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शासन को भेजा प्रस्ताव- महाकाल मंदिर की सुरक्षा के लिए होमगार्ड जवानों के 480 पदों पर भर्ती, छह माह होगी भर्ती

उज्जैन महाकाल मंदिर में अंदर से लेकर बाहर तक सुरक्षा की कमान होमगार्ड जवानों के हाथ में रहेगी। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने डेढ़ माह पहले इसके निर्देश दिए थे। इसके बाद होमगार्ड मुख्यालय ने जवानों के 480 पद स्वीकृत करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। छह माह होगी भर्ती कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद लगभग छह माह इन पदों को भरने में लगेंगे। इसके अतिरिक्त हर जिले में पुलिस बैंड के लिए 800 होमगार्ड जवानों की भर्ती का भी प्रस्ताव तैयार किया गया है। महाकाल मंदिर में सुरक्षा की जिम्मेदारी अभी होम गार्ड जवानों के अतिरिक्त निजी एजेंसी के हाथ में है। इसमें अधिकतर सुरक्षाकर्मी निजी एजेंसी के हैं। अब पूरी सुरक्षा व्यवस्था होमगार्ड जवानों को सौंपी जानी है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सरकार का अच्छा नियंत्रण हो सके। होमगार्ड जवानों की भर्ती डीजी होमगार्ड अरविंद कुमार ने बताया कि होमगार्ड जवानों की संख्या कम होने के कारण दूसरी जगह से उन्हें महाकाल में पदस्थ नहीं किया जा सकता, इसलिए अतिरिक्त पदों पर भर्ती की जा रही है। मुख्यमंत्री ने हर जिले में पुलिस बैंड की स्थापना के लिए भी इसी वर्ष जनवरी में कहा था। उनके निर्देश पर एसएएफ के जवानों को बैंड का प्रशिक्षण दिया गया है, पर स्थायी व्यवस्था के लिए होमगार्ड जवानों की भर्ती की जा रही है।

जिला भाजपा कार्यालय में मनाई रानी दुर्गावती की प्रतिमा 500 वी जयंती

जिला भाजपा कार्यालय में मनाई रानी दुर्गावती की प्रतिमा 500 वी जयंती गोंडवाना की रानी जिसकी आवाज से ही कांप जाती थी मुगलों की सेना- अवध राज बिलैया डिण्डोरी  भारतीय जनता पार्टी जिला कार्यालय डिंडोरी में गोंडवाना शासिका गढ़ मंडला की रानी वीरांगना रानी दुर्गावती की जयंती मनाई गई। भाजपा जिला अध्यक्ष अवध राज बिलैया ने बताया कि मध्यप्रदेश के इतिहास में गोंडवाना साम्राज्य का एक अलग ही महत्व है। वीरांगना रानी दुर्गावती की वीरता के किस्से नारी शक्ति के अद्वितीय उदाहरण हैं। दमोह जिले के सिग्रामपुर के सिंगोरगढ़ में रानी दुर्गावती का किला आज भी उनकी वीरता की कहानियां सुनाता नजर आता है। दुर्गावती कालिंजर के राजा कीर्ति सिंह चंदेल की एकमात्र संतान थीं। वर्तमान उत्तरप्रदेश के बांदा जिले के कालिंजर किले में 1524 में दुर्गा अष्टमी के दिन उनका जन्म हुआ था, इसलिए उनका नाम दुर्गावती रखा गया।  नाम के अनुरूप ही तेज, साहस, शौर्य और सुंदरता के कारण उनकी प्रसिद्धि चारों ओर फैल गई। अपने राज्य के प्रति रानी का समर्पण कुछ ऐसा था कि मुगलों से लड़ते-लड़ते उन्होंने अपने प्राणों को बलिदान दिया था। अनुसूचित जनजाति मोर्चा के जिला अध्यक्ष महेश धूमकेती ने कहा कि दमोह जबलपुर स्टेट हाईवे पर सिग्रामपुर गांव में रानी दुर्गावती प्रतिमा स्थल से छह किलोमीटर की दूरी पर रानी दुर्गावती का सिंगोरगढ़ का किला है।  यह जगह रानी दुर्गावती की राजधानी थी। किले की उम्र सैकड़ों वर्ष होने के बाद भी उसकी दीवारें आज भी मजबूती से खड़ी हैं। रानी महल, हाथी दरवाजे, स्नान के लिए किले के अंदर बने जलाशय और किले की पहाड़ियों में बने गुप्त रास्तों का रहस्य आज भी पहेली लगता है। जिले के मुख्य हाथी दरवाजे से कुछ ही दूरी पर सिंगोरगढ़ जलाशय है, यहां आज भी 12 महीने पानी रहता है।  रानी दुर्गावती का जन्म राजपूत परिवार में हुआ था उनकी वीरता के किस्से सुनकर गोंडवाना साम्राज्य के तत्कालीन राजा संग्राम सिंह मरावी ने अपने बेटे दलपत शाह मरावी से उनकी शादी करवाई थी। विवाह के चार वर्ष बाद ही दलपत शाह का निधन हो गया था, उस समय रानी दुर्गावती का बेटा नारायण केवल तीन साल का था।  रानी ने स्वयं ही गोंडवाना साम्राज्य संभाल लिया, उन्होंने अनेक मठ,  बावड़ी व अन्य धर्मशालाएं बनवाईं थीं। वर्तमान जबलपुर उनके राज्य का केंद्र था। उन्होंने अपनी दासी के नाम पर चेरीताल, अपने नाम पर रानीताल व अपने विश्वस्त दीवान आधार सिंह के नाम पर अधाड़ताल बनवाया था। भाजपा जिला महामंत्री जयसिंह मरावी ने संबोधित करते हुए कहा कि रानी दुर्गावती के संपन्न राज्य पर मालवा के मुसलमान शासक बाज बहादुर ने कई बार हमला किया, लेकिन हर बार पराजित हुआ। मुगल शासक अकबर भी राज्य को जीतना चाहता था। अकबर ने अपने एक रिश्तेदार आसिफ खान के नेतृत्व में गोंडवाना साम्राज्य पर हमला कर दिया। एक बार तो आसिफ खान पराजित हुआ पर अगली बार उसने दोगुनी सेना और तैयारी के साथ हमला बोला।  दुर्गावती के पास उस समय कम सैनिक थे, उन्होंने जबलपुर के पास नरई नाले के किनारे मोर्चा लगाया और खुद पुरुष के वेश में युद्ध का नेतृत्व किया। युद्ध में मुगलों को भारी नुकसान हुआ और 24 जून 1564 को मुगल सेना ने फिर हमला बोला। रानी ने बेटे नारायण को सुरक्षित स्थान पर भेजकर पराक्रम दिखाया। हालांकि संभावित हार को देखते हुए उन्होंने खुद अपना बलिदान दे दिया। मंडला रोड पर बरेला नामक इस जगह पर रानी की समाधि है। उक्त बैठक के दौरान वरिष्ठ नेता राजेंद्र प्रसाद पाठक, जिला मीडिया प्रभारी सुधीरदत्त तिवारी, जिला कार्यालय मंत्री पुनीत जैन, जिला सह सोशल मीडिया संयोजक अविनाश सिंह सैनी, महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष नरवादिया मरकाम, महिला मोर्चा महामंत्री कुंवारिया मरावी, मंडल अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह ठाकुर, मंडल उपाध्यक्ष मोहन सिंह राठौर, अजजा मोर्चा जिला महामंत्री बोधराम सरैया, दुर्गेश जोगी सहित पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।

छात्र-छात्राओं को उच्च स्तर की खेल सुविधायें उपलब्ध कराने 110 नोडल खेल केन्द्रों की स्थापना

भोपाल प्रदेश में सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को उच्च स्तर की खेल सुविधायें उपलब्ध कराने के लिये स्कूल शिक्षा विभाग ने हर जिले के सरकारी स्कूलों में 110 नोडल खेल केन्द्रों की स्थापना की है। इन केन्द्रों के जरिये छात्र-छात्राओं को खेल अधो-संरचना के साथ उत्कृष्ट स्तर की खेल सामग्री और खेल प्रशिक्षण की सुविधायें उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस व्यवस्था से सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं के खेल प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। साथ ही विभिन्न स्तरों पर आयोजित होने वाली शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में विद्यार्थियों की सहभागिता में भी बढ़ोत्तरी हुई है। विभिन्न नोडल केन्द्रों के करीब 200 खिलाड़ियों ने राज्यस्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में सहभागिता कर विभिन्न खेलों में 80 पदक प्राप्त किये। राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में प्रदेश के खिलाड़ियों ने विभिन्न विधाओं में सहभागिता की। पिछले वर्ष 67वीं राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में 14, 17 और 19 वर्ष से कम आयु वर्ग की प्रतियोगता में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने 7 खेलों में 26 स्वर्ण, 13 रजत और 14 कांस्य समेत कुल 53 पदक प्राप्त किये। स्कूलों में खेलों में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहन देने के लिये कक्षा 9वीं से 12वीं तक आवासीय खेलकूद संस्थान, सीहोर में संचालित किया जा रहा है। इस आवासीय संस्थान में 200 सीट निर्धारित है। विद्यार्थी यहां विद्यालय में 4 वर्ष तक पढ़ाई के साथ अपनी रूचि के खेलों का भी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इस आवासीय संस्थान के विद्यार्थियों का विभिन्न खेल प्रतियोगितायों में श्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है। फिट इण्डिया मूवमेंट में गतिविधियां स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा फिट इण्डिया मूवमेंट के अंतर्गत ‘फिटनेस का डोज-आधा घण्टा रोज’ कार्यक्रम सरकारी स्कूलों में आयोजित किया गया। इसके अंतर्गत छात्र-छात्राएं, शिक्षकगण और अभिभावकों ने भी उत्साहपूर्वक विभिन्न खेल गतिविधियों में सहभागिता की। फिट इण्डिया मूवमेंट के अंतर्गत 5वां ‘फिट इण्डिया वीक’ पिछले वर्ष सभी जिलों में मनाया गया।  

भोपाल में बनेगा बड़ा इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर, सौ करोड़ रुपये की लागत से मार्च 2026 तक परियोजना पूरी होगी

भोपाल राजधानी का पहला बड़ा इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर के पास मार्च 2026 तक बनकर तैयार हो जाएगा। मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग इसका निर्माण कर रहा है, जिस पर करीब सौ करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसमें दो हजार से अधिक लोगों के बैठने की क्षमता वाला एक सभागार, ठहरने और भोजन की सुविधा के साथ एक कन्वेंशन सेंटर के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं होंगी। पर्यटन विभाग भारत सरकार की पूंजी निवेश योजना के लिए राज्यों को विशेष सहायता के तहत परियोजना के लिए राशि की व्यवस्था कर रहा है। मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एमपीटीडीसी) के प्रबंध निदेशक डा. इलैयाराजा टी ने बताया कि हमने केंद्रीय वित्त मंत्रालय को प्रस्ताव भेज दिया है और जल्द ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इस परियोजना का उद्देश्य शहर में एमआइसीइ पर्यटन (बैठकें, सम्मेलन और प्रदर्शनियों)को बढ़ावा देना है।केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने भारत में देश- विदेश के कारपोरेट और अन्य लोगों द्वारा सम्मेलन,बैठक और प्रदर्शनियों के आयोजन के लिए एक पसंदीदा गंतव्य विकसित करने के लिए 2022 में एक राष्ट्रीय रणनीति शुरू की थी। इसी तहत इस परियोजना की रूपरेखा बनाई गई है। एमआइसीइ, बिजनेस टूरिज्म का एक रूप है, जो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को किसी गंतव्य की ओर आकर्षित करता है।एमआइसीइ सेंटर के रूप में राजधानी में अभी मिंटो हाल है,जिसे अब कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर के नाम से जाना जाता है, परंतु मिंटो हाल की क्षमता सिर्फ आठ सौ लोागों के बैठने की है। इसमें एक रेस्तरां है, लेकिन प्रतिनिधियों के लिए आवास नहीं हैं। एमआइसीई पर्यटन गंतव्य के रूप में उभरेगा भोपाल मप्र पर्यटन बोर्ड के संयुक्त निदेशक (योजना) प्रशांत बघेल ने बताया कि प्रस्तावित कन्वेंशन सेंटर में दो हजार लोागों से अधिक की बैठक क्षमता वाला एक मुख्य सभागार होगा। ऐसे कमरे होंगे जहां प्रतिनिधि रुक सकेंगे, डाइनिंग हाल, रेस्तरां, प्रदर्शनी हाल, गैलरी और बड़े सम्मेलन, बैठकें और प्रदर्शनियां आयोजित करने के लिए अन्य सुविधाएं होंगी। नया सेंटर कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर से सटी जमीन पर बनेगा,जहां पहले मछलीघर हुआ करता था। पर्यटन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि देश के मध्य में स्थित होने और बेहतरीन रेल और हवाई संपर्क के कारण भोपाल में एमआइसीई पर्यटन के लिए एक प्रमुख गंतव्य के रूप में उभरने की क्षमता है।शहर कई औद्योगिक क्षेत्रों से घिरा हुआ है,जहां कई प्रमुख कंपनियों के विनिर्माण संयंत्र हैं।

पन्ना टाइगर रिजर्व में चार शावकों के साथ दिखी पी-14

P-14 seen with four cubs in Panna Tiger Reserve भोपाल। पन्ना टाइगर रिजर्व के मंडला क्षेत्र में बाघिन पी-141 द्वारा चार शावकों को जन्म देने की खबर जैसे ही सामने आई पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन में खुशी की लहर दौड़ गई। अपने चार शावकों के साथ पर्यटकों को दिखी बाघिन पी-141 ने शावकों को मंडला क्षेत्र में जन्म दिया। चार शावकों की जन्म की खबर से टाइगर रिजर्व में खुशी की लहर दौड़ गई। रिजर्व में अब बाघों की संख्या 90 पार कर गई है। नन्हें शावकों पर स्वस्थ प्रबंधन सतत निगरानी रख रही है।फील्ड डायरेक्टर अंजना सुचिता तिर्की ने बताया कि पन्ना रिजर्व में चार शावकों के जन्म की खबर बेहद सुखद है. उन्होंने बताया कि पन्ना टाइगर रिजर्व बाघों के लिए अनुकूल है और बाघों की संख्या 90 के पार पहुंच गयी है. वही उन्होंने बताया कि चारो शावक स्वस्थ है, जिनका स्वस्थ प्रबंधन द्वारा सतत निगरानी की जा रही है। बाघिन पी-141 का पर्यटकों ने वीडियो बनाया गौरतलब है देश-दुनिया में बाघों की बढ़ती संख्या के लिए शुमार पन्ना टाइगर रिजर्व में आए पर्यटकों ने चार नन्हें मेहमानों को बाघिन-पी 141 को देखा तो उनके वीडियो बना लिए. पन्ना टाईगर रिजर्व में नन्हे शावकों की किलकारी गुंजने के साथ अब टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या 90 पार कर गई है.

एमएफपी पार्क से छः महीने में ही अर्चना हटाई गई, जूनियर डीएफओ गीतांजलि बनी नई सीईओ

Archana was removed from MFP Park within six months, Junior DFO Gitanjali became the new CEO. उदित नारायणभोपाल। लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक विभाष ठाकुर ने एक बार फिर एमएफपी पार्क की सीईओ अर्चना पटेल को हटाकर 2020 बैच की आईएफएस गीतांजलि जे को नया सीईओ बनाया। संघ के एमडी ठाकुर ने 12 महीने में तीन को बदल चुके हैं पर ना दवाईयों का समय पर प्रोडक्शन हो पा रहा है ना उसकी गुणवत्ता में सुधार हो रही। चर्चा है कि जिस भी सीईओ ने गुग्गल सहित रॉ मटेरियल की खरीदी में हुई गड़बड़झाला की फाइल खोली, उसे वहां से रुखसत होना पड़ा है। पहले पीजी फुलजले और अब अर्चना पटेल को एमएफपी पार्क के सीईओ पद से हटाकर मुख्यालय अटैच कर दिया गया।2004 बैच के आईएफएस पीजी फुलजले को नवंबर 23 में एमएफपी पार्क का सीईओ के पद पर पोस्टिंग हुई और जब उन्होंने आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने के लिए गुग्गल और अन्य रॉ मटेरियल की खरीदी में हुई गड़बड़ झाला की फाइल खोली तो उन्हें हटाकर 2018 बैच की महिला आईएफएस अर्चना पटेल को सीईओ बनाया। जबकि संघ में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक मनोज अग्रवाल ( वर्तमान में उनकी सेवाएं विभाग को वापस कर दी गई है) जैसे सीनियर आईएफएस कार्यरत थे। यानि सीनियर अफसर की कमी बताकर एमएफपी पार्क के स्थापना से अब तक की सबसे जूनियर और अनुभवहीन आईएफएस अर्चना पटेल को सीईओ बनाया गया। दिलचस्प पहले हुई है कि अर्चना पटेल के हटाए जाने की स्थिति वही निर्मित हुई, जिसके कारण फुलजले को सीईओ पद से हटाया गया। बताया जाता है कि सीईओ बनने के बाद पटेल 3-4 महीने तक रबर स्टाम्प के रूप में काम किया, वह जब खुद फैसला लेने लगी और गड़बड़झाले की फाइल खोलने लगी, तभी उन्हें भी हटा दिया गया। अबकी बार 2020 बैच की महिला आईएफएस गीतांजलि जे को सीईओ बनाया। अनुभवहीन अधिकारियों की पोस्टिंग बंद करने की कहीं साज़िश तो नहीं ? एमएफपी पार्क बरखेड़ा पठानी में उत्पादित औषधीय की क्वांटिटी और क्वालिटी में गिरावट आई है। चर्चा है कि लघु वनोपज प्रसंस्करण केंद्र बरखेड़ा पठानी (एमएसपी पार्क) अनुभवहीन महिला अधिकारियों की पोस्टिंग के पीछे कहीं विंध्या हर्बल को बंद करने की साजिश तो नहीं चल रही है। यही वजह है कि एमएफपी पार्क बरखेड़ा पठानी में उत्पादित होने वाली औषधियों की क्वांटिटी और क्वालिटी में निरंतर गिरावट आ रही है। औषधि के गुणवत्ता को लेकर कई बार सवाल उठे। विगत वर्षों में केंद्र निरंतर प्रगतिशील रहा लेकिन पिछले 2 वर्षों में प्रशासनिक उदासीनता और गलत नीतियों से केंद्र को बहुत नुक़सान हुआ। कभी भारत के 17 राज्यों में आयुर्वेदिक दवाओं को सप्लाई करने वाले केंद्र को आयुष विभाग ने तो विंध्या हर्बल्स को ऑर्डर देना ही बंद कर दिया है। पिछले दिनों एक छोटा सा ऑर्डर इस वित्तीय वर्ष में केवल 1.8 करोड़ का आर्डर मिला है।

राष्ट्रीय खादी उत्सव मेले का मंगलवार अंतिम दिन

भोपाल भोपाल हाट में 27 सितम्बर 2024 से चल रहे राष्ट्रीय खादी महोत्सव का 8 अक्टूबर को समापन होगा। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग अंतर्गत आने वाले मध्यप्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा ग्रामीण अंचलों में कार्यरत कत्तिन बुनकरों एवं अन्य कारीगरों को रोजगार उपलब्ध कराने व खादी के उत्पाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भोपाल हाट में राष्ट्रीय खादी उत्सव का आयोजन किया गया है। 9 राज्यों के लगे हैं 86 स्टॉल राष्ट्रीय खादी महोत्सव में 9 राज्यों के 86 स्टॉल लगे हैं। इसमें अकेले मप्र के 26 स्टॉल है। इसके साथ ही राजस्थान, बिहार, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, जम्मू कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली उत्तराखंड, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश की खादी ग्रामोद्योग एवं हैंडीक्राफ्ट की इकाईयों द्वारा दुकानें लगाई गई हैं। मेले में प्रदेश एवं अन्य राज्यों की मलबरी सिल्क एवं मसलिन खादी की साड़ियां, कपड़ा, शाल, सूट सहित समस्त प्रकार के खादी वस्त्र के रेडीमेड गारमेंट्स, लेडीज कुर्ते एवं ग्रामोद्योग में माटीकला की सामग्री जूट, बैतबांस, लकड़ी के फर्नीचर, चमड़े के बैग, बेल्ट, पर्स, अगरबत्ती, शैंपू, सेनेटाइजर, शुद्ध एवं प्राकृतिक मसाले, शहद, अचार, पापड़, आटा, बेसन दलिया सहित विभिन्न सामग्रियों के स्टॉल लगाएं गए हैं, जिसमें बड़ी संख्या में ग्राहक पहुंचकर खरीददारी कर रहे हैं। कबीरा खादी वस्त्रों और विंध्या वैली के उत्पादों पर विशेष छूट खादी महोत्सव में मध्य प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा समस्त प्रकार के कबीरा खादी वस्त्रों पर ग्राहकों को विशेष छूट का लाभ दिया जा रहा है। इसके साथ ही प्रदेश के ग्रामोद्योग द्वारा उत्पादित एफएमजीसी उत्पाद विंध्या वैली पर विशेष छूट दी जा रही है। महोत्सव में मिट्टी के बर्तन बनाने की विधि, धागा बनाने व कपड़े की बुनाई का लगा स्टाल आकर्षण का केंद्र है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भोपाल हाट में खादी उत्सव में कला को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का हर दिन आयोजन किया जा रहा है। इसमें देशभक्ति गीत, सूफी गायन, लोक नृत्य एवं गायन प्रस्तुति, यादों की बारात, फैशन शो एवं पपेट शो, पुराने गीतों का पिटारा, गांधीजी भजन संध्या, किशोर कुमार नाइट, गज़ल, राधा कृष्णा लीला एवं गायन प्रस्तुति शामिल है। इस दौरान उपसंचालक श्री बीएस चिढार, प्रभारी उप संचालक श्री नीरज उइके, श्रीमती प्रांजलि कटारिया सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।  

भैरूंदा (सीहोर) में ग्राम विकास सम्मेलन आज, मुख्यमंत्री डॉ. यादव, केन्द्रीय कृषि मंत्री सहित अन्य मंत्रीगण होंगे शामिल

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में भैरूंदा में 8 अक्टूबर को दोपहर एक बजे “ग्राम विकास सम्मलेन” होगा। कार्यक्रम में केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश के ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल, राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा, पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, केन्द्र सरकार के ग्रामीण विकास एवं संचार राज्य मंत्री श्री डॉ. चन्द्र शेखर पेम्मासानी, केन्दीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान और वन राज्य मंत्री श्री दिलीप अहिरवार शामिल होंगे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के मोबाइल ऐप “आवास सखी“ तथा “ग्राम सड़क सर्वे एवं प्लानिंग ऐप“ का सिंगल क्लिक के माध्यम से शुभारंभ होगा। साथ ही पीएमजीएसवाई-IV के अन्तर्गत 500 कि.मी. स्वीकृत सड़कों का शुभारंभ और स्वयं सहायता समूहों के लिए 150 करोड़ रूपए के बैंक ऋण व सामुदायिक निवेश राशि का सिंगल क्लिक के माध्यम से अंतरण किया जाएगा। साथ ही 8 प्र-संस्करण इकाइयों का एवं 100 समुदाय प्रशिक्षण केन्द्रों का शुभारंभ किया जाएगा। साथ ही प्रदेश के 5 नए जिलों में आरसेटी केन्द्र की स्थापना की स्वीकृति भी दी जाएगी। सीहोर जिले के 52818 तेंदूपत्ता संग्रहकों को 2 करोड़ 70 लाख रूपये बोनस राशि का वितरण तथा मध्यप्रदेश सरकार की बांस मिशन योजना के अन्तर्गत 215 बांस हितग्राहियों को 2,90,000 बांस पौधों की अनुदान राशि 1,04,27,000 रूपये का वितरण किया जाएगा। रोड-शो भैरूंदा में आयोजित ग्राम विकास सम्मेलन के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान भैरूंदा में रोड-शो में शामिल होंगे। इस दौरान नगर की व्यापारिक, सामाजिक, सांस्कृतिक संस्थाओं के साथ ही नागरिकों द्वारा भव्य स्वागत किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भैरूंदा कार्यक्रम के पहले सलकनपुर पहुंचेंगे और श्री विजयासन देवी के दर्शन तथा पूजा-अर्चना करेंगे।

दुर्गम गांवों में रहने वाले कई जनजातीय परिवारों की जीवन-रेखा बनी हर्रानाला से दुगलई सड़क

भोपाल कभी वो दिन भी थे, जब दुगलई गांव के लोगों को अपनी ही ग्राम पंचायत बिठली तक जाने के लिये एक लंबी यात्रा करनी पड़ती थी। या तो 5.50 कोस पैदल चलना या बालाघाट की ओर से 80 किमी की यात्रा कर बिठली पहुंचना उनकी बड़ी मजबूरी थी। क्योंकि तीसरा कोई विकल्प था ही नहीं। दौर बदला, विकास की बात हुई, तो एक सड़क बन गई, जो आगे चलकर छत्तीसगढ़ राज्य के सीमावर्ती गांवों से जुड़ जाती है। यही सड़क यहां के लोगों के लिये विकास की नई सड़क बन गई है। सड़क के बनने से दुगलई के लोगों को पैदल चलने की भारी परेशानी और दुर्दिनों से भी हमेशा के लिये मुक्ति मिल गई है। इस सड़क से मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दो राज्यों के लोग मिलजुलकर अपनी देशज संस्कृति साझा कर रहे हैं। बालाघाट जिले की लांजी विधानसभा क्षेत्र का एक छोटा सा गांव है दुगलई। यह बिठली ग्राम पंचायत का पोषक ग्राम है। दुर्गम जंगल और पहाड़ी के बीच बसे दुगलई गांव तक पहुंचने के लिये पगडंडियों से होकर जाना पड़ता था। सालों यही चलता रहा। मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (एमपीआरआरडीए) ने बड़ी मेहनत और सूझ-बूझ से 16 किमी लंबी सड़क बनाकर इस क्षेत्र के विकास की नई इबारत लिख दी है। बैहर विधानसभा क्षेत्र के हर्रानाला से शुरू होकर पहाड़, घाट और घने जंगल के बीच से होकर यह सड़क लांजी विधानसभा क्षेत्र के दुगलई गांव को जोडती है। इस एक सड़क से तीन तहसील बैहर, किरनापुर और लांजी के दुर्गम गांवों को सीधी कनेक्टिविटी मिल गई है। 20 ग्रामों को मिला सीधा सम्पर्क ग्राम बिठली, हर्रानाला, लूद, सारद, पाथरी, आमानाला, बमनी, कोंगेवानी, हर्राटोला, मंडवा, माड़ी, डोंगरिया, लातरी, कुर्रेझोडी, जालदा, लिमोटी, नवही, हिर्री, भिररी और नारंगी गांवो के लोगों सीधा संपर्क इसी सड़क से होने लगा है। करीब 11 करोड़ रूपये की लागत से बनी 16 किमी लंबी सड़क से ग्रामीणों का आवागमन सुगम हुआ है।। सड़क के मायने इस सड़क के बनने से क्षेत्र की आंतरिक सुरक्षा (वामपंथी अतिवाद से निपटने के लिये) और मजबूत हो गई है। क्षेत्र के गांव-गांव हमेशा और हर मौसम में एक-दूसरे से जुड़ गये हैं। क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने लगी हैं। इससे कामकाजी लोगों, कारोबारियों, मरीजों और आमजनों को आवागमन की बारहमासी सुविधा मिल गई है। हजारों राशनकार्ड धारियों और सैकडों स्कूली बच्चों के लिये यह सड़क बेहद उपयोगी साबित हो रही है।  

प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भारत करेगा वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र का स्वप्न साकार

भोपाल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा जनकल्याण और राष्ट्र सेवा में समर्पित अपने 23 वर्ष पूर्ण होने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों की ओर से उन्हें बधाई और शुभकामनाएँ दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि गुजरात के मुख्यमंत्री एवं देश के प्रधानमंत्री के रूप में श्री मोदी ने विकास के अनूठे प्रकल्प संचालित किए और बहु-आयामी उपलब्धियां हासिल की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की प्रत्येक वर्ग के उत्थान और कल्याण की इस यात्रा में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत को गौरवान्वित होने का अवसर मिला है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में विकास की अविरल यात्रा से 2047 तक भारत विकसित देशों की पंक्ति में विश्व का प्रतिनिधित्व करेगा। महिला सशक्तिकरण में अग्रणी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सुदृढ़ एवं सबल बनाने की अभिनव पहल की गई है। प्रधानमंत्री श्री मोदी का मत है कि “बेटा-बेटी एक समान’’ के मूलमंत्र को प्राथमिकता देना चाहिए। कन्या का जन्म, उत्सव के रूप में मनाना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपने गोद लिए गांव जयापुर के नागरिकों से बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरूआत 22 जरवरी 2015 में पानीपत हरियाणा में की थी। उन्होंने कहा कि इस योजना के लागू होने से बेटा-बेटी लिंगानुपात की विसंगति को रोकने में अभूतपूर्व सफलता मिली है। उद्यमियों के बुलंद हौसले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की बढ़ती अंतर्राष्ट्रीय साख से देश के उद्योग जगत में एक नये उत्साह का संचार हुआ। भारत में उद्यमशील ऊर्जा की कमी नहीं है, युवा उत्साहित और ऊर्जावान, परंतु उन्हें प्रोत्साहित और पल्लवित करने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने चाहा कि भारतीय, नौकरी चाहने वाले नहीं नौकरी देने वाले बनें। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की “मेक इन इंडिया की पहल’’, भारत में उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए 4 स्तंभों पर आधारित है, न सिर्फ मेन्यूफेक्चरिंग में बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी। इसी का परिणाम है कि औद्योगिक क्षेत्र में मध्यप्रदेश निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। अर्थव्यवस्था की रफ्तार हुई तेज प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया में सर्वाधिक तेज़ी से बढ़ती हुई बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया। ये भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक समय है। केंद्र सरकार अर्थव्यवस्था को तेज रफ्तार से विकास के पथ पर ले आई। भारत की विकास दर ने देश को दुनिया की सभी बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों की पंक्ति में ला खड़ा किया है। खुशहाल भारत के लिए मजबूत किसान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कृषि को तेजी से बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। किसान हमेशा से हमारे देश के विकास का आधार रहे हैं। केंद्र सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम उठाकर देश के इस आधार को और सशक्त बनाने प्रयास किया है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, सिंचाई की सुविधाएं सुनिश्चित कर उपज को बढ़ाएगी। इस योजना का विजन यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक खेत को सिंचाई के साधन उपलब्ध कराए जाएं। किसानों को सिंचाई के आधुनिक तरीकों और तकनीकों के बारे में शिक्षित किया जा रहा है ताकि पानी की ‘प्रत्येक बूंद के बदले अधिक पैदावार’ मिले। प्रधानमंत्री का मानना है कि किसान मजबूत होगा तो देश मजबूत होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व की महान शक्तियों में से एक होगा।  

पन्ना टाइगर रिजर्व में एक साल बाद एक बार फिर नन्हें शावकों की किलकारी गूंजी है, यहां बाघिन पी-141 ने 4 शावकों को जन्म दिया

पन्ना पन्ना टाइगर रिजर्व में एक साल बाद एक बार फिर नन्हें शावकों की किलकारी गूंजी है। यहां बाघिन पी-141 ने 4 शावकों को जन्म दिया। बाघों के दीदार करने पहुंचे पर्यटकों ने इसके वीडियो ओर फोटो साझा किए हैं। इसके बाद प्रबंधन ने पुष्टि की और बताया की यह बहुत ही सुखद खबर है। बता दें कि पन्ना टाइगर रिजर्व बाघों के लिए अनुकूल है और इनकी लगातार संख्या बढ़ती जा रही जो अब 90 के पार पहुंच गई है। पन्ना टाइगर रिजर्व 2008-09 में बाघ विहीन हो चुका था, इसके बाद पुनर्स्थापना कर कान्हा से और पेंच से यहां बाघ बाघिन लाए गए। उचित प्रबंधन और अनुकूल वातावरण के चलते पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकारियों कर्मचारियों की मेहनत रंग लाई। आज पन्ना टाइगर रिजर्व बाघों से गुलजार हो रहा है और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।  

पश्चिम क्षेत्र विद्युत कंपनी की उज्जैन लेब को मिला राष्ट्रीय स्तर का प्रमाणीकरण, ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने दी बधाई

भोपाल मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा उज्जैन में स्थापित टेस्टिंग लेब को नेशनल एक्रिडिएशन बोर्ड फार टेस्टिंग कालिब्रेशन लेबोरेटरीज (NABL ) प्रमाण पत्र मिला है। आत्म निर्भर भारत के उद्देश्य से कंपनी की जरूरत की विद्युत सामग्री की जांच के लिए अब इस तरह की एनएबीएल प्रयोगशाला स्थानीय स्तर पर ही होने से अन्यत्र सामग्री भेजने में लगने वाला समय और शुल्क बचेगा। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर  ने उज्जैन की लेब को आगामी चार वर्षों के लिए राष्ट्रीय स्तर का प्रमाण पत्र मिलने पर बधाई दी है। अतिरिक्त मुख्य अभियंता श्री आरके नेगी ने बताया कि यह लेब पांच करोड़ की लागत से उज्जैन के शंकरपुर में तैयार हुई है। यहां अत्याधुनिक तरीके से ट्रांसफार्मर, तार और केबल की टेस्टिंग की जाएगी।जांच रिपोर्ट भी ऑटोमेटेड़ जनरेटेड़ प्राप्त होगी। इस तरह की NABL प्रमाणीकरण वाली लेब इंदौर स्थित पोलोग्राउंड मुख्यालय में पहले से ही कार्यरत है। NABL स्तर की लेब से न केवल कंपनी का कामकाज में तेजी आती है, बल्कि आर्थिक बचत भी होती है।

क्षेत्र के विकास एवं बुनियादी सुविधाओं को और अधिक बेहतर बनाने के लिये सतत कार्य किये जा रहे हैं : वन मंत्री श्री रावत

भोपाल वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री रामनिवास रावत ने कहा है कि क्षेत्र के विकास एवं बुनियादी सुविधाओं को और अधिक बेहतर बनाने के लिये सतत कार्य किये जा रहे हैं। श्री रावत ने श्योपुर जिले के विजयपुर के ग्राम अगरा में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में सामान्य वन मण्डल एवं संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के तत्वावधान में आयोजित नि:शुल्क स्वास्थ्य जाँच परीक्षण शिविर को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि मूलभूत सुविधाओें के साथ स्वास्थ्य एवं चिकित्सा जैसी सेवाओं का लाभ भी लोगों को मिले, इस दिशा में भी बेहतर कार्य किये जा रहे हैं। वन मंत्री श्री रावत ने कहा कि स्वास्थ्य शिविर के माध्यम से क्षेत्र के लोगों को लाभ मिलेगा और आयुष्मान कार्ड के माध्यम से 5 लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी। ग्राम अगरा में आयोजित नि:शुल्क स्वास्थ्य जाँच शिविर में 715 रोगियों का स्वास्थ्य परीक्षण कर नि:शुल्क दवा वितरित की गई। शिविर में श्योपुर जिला चिकित्सालय के 25, गजराराजा मेडिकल कॉलेज के 6, कुल 31 विषय-विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा शिविर में अपनी सेवाएँ दी गईं। शिविर में चर्मरोग, बाल एवं शिशु रोग, स्त्री रोग, दंत रोग, ईएनटी, मेडिसिन, न्यूरो सर्जन, जनरल सर्जन, अस्थि रोग, नेत्र रोग और मनोरोग विशेषज्ञ चिकित्सक ने स्वास्थ्य परीक्षण कर उपचार किया। शिविर के दौरान स्त्री रोग से संबंधित 14, शिशु रोग के 21, दंत रोग के 3, अस्थि रोग के 30, मनोरोग के 15, चर्मरोग के 42 और नेत्र रोग के 96 मरीजों का इलाज किया गया। शिविर में जाँच के दौरान सिकल सेल के 70 और 81 मरीजों की आरबीसी खून की जाँच की गई तथा 37 आभा आईडी बनाये गये। सभी रोगियों को नि:शुल्क दवा का वितरण किया गया। इस अवसर पर वन समितियों के पदाधिकारी, पंचायतों के पदाधिकारी, जन-प्रतिनिधि और अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।  

सुजल-शक्ति अभियान: जल-जीवन मिशन में जल संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता का अनूठा प्रयास

भोपाल जल-जीवन मिशन के तहत “सुजल-शक्ति अभियान” में “जल हमारा-जीवन धारा’’ थीम पर आयोजन किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में सतत् और सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने, जलापूर्ति प्रणालियों को सुदृढ़ बनाने और जल संरक्षण में सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने के लिये 5 दिवसीय सुजल-अभियान चलाया गया। इसके तहत ग्रामीणों को जल-संरक्षण और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया। ग्रामीणों ने इस अभियान में बढ़-चढ़कर सहभागिता की। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और अन्य संबंधित विभागों के समन्वय से इस अभियान का सफल संचालन हुआ। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके के निर्देशन और सचिव श्री पी. नरहरि की सतत् मॉनीटरिंग में जल आपूर्ति योजनाओं की समीक्षा, जल गुणवत्ता परीक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। पांच दिवसीय कार्यक्रम और सामुदायिक सहभागिता अभियान के पांचों दिन विशेष गतिविधियों में ग्रामीणों ने बढ़-चढ़ कर सहभागिता की। 1. अमृत-धारा दिवस– जल स्रोतों की सफाई, पंप हाउस की देखरेख और जल भराव की समस्याओं का समाधान किया गया। 2. श्रम धारा दिवस- ग्रामीणों ने जल स्रोतों के आसपास श्रमदान किया और पानी की सुरक्षा और सफाई के लिए सामूहिक रूप से श्रम योगदान दिया। इस दिवस पर जल आपूर्ति प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए मरम्मत कार्य और जल भराव की समस्याओं का समाधान किया गया। ग्रामीणों ने जल स्रोतों की सफाई और जल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय भागीदारी निभाई। 3. शुद्ध-धारा दिवस– फील्ड टेस्ट किट (FTK) का उपयोग कर जल गुणवत्ता की जांच की गई और स्वच्छता सुनिश्चित की गई। 4. दस्तक-धारा दिवस– घर-घर जाकर ग्रामीणों को जल संरक्षण और जलकर भुगतान के प्रति नागरिकों को जागरूक किया गया। 5. निरंतर-धारा दिवस– दीर्घकालिक जल आपूर्ति योजनाओं की समीक्षा और जल-सैनिक नंबर 1 पुरस्कार प्रदान किया गया। “हम जल साथी” अभियान में उन परिवारों को सम्मानित किया गया जिन्होंने जल प्रबंधन में उत्कृष्टता दिखाई। इसके अलावा, पंचायत भवनों में जल गुणवत्ता रिपोर्ट प्रदर्शित की गई, जिससे ग्रामीण समुदाय को जल स्रोतों की स्थिति और उसकी गुणवत्ता की जानकारी मिल सके। ग्राम, जल एवं स्वच्छता समिति, स्व-सहायता समूहों और स्थानीय तकनीशियनों की सक्रिय भागीदारी ने इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अभियान का समापन और दीर्घकालिक जल आपूर्ति योजनाएं गांधी जयंती के अवसर पर 28 सितम्बर से 2 अक्टूबर के बीच चले सुजल-अभियान का ‘निरंतर-धारा दिवस’ के साथ समापन हुआ। इस अवसर पर पीएचई सचिव श्री नरहरी ने भोपाल जिले के ग्राम बिलखिरिया में जल-सैनिक नंबर-1 को पुरस्कार प्रदान किया और ग्रामीणों ने दीर्घकालिक जल संरक्षण के प्रति संकल्प लिया। अभियान के समापन पर गांवों की जल आपूर्ति योजनाओं की समीक्षा की गई और दीर्घकालिक कार्य योजना तैयार की गई। पंचायत प्रतिनिधियों, ग्राम जल और स्वच्छता समिति, पंप ऑपरेटरों और ग्रामीण समुदाय के सहयोग से यह अभियान जनसहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण बना। इससे भविष्य में जल संकट से निपटने के स्थायी समाधान खोजे जा सकेंगे। अभियान, जल-जीवन मिशन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम “सुजल-शक्ति अभियान” ने ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण और सामुदायिक जागरूकता की मिसाल कायम की। इस अभियान से जल आपूर्ति प्रणालियों में सुधार हुआ और ग्रामीणों में जल संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना बढ़ी।  

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों की बैठक हुई

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार को विज्ञान भवन नई दिल्ली में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की समीक्षा बैठक में शामिल हुए। केंद्रीय गृह एवम सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में प्रदेश के मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन और पुलिस महानिदेशक श्री सुधीर सक्सेना भी उपस्थित थे। छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों तथा आंध्रप्रदेश, बिहार, झारखंड, केरल और पश्चिम बंगाल के उपमुख्यमंत्रियों/ गृहमंत्रियों ने भाग लिया। समीक्षा बैठक में वामपंथी उग्रवाद के वर्तमान परिदृश्य तथा वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों की सुरक्षा और विकास से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। केंद्रीय मंत्री श्री शाह ने राज्यों के साथ वामपंथी उग्रवाद के विरुद्ध सघन अभियान, हिंसक घटनाओं की सघन जांच और अभियोजन, राज्यों और केंद्र के बीच समन्वय और राज्यों की इंटेलिजेंस क्षमता निर्माण जैसे सुरक्षा मुद्दों की समीक्षा की। विकास के मुद्दों जैसे वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में सड़क संपर्क बढ़ाने, मोबाइल टावरों के उन्नयन, वित्तीय समावेशन और स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने के संबंध में भी बैठक में विचार किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आशा व्यक्त की कि नक्सलवाद व वामपंथी उग्रवाद के विरुद्ध केंद्र और राज्य सरकारों का समन्वय निश्चित रूप से इसे जड़ से समाप्त करने के प्रयासों को बल प्रदान करेगा। नक्सल गतिविधियां नियंत्रण के लिए प्रदेश में अब तक की गई कार्रवाई मध्यप्रदेश में नक्सल गतिविधियां सर्वप्रथम वर्ष 1990 में बालाघाट जिलें में परिलक्षित हुई प्रदेश के 3 जिलें बालाघाट, मंडला तथा डिंडोरी नक्सल प्रभावित है, जिनमें बालाघाट अति नक्सल प्रभावित है।     मंडला तथा डिंडोरी में नक्सल गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।     नक्सलियों द्वारा बालाघाट में पहली बड़ी हिंसक वारदात वर्ष 1991 में लांजी थाना क्षेत्र में की थी, जिसमें पुलिस वाहन को माईन्स ब्लास्ट से क्षति हुई थी। घटना में 09 पुलिसकर्मी शहीद हुए थे।     दूसरी बड़ी घटना बालाघाट के रूपझर थाना के ग्राम नांरगी क्षेत्र में की थी जिसमें माईन्स विस्फोट के द्वारा पुलिस वाहन को क्षति हुई थी। इस घटना में 16 पुलिसकर्मी शहीद हुए थे।     नक्सलियों द्वारा वर्ष 1999 में प्रदेश के तत्कालीन परिवहन मंत्री श्री लिखिराम कांवरे की हत्या की गई थी।     प्रदेश शासन द्वारा नक्सल गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए वर्ष 2000 में विशिष्ट बल “हॉक फोर्स” का गठन किया गया।     गठन के पश्चात हॉकफोर्स द्वारा नक्सल गतिविधियों पर काफी हद तक नियंत्रण किया गया। नक्सल संगठन द्वारा प्रभाव क्षेत्र में विस्तार के लिए वर्ष 2016 में एमएमसी जोन (मध्यप्रदेश-महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़) का गठन किया गया है।     सुरक्षा बलों की लगातार कार्यवाही से नक्सल संगठन विस्तार में अभी तक असफल रहा।     बस्तर में सुरक्षा बलों की लगातार कार्यवाही से नक्सलियों के प्रभाव क्षेत्र में कमी के चलते उनके प्रदेश की ओर आने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। इस हेतु अनेकों नवीन कैम्पों का निर्माण शीघ्र किया जायेगा।     इस पर नियंत्रण हेतु सीमावर्ती राज्य छत्तीसगढ़ तथा महाराष्ट्र पुलिस के साथ सीमा क्षेत्रों में संयुक्त कैम्प स्थापित किए गए है।     विगत 5 वर्षों के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा विभिन्न मुठभेड़ों में 20 हार्डकोर नक्सलियों को मारा गया है, जिन पर घोषित संयुक्त इनाम 3.31 करोड़ रूपये था।     इसी दौरान मुठभेड़ों में 6 नक्सली गिरफ्तार भी किए गए जिन पर घोषित संयुक्त ईनाम 85 लाख रूपये था।     विगत 8 माह में 3 मुठभेड़ में 4 नक्सली मारे गए है तथा एक महिला नक्सली गिरफ्तार हुई है।     विगत 2 वर्षों में डीव्हीसीएम (डीव्हिजनल कमेटी मेम्बर) स्तर के 3 नक्सलियों को मुठभेड़ों में मारा गया। इनसे 3 ए.के.-47 रायफल तथा बीजीएल शैल (Barrel Grenade Launcher Shell) बरामद हुए।     वर्ष 2023 में उत्तर बस्तर डीवीजन का एसजेडसीएम अशोक रेडडी उर्फ बलदेव गिरफ्तार किया गया, जिस पर संयुक्त रूप से 82 लाख रूपये का ईनाम घोषित था।     हॉक-फोर्स तथा विशेष आसूचना शाखा में प्रतिनियुक्ति को प्रोत्साहित करने के लिए शासन द्वारा वर्ष 2022 में नवीन भत्ते स्वीकृत किए, जिसके फलस्वरूप इसमें पदस्थ पुलिस कर्मियों के मनोबल में आशातीत वृद्धि हुई है।     नक्सल विरोधी अभियानों में उल्लेखनीय भूमिका निभाने वाले 262 पुलिसकर्मियों को क्रम पूर्व पदोन्नतियां प्रदान की गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 52 पुलिस कर्मचारियों को विगत 8 माह में क्रम पूर्व पदोन्नति प्रदान की गई है।     मुठभेड़ों में सूझबूझ तथा साहस का प्रदर्शन करने के फलस्वरूप पुलिसकर्मियों को 37 वीरता पदक प्राप्त हुए हैं।     नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने तथा आत्मसर्मपण को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य शासन द्वारा वर्ष 2023 में नवीन “मध्यप्रदेश नक्सली आत्म-समर्पण, पुनर्वास सह राहत नीति 2023” लागू की गई। इन प्रावधानों का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली को संगठन में उसके द्वारा धारित पद नाम एवं धारित हथियार के अनुसार घोषित ईनामी राशि, मकान निर्माण हेतु 1.5 लाख, जीवन यापन हेतु व्यवसायिक प्रशिक्षण के लिए 1.5 लाख, अचल सम्पत्ति के लिए 20 लाख, विवाह हेतु प्रोत्साहन राशि 50 हजार रूपये एवं आयुष्मान भारत व खाद्यान्न सहायता का लाभ दिया जायेगा।  

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