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कर्ज पर चल रही मोहन सरकार सरकार? एक हफ्ते में दूसरी बार 5 हजार करोड़ का कर्ज

Is the Mohan Yadav government running on debt? This is the second time in a week that the government has incurred a debt of Rs 5,000 crore. MP Government : विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने और अनुपूरक बजट के पहले मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने बजट सत्र के पहले बाजार से 5 हजार करोड़ का नया कर्ज लिया है। पिछले एक सप्ताह में सरकार ने दूसरी बार कर्ज लिया है। इससे पहले 4 फरवरी को ही सरकार ने 5300 करोड़ का कर्ज लिया था। सरकार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से तीन किस्तों में ये कर्ज ले रही है। इस वित्तीय वर्ष में सरकार द्वारा अब तक 67,300 करोड़ रुपए कर्ज ले चुकी है। उल्लेखनीय है कि, बजट सत्र 16 फरवरी से शुरु हो रहा है और 18 एमपी का बजट पेश होगा। बता दें कि, एक हफ्ते में लिया गया ये दूसरा कर्ज है, जो सरकार ने तीन किस्तों में लिया है। इसका भुगतान सरकार को आज यानी बुधवार को होने वाला है। इसके बाद चालू वित्त वर्ष में लिए गए कुल कर्ज की संख्या 36 हो गई है और कर्ज का आंकड़ा 67300 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। अलग-अलग किस्तों में लिया गया कर्जजनवरी 2026 तक सरकार ने 30 कर्ज लिए थे, जो फरवरी के पहले 10 दिनों में लिए गए कुल 6 कर्ज मिलाकर 36 तक पहुंच गया है। 3 फरवरी को 3 नए कर्ज लिए जाने के बाद आंकड़ा 33 तक पहुंचा था और आज फिर तीन अलग-अलग किस्तों में कर्ज लिया गया है। इसलिए लिया गया कर्ज10 फरवरी को लिए गए दो-दो हजार करोड़ के दोनों ही कर्ज 21 साल और 16 साल की अवधि के हैं, जबकि 1000 करोड़ रुपए का तीसरा कर्ज 8 साल की अवधि के लिए लिया गया है, जिसका भुगतान छमाही ब्याज के रूप में किया जाएगा। यहां गौरतलब है कि, मंगलवार को मोहन सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित बजट का प्रजेंटेशन कैबिनेट के सामने किया है, जिसे 18 फरवरी को विधानसभा में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा पेश करेंगे। एग्रीकल्चर स्कीम, सिंचाई और पॉवर प्रोजेक्ट तथा कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के स्थायी निर्माण के नाम पर यह कर्ज लिए गए हैं। 2025-26 में महीने दर महीने ऐसे लिया कर्ज

प्रदेश में संचालित आयुष विभाग अंतर्गत समस्त गतिविधियों से कराया अवगत

भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने, मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  प्रताप राव जाधव से भेंट कर, प्रदेश में संचालित आयुष विभाग अंतर्गत समस्त गतिविधियों से अवगत कराया। इस दौरान मंत्री  परमार ने, केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई घोषणा के तारतम्य में, प्रदेश में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) की उज्जैन में स्थापना के लिए केंद्रीय आयुष मंत्री से अनुरोध किया। प्रदेश के लिए दो नवीन आयुर्वेद महाविद्यालयों एवं एक होम्योपैथी महाविद्यालय की स्थापना, प्रदेश में वैलनेस टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पांच अन्य केंद्रों की स्थापना एवं टीकमगढ़ में 50 बिस्तरीय चिकित्सालय की स्थापना के लिए राष्ट्रीय आयुष मिशन अंतर्गत वित्तीय सहायता के लिए भी आग्रह किया। इस दौरान केंद्रीय आयुष मंत्री  जाधव ने मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय आयुष मिशन अंतर्गत हुई गतिविधियों के लिए भूरी-भूरी प्रशंसा एवं सराहना की। मंत्री  परमार के नेतृत्व में पहुंची आयुष विभाग की टीम ने, केंद्रीय मंत्री  जाधव से प्रदेश में आयुष अन्तर्गत संचालित गतिविधियों के अवलोकन के लिए आमंत्रित भी किया। आयुष मंत्रालय भारत सरकार के सचिव वैद्य  राजेश कोटेचा ने, प्रदेश को अधिकतम वित्तीय सहायता प्रदान किए जाने के लिए आश्वस्त भी किया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव आयुष  शोभित जैन भी उपस्थित थे। ज्ञातव्य है कि पिछले दो वर्ष में प्रदेश सरकार द्वारा 8 नवीन आयुर्वेद महाविद्यालय स्थापित किया जा रहे हैं, इनमें से 7 आयुर्वेद महाविद्यालयों का वित्तीय पोषण, भारत सरकार अंतर्गत राष्ट्रीय आयुष मिशन से प्राप्त हुआ है। इसके साथ प्रदेश के लिए खजुराहो में योग संस्थान स्थापित किए जाने और नेशनल मेडिसिनल प्लांट बोर्ड के अंतर्गत प्रदेश के एकलव्य स्कूलों में पोषण वाटिका स्थापित किए जाने के लिए भी केंद्रीय वित्तीय सहायता का अनुरोध किया गया।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डबरा की घटना में मृतक के परिजन को 4 लाख रुपए एवं गंभीर तीन घायलों को एक–एक लाख रुपए देने के दिये निर्देश

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को ग्वालियर जिले के डबरा में हुई दुर्घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए दुर्घटना में एक मृतक के परिजन को 4 लाख रुपए एवं गंभीर रूप से घायल तीन लोगों को एक – एक लाख रुपए की सहायता देने के निर्देश दिये है। साथ ही गंभीर सभी घायलों का नि:शुल्क उपचार कराने के निर्देश भी दिए। घटना की सूचना मिलते ही कलेक्टर मती रुचिका चौहान ग्वालियर स्थित एप्पल अस्पताल एवं जयारोग्य चिकित्सालय के ट्रॉमा सेंटर पहुँचीं और घटना में घायल मरीजों का हालचाल जाना। उन्होंने चिकित्सकों को निर्देशित किया कि घायलों का उपचार सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ किया जाए। कलेक्टर मती चौहान ने इसके पश्चात डबरा पहुंचकर नवग्रह शक्ति पीठ पर आयोजित कार्यक्रमों की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया एवं अधिकारियों को आवश्यक पुख्ता प्रबंध करने के दिशा-निर्देश दिए।  

MP विधायक 4 जनवरी से अंडरग्राउंड, मूसा गैंग का डर बताया, मऊगंज पुलिस ने खारिज किया

 मऊगंज मऊगंज से भाजपा विधायक पिछले एक महीने से छिप कर बैठे हैं. विधायक ने सोशल मीडिया में इसकी वजह मूसा गैंग का खतरा होना बताया है. जबकि पुलिस का दावा है कि जिले में इस तरह का कोई गैंग नहीं है. उधर भाजपा सांसद ने विधायक के ‘अवकाश’ पर होने की बात कह कर राजनीतिक गलियारों में नई बहस का मुद्दा दे दिया है. आखिर बार भाजपा विधायक 4 जनवरी 2026 को विवादित जमीन के मुद्दे को लेकर धरने पर बैठे थे. विधायक को जमकर विरोध का सामना करना पड़ा. उग्र भीड़ के आगे विधायक जान बचाकर भागने को मजबूर हो गए. इस जमीन का प्रकरण न्यायालय में चल रहा है. मौके पर मौजूद भारी पुलिस बल ने किसी कदर विधायक को भीड़ से बचा कर निकला. इसके बाद से भाजपा विधायक प्रदीप पटेल अचानक गायब को गए.  हाल ही में विधायक ने एक बयान जारी किया है. उन्होंने अपनी जान को खतरा बताया है, इसलिए वह क्षेत्र से दूर हैं. विधायक ने कहा है कि उन्हें मूसा गैंग से जान का खतरा है. जबकि एसपी दिलीप सोनी ने इस बयान को सिरे से खारिज कर दिया है. उनका दावा है कि जिले में कोई भी इस तरह की गैंग नहीं है.  उधर, इस मुद्दे विधायक की पार्टी के ही सांसद जनार्दन मिश्रा ने विधायक के अवकाश में होने की बात कह कर राजनीतिक गलियारों में नई बहस बना दी है. सांसद ने कहा कि हर किसी को काम से आराम पाने के लिए अवकाश लेना चाहिए, विधायक ने भी लिया है. विधायक के गायब होने की खबर से क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है. स्थानीय विधायक के गायब होने की असल वजह मूसा गैंग नहीं, बल्कि निजी जमीन का विवाद मान रहे है. सत्ताधारी दल के विधायक ने इस मामले में भूस्वामी के खिलाफ जिंदा जलाकर मारने की शिकायत दर्ज कराई थी. पुलिस ने कई के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की थी, बावजूद इसके विधायक अभी भी नाराज हैं.  

मध्‍यप्रदेश पुलिस की ऑपरेशन मुस्कान के तहत प्रभावी कार्यवाही

भोपाल. मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा महिला एवं बाल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संचालित ऑपरेशन मुस्कान के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों में अपहृत एवं गुमशुदा नाबालिग बालक-बालिकाओं की खोज हेतु निरंतर, समन्वित एवं तकनीकी रूप से सशक्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में विगत 5 दिन में पुलिस टीम ने प्रदेश के विभिन्‍न जिलों से27 नाबालिग/गुमशुदा बालक-बालिकाओं को सकुशल दस्तयाब कर परिजनों के सुपुर्द किया है। शिवपुरी जिले में ऑपरेशन मुस्कान के अंतर्गत कुल 05 नाबालिग बालक-बालिकाओं की दस्तयाबी की गई है। कोतवाली थाना क्षेत्र में अपहृत नाबालिग बालक को मात्र 10 घंटे के भीतर सुरक्षित दस्तयाब कर परिजनों को सुपुर्द किया गया। वहीं थाना तेंदुआपुलिस ने दो नाबालिक बालिका एवं थाना सुभाषपुरा पुलिस ने एक अपहृत नाबालिग बालिका को जयपुर, राजस्थान से सकुशल दस्तयाब कर आरोपी को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में पेश किया। इसके अतिरिक्त थाना नरवर पुलिस ने भी अपहृत नाबालिग बालिका को सुरक्षित दस्तयाबकर परिजनों के सुपुर्द किया। सीहोर जिले में 04 नाबालिग बालिकाओं की दस्तयाबी की गई है। थाना आष्टा, जावर, रेहटीएवं भैरूंदापुलिस द्वारा गठित टीमों ने तकनीकी सहायता से नाबालिग बालिकाओं को सुरक्षित दस्तयाब कर परिजनों को सुपुर्द किया, साथ ही अपहरण के मामलों में आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय पेश किया गया। सीधी थाना कोतवाली क्षेत्र में चीता मोबाइल टीम द्वारा 03 वर्षीय मासूम बच्ची को सुरक्षित परिजनों को सौंपा गया, वहीं थाना मझौली पुलिस द्वारा महाराष्ट्र एवं गुजरात से दो नाबालिग बालिकाओं को दस्तयाब कर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। विदिशा जिले में ऑपरेशन मुस्कान के अंतर्गत कुल 02 नाबालिग बालिकाओं कोदस्तयाब किया गया। शमशाबाद एवं गंजबासौदा थाना पुलिस द्वारा घर से नाराज होकर चली गई नाबालिग बालिकाओं को त्वरित, संवेदनशील एवं मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सकुशल दस्तयाब कर परिजनों से मिलाया। अशोकनगर जिले में थाना ईसागढ़ पुलिस द्वारा दो अलग अलग कार्रवाई करते हुए दो नाबालिग बालिकाओं को सकुशल दस्तयाब कर परिजनों से मिलाया। बैतूल जिले में ऑपरेशन मुस्कान के अंतर्गत 02 नाबालिग बालिकाओं की दस्तयाबी की गई है। थाना कोतवाली बैतूल पुलिस द्वारा दोनों नाबालिग बालिकाओं को सुरक्षित दस्तयाब कर उनके परिजनों को सुपुर्द किया गया। उज्जैन जिले में ऑपरेशन मुस्कान के अंतर्गत थाना भाटपचलाना पुलिस द्वारा राजस्थान के सांवलियाजी से दो बालिकाओं को सकुशल दस्तयाब कर अपहरण में प्रयुक्त वाहन जप्त किया गया तथा 02 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। कटनी जिले में ऑपरेशन मुस्कान के तहत कुल 02 नाबालिग बालिकाओं की दस्तयाबी की गई है। थाना बरही पुलिस द्वारा अलग-अलग क्षेत्रों से दोनों बालिकाओं को सकुशल दस्तयाब किया गया। उमरिया थाना मानपुर पुलिस टीम ने लगभग 1200 किलोमीटर दूर सिलवासा (दादर एवं नगर हवेली) से 15 वर्षीय गुमशुदा बालिका को तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर सकुशल दस्तयाबकिया। मंदसौर थाना दलौदा पुलिस ने150 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की जांच कर लगभग 700 किलोमीटर दूर ग्रेटर नोएडा, उत्तरप्रदेश से 16 वर्षीय अपहृत नाबालिग बालिका को आरोपी के कब्जे से सकुशल दस्तयाबकर आरोपी को गिरफ्तार किया है। इसी प्रकार दतिया, देवास एवं बड़वानी पुलिस ने 01-01अपहृत नाबालिग बालिका को सुरक्षित बरामद कर परिजनों के सुपुर्द किया है। ऑपरेशन मुस्कान के अंतर्गत की गई प्रदेश भर में की गई यह कार्रवाई स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस नाबालिगों एवं महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पूर्णतः प्रतिबद्ध, सतर्क एवं संवेदनशील है। अंतर्राज्यीय समन्वय, तकनीकी दक्षता एवं समयबद्ध कार्रवाई के माध्यम से पीड़ित परिवारों को त्वरित राहत प्रदान की जा रही है।  

12 राज्यों के 124 जिलों में 2 सप्ताह तक चलेगा अभियान

भोपाल. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री  जे.पी. नड्डा ने 12 राज्यों के 124 जिलों के लिए ‘मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) अभियान 2026’ का नई दिल्ली से वर्चुअल शुभारंभ किया। उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अपील की कि वे प्रशासनिक और राजनीतिक नेतृत्व, सांसद, विधायक, पंचायत प्रतिनिधियों और जिला परिषद सदस्य सहित सभी स्तरों पर समन्वित प्रयास करें। उन्होंने कहा कि दवा का सेवन केवल वितरण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रत्येक पात्र नागरिक तक यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि दवा पूरी मात्रा में ली जाए। केंद्रीय मंत्री  नड्डा ने कहा कि भारत सरकार 2027 तक लसीका फाइलेरिया को पूरी तरह समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने राज्यों से अपील की कि वे अभियान के दौरान सभी आवश्यक संसाधनों और जागरूकता गतिविधियों को सुनिश्चित करें। हर नागरिक की भागीदारी और दवा का समय पर सेवन ही इस गंभीर रोग को समाप्त करने की कुंजी है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि यह अभियान लसीका फाइलेरिया उन्मूलन रणनीति का अहम घटक है। उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल सहित 12 राज्य के स्वास्थ्य मंत्रियों, विभागीय अधिकारियों ने वर्चुअल सहभागिता की। नागरिक स्वयं दवा का सेवन करें, परिवार जन और पड़ोसियों को भी करें जागरूक: उप मुख्यमंत्री  शुक्ल उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश में इस अभियान को 8 जिलों – छतरपुर, पन्ना, उमरिया, मऊगंज, टीकमगढ़, निवाड़ी, शहडोल और भिंड – के 12 ब्लॉकों में संचालित किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने अपील की है कि वे नागरिक स्वयं दवा का सेवन करें, अपने परिवार जन और पड़ोसियों को जागरूक करें और स्वयंसेवक के रूप में अभियान में सक्रिय सहयोग दें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक की भागीदारी अभियान की सफलता और मध्यप्रदेश को फाइलेरिया मुक्त राज्य बनाने में निर्णायक होगी। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया और कहा कि इस अभियान में सामुदायिक नेतृत्व और पंचायतों की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रदेश में 8 जिलों के 12 चिन्हित विकासखण्डों में प्रशिक्षित दवा सेवकों के माध्यम से बूथ डे एवं घर-घर भ्रमण के दौरान फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन समस्त पात्र हितग्राहियों को कराया जाएगा। एमडीए के सघन और सफल क्रियान्वयन करने के लिये स्वास्थ्य विभाग द्वारा 15 दिन का माइक्रोप्लान तैयार किया गया है। इसके तहत 4 दिन बूथ स्तर पर, 7 दिन घर-घर अभियान और 4 दिन में शेष रह गई जनता के लिए मॉप-अप गतिविधि की जायेंगी। शत-प्रतिशत दवा सेवन के लिए उच्च/वर्तमान संचरण क्षेत्रों में आमजन को जागरूक और प्रेरित किया जाएगा। फायलेरिया लक्षण और बचाव फायलेरिया संक्रमित मच्छर (क्यूलेक्स) के द्वारा फैलने वाली बीमारी है। यह बीमारी एक धागे के समान कृमि वुचरेरिया बेनक्रफ्टाई से होती है। प्रदेश में फायलेरिया बीमारी संक्रमण के लिये क्यूलेक्स क्वींक्वीफेसियेटस प्रमुख वाहक मच्छर है। यह मच्छर सामान्यतः गंदे एवं रूके हुए पानी में प्रजनन करता है। फायलेरिया बीमारी के प्रमुख लक्षण प्रारंभिक अवस्था में लगातार बुखार, प्रभावित अंगों (पैरों/हाथ/अण्डकोष/स्तन) में दर्द एवं सूजन है, जो कि धीरे-धीरे हाथी पांव के समान हो जाती है। संक्रमण के 8 से 10 वर्षों के बाद भी उपरोक्त लक्षण प्रकट हो सकते है। राष्ट्रीय फायलेरिया उन्मूलन के लिये मॉस ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए), मोर्बिडिटी मैनेजमेंट ऐंड डिसेबिलिटी प्रिवेंशन (एमएमडीपी) गतिविधियाँ की जा रही हैं। एमडीए में प्रत्येक वर्ष में 1 बार 2 साल से अधिक उम्र (2 साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती माताओं एवं गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को छोड़कर) के जनसमुदाय को निर्धारित मात्रा में डी.ई.सी (डाय इथाईल कार्बामैज़ीन) एवं एल्बेण्डाजोल दवा का सेवन कराया जाता है।  

एमबीबीएस छात्रा की रहस्यमयी मौत: बाथरूम से बरामद शव, एसिड की बोतल ने बढ़ाया शक

भोपाल  भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा की मंगलवार सुबह संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। छात्रा का शव कोहेफिजा क्षेत्र स्थित एक निजी छात्रावास में रह रही थी। उसकी लाश छात्रावास के बाथरूम में मिला। घटनास्थल के पास एसिड की खाली बोतल मिलने से आत्महत्या की आशंका जताई जा रही है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।  कोहेफिजा थाना प्रभारी कृष्ण गोपाल शुक्ला ने बताया कि अलीराजपुर निवासी 19 वर्षीय रोशनी ने अक्तूबर माह में गांधी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया था। वह कोहेफिजा इलाके में एक घर में पेइंग गेस्ट के रूप में रह रही थी। बताया जा रहा है कि पढ़ाई ठीक से समझ में न आने के कारण वह लगातार तनाव में थी और सहपाठियों से भी अपनी परेशानी साझा करती रहती थी। मंगलवार सुबह जब रोशनी तय समय पर कॉलेज जाने के लिए कमरे से बाहर नहीं निकली, तो साथ रहने वाली छात्राओं को चिंता हुई। कई बार आवाज देने और फोन करने के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद पीजी के गार्ड को सूचना दी गई। दरवाजा तोड़कर जब बाथरूम खोला गया, तो रोशनी वहां बेसुध पड़ी मिली। पास ही एक खाली एसिड की बोतल भी मिली। घटना की जानकारी तत्काल कॉलेज प्रबंधन को दी गई। रोशनी को सुबह करीब 8:30 बजे हमीदिया अस्पताल के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। हाल ही में घर से लौटी थी छात्रा प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि रोशनी एक सप्ताह पहले ही घर से लौटकर आई थी। वह शांत और गंभीर स्वभाव की थी। पुलिस को छात्रा के मोबाइल फोन से परिजनों को भेजे गए कुछ संदेश मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि वह पढ़ाई को लेकर मानसिक दबाव में थी और मेहनत के बावजूद विषय समझ नहीं पा रही थी। फिलहाल शव को पोस्टमॉर्टम के लिए हमीदिया अस्पताल की मरच्यूरी भेज दिया गया है। पुलिस ने परिजनों को सूचना दे दी है। कोहेफिजा थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है। मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। प्राथमिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि पढ़ाई के तनाव के चलते छात्रा ने यह कदम उठाया, हालांकि पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच के बाद ही निष्कर्ष निकाला जाएगा।  

जल संसाधन मंत्री श्री सिलावट ने राजस्व मंत्री श्री वर्मा से की मुलाकात

भोपाल  जल संसाधन मंत्री से तुलसीराम सिलावट ने मंगलवार को राजस्व मंत्री  करण सिंह वर्मा के निवास पर जाकर उनसे मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने जल संरचनाओं के आसपास, विशेष रूप से बेतवा नदी के कैचमेंट एरिया एवं पेड़ों का संरक्षण और जल स्रोतों की सुरक्षा आदि विषयों पर चर्चा की। मंत्रीद्वय ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे संबंध में स्थल निरीक्षण कर तत्परता के साथ कार्रवाई करें और एक सप्ताह के अंदर निरीक्षण प्रतिवेदन प्रस्तुत करें.  

महाकाल की नगरी में पहली बार होगा वन मेले का आयोजन

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उज्जैन में बुधवार को शाम 4 बजे दशहरा मैदान, सेठी नगर उज्जैन में वन मेले का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव एम.एफ.पी. पार्क द्वारा निर्मित प्राकृतिक “होली रंग गुलाल” एवं “महाकाल स्मृति उपहार” का विमोचन करेंगे। साथ ही वन विभाग की एक नवीन पहल “महाकाल वन प्रसादम” का भी शुभारंभ करेंगे। महाकाल वन मेला “समृद्ध वन, खुशहालजन” थीम पर आधारित होगा, जो 11 से 16 फरवरी 2026 तक चलेगा। महाकाल की नगरी उज्जैन में वन मेले का आयोजन पहली बार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव वन विभाग की प्रदर्शनी का शुभारंभ कर अवलोकन करेंगे। साथ ही वन मंडलाधिकारी एवं प्रबंध संचालक, जिला यूनियन दक्षिण पन्ना एवं वन रक्षक, जिला यूनियन दक्षिण पन्ना को प्रशस्ति-पत्र प्रदान करेंगे। कार्यक्रम में वन, पर्यावरण राज्यमंत्री  दिलीप सिंह अहिरवार, अपर मुख्य सचिव वन एवं प्रशासक, मध्यप्रदेश राज्य लघु वनोपज संघ  अशोक बर्णवाल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख  व्ही.एन. अंबाडे और प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश राज्य लघु वनोपज संघ डॉ. समिता राजौरा उपस्थित रहेंगे। मेले में प्रदेश के वनवासियों द्वारा एकत्र की जाने वाली अकाष्ठीय वनोपज के प्रदर्शन, संरक्षण, संवर्धन, प्रसंस्करण एवं विपणन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मेले का आयोजन किया जा रहा है। वन मेला प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता के वैभव को प्रदर्शित करने का एक सशक्त माध्यम है। अकाष्ठीय वनोपज संग्राहक, वन धन केन्द्रों, प्राथमिक लघु वनोपज समितियाँ, व्यापारीगण, हर्बल और आयुर्वेदिक उद्योग के प्रतिनिधि इस आयोजन में भाग लेंगे और अपने उत्पादों का प्रदर्शन एवं विक्रय करेंगे। वनों में उपलब्ध अकाष्ठीय वनोपज व्यापक तौर पर ग्रामीण आजीविका का महत्वपूर्ण माध्यम है। प्रदेश में अकाष्ठीय वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा हुआ है। वन मेले में लगभग 250 भव्य एवं आकर्षक स्टॉल्स लगाये जा रहे हैं, जिसमें 16 स्टॉल्स विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी के लिये, 76 स्टॉल्स प्राथमिक लघु वनोपज समितियों एवं वन धन केन्द्रों के लिये, एक भव्य स्टॉल विंध्य हर्बल्स के लिये, 5 स्टॉल्स लघु वनोपज के जीवंत प्रदर्शन के लिये, ओपीडी (नि:शुल्क चिकित्सीय परामर्श) के लिये 50 स्टॉल्स आरक्षित रखे गये हैं। इसके अलावा 76 स्टॉल्स निजी क्षेत्र के स्टॉल धारकों के लिये और 16 स्टॉल्स फूड जेन के लिये रखे गये हैं। मेले में किड्स जोन, व्हील चेयर्स, गोल्फ कार्ट, सिटिंग एरिया, वॉटर पाइंट, सेल्फी पाइंट की सुविधाएँ भी आगंतुकों को उपलब्ध रहेंगी। मेले में क्रेता-विक्रेता सम्मेलन, आयुर्वेर्दिक डॉक्टर्स एवं परम्परागत वैद्यों द्वारा नि:शुल्क चिकित्सीय परामर्श, ज्ञानवर्धक सांस्कृतिक कार्यक्रम और परम्परागत भोज्य पदार्थों की उपलब्धता रहेगी। वन मेले में चीता परिवार एवं डायनासोर का विशाल स्कल्पचर, वरिष्ठ नागरिकों के लिये व्हील-चेयर एवं गोल्फ कॉर्ट की सुविधा, ओपीडी में उपचार कराने वाले लोगों के लिये पृथक से बैठक व्यवस्था, महाकाल मंदिर से मेला परिसर तक नि:शुल्क बस सुविधा, बच्चों के लिये आकर्षक एवं मजेदार किड्स जोन की सुविधा, फूड जोन में बाँधवगढ़ का गोंडी व्यंजन, छिंदवाड़ा का वन भोज रसोई और अलीराजपुर का दाल पानिया आकर्षण का विशेष केन्द्र रहेगा।  

नृत्य के साथ रोमांच का संगम: पर्यटकों के लिए विलेज कैंपिंग और वॉटर स्पोर्ट्स जैसे ढेरों आकर्षण

भोपाल. अपर मुख्य सचिव संस्कृति, गृह और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व  शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि मध्यप्रदेश की पावन धरा कला और संस्कृति की सुगंध एक बार फिर विश्व पटल पर बिखरने को तैयार है। भारतीय शास्त्रीय नृत्य के सबसे प्रतिष्ठित आयोजनों में से एक ‘खजुराहो नृत्य समारोह’ के 52वें संस्करण का भव्य आयोजन 20 से 26 फरवरी, 2026 तक किया जा रहा है। विश्व धरोहर स्थल खजुराहो के सुप्रसिद्ध पश्चिमी मंदिर समूह परिसर की गौरवशाली पृष्ठभूमि में आयोजित होने वाला यह समारोह इस वर्ष भी अपनी उत्कृष्ट नृत्य प्रस्तुतियों, नवाचारों और नवीन आयामों के साथ कला प्रेमियों को मंत्रमुग्ध करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल मार्गदर्शन में संस्कृति विभाग द्वारा समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक-परंपराओं और शास्त्रीय कलाओं के संरक्षण और प्रसार के लिए निरंतर सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। विभाग का लक्ष्य इस जीवंत परंपरा को जन-जन तक पहुँचाकर मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊचाइयां प्रदान करना है। खजुराहो नृत्य समारोह वास्तव में भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा की वह जीवंत साधना है, जहाँ इतिहास, अध्यात्म और सौंदर्य के अद्भुत संगम का शाहकार होता है। भव्य मंदिरों के प्रांगण में आयोजित यह समारोह नृत्य को केवल एक मंचीय प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक पवित्र सांस्कृतिक अनुष्ठान के रूप में प्रतिष्ठित करता है। इस वर्ष समारोह की केंद्रीय थीम ‘नटराज’ रखी गई है, जो भारतीय नृत्य की आध्यात्मिक चेतना, लयबद्धता और सृजनात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है। मंच पर भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी, कुचिपुड़ी और मोहिनीअट्टम जैसे शास्त्रीय नृत्य रूप अपनी परंपरागत गरिमा और शास्त्रबद्धता के साथ प्रस्तुत होंगे। समारोह की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस वर्ष देश के 7 पद्म और 6 संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त दिग्गज कलाकारों के साथ उभरते हुए युवा कलाकार भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। विभाग का यह विशेष प्रयास है कि नई पीढ़ी के कलाकारों को अधिक अवसर प्रदान किए जाएं। इस वर्ष समारोह में कई नवाचार देखने को मिलेंगे। पहली बार खजुराहो की सड़कों पर एक ‘सांस्कृतिक रैली’ का आयोजन किया जाएगा, जो 20 फरवरी को समारोह के शुभारंभ के साथ निकलेगी। इस रैली में विभिन्न विधाओं के कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में नगर भ्रमण करते हुए मुख्य कार्यक्रम स्थल तक पहुंचेंगे। ‘राष्ट्रीय खजुराहो बाल नृत्य महोत्सव’ को भी अब राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया गया है। 10 से 16 वर्ष आयु वर्ग के बाल कलाकारों को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित इस महोत्सव हेतु देश के 23 राज्यों से 310 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें कथक के 136 और भरतनाट्यम के 106 आवेदन शामिल हैं। इन नन्हें कलाकारों का चयन वरिष्ठ कला गुरुओं द्वारा किया जाएगा और उनका प्रदर्शन मेला परिसर के विशेष मंच पर होगा। समारोह को और अधिक समावेशी बनाने के लिए इस वर्ष ‘खजुराहो कार्निवाल’ का पहली बार शुभारंभ किया जा रहा है। शिल्प ग्राम में आयोजित होने वाले इस कार्निवाल में 10 राज्यों के कलाकार अपनी लोक कलाओं, लोक नृत्यों और पारंपरिक शिल्पों का प्रदर्शन करेंगे। साथ ही, कार्निवाल के दौरान शास्त्रीय एवं उप-शास्त्रीय नृत्यों की प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी। बौद्धिक संवाद के लिए ‘कलावार्ता’ का आयोजन होगा, जहाँ कलाविद् खजुराहो के मंदिर स्थापत्य और कला परंपराओं पर चर्चा करेंगे। ‘लयशाला’ के माध्यम से विद्यार्थी प्रतिष्ठित गुरुओं से नृत्य के तकनीकी पक्षों की बारीकियां सीखेंगे। वहीं, ‘आर्ट-मार्ट’ में समकालीन भारतीय चित्रकला और ‘सृजन एवं हुनर’ में पारंपरिक शिल्प तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन और विक्रय किया जाएगा। भोजन के शौकीनों के लिए ‘स्वाद’ प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश के जनजातीय और क्षेत्रीय व्यंजनों का आनंद उपलब्ध होगा। पर्यटन विभाग ने इस बार पर्यटकों के रोमांच को दोगुना करने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। ई-बाइक टूर, सेगवे टूर और विलेज टूर जैसी गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण संस्कृति को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। साहसिक पर्यटन के शौकीन पन्ना राष्ट्रीय उद्यान के पास झिन्ना एवं मड़ला में कैंपिंग कर सकते हैं और ‘वॉक विद पारधी’ के तहत प्रकृति भ्रमण का आनंद ले सकते हैं। कुटनी आईलैंड में वॉटर स्पोर्ट्स जैसे स्पीड बोट और शिकारा नाव की सवारी का भी प्रबंध किया गया है। स्थानीय कला को प्रोत्साहन देने के लिए टेराकोटा, बुंदेली पेंटिंग और बीड ज्वेलरी के प्रत्यक्ष प्रदर्शन स्टॉल लगाए जाएंगे। कुल मिलाकर, यह समारोह नृत्य, शिल्प, संवाद और पर्यटन का एक ऐसा अनूठा मंच बनेगा जो मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर और अधिक सशक्त करेगा। खजुराहो महोत्सव संस्कृति विभाग द्वारा उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन छतरपुर के साझा सहयोग से आयोजित किया जा रहा हैं।  

कैंसर इलाज में नई क्रांति: MP में पहली बार इंदौर के MGM मेडिकल कॉलेज में जीनोम सिक्वेंसिंग

इंदौर. इंदौर के एमजीएम मेडिकल कलेज में जल्द ही कैंसर की जीनोम सिक्वेंसिंग लैब शुरु होगी। यह प्रदेश की पहली लैब होगी। गौरतलब है कि अभी कैंसर के सेल व डीएनए में म्युटेशन की जांच के लिए इंदौर ही नहीं पूरे मप्र से दिल्ली के टाटा मेमोरियल अस्पताल व दिल्ली व बेंगलुरु के निजी अस्पतालों के जांच केंद्रों पर सैंपल भेजे जाते है। ऐसे में अब यह सुविधा इंदौर में ही मिल सकेगी। अभी सैंपल को अन्य शहरों में जांच के लिए भेजने के बाद उसकी रिपोर्ट आने में ही 10 से 15 दिन का समय लग जाता है, लेकिन इंदौर के एमजीएम मेडिकल कालेज में शुरु होने वाली इस लैब में पांच से सात दिन में कैंसर सेल के म्युटेशन की जांच रिपोर्ट मिल सकेगी। हालांकि शुरुआत में इस लैब में स्तन कैंसर व मस्तिष्क कैंसर के सेल की जीनोम सिक्वेंसिंग जांच होगी। मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट तैयार इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च व डिपार्टमेंट आफ हेल्थ रिसर्च द्वारा 2014 में इंदौर के एमजीएम मेडिकल कालेज के लिए यह प्रोजेक्ट तैयार किया था, लेकिन अब जाकर यहां मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (एमडीआरयू) शुरु हुई है। इस यूनिट में अब कैंसर संबंधित रिसर्च व जांच की प्रक्रिया शुरु होगी। इसके लिए उपकरण खरीदे जा चुके है और जल्द इनका इंस्टालेशन किया जाएगा। वर्तमान में इस रिसर्च यूनिट में पांच लोगों का स्टाफ नियुक्त है। इसमें दो वैज्ञानिक व तीन टेक्नीशियन है। साढ़े तीन करोड़ की लागत से आए उपकरण इस रिसर्च यूनिट में केंद्र सरकार के प्रोजेक्ट के साढ़े तीन करोड़ रुपये की लागत से उपकरण बुलवाए गए है। इनमें नेक्स्ट जनरेशन जीन सिक्वेंसिंग व पीसीआर-आरपीसीआर जांच मशीने है। इसके अलावा 20 लाख रुपये के सेल की जांच में उपयोग होने वाले रीएजेंट व कंज्युमेंबल मिले है। ये रीएजेंट फिलहाल स्तन कैंसर व मस्तिष्क कैंसर की जांच में ही काम आएंगे। अन्य कैंसर संबंधित जांच के लिए मेडिकल कालेज को अन्य रीएजेंट खरीदना होंगे। डायबिटीज, थायराइड और अन्य बीमारियों पर भी होगा शोध भविष्य में इस लैब में मुंह, पेट, सर्वाइकल सहित अन्य कैंसर की जांच भी हो सकेगी। इसके अलावा नान कम्युनिकेबल डिसिज जिसमें हृदय रोग व मेटाबालिक डिसआर्डर जैसे डायबीटिज, थायराइड जैसी बीमारियों पर शोध किया जा सकेगा। इसके अलावा इन बीमारियों के कारण जानने के लिए जीनोम सिक्वेंसिंग जांच की जा सकेगी। डॉ. तरुण वर्मा, विज्ञानी, एमडीआरयू, एमजीएम मेडिकल कॉलेज के अनुसार, इस लैब में मॉलीक्युलर बायोलॉजी के तहत कैंसर सेल के डीएनए, आरएनए व प्रोटीन की जांच होगी, जिससे इन बीमारियों के भविष्य में उपचार में मदद मिल सकेगी। शुरुआती 200 मरीजों के लिए निशुल्क जांच की सुविधा केंद्र से मिले रीएजेंट के माध्यम से फिलहाल रिसर्च के दौरान जिन मरीजों के सैंपल लिए जाएंगे, शुरुआत में स्तन व मस्तिष्क कैंसर से संबंधित करीब 200 मरीजों से जांच शुल्क नहीं लिया जाएगा। रिसर्च के अलावा यदि कोई अन्य मरीज अपने सैंपल की जांच करवाना चाहेगा तो उसे एक तय शुल्क देना होगा। यह जानकारी डॉ. शिल्पा मिश्रा शुक्ला, सीनियर साइंटिस्ट, एमडीआरयू, एमजीएम मेडिकल कालेज द्वारा दी गई है।

पं. दीनदयाल उपाध्यायः एकात्म मानवदर्शन के प्रणेता और समर्थ भारत निर्माण के चिंतक -डॉ. मोहन यादव

भोपाल  व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र निर्माण का मार्ग दिखाने वाले, विलक्षण व्यक्तित्व के धनी, एकात्म मानव दर्शन और अंत्योदय के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के चरणों में कोटिशः नमन।  पं. दीनदयाल जी का जीवन भारत राष्ट्र को दिशा देने वाला प्रकाश स्तंभ है। वे एक ऐसे ऋषि राजनेता थे जो समाज, संस्कृति और राष्ट्र के समग्र उत्थान के लिए समर्पित रहे। उन्होंने राजनीति को राष्ट्रधर्म की साधना का माध्यम माना। उनका स्पष्ट मत था कि स्वतंत्र भारत की यात्रा भारतीय दर्शन, संस्कृति और परंपरा के अनुरूप होनी चाहिए। पं. दीनदयाल जी ने राजनीतिक चिंतन को भारतीय मूल्यों से जोड़ते हुए एकात्म मानव दर्शन का सूत्र दिया। इसमें व्यक्ति, समाज, राष्ट्र और सृष्टि के बीच समन्वय और संतुलन समाहित है। यह जीवन और संपूर्ण सृष्टि को एक सूत्र में पिरोता है। यही दर्शन व्यष्टि से समष्टि की रचना करता है। इसमें श्रीकृष्ण के वसुधैव कुटुम्बकम के भाव से लेकर आज के वैश्विक परिदृश्य का समावेश है। पं. दीनदयाल जी भारत के भविष्य की कल्पना चतुर्पुरुषार्थ-धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के आधार पर की। उनका विश्वास था कि इन चारों का संतुलन ही व्यक्ति और समाज को पूर्णता की ओर ले जा सकता है। यदि व्यक्ति और समाज को विकास के समान अवसर दिए जाएँ, तो स्वावलंबी और समर्थ समाज का निर्माण संभव है। पं. दीनदयाल जी का मानना था कि राजनीति का अंतिम लक्ष्य सशक्त, समरस और स्वाभिमानी राष्ट्र का निर्माण है। उनका विकास मॉडल केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक संतुलन का समावेश था। वे चाहते थे कि विकास का लाभ अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे, तभी वह सच्चा विकास कहलाएगा। यही अंत्योदय का भाव है। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत जिस विकास पथ पर अग्रसर है, उसके मूल में पं. दीनदयाल जी का चिंतन है। विरासत से विकास, आत्मनिर्भर भारत, वोकल फॉर लोकल और सबका साथ – सबका विकास, यह सभी एकात्म मानव दर्शन के आधुनिक रूप हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी जी का संकल्प है कि वर्ष 2047, स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक भारत को विश्व की सर्वोच्च शक्ति के रूप में स्थापित किया जाए। यह संकल्प पं. दीनदयाल जी के स्वप्निल भारत की ही साकार अभिव्यक्ति है। मुझे बताते हुए प्रसन्नता है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के आत्मनिर्भर और विकसित भारत निर्माण की परिकल्पना को मूर्तरूप देने की दिशा में प्रदेश के प्रत्येक अंचल को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश के हर क्षेत्र की क्षमता, मेधा और दक्षता को अवसर प्रदान करने के लिए जहां रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का नवाचार किया गया, वहीं भोपाल में संपन्न हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से स्थानीय उद्योगों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। निवेश के लिये हमने यूके, जर्मनी, जापान और दावोस आदि यात्राएं कीं और हैदराबाद, कोयंबटूर सहित मुंबई में रोड-शो के माध्यम से उद्योगपतियों को आमंत्रित किया। यह क्षेत्रीय से वैश्विक स्तर तक उद्योग को जोड़ने का पहला सशक्त प्रयास है। मुझे यह बताते हुए संतोष है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के चिंतन को व्यवहार में उतारने का प्रयत्न किया जा रहा है। समरस, संवेदनशील और उत्तरदायी शासन के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक योजनाएं और विकास के लक्ष्य धरातल पर पहुंच रहे हैं। प्रदेश में गरीब कल्याण, किसान कल्याण, युवा शक्ति और नारी सशक्तिकरण को केन्द्र में रखकर 4 मिशन के माध्यम से कार्य किया जा रहा है। इससे समाज के सभी वर्गों के कल्याण का लक्ष्य पूर्ण होगा।  पं. दीनदयाल जी ने आर्थिक विकास के लिए कृषि, उद्योग, परिवहन, व्यापार समाज, सुरक्षा एवं सेवा का एक स्पष्ट और व्यावहारिक क्रम बताया। इस क्रम में कृषि प्रधान देश भारत में खेती को प्रथम स्थान देने की आवश्यकता व्यक्त की। उनका मानना था यदि देश में कृषि सुदृढ़ होगी, तो किसानों की आय बढ़ेगी, ग्रामीण जीवन में स्थिरता आएगी और उद्योगों को कच्चा माल एवं श्रम दोनों सहज रूप से उपलब्ध होगा। इससे किसान, उपभोक्ता और समाज तीनों का संतुलन बना रहेगा। पं. दीनदयाल जी खेती की मजबूती और किसानों की समृद्धि को समग्र विकास का आधार मानते थे। मुझे यह बताते हुए संतोष है कि मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के मार्गदर्शन में किसानों के स्वाभिमान, सुरक्षित जीवन और आत्मनिर्भरता को केन्द्र में रखकर वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसमें आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज, सिंचाई, भंडारण और बाजार तक बेहतर पहुंच के माध्यम से खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जाएगा। कृषि आजीविका के साधन के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। कृषि क्षेत्र के सशक्तिकरण में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। मुझे बताते हुए प्रसन्नता है कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने वर्ष 2025-26 किसानों के कल्याण के लिए समर्पित किया है। मध्यप्रदेश में पार्वती-कालीसिंध-चंबल तथा केन-बेतवा नदी लिंक राष्ट्रीय परियोजना सहित ताप्ती ग्राउंड वॉटर रिचार्ज मेगा परियोजना से प्रदेश के 25 जिलों में 16 लाख हेक्टेयर से अधिक अतिरिक्त कृषि रकबा सिंचित होगा। प्रदेश के किसानों के समग्र कल्याण के लिए हर जरूरी कदम उठाया जायेगा। प्रदेश में श्रीअन्न, सरसों और चना अनुसंधान केंद्र की स्थापना की जा रही है। इससे श्रीअन्न का उत्पादन और पोषण सुरक्षा को नई ऊंचाई मिलेगी। इन केंद्रों के जरिए फसलों की गुणवत्ता और पैदावार बढ़ाने पर विशेष बल दिया जाएगा। प्रदेश के 30 लाख से अधिक किसानों को अगले तीन साल में सोलर पॉवर पम्प दिये जायेंगे। प्रदेश में सिंचाई का रकबा 65 लाख हैक्टेयर से बढ़ाकर 100 लाख हैक्टेयर किये जाने का लक्ष्य है। पं. दीनदयाल उपाध्याय जी ने स्वाभिमानी, स्वावलंबी और विश्व कल्याण में अग्रणी भारत की कल्पना की थी। माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के नेतृत्व में देश इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनका जीवन और दर्शन हम सबको राष्ट्रधर्म के पथ पर निरंतर अग्रसर करता रहेगा।  राष्ट्र निर्माण के अमर साधक पं. दीनदयाल जी की पुण्यतिथि पर पुनः कोटिशः वंदन।   

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास विभाग की समीक्षा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रदेश के सभी किसानों और मछुआरों की आर्थिक समृद्धि के लिए संकल्प के साथ कार्य कर रही है। मध्यप्रदेश कृषि उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है, इसके साथ हमें मत्स्य उत्पादन में भी सक्रियता से कार्य कर आने वाले वर्षों में इसे दोगुना करने की दिशा में काम करना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मत्स्य पालकों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए प्रदेश में मछली पालन के साथ ही एक्वाकल्चर के क्षेत्र में भी कार्य किया जाए। प्रदेश में ऐसा इको सिस्टम तैयार किया जाए, जिससे मछुआरों का आर्थिक सशक्तिकरण हो सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को यह निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार कृषक कल्याण को समर्पित करते हुए यह वर्ष मना रही है। मध्यप्रदेश को मत्स्य पालन के क्षेत्र में देश का नंबर-1 राज्य बनाने के लिए कार्य योजना तैयार करें। मछुआ सम्मेलन आयोजित कर मत्स्य पालन में बेहतर कार्य करने वालों को प्रोत्साहित किया जाए। सीड प्रोडक्शन बढ़ाने की दिशा में कार्य करें। प्रदेश में संचालित मत्स्य महासंघ के सुव्यवस्थित उपयोग के लिए भी कार्य करने के निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में दिए। उन्होंने कहा कि कम भू-जल स्तर वाले जिलों में फॉर्म पॉन्ड मॉडल के माध्यम से मत्स्य उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए एक जिले को मॉडल के रूप में तैयार किया जाए, जिसमें मत्स्य उत्पादन के साथ ही सिंघाड़ा, कमल गट्टा, मखाना सहित अन्य एक्वाकल्चर आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को समीक्षा बैठक में विभागीय अधिकारियों ने जानकारी दी कि प्रदेश में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने की दिशा में मध्यप्रदेश केज कल्चर नीति पर कार्य किया जा रहा है। इसमें 10 हजार केज हितग्राही मूलक योजना में और 90 हजार केज उद्यमी मॉडल के अंतर्गत तैयार किए जाएंगे। मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों के विषय में भी अधिकारियों ने विस्तार से जानकारी दी। बैठक में भोपाल में प्रस्तावित विशेष प्रोजेक्ट इंटीग्रेडेट एक्वा पार्क एंड रिसर्च सेंटर की जानकारी भी दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संभाग स्तर पर मछली घर तैयार करने की कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के विभागीय योजनाओं की प्रगति, किसान क्रेडिट कार्ड की प्रगति, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना, भारत सरकार द्वारा स्वीकृत विशेष प्रोजेक्ट, केज कल्चर इंदिरा सागर जलाशय, टेक्नोलॉजी डिफ्यूशन सेंटर, रिजर्वायर कलस्टर आधारित मत्स्य पालन और समन्वित मछली घर एवं अनुसंधान केंद्र का बैठक में रिव्यू किया। इस अवसर पर मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  नारायण सिंह पंवार, मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय)  नीरज मंडलोई एवं अपर मुख्य सचिव  अशोक बर्णवाल सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। 

आयुष्मान योजना से उपचार में मध्यप्रदेश देश में प्रथम

भोपाल . मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में गेहूं का उपार्जन 7 फरवरी से आरंभ हो गया है, यह 7 मार्च तक जारी रहेगा। प्रदेश में 3186 पंजीयन केंद्र बनाए गए हैं। गेहूं का समर्थन मूल्य गत वर्ष से 160 रुपए अधिक है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में सकारात्मक संदेश मिला है। प्रदेश में मातृ मृत्यु दर 173 से घटकर 142 और शिशु मृत्यु दर 41 से घटकर 37 हो गई है। टी.बी. उन्मूलन कार्यक्रम में मध्यप्रदेश देश के 5 शीर्ष राज्यों में शामिल है। सिकल सेल उन्मूलन के लिए प्रदेश में व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। आयुष्मान योजना के माध्यम से उपचार में मध्यप्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। एयर एंबुलेंस सेवा और राहवीर योजना के क्रियान्वयन में भी निरंतर प्रगति हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले हुए वंदे मातरम के सामूहिक गान के बाद, अपने संबोधन में यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आहवान किया कि सभी जिलों में विक्रमोत्सव और गुड़ी पड़वा का पर्व उल्लास और उत्साह से मनाया जाए। उन्होंने कहा कि इसके तत्काल बाद प्रदेश में जल गंगा अभियान आरंभ हो जाएगा जो 3 महीने तक जारी रहेगा। उन्होंने मंत्रीगण को अपने-अपने जिलों में अभियान की गतिविधियों के व्यवस्थित संचालन के लिए आवश्यक समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश को नक्सलियों से मुक्त करने के उपलक्ष में 9 फरवरी को बालाघाट में आयोजित कार्यक्रम के संबंध में जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाकौशल क्षेत्र की कृषि कैबिनेट बालाघाट में की जाएगी, जो पूरे क्षेत्र को विकास की मुख्य धारा में लाने के संकल्प का प्रतीक होगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश को रेल के क्षेत्र में सिंगरौली जबलपुर ट्रेन की सौगात प्राप्त होने वाली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में वन्य जीव पर्यटन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से रेस्क्यू सेंटर और जू एक साथ विकसित करने की योजना है, इसके अंतर्गत जबलपुर और उज्जैन में गतिविधियां आरंभ हुई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जहां अभयारण्य हैं वहां रेस्क्यू सेंटर की व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन्य जीव पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिये पर्यटन, वन और संस्कृति विभाग समन्वित रूप से कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में चीतों के परिवार में वृद्धि की बधाई दी। उन्होंने कहा कि देश-दुनिया मैं विलुप्त हो रही वन्य प्रजाति पुनर्जीवित हो रही है। प्रदेश में चीतों की संख्या 35 हो गई है। उन्होंने बताया कि जल्द ही और भी खुशखबरी मिलेगी। उन्होंने बताया कि इंदौर जू से भी व्हाइट टाइगर की संख्या में वृद्धि का शुभ समाचार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री  भूपेंद्र यादव से प्रदेश में वन्य जीवों के पुनर्स्थापना के संबंध में हुई चर्चा के परिणाम स्वरूप अब प्रदेश में जंगली भैंसा भी लाए जा रहे हैं। साथ ही बोत्सवाना से 8 चीते 28 फरवरी को प्रदेश में लाऐ जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि धान का समर्थन मूल्य 2369 रुपए रखा गया है, जो पिछली बार की एमएसपी से अधिक है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 51 लाख 74 हजार मीट्रिक टन धान का उत्पादन हुआ। प्रदेश में 8 लाख 59 हजार से अधिक किसानों ने पंजीयन कराया, जिसमें से 7 लाख 89 हजार से अधिक किसानों ने स्पॉट बुकिंग कर धान उत्पादन में अपना योगदान दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा इस वर्ष प्रदेश में गेहूं की पर्याप्त पैदावार होने की संभावना है, राज्य सरकार के पास भंडारण की समुचित व्यवस्था है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मंत्रीगण अपने-अपने क्षेत्र में वस्त्र उद्योग इकाई स्थापना की संभावनाओं को भी देखें तथा मूलभूत आवश्यकता वाले रोजगारपरक टेक्सटाइल यूनिटों की अपने-अपने क्षेत्रों में स्थापना के लिए प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गत दिवस हुई उनकी हरिद्वार यात्रा के संबंध में भी जानकारी दी।  

बजट प्रस्तावों में सभी क्षेत्रों और वर्गों के विकास तथा कल्याण का रखा गया है ध्यान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल . मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट प्रस्तावों में सभी क्षेत्रों और वर्गों के विकास तथा कल्याण का ध्यान रखा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बजट प्रस्तावों को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में बेहतर बताते हुए उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा के दृष्टिकोण तथा प्रस्ताव तैयार करने में विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा किए गए परिश्रम की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के समक्ष मंगलवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट प्रस्तावों का प्रेजेंटेशन दिया गया। मंत्रालय में हुई बैठक में उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा, मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय)  नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव (वित्त)  मनीष रस्तोगी तथा वित्त विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। मंत्रि-परिषद के समक्ष भी आज ही बजट प्रस्तावों का प्रेजेंटेशन हुआ। मंत्रि-परिषद द्वारा अनुमोदित बजट 18 फरवरी को उप मुख्यंमत्री  देवड़ा द्वारा विधान सभा में प्रस्तुत किया जायेगा।  

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