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भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष वैभव पंवार ने की 13 दिवसीय ‘माँ बैनगंगा नदी दर्शन व अध्ययन यात्रा’

BJYM State President Vaibhav Panwar did 13-day ‘Maa Bainganga River Darshan and Study Tour’ सिवनी/बालाघाट। भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वैभव पंवार ने 15 दिसंबर 2024 को माँ बैनगंगा नदी के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से ‘माँ बैनगंगा नदी दर्शन व अध्ययन यात्रा’ का शुभारंभ किया। यह यात्रा सिवनी जिले के मुंडारा (परतापुर) में माँ बैनगंगा के उद्गम स्थल से आरंभ हुई। पंवार ने विविधत पूजन और आरती के बाद इस यात्रा को आगे बढ़ाया। यात्रा के दौरान लगभग 160 किलोमीटर की पदयात्रा की गई, जबकि शेष यात्रा सहयात्रियों के साथ बस से पूरी की गई। यह यात्रा मध्यप्रदेश के सिवनी-बालाघाट के अधिकांशतः गांवों से होते हुए महाराष्ट्र और तेलंगाना के कुछ जिलों की सीमाओं से होकर गुजरी। इस दौरान पंवार ने स्थानीय लोगों से चर्चा कर माँ बैनगंगा नदी के संरक्षण, घाटों के निर्माण और उससे जुड़ी सांस्कृतिक मान्यताओं पर संवाद किया। यात्रा का समापन तेलंगाना के गोदावरी किनारे स्थित संगम घाट पर पूजन के साथ हुआ। पंवार ने माँ बैनगंगा की पवित्रता और उसके महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह यात्रा नदी संरक्षण के प्रति जनजागृति फैलाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि“माँ बैनगंगा नदी केवल एक जलधारा नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, आस्था और पर्यावरणीय संतुलन की आधारशिला है। प्रकृति संरक्षण के लिए जनभागीदारी जरूरी उन्होंने कहा कि ‘माँ बैनगंगा नदी दर्शन व अध्ययन यात्रा’ के माध्यम से हमने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि नदियाँ केवल हमारे भौतिक जीवन का ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन का भी हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि इस यात्रा में हमें यह महसूस हुआ कि नदी संरक्षण केवल सरकार का काम नहीं, बल्कि हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। माँ बैनगंगा के संरक्षण और घाटों के निर्माण के लिए जनभागीदारी सुनिश्चित करना हमारा लक्ष्य है। आने वाली पीढ़ियों के लिए इस पवित्र धरोहर को संजोकर रखना हम सभी का कर्तव्य है।” 30 दिसंबर को होगा प्रसादी वितरण 30 दिसंबर 2024 को सोमवती अमावस्या के दिन मुंडारा (परतापुर) सिवनी में माँ बैनगंगा के उद्गम स्थल पर पूजन और प्रसादी का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेंगे।

मध्यप्रदेश बीजेपी में जबर्दस्त खींचतान, मोहन-शर्मा-सिंधिया सबके पावर खत्म, हाईकमान का सीधा हस्तक्षेप

Tremendous tussle in Madhya Pradesh BJP, Sharma-Scindia lose power, direct intervention of high command भोपाल ! मध्यप्रदेश में संगठन चुनावों के दौरान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में भारी उथल-पुथल देखने को मिली। पार्टी के भीतर मंडल अध्यक्षों और जिला अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर खींचतान साफ झलकी। पार्टी ने पहले पारदर्शिता का दावा करते हुए कहा था कि नियुक्तियां किसी मंत्री, सांसद, विधायक, या जिलाध्यक्ष की पसंद से नहीं, बल्कि योग्यता के आधार पर होंगी। लेकिन व्यवहार में यह वादा अधूरा ही रहा। हाईकमान का नया निर्देश बीजेपी हाईकमान ने इस स्थिति से निपटने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे नेताओं का जिला अध्यक्षों के चयन में सीधा हस्तक्षेप समाप्त कर दिया गया है। हाईकमान ने स्पष्ट कर दिया है कि जैसे सांसद और विधायक के टिकट का निर्णय केंद्रीय नेतृत्व करता है, वैसे ही अब जिलाध्यक्षों का चयन भी दिल्ली से होगा। जिला अध्यक्षों के चयन प्रक्रिया में बदलाव मध्यप्रदेश में बीजेपी जिलाध्यक्षों की चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जिला स्तर पर चुनाव अधिकारियों ने तीन नामों का पैनल तैयार कर प्रदेश संगठन को सौंप दिया है। अब इन नामों पर अंतिम निर्णय हाईकमान करेगा। यह पहली बार है जब मध्यप्रदेश बीजेपी में जिलाध्यक्षों का निर्धारण सीधे दिल्ली से किया जाएगा। पारदर्शिता और योग्यता पर जोर इस बदलाव का उद्देश्य संगठन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। अब तक जिलाध्यक्षों का चयन स्थानीय नेताओं द्वारा किया जाता रहा, जिसमें कई बार सांसद और विधायकों ने अपनी पसंद के लोगों को ही प्राथमिकता दी। इससे योग्यता को दरकिनार किया गया। नई व्यवस्था के तहत काबिल और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को प्रमुख जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। मंडल अध्यक्षों के चुनाव में विवाद हाल ही में हुए मंडल अध्यक्षों के चुनावों में कई गड़बड़ियां सामने आईं। पार्टी द्वारा तय किए गए क्राइटेरिया, जैसे 45 साल की आयु सीमा, आपराधिक रिकार्ड न होना, और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल न होना, का पालन कई जगहों पर नहीं हुआ। कई मंडल अध्यक्षों की नियुक्तियों पर विवाद हुआ, और कुछ को चयन के तुरंत बाद हटा भी दिया गया। नई व्यवस्था से उम्मीदें मंडल अध्यक्षों के चुनाव में सामने आए विवादों और शिकायतों के बाद हाईकमान ने जिलाध्यक्षों के चयन को लेकर सख्ती दिखाई है। अब दिल्ली से चयन होने से पारदर्शिता और निष्पक्षता की उम्मीद बढ़ गई है। इससे कार्यकर्ताओं का विश्वास भी मजबूत होगा और पार्टी संगठन को नई दिशा मिलेगी। यह कदम मध्यप्रदेश बीजेपी के संगठन को न केवल मजबूती देगा, बल्कि योग्यता और पारदर्शिता के नए मानदंड भी स्थापित करेगा।

‘ये आदेश एलजी नहीं, अमित शाह के ऑफिस से आया है’, महिला सम्मान योजना के जांच के आदेश पर भड़के केजरीवाल

‘This order has come from Amit Shah’s office, not from LG’, Kejriwal angry over the order to investigate Mahila Samman Yojana दिल्ली ! उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने महिला सम्मान योजना की जांच के आदेश दिए हैं। इसे लेकर अरविंद केजरीवाल ने भाजपा पर हमला बोला है। केजरीवाल का कहना है कि भाजपा दिल्ली में महिला सम्मान योजना रोकना चाहती है। ये आदेश एलजी ऑफिस से नहीं, अमित शाह के ऑफिस से आया है। भाजपा महिलाओं का सम्मान नहीं करती है। भाजपा दिल्ली चुनाव में हार मान चुकी है। दिल्ली में महिला सम्मान योजना को महिलाओं का पूरा समर्थन मिल रहा है। अब तक 22 लाख से ज्यादा महिलाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है। केजरीवाल ने कहा कि महिला सम्मान योजना और संजीवनी योजना से दिल्ली के लोग खुश थे। भाजपा इन योजनाओं को रोकना चाहती है। भाजपा महिला सम्मान योजना से बौखला गई है। भाजपा वाले दिल्ली में पैसे बांट रहे हैं। मैंने कहा था कि चुनाव जीतने के बाद हम महिलाओं को 2100 रुपए देंगे और 60 साल से ऊपर के बुजुर्गों को मुफ्त इलाज देंगे। ये दोनों योजनाएं जनता के लिए इतनी फायदेमंद थीं कि लाखों लोगों ने पहले ही इनके लिए रजिस्ट्रेशन करा लिया था। इससे भाजपा घबरा गई, कई भाजपा नेताओं ने मुझसे कहा कि जीतना तो छोड़िए, कई जगह भाजपा की जमानत जब्त हो जाएगी। केजरीवाल ने कहा कि पहले उन्होंने अपने गुंडे भेजे, फिर पुलिस भेजकर रजिस्ट्रेशन कैंप उखाड़ दिया, आज उन्होंने फर्जी जांच के आदेश दे दिए कि जांच होगी। किस बात की जांच होगी? हमने चुनावी घोषणा की थी कि चुनाव जीतेंगे तो इसे लागू करेंगे। मुझे खुशी है कि इस कदम से भाजपा ने साफ कर दिया है कि वे चुनाव क्यों लड़ रहे हैं। आज उन्होंने बता दिया है कि अगर आप उन्हें वोट देंगे तो वे महिला सम्मान योजना और संजीवनी योजना को लागू नहीं करेंगे। वे बसों में महिलाओं की मुफ्त यात्रा बंद कर देंगे, वे आपकी मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी, मोहल्ला क्लीनिक, मुफ्त इलाज और मुफ्त शिक्षा बंद कर देंगे।उपराज्यपाल ने महिला सम्मान योजना के जांच के आदेश दिएएलजी सचिवालय ने महिला सम्मान योजना के जांच के आदेश दिए हैं। एलजी सचिवालय ने दिल्ली के मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं। डिविजनल कमिश्नर से जांच करने को कहा गया है। सचिवालय ने पुलिस कमिश्नर से कहा है कि वे उन लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई करें जो लाभ देने की आड़ में डेटा की गोपनीयता भंग कर रहे हैं।

उज्जैन के बीजेपी लोक शक्ति कार्यालय पर इन दिनों शहर और जिला अध्यक्ष पद को लेकर गहमा गहमी देखने को मिल रही

उज्जैन मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के संगठन चुनाव चल रहे हैं जिनमें हाई प्रोफाइल सीटों पर जबरदस्त मुकाबला देखने को मिल रहा है. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के गृह नगर उज्जैन की हाई प्रोफाइल सीट पर शहर और जिला अध्यक्ष पद की दौड़ में कई नेता शामिल हैं. भारतीय जनता पार्टी के प्रभारी विधायकों द्वारा रायशुमारी चल रही है. धार्मिक नगरी उज्जैन के बीजेपी लोक शक्ति कार्यालय पर इन दिनों शहर और जिला अध्यक्ष पद को लेकर गहमा गहमी देखने को मिल रही है. उज्जैन में शहर और जिला अध्यक्ष पद को लेकर 24 नाम पर विचार चल रहा है. उज्जैन के नगर निगम के पूर्व सभापति सोनू गहलोत के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी में निर्वाचन प्रक्रिया के तहत शहर और जिला अध्यक्ष का चयन होता है लेकिन यह सब सौहार्दपूर्ण माहौल में रायशुमारी के साथ हो जाता है. इस बार भी भारतीय जनता पार्टी में कई योग्य दावेदार हैं, जिनका चयन चल रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि 31 दिसंबर के पहले ही नए अध्यक्ष का नाम सामने आ जाएगा. भाजपा नेता सौदान सिंह के मुताबिक शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोगों नेताओं के नाम पर रायशुमारी चल रही है. विधायक भगवान दास सबनानी ने कई नेताओं से बातचीत कर शहर और जिला अध्यक्ष को लेकर नाम की पैनल तैयार की है. उज्जैन में रायशुमारी, भोपाल से लगेगी मुहर भारतीय जनता पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक उज्जैन में राय सोमारी का दौर चल रहा है लेकिन आखिरी मुहर भोपाल से ही लगेगी. भोपाल से ही शहर और जिला अध्यक्ष नाम की घोषणा होगी. हालांकि बीजेपी में यह देखने में आता है कि महामंत्री को आगे शहर और अध्यक्ष की कमान मिलती है. इसी तरह के समीकरण उज्जैन में भी देखने को मिल रहा है.

BJP के प्रदेश अध्यक्ष पद पर किसकी ताजपोशी होगी? इस बात की चर्चा भोपाल से लेकर दिल्ली तक

भोपाल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष पद पर किसकी ताजपोशी होगी? इस बात की चर्चा भोपाल से लेकर दिल्ली तक चल रही है. 15 जनवरी तक बीजेपी की मध्य प्रदेश इकाई को नया अध्यक्ष मिल जाएगा, लेकिन किसके नाम का ऐलान होगा? इसे लेकर हर कोई अलग-अलग नाम पर चर्चा कर रहा है. मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के जिला और शहर अध्यक्ष पद को लेकर नेताओं के बीच रायशुमारी चल रही है. सभी जिला और शहर अध्यक्षों की घोषणा के बाद प्रदेश अध्यक्ष का चयन होगा. प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में इस बार कई नेताओं के नाम शामिल हैं. मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव हारने वाले कई नेता प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल हैं. इसके अलावा प्रदेश पदाधिकारी के लिए भी कई नामों का जिक्र हो रहा है. हालांकि, अभी आलाकमान का पूरा फोकस शहर और जिला अध्यक्ष पर किया है. शहर, जिला अध्यक्ष और जिला प्रतिनिधि मिलकर प्रदेश अध्यक्ष का चयन करेंगे. प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा को 4 साल का कार्यकाल मिला है. लोकसभा चुनाव की वजह से पिछले साल होने वाले चुनाव को इस बार संपन्न कराया जा रहा है. प्रदेश प्रवक्ता राजपाल सिंह सिसोदिया के मुताबिक, 15 जनवरी तक नए अध्यक्ष का नाम सामने आ जाएगा. उन्होंने बताया कि अभी शहर और जिला अध्यक्ष को लेकर विचार-विमर्श चल रही है. सांसद ही बनते आ रहे हैं प्रदेश अध्यक्ष, इस बार क्या होगा? अगर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के पद की बात की जाए तो लंबे समय से यह देखने में आ रहा है कि सांसदों को ही ये जिम्मेदारी दी जा रही है. इनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सत्यनारायण जटिया, नंदू चौहान, राकेश सिंह, विष्णु दत्त शर्मा जैसे कई नाम शामिल हैं. इस बार भी यह कोशिश की जा रही है कि किसी सांसद को ही प्रदेश अध्यक्ष पद की कमान मिले. वर्तमान अध्यक्ष भी दौड़ में शामिल वरिष्ठ पत्रकार सुनील जैन के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा भी दोबारा कार्यकाल की दौड़ में शामिल नजर आ रहे हैं. उनके कार्यकाल में ही बीजेपी की दो बार सरकार बन चुकी है. जब उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था, उस समय मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी. इसके बाद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद बीजेपी की सरकार बन गई. इसके पश्चात विधानसभा चुनाव 2023 में भी विष्णु दत्त शर्मा का ही कार्यकाल था, जब बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत हासिल की.

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का आलेख

Article by former Chief Minister of Madhya Pradesh Kamal Nath कमलनाथमध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार का एक साल का कार्यकाल 13 दिसंबर को पूरा हो गया। अब बीजेपी इस एक साल को स्वर्णिम कार्यकाल बताकर अपनी पीठ थपथपा रही है। लेकिन मोहन सरकार ने गरीबों, किसानों, युवाओं, महिलाओं, दलितों और सभी वर्गों के लोगों के लिए क्‍या किया है यह विचारणीय है। महिला सुरक्षा, दलित और आदिवासी सुरक्षा के मामले में मध्यप्रदेश का रिकॉर्ड और भी खराब हो गया है। स्वास्थ्य शिक्षा का हाल यह है कि मध्यप्रदेश की पहचान व्यापमं और नर्सिंग जैसे घोटालों से होने लगी है। समाज की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था, हर पहलू पर इतनी नाकामी क्यों हासिल हो रही है? इससे बढ़कर चिंता की बात यह है कि मध्य प्रदेश सरकार इन सारे विषयों पर एकदम चुप है। क्या जनता के विकास के ये सबसे महत्वपूर्ण पैरामीटर सरकार की प्राथमिकता से बाहर हो गए हैं? ऐसा लगता है कि मध्य प्रदेश की सरकार ने जमीनी सच्चाई से पूरी तरह पीठ फेर ली है और प्रदेश को उसके हाल पर छोड़ कर, खुद सिर्फ झूठी ब्रांडिंग से अपनी पीठ थपथपाने में व्यस्त हो गई है। हकीकत से मुंह फेर कर मोहन सरकार झूठे प्रचार-प्रसार में मस्‍त है। जबकि चुनावों के पहले बीजेपी ने बड़े-बड़े वादे कर जनता को गुमराह करने का काम किया। आज प्रदेश की जनता खुद सरकार से सवाल करना चाहती है कि वादों का क्‍या हुआ? सरकार कर्ज पर कर्ज लेकर अपनी गाड़ी को चला रही है। और सपने ऐसे दिखाए जा रहे हैं कि प्रदेश ने विकास के कई सोपान गढ़ लिए हैं। दलितों पर अत्‍याचार पिछले एक साल में प्रदेश में दलितों पर काफी अत्‍याचार हुए हैं। वह चाहे शिवपुरी की घटना हो या सागर की घटना हो। सारे प्रदेश में दलितों पर हो रहे अत्‍याचारों से यही लगता है कि यह साल दलित अत्‍याचार पर केन्द्रित रहा है। शिवपुरी के इंदरगढ़ में एक दलित युवक की लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। मध्यप्रदेश के सागर जिले के ग्राम बरोदिया नोनागिर में दलित युवती द्वारा छेड़छाड़ की शिकायत से गुस्साए गुंडों ने युवती के भाई की पिछले वर्ष अगस्त माह में हत्या कर दी थी। हत्या में बीजेपी नेताओं पर आरोप लगे। पीड़ित परिवार समझौते के लिये तैयार नहीं हुआ तो दो दिन पूर्व पीड़िता के चाचा की भी हत्या कर दी गई। मंदसौर जिले के एक गांव में एक महिला का पीछा करने के आरोप में दलित व्यक्ति को चेहरा काला करके, गले में जूतों की माला डालकर घुमाया गया। यह दोनों घटनाएं तो सिर्फ ऐसी थी जो सुर्खियों में ज्‍यादा रहीं लेकिन‍ ऐसी न जाने हजारों घटनाएं हैं जो रोज दलितों से साथ घटती रहीं। दुर्भाग्य की बात है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस तरह के विषयों पर कुछ भी कहने से बचते रहे और दलितों की सुरक्षा सुनिश्चित कराने में पूरी तरह नाकाम रहे। कर्ज के भरोसे सरकार मध्य प्रदेश में कर्ज दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। ऐसा कोई महीना नहीं बीतता है जब सरकार कर्ज न ले रही हो। सरकार पिछले 11 महीनों में 40 हजार 500 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है। राज्य यादव सरकार के एक साल पूरे होने के साथ कर्ज का आंकड़ा 52.5 हजार करोड़ तक पहुंचने वाला है। दिसंबर 2023 से अब तक सरकार ने 47.5 हजार करोड़ का कर्ज लिया है। साल 2024 के अंत तक राज्य पर कुल कर्ज 4 लाख करोड़ से अधिक हो जाएगा। पिछले 6 माह में हर महीने 05-05 हजार करोड़ का कर्ज लिया जा रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में अब तक 30 हजार करोड़ का कर्ज लिया जा चुका है। 31 मार्च 2025 तक मप्र सरकार का कर्ज 4.21 लाख करोड़ पहुंचेगा। मौजूदा वित्त वर्ष में सरकार अपनी जरूरतों के लिए लगभग 25 हजार करोड़ का अतिरिक्त कर्ज लेगी। पिछले साढ़े चार साल में मप्र सरकार पर कर्ज का बोझ सबसे तेजी से बढ़ा है। मार्च 2020 की स्थिति में सरकार पर लगभग 2.01 लाख करोड़ का ही कर्ज था, लेकिन पिछले साढ़े चार साल में यह दोगुना हो गया है। वादे पूरे करने में नाकाम मोहन सरकार सरकार अपने कार्यकाल का एक साल पूरा होने का जश्न मना रही है। लेकिन‍ अपने वादों को भूल गई है। चुनावों के समय जो वादे किये थे उन पर ध्‍यान ही नहीं है। लाडली बहनों को 3,000 रुपये की राशि देने का वादा, किसानों को उपज का दाम मिलना, युवाओं को रोजगार देने का वादा, महिलाओं को सुरक्षा देने का वादा, भ्रष्‍टाचार मुक्‍त प्रदेश बनाने का वादा ऐसे तमाम वादे थे जो एक साल में शुरू ही नहीं हुए हैं। किसान परेशान, जश्‍न में सरकार मध्य प्रदेश में खाद की कमी के कारण किसानों की आय पर भी काफी असर पड़ा है। किसानों ने खाद की कमी के कारण अपनी फसल ही नहीं बोई। किसानों को ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पहले साल के कार्यकाल में ऐसे मामले हैं जहां मोहन यादव की सरकार बैकफुट पर नजर आई। राज्य में कानून व्यवस्था को लेकर सवाल 13 दिसंबर 2023 को मोहन यादव राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। मोहन यादव के पहले कार्यकाल में मध्य प्रदेश में क्राइम के कई ऐसे मामले आए जिसके राज्य सरकार की किरकिरी हुई। वैसे तो प्रदेश को शांति का टापू कहा जाता है लेकिन प्रदेश में दिनोंदिन बढ़ रहे अपराधों ने मध्‍यप्रदेश को बदनाम किया है। अपराधों के आंकड़ों में लगातार इजाफा हो रहा है। क्‍या महिलाएं क्‍या बच्चियां, कोई सुरक्षित नहीं है। साइबर क्राइम भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। नौकरियों की घोषणा पर भर्ती नहीं राज्य के युवाओं को साधने के लिए मोहन यादव की सरकार ने एक लाख पदों पर भर्ती की घोषणा की थी। दिसंबर महीने से भर्ती शुरू होनी थी लेकिन कई विभाग ऐसे हैं जो यह रिपोर्ट तक नहीं दे पाए हैं कि उनके विभाग में कितने पद खाली हैं। बीते एक साल से भर्ती नहीं होने पर युवाओं में ओवरएज होने का डर है। नर्सिंग घोटाला से धूमिल हुई छवि राज्य में नर्सिंग घोटाले के बाद प्रदेश सरकार की छवि धूमिल हुई है। राज्य में कॉलेजों की संख्या कम की गई है। नर्सिंग घोटाले … Read more

पांढुर्णा: भाजपा जिला अध्यक्ष के लिए संगठन ने भेजा नामों का पैनल, आलाकमान करेगा अंतिम फैसला

पांढुर्णा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पांढुर्णा जिला संगठन में जिलाध्यक्ष के चयन को लेकर प्रक्रिया संपन्न हो चुकी है। रायशुमारी के माध्यम से संभावित नामों का चयन किया गया और पैनल तैयार कर प्रदेश नेतृत्व को भेजा गया। इसके बाद केंद्रीय नेतृत्व इन नामों का आकलन कर अंतिम निर्णय करेगा। जिलाध्यक्ष चयन प्रक्रिया: पहली बार नई रणनीति भाजपा ने पहली बार लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तरह जिलाध्यक्षों के चयन के लिए विस्तृत और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई है। पार्टी ने तय किया है कि संगठनात्मक क्षमता, सामाजिक समीकरण, और नेतृत्व कौशल को प्राथमिकता दी जाएगी। चयन प्रक्रिया का स्वरूप भाजपा जिला कार्यालय में 12 मंडल अध्यक्षों, तीनों तहसीलों (पांढुर्णा, सौंसर, नांदनवाड़ी) के वरिष्ठ पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ रायशुमारी की गई। रायशुमारी के आधार पर तीन-तीन नामों का पैनल तैयार किया गया। सभी नाम प्रदेश भाजपा कार्यालय भेजे गए, जहां से यह सूची केंद्रीय नेतृत्व को भेजी जाएगी। केंद्रीय नेतृत्व दावेदारों का मूल्यांकन कर अंतिम चयन करेगा। प्रबल दावेदार और सामाजिक समीकरण जिलाध्यक्ष पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं। इनमें मुख्यतः कुनबी समाज से वर्तमान जिलाध्यक्ष श्रीमती वैशाली ताई महाले, राहुल मोहोड़, संदीप मोहड़, देवीदास राउत, वही पावर समाज से श्रीमती सुनीता यादवराव डोबले, क्रिष्णकुमार डोबले और तेली समाज से श्रीमती मीनाक्षी ताई खुरसंगे, ठाकुर समाज से नरेंद्र परमार जैसे दावेदार भी चर्चा में रहे। हालाकि संगठन नेतृत्व में प्रबल नाम वर्तमान जिलाध्यक्ष श्रीमती वैशाली महाले का माना जा रहा है। केंद्रीय नेतृत्व करेगा अंतिम फैसला संगठन ने सामाजिक समीकरण और कार्यकर्ताओं की अनुभवजन्य क्षमता को ध्यान में रखते हुए पैनल तैयार किया है। केंद्रीय नेतृत्व सभी नामों का आकलन करेगा और जनवरी 2025 तक जिलाध्यक्ष के नाम की घोषणा संभव है। संघ की पृष्ठभूमि और संगठनात्मक अनुभव को मिलेगी प्राथमिकता भाजपा ने स्पष्ट किया है कि ऐसे कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जो लंबे समय से संगठन से जुड़े हैं, जिनकी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की पृष्ठभूमि है, और जिन्होंने संगठन में अनुकरणीय कार्य किया है। भाजपा की नई रणनीति इस बार भाजपा ने जिलाध्यक्ष चयन में पारदर्शिता और संगठनात्मक शक्ति को बढ़ाने के लिए नई रणनीति अपनाई है। पार्टी का उद्देश्य है कि सक्षम और प्रभावी नेतृत्व तैयार किया जाए, जो आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में संगठन को मजबूत कर सके।

नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन में आरएसएस की दखल बढ़ा, संघ की पृष्ठभूमि वाले नेता को ही इस पद की जिम्मेदारी मिलेगी!

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की तैयारी में जुट गई है। फरवरी महीने के अंत तक भगवा पार्टी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने की संभावना है। फिलहाल सत्तारूढ़ पार्टी बूथ, जिला और विभागीय अध्यक्षों के चुनाव में व्यस्त है। जल्द ही प्रदेश अध्यक्षों का चयन होगा। इस बात की संभावना है कि आधे से अधिक राज्यों के अध्यक्ष बदले जा सकते हैं। इसके बाद नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम का ऐलान किया जाएगा। इस रेस में कई नाम चल रहे हैं। हालांकि, पार्टी सूत्रों का कहना है कि सारी अटकलों पर पानी फिर सकता है। हरियाणा और महाराष्ट्र चुनाव में भाजपा को मिली शानदार जीत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है। इसे देखते हुए नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन में आरएसएस की दखल बढ़ने की संभावना है। ऐसी चर्चा है कि जेपी नड्डा के एक विवादास्पद बयान के बाद आरएसएस और भाजपा के बीच दूरी बन गई थी। इसका खामियाजा पार्टी को लोकसभा चुनाव में उठाना पड़ा था। लेकिन हरियाणा और महाराष्ट्र के नतीजों के बाद आरएसएस और भाजपा के बीच रिश्ते सामान्य होने की बात भी कही जाने लगी है। इन नामों की चर्चा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए जिन नामों की चर्चा है उनमें केंद्रीय मंत्रियों मनोहर लाल खट्टर, शिवराज सिंह चौहान, भूपेंद्र यादव, धर्मेन्द्र प्रधान और भाजपा के वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े का नाम शामिल है। हालांकि पार्टी सूत्रों का कहना है कि इन नामों पर विचार करना अभी जल्दबाजी हो सकती है। अंतिम निर्णय भले ही पीएम मोदी और अमित शाह लेंगे, लेकिन आरएसएस को नजरअंदाज करना मुश्किल होगा। ऐसे में संघ की पृष्ठभूमि वाले नेता को ही इस पद की जिम्मेदारी मिलेगी, जो कि भविष्य में दोनों संगठनों की बीच सामंजस्य बनाकर चल सके। बीजेपी एक दलित नेता को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने पर विचार कर सकती है। अमित शाह के द्वारा संसद में बाबा साहब भीमराव आंबेडकर को लेकर दिए गया बयान के बाद भाजपा फिलहाल बैकफुट पर दिख रही है। वहीं, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे भी दलित समुदाय से आते हैं। ऐसे में बीजेपी दलित मुद्दे पर विपक्ष के आरोपों का जवाब दे सकती है। ऐसे में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, पार्टी महासचिव दुष्यंत गौतम और उत्तर प्रदेश मंत्री बेबी रानी मौर्य के नाम की भी चर्चा होने लगी है।

20 जनवरी तक हो सकता है BJP के नए अध्यक्ष का ऐलान, जनवरी के दूसरे सप्ताह में बैठक

नई दिल्ली भाजपा को नया अध्यक्ष अगले सााल जनवरी-फरवरी में मिल सकता है। इसके लिए कुछ केंद्रीय मंत्रियों समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के नाम चर्चा में हैं। हालांकि, इस बारे में फैसला होने से पूर्व भाजपा तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेताओं के बीच जनवरी के दूसरे सप्ताह में अनौपचारिक बैठक हो सकती है। इसके पहले पार्टी आधा दर्जन से ज्यादा राज्यों में नये अध्यक्षों की नियुक्ति करेगी। भाजपा नेतृत्व नये अध्यक्ष को लेकर जल्दबाजी में नहीं है। वह संगठन स्तर पर अपनी स्थिति को व्यापक व मजबूत करने के साथ आगे बढ़ रहा है। मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा केंद्र में मंत्री बनने के बाद भी अपना दायित्व निभा ही रहे हैं और संगठन स्तर पर भी पूरी तरह सक्रिय हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा है कि संगठन चुनाव चल रहे हैं। जनवरी-फरवरी में नया अध्यक्ष संगठन को मिल जाएगा। दिल्ली के विधानसभा चुनाव को लेकर इस नेता का कहना है कि यह संगठन पर निर्भर करेगा कि उसकी उस समय की प्राथमिकताएं और जरूरतें क्या हैं। चूंकि नया अध्यक्ष 15 जनवरी के बाद आना है, इसलिए अगर चुनाव के चलते संगठन एक माह का और समय लेता है तो उसमें कोई दिक्कत नहीं है। दरअसल, भाजपा अध्यक्ष के चयन के पहले पार्टी व संघ के नेताओं के बीच नये नेता को लेकर चर्चा होना बाकी है। अभी जो नाम चर्चा में है, वह अनुमानों पर है। सूत्रों के अनुसार, अभी तक न तो भाजपा नेतृत्व ने किसी नाम को लेकर संघ से चर्चा की है और न ही संघ ने किसी नाम का सुझाव दिया है। संभवतः जनवरी के दूसरे सप्ताह में भाजपा व संघ के शीर्ष नेताओं के बीच इस बारे में अनौपचारिक बैठक होगी, जिसमें नए अध्यक्ष को लेकर चर्चा होगी। जिन नामों की चर्चा है उनमें केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल खट्टर, भूपेंद्र यादव, वरिष्ठ नेता नरेंद्र सिंह तोमर, जी. किशन रेड्डी आदि शामिल हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि राज्यों के संगठन चुनावों में आधा दर्जन से ज्यादा प्रदेशों में नये अध्यक्ष आना तय हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, गुजरात शामिल हैं। संगठन चुनावों की मौजूदा स्थिति में अधिकांश राज्यों में मंडल अध्यक्षों के चुनाव पूरे हो चुके हैं। इस माह के अंत और जनवरी के पहले सप्ताह तक जिलों के चुनाव पूरे किए जाने की तैयारी है। इसके बाद राज्यों के चुनाव होंगे। क्या कहता है बीजेपी का संविधान? भारतीय जनता पार्टी के संविधान के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने से पहले कम से कम आधे राज्य इकाइयों में संगठनात्मक चुनाव खत्म पूरे जाने चाहिए. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यकाल 3 साल का होता है. हालांकि 2024 में लोकसभा चुनाव को देखते हुए जेपी नड्डा के कार्यकाल को आगे बढ़ा दिया गया था. 2020 में राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे नड्डा फरवरी 2020 में जेपी नड्डा को बीजेपी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था. नड्डा पार्टी के 11वें राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. इसके बाद जनवरी 2023 में नड्डा का कार्यकाल पूरा हो रहा था उससे पहले ही अमित शाह ने कहा कि बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने सर्वसम्मति से पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा का कार्यकाल जून 2024 तक बढ़ाने का फैसला किया. तब से लेकर अभी तक नड्डा बीजेपी अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे हैं. अब बीजेपी का नया अध्यक्ष सरकार या संगठन किसी से भी हो सकता है. बीजेपी का राष्ट्रीय पार्टी या फिर संगठन से कोई भी हो सकता है. अभी तक किसी का भी नाम सामने नहीं आया है. आने वाले कुछ दिनों में इसे लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है.

मध्य प्रदेश नेतृत्व से भेजे जाने वाले तीन नामों में से अंतिम अंतिम मुहर दिल्ली से ही लगाई जाएगी

भोपाल भाजपा संगठन चुनाव को लेकर अब जिला अध्यक्षों को चुने जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सोमवार को राष्ट्रीय सहमंत्री शिव प्रकाश, केंद्रीय पर्यवेक्षक सरोज पांडे, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, संगठन मंत्री हितानंद की मौजूदगी में जिला अध्यक्ष चुनाव को लेकर बैठक बुलाई गई। बैठक में स्पष्ट हुआ है कि इस बार भाजपा के जिला अध्यक्षों के नाम सांसद-विधायकों की तरह दिल्ली से ही तय होंगे। मध्य प्रदेश नेतृत्व से भेजे जाने वाले तीन नामों में से अंतिम अंतिम मुहर दिल्ली से ही लगाई जाएगी। जिला अध्यक्ष को लेकर चयन समिति बंद लिफाफे में प्रदेश नेतृत्व को नामों का सुझाव देगी। सूत्रों की मानें तो राष्ट्रीय संगठन मध्य प्रदेश मनमानी रोकने की दिशा में यह कार्य कर रहा है। अभी तक क्षेत्रीय क्षत्रप अपने हिसाब से जिला अध्यक्षों का चयन करते थे। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिले सीएम मोहन यादव केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से सोमवार रात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली में मुलाकात की। वह आज  भी दोपहर तक दिल्ली में रहेंगे। मुख्यमंत्री यहां कुछ अन्य केंद्रीय मंत्रियों से मिलकर भारत सरकार से जुड़ी योजनाओं का प्रदेश में हो रहे क्रियान्वयन की प्रगति रख सकते हैं। वहीं संगठन के वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात करेंगे। केंद्रीय मंत्री चौहान से भी हुई मुलाकात मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी मिले। इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर भी उनके साथ थे। उन्होंने कृषि से जुड़े क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की।

मध्य प्रदेश में कांग्रेस निकालेगी ‘मैं भी हूं आंबेडकर’ पदयात्रा… शेड्यूल जारी कर बताई पूरी प्लानिंग

Congress will take out ‘Main Bhi Hoon Ambedkar’ padyatra in Madhya Pradesh… Complete planning has been released by releasing the schedule भोपाल। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के डॉ. भीमराव आंबेडकर को लेकर टिप्पणी किए जाने के विरोध में मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस ‘मैं भी हूं आंबेडकर’ पदयात्रा निकालेगी। यह 25 से 29 दिसंबर तक चलेगी। पांच चरणों में होने वाली इस यात्रा में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे सहित सभी वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। प्रत्येक जिले में यात्रा के समापन पर जनसभा भी होगी। मैं भी हूं आंबेडकर’ पदयात्रा… क्या है पूरा प्लान कब कहां होगी पदयात्रा

मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति पर BJP में बवाल, मंडल अध्यक्ष के लिए 45 से कम उम्र का क्राइटेरिया तय

भोपाल मध्य प्रदेश में बीजेपी के संगठन चुनाव हो रहे हैं, जहां संगठन में नए पदाधिकारियों की नियुक्तियां चल रही हैं. संगठनात्मक रूप से मध्य प्रदेश में बीजेपी के 60 जिले हैं, जिसमें मंडल अध्यक्ष चुने जाते हैं. लेकिन प्रदेश में बीजेपी ने 18 मंडल अध्यक्षों के चुनाव निरस्त कर दिए हैं, क्योंकि बीजेपी की चुनाव समिति के पास करीब 100 शिकायतें पहुंची थी, जहां जांच में यह बात सामने आई है कि कई जगह नेताओं ने अपनी उम्र छुपाई है. ऐसे में चुनाव निरस्त कर दिए गए. वहीं जो शिकायतें बीजेपी की चुनाव समिति के पास पहुंची हैं, उनका निराकरण भी जल्द किया जा सकता है. सिवनी जिले में सबसे ज्यादा दरअसल, बताया जा रहा है कि डेढ़ दर्जन ऐसे मंडल हैं, जहां पर अध्यक्ष बनने के लिए नेताओं ने अपनी उम्र घटाकर संगठन को बताई थी, ऐसे में जांच के बाद 18 मंडलों के चुनाव ही आधिकारिक तौर पर निरस्त कर दिए गए हैं, जिसमें सबसे ज्यादा मंडल अध्यक्ष सिवनी जिले के हैं. क्योंकि बीजेपी ने मंडल अध्यक्ष के पद के लिए उम्र का क्राइटेरिया 45 साल तय किया था, इसके अलावा उन नेताओं को भी मंडल अध्यक्ष नहीं बनाने के निर्देश दिए थे जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा हो, या फिर किसी नेता ने भविष्य में पार्टी के खिलाफ काम किया था. इसलिए बीजेपी ने इस बार चुनावी संगठन में इन सभी बातों का विशेष ध्यान रखने की बात कही थी. यहां के चुनाव हुए निरस्त सिवनी जिले में उत्तर सिवनी, बंडोल, बीजादेवरी, सुकतरा, कुरई में मंडल अध्यक्ष के चुनाव निरस्त कर दिए हैं.  वहीं बड़वानी जिले में अंजड़, चाचरिया, पानसेमल में भी मंडल अध्यक्ष के चुनाव निरस्त हुए हैं. जबकि राजगढ़ जिले में बोड़ा, गुलाबता और तलेन में भी मंडल अध्यक्षों की नियुक्तियों को निरस्त कर दिया है.     सिंगरौली जिले के निवास     टीकमगढ़ जिले के लिधौरा     श्योपुर जिले के पाण्डौला     खरगोन जिले के गोगांवां     पन्ना जिले के गुन्नौर     छतरपुर जिले के गौरिहार     धार जिले के सादलपुर   वहीं मंडल अध्यक्षों और संगठन के चुनाव को लेकर बीजेपी के संगठन चुनाव अधिकारी और पूर्व सांसद विवेक शेजवलकर का कहना है कि मंडस अध्यक्षों के चुनाव की लगभग प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. कुछ आपत्तियां आई थी, उनका भी समाधान भी कर दिया गया है. अंतिम परिणाम भी जल्द ही सामने आ जाएगा. वहीं जिन लोगों ने आपत्तियां जताई हैं उनका निराकरण भी जल्द किया जाएगा. 

वीडी शर्मा ने फिर दिया विवादास्पद बयान कहा, “कांग्रेस के खून में अंग्रेजों का जींस”

VD Sharma again gave a controversial statement saying, “The genes of the British are in the blood of Congress” बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा ने कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए कहा “इस पार्टी ने हमेशा डॉ.भीमराव अंबेडकर का अपमान किया.” पन्ना ! मध्यप्रदेश बीजेपी अध्यक्ष व खजुराहो सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने कहा “बाबासाहब डॉ.भीमराव अंबेडकर ने देश की आजादी, सामाजिक न्याय और भारतीय जीवन मूल्यों की स्थापना के लिए जो काम किया, उसे पूरा देश जानता है. कांग्रेस पार्टी लगातार बाबासाहब को अपमानित करती रही है. जब बाबासाहब ने संसद से इस्तीफा दिया तो पं. नेहरू का कहना था कि देने दो इस्तीफा, क्या फर्क पड़ेगा. बाबासाहब का इससे बड़ा अपमान क्या होगा?” बाबासाहब की हमेशा विरोधी रही है कांग्रेस वीडी शर्मा ने कहा “जब बाबासाहब चुनाव लड़ रहे थे तो हराने के लिए पं. नेहरू ने लगातार प्रयास किए. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संसद में दिए गए भाषण को गलत तरीके से कांग्रेस जनता के सामने प्रस्तुत किया. अमित शाह के मन, कर्म व स्वभाव में बाबासाहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के मूल्य समाहित हैं. अमित शाह डॉ. अंबेडकर के कार्यों को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी डॉ. अंबेडकर जी समाज के अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाने का कार्य कर रहे हैं.” ‘फूट डालो राज करो’ की राह पर कांग्रेस वीडी शर्मा ने कहा “कांग्रेस के खून में अंग्रेजों के जींस हैं. कांग्रेस ‘फूट डालो राज करो’ की राह पर चल रही है. डॉ. अंबेडकर को लेकर कांग्रेस पार्टी बखेड़ा खड़ा कर रही है. कांग्रेस के नेता अब गुंडागर्दी पर उतारू हो गए हैं. हम सभी ने देखा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने किस तरह हमारे सांसदों को धक्का दिया. हमारे बुजुर्ग सांसद सारंगी को सिर में चोट लगी और उन्हें आईसीयू में भर्ती करना पड़ा. वहीं, एक अन्य सांसद राजपूत को भी चोटें आई हैं.”

बदरपुर सीट पर बिधूड़ी के सांसद बनने के बाद मजबूत प्रत्याशी की तलाश में भाजपा

नई दिल्ली बदरपुर विधानसभा सीट के लिए भाजपा मजबूत उम्मीदवार की तलाश में जुटी है। इस सीट से भाजपा के विधायक रहे रामवीर सिंह बिधूड़ी के सांसद बनने के बाद पार्टी अब यहां किसी अनुभवी प्रत्याशी को चुनावी मैदान में उतारने की रणनीति बना रही है। यहां से आम आदमी पार्टी ने रामसिंह नेताजी को प्रत्याशी घोषित किया है। वह इस सीट से दो बार विधायक रह चुके हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में दक्षिणी लोकसभा संसदीय क्षेत्र की 10 में से एकमात्र बदरपुर सीट भाजपा के खाते में आई थी। ऐसे में भाजपा इस सीट को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास में लगी है। भाजपा किसी दमदार प्रत्याशी की तलाश में 2020 के विधानसभा चुनाव में बदरपुर सीट से भाजपा के रामवीर सिंह बिधूड़ी ने आप के रामसिंह नेताजी को हराकर बाजी मारी थी। तीसरे नंबर पर बसपा के नारायण दत्त शर्मा रहे थे। बिधूड़ी को 47.05 और रामसिंह को 45.11 फीसदी मत मिले थे। बिधूड़ी के दक्षिणी दिल्ली से सांसद बनने के बाद परिस्थितियां अलग हो गई हैं। अब यहां भाजपा किसी दमदार प्रत्याशी की तलाश कर रही है। इसके लिए वरिष्ठ नेता के नामों पर चर्चा चल रही है। हालांकि अभी तक किसी के नाम पर मुहर नहीं लगी है।

MP Assembly के चौथे दिन 7 महत्वपूर्ण विधेयक पारित, खाद संकट को लेकर कांग्रेस ने सरकार को घेरा

7 important bills passed on fourth day of MP Assembly, Congress cornered government over fertilizer crisis भोपाल ! मध्यप्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन 7 महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के बाद उन्हें पारित कर दिया गया. इनमें मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम संशोधन विधेयक 2024, मध्यप्रदेश माल और सेवा कर तृतीय संशोधन विधेयक 2024, मध्यप्रदेश निजी विद्यालय फीस व संबंधित विषयों का विनियमन संशोधन विधेयक 2024 समेत अन्य विधेयक शामिल हैं. इधर सदन में कांग्रेस विधायकों ने किसानों के खाद संकट को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. वहीं संसद में बाबा साहब अंबेडकर को लेकर केंद्रीय ग्रह मंत्री अमित शाह द्वारा की गई टिप्पणी के मामले में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिघार ने माफी मांगने की मांग की. साथ ही लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह द्वारा राहुल गांधी को दिए गए बयान को लेकर कांग्रेस विधायक सदन से वाक आउट कर गए. हालांकि, कुछ देर बाद फिर वापस सदन में लौट आए. खाद संकट और नकली खाद पर चर्चा शाम 6 बजे के बाद सदन में किसानों के खाद संकट पर चर्चा शुरु हुई. इसमें कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने कहा, ” मालवा निमाड़ क्षेत्र में किसानों को पानी तो मिल रहा है. लेकिन उनको खेती करने के लिए पर्याप्त खाद नहीं मिल रही है, जिससे किसानों की लंबी लाइनें लग रही हैं.” वहीं कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने कहा, ” लंबे समय से हमारे देश का किसान हरियाणा और दिल्ली बॉर्डर पर जमा हैं. उनकी सुनवाई नहीं हो रही है. आप कहते हैं कि खेती को लाभ का धंध बनाएंगे. लेकिन प्रदेश में एक बोरी खाद के लिए किसान को अधिकारी के सामने गिड़गिड़ाना पड़ रहा है. किसानों को प्रदेश में नकली खाद मिल रही है. ऐसे लोगों को सत्तापक्ष का संरक्षण मिल रहा है.” 3 साल से पहले नहीं हटेंगे नगर पालिका अध्यक्ष मध्यप्रदेश नगर पालिका निगम द्वितीय संशोधन विधेयक 2024 को सदन में मंजूरी मिल गई है. अब नगर पालिका अध्यक्ष और नगर परिषद अध्यक्ष को 3 साल से पहले नहीं हटाया जा सकेगा. यानी इनके खिलाफ 3 साल से पहले अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जाएगा. अब तक यह सीमा 2 साल थी. वहीं अब अध्यक्षों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित करने के लिए तीन चौथाई सदस्यों की जरुरत होगी. अब तक अविश्वास प्रस्ताव के लिए दो तिहाई बहुमत की जरुरत होती थी. इसके साथ ही नगर पालिका निगम और परिषद के अध्यक्षों का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से होगा. निजी स्कूलों के खिलाफ सुनवाई के लिए त्रिस्तरीय व्यवस्था मध्यप्रदेश निजी विद्यालय फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन संशोधन विधेयक 2024 को पारित करने से पहले इस पर सदन में पर्याप्त चर्चा हुई. पक्ष और विपक्ष के आठ से अधिक विधायकों ने इस चर्चा में हिस्सा लिया. कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने कहा कि इस बिल में 25 हजार रु से कम फीस वाले निजी स्कूलों को शामिल नहीं किया गया है. ऐसे में स्कूल वाला यदि 50 हजार रु फीस लेता है, तो वह ट्यूशन फीस 25 हजार रु दिखाएगा, जबकि बाकी खर्च किसी अन्य मद में दिखा देगा. इस पर स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि इस बिल में संशोधन के बाद निजी स्कूल द्वारा बच्चों से ली जाने वाले ट्रांसपोर्टेशन शुल्क को भी फीस में जोड़ा गया है. हम स्कूलों के खिलाफ सुनवाई के लिए त्रिस्तरीय व्यवस्था बना रहे हैं. एससी-एसटी और ओबीसी छात्रों को समय पर मिले स्कालरशिप चर्चा के दौरान फूल सिंह बरैया ने कहा कि जब एससी, एसटी या ओबीसी का कोई छात्र कालेज में एडमिशन लेता है, तो संचालक उससे कहता है कि तुम फीस मत देना स्कालरशिप दे देना. लेकिन जब इन बच्चों को समय पर स्कालरशिप नहीं मिलती तो कालेज संचालक ऐसे बच्चों को परीक्षा में नहीं बैठने देता है. बरैया ने कहा कि सरकार को एससी, एसटी और ओबीसी समुदाय के विद्यार्थियों को समय पर स्कालरशिप दिया जाना चाहिए, जिससे उनकी पढ़ाई में रुकावट न आए. नगर पालिक के विधेयक से नेता प्रतिपक्ष असहमत नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, ” नगर पालिका के विधेयक में संशोधन से पहले हर धारा और उपधारा पर चर्चा होनी चाहिए. इसके अंदर काफी पेचीदिगियां हैं. आप घर बनवाने के लिए ऑनलाइन परमिशन की बात करते हैं लेकिन इसके लिए लोगों को अधिकारियों के कितने चक्कर लगाने पड़ते हैं. एक पेड़ काटने के लिए ही लोगों को नगर निगम के आयुक्त से बात करनी पड़ती है. ऐसे में इस बिल में संशोधन से पहले इसे प्रवर समिति में भेजा जाना चाहिए, फिर इस पर विचार होना चाहिए.” विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष खुद भरेंगे आयकर मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष वेतन और भत्ता संशोधन विधेयक 2024 और मध्यप्रदेश विधानसभा नेता प्रतिपक्ष वेतन और भत्ता संशोधन विधेयक 2024 को भी पारित कर दिया गया है. इसके तहत अब विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष का इंनकम टैक्स सरकार नहीं भरेगी. उनको खुद अपना इनकम टैक्स भरना पड़ेगा. इसके पहले तक विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष का टैक्स सरकार देती थी. विधानसभा में ये विधेयक हुए पारित

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