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भाजपा ने विपक्षी गठबंधन पर लगाया आरोप, महाराष्ट्र से लेकर झारखंड तक वोट जिहाद और तुष्टिकरण की राजनीति कर रहे हैं

महाराष्ट्र भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने विपक्षी गठबंधन पर आरोप लगाया है कि ये महाराष्ट्र से लेकर झारखंड तक वोट जिहाद और तुष्टिकरण की राजनीति कर रहे हैं। ये घुसपैठियों का वोट मांगेंगे और वोट जिहाद भी करेंगे। भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय में शन‍िवार को मीडिया को संबोधित करते हुए गौरव भाटिया ने कहा कि चुनाव की बेला है। भाजपा, महायुति और एनडीए गठबंधन विकास की और नागरिकों के सशक्तिकरण की बात कर रहा है। झारखंड में हुए पहले चरण के मतदान से यह स्पष्ट हो गया है कि राज्य में भारी बहुमत से भाजपा-एनडीए की सरकार आ रही है। भाट‍िया ने कहा, महाराष्ट्र में भी जो हवा चल रही है,उससे स्पष्ट हो चुका है कि वहां पर महायुति की ही जीत होगी। लेकिन दूसरी तरफ झारखंड में हेमंत सोरेन एवं कांग्रेस और महाराष्ट्र में अघाड़ी गठबंधन ( कांग्रेस, शरद पवार और उद्धव ठाकरे गठबंधन ) है जो घुसपैठियों का वोट मांग रहे हैं। इन दोनों राज्यों में तुष्टिकरण की पराकाष्ठा हो रही है और वोट जिहाद चलाया जा रहा है। उन्होंने चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट से इन अपीलों का स्वतः संज्ञान लेकर कठोर कार्रवाई करने की मांग की है। भाजपा प्रवक्ता ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सकारात्मक नारे ‘एक रहोगे तो सेफ रहोगे’ पर विपक्षी दलों ने आपत्ति की लेकिन झारखंड और महाराष्ट्र, दोनों राज्यों में वोट जिहाद चलाया जा रहा है, मुस्लिम संगठन इंडी गठबंधन को वोट देने की अपील कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया ​मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मौलाना सज्जाद नोमानी ने महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी गठबंधन को समर्थन देने की बात कही है तो वहीं झारखंड में जमीयत उलेमा- लोहरदगा ने मुसलमानों से इंडी गठबंधन को वोट करने की अपील की है । यह आज मजबूती से पूछा जाएगा कि क्या यह वोट जिहाद, संविधान का उल्लंघन और चुनाव आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है ? उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड और महाराष्ट्र दोनों राज्यों में लैंड जिहाद भी चलाया जा रहा है। झारखंड में रोटी, माटी और बेटी मुख्य मुद्दा है। कांग्रेस के केंद्र में रहने के दौरान देश की सीमाओं पर घुसपैठियों को रोकने की कोई व्यवस्था नहीं की गई। वहीं झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार ने भी आदिवासियों की बेटियों और उनकी जमीन को बचाने के लिए कुछ नहीं किया। उन्होंने आगे कहा कि साहिबगंज की आबादी 1961 में 4.14 लाख थी। उस समय, साहिबगंज में मुस्लिमों की आबादी लगभग 20 प्रतिशत थी। अब साहिबगंज की आबादी 11.5 लाख हो गई है और मुस्लिम आबादी 4 लाख पहुंच गई है, जो कुल आबादी का करीब 35 प्रतिशत है। यहां पर मुस्लिमों की आबादी 15 प्रतिशत बढ़ गई है। उन्होंने झारखंड के कई अन्य जिलों में भी इसी तरह से मुस्लिमों की जनसंख्या में बढ़ोतरी का दावा करते हुए यह भी कहा कि ये घुसपैठिए राष्ट्र की सुरक्षा के साथ-साथ आदिवासी समाज के लिए भी खतरा हैं। झारखंड में हेमंत सोरेन और कांग्रेस का सूपड़ा साफ होने जा रहा है। झारखंड में दो-तिहाई बहुमत से भी ज्यादा सीटों के साथ भाजपा नीत एनडीए और महाराष्ट्र में भी पूर्ण बहुमत के साथ महायुति की सरकार बनने जा रही है। ओवैसी के बयान को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि दोनों भाइयों में भारतीयता की भावना नहीं है , ये भारत की मिट्टी और भारत के लोगों को अपना नहीं मानते हैं क्योंकि इनकी रगों में रजाकारों का खून है। ओवैसी बंधु की राजनीतिक हैसियत क्या है,यह हम सबको पता है। उन्होंने ममता बनर्जी के बयान पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि घुसपैठियों के साथ बैठकर ममता बनर्जी बिरयानी खाती हैं और घुसपैठियों की सबसे बड़ी समस्या,पश्चिम बंगाल में है। अखिलेश यादव के बयान पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को अपने मुख्यमंत्री के कार्यकाल को याद करना चाहिए जब वह पूरी तरह से फेल हो गए थे। उत्तर प्रदेश की जनता ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया है और अखिलेश यादव को आत्मचिंतन करना चाहिए।

कांग्रेस चुनाव आते ही झूठ और लूट की दुकान खोल देती है, महाराष्ट्र की जनता अब इन इरादों को समझ चुकी है: भजनलाल शर्मा

मलाड/महाराष्ट्र मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शनिवार को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के तहत मुंबई के मलाड (पश्चिम) में आयोजित राजस्थानी समाज सम्मेलन को सम्बोधित किया। इस दौरान इन्होंने मलाड पश्चिम से महायुति प्रत्याशी श्री विनोद शेलार को समर्थन देकर विजयी बनाने की अपील की । मुख्यमंत्री ने अपने सम्बोधन में कहा कि कांग्रेस चुनाव आते ही झूठ और लूट की दुकान खोल देती है। उन्हें ना तो राज्य और राष्ट्र से प्रेम है और ना ही जनता के हितों से कोई सरोकार। उन्होंने कहा कि स्वार्थ की भावना से ओतप्रोत कांग्रेस और इनके सहयोगियों में गठबंधन नही ठगबंधन की स्थिति है। ये लोग कभी विकास की बात नही करते। महाराष्ट्र की जनता अब इन इरादों को समझ चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कांगे्रस की झूठ और लूट की दुकान बंद हो गई है। जनता जानती है कि विकास केवल श्री मोदी जी के नेतृत्व में ही संभव है। लोगों में भाजपा के प्रति अति उत्साह और उमंग है तथा महाराष्ट्र में बहुत बडे़ बहुमत के साथ महायुति की सरकार बनेगी। शर्मा ने कहा कि कांगे्रस सरकार ने सीएए तथा ट्रिपल तलाक समाप्त करने का विरोध किया। साथ ही, जब महायुति सरकार ने औरंगाबाद का नाम बदल कर छत्रपति संभाजी नगर रखा तब भी महाविकास अघाड़ी इसका विरोध करते रहे। कांगे्रस केवल तुष्टीकरण की राजनीति करती है, इन्हें भोलीभाली जनता को फंसा कर अपना काम निकालना आता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने देश के विकास में कभी जाति को आधार नही माना। पीएम किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित सभी जन कल्याणकारी योजनाओं में किसी भी व्यक्ति से जाति-धर्म नही पूछा गया। भारतीय जनता पार्टी ‘सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास-सबका प्रयास‘ की की अवधारणा पर काम करती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार जो कहती है वह करके दिखाती है। राजस्थान में हमारी सरकार ने 11 माह के अल्पकाल में संकल्प पत्र के 50 प्रतिशत वादें पूरे कर दिये हैं। किसान सम्मान निधि में बढ़ोत्तरी, 450 रु में रसोई गैस सिलेण्डर, पेट्रोल-डीजल की दरों में कमी, सामाजिक सुरक्षा पेन्शन में वृद्धि जैसे कई निर्णय राज्य सरकार द्वारा लिए गये है जिससे किसान, महिला, गरीब तथा युवा सहित सभी वर्गों को राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि गत सरकार के समय हुए पेपर लीक प्रकरणों से युवाओं के मन में बहुत हताशा थी। हमने इसे समझते हुए आते ही इन प्रकरणों में लिप्त पाये गए 200 लोगों को गिरफ्तार किया। हमारी सरकार बनने के बाद अब तक एक भी पेपर लीक नहीं हुआ है। प्रवासी राजस्थानी राज्य में करें निवेश, राज्य सरकार हर संभव मदद करेंगी शर्मा ने कहा कि राजस्थान की धरा महाराणा प्रताप, सूरजमल, पन्नाधाय तथा अमृता देवी की वीर भूमि है। राष्ट्र के लिए महाराणा प्रताप हो या छत्रपति शिवाजी, दोनों नेे अपना सर्वस्व बलिदान किया। राष्ट्र को आगे बढ़ाने की प्रेरणा हमें इन्हीं महापुरूषों से मिलती है। उन्होंने कहा कि प्रवासी राजस्थानियों ने भी अपनी कर्मठता के दम पर राजस्थान की मिट्टी की खुशबू पूरे विश्व भर में फैलाई है। सामाजिक सरोकार के काम में राजस्थानी सबसे आगे रहते है। प्याऊ बनाने का काम हो या मंदिर के जीर्णोद्वार का अथवा व्यापार में पहचान बनाने का, मारवाड़ियों ने अपने कर्म से ही हर क्षेत्र में अपनी साख बनाई है। मुख्यमंत्री ने प्रवासी राजस्थानियों को 9 से 11 दिसंबर को राजस्थान में आयोजित होने वाले राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट के लिए आंमत्रित करते हुए कहा कि वे राजस्थान में निवेश करे, उनके लिए राजस्थान के द्वार हमेशा खुले है। राज्य सरकार निवेशकों को हर संभव मदद करेगी। मुख्यमंत्री ने प्रवासी राजस्थानियों से आह्वान किया कि महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और समाज को स़मृद्ध बनाने के लिए एकजुट होकर महायुति गठबंधन को वोट दे। जनता के समर्थन से डबल इंजन की सरकार महाराष्ट्र के सपनों को साकार कर पायेगी। उन्होंने प्रत्याशी श्री विनोद शेलार को अधिक से अधिक मत देकर विजयी बनानेे की अपील की। इससे पहले शर्मा को गोरेगांव स्पोर्टस क्लब का मानद सदस्य बनाकर सम्मानित किया गया।

राज ठाकरे ने कहा, रैली करने की मुझे अनुमति नहीं मिली, इसकी बजाए मैं मुंबई और ठाणे विधानसभा क्षेत्रों का दौरा करूंगा

महाराष्ट्र महाराष्ट्र में 20 नवंबर को विधानसभा चुनाव होने हैं. चुनाव प्रचार के दौरान महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने कहा कि 17 नवंबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में अपनी रैली नहीं करेंगे. ऐसा इसलिए क्योंकि चुनाव आयोग (EC) ने इसकी अनुमति नहीं दी है. ठाकरे ने कहा इसके बजाए वह मन से उम्मीदवारों के लिए प्रचार कर मुंबई और ठाणे विधानसभा क्षेत्रों का दौरा करेंगे. रैली की बजाय दौरा करूंगा- राज ठाकरे महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर राज ठाकरे ने कहा, “रैली करने की मुझे अनुमति नहीं मिली है और मेरे पास बैठक करने के लिए 1.5 दिन ही शेष है, ऐसे में 1.5 दिनों में रैलियां करनी मुश्किल है. इसकी बजाए मैं मुंबई और ठाणे विधानसभा क्षेत्रों का दौरा करूंगा.” गौरतलब है कि शिवसेना (यूबीटी) और मनसे ने 17 नवंबर को प्रसिद्ध शिवाजी पार्क में रैली आयोजित करने की अनुमति मांगी थी, जिसे लेकर दोनों ही पार्टियों के प्रस्तावित कार्यक्रमों के लिए चुनाव आयोग की अनुमति नहीं मिली है. 20 नवंबर को होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के प्रचार 18 नवंबर को शाम 5 बजे तक समाप्त हो जाएंगे.   17 नवंबर को बाल ठाकरे की पुण्यतिथि साल 1966 में शिवसेना की स्थापना के बाद से ही बाल ठाकरे की पहली दशहरा रैली का स्थल शिवाजी पार्क ही था. मैदान पर दशहरा रैली तभी से ही शिवसेना की पहचान बन गई. शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे चचेरे भाई हैं. पिछले हफ्ते उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी ने 17 नवंबर को शिवाजी पार्क में एक रैली करने के लिए चुनाव आयोग से अनुमति मांगी थी. 17 नवंबर के दिन ही शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे की पुण्यतिथि भी है. साल 2012 में मृत्यु के बाद बाल ठाकरे का अंतिम संस्कार शिवाजी पार्क में ही किया गया था. 

महाराष्ट्र में 158 निर्वाचन क्षेत्र तय करेंगे कि राज्य की सत्ता की चाबी महायुति के पास जाएगी या महाविकास अघाड़ी के पास

महाराष्ट्र महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में 158 निर्वाचन क्षेत्र तय करेंगे कि राज्य की सत्ता की चाबी महायुति के पास जाएगी या महाविकास अघाड़ी के पास. इन 158 निर्वाचन क्षेत्रों में बीजेपी बनाम कांग्रेस, शिंदे की शिवसेना बनाम, ठाकरे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी बनाम शरद पवार की एनसीपी है. लेकिन, आरएसएस को चिंता बीजेपी की नहीं, बल्कि उन 83 सीटों की है, जहां शिवसेना शिंदे और एनसीपी अजित पवार का शिवसेना उद्धव गुट और एनसीपी शरद पवार से मुकाबला है. ये 83 सीटें तय करेंगी कि राज्य में बीजेपी कांग्रेस से बेहतर है या नहीं, असली शिवसेना शिंदे की है या ठाकरे की और असली राष्ट्रवादी अजित पवार है या शरद पवार. 2019 के बाद बदले समीकरण 2019 के विधानसभा चुनावों की अगर बात करें तो महायुति और महा विकास अघाड़ी में दो पार्टियां थीं, जो मुख्य रूप से बीजेपी और कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ रही थी और एनसीपी शिवसेना के खिलाफ चुनाव लड़ रही थी. लेकिन, 2019 के बाद बदले समीकरण में महायुति और महा विकास अघाड़ी में तीन-तीन पार्टियों का गठबंधन बन गया. इसलिए 2024 के विधानसभा चुनाव में सीधी लड़ाई का समीकरण बन गया है. कहां किसके बीच होगी सीधी टक्कर • विदर्भ की 35, मराठवाड़ा की 10, पश्चिमी महाराष्ट्र की 12, मुंबई की 8, उत्तरी महाराष्ट्र की 6 और कोंकण की 4 सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर है. • महाराष्ट्र की 75 सीटों पर बीजेपी बनाम कांग्रेस का मुकाबला है. • दूसरी सीधी लड़ाई दोनों शिवसेना के बीच हो रही है. शिंदे की शिव सेना 46 सीटों पर ठाकरे की सेना के खिलाफ खड़ी है. विदर्भ में 5 सीटों पर दोनों शिवसेना आमने-सामने हैं, जबकि मराठवाड़ा में 10, पश्चिम महाराष्ट्र में 8, मुंबई में 10, उत्तर महाराष्ट्र में 4 और कोंकण में 9 सीटों पर दोनों शिवसेना आमने-सामने हैं. • महाराष्ट्र की 37 विधानसभा सीटों पर एनसीपी अजित पवार और एनसीपी शरद पवार के बीच मुकाबला है. वे दोनों विदर्भ में 3 सीटों, मराठवाड़ा में 6 सीटों, पश्चिम महाराष्ट्र में 21 सीटों, मुंबई में 1, उत्तरी महाराष्ट्र में 3 और कोंकण में 3 सीटों पर लड़ने जा रहे हैं. • 38 विधानसभा सीटों पर शरद पवार की एनसीपी का बीजेपी उम्मीदवारों के साथ मुकाबला है.   • 19 सीटों पर कभी सहयोगी रही उद्धव ठाकरे की शिवसेना के उम्मीदवार कांग्रेस के खिलाफ खड़े हैं. इन सीटों पर सीधी लड़ाई यह तय करेगी कि राज्य की सत्ता पर कौन बैठेगा. वहीं दूसरी तरफ बीजेपी को आरएसएस को शिंदे और अजित पवार की 83 सीटों की चिंता है. अगर इन 83 सीटों पर दोनों पार्टियों का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा तो खेल बिगड़ सकता है. इसलिए बीजेपी ने इन सीटों को जीतने के लिए पूरी ताकत लगा दी है.

हेमंत सोरेन का आरोप, जिन राज्यों में भाजपा का शासन है वहां हुए पेपर लीक के मामलों में भाजपा का ही हाथ

रांची झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्रीय जांच एजेंसियों पर शुक्रवार को निशाना साधते हुए दावा किया कि वे ‘‘मुर्गी चोरी” जैसी घटनाओं की जांच करने में व्यस्त हैं जबकि उत्तर प्रदेश में हुए पेपर लीक के मामलों को भाजपा के इशारे पर वे छू भी नहीं रही है। सोरेन ने आरोप लगाया कि जिन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का शासन है वहां हुए पेपर लीक के मामलों में भाजपा का ही हाथ हैं और पार्टी इससे मिले धन का इस्तेमाल अपने चुनाव-प्रचार अभियान के लिए कर रही है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘झारखंड चुनाव में जो आप भाजपा के ताम-झाम देख रहे हैं वह सब सिर्फ और सिर्फ पेपर लीक के पैसों की वजह से है… ईडी, सीबीआई, एनआईए जो आज कल मुर्गी चोरी की भी जांच करने लगी है वह कभी भी पेपर लीक के मामलों की जांच क्यों नहीं करती है? इसलिए, क्योंकि भाजपा ही पर्चे लीक करवाती है और उस पैसे से वह चुनाव के बाद विधायक/सांसद खरीदती है।” उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा शासित सभी राज्यों में पेपर लीक होते गए। मध्यप्रदेश में तो व्यापमं ने ना जाने कितने बेगुनाहों की जान ले ली। झारखंड में एक परीक्षा लीक हुई, तो हमने तुरंत देश का सबसे कड़ा क़ानून बनाया, लेकिन भाजपा इसे काला कानून करार देते हुए राजभवन चली गई।” सोरेन ने दावा किया कि अगर उन्हें ईडी और सीबीआई द्वारा ‘‘झूठे” मुकदमों में परेशान नहीं किया गया होता तो उन्होंने सरकार में कई नए पद सृजित किए होते और बड़े पैमाने पर भर्तियां सुनिश्चित की होतीं। 

प्रधानमंत्री आदिवासियों के हितैषी होने का दिखावा कर रहे : कांग्रेस

नई दिल्ली कांग्रेस ने केंद्र पर आदिवासियों को न्याय से वंचित करने के प्रयासों में ‘‘पूरी ताकत” लगा देने का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को कहा कि ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ (डीएजेजीयूए) वन अधिकार अधिनियम का मजाक है एवं सरकार के पाखंड को दर्शाता है। विपक्षी दल ने यह भी आरोप लाया कि डीएजेजीयूए ‘‘विशुद्ध मनुवादी अंदाज” में इन समुदायों को केवल जंगलों में रहने वाले ‘वनवासी’ के रूप में देखता है, जो अपने आप में राजनीतिक और आर्थिक शक्ति होने के बजाय सिर्फ श्रमिक हैं। कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने कहा कि आज धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती है जो भारत के महानतम सपूतों में से एक और स्वशासन एवं सामाजिक न्याय के प्रबल समर्थक थे। प्रधानमंत्री आदिवासियों के हितैषी होने का दिखावा कर रहे रमेश ने एक बयान जारी कर कहा, ‘‘इस अवसर पर ‘नॉन बायोलॉजिकल’ प्रधानमंत्री बिहार के जमुई में आदिवासियों के हितैषी होने का दिखावा कर रहे हैं, जबकि उनकी सरकार आदिवासियों को न्याय से वंचित करने के प्रयासों में पूरी ताकत लगा रही है।” उन्होंने कहा, ‘‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए) उनके इसी पाखंड को दर्शाता है। यह है तो भगवान बिरसा मुंडा के नाम पर लेकिन यह वन अधिकार अधिनियम का पूरी तरह से मजाक बनाता है।” रमेश ने कहा कि मनमोहन सिंह सरकार द्वारा पारित वन अधिकार अधिनियम (एफआरए 2006) एक क्रांतिकारी कानून था और इसने वनों से संबंधित शक्ति एवं अधिकार को वन विभाग से ग्राम सभा को हस्तांतरित किया था। उन्होंने बताया कि परंपरा से हटकर एक और कदम उठाते हुए जनजातीय कार्य मंत्रालय को कानून के क्रियान्वयन के लिए नोडल प्राधिकरण के रूप में सशक्त बनाया गया। रमेश ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम ने आदिवासी समुदाय और ग्राम सभाओं को वनों पर शासन और प्रबंधन का अधिकार दिया था जो वनों के लोकतांत्रिक शासन को सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा सुधार था। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन इस क्रांति के बाद नरेन्द्र मोदी की प्रति-क्रांति आई।” उन्होंने कहा, ‘‘डीएजेजीयूए इस ऐतिहासिक कानून और वन प्रशासन में लोकतांत्रिक सुधार को मूल रूप से खत्म कर देता है।” रमेश ने कहा कि यह एफआरए के कार्यान्वयन में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को अधिकार देकर जनजातीय मामलों के मंत्रालय के अधिकार को कमजोर करता है। उन्होंने बताया कि एफआरए के वैधानिक निकायों – अर्थात ग्राम सभा, उप-मंडल समिति, जिला स्तरीय समिति और राज्य स्तरीय निगरानी समिति – को सशक्त बनाने के बजाय डीएजेजीयूए ने जिला और उप-मंडल स्तरों पर एफआरए की इकाइयों का एक विशाल समानांतर संस्थागत तंत्र बनाया है और उन्हें बड़े स्तर पर धनराशि एवं संविदा कर्मचारियों से लैस किया है। रमेश ने कहा कि वे सीधे जनजातीय मामलों के मंत्रालय और राज्य जनजातीय कल्याण विभागों के केंद्रीकृत नौकरशाही नियंत्रण के अधीन हैं और एफआरए की वैधानिक निकायों के प्रति उनकी जवाबदेही नहीं है। उन्होंने कहा कि डीएजेजीयूए राज्य जनजातीय कल्याण विभागों द्वारा ग्राम सभाओं के एफआरए कार्यान्वयन और सीएफआर प्रबंधन गतिविधियों के लिए तकनीकी एजेंसियों/डोमेन विशेषज्ञों/कॉर्पोरेट एनजीओ को शामिल करता है और उनकी सेवाएं लेता है। रमेश ने तर्क दिया कि इन एफआरए इकाइयों को वे काम करने हैं जिन्हें एफआरए वैधानिक निकायों को कानून के तहत करना आवश्यकता हैं और इन वैधानिक निकायों को इन एफआरए इकाइयों के उप अंग के रूप में छोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा कि एफआरए की इन इकाइयों को नाममात्र के एफआरए निकायों का आदेश मानने तक सीमित कर दिया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘इसमें शामिल आर्थिक और सामाजिक पहलुओं पर ध्यान दिए बिना ऐसा किया गया है, जबकि इसके लिए भारी भरकम बजट आवंटित किया गया है (प्रत्येक सीएफआर के लिए तकनीकी एजेंसियों को एक लाख रुपये)। उदाहरण के लिए, मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार ने ‘वनमित्र’ ऐप बनाने के लिए ‘महाराष्ट्र नॉलेज कंपनी लिमिटेड’ (एमकेसीएल) को नियुक्त किया जिसने एफआरए दावों को प्रस्तुत करने की पारदर्शी प्रक्रिया को एक अस्पष्ट, ऑनलाइन प्रक्रिया में बदल दिया और इसकी जिम्मेदारी तकनीकी ऑपरेटरों ने संभाली है।” उन्होंने बताया कि इसके परिणामस्वरूप तीन लाख दावे खारिज कर दिए गए। रमेश ने कहा कि ऐसी तकनीकी एजेंसियों की भागीदारी के कारण बड़े पैमाने पर ऐसी घटनाएं होने से आदिवासी समुदाय चिंतित है।

आप पार्टी में शमूल हुए कांग्रेस के तीन बार के विधायक रहे दलित नेता वीर सिंह धींगान

नई दिल्ली दिल्ली में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस के तीन बार के विधायक रहे दलित नेता वीर सिंह धींगान ने आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया है। ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता दिलाई और स्वागत किया। ‘आप’ ने हाल के दिनों में कांग्रेस और भाजपा के कई नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल किया है। वीर सिंह धींगान सीमापुरी सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं। दिल्ली सरकार के खादी ग्रामोद्योग और एससी-एसटी बोर्ड के चेयरमैन रह चुके हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने उन्हें सीमापुरी सीट से उतारा था। इस सीट पर ‘आप’ के राजेंद्र पाल गौतम ने जीत हासिल की थी। वह पिछले दिनों ‘आप’ को छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए। अब ‘आप’ ने कांग्रेस से हिसाब बराबर कर लिया है। माना जा रहा है कि पार्टी धींगान को आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट दे सकती है। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि वीर सिंह धिंगान आप पार्टी में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘वह दिल्ली की राजनीति में एक बड़ा व्यक्तित्व हैं और सामाजिक सेवा में जुटे रहे हैं। उनके आने से आप पार्टी को मजबूती मिलेगी। खासतौर से दलितों के लिए किए जाने वाले कार्यों को मजबूती मिलेगी। सीमापुरी क्षेत्र के वह भावी विधायक बन सकते हैं। अरविंद ने कहा कि आज अच्छे-अच्छे लोग आप पार्टी में काम की वजह से जुड़ रहे हैं। भाजपा एवं कांग्रेस के नेता आप पार्टी में आ रहे हैं जो बताता है कि आने वाले चुनाव में आप पार्टी अच्छे बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है।’ आप पार्टी में शामिल होते हुए वीर सिंह धिंगान ने कहा कि वह लंबे समय से कांग्रेस के साथ जुड़े रहे हैं। आज कांग्रेस एवं भाजपा में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता अंदर कुछ और एवं बाहर कुछ और कहते हैं। गुरुवार को आयोजित निगम चुनाव में हमारे नेताओं ने भाजपा को सपोर्ट किया जिसका उन्हें काफी दुख है। इसलिए उन्होंने निर्णय लिया है कि वह आप पार्टी में रहकर लोगों की सेवा करेंगे। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में विश्वास जताते हुए वह आप पार्टी से जुड़ रहे हैं। वीर सिंह धिंगान ने कहा कि अरविंद केजरीवाल एनजीओ चलाने के समय सीमापुरी इलाके में काम करते थे। उन्होंने देखा है कि उस समय किस तरह अरविंद ने घर-घर जाकर लोगों के लिए काम किया। वह किस तरह गरीबों, पिछड़ों और दलितों के लिए काम करते हैं, वह काबिले तारीफ हैं। दलितों के लिए राजनीतिक पार्टियों ने केवल बोला है, लेकिन वास्तव में अगर किसी ने दलितों के लिए काम किया है तो वह अरविंद केजरीवाल ने किया है। उन्होंने ही दलितों के लिए योजनाओं को बेहतर तरीके से चलाया है।दिल्ली के विकास में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दिल्ली के शिक्षा मॉडल को उन्होंने देश-विदेश में प्रसिद्ध किया है। इसलिए वह बिना किसी लालसा के आप पार्टी में शामिल हो रहे हैं। पार्टी को मजबूत करने के लिए वह बेहतर ढंग से काम करेंगे।

देवेंद्र फडणवीस ने कहा- रिजल्ट के बाद ही पता चलेगा कौन किसके साथ

मुंबई महाराष्ट्र में कभी 4 राजनीतिक दल हुआ करते थे, लेकिन शिवसेना और एनसीपी में बंटवारे के चलते 6 पार्टियां चुनावी मैदान में हैं। इस बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या चुनाव के बाद भी यही तस्वीर बनी रहेगी या कुछ दल पालाबदल भी कर सकते हैं। अजित पवार की पार्टी ने इसके संकेत भी दिए हैं और कहा है कि असली तस्वीर चुनाव के बाद ही सामने आएगी। इस बीच डिप्टी सीएम और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने भी स्वीकार किया है कि चुनाव के बाद कुछ भी हो सकता है। उन्होंने गुरुवार को कहा कि विधानसभा चुनाव ‘अजब’ है और 23 नवंबर को परिणाम घोषित होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि कौन गुट किसका समर्थन कर रहा है। फडणवीस ने कहा कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना, अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा और भाजपा के गठबंधन ‘महायुति’ को कांग्रेस, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) और शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (एसपी) पर बढ़त हासिल है। फडणवीस ने कहा, ‘ये चुनाव अजीब हैं। हमें नतीजों के बाद ही पता चलेगा कि कौन किसके साथ है। महायुति के भीतर भी आंतरिक विरोधाभास है।’ उन्होंने दावा किया कि एमवीए को भी इसी तरह की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। फडणवीस ने कहा कि उनकी पार्टी का नारा ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ एमवीए के चुनाव प्रचार अभियान के जवाब में गढ़ा गया है। भाजपा नेता ने दावा किया कि उनके सहयोगियों अशोक चव्हाण और पंकजा मुंडे के साथ-साथ उप मुख्यमंत्री अजित पवार इसके ‘मूल’ अर्थ को समझने में विफल रहे। महाराष्ट्र में 20 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बार-बार इस्तेमाल किए जाने वाले इस नारे ने विपक्ष को इसकी निंदा करने के लिए एकजुट कर दिया है। विपक्ष का दावा है कि इस नारे के सांप्रदायिक निहितार्थ हैं, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन के कुछ नेताओं ने भी इस पर आपत्ति जताई है। फडणवीस ने कहा कि ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ कांग्रेस नीत महाविकास आघाडी के विभाजनकारी चुनाव प्रचार अभियान के जवाब में गढ़ा गया नारा है। इस नारे का मूल संदेश यह है कि ‘सभी को एक साथ रहना होगा।’ फडणवीस ने कहा, ‘इस नारे का मतलब यह नहीं है कि हम मुस्लिमों के खिलाफ हैं। हमने यह नहीं कहा कि लाडकी बहिन योजना का लाभ मुस्लिम महिलाओं को नहीं दिया जाएगा।’ उन्होंने दावा किया, ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ भी कांग्रेस और एमवीए के तुष्टिकरण का जवाब है। उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान ‘वोट जिहाद’ का प्रयोग किया और मस्जिदों में पोस्टर लगाए गए, जिसमें लोगों से एक विशेष पार्टी को वोट देने का आग्रह किया गया। यह किस तरह की धर्मनिरपेक्षता है। सीएम बनने के सवाल पर बोले- जीना यहां, मरना यहां इस दौरान देवेंद्र फडणवीस ने चुनाव बाद खुद के सीएम बनने की संभावनाओं पर भी बात की। उनसे पूछा गया कि क्या आपका प्रमोशन होगा? इस सवाल को वह हंसकर टाल गए। लेकिन यह भी कहा, ‘भाजपा मुझसे जो भी करने को कहेगी, मैं वह करूंगा। ‘जीना यहां, मरना यहां, इसके सिवा जाना कहां।’ भाजपा जहां भी जाने को कहेगी, मैं वहां जाऊंगा।’

मध्य प्रदेश में बीजेपी का बूथ संगठन पर्व शुरू, हर इकाई में तीन महिलाओं को बनाया जाएगा सदस्य

भोपाल मध्य प्रदेश में बीजेपी (BJP) का बूथ संगठन पर्व शुरू हो गया है. इसमें बूथ स्तरीय इकाईयों का गठन किया जाएगा. हर इकाई में तीन महिलाओं को सदस्य बनाया जाएगा. प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा भोपाल में हुजूर विधानसभा के बूथ क्रमांक-223 पर बूथ संगठन पर्व का शुभारंभ कर पन्ना प्रमुख बने. राज्य की पहली बूथ अध्यक्ष अर्चना गोस्वामी सहित 11 पदाधिकारियों और सदस्यों को सहमति से चुना गया. वहीं, पन्ना प्रमुख का दायित्व ग्रहण करने के बाद प्रदेशाध्यक्ष शर्मा ने कहा कि मुझे इस बात का गर्व है कि मेरे बूथ पर पन्ना प्रमुख की भूमिका मिली है. संगठन पर्व के पहले फेज में सदस्यता पर्व में प्रदेश ने इतिहास रचा है और आज तक 1.65 करोड़ से ज्यादा सदस्य पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर चुके हैं. हमारा दूसरा फेज बूथ के संगठन पर्व की शुरुआत गुरुवार से हो गई. यह 20 नवंबर तक चलेगा. उन्होंने कहा कि देश-प्रदेश में महिला सशक्तीकरण को लेकर बीजेपी हमेशा आगे रही है. बूथ संगठन पर्व का शुभारंभ कर पन्ना प्रमुख बने वीडी शर्मा संगठन पर्व पर प्रदेश के 65,013 बूथों में हर बूथ पर तीन महिलाओं को स्थान दिया जाएगा. बूथ कमेटी में हर वर्ग के लोगों को स्थान देने की शुरुआत भी हो गई है. इसी दिशा में अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम के लिए इंचार्ज, व्हाट्सएप इंचार्ज सहित लाभार्थी इंचार्ज भी बनाया गया और प्रदेशभर में इस तरह संगठन पर्व के तहत सभी वर्गों को शामिल कर प्रतिनिधित्व दिया जाएगा. बीजेपेी अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार गरीब कल्याण की योजनाओं के माध्यम से गरीबों का कल्याण कर उनके जीवन में खुशियां लाने का काम कर रही हैं. केंद्र और राज्य सरकार नई-नई योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने का कार्य कर रही हैं. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के आरोपों का जवाब देते हुए बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस जब चुनाव जीतती है तो राहुल गांधी के सिर पर सेहरा सजाती है. हारने का आभास होता है तो गुंडागर्दी करने पर उतारू हो जाती है और प्रशासन एवं ईवीएम पर ठीकरा फोड़ती है. विजयपुर में कांग्रेस नेताओं ने गुंडागर्दी की है, मैनें वहां जाकर इसका विरोध किया है. 23 नवंबर को जब परिणाम आएंगे, तब विजयपुर और बुधनी की जनता का जवाब कांग्रेस को मिलेगा.

झारखंड विधानसभा के लिए पहले चरण के मतदान के बाद ही यह तय हो गया है कि राज्य में भाजपा की सरकार बन रही है: अमित शाह

गिरिडीह केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को दावा किया कि झारखंड विधानसभा के लिए पहले चरण के मतदान के बाद ही यह तय हो गया है कि राज्य में भाजपा की सरकार बन रही है। गिरिडीह में भाजपा के प्रत्याशी निर्भय शाहाबादी के पक्ष में आयोजित चुनावी सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पहले चरण के चुनाव में ही झामुमो-कांग्रेस का राज्य में सूपड़ा साफ हो गया है। जनता ने भाजपा-एनडीए के प्रत्याशियों को भरपूर समर्थन दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि झारखंड हमेशा से ऊर्जा का केंद्र रहा है। पूरे देश में यह सबसे समृद्ध राज्य है। इसके नीचे इतना खनिज और कोयला पड़ा है कि पूरे देश को ऊर्जा देने काम कर सकता है। झारखंड समृद्ध है, पर झारखंड गरीब है। आप यहां निर्भय शाहाबादी को जिताइए। इसके बाद यहां के युवाओं को पलायन के लिए विवश नहीं होना पड़ेगा। हम यहां नए कल-कारखाने लगाएंगे। झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा उठाते हुए शाह ने कहा कि हेमंत सरकार का ध्यान यहां घुसपैठियों को बसाने पर है। ये घुसपैठियां झारखंड में आते हैं और झारखंडी बेटियों से शादी करके उनकी जमीन हड़प लेते हैं। आप बीजेपी की सरकार बनाइए, यहां सिर्फ घुसपैठिए ही नहीं बल्कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता। मैं घुसपैठियों से कहना चाहता हूं कि हेमंत सरकार का समय खत्म हो गया है और आपका भी। हम एक-एक करके सभी घुसपैठियों को बाहर निकालेंगे। हम ऐसा कानून लाएंगे कि घुसपैठियों को लूटी गई सारी जमीन वापस करनी होगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी कश्मीर में अनुच्छेद-370 वापस लाना चाहती है, लेकिन राहुल गांधी को बता देना चाहता हूं कि उनकी चार पीढ़ियां भी अनुच्छेद-370 को वापस नहीं ला सकती हैं। जब यूपीए 10 साल सत्ता में थी, तो हर दूसरे दिन आतंकवादी हमला करते थे। लेकिन, जब आपने मोदी जी की सरकार बनाई, तो उरी और पुलवामा में उन्होंने ऐसी ही कोशिश की, जिसका हमने चुन-चुन कर बदला लिया। झारखंड ने सालों तक नक्सलवाद को झेला है। नक्सलवादियों ने झारखंड को तबाह करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। छत्तीसगढ़ में जो नक्सलवाद बचा है 31 मार्च 2026 के पहले उसे भी समाप्त कर देंगे। उन्होंने राहुल गांधी पर तंज करते हुए कहा कि सोनिया गांधी को अपने बेटे को लॉन्च करने का बड़ा शौक है। उन्होंने 20 दफा राहुल नाम का प्लेन लॉन्च किया, पर प्लेन लैंड ही नहीं होता। 20 दफा क्रैश कर गया। 21वीं बार भी उनका प्लेन देवघर में क्रैश होने वाला है। हरियाणा में सूपड़ा साफ। राहुल गांधी का झारखंड में पांच का भी आंकड़ा पार नहीं होने वाला है। राहुल गांधी और हेमंत सोरेन वक्फ कानून बदलने का विरोध कर रहे हैं पर मैं उन्हें बता देना चाहता हूं कि हम संसद में वक्फ कानून बदलने का काम करेंगे।

मैं कहना चाहता हूं कि संविधान उनके लिए खाली है क्योंकि उन्हें पता नहीं है कि संविधान के अंदर क्या लिखा है: राहुल गांधी

नंदुरबार लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी गुरुवार को महाराष्ट्र के नंदुरबार में थे। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा। यहां उन्होंने चुनावी सभा को संबोधित किया। राहुल गांधी ने कहा है कि दो विचारधाराओं और दो सोच की टक्कर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि मैं जनता के बीच जो संविधान दिखाता हूं वह खाली है। मैं उनसे कहना चाहता हूं कि संविधान उनके लिए खाली है क्योंकि उन्हें पता नहीं है कि संविधान के अंदर क्या लिखा है। राहुल गांधी ने कहा, मुझे लाल रंग से फर्क नहीं पड़ता है। संविधान के अंदर जो लिखा है इसके लिए मैं जान देने के लिए तैयार हैं। इंडी एलायंस संविधान की रक्षा कर रही है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहना चाहता हूं कि संविधान खोखला नहीं है। इसमें बिरसा मुंडा, भगवान बुद्ध, गांधी, फुले की सोच है। इस संविधान में हिंदुस्तान का ज्ञान है, देश की आत्मा है। जब पीएम नरेंद्र मोदी संविधान को खोखला कहते हैं, तो वे बिरसा मुंडा जी, भगवान बुद्ध, गांधी जी, फुले जी, अंबेडकर जी का अपमान करते हैं। संविधान में आपको ‘आदिवासी’ नाम दिया गया है। लेकिन भाजपा-आरएसएस के लोग आपको ‘वनवासी’ कहते हैं। आदिवासी और वनवासी में बहुत बड़ा फर्क है। आदिवासी का मतलब- हिंदुस्तान के पहले मालिक। वनवासी का मतलब- जल, जंगल, जमीन पर आपका कोई अधिकार नहीं है। आपके इसी अधिकार को बचाने के लिए बिरसा मुंडा जी अंग्रेजों से लड़े थे। आज यही सोच लेकर नरेंद्र मोदी और भाजपा के लोग घूम रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने कहा है कि महाराष्ट्र की सरकार यहां के प्रोजेक्ट्स को दूसरे प्रदेश में भेजती है, इस कारण यहां के लोगों को नौकरी करने दूसरे राज्य में जाना पड़ता है। महाराष्ट्र सरकार ने करीब 5 लाख रोजगार छीन लिए। यही कारण है कि यहां के युवा बेरोजगार हैं। लेकिन हमारी सरकार ऐसा नहीं होने देगी। जो प्रोजेक्ट गुजरात का है, वो उनका रहेगा और जो महाराष्ट्र का है, वो यहां से कहीं और नहीं जाएगा।

BJP विधायक ने कहा- मंदिर में आने वालों का मजहबी टेस्ट करने और मंत्र पढ़वाकर खतना की जांच करने की भी बात कही

बागपत बीजेपी विधायक नंद किशोर ने चुनावी माहौल में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि मंदिर में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति की मजहबी पहचान करने की आवश्यकता है। मंदिर में आने वालों का मजहबी टेस्ट करने और मंत्र पढ़वाकर खतना की जांच करने की भी बात कही है। इसके साथ ही खतना चेक करने की भी बात कही। फिलहाल यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। आपको बता दें कि भाजपा विधायक  बुधवार रात छपरौली में एक शादी समारोह में शरीक होने के लिए गए थे, जहां उन्होंने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि मुस्लिम भी हिंदू देवताओ को मानते हैं और जल्द मौलवी भी जलाभिषेक करेंगे और भारत में सनातन धर्म बुलंद होगा। उन्होंने थूक और मूत्र-जिहाद को बड़ी साजिश बताया और कहा कि इसीलिए मुस्लिम धर्मगुरुओं की इस मुद्दे पर  बोलती बंद रहती हैं। ‘हिंदुओं को दरगाह पर नहीं जाना चाहिए’ वहीं, प्रयागराज में लगने वाले महाकुंभ में मुस्लिमों के दुकान न लगाने के निर्देश व इस पर माैलानाओं के हिंदुओं के दरगाह पर न जाने संबंधी सवाल पर पत्रकारों से बात करते हुए भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर ने एक बार फिर विवादित बयान देते हुए कहा है कि हिंदुओं को दरगाह पर नहीं जाना चाहिए, क्योंकि मजार में जिहादी दफन हैं, जिन्होंने महिलाओ पर जुल्म किए हैं।  

पुणे की तीन सीटों पर शरद पवार ने दांव चल दिया है, जिससे अजित पवार को चौकाया, तोड़े तीन सीटों पर 3 नेता

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव अब लगभग आखिरी दौर में है। प्रचार में 5 दिन का ही वक्त बचा है और उससे पहले शरद पवार ने बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेल दिया है। उन्होंने पुणे की दो सीटों पर अजित पवार के सहयोगियों को शामिल कर लिया है तो वहीं एक सीट पर भाजपा के बड़े नेता को अपने पाले में ले आए हैं। इस तरह पुणे की तीन सीटों पर शरद पवार ने दांव चल दिया है, जिन पर अजित पवार और भाजपा खुद को मजबूत मानकर चल रहे थे। अजित पवार के साथी सुनील तटकरे के करीबी और पीएमसी बैंक के पदाधिकारी भी पार्टी में शामिल हो गए हैं। विधानसभा चुनाव के आखिरी चरण में शरद पवार पश्चिमी महाराष्ट्र पर फोकस कर रहे हैं। इस बार फोकस बैठकों, रोड शो और दूसरे नेताओं को पार्टी में लाने पर है। शरद पवार ने आज पुणे और रायगढ़ में पार्टी में कई नेताओं को एंट्री दिलाई। इससे महायुति को झटके की आशंका है। वड़गांव शेरी निर्वाचन क्षेत्र से पूर्व एनसीपी नगरसेवक रेखा टिंगरे और चंद्रकांत टिंगरे ने एनसीपी-एसपी का दामन थाम लिया है। इनके अलावा दिलीप तुपे और अनिल तुपे भी पार्टी में आए गए हैं। इन लोगों का पुणे की हड़पसर सीट पर असर माना जाता है। इसके अलावा धनकवाड़ी के समीर धनकावड़े की भी पार्टी में एंट्री हुई है। वड़गांव शेरी से रेखा टिंगरे शरद पवार की पार्टी में शामिल हो गई हैं। रेखा टिंगरे 2022 में बीजेपी में शामिल हुई थीं, लेकिन चार महीने पहले ही वह अजित पवार की एनसीपी में शामिल हो गईं थीं। अब चुनाव से पहले उन्होंने एक बार फिर से पालाबदल किया है। वडगांवशेरी में सुनील टिंगरे को हराने के लिए शरद पवार उन्हें साथ लाए हैं। दोनों की प्रतिद्वंद्विता जगजाहिर है क्योंकि एक दौर में रेखा टिंगरे ने सुनील टिंगरे से अदावत के चलते ही एनसीपी छोड़ दी थी। दिलीप तुपे पुणे नगर निगम की स्थायी समिति के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं, इसलिए तुपे का अपने क्षेत्र में काफी दबदबा है। तुपेवाड़ी या तुपेगांव का हड़पसर में बड़ा प्रभाव है। यह निर्वाचन क्षेत्र काफी बड़ा है और तुपे का यहां एक इलाके में अच्छा असर है। इस तरह शरद पवार ने इन नेताओं को साथ लाकर अजित पवार और भाजपा के खेमे में सेंध लगाने की कोशिश की है।

खरगे के बेटे का योगी को जवाब, घर को रजाकरों ने जलाया था, पूरे मुस्लिम समुदाय ने नहीं, उनकी मां और बहन की जान ले ली थी

बेंगलूरो कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि घर को रजाकरों ने जलाया था, पूरे मुस्लिम समुदाय ने नहीं। दरअसल, हाल ही में सीएम आदित्यनाथ ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के घर पर हुए हमले का जिक्र किया था। उन्होंने आरोप लगाए थे कि खरगे ने वोट बैंक के चलते इस घटना पर चुप्पी साध रखी थी। प्रियांक खरगे ने पोस्ट किया, ‘हां योगी आदित्यनाथ जी 1948 में रजाकरों ने खरगे जी का घर जला दिया था और उनकी मां और बहन की जान ले ली थी। लेकिन वह बच गए और 9 बार विधायक, दो बार लोकसभा और एक बार राज्यसभा सांसद, केंद्रीय मंत्री, लोकसभा के नेता, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के चुने हुए अध्यक्ष बने। इस घटना के बावूजद उन्होंने इसका इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए नहीं किया, कभी विक्टिम कार्ड नहीं खेला और नफरत को कभी पास नहीं आने दिया।’ उन्होंने आगे लिखा, ‘रजाकरों ने यह घटना को अंजाम दिया, पूरे मुस्लिम समुदाय ने नहीं। हर समुदाय में बुरे लोग होते हैं, जो गलत काम करते हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘तो सीएम साहब मुझे बताए कि आपकी विचारधारा खरगे जी को बराबर का देखने में असफल रही। यह इंसानों में फर्क करती है। क्या इससे आप सभी बुरे हो जाते हैं या वो जो इसे मानते हैं।’ प्रियांक ने सवाल किया, ‘किसने उन्हें अछूत या दलित का लेबल दिया। भेदभाव करने वाली विचारधारा का होना समुदाय के सभी लोगों को बुरा नहीं बनाता है। बनाता है क्या?’ उन्होंने कहा, ’82 साल की उम्र में खरगे जी बुद्ध-बासवन्ना-आंबेडकर के मूल्यों के लिए बगैर थके लड़ रहे हैं और आपकी फैलाई हुई नफरत से संविधान को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वह इस जंग को जारी रखेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘तो योगी जी आप अपनी नफरत को कहीं और ले जाओ। आप उनके सिद्धांतों या उनकी विचारधारा पर बुलडोजर नहीं चला पाएंगे।’ कर्नाटक सरकार में मंत्री ने कहा, ‘राजनीतिक फायदे के लिए नफरत के बीज बोने के बजाए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की ‘उपलब्धियों’ पर चुनाव जीतने की कोशिश करें।’

कम मतदान प्रतिशत से उनके द्वारा घोषित किए गए मतदान के मार्जिन पर कोई असर नहीं पड़ेगा: कांग्रेस

वायनाड वायनाड लोकसभा सीट पर बुधवार को हुए उपचुनाव में 64.72 प्रतिशत वोटिंग हुई। 2009 में इस सीट के गठन के बाद से अब तक का सबसे कम मतदान प्रतिशत है। राहुल गांधी के द्वारा इस सीट से इस्तीफा देने के कारण यहां उपचुनाव की स्थिति बनी। यहां प्रियंका गांधी वाड्रा का मुकाबला सीपीआई उम्मीदवार सत्यन मोकेरी और बीजेपी की नव्या हरिदास से है। मतदान प्रतिशत में गिरावट को लेकर कांग्रेस के भीतर चिंताएं भी जताई गई हैं। आपको बता दें कि कांग्रेस ने प्रियंका गांधी के लिए जीत का अंतर 5 लाख वोटों का दावा किया था। कांग्रेस नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने कहा है कि कम मतदान प्रतिशत से उनके द्वारा घोषित किए गए मतदान के मार्जिन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, यूडीएफ नेताओं ने इसका खंडन किया और दावा किया कि पार्टी की स्थिति मजबूत है। सीपीआई नहीं दिखी उत्साहित केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीसन ने कम मतदान प्रतिशत के लिए सीपीआईएम के प्रभुत्व वाले क्षेत्रों में मतदाताओं के बीच उत्साह की कमी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि कुछ इलाकों में मतदाताओं का रुझान अपेक्षाकृत कम था, जिसके कारण मतदान प्रतिशत में गिरावट आई। प्रियंका गांधी को समर्थन जुटाने के लिए आल इंडिया कांग्रेस कमेटी के महासचिव केसी वेणुगोपाल और दीपा दासमुनी ने प्रियंका गांधी के साथ बैठकों में भाग लिया। इसके अलावा, कांग्रेस नेताओं ने यह सुनिश्चित किया कि उनके विधायक और कार्यकर्ता प्रियंका गांधी के अभियान के दौरान क्षेत्र में मौजूद रहें। प्रियंका गांधी वाड्रा के लिए प्रचार में वरिष्ठ कांग्रेस नेता जैसे पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, विपक्षी नेता राहुल गांधी और कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार भी शामिल हुए। इस उपचुनाव के दौरान इन नेताओं ने प्रियंका गांधी के प्रचार का नेतृत्व किया और पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय रूप से मैदान में लाने की कोशिश की। वायनाड में बाढ़ का असर यह उपचुनाव वायनाड जिले में आई बाढ़ के कुछ महीने बाद हुआ है। बाढ़ के कारण 231 लोगों की मौत हो गई थी। 47 अभी भी लापता हैं। वायनाड उपचुनाव के मतदान प्रतिशत में कमी के बावजूद कांग्रेस और UDF के नेताओं का मानना है कि प्रियंका गांधी की जीत में कोई बाधा नहीं आएगी। अब सभी की नजरें इस बात पर होंगी कि कम मतदान के बावजूद क्या कांग्रेस की उम्मीदें पूरी होती हैं और क्या प्रियंका गांधी वाड्रा वायनाड से जीत हासिल कर पाती हैं।

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