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दिल्ली विधानसभा चुनाव के शुरुआती रुझाने के बाद मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा

नई दिल्ली/श्रीनगर दिल्ली में आज मतगणना का दिन है. वोटों की गिनती जारी है. शुरुआती रुझान बीजेपी के पक्ष में आ रहे हैं. अब तक के डेटा के अनुसार, बीजेपी 32 सीटों पर आगे चल रही है जबकि AAP सिर्फ 14 सीटों पर बढ़त हासिल कर पाई है. वोटों की गिनती के बीच जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर कांग्रेस और AAP पर निशाना साधा है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ‘महाभारत’ सीरियल का एक सीन शेयर करते हुए उमर अब्दुल्ला ने सिर्फ इतना लिखा, ‘और लड़ो आपस में!’… साफ है कि उनका इशारा दिल्ली में कांग्रेस और AAP के अलग-अलग चुनाव लड़ने के फैसले पर है. विधानसभा चुनावोंं में काम नहीं करता है ‘इंडिया’ ब्लॉक कांग्रेस और AAP केंद्र में इंडिया ब्लॉक का हिस्सा हैं लेकिन विधानसभा चुनावों में यह गठबंधन काम नहीं करता है. पहले हरियाणा और फिर दिल्ली में कांग्रेस और AAP ने एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा और दोनों ही जगह बीजेपी को फायदा हुआ. सही साबित होते दिख रहे एग्जिट पोल दिल्ली में पांच फरवरी को वोट डाले गए थे. नतीजों से पहले जारी हुए एग्जिट पोल्स में बताया गया था कि अबकी बार बीजेपी के लिए दिल्ली दूर नहीं है यानी एग्जिट पोल्स में बीजेपी को बहुमत मिलता बताया गया था. शुरुआती रुझानों में एग्जिट पोल सही साबित होते दिख रहे हैं. बता दें कि दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा सीट के लिए 5 फरवरी को मतदान हुआ था. इस दौरान कुल 60.54 प्रतिशत लोगों ने वोट डाला था.चुनाव के दौरान तीनों दलों ने जमकर प्रचार प्रसार किया था. पीएम मोदी ने किया प्रचार बीजेपी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रचार का नेतृत्व किया. इस दौरान पार्टी ने यमुना नदी के कथित जहरीली होने और मुख्यमंत्री के रूप में अरविंद केजरीवाल के आवास के रेनोवेशन का मुद्दा उठाया. वहीं, AAP ने अपने 11 साल के कार्यकाल के दौरान शिक्षा क्षेत्र में अपनी परफोर्मेंस को जनता के सामने रखा. दूसरी ओर कांग्रेस भी जमकर प्रचार किया. इस दौरान कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली आबकारी नीति घोटाले को लेकर मामले में कथित भूमिका के लिए केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया पर निशाना साधा. दो चुनावों में AAP का रहा दबदबा बता दें कि दिल्ली में लगातार 15 साल तक सत्ता में रहने वाली कांग्रेस को पिछले दो विधानसभा चुनावों में बुरी तरह से शिकस्त का सामना करना पड़ा.इतना ही नहीं पार्टी एक सीट भी अपने नाम नहीं कर सकी. इसी तरह बीजेपी भी दो दशक से अधिक समय दिल्ली की सत्ता से बाहर है, जबकि पिछले दो चुनाव में आम आदमी पार्टी ने जबरदस्त प्रदर्शन किया था.  

देश की राजधानी दिल्ली पर जिस पार्टी ने सबसे ज्यादा राज किया, आज उसे जनता ने किया पहचानने से इनकार!

नई दिल्ली  देश की राजधानी दिल्ली पर जिस पार्टी ने सबसे ज्यादा राज किया, आज उसे दिल्ली की जनता ने शायद पूरी तरह भुला दिया है। दिल्ली में 15 साल तक लगातार सरकार चलाने वाली कांग्रेस पार्टी इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 से गायब हो गई है। पूरा मुकाबला आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच ही सिमट कर रह गया है। अभी तक के रुझानों में दिल्ली की 70 सीटों में से एक पर भी खाता खुलता नहीं दिख रहा है। वोट प्रतिशत की भी बात करें, तो कांग्रेस बहुत ही बुरी स्थिति में दिख रही है। सुबह 10.30 बजे तक के रुझानों में कांग्रेस को महज 6.86 फीसदी वोट ही मिले हैं। मौजूदा रुझानों में 69 में से बीजेपी 41 तो आम आदमी पार्टी 28 सीटों पर आगे चल रही है। अगर इस बार भी कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिलती है तो यह लगातार तीसरा मौका होगा, जब कांग्रेस को दिल्ली ने पूरी तरह से नकार दिया। 2020 में भी नहीं खुला था खाता दिल्ली में हुए पिछले विधानसभा चुनाव 2020 में भी कांग्रेस का बुरा हाल था। पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी। उसका वोट प्रतिशत भी महज 4.26 फीसदी ही रहा था। 2015 में भी कांग्रेस ने सभी 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। वोट शेयर भी 9.7 फीसदी ही रहा था। आम आदमी पार्टी के उदय ने किया बंटाधार 2013 में आम आदमी पार्टी के उदय ने अगर किसी को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है तो वो कांग्रेस ही है। इस चुनाव से पहले 1998 से लगातार कांग्रेस की सरकार दिल्ली में थी। मगर 2013 में जनता ने अपना नया नेता चुन लिया। एक नई पार्टी ने चमत्कार कर दिया। 2008 के चुनावों में 40 फीसदी से ज्यादा वोट शेयर लेकर सरकार बनाने वाली कांग्रेस 2013 में 25 फीसदी से भी कम वोट शेयर पर आ गिरी। पार्टी का वोट शेयर 24.25 फीसदी ही रहा और सीटें भी 43 से घटकर महज 8 ही रह गई। इसके बाद से तो पार्टी को एक सीट मिलना भी दूभर हो गया। लोकसभा चुनाव का नहीं मिला फायदा कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में देशभर में अच्छा प्रदर्शन किया था। पार्टी ने बीजेपी को कड़ी टक्कर दी थी। हालांकि दिल्ली की सातों सीटों पर उसे हार ही मिली थी। लेकिन 18 फीसदी जनता ने राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस पर भरोसा जताया था। मगर इसका फायदा कांग्रेस को दिल्ली के विधानसभा चुनावों में नहीं मिला।

एमपी बीजेपी अध्यक्ष के लिए पार्टी अपने पुराने और आजमाए हुए फॉर्मूले पर ही भरोसा करेगी

भोपाल मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी में नए प्रदेश अध्यक्ष का नाम तय होना है. जिसके लिए प्रक्रिया तो जारी है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल लगातार हो रही देरी से उठ रहा है. क्योंकि काफी मशक्कत के बाद बीजेपी ने जिला अध्यक्षों की घोषणा तो कर दी लेकिन प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में देरी क्यों हो रही है. हालांकि, बीजेपी का कहना है कि फिलहाल पार्टी की प्राथमिकता दिल्ली विधानसभा चुनाव है, जिसके तुरंत बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चुन लिया जाएगा. अब सवाल यह है कि पार्टी इस बार अध्यक्ष पद के लिए क्या फॉर्मूला तय करती है? बीजेपी से जुड़े सूत्रों की मानें तो एमपी बीजेपी अध्यक्ष के लिए पार्टी अपने पुराने और आजमाए हुए फॉर्मूले पर ही भरोसा करने वाली है. क्या है पुराना फॉर्मूला? आपको बता दें कि मध्यप्रदेश में बीजेपी ने साल 2003 के विधानसभा चुनाव में 10 सालों की कांग्रेस सरकार को हटाकर प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई थी. तब जिस फॉर्मूले पर भारतीय जनता पार्टी ने काम किया, उसने बीजेपी को मध्यप्रदेश में बेहद मजबूत स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया. यह फॉर्मूला था ओबीसी मुख्यमंत्री और सवर्ण प्रदेश अध्यक्ष का. 2003 में उमा भारती को मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया था जो ओबीसी वर्ग से आती हैं. उमा भारती के बाद बाबूलाल गौर, शिवराज सिंह चौहान और अब मोहन यादव एमपी के मुख्यमंत्री बने और यह चारों ओबीसी वर्ग से आते हैं. वहीं, इन सभी मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में बीजेपी के संगठन की जिम्मेदारी यानी प्रदेश अध्यक्ष का जिम्मा कैलाश जोशी, नरेंद्र सिंह तोमर, प्रभात झा, नंदकुमार सिंह चौहान, राकेश सिंह और वीडी शर्मा को मिला जो सभी सवर्ण वर्ग से आते हैं.  जातिगत फैक्टर हो सकता है टर्निंग पॉइंट  ओबीसी सीएम वाली सरकार और सामान्य वर्ग वाला प्रदेश अध्यक्ष बनाकर 2003 से बीजेपी ने सत्ता और संगठन में जो संतुलन बनाया, उसने एमपी बीजेपी को देश का सबसे मजबूत संगठन बना दिया और माना जा रहा है कि बीजेपी इसी फॉर्मूले पर इस बार भी भरोसा करने जा रही है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि जातिगत समीकरण किस वर्ग के लिए सटीक बैठने की संभावना है.  ब्राह्मण बीजेपी के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा जो ब्राह्मण वर्ग से आते हैं, उनका कार्यकाल पूरा हो चुका है. सियासी गलियारों की मानें तो वीडी शर्मा को कोई नई जिम्मेदारी देकर एमपी में वीडी शर्मा की जगह नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है. ऐसे में ब्राह्मण वर्ग से जो नाम रेस में हैं- उनमें पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला और विधायक रामेश्वर शर्मा का नाम सामने आ रहा है. जातिगत समीकरणों की बात करें तो फिलहाल मोहन कैबिनेट में सबसे कम भागीदारी ब्राह्मण वर्ग की है, जिसमें सिर्फ दो मंत्री शामिल हैं. राजेंद्र शुक्ला और राकेश शुक्ला. विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे तो बीजेपी के 27 ब्राह्मण विधायक चुनाव जीते थे लेकिन सरकार में भागीदारी के मामले में यह वर्ग पीछे रह गया. अब जब 2027 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं तो पड़ोसी राज्य में ब्राह्मण को एक बार फिर से प्रदेश अध्यक्ष बनाकर बीजेपी एमपी और यूपी के सवर्णों को खुश करने की कोशिश कर सकती है. दूसरी तरफ, सरकार में ब्राह्मणों की कम भागीदारी से सवर्णों की नाराजगी का जो डर बीजेपी की सता रहा है, उससे भी उसे छुटकारा मिल सकता है.  क्षत्रिय 2003 के बाद से लंबे समय तक प्रदेश अध्यक्ष बनने की जिम्मेदारी एमपी बीजेपी के क्षत्रिय वर्ग से आने वाले नेताओं को ही मिली है. नरेंद्र सिंह तोमर, नंदकुमार सिंह चौहान और राकेश सिंह. वर्तमान में मोहन कैबिनेट की बात करें तो इसमें 4 मंत्री क्षत्रिय वर्ग से आते हैं- जिनमें राकेश सिंह, उदय प्रताप सिंह, गोविंद सिंह राजपूत और प्रद्युम्न सिंह तोमर शामिल हैं. वहीं, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर हैं जो क्षत्रिय वर्ग से आते हैं. पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में बीजेपी ने किरण देव सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर एमपी में संदेश लगभग साफ कर दिया है कि यहां इस वर्ग से प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनेगा.  वैश्य बीते कुछ दिनों में जो नाम तेजी से प्रदेश अध्यक्ष की दावेदारी के रूप में उभरा है- उनमें हेमंत खंडेलवाल का नाम है जो वैश्य समाज से आते हैं. मोहन कैबिनेट में फिलहाल 2 वैश्य वर्ग से आने वाले मंत्री हैं- कैलाश विजयवर्गीय और चेतन कश्यप. ऐसे में देखना यह है कि क्या सीएम की पसंद कहे जा रहे हेमंत खंडेलवाल को जिम्मेदारी मिलती है या नहीं? अनुसूचित जाति मोहन कैबिनेट में अनुसूचित जाति के मंत्रियों की संख्या 4 है और एक डिप्टी सीएम हैं- जगदीश देवड़ा. जाहिर है सरकार में इस वर्ग की भागीदारी बेहतर है, इसलिए 2003 फॉर्मूले में यह वर्ग फिट नहीं बैठता. हालांकि, जिस तरह से अंबेडकर के नाम पर इन दिनों सियासी माहौल बना हुआ है, माना जा रहा है कि बीजेपी एससी वर्ग को अपने पाले में करने के लिए किसी एससी वर्ग के नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाने का दांव चल सकती है. अगर ऐसा होता है तो लाल सिंह आर्य का नाम सबसे ऊपर आ जाएगा जो बीजेपी एससी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं.  ओबीसी मध्यप्रदेश में 2003 के बाद से ही बीजेपी ने ओबीसी वर्ग से ही मुख्यमंत्री बनाया है और वर्तमान में ओबीसी वर्ग से आने वाले मोहन यादव सीएम हैं. वहीं, दूसरी तरफ उनकी कैबिनेट में 8 से ज्यादा मंत्री ओबीसी वर्ग से आते हैं. दूसरी तरफ, 2003 के फॉर्मूले को देखें तो ओबीसी सीएम और सामान्य वर्ग से प्रदेश अध्यक्ष बनाने का नियम रहा है, ऐसे में अगला प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी वर्ग से बनने के आसार न के बराबर हैं.  अनुसूचित जनजाति वर्तमान में मोहन कैबिनेट में अनुसूचित जनजाति वर्ग से 5 मंत्री बने हुए हैं. एमपी में 47 एसटी सीटें हैं, जबकि दो दर्जन से ज्यादा सीटों पर अनुसूचित जाति ही हार या जीत का फैसला करती है. जाहिर है यह एक बड़ा वोट बैंक है और इसे साधने के लिए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के लिए एसटी चेहरे पर भी दांव चल सकती है. अगर ऐसा होता है तो सुमेर सिंह सोलंकी, दुर्गादास उइके (मोदी कैबिनेट में मंत्री)और गजेंद्र पटेल का नाम ऊपर आ सकता है.  जातिगत समीकरण और अनुभव को दी जाएगी तवज्जो मध्यप्रदेश बीजेपी … Read more

चुनाव के नतीजों से पहले कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने लगाया बड़ा आरोप, कहा- महाराष्ट्र चुनाव में भी हुई गड़बड़ी

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने महाराष्ट्र चुनाव में गड़बड़ी का शक जताया है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि महाराष्ट्र में विधानसभा 2019 और लोकसभा 2024 के बीच 5 साल में 32 लाख नए मतदाता जोड़े गए। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा 2024 और विधानसभा 2024 के बीच 5 महीने में 39 लाख नए मतदाता जोड़े गए। कांग्रेस सांसद ने पूछा कि सवाल ये है कि 5 महीने के अंदर पिछले 5 साल से ज्यादा मतदाता कैसे जोड़े गए? राहुल गांधी ने वोटर लिस्ट को लेकर जानकारी मांगी है। उन्होंने कहाकि चुनाव आयोग ने हमारी आशंकाओं को लेकर जवाब नहीं दिया। राहुल ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच 39 लाख मतदाताओं की वृद्धि हिमाचल प्रदेश जैसे पूरे राज्य की जनसंख्या के बराबर है। उन्होंने कहाकि निर्वाचन आयोग को पारदर्शिता लानी चाहिए, महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनावों की मतदाता सूची उपलब्ध कराना उसकी जिम्मेदारी है। इस दौरान प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद शिवसेना-यूबीटी सांसद संजय राउत ने कहाकि अगर इस देश का चुनाव आयोग जिंदा है, उनका ज़मीर मरा नहीं है तो राहुल गांधी ने जो सवाल पूछे हैं उनका जवाब उसको देना चाहिए। लेकिन चुनाव आयोग उसका जवाब नहीं देगा क्योंकि चुनाव आयोग भी सरकार की गुलामी कर रहा है। वहीं, एनसीपी-शरद पवार पार्टी की सांसद सुप्रिया सुले ने कहाकि जिस तरह से हमारी पार्टी तोड़ी गई, विधायक-सांसद तोड़े गए। हमारी लड़ाई आज भी सुप्रीम कोर्ट में चल रही है… हमने विधानसभा में चुनाव चिन्ह से तुतारी हटाने का अनुरोध चुनाव आयोग से किया। लेकिन उन्होंने तुतारी नहीं हटाया। जिसके कारण हम कई सीट हारे….चुनाव चिन्ह का विषय है, पार्टियां तोड़ने का विषय है, मतदाता सूची का विषय है। चुनाव आयोग को निष्पक्ष होना चाहिए।

चंद्रबाबू नायडू 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद NDA के उपाध्यक्ष बनना चाहते थे, लेकिन मोदी ने मना कर दिया, देवगौड़ा का दावा

नई दिल्ली पूर्व प्रधानमंत्री और जेडीएस के अध्यक्ष एचडी देवगौड़ा ने राज्यसभा में दावा किया कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद NDA के उपाध्यक्ष बनना चाहते थे, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका यह प्रस्ताव ठुकरा दिया। देवगौड़ा ने यह दावा राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया देने दौरान किया। देवगौड़ा ने कहा, “2024 में जब मोदी जी को 240 सीटें मिलीं तब चंद्रबाबू नायडू और उनके सांसद NDA के सभी दलों द्वारा बनाई गई समिति के उपाध्यक्ष या अध्यक्ष बनना चाहते थे। लेकिन मोदी जी ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं होगा। उन्हें प्रशासन चलाने का अनुभव है, वे देश को बिना किसी उथल-पुथल के चला सकते हैं और वे देश के एकमात्र सबसे बड़े नेता हैं जो इसका नेतृत्व कर सकते हैं।” देवगौड़ा के इस बयान के बाद राज्यसभा अध्यक्ष जगदीप धनखड़ ने भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष जेपी नड्डा को इस मुद्दे पर संक्षिप्त बयान देने का अवसर दिया। नड्डा ने देवगौड़ा के दावे को खारिज करते हुए कहा, “मान्यवर देवगौड़ा, जो NDA के एक साझेदार हैं और पूर्व प्रधानमंत्री भी हैं, ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नेतृत्व किए गए सरकार के बारे में एक मुद्दा उठाया है। मैं पार्टी के अध्यक्ष के रूप में इस मामले को स्पष्ट करना चाहता हूं। NDA में ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई थी और सभी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के पीछे अपनी ताकत लगाने का फैसला किया है।” गौरतलब है कि जेडी (एस) NDA का हिस्सा है, जिसके लोकसभा में दो सांसद हैं। देवगौड़ा के बेटे एचडी कुमारस्वामी केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री हैं।

हार्दिक पटेल को सुप्रीम राहत, पटेल और उनके सहयोगियों के खिलाफ दर्ज किए गए राजद्रोह का केस वापस

अहमदाबाद गुजरात बीजेपी के विधायक हार्दिक पटेल (31) काे बड़ी राहत मिली है। राज्य सरकार ने हार्दिक पटेल और अन्य के खिलाफ दर्ज राजद्रोह में मामले को वापस ले लिया है। पाटीदार अनामत आंदोलन के दौरान हार्दिक पटेल और उनके साथियों के खिलाफ राजद्रोह का केस दर्ज हुआ था। आंदोलन के बाद हार्दिक पटेल कांग्रेस में शामिल हो गए थे। 2022 गुजरात विधानसभा चुनावों से पहले हार्दिक पटेल बीजेपी में शामिल हो गए थे। हार्दिक पटेल वर्तमान में अहमदाबाद जिले की वीरमगाम से विधायक हैं। गुजरात में पाटीदार अनामत आंदोलन साल 2015 में हुआ था। इसके बाद राज्य की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। 2017 में विधानसभा चुनावों में बीजेपी इसी आंदोलन की वजह से सिर्फ 99 सीटें जीत पाई थी। फैसले पर बोले हार्दिक पटेल राज्य सरकार के फैसले पर हार्दिक पटेल ने खुशी व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि गुजरात में हुए पाटीदार आंदोलन के दौरान मेरे समेत समाज के अनेक युवाओं पर लगे गंभीर राजद्रोह समेत के मुकदमें आज भूपेंद्र भाई पटेल की सरकार ने वापिस लिए है। मैं समाज की ओर से गुजरात की भाजपा सरकार का विशेष आभार व्यक्त करता हूं। पाटीदार आंदोलन से गुजरात में बिन आरक्षित वर्गों के लिए आयोग-निगम बना, 1000 करोड़ की युवा स्वावलंबन योजना लागू हुई और देश में आर्थिक आधार पर स्वर्णों को 10 फीसदी आरक्षण का लाभ मिला हैं। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी, गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित भाई शाह और राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल पुनः दिल की गहराई से आभार व्यक्त करता हूं। जीएमडीसी मैदान में की थी सभा 20 जुलाई 1993 को जन्में हार्दिक पटेल बी कॉम की डिग्री ली है। वह अक्टूबर 2012 में सरदार पटेल ग्रुप से जुड़ गए थे। इसके बा वह एसपीजी की वीरमगाम यूनिट के अध्यक्ष बन गए थे। 2015 में हार्दिक पटेल को मतभेदों के बाद एसपीजी प्रमुख ने निकाल दिया था। हार्दिक पटेल ने गुजरात पाटीदार अनामत आंदोलन को लीड किया था। इसके बाद वह पूरे देश में बड़ा चेहरा बन गए थे। उन्होंने जीएमडीसी मैदान में बड़ी सभा करके उस वक्त की सरकार को हिला दिया था। उनके आंदोलन को पास (PAAS) यानी पाटीदार अनामत आंदोलन समिति ने संचालित किया था। गुजराती में अनामत का मतलब आरक्षण से है।

अखिलेश यादव ने प्रशासन पर सवाल उठाए, मिल्कीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर अब आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू

नई दिल्ली उत्तर प्रदेश के मिल्कीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर अब आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मिल्कीपुर में उपचुनाव निष्पक्ष नहीं हुआ है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए कहा, “अगर चुनाव आयोग सख्त कार्रवाई करता तो मिल्कीपुर में निष्पक्ष चुनाव हुआ होता। ये चुनाव निष्पक्ष नहीं हुआ है, इसलिए मैंने कहा है कि वह (भाजपा) बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर का दिया हुआ वोटिंग का अधिकार छीनना चाहते हैं। सभी ने देखा है कि भाजपा के लोगों ने वोट के अधिकार को भी छीन लिया है।” उन्होंने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा, “अयोध्या के एसएसपी राजकरन नय्यर, मिल्कीपुर के एसडीएम राजीव रतन सिंह, सीओ मिल्कीपुर श्रेयस त्रिपाठी, इनायतनगर थाना के एसओ देवेंद्र पांडेय, थाना कुमारगंज के अमरजीत सिंह, थाना खंडासा के संदीप सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक पवन तिवारी पर काफी दबाव है। इतनी सी बात है कि दबाव बहुत है और कोई भी सच नहीं बोल सकता है।” बता दें कि मिल्कीपुर विधानसभा की जनता ने उपचुनाव में अपना 2022 का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। यहां के मतदाताओं ने साल 2022 में हुए अब तक के सर्वाधिक 60.23 फीसदी मतदान को पीछे छोड़ते हुए उपचुनाव में 65.35 फीसदी मतदान किया है। इससे पहले समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मिलकर मिल्कीपुर विधानसभा उपचुनाव में धांधली को लेकर ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने आरोप लगाया कि मिल्कीपुर विधानसभा उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के पोलिंग एजेंटों को मतदान कक्ष से बाहर निकाला गया, पुलिस अधिकारियों द्वारा मतदाताओं की आईडी चेक की गई और दर्जनों पोलिंग स्टेशनों पर भाजपा द्वारा फर्जी वोटिंग कराया गया। आरोप ये भी है कि भाजपा नेताओं द्वारा चार पहिया वाहनों के काफिले के साथ निर्वाचन क्षेत्र में घूम-घूम कर चुनाव को प्रभावित किया गया है।

अरविंद केजरीवाल इस बार चुनाव नहीं जीतेंगे और दोबारा जेल जाएंगे, भाजपा नेता आर. तमिल सेल्वन ने दावा किया

मुंबई दिल्ली विधानसभा के ल‍िए मतदान संपन्‍न होने के बाद आए एग्जिट पोल के रुझानों पर महाराष्ट्र से भाजपा नेता आर. तमिल सेल्वन ने दावा किया है कि अरविंद केजरीवाल इस बार चुनाव नहीं जीतेंगे और दोबारा जेल जाएंगे। मीडिया से बातचीत के दौरान आर. तमिल सेल्वन ने कहा कि ” सभी मीडिया स्रोत इस बात का संकेत दे रहे हैं कि अरविंद केजरीवाल चुनाव नहीं जीतेंगे। क्योंकि उन्होंने झूठे वादे कर दो बार तो चुनाव जीत ल‍िया, लेकिन इस बार उन्‍हें पराजय का सामना करना पड़ेगा और वह दोबारा जेल जाएंगे। भाजपा पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी।” एग्जिट पोल में कांग्रेस के कमजोर नजर आने पर भाजपा नेता ने कहा, “कांग्रेस सिर्फ दिल्ली में ही नहीं, पूरे देश से खत्म हो रही है। हरियाणा के विधानसभा चुनाव में हार मिली। महाराष्ट्र में भाजपा ने 132 सीटों पर जीत हासिल की। यहां कांग्रेस को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा। धीरे-धीरे हर राज्य से कांग्रेस मुक्त होगी। आने वाले समय में कांग्रेस एक-दो प्रदेशों में ही रह जाएगी। फिर सोनिया गांधी वापस इटली जाएंगी। राहुल गांधी किधर जाएंगे पता नहीं।” उन्होंने कहा, “एक कारण यह भी है कि साल 2014 में पीएम मोदी के आने बाद लोगों के विकास के लिए योजनाएं लाई गईं, जैसे आयुष्मान योजना, आवास योजना। भाजपा ने 10 साल में वह कार्य किए हैं, जो कांग्रेस 60 साल में भी नहीं कर पाई। इसलिए भाजपा पर जनता का विश्वास बढ़ा है।” तिरुपति बालाजी मंदिर में गैर-हिंदुओं की सेवा समाप्त करने पर भाजपा नेता आर. तमिल सेल्वन ने कहा, “तिरुपति देवस्थानम बोर्ड का कहना है कि किसी भी धर्म का कोई भी व्यक्ति बालाजी मंदिर में दर्शन के लिए आ सकता है। हालांकि, उन्हें देवस्थानम के नियम और कानून के बारे में पूछना चाहिए कि क्या गैर-हिंदू उनकी समिति में हो सकते हैं।” हिन्दुओं की एकजुटता पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर भाजपा नेता आर. तमिल सेल्वन ने कहा, “मोहन भागवत ने सही कहा है, और इस मामले में प्रधानमंत्री मोदी ने भी ‘एक हैं तो सुरक्षित हैं’ का उल्लेख किया है।”

राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने कहा- दिल्ली में केजरीवाल से लोग नाराज, 8 फरवरी को बनेगी भाजपा की सरकार

नई दिल्ली दिल्ली की सभी 70 विधानसभा सीटों पर बुधवार को चुनाव खत्म होने के साथ ही कई एजेंसियों के एग्जिट पोल सामने आ गए हैं। अधिकतर एग्जिट पोल में दावा किया गया है कि दिल्ली में सत्ता परिवर्तन हो सकता है और अरविंद केजरीवाल सरकार बनाने से चूक सकते हैं। राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने एग्जिट पोल पर कहा, “एग्जिट पोल में जो कुछ भी दिखाया जा रहा है, वह बिल्कुल सच के करीब है। जमीनी सच्चाई ये है कि केजरीवाल के खिलाफ लोगों में नाराजगी है। दिल्ली में लोग उनसे नाराज हैं और कई मुद्दे ऐसे भी थे, जिस पर केजरीवाल लोगों को समझा नहीं पाए। इसी के अनुकूल ही एग्जिट पोल भी है। मुझे लगता है कि रिजल्ट आम आदमी पार्टी के खिलाफ ही आएगा। 8 फरवरी के बाद दिल्ली में भाजपा की सरकार बनेगी।” उन्होंने लालू प्रसाद के बयान पर कहा, “वह जितनी बार भी तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाने की बात कहेंगे, उनकी पार्टी उतनी ही कमजोर होगी और लोग भी उनसे दूर होते जाएंगे। अब लालू यादव कुछ भी कहते रहें, ये उनका मामला है।” उपेंद्र कुशवाहा ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “कांग्रेस के लोगों को दलित से कोई लेना-देना नहीं है। वह सिर्फ दिखावे के लिए कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं और भाषण देते हैं कि हम दलितों के साथ हैं।” वहीं, एग्जिट पोल को लेकर शिवसेना प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने कहा, “एग्जिट पोल के नतीजों के मुताबिक दिल्ली में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिल रहा है और कांग्रेस-आम आदमी पार्टी का सफाया होने वाला है। कांग्रेस को तो दो सीट मिलने का अनुमान है और ये स्वाभाविक था कि लोकसभा चुनाव के दौरान सभी अवसरवादी पार्टियां एकजुट हुई थीं। बाद में अलग-अलग होकर चुनाव लड़ने लगीं। इन लोगों में एकजुटता नहीं है, ये साफ हो गया है।”  

‘ पूरे देश को UCC की जरूरत है, हर कोई चाहता है…’, TMC सांसद शत्रुघ्न सिन्हा बोले- नॉनवेज पर भी पूरे देश में लगे बैन

नई दिल्ली तृणमूल कांग्रेस सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने एक बयान से जनता को चौंकाया है. उन्होंने समान नागरिक संहिता (UCC) की पैरवी की है और कहा है कि इसे देश भर में लागू किया जाना चाहिए. शत्रुघ्न सिन्हा ने उत्तराखंड में लागू हुए समान नागरिक संहिता की भी तारीफ की है. शत्रुघ्न सिन्हा का ये बयान तब आया है जब गुजरात में भी समान नागरिक संहिता लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. गुजरात में यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए एक कमेटी बनाई गई हैं. इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत जज रंजना देसाई करेंगीं. रंजना देसाई ने ही उत्तराखंड में लागू यूसीसी का मसौदा तैयार किया है. टीएमसी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने संसद के बाहर एएनआई से बातचीत करते हुए कहा, “उत्तराखंड में जो हुआ है, प्रथम दृष्टतया हम सब कहें तो सराहनीय है… यूनिफॉर्म सिविल कोड तो होना ही चाहिए, किसी भी देश में होना चाहिए और तमाम देशवासी इस बात को मानेंगे.” हालांकि टीएमसी सांसद ने कहा कि यूसीसी के अंदर बहुत सारे पेंच हैं जिन्हें दूर किये जाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि यूसीसी में बहुत सारे लोगों का, बहुत सारे वर्गों का ध्यान रखा जाना जरूरी है. ऐसा नहीं लगना चाहिए कि आप वोट के लिए अथवा चुनाव के लिए इसे लागू कर रहे हैं. बीफ बैन का मुद्दा उठाते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि कई जगह इसे बैन किया गया है और ये सही भी है. उन्होंने कहा, “मुझे पूछोगो तो बीफ बैन सही है और बीफ बैन ही क्यों पूरे देश में नॉनवेज ही बैन किया जाना चाहिए. ये मेरी राय है.” उन्होंने केंद्र पर नाराजगी जताते हुए कहा कि आपने कई जगह बीफ बैन किया हुआ है और कई जगह इसे बैन नहीं किया है. नॉर्थ ईस्ट में क्या है? उन्होंने कहा कि बीफ को लेकर नॉर्थ इंडिया में ‘मम्मी’और नॉर्थ ईस्ट में ‘यम्मी’ वाली नीति नहीं चलेगी. यूनिफॉर्म सिविल कोड की चर्चा करते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि यूसीसी में बहुत पेंच है. इस पर विचार विमर्श के लिए सर्वदलीय बैठक होनी चाहिए.सबकी राय ली जानी चाहिए. और इसे चुनाव अथवा वोट के दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए. इसे समझबूझ कर सावधानी के साथ किया जाना चाहिए. टीएमसी सांसद ने कहा कि अगर इसे सावधानी के साथ, चर्चा के बाद लागू किया जाएगा तो इसके सकारात्मक परिणाम होंगे. गौरतलब है कि शत्रुघ्न सिन्हा पहले बीजेपी के ही नेता थे. लेकिन लंबे समय तक बीजेपी नेतृत्व से दूरी के बाद अप्रैल 2019 में वे कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए थे. मार्च 2022 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस ज्वाइन कर ली थी. अप्रैल 2022 में आसनसोल लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में उन्होंने बीजेपी को शिकस्त दी थी. फिर 2024 लोकसभा चुनाव में उन्होंने आसनसोल सीट से टीएमसी के टिकट पर जीत हासिल की थी.  

दिल्ली की जनता के मन में मोदी जी हैं और आतिशी को यह अच्छे से पता है कि वो चुनाव हारने जा रही हैं: रमेश बिधूड़ी

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता रमेश बिधूड़ी ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी की नेता और दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी पर जोरदार निशाना साधा। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि आतिशी के पास दिल्ली के लोगों को बताने के लिए कुछ भी नहीं है, क्योंकि उन्होंने पिछले पांच सालों में दिल्ली की जनता के लिए कोई काम नहीं किए हैं। उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली की जनता के मन में मोदी जी हैं और आतिशी को यह अच्छे से पता है कि वो चुनाव हारने जा रही हैं। भाजपा नेता ने आगे कहा कि मुझे लगता है कि आतिशी को अब देश की व्यवस्था पर विश्वास करना चाहिए। लेकिन, आतिशी ऐसा ना करके गाड़ियों का काफिला लेकर अपने साथ चल रही हैं और हमारे कार्यकर्ताओं को उठवा रही हैं, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि आतिशी कभी किसी की फोटो जारी कर रही है, तो कभी किसी की। मुझे लगता है कि आतिशी जी को ऐसा नहीं करना चाहिए, बल्कि उन्हें संविधान पर और देश की व्यवस्था पर विश्वास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आतिशी की यह संस्कृति ही हैं। उनके संस्कार ही ऐसे हैं। उन्होंने कहा कि अब देश के लोग आम आदमी पार्टी के नेताओं की सच्चाई जान चुके हैं, तो ऐसे में जनता इन लोगों के झांसे में नहीं आने वाली है। उन्होंने आगे कहा कि अगर मैं चुनाव लड़ूंगा, तो जाहिर सी बात है कि मेरे बेटा और मेरी पत्नी चुनाव प्रचार में जरूर हिस्सा लेंगे। उन्होंने आतिशी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वो हर किसी को गुंडा कह दे रही हैं, जो मन में आ रहा है, वो कह रही हैं, लेकिन हम उन्हें कुछ कह नहीं रहे हैं, क्योंकि वो एक महिला हैं। बता दें कि दिल्ली में पांच फरवरी को मतदान है और नतीजों की घोषणा आठ फरवरी को होगी।

भारत का संविधान किसी के पिताजी का नहीं है, ओवैसी किसी गलतफहमी में न जिएं, कानून के हिसाब से चलेगा देश’: गिरिराज सिंह

नई दिल्ली भाजपा सांसद गिरिराज सिंह ने मंगलवार को वक्फ संसोधन को लेकर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर पलटवार करत हुए कहा कि संविधान किसी की बपौती नहीं है। असदुद्दीन ओवैसी ने चेतावनी दी थी कि संशोधित वक्फ कानून के लागू होने पर देश में अस्थिरता पैदा होगी। उन्होंने कहा था कि देश के मुसलमान इसे नहीं मानेंगे। गिरिराज सिंह ने यहां संसद भवन परिसर में आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “भारत का संविधान किसी के पिताजी का नहीं है। ओवैसी किसी गलतफहमी में न जिएं। देश में कानून का राज है और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। देश कानून से चलेगा।” उन्होंने कहा, “कोई समाज हिंदू हो या मुसलमान, कानून से ऊपर कोई नहीं है। देश को उन्होंने बहुत डरा लिया। जो लोग बोर्ड के सौदागर हैं, वे डरेंगे। लेकिन कोई कानून से बड़ा बनने की कोशिश न करे। जो कानून कहेगा, वही वक्फ बोर्ड में होगा।” वक्फ से समाज में असमानता पैदा होने वाले ओवैसी के बयान पर गिरिराज सिंह ने कहा, “उनको यह बात कांग्रेस से पूछनी चाहिए। कानून से बड़ा कोई समाज नहीं है, चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान, ओवैसी हो या रामनाथ। वह देश को डराने का काम कर रहे हैं, लेकिन देश डरने से नहीं चलता, बल्कि कानून से चलता है। अगर कांग्रेस का राज होता तो वह डराकर काम करा लेते।” औद्योगिक स्तर पर चीन के भारत से बेहतर होने वाले लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान पर गिरिराज सिंह ने कहा, “राहुल गांधी की मानसिकता देश विरोधी है। वह चीन से पैसा खाते हैं। वे लोग चीन के पैसे पर पलने वाले हैं, इसलिए चीन की तारीफ कर रहे हैं।”

महाकुंभ की दुर्घटना पर हेमा मालिनी का बयान, कहा- ‘इतना बड़ा, कुछ नहीं हुआ…

नई दिल्ली उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान हुई भगदड़ में 30 लोगों की मौत पर मथुरा से बीजेपी सांसद हेमा मालिनी ने विवादित बयान दिया है. उन्होंने कहा कि घटना इतनी बड़ी नहीं थी, जितना इसे बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जा रहा है. हेमामालिनी ने कहा कि हम भी कुंभ गए थे. हमने संगम में स्नान किया. ये दुखद घटना हुई थी. लेकिन इतनी बड़ी नहीं थी. सब कुछ मैनेज कर लिया गया था. मुझे इसके बारे में ज्यादा पता नहीं है लेकिन घटना इतनी बड़ी नहीं थी, जितना बढ़ा-चढ़ाकर इसे दिखाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल प्रयागराज जाकर पवित्र स्नान करेंगे. अगर स्थिति मैनेज नहीं होती तो क्या प्रधानमंत्री जाते? दरअसल संसद में महाकुंभ में हुई भगदड़ को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से सवाल उठाए जाने के सवाल पर हेमामालिनी ने कहा कि अखिलेश का काम ही गलत बोलना है. घटना घटी थी लेकिन इतनी बड़ी घटना नहीं थी. बता दें कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संसद के बजट सत्र के पहले दिन राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान महाकुंभ में हुई मौतों के आंकड़ों को लेकर सवाल उठाए थे. अखिलेश यादव ने कहा कि डिजिटल कुंभ कराने वाले मृतकों के आंकड़े तक नहीं दे पा रहे. लाशें कहां फेंकी गईं, बताया जाना चाहिए. मुख्यमंत्री ने मृतकों को श्रद्धांजलि तक नहीं दी. वे घटना को छिपाने में लगे रहे. पुण्य कमाने आए लोग अपनों के शव लेकर गए. उन्होंने मृतकों का आंकड़ा जारी करने की मांग करते हुए कहा कि सरकार मृतकों के आंकड़े नहीं दे पाई. बच्चों के आंकड़े तो नदारद हैं. खोया-पाया केंद्रों पर लोग अपनों को खोज रहे हैं. महाकुंभ में लोगों ने अपनों को खोया. कुंभ का आयोजन कोई पहली बार नहीं हुआ. समय समय पर जिसकी भी सरकारें रही हैं, इसका आयोजन करती रही हैं. सपा प्रमुख ने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण को लेकर कहा कि उनके अभिभाषण में वही सारी पुरानी बातें थीं. 80 करोड़ लोगों को फ्री राशन, 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर लाई गई, 10 करोड़ गैस कनेक्शन दिए गए. यही आबादी 105 करोड़ हो जा रही है तो सरकार किस आबादी के लिए काम कर रही है. अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार के दोनों इंजन कहीं आपस में टकरा तो नहीं रहे. दस साल पहले जिसे क्योटो बनाने की बात कही थी, वहां आज तक ये मेट्रो तक नहीं शुरू करा पाए. यूपी में जो भी मेट्रो चल रही है, सब समाजवादियों की देन है. हेमा मालिनी ने कहा- ये मेरा सौभाग्य है, मुझे भी यहां स्थान मिला नहाने का संगम पर चारों ओर इस भयावह मंजर के बीच मौनी अमावस्या के मौके पर अमृत स्नान के लिए हेमा मालिनी भी पहुंचीं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘महा स्नान के इस शुभ अवसर पर मुझे यहां गुरु स्वामी श्री अवधेशानंद जी के सानिध्य में स्नान करने का अवसर मिला है, ये मेरा सौभाग्य है, बहुत ही अच्छा लगा है। इतने करोड़ों लोग आए हुए हैं। मुझे भी यहां स्थान मिला नहाने का, धन्यवाद।’    

चुनाव आयोग और दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर चुनाव में धांधली कर रही BJP, मनीष सिसोदिया का दावा

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और पूर्व दिल्ली शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने मंगलवार को चुनाव आयोग (EC) और दिल्ली पुलिस पर भाजपा के साथ मिलकर दिल्ली चुनावों में धांधली करने का गंभीर आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री आतिशी के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली में चुनावी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हो रही है, जहां भाजपा समर्थक खुलेआम हिंसा, गुंडागर्दी और मतदाताओं को धमका रहे हैं। EC और पुलिस के दम पर चुनाव लड़ रही बीजेपी- सिसोदिया सिसोदिया ने कहा, “हमारे देश का चुनाव आयोग पहले पूरे विश्व में आदर्श था, लेकिन अब इसका कामकाज देखने से ऐसा लगता है जैसे भाजपा ने चुनाव आयोग को चुनाव चलाने की जिम्मेदारी दे दी हो।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अपने दम पर चुनाव नहीं लड़ रही है, बल्कि चुनाव आयोग और दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर चुनाव जीतने की कोशिश कर रही है। सिसोदिया ने कहा कि सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए हैं जो यह साफ दिखाते हैं कि भाजपा के गुंडे पिछले कुछ दिनों से हिंसा और धमकियों में शामिल हैं।   AAP कार्यकर्ताओं को धमका रहे बीजेपी समर्थक उन्होंने जंगपुरा विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा समर्थक खुलेआम AAP के कार्यकर्ताओं, खासकर महिला कार्यकर्ताओं को धमकियां दे रहे हैं, जैसे “हम शिक्षित हैं, हमारे बच्चे शिक्षित हैं, अगर तुम हमारे खिलाफ बोलोगी तो हम तुम्हें तेजाब फेंक देंगे।” सिसोदिया ने यह भी बताया कि युवा मतदाता भी भाजपा समर्थकों की धमकियों का शिकार हो रहे हैं, जहां वे उन्हें यह कहकर डराते हैं कि “अगर तुम हमारे खिलाफ वोट दोगे, तो तुम्हारा चेहरा किसी को नहीं दिखेगा।” चुनाव आयोग की निष्क्रियता पर खड़े किए सवाल चुनाव आयोग की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए सिसोदिया ने कहा, “पुलिस उन लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है, जो इन घटनाओं की शिकायत कर रहे हैं। पुलिस और चुनाव आयोग कुछ नहीं कर रहे हैं।” सिसोदिया ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपील करते हुए कहा, “आप दिल्ली में चुनावी रैलियां कर रहे हैं, लेकिन आपकी पार्टी के लोग ही हिंसा फैला रहे हैं। इसे रोकने की जरूरत है।” सिसोदिया ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा समर्थक झुग्गी-झोपड़ी वालों से वोटर आईडी जबरदस्ती छीन रहे हैं और उन्हें धमका रहे हैं कि “अगर तुम वोट डालने गए, तो हमारी नजर तुम पर होगी।”   भाजपा जीती तो दिल्ली में माफिया राज होगा- सिसोदिया उन्होंने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा, “क्या हम लोकतंत्र के लिए लड़ रहे हैं या गुंडागर्दी के लिए? भाजपा खुलेआम ऐसी गतिविधियों में शामिल हो रही है।” सिसोदिया ने चेतावनी दी कि अगर भाजपा जीतती है तो दिल्ली की कल्याणकारी योजनाओं को नष्ट कर दिया जाएगा, जैसे मुफ्त शिक्षा, बिजली, बस यात्रा, और 24 घंटे बिजली। सिसोदिया ने कहा, “अगर भाजपा जीतती है, तो दिल्ली में लोकतांत्रिक शासन नहीं चलेगा, बल्कि माफिया राज होगा।” सिसोदिया की मीडिया से अपील सिसोदिया ने एक और वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि उसमें भाजपा के उम्मीदवार और उनके समर्थक जंगपुरा में महिलाओं के साथ मारपीट कर रहे हैं। सिसोदिया ने मीडिया से अपील की, “मैं मीडिया से आग्रह करता हूं कि इस मामले को उजागर करें। अगर चुनाव आयोग और पुलिस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, तो कम से कम जनता को इसकी जानकारी होनी चाहिए।” चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया चुनाव आयोग ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमने बार-बार आरोपों का सामना किया है, लेकिन हम संविधानिक संयम बनाए रखेंगे। चुनाव आयोग अपने कर्तव्यों को निष्पक्ष तरीके से निभा रहा है और हर शिकायत पर कार्रवाई की जा रही है।”

एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत पवार और कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने नई युवा कांग्रेस की टीम को मंजूरी दी

नई दिल्ली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने राष्ट्रवादी युवा कांग्रेस की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का ऐलान किया है। एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत पवार और कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने नई एनसीपी युवा कांग्रेस की टीम को मंजूरी दी है। राष्ट्रवादी युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष धीरज शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अजित पवार, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल, राष्ट्रीय महासचिव सुनील तटकरे, और महासचिव अविनाश आदिक की स्वीकृति से मैं राष्ट्रवादी युवा कांग्रेस की राष्ट्रीय समिति की घोषणा कर रहा हूं। राष्ट्रवादी युवा कांग्रेस की राष्ट्रीय समिति का ऐलान किया गया है। विमल कुमार शर्मा, शेख जिलानी, जानकी पांडे, जगन्नाथ भोज, मोहसिन शेख और विजय यादव को राष्ट्रीय महासचिव घोषित किया गया है। राष्ट्रीय महासचिव (कानूनी प्रकोष्ठ) की जिम्मेदारी एडवोकेट अनिल कुमार वर्मा को सौंपी गई है। इसके अलावा राष्ट्रीय सचिव के नामों का भी ऐलान किया गया है, जिसमें अमित वशिष्ठ, सौरभ आहूजा, विजय दीक्षित, आनंद उप्रेती, पी.सी. सनूप, परबजीत सिंह, विकास पांडे, युवराज सिंह श्योकंद, एन संजीत कुमार सिंह, धीरज मिश्रा, रोहित टाडा, बिष्णु दास, सीमा किरण, अतुल सिंह, साजिर एम, अखिल शर्मा, वरुण कुमार और यश पवार को जगह दी गई है। राष्ट्रवादी युवा कांग्रेस की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी के अनुसार, सूरज चव्हाण को महाराष्ट्र अध्यक्ष, वरुण कुमार को बिहार अध्यक्ष, गौरव त्रिपाठी को यूपी अध्यक्ष, वीरेन्द्र सिंह संधू को राजस्थान अध्यक्ष, सी.के. गफूर को केरल अध्यक्ष, अनुपाल दास को असम अध्यक्ष, मोहम्मद आरिफ शफी को जम्मू एवं कश्मीर अध्यक्ष, जिग्नेश जोशी को गुजरात अध्यक्ष और दीपक यादव को राष्ट्रवादी युवा कांग्रेस का दिल्ली अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा रतन मौली को तमिलनाडु का प्रदेश अध्यक्ष, शिहास कोयमक्कड़ा को लक्षद्वीप के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही साहिबान अहमद को हरियाणा, सौरभ आहूजा को उत्तराखंड, कुलदीप बराड़ को पंजाब और अविनाश प्रशांत पाठक को बिहार का कॉर्डिनेटर बनाया गया है।  

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