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बैतुल लोकसभा में फिर आमने-सामने उतरे दुर्गादास और रामू टेकाम

Durgadas and Ramu Tekam face each other again in Betul Lok Sabha. चुनाव में प्रमुख पार्टियों के प्रत्याशी- भाजपा- दुर्गादास उईके, कांग्रेस- रामू टेकाम, बसपा- अशोक भलावी मुख्य मुकाबला भाजपा व कांग्रेस के बीच संभावित, बाकी पार्टियों ने अभी प्रत्याशी घोषित नहीं किए  लोकसभा क्षेत्र -2024 – बैतूल (अनुसूचित जनजाति) भोपाल। बैतूल लोकसभा सीट में तीन जिले व बैतूल, हरदा व खंडवा जिले आते हैं। यहां की आठ विधानसभा क्षेत्रों में 5 बैतूल की है। इसमें बैतूल, मुलताई, आमला, घोड़़ाडोंगरी व भैंसदेही तथा हरदा जिले की दो विधानसभा सीट हरदा व टिमरनी आते हैं। जबकि एक विधानसभा क्षेत्र खंडवा जिले की हरसूद आती है। यह सीट लंबे समय से भाजपा की पारंपरिक सीट बनती जा रही है। इस सीट से भाजपा व कांग्रेस के अलावा बसपा ने भी अपना प्रत्याशी मैदान में उतारा है। हालांकि बसपा का वोट प्रतिशत इस क्षेत्र में लगातार कम होता गया। पिछले 2019 के चुनाव में करीब पौने तीन फीसदी वोट बसपा को मिले थे। जबकि गोगपा व अन्य कोई खास वोट हािसल नहीं कर पाए थे। इस सीट से 2014 लोकसभा चुनाव में ज्याेति धुर्वे चुनाव जीती थी। बाद में उनका जाति प्रमाणपत्र का मुद्दा सुर्खियों में बना। उनके बारे में कहा गया था कि वे ओबीसी जाति की है। हालांकि बाद में अदालतों ने उनके पक्ष में फैसला दे दिया था। किंतु भाजपा ने दोबारा उन्हें टिकट नहीं दिया। हालांकि 2019 के चुनाव में भाजपा फिर से चुनाव जीत गई। यहां से भाजपा ने पेशे से शिक्षक दुर्गादास उईके को मैदान में उतारा। शिक्षक होने के साथ ही उईके की पैठ आरएसएस में थी। वे मुलताई क्षेत्र के निवासी थे, किंतु उनका शैक्षकीय जीवन करीब 26 सालों तक कोयलांचल क्षेत्र में बीता। इसी दौरान वे आरएसएस के नजदीक आए और आरएसएस की शाखाओं में जाने लगे। उनकी लगन व मेहनत को देखते हुए भाजपा ने बैतूल क्षेत्र से टिकट दे दिया। साफ-स्वच्छ छवि व मिलनसार व्यक्तित्व होने की वजह से वे 2019 का चुनाव जीत गए। इस बार पार्टी ने फिर से उन्हीं पर भरोसा जताते हुए मैदान में उतारा है। कांग्रेस में आपस में ही टिकट को लेकर नाराजगीकांग्रेस ने बैतूल लोकसभा सीट से रामू टेकाम को ही मैदान में उतारा है। पिछली बार भी कांग्रेस ने उन्हें टिकट दिया था। उन्हें दूसरी बार टिकट मिल जाने से कांग्रेस के ही दूसरे गुट में बड़े पैमाने पर नाराजगी है। यह गुट नहीं चाहता था कि रामू टेकाम को फिर से टिकट मिले। टिकट की घोषणा के बाद घोड़ाडोंगरी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके राहुल चौहान, ब्रह्मा भलावी, धर्मू सिंह सिरसाम, निलय डागा समेत अन्य नेताओं ने टिकट बदलने की मांग रखी है। बताते हैं कि एक गुट दिल्ल्ाी तक जाकर टिकट बदलने को कहा,लेकिन उन्हें समझा-बुझा कर वापस कर दिया गया। अब हालांकि सभ्ाी कांग्रेस प्रत्याशी टेकाम को जिताने के लिए काम तो शुरू कर दिए हैं, िकंतु अंदरखाने में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। टेकाम को लेकर विरोध के स्वर भी उठने लगे हैं। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगा तो आने वाले दिनों में पार्टी को नुकसान हो सकता है। उधर, इस क्षेत्र में दूसरे चरण में चुनाव होना है। इसलिए अभी सब कुछ साफ नहीं हो पाया है। होली बाद स्थिति पूरी तरह से साफ हो जाएगी। पिछले चुनाव में बैतूल की 5 में से चार सीटे कांग्रेस के पास थीयह भी रोचक है कि पिछले लोकसभा चुनाव 2019 से पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को काफी अच्छी बढ़त मिली हुई थी। मुलताई क्षेत्र से सुखदेव पांस कैबिनेट मंत्री थे। बैतूल जिले की पांच में से चार विधानसभा सीटों मुलताई, बैतूल, भैंसदेही व घोड़ाडोंगरी में कांग्रेस के विधायक थे। महज आमला क्षेत्र में ही भाजपा जीत पाई थी। पांच में से चार क्षेत्रांंे में कांग्रेस का विधायक होने के बाद भी लोकसभा चुनाव में भाजपा बंपर वोट से चुनाव जीती थी। उस वक्त कांग्रेस के विधायक अपने क्षेत्र में ही पार्टी को वोट नहीं दिलवा पाए थे। पार्टी में भ्ाी इसे लेकर आवाज उठी, किंतु बाद में सरकार िगर जाने के बाद रही सही कसर खत्म हो गई। बाद में 2023 के चुनाव में कांग्रेस पूरी तरह से साफ हो गई। बैतूल लोकसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा संख्या जनजातियों कीअभी तक का रिकार्ड है कि बैतूल लोकसभा क्षेत्र में जाति का कोई खास फैक्टर नहीं चला। इस पर तो वैसे भी मोदी फैक्टर ज्यादा प्रभावी है। इसके बावजूद बैतूल लोकसभा क्षेत्र के सभी आठों विधानसभा में से बैतूल, मुलताई, आमला व हरदा को छोड़कर बाकी चार विधानसभा क्षेत्राें में जनजातियों की संख्या सर्वाधिक है। इसीलिए 8 में से 3 विधानसभा बैतूल, मुलताई व हरदा क्षेत्र सामान्य श्रेणी के हैं, जबकि आमला क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। बाकी सभी 4 विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जन जाति के लिए आरक्षित है। लोकसभा क्षेत्र भी अनुसूचित जन जाति (एसटी) के लिए आरक्षित है। इसी वजह से यहां कोई अन्य जातिगत समीकरण काम नहीं करता। जिसकी पैठ जनजातीय समाज में होती है, वही यहां से चुनाव जीतता है। इस बार भी यही समीकरण बनने की पूरी संभावना है। बैतूल लोकसभा सीट में हरदा में जाट, गुर्जर व राजपूतों की संख्या सर्वाधिक है तो बैतूल में कुंबी, कुर्मी, पंवार व गोड़ की संख्या है। टिमरनी में गोंड़ व कोरकू की आबादी अधिक है। घोड़ाडोंगरी में गोंड सर्वाधिक हैं। मुलताई में कुंबी, पंवार बराबर की संख्या में हैं। वर्ष 2019 के चुनाव में प्रत्याशी, जीत हार का अंतर, प्राप्त वोट का प्रतिशतभाजपा से दुर्गादास उईके (चुनाव जीते) प्राप्त वोट- 8,11,248 (59.74) कांग्रेस से रामू टेकाम (हार मिली) प्राप्त वोट- 4,51,007 (33.21)जीत-हार का अंतर- 3,60,241 कुल मतदाता–17,37,437 कुल वोट पड़े– 13,57,857प्रतिशत– 78.15 वर्ष 2014 में प्रतिशत– 65.17

आचार संहिता के उल्लंघन पर पांच मिनट में होगी कार्रवाई, ऐसे करें शिकायत

Action will be taken on violation of code of conduct within five minutes, complain like this आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के मामलों की शिकायत सी-विजिल सिटीजन एप पर की जा सकती है। इसके लिए जीपीएस को ऑन रखना होगा। सी-विजिल एप पर कर सकते हैं आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायतशिकायत करते वक्त जीपीएस ऑन रखना जरूरीपांच मिनट में पहुंचेगी फ्लाइंग स्क्वायड की टीम भोपाल ! लोक सभा चुनाव की आदर्श आचरण संहिता लागू हो गई है। आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के मामलों की आनलाइन शिकायत आप भी कर सकते हैं। ऐसे किसी भी उल्लंघन के मामले का वीडियो और फोटो लेने के पांच मिनट के अंदर इसे सी-विजिल सिटीजन एप पर भेजना होगा। इसके लिए उसे मोबाइल पर जीपीएस आन रखना होगा। सी-विजिल एप को गूगल प्ले स्टोर से मोबाइल में डाउनलोड किया जा सकता है। इस एप का इस्तेमाल करने के लिए शिकायतकर्ता के मोबाइल पर जीपीएस और इंटरनेट चालू होना आवश्यक है। वीडियो दो मिनट से अधिक का नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही जिस मोबाइल से फोटो या वीडियो कैप्चर किए गए हैं शिकायत केवल उसी से की जा सकेगी। किसी दूसरे मोबाइल या कैमरे की फोटो या वीडियो अथवा पहले से स्टोर फोटो या वीडियो इस एप पर अपलोड नहीं होगी। इस तरह काम करेगी सी-विजिल एप

छिंदवाड़ा में सांसद नकुल नाथ ने दाखिल किया नामांकन

MP Nakul Nath filed nomination in Chhindwara लोकसभा चुनाव 2024 : नामांकन रैली व मानसरोवर कॉम्प्लेक्स के सामने आयोजित जनसभा में कमल नाथ के अलावा मां पूर्व सांसद अलका नाथ, जीतू पटवारी और उमंग सिंघार मौजूद रहेंगे। दीपक सक्‍सेना ने कहा कि वे नकुल नाथ की नामांकन रैली में मौजूद रहेंगे। छिंदवाड़ा। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे और सांसद नकुल नाथ आज नामांकन केे पहले पूजा अर्चना की। इस दौरान कमल नाथ की पत्नी और पूर्व सांसद अलका नाथ भी मौजूद रहीं। पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी , विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार और पूर्व मंत्री दीपक सक्सेना शामिल होंगे। दीपक सक्सेना ने हाल ही में कांग्रेस से सभी पदों से इस्तीफा दिया है और उनके बेटे अजय सक्सेना ने भाजपा की सदस्यता ली है। लेकिन कमल नाथ ने सोमवार को दीपक सक्सेना से मुलाकात की जिसके बाद अब वो रैली में शामिल होंगे। मानसरोवर कॉम्प्लेक्स के सामने आयोजित जनसभा में उपस्थित होने के उपरांत सांसद नकुलनाथ कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर नामांकन पत्र जमा करेंगे। सांसद कार्यालय द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार 26 मार्च को सांसद नकुल नाथ व पूर्व सीएम कमल नाथ नामांकन रैली व मानसरोवर कॉम्प्लेक्स के सामने आयोजित जनसभा में उपस्थित होंगे। तदोपरांत सांसद नकुलनाथ कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। तत्पश्चात पूर्व सीएम कमल नाथ जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा निर्धारित कार्यक्रमों में सम्मिलित होंगे।

भोजशाला में सर्वे करने चौथे दिन पहुंची ASI की टीम, पुलिस ने इन चीजों पर लगाया प्रतिबंध

ASI team reached Bhojshala on the fourth day to survey, police banned these things भोजशाल को लेकर हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों की तरफ से अलग-अलग दावे किए जाते रहे हैं. बीते दिनों एमपी हाईकोर्ट ने एएसआई को भोजशाला का साइंटिफिक सर्वे करने का आदेश दिया है. धार ! प्रदेश के धार जिला स्थित भोजशाला में एएसआई की टीम चौथे दिन यानी सोमवार (25 मार्च) को भी सर्वे करने पहुंची. एएसआई ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के निर्देश पर भोजशाला कांप्लेक्स का बीते शुक्रवार (22 मार्च) से पुलिस और प्रशासन की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सर्वे का कार्य शुरू किया था. प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने एएसआई को भोजशाला का सर्वे करने का आदेश दिया था. भोजशाला को लेकर हिंदू पक्ष का दावा है कि ये वाग्देवी मंदिर (सरस्वती मंदिर) है, जबकि मुस्लिम का पक्ष का कहना है कि यह कमाल मौला मस्जिद है. इसके बाद साल 2023 में एक नियम बनाया गया है. हिंदू समुदाय के लोगों को भोजशाल में प्रत्येक मंगलवार को सुबह से शाम तक पूजा करने की और शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय को दोपहर 1 से 3 बजे के बीच जुमे की नमाज अदा करने की इजाजत दी गई है. भोजशाल में इन कामों पर रहेगी पाबंदी धार एसपी मनोज कुमार सिंह ने कहा कि मौके पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. सर्वे की गोपनीयता को बरकरार रखने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं. सर्वे के दौरान ड्रोन का इस्तेमाल के साथ, फोटो या वीडियो लेने पर पाबंदी लगाई गई है. उन्होंने बताया कि इस तरह की फोटो या वीडियो वायरल करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. रविवार को एएसाई के अधिकारियों ने करीब नौ घंटे तक भोजशाला कांप्लेक्स का सर्वे किया था. सर्वे का काम अगले कुछ दिनों तक तेजी से चलेगा. 29 अप्रैल को पेश की जाएगी सर्वे रिपोर्ट बीते दिन यानी रविवार (24 मार्च) को दिल्ली और भोपाल के एएसआई अधिकारियों की मौजूदगी में सर्वे का काम किया गया. जहां अधिकारियों ने मजदूरों की मदद से एक ब्लॉक को करीब 6 फीट और अन्य ब्लॉक की दो से तीन फीट खुदाई की. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एएसआई को भोजशाल के 50 मीटर के दायरे में सर्वे करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने इसके लिए 6 हफ्ते का वक्त दिया है, सर्वे रिपोर्ट को आगामी 29 अप्रैल को कोर्ट की सामने पेश किया जाएगा. भोजशाला में साइंटिफिक सर्वे के दौरान सर्वे फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी की जा रही है.

केजरीवाल की गिरफ्तारी पर पटवारी बोले- ईडी ने 121 नेताओं पर कार्रवाई की, इसमें 115 विपक्ष के

Patwari said on Kejriwal’s arrest – ED took action against 121 leaders, out of which 115 were from opposition. पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने रविवार को ईडी की कार्रवाई को लेकर आंकड़े जारी किए। जीतू पटवारी ने कहा कि देश में ईडी ने 121 नेताओं पर कार्रवाई की और नोटिस दिए हैं। भोपाल ! दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने ईडी की कार्रवाई को लेकर आंकड़े जारी कर भाजपा सरकार पर कई सवाल उठाए हैं। पटवारी ने कहा कि ईडी ने 121 नेताओं पर कार्रवाई की। इसमें 115 विपक्ष के नेता हैं। अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को लेकर विपक्ष एकजुट होकर भाजपा पर लगातार हमलावर है। इसी बीच, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने रविवार को ईडी की कार्रवाई को लेकर आंकड़े जारी किए। जीतू पटवारी ने कहा कि देश में ईडी ने 121 नेताओं पर कार्रवाई की और नोटिस दिए हैं। इसमें से 115 विपक्ष के नेता हैं। उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि प्रधानमंत्री को विपक्ष के नेता पसंद नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इसमें से 70 प्रतिशत ने भाजपा की सदस्यता ले ली। वहीं, पटवारी ने कहा कि येदियुरप्पा के खिलाफ ईडी की कार्रवाई हुई थी। इस मामले में वे गिरफ्तार नहीं हुए। व्यापमं को लेकर जांच हुई। कई लोग मारे गए। इसमें भी पता नहीं क्या हुआ? उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री भष्टाचार को दो तरह से देखते हैं। वे कहते हैं कि विपक्ष भष्टाचार ना करे, लेकिन हम पेट भर खाएंगे।

चैनलिंक, बारवेड वायर और पोल्स की खरीदारी में करोड़ों की कमीशनबाजी का खेल

Crores of rupees of commission game in the purchase of Chainlink, Barbed Wire and Poles भोपाल। चालू वित्त वर्ष में जंगल महकमे में करीब 50 से 60 करोड़ रूपए की चैनलिंक, बारवेड वायर और टिम्बर पोल्स की खरीदी में बड़े पैमाने पर कमीशन बाजी का खेल खेला जा रहा है। सबसे अधिक खरीदी कैंपा फंड से की जा रही है। इसके अलावा विकास और सामाजिक वानिकी (अनुसंधान एवं विस्तार ) शाखा से भी खरीदी होती है। विभाग के उच्च स्तरीय सूत्रों की माने तो कुल रिलीज बजट के 18 से 20% धनराशि कमीशन कमीशन के रूप में टॉप -टू – बॉटम बंटती है। कई सालों से एक सिंडिकेट कम कर रहा है, जिसे आज तक कोई नहीं तोड़ सका है। इस सिंडिकेट की जड़े काफी मजबूत है।  मुख्यालय से सबसे अधिक फंड कैंपा शाखा से रिलीज किया जाता है। इसके बाद सामाजिक वानिकी और विकास शाखा से करोड़ों की धनराशि वन मंडलों को दिया जाता है। तीनों शाखों को मिलाकर हर वन मंडल को 5 से 7 करोड़ रूपए की राशि हर साल खरीदी के लिए रिलीज किया जा रहा है। चैनलिंक जाली, बारवेड वायर, टिम्बर पोल्स, रूट ट्रेनर्स, मिट्टी और गोबर एवं रासायनिक खाद वगैरह की खरीदी की जाती है. इस खरीदी में 15 से 18 फीसदी राशि कमीशन बाजी में बंटती है। इस खेल को रोकने के लिए  वन मंत्री विजय शाह ने ग्लोबल टेंडर बुलाने की पहल की थी किंतु मैदानी अफसरों के विरोध के चलते वे अपने मंसूबे में सफल नहीं हो पाए थे। गौरतलब यह भी है कि मुख्यालय से विभिन्न शाखों द्वारा फंड रिलीज करने का कोई निर्धारित मापदंड नहीं है। चेहरा देखकर फंड वितरित किया जा रहा है। इसके कारण गड़बड़ी की आशंका बढ़ती जा रही है।  सरकार के निर्देशों की अवहेलना  राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देश है कि वायरवेट, चैनलिंक और पोल की खरीदी में लघु उद्योग निगम को प्राथमिकता दें किंतु 95% खरीदी जेम्स और ई टेंडर से हो रही है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि लघु उद्योग निगम की दर और जेम (GEM) की दरों में डेढ़ गुना अंतर है। यानी लघु उद्योग निगम में वायरवेट किधर 83 रुपए से लेकर 85 रुपए तक निर्धारित की गई है। जबकि जेम (GEM) में ₹150 तक है। सरकार की मंशा यह भी है कि लघु और मध्यम उद्यमियों को इस कारोबार से जोड़ा जाए। मुख्यालय से लेकर फील्ड के अफसर टेंडर की शर्तों में ऐसी शर्ते जुडवा देते हैं जिसके चलते लघु और मध्यम उद्यमी प्रतिस्पर्धा के रहस्य बाहर हो जाते हैं।   चहेती फर्म को उपकृत करने जोड़ देते हैं नई शर्तें  फंड बंटवारे को लेकर दो अफसर भिड़ चुके  विभाग में फंड बंटवारे को लेकर दो सीनियर अधिकारी भिड़ चुके हैं। पीसीसीएफ कैंपा महेंद्र सिंह धाकड़ की पदस्थापना के पहले तक फॉरेस्ट प्रोटक्शन को लेकर कैंपा से फंड संरक्षण शाखा को रिलीज किया जाता था और फिर संरक्षण शाखा डीएफओ की मांग के आधार पर वितरित करता था। धाकड़ ने इस परंपरा को बदल दिया। अब वह प्रोटेक्शन की राशि भी स्वयं जारी करते हैं। पूर्व में पीसीसीएफ प्रोटेक्शन रहे अजीत श्रीवास्तव ने इसका पुरजोर विरोध किया था और तीखा पत्र भी लिखा था, लेकिन बात नहीं बनी। मुद्दे को लेकर एक बैठक में तो दोनों के बीच अच्छी बहस भी हुई पर तत्कालीन वन बल प्रमुख आरके गुप्ता ने पीसीसीएफ कैंपा धाकड़ का साथ दिया। हालांकि अजीत श्रीवास्तव जल्द ही रिटायर हो गए। मौजूदा पीसीएफ प्रोटेक्शन डॉ दिलीप कुमार किम कर्तव्यविमुढ़ की स्थिति में है और वह सेवानिवृत्ति के दिन गिन रहे हैं। ब्लैक लिस्ट फर्म कर रही हैं अभी भी धंधा  वन विभाग में अलग-अलग वन मंडलों में कई फर्म को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है. इसके बाद भी ब्लैक लिस्ट फर्म अपने राजनीतिक रसूख के दम पर सामग्री की सप्लाई कर रही हैं. इसकी वजह भी साफ है कि वन विभाग में ऐसी कोई भी व्यवस्था नहीं है, जहां ब्लैक लिस्ट की गई फर्म को अन्य वन मंडलों में मैसेज कर धंधा करने से रोका जाए. वैसे पीडब्ल्यूडी जल संसाधन और अन्य विभागों में ऐसी व्यवस्था है कि ब्लैक लिस्ट फर्म की सूची बनाकर मैदानी अफसरों को भेजा जाता है और उन्हें निर्देशित किया जाता है कि इनसे कोई भी वर्क आर्डर न दिया जाए. कमीशन बाजी के खेल में प्रमुख संस्थाएं तिरुपति इंजीनियरिंग वर्क बालाघाट, जबलपुर वायरस जबलपुर, श्री विनायक स्टील इंदौर, राजपूत फेसिंग पोल भोपाल, अरिहंत मेटल (नाहटा), लकी इंडस्ट्रीज इंदौर, आकांक्षा इंडस्ट्रीज विदिशा, नवकार ग्रेनाइट मंदसौर, बीएम मार्केटिंग वर्कर्स इंदौर, शारदा बारबेड  वायर एंड स्टील प्रोडक्ट मंडला, कृष्णा इंटरप्राइजेज छिंदवाड़ा, शारदा सीमेंट पाइप मंडला, ताप्ती एक्वा इंडस्ट्रीज बैतूल, शिल्पा कूलर छिंदवाड़ा, अपहरि प्लास्टिक बिलासपुर और गुरु माया इंडस्ट्रीज इटारसी.  इनका कहना  अगले वित्तीय वर्ष से टेंडर की शर्तें मुख्यालय से निर्धारित की जाएगी, ताकि उसकी एकरूपता बनी रहे। डीएफओ अपनी मनमानी शर्ते नहीं जोड़ पाएंगे. यूके सुबुद्धि पीसीसीएफ विकास

कांग्रेस की चौथी लिस्ट जारी, 45 नामः दिग्विजय सिंह को राजगढ़ से उतरा मैदान में

Congress’s fourth list released, 45 names: Digvijay Singh fielded from Rajgarh अब तक 184 उम्मीदवारों का ऐलानलोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने शनिवार देर रात चौथी लिस्ट जारी की। इसमें 12 राज्यों के 45 नाम हैं। मध्यप्रदेश से 12, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र 4, तमिलनाडु से 7, मणिपुर 2, मिजोरम से एक, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर से 2-2, छत्तीसगढ़, अंडमान निकोबार और असम से एक-एक उम्मीदवार का ऐलान किया। अब तक पार्टी 183 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। मध्य प्रदेश में दिग्विजय सिंह को राजगढ़ से टिकट दी गई है। वहीं वाराणसी से पीएम मोदी के खिलाफ अजय राय को उतारा गया है।

शैडो वन मंत्री की कार्यशैली से विधायकों एवं कार्यकर्ताओं में नाराजगी

Dissatisfaction among MLAs and workers due to the working style of Shadow Forest Minister भोपाल। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नागर सिंह चौहान को वन मंत्री बनाया। चौहान भानमती तो बन गए किंतु उनका मंत्रालय अपर संचालक स्तर के वित्तीय सेवा के अधिकारी रंजीत सिंह चौहान संचालित कर रहे हैं। जंगल महक में उन्हें शैडो वन मंत्री के रूप में देखा जा रहा है। विभाग में सप्लायर का वर्क आर्डर जारी करना हो या फिर ट्रांसफर पोस्टिंग, ये सभी कार्य अधिकारियों से मिलकर वह स्वयं कर रहे हैं। यही कारण है कि विधायकों और बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की सिफारिशी तबादला आदेश चुनाव आचार संहिता लगने के पूर्व जारी नहीं हो सके। वन विभाग में अधिकांश अधिकारी वन मंत्री चौहान के अनादिकृत ओएसडी रणजीत सिंह चौहान को शैडो मंत्री के रूप में देखते हैं। फील्ड में पदस्थ डीएफओ यह मानते हैं कि रणजीत सिंह चौहान उनके नजदीकी है। उनकी मान्यताओं पर तब और बल मिलता है जब अधिकारी अपने मंत्री से मिलने जाते हैं और वे उन्हें चौहान की से मिलने का संकेत दे देते हैं। इसके कारण ही विभाग के अवसर उन्हें शैडो वन मंत्री के रूप में देखते हैं। अब नेताओं को भी ऐसा एहसास होने लगा है वह इसलिए कि धार, झाबुआ और अलीराजपुर के विधायकों एवं नेताओं ने वन विभाग के डीएफओ, एसडीओ से लेकर रेंजरों को हटाने और उनकी प्राइम पोस्टिंग करने के सिफारिश की थी। वन मंत्री चौहान ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मंथन कर सूची तैयार कर मंत्रालय को भेजी। इस बीच पार्टी हाई कमान ने उनकी पत्नी अनीता सिंह चौहान को झाबुआ-रतलाम लोकसभा का प्रत्याशी घोषित कर दिया। इस घोषणा के बाद वन मंत्री नागर सिंह चौहान राजनीतिक गतिविधियों में व्यस्त हो गए और इसका लाभ उठाते हुए विधायकों के सिफारिश वाले अधिकारियों के तबादले की सूची में नाम हटाकर चौहान ने अपने पसंदीदा डीएफओ, एसडीओ और रेंजरों के तबादला आदेश आचार संहिता लगने के चंद्र घंटे पहले जारी करवा दिए। वन मंत्री के नजदीकी सूत्रों का कहना है कि विधायकों और नेताओं की अनुशंसा वाले दबा दें आदेश जारी नहीं होने के कारण वन मंत्री के प्रति नाराजगी है और वे चुनाव बाद मुख्यमंत्री मोहन सिंह यादव से शिकायत करने का मन बनाया है। सप्लायर के कारोबार में भी है दखलअंदाजीवन विभाग में लंबे समय से सप्लायर का एक नेक्सस सक्रिय है। इस सिंडिकेट से वन मंत्री चौहान के अनाधिकृत ओएसडी चौहान भी जुड़ गए है। दबाव के चलते ही महकमे में एक दर्जन से अधिक डीएफओ ने चैन लिंक और वायरबेड खरीदी की निविदा में ऐसी शर्त जोड़ दी, जिसे केवल चौहान के नजदीकी फर्म को ही वर्क आर्डर मिल सके। बताया जाता है कि डीएफओ को फोन करके अपने चहेते फर्म को ठेका दिलवाने के लिए नई-नई शर्ते जुड़वा रहे हैं। दक्षिण सागर,बैतूल और बालाघाट समेत एक दर्जन डीएफओ ने चैनलिंक और वायरबेड खरीदी के लिए निविदा आमंत्रित बुलाई गई। इस निविदा में 3 करोड़ के टर्न-ओवर के साथ यह शर्त भी जोड़ दी कि भारत मानक ब्यूरो से मान्यता प्राप्त फर्म ही निविदा में हिस्सा ले सकेंगी। यह शर्त पहली बार जोड़ी गई। इस शर्त के कारण तीन दर्जन से अधिक संस्थाएं प्रतिस्पर्धा से बाहर हो गई। मप्र में भारतीय मानक ब्यूरो से लाइसेंस प्राप्त दो फर्म ही रजिस्टर्ड हैं। यह दोनों फर्म ही कांग्रेस नेता के रिश्तेदार की है। यानी कांग्रेस नेता के रिश्तेदार को उपकृत करने के लिए प्रदेश के एक दर्जन डीएफओ ने पहली बार यह शर्त निविदा में जोड़ दी है। यह बात अलग है कि प्रतिस्पर्धा से बाहर हुई संस्थाओं ने शिकवे-शिकायतें शुरू कर दी हैं। जानकारों का कहना है कि मंत्री के यहां अनाधिकृत रूप से सक्रिय अपर संचालक स्तर के एक अधिकारी के कहने पर फील्ड के अफसरों ने निविदा में भारतीय मानक ब्यूरो की शर्त जोड़ी है। बताया जाता है कि अफसर पर दबाव बनाने वाले अनाधिकृत काम देख रहे अधिकारी का कांग्रेस नेताओं से पुराने संबंध रहे हैं। क्या है रंजीत सिंह चौहान का बैकग्राउंडरणजीत सिंह चौहान वित्तीय सेवा के अधिकारी

महा रण 2024 … सोशल मीडिया ने बिगाड़ा प्रचार का स्तर

Maha Ran 2024… Social media spoiled the level of publicity भोपाल। वर्तमान लोकसभा चुनाव में सबसे बड़ी भूमिका सोशल मीडिया की दिखाई दे रही है। जबकि इस समय सोशल मीडिया की सत्यता की न तो किसी प्रकार से जांच की जा रही है और न ही उस पर किसी प्रकार का एक्शन। जबकि इस समय जो सूचना प्रोद्योगिकी चल रही है, उससे लाभ ज्यादा हैए लेकिन चुनाव प्रचार में उसका उपयोग कई राजनीतिक दल गलत जानकारी देकर या असत्यता पर आधारित खबर देकर भ्रम की स्थिति पैदा कर देते हैं। इससे मतदाता किसी के बारे में सही और गलत का आंकलन नहीं कर पाता है। चुनाव से सबंधित जो लोग व्यवस्था देख रहे हैं, उन्हें इस पर नजर रखना चाहिए। वर्ना चुनाव का ढांचा बिगड़ता चला जाएगा और सोशल मीडिया का उपयोग करना लोग छोड़ देंगे। सोशल मीडिया का लाभ भी इतना है कि किसी भी जानकारी के लिए दूसरे दिन का इंतजार नहीं करना पड़ता। पूरे देश में एक पल में खबर इधर से उार हो जाती है। 25.30 साल पहले की बात ही अलग थीसोशल मीडिया का जब दौर नहीं था, तब आपसी चर्चा और अखबार और पर्चों को पढ़कर ही चुनाव प्रचार का अंदाजा लगाया जाता था। उम्मीदवार भी शलीनता से मिलने और अखबार वालों को अपनी बात समझाने आते थे। उस दौरान झूठ और सही के बीच भेद मालुम पड़ जाता था और लोग भी ध्यान रखते थे। इस समय सोशल मीडिया पर झूठ इस प्रकार परोसा जा रहा है कि लोगों को समझ नहीं आ रहा कि क्या करें।

भोपाल सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर की एक बड़ी इच्छा नहीं हुई पूरी, प्रदेश सरकार ने नहीं दिया महत्व

A big wish of Bhopal MP Pragya Singh Thakur was not fulfilled, the state government did not give it importance. भोपाल। भोपाल की सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर की इच्छा थी कि राजधानी में एक सरकारी कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च फाउंडेशन अलग से बने, जिससे पूरे प्रदेश के लोगों को लाभ मिल सके। क्योंकि अभी तक इसके लिए कोई सरकारी अस्पताल स्वतंत्र रूप से नहीं बनाए जैसे दूसरे निजी या संस्था के अस्पताल हैं। इसके लिए उन्होंने प्रयास भी किए। बकायदा उन्होंने राज्य सरकार को एक प्रस्ताव भी भेजा था, लेकिन सरकार ने उस पर गंभीरता से विचार नहीं किया, जिस कारण उनकी इच्छा पूरी नहीं हो सकी। इस सपने पर उनकी ही पार्टी की राज्य सरकार ने विराम लगाने की बात सामने आ रही है। एम्स या हमीदिया में इलाज तो मिलता है, लेकिन अलग से सरकारी अस्पताल नहीं हैए जिससे लोगों को मुंबई के टाटा या भोपाल के एक संस्थागत अस्पताल जाना पड़ता है। यहां खर्चा इतना ज्यादा है कि आदमी पूरी तरह से अपना सब कुछ बेचने को मजबूर हो जाता है। भोपाल के डॉ यशवंत राव धवले के अनुसार सुल्तानिया जनाना अस्पताल को हमीदिया में शिफ्ट किया गया है, अगर सुल्तानिया को कैंसर अस्पताल के लिए चयनित किया जाता है तो यह अस्पताल मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु पूरे भारत वर्ष के ग्रामीण क्षेत्रए शहरी क्षेत्रों एवम अन्य लोगों की भी सेवा की जा सकती है। ज्ञान और आर्थिक ताकत की कमी के कारण कैंसर के निदान और उपचार के लिए प्रौद्योगिकियों और उन्नत सुविधाओं से वंचित हैं। कैंसर अनुसंधान में उन्नत और अद्यतन तौर, तरीके बढ़ाए जा सकते थे। इस संबंध में सांसद ने प्रदेश व सरकार को भी प्रस्ताव भेज दिया था। प्रदेश सरकार इसमें निर्णय लेती तो आगे का काम केंद्र के माध्यम से सांसद द्वारा करवाया जा सकता था।

कर्ज तले दबता प्रदेश, पांच हजार करोड़ का कर्ज लेगी मध्‍य प्रदेश सरकार

State is burdened with debt, Madhya Pradesh government will take a loan of five thousand crores भोपाल । लोकसभा चुनाव की आचार संहिता में मध्य प्रदेश सरकार पांच हजार करोड़ रुपये का नया कर्ज लेगी। राज्य सरकार रिजर्व बैंक के मुंबई कार्यालय के माध्यम से 26 मार्च को तीन हिस्सों में कुल पांच हजार करोड़ रुपयों का कर्ज बाजार से लेगी। पहला कर्ज 20 साल के लिए दो हजार करोड़ रुपये का होगा। इसी तरह दो हजार करोड़ का दूसरा कर्ज 21 साल के लिए और एक हजार करोड़ रुपये का तीसरा कर्ज लिया जाएगा जो 22 साल में चुकाया जाएगा। तीनों ही कर्ज पर साल में दो बार ब्याज का भुगतान किया जाएगा। राज्य सरकार तीन माह (जनवरी-फरवरी) में साढ़े 15 हजार 500 हजार करोड़ रुपये कर्ज ले चुकी है। वर्तमान वित्त वर्ष में मध्य प्रदेश सरकार अब तक कुल 37 हजार 500 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है। अब पांच हजार करोड़ रुपये का नया कर्ज मिलाकर कुल कर्ज 42 हजार 500 करोड़ रुपये हो जाएगा। वहीं वर्ष 2024 में 23 जनवरी को ढाई हजार करोड़ रुपये, छह फरवरी को तीन हजार करोड़ रुपये और बीस फरवरी को पांच हजार करोड़ रुपये और 27 फरवरी को पांच हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया जा चुका है। प्रदेश के ऊपर मार्च 2023 की स्थिति में तीन लाख 31 हजार करोड़ रुपये से अधिक का ऋण है।वहीं अब तक के कुल कर्ज को मिलाकर मध्य प्रदेश सरकार पर कर्ज का कुल भार तीन लाख 70 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। बता दें कि विधानसभा चुनाव से पहले भी सरकार ने लगातार कर्ज लिया था।

कांग्रेस को एक और झटका, BJP में शामिल होने कई बड़े नेता पहुंचे भोपाल

Another blow to Congress, many big leaders reached Bhopal to join BJP लोकसभा चुनाव के पहले चरण की नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशी समेत अन्य उम्मीदवार 27 तक नामांकन कर सकेंगे। जानिए, इससे पहले मप्र में क्या हो रहा है? लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को मप्र में आज एक बार फिर बड़ा झटका लगने वाला है। कांग्रेस के कई बड़े नेता भाजपा में शामिल होने के लिए भोपाल पहुंच गए हैं। इनमें पूर्व सांसद देवराज सिंह पटले और पूर्व विधायक यादवेंद्र सिंह समेत कई नेता शामिल हैं। सतना के ये नेता भाजपा में होंगे शामिल

कांग्रेस उपाध्यक्ष लालचंद गुप्ता का इस्तीफा, बोले- अध्यक्ष के पास जाने पर देना पड़ता था परिचय

Congress Vice President Lalchand Gupta resigns, says he had to give introduction when he went to the President विंध्य में कांग्रेस को फिर लगा झटका, लालचंद गुप्ता बोले- 5 साल उपाध्यक्ष रहा, आज तक एक भी बैठक नहीं हुई।भोपाल। प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में कांग्रेस को एक बड़ा झटका लगा है, कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष लालचंद गुप्ता ने कांग्रेस पार्टी और उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। प्रदेश उपाध्यक्ष लालचंद गुप्ता ने आरोप लगाया कि 5 साल उपाध्यक्ष रहने के बाद आज तक नहीं हुई एक भी बैठक। प्रदेश अध्यक्ष के पास जाने पर अपना परिचय बताना पड़ता था। वे प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष के पद पर 5 साल तक रहे है। इसके पहले वे भाजपा जिला अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस कर यह जानकारी साझा की। गौरतलब है कि प्रदेश में कांग्रेस नेताओं के पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने का सिलसिला लगातार जारी है। कमल नाथ के गढ़ सहित प्रदेश के कई इलाकों से कांग्रेस के बड़े नेता, पूर्व विधायक भाजपा में शामिल हो चुके हैं। बड़े नेताओं को पार्टी छोड़कर जाने से लगातार झटके लग रहे हैं।

हमीदिया अधीक्षक के निर्देश: अब नहीं चलेगी घसीटा राइटिंग, डॉक्टर कैपिटल लेटर में लिखेंगे दवाओं के नाम

Hamidia Superintendent’s instructions: Now cursive writing will not work, doctors will write names of medicines in capital letters. भोपाल। अब डॉक्टरों की घसीटा राइटिंग से किसी मरीज को परेशान नहीं होना पड़ेगा। अब हमीदिया अस्पताल के डॉक्टरों को ओपीडी पर्चे पर दवाओं के नाम कैपिटल लेटर्स में ही लिखेंगे। यही नहीं जिन पर जो में घसीटा राइटिंग होगी उन्हें मान्य नहीं किया जाएगा। हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ सुमित टंडन ने इस संबंध में अस्पताल के सभी एचओडी को आदेश जारी कर इसे सख्ती से लागू कराने के निर्देश दिए हैं। पत्र में कहा गया है कि दवाओं के नाम स्पष्ट व बड़े अक्षरों में लिखें, जिससे मेडिकल स्टोर में कार्यरत फार्मासिस्ट व दूसरे कर्मचारियों को आसानी से दवा का नाम समझ सकें। बतादें कि मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया ने पहले भी दवाओं के नाम कैपिटल लेटर में लिखने का फरमान जारी किया था। हालांकि यह फरमान पूरी तरह लागू नहीं हुआ है। ओपीडी पर्ची की होगी मॉनिटरिंग डॉक्टरों की राइटिंग के कारण कई बार मेडिकल स्टोर में दवाओं के नाम पर कंफ्यूजन होता है। कई बार मरीजों को गलत दवा मिल जाती है। मरीजों को परेशानी से बचने के लिए कैपिटल लेटर में दवा का नाम लिखने को कहा है। यही नहीं चिकित्सक ऐसा कर रहे हैं या नहीं, इसकी मॉनिटरिंग भी की जाएगी। सभी विभागों की ओपीडी पर्ची की जांच की जाएगी, ताकि कैपिटल लेटर में लिखने को बढ़ावा दिया जा सके। डॉक्टरों को लिखनी होगी जेनेरिक दवाएंचिकित्सकों को मरीजों के लिए केवल जेनेरिक दवा लिखने का फरमान जारी किया गया है। मानिटरिंग में यह बात सामने आई कि डाक्टर मरीजों की परची में केवल 40 फीसदी जेनेरिक दवा लिख रहे हैं। बाकी ब्रांडेड दवाओं के नाम सामने आ रहे है। अस्पताल प्रबंधन ने सभी विभाग के चिकित्सकों को जेनेरिक दवा लिखने के निर्देश दिए हैं। पहले भी जारी हो चुके ऐसे आदेश9 दिसंबर 2014 को चिकित्सकों को घसीटामार लिखावट नहीं करने के लिए मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया ने निर्देश जारी किए थे। इसमें भी डाक्टरों से कैपिटल लेटर में दवा का नाम लिखने को कहा गया था। इसके बाद अप्रैल 2015 में एक बार फिर यही आदेश जारी किए गए। – 2 जनवरी 2021 – हमीदिया अस्पताल में इलाज कराने वाले मरीजों के पर्चे पर चिकित्सकों का नाम, मोबाइल नंबर और उनकी मुहर भी लगाने के आदेश जारी हुए थे। इनका कहनाहमीदिया के सभी विभागों में एचओडी को जेनेरिक दवाएं और बड़े अक्षरों में लिखने के लिए निर्देश जारी किए हैं। इसके बाद हम इसे लेकर मॉनिटरिंग भी करेंगे। एमसीआई ने पूर्व में इसे लेकर निर्देश दे चुकी है। लेकिन पालन नहीं किया जाता था।डॉ सुमित टंडन, अधीक्षक, हमीदिया अस्पताल

इलेक्टरल बॉन्ड घोटाला स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा घोटाला :जीतू पटवारी

Electoral bond scam is the biggest scam of independent India: Jitu Patwari मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ट्रांसपोर्ट कमिश्नर की नियुक्ति 300 करोड़ में, मध्य प्रदेश भ्रष्टाचार का केंद्र बना : जीतू पटवारी 2014 से 2023 तक भाजपा ने एक भी गारंटी पूरी नहीं की,भाजपा की वादाखिलाफी के खिलाफ जनता आशा भरी निगाहों से कांग्रेस पार्टी की ओर देख रही है: जीतू पटवारी भोपल ! मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश समेट पूरे देश के लिए लोकसभा चुनाव घोषित हो चुके हैं परंतु बीजेपी की डबल इंजन सरकार की डबल वादा खिलाफी के खिलाफ जनता हताश और निराशा है, आलम यह है कि 2014 से 2023 तक कोई भी गारंटी पूरी नहीं हुई है एवं इसी कारण जनता आशाभरी निगाहों से कांग्रेस पार्टी की ओर देख रही है। पटवारी ने कहा कि नरेंद्र मोदी जी भ्रष्टाचार के खिलाफ नारे दिया करते थे उसके विपरीत इलेक्ट्रोरल बॉन्ड्स के जरिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कई खुलासे हुए हैं एवम उससे ऐसा प्रतीत होता है कि यह भाजपा के लीगल करप्शन के उदाहरण हैं। वैक्सीन निर्माता, पाकिस्तान एवं लॉटरी किंग के द्वारा भाजपा को जो चंदा दिया गया इन सब पर चर्चा होनी चाहिए, चुनावी बांड घोटाला स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा घोटाला है। भाजपा ने भ्रष्टाचार का तांडव मचा रखा है एवं संस्थाओं को डराने एवं वसूली का माध्यम बनाकर रखा है, यह पहले कभी नहीं हुआ। पटवारी ने कहा कि जहां कांग्रेस पार्टी ने लोगों को आरटीआई जैसे अधिकार दिए खाद्यान्न, भूमि अधिग्रहण, वन अधिकार कानून आदि कानून दिए वहीं भाजपा ने इन कानूनों को पंगु बनाया। कांग्रेस पार्टी फिर एक बार जनता को अधिकार देगी, हम किसानों को एमएसपी का अधिकार देंगे, ग्रेजुएट युवाओं को ₹100000 सालाना की स्टाइपेंड का अधिकार देंगे, बहनों को 8000 से 8500 के करीब प्रति माह की आर्थिक सुरक्षा का अधिकार देंगेऔर विस्तार में सभी अधिकार एवं न्याय के माध्यम इंडिया एलायंस की रैली में हमारे नेता राहुल जी एवं एलायंस के नेता करेंगे। पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश में भी मध्य प्रदेश की सरकार ने लगातार आचार संहिता लगने के पहले तक तबादले किए परंतु उसके बाद भी कई अधिकारी कई विभाग में नहीं हैं, 500 से ज्यादा पदों पर पदाधिकारी नहीं है तथा प्रभार के आधार पर व्यवस्थाएं चल रही हैं। यहां कर्ज, क्राइम एवं करप्शन पर्ची वाले मुख्यमंत्री के शासन में लगातार फल फूल रहा है, मध्य प्रदेश लगातार क्राइम इंडेक्स में एवं करप्शन इंडेक्स में ऊंचाई हासिल कर रहा है, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का तो यहां तक भी कहना है कि ट्रांसपोर्ट कमिश्नर की 300 करोड रुपए में नियुक्ति हुई है, यही बीजेपी का असली चरित्र है। श्री पटवारी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी दृढ़ता से चुनाव में उतर रही है एवं जो संकेत हैं उनके आधार पर मैं कह सकता हूं कि परिणाम आप सभी को चौंकाएंगे एवं कांग्रेस पार्टी चुनाव में बेहतरीन प्रदर्शन करेगी।

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