारना संभव नहीं है। कोर्ट ने सभी चयनित शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मियों को सेवा से हटाने का आदेश दिया था। इस मामले में सीबीआई ने पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी सहित कई तृणमूल नेताओं को गिरफ्तार किया था। जांच में यह भी पाया गया कि कई उम्मीदवारों ने खाली OMR शीट जमा की थी फिर भी उन्हें चयनित किया गया। कुछ उम्मीदवारों को योग्यता के आधार पर स्थान न मिलने के बावजूद ऊंची रैंकिंग दी गई।

मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में गर्मी के तेवर और तीखे होने की संभावना, रेवाड़ी में 42 डिग्री तक पहुंचा तापमान

रेवाड़ी मौसम में फिर तल्खी बढ़ने लगी है। बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस रहा। अप्रैल माह में अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तीसरी बार पहुंचा है। इससे पहले आठ व नौ अप्रैल को भी अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस रहा है। अप्रैल माह का पहला पखवाड़ा उतार चढ़ाव भरा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में गर्मी के तेवर और तीखे होने की संभावना है। बृहस्पतिवार को जिले में सुबह तेज धूप के बीच हल्की हवा चलने के बाद भी गर्मी से राहत नहीं मिल रही थी। अधिकतम तापमान 42 डिग्री पहुंचा वहीं, बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 42 तो न्यूनतम 24.5 डिग्री सेल्सियस रहा। बुधवार को अधिकतम 39.5 और न्यूनतम 22.5 डिग्री सेल्सियस था। गर्मी के चलते बाजार में ठंडे पेय और खाद्य पदार्थों की दुकानों पर लोग पहुंच रहे हैं। कहीं आइसक्रीम खाने में तो कोई नींबू पानी, गन्ने का रस और अन्य पेय पदार्थों का सेवन कर गर्मी से बचाव का प्रयास करते नजर आए। दोपहर के समय तेज धूप होने से लोग सिर पर तौलिया, टोपी पहने नजर आए। बताया गया कि पिछले दो दिनों से रेवाड़ी में गर्मी के तेवर तीखे बने हुए हैं। पंखा कूलर की हवा में ठंडक गायब है। घरों और प्रतिष्ठानों में एसी और पंखे कूलर लगातार चलने लगे हैं। इस माह का तुलनात्मक तापमान दिनांक इस साल पिछले साल अधिकतम/ न्यूनतम अधिकतम/ न्यूनतम 17 अप्रैल 42.0/24.5 36.0/21.5 16 अप्रैल 39.5/22.5 36.0/23.6 15 अप्रैल 37.5/22.0 37.0/23.0 14 अप्रैल 38.0/20.0 31.2/22.5 13 अप्रैल 36.5/20.5 38.5/20.5 12 अप्रैल 34.0/17.0 40.0/17.5 11 अप्रैल 37.0/22.5 39.5/17.6 10 अप्रैल 40.5/26.5 40.2/17.5 नौ अप्रैल 42.0/22.5 39.0/17.0 आठ अप्रैल 42.0/22.5 38.0/16.0 जिला प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी इन दिनों स्वास्थ्य विशेषज्ञों के पास ज्यादातर मरीज सिरदर्द, चक्कर आना, वायरल, खांसी आदि के साथ एलर्जी से संबंधित पहुंच रहे हैं। ऐसे में जिला प्रशासन की ओर से एडवाइजरी जारी की हुई है। नागरिक अस्पताल के फिजिशियन डा. गौरव यादव का कहना है कि गर्मी के मौसम में हवा के गर्म थपेड़ों और बढ़े हुए तापमान से लू (हीट वेव) लगने का खतरा बढ़ जाता है। धूप में घूमने वालों, खिलाड़ियों, बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को लू लगने का डर ज्यादा रहता है। लू लगने पर उसके इलाज से बेहतर है, हम लू से बचे रहें यानी बचाव इलाज से बेहतर है। गर्मी में हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहनें, अपना सिर ढककर रखें, कपड़े, हैट अथवा छतरी का उपयोग करें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं भले ही प्यास न लगी हो। ओआरएस (ओरल रीहाइड्रेशन सोल्यूशन), घर में बने पेय जैसे लस्सी, तोरानी (चावल का मांड), नींबू पानी, छाछ आदि का सेवन कर तरोताजा रहें। पार्किंग के समय बच्चों को वाहनों में छोड़कर न जाएं उन्हें लू लगने का खतरा हो सकता है। नंगे पांव बाहर न जाएं, गर्मी से राहत के लिए हाथ का पंखा अपने पास रखना चाहिए। गर्मी के मौसम में जंक फूड का सेवन नहीं करना चाहिए। ताजे फल, सलाद तथा घर में बना खाना खाना चाहिए।

न्यायाधीश के घर में पैसे मिले और FIR नहीं हुई लेकिन न्यायपालिका राष्ट्रपति पर सवाल उठा सकती हैःउपराष्ट्रपति धनखड़

नई दिल्ली 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार एक टिप्पणी के जरिए सलाह दी थी कि राष्ट्रपति को तीन महीने के भीतर राज्यपालों द्वारा भेजे गए लंबित विधेयकों पर फैसला ले लेना चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय की इस टिप्पणी पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने प्रतिक्रिया दी है और इस पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि भारत ने ऐसे लोकतंत्र की कल्पना नहीं की थी। उपराष्ट्रपति ने किसे कहा ‘सुपर संसद’? उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा, भारत ने ऐसे लोकतंत्र की कल्पना नहीं की थी, जहां न्यायाधीश कानून बनाएंगे, कार्यकारी कार्य करेंगे और ‘सुपर संसद’ के रूप में कार्य करेंगे। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने गुरुवार को न्यायपालिका की भूमिका, पारदर्शिता की कमी और हाल की घटनाओं को लेकर चिंता जताई. उन्होंने न्यायपालिका द्वारा कार्यपालिका और विधायिका के क्षेत्र में हस्तक्षेप को लेकर तीखे सवाल उठाए. हाल ही में एक जज के आवास पर हुई घटना, उन पर एफआईआर दर्ज न होने और राष्ट्रपति को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मद्देनजर ये सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि देश ने ऐसे लोकतंत्र की कल्पना नहीं की थी, जहां जज कानून बनाएंगे, कार्यपालिका का काम भी काम खुद ही करेंगे और सुपर संसद की तरह काम करेंगे. हाल ही में एक फैसले में राष्ट्रपति को निर्देश दिया गया है. आखिर हम कहां जा रहे हैं? देश में क्या हो रहा है? ये बातें उपराष्ट्रपति ने राज्यसभा के प्रशिक्षुओं के छठे बैच को उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में संबोधित करते हुए कहीं. उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमें बेहद संवेदनशील होना होगा. ये कोई समीक्षा दायर करने या न करने का सवाल नहीं है. राष्ट्रपति को समयबद्ध तरीके से फैसला करने के लिए कहा जा रहा है. अगर ऐसा नहीं होता है तो संबंधित विधेयक कानून बन जाता है. अनुच्छेद-142 न्यायपालिका के लिए न्यूक्लियर मिसाइल बन गया है. इसका उपयोग लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को दरकिनार करने के लिए किया जा रहा है. ये संविधान की आत्मा के खिलाफ है उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति को निर्देश देना संविधान की आत्मा के खिलाफ है. बता दें कि उपराष्ट्रपति ने ये बात सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर कही है जिसमें अदालत ने राष्ट्रपति और राज्यपालों के लिए बिलों को मंजूरी देने में 3 महीने का समय निर्धारित किया था. उन्होंने केशवानंद भारती केस में आए मूल ढांचे के सिद्धांत की सीमाओं का जिक्र करते हुए आपातकाल के दौरान सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की याद दिलाई और कहा कि तब मौलिक अधिकारों का हनन हुआ था, जबकि मूल ढांचा अस्तित्व में था. देश का कानून उन पर लागू नहीं होता राज्यसभा के प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे पास ऐसे जज हैं जो कानून बनाएंगे, जो कार्यपालिका का कार्य खुद संभालेंगे, जो सुपर संसद की तरह काम करेंगे और उनकी कोई जवाबदेही नहीं होगी, क्योंकि देश का कानून उन पर लागू नहीं होता. उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि ये सब देखना पड़ेगा. भारत में राष्ट्रपति का पद बहुत ऊंचा है और राष्ट्रपति संविधान की रक्षा, संरक्षण एवं बचाव की शपथ लेते हैं. जबकि मंत्री, उपराष्ट्रपति, सांसदों और जज सहित अन्य लोग संविधान का पालन करने की शपथ लेते हैं. क्या देरी को समझाया जा सकता है? उपराष्ट्रपति ने कहा, हम ऐसी स्थिति नहीं बना सकते जहां आप भारत के राष्ट्रपति को निर्देश दें और वह भी किस आधार पर? संविधान के तहत आपके पास एकमात्र अधिकार अनुच्छेद 145(3) के तहत संविधान की व्याख्या करना है. इसके लिए पांच या उससे अधिक न्यायाधीशों की आवश्यकता होती है. धनखड़ ने कहा, मैं हाल की घटनाओं का उदाहरण देना चाहूंगा. 14 और 15 मार्च की रात दिल्ली में एक जज के निवास पर एक घटना घटी. सात दिनों तक किसी को इसके बारे में पता नहीं चला. क्या देरी को समझाया जा सकता है? क्या इससे बुनियादी सवाल नहीं उठते? उन्होंने कहा, क्या ये मामला क्षमा योग्य है? क्या इससे कुछ बुनियादी सवाल नहीं उठते? एक लोकतांत्रिक देश में इसकी जांच की जरूरत है. इस समय कानून के तहत कोई जांच नहीं चल रही है क्योंकि आपराधिक जांच के लिए एफआईआर से शुरुआत होनी चाहिए. यह देश का कानून है कि अपराध की सूचना पुलिस को देना आवश्यक है. ऐसा न करना एक अपराध है. इसलिए आप सभी सोच रहे होंगे कि कोई एफआईआर क्यों नहीं हुई. इसका उत्तर सरल है. कानून से परे एक वर्ग को छूट कैसे मिली? उपराष्ट्रपति ने कहा, इस देश में किसी के भी खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा सकती है, किसी भी संवैधानिक पदाधिकारी के खिलाफ, चाहे वह आपके सामने मौजूद कोई भी हो. मगर, ये न्यायाधीश हैं, उनकी श्रेणी है, तो एफआईआर सीधे दर्ज नहीं की जा सकती. इसे न्यायपालिका में संबंधित लोगों द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिए, लेकिन संविधान में ऐसा नहीं दिया गया है. संविधान ने केवल राष्ट्रपति और राज्यपालों को ही अभियोजन से छूट दी है. फिर कानून से परे एक वर्ग को यह छूट कैसे मिली? इसके दुष्परिणाम सभी के मन में महसूस किए जा रहे हैं. धनखड़ ने कहा कि उनकी चिंताएं ‘‘बहुत उच्च स्तर” पर हैं और उन्होंने ‘‘अपने जीवन में” कभी नहीं सोचा था कि उन्हें यह सब देखने का अवसर मिलेगा। उन्होंने उपस्थित लोगों से कहा कि भारत में राष्ट्रपति का पद बहुत ऊंचा है और राष्ट्रपति संविधान की रक्षा, संरक्षण एवं बचाव की शपथ लेते हैं, जबकि मंत्री, उपराष्ट्रपति, सांसदों और न्यायाधीशों सहित अन्य लोग संविधान का पालन करने की शपथ लेते हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘हम ऐसी स्थिति नहीं बना सकते जहां आप भारत के राष्ट्रपति को निर्देश दें और वह भी किस आधार पर? संविधान के तहत आपके पास एकमात्र अधिकार अनुच्छेद 145(3) के तहत संविधान की व्याख्या करना है> इसके लिए पांच या उससे अधिक न्यायाधीशों की आवश्यकता होती है।’ उपराष्ट्रपति निवास में राज्यसभा के 6वें बैच के प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए धनखड़ दिल्ली हाईकोर्ट के एक जज के घर से जले हुए नोटों के बंडल मिलने के मामले पर भी बात की। उन्होंने कहा कि 14 और 15 मार्च की रात को नई दिल्ली में एक न्यायाधीश के निवास पर एक घटना हुई। सात दिनों तक, किसी को इसके बारे में पता नहीं था। हमें अपने आप से सवाल पूछने होंगे। क्या देरी समझने योग्य … Read more

मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा- यह राज्य सरकार पर छोड़ दिया गया है, हर राज्य अपना काम करता है

बेंगलुरु कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बृहस्पतिवार को कहा कि कर्नाटक में पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार सामाजिक-आर्थिक और शिक्षा सर्वेक्षण रिपोर्ट पर मंत्रिमंडल में विचार-विमर्श करेगी और उचित निर्णय लेगी। सामाजिक-आर्थिक और शिक्षा सर्वेक्षण रिपोर्ट को ‘जाति जनगणना’ के नाम से जाना जाता है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने रिपोर्ट पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने अब तक इसे नहीं देखा है। खरगे ने यहां संवाददाताओं से कहा, “यह राज्य सरकार पर छोड़ दिया गया है, हर राज्य अपना काम करता है। केंद्र सरकार ने ऐसा नहीं किया। राज्य सरकार मंत्रिमंडल में चर्चा करेगी और निर्णय लेगी। मैंने रिपोर्ट नहीं देखी है। मामला राज्य सरकार पर छोड़ दिया गया है।” उन्होंने रिपोर्ट के विरोध के बारे में पूछे जाने पर कहा, “(विरोध) हो सकता है। मैंने अपनी राय साझा की है।” जाति जनगणना पर विरोध के बीच मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की अगुवाई में कर्नाटक सरकार की एक विशेष बैठक बृहस्पतिवार को इस मुद्दे पर चर्चा के लिए बुलाई गई है। कर्नाटक के दो प्रमुख समुदायों वोक्कालिगा और वीरशैव-लिंगायत समुदायों सहित विभिन्न समुदायों के लोगों ने इस सर्वेक्षण (जाति जनगणना) को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे ‘अव्यवस्थित’ करार दिया है। समुदायों ने इस सर्वेक्षण को खारिज कर नया सर्वेक्षण कराने की मांग की है। समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा भी जाति जनगणना सर्वेक्षण पर आपत्ति जताई गई है और सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर भी इसके खिलाफ जोरदार आवाजें उठ रही हैं।

हिंदुओं के तिलक पर विवादित टिप्पणी करने वाले मंत्री पर होगी FIR, मद्रास हाईकोर्ट का आदेश

चेन्नई मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया है कि राज्य के मंत्री पोनमुडी के खिलाफ महिलाओं और धार्मिक समुदायों के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देने के मामले में FIR दर्ज की जाए. कोर्ट ने सरकार को 23 अप्रैल तक का समय दिया है. कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए यह भी कहा कि अगर तय समय सीमा तक FIR दर्ज नहीं की गई, तो अदालत स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई शुरू करेगी. बता दें कि मंत्री के. पोनमुडी ने पिछले दिनों एक कार्यक्रम में धार्मिक संदर्भ में सेक्स वर्कर का उल्लेख करते हुए आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. इस बयान को लेकर पार्टी की सांसद कनिमोझी ने भी नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा था कि मंत्री पोनमुडी का हालिया भाषण स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने जिस भी कारण से ये बातें कहीं, इस तरह की अश्लील भाषा निंदनीय है. हिंदुओं के तिलक पर विवादित टिप्पणी करने वाले मंत्री पर DMK का एक्शन तमिलनाडु के वन मंत्री और सीनियर डीएमके नेता के पोनमुडी (K Ponmudi) एक सार्वजनिक समारोह में दी गई अपनी स्पीच की वजह से विवादों में आ गए हैं. उन्होंने हिंदू धार्मिक पहचान को यौन स्थितियों से जोड़ने वाली टिप्पणी की थी. एक वायरल वीडियो में पोनमुडी को यह कहते हुए सुना गया, “महिलाओं, कृपया आप गलतफहमी न पालें.” इसके बाद वे एक चुटकुला सुनाते हैं, जिसमें एक आदमी एक सेक्स वर्कर से मिलने जाता है, जो फिर उस आदमी से पूछती है कि वह शैव है या वैष्णव. डीएमके नेता के द्वारा सुनाए जा रहे किस्से में, जब आदमी को समझ में नहीं आता, तो सेक्स वर्कर यह पूछकर स्पष्ट करती है कि क्या वह पट्टई (क्षैतिज तिलक, जो शैव धर्म से जुड़ा है) या नामम (लंबवत तिलक, जो वैष्णव धर्म से जुड़ा है) पहनता है. फिर वह समझाती है कि अगर वह शैव है, तो स्थिति ‘लेटी हुई’ है, और अगर वैष्णव है, तो स्थिति ‘खड़े होकर’ है. डीएमके सांसद कनिमोझी ने पोनमुडी के बयान की निंदा की है. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “मंत्री पोनमुडी का हालिया भाषण अस्वीकार्य है. भाषण का कारण चाहे जो भी हो, ऐसी अभद्र टिप्पणी निंदनीय है.” अभिनेत्री और बीजेपी नेता खुशबू सुंदर ने सोशल मीडिया पोस्ट में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को टैग करते हुए पूछा, “क्या आप कभी उन्हें उनकी कुर्सी और पद से हटाने की हिम्मत कर पाएंगे? या आप और आपकी पार्टी महिलाओं और हिंदू धर्म का अपमान करने में सुख पाती है?”

सुप्रीम कोर्ट ने नए वक्फ कानून पर फिलहाल रोक से इनकार किया, वक्फ परिषद और बोर्डों में कोई नियुक्ति नहीं

नई दिल्ली  नए वक्फ कानून के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने लगातार दूसरे दिन सुनवाई हुई। इस दौरान सर्वोच्च अदालत ने वक्फ कानून पर फिलहाल स्टे नहीं लगाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के इस बयान को रिकॉर्ड में लिया कि केंद्र सात दिनों के भीतर जवाब देगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि काउंसिल और बोर्ड को कोई नियुक्ति नहीं की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल ने आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई की तारीख तक, वक्फ, जिसमें पहले से पंजीकृत या अधिसूचना के माध्यम से घोषित वक्फ शामिल हैं। उनको न तो डीनोटिफाई किया जाएगा और न ही कलेक्टर को बदला जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र को सात दिनों के भीतर जवाब दाखिल करना चाहिए। वक्फ कानून पर SC ने नहीं लगाई रोक वक्फ संशोधन अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर एडवोकेट बरुण कुमार सिन्हा ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून पर रोक नहीं लगाई है। भारत के सॉलिसिटर जनरल ने कहा है कि नए संशोधन अधिनियम के तहत परिषद या बोर्ड में कोई नियुक्ति नहीं की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में लिखा है कि सरकार अगली तारीख तक उन संपत्तियों (वक्फ-बाय-यूजर) को डी-नोटिफाई नहीं करेगी जो रजिस्टर्ड और गजटेड हैं। हालांकि, सरकार अन्य संपत्तियों पर कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। ओवैसी बोले- हम इस एक्ट को असंवैधानिक मानते हैं अधिवक्ता बरुण सिन्हा ने आगे कहा कि केंद्र ने कोर्ट से कहा कि आप संसद की ओर से पारित कानून पर रोक नहीं लगा सकते और केंद्र रोजाना सुनवाई के लिए तैयार है। इस मुद्दे को अब 5 मई के लिए लिस्ट किया गया है और उसी दिन सुनवाई शुरू होगी। वहीं सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई पर एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने रिएक्ट किया। उन्होंने कहा कि हम इस एक्ट को असंवैधानिक मानते हैं। ‘इस एक्ट के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रहेगी’ ओवैसी ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि सेंट्रल वक्फ काउंसिल और स्टेट वक्फ काउंसिल का गठन नहीं किया जाएगा। ‘वक्फ बाय यूजर’ को हटाया नहीं जा सकता। जेपीसी की चर्चा के दौरान मैंने सरकार की ओर से प्रस्तावित सभी संशोधनों का विरोध करते हुए एक रिपोर्ट दी थी और बिल पर बहस के दौरान मैंने बिल को असंवैधानिक बताया था। इस एक्ट के खिलाफ हमारी कानूनी लड़ाई जारी रहेगी। वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी बड़ी बातें     सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून की संवैधानिक वैधता के खिलाफ दायर याचिकाओं पर जवाब देने के लिए केंद्र सरकार को सात दिन का समय दिया।     सर्वोंच्च अदालत ने कहा कि इस बीच केंद्रीय वक्फ परिषद और बोर्डों में कोई नियुक्ति नहीं होनी चाहिए।     केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से एक सप्ताह का समय मांगा था, जिसके बाद अदालत ने उन्हें वक्त दिया।     शीर्ष कोर्ट ने कहा कि मामले में इतनी सारी याचिकाओं पर विचार करना असंभव, केवल पांच पर ही सुनवाई होगी।     याचिकाओं पर सुनवाई के दूसरे दिन प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना ने कहा कि अगर किसी वक्फ संपत्ति का रजिस्ट्रेशन 1995 के अधिनियम के तहत हुआ है तो उन संपत्तियों को नहीं छेड़ा जा सकता।     केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया कि वह अगली सुनवाई तक ‘वक्फ बाय डीड’ और ‘वक्फ बाय यूजर’ को गैर-अधिसूचित नहीं करेगा।     सुनवाई के बाद उच्चतम न्यायालय ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई के लिए पांच मई की तारीख तय की। सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश में और क्या-क्या कहा?     सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि वक्फ बाय यूजर में बदलाव नहीं किया जाएगा। सात दिनों में सरकार जवाब दाखिल करें।     जवाब तक वक्फ संपत्ति की स्थिति नहीं बदलेगी। अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनी रहेगी।     सरकार फिलहाल कोई नियुक्ति नहीं होगी। ना कोई नया बोर्ड बनेगा, ना काउंसिल बनेगी।     एसजी तुषार मेहता ने आश्वासन दिया है कि अगली सुनवाई तक संशोधित कानून के तहत कोई नियुक्ति या बोर्ड नहीं गठित किया जाएगा।     केंद्र सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट अंतरिम आदेश जारी करने से पहले विचार करे कि इसका परिणाम क्या होगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की इस दलील को ठुकरा दिया।     एसजी तुषार मेहता ने आश्वासन दिया है कि अगली सुनवाई तक संशोधित कानून के तहत कोई नियुक्ति या बोर्ड नहीं गठित किया जाएगा।     सीजेआई संजीव खन्ना ने कहा कि सुनवाई के दौरान एसजी तुषार मेहता ने कहा कि प्रतिवादी सरकार 7 दिनों के भीतर एक संक्षिप्त जवाब दाखिल करना चाहते हैं और आश्वासन दिया कि अगली तारीख तक 2025 अधिनियम के तहत बोर्ड और परिषदों में कोई नियुक्ति नहीं होगी।     उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि अधिसूचना या राजपत्रित द्वारा पहले से घोषित उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ सहित वक्फ की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।     जवाब 7 दिनों के भीतर दाखिल किया जाना चाहिए। उस पर प्रतिउत्तर अगले 5 दिनों के भीतर दाखिल किया जाना चाहिए।     सीजेआई ने कहा कि अगली सुनवाई से केवल 5 रिट याचिकाकर्ता ही न्यायालय में उपस्थित होंगे। हम यहां केवल 5 ही चाहते हैं। आप 5 का चयन करें। अन्य को या तो आवेदन के रूप में माना जाएगा या निपटाया जाएगा। हम नाम का उल्लेख नहीं करेंगे। अब इसे कहा जाएगा- इन री: वक्फ संशोधन अधिनियम मामला  

मुनीर ने कहा दो कौमी नजरिये को ध्यान में रखकर हमारे पूर्वजों ने संघर्ष किया, पाक मुल्क को बनाया

लाहौर पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर ने ओवरसीज पाकिस्तानियों के एक जलसे में मौलानाओं की तरह तकरीरें की है. उनके भाषण में हिन्दू धर्म के प्रति नफरत खूब झलका. उन्होंने इकबाल का जिक्र किया, ओवरसीज पाकिस्तानियों के डॉलर पर लालची निगाह दौड़ायी और कश्मीर-ब्लूचिस्तान की चर्चा छेड़कर विदेशों में कमा रहे पाकिस्तानियों की वफादारी खरीदने की कोशिश की. ओवरसीज पाकिस्तानियों का पहला सालाना जलसा 13-16 अप्रैल 2025 तक पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुआ. इस सम्मेलन में असीम मुनीर का संबोधन 16 अप्रैल को हुआ. इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत पाकिस्तान के सभी बड़े नेता मौजूद थे. भारत के दुखद बंटवारे का जिक्र करते हुए जनरल मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान की कहानी अपने बच्चों को जरूर बताएं. ताकि वे पाकिस्तान की कहानी न भूलें. एक बिलियन डॉलर का कर्ज मांगने के लिए वर्ल्ड बैंक के सामने दर्जनों बार हाथ फैला चुके पाकिस्तान के आर्मी चीफ ने अपनी तकरीर में उसी मुद्दे को उठाया जिसे पाकिस्तानी हमेशा से करते आए हैं. वो मुद्दा था हिन्दुओं से नफरत. पाकिस्तान में ‘मुल्ला जनरल’ के नाम से सुर्खियां बटोरने वाले असीम मुनीर ने कहा, “हमारे पूर्वजों ने सोचा कि हम जीवन के हर मुमकिन पहलू में हिंदुओं से अलग हैं. हमारे धर्म अलग हैं, हमारे रीति-रिवाज अलग हैं, हमारी परंपराएं अलग हैं, हमारे विचार अलग हैं, हमारी महत्वाकांक्षाएं अलग हैं. यहीं से दो-राष्ट्र सिद्धांत की नींव रखी गई. हम दो राष्ट्र हैं, हम एक राष्ट्र नहीं हैं.” मुनीर ने कहा कि, ‘इसी दो कौमी नजरिये को ध्यान में रखकर हमारे पूर्वजों ने संघर्ष किया, लगातार संघर्ष किया और इस मुल्क को बनाया. इस मुल्क के लिए कुर्बानियां दीं.” दो कौमी नजरिये की पैरवी करने वाले मुनीर ये बताना भूल गए कि पाकिस्तान बनने के कुछ सालों बाद ही इससे टूटकर बांग्लादेश कैसे बन गया. जनरल असीम मुनीर विदेशों में कमा रहे पाकिस्तानियों की कमाई को देखकर खूब गदगद दिखे. उन्होंने कहा, “जिस तरह आप अपने मुल्क के लिए योगदान दे रहे हैं, पैसे भेजकर, निवेश कर, अलग-अलग माध्यमों से इससे ये पता चलता है कि आप अपने मुल्क से कितना मोहब्बत करते हैं. प्रवासी पाकिस्तानियों को आइडियोलॉजी का चूरन देते हुए असीम मुनीर ने कहा कि, ‘जो ओवरसीज हैं वो एक अलग तहजीब में रहते हैं, लेकिन आप ये कभी मत भूलिए कि आप एक सुपीरियर आइडियोलॉजी से ताल्लुक रखते हैं.” असीम मुनीर ने बड़े ही भावुक अंदाज में कहा, “मेरे भाई-बहन, बेटे-बेटियों कृपया पाकिस्तान की इस कहानी को कभी भूलना मत. इसे अपनी आने वाली जेनेरेशन को जरूर बताइएगा. जिससे वह पाकिस्तान के साथ अपने जुड़ाव को महसूस कर सकें. यह कभी कमजोर न हो, चाहें यह तीसरी पीढ़ी हो, चौथी पीढ़ी हो या फिर पांचवीं पीढ़ी. वे जानें कि पाकिस्तान उनके लिए क्या है.” पाकिस्तान बनने की कहानी में हिंसा और दंगों की कहानी को दबाते हुए और पूरे इतिहास को शुद्ध मजहबी रंग देते हुए असीम मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान कलमे की बुनियाद पर बना है. उन्होंने कहा, “आजतक इंसानियत की तारीख में सिर्फ दो रियासतें हैं जो कलमें की बुनियाद पर बनी हैं. पहली जो थी उसका नाम है रियासत-ए-तैयबा… आज उसको मदीना कहा जाता है. और जो दूसरी रियासत है, वो उसके 1300 साल के बाद अल्लाह ने आपकी (पाकिस्तान) बनाई है, कलमे की बुनियाद के ऊपर.” मुनीर ने गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई से प्रभावित फिलिस्तीनियों के प्रति भी समर्थन व्यक्त किया और कहा, “पाकिस्तानियों के दिल गाजा के मुसलमानों के साथ मिलकर धड़कते हैं.” बता दें कि तंगहाली और कंगाली के कगार पर पहुंच चुके पाकिस्तान में इस समय ओवरसीज पाकिस्तानी डॉलर भेजकर वहां की इकोनॉमी में ऑक्सीजन देने की कोशिश कर रहे हैं. असीम मुनीर ने अपने भाषण में जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान का वही पुराना रोना रोया और इसे पाकिस्तान के गले की नस बताया.  

देश में बंद हुआ एक और बैंक, जमाकर्ताओं के पैसों का क्या होगा, जानिए RBI ने क्यों रद्द किया लाइसेंस

अहमदाबाद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 16 अप्रैल, 2025 को अहमदाबाद स्थित कलर मर्चेंट्स को-ऑपरेटिव बैंक (Colour Merchants Co Operative Bank) का लाइसेंस रद्द कर दिया। यह निर्णय बैंक की कमजोर वित्तीय स्थिति और कमाई की संभावनाओं की कमी के कारण लिया गया है। आरबीआई ने कहा कि बैंक के पास पर्याप्त पूंजी नहीं है और यह बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रहा है। जमाकर्ताओं को मिलेगी बीमा सुरक्षा लाइसेंस रद्द होने के बाद, बैंक बुधवार को अपने सभी बैंकिंग कार्य बंद कर देगा। बैंकिंग कारोबार में जमा स्वीकार करना और उसका पुनर्भुगतान शामिल होता है। परिसमापन की प्रक्रिया शुरू होने पर, डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) के तहत जमाकर्ताओं को उनकी जमा राशि पर अधिकतम ₹5 लाख तक की बीमा राशि प्राप्त होगी। 98.51% जमाकर्ताओं को पूरी राशि मिलने की उम्मीद आरबीआई द्वारा जारी बयान के अनुसार, बैंक के द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, लगभग 98.51% जमाकर्ता DICGC बीमा के अंतर्गत अपनी पूरी जमा राशि पाने के हकदार हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि अधिकांश जमाकर्ताओं की रकम बीमा के दायरे में आ जाती है। अब तक 13.94 करोड़ रुपये का भुगतान हो चुका DICGC पहले ही 31 मार्च 2024 तक बैंक के जमाकर्ताओं को ₹13.94 करोड़ का भुगतान कर चुका है। इससे यह स्पष्ट है कि बीमा प्रणाली सक्रिय रूप से कार्य कर रही है और जमाकर्ताओं की सुरक्षा प्राथमिकता है। जनहित में लिया गया फैसला आरबीआई ने स्पष्ट किया कि बैंक की वर्तमान स्थिति उसके जमाकर्ताओं के हितों के लिए हानिकारक है। अगर बैंक को आगे कारोबार जारी रखने की अनुमति दी जाती, तो इससे जनहित पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता था। इसलिए, बैंकिंग कार्यों को समाप्त करना आवश्यक हो गया था। यह निर्णय भारत के सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में नियामक निगरानी की गंभीरता और जमाकर्ताओं की सुरक्षा की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

शिकोहपुर भूमि घोटाले में रॉबर्ट वाड्रा लगातार तीसरे दिन पहुंचे ईडी दफ्तर, पूछताछ जारी

नई दिल्ली जाने-माने कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा से लगातार तीसरे दिन प्रवर्तन निदेशालय पूछताछ कर रहा है। इससे पहले दो दिनों में रॉबर्ट वाड्रा से करीब साढ़े 11 घंटे (पहले दिन छह घंटे और दूसरे दिन साढ़े पांच घंटे) तक पूछताछ हो चुकी है। प्रवर्तन निदेशालय ने 2008 के शिकोहपुर भूमि सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा से पूछताछ कर रहा है। बीते दिन वाड्रा प्रियंका के साथ ईडी मुख्यालय पहुंचे थे। आज भी प्रियंका उनके साथ मौजूद हैं। पूछताछ के दौरान प्रियंका ईडी दफ्तर में ही मौजूद रहीं। ‘सरकार का प्रचार करने का तरीका’ पूछताछ से पहले रॉबर्ट वाड्रा ने कहा, ‘…मैं सभी सवालों के जवाब दे चुका हूं। 2019 में भी यही सवाल पूछे गए थे। यह कोई नई बात नहीं है। यह इस सरकार का प्रचार करने का तरीका है, उनका दुरुपयोग करने का तरीका है। हमारे पास इसका सामना करने की ताकत है और हम ऐसा करेंगे।’ ‘जनता जागरूक है, वे सब कुछ जानती और समझती है’ रॉबर्ट वाड्रा ने कहा, ‘यह भाजपा का राजनीतिक प्रचार है कि सोनियाऔर राहुल गांधी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है और मुझे उसी दिन तलब किया गया। इसलिए वे मीडिया के माध्यम से यह दिखा रहे हैं कि हम कुछ गलत कर रहे हैं। जनता जागरूक है, वे सब कुछ जानती और समझती है। ऐसी बातों का कोई मतलब नहीं होता, इससे हम और मजबूत होते हैं। इससे कोई नतीजा नहीं निकलेगा, क्योंकि इसमें कुछ है ही नहीं। अगर वे कुछ गलत करके दिखाना या करना चाहते हैं, तो मैं इसे नियंत्रित नहीं कर पाऊंगा, लेकिन सच्चाई यह है कि उनके पास कुछ भी नहीं है।’ ‘लोग चाहते हैं कि मैं राजनीति में आऊं’ गुरुग्राम भूमि मामले में ईडी की ओर से उन्हें भेजे गए समन और पूछताछ पर वाड्रा ने कहा, ‘अगर मैं राजनीति में आता, जो कि सभी चाहते हैं, तो वे (भाजपा) या तो वंशवाद की बात करेंगे या ईडी का दुरुपयोग करेंगे। यह मुश्किल तब शुरू हुई, जब कुछ दिन पहले मैंने अल्पसंख्यकों पर अत्याचारों के बारे में सोशल मीडिया पर संदेश दिया। यह और कुछ नहीं है। जब से मैंने कहा कि लोग चाहते हैं कि मैं राजनीति में आऊं, तब से यह मुश्किल शुरू हो गई, लेकिन ईडी के समन का कोई आधार नहीं है।’ ‘परिवार के आशीर्वाद के साथ राजनीति में शामिल होऊंगा’ जब उनसे पूछा गया कि क्या वे राजनीति में आएंगे? तो कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा ने कहा, ‘निश्चित रूप से अगर लोग चाहेंगे, तो मैं अपने परिवार के आशीर्वाद के साथ इसमें शामिल होऊंगा। मैं कांग्रेस के लिए कड़ी मेहनत करूंगा। यह जारी रहेगा, क्योंकि हम आंदोलन करते हैं, हम लोगों के लिए लड़ते हैं, हम अन्याय के खिलाफ हैं।’ क्या है मामला? फरवरी 2008 का यह भूमि सौदा स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी ने किया था। वाड्रा पहले इस कंपनी के निदेशक थे। इसने शिकोहपुर में ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज नामक एक फर्म से 7.5 करोड़ रुपये की कीमत पर 3.5 एकड़ जमीन खरीदी थी। उस समय मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार सत्ता में थी। चार साल बाद, सितंबर 2012 में, कंपनी ने यह 3.53 एकड़ जमीन रियल्टी प्रमुख डीएलएफ को 58 करोड़ रुपये में बेच दी।

समंदर में भारत के सामने नहीं टिकेगा कोई देश!, 26 राफेल-मरीन लड़ाकू जेट खरीदने मिली मंजूरी, नौसेना की बढ़ेगी ताकत

नई दिल्ली नौसेना की ताकत और बढ़ाने के लिए मोदी सरकार ने फ्रांस से 26 राफेल-मरीन लड़ाकू जेट खरीदने के लिए 64,000 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. ये फाइटर जेट भारत के पहले घरेलू एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत से ऑपरेट होंगे. इसे सितंबर 2022 में कमीशन किया गया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की ओर से स्वीकृत इस सौदे में 22 सिंगल सीटर कैरियर-सक्षम राफेल-एम जेट और चार ट्विन-सीटर ट्रेनर वैरिएंट शामिल हैं. इस डील पर हस्ताक्षर होने के साढ़े तीन साल बाद डिलीवरी शुरू होगी और 2031 तक पूरी होने की उम्मीद है. ये सौदा क्यों है अहम? राफेल-एम 4.5 जनरेशन के राफेल लड़ाकू विमान का नेवी वैरियंट है और इसे फ्रांसीसी एयरोस्पेस फर्म डसॉल्ट एविएशन ने विकसित किया है. यह पहले ही अपनी लड़ाकू क्षमता साबित कर चुका है, यह परमाणु-सक्षम मिसाइलों सहित कई तरह के हथियार ले जाने में सक्षम है. भारतीय वायु सेना (IAF) पहले से ही राफेल जेट के दो स्क्वाड्रन संचालित कर रही है. 2016 में 59,000 करोड़ रुपये में 36 विमान खरीदे गए थे. भारतीय नौसेना की ओर से किए गए व्यापक परीक्षणों के बाद राफेल-एम ने अपने विरोधी बोइंग एफ/ए-18ई/एफ सुपर हॉर्नेट को पछाड़ दिया. इनमें महत्वपूर्ण स्की-जंप टेस्ट भी शामिल था, जो STOBAR (शॉर्ट टेक-ऑफ बट अरेस्टेड रिकवरी) सिस्टम का उपयोग करके भारतीय विमान वाहक से छोटी उड़ान भरता है. राफेल-एम ने असाधारण प्रदर्शन किया. भारतीय वायुसेना के मौजूदा राफेल बेड़े के साथ इसकी अनुकूलता ने इसे और भी बेहतर बना दिया. यूरेशियन के लिए लिखते हुए ग्रुप कैप्टन एमजे ऑगस्टीन विनोद (सेवानिवृत्त) ने कहा, “भारतीय वायुसेना और नौसेना के राफेल विमानों के बीच साझा एयरफ्रेम, एवियोनिक्स, प्रशिक्षण सिमुलेटर और युद्ध सामग्री से रसद संबंधी बोझ कम होगा और संचालन में संयुक्तता सुनिश्चित होगी, जिससे आपात स्थितियों में क्रॉस-सर्विस तैनाती संभव होगी.” ये डील सिर्फ नए जेट खरीदने के लिए नहीं बल्कि इसकी कमियों को दूर करने के साथ हुई है. नौसेना के मिग-29K विमानों के मौजूदा बेड़े को विश्वसनीयता, लगातार रखरखाव की मांग और सीमित उपलब्धता की वजह से परेशानी हुई है. ये विमान INS विक्रमादित्य पर तैनात हैं. क्या है इसकी खासियत? इसको परमाणु क्षमताओं के साथ जोड़ा जा सकता है, जिससे भारत को समुद्र से हवाई मार्ग से परमाणु हथियार ले जाने का विश्वसनीय विकल्प मिल जाएगा. यह एक ऐसा आयाम है जिसे कोई भी क्षेत्रीय विरोधी नजरअंदाज नहीं कर सकता. ये फाइटर जेट कई मौकों पर अपनी क्षमता साबित कर चुका है. अफगानिस्तान, लीबिया, इराक और सीरिया में स्ट्राइक मिशन को भी अंजाम दे चुका है. कैसे बनेगा अजेय कॉम्बिनेशन भारत का स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत और राफेल मरीन एक साथ होंगे तो अपनी जगह से दूर हुए बिना भारत पूरे दक्षिण एशिया में किसी भी खतरे से निपट सकता है. जिस तरह तरह चीन पिछले कई सालों से हिंद महासागर में भारत को घेरने की कोशिश कर चुका है, उससे निपटने में भी ये शक्ति कारगर साबित होगी. भारत भी चीन की गतिविधियों पर नजर रख सकेगा और पकड़ मजबूत होगी. उधर पाकिस्तान के पास कैरियर ऑपरेशनल पावर बहुत कम है. राफेल मरीन से अगर तुलना की जाए तो पड़ोसी देश बहुत पीछे है, उसके पास ऐसी कोई समुद्री ताकत नहीं है. हिंद महासागर में निगरानी करने की क्षमता भी न के बराबर है. ऐसे में जरूरत पड़ने पर भारत कराची से ग्वादर तक पाकिस्तानी पोर्ट का घेराव कर सकता है. अब राफेल मरीन जेट से भारत को समुद्र में ऐसी ताकत मिलेगी जो सिर्फ चुनिंदा देशों के पास थी. उनमें फ्रांस, अमेरिका और चीन जैसे देश शामिल हैं. इन फाइटर जेट के आने के बाद भारत अपनी रक्षा करने में तो सक्षम होगा ही साथ ही संकट में अपने मित्र देशों को भी मदद दे सकता है.

तेजस-MK2 की पहली उड़ान अगले साल फरवरी-मार्च में, 5 साल में तेजस की नई एडवांस खेप मिलने लगेगी

मुंबई हाल ही में कुछ मीडिया आउटलेट्स ने डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत के हवाले से कहा कि तेजस MkII की पहली उड़ान “6-12 महीनों” के भीतर होगी. जिससे अक्टूबर 2025 की शुरुआत में उड़ान की अटकलें लगाई जा रही हैं. लेकिन ऐसा नहीं है.   कैसे होगा तेजस एमके2 का प्रोडक्शन टाइमलाइन? 1. रोलआउट: अक्टूबर-नवंबर 2025… प्रोटोटाइप असेंबली लाइन से बाहर आएगा, जिससे इंजन ग्राउंड रन और सिस्टम जांच शुरू होगी. 2. टैक्सी ट्रायल: दिसंबर 2025-फरवरी 2026… निम्न और उच्च गति टैक्सी परीक्षण विमान के सिस्टम को मान्य करेंगे. 3. पहली उड़ान: फरवरी-मार्च 2026… पहली उड़ान बुनियादी उड़ान विशेषताओं का परीक्षण करेगी. 4. उत्पादन: 2028-2029 से शुरू, सालाना 18 इकाइयां. तेजस MkII एक उन्नत 4.5 पीढ़ी का लड़ाकू विमान है, जो तेजस MkI और पांचवीं पीढ़ी के AMCA के बीच की खाई को पाटने के लिए डिज़ाइन किया गया है. इसमें शक्तिशाली F414-INS6 इंजन, उत्तम AESA रडार और उन्नत हथियार सूट है. 2035 तक 120-180 इकाइयों को शामिल करने की योजना है, जो पुराने लड़ाकू विमानों की जगह लेंगे. जानिए तेजस Mk2 का खासियत तेजस मार्क 2 में नाइट विजन चश्मे से जुड़ा हुआ कॉकपिट होगा. यानी रात के समय या अंधेरे में भी इस फाइटर जेट से दुश्मन टारगेट पर हमला किया जा सके. इसमें HOTAS यानी हैंड्स ऑन थ्रॉटल-एंड-स्टिक की व्यवस्था होगी. यानी जिस लीवर से फाइटर जेट कंट्रोल किया जाएगा, उसी से हथियार भी चलेंगे. 2223 km प्रतिघंटा की रफ्तार से चीरेगा आसमान यह अधिकतम 2223 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ेगा. इसकी रेंज करीब 2500 किलोमीटर होगी. अधकितम 56,758 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर पाएगा. इस फाइटर जेट में 30 मिलिमीटर की एक GSh-30-1 गन लगी होगी. यह गन एक मिनट में 1500-1800 गोलियां दाग सकती है. जिसकी रेंज 200 से 1800 मीटर होगी. एक से एक घातक हथियारों से किया जाएगा लैस इस गन के अलावा इस फाइटर जेट पर 13 हार्डप्वाइंट्स होंगे. यानी 13 एक जैसे या अलग-अलग तरह के हथियार लगा सकते हैं. इसमें पांच तरह के हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें लगाई जा सकती हैं. जैसे- MICA, ASRAAM, Meteor, Astra और NG-CCM. इनकी तैनाती लगभग तय मानी जा रही है. इनके अलावा हवा से सतह पर मार करने वाली चार मिसाइलें लगाई जाएंगी. जिनमें ब्रम्होस-एनजी ALCM, LRLACM, स्टॉर्म शैडो और क्रिस्टल मेज शामिल हैं. यही नहीं इनके अलावा इसमें एंटी-रेडिएशन मिसाइल रुद्रम 1/2/3 लगाने की भी योजना है. इसके अलावा इसमें चार प्रेसिशन गाइडेड बम एक लेजर गाइडेड बम, क्लस्टर म्यूनिशन, लॉयटरिंग म्यूनिशन CATS ALPHA और अनगाइडेड बम लगाए जाएंगे.  

बिना रूके एक्सप्रेसवे पर भगा सकेंगे गाड़ी, ₹3000 में सालभर टोल टैक्स की छुट्टी, क्या है नया टोल प्लान

नई दिल्ली देश के टोल बूथ को लेकर सरकार एक बड़ा बदलाव करने वाली है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि देश के राजमार्गों पर टोल पेमेंट का तरीका बदलने वाला है। केंद्र अगले 15 दिनों के अंदर एक नई टोल पॉलिसी पेश करने वाली है। यानी मई से ये पॉलिसी लागू हो सकती है। हालांकि, गडकरी ने अभी इसके बारे में ज्यादा डिटेल नहीं बताई। उन्होंने इस बात के संकेत दिए कि एक बार नई पॉलिसी लागू होने के बाद टोल के बारे में किसी को शिकायत करने का मौका नहीं मिलेगा। इस नए सिस्टम से FASTag का काम भी खत्म हो जाएगा। गडकरी ने कहा कि नए सिस्टम के लिए फिजिकल टोल बूथ की आवश्यकता नहीं होगी। इसके बजाय, सैटेलाइट ट्रैकिंग और व्हीकल नंबर प्लेट पहचान का उपयोग करके बैंक खातों से टोल ऑटोमैटिक ही पेमेंट कट जाएगा। उन्होंने इवेंट के दौरान कहा कि लंबे समय से लंबित मुंबई-गोवा हाईवे पर भी अपडेट दिया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना इस साल जून तक पूरी तरह से लागू हो जाएगी। मुंबई-गोवा हाईवे को लेकर कई कठिनाइयां थीं, लेकिन चिंता न करें हम इस जून तक सड़क का 100% काम पूरा कर लेंगे। अब नहीं रुकना पड़ेगा टोल प्लाजा पर नई पॉलिसी लागू होने के बाद जब आप कार से सफर पर निकलेंगे, तो बीच में किसी टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। एक बार गाड़ी ने रफ्तार पकड़ी तो सीधा मंज़िल तक पहुंच सकेंगे। 15 दिनों में लागू होगी नई टोल पॉलिसी सरकार अगले 15 दिनों में नई टोल टैक्स पॉलिसी लागू करने जा रही है। इसके तहत देशभर में टोल सिस्टम पूरी तरह बदल जाएगा। सालभर के लिए मिलेगा एनुअल टोल पास नई पॉलिसी के तहत अब सालभर के लिए टोल पास बनाए जाएंगे। मतलब आपको बार-बार टोल टैक्स नहीं भरना पड़ेगा।     3000 रुपये का एनुअल पास मिलेगा।     एक बार Fastag में रिचार्ज किया और पूरे साल फ्री सफर।     बार-बार रुकने और टोल भरने से छुटकारा। टोल प्लाजा हटेंगे, नया सिस्टम आएगा सरकार की योजना के अनुसार अब देशभर के टोल प्लाजा हटाए जाएंगे। उनकी जगह किलोमीटर बेस्ड चार्जिंग सिस्टम लागू किया जाएगा। यानी जितनी दूरी तय करेंगे, उतना ही टोल देना होगा। बेवजह ज्यादा टोल नहीं भरना पड़ेगा। सैटेलाइट ट्रैकिंग से ऑटोमैटिक टोल कटेगा नए सिस्टम में सैटेलाइट ट्रैकिंग का इस्तेमाल होगा। इसका मतलब आपकी गाड़ी की नंबर प्लेट को सैटेलाइट से स्कैन किया जाएगा। टोल अपने आप कट जाएगा। मैनुअल टोल बूथ की जरूरत नहीं पड़ेगी। लाइफटाइम टोल पास पर भी विचार     मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार नई कारों के लिए लाइफटाइम टोल पास देने पर भी विचार कर रही है।     30,000 रुपये में 15 साल तक फ्री सफर की सुविधा।     हालांकि इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। नितिन गडकरी का ऐलान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 14 अप्रैल 2025 को एक इवेंट में कहा कि जल्द ही देश से फिजिकल टोल बूथ खत्म हो जाएंगे। टोल सिस्टम पूरी तरह डिजिटल और ऑटोमैटिक होगा। इससे देशभर में बिना रुकावट यात्रा करना आसान हो जाएगा। समय और पैसे दोनों की बचत इस नई व्यवस्था से टोल प्लाजा पर रुकना नहीं पड़ेगा। टोल भरने का झंझट खत्म होगा। ट्रैफिक कम होगा। पैसे और समय दोनों की बचत होगी। एक बार हाईवे पूरा हो जाने पर, यात्रा का समय कम हो जाएगा और कोंकण क्षेत्र में विकास को बढ़ावा मिलेगा। गडकरी ने स्वीकार किया कि भूमि विवाद, कानूनी चुनौतियों और आंतरिक पारिवारिक झगड़ों के कारण परियोजना में कई सालों तक देरी हुई। उन्होंने बताया कि भाइयों के बीच झगड़े थे, अदालतों में मामले थे और भूमि के लिए मुआवजा देने में अंतहीन जटिलताएं थीं। लेकिन अब वे मुद्दे सुलझ गए हैं और मुंबई-गोवा राजमार्ग पर काम ने गति पकड़ ली है। गडकरी ने यह भी कहा कि उन्हें भारत के सड़क बुनियादी ढांचे के फ्यूचर को लेकर पूरा भरोसा है। अगले दो सालों में भारत का सड़क बुनियादी ढांचा अमेरिका से बेहतर होगा। उन्होंने ये भी बताया कि दिल्ली-जयपुर और मुंबई-गोवा जैसे कुछ राजमार्ग अभी भी गंभीर मुद्दों का सामना कर रहे हैं। गडकरी ने बताया कि दिल्ली-जयपुर और मुंबई-गोवा (हाईवे) हमारे विभाग के ब्लैक स्पॉट में से हैं। इनके साथ कई कठिनाइयां आती हैं। अगर वो कोंकण के बारे में सच बोलें तो लोग इसे स्वीकार नहीं करेंगे। क्या है नया GPS टोलिंग सिस्टम? देश में सड़कों के निर्माण के साथ टोल बूथ की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। ऐसे में सरकार बूथों को समाप्त करने GPS बेस्ड टोलिंग सिस्टम को बढ़ावा देने के फास्टैग सिस्मट को रिप्लेस करने वाली है। टोल बूथ का निर्माण से इन्फ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट बढ़ जाती है। इससे टोल कलेक्शन की लागत में भी बढ़ोतरी होती है। इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए सरकार नया टोलिंग सिस्टम लाने वाली है। इस सिस्टम में GPS की मदद से सीधे ड्राइवर या व्हीकल ओनर के बैंक अकाउंट से टोल की राशि काटी जाएगी। व्हीकल की निगरानी GPS के माध्यम से होगी। तय किए गए मार्जिन और समय के आधार पर टोल की राशि कैलकुलेट की जाएगी।

रेलवे की नई सुविधा, जल्द ही रेलगाड़ी में मिलेगी ATM की facility

नई दिल्ली आरामदायक कुर्सियों से लेकर अब ट्रेन में मोबाइल फोन चार्जिंग और लैंप जैसी कई आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। हालांकि, रेल के विकसित होने का यह सिलसिला अभी थमा नहीं है। खबर है कि रेलवे ने ट्रेनों में ATM यानी ऑटोमैटेड टैलर मशीन का परीक्षण शुरू कर दिया है। हालांकि, यह साफ नहीं है कि व्यापक स्तर पर इसे कब लागू किया जाएगा। सेंट्रल रेलवे (CR) ने मुंबई-मनमाड पंचवटी एक्सप्रेस में प्रायोगिक आधार पर एटीएम लगाया है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि यह एटीएम एक निजी बैंक द्वारा प्रदान किया गया है और इसे इस दैनिक एक्सप्रेस सेवा की वातानुकूलित चेयर कार कोच में स्थापित किया गया है। उनके अनुसार, इसे जल्द ही यात्रियों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी स्वप्निल नीला ने कहा, ‘पंचवटी एक्सप्रेस में प्रायोगिक आधार पर एटीएम स्थापित किया गया है।’ रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह एटीएम कोच के पिछले हिस्से में एक क्यूबिकल में लगाया गया है, जहां पहले अस्थायी पेंट्री थी। ट्रेन के चलने के दौरान सुरक्षा और पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक शटर दरवाजा भी लगाया गया है। अधिकारी ने बताया कि इस कोच में आवश्यक परिवर्तन मनमाड रेलवे कार्यशाला में किए गए। पंचवटी एक्सप्रेस मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस और पड़ोसी नासिक जिले के मनमाड जंक्शन के बीच प्रतिदिन चलती है। यह ट्रेन लगभग 4 घंटे 35 मिनट में एक तरफ की यात्रा पूरी करती है। इस ATM को मनमाड़ रेलवे वर्कशॉप में विशेष तकनीकी और स्ट्रक्चरल बदलावों के साथ स्थापित किया गया है। कोच में अतिरिक्त इलेक्ट्रिकल सपोर्ट और आवश्यक संरचनात्मक बदलाव किए गए हैं, ताकि मशीन ट्रेन की गति और झटकों के बावजूद सुचारू रूप से काम कर सके। इस प्रकार की सुविधा देने की शुरुआत भुसावल मंडल द्वारा आयोजित एक अभिनव गैर-किराया राजस्व ग्राहक संवाद बैठक में की गई थी। इस दूरदर्शी प्रस्ताव के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए, प्रमुख राष्ट्रीयकृत बैंक (बैंक ऑफ महाराष्ट्र) ने नई नवाचारी गैर-किराया राजस्व विचार योजना (NINFRIS) के अंतर्गत औपचारिक योजना प्रस्तुत की। यह सुविधा खासकर उन यात्रियों के लिए बहुत फायदेमंद होगी, जो अचानक कैश की जरूरत में स्टेशन पर नहीं उतर सकते या फिर रिमोट इलाकों की यात्रा कर रहे हों।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा- सिलक्यारा टनल आस्था और समर्पण की शक्ति का जीवंत उदाहरण

देहरादून उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बुधवार को सिलक्यारा सुरंग के ब्रेकथ्रू कार्यक्रम में शामिल हुए। गौरतलब है कि वर्ष 2023 में निर्माण के दौरान 41 श्रमिक 17 दिनों तक सिलक्यारा सुरंग में फंस गए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और सीएम पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। सिलक्यारा सुरंग चारधाम यात्रा की दृष्टि से महत्वपूर्ण परियोजना है। लगभग 853 करोड़ लागत की डबल लेन की इस सुरंग परियोजना की लंबाई 4.531 किलोमीटर है। सुरंग निर्माण से गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के बीच की दूरी 26 किलोमीटर तक कम हो जाएगी, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधा और समय की बचत होगी। इस परियोजना के पूर्ण होने से क्षेत्र में व्यापार, पर्यटन और रोजगार की संभावनाओं में वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा। मुख्यमंत्री ने सिलक्यारा टनल ब्रेकथ्रू के अवसर पर परियोजना से जुड़े सभी इंजीनियरों, तकनीकी विशेषज्ञों, श्रमिकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक अवसर न केवल उन्नत इंजीनियरिंग की सफलता का प्रतीक है, बल्कि आस्था और समर्पण की शक्ति का जीवंत उदाहरण भी है। उन्होंने कहा कि सिलक्यारा टनल अभियान दुनिया का सबसे जटिल और लंबा रेस्क्यू ऑपरेशन था। इससे जुड़े प्रत्येक व्यक्ति ने मानवता और टीम वर्क की एक अद्भुत मिसाल कायम की। यह घटना तकनीकी और मानवीय संकल्प की वास्तविक परीक्षा थी, सभी ने एकजुट होकर इस अभियान को सफल बनाया। उन्होंने समस्त रेस्क्यू टीम, रैट माइनर्स, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सहयोगी संस्थाओं का भी इस अभियान को सफल बनाने में आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सिलक्यारा अभियान पर पूरी दुनिया की नजरें थी। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन और भारत सरकार के पूर्ण सहयोग के चलते राज्य सरकार ने इस चुनौतीपूर्ण अभियान को सफलतापूर्वक संचालित किया। इस रेस्क्यू अभियान में देश और दुनिया में उपलब्ध आधुनिक संसाधनों और विशेषज्ञों का भी सहयोग लिया गया। सुरंग में फंसे मजदूरों ने जिस धैर्य का परिचय दिया, इससे हमारा हौसला बढ़ा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री बाबा बौखनाग मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के लिए घर से भेंट और पूजा सामग्री लेकर सिलक्यारा पहुंचे। उन्होंने बाबा बौखनाग मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में भी भाग लिया। सुरंग में फंसे श्रमिकों के सकुशल रेस्क्यू के लिए सीएम धामी ने खुद सिलक्यारा अभियान के दौरान कैंप कर अभियान की निरंतर निगरानी और निर्देशन किया था। रेस्क्यू अभियान की सफलता के लिए मुख्यमंत्री ने बाबा बौखनाग से मन्नत मांगते हुए मंदिर निर्माण का संकल्प लिया था। सीएम धामी ने बाबा बौखनाग से प्रदेश की खुशहाली और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि जब सुरंग के मुख पर बाबा बौखनाग को विराजमान किया गया, तभी फंसे हुए मजदूरों को बाहर निकाला जा सका। उस समय उन्होंने बाबा बौखनाग का भव्य मंदिर बनाने की घोषणा की थी। बुधवार को मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा होने से संकल्प भी पूरा हुआ है और श्रद्धालु भी बाबा बौखनाग का आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सिलक्यारा टनल का नाम बाबा बौखनाग पर किए जाने की कार्यवाही की जाएगी। वहीं, बौखनाग टिब्बा को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही स्यालना के निकट हेलीपैड का निर्माण किया जाएगा।

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