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धार वन मंडल में टेंडर प्रक्रिया को लेकर हुई गड़बड़झाला

There was a mess in the tender process in Dhar forest division भोपाल। इंदौर सर्किल के अंतर्गत वन विभाग एक बार फिर विवादों के घेरे में है। धार वन मंडल में टेंडर प्रक्रिया को लेकर हुई गड़बड़ियों की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णवाल और वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव सहित वरिष्ठ अधिकारियों को की गई है। आरोप है कि अफसरों और सप्लायर्स के गठजोड़ (नेक्सस) के चलते निविदाएं नियमों को ताक पर रखकर जारी की गईं, जिससे खास सप्लायर्स को अनुचित लाभ पहुंचाया जा सके।धार वन मंडल की संदिग्ध निविदाएंशिकायतकर्ता हितेंद्र भावसार ने बताया कि धार वन मंडल अधिकारी द्वारा 3 जुलाई को पांच निविदाएं जेम पोर्टल पर प्रकाशित की गईं। इनके क्रमांक इस प्रकार हैं —GEM/2025/B/6413130GEM/2025/B/6411838GEM/2025/B/6412580GEM/2025/B/6412737GEM/2025/B/6413223ये निविदाएं महज एक दिन के भीतर यानी 4 और 5 जुलाई को पूर्ण भी कर दी गईं। आरोप है कि इस प्रक्रिया में क्रय भंडार नियमों और वन बल प्रमुख द्वारा निर्धारित मानकों की खुलेआम अनदेखी की गई है। यह भी कहा गया है कि जिन वस्तुओं के लिए निविदाएं निकाली गईं, उन्हें पहले भी तीन बार प्रकाशित किया गया था, लेकिन हर बार उन्हें बिना कारण बताए निरस्त कर दिया गया। वन मुख्यालय से नहीं ली गई अनुमतिमध्यप्रदेश के वन नियमों के अनुसार, किसी भी निविदा को निर्धारित समय से पूर्व निरस्त करने के लिए वन मुख्यालय से पूर्वानुमति लेना आवश्यक होता है। मगर धार वन मंडल अधिकारी ने यह जरूरी प्रक्रिया नहीं अपनाई। इस मामले में संदेह जताया जा रहा है कि इंदौर सर्किल के प्रभावशाली अधिकारियों और एक खास सप्लायर के बीच सांठगांठ है और उसी को लाभ पहुंचाने के लिए पूरी निविदा प्रक्रिया को मनमर्जी से चलाया गया। हॉफ के दिशा-निर्देशों की अवहेलनायह मामला तब और गंभीर हो जाता है जब यह देखा जाए कि वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने सप्लायर्स और अधिकारियों के इस गठजोड़ को तोड़ने के लिए ‘उत्तम शर्मा कमेटी’ बनाई थी। इस कमेटी ने प्रदेश के लिए統一ित (एकजाई) निविदा नियम तय किए थे। इसके तहत निर्देश दिए गए थे कि सभी निविदाएं केवल जेम पोर्टल पर ही नहीं बल्कि विभाग की वेबसाइट पर भी अपलोड की जाएं ताकि प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।हालांकि धार वन मंडल में न तो विभागीय पोर्टल पर जानकारी दी गई और न ही पारदर्शिता के नियमों का पालन किया गया। यह सीधे तौर पर विभागीय दिशा-निर्देशों की अवहेलना है। आईटी शाखा की रिपोर्ट भी हुई नजरअंदाजपूर्व में वन विभाग की आईटी शाखा द्वारा विभाग के हॉफ (हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स) को एक रिपोर्ट भेजी गई थी, जिसमें ऐसे मामलों में लगातार नियमों की अनदेखी और नेक्सस की गतिविधियों को उजागर किया गया था। लेकिन उस रिपोर्ट पर भी किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई। इससे यह स्पष्ट होता है कि विभागीय प्रमुख स्तर पर भी ऐसी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। मुख्यमंत्री तक पहुंची शिकायतअब जबकि यह शिकायत सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच चुकी है, विभागीय हलकों में हलचल बढ़ गई है। हितेंद्र भावसार ने अपने पत्र में मांग की है कि धार वन मंडल में हुई निविदा प्रक्रिया की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। पृष्ठभूमि: क्यों जरूरी है पारदर्शितामध्यप्रदेश वन विभाग में बीते कुछ वर्षों में कई टेंडर प्रक्रियाओं पर सवाल उठे हैं। सप्लायर्स और अधिकारियों के बीच बने अपारदर्शी गठजोड़ के कारण विभाग की छवि लगातार धूमिल हो रही है। यह मामला इस बात की एक और बानगी है कि कैसे विभागीय आदेशों को दरकिनार कर कुछ चहेते सप्लायर्स को फायदा पहुंचाया जा रहा है।

प्रशासनिक एक्सरसाइज किए बिना वन विभाग में हुए तबादले, कुछ वनमंडल हुए ACF विहीन

Transfers took place in the forest department without any administrative exercise, some forest divisions were left without ACF भोपाल। तबादलों के मौसम में मैनेजमेंट कोटे के आधार पर ACF और रेंजरों के ताबड़तोड़ ट्रांसफर किए गए। पहली बार ऐसा प्रतीत हो रहा है कि प्रशासनिक एक्सरसाइज किए बिना ही स्थानांतरण कर दिए गए। अब पीसीसीएफ प्रशासन विवेक जैन को आईएफएस अफसरों के व्हाट्सप्प ग्रुप पर पोस्ट कर पूछना पड़ रहा है कि समस्त उपवनमंडल रिक्त हो जाते हैं तो तत्काल मेरे फोन पर विवरण भेजे।गत दिनों वन विभाग में एसडीओ और रेंजर्स के तबादले किए गए। पहली बार अधिकारियों ने अपनी मनमानी कर तबादला सूची जारी की। यही वजह रही कि जारी किए गए स्थानांतरण आदेश आने के बाद प्रशासन-एक के पीसीसीएफ विवेक जैन की प्रशासनिक अक्षमता भी उजागर हो गई। अर्थात प्रशासनिक एक्सरसाइज किए बिना स्थानांतरण सूची को अंतिम रूप दे दिया गया। इसके परिणाम स्वरूप कुछ वन मंडल ACF विहीन हो गए। अब प्रशासन एक के पीसीसीएफ को अपने व्हाट्सप्प ग्रुप को यह पोस्ट करना पड़ा कि ‘वर्तमान में हुए ACF स्थानांतरण के पश्चात यदि किसी वनमण्डल के समस्त उपवनमंडल रिक्त हो जाते हैं तो तत्काल मेरे फोन पर विवरण भेजे।’ यही नहीं, मुख्यालय पदस्थ और अपने निज सहायक कि ड्यूटी लगाई है किवह सभी वन मंडलों में लगाकर जानकारी ले और स्थानांतरित एसीएफ को भारमुक्त कराने डीएफओ दबाव बनाएं। उनके पोस्ट जब प्रशासन-एक शाखा से सेवानिवृत पीसीसीएफ से बातचीत की। पहले तो हंसे और फिर बोले कि पूरी प्रशासनिक एक्सरसाइज इस बात के लिए की जाति है कि कहीं वनमण्डल में स्वीकृत एसीएफ के सभी पद रिक्त तो नहीं हो जाएंगे। ऐसी स्थिति बनने के पूर्व ही कितनी ही उच्च दबाव बने पर हम तबादला नहीं करते थे। ऐसी स्थिति में मंत्री और अन्य राजनेताओं के नाराजगी भी झेलनी पड़ती है। एक करने पीसीसीएफ स्तर के अधिकारी की टिप्पणी है कि यह तो प्रशासनिक दिवालियापन है। कुछ डीएफओ ने भार मुक्त करने से किया इंकारपीसीसीएफ विवेक जैन की पोस्ट के बाद मालवांचल क्षेत्र के डीएफओ ने पीसीसीएफ मुख्यालय को पत्र लिखकर उनके वन मंडल में एकमात्र एसीएफ को भारमुक्त करने से मना कर दिया है। इंदौर वन मंडल में दो एसीएफ पदस्थ हैं और दोनों को ही स्थानांतरित कर दिया गया और अब रालामंडल के अधीक्षक को मैनेजमेंट के आधार पर इंदौर का अतिरिक्त प्रभार देने के निर्देश भोपाल से दिए गए हैं। हास्यास्पद पहलू यह कि इंदौर में पदस्थ एसीएफ का स्थानांतरण इसलिए कर दिया गया क्योंकि पिछले दिनों संपन्न कार्यशाला में कई अफसरों और उनकी पत्नियों की इच्छा अनुसार व्यवस्था नहीं कर पाया था। ट्रांसफर नीति का खुला उल्लंघनशीर्ष अधिकारियों ने एसीएफ और रेंजर्स के तबादले करते समय राज्य सरकार के स्थानांतरण नीति का भी उल्लंघन किया। नीति में साफ तौर पर पति-पत्नि का एक साथ रहने का अधिकार दिया है। इसका पालन वन विभाग ने नहीं किया गया। रीवा सर्किल ऑफिस के संलग्नाधिकारी विद्या भूषण मिश्रा का ट्रांसफर खरगोन वनमंडल कर दिया। जबकि उनकी पत्नि रीवा आईटीआई कॉलेज में प्रशिक्षण अधिकारी हैं। वैसे भी रीवा में सामाजिक वानिकी में एसडीओ के दो पद खाली है। मिश्रा को तत्काल प्रभाव से बाहर मुक्त कर दिया है और उनका प्रभार सीनियर रेंजर को सौंपा है, जोकि प्रभारी एसडीओ है। अब रेंजर के पास मऊगंज और रीवा का प्रभार आ गया है। यानी यहां भी मुख्यालय के अफसर ने प्रभार का खेल खेला है। मंत्रालय में बरसों से जमे हैं एसडीओ और बाबूरेंजर संगठन के व्हाट्सएप ग्रुप में एक यक्ष प्रश्न उठाया है कि क्या वन विभाग अंतर्गत ट्रान्सफर नीति और ट्रान्सफर केवल वन विभाग के वर्दी वाले लोगों के लिए लागू होते हैं ? क्या ट्रांसफर नीति वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और मुख्यालय के एसीएफ और उनके बाबुओं के लिए नहीं? मुख्यालय के साथ-साथ प्रदेश के अनेक वन वृत्तों और वनमण्डलों में सैकड़ों की संख्या में ऐसे बाबू हैं जिनकी नियुक्ति उसी ऑफिस में पार्टिकुलर उसी शाखा में हुई और उसी में प्रमोशन और रिटायरमेंट हुआ। लेकिन उनका ट्रांसफर उस शाखा और उस ऑफिस से नहीं हुआ। संरक्षण शाखा, कैम्पा, वित्त एवं बजट, प्रशासन, एचआरडी आदि शाखाओं 4-5 सालों से एसीएफ और 8-9 सालों से कंप्यूटर ऑपरेटर जमे हैं पर उनका ट्रांसफर करने की हिमाकत कोई नहीं कर पा रहा है। ये कंप्यूटर ऑपरेटर शाखा चला रहे हैं और उनके अफसर रबर स्टाम्प बने हुए है। सूत्रों की खबर यह भी है कि कतिपय कंप्यूटर ऑपरेटर अपने अपने मुखियाओं के नाम से डीएफओ-एसडीओ और रेंजर्स से चौथ वसूली भी करते हैं। पिछले दिनों नई वाहनों के रजिस्ट्रेशन के नाम पर धन संग्रह किए गए हैं।

तबादला और पोस्टिंग में एसीएस-पीएस की मनमानी, मंत्रियों में नाराजगी

ACS-PS’s arbitrariness in transfer and posting, ministers unhappy उदित नारायणभोपाल। प्रदेश में एक महीना 17 दिन ट्रांसफर और पोस्टिंग का सीजन चला। सरकार ने मंत्रियों को छूट दी थी, लेकिन ट्रांसफर-पोस्टिंग में विभाग के एसीएस-पीएस ने अपनी मनमार्जी चलाई और उन्होंने ही अपनी रणनीति के तहत अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले किए। चिंताजनक पहलू यह है कि गंभीर बीमारी से जुड़े प्रकरणों में कर्मचारियों को ट्रांसफर का लाभ नहीं मिला। जबकि नीति में गंभीर बीमारी, परिवार में बीमार और पति-पत्नी को एक ही जिले में पदस्थ करने का प्रावधान किया गया था। वन विभाग ने तो ‘ए-प्लसÓ की नोटशीट तक की सिफारिशों को दरकिनार कर दिया है। आखिरी दिन तक वन मंत्रालय में तबादला सूची में मैनेजमेंट कोटे के आधार देर रात तक नाम कटते और जुड़ते रहे। तबादला सीजन में मंत्रियों और प्रमुख सचिवों के बीच तालमेल की कमी भी खुलकर सामने आई है। तबादले के लिए तमाम मनुहार कर बैन हटवाने वाले मंत्रियों को अपने मिलने-जुलने वालों के तबादले और पोस्टिंग करने का मौका नहीं मिल सका है। वरिष्ठ अफसरों ने इसके लिए सरकार के नियमों को भी दरकिनार किया है। एसीएस और मंत्रियों के बीच खींचतान की वजह से कई विभागों में 8 फीसदी तक तबादले नहीं हो पाए हैं। वहीं कई विभागों द्वारा अब बैकडेट में तबादला आदेश जारी किए जा रहे हैं। राजस्व विभाग ने 509 पटवारियों का तबादला किए। इसके बाद 89 पटवारियों के आधी रात को आदेश जारी कर दिए गए हैं। अभी कुछ सूची जारी करने की तैयारी विभाग कर रहा है। वह भी बैकडेट में होने की तैयारी चल रही है। वन विभाग में फारेस्ट गार्ड, प्रभारी रेंजर से लेकर एसडीओ तक के ट्रांसफर 17 और 18 जून तक जारी किए गए हैं। सीएम के विभागों को लेकर खासी माथा-पच्चीमुख्यमंत्री के पास गृह, जेल, उद्योग, नर्मदा घाटी, विमानन, वन जैसे करीबन 10 से ज्यादा विभाग हैं। इन विभागों में जितने भी ट्रांसफर किए गए हैं, उसमें सीएम मॉनिट के नाम पर एसीएस-पीएस ने अपनी मनमानी की है। वन विभाग में दीगर मंत्रियों को डस्टबिन में डाल दिया गया। इससे मंत्रियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। साथ ही स्थानांतरित हुए अधिकारियों-कर्मचारियों में असंतोष व्याप्त है। कई अधिकारियों का मैनेजमेंट कोटे से मनपसंद पोस्टिंग कराने की सिफारिश मंत्रियों और शीर्षस्थ अधिकारियों से की थी। उनके नाम सूची में आए, लेकिन चाही गई जगह नहीं मिली। यहां भी देर रात तक नाम कटते और जुड़ते रहे हैं। यही वजह रही कि एक रेंजर स्वस्ति श्री जैन की पोस्टिंग 2 जगह कर दी गई। कुछ मामलों में जहां जगह ही नहीं, वहां भी तबादले किए गए हैं। वन विभाग में चर्चा है कि मंत्रालय के अधिकारियों ने जमकर मनमानी की, क्योंकि वन विभाग सीएम के पास है और उनके पास गृह जेल उद्योग और आईएएस की पोस्टिंग संबंधित महत्वपूर्ण कार्य हैं। इसके कारण उनका वन विभाग पर फोकस कम रहा और इसका फायदा नौकरशाह और शीर्ष अफसरों ने जमकर उठाया। यही स्थिति जेल विभाग में भी रही। उद्योग विभाग की सूची का तो कर्मचारियों को पता ही नहीं चला। एमएसएमई विभाग में मंत्री चेतन्य काश्यप के प्रस्तावों को तवज्जो ही नहीं दी गई। उधर, पीएचई में किए गए तबादलों में विभागीय मंत्री द्वारा की गई अनुशंसाओं को दरकिनार कर ट्रांसफर किए गए। यह सब मुख्यमंत्री के नाम पर विभागों के अफसरों ने खेल खेला है। इस मामले में तो कर्मचारियों ने विभागाध्यक्षों पर लेनदेन के भी आरोप लगाए हैं। मंत्री प्रहलाद पटेल की तबादलों में नहीं चलीकैबिनेट में प्रहलाद पटेल कद्दावर मंत्रियों में गिने जाते हैं, लेकिन तबादलों में अफसरों ने उनकी नहीं सुनी। तबादला आदेश जारी करने के दौरान अफसरों ने यह कहकर मंत्री के नाम रिजेक्ट किए कि यह तीन फार्मूले में फिट नहीं बैठते हैं। ये फार्मूला है-पारस्परिक तबादला, गंभीर बीमारी जैसे कैंसर या ब्रेन ट्यूमर तथा तीसरा महिला का अपने परिवार से दूर पदस्थ होना बताया गया। यही वजह है कि मंत्री के यहां से गए प्रस्तावों पर तबादले नहीं किए गए। उधर, आजीविका मिशन, आरईएस, पंचायत राज सहित अन्य विभागाध्यक्ष कार्यालयों में ट्रांसफर खुलकर किए गए हैं। राजस्व विभाग के पीएस विवेक पोरवाल ने मंत्री करण सिंह वर्मा की भी नहीं सुनी, ऐसी चर्चा है। मंत्री ने जो सूची भेजी, उसमें भारी काट-छांट करते हुए प्रमुख सचिव और सीएलआर ने नामात्र के तबादले किए हैं।

एमपी के पूर्व मुख्य सचिव भ्रष्टाचार के केस में फंस गए लगते हैं। उनके खिलाफ लोकायुक्त ने जांच शुरु कर दी है।

The former Chief Secretary of MP seems to be trapped in a corruption case. The Lokayukta has started an investigation against him. एमपी के पूर्व मुख्य सचिव भ्रष्टाचार के केस में फंस गए लगते हैं। उनके खिलाफ लोकायुक्त ने जांच शुरु कर दी है। प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस और आजीविका मिशन के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी ललित मोहन बेलवाल के खिलाफ ये जांच शुरू की गई है। प्रदेश के पूर्व विधायक पारस सकलेचा की शिकायत पर भोपाल लोकायुक्त ने ये कार्रवाई की है। सकलेचा ने पूर्व मुख्य सचिव बैंस और बेलवाल पर सन 2018-19 से सन 2021-22 के दौरान पोषण आहार तथा अन्य योजनाओं में 500 करोड़ रुपए का भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। ऑडिटर जनरल ने मार्च 2025 में विधानसभा में प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में भी इसका उल्लेख किया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इकबाल सिंह बैंस ने सन 2017 में अपने चहेते बेलवाल को वन विभाग से प्रतिनियुक्ति पर लाकर आजीविका मिशन का सीईओ बना दिया था। ललित मोहन बेलवाल सन 2018 में सेवानिवृत्त हो गए थे। तब भी इकबाल सिंह बैंस ने जून 2020 में उन्हें संविदा आधार पर पुनः आजीविका मिशन का मुख्य कार्यकारी अधिकारी बना दिया। एक वर्ष के लिए की गई इस नियुक्ति के फौरन बाद बेलवाल ने पोषण आहार बनाने का काम एग्रो इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन से लेकर आजीविका मिशन को दे दिया।शिकायतकर्ता कांग्रेस विधायक पारस सकलेचा का आरोप है कि इकबाल सिंह बैंस और उनके चहेते बेलवाल ने षड्यंत्रपूर्वक पोषण आहार बनाने वाली सातों फैक्ट्री का कार्य आजीविका मिशन को दिया। दिसंबर 2018 में कमलनाथ की कांग्रेस सरकार बनने पर घोटाले को देखते हुए यह काम पुनः एग्रो इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन को दे दिया गया था। हालांकि 23 मार्च 2020 को पुनः बीजेपी की सरकार बन गई। तब शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने दूसरे ही दिन इकबाल सिंह बैंस को मुख्य सचिव बना दिया था। ऑडिट रिपोर्ट में हुआ भ्रष्टाचार का खुलासासन 2018 से सन 2021 तक पोषण आहार में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार किया गया। वितरण, परिवहन और गुणवत्ता में बड़ीगड़बड़ी की गई। ऑडिटर जनरल की रिपोर्ट से भी इसकी पुष्टि हुई। ऑडिटर जनरल ने सन 2018-19 से लेकर सन 2021-22 तक 481.79 करोड़ का घोटाला पाया। 4 साल की अवधि में महज 8 जिलों की जांच में यह गड़बड़ी पाई गई थी। मार्च 2025 में विधानसभा के पटल पर यह प्रतिवेदन रखा गया।

पशुपालन विभाग का नया नाम गौपालन विभाग, एमपी की मोहन सरकार ने की बड़ी घोषणा

New name of Animal Husbandry Department is Cow Husbandry Department भोपाल! एमपी सरकार के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव शुक्रवार को भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने डॉक्टर भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना के लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र दिए। साथ ही गौशालाओं के लिए 90 करोड़ रुपये की राशि जारी की। इसके साथ ही उन्होंने पशुपालन विभाग का नया नामकरण भी किया है। सीएम मोहन यादव ने पशुपालन विभाग का नाम बदलकर गौपालन विभाग करने की भी घोषणा की है। सीएम यादव ने आचार्य विधासागर जीव दया पुरस्कार भी वितरित किए। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश को दूध की राजधानी बनना चाहिए। उन्होंने राज्य स्तरीय गौ-शाला सम्मेलन में मध्य प्रदेश को दूध उत्पादन में नंबर वन बनाने का लक्ष्य रखा। दूध का महत्व बढ़ाने को लेकर कामसीएम मोहन ने कहा कि एमपी को दूध उत्पादन में सबसे आगे ले जाना है। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश नदियों का मायका है। दूध का महत्व आर्थिक रूप से बढ़े, इस दिशा में सरकार काम कर रही है। भाजपा सरकार ने पशुपालन विभाग का बजट बढ़ाया है। पहले यह 300 करोड़ था, जिसे अब 2600 करोड़ कर दिया गया है। पशुपालन विभाग का बदला नामसीएम यादव ने कहा कि गौशालाओं में दूध उत्पादन तो होना ही चाहिए, साथ ही सीएनजी भी बनाई जा सकती है। उन्होंने पशुपालन विभाग के नाम में बदलाव करते हुए कहा कि अब इसे गौपालन विभाग के नाम से भी जाना जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सड़क पर घूमने वाली गायों को गौशालाओं में पहुंचाया जाएगा। सीएम ने कहा कि सरकार एक साल में पूरे प्रदेश में बदलाव लाने के लिए संकल्पित है। सरकार ने गोवर्धन पूजा मनाने का भी फैसला किया है।

कर्नल सोफिया केस में नया मोड़: मंत्री विजय शाह को एसआईटी भेजेगी नोटिस, जल्द होगी पूछताछ

New twist in Colonel Sofia case: SIT will send notice to Minister Vijay Shah, interrogation will take place soon भोपाल। कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए कथित विवादास्पद बयान मामले में अब मंत्री विजय शाह से पूछताछ की तैयारी तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम (SIT) जल्द ही विजय शाह को नोटिस भेजकर उनका बयान दर्ज करेगी। सूत्रों के अनुसार, अब तक की जांच रिपोर्ट में विजय शाह के कथनों को शामिल नहीं किया गया था। लेकिन जांच के अगले चरण में SIT महू का दौरा दोबारा करेगी और बयान से संबंधित वीडियो की भी गहन जांच होगी। यह वीडियो फिलहाल भोपाल स्थित सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री (CFSL) में परीक्षणाधीन है, ताकि उसकी प्रमाणिकता की पुष्टि हो सके। इससे पहले यह वीडियो रीजनल फॉरेंसिक लैब में भेजा गया था, लेकिन तकनीकी कारणों से वहाँ इसकी जांच संभव नहीं हो पाई थी। इधर, पुलिस मुख्यालय (PHQ) से मिली जानकारी के मुताबिक, SIT प्रमुख प्रमोद वर्मा का हाल ही में तबादला सागर से जबलपुर कर दिया गया है। हालांकि, SIT के नेतृत्व में कोई बदलाव नहीं किया गया है और प्रमोद वर्मा ही टीम की कमान संभालते रहेंगे। टैग्स: #कर्नलसोफिया #विजयशाह #SITजांच #मध्यप्रदेशसमाचार #BreakingNews

पचमढ़ी अभ्यारण्य का नया नाम राजा भभूत सिंह के नाम पर, मोहन सरकार की कैबिनेट बैठक में कई अहम निर्णय

New name of Pachmarhi Sanctuary after Raja Bhabhut Singh, many important decisions in Mohan government’s cabinet meeting मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में सोमवार को पचमढ़ी में आयोजित कैबिनेट बैठक में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। अब पचमढ़ी वन्य जीव अभ्यारण्य का नाम राजा भभूत सिंह के नाम पर होगा। यह फैसला राजा भभूत सिंह की वीरता और जनजातीय समाज के प्रति उनके योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से लिया गया। बैठक की शुरुआत पचमढ़ी के राजभवन में वंदे मातरम् के गायन के साथ हुई। नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जानकारी दी कि राजा भभूत सिंह की जन्म और कर्मभूमि पर यह विशेष बैठक आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि राजा भभूत सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ साहसिक संघर्ष किया और उन्हें नर्मदा अंचल का शिवाजी माना जाता है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि कैबिनेट ने राजस्व विभाग के बिल को स्वीकृति दी है। इसमें प्रमुख राजस्व आयुक्त और अभिलेख आयुक्त के पदों को मिलाकर नया पद “कमिश्नर लैंड रिसोर्स एंड मैनेजमेंट” बनाया गया है। अब लोगों को सीधे और पारदर्शी सुविधा मिले, इसके लिए आईटी का प्रवेश राजस्व विभाग में जल्द हो। अब तहसीलदार को दो श्रेणी में बांटा जाएगा। राजस्व का न्यायालय देखने वाले न्यायालय देखेंगे और जो लॉ एंड ऑर्डर देखेंगे वो लॉ एंड ऑर्डर का काम ही देखेंगे। उन्होंने कहा कि आईटी के चलते अब विभाग के 500 पदों को समाप्त कर 1200 नए पद सृजित किए जाएंगे। इन नए पदों में सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित पदों को प्राथमिकता दी जाएगी। विजयवर्गीय ने कहा कि यह तेज गति से राजस्व को चलाने वाला देश का पहला राज्य मध्य प्रदेश होगा। इसके अलावा बैठक में श्रम विभाग के संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसमें ठेका श्रम विनियम उत्पादन अधिनियम 1970 में 20 ठेका श्रमिक को 50 तक बढ़ाए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। साथ ही कारखाना अधिनियम 1948 में 10 श्रमिक के स्थान पर 20 श्रमिक बिना हाथ से काम करने वाले यानी मशीन पर काम करने और हाथ से काम करने वालों की संख्या 20 से 40 की गई है। इन परिवर्तन से औद्योगिकरण में श्रमिकों के अधिकारों का संरक्षण करते हुए लेवर एक्ट में संशोधन किया है। महिलाओं को सुरक्षित वातावरण में रात में काम करने की अनुमति देने हेतु श्रम कानूनों में संशोधन को मंजूरी दी गई है। साथ ही, ठेका श्रमिकों से जुड़े नियमों को भी संशोधित किया जाएगा ताकि शोषण से बचाव हो सके। कैबिनेट ने इंदौर स्थित आईआईटी में “एग्रो आईआईटी हब” स्थापित किया जाएगा। यह हब कृषि क्षेत्र में नवाचार और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देगा। इसके लिए भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। इसमें अच्छे बीज हो, अच्छी खेती और उत्पादन बढ़े इसको लेकर काम होगा। ताकि खेती लाभ का धंधा बनें। विजय शाह तीसरी बार कैबिनेट से नदारदजनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह कैबिनेट बैठक में शामिल नहीं हुए। यह लगातार तीसरी बार है जब वे बैठक से अनुपस्थित रहे। कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए बयान को लेकर चल रही जांच के बीच उनकी गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी हुई है।

खरीफ 2025: सोयाबीन की उम्मीदों के साथ किसानों की तैयारी तेज, पर बीज संकट बना चुनौती

Kharif 2025: Farmers’ preparations intensify with expectations of soybean, but seed crisis remains a challenge भोपाल ! खरीफ 2025 की तैयारियों ने ज़ोर पकड़ लिया है और इस बार किसानों के लिए ये सीजन निर्णायक साबित हो सकता है। मौसम विभाग ने मानसून समय पर आने और सामान्य वर्षा की भविष्यवाणी की है, जिससे फसल उत्पादन को लेकर उम्मीदें बंधी हैं। खासकर सोयाबीन की खेती करने वाले किसानों के लिए यह राहत भरी खबर है। सोयाबीन की खेती को मिल सकती है रफ्तार, पर बीज बना बाधा मध्यप्रदेश देश में सबसे अधिक सोयाबीन उत्पादन करने वाला राज्य है, लेकिन इस बार किसानों को उपचारित व प्रमाणित बीज नहीं मिल रहा। किसान मंडियों से बीज खरीदकर या अपने ही पुराने बीज का उपयोग कर रहे हैं, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। किसानों की बात: सीहोर जिले के किसानों अमित सिंह, राजेंद्र सिंह और विक्रम सिंह मालवीय का कहना है कि मंडियों से बीज मिल रहे हैं, लेकिन प्रमाणित बीज की उपलब्धता सीमित है। उड़द, मक्का और धान बन रहे विकल्प कई किसान इस बार सोयाबीन के बदले उड़द और मक्का जैसी फसलें बोने की योजना बना रहे हैं। वहीं जहां पानी की अधिकता है वहां धान की खेती को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे फसल विविधता तो बढ़ेगी लेकिन सोयाबीन उत्पादन में गिरावट की आशंका भी जताई जा रही है। प्रति एकड़ 10 क्विंटल तक उत्पादन संभव कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान उन्नत किस्में और आधुनिक तकनीकों का उपयोग करें तो प्रति एकड़ 10 क्विंटल तक उत्पादन संभव है। खरीफ 2025 के लिए प्रमुख सोयाबीन किस्में: विशेषज्ञ सलाह: 2021, 2022 और 2023 में जारी की गई नई किस्मों को अपनाने से उत्पादन में 20% तक की बढ़ोतरी संभव है। बीज प्रमाणीकरण के आंकड़े राज्य के कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने बताया कि: किसानों के लिए सुझाव: सही किस्म, सही समय उपसंचालक कृषि के.के. पांडे ने बताया कि बीज तीन वर्गों में आते हैं — जल्दी पकने वाली, मध्यम अवधि वाली और देर से पकने वाली किस्में। किसानों को अपने क्षेत्र और बुवाई के समय के अनुसार सही किस्म चुननी चाहिए। बीज की खरीद प्रमाणित स्रोतों से ही करें, और बुवाई से पहले उसका परीक्षण अवश्य करें। खरीफ 2025 में मानसून की अनुकूलता के साथ उत्पादन में सुधार की पूरी संभावना है, लेकिन प्रमाणित बीजों की कमी एक बड़ा सवाल बनकर खड़ा है। अगर किसानों को समय पर सही बीज मिल जाएं और वे आधुनिक तकनीकों का उपयोग करें, तो यह सीजन कृषि क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक मोड़ साबित हो सकता है।

गुटबाजी खत्म करो, बदलाव चाहिए तो बताओ – मैं करूंगा’: भोपाल में राहुल गांधी का कांग्रेस नेताओं को सख्त संदेश

Rahul Gandhi’s strong message to Congress leaders in Bhopal भोपाल | लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को भोपाल में कांग्रेस के ‘संगठन सृजन अभियान’ की शुरुआत करते हुए पार्टी नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया: गुटबाजी अब और नहीं चलेगी, सभी को मिलकर संगठन को मजबूत करना होगा। पार्टी संगठन को मिशन 2028 के तहत नए सिरे से खड़ा करने की कोशिश के तहत राहुल गांधी ने एक ही दिन में पांच अहम बैठकें कीं। उन्होंने सभी नेताओं से साफ कहा, कोई भी फैसला ऊपर से नहीं थोपा जाएगा। आप मिलकर निर्णय लें, और अगर कोई बदलाव चाहिए, तो बताइए – मैं करूंगा। लेकिन पहले एकजुट हो जाइए। संगठन में नई जान फूंकने की कोशिश राहुल गांधी ने नेताओं को याद दिलाया कि पिछले बीस सालों में कांग्रेस का संगठन मध्य प्रदेश में कमजोर हुआ है और अब समय है इसे फिर से खड़ा करने का। उन्होंने संगठन को मजबूत, पारदर्शी और जनसरोकार से जुड़ा बनाने पर जोर दिया। कांग्रेस के ‘संगठन सृजन अभियान’ का लक्ष्य 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले स्थानीय और जिला स्तर पर संगठनात्मक ढांचे को पुनर्गठित करना है। राहुल गांधी ने कहा कि कार्यकर्ताओं की आवाज़ सुनी जाएगी और निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाएंगे, न कि ऊपर से थोपे जाएंगे।

स्वावलंबी महिला, सशक्त राष्ट्र – अहिल्या वाहिनी महिला बाइक रैली का भव्य आयोजन

Self-reliant women, strong nation – Ahilya Vahini women bike rally organized grandly भोपाल । लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती के पावन अवसर पर ‘स्वावलंबी महिला, सशक्त राष्ट्र’ की संकल्पना को साकार करते हुए भोपाल स्थित शौर्य स्मारक से अहिल्या वाहिनी महिला बाइक रैली का भव्य शुभारंभ हुआ। इस जनकल्याणी पर्व के अंतर्गत महिला सशक्तिकरण एवं उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से आयोजित इस रैली को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह आयोजन पुलिस विभाग एवं खेल विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान मध्यप्रदेश पुलिस ऑर्केस्ट्रा ने देशभक्ति गीतों की मनमोहक प्रस्तुति दी, जिससे वातावरण राष्ट्रभक्ति की भावना से ओत-प्रोत हो उठा। इस अवसर पर सांसद बीडी शर्मा, खेल एवं युवा कल्यारण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, राज्य मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर, महा‍पौर श्रीमती मालती राय, डीजीपी कैलाश मकवाणा, अपर मुख्यि सचिव गृह जे.एन कंसोटिया, विशेष पुलिस महानिदेशक श्रीमती प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्ताव, संचालक खेल एवं युवा कल्याण राकेश गुप्ता, विधायक भगवान दास सबनानी सहित प्रदेश के वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण, महिला पुलिसकर्मी, स्कूली छात्राएं एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे। इच्छाशक्ति और सेवा भाव से रचा जा सकता है सशक्तह राष्ट्र – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादवमुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में लोकमाता अहिल्याबाई की प्रशासनिक दक्षता, सामाजिक समर्पण और उनके द्वारा स्थापित सुशासन की प्रेरणादायी परंपराओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि रानी अहिल्याबाई एक आदर्श बहू, आदर्श मां, आदर्श पत्नी और महान शासिका थीं। उन्होंने अपने व्यक्तिगत दुखों को शक्ति में बदलते हुए नारी सशक्तिकरण, महिला शिक्षा, धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार और जनकल्याण के अनेक कार्य किए। उन्होंसने कहा कि इच्छाशक्ति और सेवा भाव से ही सशक्तज राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बाइक रैली के माध्यम से हमारी बहनें आज भोपाल की सड़कों पर चल रही हैं, यह हमारी संस्कृति, परंपरा और नारी सम्मान का प्रतीक है। देवी अहिल्या बाई की जीवनगाथा नारीशक्ति के लिए प्रेरणा स्त्रोत – डीजीपी कैलाश मकवाणापुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि देवी अहिल्या बाई की जीवनगाथा नारीशक्ति के लिए प्रेरणा स्त्रोत है। उन्होंने कहा कि “स्वयं के आत्मबल और दृढ़ इच्छा शक्ति से जीवन में कोई भी कठिनाई पार की जा सकती है। देवी अहिल्या का जीवन इसका उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी सामाजिक न्याय और महिला उत्थान की नींव रखी।उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में इस सप्ताह विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। महिला सशक्तिकरण को लेकर पुलिस विभाग निरंतर प्रयासरत है, जिसमें सेल्फ डिफेंस प्रशिक्षण सहित अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने उपस्थित छात्राओं से भी सोशल मीडिया के भ्रम से बचकर आत्मरक्षा व आत्मनिर्भरता की दिशा में सजग रहने की अपील की।विशेष पुलिस महानिदेशक श्रीमती प्रज्ञा ऋचार श्रीवास्तमव ने कहा कि हमारे युवा वर्ग, हमारी बेटियों और महिलाओं में जो उत्साह और ऊर्जा दिखाई दे रही है, वह प्रेरणादायक है। यह भले ही एक प्रतीकात्मक प्रयास हो, लेकिन यह स्पष्ट संदेश देता है कि महिलाएं और बच्चियां भी मोटर बाइक चला सकती हैं। यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सशक्त पहल है, जो दर्शाती है कि मध्यप्रदेश किसी भी शासन से इस दिशा में पीछे नहीं है।इस कार्यक्रम में सृजन कार्यक्रम के 500 बालक/बालिका भी शामिल हुए। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशभर में बाल संरक्षण, आत्मरक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में संचालित सृजन कार्यक्रम ने एक नई मिसाल कायम की है। सामुदायिक पुलिसिंग के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र एवं शहरी क्षेत्र के झुग्गी झोपड़ियां एवं बस्तियों में निवासरत किशोर बालक-बालिकाओं हेतु सृजन कैंप आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें उन्हें गुड टच-बैड टच, महिलाओं पर होने वाले घरेलू एवं यौन हिंसा की रोकथाम, बाल अधिकारों, आत्मरक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और साइबर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी जा रही है। सृजन कार्यक्रम न केवल बच्चों को आत्मरक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूक बना रहा है, बल्कि उनके आत्मविश्वास और भविष्य को नई दिशा भी दे रहा है। कार्यक्रम में भोपाल की संस्थाएं जैसे आरंभ सामाजिक संस्था मुस्कान, आरंभ, उदय संस्था मीत आदि संस्था शामिल हुई। जो लगातार पुलिस के साथ मिलकर थाना स्तर पर बच्चों को एकत्रित करके इस कार्यक्रम को सफल बना रहे हैं।

3 जून को एमपी आएंगे Rahul Gandhi, 7 घंटे होगा स्टे, कांग्रेस पदाधिकारियों और विधायकों से करेंगे बात

Rahul Gandhi MP Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के दो दिन बाद राहुल गांधी कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान की शुरुआत करेंगे। वे पदाधिकारियों, विधायकों और कार्यकर्ताओं से संवाद कर संगठन को धार देंगे। Rahul Gandhi MP Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) के दौरे के दो दिन बाद 3 जून को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) भोपाल आएगे। वे संगठन सृजन अभियान की शुरुआत करेंगे। करीब सात घंटे के दौरे में पार्टी के पदाधिकारियों, विधायकों के अलावा कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें करेंगे। उमंग सिंघार ने दी जानकारीविधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत में यह जानकारी दी। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस संगठन प्रभारी संजय कामले, मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक भी मौजूद थे।सिंघार ने कहा, राहुल गांधी के मार्गदर्शन में शुरू होने वाला यह अभियान कांग्रेस को जमीनी स्तर पर और सशक्त करेगा। यह पहल युवाओं, किसानों, श्रमिकों और समाज के वंचित वर्गों को कांग्रेस के साथ वापस जोड़ने का माध्यम बनेगी। अभियान के तहत अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षकों, प्रदेश कार्यकारिणी, राजनीतिक मामलों की समिति और सभी जिला अध्यक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा। उद्देश्य संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और स्पष्ट रणनीति तैयार करना है। ये है दौरे का पूरा शेड्यूलसुबह 11 से 12 : प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पॉलीटिकल अफेयर कमेटी की बैठक।दोपहर 12 से 12.30 विधायकों के साथ बैठक।दोपहर 12.30 से 1.30: पर्यवेक्षकों, प्रभारियों के साथ बात करेंगे।दोपहर 1.30 से 2.30: आरक्षित समय।दोपहर 2.30 से 4 : रवींद्र भवन में एआइसीसी डेलीगेट्स, पीसीसी डेलीगेट्स, जिलाध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्षों का अधिवेशन।

आईएफएस एपीएआर: सेन्ट्रल इम्पॉवर्ड कमेटी के सदस्य ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र

IFS APAR: Member of Central Empowered Committee wrote a letter to the Chief Secretary भोपाल। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के अगले ही दिन सेन्ट्रल इम्पॉवर्ड कमेटी के सचिव चंद्र प्रकाश गोयल ने गुरुवार मुख्य सचिव को पत्र लिखकर आईएफएस अफसरों की एपीएआर (एनवल अप्रेजल एसेसमेंट रिपोर्ट) राज्य शासन द्वारा जून 24 को जारी आदेश को रद्द कर 22 सितम्बर 2000 को जारी आदेश का कड़ाई से पालन करते हुए नए आदेश जारी कराएं।सेन्ट्रल इम्पॉवर्ड कमेटी के सदस्य गोयल ने मुख्य सचिव को सम्बोधित अपने पत्र में लिखा कि आपका ध्यान माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 21 मई 25 के आईएफएस एपीएआर लिखने विषय पर दिए गए निर्णय की ओर आकृष्ट किया जाता है, जिसमें माननीय न्यायालय ने निर्देश दिए हैं कि 29 जून 2004 के विवादित सरकारी आदेश को इस न्यायालय द्वारा दिनांक 22 सितम्बर 2000 (संतोष भारती केस) की वर्तमान कार्यवाही में पारित आदेश का उल्लंघन माना जाता है, जिसे दोहराया जाता है और परिणामस्वरूप रद्द किया जाता है और अलग रखा जाता है। यह कार्य इस निर्णय की तिथि से एक माह की अवधि के भीतर किया जाएगा। इस आलोक में, सभी राज्य सरकारों/संघ शासित प्रदेशों से अनुरोध है कि वे माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक अनुवर्ती कार्रवाई करें। माननीय न्यायालय के संज्ञान में लाया गया कि लगभग सभी राज्य माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 22 सितम्बर 2000 को पारित आदेशों का अनुपालन कर रहे हैं। यदि इन आदेशों से कुछ विचलन होता है, तो राज्यों को संशोधित आदेश जारी करने की आवश्यकता है ताकि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का अक्षरशः पालन किया जा सके। इस संबंध में, आपसे अनुरोध है कि कृपया माननीय सर्वोच्च न्यायालय के इन निर्देशों का अनुपालन करते हुए राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए प्रासंगिक आदेश माननीय न्यायालय द्वारा निर्धारित समय के भीतर भेजें।

सुप्रीम कोर्ट ने किया आईएफएस को कमजोर करने वाले मप्र सरकार के आदेश को किया खारिज

Supreme Court rejects MP government’s order weakening IFS भोपाल। सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को मप्र सरकार द्वारा 29 जून, 2024 को जारी किए गए एक विवादास्पद आदेश को खारिज कर दिया। इस आदेश में कहा गया था कि गैर-वन अधिकारी – विशेष रूप से कलेक्टर और संभागीय आयुक्त – प्रधान मुख्य वन संरक्षक सहित वरिष्ठ भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारियों की कार्य-निष्पादन मूल्यांकन प्रक्रिया में भाग लेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के एपीएआर संशोधन प्रक्रिया के आदेश को अनुचित ठहराते हुए वर्ष 2002 में पूर्ववर्ती आदेश को यथावत रखा। यानि अब डीएफओ और एपीसीसीएफ के एपीएआर में कलेक्टर कमिश्नर और प्रमुख सचिव टिप्पणी नहीं लिखेंगे। उच्चतम न्यायालय के आदेश से आईएफएस अफसर की जहां जीत हुई है वही प्रदेश के नौकरशाही खासकर एसीएस अशोक वर्णवाल की किरकिरी हुई है।पर्यावरण अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल और अन्य द्वारा दायर याचिका के बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने माननीय न्यायमूर्ति मसीह के साथ मिलकर यह फैसला सुनाया। बुधवार को सुप्रीम न्यायालय ने प्रशासनिक औचित्य और पारिस्थितिकी संवेदनशीलता के सिद्धांतों को बरकरार रखते हुए आदेश को निर्णायक रूप से रद्द कर दिया। पीठ ने अपने फैसले में यह भी कहा कि हमें यह मानने में कोई संकोच नहीं है कि विवादित सरकारी आदेश प्रकृति में अवमाननापूर्ण है, क्योंकि यह सरकारी आदेश इस न्यायालय के दिनांक 22 सितम्बर 2000 और 19 अप्रैल 2024 के पूर्वोक्त आदेशों का उल्लंघन करता है और इसे इस न्यायालय से स्पष्टीकरण/संशोधन मांगे बिना ही जारी किया गया है। हम ऐसे सरकारी आदेश जारी करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अवमानना ​​कार्यवाही शुरू कर सकते थे। हालांकि, हम ऐसा करने से खुद को रोकते हैं। उक्त सरकारी आदेश इस न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन करने के कारण रद्द किए जाने योग्य है और इसे रद्द किया जाना चाहिए। अधिवक्ता बंसल ने आदेश की संवैधानिकता और प्रशासनिक सुदृढ़ता को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि इसने भारतीय वन सेवा की संस्थागत अखंडता का उल्लंघन किया है और वन संरक्षण प्रयासों को कमजोर किया है। उन्होंने प्रस्तुत किया कि महत्वपूर्ण वन और वन्यजीव संरक्षण कार्य का आकलन करने में गैर-वन अधिकारियों को शामिल करना न केवल अनुचित होगा, बल्कि टी.एन. गोदावर्मन थिरुमुलपाद बनाम भारत संघ (2000) और संतोष भारती बनाम मध्य प्रदेश राज्य जैसे ऐतिहासिक पर्यावरण मामलों में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्थापित कानूनी मिसालों के भी विपरीत होगा। मामले को गंभीरता से लेते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राज्य का आदेश भारतीय वन सेवा की स्वायत्तता और तकनीकी अध्यादेश का उल्लंघन करता है और भारत के वन प्रशासन के लिए इसके दूरगामी परिणाम हैं। क्या थी एपीएआर लिखने की नई व्यवस्था? 29 जून 24 को जारी आदेश के तहत राज्य शासन ने प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) से लेकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) तक के भारतीय वन सेवा अधिकारियों के लिए एपीएआर चैनल के संबंध में एक नई व्यवस्था शुरू की है। राज्य शासन के आदेश खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका कर्ता एडवोकेट गौरव कुमार बंसल ने अपने याचिका में कहा है कि 29 जून 24 के अपने आदेश के तहत मध्य प्रदेश राज्य ने प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) से लेकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) तक के भारतीय वन सेवा अधिकारियों के लिए पीएआर चैनल के संबंध में एक नई व्यवस्था शुरू की है। आईएफएस का संरक्षण जरूरी जहां भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों का समग्र काम राजस्व और प्रशासनिक मामलों पर केंद्रित है और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारियों का काम कानून और व्यवस्था पर केंद्रित है, वहीं भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारियों का काम प्रकृति में अधिक तकनीकी है। वह पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण के लिए समर्पित हैं। इस अद्वितीय भूमिका के कारण, कई बार भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारियों को अक्सर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जब उनके संरक्षण प्रयास राज्य अधिकारियों द्वारा अपनाए गए विकासात्मक उद्देश्यों से टकराते हैं। ऐसे आईएफएस अफसरों का संरक्षण अधिक जरूरी है। अतः एपीआर लिखने की प्रक्रिया में संशोधन गैर वाजिब है।

श्रीअन्न का उत्पादन बढ़ाएं, सरकार खरीदेगी किसानों से श्रीअन्न : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

Increase the production of Shrianna, the government will buy Shrianna from farmers: Chief Minister Dr. Yadav भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में रागी, कोदो-कुटकी, ज्वार-बाजरा, मक्का जैसे श्रीअन्न का उत्पादन बढ़ाया जाए और किसानों को श्रीअन्न उत्पादन के लिए प्रोत्साहि त किया जाए। किसानों द्वारा उत्पादित श्रीअन्न अब सरकार खरीदेगी। उन्होंने कहा कि तुअर उत्पादक किसानों को अच्छे किस्म के खाद, बीज और उत्पादन वृद्धि के लिए प्रोत्साहन भी दिया जाए। इसके लिए किसानों को फसल अनुदान देने और उनकी फसल का बीमा कराने जैसे नवाचार भी किये जा सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को मंत्रालय में किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री  एदल सिंह कंषाना, मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव सहकारिता अशोक बर्णवाल, सचिव कृषि एम. सेल्वेन्द्रम सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। कृषि उपज मंडी के अलावा फल व सब्जी मंडी, मसाला मंडी स्थापना के लिए भी करें प्रयास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की सभी मंडियों में प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी मंडियों का विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों से आकस्मिक निरीक्षण करायें। मंडियों की व्यवस्थाओं को और भी बेहतर बनाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नई जरूरतों के मुताबिक अब अलग-अलग मंडियों की स्थापना पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंडियों का फसलवार मॉडल तैयार करें। कृषि उपज मंडी के अलावा अब फल व सब्जी मंडी, मसाला मंडी या अन्य विशेष पैदावार की मंडी स्थापना के लिए भी प्रयास किए जाएं। इसके लिए रोडमैप तैयार किया जाए और यदि आवश्यकता है तो इसमें प्रायवेट सेक्टर को भी सम्मिलित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मंडियों में जारी वर्तमान व्यवस्थाओं का समुचित तरीके से किसानों के हित में प्रबंधन किया जाए। मंडी शुल्क की प्राप्त राशि से किसानों की कल्याण गतिविधियों पर फोकस किया जाए। आदर्श बनें प्रदेश की कृषि उपज मंडियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की कृषि उपज मंडियों को आदर्श बनाया जाए। मंडियों में कृषि आधारित सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित हों। मंडियों में किसानों को फसल बेचने में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। मंडी में अपनी फसल बेचने आने वाले हर किसान को उसकी उपज का सही दाम मिले किसी का भी नुकसान न होने पाए। मंडियों को और अधिक आधुनिक बनाया जाए यहां किसानों को उनके उपज में गुणवत्ता संवर्धन के बारे में भी बताया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी मंडियां अपने विकास कार्यों के लिए आत्मनिर्भर बनें। उन्होंने कृषि अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे स्थानीय निकायों से नई मंडियों की स्थापना/ फसल भण्डारण क्षमता बढ़ाने के लिए समन्वय करें, जिससे किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए अधिक सुविधाएं मिल सकें। किसानों को मिले प्रोत्साहन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं। प्रदेश के किसानों को रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर उन्नत किस्म के बीज, आधुनिक कृषि यंत्रों, अच्छा भाव, अनुदान आदि का प्रोत्साहन मिले। उन्होंने कहा कि श्रीअन्न रागी, कोदो-कुटकी, मक्का, ज्वार, बाजरा की फसलों को प्रोत्साहन दिया जाए। इन फसलों के उत्पादक क्षेत्र को अच्छी पैदावार करने के लिए प्रोत्साहन मिले। आवश्यकता अनुसार अनुदान की राशि भी बढ़ाई जाए। ग्रीष्मकालीन मूंग में खरपतवारनाशकों के उपयोग को करें हतोत्साहित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रीष्मकालीन मूंग में खरपतवारनाशकों के उपयोग से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए खरपतवारनाशकों को हतोत्साहित करने की कोशिश करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा मिले। स्वाभाविक फसलों की पैदावार पर विशेष जोर दिया जाए। कृषि उद्योग समागम के अनुभवों से आगे बढ़ें, किसानों को मिले बेहतर परिणाम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश के हर संभाग में किसान मेलों का आयोजन करने का निर्णय लिया है। इन मेलों में कृषि आधारित उद्योगों में निवेश पर जोर दिया जा रहा है। हाल ही में मंदसौर जिले के सीतापुर में आयोजित कार्यक्रम में किसानों को कृषि के आधुनिक यंत्रों और तकनीक से अवगत कराया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सीतामऊ में हुए कृषि उद्योग समागम के अनुभवों को सामने रखें और इन अनुभवों के आधार पर आगे होने वाले कृषि उद्योग समागमों की तैयारी करें, जिससे किसानों को इन समागमों से अधिक और बेहतर परिणाम प्राप्त हों। उन्होंने कहा कि किसानों को खेतों में नरवाई जलाने से रोकने के प्रयास किए जाएं। किसानों को हैप्पी सीडर कृषि यंत्र का उपयोग करने के लिए जागरूक किया जाए। उन्होंने कृषि यंत्रों को प्रोत्साहन और हर ग्राम पंचायत में हैप्पी सीडर की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। तीन फसलों को जल्द ही मिलेगा जीआई टैग बैठक में बताया गया कि राज्य शासन की प्रगतिशीलता से प्रदेश में उत्पादित होने वाली 3 फसलों को बहुत जल्द जीआई-टैग मिल जाएगा। सचिव कृषि ने बताया कि डिंडोरी जिले की नागदमन मकुटकी, सिताही कुटकी और बैंगनी अरहर की फसल को जीआई टैग परीक्षण के लिए भेजा गया है, उम्मीद है कि जल्द ही इन फसलों को जीआई टैग प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि ई-अनुज्ञा प्रणाली लागू करने के बाद प्रदेश में बीते एक अप्रैल 2025 से प्रदेश की सभी 259 मंडियों में ई-मंडी योजना भी लागू कर दी गई है। सभी मंडियों में अब डिजीटल तरीके से रिकार्ड कीपिंग की जा रही है। 26,27 एवं 28 मई को नरसिंहपुर में होगा कृषि आधारित उद्योगों का सम्मेलन बैठक में सचिव कृषि ने जानकारी दी कि आगामी 26, 27 एवं 28 मई को जिला मुख्यालय नरसिंहपुर में कृषि आधारित उद्योगों का सम्मेलन सह विशाल कृषि मेला आयोजित किया जाएगा। आयोजन में कृषि आधारित उद्योगों के बारे में जानकारी के अलावा दुग्ध उत्पादन, मत्स्य उत्पादन, शाक-सब्जी उत्पादन, श्रीअन्न उत्पादन, उद्यानिकी, बागवानी, उन्नति किस्म के बीज, खाद, उर्वरक की जानकारी सहित उन्नत कृषि उपकरणों का प्रदर्शन भी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि तीन दिन अलग-अलग गतिविधियां होंगी। इस दौरान उन्नत कृषि उपकरणों के साथ किसानों से आधुनिक कृषि उपकरणों की बुकिंग भी कराई जाएगी। कृषि के क्षेत्र में नए र्स्टाट-अप्स के बारे में जानकारी भी दी जाएगी। उन्होंने बताया … Read more

खेलों में नई क्रांति: सरकार ने दोगुना किया खेल बजट, विधानसभा स्तर पर बनेंगे अत्याधुनिक मैदान – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

New revolution in sports: Government has doubled the sports budget, ultra-modern grounds will be built at Vidhan Sabha level – Chief Minister Dr. Mohan Yadav भोपाल ! मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने क्षीरसागर स्टेडियम, उज्जैन में आयोजित अखिल भारतीय फिरोजिया ट्रॉफी 2025 के समापन समारोह में खेलों के क्षेत्र में सरकार की दूरदर्शी नीति की घोषणा की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से खेल बजट को दोगुना कर दिया है। साथ ही, ओलंपिक पदक विजेताओं को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि को 50 लाख से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपए करने की घोषणा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में अत्याधुनिक खेल मैदानों का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जहाँ खिलाड़ियों को उच्चस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि खेल अब केवल मनोरंजन या प्रतियोगिता नहीं, बल्कि शिक्षा नीति का एक अभिन्न हिस्सा होंगे। खेल प्रशिक्षकों और उत्कृष्ट खिलाड़ियों को शासन में महत्वपूर्ण भूमिका दी जाएगी। खेलों से राष्ट्रीय गौरव का निर्माण मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा, “खेल केवल शरीर को नहीं, बल्कि चरित्र को भी गढ़ते हैं। प्राचीन भारत में खेलों को पुरुषार्थ का प्रतीक माना गया, और आज हम उसी भावना को आधुनिक सुविधाओं से जोड़कर पुनर्जीवित कर रहे हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि उज्जैन में अंतरराष्ट्रीय स्तर का एस्ट्रोटर्फ हॉकी ग्राउंड जल्द ही बनकर तैयार होगा, जिससे स्थानीय खिलाड़ियों को वैश्विक मंच तक पहुँचने का अवसर मिलेगा। खिलाड़ियों को दी शुभकामनाएं समापन समारोह में इंदौर और ओडिशा की टीमों के बीच हुए फाइनल मैच के अवसर पर मुख्यमंत्री ने दोनों टीमों को खेल भावना से खेलने की प्रेरणा दी और आशा जताई कि उज्जैन सहित पूरे प्रदेश से ऐसे खिलाड़ी उभरें जो रणजी ट्रॉफी खेलें, राष्ट्रीय टीम में चयनित हों और विश्व कप में भारत का नाम रोशन करें। फिरोजिया ट्रॉफी: खेल और परंपरा का संगम इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता का आयोजन 5 से 11 मई तक क्षीरसागर मैदान में रात्रिकालीन क्रिकेट मैचों के रूप में किया गया। यह ट्रॉफी सांसद अनिल फिरोजिया द्वारा अपने पिता, स्वर्गीय भूरेलाल जी फिरोजिया की स्मृति में पिछले 20 वर्षों से कराई जा रही है। समापन समारोह में सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, जनप्रतिनिधि संजय अग्रवाल, रवि सोलंकी सहित बड़ी संख्या में खिलाड़ी और खेल प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को ट्रॉफी का स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। उन्होंने उज्जैन में हो रहे औद्योगिक निवेश और विकास के कार्यों का भी उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की और देश की सुरक्षा में भारतीय सेना के अद्वितीय योगदान का स्मरण किया।

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