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साइबर अपराध पर पुलिस एक्शन: 11 थानों में 29 ठगी के मामले, शिकायत के बाद कार्रवाई तेज

भोपाल  पुलिस प्रशासन और स्वयंसेवी संगठनों द्वारा लगातार चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों के बावजूद सायबर ठगी की घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। राजधानी के 11 थानों में चौबीस घंटों के भीतर ठगी के कुल 29 अपराध दर्ज किए गए हैं, जिनमें सायबर जालसाजों ने लोगों को करोड़ों रुपये की चपत लगाई है। ज्यादातर ठगी शेयर मार्केट में निवेश, नौकरी और मुनाफा कमाने का लालच, बिजली बिल कनेक्शन काटने के नाम पर की गई है। राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर पर की गई शिकायतों के बाद अब थानों में प्रकरण दर्ज होना शुरू हो गया है।  दरअसल सायबर ठगी की शिकायतों के लिए राष्ट्रीय हेल्प लाइन नंबर 1930 जारी किया गया था। इस नंबर पर प्रदेशभर से सैकड़ों शिकायतें की गई थीं, जो काफी समय से संबित थीं। पिछले दिनों यह जानकारी केंद्रीय गृहमंत्रालय तक पहुंची तो मंत्रालय ने संबंधित थानों में केस रजिस्टर्ड कराकर जांच कराने के निर्देश दिए। राज्य सायबर सेल के पास इस प्रकार की शिकायतें भेजी गई थी, जिसमें अकेले भोपाल में ही सवा सौ से ज्यादा शिकायतें सामने आई। इन्हीं शिकायतों को थानों में भेजा गया, जहां असल कायमी जांच शुरू की गई है। बीते चौबीस घंटे के दौरान बागसेवनिया और अशोका गार्डन थाने में 5-5 और मिसरोद तथा अवधपुरी में 4-4 शिकायतें पहुंची। इसके अलावा ऐशबाग, हबीबगंज, निशातपुरा और गांधी नगर में एक-एक शिकायत दर्ज हुई। इसी प्रकार कमला नगर, पिपलानी में दो-दो और कोलार में तीन अपराध दर्ज किए गए हैं। टॉस्क देकर लगाई 50.98 लाख की चपत बागसेवनिया थानांतर्गत साकेत नगर में रहने वाले राजेश जैन को अज्ञात व्यक्ति ने वांट्सएफ ग्रुप पर जोड़ा, जहां लोग पैसों का निवेश कर होने वाले मुनाफे का स्क्रीन शॉट डालते थे। कई दिनों तक नज़र अंदाज़ करने के बाद उन्हें लगा कि यह फायदे का सौदा है, इसलिए वह भी निवेश करने लगे। पहले तो उन्हें मुनाफा दिखाई दिया, लेकिन जब पैसे निकालने का प्रयास किया तो 35 लाख रुपए का टैक्स मांगा जाने लगा। इस प्रकार राजेश ने जालसाजों के बताए एकाउंट में 50 लाख 98 लाख रुपये से अधिक की राशि जमा कर दी, लेकिन यह रुपये वापस नहीं मिले। ऐप डाउनलोड कराकर निकाले 2.12 लाख बागसेवनिया थानांतर्गत नारायण नगर में रहने वाले प्रेमचंद जैन के मोबाइल पर एक व्यक्ति ने फोन किया और बताया कि आपका कंज्यूमर नंबर चेंज हो रहा है। इसके लिए जालसाज ने उन्हें एमपीईबी इलेक्ट्रीसिटी हेड आफिस भोपाल का एप डाउनलोड करके उसमें 12 रुपए का भुगतान करने का बोला। प्रेमचंद ने जैसे ही ऐप डाउनलोज किया, वैसे ही उनके एकाउंट से 1 लाख 13 हजार रुपये कट गए। उन्होंने फोन करने वाले से इसकी शिकायत की तो बताया कि साफ्टवेयर अपडेट हो रहा, कुछ देर बाद पैसे वापस लौट आएंगे। उसके बाद उनके दूसरे एकाउंट से भी पैसे कट गए। इस पर जालसाजों ने कुल 2 लाख 12 हजार रुपये चपत लगा दी। दूसरे व्यक्ति को लगाई 3.66 लाख की चपत मूलत: औबेदुल्लागंज निवासी नंद किशोर यादव यहां रजत विहार कालोनी के पास मोहिनी मुस्कान गार्डन में रहते हैं। दिसंबर महीने में एक व्यक्ति ने उन्हें वीडियो काल किया और बताया कि वह गोविंदपुरा बिजली कार्यालय से बोल रहा है। उसने मकान नंबर बताते के साथ ही कहा कि उनका कंज्यूमर नंबर अपडेट होने का आज आखिरी दिन है। उसने यह भी बताया कि शाम तक आईडी अपडेट नहीं हुई तो बिजली का कनेक्शन काट दिया जाएगा। नंद किसोर ने बताया कि वह शहर से बाहर हैं, इसलिए उसने 12 रुपये आनलाइन ट्रांसफर करने का बोला। नंद किशोर ने जैसे ही उसे रुपये ट्रांसफर किए, वैसे ही अलग-अलग समय में कुल 3.66 लाख रुपए कट गए। क्रेडिट कार्ड से निकाले एक लाख रुपये बागसेवनिया पुलिस ने अगली रिपोर्ट राकेश कुशवाहा की शिकायत पर दर्ज की है। पिपलिया पेंदे खां में रहने वाले राकेश कुशवाहा के पास एक व्यक्ति ने क्रेडिट कार्ड कंपनी का अधिकारी बनकर फोन किया और कार्ड से जुड़ी जानकारी हासिल कर ली। उसके जालसाज ने एक ऐप डाउनलोड करवाया और क्रेडिट कार्ड से 1 लाख 3 हजार रुपये निकाल लिए। इसी प्रकार भाजपा कार्यालय के पास एनसीसी कंपनी में काम करने वाले राजा गोपाल रेड्डी के क्रेडिट कार्ड की जानकारी लेकर जालसाज ने दो बार में 1 लाख 21 हजार रुपये निकाल लिए। पुलिस ने सभी मामलों में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इसी प्रकार के शहर के दस अन्य थानों में दर्ज धोखाधड़ी के मामलों में जालसाजों ने लाखों रुपये की चपत लोगों को लगाई है। 

मौसम की करवट: 20 जिलों में बारिश, फसलें आड़ी, कृषि मंत्री बोले- जल्द होगा सर्वे

भोपाल  मध्य प्रदेश का मौसम फरवरी के महीने में एक बार फिर करवट ले चुका है। इस साल तीसरी बार राज्य के कई जिलों में अचानक बारिश और ओलावृष्टि हुई, जिससे आम लोग और किसान दोनों ही चिंतित हैं। राजधानी भोपाल, ग्वालियर, इंदौर और उज्जैन में तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बौछारें हुईं। अचानक बदलाव से तापमान में गिरावट आई और रात में ठंड बढ़ गई। खेतों में खड़ी फसलें आड़ी-तिरछी गिर गईं, जिससे किसानों के चेहरे पर चिंता साफ नजर आई। अचानक क्यों बदला मौसम मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मध्य प्रदेश में एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम एक्टिव है। इसके साथ ही वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और ट्रफ भी सक्रिय हैं, जो मौसम में अचानक बदलाव के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।     18 फरवरी को राज्य के लगभग 20 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और ओलावृष्टि हुई।     भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, रतलाम और मंदसौर में दिनभर धूप खिलने के बाद अचानक मौसम बिगड़ा।     मौसम विभाग ने ग्वालियर, भिंड, शिवपुरी, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना जिलों में अलर्ट जारी किया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह साइक्लोनिक सर्कुलेशन पश्चिमी राजस्थान और मध्य प्रदेश पर सक्रिय है और इसके प्रभाव से आने वाले दो दिनों में मौसम में उतार-चढ़ाव बने रहेंगे। फरवरी महीने में यह तीसरी बार है, जब अचानक प्रदेश का मौसम बदला और बारिश की फुहारें पड़ने लगीं। अचानक हुई बारिश ने तापमान में कमी ला दी है। रुक-रुक कर हो रही बेमौसम बारिश से फसलों को भी नुकसान पहुंच रहा है। कई इलाकों में खेतों में खड़ी फसलें लेट गई हैं। बारिश के साथ ही सबसे ज्यादा नुकसान ओले गिरने से हुआ है। इन जिलों में हुई बारिश लगातार हो रही बारिश के कारण प्रदेश का तापमान गिरा है। एमपी के खजुराहो में सबसे कम 9.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। इसके अलावा राजगढ़ में 10 डिग्री सेल्सियस और पंचमढ़ी में 10.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार को भोपाल, बड़वानी, आगर-मालवा, सीहोर, शिवपुरी, उज्जैन, धार, दतिया, गुना, ग्वालियर, इंदौर, रतलाम, मंदसौर, मुरैना, शाजापुर और छतरपुर में बारिश दर्ज की गई है। कैसा रहेगा अगले 2 दिन का मौसम मौसम विभाग ने 20 फरवरी को ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग में बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, तीनों संभाग के 8 जिलों में बारिश की संभावना है। बारिश के साथ ही यहां बिजली गिरने की भी आशंका है। इसके बाद 21 फरवरी को मध्य प्रदेश का मौसम साफ रहेगा। इस दौरान किसी भी जिले में बारिश की संभावना नहीं जताई गई है। मध्य प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के कारण किसानों की फसलों का काफी नुकसान हुआ है। गेहूं की फसलें गिर गई हैं। गेहूं की फसलें गिर जाने के कारण दाने कमजोर हुए हैं। दाने कमजोर होने की वजह से पैदावार में कमी देखने को मिल सकती है। बारिश और ओले का असर     बेमौसम बारिश और ओले ने आम जनता और किसानों दोनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।     राजधानी भोपाल में बादलों की तेज गड़गड़ाहट के साथ लगभग डेढ़ घंटे तक तेज और हल्की बारिश हुई।     इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और रतलाम में दिनभर मौसम गर्म रहने के बाद रात को अचानक बारिश और ओले गिरे।     ठंडी हवाओं के कारण दिन के तापमान में गिरावट आई और रात में ठंड बढ़ गई। किसानों की चिंता:     गेहूं, चना और सरसों जैसी फसलें कटाई के लिए तैयार थीं।     तेज हवाओं और ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी फसलें आड़ी-तिरछी गिर गईं।     कुछ क्षेत्रों में फसल की गुणवत्ता और उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना जताई गई है।     किसानों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराने और उचित मुआवजा देने की मांग की है। प्रभावित जिले और अलर्ट मौसम विभाग ने गुरुवार को आठ जिलों में बारिश और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया। इन जिलों में अलर्ट जारी ग्वालियर, भिंड, शिवपुरी, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना इन जिलों में हुई बारिश भोपाल, दतिया, गुना, ग्वालियर, इंदौर, रतलाम, श्योपुर, उज्जैन, धार, विदिशा, बड़वानी, आगर-मालवा, शाजापुर, मुरैना, छतरपुर, शिवपुरी, सीहोर, मंदसौर कहां कितना रहा तापमान बारिश और ठंडी हवाओं के चलते तापमान में उतार-चढ़ाव देखा गया। प्रदेश में खजुराहो सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 9.2°C रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा राजगढ़ में 10.0°C और पचमढ़ी में 10.2°C दर्ज होने के कारण कड़ाके की ठंड का अनुभव हुआ। इन जिलों में बारिश का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार गुरुवार को ग्वालियर, भिंड, शिवपुरी, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना जिलों में बारिश और गरज-चमक की संभावना है। इससे पहले बुधवार को रतलाम, श्योपुर, मुरैना, मंदसौर, नीमच, गुना सहित 20 से अधिक जिलों में कहीं बारिश तो कहीं ओले गिरे। दो साइक्लोनिक सिस्टम और वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के मुताबिक प्रदेश में दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम और एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय है। इसके अलावा एक ट्रफ लाइन भी प्रदेश से गुजर रही है, जिससे मौसम में अस्थिरता बनी हुई है। तापमान में उतार-चढ़ाव जारी प्रदेश में फिलहाल रात और सुबह हल्की सर्दी बनी रहेगी। ज्यादातर शहरों में रात का तापमान 10 डिग्री से ऊपर है, जबकि दिन का तापमान 30 डिग्री के पार पहुंच रहा है। कटनी का करौंदी सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 7 डिग्री दर्ज किया गया। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर में भी तापमान सामान्य से कम दर्ज हुआ। अगले दो दिन का पूर्वानुमान 20 फरवरी को ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग के जिलों में बारिश का अलर्ट है और बिजली गिरने की संभावना है। वहीं 21 फरवरी को मौसम साफ रहने की संभावना जताई गई है।

जलवायु परिवर्तन से मुकाबले में मध्यप्रदेश की पहल, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गिनाईं उपलब्धियां

क्लाइमेट चेंज से निपटने में लीडर बन रहा है मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव म.प्र. और इन्वेस्टर्स मिलकर देश को बढ़ाएंगे आगे 24 घंटे बिजली देने में मध्यप्रदेश सबसे आगे मध्यप्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा विकास के लिए सिकोया क्लाइमेट फाउंडेशन के साथ हुआ एमओयू  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुंबई क्लाइमेट वीक-2026 में की सहभागिता भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि क्लाइमेट चेंज एक गंभीर वैश्विक चुनौती है। क्लाइमेट चेंज मानव अस्तित्व, आर्थिक स्थिरता और भावी पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है। उन्होंने कहा कि सतत् विकास की राह में हम पर्यावरण की अनदेखी नहीं कर सकते। विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना ही प्रगति का मूल आधार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जोर देकर कहा कि क्लाइमेट चेंज के मामले में ठोस और समयबद्ध समाधान पर काम करना आज की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत की क्लाइमेट चेंज को लेकर प्रतिबद्धताओं में भी राज्यों का योगदान भी महत्वपूर्ण है। मध्यप्रदेश क्लाइमेट चेंज से निपटने में सर्वाधिक नवकरणीय ऊर्जा का उत्पादक बन लीडर की भूमिका में है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश के सबसे तेज गति से विकास करने वाले राज्यों में अग्रणी है। यहां लगभग हर क्षेत्र में तेजी से विकास हुआ है। मुख्यमंत्री ने नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में मप्र में निवेश करने के इच्छुक निवेशकों को हरसंभव सहयोग देने का विश्वास और सुरक्षा की गारंटी देते हुए कहा कि राज्य और निवेशक मिलकर देश को नवकरणीय ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाएंगे। उन्होंने कहा कि 24 घंटे बिजली देने की दिशा में मध्यप्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। निवेशकों के साथ हमारा रिश्ता नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में व्यापार-व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार की शाम मुंबई में क्लाइमेट वीक-2026 को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मध्यप्रदेश में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के विकास के लिए नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग (मप्र शासन) एवं ग्रीन एनर्जी के लिए विख्यात सिकोया क्लाइमेट फाउंडेशन के बीच मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में एमओयू हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती का समाधान केवल एक देश, एक राज्य या एक सरकार ही नहीं कर सकती, इसके लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा परिवर्तन, हरित विकास और जलवायु समाधान के लिए आगे बढ़ने की दिशा में मुम्बई क्लाइमेट वीक एक महत्वपूर्ण मंच है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लिए त्वरित और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा के स्वच्छ स्रोतों को बढ़ावा देना, हरित तकनीकों को अपनाना और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग करना ही भविष्य का विकास मार्ग है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पृथ्वी को सुरक्षित और संतुलित बनाए रखने की जिम्मेदारी सरकारों के साथ ही उद्योगों, संस्थाओं और इस देश में रहने वाले हर नागरिक की भी है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए ‘लाइफ स्टाइल फॉर एनवायरमेंट’ जैसे व्यवहारिक बदलावों को अपनाने की अपील की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हरित ऊर्जा उत्पादन के जरिए क्लाइमेट चेंज से निपटने की दिशा में मध्यप्रदेश सरकार के नवाचारों की जानकारी देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश भारत के उन अग्रणी राज्यों में से एक है, जिसने नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश पहला राज्य है, जिसने ईवी नीति बनाई, जो क्लाइमेट चेंज की ओर कारगर कदम है। मुख्यमंत्री ने बताया कि हमारी सरकार मध्यप्रदेश में 300 मेगावाट 4 घंटे सौर-सह एनर्जी स्टोरेज परियोजना, 300 मेगावाट 6 घंटे सौर-सह एनर्जी परियोजना सहित 24×7 घंटे नवकरणीय ऊर्जा बैटरी आधारित एनर्जी स्टोरेज परियोजना पर काम कर रही है। यह एक नया प्रयोग है। यह भारत की अपनी तरह की पहली परियोजना है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जो इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बीते 12 सालों में मप्र की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। सौर ऊर्जा में 48 प्रतिशत और पवन ऊर्जा में 19 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। नवकरणीय ऊर्जा की बड़ी परियोजनाओं के जरिए हमने म.प्र. की जरूरतों को पूरा करने के बाद पड़ोसी राज्यों और भारतीय रेलवे को भी स्वच्छ ऊर्जा की आपूर्ति शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट दुनिया का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट है। ये एक ऐसा प्रोजेक्ट है, जिसमें हमने किसी भी नागरिक को विस्थापित नहीं होने दिया, इस प्रोजेक्ट में ऊर्जा उत्पादन भी प्रारंभ हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में सांची देश की पहली सोलर सिटी बनी है। हम सभी शासकीय भवनों पर सोलर रूफटॉप लगाने की ओर बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार निवेशकों, निजी क्षेत्र और नीति निर्माताओं के साथ मिलकर मप्र को भारत का नवकरणीय ऊर्जा हब बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। हम सौर, पवन, एनर्जी स्टोरेज, बायोफ्यूल तथा ग्रीन हाइड्रोजन सहित सभी नवकरणीय टेक्नोलॉजी में वित्तीय एवं नीतिगत प्रोत्साहन भी दे रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों से आव्हान किया कि मध्यप्रदेश की तेजी से परिवर्तनकारी यात्रा में हमारे साथ जुड़ें। इससे जलवायु को संतुलित रखने में तो मदद मिलेगी ही, यह सबके व्यापार-व्यवसाय को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा और मप्र के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। उन्होंने कहा कि हम ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सतत् विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के साथ-साथ मप्र और भारत के उज्जवल भविष्य का निर्माण करेंगे। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री  राकेश शुक्ला ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए हम बैटरी स्टोरेज आधारित ऊर्जा उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मप्र में ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर पॉवर प्रोजेक्ट, शाजापुर, आगर-मालवा और रीवा में अल्ट्रा मेगा सोलर परियोजना पर काम हुआ है। उन्होंने निवेशकों से अपील करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश अनंत संभावनाओं का प्रदेश है। यहां निवेश करें, सरकार आपके साथ है। अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा  मनु वास्तव ने कहा कि नवकरणीय ऊर्जा, विद्युत आपूर्ति का एक कारगर, सस्ता और विश्वसनीय विकल्प है। हम मध्यप्रदेश के नागरिकों को कम से कम दर पर विद्युत आपूर्ति कर रहे हैं। उन्होंने निवेशकों और … Read more

आईसेक्ट समूह के डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने मध्य प्रदेश के बजट पर जताई प्रतिक्रिया, बताए अवसर और चुनौतियां

सीआईआई मध्य प्रदेश के उपाध्यक्ष और आईसेक्ट समूह के कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी द्वारा मध्य प्रदेश बजट 2026-27 पर प्रतिक्रिया…   भोपाल  प्रस्तुत सीआईआई मध्य प्रदेश के उपाध्यक्ष और आईसेक्ट समूह के कार्यकारी उपाध्यक्ष मध्य प्रदेश 2026-27 का बजट रोजगार, उद्योग और शिक्षा-कौशल विकास  पर संतुलित फोकस करता है। बजट में 48 नए औद्योगिक पार्कों की घोषणा राज्य में विनिर्माण और निवेश को प्रोत्साहित करेगी, जिससे स्थानीय रोजगार सृजन और MSME वृद्धि को बल मिलेगा। पूंजीगत व्यय को 1 लाख करोड़ से अधिक रखने का निर्णय आधारभूत ढांचे तथा औद्योगिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा। शिक्षा और कौशल विकास में वृद्धि पर जोर देते हुए बजट ने शिक्षा क्षेत्र के लिए वृद्धि की घोषणा की है, जिससे स्कूलों, उच्च शिक्षा और प्रशिक्षण संसाधनों का विस्तार संभव होगा। स्वास्थ्य, सड़क और शहरी विकास के साथ-साथ नौकरी-सृजन प्रावधान भी रखा गया है, जिससे युवा रोजगार अवसरों में वृद्धि होगी। मेरा मानना है कि यह बजट उद्योग, नवाचार एवं कुशल कार्यबल के विकास के लिए प्रोत्साहन देता है और राज्य को एक मजबूत आर्थिक तथा औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा। डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी उपाध्यक्ष, सीआईआई मध्य प्रदेश कार्यकारी उपाध्यक्ष, आईसेक्ट समूह कुलाधिपति, स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी

मंत्री-सांसद और विधायकों का हूटर मोह नहीं रुक रहा, मध्य प्रदेश पुलिस सख्ती करने से बच रही

भोपाल  राजधानी में आपको हूटर प्रेमी बहुत दिख जाएंगे, जो खुलआम अपने वाहनों में हूटर लगाकर कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश से वीवीआईपी कल्चर खत्म करने को लेकर कई बार अलग-अलग मंचों से कह चुके हैं. इसके साथ ही इस कल्चर को खत्म करने के लिए कई नियमों में बदलाव भी किया गया. इसके बावजूद नेताओं और अधिकारियों का लाल बत्ती के साथ हूटर के लिए जो प्यार है, खत्म होने का नाम नहीं लेता है. मंत्री-विधायक और सांसदों के वाहन सांय-सांय की आवाज करते सड़कों पर दौड़ते नजर आ जाते हैं. हूटर नियम के बाद नहीं उतर रहे हैं. पीएम मोदी के आदेश एमपी में बेअसर करीब 8 साल पहले केंद्र सरकार की ओर से मंत्री अफसर समेत सभी जनप्रतिनिधियों के वाहनों पर हूटर लगाने के नियम को बंद कर दिया गया था. इसके बाद से गाड़ियों पर लगे हूटरों को उतारना शुरू भी कर दिया गया था. ज्यादातर गाड़ियों से हूटर और लाल बत्ती को प्रशासन द्वारा उतरावा भी दिया गया था, लेकिन मध्य प्रदेश में जनप्रतिनिधि हों या बड़े अधिकारी अब भी हूटर का उपयोग कर रहे हैं. केंद्र सरकार की मंशा ये थी की हूटर से काफी तेज आवाज निकलती है और ऐसे में सामान्य तौर पर उसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. वाहनों में प्रेशर हॉर्न लगाने की अनुमति नहीं केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के तहत इस तरह का कोई भी प्रेशर हॉर्न किसी वाहन में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, लेकिन पहले वीआईपी लोगों को इसकी इजाजत थी. केन्द्र सरकार के आदेश के बाद वीआईपी लोगों के वाहनों पर भी हूटर लगाना बंद कर दिया गया था. हूटर लगाने की इजाजत सिर्फ आपातकालीन सेवा में इस्तेमाल होने वाले वाहन जैसे एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस के वाहन शामिल हैं. इन वाहनों के अलावा अगर और कोई हूटर इस्तेमाल करता हुआ पाया जाता है, तो उस पर कार्रवाई की जा सकती है. हूटर लगाकर फर्राटा भर रहे नेतागण वर्तमान में विधायक, नगर पालिका अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के साथ ही अन्य राजनीतिक दलों के पदाधिकारी बेखौफ होकर हूटर लगाकर अपना जलवा बिखेरने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं. यातायात पुलिस की चालानी कार्रवाई 2 पहिया वाहनों, सीट बेल्ट व वाहनों के दस्तावेज चेक करने तक ही सिमट कर रह गई है. अनाधिकृत रूप से हूटर लगाकर शहर और मुख्य मार्गों में दौड़ने वाले वाहनों के विरुद्ध अब तक यातायात पुलिस ने भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है. इन वाहनों में हूटर लगाने की छूट अगर कोई इन नियमों के खिलाफ जाकर अपने वाहन पर हूटर लगाता है, तो उस पर 5000 रुपये तक का चालान किया जा सकता है. केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम 1989 के नियम 119(3) के तहत इन वाहनों को हूटर और साइरन के लिए छूट दी गई है, जिसमें एंबुलेंस, फायर बिग्रेड, आपातकालीन सेवा में चलने वाली गाड़ी और परिवहन विभाग के अफसरों की गाड़ियां शामिल हैं. नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई इस मामले में पुलिस कमिश्नर संजय सिंह ने कहा, “यातायात पुलिस की ड्यूटी है कि ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करें. जरूरत पड़ी तो हूटर के खिलाफ अभियान भी चलाया जाएगा.” हूटर के अलावा प्रेशर हॉर्न, ब्लैक फिल्म, फ्लैशर लाइट और मॉडिफाइड साइलेंसर लगाना केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम 1989 के खिलाफ है. ऐसा करने पर भी जुर्माना भरना पड़ सकता है. इसीलिए वाहन चलाते वक्त इन नियमों का ध्यान रखना काफी जरूरी है.

चिटफंड घोटाला उजागर, 300 लोगों का पैसा डूबा; LJCC के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने पहुंचे निवेशक

मुरैना  मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में एक और चिटफंड कंपनी कई साल चली और 300 से अधिक लोगों के डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा लेकर चंपत हो गई। अब पीड़ित अपने पैसे की वापसी के लिए चक्कर काट रहे हैं। एक दर्जन से अधिक लोग इसकी शिकायत लेकर एसपी आफिस पहुंचे, इनमें कुछ चिटफंड कंपनी के एजेंट भी थे। एफडी करवाई और मोटे ब्याज के साथ रुपये वापस कर दिए दरअसल एलजेसीसी नाम की यह चिटफंड कंपनी पांच से छह साल पहले मुरैना में आई। इस चिटफंड कंपनी की ऑफिस वनखंडी रोड पर, वनखंडी महादेव मंदिर के पास चली। लोगों को तीन साल में रकम दोगुनी करने का लालच दिया। साथ ही एफडी पर मोटा ब्याज देने का झांसा दिया। लोगों को फंसाने के लिए छह-छह महीने की एफडी करवाई और मोटे ब्याज के साथ रुपये वापस कर दिए। लोगों को फंसाने के लिए एजेंट रखे गए, जिन्हें भी मोटा मानदेय दिया गया। मोटे ब्याज और तीन साल में दोगुनी राशि के झांसे में लोग आए और 300 से अधिक लोगों ने डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा जमा कराए। कंपनी दफ्तर बंद कर गायब हो गई निवेशकों की रकम को साल 2024 में तीन साल होने थे, इसके बाद उन्हें दोगुनी राशि मिलने का भरोसा था, लेकिन इससे पहले ही यह कंपनी अपना दफ्तर बंद कर गायब हो गई। एजेंटाें के अनुसार चिटफंड कंपनी का मालिक समीर अग्रवाल है। इसके बारे में कोई नहीं जानता, बस इनका नाम सुना है। मुरैना में इस चिटफंड कंपनी का संचालक रामकुमार शर्मा उर्फ राजू सफर पुत्र पहलवान सिंह करता था, जो भिंड जिले का रहने वाला है, वह मुरैना चंबल कालोनी में रहता था। कंपनी के मैनेजर भगवान सिंह कुशवाह, अरविंद सिंह कुशवाह, राजेश कुशवाह और अरविंद त्रिपाठी थे, यह सभी लापता है। बिजली कंपनी के लाइनमैन बन गए एजेंट काशीबाबा कालोनी में रहने वाले प्रहलाद प्रजापति बिजली कंपनी में प्राइवेट लाइनमैन है, पैसा दोगुना के लालच में फंसे और करीब एक लाख रुपये खुद के जमा किए। इसके बाद मोटे कमीशन के लालल में एजेंट बन गए और 50 लोगों के आठ लाख रुपये भी मासिक किस्तों में चिटफंड कंपनी में जमा करवाए, जिन्हें लेकर चिटफंड कंपनी भाग गई। 90 लाख रुपये जमा करवाए इसी तरह अजय राठौर एजेंट बना, जिसने 100 से अधिक लोगों के 90 लाख रुपये जमा करवाए। अजय कहता है, कि जिनके पैसे जमा करवाए वह मुझसे मांगते हैं, कभी-कभी ऐसा तनाव होता है कि फांसी लगाने का मन हाेता है। अन्य एजेंट भगवती प्रजापति, विनोद रामपुरी, सतीश शाक्य, मनीष प्रजापति आदि ने भी लाखों रुपये लोगों के जमा करवाए थे।

पन्ना में हीरा कारोबार को नया मुकाम, पहली बार संयुक्त नीलामी से कारोबार में बढ़ोतरी की उम्मीद

पन्ना देश की एकमात्र मशीनीकृत हीरा खदान संचालित करने वाली कंपनी की मझगवां स्थित हीरा परियोजना और उथली खदानों से प्राप्त हीरों की नीलामी पहली बार एक साथ पन्ना में होगी। बहुप्रतीक्षित नीलामी 15 से 30 मार्च के बीच नव-निर्मित हीरा कार्यालय परिसर में हो सकती है। देश की एकमात्र मशीनीकृत हीरा खदान राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी- नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) की हीरा खदान देश की एकमात्र मशीनीकृत हीरा खदान है। यहां अत्याधुनिक अयस्क प्रसंस्करण संयंत्र है। संयुक्त नीलामी के लिए नवनिर्मित हीरा कार्यालय के हॉल को तैयार किया जा रहा है। एसी की व्यवस्था पूरी हो चुकी है। फर्नीचर और अन्य आवश्यक काम अंतिम चरण में है। तीन साल बंद रहा उत्पादन 1 जनवरी 2021 को पर्यावरणीय स्वीकृति समाप्त होने सेएमपीके मझगवां हीरा खदान से खनन बंद हो गया था। लगभग तीन वर्ष तक उत्पादन ठप रहा। मार्च 2024 में पुन: खनन शुरू किया गया। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से अनुमति मिलने के बाद एनएमडीसी को दो खनन पट्टों पर खनन की मंजूरी दी गई है।

मजदूरों के लिए बड़ा सवाल: 6 साल में 1% को ही 100 दिन का काम, कोविड में 10 लाख नाम हटने की बात विधानसभा में उजागर

भोपाल  प्रदेश में मनरेगा के तहत पिछले छह वर्षों में 1 प्रतिशत मजदूरों को भी पूरे 100 दिन का रोजगार नहीं मिल पाया। यह खुलासा विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में हुआ। जवाब में सामने आया कि बड़ी संख्या में मजदूर पंजीकृत होने के बावजूद सीमित परिवारों को ही 100 दिन का काम मिला। विधानसभा में दिए गए जवाब के अनुसार वर्ष 2021 में 1 करोड़ 70 लाख से अधिक पंजीकृत मजदूरों में से केवल 1 लाख 23 हजार परिवारों को ही 100 दिन का रोजगार मिला। वर्ष 2022 में यह संख्या घटकर 63 हजार 898 परिवार, वर्ष 2023 में 40 हजार 588, वर्ष 2024 में 30 हजार 420 और वर्ष 2025 में 32 हजार 560 परिवार रह गई। आंकड़ों के आधार पर विपक्ष ने आरोप लगाया कि छह वर्षों में 1 प्रतिशत मजदूरों को भी पूरा रोजगार नहीं मिल सका। 150 दिन रोजगार का प्रावधान भी अधूरा मनरेगा के तहत वनाधिकार पट्टाधारियों को वर्ष में 150 दिन रोजगार देने का प्रावधान है, लेकिन विधानसभा में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार वर्ष 2025-26 में 24 जिलों में एक भी मजदूर को 150 दिन का रोजगार नहीं मिला। चार जिलों में मात्र एक-एक परिवार को ही 150 दिन काम दिया गया। जानकारी में बताया गया कि सबसे अधिक अलीराजपुर जिले में 112 परिवारों को 150 दिन रोजगार मिला, जबकि छिंदवाड़ा में 28, धार में 21, मंडला में 17 और दमोह में 16 परिवारों को यह लाभ मिला। आदिवासी जिला झाबुआ में 150 दिन रोजगार का आंकड़ा शून्य रहा। मजदूरी की मांग बढ़ी, रोजगार नहीं विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार कोविड काल के बाद से मजदूरी की मांग लगातार बढ़ी, लेकिन रोजगार उपलब्धता उसी अनुपात में नहीं बढ़ सकी। बड़ी संख्या में परिवारों और श्रमिकों ने काम की मांग की, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति पर सवाल खड़े हुए हैं। जॉब कार्डधारी परिवार बढ़े, काम कम मिला प्रदेश में जॉब कार्डधारी परिवारों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन प्रति परिवार मिलने वाले कार्य दिवस घटे हैं। विपक्ष ने इसे सरकार की रोजगार नीति की विफलता बताते हुए कहा कि ग्रामीण मजदूरों को पर्याप्त काम नहीं मिल पाने के कारण पलायन की स्थिति बन रही है। ऐसे घटता गया 100 दिन रोजगार पाने वालों का आंकड़ा साल पंजीकृत मजदूर 100 दिन रोजगार पाने वाले परिवार 2021 1,70,19,681 1,23,624 2022 1,81,42,207 63,898 2023 1,69,07,207 40,588 2024 1,70,42,207 30,420 2025 1,86,57,080 32,560 150 दिन रोजगार का प्रावधान भी अधूरा मनरेगा के तहत वनाधिकार पट्टाधारियों को वर्ष में 150 दिन रोजगार देने का प्रावधान है, लेकिन 2025-26 में स्थिति कमजोर रही। जिलावार स्थिति (150 दिन रोजगार): 24 जिलों में — एक भी परिवार को नहीं मिला रोजगार 4 जिलों में — सिर्फ 1 परिवार को मिला रोजगार अलीराजपुर — 112 परिवार छिंदवाड़ा — 28 परिवार धार — 21 परिवार मंडला — 17 परिवार दमोह — 16 परिवार झाबुआ — शून्य विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में सरकार ने स्वीकार किया कि पिछले वर्षों में लाखों परिवारों और श्रमिकों के नाम जॉब कार्ड से हटाए गए, जिनमें सबसे ज्यादा नाम कोविड काल के दौरान काटे गए। कोरोना काल में सबसे ज्यादा नाम हटे विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में 10 लाख 46 हजार 786 परिवारों के 43 लाख 43 हजार 378 श्रमिकों के नाम जॉब कार्ड से हटाए गए। उस समय रोजगार की मांग सबसे अधिक थी, लेकिन बड़ी संख्या में मजदूर योजना से बाहर हो गए। वर्षवार जॉब कार्ड से हटाए गए नाम 2021: 10,46,786 परिवार — 43,43,378 श्रमिक 2022: 1,71,389 परिवार — 7,71,730 श्रमिक 2023: 5,28,579 परिवार — 20,24,552 श्रमिक 2024: 45,516 परिवार — 1,91,183 श्रमिक 2025: 25,684 परिवार — 1,23,524 श्रमिक रोजगार की मांग के बीच बाहर हुए मजदूर आंकड़ों के मुताबिक कोविड के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की मांग लगातार बढ़ी, लेकिन उसी दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम जॉब कार्ड से हटाए जाने से मजदूरों को काम पाने में कठिनाई हुई। विपक्ष का आरोप कांग्रसे ने आरोप लगाया कि जब ग्रामीण मजदूरों को सबसे ज्यादा रोजगार की जरूरत थी, उसी समय नाम काटे जाने से उन्हें काम से वंचित होना पड़ा और पलायन की स्थिति बनी। विधानसभा में सामने आए इन आंकड़ों के बाद मनरेगा के क्रियान्वयन और जॉब कार्ड सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। मजदूरी की मांग भी रही ऊंची वर्ष परिवार श्रमिक 2021-22 61,66,780 1,21,95,233 2022-23 53,13,454 92,99,519 2023-24 46,99,747 76,31,549 2024-25 44,79,776 69,86,086 2025-26 42,64,414 65,47,787  

पॉक्सो मामलों में MP तेज़, दिल्ली में बच्चों के अपराधों की जांच में 4.5 साल का वक्त

भोपाल  मध्य प्रदेश में पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दर्ज होने वाले गंभीर अपराधों के मामलों में पीड़ितों को न्याय मिलने की रफ्तार देश के कई बड़े राज्यों और महानगरों की तुलना में काफी बेहतर है। राज्यसभा में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मध्यप्रदेश के फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (FTSC) में इन मामलों के ट्रायल (विचारण) में लगने वाला औसत समय राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और गुजरात जैसे राज्यों के मुकाबले काफी कम है। एमपी में 380 दिन में फैसला, दिल्ली में साढ़े 4 साल विधि और न्याय मंत्रालय द्वारा जारी 2024 के आंकड़ों के अनुसार, मध्यप्रदेश में एक पॉक्सो मामले के निपटारे में औसतन 380 दिन का समय लगता है। इसकी तुलना यदि अन्य राज्यों से की जाए, तो तस्वीर काफी चौंकाने वाली है।     दिल्ली: यहां पॉक्सो केस के ट्रायल में औसतन 1639.5 दिन (लगभग 4.5 साल) लग रहे हैं।     गुजरात: यहां न्याय मिलने में औसतन 1292.5 दिन का समय लगता है।     उत्तर प्रदेश: यहां भी ट्रायल में औसतन 861 दिन लगते हैं, जो एमपी से दोगुने से भी अधिक है। देशभर में 2.24 लाख से ज्यादा मामले लंबित मंत्रालय ने बताया कि 31 दिसंबर 2025 तक देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पॉक्सो अधिनियम के तहत कुल 2,24,572 मामले लंबित थे। इन मामलों के त्वरित निपटान के लिए वर्तमान में देश भर में 774 फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय कार्य कर रहे हैं, जिनमें 398 विशेष तौर पर केवल पॉक्सो (ई-पॉक्सो) कोर्ट हैं। चाइल्ड फ्रेंडली न्याय प्रणाली पर सरकार का फोकस सरकार पीड़ितों को सुविधाजनक माहौल देने के लिए न्यायालय परिसरों के भीतर सुभेद्य साक्षी निक्षेपण केन्द्रों (VWDC) के उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है। इसके माध्यम से बच्चों के लिए डरावने न्यायिक वातावरण के बजाय एक ‘चाइल्ड फ्रेंडली’ माहौल तैयार किया जा रहा है। इसके लिए अब तक 10,000 से अधिक प्रतिभागियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। कानून व्यवस्था राज्य की जिम्मेदार मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘पुलिस’ और ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ राज्य के विषय हैं। इसलिए, कानून व्यवस्था बनाए रखने, नागरिकों की सुरक्षा और अपराधों की जांच व अभियोजन की मुख्य जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। केंद्र सरकार महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और इसके लिए कई कदम उठा रही है। 2.45 मामले अभी भी पेंडिंग न्याय में तेजी लाने के लिए केंद्र सरकार ने फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों और विशेष POCSO अदालतों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है। 31 दिसंबर 2025 तक, देश भर में 774 FTSCs और 398 e-POCSO अदालतें काम कर रही हैं। इन अदालतों ने 3.66 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया है, जबकि लगभग 2.45 लाख मामले अभी भी लंबित हैं। 22 राज्यों में 880 फास्ट ट्रैक अदालत इसके अलावा, 22 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 880 फास्ट-ट्रैक अदालतें भी चल रही हैं। ये अदालतें गंभीर अपराधों, महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों, दिव्यांगों और लंबी बीमारियों से पीड़ित लोगों से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई करती हैं। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि मध्य प्रदेश में इन 880 अदालतों में से एक भी फास्ट-ट्रैक अदालत कार्यरत नहीं है। वहीं, उत्तर प्रदेश में 373 और महाराष्ट्र में 102 ऐसी अदालतें हैं। मध्य प्रदेश में 67 फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतें, जिनमें POCSO अदालतें भी शामिल हैं, कार्यरत हैं। अब ट्रायल को भी समझ लीजिए     ट्रायल का औसत समय: विशेष रूप से उस अवधि को दर्शाता है जो अदालत में ‘ट्रायल’ (विचारण) की प्रक्रिया शुरू होने से लेकर अंतिम फैसले तक लगती है।     ट्रायल की शुरुआत: कानूनी प्रक्रिया में ट्रायल तब शुरू माना जाता है, जब पुलिस अपनी जांच पूरी कर अदालत में आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल कर देती है और अदालत उस पर संज्ञान लेकर कार्यवाही शुरू करती है।     अवधि की गणना: दस्तावेजों में ‘औसत विचारण समय’ की गणना उन दिनों के आधार पर की गई है जो फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (FTSC) और अनन्य पॉक्सो (e-POCSO) न्यायालयों में मामले की सुनवाई चलने और फैसला आने के बीच व्यतीत हुए हैं।     केस दर्ज होने से अंतर: आमतौर पर केस दर्ज होने (FIR) और विचारण (Trial) शुरू होने के बीच ‘जांच’ का समय होता है। जो 380 दिन (मध्य प्रदेश के लिए) का आंकड़ा दिया गया है, वह मुख्य रूप से अदालती कार्यवाही (Trial) में लगने वाला समय है।     त्वरित निपटान का लक्ष्य: इन विशेष न्यायालयों का उद्देश्य ही यह है कि विचारण की इस अवधि को कम किया जाए ताकि पीड़ितों को वर्षों तक इंतजार न करना पड़े। मंत्री बोले- जितना जल्दी न्याय मिलेगा, तभी हम कहेंगे न्याय हुआ पॉक्सो के मामलों के जल्द निपटारे पर मप्र के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने कहा- न्याय जितने जल्दी मिले, तभी हम कह सकते हैं कि न्याय हुआ। अन्यथा जितना देरी होगी उतना अन्याय की दिशा में हम बढे़ेंगे। मप्र के लिए हमें यह संतोष है कि जो शिकायतें हुई उनका जितना जल्दी हो सके न्याय दिलाने का प्रयास किया है।

होटल रूम की गुत्थी: अंदर कौन था, कैसे हुई छात्रा की मौत? जांच में कई चौंकाने वाले मोड़

शिवपुरी फिजिकल थानांतर्गत खिन्नी नाके पर स्थित होटल युवराज में सोमवार को एक छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला दो दिन बाद भी अबूझ पहेली बना हुआ है। फिलहाल पुलिस भी मामले में कुछ स्पष्ट रूप से बताने को तैयार नहीं है। फिलहाल मर्ग कायम कर मामले की विवेचना की बात कही जा रही है। उल्लेखनीय है कि 16 फरवरी को सेसई निवासी नैनसी पुत्र राजू राठौर उम्र 20 साल सुबह घर से कॉलेज का फार्म भरने जाने की बात कह कर गांव के अंकुश रावत के साथ खिन्नी नाके के पास स्थित होटल युवराज में पहुंची थी। जहां उसकी संदिग्ध हालातों में मौत हो गई। फिलहाल मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के उपरांत ही कुछ बता पाने की बात कह रही है। पुलिस ने अंकुश रावत नाम के जिस युवक को हिरासत में लिया था उसे भी छोड़ दिया है। इस मामले में बुधवार को जब होटल युवराज के स्टाफ से घटना के संबंध में जानकारी जुटाने का प्रयास किया तो स्टाफ ने बताया कि सोमवार को लड़का-लड़की दोनों एक साथ कार में सवार होकर सुबह करीब 11:15 बजे होटल पहुंचे थे। उन्होंने कमरा नंबर 308 बुक किया। लगभग दो घंटे बाद लड़का, लड़की को बेहोशी की हालत में लेकर नीचे आया और बताया कि अचानक इसकी तबीयत खराब हो गई है। होटल स्टाफ के अनुसार लड़के के कहने पर उन्होंने मदद करके लड़की को कार में रखवाया और वह चला गया। स्टाफ की मानें तो उन्हें प्रथम दृष्टया कमरे में फांसी जैसा कुछ नजर नहीं आया। इसके बाद पुलिस ने कमरे को सील कर दिया है। कमरे की चाबी टीआई मेडम के पास है। अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आई, लड़का फांसी लगाना बता रहा टीआईइस मामले में फिजिकल थाना प्रभारी टीआई नम्रता भदौरिया का कहना है कि लड़के ने प्रारंभिक पूछताछ में यह बताया कि, लड़की उस पर शादी का दबाव बना रही थी, उसने फिलहाल शादी करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि, वह शादी तो घर वालों की मर्जी से ही करेगा। इसके बाद लड़की ने फांसी लगा ली। हालांकि लड़के की कमरे में मौजूदगी के दौरान लड़की द्वारा फांसी लगा पाने के संबंध में टीआई का कहना है कि लड़के के अनुसार वह जब बाहर चला गया था, तब लड़की ने अपने दुपट्टे से फांसी लगाई, जबकि होटल के स्टाफ की मानें तो लड़का-लड़की जब कमरे में गए उसके बाद कोई भी होटल से बाहर नहीं निकला।

उमरिया स्कूल में छात्राओं के ‘झूमने’ पर अफरा-तफरी, मेडिकल रिपोर्ट सामान्य फिर भी अंधविश्वास हावी

नौरोजाबाद उमरिया जिले के करकेली जनपद अंतर्गत कल्दा गांव मे स्थित शासकीय हाई स्कूल की चार छात्राएं अचानक झूमने लगीं। छात्राओं के झूमने का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में विद्यालय में अध्ययनरत कुछ बच्चियों के कथित तौर पर “भूत लगने” की बात सामने आई है, जिसे लेकर पूरे क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है। हालांकि सीएससी पाली के डा पवन कुमार दीपांक का कहना है कि उन्होंने बच्चियों की जांच की है और वे पूरी तरह से सामान्य हैं। उनका कहना है कि उनसे लोग इस मामले को भूत-प्रेत का बता रहे थे पर इस तरह की बातों को मेडिकल साइंस में किसी भी तरह की मान्यता नहीं है। कराई गई झाड़फूंक बताया जा रहा है कि बच्चियों की तबीयत अचानक बिगड़ने और अजीब व्यवहार करने की बात सामने आने के बाद ग्रामीणों ने इसे अंधविश्वास से जोड़ दिया। इसके बाद गांव के पंडा-पुजारी द्वारा झाड़-फूंक की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। तेजी से वायरल हो रहा वीडियो जानकारी के अनुसार बच्चियों को गांव के ही प्रसिद्ध धार्मिक स्थल महोबादादर मंदिर ले जाया गया, जहां कथित रूप से उनका झाड़-फूंक के जरिए उपचार किया जा रहा है। वीडियो आने के बाद दौड़े अधिकारी इस पूरी घटना का वीडियो किसी ग्रामीण द्वारा बनाकर इंटरनेट मीडिया पर अपलोड कर दिया गया, जिसके बाद यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया। यह भी पढ़ें- थाने पहुंची महिला बोली- पहले पति ने बेचा, खरीदने वालों ने जहां सगाई की वहां से भी अपहरण कर लिया शिक्षा विभाग में चर्चा शुरू वीडियो बहुप्रसारित होने के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासनिक स्तर पर भी मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। और पाली अनुविभागीय अधिकारी मीनाक्षी इंगले की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा है कि बीईओ सरिता जैन को उन्होंने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी आरएस मरावी का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।  

लोकायुक्त की कार्रवाईः दूसरी किस्त लेते ही पटवारी गिरफ्तार, जांच आगे बढ़ी

मंदसौर मध्यप्रदेश में भ्रष्ट अधिकारी कर्मचारियों के खिलाफ लोकायुक्त की कार्रवाई लगातार जारी है। इसके बाद भी भ्रष्टाचार के मामले कम नहीं हो रहे हैं। ताजा मामला प्रदेश के मंदसौर जिले का है जहां पटवारी को रिश्वत लेते लोकायुक्त पुलिस ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। समाचार के लिखे जाने तक आरोपी पटवारी के खिलाफ कार्रवाई जारी थी। सुवासरा तहसील का पटवारी हरीश पाटीदार दरअसल मामला मंदसौर जिले के सुवासरा तहसील का है जहा पदस्थ पटवारी हरीश पाटीदार रिश्वत लेते हुए पकड़ाया है। उसने भूमि के नामांतरण के लिए 40 हजार की रिश्वत मांगी थी। इसकी शिकायत पीड़ित ने लोकायुक्त से की थी। उज्जैन लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई शिकायत की पुष्टि के बाद दूसरी किस्त में 30 हजार रुपए लेते हुए लोकायुक्त की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई उज्जैन लोकायुक्त पुलिस ने की है। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं तहत कार्रवाई की जा रही है।

87.21 करोड़ लागत के 41 विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश सरकार सभी वर्गों के कल्याण के लिए दृढ़संकल्पित होकर कार्य कर रहे है। मध्यप्रदेश विधानसभा में 4 लाख 38 हजार करोड़ रुपए से अधिक का ऐतिहासिक बजट प्रस्तुत किया गया है। कृषि कल्याण वर्ष में प्रदेश के किसानों के लिए एक लाख करोड़ से अधिक राशि का प्रावधान किसान हितैषी योजनाओं के लिये किया गया है। प्रदेश सरकार का किसानों के कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता का यह प्रमाण है। उन्होंने कहा गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी कल्याण के साथ हम प्रदेश को प्रगति पथ पर आगे बढ़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि उत्पादन में लंबे समय से अग्रणी है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने पशुपालन और दूध उत्पादन बढ़ाने का संकल्प लिया है। डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना से प्रदेश में दूध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को किसान कल्याण वर्ष के उपलक्ष में ग्वालियर जिले में भगवान जगन्नाथ की पुण्य भूमि ग्राम कुलैथ में आयोजित हुए विशाल किसान सम्मेलन में किसान भाईयों को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने 87 करोड़ 21 लाख रुपए से अधिक लागत के 41 विकास कार्यों के लोकार्पण और भूमि-पूजन किया। साथ ही कुलैथ क्षेत्र के विकास के लिये बड़ी-बड़ी सौगातों की घोषणा भी की। उन्होंने किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी देने के लिये लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। किसानों की पट्टों वाली जमीन की अपने खर्चे पर सरकार कराएगी रजिस्ट्री मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की जमीन के पट्टों की रजिस्ट्री का पूरा खर्च सरकार उठाएगी, इसके लिए बजट में पर्याप्ट धनराशि का प्रावधान किया गया है। इससे किसानों को बैंकों से योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। उन्होंने कहा किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए सरकार द्वारा हर संभव कार्य किए जा रहे हैं। प्रदेश के किसानों को सोलर पंप वितरित कर उन्हें बिजली उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। बुंदेलखंड की केन-बेतवा लिंक परियोजना का लाभ चंबल क्षेत्र के किसानों को भी मिलने वाला है। सिंचाई की सुविधा मिलने से यहां खेतों में फसलें लहलहाएंगी। सुपोषण के लिये सरकार स्कूली बच्चों को नि:शुल्क दूध उपलब्ध कराएगी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में पहली से 8वीं कक्षा तक के बच्चों के सुपोषण के लिये सरकार नि:शुल्क दूध उपलब्ध कराएगी। इस साल के बजट में यह योजना प्रस्तावित की गई है। साथ ही बजट में लाड़ली बहनों के लिए 23 हजार करोड़ से अधिक राशि आवंटित की गई है। कन्हैया लोकगीतों का लिया आनंद और पुष्पवर्षा कर किया अभिनंदन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान कृष्ण का स्मरण करने से जीवन की अनेक कठिनाइयां खत्म हो जाती हैं। बाबा महाकाल ने सभी के जीवन का समय निश्चित किया है, इसलिए समाज कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। इस अवसर पर स्थानीय ग्रामीण पारंपरिक लोक गायकों द्वारा प्रस्तुत कन्हैया लोकगीतों का आनंद भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लिया। उन्होंने मनमोहक कन्हैया लोक गीत प्रस्तुत करने वाले लोक गायकों का पुष्प वर्षा कर अभिनंदन और उत्साहवर्धन किया। लोक गायन में भाग लेने वाली सभी 18 टीमों को 5 – 5 हजार रुपए का पुरस्कार देने की घोषणा की। बैलगाड़ी दौड़ में शामिल लोगों का किया उत्साहवर्धन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान सम्मेलन स्थल के समीप स्थानीय किसानों द्वारा आयोजित पारंपरिक बैलगाड़ी दौड़ भी देखी। उन्होंने बैलगाड़ी दौड़ में शामिल हुईं 28 बैलगाड़ियों को प्रोत्साहन स्वरूप 5-5 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान करने की घोषणा की। साथ ही बैलगाड़ी दौड़ में प्रथम और द्वितीय पुरस्कार के लिए क्रमश: 21 व 11 हजार रुपए प्रदान करने की घोषणा भी की। रोड-शो में स्थानीय निवासियों ने पुष्प वर्षा कर किया अभिनंदन ग्वालियर के कुलैथ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव जब हैलीपेड से रथ पर सवार होकर रोड-शो करते हुए आगे बढ़े तो मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में मौजूद जनसमुदाय द्वारा उनका पुष्प वर्षा कर भव्य एवं आत्मीय स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी जनता का अभिवादन किया। कुलैथ क्षेत्र के लिये की बड़ी-बड़ी सौगातों की घोषणा भगवान जगन्नाथ की पुण्य भूमि कुलैथ में आयोजित विशाल किसान सम्मेलन में शामिल होने आए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुलैथ क्षेत्र को विकास कार्यों की बड़ी-बड़ी सौगातें देने की घोषणा की। इनमें डंडे वाले बाबा मंदिर तक एक किलोमीटर लम्बी सड़क व ट्रांसफार्मर, भगवान जगन्नाथ मंदिर के दर्शन के लिये आने वाले श्रृद्धालुओं को ठहरने के लिये सामुदायिक भवन, युवाओं के लिये खेल मैदान व कुलैथ क्षेत्र में उद्योग की स्थापना शामिल है। साथ ही ग्राम पंचायत सुसैरा, ब्रह्मपुरा, साईंपुरा व ग्राम पंचायत सोजना के बंजारे का पुरा को आबादी क्षेत्र बनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस क्षेत्र की महेश्वरा पत्थर खदान को फिर से चालू कराने के लिये आशवस्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ग्वालियर क्षेत्र के लिये हमेशा सौगातें लेकर आते हैं – सांसद  कुशवाह सांसद  भारत सिंह कुशवाह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ग्वालियर क्षेत्र के लिये हमेशा बड़ी-बड़ी सौगातें लेकर आते हैं। उन्होंने आज भी 87 करोड़ से अधिक लागत के विकास कार्यों की सौगातें दी हैं। साथ ही विधानसभा में प्रस्तुत हुए बजट में विकास के लिये लगभग 4 लाख करोड़ से अधिक धनराशि का प्रावधान किया है। सांसद  कुशवाह ने कहा कि खुशी की बात है कि ग्वालियर संसदीय क्षेत्र में पुल-पुलियाओं व सड़कों के निर्माण के लिये भी लगभग 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। उन्होंने इसके लिये मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रति क्षेत्रीय जनता की ओर से धन्यवाद व्यक्त किया। हितलाभ वितरण एवं प्रदर्शनी का अवलोकन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसान सम्मेलन में सरकार की किसान हितैषी व अन्य योजनाओं के तहत मुख्य मंच से प्रतीक स्वरूप हितलाभ भी वितरित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर लगी कृषि प्रदर्शनी में लगाए गए 16 स्टॉलों का भ्रमण कर विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं द्वारा प्रदर्शित योजनाओं, नवाचारों एवं तकनीकी जानकारी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा विभागीय योजनाओं के प्रचार-प्रसार के साथ फूलों की खेती एवं ड्रिप स्प्रिंकलर का लाइव डेमो प्रस्तुत किया गया। … Read more

रोड सेफ्टी पर फोकस, हादसे रोकने के लिए चल रहे विशेष मैनेजमेंट कोर्स

भोपाल  पुलिस परिवहन शोध संस्थान (पीटीआरआई) द्वारा मध्यप्रदेश में सड़क पर होने वाली वाहन दुर्घटना एवं दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु की संख्या में कमी लाने के उद्देश्य से लगातार सड़क सुरक्षा प्रबंधन कोर्स हो रहे हैं। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री विवेक शर्मा के निर्देशन पर पीटीआरआई में अतिरिक्‍त पुलिस अधीक्षक से उप निरीक्षक स्तर के अधिकारियों को सड़क सुरक्षा प्रबंधन कोर्स के माध्यम से दो दिवसीय प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य सड़क उपयोगकर्ताओं को एक सुरक्षित सड़क नेटवर्क उपलब्ध कराने, पदयात्रियों तथा सायकिल, वाहन चालकों को प्राथमिकता और भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं की संख्‍या एवं सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु की संख्‍या में कमी लाना है । प्रशिक्षण सत्र के शुभारंभ पर उप पुलिस महानिरीक्षक पीटीआरआई श्री टी.के. विद्यार्थी ने सड़क दुर्घटनाओं की भयावहता को प्रशिक्षणार्थियों के सम्मुख रखा। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा को मूलभूत यातायात सेवा में अविभाज्य अंग के रूप में मान्यता देना है। उनके द्वारा यातायात प्रवर्तन को दृष्टिगत रखते हुये ई-इनफोर्समेंट पर जोर दिया गया। साथ ही ओवर स्‍पीडिंग से निदान के लिये इन्‍टरसेप्‍टर व्‍हीकल की उपयोगिता को बढ़ाए जाने का अनुरोध किया गया। वर्तमान में भारत सरकार की योजनाओं राहवीर एवं केशलैस उपचार के साथ गोल्‍डर ऑवर की अवधारणा से प्रशिक्षुओं को अवगत कराया। इस दौरान पीटीआरआई के सहायक पुलिस महानिरीक्षक श्री अभिजीत कुमार रंजन, श्री राजेश मिश्रा, उपुअ श्री मनोज खत्री एवं प्रशिक्षण टीम के अधिकारी उपस्थित थे। कोर्स के समापन के दौरान प्रशिक्षणार्थियों को पीटीआरआई द्वारा प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर प्रमाण-पत्र प्रदाय किया गया।

शौक बना अपराध: पोर्न इंडस्ट्री में नाम कमाने के लिए पति ने किया पत्नी का सेक्स वीडियो वायरल

रीवा पोर्न स्टार बनने की चाहत ने एक पति को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। आरोपी ने अपनी ही पत्नी के साथ सेक्स का पोर्न वीडियो बनाया और उसे वायरल कर दिया। बताया गया आरोपी ने अपनी नवविवाहिता पत्नी के साथ संबंध बनाते हुए वीडियो रिकॉर्ड किया था। इसके बाद इन अश्लील वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड किया था। 13 मिनट की क्लिप देखकर इंटरनेट पर सनसनी मच गई थी। वहीं पीड़िता ने इसकी शिकायत थाने में की थी। जिसके आधार पर पुलिस ने आरोपी को दबोच लिया है। यह पूरा मामला मध्य प्रदेश के रीवा जिले का है। जहां दहेज लोभी पति शिवम साहू ने इंसानियत की सारी सीमाएं पार कर दी। उसने अपनी पत्नी को पहले दहेज के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। बात नहीं बनी तो उसने अपनी पत्नी का दिल जीता और भरोसे में लेकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। सेक्स के दौरान के पलों को अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया। इसके बाद इस अश्लील क्लिप को फेसबुक, इंस्टाग्राम पर वायरल कर दिया था। पीड़िता ने थाने में शिकायत कर बताई पूरी कहानी सोशल मीडिया पर 13 मिनट का वीडियो वायरल होते ही सनसनी मच गई। जब पीड़िता और उसे घर वालों ने यह वीडियो देखा तो उनके भी पैरों तले जमीन खिस गई। कुछ समझ नहीं आ रहा था। इसके बाद उन्होंने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता के मुताबिक, शादी से पहले ही उसके ससुराल वाले दहेज के लिए दबाव बना रहे थे। परिवार ने असमर्थता जताई थी। जिसके बाद विवाह सम्पन्न हुआ और उसे ससुराल विदा कर दिया गया। ससुराल पहुंचने के बाद पति शिवम साहू दहेज के लिए लगातार शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था। पीड़िता ने शिकायत में बताया था कि जब शिवम को सफलता नहीं मिली तो उसने बहला फुसला कर संबंध बनाए और निजी पलों का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। इसके कुछ समय बाद एक बार फिर दहेज की मांग की। जब डिमांड पूरी नहीं हुई तो उसने वीडियो को वायरल कर दिया। आरोपी शिवम साहू ट्रक ड्राइवर है। फिलहाल पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

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