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मप्र में प्रधानमंत्री जनमन के तहत विशेष जनजाति क्षेत्रों में 194 नवीन आंगनवाडी केन्द्र खुलेंगे

194 new Anganwadi centers will open in special tribal areas under Prime Minister Janman in Madhya Pradesh. भोपाल। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) कार्यक्रम के तहत सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के अंतर्गत विशेष जनजाति क्षेत्र (पीवीजीटी) क्षेत्र में केन्द्र सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 194 नवीन आंगनवाड़ी केन्द्रों की स्वीकृति दी है। महिला-बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि हम प्रदेश की महिलाओं एवं बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में प्रदेश को आंगनवाड़ियों की सौगात मिली है। आंगनवाड़ियों का निर्माण कार्य जल्द शुरू कराया जाएगा, ताकि बच्चों को इसका लाभ मिल सके। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती निर्मला भूरिया ने इसके लिए केन्द्र सरकार का आभार माना है। नवीन आंगनवाड़ी केन्द्र खुलने से विशेष जनजाति क्षेत्रों के बच्चों को आंगनवाड़ी के माध्यम से उचित पालन-पोषण में सहायता मिलेगी। प्रदेश के 20 जिलों में खुलेंगे 194 आंगनवाड़ी केन्द्र- प्रदेश के 20 जिलों में शिवपुरी में 34, श्योपुर में 33, शहडोल 23, उमरिया 23, गुना 14, डिंडोरी 12, अशोकनगर 10, अनूपपुर 7, मंडला 6, विदिशा 5, बालाघाट 5, ग्वालियर 5, दतिया 4, जबलपुर 3, सीधी 4, मुरैना 2 एवं कटनी, छिंदवाड़ा, भिंड और रायसेन में 1-1 नवीन आंगनवाड़ी केन्द्रों को मिलाकर कुल 194 नवीन आंगनवाड़ी केन्द्र खुलेंगे।

जेपी अस्पताल: आउटसोर्स कर्मचारी के आगे प्रबंधक नतमस्तक, सोनोग्राफी की फीस कर्मचारी ने अपने खाते में कराई जमा

J.p Hospital: Manager bowed before the outsourced employee, the employee deposited the sonography fees in his account. भोपाल। राजधानी के मॉडल अस्पताल जेपी में एक आउटसोर्स कर्मचारी सुर्खियों में हैं। उनके खिलाफ अस्पताल के नियमित कर्मचारी लामबंद होकर उनकी अनियमित्ताओं की शिकायत भी कर चुके हैं। यह शिकायत मुख्यमंत्री, सीएमएचओ कार्यालय से लेकर सिविल सर्जन को हो चुकी है। इसके बावजूद अस्पताल के जिम्मेदार अफसर कोई निर्णय नहीं ले पा रहे। कर्मचारी पर आरोप है कि वे सरकारी मद में जमा होने वाली सोनोग्राफी की फीस अपने निजी बैंक अकाउंट में जमा कराते हैं। इन्हीं सभी विषयों पर सबूत के साथ बकायदा शिकायत की गई है। यह शिकायत जयप्रकाश अस्पताल के नियमित कर्मचारियों ने दिसंबर 2023 में की थी। जिसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने आरोपों की जांच करने के लिए कमेटी बनाने का निर्णय लिया था। कमेटी ने कर्मचारियों को 6 और 7 फरवरी को बयान दर्ज करने के नोटिस दिए। उस वक्त कर्मचारियों की भारी संख्या देखकर सिविल सर्जन कार्यालय ने कार्य की अधिकता बताकर दो लोगों के बयान दर्ज कर पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। कार्रवाई नहीं तो उप मुख्यमंत्री से करेंगे शिकायत आउटसोर्स कर्मचारी का नाम धर्मेश कौरव हैं जो रोगी कल्याण समिति की तरफ से देय वेतन में 2016 से पदस्थ हैं। उनके पास सोनोग्राफी की फीस लेने का भी काम हैं। आरोप है कि आउटसोर्स कर्मचारी यह फीस अपने निजी खाते में जमा कराई। जिसके तीन सबूत प्रबंधन को सौंपे गए हैं। अगर एक सप्ताह में जांच कर आउटसोर्स कर्मचारी पर कार्रवाई नहीं की तो उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से शिकायत की जाएगी। महेंद्र शर्मा, प्रांताध्यक्ष, लघु वेतन कर्मचारी संघ शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई आउटसोर्स कर्मचारी धर्मेश कौरव ड्यूटी के दौरान सहयोगियों के साथ अभद्रता और मारपीट करते हैं। वह सोनोग्राफी कराने आने वाले मरीजों से फीस की रसीद काटने की बजाए अपने खाते में रुपए जमा कराता है। जिसको लेकर कई बार शिकायत सीएमएचओ और सिविल सर्जन से की जा चुकी है। इसके बाद भी अब तक धर्मेश कौरव के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।  बयान के बाद होगी कार्रवाई जेपी अस्पताल अधीक्षक डॉ राकेश श्रीवास्तव का कहना है कि आउटसोर्स कर्मचारी धर्मेश कौरव के खिलाफ कमेटी गठित कर जांच की जा रही है। शिकायती कर्मचारियों के बयान दर्ज कर जांच कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी। जांच कमेटी सोमवार को कर्मचारियों के बयान दर्ज करेगी।

विधायक पर एफआईआर कराने सीएम हाउस पहुंचा संयुक्त संघर्ष मोर्चा  

United Sangharsh Morcha reached CM House to file FIR against MLA भोपाल। आठ साल पहले इकबाल मैदान में मध्य क्षेत्र के कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के एक बयान को लेकर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारी शनिवार को सीएम हाउस पहुंचे, जहां उन्होंने सीएम मोहन यादव के ओएसडी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में विधायक पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। मोर्चा अध्यक्ष शमसुल हसन बल्ली ने बताया कि आठ साल पहले (2016) में आरिफ मसूद ने मिली काउंसिल के सदस्यों के साथ इकबाल मैदान में धर्म सभा का आयोजन किया था, जिसमे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह को लेकर अपशब्दों का प्रयोग किया गया। जिसमें मसूद और मिली काउंसिल के मौलानाओं ने हिंदू-मुस्लिम धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाले बयान भी दिए थे। जिसके बाद इनके खिलाफ तलैया थाने में मामला लंबित है। मोर्चा पदाधिकारियों की शिकायत पर आठ साल में भी कार्रवाई नहीं की गई है। इस मामले में सीएम से विधायक पर कार्रवाई की मांग की गई है।

वन विभाग के दागी अफसरों पर मेहरबान है शीर्ष  अफसर

Top officers are kind to the tainted officers of the Forest Department विशेष संवाददाता  जंगल महकमे के शीर्ष अधिकारी कुछ चहेते अफसरों को बचाने के लिए पूरी ताकत लगाते आ रहें है। शीर्ष अधिकारी गंभीर वित्तीय मामले में घिरे आईएफएस अधिकारियों बचाने के लिए आरोप पत्र को जारी करने के बजाय शो कॉज नोटिस जारी कर रहे हैं। जिनके खिलाफ आरोप पत्र जारी भी कर दिए गए हैं, उनके विरुद्ध आगे की कार्यवाही पेंडिंग कर दी जा रही है। विभाग के शीर्ष अधिकारियों की ढुलमुल रवैया के कारण आरोपित अधिकारी धीरे-धीरे रिटायर भी होते जा रहें है। विभाग सेवानिवृत्त अधिकारियों पर सद्भावना दिखाते हुए पेंशन भी स्वीकृत कर रहा है. मसलन, एम काली दुर्रई, देवेंद्र कुमार पालीवाल, प्रभात कुमार वर्मा जांच कार्यवाही के लंबित रहते हुए सेवानिवृत्त हो गए और अब उनके समस्त देयकों के भुगतान करने पर उदारता बरती जा रही है। दागी अफसरों को बचाने के लिए शीर्ष अधिकारी क्यों उदारता बरत रहे हैं, शोध का विषय है। इन अफसरों को अभयदान देने के प्रयास  आरपी राय: खंडवा सर्किल में पदस्थ सीसीएफ आर पी राय के खिलाफ 10 जून 2019 को आरोप पत्र जारी हुआ था। आरोप था कि वन मंडल इंदौर के अंतर्गत वन परीक्षेत्र चोरल में बड़े पैमाने पर अवैध कटाई हुई थी। जांच के दौरान राय अपने दायित्वों का निर्वहन करने में असफल रहे। इसके कारण 6 लाख 93 हजार 361 रुपए की राजस्व हानि हुई थी। अभी इनसे वसूली नहीं हुई है। मामला विभाग में ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। राय अगले मई महीने सेवानिवृत्त हो गए। यही नहीं, विभागीय मंत्री की विशेष कृपा होने के कारण इनसे छह लाख 93 हजार की वसूली नहीं हो पाई। एपीएस सेंगर: बालाघाट सर्किल में पदस्थ सीसीएफ एपीएस सेंगर के खिलाफ 24 अगस्त 2022 को आरोप पत्र जारी हुआ। मामला तब का है, जब वे टीकमगढ़ के डीएफओ हुआ करते थे। इन पर आरोप है कि भंडार क्रय नियमों का पालन नहीं किया। खरीदी में गड़बड़ी हुई। इनके खिलाफ आरोपपत्र भी बन गया परंतु  प्रशासन-1 शाखा ने उदारता दिखाते हुए शो कॉज नोटिस जारी कर उन्हें बालाघाट सर्किल में प्राइम पोस्टिंग दे दी गई है। दुर्भाग्य जनक पहलू यह है कि विभाग ने इनके खिलाफ कार्रवाई करने की अद्यतन स्थिति से शासन को अवगत नहीं कराया है। यही नहीं, बल्कि सेंगर को बालाघाट सर्किल की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई।   एम काली दुर्रई:  1996 बैच के आईएफएस अधिकारी एम काली दुर्रई प्रतिनियुक्ति पर हॉर्टिकल्चर में पदस्थ रहे। यहां पदस्थ रहते हुए दुर्रई ने किसानों की सब्सिडी देने के मामले में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की। इसके चलते उन्हें कमिश्नर हॉर्टिकल्चर पद से हटाया गया। मूल विभाग वन विभाग में लौटते ही उनके खिलाफ  विभागीय जांच शुरू की गई। प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के जांच अफसर सीके पाटिल को जांच के लिए 2 साल का पर्याप्त समय मिलने के बाद भी विभागीय जांच कंप्लीट नहीं कर पाए और वे रिटायर हो गए। राजनीतिक दबाव के चलते विभाग के अफसर उनके खिलाफ कोई बड़ी कार्यवाही नहीं कर पाए। सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले देयकों का भुगतान भी उदारता से किया जा रहा है।    डीके पालीवाल: सीसीएफ शिवपुरी के पद से रिटायर हुए हैं। इनके पेंशन के भुगतान पर आपत्ति की गई है, क्योंकि धार और फिर गुना डीएफओ पद रहते हुए आर्थिक गड़बड़ी कर शासन को नुकसान पहुंचाया है। धार में पदस्थ रहते हुए पालीवाल ने एक रेंजर का समयमान वेतनमान का फिक्सेशन अधिक कर दिया। जब मामला संज्ञान में आया, तब तक पालीवाल वहां से स्थानांतरित हो गए थे। विभाग ने अतिरिक्त भुगतान के गए राशि वसूलने के नोटिस सेवानिवृत्त रेंजर को भेजा तो कोर्ट ने उस के पक्ष में फैसला देते हुए फिक्सेशन करने वाले अफसर पालीवाल से ₹300000 की वसूली करने के आदेश दिए। इसी प्रकार गुना में कैंपा फंड की राशि से गड़बड़झाला करने का भी आरोप है। इनके खिलाफ पूर्व एसीएस वन अशोक वर्णवाल ने आरोप पत्र जारी करने के निर्देश दिए थे। वर्णवाल के निर्देश पर विभाग ने उनके खिलाफ आरोप पत्र तैयार किया किंतु बड़े अफसरों के चहेते होने की वजह से आरोप-पत्र को शो-कॉज नोटिस परिवर्तित कर दिया गया है। बजट शाखा ने उनके पेंशन जारी करने पर आपत्ति लगाई है किंतु शीर्ष अफसरों ने शो-कॉज नोटिस जारी कर उनके पेंशन और समस्त देयकों के  भुगतान के रास्ते प्रशस्त कर दिए।  प्रभात कुमार वर्मा : 2001 बैच के आईएफएस अधिकारी प्रभात कुमार वर्मा जनवरी में सेवानिवृत्त हुए हैं। वे जब 2020 में वन विकास निगम में पदस्थ थे तब आर्थिक गड़बड़ियों के चलते उन्हें आरोप पत्र जारी किया गया। यही नहीं, विभाग ने 4 जनवरी 2022 को वन विकास निगम के एमडी को पत्र लिखकर गड़बड़ियों से संबंधित प्रचलित नस्ती उपलब्ध कराने के निर्देश दिए किंतु नस्ती उपलब्ध नहीं कराने के कारण उनके मामले में निर्णय नहीं हो सका। वे सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। जांच लंबित रहते हुए उनके देयकों के भुगतान की प्रक्रिया भी शुरू है। वर्मा पर आरोप यह भी है कि वे अपने मातहत अधिकारियों के खिलाफ दुर्भावना से कार्रवाई करते हैं। इनके शिकार खंडवा डीएफओ देवांशु शेखर, सुश्री नेहा श्रीवास्तव, अधर गुप्ता और एसडीओ विद्या भूषण मिश्रा हो चुके हैं. इनके द्वारा दुर्भावना से कार्रवाई करने की वजह से मिश्रा आईएफएस की दौड़ में पीछे रह गए हैं। दुर्भावना से की गई कार्रवाई से संबंधित दस्तावेज भी बड़े अधिकारियों को सौंपे हैं। उन पर  लघु वनोपज संघ के अंतर्गत अधोसंरचना विकास के मद में भी गड़बड़ी करने के आरोप हैं।  बृजेंद्र श्रीवास्तव: छिंदवाड़ा पूर्व में पदस्थ डीएफओ बृजेंद्र श्रीवास्तव के खिलाफ 21 जुलाई 2022 को नियम दस के तहत आरोप पत्र जारी किया गया था। इन पर आरोप है कि स्थानांतरण नीति के विरुद्ध जाकर कर्मचारियों के तबादले किए। आरोप पत्र का जवाब अभी तक नहीं दिया गया है। इनका तबादला वन मंत्री शाह की सिफारिश पर ग्वालियर से पूर्व छिंदवाड़ा वन मंडल जैसे महत्वपूर्ण वन मंडल में कर दिया गया है। भारत सिंह बघेल: भोपाल मुख्यालय में पदस्थ भारत सिंह बघेल को आरोप पत्र 22 मई 2006 को जारी किया गया था। बघेल ने अपने प्रभाव अवधि के दौरान पूर्व लांजी क्षेत्र में प्रभार अवधि में राहत कार्य अंतर्गत कार्यों … Read more

संबल योजना में निगम ने दर्ज कराई एफआईआर, तीन जोनल अधिकारी निलम्बित, 5 वार्ड प्रभारियों पर भी कार्रवाई 

Corporation lodged FIR in Sambal Yojana, three zonal officers suspended, action taken against 5 ward in-charges also भोपाल। नगर निगम भोपाल द्वारा संबल घोटाले में एफआईआर दर्ज कराई गई है।अपर आयुक्त रणबीर सिंह ने गोविंदपुरा थाने में मामला दर्ज कराया है। इस मामले में निगम द्वारा 3 जोनल अधिकारियों को निलंबित किया गया है। जानकारी के मुताबिक इस मामले में योजना का काम देखने वाले कर्मचारी अनिल साहू पर मामला दर्ज कराया गया है। हैरानी की बात इसलिए है क्योकि आयुक्त फ्रेंक नोबल ए के द्वारा शुक्रवार को ही अपर आयुक्त निधि सिंह के नेतृत्व में जांच समिति बनाई थी, जिसे 15 दिन में रिपोर्ट देनी है। ज्ञात हो कि संबल घोटाले को लेकर 118 फ़ाइल संदिग्ध पाई गई थी जिसकी जांच होना थी, लेकिन इसके पहले ही कार्रवाई कर दी गई।  यह मामला लगातार मीडिया में छाया रहा इसके बाद यह कार्रवाई की गई। जिस कर्मचारी अनिल साहू पर मामला दर्ज कराया गया है, उस पर फ़र्ज़ी दस्तावेजों के आधार पर शासन की संबल योजना का अपात्रों को लाभ दिलाये जाने का गम्भीर आरोप है। इस मामले में निगम ने जिन 3 जोनल अधिकारियों को निलंबित किया है, उनमें ज़ोन 3 के अनिल शर्मा, ज़ोन 12 के अभिषेक श्रीवास्तव और ज़ोन 18 के सुभाष जोशी को निलंबित किया गया है। वहीं 5 वार्ड प्रभारी जिनमें कपिल सोनी, नितेश अरुणेश्वर, अभिमन्यु श्रीवास्तव और शिवकुमार गोफनीया को पहले ही निलम्बित कर दिया गया है।

वर्षों से विभिन्न विभागों में अटैच प्रोफेसरों को वापस बुलाने की तैयारी

Preparation to recall professors attached to various departments for years भोपाल। वर्षों से विभिन्न विभागों में अटैच प्रोफेसरों को वापस बुलाने के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों ने उच्च शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार को ज्ञापन सौंपा है। जिसके बाद इन प्रोफेसरों को मूल पदस्थापना पर भेजने के तैयारी चल रही है। हालांकि कुछ इसे रोकने के लिए मंत्रियों और विभाग के आला अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। दरअसल, प्रदेश के कॉलेजों में वर्षों से प्रोफेसरों और कर्मचारियों के पद खाली पड़े हैं। प्रोफेसरों की पदस्थापना कॉलेजों में होने के कारण उन पदों पर अतिथि विद्वान भी नहीं रखे जा रहे हैं।  ऐसे में प्रदेश के अधिकांश सरकारी कॉलेजों में नए असिस्टेंट प्रोफेसरों और अतिथि विद्वानों के भरोसे पढ़ाई चल रही है। जबकि विषय विशेषज्ञ प्रोफेसर उच्च शिक्षा विभाग के कार्यालयों में बाबूगिरी कर रहे हैं। सूत्रों की माने तो करीब सौ से अधिक प्रोफेसर विभाग, मंत्रियों और विधायकों के पास अटैच हैं। अकेले राजधानी में डेढ़ दर्जन प्रोफेसर मुख्यालय और अन्य विभागों में अटैच होकर काम कर रहे हैं। जबकि इनका वेतन उनकी मूल पदस्थापना वाले कॉलेजों से निकल रहा है।

पॉलिटेक्निक चौराहे के टावर पर चढ़ी फीजियोथैरेपिस्ट, नगर निगम की टीम ने सकुशल उतारा

Physiotherapist climbed the tower of Polytechnic intersection, Municipal Corporation team brought her down safely भोपाल। श्यामला हिल्स स्थित पॉलिटेक्निक चौराहा पर शुक्रवार शाम एक फीजियोथैरेपिस्ट मोबाइल टावर पर चढ़ गई। वह टावर से कूदने की धमकी दे रही थी। सूचना पर पहुंची नगर निगम की टीम और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए महिला को टावर से नीचे उतार लिया। महिला को अयोध्या नगर थाने भेजा गया है। दरअसल, महिला ने अयोध्या नगर थाने में दो एफआईआर कराई थी और कोर्ट में मामला विचाराधीन है। विचाराधीन मामले में आरोपी पक्ष महिला पर दबाव बना रहा था। इसी से दुखी होकर वह टावर पर चढ़ गई थी। जानकारी के अनुसार 37 साल की महिला मूलत: सागर की रहने वाली है। उन्होंने मिनाल रेसीडेंसी में मकान खरीदा था। कुछ रुपए वह दे चुकी थी, जबकि कुछ रकम देनी बाकि थी। रुपए बाकि होने के कारण द्वारिका प्रसाद और ठेकेदार सुधीर शर्मा रुपए के लिए दबाव बना रहे थे। महिला ने अयोध्या नगर में दोनों के खिलाफ 2021 में छेड़छाड़ की शिकायत दर्ज कराई थी। कुछ दिन बाद आरोपियों ने उसके साथ घर में घुसकर मारपीट की थी। उसकी भी एफआईआर कराई थी। महिला का कहना है कि आरोपी उसे घर से बेदखल कर चुके है। अब वह पुराने केस में समझौता करने के लिए दबाव बना रहे हैं। वह आरोपियों की शिकायत लेकर थाने पहुंची तो पुलिस ने उसकी मदद नहीं की। इसी से दुखी होकर वह श्यामला हिल्स के पॉलिटेक्निक चौराहा पहुुंची और टावर पर चढ़ गई।

12 आईपीएस अफसरों के तबादले; बैतूल, नीमच एसपी को हटाया; उज्जैन एसपी का भी ट्रांसफर

Transfer of 12 IPS officers; Betul, Neemuch SPs removed; Ujjain SP also transferred मध्यप्रदेश शासन ने 12 आईपीएस अफसरों के तबादले किए हैं। आदिवासी पिटाई कांड के बाद बैतूल एसपी सिद्धार्थ चौधरी को हटाया गया है। उन्हें सेनानी, 8वीं वाहिनी विशेष सशस्त्र बल छिंदवाड़ा में पदस्थ किया गया है।उज्जैन एसपी सचिन शर्मा को मप्र भवन दिल्ली में अतिरिक्त आवासीय आयुक्त बनाया गया है। इनकी जगह दतिया एसपी प्रदीप शर्मा को उज्जैन का एसपी बनाया गया है। वहीं नीमच एसपी अमित तोलानी को सेनानी, 24वीं वाहिनी विशेष सशस्त्र बल जावरा, रतलाम में पदस्थ किया गया है। अनिल सिंह कुशवाह को IG जबलपुर रेंज बनाया गया है।

भोपाल में सीएम हेल्पलाइन में 5 हजार शिकायतें पेडिंग

5 thousand complaints padding in CM Helpline in Bhopal भोपाल। राजस्व प्रकरण और शिकायतों को निपटाने में अधिकारी सफलता हासिल नहीं कर पा रहे हैं। यही वजह है कि अब भी सीएम हेल्पलान पर लगभग पांच हजार शिकायतें लंबित हैं और लगभग पांच सौ राजस्व प्रकरण लंबित हैं। सोमवार को कलेक्ट्रेट में हुई टीएल बैठक के दौरान एडीएम और सीईओं ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाते हुए चेतावनी दी है।बैठक में एडीएम हरेद्र नारायण, जिला पंचायत सीईओ ऋतुराज सिंह, सभी एसडीएम, डीप्टी कलेक्टर, तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार उपस्थित थे। जानकारी के अनुसार राजस्व महाअभियान के तहत भोपाल जिले को पहले स्थान पर लाने के लिए सभी तरह की शिकायतों, राजस्व प्रकरणों सहित अन्य विभाग के प्रकरणों का निराकरण करने के लिए कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने निर्देश दिए थे। इसके बाद राजस्व अधिकारियों ने नामांतरण, बंटान, सीमांकन सहित अन्य काम को निपटाने का काम तो शुरू किया था लेकिन इसकी रफ्तार में फिर से कमी आ गई है।हालात यह है कि बैरसिया, कोलार, हुजूर, गोविंदपुरा, संत हिरदाराम नगर, शहर, एमपीनगर, टीटीनगर में लगभग 500 राजस्व प्रकरण लंबित हैं। जबकि सीएम हेल्पलाइन पर कुल 13 हजार शिकायतें विभिन्न विभागों की दर्ज हुई हैं। इनमें से पांच हजार शिकायतें अब भी लंबित हैं।टीएल बैठक में जिला पंचायत सीईओ ऋतुराज सिंह ने विभागानुसार शिकायतों और प्रकरणों की समीक्षा करते हुए जिम्मेदार एसडीएम, तहसीलदारों को फटकार लगा दी। साथ ही चेतावनी दी है कि जल्द से जल्द लंबित प्रकरण और मामलों का निराकरण करें।

हमीदया अस्पताल में हफ्ता वसूली की जांच जारी

Investigation of week recovery continues in Hamiday Hospital भोपाल। मप्र मानव अधिकार आयोग ने भोपाल जिले के तीन मामलों मे संज्ञान लिया है। भोपाल जिले के हमीदिया अस्पताल में असामाजिक तत्वों द्वारा कर्मचारियों से हफ्ता वसूली करने का मामला सामने आया है। असामाजिक तत्व रात के समय अस्पताल में घुसकर कर्मचारियों से हफ्ता वसूली कर रहे है। इस संबंध में अस्पताल कर्मचारियों ने पुलिस में शिकायत दर्ज की है। मामले में संज्ञान लेकर आयोग ने अधीक्षक, हमीदिया अस्पताल और पुलिस कमिश्नर को जांच के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही की गई कार्यवाही के संबंध में तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।इन मामलों में भी लिया संज्ञानआयोग ने भोपाल के शाहपुरा इलाके की एक बस्ती में रहने वाली 47 वर्षीय महिला के साथ एक युवक द्वारा शारीरिक दुराचार करने और मिसरोद थानाक्षेत्र में पुलिस विभाग के एक आरक्षक द्वारा युवती के साथ दुराचार और दैहिक शोषण करने के मामले में संबंधित अधिकारियों के जांच के निर्देश देने के साथ ही मामले की रिपोर्ट तलब की है।

बजट की माया, कौन समझ पाया… साहित्य की भाषा में समझें

The illusion of the budget who could understand… understand in the language of literature भोपाल। मध्यप्रदेश का वित्त बजट 3 लाख, 14, हजार, 25 करोड़ के लिए वित्त मंत्री श्री जगदीश देवड़ा द्वारा प्रस्तुत किया गया है, वह वास्तव में पूर्ण बजट न होकर 31 जुलाई 2024 तक के लिए लेखानुदान है। इस बजट में यह समझदारी तो परिलक्षित होती ही है कि आगत लोकसभा के चुनाव को देखते हुए कोई कड़वी दवा न दी जाए। अत: इसको चुनावी बजट तो कहा ही जा सकता है। बड़ी बात यह कि जैसा विपक्षी दल यह दुष्प्रचार कर रहे थे, कि मामाजी के जाते ही लाडली बहनों को मिलने वाली राशि बंद कर दी जाएगी, उस आशंका और दुष्प्रचार को मोहन सरकार ने यथावत रखने हेतु वित्तीय प्रावधान रखकर, निर्मूल कर दिया। दूसरी बात यह कि भाजपा की नए वोटर पर पैनी दृष्टि है अत: 12 कक्षा में अच्छे नंबरों से पास होने वाली छात्राओं को अब साइकिल के स्थान पर ई स्कूटी देने हेतु बजट में प्रावधान रखना चतुराई का प्रमाण है। पहली बार पेपरलेस ई बजट प्रस्तुत करना डिजिटल इंडिया की ओर बढ़ता हुआ एक कदम है। देश की जीडी पी में मध्यप्रदेश का योगदान 3.6 से बढ़कर 4.8 हो जाना आर्थिक स्थिरता और समृद्धि का परिचायक है।  इस बार का बजट युवा, महिला, बेटी और जनजातीय वर्ग को समर्पित है। साथ ही मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर को गति देने वाला है भोपाल, इंदौर मेट्रो को गति देने हेतु फंड का आवंटन इसका प्रमाण है। सरकार द्वारा 1000 वाहनों को अपने बेड़े में से कम करके उनकी जगह प्रदूषण रहित ई वाहन चलाने की घोषणा करना जहां पर्यावरण प्रदूषण को कम करने की स्वागत योग्य पहल है वहीं केंद्र सरकार की योजनाओं से तालमेल स्थापित करने का प्रयास भी है। मिलेट्स को बढ़ावा देने हेतु सब्सिडी की योजना से किसानों की आय बढ़ेगी, सीएम राइज स्कूलों के लिए बजट में वृद्धि निश्चित ही शिक्षा के क्षेत्र में एक सराहनीय पहल है। गरीबों को मकान की रजिस्ट्री की दर 5 प्रतिशत से 0 प्रतिशत कर देना भी राहत देने वाला कदम है। अनुसूचित जनजाति का बजट 37 प्रतिशत बढ़ा देना बताता है कि आदिवासी वोटों को सरकार अगले चुनावों में हाथ से नहीं जाने देना चाहती। भले ही बजट में कोई नया कर नहीं लगाया परंतु किसी तरह की कोई राहत भी नहीं दी गई। कुल मिलाकर नई सरकार मोदी के फुट प्रिंट पर चलती दिखाई दी। पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस की कीमतों में कमी होने की अपेक्षा थी जो पूरी नहीं हुई। मैं चूंकि साहित्यकार हूं तो अपनी बात कहूंगा कि अधिकांश राज्यों में सरकार द्वारा पुस्तक खरीदी योजना चलाई जाती है, जिससे सत्साहित्य को एवम साहित्यकारों को बढ़ावा मिलता है तथा सामाजिक उत्थान होता है। मध्यप्रदेश में भी यह योजना लागू थी परंतु कुछ वर्षों से पुस्तक खरीदी योजना बंद होने से साहित्यकारों में निराशा और आक्रोश है। साहित्यकार कई वर्षों से यह मांग करते आ रहे हैं परंतु इस बार भी सरकार ने निराश किया। आशा है मुख्यमंत्री इसपर ध्यान देंगे।

हमीदिया अस्पताल: एंबुलेंस चालकों का आरोप: शव ले जाने से पहले पार्किंग संचालक मांगता है कमीशन

Hamidia Hospital: Allegations of ambulance drivers: Parking operator demands commission before taking the dead body भोपाल। हमीदिया अस्पताल में पार्किंग व शव वाहन का संचालन विवाद की जड़ बन गया है। अकसर रात में यहां दो गुट एक दूसरे के लोगों को धमकाते व मारपीट करते हैं। हाल ही में इसका एक वीडियो भी वयरल हुआ था। वहीं अब करीब 11 एंबुलेंस चालकों द्वारा कोहफिजा थाने में लिखित शिकायत की गई है। जिसमें पार्किंग संचालक नरेंद्र गोस्वामी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। लिखित आवेदन में कहा गया है कि पार्किंग संचालक शव ले जाने से पहले कमीशन मांगता है। उसकी बात ना मानने मारपीट व जान से मारने तक की धमकी देता है। इस मामले में पार्किंग संचालक नरेंद्र का कहना है कि यह वे लोग हैं जो प्रति माह 2 हजार रुपए का तय किराया नहीं दे रहे हैं। इनसे जब किराया मांगा गया तो, इन्होंने झूठा आरोप लगाना शुरू कर दिया। इनके पीछे सलमान और आरीफ नाम के लोगों का हाथ। जो अकसर हमीदिया परिसर में गुंडागर्दी करते हैं। परिजनों से वसूल रहे दो से ढाई गुना किरायापार्किंग को लेकर चल रहे इस विवाद से परेशान मरीजों व परिजनों को होना पड़ रहा है। परिजनों को हमीदिया से शव निवास तक ले जाने के लिए दो से ढाई गुना अधिक किराया चुकाना पड़ रहा है। यह स्थिति बीते डेढ़ से दो साल से बनी हुई। अस्पताल प्रबंधन से लेकर प्रसाशन तक ने अब तक इस पर कोई कठोर कदम नहीं उठाए हैं। जिसके चलते अस्पताल की व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हो रही है।

जेपी अस्पताल: हद है… किसी दूसरे मरीज का एक्स-रे देख डॉक्टर ने शुरू कर दी थी इलाज की तैयार

Jaypee Hospital: This is too much… the doctor started preparing for treatment after seeing the X-ray of another patient भोपाल। राजधानी मॉडल अस्पताल जेपी में एक बार फिर इलाज के प्रति स्टाफ की लापरवाही उजागर हुई है। यदि मरीज चिकित्सक की बात मानकर इलाज शुरू करा देता तो उसको जो नुकसान होता उसकी भरपाई नामुमकिन थी। लेकिन मरीज ने समझदारी दिखाई और सेकेंड ओपिनियन के लिए वह एक निजी अस्पताल पहुंच गया, जहां पता चला कि उसे वो बीमारी ही नहीं है, जिसका इलाज जेपी अस्पताल के चिकित्सक बता रहे थे। दरअसल समीर सूफी नाम का एक मरीज 6 फरवरी को जेपी अस्पताल पहुंचा। उसकी दाढ़ में से अक्सर खून आता रहता है, यही समस्या लेकर वह जेपी अस्पताल गया और यहां डॉ. यश से चैकअप कराया। डॉ. यश ने मरीज का एक्स-रे कराने को कहा। एक्स-रे जेपी अस्पताल में ही हुआ था। एक्स-रे की रिपोर्ट देख डॉ. यश ने मरीज समीर से कहा कि आपका दाढ़ सढ़ गई है, इसे निकालना होगा। मरीज ने इस बात पर आपत्ति भी ली और कहा कि मुझे भोजन चबाने में कोई दिक्कत नहीं होती, लेकिन चिकित्सक ने मरीज की बात को नकार दिया और दाढ़ निकलवाने की राय देता रहा।मरीज ने कराया फिर से एक्स-रेजेपी अस्पताल से निराश होकर लौटे समीर सूफी ने आठ फरवरी को करोंद स्थित पीपुल्स डेंटल अस्पताल में एक संपर्क किया। यहां चिकित्सक ने मरीज का फिर से एक्स-रे किया। इस एक्स-रे में मरीज की दाढ़ को एक दम स्वस्थ्य बताया और खून आने का कारण नस में परेशानी को बताया। इतना ही नहीं इस समस्या का इलाज बिना किसी चीर फाड़ या दाढ़ निकलवाने के बजाए सिर्फ दवाओं से बताया। इस मामले में अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. राकेश श्रीवास्तव का कहना है कि मामले को दिखवाना पड़ेगा, किस स्तर पर गलती हुई है। यदि कहीं कोई चूक हुई है तो कार्रवाई भी की जाएगी।

अब विदेशी प्रोफेसर लेंगे आईआईआईटी में ऑनलाइन क्लास, विद्यार्थियों को मिलेगा कई विषयों में विशेष मागर्दशन

Now foreign professors will take online class in triple IIIT, students will get special guidance in many subjects भोपाल। राजधानी स्थित भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) ने अपने विद्यार्थियों के विश्वस्तरीय शिक्षण के लिए चीन, ऑस्ट्रेलिया एवं जापान सहित अन्य देशों के प्रसिद्ध शिक्षकों के साथ अनुबंध किया है। यह विदेशी प्रोफेसर ऑनलाइन माध्यम से विश्वस्तरीय अनुसंधान एवं तकनीकों से विद्यार्थियों को अवगत कराएंगे। प्रोफेसरों में शियाओचिंग वेन, एथानासियोस वासिलकोस, सी टेंग सो, डॉण् वॉल्कर लिंडेंसट्रुथ, चंग नेन ली और गुरदीप सिंह जैसे अनुभवी एवं विश्व स्तरीय प्रोफेसर शामिल हैं। यह सभी यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड ईस्टर्न शोर्स, सुन्येत्सन यूनिवर्सिटी, कर्टीन यूनिवर्सिटी और यूआईए नॉर्वे जैसी विश्व प्रसिद्ध संस्थाओं में कार्यरत हैं।  प्रोफेसर अथानासियोस वी. वासिलकोस स्वीडन में लूलिया यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में पूर्णकालिक प्रोफेसर हैं। वे कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल और स्पेस इंजीनियरिंग में प्रोफेसर हैं। उनकी विशेषज्ञता साइबर-भौतिक प्रणालियों में सुरक्षा है। उन्होंने सुरक्षा और गोपनीयता, क्रिप्टोग्राफी, साइबर सुरक्षा के अर्थशास्त्र, क्रिप्टोकरेंसी प्रोटोकॉल, नेटवर्क, कॉम्प्लेक्स नेटवर्क, क्लाउड कंप्यूटिंग, बिग डेटा, मशीन लर्निंग, बायोकंप्यूटिंग में गहन शोध किया है। उन्होंने 1500 से अधिक शोध प्रकाशित किए हैं। ट्रिपल आईटी भोपाल ने प्रोण् वासिलकोस के साथ सहयोग किया है। वे ऑनलाइन व्याख्यान के माध्यम से कॉलेज के छात्रों के साथ अपने अनुभव साझा करेंगे। यह है इन प्रोफेसर्स की विशेषज्ञताडॉ. सी तेंग सोह वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में कर्टिन विवि में एसोसिएट प्रोफेसर हैं।  विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के तहत इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर और गणित विज्ञान स्कूल में कार्यरत हैं। उन्होंने लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी, बैटन रूज से पोस्ट-डॉक्टरेट की पढ़ाई पूरी की है। वे कंप्यूटर नेटवर्क, नेटवर्क, विश्वसनीयता, वायरलेस मेष नेटवर्क ट्रैफिक इंजीनियरिंग, पीयर-टू-पीयर नेटवर्क, एल्गोरिदम डिजाइन शामिल हैं। जर्मनी के फ्रेंकफर्ट में निदेशक हैं प्रो. वोल्कर:प्रो. वोल्कर लिंडेनस्ट्रुथ वर्तमान में जर्मनी के फ्रेंकफर्ट में फ्रेंकफर्ट इंस्टीट्यूट फॉर एडवांस्ड स्टडीज में निदेशक मंडल के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने कई वैज्ञानिक पदों पर काम किया है और 1997 में आईकोर प्रौद्योगिकियों की स्थापना की है। उनके शोध का क्षेत्र कंप्यूटर विज्ञान और एआई सिस्टम है, जिसमें ऊर्जा, बिग डेटा, उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग और परमाणु भौतिकी पर प्रमुख ध्यान दिया गया है। प्रो. हुरा यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड ईस्टर्न से जुड़ेप्रोण् गुरदीप एस. हुरा वर्तमान में यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड ईस्टर्न शोर से जुड़े हुए हैं। उन्होंने 1972 में जबलपुर विवि (भारत) से बीई, 1975 में रूड़की विवि से एमई और 1984 में रूड़की विवि से पीएच.डी. प्राप्त की। मील का पत्थर साबित होगाट्रिपल आईटी के निदेशक प्रो.आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि ट्रिपल आईटी के विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय विदेशी प्रोफेसर्स का शिक्षण ट्रिपल आईटी भोपाल के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।

केंद्र सरकार के इशारे पर आयकर विभाग कार्यवाही के नाम पर कांग्रेस नेताओं पर दबाव डाल रहा है : जीतू पटवारी

At the behest of the Central Government, the Income Tax Department is putting pressure on Congress leaders in the name of action: Jitu Patwari भोपाल । मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से अनौपचारिक चर्चा के दौरान कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार के इशारे पर आयकर विभाग द्वारा हाल ही में कांग्रेस पार्टी के देश एवं प्रदेश के सैकड़ों नेताओं व कार्यकर्ताओं को समन जारी किये जाने की खबरें सामने आ रही हैं। आयकर विभाग द्वारा कांग्रेस नेताओं पर की जा रही यह कार्यवाही केंद्र सरकार के इशारे पर आयकर विभाग द्वारा केवल दबाव डालने और राजनैतिक उद्देश्यों से प्रेरित होकर की जा रही है। जब-जब चुनाव आते हैं सत्ता में बैठी भाजपा का यह घिनौना कृत्य करने का तरीका सामने आने लगता है।   पटवारी ने कहा कि इससे पूर्व भी 2019 में लोकसभा चुनाव के ठीक पहले ऐसी ही कार्यवाही राजनैतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए केंद्र सरकार के दबाव में आयकर विभाग द्वारा कांग्रेस नेताओं पर की गई थी, अवैधानिक तरीके से छापे मारी की गई थी, इस कार्यवाही को लेकर न्यायालय में भी चुनौती दी गई थी जो आज भी लंबित है। आयकर विभाग इस न्यायालयीन प्रक्रिया में न्यायालय के समक्ष दस्तावेज तक पेश नहीं कर सकी। इसी तरह अब 2024 में भी निकट भविष्य में लोकसभा चुनाव होना है तो फिर आयकर विभाग ने केंद्र सरकार के इशारे पर उसी तरह की कार्यवाही को दोहराना शुरू कर दिया है। कांग्रेस से जुड़े नेताओं, कार्यकर्ताओं को कभी समन तो कभी नोटिस देकर प्रताड़ित किया जा रहा है। आयकर विभाग से जारी नोटिस एवं समन में किसी भी करदाता से कोई दस्तावेज नहीं मांगा गया, केवल उनकी उपस्थिति के आदेश जारी किये गये हैं। इनता ही नहीं समन जारी होने पर उनके विधिक जबाव भी पेश किये गये, जिसमें समन जारी करने के विधिक कारण भी चाहे गये हैं। आयकर विभाग द्वारा केवल एक पंक्ति का आदेश दिया गया है जिसमें कोई दस्तावेज नहीं, बल्कि कांग्रेस के पूर्व मंत्रियों, वर्तमान एवं पूर्व विधायकों को दिल्ली स्थित आयकर विभाग के कार्यालय में उपस्थित होने के लिए कहा गया है। वहीं पटवारी ने यह भी कहा कि जो हमारे पूर्व साथी आज भाजपा में चले गये हैं, जो मौजूदा सरकार में मंत्री, विधायक हैं उनमें से किसी भी व्यक्ति को आयकर विभाग द्वारा एक भी समन अथवा नोटिस जारी नहीं किया गया है। इस तरह की पक्षपातपूर्ण राजनीति से स्पष्ट है कि आयकर विभाग स्वयं एक राजनैतिक पार्टी की तरह हर चुनाव के पूर्व मात्र सनसनी पैदा करने व राजनैतिक प्रतिद्धंदियों की मानहानि के उद्देश्य से काम करता है। पटवारी ने पत्रकारों से पूछे गए सवाल में कहा कि मैं राज्यसभा सदस्य की दौड़ में शामिल नहीं हूं। एक व्यक्ति एक पद की गरिमा पर कायम हूं और रहूंगा। वहीं प्रदेश सरकार द्वारा किसानों, महिलाओं के साथ किये जा रहे धोखे पर कहा कि किसानों को 2700 और 3100 रू. धान एवं गेहूं पर समर्थन मूल्य दे सरकार। वहीं महिलाओं को 3000 रूपयें और 450 रू. में सिलेण्डर देने की जो राज्य सरकार ने अपने घोषणा पत्र में बात कही भी, उस पर भी सरकार अमल करें। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार जितनी कोशिश आंदोलन को असफल बनाने में कर रही है, यदि उससे आधे प्रयास भी किसानों की मांगों व समस्याओं को सुनने में लगा दे तो बहुत हद तक असलियत समझ आ जाएगी। पटवारी ने कहा कि भाजपा द्वारा कांग्रेस के लोगों पर ईडी और आयकर का दबाव बनाकर उन्हें भाजपा में शामिल करने का दबाव बनाया जा रहा है। वहीं कुछ स्वार्थी प्रकार के नेता ईडी आयकर के डर से अपने धंधा बचाने स्वयं भाजपा में शामिल हो रहे हैं।

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