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मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड को मिला बेस्ट स्टेट टूरिज्म बोर्ड का पुरस्कार

Madhya Pradesh Tourism Board received the Best State Tourism Board award मध्य प्रदेश के पर्यटन गंतव्यों के प्रचार-प्रसार नवाचार करने पर्यटकों को अनुभव आधारित पर्यटन प्रदान करने एवं पर्यावरण अनुकूल पर्यटन के क्षेत्र में सबसे बेहतर काम करने के लिए मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया।प्रदर्शनी में बोर्ड ने प्रमुखता से सहभागिता कर देश एवं विदेशों से आए ट्रेवल एजेंट्स टूर आपरेर्ट्सहोटेलियर्स एवं विभिन्न हितधारकों के समक्ष प्रदेश के पर्यटन स्थलों एवं उत्पादों को प्रचारित किया। भोपाल। मध्य प्रदेश के पर्यटन गंतव्यों के प्रचार-प्रसार, नवाचार करने, पर्यटकों को अनुभव आधारित पर्यटन प्रदान करने एवं पर्यावरण अनुकूल पर्यटन के क्षेत्र में सबसे बेहतर काम करने के लिए मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड (एमपीटीबी) को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। ग्रेटर नोएडा में आयोजित प्रमुख ट्रेवल प्रदर्शनी एसएटीटीई (साउथ एशियन ट्रेवल एंड टूरिज्म एक्सचेंज) में मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड को ‘बेस्ट टूरिज्म स्टेट बोर्ड के अवार्ड से सम्मानित किया गया है। युवराज पडोले ने ग्रहण किया पुरस्कारवहीं, राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किए जाने पर प्रमुख सचिव पर्यटन और संस्कृति एवं प्रबंध संचालक मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड शिव शेखर शुक्ला ने इस खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि पर्यटन विभाग सदैव ही प्रदेश में भ्रमण के लिए पहुंचने वाले पर्यटकों की सुलभता, सुगमता एवं सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। बोर्ड की ओर से यह सम्मान उपसंचालक युवराज पडोले ने ग्रहण किया। इस आधार पर मिला परस्कार एमपीटीबी स्टाल पर आगंतुकों को सांची, अमरकंटक, नर्मदा के घाटों और अन्य गंतव्यों के वर्चुअल टूर का अनुभव करने का भी मौका मिला। बोर्ड को यह सम्मान पर्यटन, बुनियादी ढांचे के विकास, स्थानीय समुदाय के आर्थिक विकास, राज्य की संस्कृति और विरासत के संरक्षण इत्यादि क्षेत्र में उच्च स्तरीय प्रदर्शन के आधार पर दिया गया है।

खाद्य विभाग द्वारा नगर की दुकानों में किया आकस्मिक निरीक्षण, दूध एवं दूध उत्पादन सामग्री के लिए सैंपल

Food department conducted surprise inspection in city shops, took samples for milk and milk production materials. नैनपुर ! मिलावट से मुक्ति अभियान के अंतर्गत कलेक्टर के निर्देश पर मिलावटी खाद्य पदार्थ के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने के संबंध में जिला स्तर पर गठित निगरानी समिति के द्वारा विभिन्न दुकानों का आकस्मिक निरीक्षण किया गया विशेष कर दूध एवं दूध उत्पादन में होने वाली मिलावट को रोकने हेतु विभिन्न दुकानों में मिलावट की आशंका पर दूध एवं दूध उत्पादन के नमूने लिए गए। निरीक्षण के दौरान श्याम स्वीट्स से खोवा एवं रसगुल्ला, प्रेम लस्सी सेंटर से खोवे के पेड़े एवं लस्सी, जैन किराना स्टोर से पापड़ एवं सरसों तेल के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए वही श्याम स्वीट्स में घरेलू गैस का व्यवसायिक दुरुपयोग पाए जाने पर जब्ती की कार्यवाही कर प्रकरण बनाया गया। सभी नमूने प्रयोगशाला भोपाल भेजे जाएंगे। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने पर विक्रेताओं के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही की जाएगी कार्रवाई के दौरान नापतोल निरीक्षक एवं खाद्य सुरक्षा अधिकारी मौजूद रहे। यह कार्यवाही आगे भी जारी रहेगी बाइट – आर एस वरकड़े कनिस्ट आपूर्ति अधिकारी

किसी भी स्थिति में बच्चों को परीक्षा न किया जाए वंचित, अन्यथा होगी कार्यवाही

Children should not be deprived of exams under any circumstances, otherwise action will be taken निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ पहुंची शिकायत, कलेक्टर का अल्टीमेंटम भोपाल। आरटीई के तहत पढ़ने वाले बच्चों की फीस और पढ़ाई को लेकर निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ लगातार शिकायतें मिलने के बाद कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने निजी स्कूलों को अल्टीमेटम दिया है। कलेक्टर ने सभी स्कूलों को आदेश दिए कि किसी भी स्थिति में स्कूल में प्रवेशित छात्र-छात्राओं को स्कूल से तथा आयोजित होने वाली परीक्षाओं से वंचित न किया जाए। अन्यथा की स्थिति में अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए बाध्य होना पड़ेगा, जिसके लिए स्कूल खुद जिम्मेदार होंगें। मामले में अभिभावकों को लेकर राहत देते हुए कहा गया है कि निजी स्कूलों की इस तरह की किसी भी शिकायत के लिए कलेक्टर व जिला शिक्षा अधिकारी से संपर्क किया जा सकता है। यह है पूरा मामला दरअसल, शास, अशास, अल्पसंख्यक, सीबीएससी स्कूलों में पढ़ने वाले कई विद्यार्थियों के अभिभावकों द्वारा जनसुनवाई के दौरान और विभिन्न आवेदनों के माध्यम से इसको लेकर कलेक्टर सहित अन्य कार्यालयों में शिकायतें की गई हैं। इस शिकायत में बताया गया है कि संबंधित शाला द्वारा उनके बच्चों की आर.टी.ई. प्रावधान अंतर्गत फीस प्रतिपूर्ति न होने, पूर्व संस्था द्वारा टी.सी. प्रदाय न करने, समग्र पोर्टल में नाम अंकित न होने अथवा त्रुटिपूर्ण होने, शाला में फीस जमा न कर पाने के कारण बच्चों को शाला में अध्ययन न कराते हुए परीक्षा से वंचित किया जा रहा है एवं अलग से फीस की मांग की जा रही है, जबकि आर.टी.ई. के अंतर्गत आने वाले छात्रों को पूर्णतः निःशुल्क शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है।

राजधानी के मॉडल अस्पताल जेपी के बुरे हाल: ओपीडी पर्चे पर लिखी दवा भी नहीं मिलती

Bad condition of Capital’s Model Hospital JP: Even medicine written on OPD prescription is not available. भोपाल। कहने को जय प्रकाश अस्पताल (जेपी) राजधानी का मॉडल अस्पताल हैं, लेकिन सुविधाओं के मामले में वह किसी सामुदायिक केंद्र के बराबर है। जेपी अस्पताल में दवा ही नहीं है। आधी दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। यह पीड़ा जेपी अस्पताल में इलाज कराने आई मीना नागराज ने सुनाई। उन्होंने बताया कि डॉक्टर ने ओपीडी पर्चे पर पांच दवाएं लिखी थी, जिनमें से तीन दवाएं उन्हें बाहर से खरीदने के लिए कहा गया, क्योंकि उक्त दवाओं का स्टाक खत्म हो गया था। उन्हीं की तरह अन्य मरीजों ने दवा नहीं मिलने पर नाराजगी व्यक्त की। ओपीडी में आए मरीजों से बात की तो पता चला कि कई दवाएं अस्पताल में मिली ही नहीं। इनमें लेवोसालबूटामाल, आइंट मिंट जैसी महत्वपूर्ण दवाएं भी शामिल हैं। ब्लड प्रेशर की सामान्य दवा भी नहीं मिल रहीबुजुर्ग रोशन मौर्य ने बताया कि मुझे हार्ट से संबंधित, ब्लड प्रेशर, जोड़ों की समस्या रहती है। जेपी अस्पताल के डाॅक्टर अच्छे हैं, इसलिए यहां इलाज के लिए आया हूं। यहां मुझे कुछ दवाएं मिली हैं, लेकिन बाकी बाहर से खरीदने के लिए कहा गया है। पांच में सिर्फ दो दवाएं मिलीहाथ में दर्द होने के बाद उपचार के लिए ओपीडी में आए मोहन मीणा ने बताया कि डॉक्टर ने पांच दवाएं लिखी थी, पर मुझे दो ही दवाएं मिली। मैं तो सक्षम हूं बाहर से खरीद लूंगा, लेकिन कई लोग ऐसे हैं, जिनके पास अस्पताल तक आने का किराया भी नहीं होता, वे कहां से दवा खरीदेंगे। संबंधित पर कार्रवाई करेंगेजेपी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राकेश श्रीवास्तव का कहना है कि अगर अस्पताल में दवाओं की कमी है, तो फार्मासिस्टों को तुरंत रिक्वायरमेंट स्टोर को भेजना चाहिए। हमने नई व्यवस्था बनाई है, अगर अब चूक होती है तो तुरंत संबंधित पर कार्रवाई करेंगे।

भोपाल व रानी कमलापति स्टेशन पर बदबूदार गंदे पानी की सप्लाई

Supply of smelly dirty water at Bhopal and Rani Kamlapati stations यात्रियों को मजबूरी में खरीदना पड़ रही बोतल भोपाल। रेलवे स्टेशन पर 40 लाख रुपए का आरओ प्लांट सालों से बंद गंदा पानी पीने से यात्रियों के बीमार होने का खतरा रानी कमलापति स्टेशन पर पानी की लाइन टूटी हरिभूमि न्यूज,भोपाल। भोपाल व रानी कमलापति स्टेशन पर यात्री गंदा पानी पीने को मजबूर है। पिछले कुछ दिनों से वर्ल्ड क्लास रानी कमलापति व भोपाल स्टेशन पर इसी तरह के गंदे पानी की सप्लाई की जा रही है। दो दिन से यह परेशानी अधिक बढ़ गई है। गंदा पानी पीने से यात्री संक्रमित बीमारी का शिकार हो सकते हैं, लेकिन रेलवे अधिकारियों का इस ओर ध्यान ही नहीं है। इस संबंध में कुछ यात्रियों ने गंदे पानी को लेकर सोशल मीडिया पर शिकायत की है। इस संबंध में भोपाल रेल मंडल के सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया का कहना है कि जल्द ही मामले को दिखवा लेता हूं। जो भी समस्या होगी, उसको ठीक करा लिया जाएगा। 40 लाख रुपए का आरओ प्लांट सालों से बंद भोपाल स्टेशन पर कई सालों से 40 लाख रुपए का आरओ प्लांट बंद पड़ा है। इसके चलते रेलवे यात्रियों को शुद्ध पानी मुहैया नहीं हो पा रहा है। सालों से आरओ प्लांट ठीक नहीं कराने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। गौरतलब है कि आरओ प्लांट वर्ष 2015 में लगाया गया था। अप्रैल 2017 से यह बंद है। इसके पहले भी ये कई बार बंद हुआ। इस तरह यह प्लांट सिर्फ 200 दिन ही चल पाया। जानकारों का कहना है कि आरओ प्लांट को ठीक नहीं कराया जाना लापरवाही का मामला है। अब गर्मी का सीजन दस्तक दे रहा है तो पिछले कुछ दिनों से लगातार गंदे पानी की प्लेटफार्म पर लगे नलों में सप्लाई की जा रही है। ऐसे में यात्रियों को मजबूरी में रेल नीर का बोतल बंद पानी खरीदना पड़ रहा है। पानी माफिया सक्रिय गर्मी के सीजन में भोपाल रेलवे स्टेशन पर बोतलबंद पानी की बिक्री के लिए पानी माफिया सक्रिय रहता है। रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, गर्मियों में प्रतिदिन 30 से 40 हजार बोतलबंद पानी बिक जाता है। ऐसे में यदि यात्रियों को रेलवे से आरओ वाटर भरपूर मिलने लगेगा तो पानी माफिया की बिक्री सीमित हो जाएगी। रानी कमलापति पर नलों में आ रहा गंदा पानी रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर पिछले कुछ दिनों से गंदा पानी आ रहा था। इससे यात्रियों को शुद्ध पानी को लेकर परेशान होना पड़ रहा है। नगर निगम की पानी की लाइन टूटी हुई थी। जिनको मरम्मत के लिए बोला है। मोहित सोमय्या, प्रोजेक्ट मैनेजर, बंसल पाथ-वे हबीबगंज प्राइवेट लिमिटेड

पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस के खिलाफ लोकायुक्त ने शुरू की जांच

Lokayukta starts investigation against former Chief Secretary Iqbal Singh Bais भोपाल। प्रदेश लोकायुक्त संगठन में चल रहे उज्जैन की हवाई पट्टी के मामले में लोकायुक्त ने पांच आईएएस अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति मांगी है। जबकि कुछ अधिकारियों के खिलाफ अभी जांच जारी है। इनमें पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस भी शामिल हैं जिनके खिलाफ जांच पूरी नहीं होने से अभियोजन मांगने वाले अधिकारियों की सूची में उनका नाम शामिल नहीं किया है। वैसे इस मामले में करीब आधा दर्जन आईएएस और आईपीएस के नाम भी जांच में शामिल थे जिनमें से कुछ अधिकारियों के खिलाफ भी अब तक जांच पूरी नहीं हुई है तो कुछ अफसरों को क्लीनचिट जैसी मिल गई है। इनमें लोकायुक्त के डीजी रहे अरुण गुर्टु व लोकायुक्त संगठन के सचिव रहे अरुण कोचर भी शामिल हैं। पढ़िये रिपोर्ट। उज्जैन की हवाई पट्टी को कुछ साल पहले निजी कंपनी को पायलट ट्रेनिंग के लिए लीज पर दिया गया था जिसका करीब डेढ़ लाख रुपए सालाना लीज तय किया गया था। सिंहस्थ आयोजन की वजह से हवाई पट्टी पर बड़े विमानों के उतारे जाने के कैबिनेट फैसले के आधार पर सरकार ने यहां 80 लाख रुपए खर्च किए थे। इस मामले में सालाना लीज जमा नहीं किए जाने तथा निजी कंपनी को लीज पर दिए जाने के बावजूद सरकारी खर्च से वहां काम कराए जाने के आरोपों के आधार पर लोकायुक्त संगठन में शिकायत हुई थी जिसमें 2019 में एफआईआर दर्ज की गई थी।शुरुआत में ये जांच के घेरे में आए सूत्र बताते हैं कि लोकायुक्त की शुरुआती जांच में यश एयर लिमिटेड इंदौर और सेटार एविएशन नाम की दो कंपनियों सहित लोकायुक्त के डीजी रहे रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी अरुण गुर्टू, शिवरमन, यशराज टोंग्या, भरत टोंग्या, शिरीष चुन्नीलाल दलाल, वीरेंद्र कुमार जैन, दुष्यंत लाल कपूर, दिलीप रावत के नाम आए थे। इसी तरह उज्जैन कलेक्टर रहे शिवशेखर शुक्ला, अजातशत्रु श्रीवास्तव, डॉ. एम गीता, बीएम शर्मा, कवींद्र कियावत, संकेत भोंडवे, मनीष सिंह, शशांक मिश्र व नीरज मंडलोई, विमानन विभाग के प्रमुख रहे अरुण कोचर, पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन यंत्री रहे एसएम सलूजा, एके टूटेजा व जीपी पटेल के नाम भी थे। पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस का नाम भी इस मामले में आने पर उनके खिलाफ भी जांच शुरू हुई थी। बैंस के अभियोजन स्वीकृति फिलहाल नहीं सूत्रों से मुताबिक लोकायुक्त की विशेष पुलिस स्थापना ने अब तक की जांच में जिनके खिलाफ साक्ष्य पाए हैं, उनमें शिवशेखर शुक्ला, अजातशत्रु श्रीवास्तव, कवींद्र कियावत, अरुण कोचर सहित डॉ. एम गीता के नाम हैं। गीता का निधन हो चुका है तो शुक्ला को छोड़ अन्य तीन अधिकारी रिटायर्ड हो गए हैं। वहीं, मामले से जुड़े पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस व रिटायर्ड आईएएस बीएम शर्मा की जांच अभी पूरी नहीं होने की वजह से उनके लिए अभियोजन स्वीकृति के लिए राज्य शासन को नहीं लिखा गया है।

कमलनाथ के मुद्दे पर एक्शन के मूड में कांग्रेस, बयान देने वालों पर क्या गिरेगी गाज?

Congress in mood for action on Kamal Nath issue, what punishment will fall on those who make statements? कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके बेटे नकुलनाथ के बीजेपी में जाने की खबरों के बीच कमलनाथ समर्थक नेताओं ने पार्टी के खिलाफ जमकर बयानबाजी की. अब पार्टी ऐसे नेताओं को सबक सिखाने के मूड में है.मध्य प्रदेश कांग्रेस में अब भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. तीन-चार दिन मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके बेटे नकुलनाथ के बीजेपी में जाने को लेकर जमकर चर्चा चली. आग लगी थी, तभी धुआं भी निकला. कमलनाथ के समर्थकों ने कांग्रेस पार्टी के खिलाफ जमकर बयानबाजी की थी. किसी ने कहा कि कमलनाथ ने पार्टी को जीवन दे दिया, मगर पार्टी ने उनको अपमानित किया. किसी ने कहा कि अगर कमलनाथ बीजेपी जाते हैं तो हम भी बीजेपी उनके साथ जॉइन करेंगे.इस बयानबाजी में सबसे आगे पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, पूर्व विधायक दीपक सक्सेना और कमलनाथ के मीडिया कॉर्डिनेटर सैयद जफर सबसे आगे थे. मामला भले ही शांत हो गया हो, मगर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस बयानबाजी को अनुशासनहीनता में लिया है. जीतू  पटवारी गुस्से में हैं. लिहाजा कठोर शब्दों में चेतावनी दी है. बता दें कि कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ द्वारा ट्विटर हैंडर में चेंज करने और उनके समर्थकों के बयानबाजी के बाद यह अटकलें लगी थी कि कमलनाथ राज्यसभा की सीट नहीं दिए जाने से नाराज हैं और वह बीजेपी में शामिल होंगे. हालांकि बाद में उनकी राहुल गांधी से बातचीत हुई. उसके बाद मामला फिलहाल शांत है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने दी चेतावनीजीतू  पटवारी ने कहा कि इस मामले को लेकर कांग्रेस पार्टी गंभीर है.अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. हालांकि बीजेपी जीतू  पटवारी की इस बात का मजाक ही उड़ा रही है. जीतू  पटवारी के ही सामने चुनाव लड़ने वाले बीजेपी नेता जीतू  जिराती का कहना है कि अगर वाकई ऐसा जीतू  पटवारी कह रहे हैं तो ये बड़ी बात है. कमलनाथ थोड़ा सा इधर-उधर हुए और कांग्रेस की हालत खराब हो गई. जीतू पटवारी उनका बाल भी नहीं बांका कर सकते. उनके समर्थकों पर कार्रवाई तो छोड़ दीजिए. कांग्रेस नेताओं की बयानबाजी से विवादहालांकि अब भी कमलनाथ समर्थकों के सुर नहीं बदले है. राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा की बैठक में शामिल होने पहुंचे सज्जन वर्मा से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा छिंदवाड़ा के विधायकों की दुनिया ही अलग है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू  पटवारी भले ही कह चुके हैं कि अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं होगी, मगर ये देखना भी दिलचस्प होगा कि कमलनाथ समर्थकों पर कार्रवाई होती है या नहीं.

मध्य प्रदेश में RTE के तहत फ्री स्कूल एडमिशन के लिए आवेदन चालू

Application open for free school admission under RTE in Madhya Pradesh मध्य प्रदेश राज्य शिक्षा केन्द्र, भोपाल द्वारा शैक्षणिक सत्र 2024-25 के लिये शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत गैर-अनुदान मान्यता प्राप्त अशासकीय स्कूलों में कमजोर वर्ग एवं वंचित समूह के बच्चों के ऑनलाइन नि:शुल्क प्रवेश के लिये समय-सारणी जारी की गई है। शिक्षा का अधिकार ऑनलाइन आवेदन के लिए अधिकृत वेबसाइट संचालक राज्य शिक्षा केन्द्र श्री धनराजू एस ने बताया कि 23 फरवरी से 3 मार्च, 2024 तक www.educationportal.mp.gov.in/rte पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन लिये जायेंगे। पोर्टल पर त्रुटि सुधार के लिये विकल्प उपलब्ध रहेगा। ऑनलाइन आवेदन के बाद आवेदक 24 फरवरी से 5 मार्च तक पावती डाउनलोड और मूल दस्तावेजों का केन्द्रों में सत्यापन करा सकेंगे। MP RTE स्कूल एडमिशन के लिए ऑनलाइन लॉटरी की तारीख आरटीई के तहत 7 मार्च, 2024 को पारदर्शी रेण्डम पद्धति से ऑनलाइन लॉटरी आयोजित करते हुए आवेदकों को स्कूल आवंटित किया जायेगा। आवेदकों को एसएमएस से भी सूचित किया जायेगा। लॉटरी में चयनित आवेदक 11 मार्च से 19 मार्च, 2024 तक आवंटन-पत्र डाउनलोड कर आवंटित स्कूल में प्रवेश पा सकेंगे। प्रवेश लेते समय ही संबंधित प्रायवेट स्कूल द्वारा मोबाइल एप के माध्यम से एडमिशन रिपोर्ट भी दर्ज की जायेगी।MP RTE का सेकंड राउंड कब शुरू होगा प्रथम चरण की प्रक्रिया समाप्त होते ही द्वितीय चरण में प्रवेश के लिये प्रक्रिया शुरू की जायेगी। पोर्टल पर 21 मार्च, 2024 को रिक्त सीटों को प्रदर्शित किया जायेगा। द्वितीय चरण में 22 से 26 मार्च तक स्कूलों की च्वाइस अपडेट की जा सकेगी। द्वितीय चरण की ऑनलाइन लॉटरी 28 मार्च को होगी और स्कूलों का आवंटन किया जायेगा। द्वितीय चरण में लॉटरी से चयनित आवेदक 30 मार्च से 5 अप्रैल, 2024 के बीच आवंटन-पत्र डाउनलोड कर आवंटित स्कूल में प्रवेश प्राप्त कर सकेंगे। राज्य शिक्षा केन्द्र ने सभी जिला कलेक्टर्स को नियमानुसार पूर्ण पारदर्शी तरीके से नियत समय में यह कार्य सम्पादित किये जाने के निर्देश जारी किये हैं।

हीरा खदानों से मिले हीरों की नीलामी शुरू, पहले दिन रखे गए 76 हीरे; कई राज्यों से पहुंचे व्यापारी

Auction of diamonds found from diamond mines started, 76 diamonds were kept on the first day; Traders arrived from many states पन्ना ! नीलामी के पहले दिन हीरा व्यापारियों के लिए हीरों की प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें हीरा व्यापारियों को हीरे दिखाए गए। इसके बाद पहले दिन की नीलामी शुरू हुई। इसमें 30 ट्रे के माध्यम से 76 नग हीरे नीलामी में रखे गए। पन्ना जिले में उथली हीरा खदानों से प्राप्त 156 नग हीरों की नीलामी हीरा कार्यालय में गुरुवार से शुरू हो गई है। ये नीलामी 23 फरवरी तक चलेगी। इस नीलामी मे 286.41 कैरेट के छोटे-बड़े उज्ज्वल, मटमैले आदि किस्म के हीरे रखे गए हैं। इनकी अनुमानित कीमत पांच करोड़ रुपये है। गुरुवार को नीलामी के पहले दिन हीरा व्यापारियों के लिए हीरों की प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें हीरा व्यापारियों को हीरे दिखाए गए। इसके बाद पहले दिन की नीलामी शुरू हुई। इसमें 30 ट्रे के माध्यम से 76 नग हीरे नीलामी में रखे गए। हीरों की नीलामी में सूरत, गुजरात, मुंबई, राजस्थान आदि स्थानों से हीरा व्यापारी शामिल हुए। बता दें कि इस बार नीलामी में सबसे खास बात यह होगी कि इनमें कई ऐसे नायाब हीरे हैं, जिनकी बोली एक करोड़ या फिर उससे अधिक तक जा सकती है। हीरा अधिकारी ने बताया कि 14.21 कैरेट, 11.88 कैरेट, 9.99 कैरेट, 8.01 कैरेट और 7.90 कैरेट के बड़े हीरे आकर्षण का केंद्र हैं। काफी समय बाद हुई हीरों की नीलामी की वजह से अच्छे राजस्व के आने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।

दिग्विजय सिंह ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र, ‘बस्ती के लोगों को बेघर करने की कार्रवाई रोकने की मांग

Digvijay Singh wrote a letter to the Chief Secretary, demanding to stop the action of making slum people homeless. इस पत्र में पूर्व मुख्यमंत्री ने लिखा है कि ‘भदभदा ब्रिज के पास स्थित इस बस्ती में 350 से अधिक मकान बने हुए है। एन.जी.टी. न्यायालय में शासन द्वारा नगर निगम भोपाल को पार्टी बना कर पेश किया गया था इसको लेकर नगर निगम भोपाल द्वारा इन 5 वर्षो में कोई भी ठोस जवाब न्यायालय में पेश नही किया गया है। जिसके कारण माननीय एन.जी.टी. न्यायालय द्वारा इस बस्ती को अवैध निर्माण घोषित कर दिया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने मध्यप्रदेश शासन के मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। इसमें उन्होने भोपाल में ताज होटल के सामने भदभदा बस्ती में निवासरत लोगों को बेघर करने के लिये की जा रही कार्रवाई को निरस्त करने की मांग की है और कहा है कि इसके लिएसंबंधित को उचित निर्देश प्रदान किया जाए। दिग्वियज सिंह द्वारा लिखा पत्र मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश शासन को लिखे पत्र में दिग्विजय सिंह ने कहा है कि ‘भोपाल शहर के होटल ताज के पास स्थित तालाब किनारे की 100 वर्षो पूर्व से बसी बसाहट को शासन द्वारा बलपूर्वक बिना विस्थापन के हटाये जाने की कार्यवाही की ओर आपका ध्यान आकर्षित कर रहा हूँ। भदभदा ब्रिज के पास स्थित इस बस्ती में 350 से अधिक मकान बने हुए है जिनका खसरा क्र. 291 है। जो वक्फ के नाम पर रजिस्टर्ड है। इस भूमि का प्रकरण वक्फ ट्रिब्यूनल कोर्ट में वर्ष 2018 से प्रचलित है। एन.जी.टी. न्यायालय में शासन द्वारा नगर निगम भोपाल को पार्टी बना कर पेश किया गया था इसको लेकर नगर निगम भोपाल द्वारा इन 5 वर्षो में कोई भी ठोस जवाब न्यायालय में पेश नही किया गया है। जिसके कारण माननीय एन.जी.टी. न्यायालय द्वारा इस बस्ती को अवैध निर्माण घोषित कर दिया गया है। माननीय नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल न्यायालय के आदेश के पश्चात नगर निगम भोपाल द्वारा बिना विस्थापन की व्यवस्था किये इनके मकानों को बलपूर्वक तोड़ने की कार्यवाही की जा रही है। शासन द्वारा पूर्व में इन्हें स्थाई नल कनेक्शन और विद्युत कनेक्शन दिये गये है, जिसका इन लोगों द्वारा समय-समय पर भुगतान किया जाता रहा है। यह लोग कई वर्षो से सम्पति कर भी जमा करते आ रहे है। इसके पश्चात भी प्रशासन द्वारा विगत कुछ दिनों से नियम विरूद्ध तरीके से इनके नल और विद्युत कनेक्शन काट दिये गये है। वर्तमान में 10वीं एवं 12वीं कक्षा की परीक्षाऐं भी चल रही है। मेरा मानना है कि जब इस भूमि का प्रकरण पहले से ही वक्फ कोर्ट में प्रचलित है तो 100 साल पुरानी इस बस्ती को हटाने के लिये की जा रही कार्यवाही को निरस्त किया जाना चाहिये। इसके पश्चात फैसले के आधार पर अगर हटाया भी जाता है तो इन लोगों के पुनर्वास एवं उचित मुआवजे की व्यवस्था सरकार को करना चाहिये। मेरा आपसे अनुरोध है कि भदभदा बस्ती के लोगों को बेघर करने के लिये की जा रही इस कार्यवाही को निरस्त करने के संबंधित को उचित निर्देश प्रदान करने का कष्ट करें।

आईपीएस अजय शर्मा हर महीने किराए से कमा रहे 2.50 लाख रुपए  

IPS Ajay Sharma is earning Rs 2.50 lakh every month from rent. भोपाल। मध्य प्रदेश के आईपीएस अफसर ने संपत्ति का बुरा पेश किया है। मध्य प्रदेश कैडर के स्पेशल डीजी शैलेश सिंह के पास सबसे ज्यादा पुश्तैनी जमीन है। वहीं ईओडब्ल्यू में पदस्थ डीजी अजय शर्मा को हर महीने ढाई लाख रुपए की आय किराए से होती है। खास बात है कि मध्य प्रदेश के 246 अफसर ने ही संपत्ति की जानकारी दी है, जबकि 23 आईपीएस में कोई भी रिकॉर्ड संपत्ति के बारे में नहीं जमा किया है। स्पेशल डीजे गोविंद प्रताप सिंह के पास भी उत्तर प्रदेश में पुश्तैनी जमीन है। उन्होंने अपने आईपीआर में बताया है कि उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश में कई संपत्तियां हैं। इसके अलावा कुछ जमीनों को बेचकर उन्होंने प्रापर्टी भी खरीदी है। ईओडब्ल्यू के डीजी अजय शर्मा ने बताया है कि दिल्ली के फ्लैट से 2 लाख से अधिक किराया मिलता है। भोपाल के एक मकान से 66 हजार से अधिक किराया मिलता है। दीपक हाउसिंग सोसाइटी में बने प्लॉट से 1 लाख 10 हजार की आय होती है। वही चंदनपुर परिवार की जमीन से डेढ़ लाख रुपए का रेंट उन्हें हर महीने मिलता है। डेढ़ लाख की जमीन की कीमत 29 साल में 51 लाख पहुंची आईपीएस और स्पेशल डीजी सुषमा सिंह ने हुजूर इलाके में आधा एकड़ जमीन 1995 में खरीदी थी। उसे वक्त डेढ़ लाख रुपए देकर अपने नाम जमीन कराई थी। जिसकी मौजूदा कीमत 51 लाख के पार हो चुकी है। उन्होंने बताया कि जमीन पर मकान बनाया गया है। इसके लिए पति और जीपीएफ की सेविंग से कंस्ट्रक्शन किया गया है। झील किनारे आईपीएस का एक करोड़ का बंगला आईपीएस राजेश चावला ने संपत्ति का ब्यौरा देते हुए कहा कि उनके नाम पर कोई संपत्ति नहीं है। पत्नी के नाम पर संपत्ति खरीदी गई है। उन्होंने बताया कि शाहपुरा स्थित इस सेक्टर में साल 2021 में एक करोड़ से अधिक में संपत्ति खरीदी गई। चावला जमीन पर बंगला बनवा रहे हैं। इसके अलावा उनके पास 55 ला ख रुपए का बागसेवनिया इलाके में फ्लैट भी है। जिसे उन्होंने साल 2017 में खरीदा था।  श्रीवास्तव ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में किया निवेश साल 1992 बैच के आईपीएस पंकज कुमार श्रीवास्तव ने मध्य प्रदेश में अपनी कोई संपत्ति नहीं खरीदी है। उन्होंने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में फ्लैट और मकान खरीदा है। श्रीवास्तव ने अपनी संपत्ति की जानकारी देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में 40 लाख रुपए का फ्लैट 2012 में खरीदा था। जिसकी मौजूदा कीमत 1 करोड़ 25 लाख है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के अल्मोड़ा में साल 2009 में 5 लाख की जमीन खरीदी गई थी। जिसकी मौजूदा कीमत 15 लाख है। वही 25 लाख रुपए का मकान भी खरीदा था। जिसकी मौजूदा कीमत 50 लाख रुपए है।  इन आईपीएस की संपत्ति का रिकॉर्ड  -साल 1990 बैच के आईपीएस अशोक अवस्थी के पास पिता का मकान है। जिसे उन्होंने रिकंस्ट्रक्शन कर बनाया है। उन्होंने160 लाख रुपए मकान की कीमत बताई है।- साल 1995 बैच की एडीजी योगेश देशमुख के पास पांच संपत्ति है। उन्होंने संपत्ति का ब्यौरा देते हुए यह नहीं बताया है कि मौजूदा संपत्ति की कीमत कितनी है। देशमुख के पास बैतूल, दिल्ली और भोपाल सहित महाराष्ट्र में संपत्ति है।

डीजीपी बनने की रेस में कैलाश मकवाना, प्रशासनिक टिप्पणी और अनुशंसा से हो जाएंगे बाहर

Kailash Makwana in the race to become DGP, will be out of administrative comment and recommendation भोपाल। मध्य प्रदेश लोकायुक्त संगठन में विशेष स्थापना पुलिस के पूर्व प्रमुख रहे कैलाश मकवाना की लोकायुक्त द्वारा लिखी गई खराब सीआर के मामले में जब मकवाना ने राज्य शासन को रिव्यू के लिए लिखा तो तत्कालीन मुख्यमंत्री ने आईपीएस अधिकारी की सीआर में सुधार किया। हालांकि सिर्फ नंबर ही पूर्व सीएम बढ़ा सके। अब यह मामला इसलिए चर्चा में हैं क्योंकि मकवाना डीजीपी की रेस में हैं। ऐसे में उनकी सीआर में कम नंबर रेस से बाहर होने की आसार बना रही है। वहीं जानकारों का कहना है कि एक बार सीएम ने सीआर में सुधार किया है तो फिर दुबारा बदलाव की गुंजाइश नहीं होती है। मध्य प्रदेश के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी 1988 बैच के कैलाश मकवाना की लोकायुक्त संगठन की विशेष पुलिस स्थापना में पोस्टिंग और लोकायुक्त जस्टिस एनके गुप्ता से उनके मतभेदों के बाद सवा साल पहले स्थानांतरण के बावजूद मकवाना-गुप्ता विवाद खत्म नहीं हुआ है। जस्टिस गुप्ता ने मकवाना की लोकायुक्त की विशेष पुलिस स्थापना में करीब छह महीने की पदस्थापना के दौरान उनके कामकाज को लेकर सीआर लिखी तो तबादले के बाद शांत पड़ा दोनों के बीच का विवाद फिर सुर्खियों में आ गया।  सीआर में नंबर देने में कंजूसी  सूत्रों के मुताबिक मकवाना के तबादले के कुछ महीने बाद लोकायुक्त ने सीआर लिखी तो उसमें उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए और नंबर देने में कंजूसी की। सीआर में दस में से पांच नंबर दिए गए। मकवाना को अपनी सीआर खराब किए जाने पर नाराजगी हुई और उन्होंने सलाह मशविरे के बाद सीआर के रिव्यू के लिए राज्य शासन को पत्र लिखा जिसमें जस्टिस गुप्ता द्वारा लिखी गई सीआर को दुर्भावनापूर्ण बताया।  यह भी सही है कि लोकायुक्त ने सीआर में कम नंबर की वजह भी बताई। मकवाना ने एक पूर्व डीजी की आय से अधिक संपत्ति पर कार्रवाई नहीं करने की वजह भी दी। फिर लोकायुक्त से मकवाना हटे तो पूर्व डीजी के खिलाफ मामला भी दर्ज हुआ।  सीआर की समीक्षा के बाद सुधार  सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मकवाना ने राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग को लोकायुक्त जस्टिस गुप्ता द्वारा लिखी गई सीआर के रिव्यू के लिए लिखा तो मामला तत्कालीन सीएम के पास पहुंचा। उन्होंने मामले में सीआर का परीक्षण किया और सीआर में मकवाना को दिए गए नंबर पांच से बढ़ाकर छह कर दिए।

पार्टी पलायन: 5 साल में कांग्रेस से भाजपा पहुंचे 62 नेता, 7 का भविष्य हुआ उज्जवल, बांकी मुंह ताक रहे

Party exodus: 62 leaders moved from Congress to BJP in 5 years, 7 have a bright future, the rest are staring at them भोपाल। पिछले पांच साल में कांग्रेस से भाजपा में 62 नेता पलायन कर गए। इसमें दावा किया है कि भाजपा में शामिल सिर्फ 7 नेताओं की ही किस्मत चमकी है। शेष पूर्व विधायक, जिलाध्यक्ष राजनीति में हाशिये पर हैं। भाजपा ने भले ही टिकट दिया लेकिन चुनाव नहीं जीत सके हैं। अब भाजपा में भी उनकी पूछ परख नहीं हो रही है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके सांसद बेटे नकुलनाथ के कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने की अटकलें हैं। दोनों नेता दिल्ली में हैं। रविवार को दिनभर अटकलें लगती रहीं कि कमलनाथ और नकुलनाथ रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर भाजपा में शामिल होंगे, लेकिन देररात तक ऐसा कुछ नहीं हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के कांग्रेस छोड़ने की चर्चाओं के बीच प्रदेश कांग्रेस में खलबली मच गई है। अब पिछले 5 साल में कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं के करियर पर भी चर्चा शुरू हो गई है। पिछले पांच साल में जिन 62 कांग्रेस नेताओं ने पार्टी छोड़ी। इनमें सिर्फ 7 नेता ही चांदी काट रहे है, बाकी पूर्व विधायक और जिलाध्यक्ष अब तक बैकबेंचर्स ही बने हुए हैं।  इनकी चमकी किस्मत   मध्य प्रदेश में 2018 में कमलनाथ ने भाजपा के विजय रथ को रोक कर कांग्रेस की सत्ता में वापसी कराई थी। हालांकि, 15 माह की सरकार के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने समर्थक विधायकों के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इससे कांग्रेस की सरकार गिर गई थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाजपा ने राज्यसभा में भेजा और उनके साथ आए समर्थक विधायकों को प्रदेश सरकार में मंत्री बनाया। सिंधिया केंद्र सरकार में उड्डयन मंत्री है। उनका कद भाजपा में लगातार बढ़ रहा है। उनके समर्थक विधायक तुलसी सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत, प्रद्घुमन सिंह तोमर समेत अन्य नेता भाजपा सरकार में मजबूत हुए।  55 नेताओं का भविष्य भाजपा में खत्म   कांग्रेस नेताओं का दावा है कि कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए 62 में से 55 नेताओं का भविष्य खत्म हो गया या राजनीति के हाशिये पर चले गए। अब वह भाजपा में बैकबैंचर्स की भूमिका में हैं। कांग्रेस के नेताओं का दावा है कि भाजपा उनका उपयोग करने के बाद उनकी राजनीति ही खत्म कर देगी। जानकारों का कहना है कि कांग्रेस अब अपने विधायक और बड़े नेताओं को भाजपा में शामिल होने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रही है। इन नेताओं का संकट में राजनैतिक भविष्य – पूर्व विधायक रघुराज सिंह कंसाना, गिर्राज डंडोतिया, कमलेश जाटव, राकेश मावई, उम्मेद सिंह बना, ओपीएस भदौरिया, रणवीर सिंह जाटव, मुन्नालाल गोयल, इमरती देवी, रामवरण सिंह गुर्जर, प्रदीप जायसवाल, अजय चौरे, सविता दीवान, लोकसभा प्रत्याशी मोना सुस्तानी, विजय सिंह सोलंकी सहित कई और भी नेता हैं। जिनके राजनैतिक भविष्य पर संकट आ गया है।

जेपी अस्पताल: आज जांच कमेटी के सामने बयान दर्ज कराएंगे कर्मचारी

J.p Hospital: Employees will record statement in front of inquiry committee today भोपाल। जेपी अस्पताल में सोनोग्राफी फीस में फर्जीवाड़ा करने वाले आउटसोर्स कर्मचारी धर्मेश कौरव के खिलाफ शिकायत करने वाले कर्मचारियों के सोमवार को बयान दर्ज होंगे। अधीक्षक राकेश श्रीवास्तव द्वारा गठित की गई जांच कमेटी ने कर्मचारियों को सोमवार को बयान दर्ज करने के लिए बुलाया है। बतादें कि आउटसोर्स कर्मचारी धर्मेश कौरव पर नियमित कर्मचारियों ने मारपीट, मेडिकल प्रणाम पत्र और सोनोग्राफी फीस में फर्जीवाड़ा करने के आरोप लगाए है। कर्मचारियों ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री, सीएमएचओ और अधीक्षक से की थी। इसके बाद धर्मेश कौरव के खिलाफ जांच करने के लिए एक कमेटी गठित की गई थी। सोमवार को जांच कमेटी कर्मचारियों के बयान दर्ज कर रिपोर्ट अधीक्षक को सौंपेंगी।  कर्मचारी संगठन हुआ लामबंद लघु वेतन कर्मचारी संघ के प्रातांध्यक्ष महेंद्र शर्मा ने बताया कि जेपी अस्पताल की कोई सुध लेना वाला नहीं है। पार्किंग ठेकेदार डॉक्टरों पर हमला कर रहे है, आए-दिन अस्पताल में चोरी की घटनाएं हो रही है। हद तो यह है कि आउटसोर्स कर्मचारी खुलेआम सोनोग्राफी फीस में फर्जीवाड़ा करने के साथ नियमित कर्मचारियों को धमका रहे है। इतना सब अस्पताल में हो रहा है। बावजूद इसके सीएमएचओ हो या फिर अस्पताल अधीक्षक ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया। शर्मा ने कहा कि अगर जल्द ही आउटसोर्स कर्मचारी पर कार्रवाई नहीं हुई तो डिप्टी सीएम से शिकायत कर अस्पताल में धरना दिया जाएगा।

वन विभाग के दागी अफसरों पर मेहरबान है शीर्ष अफसर

The top officer is kind to the tainted officers of the forest department भोपाल। जंगल महकमे के शीर्ष अधिकारी कुछ चहेते अफसरों को बचाने के लिए पूरी ताकत लगाते आ रहें है। शीर्ष अधिकारी गंभीर वित्तीय मामले में घिरे आईएफएस अधिकारियों बचाने के लिए आरोप पत्र को जारी करने के बजाय शो कॉज नोटिस जारी कर रहे हैं। जिनके खिलाफ आरोप पत्र जारी भी कर दिए गए हैं, उनके विरुद्ध आगे की कार्यवाही पेंडिंग कर दी जा रही है। विभाग के शीर्ष अधिकारियों की ढुलमुल रवैया के कारण आरोपित अधिकारी धीरे-धीरे रिटायर भी होते जा रहें है। विभाग सेवानिवृत्त अधिकारियों पर सद्भावना दिखाते हुए पेंशन भी स्वीकृत कर रहा है. मसलन, एम काली दुर्रई, देवेंद्र कुमार पालीवाल, प्रभात कुमार वर्मा जांच कार्यवाही के लंबित रहते हुए सेवानिवृत्त हो गए और अब उनके समस्त देयकों के भुगतान करने पर उदारता बरती जा रही है। दागी अफसरों को बचाने के लिए शीर्ष अधिकारी क्यों उदारता बरत रहे हैं, शोध का विषय है। इन अफसरों को अभयदान देने के प्रयास आरपी राय: खंडवा सर्किल में पदस्थ सीसीएफ आर पी राय के खिलाफ 10 जून 2019 को आरोप पत्र जारी हुआ था। आरोप था कि वन मंडल इंदौर के अंतर्गत वन परीक्षेत्र चोरल में बड़े पैमाने पर अवैध कटाई हुई थी। जांच के दौरान राय अपने दायित्वों का निर्वहन करने में असफल रहे। इसके कारण 6 लाख 93 हजार 361 रुपए की राजस्व हानि हुई थी। अभी इनसे वसूली नहीं हुई है। मामला विभाग में ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। राय अगले मई महीने सेवानिवृत्त हो गए। यही नहीं, विभागीय मंत्री की विशेष कृपा होने के कारण इनसे छह लाख 93 हजार की वसूली नहीं हो पाई।** एपीएस सेंगर: बालाघाट सर्किल में पदस्थ सीसीएफ एपीएस सेंगर के खिलाफ 24 अगस्त 2022 को आरोप पत्र जारी हुआ। मामला तब का है, जब वे टीकमगढ़ के डीएफओ हुआ करते थे। इन पर आरोप है कि भंडार क्रय नियमों का पालन नहीं किया। खरीदी में गड़बड़ी हुई। इनके खिलाफ आरोपपत्र भी बन गया परंतु प्रशासन-1 शाखा ने उदारता दिखाते हुए शो कॉज नोटिस जारी कर उन्हें बालाघाट सर्किल में प्राइम पोस्टिंग दे दी गई है। दुर्भाग्य जनक पहलू यह है कि विभाग ने इनके खिलाफ कार्रवाई करने की अद्यतन स्थिति से शासन को अवगत नहीं कराया है। यही नहीं, बल्कि सेंगर को बालाघाट सर्किल की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई। एम काली दुर्रई: 1996 बैच के आईएफएस अधिकारी एम काली दुर्रई प्रतिनियुक्ति पर हॉर्टिकल्चर में पदस्थ रहे। यहां पदस्थ रहते हुए दुर्रई ने किसानों की सब्सिडी देने के मामले में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की। इसके चलते उन्हें कमिश्नर हॉर्टिकल्चर पद से हटाया गया। मूल विभाग वन विभाग में लौटते ही उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई। प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के जांच अफसर सीके पाटिल को जांच के लिए 2 साल का पर्याप्त समय मिलने के बाद भी विभागीय जांच कंप्लीट नहीं कर पाए और वे रिटायर हो गए। राजनीतिक दबाव के चलते विभाग के अफसर उनके खिलाफ कोई बड़ी कार्यवाही नहीं कर पाए। सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले देयकों का भुगतान भी उदारता से किया जा रहा है। डीके पालीवाल: सीसीएफ शिवपुरी के पद से रिटायर हुए हैं। इनके पेंशन के भुगतान पर आपत्ति की गई है, क्योंकि धार और फिर गुना डीएफओ पद रहते हुए आर्थिक गड़बड़ी कर शासन को नुकसान पहुंचाया है। धार में पदस्थ रहते हुए पालीवाल ने एक रेंजर का समयमान वेतनमान का फिक्सेशन अधिक कर दिया। जब मामला संज्ञान में आया, तब तक पालीवाल वहां से स्थानांतरित हो गए थे। विभाग ने अतिरिक्त भुगतान के गए राशि वसूलने के नोटिस सेवानिवृत्त रेंजर को भेजा तो कोर्ट ने उस के पक्ष में फैसला देते हुए फिक्सेशन करने वाले अफसर पालीवाल से ₹300000 की वसूली करने के आदेश दिए। इसी प्रकार गुना में कैंपा फंड की राशि से गड़बड़झाला करने का भी आरोप है। इनके खिलाफ पूर्व एसीएस वन अशोक वर्णवाल ने आरोप पत्र जारी करने के निर्देश दिए थे। वर्णवाल के निर्देश पर विभाग ने उनके खिलाफ आरोप पत्र तैयार किया किंतु बड़े अफसरों के चहेते होने की वजह से आरोप-पत्र को शो-कॉज नोटिस परिवर्तित कर दिया गया है। बजट शाखा ने उनके पेंशन जारी करने पर आपत्ति लगाई है किंतु शीर्ष अफसरों ने शो-कॉज नोटिस जारी कर उनके पेंशन और समस्त देयकों के भुगतान के रास्ते प्रशस्त कर दिए। प्रभात कुमार वर्मा : 2001 बैच के आईएफएस अधिकारी प्रभात कुमार वर्मा जनवरी में सेवानिवृत्त हुए हैं। वे जब 2020 में वन विकास निगम में पदस्थ थे तब आर्थिक गड़बड़ियों के चलते उन्हें आरोप पत्र जारी किया गया। यही नहीं, विभाग ने 4 जनवरी 2022 को वन विकास निगम के एमडी को पत्र लिखकर गड़बड़ियों से संबंधित प्रचलित नस्ती उपलब्ध कराने के निर्देश दिए किंतु नस्ती उपलब्ध नहीं कराने के कारण उनके मामले में निर्णय नहीं हो सका। वे सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। जांच लंबित रहते हुए उनके देयकों के भुगतान की प्रक्रिया भी शुरू है। वर्मा पर आरोप यह भी है कि वे अपने मातहत अधिकारियों के खिलाफ दुर्भावना से कार्रवाई करते हैं। इनके शिकार खंडवा डीएफओ देवांशु शेखर, सुश्री नेहा श्रीवास्तव, अधर गुप्ता और एसडीओ विद्या भूषण मिश्रा हो चुके हैं. इनके द्वारा दुर्भावना से कार्रवाई करने की वजह से मिश्रा आईएफएस की दौड़ में पीछे रह गए हैं। दुर्भावना से की गई कार्रवाई से संबंधित दस्तावेज भी बड़े अधिकारियों को सौंपे हैं। उन पर लघु वनोपज संघ के अंतर्गत अधोसंरचना विकास के मद में भी गड़बड़ी करने के आरोप हैं। बृजेंद्र श्रीवास्तव: छिंदवाड़ा पूर्व में पदस्थ डीएफओ बृजेंद्र श्रीवास्तव के खिलाफ 21 जुलाई 2022 को नियम दस के तहत आरोप पत्र जारी किया गया था। इन पर आरोप है कि स्थानांतरण नीति के विरुद्ध जाकर कर्मचारियों के तबादले किए। आरोप पत्र का जवाब अभी तक नहीं दिया गया है। इनका तबादला वन मंत्री शाह की सिफारिश पर ग्वालियर से पूर्व छिंदवाड़ा वन मंडल जैसे महत्वपूर्ण वन मंडल में कर दिया गया है। भारत सिंह बघेल: भोपाल मुख्यालय में पदस्थ भारत सिंह बघेल को आरोप पत्र 22 मई 2006 को जारी किया गया था। बघेल ने अपने प्रभाव अवधि के दौरान पूर्व लांजी क्षेत्र में प्रभार अवधि में राहत कार्य अंतर्गत कार्यों … Read more

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