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राहुल गांधी ने संसद परिसर में जताया अनोखा विरोध, मंत्री राजनाथ सिंह को तिरंगा और गुलाब का फूल भेंट किया

नई दिल्ली कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद परिसर में एक अनोखे तरीके से केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध जताया। राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं ने संसद परिसर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को तिरंगा और गुलाब का फूल भेंट किया। यह घटना तब घटी जब राजनाथ सिंह अपनी कार से संसद परिसर में प्रवेश कर रहे थे। जैसे ही उनकी कार रुकी, राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेता उनके पास पहुंचे और उन्हें तिरंगा और गुलाब का फूल भेंट कर दिया। यह प्रतीकात्मक रूप से उनके विरोध का इजहार था और केंद्र सरकार के खिलाफ संसद में होने वाली चर्चा से बचने का आरोप था, खासकर अडानी समूह के साथ जुड़ी कथित भ्रष्टाचार की जांच को लेकर। इस अनोखे विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता इमरान प्रतापगढ़ी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कांग्रेस का यह कदम गांधीवादी विचारधारा पर आधारित था। उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने तिरंगा और गुलाब का फूल संसद में सत्तापक्ष के सांसदों को भेंट कर यह संदेश देने की कोशिश की कि वे अडानी के खिलाफ आरोपों पर संसद में चर्चा करने के लिए तैयार हैं। प्रतापगढ़ी ने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार ने संसद को काम न करने देने की कसम खाई है और विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि अडानी मामले पर सदन में चर्चा की जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में चुप्पी साधे हुए है और अडानी को बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच, 20 नवंबर से संसद के सत्र के दौरान दोनों सदनों में लगातार हंगामा देखा गया। कांग्रेस ने अडानी समूह के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा की मांग की, जबकि बीजेपी ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं के जॉर्ज सोरोस से संबंध हैं। बीजेपी ने दावा किया कि जॉर्ज सोरोस द्वारा वित्त पोषित एक संगठन ने कश्मीर को भारत से अलग करने का समर्थन किया था। इस तरह के आरोपों को लेकर भी सदन में तू-तू, मैं-मैं का माहौल बना हुआ है। संसद में विपक्ष के प्रदर्शनों का सिलसिला जारी रहने के साथ, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की योजना बनाई है। 10 दिसंबर को, विपक्षी गठबंधन के दलों ने राज्यसभा में धनखड़ को हटाने के लिए एक नोटिस दिया। इन दलों का आरोप है कि उपराष्ट्रपति के रूप में धनखड़ ने हमेशा पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया है, जिससे सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई है। हालांकि, विपक्ष के पास राज्यसभा में धनखड़ के खिलाफ प्रस्ताव पारित कराने के लिए जरूरी सदस्य संख्या की कमी है, फिर भी यह कदम एक कड़ा संदेश देने के रूप में देखा जा रहा है कि वे लोकतंत्र की रक्षा के लिए खड़े हैं।   इन घटनाओं के बीच, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार अपनी आवाज़ उठाने की कोशिश कर रहे हैं कि सरकार अडानी मामले पर संसद में चर्चा कराए। उनका कहना है कि यदि इस मामले पर चर्चा नहीं की जाती है, तो यह संसद और लोकतंत्र की विश्वसनीयता के लिए एक बड़ा संकट बन सकता है। विपक्ष का यह मानना है कि यह सरकार का कर्तव्य है कि वह भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों पर संसद में खुलकर चर्चा करने की अनुमति दे, ताकि जनता को सच्चाई का पता चल सके। राहुल गांधी द्वारा तिरंगा और गुलाब का फूल भेंट करने की यह घटना न केवल विरोध का प्रतीक बन गई, बल्कि यह देश की राजनीति में एक नई दिशा को भी जन्म देती है। इसने यह भी दिखा दिया कि कैसे विपक्ष अपनी असहमति को शांतिपूर्ण और प्रतीकात्मक तरीके से व्यक्त कर सकता है, जैसा कि गांधी के समय में हुआ करता था। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक विश्लेषकों और जनता के बीच यह सवाल उठाया है कि क्या भारत की संसद में इस तरह के विरोध प्रदर्शन और आरोप-प्रत्यारोप लोकतंत्र की मजबूती का संकेत हैं या यह केवल राजनीतिक दांवपेंच का हिस्सा हैं। 

कर्नाटक राज्य के इतिहास में अनुशासन और प्रबुद्ध शासन की मिसाल रहे एसएम कृष्णा: बीवाई विजयेंद्र

नई दिल्ली कर्नाटक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने मंगलवार को पूर्व विदेश मंत्री, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल एसएम कृष्णा के निधन पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट के जरिए कहा, “कर्नाटक राज्य के इतिहास में अनुशासन और प्रबुद्ध शासन की मिसाल रहे, अपनी सज्जनता और मर्यादित व्यवहार से विशेष छाप छोड़ने वाले एसएम कृष्णा के निधन की खबर है।” उन्होंने आगे कहा, “गौरवान्वित कन्नडिगा एसएम कृष्णा, जिन्होंने राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण पद संभाले और इतिहास में अपनी स्थायी छाप छोड़ी। विशेषकर बेंगलुरू को सिलिकॉन सिटी के रूप में विकसित करने में उनके योगदान को कभी नहीं भुलाया जाएगा।” उन्होंने आगे कहा, “केंद्रीय मंत्रिमंडल में विभिन्न पदों के साथ महत्वपूर्ण विदेशी मामलों के पोर्टफोलियो को कुशलता से संभालने वाले और महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में कार्य करने वाले कृष्णा राजनीति की चार पीढ़ियों की सबसे बड़ी कड़ी थे।” उन्होंने कहा, “उन्होंने अपने जीवन की अंतिम सांस तक संस्कार और सुसंस्कृत आचरण को अपने जीवन का हिस्सा बनाया क्योंकि स्वस्थ मन ही सक्रियता का प्रतीक है। कृष्णा शुचिता की प्रतिमूर्ति थे, जिन पर अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कभी कोई कलंक नहीं लगा।” उन्होंने कहा, “कर्नाटक की राजनीति में कृष्णा के बिना कुछ भी याद करना बहुत मुश्किल है, वह हम जैसे राजनेताओं की युवा पीढ़ी के लिए आदर्श थे और रहेंगे।” उन्होंने कहा, “जब तक कर्नाटक का इतिहास है, एसएम कृष्णा अमर हैं, उनके निधन का दुःख उनके परिवार के साथ-साथ लाखों लोगों पर भी असर डालेगा।” उन्होंने कहा, “एसएम कृष्णा का वर्तमान राजनीतिक रुख भारत की सुरक्षा के लिए प्रेरक शक्ति थे, भगवान उनकी आत्मा को शाश्वत शांति दे। मुझे लगता है कि उनकी आत्मा कर्नाटक और देश के लिए हमेशा धड़कती रहती है।” बता दें कि एसएम कृष्णा लंबे समय से उम्र संबंधी दिक्कतों से जूझ रहे थे। उनका अंतिम संस्कार पैतृक गांव मद्दुर में बुधवार (11 दिसंबर) को होगा। वो 1999 से 2004 तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री थे और 2004 से 2008 तक महाराष्ट्र के राज्यपाल रहे। उनकी सफल राजनीतिक पारी की बात करें तो, 22 मई 2009 को उन्हें मनमोहन सिंह के केंद्रीय कैबिनेट में शामिल किया गया था। 23 मई 2009 को उन्हें विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। 2009 से 2012 तक उन्होंने भारत की विदेश नीति को नया आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाई थी। मार्च 2017 में वो कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। 2023 में सरकार ने एसएम कृष्णा को पद्म विभूषण से सम्मानित किया था। उनके पिता का नाम एस सी मल्लैया है। उन्होंने अपने स्नातक की पढ़ाई स्नातक की पढ़ाई मैसूर के महाराजा कॉलेज से स्नातक की डिग्री कॉलेज से की थी। बेंगलुरू के सरकारी कॉलेज से कानून की डिग्री ली। इसके बाद वो उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए थे। वहां से स्नातक करने के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून में शिक्षा ग्रहण की थी। 1962 में उन्हें कर्नाटक विधानसभा का सदस्य भी चुना गया था। 1960 के आसपास विधिवत रूप से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कर दी थी। 1962 में उन्होंने मद्दुर विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। इसके बाद वे प्रजा सोशलिस्ट पार्टी में शामिल हो गए थे। 1968 में उन्होंने मांड्या लोकसभा सीट से उपचुनाव जीता था। 1999 से लेकर 2004 तक वह कर्नाटक के मुख्यमंत्री भी रहे। दिसंबर 2004 से लेकर 2008 तक वह महाराष्ट्र के राज्यपाल भी रहे। जनवरी 2023 में उन्होंने घोषणा की थी कि वो अब सक्रिय राजनीति का हिस्सा नहीं रहेंगे।  

अब पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में नई बाबरी मस्जिद बनाएंगे: TMC MLA हुमांयू कबीर

कोलकाता अयोध्या में बाबारी मस्जिद विध्वंस विवाद खत्म हो गया। विवादित रहे स्थल पर राम मंदिर का निर्माण हो गया लेकिन राजनीति में बाबरी मस्जिद मुद्दा अब भी जिंदा है। तृणमूल कांग्रेस के विधायक का इसी बीच विवादित बयान सामने आया है। हुमायूं कबीर ने ऐलान किया है कि वह पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में नई बाबरी मस्जिद बनाएंगे। हुमांयू कबीर अपने विवादास्पद बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं। भरतपुर के विधायक ने दावा किया है कि वह बाबरी मस्जिद बेलडांगा में बनाएंगे। पश्चिम बंगाल का बेलडांगा इलाका मुस्लिम बाहुल है। मस्जिद बनाने के लिए देंगे एक करोड़ रुपये बेलडांगा में बाबरी मस्जिद बनाने के ऐलान के साथ ही हुमायूं कबीर ने वादा किया है कि वह इस मस्जिद को बनाने के लिए अपने पास से एक करोड़ रुपये देंगे। उन्होंने दावा किया कि बाबारी मस्जिद बनाने के प्रस्ताव पर काम शुरू हो गया है। मस्जिद निर्माण की नींव वह 6 दिसंबर 2025 तक रखेंगे। बाबरी मस्जिद ट्रस्ट भी बनाएंगे हुमायूं कबीर ने कहा कि बंगाल में मुसलमानों की आबादी का लगभग 30 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने मुस्लिम समुदाय की भावनाओं और अधिकारों पर खास ध्यान दिया है। उन्होंने बेलडांगा में बनने जा रही बाबरी मस्जिद के लिए बहरामपुर क्षेत्रों के मदरसा अध्यक्षों और सचिवों सहित 100 से अधिक सदस्यों वाली एक बाबरी मस्जिद ट्रस्ट बनाने का भी ऐलान किया। मुसलमानों से जुटाएंगे धन हुमांयू कबीर ने कहा कि बाबरी मस्जिद ट्रस्ट बेलडांगा में दो एकड़ में बनने जा रही मस्जिद के निर्माण की देखरेख करेगा। उन्होंने कहा कि मस्जिद बनाने के लिए मुस्लिम सपोर्ट करेंगे और धन भी जुटाएंगे। ट्रस्ट दान में आने वाले धन को मैनेज करेगा। कांग्रेस से टीएमसी में आए थे हुमायूं ममता बनर्जी के पहले कार्यकाल में मंत्री रहे हुमायूं कबीर तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर नेता हैं। टीएमसी में आने से पहले वह 2011 में कांग्रेस के टिकट पर रेजिनगर विधानसभा सीट से अपना पहला चुनाव लड़े थे। हुमायूं अकसर ऐसे बयान देते रहते हैं, जिससे टीएमसी को विपक्ष का सामना करना पड़ता है। हाल ही में टीएमसी ने हुमायूं को उनके एक बयान के लिए नोटिस भी दिया था। बाबरी मस्जिद विवाद क्या हुमायूं ने कहा कि मुगल कमांडर मीर बाक़ी ने 1528-29 में बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया था। उनका आरोप है कि 1992 में हिंदू राष्ट्रवादी भीड़ ने मस्जिद के ढांचे को गिरा दिया था, जिसके बाद हिंसा हुई थी। मस्जिद पर लंबे समय तक राजनीति चली और कोर्ट में केस चला। 2019 में, सुप्रीम कोर्ट ने अयोधया की विवादित भूमि को रामजन्मभूमि का हिस्सा बताते हुए मंदिर निर्माण का फैसला सुनाया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है: केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल

चंडीगढ़ भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “30-40 साल पहले 30 फीसद के अंदर ही शहरीकरण था। अब यह 70 फीसद क्रॉस कर गया है। पिछले 10 साल हमारे लिए महत्वपूर्ण रहे। हमने बहुत काम किया। पिछले 10 सालों में हमने 2014 से 2024 तक बहुत कुछ हासिल किया है। अब इस कार्यकाल में 6 महीने हो गए हैं।” उन्होंने कहा, “कई योजनाओं का विस्तार धीरे-धीरे कर रहे हैं और उसकी गति पहले से ज्यादा कैसे तेज हो, इसके लिए भी बहुत काम किए हैं।” उन्होंने कहा, “इस बार यह तय किया गया है कि बिना मांग के भी पहले चरण में आवासों को सैंक्शन दिया जाएगा। यह निर्णय इसलिए लिया गया, क्योंकि मांग आने में बहुत समय लगता है, और उसके बाद प्रक्रिया पूरी करने में भी समय लग जाता है। खासतौर पर, पांच साल के इस प्रोग्राम में शहरी क्षेत्र में एक करोड़ मकान बनाने का लक्ष्य है, और उसका एक छोटा हिस्सा यानी लगभग 6 फीसद या 7 फीसद पहले चरण में अनुमोदित किया जाएगा।” उन्होंने कहा, “इसमें एक विशेष पहल की गई है कि कुछ राज्यों को पहले ही अनौपचारिक सैंक्शन मिल जाएगा, और यह सात लाख मकानों के लिए होगा। इस सैंक्शन से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इन राज्यों में जितने मकान निर्धारित हैं, उन्हें इस साल पूरा किया जा सके। यह एक तरह का प्रावधान होगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि इन राज्यों को सैंक्शन मिलने पर उनके पास इस साल के लिए एक निश्चित संख्या में मकानों की गारंटी होगी।” उन्होंने कहा, “हम प्रधानमंत्री आवास योजना में जो भी डिमांड आती थी, उसके हिसाब से आवासों का आवंटन करते थे। लेकिन, इस बार यह तय किया गया है कि जो डिमांड आती है, उसे सेंक्शन करने में बहुत समय लग जाता है। इसलिए पहले चरण का जो हमारा सैंक्शन है, वह डिमांड के बिना किया जाएगा, क्योंकि यह पांच साल का प्रोग्राम है। इस पांच साल के प्रोग्राम में एक करोड़ मकान शहरी क्षेत्र में बनाए जाने हैं। इसका एक छोटा हिस्सा, यानी छह या सात प्रतिशत, अभी तय नहीं है।” उन्होंने कहा, “अगर किसी राज्य में किसी कारणवश किसी प्रकार का घाटा होता है, तो हम पहले किस्त के पैसे का ट्रांसफर कर देंगे। इसके अलावा, जो भी डिमांड 31 मार्च तक आएगी, उसकी समीक्षा कर अगले वर्षों के लिए सैंक्शन प्रारंभ में ही बता दिए जाएंगे। ताकि कोई भी लाभार्थी या निर्माण करने वाला व्यक्ति यह जान सके कि पांच साल में उसे कब मकान मिलेगा।”  

जयराम रमेश ने कहा- विपक्ष के सांसदों को सदन में बोलने का नहीं मिलता है मौका, इसलिए लाए अविश्वास प्रस्ताव

नई दिल्ली उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव विपक्ष ने पेश किया है। कांग्रेस के सीनियर नेता जयराम रमेश ने इसकी जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के सांसदों के हस्ताक्षर वाले इस प्रस्ताव को राज्यसभा के जनरल सेक्रेटरी को सौंप दिया गया है। इस प्रस्ताव को ममता बनर्जी की टीएमसी का भी समर्थन मिल गया है। जयराम रमेश ने कहा कि यह कठिन फैसला है, लेकिन मजबूरी में हमें ऐसा करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के सांसदों को तो सदन में बोलने का भी मौका नहीं दिया जाता। उनका माइक तक बंद कर दिया जाता है। यह पक्षपात की स्थिति है और इसलिए हमें अविश्वास प्रस्ताव लाना पड़ा है। जयराम रमेश ने लिखा, ‘विपक्षी INDI अलायंस से जुड़े सभी दलों के पास राज्यसभा के चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। वह राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन पक्षपात के साथ कर रहे थे। INDI अलायंस के दलों के लिए यह एक कठिन फैसला है, लेकिन संसदीय लोकतंत्र के हित में है। इसलिए हमें ऐसा कदम उठाना पड़ा है। अविश्वास प्रस्ताव को हमने राज्यसभा के जनरल सेक्रेटरी को सौंप दिया है।’ हालांकि सूत्रों का कहना है कि इस प्रस्ताव में विपक्षी दलों के किसी भी नेता सदन के हस्ताक्षर नहीं हैं। यहां तक कि सोनिया गांधी के साइन भी इस प्रस्ताव में नहीं हैं। कहा जा रहा है कि कुल 60 सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं।

ममता को ‘इंडिया’ गठबंधन का नेतृत्व करने का मौका देना चाहिए, कौन संभालेगा INDIA की कमान?, चर्चा के लिए पार्टी तैयार

नई दिल्ली शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने मंगलवार को संकेत दिया कि उनकी पार्टी इस बात पर चर्चा करने के लिए तैयार है कि क्या कांग्रेस के बाहर किसी को विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ का नेतृत्व करना चाहिए। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि गठबंधन के सभी घटक दल इस मुद्दे पर चर्चा करने को तैयार हैं। राउत राष्ट्रीय जनता दल (राजग) प्रमुख लालू प्रसाद की इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दे रहे थे कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को ‘इंडिया’ गठबंधन का नेतृत्व करने का मौका देना चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे वर्तमान में विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलेपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (INDIA) के अध्यक्ष हैं। दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में राज्यसभा सदस्य राउत ने कहा कि खरगे और राहुल गांधी सहित कांग्रेस नेतृत्व के साथ उनकी पार्टी के बहुत अच्छे संबंध हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है और ‘INDIA’ गठबंधन सहयोगियों में उसके सांसदों की संख्या सबसे अधिक है। राउत ने कहा, ‘फिर भी, अगर ‘INDIA’ गठबंधन को दोबारा मजबूत करना है, तो हर कोई नेतृत्व (संबंधित मुद्दों) पर चर्चा करना चाहता है, (ऐसा नेतृत्व) जो गठबंधन को समय दे सकता है….(चाहे वह) ममता बनर्जी, उद्धव ठाकरे, लालू प्रसाद, शरद पवार या अखिलेश यादव हो सकते हैं।’ उन्होंने कहा कि यहां तक ​​कि बीजद प्रमुख नवीन पटनायक भी ‘INDIA’ में शामिल हो सकते हैं, जिनकी पार्टी गठबंधन का हिस्सा नहीं है। शिवसेना (UBT) नेता ने कहा, ‘हम इस मुद्दे पर एक-दूसरे से बात कर रहे हैं।’ इस सप्ताह की शुरुआत में, बनर्जी ने भाजपा विरोधी गठबंधन की कमान संभालने की अपनी मंशा व्यक्त की थी। लालू प्रसाद यादव ने किया ममता बनर्जी का समर्थन राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद ने तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो का समर्थन करते हुए मंगलवार को कहा कि उन्हें भाजपा विरोधी इस गठबंधन का नेतृत्व करने दिया जाना चाहिए। लालू ने कहा, ‘ममता बनर्जी को ‘इंडिया’ गठबंधन का नेतृत्व करने दिया जाना चाहिए।’ जब पत्रकारों ने ममता के दावों पर कांग्रेस की आपत्ति के बारे में पूछा, तो लालू ने कहा, ‘कांग्रेस के विरोध से कोई फर्क नहीं पड़ेगा…उन्हें ‘इंडिया’ गठबंधन का नेतृत्व करने दिया जाना चाहिए।’

AIMIM ने दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन को मुस्तफाबाद विधानसभा सीट से दिया टिकट

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (AIMIM) भी उतरेगी. मुस्तफाबाद विधानसभा क्षेत्र से AIMIM ने दिल्ली दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन को उम्मीदवार बनाया है. ताहिर हुसैन की पत्नी शमा और बेटा शादाब आज (10 दिसंबर) असदुद्दीन ओवैसी से मिलने उनके आवास पहुंचे. इस मुलाकात के दौरान AIMIM नेता इम्तियाज जलील भी मौजूद थे. इस मुलाकात के बाद असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ पर एक तस्वीर पोस्ट कर लिखा, “ताहिर हुसैन AIMIM में शामिल हो गए हैं और आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव में मुस्तफाबाद विधानसभा क्षेत्र से हमारे उम्मीदवार होंगे. उनके परिवार के सदस्य और समर्थक आज मुझसे मिले और पार्टी में शामिल हुए.” जेल में बंद हैं ताहिर हुसैन बता दें ताहिर हुसैन फरवरी 2020 में दिल्ली में हुए दंगों के आरोपी हैं. वह आम आदमी पार्टी से निगम पार्षद का चुनाव जीत चुके हैं. हालांकि, दंगों में नाम आने के बाद पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया था. हाल ही में ताहिर हुसैन को दिल्ली हाई कोर्ट से राहत मिली थी. अदालत ने दिल्ली दंगों के सिलसिले में ताहिर हुसैन के खिलाफ एक प्राथमिकी रद्द कर दी थी. यह एफआईआर 27 फरवरी 2020 को दर्ज की गई थी. यह एफआईआर इमारत की पहली मंजिल पर दंगा और उपद्रव के मामले में पीड़ितों की शिकायत पर कराई गई थी. दिल्ली विधानसभा के लिए फरवरी 2025 में चुनाव होने हैं और आप तीसरी बार सत्ता पर कब्जा बनाए रखने की कोशिश कर रही है. साल 2020 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 70 में से 62 पर जीत दर्ज की थी. AIMIM इतने सीटों लड़ सकती है चुनाव इस बीच चर्चा है कि AIMIM अगले साल फरवरी में होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में लगभग 10 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है. ऐसे में मुस्लिम सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला हो सकता है. दूसरी तरफ बीजेपी और कांग्रेस भी आगामी चुानव के लिए जोरशोर से तैयारी कर रही है. 

लालू प्रसाद यादव ने कहा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इंडिया गठबंधन का नेता चुना जाना चाहिए

नईदिल्ली इंडिया ब्लॉक में नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान को लेकर आरजेडी नेता लालू प्रसाद यादव ने एक बड़ा बयान दिया है. RJD नेता लालू प्रसाद यादव ने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इंडिया गठबंधन का नेता चुना जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के विरोध का कोई मतलब नहीं है. ममता को ही नेता बनाया जाना चाहिए. इस दौरान लालू यादव ने जोर देकर कहा कि बिहार में होने वाले अगले चुनाव में उनकी पार्टी सत्ता में आएगी. इससे पहले बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा था कि उन्हें तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी समेत इंडिया ब्लॉक के किसी भी सीनियर लीडर द्वारा गठबंधन का नेतृत्व करने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि इस निर्णय पर आम सहमति से पहुंचा जाना चाहिए. ममता बनर्जी ने क्या कहा था… पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हालिया हरियाणा और महाराष्ट्र चुनाव में INDIA ब्लॉक के खराब प्रदर्शन पर असंतोष जाहिर किया है और संकेत दिया कि अगर मौका मिला तो वह INDIA ब्लॉक की कमान संभालने के लिए तैयार है. तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सुप्रीमो ने कहा कि वह बंगाल की मुख्यमंत्री के रूप में अपनी भूमिका जारी रखते हुए विपक्षी मोर्चे को चलाने की दोहरी जिम्मेदारी संभाल सकती हैं. एक टीवी चैनल से बात करते हुए ममता बनर्जी ने कहा , “मैंने इंडिया ब्लॉक का गठन किया था, अब मोर्चा का नेतृत्व करने वालों पर इसका प्रबंधन करने की जिम्मेदारी है. अगर वे इसे नहीं चला सकते, तो मैं क्या कर सकती हूं? मैं सिर्फ इतना कहूंगी कि सभी को साथ लेकर चलना होगा.” यह पूछे जाने पर कि एक मजबूत भाजपा विरोधी ताकत के रूप में अपनी साख के बावजूद वह इंडिया ब्लॉक की कमान क्यों नहीं संभाल रही हैं? इस पर बनर्जी ने कहा, “अगर मौका मिला तो मैं इसके सुचारू संचालन को सुनिश्चित करूंगी.” उन्होंने कहा, “मैं बंगाल से बाहर नहीं जाना चाहती, लेकिन मैं इसे यहीं से चला सकती हूं.” कांग्रेस ने क्या कहा… बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा था कि ममता बनर्जी की पार्टी बंगाल तक ही सीमित है और नेशनल परिप्रेक्ष्य में ममता बनर्जी की पार्टी और उनका व्यक्तित्व उतना बड़ा नहीं है. वहीं, शिवसेना यूबीटी के सांसद संजय राउत ने कहा कि हमें ममता बनर्जी की राय पता है. हम चाहते हैं कि ममता हमारे साथ रहें. हम सभी एक साथ हैं. अगर कोई मतभेद भी है तो वो छोटे-मोटे हैं. हम कोलकाता जाकर ममता बनर्जी से इस पर बात करेंगे. इससे पहले सपा ने भी ममता बनर्जी के नाम पर सहमति जताई थी.  

कांग्रेस ला रही जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, साथ आए AAP, सपा और TMC

नई दिल्ली. विपक्षी INDI गठबंधन की ओर से राज्यसभा के चेयरमैन जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है। कांग्रेस ने यह प्रस्ताव लाने की पेशकश की है, जिसका समर्थन INDI अलायंस के अन्य दल भी कर सकते हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि राज्यसभा के चेयरमैन के तौर पर जगदीप धनखड़ पक्षपात कर रहे हैं। वह विपक्षी दलों के सांसदों को मौका नहीं देते और उन्हें अनसुना किया जाता है। ममता बनर्जी की टीएमसी, अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी और अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। विपक्षी दल संविधान के अनुच्छेद 67(B) के तहत इस प्रस्ताव को लाने वाले हैं। बता दें कि सोमवार को भी संसद के दोनों सदनों में कामकाज प्रभावित रहा। राज्यसभा में भी रुक-रुक कर हंगामा होता रहा और कई बार सदन को ठप करने के बाद अंत में पूरे दिन के लिए ही कार्यवाही स्थगित कर दी गई। इस दौरान जगदीप धनखड़ ने विपक्षी सांसदों के रुख पर दुख भी जताया और कहा कि ये लोग कामकाज बाधित कर रहे हैं और लोकतंत्र के मंदिर में चर्चा से बच रहे हैं। राज्यसभा में सोमवार को सत्ता पक्ष एवं विपक्ष ने अलग-अलग मुद्दों पर भारी हंगामा किया, जिसके कारण उच्च सदन की कार्यवाही तीन बार के स्थगन के बाद अपराह्न करीब तीन बजकर दस मिनट पर पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। एनडीए के सांसदों ने कांग्रेस तथा उसके नेताओं पर विदेशी संगठनों और लोगों के माध्यम से देश की सरकार तथा अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने इस मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की। वहीं कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने अडानी समूह से जुड़ा मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। तीन बार के स्थगन के बाद दोपहर तीन बजे उच्च सदन की बैठक शुरू होने पर भी सदन में हंगामा जारी रहा और विपक्षी सदस्यों ने अडानी समूह से जुड़ा मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्ष के कुछ सदस्य अपनी सीट से आगे आ गए। हंगामे के बीच सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि उनके कक्ष में सदन के नेता जेपी नड्डा और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ उनकी बैठक हुई। उन्होंने कहा, ‘बैठक का उद्देश्य सदन में निर्बाध कामकाज सुनिश्चित करना था। दोनों पक्षों ने खुलकर चर्चा की और संकेत दिया कि राष्ट्र की अखंडता और संप्रभुता हमारे लिए पवित्र है। ’ धनखड़ ने कहा कि नेताओं ने मंगलवार को सुबह 10:30 बजे फिर से उनके कक्ष में मिलने पर सहमति जताई है। इसके बाद उन्होंने सभी सदस्यों से अपील की कि वे संविधान की शपथ पर सावधानीपूर्वक विचार करें ताकि राष्ट्र की अखंडता प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित की जा सके।

कांग्रेस का स्ट्राइक रेट 10 तो दीदी का 70…’, INDIA ब्लॉक के नेतृत्व पर बोले TMC सांसद

नई दिल्ली इंडिया गठबंधन में क्या सबकुछ ठीक नहीं चल रहा? यह सवाल इसलिए भी क्योंकि I.N.D.I.A गठबंधन में शामिल कई दल एक के बाद एक राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल खड़े कर रहे हैं। राहुल गांधी पर कोई सीधे सवाल खड़े कर रहा है तो कोई ममता बनर्जी को बेहतर बता कर नेता विपक्ष पर सवाल उठा रहा। संसद के शीतकालीन सत्र के बीच ही राहुल गांधी के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। टीएमसी की ओर से कही गई बात और ममता बनर्जी की हां के बाद कई नेताओं को लगने लगा है कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की जिद ठीक नहीं है। इंडिया गठबंधन में शामिल दलों के नेताओं के बयान पर यदि गौर किया जाए तो ऐसा लगता है कि उनमें भी कहीं न कहीं बेचैनी है। जिनके साथ आने की सबसे अधिक हुई चर्चा, अब वही हुए दूर! लोकसभा चुनाव में सबसे अधिक चर्चा यूपी में कांग्रेस और सपा के साथ आने की हुई। राहुल गांधी और अखिलेश यादव कई मौकों पर साथ आए और नतीजों में इसका असर भी देखने को मिला। लोकसभा नतीजों के बाद सबसे अधिक चर्चा यूपी की हुई। कांग्रेस और सपा दोनों यूपी के मतदाताओं का आभार करते नहीं थक रहे थे। लेकिन अब ये बात पुरानी हो चुकी है। सपा और कांग्रेस के बीच दूरिया बढ़ती हुई नजर आ रही है। महाराष्ट्र में सपा ने महाविकास अघाड़ी से अलग होने का ऐलान कर दिया लेकिन इससे पहले संभल और लोकसभा में सीटिंग अरेंजमेंट पर भी मनमुटाव साफ-साफ देखने को मिला। सपा के एक नेता आईपी सिंह ने राहुल गांधी की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि इन्होंने जिद कर ली है कि ये नहीं सुधरेंगे। सपा सांसद रामगोपाल यादव ने राहुल गांधी पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी I.N.D.I.A. गठबंधन के नेता नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई भी कह सकता है, राजनीति में कोई साधु-संत तो बनकर आता नहीं है। सब पद पाना चाहते हैं। चाहे लोकसभा का चुनाव हो या विधानसभा का कांग्रेस कहीं अच्छा परफॉर्म कर नहीं पाई। मौका मिला तो नेतृत्व करने को तैयार- ममता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इंडिया गठबंधन के कामकाज पर असंतोष व्यक्त किया है साथ ही मौका मिलने पर इसकी कमान संभालने के संकेत भी दिए। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ने कहा कि वह बंगाल की मुख्यमंत्री के रूप में अपनी भूमिका जारी रखते हुए विपक्षी मोर्चे के नेतृत्व के साथ दोहरी जिम्मेदारी संभालने में सक्षम होंगी। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि मैंने इंडिया गठबंधन का गठन किया था, अब इसे ठीक से चलाना मोर्चे का नेतृत्व करने वालों पर निर्भर है। अगर वे यह नहीं कर सकते, तो मैं क्या कर सकती हूं? मैं बस यही कहूंगी कि सभी को साथ लेकर चलने की जरूरत है। यह पूछे जाने पर कि एक मजबूत भाजपा विरोधी ताकत के रूप में अपनी साख को देखते हुए वह गठबंधन का प्रभार क्यों नहीं ले रही हैं, बनर्जी ने कहा, यदि अवसर दिया गया तो मैं इसका सुचारू संचालन सुनिश्चित करूंगी। ममता बनर्जी की यह टिप्पणी उनकी पार्टी के सांसद कल्याण बनर्जी द्वारा कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के अन्य सहयोगियों से अपने अहंकार को अलग रखने और ममता बनर्जी को विपक्षी गठबंधन के नेता के रूप में मान्यता देने का आह्वान किए जाने के कुछ दिन बाद आई। इन दलों ने भी कांग्रेस पर उठा दिए सवाल विपक्षी गठबंधन के भीतर हाल के घटनाक्रम पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के महासचिव डी राजा ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे गठबंधन के अध्यक्ष हैं और उन्हें मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि कांग्रेस को अपने सहयोगियों के प्रति अधिक उदार होना चाहिए और कुछ गंभीर आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। राजा ने कहा, कांग्रेस को गंभीरता से आत्मचिंतन करना होगा और इस बात पर विचार करना होगा कि विधानसभा चुनावों में सीटों का बंटवारा ठीक से क्यों नहीं किया गया, जहां उसे बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा। दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने बूते चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है और कांग्रेस से दूरी भी बना ली है। उद्धव ठाकरे की पार्टी भी सामना के जरिए कांग्रेस पर निशाना साध रही है। पार्टी ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में इस बात पर जोर दिया कि आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल को इंडिया गठबंधन का हिस्सा बने रहने के लिए मनाने की जरूरत है। संपादकीय में कहा गया, कि ममता बनर्जी कांग्रेस से दूरी रखकर राजनीति करने की कोशिश कर रही हैं। अब केजरीवाल भी उसी राह पर जा रहे हैं। इस संबंध में कांग्रेस को आत्मनिरीक्षण करने और (विपक्ष की) एकजुटता के लिए कदम उठाने की जरूरत है।

ममता बनर्जी की पेशकश कांग्रेस पार्टी का अपमान, ये सांसद राहुल गांधी की असफलता दर्शाता है: विधायक उदय सामंत

मुंबई पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री एवं ‘तृणमूल कांग्रेस पार्टी’ (टीएमसी) की प्रमुख ममता बनर्जी के इंडिया ब्लॉक का नेतृत्व करने की पेशकश की है। शिवसेना विधायक उदय सामंत के मुताबिक ये सांसद राहुल गांधी की असफलता दर्शाता है। शिवसेना विधायक ने आईएएनएस से कहा, “यह कांग्रेस पार्टी का अपमान है। इससे यह बात पता चलता है कि वो राहुल गांधी के नेतृत्व में सफल नहीं हुए। इसलिए वो दूसरे लोगों को तलाश रहे हैं कि कौन गठबंधन का नेतृत्व करें। यह उनकी राजनीति है। लेकिन अगर राहुल गांधी के नेतृत्व में गठबंधन को असफलता मिली है और ममता बनर्जी के बाद नेतृत्व जा रहा है तो पूरी तरह कांग्रेस पार्टी का अपमान है।” राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के अध्यक्ष शरद पवार की तरफ से ईवीएम को लेकर उठाए जा रहे सवाल पर उदय सामंत ने कहा, “विपक्ष को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में जो असफलता मिली है, उन्हें ढकने के लिए ईवीएम का मुद्दा उठाया जा रहा है। वायनाड, नांदेड़ और जहां पर वो जीत दर्ज करते हैं, वहां पर ईवीएम सही काम करता है लेकिन हमारे यहां खराब हो जाता है। ऐसे में ईवीएम को लेकर लोगों के दिमाग को डायवर्ट करना, ‘महाविकास अघाड़ी’ की एक राजनीतिक चाल है।” ‘समाजवादी पार्टी’ के प्रदेश अध्यक्ष अबू आजमी के एमवीए से अलग होने को लेकर शिवसेना विधायक ने कहा, अबू आजमी ने आरोप लगाया कि महाविकास अघाड़ी के नेता दोनों तरफ से बोलते हैं। जिसके कारण वो गठबंधन से बाहर जा रहे हैं। वहीं, इंडिया ब्लॉक को लेकर ममता बनर्जी के बयान पर शिवसेना नेता आशीष जायसवाल ने कहा, “सभी लोग चाहते हैं कि वो देश का नेतृत्व करें, लेकिन वो संभव नहीं है। विपक्ष में एकता, समन्वय और लड़ने की क्षमता नहीं है इसलिए वो भ्रमित हैं। विपक्ष पूरी तरह टूट चुका है, वो एकसाथ कभी नहीं मिल सकते।” ‘पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी’ (पीडीपी) प्रमुख एवं जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती के हिंदुत्व को बीमारी बताने पर शिवसेना नेता ने कहा, वो खुद एक बीमारी हैं।

शहजाद पूनावाला ने कहा- लेफ्ट भी यही बात कर रही है कांग्रेस से नहीं हो पा रहा है। कांग्रेस पार्टी इंडी अलायंस में एक मीम बन चुकी

नई दिल्ली भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इंडिया ब्लॉक में तकरार की खबरों के बीच कहा कि कांग्रेस हारी हुई पार्टी बन गई है जिसे बर्दाश्त करने के मूड में उसके साथी भी नहीं हैं। पूनावाला ने कहा, ” सुबह ममता बनर्जी कहती हैं कि ‘टीएमसी और मुझे इंडी एलायंस का नेता बनाओ, क्योंकि कांग्रेस से यह काम नहीं हो रहा है। दोपहर तक महाविकास अघाड़ी और उद्धव सेना के रुख के कारण, अबू आजमी बाहर निकल जाते हैं, और अबू आजमी कहते हैं कि समाजवादी पार्टी कांग्रेस से अपना रुख स्पष्ट करने की मांग कर रही है। ” उन्होंने आगे कहा, ” फिर, हम देखते हैं कि समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव कहते हैं, राहुल गांधी हमारे नेता नहीं हैं। इंडी अलायंस के नेता नहीं है। कांग्रेस लगातार चुनाव हार रही है और वह अभी भी चुनाव हारी है इसलिए हम लोग सरकार नहीं बना पाए हैं। कोई यह मांग करता है कि इंडी अलायंस का किसी को नेता बनाया जाए तो हम उस मांग का स्वागत करते हैं।” भाजपा नेता ने तंज कसा, “लेफ्ट भी यही बात कर रही है कांग्रेस से नहीं हो पा रहा है। कांग्रेस पार्टी इंडी अलायंस में एक मीम बन चुकी है। पहले परजीवी का मीम बनती थी। अब इंडी एलायंस के सभी लोग कह रहे हैं कांग्रेस नहीं हो पाएगा। कांग्रेस हारी हुई पार्टी है। राहुल गांधी के नेतृत्व में 90 चुनाव हार चुकी है। इंडी अलायंस में अब कांग्रेस को कोई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।” झारखंड में कांग्रेस को डिप्टी सीएम पद ने देने को आधार बनाकर पूनावाला ने कहा, ” झारखंड में कांग्रेस को जेएमएम ने डिप्टी सीएम का पद नहीं दिया। जम्मू-कश्मीर में एक विभाग मिला है। महाराष्ट्र चुनाव में मिली हार के बाद कांग्रेस ईवीएम पर दोष देने लगी तो शरद पवार ने कांग्रेस को आईना दिखा दिया। इंडी अलांयस में शामिल दल कांग्रेस को उनकी मौजूदा स्थिति से अवगत करा रहे हैं। लेकिन कांग्रेस हर बार की तरह वही गलती दोहराती रही है। धूल चेहरे पर थी और कांग्रेस आईना साफ करती रही। इंडी अलांयस के लोग बोल रहे हैं राहुल गांधी हार स्वीकार कीजिए आप हमारे नेता नहीं हो।”

इंडिया ब्लॉक का नेतृत्व करना सब चाहते हैं, नीतीश कुमार की भी यही इच्छा थी – राशिद अल्वी

 नई दिल्ली  कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने इंडिया अलायंस की कमान संभालने की इच्छा संबंधी बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के बयान पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा- बड़ा अलायंस है सब चाहते हैं नेतृत्व करना लेकिन फैसला सर्वसम्मति से लिया जाएगा। ममता बनर्जी के इंडिया गठबंधन के कन्वीनर बनने की इच्छा पर राशिद अल्वी ने कहा, “जब एक बड़ा अलायंस बनता है, तो फैसले एक व्यक्ति या पार्टी के हाथ में नहीं होते। यह सर्वसम्मति से लिया जाता है। हर कोई चाहता है कि वह ही इसका नेतृत्व करे, लेकिन यह संभव नहीं है। जितने सदस्य हैं, उन सभी की सहमति ये यह तय होगा कि कौन इस गठबंधन को चलाएगा। नीतीश कुमार भी पहले यही चाहते थे कि उन्हें इंडिया ब्लॉक का नेतृत्व दिया जाए, लेकिन ऐसा नहीं हो सकता।” इसके साथ ही अल्वी ने अपने गठबंधन के साथी और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल के यमुना की सफाई को लेकर दिए बयान पर घेरा। राशिद अल्वी ने केजरीवाल के इस बयान पर कहा, ” अगर पहले आप यह काम नहीं कर पाए, तो लोग क्यों विश्वास करें कि अब आप इसे ठीक करेंगे? दिल्ली में प्रदूषण, सड़कें और यमुना नदी की सफाई, ये सब मुद्दे पिछले कई वर्षों से हैं, लेकिन आपने इन्हें हल नहीं किया। आपकी सरकार की नाकामियों को लोग अच्छे से जानते हैं।” उन्होंने आगे कहा, ” दिल्ली में जो हालात हैं, वह आपको ही सुधारने चाहिए थे, लेकिन आपने सिर्फ इल्जाम लगाने का काम किया। आम आदमी पार्टी की सरकार सबसे भ्रष्ट और नाकाम है। अरविंद केजरीवाल की सरकार ने दिल्ली को और अधिक समस्याओं में डाल दिया है।” दिल्ली में 24 घंटों में हुई तीन हत्याओं पर राशिद अल्वी ने चिंता व्यक्त की। कहा “दिल्ली के लॉ एंड ऑर्डर की जिम्मेदारी गृह मंत्री की है, क्योंकि यह यूनियन टेरिटरी है और यहां की कानून व्यवस्था केंद्र सरकार और लेफ्टिनेंट गवर्नर के अधीन है। दिल्ली में बढ़ते अपराध और हिंसा के लिए पूरी तरह से केंद्र सरकार और गृह मंत्री जिम्मेदार हैं। जब अमेरिका का राष्ट्रपति भारत आया था, तब दिल्ली में बड़े पैमाने पर दंगे हुए थे और सरकार खामोश रही थी। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि दिल्ली में अब तीन लोग मारे गए हैं, इसके लिए कौन जिम्मेदार है? निश्चित रूप से भारत सरकार और गृह मंत्री जिम्मेदार हैं। दिल्ली की कानून व्यवस्था पूरी तरह से बिगड़ चुकी है।”

दिल्ली चुनाव में मप्र कांग्रेस के नेताओं की जिम्मेदारी,मीनाक्षी नटराजन को टिकट स्क्रीनिंग कमेटी अध्यक्ष, प्रियव्रत सिंह को वार रूम के चेयरमैन

भोपाल  अगले वर्ष होने वाले दिल्ली विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस की कमान मध्य प्रदेश के नेता संभालेंगे। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने टिकट वितरण से लेकर चुनाव की कार्ययोजना बनाने का दायित्व पार्टी ने प्रदेश के नेताओं को दिया है। टिकट के लिए नाम प्रस्तावित करने गठित स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को बनाया है तो वार रूम की जिम्मेदारी पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह को दी गई है। अभी हाल ही में हुए महाराष्ट्र, झारखंड और उसके पहले जम्मू कश्मीर व हरियाणा विधानसभा के चुनाव में मध्य प्रदेश के नेताओं को भेजा गया था। यहां प्रदेश के नेता सहयोगी की भूमिका में थे लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी प्रदेश के नेताओं के ही हाथ में रहेगी। टिकट दावेदारों की कुंडली तैयार करना इसमें सबसे महत्वपूर्ण काम टिकट के लिए संभावित दावेदारों का गुण-दोष के आधार पर आकलन करके नाम प्रस्तावित करना है। यह दायित्व पूर्व सांसद और संगठन में विभिन्न पदों पर काम कर चुकीं मीनाक्षी नटराजन को दिया गया है। उन्हें गांधी परिवार का भरोसेमंद माना जाता है। भारत जोड़ो यात्रा में वे पूरे राहुल गांधी के साथ रहीं। पार्टी ने उन्हें तेलंगाना विधानसभा चुनाव के लिए पर्यवेक्षक बनाकर भी भेजा था। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी की राजनीतिक मामलों की समिति और कार्यकारी समिति की सदस्य हैं। निर्विवादित होने के कारण संगठन ने उन्हें प्रत्याशी चयन का काम दिया है। वार रूम का चेयरमैन प्रियव्रत सिंह वहीं, कमल नाथ सरकार में मंत्री रहे प्रियव्रत सिंह को वार रूम का चेयरमैन बनाया गया है। उन्हें चुनाव लड़ने और लड़वाने दोनों का पर्याप्त अनुभव है। युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय पदाधिकारी से लेकर प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके हैं। पार्टी ने उन्हें अलग-अलग राज्यों के चुनावों में विभिन्न जिम्मेदारी दे चुकी है। चुनाव की रणनीति बनाने के साथ उसके अमल की पूरी जवाबदारी प्रियव्रत की होगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के मीडिया सलाहकार केके मिश्रा का कहना है कि पार्टी युवा नेतृत्व को आगे करने की दिशा में काम कर रही है। यही कारण है कि प्रदेश के दो युवा नेताओं को दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई हैं। दोनों को ही संगठन और चुनाव से जुड़े कामों का पर्याप्त अनुभव है। इसका लाभ चुनाव में मिलेगा। जीतू पटवारी, उमंग सिंघार, कुणाल चौधरी भी संभाल चुके हैं दायित्व प्रदेश के युवा नेताओं पर संगठन को भरोसा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को गुजरात, उमंग सिंघार को झारखंड और कुणाल चौधरी को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए अलग-अलग दायित्व देकर भेजा जा चुका है।

ममता बनर्जी ने जैसे ही इंडिया गठबंधन की लीडरशिप पर अपना दावा ठोका कि कांग्रेस भी खुलकर सामने आई

नई दिल्ली लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजयी रथ को रोकने के लिए तैयार इंडिया गठबंधन में मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने जैसे ही इंडिया गठबंधन की लीडरशिप पर अपना दावा ठोका कि कांग्रेस भी खुलकर सामने आ गई। देश की सबसे पुरानी पार्टी को यह बात रास नहीं आई। हालांकि, ममता के दावे को अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी (सपा) का समर्थन जरूर मिला है। साथ ही राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने लालू यादव को इस गठबंधन की शिल्पकार करार दिया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में बयान दिया कि वह INDIA गठबंधन की कमान संभालने के लिए तैयार हैं। उनके इस बयान ने सहयोगी दलों के बीच असहमति को जन्म दिया है। कांग्रेस का विरोध इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडिया गठबंधन के प्रमुख दल कांग्रेस ने ममता बनर्जी के दावे पर असहमति जताई। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि गठबंधन का नेतृत्व सामूहिक सहमति से तय किया जाना चाहिए, न कि किसी एकतरफा घोषणा से। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “गठबंधन का नेतृत्व एक सामूहिक निर्णय होना चाहिए और इसे सभी सहयोगियों की सहमति से तय किया जाएगा।” समाजवादी पार्टी का रुख समाजवादी पार्टी (एसपी) ने ममता के नेतृत्व का समर्थन किया है। समाजवादी पार्टी ने कहा कि ममता बनर्जी अपने नेतृत्व कौशल से हरियाणा और महाराष्ट्र में लगातार चुनावी हार के बाद इंडिया गठबंधन को मजबूत करेंगी। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सपा प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने कहा, ‘अगर ममता बनर्जी ने ऐसी इच्छा जाहिर की हैं तो INDIA ब्लॉक के नेताओं को उसपर विचार करना चाहिए और उनका सहयोग लेना चाहिए। इससे इंडिया गठबंधन मजबूत होगा। ममता बनर्जी ने भाजपा को बंगाल में रोकने का काम किया है। ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के प्रति हमारा 100 प्रतिशत समर्थन और सहयोग है।’ राजद का बयान राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने इस बहस को अलग दिशा देते हुए कहा कि लालू प्रसाद यादव ही गठबंधन के असली निर्माता हैं। राजद के प्रवक्ता ने कहा, “INDIA गठबंधन किसी एक व्यक्ति की महत्वाकांक्षा पर नहीं बल्कि सामूहिक ताकत पर आधारित है। लालू प्रसाद यादव ने इस गठबंधन की नींव रखी थी और उनकी दृष्टि ही इसे आगे ले जाएगी।” INDIA गठबंधन के सामने चुनौतियां इन विभिन्न बयानों से यह स्पष्ट हो गया है कि विपक्षी दलों को एकजुट रहना चुनौतीपूर्ण होगा। गठबंधन ने अब तक ईवीएम छेड़छाड़ जैसे मुद्दों पर एकजुट होकर आवाज उठाई है, लेकिन नेतृत्व को लेकर विवाद उनके सामूहिक उद्देश्य को कमजोर कर सकता है। सियासी एक्सपर्ट का मानना है कि इन मुद्दों को सार्वजनिक मंच पर लाने के बजाय आंतरिक चर्चा में हल किया जाना चाहिए।

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