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लोकसभा में राहुल गांधी विवादास्पद बयान, कांग्रेस में फूट, वरिष्ठ नेता ने टिप्पणी को बताया अशोभनीय

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भोपाल  पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के भाई और कांग्रेस नेता लक्ष्मण सिंह ने लोकसभा में राहुल गांधी की हिंदुओं पर की गई टिप्पणी को अशोभनीय और अनावश्यक बताया है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा में सदस्यों को केवल और केवल जनता और देश से जुड़े मुद्दों को उठाना चाहिए। लक्ष्मण सिंह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि संसद में “हिंदुओं”पर की गई टिप्पणी अशोभनीय है और अनावश्यक भी। केवल और केवल जनता और देश से जुड़े मुद्दे उठाना ही उचित होगा। पहले भी पार्टी पर उठा चुके सवाल आपको बता दें पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई हैं लक्ष्मण सिंह और राहुल गांधी को जवाब दे रहे हैं. यह भी सलाह दे रहे हैं कि मुद्दे जो हैं वह जनता के उठाएं ऐसा पहली बार नहीं है. कि लक्ष्मण सिंह के निशाने पर उनकी ही पार्टी का आलाकमान रहा हो. इससे पहले भी तमाम मुद्दे ऐसे आए जहां पर उन्होंने बेबाक राय रखी है. आपको बता दें लक्ष्मण सिंह एक बार राहुल गांधी को लेकर कह चुके हैं कि वे उन्हें बड़ा नेता नहीं मानते हैं. समय समय पर लक्ष्मण  सिंह अपनी ही पार्टी के खिलाफ बयानबाजी करते रहते हैं. बावजूद इसके अभी तक पार्टी की तरफ से उनपर कोई कार्रवाई नहीं की गई है. यही वजह है कि लक्ष्मण सिंह को लेकर कहा जाता है कि वह कांग्रेस के अंदर रहकर भी कांग्रेस पर ही सवाल ज्यादा उठा लेते हैं. लक्ष्मण के बयान पर सीएम मोहन की प्रतिक्रिया सीएम मोहन यादव ने राहुल गांधी को लेकर कहा “लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के भाषण पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, “मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता लक्ष्मण सिंह समेत कई कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी की बातों से असहमति जताई है. मुझे लगता है कि मल्लिकार्जुन खरगे को इस बारे में विस्तृत जानकारी जुटानी चाहिए और राहुल गांधी से उनके इस्तीफे के बारे में बात करनी चाहिए” यह पहली बार नहीं है, जब लक्ष्मण सिंह ने पार्टी लाइन से हटकर बयान दिया है। इससे पहले भी वह कई बार ऐसा कर चुके हैं। अपने बयानों की वजह से वह पार्टी को कई बार असहज कर चुके हैं। राहुल गांधी ने लोकसभा में अपने भाषण में एक विवादास्पद बयान दिया है जिसमें उन्होंने भाजपा को हिंसा करने वाली पार्टी बताया। उन्होंने कहा कि जो खुद को हिंदू बताते हैं, वह हिंसा करते हैं। उनके इस बयान पर कांग्रेस के विभिन्न नेताओं में भी विवाद उत्पन्न हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता लक्ष्मण सिंह को सिरोंज से बीजेपी विधायक उमाकांत शर्मा और खिलचीपुर से बीजेपी विधायक हजारी लाल दांगी ने पार्टी में शामिल होने का न्यौता दिया है। उमाकांत शर्मा ने लक्ष्मण सिंह से आग्रह किया है कि वह कांग्रेस में रहकर क्यों ज्यादती सहन कर रहे हैं और उन्हें भाजपा में शामिल होने का आह्वान किया है। वहीं, हजारी लाल दांगी ने भी कहा कि उन्होंने इस बारे में लक्ष्मण सिंह से बातचीत की है। लक्ष्मण सिंह, जो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और दिग्विजय सिंह के भाई हैं, को लेकर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि वह जल्द ही कांग्रेस का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं।

जो धर्म का विनाश करता है, धर्म उसका विनाश कर देता है: नूपुर शर्मा

Man assaulted for refusing to become BJP member

नई दिल्ली संसद में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के भाषण को लेकर घमासन मचा हुआ है। भाजपा और हिंदुवादी संगठन कांग्रेस नेता पर हमलावर हैं और उन्हें माफी मांगने को कह रहे हैं। इस बीच भाजपा से निकाली जा चुकीं नूपुर शर्मा ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। पैगंबर पर विवादित टिप्पणी की वजह से 2 साल तक सोशल मीडिया से भी गायब रहीं नूपुर शर्मा ने कहा कि जो धर्म का विनाश करता है, धर्म उसका विनाश कर देता है।   नूपुर शर्मा ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘हिंसक हिंदू नहीं बल्कि वो हैं जो हिंदुओं के नरसंहार की बात करते हैं। धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः। तस्माद्धर्मो न हन्तव्यो मा नो धर्मो हतोऽवधीत्।। अर्थात- जो स्वधर्म (हिंदू) विमुख होकर धर्म का विनाश कर देता है, उस का विनाश धर्म कर देता है। जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है।’ माना जा रहा है कि नूपुर ने यह बात राहुल गांधी की ओर से दिए गए बयान को लेकर दिया है। हालांकि, उन्होंने राहुल गांधी का नाम नहीं लिया है। नूपुर शर्मा के इस पोस्ट पर उनके समर्थकों ने जमकर राहुल गांधी के खिलाफ भड़ास निकाली है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सोमवार को राहुल गांधी की ओर से दिए गए भाषण को लेकर भाजपा बेहद आक्रामक है और राहुल से माफी की मांग कर रही है। भाजपा का आरोप है कि राहुल ने हिंदुओं को हिंसक बताया जबकि कांग्रेस और विपक्ष की ओर से सफाई दी जा रही है कि उनका आरोप भाजपा पर था। खुद प्रधानमंत्री और गृहमंत्री अमित शाह ने भी संसद में आपत्ति जाहिर की थी। लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा, ‘सभी धर्मों और हमारे सभी महापुरुषों ने अहिंसा और निडरता की बात की है। वे कहते थे कि डरो मत, डराओ मत। शिवजी कहते हैं डरो मत, डराओ मत। वह अहिंसा की बात करते हैं। लेकिन जो लोग अपने आपको हिंदू कहते हैं, वो 24 घंटे हिंसा, नफरत और असत्य की बात करते हैं।’ इस पर सत्तापक्ष के सदस्य अपने स्थान पर खड़े होकर जोरदार तरीके से विरोध जताने लगे। राहुल ने कहा, ‘आप हिंदू हैं ही नहीं। हिंदू धर्म में साफ लिखा है सत्य के साथ खड़ा होना चाहिए, सत्य से पीछे नहीं हटना चाहिए। ये इसलिए चिल्ला रहे हैं, क्योंकि तीर दिल में जाकर लगा है।’  

पीएम मोदी ने कहा, ‘जब यह बालक बुद्धि पूरी तरह सवार हो जाती है तो सदन में भी किसी के गले पड़ जाते हैं

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर मंगलवार को इशारों-इशारों में जमकर तंज कसे। उन्होंने कहा कि बालक बुद्धि में न बोलने का ठिकाना होता है और न ही व्यवहार का कोई ठिकाना होता है। पीएम मोदी ने कहा, ‘जब यह बालक बुद्धि पूरी तरह सवार हो जाती है तो सदन में भी किसी के गले पड़ जाते हैं। यह बालक बुद्धि अपनी सीमाएं खो देती है और सदन में बैठकर आंखें मारने लगते हैं।’ नेता विपक्ष को लेकर उन्होंने कहा कि इनकी सच्चाई अब पूरा देश समझ गया है। आज देश इनसे कह रहा है कि तुमसे ना हो पाएगा।   नरेंद्र मोदी ने कहा कि कांग्रेस के नेताओं की बयानबाजी ने शोले फिल्म को भी पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने कहा, ‘शोले में एक मौसी जी थीं… तीसरी बार ही तो हारे हैं, पर मौसी मोरल विक्ट्री तो है ना। अरे मौसी 13 राज्यों में 0 सीटें आई हैं, पर हीरो तो है ना। अरे पार्टी की लुटिया तो डुबोई है, पार्टी अभी भी सांसें तो ले रही है।’ उन्होंने कहा कि 16 राज्यों में कांग्रेस जहां अकेले लड़ी, वहां उसका वोट शेयर गिर चुका है। गुजरात, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश, तीन राज्यों में जहां कांग्रेस अपने दम पर लड़ी और वहां 64 में से सिर्फ 2 सीट जीत पाई है। इसका साफ मतलब है कि इस चुनाव में कांग्रेस पूरी तरह परजीवी बन चुकी और अपने सहयोगी दलों के कंधे पर चढ़कर सीटों का आंकड़ा बढ़ाया है।     ‘कांग्रेस में छोटे बच्चे का मन बहलाने का चल रहा काम’ पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस और उसका इकोसिस्टम दिन-रात हिंदुस्तान के नागरिकों के मन में ये प्रस्थापित करने की कोशिश कर रहा है कि उन्होंने हमें हरा दिया है। ऐसा लग रहा है कि आजकल कांग्रेस में छोटे बच्चे का मन बहलाने का काम चल रहा है। उन्होंने कहा, ‘मुझे एक किस्सा याद आ रहा है… 99 मार्क्स लेकर एक बालक घमंड में घूम रहा था और सबको दिखाता था कि देखो कितने मार्क्स आए हैं। लोग भी 99 सुनकर उसे शाबाशी देते थे और हौंसला बढ़ाते थे। फिर उनके टीचर ने बताया कि ये 100 में से नहीं 543 में से 99 लाया है। अब उस बालक बुद्धि को कौन समझाए कि तुमने फेल होने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया है।’  

पीएम मोदी ने राहुल गांधी पर हमला किया कहा, “चाय वाला तीन बार प्रधानमंत्री बन गया, तो ये लोग छटपटा रहे हैं

भोपाल  लोकसभा के सत्र में राहुल गांधी ने सोमवार एक जुलाई को जो भाषण दिया, उससे सियासी महकमे में भयंकर हंगामा मच गया. राहुल गांधी के भाषण के एक हिस्से में हिन्दू समाज का जिक्र किया गया था, जिसके बाद सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी ने कांग्रेस को ‘हिन्दू विरोधी’ करार दे दिया है. अब इस मामले में दिग्विजय सिंह राहुल गांधी के समर्थन में आए हैं. राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने राहुल गांधी के भाषण और इस पर किए जाने वाले बीजेपी के हमले पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा, “राहुल गांधी ने ये अपने भाषण में ही साफ कर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी और आरएसएस हिन्दूओं के प्रतीक नहीं हैं. इनका आचरण हिन्दू धर्म की सीख के खिलाफ है.” ‘भले चाय न बेची हो, लेकिन कई लोग पीएम बने’ वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला करते हुए दिग्विजय सिंह ने बड़ा बयान दिया. दरअसल, मंगलवार को सदन की शुरुआत से पहले बीजेपी के संसदीय दल की बैठक हुई जिसमें पीएम मोदी ने राहुल गांधी पर हमला किया. उन्होंने कहा, “चाय वाला तीन बार प्रधानमंत्री बन गया, तो ये लोग छटपटा रहे हैं.” पीएम मोदी के इस बयान पर दिग्विजय सिंह ने पलटवार करते हुए कहा, “भले ही चाय ना बेची हो लेकिन कई लोग पीएम बने हैं. इस देश में किसी को भी प्रधानमंत्री बनने का हक है. बाबा साहब अंबेडकर के लिखे संविधान की बदौलत मोदी प्रधानमंत्री बने हैं.” क्या था पीएम मोदी का बयान? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी के सदन में व्यवहार को गलत बताया और बीजेपी के सांसदों से अपील की कि उनके जैसा बर्ताव न करें और अच्छा आचरण रखें. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के लिए यह असहनीय है कि एक चाय वाला तीन बार प्रधानमंत्री बन गया.

उमा भारती ने राहुल गांधी पर जोरदार पलटवार किया, कहा उन्हें पद और उम्र का ख्याल रखने की सलाह दी

भोपाल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘हिंदू’ वाले बयान पर जोरदार पलटवार किया है। संसद में विपक्ष के नेता के तौर पर राहुल गांधी के भाषण को लेकर उमा भारती ने कहा कि उन्हें अब अपने पद और उम्र का ख्याल रखना चाहिए। भाजपा की फायरब्रांड नेता ने यह भी कहा कि राहुल गांधी अब युवा नहीं 50 साल के अधेड़ हो चुके हैं, लेकिन भाषण छात्र नेता की तरह दिया।   पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हिंदू या तो हिंसा के शिकार हुए हैं या हिंसा का सामना किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर कहा, ‘कल संसद में राहुल गांधी जी का व्यवहार और भाषण विपक्ष के नेता की तरह नहीं, किसी कॉलेज के उच्छृंखल छात्र नेता की तरह था। राहुल को याद रखना होगा कि वह दुर्भाग्य से विपक्ष के नेता चुन लिए गए हैं, दूसरा वह अब युवा नहीं है बल्कि 50 साल से ज्यादा के अधेड़ हैं। राहुल जी अपना पद, अपना देश और अपनी उम्र का कुछ तो ख्याल रखिए, पूरे देशवासियों के साथ मैं भी आपकी भर्त्सना करती हूं।’ उमा भारती की तरह भाजपा और हिंदूवादी संगठनों के कई नेताओं ने राहुल गांधी के बयान को हिंदू विरोधी बताते हुए उन पर जोरदार पलटवार किया है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपत्ति जाहिर की थी। उन्होंने संसद में कहा कि यह गंभीर मामला है कि राहुल गांधी पूरे हिंदू समाज को हिंसक कह रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अन्य मंत्रियों ने कांग्रेस नेता से माफी मांगने की मांग की। वहीं, कांग्रेस और विपक्षी दलों की ओर से सफाई दी जा रही है कि उन्होंने हिंदुओं पर नहीं बल्कि भाजपा पर हिंसा फैलाने का आरोप लगाया था। लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा, ‘सभी धर्मों और हमारे सभी महापुरुषों ने अहिंसा और निडरता की बात की है। वे कहते थे कि डरो मत, डराओ मत। शिवजी कहते हैं डरो मत, डराओ मत। वह अहिंसा की बात करते हैं। लेकिन जो लोग अपने आपको हिंदू कहते हैं, वो 24 घंटे हिंसा, नफरत और असत्य की बात करते हैं।’ राहुल ने कहा, ‘आप हिंदू हैं ही नहीं। हिंदू धर्म में साफ लिखा है सत्य के साथ खड़ा होना चाहिए, सत्य से पीछे नहीं हटना चाहिए। ये इसलिए चिल्ला रहे हैं, क्योंकि तीर दिल में जाकर लगा है।’  

धीरन शाह को कांग्रेस ने उम्मीदवार तय किया, आखिर कौन है इनवाती जिसके ऊपर पार्टी ने भरोसा जताया है

अमरवाड़ा मध्य प्रदेश की राजनीति की बात करें तो इस समय सबकी निगाहें अमरवाड़ा में होने वाले उपचुनाव पर टिकी हुई हैं. जहां से बीजेपी ने कमलेश शाह को अपना उम्मीदवार बनाया है. गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने भी अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी और अब आखिरकार कांग्रेस ने भी अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी है. धीरन शाह इनवाती को कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार तय किया है. लेकिन आखिर कौन है धीरन शाह इनवाती जिसके ऊपर कांग्रेस ने भरोसा जताया है.आइये जानते हैं. लोकसभा चुनाव में छिंदवाड़ा लोकसभा सीट बीजेपी के हाथ चली गई. जिसके बाद आई बारी अमरवाड़ा में होने वाले उपचुनाव की आपको बता दें कि अमरवाड़ा में होने वाले उपचुनाव जहां कांग्रेस वहीं कमलनाथ के लिए भी साख का विषय बन गए हैं. यहां से आपको बता दें कि युवा चेहरे धीरेंद्र शाह इबनाती को कांग्रेस ने चुनावी मैदान में उतारा है. आपको बता दें धीरेंद्र शाह इबनाती आंचल कुंड दरबार के सेवादार सुखराम दादा की बेटे हैं. सेल्समैन की नौकरी छोड़ लड़ रहे विधायकी का चुनाव धीरन शाह इनवाती एक फ्रेश युवा चेहरा हैं. जो बटका खापा सोसाइटी में सेल्समैन के पद पर कार्य कर रहे थे. बताया जा रहा है कि उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए अपनी नौकरी से भी इस्तीफा दे दिया है. वहीं कांग्रेस ने धीरन शाह इनवाती के नाम पर मोहर लगा दी है. माना यह भी जा रहा है कि धीरन शाह इनवाती और किसी की नहीं बल्कि कमलनाथ की ही पसंद है. इसको लेकर कमलनाथ और नकुलनाथ दोनों ने ही अपने सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक पोस्ट साझा की है. और साथ ही साथ इस घोषणा के बारे में बताया कि कांग्रेस ने धीरन शाह इनवाती को अपना प्रत्याशी बनाया है. कमलनाथ की पसंद पर लगी मुहर आपको बता दें कि कमलनाथ लगातार अमरवाड़ा से गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ गठबंधन के प्रयास कर रहे थे. लेकिन वह बात नहीं बनी लेकिन फिलहाल यह माना जा रहा है. कि, एक बार फिर मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने कमलनाथ की पसंद पर ही मोहर लगाई है. धीरन शाह इनवाती कमलनाथ खेमे से आते हैं. कमलनाथ के करीबी बताए जा रहे हैं. ऐसे में कहीं ना कहीं विधानसभा और लोकसभा की हार के बावजूद भी कांग्रेस का पूरा भरोसा कमलनाथ के ऊपर कायम दिखाई पड़ता है. फिलहाल देखने वाली बात होगी कि धीरन शाह इनवाती जो कि युवा चेहरा हैं. यह जो एक्सपेरिमेंट कांग्रेस ने अमरवाड़ा में किया है. वह कांग्रेस के लिए कितना कामगार साबित होता है. कितनी कड़ी टक्कर कांग्रेस जो है वह बीजेपी और साथ ही साथ गुणवान गणतंत्र पार्टी को यहां से देते हुए दिखाई देती है.

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, दिल्ली आदि राज्यों में हार की पड़ताल की शुरू

 भोपाल लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन वाले राज्यों को लेकर कांग्रेस आलाकमान एक्शन मोड में आ चुका है.  यह एक्शन अब नजर भी आने लग गया है. यही कारण है कि कांग्रेस द्वारा कमेटी बना दी गई है. मध्य प्रदेश को लेकर भी कमेटी बनाई गई है. इस कमेटी में तीन लोगों को रखा गया है. जिनमें दो प्रमुख नाम हैं. आपको बता रहा हूं महाराष्ट्र से आने वाले पृथ्वीराज चौहान साथ ही सात गुजरात से आने वाले जिग्नेश मेवानी इसके अलावा सपतागिरी उल्का को इस कमेटी में रखा गया है. ये कमेटी मध्य प्रदेश में कांग्रेस करारी हार की वजहों का पता लगाएगी. आपको बता दें की मध्य प्रदेश में कांग्रेस के प्रदर्शन को देखते हुए माना जा रहा था कि आला कमान मध्य प्रदेश की हार को लेकर कुछ एक्शन ले सकता है. अब ठीक वैसा नजर आ रहा है. कई और राज्यों के लिए भी कमेटी बनाई गई है. लेकिन, मध्य प्रदेश के लिए आला कमान का यह संकेत है. जीतू पटवारी पद पर रहेंगे या जाएंगे? यह सोचने वाली बात होगी. वो इसलिए क्योंकि मध्य प्रदेश में 29 में से एक सीट भी कांग्रेस हासिल नहीं कर पाई है. जीतू पटवारी बचा पाएंगे अपना पद? आपको बता दें मध्य प्रदेश में कांग्रेस को इस बार पिछले चुनाव के मुकाबले ज्यादा उम्मीद नजर आ रही थी. लेकिन, यहां चुनाव के पहले कई कांग्रेसियों ने बीजेपी का दामन थाम लिया था. जिसका असर चुनाव में भी देखने को मिला है. यहां कांग्रेस कोई खाता तक नहीं खोल पाई है. अब यही वजह है कि आला कमान कमेटी बनाकर यह संदेश दे रहा है कि अगर कमेटी की रिपोर्ट में प्रदेश अध्यक्ष का काम ठीक नहीं निकला तो क्या आलाकमान प्रदेश अध्यक्ष यानि की जीतू पटवारी को हटाया? क्योंकि उसके संकेत भी मिल रहे हैं. कि जिन राज्यों में कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत खराब रहा है. लोकसभा चुनाव में वहां पर आला कमान बदलाव के मूड में है. माना जा रहा है कि और सूत्र बताते हैं कि रिपोर्ट के आधार पर ही आगे फैसला लिया जाएगा. क्या बदलाव के मूड में है आलाकमान? मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को राहुल गांधी का बेहद नजदीकी माना जाता है. लेकिन, अब आला कमान ने कमेटी बना दी और कमेटी का जो उद्देश्य है. हार की समीक्षा में जाहिर सी बात है. जीतू पटवारी पहले ही कह चुके थे. हार के बाद के नैतिक तौर पर उनकी जिम्मेदारी है. लेकिन, सवाल यही उठेगा कि अंतर्विरोध से जूझ रहे जीतू पटवारी के सामने अब यह कमेटी भी जब अपनी रिपोर्ट देगी तो क्या उसके बाद आला कमान जीतू पटवारी को आगे तक जारी रखेगा का अध्यक्ष के तौर पर या बदलाव भी कर सकता है? लोकसभा चुनाव में देश के कई राज्यों में कांग्रेस को जबरदस्त हार का सामना करना पड़ा है। दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश आदि राज्य तो ऐसे हैं, जहां कांग्रेस का खाता तक नहीं खुल सका। यही कारण है कि कांग्रेस ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक व तेलंगाना जैसे राज्यों में मिली हार का कारण ढूंढना शुरू कर दिया है। इन राज्यों में मिली हार के कारण ढूंढने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अलग-अलग फैक्ट फाइंडिंग कमेटियों का गठन किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को कुल 6 फैक्ट फाइंडिंग कमेटियों के गठन को मंजूरी दी है। ये सभी कमेटियां इन राज्यों में हार के कारणों का पता लगाएंगी। इस प्रक्रिया में स्थानीय कांग्रेस नेताओं से भी उनकी राय ली जाएगी। सभी से बात करने के उपरांत हार के कारणों की रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष को सौंपी जाएगी। मध्य प्रदेश में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था। पार्टी यहां लोकसभा की सभी 29 सीटों पर चुनाव हार गई। यहां हार के कारण जानने के लिए तीन सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चौहान, सप्तगिरि उलका और जगदीश मेवानी शामिल हैं। छत्तीसगढ़ में मिली हार के कारणों का पता लगाने के लिए वीरप्पा मोइली और हरीश चौधरी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। ओडिशा में भी कांग्रेस चुनाव बुरी तरह हार गई। यहां हार के कारणों का पता लगाने की जिम्मेदारी अजय माकन और तारिक अनवर को सौंपी गई है। तीन और राज्य ऐसे हैं, जहां कांग्रेस पार्टी का खाता भी नहीं खुल पाया। इनमें दिल्ली, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं। इन तीनों राज्यों के लिए भी एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीएल पुनिया और रजनी पाटिल शामिल हैं। कांग्रेस के नेता इन राज्यों में हार के कारणों का पता लगाकर आलाकमान को रिपोर्ट सौंपेंगे। कर्नाटक में भी कांग्रेस पार्टी को उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिल पाए, यही कारण है कि यहां हुई हार के लिए भी तीन सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी में मधुसूदन मिस्त्री, गौरव गोगोई और हीबी ईडन शामिल हैं। वहीं, तेलंगाना में पीजे कुरियन, रकिबुल हुसैन और प्रगट सिंह की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी उम्मीद के मुताबिक नतीजे न मिलने के कारणों का पता लगाएगी। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को केवल 99 सीटें ही मिल सकी थी। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के इंडिया गठबंधन को कुल 234 सीटें मिली हैं। चुनाव नतीजों से पहले कांग्रेस ने इंडिया गठबंधन को 295 सीटें मिलने का अनुमान लगाया था। कांग्रेस पार्टी ने हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए रोडमैप बनाने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी है। कांग्रेस अभी से विधानसभा चुनाव की तैयारी में भी जुट जाना चाहती है। यही कारण है कि पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने प्रत्येक विधानसभावार प्रभारी नियुक्त करने का सुझाव दिया है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना ने 100 सीटों की डिमांड रख दी

मुंबई महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव के नतीजे भाजपा की उम्मीदों के विपरीत रहे हैं। इसे लेकर मंथन का दौर जारी है और अजित पवार की एनसीपी के साथ तनाव की स्थिति बन गई है। इस बीच विधानसभा चुनाव भी 4 महीने के अंदर ही होने हैं और उसके लिए भी दबाव की राजनीति शुरू हो गई है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना ने विधानसभा चुनवा में अपनी पार्टी के लिए 100 सीटों की मांग रख दी है। पार्टी के सीनियर लीडर रामदास कदम ने कहा कि उनकी पार्टी को राज्य विधानसभा की 288 सीट में से कम से कम 100 पर चुनाव लड़ने का मौका मिलना चाहिए। शिवसेना एऩडीए गठबंधन का हिस्सा है, जिसमें भाजपा और अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) भी शामिल है। राज्य में अक्टूबर में विधानसभा चुनाव होने हैं। पूर्व मंत्री रामदास कदम ने बुधवार को शिंदे गुट द्वारा आयोजित अविभाजित शिवसेना के 58वें स्थापना दिवस के मौके पर कहा, ‘हमें लड़ने के लिए 100 सीट मिलनी चाहिए और हम उनमें से 90 पर जीत सुनिश्चित करेंगे।’ वहीं महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और एनसीपी नेता छगन भुजबल ने भी हाल ही में कहा था कि उनकी पार्टी को राज्य विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए 80 से 90 सीट मिलनी चाहिए। एनसीपी ने भी रखी थी डिमांड, जिस पर बोले थे देवेंद्र फडणवीस एनसीपी के दावे पर तो देवेंद्र फडणवीस ने जवाब भी दिया था और कहा था कि राज्य में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है। उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है और राज्य में होने वाले चुनाव में ज्यादा सीट पर चुनाव लड़ेगी। फडणवीस ने हालांकि यह भी कहा कि तीनों दलों के नेताओं की बैठक और चर्चा के बाद ही सीट बंटवारे पर कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा। माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के नतीजों में भाजपा को महज 9 सीटें मिलने के बाद उसकी स्थिति गठबंधन में कमजोर होगी। उसे साथी दलों का दबाव झेलना पड़ सकता है। क्यों अजित पवार को छोड़कर भाजपा के चुनाव में उतरने की चर्चा हालांकि एक चर्चा यह भी जोर पकड़ रही है कि भाजपा अजित पवार की एनसीपी का साथ छोड़कर चुनाव में उतर सकती है। एकनाथ शिंदे गुट का प्रदर्शन अच्छा था। ऐसे में वह उसे साथ लेकर चलना चाहेगी। एक वजह यह भी है कि शिंदे सेना के साथ उसकी वैचारिक समानता है, जबकि अजित पवार के साथ स्थिति थोड़ा उलट है। बता दें कि संघ के नेताओं ने भी अजित पवार के साथ गठजोड़ पर सवाल उठाया था और लोकसभा चुनाव के खराब नतीजों के लिए जिम्मेदार बताया था।  

देहरा विधानसभा से पार्टी प्रत्याशी के रूप में सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर का नाम

शिमला कांग्रेस नेता और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि वह नहीं चाहते थे कि उनकी पत्नी चुनाव लड़ें, लेकिन पार्टी आलाकमान के जोर देने पर वह मना नहीं कर सके और उन्हें देहरा विधानसभा उपचुनाव में पार्टी उम्मीदवार बनाया गया है। कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल द्वारा  जारी उम्मीदवारों की सूची में देहरा विधानसभा से पार्टी प्रत्याशी के रूप में सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर का नाम है। उन्हें देहरा विधानसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर चुनाव लड़ रहे दो बार के निर्दलीय विधायक होशियार सिंह के खिलाफ मैदान में उतारा गया है। सुक्खू ने मंगलवार देर रात संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं नहीं चाहता था कि मेरी पत्नी चुनाव लड़ें लेकिन कांग्रेस आलाकमान को मना नहीं कर सका।’’ उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने लोकसभा चुनाव के दौरान भी उनसे कहा था कि कमलेश को चुनाव लड़ना चाहिए ‘‘लेकिन मैं नहीं चाह रहा था’’। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘इस बार फिर से आलाकमान ने जोर दिया तो मैं मना नहीं कर सका।’’ उन्होंने कहा कि पार्टी के सर्वेक्षण में उनकी पत्नी उम्मीदवार की दौड़ में सबसे आगे थीं लेकिन वह तब भी नहीं चाहते थे कि उन्हें चुनाव लड़ाया जाए क्योंकि उनका मानना है कि परिवार से एक ही व्यक्ति को राजनीति में होना चाहिए। सुक्खू ने कहा, ‘‘लेकिन राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए हमें देहरा विधानसभा सीट से एक मजबूत उम्मीदवार की जरूरत है। मेरी पत्नी देहरा की रहने वाली हैं। उनके परिवार के लोग वहां रहते हैं और वहां के पंचायत प्रतिनिधि भी चाहते थे कि वह चुनाव लड़ें।’’ मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मैंने पहले कहा था कि ‘देहरा मेरा है’। अब मेरी पत्नी अगले साढ़े तीन साल देहरा में मेरी प्रतिनिधि होंगी और इलाके का विकास सुनिश्चित करेंगी।’’  

एक बार फिर मध्य प्रदेश चुनावी मोड में, प्रदेश की एक राज्यसभा सीट खाली, तमाम तरह की अटकलें और दावेदारी शुरू

भोपाल मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनावों के बाद एक बार फिर मध्य प्रदेश चुनावी मोड में नजर आ रहा है. छिंदवाड़ा जिले की अमरवाड़ा विधानसभा सीट पर उपचुनाव हो रहे हैं. यहां 10 जुलाई को वोटिंग होनी है, जबकि 13 जून को यहां के नतीजे आएंगे. इसके अलावा मध्य प्रदेश की एक राज्यसभा सीट भी खाली हो चुकी है, जिसे लेकर तमाम तरह की अटकलें और दावेदारी शुरू हो चुकी है. कई नेताओं की सक्रियता भी देश की राजधानी दिल्ली और प्रदेश की राजधानी भोपाल में बढ़ गई है. प्रदेश के कई दिग्गज नेता राज्यसभा सीट के लिए अभी से अपनी तैयारी में लगे हुए हैं. मध्य प्रदेश में राज्यसभा सीट को लेकर भारतीय जनता पार्टी से कौन दावेदार माना जा रहा है. आइये जानते हैं. 1. कृष्णपाल सिंह यादव (पूर्व सांसद गुना) साल 2019 में गुना लोकसभा सीट पर ज्योतिरादित्य सिंधिया को करारी हार का मुंह दिखाया था. तभी से भारतीय जनता पार्टी में के पी यादव का दबदबा बढ़ गया है. लेकिन साल 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के भारतीय जनता पार्टी में आने के बाद इस बार के लोकसभा चुनाव में केपी यादव की जगह ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनावी मैदान में उतारा गया. सीट खाली करने और पार्टी के लिए काम करने का ईनाम भारतीय जनता पार्टी केपी यादव को दे सकती है. केपी यादव के राजनीतिक भविष्य को लेकर खुद गृहमंत्री अमित शाह भी लोकसभा चुनाव के दौरान कह चुके थे कि “चिंता करने की जरूरत नहीं है” गुना को दो नेता मिलने वाले हैं. 2. पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा शिवराज सरकार में गृहमंत्री रहे नरोत्तम मिश्रा को हाल ही में विधानसभा चुनाव में दतिया विधानसभा सीट से हार का सामना करना पड़ा था. इस हार के बाद भी वे बीजेपी में काफी एक्टिव बने रहे. यही कारण है कि पार्टी ने उन्हें न्यू ज्वाइनिंग टोली की जिम्मेदारी सौंपी थी. जिसके बाद उन्होंने हजारों की संख्या में कांग्रेसी नेताओं को बीजेपी में शामिल कराया था. यही कारण है कि उनको लेकर पार्टी भी कोई जिम्मेदारी देना चाहती है. माना जा रहा है कि शायद बीजेपी मिश्रा को राज्यसभा भेज सकती है. 3. जयभान सिंह पवैया जयभान सिंह पवैया ग्वालियर से सांसद रह चुके हैं. इसके साथ ही राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े रहने के कारण उनकी छवि हिंदूवादी नेता के तौर पर है. संघ की पृष्ठभूमि से आने वाले पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया भी राज्यसभा के लिए दावेदार माने जा रहे हैं. पवैया 2018 में विधानसभा का चुनाव हार चुके हैं. तभी से किसी बड़ी जिम्मेदारी का इंतजार है. ऐसा माना जा रहा है कि पार्टी राज्यसभा से पवैया को भी भेज सकती है. इसके अलावा अगर बात की जाए तो भारतीय जनता पार्टी नए प्रयोगों के लिए जानी जाती रही है. यही कारण है कि इन नामों के अलावा भी पार्टी किसी नए चेहरे पर दांव लगा सकती है.

संसद भवन परिसर में मूर्तियों को उनके मूल स्थान पर पुनः स्थापित करने की खड़गे ने की मांग

नई दिल्ली संसद भवन परिसर में मूर्तियों के स्थानांतरण को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच चल रही जुबानी जंग के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने मूर्तियों को उनके मूल स्थान पर पुनः स्थापित करने की मांग की। खड़गे ने पत्र में आरोप लगाया कि संसद भवन परिसर में महात्मा गांधी और डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर सहित कई महान नेताओं की मूर्तियों को उनके मूल प्रमुख स्थानों से हटाकर एक अलग कोने में स्थानांतरित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि मूर्तियों को हटाना हमारे लोकतंत्र की मूल भावना का उल्लंघन है और कहा कि संसद भवन के सामने महात्मा गांधी की मूर्ति को उचित विचार-विमर्श के बाद रखा गया था और यह भारत की लोकतांत्रिक राजनीति में भी बहुत महत्व रखती है। दशकों से, इस स्थान ने पवित्र मूल्य ग्रहण कर लिया था। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सांसदों और आगंतुकों ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की और महात्मा की भावना को अपने भीतर समाहित किया। यह वह स्थान है, जहां सांसदों ने लोकतांत्रिक तरीके से लोगों की चिंताओं को आवाज दी और सरकार का ध्यान आकर्षित कर उचित समाधान की मांग की। बाबासाहेब की प्रतिमा को स्थानांतरित करने पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने अपने छात्र जीवन के अनुभवों का हवाला दिया और कहा कि इस सुविधाजनक स्थान पर लोगों को उनकी जयंती और पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देने के लिए निर्बाध आवाजाही की सुविधा थी। खड़गे ने लिखा कि1960 के दशक के मध्य में अपने छात्र जीवन के दौरान, मैं संसद भवन के परिसर में प्रतिमा स्थापित करने की मांग करने वालों में सबसे आगे था। इस तरह के ठोस प्रयासों के परिणामस्वरूप अंततः डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की प्रतिमा को उस स्थान पर स्थापित किया गया, जहां वह पहले रखी गई थी। मैं यह दुख के साथ कहने के लिए बाध्य हूं कि यह सब अब मनमाने और एकतरफा तरीके से खत्म कर दिया गया है। महात्मा गांधी, बीआर अंबेडकर और अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों की मूर्तियों को उनके मूल स्थान पर पुनः स्थापित करने की मांग करने वाला खड़गे का पत्र 24 जून से शुरू हो रहे 18वीं लोकसभा के पहले संसद सत्र से पहले आया है। विशेष रूप से, संसद परिसर के अंदर राष्ट्रीय प्रतीकों और स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्तियों को स्थानांतरित करने पर विपक्ष ने केंद्र के कदम के खिलाफ विरोध जताया। हालांकि सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि मूर्तियों को एक ‘प्रेरणा स्थल’ पर एक ही स्थान पर रखने से आगंतुकों को देश की समृद्ध विरासत की बेहतर जानकारी मिलेगी।

किरण चौधरी ने 4 दशक बाद कांग्रेस को कहा अलविदा, भाजपा का थामा दामन

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हरियाणा हरियाणा के निर्माता कहे जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल की पुत्रबधु किरण चौधरी ने बेटी श्रुति के साथ कांग्रेस हाथ छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया। दिल्ली भाजपा कार्यालय में किरण व श्रुति ने मुख्यमंत्री नायब सैनी और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ली। इसी के साथ कांग्रेस में किरण चौधरी के 40 वर्षीय लंबे राजनीतिक कैरियर का अंत हो गया। किरण चौधरी और श्रुति चौधरी ने बीते दिन अपना इस्तीफा मल्लिकार्जुन खरगे को भेजा था। इस्तीफे में उन्होंने लिखा कि हरियाणा में कांग्रेस व्यक्ति सेंट्रिक पार्टी हो गई है। उन्होंने बिना नाम लिए हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की ओर इशारा किया। इसके साथ ही लिखा कि पार्टी व्यक्तिगत जागीर की तरह चलाई जा रही है। मेरे जैसे ईमानदार लोगों की पार्टी में कोई जगह नहीं है। मेरी आवाज दबाकर मुझे अपमानित किया गया। मेरे खिलाफ साजिशें रची गईं, हालांकि मेरा उद्देश्य हमेशा राज्य और देश के लोगों की सेवा करना रहा है। 40 साल का सफर मुखर अलोचना के साथ खत्म किरण चौधरी के इस्तीफे में लिखे शब्दों से स्पष्ट है कि नाराजगी उनकी हुड्डा से थी। उन्हें या उनके लोगों को वो राजनीतिक स्पेश नहीं मिल पा रहा था। जिसकी उम्मीद उन्हें थीं। सर्वविदित है कि हरियाणा कांग्रेस 2 गुटों में बंटी हुई थी। एक गुट में कुमारी सैलजा, रणदीप सुरजेवाला और किरण चौधरी थीं, जिसको एसआरके गुट कहा जाता था। वहीं इसके समानांतर हुड्डा गुट में भूपेंद्र हुड्डा, दीपेंद्र हुड्डा व उदयभान हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस छोड़ने से पहले किरण चौधरी अपनी ही पार्टी और हुड्डा की मुखर आलोचना कर रहीं थी। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि हरियाणा में कांग्रेस का कोई भविष्य नहीं है। इसके बाद से उनके कांग्रेस छोड़ने के कयास लगाए जा रहे थे। हालांकि इस बीच उन्होंने अगामी विधानसभा चुनाव के बाद कुमारी सैलजा को सीएम बनाने की पैरवी भी की थी। कुमारी सैलजा और किरण चौधरी में काफी अच्छे संबंध हैं, इसलिए लग रहा था वह कांग्रेस में रह सकती हैं। 2019 में शुरु हुई थी किरण और हुड्डा में राजनीतिक अदावत हुड्डा और किरण चौधरी के बीच राजनीतिक अदावत 2019 में शुरु हुई थी, समय के साथ इस अदावत ने गुटबाजी का रूप ले लिया। गुटबाजी का नतीजा रहा कि किरण ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्यसभा चुनाव के दौरान ही किरण के कांग्रेस छोड़ने के अटकल बाजियां शुरु हो गईं थी। दरअसल जून 2022 में हरियाणा से कांग्रेस ने अजय माकन को राज्यसभा के चुनावी मैदान में उतारा था। इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी कार्तिकेय शर्मा जीत गए और अजय माकन हार गए। इस हार का ठीकरा हुड्डा गुट ने किरण चौधरी पर फोड़ा था। इसके बाद लग रहा था कि अब किरण भाजपा ज्वाइन करेंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसका कारण लोकसभा चुनाव 2024 बताया गया, चौधरी को उम्मीद थी की बेटी श्रुति को भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा से टिकट मिलेगा। अंत समय में यह संभव नहीं हो पाया। जिसके कारण किरण चौधरी की नाराजगी और बढ़ गई। भिवानी में भीतरघात का आरोप 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की लहर दिखाई दे रही थी। हालांकि हिरयाणा में भाजपा और कांग्रेस के बीच मैच टाई रहा, दोनों पार्टियों के 5-5 उम्मीदवार जीते, लेकिन कांग्रेस इससे ज्यादा की उम्मीद थी। किरण चौधरी की होल्ड वाली सीट भिवानी महेंद्रगढ़ लोकसभा में कांग्रेस हार गई और मामूली अंतर से भाजपा प्रत्याशी धर्मबीर सिंह चुनाव जीत गए। इस दौरान भी किरण चौधरी पर भिवानी महेंद्रगढ़ लोकसभा से कांग्रेस प्रत्याशी राव दान सिंह ने किरण और श्रुति चौधरी पर भीतरघात के आरोप लगाए। रावदान सिंह के आरोपों पर पलटवार करते हुए किरण चौधरी ने कहा कि हमें बार-बार अपमानित किया। चुनाव के दौरान पार्टी के कार्यक्रमों में न बुलाया जाता था और न ही कोई जानकारी दी जाती थी। स्वयं फोन करती थी तो इग्नोर कर दिया जाता था। मेरा फोन तक नहीं उठाया जाता था।   भाजपा के जरिए रानीतिक विरासत बचाने की कोशिश राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गांधी परिवार तक सीधे किरण चौधरी की पहुंच है। किरण चौधरी ने राहुल गांधी के सामने मामले को रखा भी था। लेकिन बात नहीं बन सकी। दरअसल सियासी गलियाों में हुड्डा को लेकर चर्चा आम है कि कांग्रेस आलाकमान ने हुड्डा को हरियाणा में फ्री हैंड दे रखा है। हरियाणा में कांग्रेस के सभी फैंसले भूपेंद्र हुड्डा ही लेंगे और लोकसभा चुनाव के टिकट वितरण में यह स्पष्ट भी हो गया कि हुड्डा ही सभी फैंसले ले रहें हैं।  लोकसभा चुनाव में श्रुति को टिकट न मिलने से किरण चौधरी असमंजस में फंस गईं थी। 

हेमंत सोरेन को आदिवासी मुख्यमंत्री होने की वजह से जेल में डाला गया: कल्पना सोरेन

पलामू पलामू जिले के हुसैनाबाद के टाउन हॉल में बीते मंगलवार को जेएमएम विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन पहुंचीं। वह झामुमो की ओर से आयोजित मिलन समारोह में शामिल हुईं। उनके साथ झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश ठाकुर भी मौजूद रहे। विधायक कल्पना सोरेन के यहां पहुंचने पर फूल माला देकर जिला परिषद उपाध्यक्ष आलोक कुमार सिंह समेत जेएमएम नेताओं ने उनका स्वागत किया। “झारखंड की 3.50 करोड़ जनता हेमंत सोरेन के साथ है” इस दौरान कल्पना सोरेन ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि हेमंत सोरेन ने गरीबों के लिए कार्य योजना बनाकर लाभ पहुंचाने का काम कर रहे थे, लेकिन भाजपा ने उन्हें अकारण फंसाने का काम किया है। जिस जमीन की खरीद बिक्री नहीं हो सकती है वैसे मामलों में जेल में डाला गया है। लोकसभा चुनाव से आगाज हुआ है विधानसभा चुनाव में मजबूती के साथ अंजाम तक पहुंचना है। इसके लिए जनता को कमर कस के रहने की जरूरत है। कल्पना सोरेन ने कहा कि हेमंत सोरेन को आदिवासी मुख्यमंत्री होने की वजह से जेल में डाल दिया। भाजपा इसे कमजोर समझने की कोशिश ना करें। झारखंड की 3.50 करोड़ जनता हेमंत सोरेन के साथ है। “हेमंत सोरेन कभी झुकने वाले व्यक्ति नहीं है” कल्पना सोरेन ने कहा कि हेमंत सोरेन संवेदनशील व्यक्ति हैं। वह हमेशा गरीबों के लिए काम किए है। कोरोना काल में हेमंत की सरकार ने गरीबों को ट्रेन और हवाई मार्ग से वापस घर पहुंचने का काम किया है, जो पहली सरकार होगी। 50 वर्ष उम्र में वृद्धा पेंशन देने का राज्य सरकार ने शुरू की है। तीन कमरे का अबुआ आवास का निर्माण कार्य शुरू कराया गया। हेमंत सोरेन द्वारा शुरू की गयी इन योजनाओं को आगे बढ़ाने का कार्य चंपाई चाचा बखूबी कर रहे हैं। सिर्फ इंडिया गठबंधन की सरकार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को गिराने के लिए लगातार प्रयास किया गया, लेकिन अपने मन मंसूबे में सफल नहीं हो पाये। हेमंत सोरेन कभी झुकने वाले व्यक्ति नहीं है।  

सहयोगी दलों का भाजपा को पूर्ण समर्थन, पीएम मोदी जिसे चुनेंगे वही होगा लोकसभा अध्यक्ष

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नई दिल्ली लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव से पहले, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने सत्ताधारी गठबंधन में आम सहमति बनाने की कोशिश कर रही है। बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने अध्यक्ष पद के लिए विभिन्न सहयोगियों से बातचीत की है। बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के छोटे से छोटे सहयोगियों से भी चर्चा की गई है। बता दें कि भाजपा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में सबसे बड़ी पार्टी है। मीडिया ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि एनडीए गठबंधन के सहयोगियों ने भाजपा द्वारा लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए नामित किए जाने वाले उम्मीदवार को पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया है। एक सूत्र ने बताया, “अध्यक्ष पद उम्मीदवार के लिए सहयोगी दलों से सुझाव मांगे गए हैं। हालांकि, अधिकांश सहयोगी दलों ने किसी खास व्यक्ति को प्राथमिकता या पसंद नहीं दी है।” भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को यह बता दिया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए एकजुट बना रहेगा और लोकसभा अध्यक्ष पद को लेकर जो भी फैसला पीएम मोदी लेंगे वह सभी दलों को मान्य होगा। भाजपा के शीर्ष नेताओं ने गठबंधन सहयोगियों को यह भी बता दिया है कि वे गठबंधन के किसी एक सहयोगी को उपसभापति का पद देने के लिए इच्छुक हैं। हालांकि, विपक्ष भी इस पद के लिए अपना दावा पेश कर सकता है, क्योंकि इसके लिए पर्याप्त संख्याबल उनके पास है। गौरतलब है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को संसद के आगामी सत्र के लिए सदन की रणनीति तैयार करने के लिए वरिष्ठ मंत्रियों की एक बैठक की अध्यक्षता की। इस सत्र में जहां नए लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव होगा वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अगले पांच साल के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार का दृष्टिकोण देश के सामने रखेंगी। राजनाथ सिंह के आधिकारिक आवास पर हुई बैठक में केंद्रीय मंत्री एस जयशंकर, मनोहर लाल खट्टर, भूपेंद्र यादव, पीयूष गोयल, धर्मेंद्र प्रधान, किरण रिजिजू और अन्नपूर्णा देवी शामिल हुए। राजग के सहयोगी दलों में जनता दल (यूनाइटेड) के राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के चिराग पासवान सहित अन्य नेता शामिल हुए। सिंह और पासवान केंद्रीय मंत्री हैं। कुछ सहयोगी दलों, जिनमें वरिष्ठ सांसद भी शामिल हैं, उन्होंने भी भाजपा से अध्यक्ष पद के लिए ऐसा उम्मीदवार लाने का अनुरोध किया है, जिस पर आम सहमति बन सके। कुछ सहयोगी दलों ने सरकार को बताया है कि “2014 और 2019 अलग थे, जब भाजपा को लोकसभा में पूर्ण बहुमत प्राप्त था। लेकिन इस बार अधिक संख्याबल के साथ विपक्ष ज्यादा आक्रामक होगा। इसलिए अध्यक्ष पद और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।” संसद का विशेष सत्र 24 जून को शुरू होगा। हालांकि यह सत्र मुख्य रूप से लोकसभा में सभी निर्वाचित सांसदों के शपथ ग्रहण के लिए है। तीसरे दिन 26 जून को स्पीकर के लिए चुनाव होगा। वर्तमान में ओम बिरला पिछले पांच वर्षों से लोकसभा अध्यक्ष के पद पर हैं। लेकिन लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव से पहले एक प्रोटेम स्पीकर का पद होगा जो अध्यक्ष चुने जाने तक पहले तीन दिनों तक सदन की अध्यक्षता करेगा। इस पद को देने के लिए आम तौर पर सबसे वरिष्ठ सदस्य को प्रोटेम स्पीकर बनाया जाता है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि नेता सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुनने के लिए विपक्ष समेत सभी राजनीतिक दलों से संपर्क करेंगे। जहां तक ​​एनडीए उम्मीदवार का सवाल है, उनके पास नंबर हैं। केंद्रीय रक्षा मंत्री और लोकसभा के उपनेता राजनाथ सिंह सर्वसम्मति बनाने के लिए सभी राजनीतिक दलों से संपर्क करेंगे। ऐसी भी खबरे हैं कि जदयू ने कहा है कि वह अध्यक्ष पद के लिए भाजपा उम्मीदवार का समर्थन करेगी जबकि एक अन्य महत्वपूर्ण सहयोगी तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) ने इस प्रतिष्ठित पद के लिए सर्वसम्मति से उम्मीदवार की मांग की है। विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन ने अपने उम्मीदवार के लिए विधानसभा उपाध्यक्ष पद की मांग की है जबकि भाजपा अपने गठबंधन सहयोगी को यह पद देने पर विचार कर रही है।  

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