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26/11 हमला: प्रत्यर्पित तहव्वुर राणा दिल्ली लाया गया, प्रत्यर्पण पर इजरायली राजदूत ने भारत सरकार को शुक्रिया कहा

नई दिल्ली  26/11 मुंबई आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर राणा दिल्ली पहुंच चुका है। तहव्वुर राणा को अमेरिका से एनआईए की 7 सदस्यीय टीम दिल्ली लेकर पहुंची है। दिल्ली एयरपोर्ट पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच वह यहां पहुंचा। तहव्वुर राणा का मेडिकल कराया जाएगा और फिर एनआईए उसे कोर्ट में पेश करेगी। राणा को अमेरिका से भारत लाए जाने के बाद तिहाड़ जेल के हाई सिक्योरिटी वार्ड में रखा जा सकता है। तिहाड़ की हाई सिक्योरिटी वार्ड में रखा जाएगा सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि 64 साल का तहव्वुर राणा दिल्ली की तिहाड़ जेल में एक हाई सिक्योरिटी वार्ड में रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि आतंकवादी को रखने के लिए जेल में सभी आवश्यक तैयारियां पहले ही कर ली गई हैं। तहव्वुर राणा साल 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक डेविड कोलमेन हेडली उर्फ दाऊद गिलानी का करीबी सहयोगी है। राणा को लेकर एक विशेष चार्टर्ड विमान बुधवार (9 अप्रैल) को अमेरिका से भारत के लिए रवाना हुआ था। 2008 के आतंकी हमले में 166 लोग मारे गए थे। NIA हेडक्वाटर में होगी पूछताछ तहव्वुर राणा को अमेरिका से भारत लाने में लंबी कानूनी लड़ाई के बाद प्रत्यर्पित किया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि राणा को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की हिरासत में लिया जाएगा, जो रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के साथ मिलकर उसके प्रत्यर्पण का कोर्डिनेशन कर रही है। संभावना है कि उसे जल्द ही दिल्ली की एक अदालत में पेश किया जाएगा। किन किन धाराओं में आरोपी है राणा? राणा पर कई धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं, जिनमें आपराधिक साजिश, भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना, हत्या, जालसाजी और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम शामिल हैं। हालांकि, मुंबई पुलिस को अभी तक उसके शहर में स्थानांतरण के बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। लेकिन माना जा रहा है कि उसे मुंबई ले जाने पर ऑर्थर रोड जेल के इस सेल में रखा जाएगा जहां आतंकी कसाब को रखा गया था। ट्रंप की हरी झंडी के बाद मिली कामयाबी डेविड कोलमेन हेडली का सहयोगी होने के अलावा, ऐसा माना जाता है कि राणा के पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के साथ करीबी संबंध थे। राणा के प्रत्यर्पण की घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्हाइट हाउस दौरे के दौरान की थी। इसके बाद राणा ने सुप्रीम कोर्ट में प्रत्यर्पण को रोकने की कोशिश की, लेकिन अब उसकी सभी कानूनी अपीलों को खारिज कर दिया गया है। भारत ने रचा ऐसा चक्रव्यूह कि शिकंजे में आ गया राणा  ……. 26/11 के मुंबई हमलों के वांछित और साजिशकर्ता तहव्वुर राणा भारत प्रत्यर्पित हो चुका है। यह काम इतना आसान और सहज नहीं था, लेकिन भारत ने इसे सच कर दिखाया। यह केंद्रीय एजेंसियों के सबसे महत्वपूर्ण प्रत्यर्पणों में से एक है क्योंकि इसके लिए NIA अधिकारियों को कई बार अमेरिका के चक्कर लगाने पड़े और अमेरिकी सरकार को राणा को प्रत्यर्पित करने के लिए मनाना पड़ा। एक बार तो राणा को तब अमेरिकी जेल में रखने के लिए अमेरिकी सरकार को मनाना पड़ा , जब वह रिहा होने वाला था। इस दौरान भारतीय अधिकारियों ने ना केवल राणा के प्रत्यर्पण की गारंटी सुनिश्चित की बल्कि उसके खिलाफ सबूत भी जुटाए। गिरफ्तारी, दोबारा गिरफ्तारी, सजा, भारत का प्रत्यर्पण अनुरोध 64 वर्षीय तहव्वुर हुसैन राणा, पाकिस्तान में जन्मा एक कनाडाई नागरिक है। उसे अमेरिकी अधिकारियों ने 18 अक्टूबर, 2009 को गिरफ्तार किया था। इससे दो हफ्ते पहले 3 अक्टूबर, 2009 को उसके बचपन के दोस्त डेविड कोलमैन हेडली की गिरफ्तारी हो चुकी थी। भारत ने हेडली के लिए भी प्रत्यर्पण अनुरोध भेजा था, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने उसे देने से इनकार कर दिया, क्योंकि उसने मुंबई हमलों और डेनमार्क में नाकाम साजिश से संबंधित कई मामलों सहित आतंकवाद से संबंधित 12 आरोपों में दोषी होने की बात स्वीकार की थी। चूंकि वह अमेरिकी जांचकर्ताओं के साथ सहयोग करने के लिए तैयार था, इसलिए हेडली के याचिका समझौते में गैर-प्रत्यर्पण प्रावधान शामिल था। दूसरी ओर, राणा पर अमेरिका में तीन मामलों में मुकदमा चलाया गया। इनमें भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देने की साजिश, डेनमार्क में आतंकवाद को बढ़ावा देने की साजिश और एक विदेशी आतंकवादी संगठन को सहायता प्रदान करना शामिल था। इस बीच, भारत ने तहव्वुर राणा को वांछित घोषित कर दिया था और 28 अगस्त, 2018 को उसके खिलाफ साजिश, युद्ध छेड़ने, हत्या करने, जालसाजी, आतंकवादी हमले के आरोपों पर गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया गया। उधर, राणा के बचपन के दोस्त हेडली ने अमेरिकी अभियोजन पक्ष के सामने गवाही दी और यूएस जूरी ने 9 जून, 2011 को राणा को डेनमार्क से संबंधित आतंकवादी साजिश और लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) को भौतिक सहायता प्रदान करने का दोषी ठहरा दिया, लेकिन भारत से संबंधित आतंकवादी साजिश से उसे बरी कर दिया। 17 जनवरी, 2013 को अमेरिकी डिसेट्रिक कोर्ट ने उसे 168 महीने के कारावास की सजा सुनाई। 7 साल जेल में रहने के बाद, कोविड-19 महामारी के दौरान राणा की अनुकंपा रिहाई की याचिका भी मंजूर कर ली गई। इसी बीच, जब वह रिहा होने वाला था, तब भारत द्वारा प्रत्यर्पण का अनुरोध किया गया। इसके बाद राणा को 10 जून, 2020 को फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। भारतीय वकील दयान कृष्णन ने की ‘निःशुल्क’ सहायता 2009 में 26/11 हमलों की जांच शुरू करने के बाद से, डेविड हेडली और तहव्वुर राणा की हिरासत पाने के लिए एनआईए अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई और न्याय विभाग के साथ नियमित संपर्क में था। NIA की एक टीम ने पहली बार 2010 में अमेरिका का दौरा किया और हेडली से पूछताछ की थी लेकिन उस समय राणा से पूछताछ नहीं की जा सकी थी। इसके बाद, 2018 में मामले में सबूत इकट्ठा करने के लिए एनआईए के अफसरों ने फिर यूएस का दौरा किया। इसके दो साल बाद राणा के प्रत्यर्पण की कार्रवाई शुरू हुई। 2020 में राणा के प्रत्यर्पण की कार्यवाही शुरू होने के बाद, NIA की टीमों ने मामले के दस्तावेजों, आरोपों आदि को समझाने में अमेरिकी अभियोजकों की सहायता के लिए कई बार दौरे किए। अमेरिका में राणा की पैरवी ब्रिटिश बैरिस्टर पॉल गार्लिक कर रहे थे, जबकि … Read more

तहव्वुर राणा का पाकिस्तान कनेक्शन?एनआईए आरोपी की कस्टडी की मांग करेगी

नई दिल्ली अमेरिका से प्रत्यर्पित किए गए 26/11 मुंबई आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा को स्पेशल विमान के जरिए आज भारत लाया जा रहा है. वह गुरुवार दोपहर दिल्ली पहुंचेगा, जहां उसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया जाएगा. इसके बाद उसे राजधानी की तिहाड़ जेल में रखा जाएगा, जहां उसकी सुरक्षा को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं. इससे पहले राणा को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां एनआईए आरोपी की कस्टडी की मांग करेगी. बुलेटप्रूफ व्हीकल में NIA हेडक्वार्टर जाएगा तहव्वुर राणा 26/11 के आतंकी तहव्वुर राणा को बुलेट प्रूफ गाड़ी में पालम टेक्निकल एयरपोर्ट से एनआईए हेडक्वॉक्टर लाया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक, बुलेट प्रूफ गाड़ी के साथ मार्क्समेन गाड़ी को भी स्टैंडबाय में रखा गया है. दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के कमांडोज इस गाड़ी के साथ भी स्टैंडबाय पर हैं. मार्कसमेन बेहद सुरक्षित गाड़ी होती है, जिसमें किसी तरह का हमला कारगर नही हो सकता. बड़े आतंकियों और गैंगस्टर्स को इसी गाड़ी से स्पेशल सेल कोर्ट और एजेंसी के दफ्तर लाने और ले जाने के लिए इस्तेमाल करती है. तहव्वुर राणा के खिलाफ क्या-क्या कानूनी कार्रवाई हुई? अक्टूबर 2009 में, तहव्वुर राणा और हेडली को अमेरिकी अधिकारियों ने डेनमार्क में जाइलैंड्स-पोस्टेन अखबार के आफिस पर हमला करने की कथित साजिश के लिए गिरफ्तार किया था, जिसने कार्टून पब्लिश किए थे. इस जांच से मुंबई हमलों में उसकी संलिप्तता का पता चला. जून 2011 में, अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में तीन सप्ताह की सुनवाई के बाद, राणा को लश्कर-ए-तैयबा को मदद करने और डेनिश अखबार के खिलाफ विफल साजिश में उसकी भूमिका के लिए दोषी ठहराया गया था. तहव्वुर राणा को अमेरिकी अदालत में मुंबई हमलों में प्रत्यक्ष भागीदारी के आरोपों से मुक्त कर दिया गया था, फिर भी उसे 17 जनवरी, 2013 को 14 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी. सजा सुनाते समय जज ने साजिश को “कायरतापूर्ण” कहा था. इस बीच, हेडली ने 12 आतंकवाद के आरोपों में दोषी होने की दलील दी और उसे 35 साल की जेल की सजा सुनाई गई. अधिकारियों के साथ हेडली के सहयोग, जिसमें राणा के खिलाफ गवाही देना भी शामिल था – उसे मौत की सजा और प्रत्यर्पण से बचने में मदद की. राणा के खिलाफ सबूत पर्याप्त थे. मुकदमे के दौरान, रिकॉर्ड की गई बातचीत के टेप पेश किए गए, जिनमें सितंबर 2009 के टेप भी शामिल थे. अन्य बातचीत में, राणा ने हेडली से कहा था कि मुंबई हमलों में शामिल हमलावरों को पाकिस्तान का सर्वोच्च मरणोपरांत सैन्य सम्मान मिलना चाहिए, जिससे आतंकवादियों की कार्रवाइयों के प्रति उसके समर्थन का पता चलता है. तहव्वुर राणा के भारत आगमन पर क्या तैयारियां की गई हैं? भारत ने तहव्वुर राणा को कानूनी सजा देने के लिए तमाम तैयारियां की हैं. भारत से एनआईए के इंसपेक्टर जनरल रैंक के अधिकारी आशीष बत्रा के नेतृत्व में एक मल्टी-एजेंसी टीम तहव्वुर राणा को हिरासत में लेने के लिए अमेरिका गई थी. टीम में सब-इंसपेक्टर जनरल रैंक की अधिकारी जया रॉय और एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के साथ-साथ तीन खुफिया एजेंसी के अधिकारी शामिल हैं. वे रविवार को “आत्मसमर्पण वारंट” की पुष्टि प्राप्त करने के बाद अमेरिका के लिए रवाना हुए, जिसके तहत राणा को भारतीय अधिकारियों को सौंपा गया.   भारत पहुंचने पर, तहव्वुर राणा को हिरासत के लिए नई दिल्ली में एनआईए अदालत में पेश किया जाएगा. पूछताछ और जांच के शुरुआती कुछ हफ्तों तक उसके एनआईए की हिरासत में रहने की उम्मीद है. बाद में, मुंबई क्राइम ब्रांच मुंबई हमलों की आगे की जांच के लिए उसकी हिरासत की मांग करेगी. नामित जेलों में हाई सिक्योरिटी की व्यवस्था की गई है, जिसमें राणा की गतिविधियों पर 24/7 निगरानी रखने के लिए इन-बिल्ट बाथरूम सुविधाओं के साथ सीसीटीवी कैमरे शामिल हैं. NIA, RAW, SWAT Team और स्पेशल प्लेन… वो टीम जो तहव्वुर राणा को इंडिया ला रही है   2008 के मुंबई आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर राणा को आज अमेरिका से प्रत्यर्पित कर भारत लाया जा रहा है. उसे स्पेशल प्लेन से राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (NIA) और RAW की टीम भारत ला रही है. यह विमान किसी भी वक्त दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड कर सकता है. एनआई और RAW की संयुक्त टीम की तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण में अहम भूमिका है. सूत्रों का कहना है कि एनआईए की DIG जया रॉय ने मंगलवार को तहव्वुर राणा के सरेंडर वॉरंट पर साइन किए थे, जिसके बाद उसे भारत प्रत्यर्पित किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी. राणा को लेकर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की टीम विशेष विमान से बुधवार सुबह लगभग 6.30 बजे दिल्ली के लिए रवाना हुई थी. इस दौरान एनआईए टीम की अगुवाई सदानंद दाते कर रहे हैं. वह महाराष्ट्र कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं. 26 नवंबर 2008 को पाकिस्तान से आए लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों ने जब मुंबई पर हमला किया था, तब सदानंद दाते मुंबई क्राइम ब्रांच में कार्यरत थे. भारत पहुंचते ही एनआईए की टीम आधिकारिक रूप से राणा को हिरासत में ले लेगी. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को भी हाई अलर्ट कर दिया गया है. साथ ही SWAT कमांडोज को भी एयरपोर्ट पर तैनात किया गया है. इसके अलावा एयरपोर्ट के बाहरी क्षेत्र में सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (CAPF) की सिक्योरिटी विंग और स्थानीय पुलिस मुस्तैद रहेगी. तहव्वुर राणा को सीधे एनआईए के दफ्तर लाया जाएगा. एनआईए दफ्तर और उसके आसपास हाई लेवल सिक्योरिटी है. राणा को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया जा सकता है. कहा जा रहा है कि सुरक्षा कारणों से उसे वर्चुअली ही एनआईए जज के समक्ष पेश किया जाएगा. पेशी से पहले उसका मेडिकल टेस्ट किया जाएगा. तहव्वुर राणा को दिल्ली की तिहाड़ जेल के हाई-सिक्योरिटी वॉर्ड में रखा जाएगा. जेल प्रशासन ने सुरक्षा के विशेष बंदोबस्त किए हैं.  केंद्र सरकार ने इस मामले में एडवोकेट नरेंद्र मान को स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त किया है. उन्हें तीन साल की अवधि के लिए या फिर केस का ट्रायल पूरा होने तक यह जिम्मेदारी दी गई है. मान पहले भी कई मामलों में सीबीआई का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. कौन है तहव्वुर राणा? तहव्वुर राणा का जन्म पाकिस्तान में हुआ था. उसने आर्मी मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई की और पाकिस्तान आर्मी … Read more

भारत के अधिकांश हिस्सों में गर्मी का कहर जारी, इन 8 राज्यों में प्रचंड गर्मी का अलर्ट लेकिन कई राज्यों में होगी बारिश

नई दिल्ली भारत के अधिकांश हिस्सों में गर्मी का कहर जारी है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों में लू चलने और तापमान में बढ़ोतरी के कारण मौसम विभाग ने हीटवेव का येलो अलर्ट जारी किया है। हालांकि, राहत की खबर यह है कि आने वाले दिनों में कई राज्यों में बारिश का अनुमान है, जिससे कुछ हद तक तापमान में गिरावट हो सकती है। दिल्ली और 8 अन्य राज्यों में हीटवेव का अलर्ट मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली और 8 अन्य राज्यों में अगले कुछ दिनों तक हीटवेव की स्थिति बनी रह सकती है। इनमें राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली शामिल हैं। इन राज्यों में 10 अप्रैल तक लू की स्थिति बनी रहेगी। मुंबई और पड़ोसी जिलों में येलो अलर्ट मुंबई और इसके पड़ोसी जिले ठाणे, पालघर, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग में भी गर्मी का प्रकोप जारी है। आईएमडी ने इन इलाकों में 10 अप्रैल तक उमस और गर्मी के साथ येलो अलर्ट जारी किया है। डॉक्टरों ने नागरिकों को हीटस्ट्रोक, मांसपेशियों में ऐंठन और चकत्ते जैसी समस्याओं से बचने के लिए आवश्यक एहतियात बरतने की सलाह दी है। दिल्ली में बारिश की संभावना दिल्लीवासियों के लिए राहत की खबर यह है कि 48 घंटे बाद हल्की बारिश की संभावना है। मौसम विभाग के वैज्ञानिक डॉ. नरेश कुमार ने बताया कि 11 अप्रैल तक दिल्ली-एनसीआर में बारिश हो सकती है, जिससे तापमान में थोड़ी राहत मिल सकती है। उत्तर-पश्चिम भारत के अन्य क्षेत्रों में भी लू का प्रभाव जारी रहेगा, लेकिन 10 अप्रैल के बाद बारिश की संभावना जताई गई है। दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में बारिश का दौर जब उत्तर भारत में तापमान बढ़ रहा है, वहीं दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में बारिश का दौर शुरू हो चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, तमिलनाडु, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक और पूर्वोत्तर राज्यों में 12 अप्रैल तक हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इन क्षेत्रों में तेज हवाएं भी चलने की संभावना है। इसके अलावा, बिहार में आज हल्की बारिश और ओलावृष्टि का अनुमान जताया गया है। ओडिशा में बारिश और येलो अलर्ट ओडिशा के विभिन्न जिलों में बारिश की संभावना है, और इसके लिए येलो अलर्ट भी जारी किया गया है। रायगढ़, कोरापुट, मयूरभंज और कालाहांडी जैसे जिलों में भारी बारिश हो सकती है।इस मौसम में सभी को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है, खासकर गर्मी और उमस से बचने के लिए।

मुंबई-दुबई के बीच पानी के नीचे चलने वाली ट्रेन का प्लान, 2 घंटे में तय करेगी 2000 किमी की दूरी

नई दिल्‍ली  मुंबई और दुबई के बीच पानी के नीचे चलने वाली ट्रेन का प्लान है। यह ट्रेन दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय बहुत कम कर देगी। संयुक्‍त अरब अमीरात (UAE) का नेशनल एडवाइजर ब्यूरो इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। अगर सब ठीक रहा तो 2030 तक यह ट्रेन शुरू हो सकती है। इससे मुंबई और दुबई के बीच 2,000 किलोमीटर की दूरी सिर्फ 2 घंटे में तय की जा सकेगी। यह बुलेट ट्रेन से भी तेज होगी और पानी के अंदर चलेगी। अब इस प्रोजेक्ट के बारे में थोड़ा विस्तार से जानते हैं। मुंबई और दुबई के बीच अभी हवाई जहाज से यात्रा करने में काफी समय लगता है। लेकिन, पानी के नीचे चलने वाली ट्रेन बन जाती है तो यह समय बहुत कम हो जाएगा। इकनॉमिक टाइम्‍स की रिपोर्ट के अनुसार, इस ट्रेन की स्पीड बहुत ज्यादा होगी। यह ट्रेन 600 से 1,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी। एक साल पहले शुरू हुआ था प्रोजेक्‍ट यह प्रोजेक्ट कुछ साल पहले शुरू हुआ था। लेकिन, अभी तक इसे पूरी तरह से मंजूरी नहीं मिली है। इस ट्रेन से सिर्फ लोग ही नहीं, बल्कि सामान भी ले जाया जा सकेगा। इसमें कच्चा तेल (क्रूड) भी शामिल है। इस ट्रेन में सफर करने वाले लोग पानी के अंदर की दुनिया को भी देख सकेंगे। नेशनल एडवाइजर ब्यूरो का दावा है कि उन्होंने एक वीडियो भी बनाया है। इस वीडियो में दिखाया गया है कि ट्रेन बनने के बाद कैसी दिखेगी। वीडियो को YouTube पर अपलोड किया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस प्रोजेक्ट में बहुत ज्यादा पैसा लगेगा। यह अरबों डॉलर का प्रोजेक्ट है। क्या है अंडरवाटर रेल प्रोजेक्ट नेशनल एडवाइजर ब्यूरो लिमिटेड ने इस प्रोजेक्ट का आइडिया 6 साल पहले यूएई-इंडिया कॉन्क्लेव अबू-धाबी में दिया था. अब्दु्ल्ला शेही ने इस प्रोजेक्ट की जो रूपरेखा खीची है उसके अनुसार इस प्रोजेक्ट में अल्ट्रा-स्पीड फ्लोटिंग ट्रेनों के माध्यम से भारत के मुंबई को दुबई के फुजैराह से जोड़ने की योजना है. इस परियोजना का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना है. फुजैराह बंदरगाह से भारत को तेल का निर्यात होगा और मुंबई के उत्तर में नर्मदा नदी से अतिरिक्त पानी को दुबई लाया जाएगा.  इसके अलावा इस रूट पर ट्रेनें चलेंगी जिससे यात्री भी मुंबई से दुबई और दुबई से मुंबई आ जा सकेंगे. अब्दुल्ला अल शेही के अनुसार अगर ये प्रोजेक्ट सफल होता है तो कई अन्य रुट पर विचार किया जा सकता है. और इसके दायरे में पाकिस्तान, बांग्लादेश के शहर भी आएंगे. अल शेही ने कहा कि हम इस क्षेत्र के लगभग 1.5 अरब लोगों के बारे में बात कर रहे हैं. उनके लिए विमान के बजाय ट्रेन का उपयोग करना आसान होगा. समंदर के अंदर से होकर गुजरने वाले इस रेल रूट की लंबाई लगभग 2000 किलोमीटर होगी. और इसकी गति 600 किलोमीटर प्रति घंटे से लेकर 1000 किलोमीटर प्रति घंटे तक होगी.   अल शेही के अनुसार, ट्रेन को इलेक्ट्रोमैग्नेट का उपयोग करके टनल में उठा दिया जाएगा. इसे मैग्लेव तकनीक के रूप में जाना जाता है, जो ट्रेन को 1,000 किमी प्रति घंटे की गति तक पहुंचाएगा. इस तरह से दुबई से मुंबई तक की यात्रा मात्र 2 घंटे में पूरी हो सकेगी. अभी विमान से इस सफर को पूरा करने में 2-3 घंटे का समय लगता है. बता दें कि मैग्लैव तकनीक का इस्तेमाल कर ही जापान और चीन में बुलेट ट्रेनें चलती हैं. यह तकनीक ट्रेन को चुंबकीय बल से हवा में उठाकर घर्षण कम करती है, जिससे 1,000 किमी/घंटे तक की रफ्तार संभव होती है. उन्होंने कहा कि ट्रेन कंक्रीट सुरंगों से होकर गुजरेगी जो अरब सागर की सतह से 20-30 मीटर नीचे डूबी होंगी. इन सुरंगों को स्थिरता प्रदान करने के लिए एंकर किया जाएगा. नेशनल एडवाइजर ब्यूरो लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अल शेही का मानना है कि इस परियोजना के साथ, UAE यात्रियों और माल दोनों के लिए अरब की खाड़ी में भारत का प्रवेश द्वार बन जाएगा, और यह यूएई की राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए एक रणनीतिक बदलाव होगा. क्रांतकारी विचारों के लिए जाना जाता है नेशनल एडवाइजर ब्यूरो बता दें कि नेशनल एडवाइजर ब्यूरो लिमिटेड एक स्टार्ट अप और बड़े बिजनेस घरानों के लिए काम करने वाला एक सलाहकार फर्म है. दुबई की पानी की समस्या को खत्म करने के लिए इस कंपनी ने अंटार्कटिका से हिमखंड (आइसबर्ग) को खींचकर दुबई के समंदर तक लाने का क्रांतिकारी विचार दिया है. फिर इस आइसबर्ग से पीने योग्य पानी बनाने का विचार पेश किया गया है. क्या दुनिया में चल रही है ऐसी ट्रेंने चैनल टनल (यूके-फ्रांस) इसका सबसे मशहूर उदाहरण है. जो इंग्लैंड और फ्रांस को जोड़ता है. यह 50.45 किलोमीटर लंबी सुरंग 1994 में खुली थी. इसकी गहराई 75 मीटर तक है. इसमें यूरोस्टार ट्रेनें 160 किमी/घंटे की रफ्तार से चलती हैं. भारत ने हाल ही में शुरू किया है अंडरवाटर मेट्रो बता दें कि भारत ने भी हाल ही में अंडरवाटर मेट्रो के सफल संचालन में कामयाबी पाई है. इसे एक साल पहले देश में शुरू किया गया है. यह 520 मीटर लंबी सुरंग है, जो हावड़ा और कोलकाता को जोड़ती है. अंडरवॉटर मेट्रो सर्विस कोलकाता मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के हावड़ा मैदान-एस्प्लेनेड सेक्शन का हिस्सा है. यह देश की पहली अंडरग्राउंड मेट्रो टनल है, जो हुगली नदी के दोनों छोर पर बसे दो शहरों को जोड़ेगी. इसके लिए 3.8 किलोमीटर की दो अंडरग्राउंड टनल तैयार की गई हैं, जिसमें 520 मीटर का हिस्सा पानी के नीचे है. इसे 45 सेकेंड में क्रॉस किया जाता है. हालांकि, मुंबई-दुबई प्रोजेक्ट की विशाल दूरी (2,000 किमी) और गहरे समुद्र में निर्माण इसे दुनिया में अपनी तरह का सबसे बड़ा और जटिल प्रोजेक्ट बनाता है. दुनिया में दुबई-मुंबई अंडरवाटर रेल प्रोजेक्ट जैसे कई मिशन पर काम हो रहा है. चीन की योजना समंदर के जरिये रूस और कनाडा को जोड़ने की है. खर्च का अनुमान इस प्रोजेक्ट की लागत का सटीक अनुमान लगाना अभी मुश्किल है क्योंकि यह योजना प्रारंभिक चरण में है. लेकिन चैनल टनल (यूके-फ्रांस) के बनने में लगे खर्चे के आधार पर इसका अनुमान लगाया जा सकता है. चैनल टनल की लागत 1994 में लगभग 21 … Read more

इस बार बढ़ेंगे लू के दिन 10 से 12 दिनों के ऐसे कई दौर पड़ेंगे : एक्सपर्ट

नई दिल्ली उत्तर और पश्चिम भारत में इस वक्त आसमानी आफत से लोग परेशान हैं. अप्रैल के पहले हफ्ते में जिस तरह से मई जैसी गर्मी पड़ रही है, उससे लोग हैरान हैं, लोग डरे हुए हैं कि इस बार पिछले साल से भी ज्यादा गर्मी पड़ी तो क्या होगा? आखिर इससे राहत कब मिलेगी? साल 2024 को अब तक का सबसे गर्म साल माना गया था पिछले साल देश ने 1901 के बाद सबसे ज्यादा गर्मी झेली लेकिन जिस तरह से अप्रैल में ही गर्मी जला रही है उसने बता दिया है कि इस बार गर्मी पिछले साल का रिकॉर्ड तोड़ देगी अब सवाल ये है कि क्या साल 2025 सबसे गरम साल के रूप में याद किया जाएगा? अप्रैल में ये हाल तो मई-जून में क्या होगा? उत्तर भारत के अधिकतर शहरों का यही हाल है. गर्मी और लू की वजह से बाहर निकलना मुश्किल है. घर से बाहर जाने से पहले इसी तरह से तैयार होना पड़ता है. गर्मी को लेकर लोगों का एक ही सवाल है कि मई-जून में क्या होगा? कुछ साल पहले तक इन्हीं दो महीनों में इस तरह की गर्मी पड़ती थी लू के थपेड़े झेलने पड़ते हैं लेकिन इस बार अप्रैल में ये सब देखकर लोग हैरान हैं. दो दिन अभी और सताएगी गर्मी वैसे तो पूरे उत्तर भारत में गर्मी डराने में लगी है, दिल्ली-एनसीआर वालों की हालत भी खराब है. इस सीजन में ये पहली बार है जब दिल्ली में पारा 40 डिग्री के पार पहुंचा. दिल्ली में हफ्ते के पहले चार दिन तापमान 40 डिग्री या उसके पार जाने की संभावना है गुरुवार को भी तापमान 40 के पार रहेगा. मौसम वैज्ञानिक का कहना है कि दिल्ली को लू की श्रेणी में रख सकते हैं. राजस्थान में यही हाल है. दिन-रात के तापमान ज्यादा है और अधिकतम तापमान 45 डिग्री तक चला गया है. पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और NCR के इलाकों में यही कंडीशन है और 2 दिन तक ऐसा ही मौसम रहेगा. दिल्लीवालों के लिए दो दिन गर्मी के लिहाज से बहुत ही भारी रहने वाले हैं यानी कि सोमवार से शुरू हुई भीषण गर्मी गुरुवार तक जारी रहेगी.  तापमान में गिरावट होने का अनुमान मौसम विभाग ने ‘येलो’ अलर्ट के दौरान लोगों को गर्मी की चपेट में आने से बचने के लिए हल्के-फुल्के और हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहनने और अपने सिर को कपड़े, टोपी या छाते से ढकने की सलाह दी है.  IMD वैज्ञानिक नरेश कुमार के मुताबिक, इस तरह हफ्ते के आखिरी दिनों में दिल्लीवालों को गर्मी से कुछ हद तक राहत मिलेगी. दिल्ली समेत उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान में गिरावट होने का अनुमान है. क्या 2025 बनेगा अब तक का सबसे गर्म साल? पिछले साल भारत में 536 हीटवेव यानी लू देखी गईं, जो 14 सालों में सबसे ज़्यादा थी. पिछले साल पहली हीटवेव 5 अप्रैल को दर्ज की गई थी, वहीं इस बार सोमवार यानी 7 अप्रैल को इस मौसम में लू का पहला दिन था. चिंता की बात ये है कि देश में इस बार उम्मीद से कहीं ज्यादा गर्मी पड़ने वाली है. भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, इस साल देश के उत्तर और पश्चिम के राज्यों यानी हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, दिल्ली में लू के दिनों की संख्या दोगुनी होने की आशंका है. इस बार बढ़ेंगे लू के दिन आमतौर पर अप्रैल से जून के महीनों में लगातार 5-6 दिन लू चलती है, लेकिन इस बार 10 से 12 दिनों के ऐसे कई दौर आ सकते हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि अगर हीटवेव के दिनों की संख्या दोगुनी होती है तो 2025 अब तक का सबसे गर्म साल होगा. ऐसे में पारा सामान्य से 5 डिग्री या इससे भी ज्यादा रह सकता है. तो आगे गर्मी से बड़ी जंग लड़नी अभी बाकी है, जिसका ट्रेलर अप्रैल की शुरुआत में ही दिखने लगा है.  

भारत ने बांग्लादेश को दिया झटका, ट्रांसशिपमेंट की सुविधा की खत्म, कई देशों को नहीं बेच पाएगा सामान

नई दिल्ली भारत ने बांग्लादेश को दी गई ट्रांसशिपमेंट की सुविधा खत्म कर दी है। इससे बांग्लादेश का भूटान, नेपाल और म्यांमार के साथ व्यापार प्रभावित हो सकता है। इस सुविधा के तहत बंदरगाहों और हवाई अड्डों के रास्ते में भारतीय भूमि सीमा शुल्क स्टेशनों का उपयोग करके बांग्लादेश से तीसरे देशों को निर्यात कार्गो की अनुमति दी गई थी। मुख्य रूप से परिधान क्षेत्र के भारतीय निर्यातकों ने सबसे पहले सरकार से पड़ोसी देश से यह सुविधा वापस लेने का आग्रह किया था। सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स (सीबीआईसी) ने इस बारे में एक सर्कुलर जारी किया है। भारत के रास्ते सामान भेजता था बांग्लादेश इसमें बोर्ड ने 29 जून, 2020 के अपने पुराने आदेश को रद कर दिया है। उसमें बांग्लादेश से आने वाले सामान को भारत के रास्ते दूसरे देशों में भेजने की अनुमति दी गई थी। यह सामान जमीन के रास्ते भारतीय बंदरगाहों और हवाई अड्डों तक पहुंचता था। इसका मकसद यह था कि बांग्लादेश आसानी से भूटान, नेपाल और म्यांमार जैसे देशों को सामान भेज सके। लेकिन शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तल्खी आई है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (फियो) के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा, ‘अब हमारे पास अपने कार्गो के लिए अधिक हवाई क्षमता होगी।’ नए आदेश के बाद सुविधा बंद एईपीसी के अध्यक्ष सुधीर सेखरी ने कहा था कि लगभग 20-30 लोडेड ट्रक हर दिन दिल्ली आते हैं, जिससे कार्गो की सुचारू आवाजाही धीमी हो जाती है और एयरलाइंस इसका अनुचित लाभ उठा रही हैं। इससे हवाई मालभाड़े में अत्यधिक वृद्धि हो जाती है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) का कहना है कि नए आदेश के बाद यह सुविधा तुरंत बंद कर दी गई है। हालांकि जो सामान पहले से ही भारत में आ चुका है, उसे पुराने नियमों के अनुसार बाहर जाने दिया जाएगा।  

हरिद्वार की जिला कारागार में बंद 15 कैदी HIV पॉजिटिव, मचा हड़कंप, अलग बैरक में किया शिफ्ट

हरिद्वार उत्तराखंड में हरिद्वार की जिला कारागार से चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जेल में बंद 15 कैदी एचआईवी पॉजिटिव मिले हैं। इसके बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। कैदियों के हेल्थ चेकअप के दौरान 15 लोगों में एचआईवी संक्रमित की पुष्टि हुई है। इसके बाद जेल प्रशासन ने एचआईवी पॉजिटिव कैदियों को अलग बैरक में शिफ्ट कर दिया, जहां उनका इलाज किया जा रहा है। जेल में बंद अन्य कैदियों के अंदर भी भय का माहौल है। हरिद्वार के वरिष्ठ जेल अधीक्षक के अनुसार, सात अप्रैल को जिला कारागार में विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर स्वास्थ्य कैंप लगा था। जेल में बंद सभी कैदियों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया था, जिसमें 15 कैदियों में एचआईवी की पुष्टि हुई। सभी पॉजिटिव कैदियों को एक ही बैरक में रखा गया है। हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि जेल में बंद 15 कैदी कैसे एचआईवी पॉजिटिव हो गए। गौरतलब है कि वर्ष 2017 में भी मेडिकल जांच के दौरान हरिद्वार जेल में बंद 16 कैदी एचआईवी पॉजिटिव मिले थे। बता दें कि हरिद्वार जिला कारागार में वर्तमान में करीब 1100 कैदी बंद हैं। एचआईवी की पुष्टि के बाद अब जेल प्रशासन में स्वास्थ्य विभाग की टीम अलर्ट मोड में है और उनका इलाज किया जा रहा है। बता दें कि एड्स एक ऐसी जानलेवा बीमारी है जो मानवीय प्रतिरक्षी अपूर्णता विषाणु (एचआईवी) संक्रमण के बाद होती है। एचआईवी संक्रमण के पश्चात मानवीय शरीर की प्रतिरोधक क्षमता घटने लगती है। एड्स का पूर्ण रूप से उपचार अभी तक संभव नहीं हो सका है। एचआईवी संक्रमित व्यक्ति में एड्स की पहचान संभावित लक्षणों के दिखने के पश्चात ही हो पाती है। रोग रोकथाम एवं निवारण केंद्र द्वारा एड्स के संभावित लक्षण बताए गए हैं। एचआईवी संक्रमित व्यक्ति, जो किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित नहीं है, में एड्स के लक्षणों की जांच विशेष रक्त जांच (सीडी4 प्लस कोशिका गणना) के आधार पर की जा सकती है। एचआईवी संक्रमण का अर्थ यह नहीं है कि वह व्यक्ति एड्स से भी पीड़ित हो। एड्स के लक्षण दिखने में 8 से 10 वर्ष तक का समय लग सकता है। एड्स की पुष्टि चिकित्सकों द्वारा जांच के पश्चात ही की जा सकती है। एचआईवी संक्रमण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को इस हद तक कम कर देता है कि इसके बाद शरीर अन्य संक्रमणों से लड़ पाने में अक्षम हो जाता है।

मोदी कैबिनेट ने लिए बड़े फैसले, रेल लाइन प्रोजेक्ट, जीरकपुर बाईपास समेत तीन परियोजनाओं को दी मंजूरी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इनमें जीरकपुर बाईपास निर्माण, तिरुपति-पाकला-कटपडी सिंगल रेलवे लाइन का दोहरीकरण और कृषि सिंचाई योजना के तहत जल प्रबंधन का आधुनिकीकरण शामिल हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य राज्य की यातायात सुविधाओं को सुधारना, जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। कैबिनेट ने पंजाब और हरियाणा में स्थित जीरकपुर बाईपास के निर्माण को मंजूरी दी। यह बाईपास छह लेन का होगा और इसकी कुल लंबाई 19.2 किलोमीटर होगी। यह परियोजना प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत एकीकृत परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है। बाईपास एनएच-7 (जीरकपुर-पटियाला) के जंक्शन से शुरू होकर एनएच-5 (जिरकपुर-परवाणू) के जंक्शन तक जाएगा। इसके निर्माण से जीरकपुर और पंचकूला के अत्यधिक शहरीकृत और भीड़-भाड़ वाले इलाकों से बचा जा सकेगा। यह परियोजना पटियाला, दिल्ली, मोहाली एरोसिटी से आने वाले यातायात को डाइवर्ट करके हिमाचल प्रदेश के लिए सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, जिससे इन क्षेत्रों में यातायात की भीड़-भाड़ कम होगी। इस परियोजना की कुल लागत 1,878.31 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। इसका उद्देश्य यात्रा समय को कम करना और मुख्य शहरी मार्गों पर यातायात के निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करना है। इसके अलावा कैबिनेट ने आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के बीच तिरुपति-पाकला-कटपडी सिंगल रेलवे लाइन के दोहरीकरण को भी मंजूरी दी। इस परियोजना पर 1,332 करोड़ रुपये खर्च होगा और इसका उद्देश्य रेलवे की लाइन क्षमता को बढ़ाकर ट्रेनों की गति और सेवा को सुधारना है। यह दोहरीकरण परियोजना भारतीय रेलवे के सबसे व्यस्त खंडों में से एक में आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास को सुनिश्चित करेगा, जिससे यात्री और माल परिवहन में सुधार होगा। इस परियोजना के पूरा होने से रेलवे की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी और भारतीय रेलवे की सेवा विश्वसनीयता में सुधार होगा, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे। तीसरी महत्वपूर्ण परियोजना प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत जल प्रबंधन का आधुनिकीकरण है। इस योजना को 2025-2026 की अवधि के लिए मंजूरी दी गई है, और इसकी प्रारंभिक कुल लागत 1,600 करोड़ रुपये है। इस परियोजना का उद्देश्य मौजूदा सिंचाई नेटवर्क का आधुनिकीकरण करना और किसानों को सूक्ष्म सिंचाई सुविधाएं प्रदान करना है। जल प्रबंधन के लिए एससीएडीए और इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे जल उपयोग की दक्षता में सुधार होगा। इस योजना से कृषि उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि होगी, जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी और उन्हें जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद मिलेगी। इन परियोजनाओं के माध्यम से सरकार की प्राथमिकता देश में बुनियादी ढांचे का विकास करना, जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और आर्थिक विकास को गति देना है।

मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण के फैसले का हम स्वागत करते हैं: कांग्रेस नेता नाना पटोले

अहमदाबाद महाराष्ट्र कांग्रेस के विधायक एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने बुधवार को मिडिया से बात करते हुए मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण पर खुशी जताई। कांग्रेस नेता नाना पटोले ने कहा मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण के फैसले का हम स्वागत करते हैं। पटोले ने कहा, ललित मोदी, नीरव मोदी और विजय माल्या जैसे लोग, जो देश का पैसा लूट कर भागे, भाजपा ने ही उनका सहयोग किया। हमारा सवाल है कि उन्हें क्यों नहीं वापस लाया गया।” यूपीए सरकार के समय के गुनहगारों को मोदी सरकार सजा दिलवा रही है, भाजपा नेताओं के इस बयान पर कांग्रेस नेता ने कहा, “सरकार किसी की भी हो, गुनहगारों को सजा मिलनी चाहिए। कांग्रेस सरकार ने हमेशा इसे प्राथमिकता दी है। भाजपा सरकार ललित मोदी, नीरव मोदी, विजय माल्या और दाऊद को भी देश में लाना चाहती थी, उसका क्या हुआ? भाजपा को इसका जवाब देना चाहिए।” गुजरात के अहमदाबाद में कांग्रेस के दो दिवसीय अधिवेशन के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि हम दलित, ब्राह्मण और मुस्लिम में उलझे हैं और ओबीसी ने हमारा साथ छोड़ दिया है। इस बयान का पटोले ने समर्थन करते हुए कहा, “जो भी राजनीतिक नुकसान होता है। उसकी चर्चा की जाती है। कांग्रेस पार्टी में लोकतंत्र है, लेकिन भाजपा में ऐसा नहीं है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह जो बोलेंगे, वही भाजपा है। ऐसे में राहुल गांधी ने जो कहा है, वो सही है।” उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी को ताकत देने के लिए अधिवेशन का आयोजन हुआ। अहमदाबाद कांग्रेस अधिवेशन से सिर्फ गुजरात ही नहीं, बल्कि पूरे देश को ताकत मिलेगी। यह सरदार पटेल और महात्मा गांधी की भूमि है। यहां से कांग्रेस को ताकत मिलती रही है और मुझे उम्मीद है कि इस अधिवेशन से कांग्रेस को पूरे देश में ताकत मिलेगी।”

राष्ट्रपति मुर्मू की स्लोवाकिया यात्रा के दौरान द्विपक्षीय साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में काम करने पर सहमति जताई

ब्रातिस्लावा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को ब्रातिस्लावा में स्लोवाकिया के प्रेसिडेंट पीटर पेलेग्रिनी के साथ मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-स्लोवाकिया संबंधों के अलग-अलग पहलुओं की समीक्षा की और विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में काम करने पर सहमति जताई। बैठक और प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान, राष्ट्रपति मुर्मू और पेलेग्रिनी ने साझे वैश्विक और क्षेत्रीय हितों के मुद्दों पर भी चर्चा की। भारतीय पक्ष की ओर से प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में राज्य मंत्री निमूबेन बंभानिया के साथ-साथ सांसद धवल पटेल, संध्या रे और वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। राष्ट्रपति ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए राष्ट्रपति पेलेग्रिनी की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता और पहल की सराहना की। दोनों नेताओं की उपस्थिति में दो एमओयू का आदान-प्रदान किया गया। इससे पहले दिन में राष्ट्रपति मुर्मू का प्रेसिडेंशियल पैलेस में प्रेसिडेंट पेलेग्रिनी ने स्वागत किया। उनका गार्ड ऑफ ऑनर के साथ औपचारिक स्वागत किया गया। लोक परिधान पहने एक जोड़े ने पारंपरिक स्लोवाक तरीके से उनका स्वागत ब्रेड और नमक के साथ किया। संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने स्लोवाकिया की यात्रा पर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध आपसी विश्वास, लोकतांत्रिक आदर्शों और वैश्विक सहयोग के साझा दृष्टिकोण पर आधारित हैं। दोनों देश विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे का समर्थन करते हैं। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि आर्थिक मोर्चे पर दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध लगातार बढ़ रहे हैं। हाल के वर्षों में व्यापार और निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह लगभग तीन दशकों में किसी भारतीय राष्ट्रपति की स्लोवाकिया की पहली यात्रा है। राष्ट्रपति दौपदी मुर्मू की स्लोवाकिया की दो दिवसीय यात्रा इस बात का संकेत देती है कि भारत स्लोवाक गणराज्य के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को कितना महत्व देता है। इससे रक्षा, विज्ञान, टेक्नोलॉजी, शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में गहन सहयोग और नई पहलों के शुरू होने की उम्मीद है।

महावीर जयन्ती पर कल देशभर में इस दिन स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी दफ्तरों और बैंकों में छुट्टी का ऐलान किया गया

नई दिल्ली अप्रैल महीना अपने साथ कई छुट्टियों और त्योहारों का बहार लेकर आता है, और इस बार 10 अप्रैल को एक खास अवसर पर पूरे देश में अवकाश रहेगा। इस दिन महावीर जयन्ती का उत्सव मनाया जाएगा, जो जैन धर्म के महानायक भगवान महावीर की जयंती है। देशभर में इस दिन स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी दफ्तरों और बैंकों में छुट्टी का ऐलान किया गया है, जिससे आपकी जरूरी कामों में रुकावट आ सकती है। अगर आपके पास कोई बैंक से संबंधित काम बाकी है, तो बेहतर होगा कि उसे पहले ही निपटा लें।  कौन-कौन से शहरों में रहेगा बैंक बंद? RBI की छुट्टी लिस्ट के मुताबिक, 10 अप्रैल को महावीर जयन्ती के कारण अहमदाबाद, आइजोल, बेलापुर, बेंगलुरु, भोपाल, चेन्नई, जयपुर, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली, रायपुर और रांची जैसे प्रमुख शहरों में सभी बैंकों में छुट्टी रहेगी। इस दिन बैंकों में कोई लेन-देन नहीं होगा, इसलिए जरूरी बैंकिंग कार्यों को पहले ही पूरा कर लें। अप्रैल में होने वाली अन्य छुट्टियां: अप्रैल का महीना त्योहारों और अवकाशों से भरा हुआ है, और यह माह राज्य स्तर पर भी विशेष महत्व रखता है। महावीर जयन्ती के बाद, 14 अप्रैल को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जयंती के साथ-साथ कई अन्य त्योहारों का आयोजन होगा, जैसे विशु, बिजू महोत्सव और तमिल नववर्ष दिवस। इसके बाद 18 अप्रैल को गुड फ्राइडे और 21 अप्रैल को गरिया पूजा जैसी महत्वपूर्ण छुट्टियां भी आएंगी। इसलिए, यदि आपके पास इस महीने कुछ महत्वपूर्ण काम हैं, तो वक्त रहते उसे निपटाना बेहद जरूरी है ताकि आप किसी भी छुट्टी या सार्वजनिक अवकाश से प्रभावित न हों।

शहरों में सड़कों के किनारे पेशाब से लोग बाज नहीं आ रहे, शख्स मंत्रालय के बाहर ही सड़क पर पेशाब करता दिख रहा

नई दिल्ली गांवों में जिस तरह खुले में शौच की समस्या अभी तक पूरी तरह से खत्म नहीं हो पाई है उसी तरह शहरों में सड़कों के किनारे पेशाब से लोग बाज नहीं आ रहे। देश की राजधानी दिल्ली भी इससे अलग नहीं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक शख्स मंत्रालय के बाहर ही सड़क पर पेशाब करता दिख रहा है। लोग इस वीडियो को शेयर कर सिविक सेंस की याद दिला रहे हैं। 6 सेकेंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक सफेंद पैंट शर्ट पहना एक शख्स फुटपाथ पर पेशाब करता दिख रहा है। उसके सामने ‘पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय’ लिखा है। लोदी रोड स्थित इस मंत्रालय के बाहर किसी कार चालक ने फुटपाथ पर पेशाब करते शख्स को टोका। वह वीडियो बनाते हुए कहता है, ‘अरे चाचा, वो मूत्रालय नहीं मंत्रालय लिखा है।’ देसी मोजितो नाम के एक्स हैंडल पर इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा गया, ‘कोई सिविक सेंस नहीं है और फिर वो सरकार को दोष देंगे। जो लोग कह रहे हैं कि सरकार को और ज्यादा पब्लिक टॉयलेट बनाना चाहिए उन्हें बता दूं कि दीवार के आगे ही पब्लिक टॉयलेट मौजूद है।’ वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। लोग तरह-तरह के कॉमेंट कर रहे हैं। कुछ लोगों ने इस पर मीम भी बना डाले तो कुछ ने इसे गंभीर समस्या बताते हुए सड़कों पर और शौचालय बनाने की मांग की। वहीं, कुछ ने इसे लोगों की आदत का मामला बताया।

दुनिया की दो बड़ी आर्थिक महाशक्तियों (अमेरिका और चीन) के बीच व्यापार युद्ध गहरा गया, पूरी दुनिया पर क्या पड़ेगा असर

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने मुख्य व्यापारिक प्रतिद्वंद्वी चीन पर 104 फीसदी का जवाबी शुल्क लगा दिया है। इससे दुनिया की दो बड़ी आर्थिक महाशक्तियों (अमेरिका और चीन) के बीच व्यापार युद्ध गहरा गया है। ट्रंप प्रशासन की नई शुल्क दरें बुधवार (9 अप्रैल) मध्यरात्रि से ही लागू हो चुकी हैं। ट्रंप ने इससे पहले 2 अप्रैल को रेसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा की थी, जिसके जरिए चीन पर तब 34 फीसदी का अतिरिक्त टैक्स लगाया गया था। इस पर पलटवार करते हुए चीन ने भी अमेरिकी सामानों के आयात पर 34 फीसदी का टैक्स लगा दिया था। चीन के पलटवार के बाद ट्रंप प्रशासन ने चीन से 24 घंटे के अंदर शुल्क हटाने को कहा था और ऐसा नहीं करने की स्थिति में चीनी वस्तुओं पर 50 फीसदी अतिरिक्त शुल्क और लगाने की धमकी दी थी। जब चीन अमेरिकी धमकी के आगे नहीं झुका तो मंगलवार तक दी गई मियाद खत्म होते ही ट्रंप प्रशासन ने चीन पर 50 फीसदी यानी कुल मिलाकर 104 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। चीन-अमेरिका व्यापार का क्या हिसाब-किताब? दोनों देशों के रुख से साफ हो गया कि कोई भी पक्ष नरमी बरतने के मूड में नहीं है और दोनों ही देश अंत तक व्यापार युद्ध लड़ने को तैयार हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर दो आर्थिक महाशक्तियों की आपसी लड़ाई की पूरी दुनिया पर क्या असर पड़ेगा। इसका अर्थ इन दोनों देशों के व्यापार आंकड़े में छिपा है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल दोनों आर्थिक दिग्गजों ने करीब 585 अरब डॉलर मूल्य के सामान का व्यापार किया था। इनमें से अमेरिका ने चीन से 440 अरब डॉलर मूल्य के सामान आयात किए, जबकि एशियाई दिग्गज ने 145 अरब डॉलर मूल्य के यूएस उत्पाद आयात किए। यानी अमेरिका का व्यापार असंतुलन 295 अरब डॉलर का रहा है, जिसे वह टैरिफ लगाकर पाटने की कोशिशों में जुटा है। क्या-क्या हो जाएगा महंगा? चीन ने अमेरिका से सबसे ज्यादा सोयाबीन आयात किया है। इसे 4.40 करोड़ सुअरों के खिलाने के लिए मंगवाया है। इसके बाद बड़ी मात्रा में अमेरिका से फार्मास्यूटिकल्स और पेट्रोलियम उत्पाद मंगवाए हैं, जबकि अमेरिका चीन से बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक्स, कम्प्यूटर और खिलौने आयात करता है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक कारों के लिए बैटरी भी चीन से ही निर्यात किया जाता है। मिडिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन से अमेरिका में होने वाले आयात में सबसे बड़ा हिस्सा स्मार्टफोन का है, जो कुल आयात का 9 फीसदी है। इन स्मार्टफोन्स का एक बड़ा हिस्सा अमेरिका स्थित बहुराष्ट्रीय कंपनी एप्पल के लिए चीन में बनाया जाता है। अब ट्रंप के 104 फीसदी के जवाबी शुल्क से यह स्पष्ट हो गया है कि अमेरिका में इन सामानों की कीमतों में भारी उछाल आने की संभावना है और इसका बोझ कहीं न कहीं अमेरिका जनता की जेब पर ही पड़ने वाला है। हालांकि, इस प्रतिशोध में अमेरिका से आयातित सामान की कीमतें भी चीन में बढ़नी तय हैं, जिसका बोझ चीनियों को उठाना पड़ेगा। इस जंग का पूरी दुनिया पर क्या असर? इस व्यापार युद्ध का पहला असर तो दुनिया भर के शेयर बाजारों पर दिखने लगा है। बुधवार को चीन का ब्लू-चिप सीएसआई300 इंडेक्स 1.2 प्रतिशत नीचे खुला, जबकि शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 1.1 प्रतिशत गिरा। भारतीय शेयर बाजार में भी बुधवार को गिरावट देखने को मिली है। बाजा विशेषज्ञ इस टैरिफ वार से ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावट आने और मंदी आने की आशंका जता रहे हैं। विशेषज्ञ चीन की जीडीपी में गिरावट की आशंका भी जता रहे हैं। गोल्डमैन सैक्स और बीएनपी पारिबा के अनुसार, 54 फीसदी टैरिफ पर ही 2025 में चीन की जीडीपी में 2.4 फीसदी की गिरावट आ सकती है। बड़ी बात यह है कि कोविड महामारी और आर्थिक मंदी से पहले ही चीनी अर्थव्यवस्था डगमग हाल में है और अभी संभल ही रही थी, तभी अमेरिकी टैरिफ से एक बार फिर चीन का आर्थिक संतुलन बिगड़ सकता है। हालांकि, गौर करने वाली बात यह भी है कि इस व्यापार युद्ध में चीन अकेली ऐसी अर्थव्यवस्था नहीं होगी जिसे संकट झेलना पड़ेगा। अमेरिका को तो भुगतान करना ही होगा, साथ में कई पड़ोसी वियतनाम, दक्षिण कोरिया और अन्य देशों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। वैश्विक अर्थव्यवस्था में चीन-अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 43% अमेरिका में चीनी माल के दाम में बढ़ोत्तरी की वजह से उसकी मांग घट सकती है। इसके फलस्वरूप चीनी सामान आस-पड़ोस के बाजारों पर कब्जा कर सकता है। इससे उन देशों में उत्पादन, रोजगार और बाजार प्रभावित हो सकता है। इससे कई देशों में मंदी आ सकती है। भारत की अर्थव्यवस्था भी इससे अछूती नहीं रह सकती है। वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फिति और मंदी का खतरा इसलिए भी गना हुआ है क्योंकि वैश्विक अर्थव्यस्था में IMF के अनुसार अमेरिका और चीन की हिस्सेदारी करीब 43 फीसदी की है।

भारत से यूरोप तक बनेगा सीधा रास्ता, अब इस प्रोजेक्ट पर तेजी लाने को लेकर पीएम मोदी की सऊदी अरब के नेताओं से होगी बात

नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी अप्रैल के तीसरे सप्ताह में सऊदी अरब जा सकते हैं। अभी तारीखों पर अंतिम फैसला होना बाकी है, लेकिन उनका दौरा करीब-करीब तय हो गया है। दो दिनों का उनका यह दौरा होगा, जिसमें वह सऊदी अरब के नेताओं के साथ कारोबार, निवेश, ऊर्जा और रक्षा संबंधों को लेकर बात करेंगे। इसके अलावा एक बड़ा एजेंडा IMEC यानी इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकनॉमिक कॉरिडोर भी होगा। इस पर जी-20 समिट के दौरान सहमति बनी थी और अब इस प्रोजेक्ट पर तेजी लाने को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी की सऊदी अरब के नेताओं से बात होगी। भारत से यूरोप तक बनने वाले रास्ते में सऊदी अरब भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो दुनिया का सबसे ताकतवर इस्लामिक मुल्क है। चार सालों के अंतराल के बाद पीएम नरेंद्र मोदी सऊदी अरब पहुंचने वाले हैं। दिल्ली में 2023 में जी-20 समिट का आयोजन हुआ था। इसी दौरान IMEC को लेकर सहमति बनी थी। यह कॉरिडोर भारत के लिए भू-राजनीतिक और आर्थिक तौर पर बेहद अहम है। इस प्रोजेक्ट के तहत भारत से मिडल ईस्ट होते हुए यूरोप तक जो गलियारा जाएगा, उसमें रेल, रोड नेटवर्क शामिल होगा। इसके अलावा सड़क परिवहन भी शामिल रहेगा। पहले चरण में यह भारत से मध्य पूर्व तक होगा। इसके अलावा दूसरा हिस्सा मध्य पूर्व से यूरोप के बीच होगा। पहले पार्ट को पूर्वी कॉरिडोर कहा गया है, जो भारत के मुंबई से होते हुए मिडल ईस्ट तक जाएगा। फिर मिडल ईस्ट से सऊदी अरब तक के रास्ते को नॉदर्न कॉरिडोर कहा जाएगा। IMEC कॉरिडोर में इलेक्ट्रिसिटी केबल, हाइड्रोजन पाइपलाइन और हाईस्पीड डेटा केबल भी शामिल होंगे। इस कॉरिडोर में भारत, अमेरिका, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, इटली, फ्रांस और जर्मनी शामिल होंगे। इसके अलावा यूरोपियन यूनियन भी इसका हिस्सा है। इस रूट पर भारत के तीन पोर्ट शामिल होंगे- गुजरात के मुंद्रा और कांडला बंदरगाह। इसके अलावा नवी मुंबई का जवाहर लाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट भी इसका हिस्सा होगा। फिर मध्य पूर्व देश फुजैराह, जेबेल अली और अबू धाबी बंदरगाह भी इसमें शामिल होंगे। सऊदी अरब के दम्मम और रास अल खैर भी इस कॉरिडोर का हिस्सा होंगे। दिलचस्प बात है कि रेलवे लाइन भी इस कॉरिडोर में होगी और इसका हिस्सा इजरायल भी होगा। रेलवे लाइन संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह पोर्ट से गुजरेगी। इसके अलावा इजरायल के हाइफा पोर्ट को भी रेलवे लाइन कनेक्ट करेगी। फिर सऊदी अरब और जॉर्डन भी इस रेल लाइन का हिस्सा होंगे। अब यूरोप की बात करें तो ग्रीस का पिराएस पोर्ट, साउथ इटली का मेसिना और फ्रांस का मार्सिले पोर्ट भी इसी रूट पर आएगा। इस प्रोजेक्ट के जरिए भारत से यूरोप तक सस्ता और सुगम सफऱ होगा। इसके अलावा मालवाहक जहाजों का सफऱ भी आसान होगा। खासतौर पर पाकिस्तान के भू-राजनीतिक महत्व को भी भारत कमतर कर पाएगा। इसके अलावा चीन के बेल्ट ऐंड रोड प्रोजेक्ट को भी यह गलियारा टक्कर दे सकेगा। खासतौर पर यूरेशिया क्षेत्र में चीन के बीआरआई को इससे टक्कर मिलेगी। अमेरिका भी इस परियोजना में खास दिलचस्पी है क्योंकि वह इसके माध्यम से एशिया से यूरोप तक चीन को टक्कर देने की कोशिश में है।

अब नए प्लान से कांपेगा ड्रैगन, चीन पर अमेरिका का दोहरा वार, टैरिफ प्लान से उड़ी नींद

वाशिंगटन जब से अमेरिका में सत्ता बदली तब से चीन की परेशानियां कम होने का नाम नहीं रही। नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी आर्थिक और रणनीतिक नीतियों से चीन के सामने बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दी है। भारी टैरिफ लगाने के बाद अब डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के लिए एक बार फिर सिरदर्दी बढ़ा दी है। अमेरिका ने हाल ही में एक ऐसा प्लान तैयार किया जिससे चीन को काफी मुश्किलें होंगी। हाल ही में पानामा नहर को लेकर एक बार फिर अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पिट हेजसेथ ने साफ शब्दों में कहा है कि अमेरिका, पनामा के साथ मिलकर चीन के प्रभाव को खत्म करेगा और इस रणनीतिक जलमार्ग पर फिर से अपना प्रभाव स्थापित करेगा। दरअसल, बीते कुछ दिनों में पिट हेजसेथ पनामा के दौरे पर थे। पिछले कई दशकों में ऐसा पहली बार हुआ जब कोई अमेरिकी रक्षा मंत्री पनामा पहुंचा। वहां उन्होंने पनामा के राष्ट्रपति होसे राउल मुलिनो से बंद कमरे में बातचीत की। इस मीटिंग में खासतौर से चीन की तरफ से पनामा नहर में हो रहे निवेश और बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता जताई गई। चर्चा के बाद पिट ने ऐलान किया कि अमेरिका और पनामा की सेनाएं मिलकर सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करेंगी। चीन का प्रभाव खत्म करने की तैयारी हेजसेथ ने कहा, “हम चीन के प्रभाव से पनामा नहर को मुक्त कराएंगे। चीन ने नहर बनाई नहीं है और न ही वो इसका संचालन करता है। ऐसे में उसे इसे एक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।” उन्होंने कहा कि अगर 1999 के बाद अमेरिका और पनामा के बीच एक नया समझौता होता है तो चीन के प्रभाव से नहर को आजाद किया जा सकता है। गौरतलब है कि पनामा नहर अमेरिका के लिए हमेशा से रणनीतिक महत्व की रही है। 20वीं सदी की शुरुआत में अमेरिका ने ही इस नहर का निर्माण किया था जो अटलांटिक और प्रशांत महासागर को जोड़ती है। दशकों तक अमेरिका इसका संचालन करता रहा, लेकिन 1977 में तत्कालीन राष्ट्रपति जिमी कार्टर के समय हुए समझौते के तहत 1999 में इसका नियंत्रण पनामा को सौंप दिया गया। पनामा नहर को लेकर फिर आक्रामक अमेरिका लेकिन डोनाल्ड ट्रंप जब दोबारा राष्ट्रपति बने तो उन्होंने इस नहर को लेकर एक बार फिर आक्रामक रुख दिखाया। उन्होंने पनामा पर अमेरिकी जहाजों से जबरन शुल्क वसूलने का आरोप लगाया था और साफ किया था कि अमेरिका इस नहर को फिर से अपने नियंत्रण में ले सकता है। फरवरी में पनामा ने अमेरिकी दबाव के चलते चीन के बेल्ट एंड रोड परियोजना से खुद को अलग कर लिया था। अब अमेरिका इस मौके को भुनाकर पनामा नहर में अपनी वापसी की राह तलाश रहा है।

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