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सांसद महुआ मोइत्रा फिर नई मुसीबत में फंसती दिख रही, क्या सांसदी फिर जाएगी

नई दिल्ली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा फिर नई मुसीबत में फंसती दिख रही हैं. उनके खिलाफ दिल्ली पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है. ये केस राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा पर अभद्र टिप्पणी को लेकर दर्ज किया गया है.  भारतीय न्याय संहिता के तहत दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की ये पहली एफआईआर है. राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से दिल्ली पुलिस कमिश्नर के सामने महुआ मोइत्रा के खिलाफ शिकायत दी गई थी. इसी आधार पर स्पेशल सेल ने केस दर्ज किया है. क्या है मामला? दो जुलाई को यूपी के हाथरस में सत्संग के बाद भगदड़ मची थी. इस भगदड़ में 120 से ज्यादा मौतें हुई थीं. मरने वालों में ज्यादातर महिलाएं थीं. चार जुलाई को राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा हाथरस गई थीं. इस दौरान एक शख्स पीछे छाता लेकर चल रहा था. इसका वीडियो सामने आया, जिस पर महुआ मोइत्रा ने अभद्र टिप्पणी की थी. हालांकि, बाद में महुआ ने इसे डिलीट कर दिया था. इस पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया. महिला आयोग ने अपनी शिकायत में कहा कि महुआ की टिप्पणी बेहद अपमानजनक हैं और महिलाओं के सम्मान के साथ जीने के अधिकार का सरासर उल्लंघन है. महिला आयोग ने महुआ मोइत्रा के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है. इसके अलावा, तीन दिन के भीतर एक्शन रिपोर्ट भी मांगी है. एफआईआर में कौनसी धारा? महिला आयोग ने आरोप लगाया था कि महुआ मोइत्रा की टिप्पणी न सिर्फ अपमानजनक है, बल्कि एक महिला के गरिमा के अधिकार का उल्लंघन भी है. महिला आयोग ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 79 के तहत केस दर्ज करने की मांग की थी. महिला आयोग की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 79 के तहत केस दर्ज किया है. X पर महिला आयोग की पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए महुआ ने लिखा, ‘दिल्ली पुलिस इस स्वतः संज्ञान आदेश पर तुरंत कार्रवाई करें. अगर आपको अगले तीन दिन में तुरंत गिरफ्तारी के लिए मेरी जरूरत हो तो मैं नादिया में हूं.’ महुआ ने महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा पर तंज कसते हुए भी लिखा, ‘मैं अपना छाता खुद पकड़ सकती हूं.’ कितनी सजा हो सकती है? भारतीय न्याय संहिता की धारा 79 कहती है कि जो कोई भी महिला की गरिमा को अपमानित करने के इरादे से कुछ बोलता है, कुछ आवाज निकालता है, कुछ इशारे करता है या फिर कुछ भी ऐसा करता है जिससे महिला की निजता में दखल होता है तो दोषी पाए जाने पर जेल की सजा होगी, जिसे तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है. इसके साथ ही ऐसे मामले में दोषी पाए जाने पर जुर्माने की सजा का भी प्रावधान है. तो क्या चली जाएगी सदस्यता? कानूनन अगर किसी सांसद या विधायक को किसी आपराधिक मामले में दो साल या उससे ज्यादा की सजा होती है तो तत्काल उसकी सदस्यता रद्द कर दी जाएगी. 1951 में आए जनप्रतिनिधि कानून की धारा 8(3) में लिखा है कि अगर किसी सांसद या विधायक को दो साल या उससे ज्यादा की सजा होती है तो तत्काल उसकी सदस्यता चली जाएगी. इसके अलावा, सजा पूरी होने के बाद अगले छह साल तक चुनाव लड़ने पर भी रोक लग जाती है. जुलाई 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर किसी मौजूदा सांसद या विधायक को दोषी ठहराया जाता है तो जनप्रतिनिधि कानून की धारा 8(1), 8(2) और 8(3) के तहत वो अयोग्य हो जाएगा. ऐसे में अगर इस मामले में महुआ मोइत्रा को दो साल या उससे ज्यादा की सजा होती है तो उनकी लोकसभा की सदस्यता चली जाएगी. पिछले साल चली गई थी सदस्यता टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा पिछले साल ‘कैश फॉर क्वेरी’ मामले में फंस गई थीं. बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने उनपर रिश्वत लेकर संसद में सवाल पूछने का आरोप लगाया था. महुआ मोइत्रा पर आरोप लगा था कि उन्होंने कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से रिश्वत लेकर संसद में सवाल पूछे थे. ये भी आरोप था कि उन्होंने हीरानंदानी और हीरानंदानी ग्रुप को लोकसभा वेबसाइट के लिए अपने लॉगइन क्रेडेंशियल दिए थे, ताकि वो इसका इस्तेमाल अपने निजी फायदे के लिए कर सकें. महुआ ने हीरानंदानी को पासवर्ड देने की बात मानी थी. उन्होंने कहा था कि उन्होंने हीरानंदानी को पासवर्ड इसलिए दिया था, ताकि उनके ऑफिस से कोई सवाल टाइप और अपलोड कर दे. उन्होंने कहा था कि कोई भी उनकी जानकारी के बगैर सवाल नहीं डाल सकता था. हालांकि, लोकसभा की एथिक्स कमेटी ने महुआ को दोषी मानते हुए सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की थी. इसके बाद 8 दिसंबर 2023 को उनकी लोकसभा की सदस्यता रद्द कर दी गई थी.  

लोकसभा चुनाव के नतीजों को लेकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी सिरफुटौव्वल शुरू

 नई दिल्ली लोकसभा चुनाव के नतीजे आए एक महीने से अधिक समय गुजर गया. संसद का पहला सत्र संपन्न हो चुका और नवगठित सदस्यों ने शपथ भी ले ली है लेकिन राजनीतिक दलों में चुनाव नतीजों की समीक्षा का सिलसिला चल रहा है. लोकसभा चुनाव में गठबंधन कर उतरी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में अब केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली के नतीजों को लेकर सिरफुटौव्वल शुरू हो गई है. गठबंधन के तहत कांग्रेस को दिल्ली की सात में से तीन सीटें मिली थीं और आम आदमी पार्टी ने चार सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे. गठबंधन के प्रत्याशियों को सभी सात सीटों पर मात मिली थी. कांग्रेस के उम्मीदवारों ने अब हार के लिए आम आदमी पार्टी को जिम्मेदार ठहराया है. कांग्रेस ने दिल्ली में हार की समीक्षा के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई थी. फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के सामने दिल्ली के तीनों उम्मीदवारों ने अपनी हार के कारण बताए थे. कमेटी ने अब अपनी रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को सौंप दी  है. इस रिपोर्ट के मुताबिक उम्मीदवारों ने आम आदमी पार्टी पर हार का ठीकरा फोड़ा है. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार रहे उदित राज, जेपी अग्रवाल और कन्हैया कुमार ने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के सामने आरोप लगाया है कि आम आदमी पार्टी चुनाव में अपने वोट ट्रांसफर कराने में विफल रही. तीनों नेताओं ने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी को ये भी बताया है कि चुनाव प्रचार के दौरान आम आदमी पार्टी ने उनका समर्थन नहीं किया. हालांकि, फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने कांग्रेस अध्यक्ष को सौंपी अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि तीनों ही उम्मीदवारों ने कांग्रेस कैडर के साथ अच्छा व्यवहार नहीं दिया. इसकी वजह से उम्मीदवारों को कांग्रेस कैडर की नाराजगी का भी सामना करना पड़ा. तीनों उम्मीदवारों को ये उम्मीद थी कि आम आदमी पार्टी ही उनकी जीत सुनिश्चित कर देगी. गौरतलब है कि गठबंधन के तहत केंद्र शासित प्रदेश की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी ने चार और कांग्रेस ने तीन सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे. गठबंधन में कांग्रेस को उत्तर पश्चिमी दिल्ली, चांदनी चौक और उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट मिली थी. पार्टी ने उत्तर पश्चिमी सीट से पूर्व केंद्रीय मंत्री उदित राज, चांदनी चौक से पूर्व सांसद और दिल्ली कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके जेपी अग्रवाल और उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट से कन्हैया कुमार को चुनाव मैदान उतारा था. कांग्रेस के तीनों ही उम्मीदवारों को बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा था.  

बिहार की लगेगी लॉटरी, आंध्र प्रदेश ने भी रखी डिमांड, दोनों राज्यों में इस बार के बजट में होगी धन वर्षा

नई दिल्ली निर्मला सीतारमण 23 जुलाई को देश का बजट पेश करेंगी। 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी अपने दम पर बहुमत हासिल करने में असफल रही। एनडीए सरकार की निर्भरता चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी और नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू पर अधिक है। यही कारण है कि इस साल के बजट में बिहार और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों पर केंद्र सरकार मेहरबानी दिखा सकती है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों ही राज्यों ने 2024 के केंद्रीय बजट से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि मांगी है। रॉयटर्स और एक सूत्र द्वारा समीक्षा किए गए दस्तावेजों के अनुसार, भाजपा के दो प्रमुख सहयोगियों ने चालू वित्त वर्ष के लिए फंड के अलावा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए उधार लेने की सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया है। 16 सांसदों वाली टीडीपी और 12 सांसदों वाली जेडीयू ने हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनावों में भाजपा को केंद्र में सरकार बनाने में मदद की थी। इसके बाद से लगातार उम्मीद की जा रही थी कि नायडू और नीतीश भाजपा के लिए किंगमेकर की भूमिका निभाने के बदले में अपने राज्यों के लिए अतिरिक्त धनराशि की मांग करेंगे। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, नायडू ने अकेले ही 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता मांगी है। टीडीपी सुप्रीमो ने इस सप्ताह की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की थी। सूत्रों का कहना है कि इस दौरान उन्होंने अपनी मांगों पर जोर दिया। मनीकंट्रोल ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि आंध्र प्रदेश ने अपनी राजधानी अमरावती के विकास के लिए धन मांगा है। इसके अलावा पोलावरम सिंचाई परियोजना के लिए भी राशि की मांग की गई है। तमिलनाडु ने रखी डिमांड नायडू विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम और अमरावती में मेट्रो परियोजनाओं, एक लाइट रेल परियोजना और विजयवाड़ा से मुंबई और नई दिल्ली तक वंदे भारत ट्रेन के लिए भी धन चाहते हैं। इसके अलावा, उन्होंने पिछड़े जिलों के लिए अनुदान और रामायपटनम बंदरगाह और कडप्पा में एक एकीकृत इस्पात संयंत्र जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए समर्थन मांगा है। बिहार को चाहिए 9 नए एयरपोर्ट एक रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार नौ नए हवाई अड्डों, दो बिजली परियोजनाओं, दो नदी जल कार्यक्रमों और सात मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए धन मांग रहा है।  रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों राज्य यह भी चाहते हैं कि केंद्र सरकार द्वारा सभी राज्यों को बुनियादी ढांचे पर खर्च के लिए दिए जाने वाले बिना शर्त दीर्घकालिक ऋण को लगभग दोगुना करके 1 लाख करोड़ रुपये कर दिया जाए। अंतरिम बजट में केंद्र ने जीडीपी के 5.1% के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य रखा। 6 जुलाई को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने घोषणा की कि संसद का बजट सत्र 22 जुलाई से 12 अगस्त के बीच आयोजित किया जाएगा, जबकि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 23 जुलाई को बजट पेश करेंगी।  

कांग्रेस में बचे हिंदुओं को राहुल गांधी की मानसिकता से सावधान रहना चाहिए: विश्व हिंदू परिषद

नई दिल्ली विश्व हिंदू परिषद का कहना है कि कांग्रेस में बचे हिंदुओं को राहुल गांधी की मानसिकता से सावधान रहना चाहिए। राम जन्मभूमि आंदोलन के संबंध में राहुल गांधी का ताजा बयान, झूठ का एक पुलिंदा है तथा हिंदुओं के प्रति घृणा से भरा हुआ है। लालकृष्ण आडवाणी द्वारा निकाली गई रथ यात्रा का इस संपूर्ण संघर्ष में एक महत्वपूर्ण योगदान है। परंतु, राहुल गांधी का यह कहना कि राम जन्मभूमि का संघर्ष इस यात्रा से शुरू हुआ, उनकी अज्ञानता का परिचय देता है। विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन ने रविवार को कहा कि जन्मभूमि के लिए हिंदुओं का संघर्ष वर्ष 1528 से ही शुरू हो गया था, जब आक्रांता बाबर ने राम जन्मभूमि पर स्थित रामलला के पावन मंदिर को तोड़ा था। सुप्रीम कोर्ट के 2019 में निर्णय आने तक संपूर्ण देश के राम भक्त निरंतर संघर्षरत रहे। डॉ. जैन ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने फिर एक बार हिंदू समाज का अपमान किया है, जिसने कभी विदेशी आक्रमण के समक्ष घुटने नहीं टेके। राहुल गांधी ने गुरु नानक देव, गुरु तेग बहादुर और गुरु गोविंद सिंह जी के अमर योगदान को भुलाने का षड्यंत्र किया है, जो अयोध्या पधारे थे। उनकी स्मृति में बने गुरुद्वारों में आज भी लाखों श्रद्धालु जाकर अपने आप को धन्य समझते हैं। राहुल गांधी ने अपमानित किया है, उन लाखों बलिदानियों का, जिन्होंने राम जन्मभूमि को मुक्त करने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है। राहुल ने उन 60 करोड़ राम भक्तों के योगदान को भी अपमानित किया है, जिन्होंने राम जन्मभूमि के निर्माण के लिए खुले दिल से योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि महंत दिग्विजय नाथ, महंत अवैद्यनाथ, महंत रामचंद्र परमहंस, अशोक सिंघल जैसे महापुरुषों के योगदान को राहुल गांधी भुलाना चाहते हैं, जो कभी संभव नहीं है। इन सब के प्रति हिंदू समाज हमेशा कृतज्ञ रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि वह व्यक्ति इस कृतज्ञता को नहीं समझ सकता, जिसकी परंपरा देश के विकास में योगदान देने वाले महापुरुषों को अपमानित करने की रही है। राहुल के परिवार के मन में हिंदुओं के प्रति कितनी नफरत भरी है, उनके इन बयानों से स्पष्ट हो जाता है। फैजाबाद में सपा उम्मीदवार की विजय का विश्लेषण हो सकता है, लेकिन बार-बार अयोध्यावासियों को निशाने पर लेना किसी भी तरह उचित नहीं है। उन्हें ध्यान रखना चाहिए कि संघर्ष के हर पड़ाव का केंद्र बिंदु अयोध्या रहा है। अयोध्यावासियों का योगदान कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। राहुल गांधी अपनी झूठी विजय की मृग मरीचिका में जी रहे हैं। हिंदू को अपमानित करने का जो मकड़जाल वे बुन रहे हैं, उसमें वे ही फंसेंगे।

राहुल गांधी के बयान पर कटाक्ष किया, कहा- उन्हें हसीन सपने देखने की पुरानी आदत, कांग्रेस भानुमती का कुनबा: राकेश सिन्हा

पटना कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आगामी गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा को हराने की बात कही है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा को अयोध्या की तर्ज पर ही गुजरात में हराएंगे। लोकसभा सांसद के इस वार पर भाजपा ने पलटवार किया है। भाजपा के राज्यसभा सांसद और आरएसएस विचारक राकेश सिन्हा ने राहुल गांधी के बयान पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, ” राहुल गांधी को हसीन सपने देखने की पुरानी आदत है। कुछ चीजें है जो दुर्घटनाओं में हो जाती हैं। लोकसभा चुनाव एक दुर्घटना थी और इसमें कुछ सीट कांग्रेस पार्टी को अधिक मिल गई है।” सिन्हा ने कांग्रेस को संगठन हीन पार्टी करार दिया। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। कांग्रेस का ना अपना संगठन है, ना ही दृष्टि है। जिस पार्टी के पास ना संगठन हो न दृष्टि हो, जो पार्टी भानुमती का कुनबा हो, वह देश में कभी भी विकल्प नहीं बन सकती। सांसद से राजद प्रमुख और बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव के ‘सरकार गिरने’ वाले बयान को लेकर भी सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा,” वह अपनी पार्टी को संभाल लें। किसी प्रतिभावान व्यक्ति को राजनीति में आगे लाएं। परिवार पर आधारित लोग जो वह परिवार से बाहर जाते नहीं है। उनको दूसरों को नैतिक उपदेश देने का अधिकार नहीं है।” बिहार एनडीए में तालमेल के सवाल पर उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी गठबंधन धर्म का निर्वाह करती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जो नेतृत्व है, वह हमेशा सर्व समावेशी नेतृत्व रहा है। पीएम मोदी के नेतृत्व में जो कश्मीर से कन्याकुमारी तक आस्था है। वो स्वतंत्र भारत के किसी नेतृत्व में नहीं है। लालू प्रसाद यादव ने 5 जुलाई को, राजद के स्थापना दिवस पर समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच दावा किया था कि केंद्र की एनडीए सरकार अगस्त में गिर जाएगी। उन्होंने कहा था, ”केंद्र सरकार बहुत कमजोर है…बहुत मुमकिन है कि अगस्त तक यह सरकार गिर जाएगी।” उनके इस बयान के बाद ही आरोप प्रत्यारोप का दौर पक्ष-विपक्ष के बीच शुरू हो गया है।

हाथरस की घटना पर जितनी तेज कार्रवाई करनी चाहिए, योगी सरकार ने की, राहुल गांधी कर रहे दुर्भाग्यपूर्ण राजनीति: राकेश त्रिपाठी

नई दिल्ली यूपी के हाथरस में भोले बाबा के सत्संग के बाद मची भगदड़ में सौ से ज्यादा लोगों की मौत की घटना पर बयानबाजियों का दौर जारी है। इसी बीच कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर पीड़ितों की मदद की अपील करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस पर भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने पलटवार किया है। भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि हाथरस की दुखद घटना पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी दुर्भाग्यपूर्ण राजनीति कर रहे हैं, यह अच्छी बात नहीं है। हाथरस की घटना पर जितनी तेज गति से कार्रवाई करनी चाहिए, योगी सरकार ने की। मुआवजा राशि भी लोगों तक पहुंचा दी गई है। इसके बावजूद राहुल गांधी फोटो अपॉर्चुनिटी तलाश रहे हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया में कैसे सनसनी बनाई जाए, कैसे सुर्खियां बटोरी जाए, इसके लिए राहुल गांधी घृणित राजनीति करने का काम कर रहे हैं। ऐसी घटना पर संवेदना जताई जाती है, सहानुभूति रखी जाती है। राज्य सरकार दोषियों पर कार्रवाई कर रही है, उसके बावजूद सरकार को कटघरे में खड़ा करना, वोट बैंक की तलाश करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की जांच के लिए योगी सरकार ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस बृजेश कुमार श्रीवास्तव के अध्यक्षता में एक न्यायिक जांच आयोग बनाई है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई है। पूरे मामले की जांच हो रही है, एफआईआर दर्ज हो चुकी है, विवेचना हो रही है, कई गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं। इसके बावजूद सवाल खड़ा करना गलत है, इससे स्थापित होता है कि आप राजनीति कर रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है, ऐसा घृणित काम करने से राहुल गांधी को बाज आना चाहिए। उल्लेखनीय है कि शनिवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखकर मुआवजे की राशि को बढ़ाने, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि मुआवजा राशि अपर्याप्त है, इसलिए मुआवजे की राशि बढ़ाई जाए और इसे जल्द से जल्द मृतकों के परिजनों को दिया जाए। उन्होंने अपने पत्र में आगे लिखा कि हादसे की जांच पारदर्शी तरीके से कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।

पीयूष गोयल ने कहा- दिल्ली की सातों लोकसभा सीट जिताने के लिए जनता को धन्यवाद दिया, कहा- डबल इंजन’ सरकार की दरकार

नई दिल्ली आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव के मद्देनजर रविवार को प्रदेश भाजपा कार्यकारिणी की बैठक में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कई बातों का जिक्र किया। उन्होंने दिल्ली की सातों लोकसभा सीट जिताने के लिए यहां की जनता को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यह जीत साधारण नहीं है, दिल्ली की जनता का योगदान अमूल्य है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विजय सिर्फ विकास कार्यों की विजय है, जो देशहित में लगातार देशवासियों की सेवा करते रहते हैं। अनेकों कार्यक्रम और योजनाओं से मोदी सरकार ने विकास कार्य किया है। हमारा ‘विकसित भारत’ बनाने का संकल्प है। उन्होंने कहा कि एक बालक बुद्धि नेता को समझ नहीं आ रहा है कि तीसरी बार उनकी 100 से कम सीटें रहीं और 13 राज्यों में उनका खाता तक नहीं खुला। दक्षिण भारत में अगर कोई सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है तो वह भाजपा है। कांग्रेस सिर्फ परजीवी पार्टी बनकर रह गई है और बैसाखी के बगैर वह किसी भी राज्य में चुनाव जीत नहीं सकती है। दिल्ली में तो कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने मिलकर चुनाव लड़ा, इसके बावजूद भाजपा को 54 फीसद वोट मिला। दिल्लीवासियों ने साबित कर दिया कि वे पीएम मोदी की नीतियों के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के तीसरे कार्यकाल में तीन गुना ऊर्जा के साथ हम आगे काम करेंगे और यह देश तीन गुना आगे बढ़ेगा। व्यापार को आगे बढ़ाने में हम काम करेंगे। हमारी सरकार गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्ति के लिए आगे भी काम करती रहेगी। देश को गरीबी से मुक्ति दिलाना है। नारी सम्मान को लेकर मोदी सरकार सदैव समर्पित भाव से काम कर रही है। हमने तीन करोड़ लखपति दीदी बनने का संकल्प भी लिया है। 11 करोड़ घरों में मुफ्त में शौचालय बनाकर जीवन जीने के तरीके में हमारी सरकार ने बदलाव लाया है। पीएम मोदी ने हर घर में पाइप से गैस पहुंचाने का संकल्प लिया है। उन्होंने बताया कि साल 2014 में 3 करोड़ घरों में नल से जल पहुंचता था, जो अब 16 करोड़ हो गया है। 2014 से काम को एक नई गति मिली है। मेक इन इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित कई अन्य योजनाओं के साथ मोदी सरकार ने देश के विकास में लगातार अपना योगदान दिया है। देश की अर्थव्यवस्था को 10 वर्षों में 11वीं से 5वीं बनाने का काम मोदी सरकार ने किया है। यह सफर आसान नहीं रहा है, कोरोना की मार को देश ने झेला है। पीयूष गोयल ने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि इमरजेंसी के वक्त हुए अत्याचार के बारे में देश की जनता को और खासकर दिल्ली वालों को बताना चाहिए। उन्होंने कहा, जो आज संविधान की बात कर रहे हैं, उन्होंने कैसे इसका दुरुपयोग किया, कैसे सत्ता में रहकर विकास कार्यों में बाधा डाला और भ्रष्टाचार किया, इसकी जानकारी घर-घर तक पहुंचानी है। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि जिस मेहनत के साथ आपने दिल्ली में लोकसभा की सभी सीटों को जिताने में योगदान दिया है, ठीक वही योगदान विधानसभा में भी मिलेगा। युवा और महिला कार्यकर्ताओं को अधिक मेहनत करनी है, ताकि दिल्ली भ्रष्टाचार मुक्त और विकास के पथ पर अग्रसर हो सके। हम एक ऐसी सरकार बनाएंगे, जो दिल्ली का कायाकल्प करेगी। 2025 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को लाने के लिए हमें अभी से मेहनत करनी पड़ेगी। गोयल ने कहा, आज दिल्ली सरकार का बजट 80 हजार करोड़ का है। लेकिन, दिल्ली का विकास नहीं हुआ। भाजपा को मौका मिलेगा, तो हम पांच साल में दिल्ली का कायाकल्प कर देंगे। उन्होंने कहा, “दिल्ली में केजरीवाल सरकार दस साल में एक भी नया प्रोजेक्ट नहीं लाई, दूसरे राज्यों में जो काम राज्य सरकारें करती है, दिल्ली में वो काम केंद्र सरकार करती है। दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने आम जनता को सुविधा देने के लिए कोई काम नहीं किया। झुग्गी वालों को मकान देने के लिए कोई काम नहीं किया। हमें 2025 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में इस भ्रष्टाचारी सरकार को उखाड़ फेंकना होगा और डबल इंजन की सरकार बनानी होगी।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा- जो एरिया मई 2020 तक भारत के कब्जे में था, वहां चीन अपने सैन्य अड्डे कैसे स्थापित कर सकता है?

नई दिल्ली कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि चीन एलएसी पर बॉर्डर की जो स्थिति है, उस पर देश को विश्वास में लिया जाए। सवाल किया कि जो एरिया मई 2020 तक भारत के कब्जे में था, वहां चीन अपने सैन्य अड्डे कैसे स्थापित कर सकता है? कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि चीन पैंगोंग त्सो के पास उस जमीन पर सैन्य अड्डा कैसे बना सकता है, जो मई 2020 तक भारत के कब्जे में था? वो भी तब जब हम गलवान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए “क्लीन चिट” के पांचवें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं, जहां (गलवान) हमारे बहादुर सैनिकों ने अपने जीवन का बलिदान दिया, चीन हमारी क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करना जारी रख रहा है। उन्होंने कहा कि हाल ही में 10 अप्रैल 2024 को विदेशी प्रेस को दिए इंटरव्यू में पीएम मोदी वैश्विक मंच पर भारत का पक्ष मजबूती से रखने में नाकाम रहे। 13 अप्रैल 2024 को विदेश मंत्री ने यह बयान दिया कि चीन ने हमारी किसी भी ज़मीन पर कब्ज़ा नहीं किया है। विदेश मंत्री के इस बयान ने चीन के प्रति मोदी सरकार की नम्र नीति को उजागर कर दिया। 4 जुलाई 2024 को भले ही देश के विदेश मंत्री ने अपने चीनी समकक्ष से मुलाकात की और कहा कि एलएसी (वास्तविक नियंत्रण रेखा) का सम्मान करना और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति सुनिश्चित करना आवश्यक है। लेकिन, चीन हमारे क्षेत्र पर कब्ज़ा करने और सिरिजाप में एक सैन्य अड्डे का निर्माण करने के लिए आक्रामक बना हुआ है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा यह वह भूमि है जो भारतीय नियंत्रण में थी। उन्होंने आरोप लगाया कि एलएसी पर यथास्थिति कायम नहीं रखने के लिए केंद्र की मोदी सरकार जिम्मेदार है। हमने डेपसांग प्लेन्स, डेमचोक और गोगरा हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र सहित 65 में से 26 पेट्रोलिंग प्वाइंट (पीपी) पर कब्जा खो दिया है। ‘मोदी की चीनी गारंटी’ जारी है, क्योंकि उनकी सरकार अपनी लाल आंख पर 56 इंच के बड़े चीनी ब्लिंकर पहनती है। उन्होंने एक बार फिर एलएसी पर सीमा की स्थिति पर देश को विश्वास में लेने की अपनी मांग दोहराई है। कांग्रेस अध्यक्ष का कहना है कि हम अपने वीर सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।

महुआ मोइत्रा की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ीं, नए आपराधिक कानूनों के तहत FIR दर्ज, जाने क्या है मामला

नई दिल्ली तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा की एक बार फिर से मुश्किलें बढ़ गई हैं। हाथरस कांड के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग की प्रमुख रेखा शर्मा के खिलाफ किए गए एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर महुआ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। नए आपराधिक कानून के तहत महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने को लेकर मामला दर्ज हुआ है। यूपी के हाथरस में पिछले दिनों ‘भोले बाबा’ के सत्संग में भगदड़ मच गई थी, जिसके बाद 121 लोगों की जान चली गई। इस हादसे के बाद महिला आयोग प्रमुख रेखा शर्मा घटनास्थल पर पहुंची थीं। सामने आए वीडियो में रेखा शर्मा के लिए किसी और ने बारिश से बचाने के लिए छाता पकड़ा हुआ था। इस पर महुआ मोइत्रा ने एक्स पर लिखा था कि वह अपने बॉस का पजामा संभालने में बहुत व्यस्त हैं। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद महुआ ने अपने पोस्ट को हटा लिया है। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने अपनी अध्यक्ष रेखा शर्मा के विरुद्ध तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा की आपत्तिजनक टिप्पणी पर स्वत: संज्ञान लेते हुए उनके खिलाफ पुलिस से प्राथमिकी दर्ज करने के लिए कहा था। एनसीडब्ल्यू ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”अभद्र टिप्पणी अपमानजनक है और यह गरिमा के साथ रहने के एक महिला के अधिकार का उल्लंघन है। आयोग ने पाया कि यह टिप्पणी भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 79 के अंतर्गत आती है।” एनसीडब्ल्यू ने कहा कि वह अपमानजनक टिप्पणियों की कड़ी निंदा करता है और मोइत्रा के खिलाफ सख्त कार्रवाई चाहता है। एनसीडब्ल्यू ने लिखा था, ”मोइत्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए और तीन दिनों के भीतर आयोग को एक विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट से अवगत कराया जाना चाहिए।” इसके बाद, ‘एक्स’ पर एनसीडब्ल्यू के पोस्ट पर ‘रिपोस्ट’ करते हुए मोइत्रा ने लिखा कि दिल्ली पुलिस आए, कृपया इन स्वत: संज्ञान आदेशों पर तुरंत कार्रवाई करें। अगर आपको अगले तीन दिनों में त्वरित गिरफ्तारी करने के लिए मेरी आवश्यकता हो तो मैं नदिया में हूं।” एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष पर स्पष्ट रूप से तंज कसते हुए महुआ ने कहा, ”मैं अपना छाता खुद संभाल सकती हूं।” एक अन्य पोस्ट में मोइत्रा ने शर्मा द्वारा किए गए पोस्ट के कई ‘स्क्रीनशॉट’ साझा किए और कहा कि उन पोस्ट के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।

छिंदवाड़ा लोकसभा जीतने के बाद बीजेपी अमरवाड़ा उपचुनाव भी जीतना चाहती है तो कांग्रेस लोकसभा की हार का बदला लेने के मूड में

अमरवाड़ा लोकसभा चुनाव के बाद मध्य प्रदेश में अब एक और चुनाव होना है. 10 जुलाई को एमपी के अमरवाड़ा में उपचुनाव होना है. यह सिर्फ एक उपचुनाव नहीं, बल्कि बीजेपी और कांग्रेस की नाक का सवाल बन गया है. छिंदवाड़ा लोकसभा जीतने के बाद बीजेपी इस विधानसभा को भी जीत लेना चाहती है तो वहीं कांग्रेस और कमलनाथ लोकसभा की हार का बदला लेने के मूड में है. दरअसल, पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी भले ही 164 सीटें जीत गई थी, लेकिन छिंदवाड़ा जिले की सभी 7 सीटों पर उसे हार का मुंह देखना पड़ा था. इनमें से एक सीट अमरवाड़ा विधानसभा सीट थी, जहां कांग्रेस के कमलेश शाह ने जीत दर्ज की थी. कमलेश ने जॉइन की बीजेपी कांग्रेस को यहां झटका तब लगा, जब लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस विधायक कमलेश शाह ने बीजेपी का दामन थाम लिया और विधायकी से इस्तीफा दे दिया. विधानसभा अध्यक्ष के इस्तीफा स्वीकार करते ही अमरवाड़ा सीट को खाली घोषित कर दिया गया और इसी वजह से अब यहां उपचुनाव हो रहा है. आसान नहीं BJP की राह बीजेपी ने भले ही विधानसभा चुनाव में बंपर जीत दर्ज की, लेकिन छिंदवाड़ा में वो सेंध नहीं लगा पाई थी. यहां सभी सीट कांग्रेस ने जीती थी. हालांकि, छिंदवाड़ा लोकसभा जीत कर बीजेपी ने भले ही इतिहास रचा हो, लेकिन अमरवाड़ा में आखिरी बार बीजेपी 2008 में विधानसभा चुनाव जीती थी. उसके बाद से ही बीजेपी को यहां जीत का इंतजार है. बीजेपी की तरफ से मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मोर्चा संभाल रखा है. वहीं, कांग्रेस की तरफ से कमलनाथ भी अपने गढ़ की विधानसभा सीट को बचाने में ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं. आदिवासी वर्ग तय करता है हार-जीत अमरवाड़ा विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षित सीट है. 2 लाख 55 हजार से ज्यादा वोटरों वाली आदिवासी बाहुल्य इस सीट पर हार और जीत का फैसला जनजाति वर्ग ही तय करता है. कुल वोटरों में से करीब 58% वोटर तो यहां अनुसचित जनजाति के हैं. आंकड़ों के मुताबिक 2 लाख 55 हजार वोटरों में से करीब 1 लाख 40 हजार वोटर तो अनुसूचित जनजाति के हैं. इसके बाद अनुसूचित जाति (SC) वोटर हैं, जिनकी संख्या करीब 21 हजार 167 है. यहां 6,308 मुस्लिम मतदाता भी हैं. ग्रामीण और शहरी वोटरों का अनुपात देखें तो कुल वोटरों का करीब 93% वोटर ग्रामीण क्षेत्रों के हैं. यानी इस विधानसभा सीट पर जीत का फैसला ग्रामीण आबादी ही करती है. बीजेपी-कांग्रेस में मुकाबला, गोंगपा बिगाड़ेगी खेल? अमरवाड़ा में मुख्य मुकाबला तो बीजेपी प्रत्याशी कमलेश शाह और कांग्रेस प्रत्याशी धीरन शाह इनवाती के बीच है, लेकिन आदिवासी बहुल सीट पर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी दोनों दलों के वोटरों में सेंध लगाने का दम रखती है. गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के उम्मीदवार देवरावेन भलावी पर भी सबकी नजरें लगी हुई हैं, क्योंकि साल 2003 में अमरवाड़ा से गोंडवाना गणतंत्र पार्टी चुनाव जीत चुकी है. कमलेश शाह का राजघराने से ताल्लुक बीजेपी प्रत्याशी कमलेश शाह तीन बार से अमरवाड़ा के विधायक हैं. यहां के प्रतिष्ठित हर्रई राजघराने से आते हैं. वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी धीरन शाह इनवाती की वैसे तो कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं, लेकिन आंचल कुंड दादा दरबार से होने के कारण उन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता. क्योंकि आदिवासी बहुल इस सीट पर आदिवासी वोटरों का आंचल कुंड धाम से जुड़ाव है.  

कांग्रेस अग्निवीर ही नहीं एमएसपी जैसे कई मुद्दो्ं पर बीजेपी को बैकफुट पर डालने के लिए हथकंडे अपनाए

नई दिल्ली अग्निवीर पर राहुल गांधी और कांग्रेस ने संसद में और संसद के बाहर जो नरेटिव सेट करना चाहा फिलहाल उस पर लगाम लगती दिख रही है. सेना के क्लैरिफिकेशन के बाद शहीद अग्निवीर परिवार ने भी मान लिया है कि उसे अब तक उसे 98 लाख रुपये मिल चुके हैं और 67 लाख की रकम और मिलने वाली है. इसके अलावा पंजाब सरकार से भी एक करोड़ रुपया अतिरक्त परिवार को मिला है. सेना से मिले 98 लाख रुपये के बैंक ट्रांजेक्शन की डिटेल भी सामने आ चुकी है. शायद इन्ही सब कारणों का नतीजा है कि कांग्रेस ने शुक्रवार को इस मुद्दे पर बिल्कुल चुप्पी साध ली है. पर देर शाम तक कांग्रेस की ओर से पहले रणदीप सुरजेवाला ने पीसी करके सफाई देने की कोशिश की. फिर राहुल गांधी का भी बयान आ गया. अब कांग्रेस इंश्योरेंस की रकम मिलने की बात कहकर झेंप मिटाना चाहती है. कांग्रेस को समझना चाहिए कि इंश्योरेंश के लिए भी प्रिमियम जमा करना होता है, और सरकार सभी अस्थाई कर्मचारियों के लिए इतनी बड़ी रकम की इंश्योरेंश नहीं कराती. दरअसल कांग्रेस आज कल भारतीय जनता पार्टी के ही तरीके से आक्रामक ढंग से खेल रही है. झूठ या सच किसी भी तरीके से सामने वाली पार्टी पर हावी होना है. अग्निवीर ही नहीं एमएसपी आदि जैसे कई मुद्दो्ं पर बीजेपी को बैकफुट पर डालने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाए गए. पर अग्निवीर जैसे संवेदनशील मुद्दे पर विवाद खड़ा करके कांग्रेस ने भारतीय सेना को नुकसान पहुंचाया है. जिन परिवारों से सेना के सबसे निचले लेवल की भर्तियां होती हैं उन तक जो गलतफहमियां पैदा हो चुकी हैं उन्हें खत्म होने में महीनों में लग जाएंगे. झूठ बातों का नरेटिव सेट करना भारतीय राजनीति में सबसे बड़े बुराई के रूप में उभरी है. राजनीतिक फायदा उठाने के लिए इस हथकंडे का इस्तेमाल सभी पार्टियां करने लगी हैं. लेकिन अग्निवीर को लेकर जिस तरह की बातें संसद में हुई हैं, वे फिक्र बढ़ाने वाली हैं – और इस मामले में सेना की भी एंट्री होने से बात और भी सीरियस हो जाती है. इसलिए जरूरी है कि अग्निवीर ही नहीं किसी भी तरह का झूठ बोलकर जनता को गुमराह करने वाले बयानों को रोकने के लिए जल्द से जल्द कोई कदम उठाया जाना चाहिये. लोकसभा में झूठ गंभीर मुद्दा है, पर होगा कुछ नहीं लोकसभा भारतीय लोकतंत्र का मंदिर है. यहां पर सत्ता पक्ष या विपक्ष, किसी भी पक्ष के लोग झूठ बोलते हैं तो उस पर तत्काल एक्शन की व्यवस्था होनी चाहिए. पीएम नरेंद्र मोदी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से सदन में राहुल गांधी के झूठ पर झूठ बोले जाने पर कार्रवाई करने की अपील की थी. बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने भी राहुल के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष को नोटिस भेजा है. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने साफ-साफ कहा है कि गांधी परिवार का सदस्य होने के नाते राहुल गांधी सदन को गुमराह करके बच नहीं सकते हैं, उन्हें नियमों के तहत कार्रवाई का सामना करना ही पड़ेगा. पर ऐसा कुछ होता नजर नहीं आता. गृहमंत्री अमित शाह ने भी राहुल गांधी के अग्निवीर योजना, हिंदुत्व, किसानों के मुद्दे पर जो भी बयान दिया, उस पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी. उन्होंने स्पीकर ओम बिरला से नेता प्रतिपक्ष के बयानों की जांच की मांग की थी. शाह ने कहा, बयानों के सत्यापन का निर्देश दिया जाए और हमें संरक्षण प्रदान किया जाए. राहुल गांधी ने भाषण के अंत में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष की कई बातें तथ्यात्मक और सत्य नहीं है. उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि इन बातों का सत्यापन किया जाए. जिसपर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा, सत्यापन किया जाएगा. पर एक्शन के नाम पर कुछ नहीं होने वाला है. क्योंकि झूठ का सहारा सभी लेते हैं. चुनाव प्रचार के दौरान भी लगातार झूठ बोला गया पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह ने चुनाव प्रचार के दौरान दूषित चुनाव अभियान पर एक बयान देकर एक बहस को जन्म दे दिया था. सिंह ने कहा था कि अतीत में किसी भी प्रधान मंत्री ने समाज के एक विशिष्ट वर्ग या विपक्ष को निशाना बनाने के लिए ऐसे घृणित, असंसदीय और असभ्य शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया है. पर मनमोहन सिंह ने केवल एक चश्मे से ही वर्तमान को देखा. जबकि झूठे प्रचार से गलत नरेटिव सेट करने की कोशिशें इस बार के चुनावों इंडिया गठबंधन की ओर से ज्यादा हुईं.एक उदाहरण देखिए नरेंद्र मोदी फिर पीएम बन गए तो देश में फिर चुनाव नहीं होंगे. रूस की तरह देश में एक दलीय प्रणाली की शुरूआत होगी और पुतिन की तरह नरेंद्र मोदी स्थाई रूप से देश के शासक बन जाएंगे. संविधान खतरे में है, आरक्षण खतरे में है का नरेटिव सेट करने की कोशिश कितनी हास्यास्पद थी. इसका फायदा भी विपक्ष को मिला. पर क्या देश में अब तक संविधान संशोधन नहीं होते रहे हैं. कांग्रेस राज में कितने संविधान संशोधन हुए हैं. क्या संविधान खतरे में पड़ गया. इसी तरह आरक्षण समाप्त करने का भ्रम फैलाना देश की जनता के साथ गद्दारी से कम नहीं था. अरविंद केजरीवाल का सीएए विरोध तो इतना हास्यास्पद था कि सीधे इसके लिए केस होना चाहिए था. चुनाव प्रचार के शुरूआती दिनो में कई दिन टीवी पर वे आते और यही कहते कि इस कानून के बन जाने के बाद करोड़ों पाकिस्तानी दिल्ली में आकर बस जाएंगे. हमारी नागरिक सुविधाओं का क्या होगा. जबकि हर कोई जानता है कि इस कानून के लागू होने के बाद भी मुट्ठी भर लोग ही पाकिस्तान से भारत आकर नागरिकता ले सकते हैं. यह कानून इसलिए लाया गया है कि भारत में दशकों से जो लोग रहे हैं उन्हें देश की नागरिकता मिल सके. लगातार झुठ बोलने वाले नेताओं पर लगाम के लिए उठाने होंगे कदम अग्निवीर पर कांग्रेस का झूठ सुनियोजित लगता है. क्योंकि राहुल ने अग्निवीर के परिवार का जो विडियो जारी किया उसमें परिवार से बातचीत चुनाव प्रचार के दौरान की है. स्पष्ट है कि एक बार भी कांग्रेस की ओर से यह प्रयास नहीं किया गया कि दोबारा शहीद परिवार से बातकर के पूछें कि उसे पूरी रकम मिली की नहीं. यह … Read more

तेलंगाना में बढ़ती जा रही कांग्रेस की ताकत, विधायक बी कृष्ण मोहन रेड्डी कांग्रेस में हुए शामिल

हैदराबाद तेलंगाना में विपक्षी दल भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) को झटका देते हुए पार्टी के विधायक बी कृष्ण मोहन रेड्डी शनिवार को सत्तारूढ़ कांग्रेस में शामिल हो गए। पिछले साल विधानसभा चुनाव के बाद से कांग्रेस में शामिल होने वाले बीआरएस विधायकों की कुल संख्या सात हो गई है। गडवाल से विधायक कृष्ण मोहन रेड्डी यहां जुबली हिल्स स्थित मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ए रेवंत रेड्डी और अन्य पार्टी नेताओं की मौजूदगी में कांग्रेस में शामिल हुए। ऐसी अटकलें हैं कि आने वाले दिनों में बीआरएस के और विधायक सत्तारूढ़ पार्टी में शामिल हो सकते हैं। पिछले साल हुए विधानसभा चुनावों में बीआरएस ने कुल 119 विधानसभा क्षेत्रों में से 39 पर जीत हासिल की थी, जबकि कांग्रेस 64 सीटें जीतकर सत्ता में आई थी। बीआरएस के सात विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के बाद कांग्रेस विधायकों की संख्या 71 हो गई। बृहस्पतिवार रात को बीआरएस के छह विधानपार्षद सत्तारूढ़ कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इसके साथ ही 40 सदस्यीय विधान परिषद में कांग्रेस के सदस्यों की संख्या 10 हो गई।  

विपक्षी दलों ने कहा- महाराष्ट्र सरकार क्रिकेटरों की उपलब्धि पर गर्व है, लेकिन राज्य के खजाने से 11 करोड़ रुपये देने की कोई जरूरत नहीं

महाराष्ट्र महाराष्ट्र में विपक्षी दल कांग्रेस और शिवसेना ने टी20 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम को 11 करोड़ रुपये का इनाम देने की एकनाथ शिंदे नीत सरकार की घोषणा पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि ऐसा करके सरकार अपनी पीठ थपथपाना चाहती है। विपक्षी दलों ने कहा कि उन्हें क्रिकेटरों की उपलब्धि पर गर्व है, लेकिन राज्य के खजाने से 11 करोड़ रुपये देने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री से यह राशि अपनी जेब से देने को कहा। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक प्रवीण दरेकर ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शुक्रवार को भारतीय क्रिकेट टीम के लिए 11 करोड़ रुपये के नकद पुरस्कार की घोषणा की। यह घोषणा विधान भवन में की गई, जहां टीम के मुंबई के चार खिलाड़ियों-कप्तान रोहित शर्मा, सूर्यकुमार यादव, यशस्वी जायसवाल और शिवम दुबे को सम्मानित किया गया। बाद में, पत्रकारों से बातचीत में राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय वडेट्टीवार ने कहा, ”राज्य के खजाने से 11 करोड़ रुपये देने की क्या जरूरत थी? यह अपनी पीठ थपथपाने के लिए है…खजाना खाली होने दो…गरीबों को मरने दो। लेकिन सरकार अपनी पीठ थपथपाना चाहती है।” विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे ने कहा, ”खिलाड़ियों को राज्य के खजाने से 11 करोड़ रुपये देने की जरूरत नहीं थी। हर किसी को उनकी उपलब्धियों पर गर्व है और उन्हें पर्याप्त पुरस्कार राशि मिलती है। मुख्यमंत्री को अपनी जेब से 11 करोड़ रुपये देने चाहिए थे।” वडेट्टीवार कांग्रेस से और दानवे शिवसेना (यूबीटी) से जुड़े हैं। भाजपा के विधान पार्षद दरेकर ने एक मराठी समाचार चैनल से बातचीत में कहा, ”विजय वडेट्टीवार की सोच विकृत और ओछी है। पूरा देश टी20 टीम के विश्व कप जीतने पर खुश है।” उन्होंने कहा, ”लोगों ने देखा है कि किस तरह क्रिकेट प्रशंसक मुंबई के मरीन ड्राइव पर (विजय जुलूस के दौरान) क्रिकेटरों पर अपना प्यार और प्रशंसा बरसाने के लिए बड़ी संख्या में एकत्र हुए थे। लेकिन वडेट्टीवार इस कार्यक्रम का भी राजनीतिकरण करना चाहते हैं।”  

कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा- आगामी विधानसभा चुनाव में सभी सीट पर चुनाव लड़ने की तैयारी करेगी

महाराष्ट्र महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सभी सीटों पर ताल ठोंकने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस पार्टी की महाराष्ट्र यूनिट के अध्यक्ष नाना पटोले ने शनिवार को यह बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में सभी सीट पर चुनाव लड़ने की तैयारी करेगी, लेकिन अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ सीट बंटवारे के समझौते के अनुसार ही चुनाव लड़ेगी। नागपुर में अपने आवास पर पत्रकारों से बात करते हुए पटोले ने कहा, ‘अगर पार्टी सभी सीट पर चुनाव लड़ने की तैयारी करती है तो यह गलत नहीं होगा क्योंकि पार्टी का हर जगह अपना संगठनात्मक ढांचा होना चाहिए और उसे काम करना चाहिए।’ महाराष्ट्र की 288 सदस्यीय विधानसभा के लिए इस साल अक्टूबर में चुनाव कराए जाएंगे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘किसी पार्टी का हर जगह अपना संगठनात्मक ढांचा होना चाहिए और उसे काम करना चाहिए। सीट बंटवारे के आधार पर गठबंधन बनाया जाएगा। सभी सीट के लिए तैयारी करना गलत नहीं है और हमारे गठबंधन के सहयोगी भी ऐसी तैयारी कर रहे हैं। हम महाविकास अघाडी (MVA) गठबंधन के तहत ही चुनाव लड़ेंगे।’ महाविकास अघाडी में शिवसेना (यूबीटी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) और कांग्रेस शामिल हैं। गठबंधन ने हाल में लोकसभा चुनाव में राज्य में 48 में से 30 सीट जीती थीं। ‘NDA के सहयोगी दल कब तक रहेंगे उनके साथ’ नाना पटोले ने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद की यह भविष्यवाणी सच हो सकती है कि नरेंद्र मोदी की सरकार अगले महीने गिर सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि सरकार बैकफुट पर है और कोई भी दावे के साथ यह नहीं बता सकता कि सहयोगी दल कितने समय तक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के साथ रहेंगे। उन्होंने कहा, ‘कुछ भी हो सकता है। हम देख सकते हैं कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लोकसभा में दिए गए भाषण के बाद सरकार किस तरह ‘बैकफुट’ पर आ गई है। हम यह नहीं कह सकते कि राजग के सहयोगी दल कब तक उनके साथ रहेंगे।’  

मायावती कल चेन्नई जाएंगी, तमिलनाडु BSP अध्यक्ष को देंगी श्रद्धांजलि

चेन्नई तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में शुक्रवार शाम को बहुजन समाज पार्टी (BSP) के प्रदेश अध्यक्ष आर्मस्ट्रांग की सरेआम चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई. तीन बाइक पर सवार हत्यारों ने आर्मस्ट्रांग पर चाकुओं से ताबड़तोड़ वार किए और वारदात को अंजाम देकर मौके से फरार हो गए जिन्हें बाद में अरेस्ट कर लिया गया. इस हत्या के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने ऐलान किया है कि वह रविवार को चेन्नई जाएंगी और मृतक के परिजनों से मुलाकात करेंगी. इस हत्या पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने सवाल खड़े करते हुए सख्त कार्रवाई की मांग उठाई तो मुख्यमंत्री स्टालिन ने हमलावरों की गिरफ्तारी की जानकारी सोशल पर मीडिया दी। स्टालिन ने हत्या पर अफसोस जताते हुए हमलावरों के पकड़े जाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा, “बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष आर्मस्ट्रॉन्ग की हत्या स्तब्धकारी एवं अत्यंत दुःखद है। पुलिस ने रातों रात हत्या में शामिल लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।” उन्होंने एक लंबे चौड़े पोस्ट में आगे लिखा, “इसके साथ ही मैं आर्मस्ट्रॉन्ग की शोक संतृप्त पार्टी, परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करना चाहता हूं… मैंने पुलिस अधिकारियों को मामले की शीघ्र तहकीकात कर दोषियों को कानून के अनुसार न्याय के कटघरे में लाने का आदेश दे दिया है।” इससे पहले बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती ने भी एक्स पर दुख जताते हुए नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा था, “बसपा तमिलनाडु राज्य इकाई के अध्यक्ष के. आर्मस्ट्रॉन्ग की आज शाम (5 जुलाई) उनके चेन्नई आवास के बाहर की गई नृशंस हत्या अति-दुःखद व अति-निन्दनीय है। पेशे से वकील आर्मस्ट्रॉन्ग राज्य में दलितों की सशक्त आवाज़ के रूप में जाने जाते थे। सरकार दोषियों के खिलाफ अविलम्ब सख्त कार्रवाई करे।   बसपा सुप्रीमो ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, ‘तमिलनाडु में बीएसपी के कर्मठ एवं समर्पित नेता व स्टेट पार्टी यूनिट के अध्यक्ष श्री के. आर्मस्ट्रांग की कल शाम उनके चेन्नई आवास के बाहर की गयी जघन्य हत्या से पूरे समाज में दुःख व आक्रोश की लहर. सरकार को अविलम्ब सख्त/जरूरी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं को आगे रोका जा सके. इस अति-दुःखद व चिन्ताजनक घटना की गंभीरता आदि को देखते हुए कल सुबह मेरा चेन्नई जाकर श्री आर्मस्ट्रांग को श्रद्धा-सुमन अर्पित करने व उनके पीड़ित परिवार से मिलकर उन्हें सांत्वना देने का कार्यक्रम. सभी शान्ति व्यवस्था बनाए रखें, यह अपील.’ 8 आरोपी अरेस्ट इस हाई प्रोफाइल हत्या के बाद एक्टिव हुई चेन्नई पुलिस ने अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद एक बड़ा खुलासा हुआ है, गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों का कनेक्शन आर्कोट सुरेश गैंग के साथ जुड़ा बताया जा रहा है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक BSP प्रदेश अध्यक्ष आर्मस्ट्रांग की हत्या के मामले में शुरुआती जांच में कुछ तथ्य सामने आए हैं. यह हत्याकांड पुरानी रंजिश और बदले की भावना से जुड़ा लग रहा है. दरअसल, पिछले साल चेन्नई में आर्कोट सुरेश नामक हिस्ट्रीशीटर की हत्या हुई थी. आर्मस्ट्रांग की हत्या के सिलसिले में अब तक गिरफ्तार किए गए 8 आरोपी या तो आर्कोट सुरेश के रिश्तेदार हैं या फिर गिरोह के सदस्य हैं. इनमें से एक पोन्नई बाला जो अभी हिरासत में है, आर्कोट सुरेश का भाई है. हालांकि अभी तक यह साबित नही हो सका है कि यह आपसी रंजिश का मामला है या फिर इसमें कुछ और एंगल है. आरोपियों से पूछताछ के बाद हत्या के पीछे के मकसद का पता लगाया जा सकेगा. चेन्नई उत्तर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक असरा गर्ग ने एजेंसी को बताया कि जांच के लिए दस टीमें गठित की गई हैं. मर्डर में धारदार हथियारों का इस्तेमाल किया गया है. दोस्त से बात कर रहे थे आर्मस्ट्रांग बता दें कि तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में 5 जून को शाम 7 बजे बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के प्रदेश अध्यक्ष की बेरहमी से हत्या कर दी गई. 47 साल के आर्मस्ट्रांग पेरम्बूर इलाके में अपने नवनिर्मित घर के पास दोस्त से बातचीत कर रहे थे. इसी दौरान शाम करीब 7 बजे हथियारों से लैस 3 बाइकों पर सवार बदमाशों ने आर्मस्ट्रांग पर हमला कर दिया. वारदात की जगह पर पड़ा मिला चाकू घटनास्थल पर एक बड़ा चाकू पड़ा मिला है, जहां आर्मस्ट्रांग की हत्या की गई. आर्मस्ट्रांग को घायल अवस्था में एक निजी अस्पताल ले जाया गया था, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. जांच में शामिल एक वरिष्ठ अधिकारी ने आजतक को बताया कि 6 लोगों में से 4 ने एक फूड डिलीवरी कंपनी की टी-शर्ट पहन रखी थी. स्टालिन के खिलाफ लड़ चुके हैं चुनाव पेशे के एक वकील और अंबेडकरवादी थे जो दलितों के हित के लिए काम करते थे. 52 वर्षीय आर्मस्ट्रांग कई सालों तक बसपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे. वह उत्तरी चेन्नई इलाके में काफी लोकप्रिय थे. खास कर उन युवाओं के बीच जिसकी उन्होंने पढ़ाई पूरी करने और नौकरियों के कई मामलों में मदद की थी. वह अपनी राजनीतिक सक्रियता और स्थानीय मध्यस्थता में भूमिका के लिए भी जाने जाते थे. आर्मस्ट्रांग ने 2006 के स्थानीय निकाय चुनावों में शहर के एक वार्ड में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल की थी. वे तब चर्चा में आए जब उन्होंने उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को आमंत्रित किया और चेन्नई के अमिनजिकरई में पुल्ला रेड्डी एवेन्यू में एक विशाल रैली और जनसभा आयोजित की. 2011 में आर्मस्ट्रांग ने विधानसभा चुनाव लड़ा था और कोलाथुर निर्वाचन क्षेत्र में डीएमके के एमके स्टालिन से हार गए. उनके परिवार में उनकी पत्नी और एक बेटी है.

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