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Arunachal में एक बार फिर से BJP की पूर्ण बहुमत की सरकार, सरकार गठन में फिर भी देरी

ईटानगर 4 जून को आए लोकसभा चुनावों के दो दिन पहले ही अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के विधानसभा चुनावों के नतीजे आ चुके थे। सिक्किम में मुख्यमंत्री अपनी मंत्रिपरिषद के साथ शपथ ले चुके हैं। देश में मोदी सरकार की शपथ हो गई है, मंत्रालयों के बंटवारे भी हो चुके हैं लेकिन अभी तक अरुणाचल प्रदेश में सरकार के गठन को लेकर कोई हलचल नहीं है। यहां पर सरकार में बैठी भाजपा एक बार फिर से चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ जीती है। विधानसभा की 60 सीटों में से भाजपा को 46 सीटें मिली हैं। एनडीए की साथी पार्टी एनपीपी को भी 5 सीटों पर जीत मिली है ऐसे में 60 सीटों की विधानसभा में एनडीए को 51 सीटें प्राप्त हैं। 2016 से प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू एक बार से मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में शामिल हैं। शपथ में देरी पर भाजपा की सफाई भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बियुराम वाहगे ने मीडिया से कहा कि मुख्यमंत्री पेमा खांडू और बाकी के विधायक और भाजपा नेता केन्द्रीय सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए गए हुए है, हम उनके और हाईकमान की तरफ से किसी पर्यवेक्षक का इंतजार कर रहे हैं। जैसे ही वह यहां आते हैं और नए विधायकों के साथ मिलकर विधायक दल के नेता का चुनाव कर लेते हैं। वैसे ही शपथ ग्रहण की तैयारियां शुरू हो जाएंगी। फिलहाल कोई तारीख तय नहीं हुई है। कांग्रेस ने कसा तंज शपथ ग्रहण में हुई देरी पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नबाम तुकी ने कहा नई सरकार के बनने में इतनी देर होना प्रदेश के लिए ठीक नहीं है यह प्रदेश के विकास और प्रशासन के लिए ठीक नहीं है। लेकिन भाजपा के अंदर ऐसे ही काम होता है। प्रदेश ईकाई बिना हाईकमान के निर्देश के एक इंच भी नहीं बढ़ सकती।इससे पहले अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल कैवल्य परनायक ने 2 जून को विधानसभा भंग कर दी थी और मुख्यमंत्री पेमा खांडू को नई सरकार के पदभार ग्रहण करने तक मुख्यमंत्री पद का दायित्व संभालने के लिए कहा था।  

शिवराज सिंह चौहान के केंद्र में पहुंचने से बुधनी विधानसभा सीट रिक्त, उपचुनाव होना तय

 बुधनी मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश भर के मामा और भैया यानि कि शिवराज सिंह चौहान की देश की राजनीति में एंट्री हो गई है. उन्हें मोदी कैबिनेट में अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी दी गई है. अब शिवराज सिंह चौहान केंद्र में कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालेंगे. ऐसे में आने वाले दिनों में बुधनी विधानसभा सीट खाली हो जाएगी. इस सीट पर शिवराज के बाद अब कौन कमान संभालेगा? इसको लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. ऐसा माना जा रहा है कि इस सीट से शिवराज के बेटे कार्तिकेय चौहान भी चुनाव लड़ सकते हैं. आइये जानते हैं कौन हो सकता है बुधनी उपचुनाव का उम्मीदवार? बुधनी से कौन होगा उपचुनाव में उम्मीदवार? केंद्रीय मंत्री बनने के बाद शिवराज सिंह चौहान विधायक पद से जल्द ही इस्तीफा देंगे. ऐसे बुधनी विधानसभा सीट पर उपचुनाव होगा. इस सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर अभी से राजनीतिक सुगबुगाहट तेज हो गई है. इस सीट पर शिवराज सिंह के बेटे कार्तिकेय चौहान का नाम बड़ी तेजी से चल रहा है. सूत्रों की माने तो पार्टी आलाकमान बुधनी विधानसभा सीट से कार्तिकेय सिंह चौहान को चुनावी मैदान में उतार सकती है.   ऐसा इसलिए क्योंकि मध्य प्रदेश में कई बड़े नेताओं के बेटे राजनीति में लंबे समय से सक्रिय चल रहे हैं. इसमें पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान भी शामिल हैं. ऐसा माना जा रहा है कि बुधनी उपचुनाव के जरिए कार्तिकेय की राजनीति में बड़ी ही आसानी के साथ एंट्री हो सकती है. कार्तिकेय लंबे समय से अपने विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हैं. लगातार कार्यकर्ताओं से मेल मुलाकात कर रहे हैं. शिवराज के लिए सीट खाली करने का मिलेगा ईनाम? विदिशा लोकसभा सीट से सांसद रहे रमाकांत भार्गव का टिकट इस चुनाव में काट दिया गया था. उनकी जगह पर शिवराज सिंह चौहान को चुनावी मैदान में उतारा गया था. तो वहीं एक समय पर राजेंद्र सिंह राजपूत ने भी शिवराज सिंह चौहान के बुधनी विधानसभा छोड़ी थी. जिसके बाद शिवराज सिंह चौहान यहां से विधायक चुने गए थे. ऐसे में विधानसभा उपचुनाव में बुधनी विधानसभा सीट से ये दोनों नाम प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं. हालांकि बीजेपी की रणनीति को हर कोई जानता है, उपचुनाव में हो सकता है बीजेपी कोई नया प्रयोग भी कर सकती है. क्या बीजेपी बनाएगी नेता पुत्रों को अपना प्रत्याशी? शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफे के बाद बीजेपी उपचुनाव को लेकर क्या रणनीति बनाती है. इसका पता चलेगा. हालांकि परिवारवाद पर हमेशा सवाल खड़ा करने वाली बीजेपी क्या नेता पुत्रों को उपचुनाव में टिकट देती है या नहीं ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा. लेकिन अगर बुधनी विधानसभा सीट पर उपचुनाव होते हैं. तो इस वक्त कार्तिकेय सिंह चौहान प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं.

जेपी नड्डा मोदी कैबिनेट में शामिल होने के कारण भाजपा को नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश

नई दिल्ली भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री बनने के बाद पार्टी को नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश करनी है। भाजपा में आमतौर पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया के मुताबिक, सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव करने की परंपरा रही है। भाजपा के संविधान की धारा-19 के अनुसार, पार्टी अध्यक्ष का चुनाव एक निर्वाचक मंडल करता है, जिसमें राष्ट्रीय और प्रदेश परिषद के सभी सदस्य शामिल होते हैं। इससे पहले पार्टी को जिला से लेकर राज्य स्तर तक चुनाव की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव राष्ट्रीय कार्यकारिणी के निर्धारित नियमों के अनुसार ही कराया जाता है। पार्टी संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष वही व्यक्ति हो सकेगा जो कम से कम चार अवधियों तक सक्रिय सदस्य और कम से कम 15 वर्ष तक प्राथमिक सदस्य रहा हो। निर्वाचक मंडल में से कोई भी 20 सदस्य राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव की अर्हता रखने वाले व्यक्ति के नाम का संयुक्त रूप से प्रस्ताव कर सकेंगे। यह संयुक्त प्रस्ताव कम से कम ऐसे पांच प्रदेशों से आना जरूरी है, जहां राष्ट्रीय परिषद के चुनाव संपन्न हो चुके हों। नामांकन पत्र पर उम्मीदवार की स्वीकृति आवश्यक है। इससे पहले आम तौर पर देशभर में पार्टी सदस्यता अभियान भी चलाती है। ऐसे में इस सारी प्रक्रिया को पूरा होने में तीन से चार महीने का वक्त लगता है। यही वजह है कि निर्वाचन प्रक्रिया से गुजर कर राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन में लगने वाले समय को देखते हुए पार्टी स्तर पर कई विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। सूत्रों की माने तो, भाजपा पूर्णकालिक अध्यक्ष चुने जाने तक किसी नेता को उसी तरह से पार्टी का कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त कर सकती है, जैसे 2019 में तत्कालीन अध्यक्ष अमित शाह के कैबिनेट मंत्री बनने पर जेपी नड्डा को कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। कार्यवाहक राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति होने तक जेपी नड्डा केंद्रीय मंत्री और पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष दोनों का कामकाज देखते रहेंगे। 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के गृह मंत्री बनने पर जुलाई 2019 में नड्डा को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था, इसके कुछ महीने बाद ही उन्हें तीन वर्षीय कार्यकाल के लिए सर्वसम्मति से पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था। उन्होंने पार्टी के पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर पार्टी की कमान 20 जनवरी 2020 को संभाली थी। उनका कार्यकाल जनवरी 2023 में ही समाप्त हो गया था। लेकिन, लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जेपी नड्डा के कार्यकाल को जून 2024 तक बढ़ा दिया गया था। उनका अध्यक्षीय कार्यकाल 30 जून को खत्म हो रहा है। इसी वर्ष फरवरी 2024 में दिल्ली में हुए भाजपा के राष्ट्रीय अधिवेशन की बैठक में पार्टी संविधान में संशोधन करते हुए पार्टी के फैसले लेने वाली सर्वोच्च इकाई संसदीय बोर्ड को आपात स्थिति में पार्टी अध्यक्ष से संबंधित फैसला लेने की शक्ति दी गई। पार्टी का संसदीय बोर्ड परिस्थिति के अनुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यकाल को बढ़ाने या घटाने का फैसला कर सकता है। भाजपा के संविधान की धारा-21 में अध्यक्ष के कार्यकाल का जिक्र है। इसके मुताबिक, कोई व्यक्ति तीन-तीन साल के लगातार दो कार्यकाल तक ही भाजपा का अध्यक्ष रह सकता है।  

आप पार्टी चाहती है टीडीपी और जेडीयू में से किसी एक के पास रहे लोकसभा स्पीकर का पद

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी ने सत्ताधारी एनडीए गठबंधन के सहयोगी दलों टीडीपी और जेडीयू से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि लोकसभा स्पीकर का पद उनमें से किसी एक पार्टी के पास रहे। भाजपा का स्पीकर होने पर तीन तरह के खतरों की आशंका जाहिर करते हुए ‘आप’ ने कहा कि टीडीपी या जेडीयू का स्पीकर होने में ना सिर्फ उनकी भलाई है बल्कि यह संविधान और लोकतंत्र के हक में होगा। आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि यदि टीडीपी भाजपा के समर्थन के बिना अपना लोकसभा उम्मीदवार उतारती है तो इंडिया गठबंधन की भूमिक अहम होगी। संजय सिंह ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘कहा कि गलती से यदि भाजपा का स्पीकर बन गया तो उसके तीन बड़े खतरे हैं। नंबर एक खतरा, बाबा साहब भीम राव अंबेडकर के लिखे संविधान की धज्जियां उड़ाई जाएंगी। दूसरा खतरा, एनडीए के घटक दलों, डीडीपी, जेडीयू, आरएलजी, चिराग पासवान, पवन कल्याण की पार्टियों को तोड़कर भाजपा के साथ मिलाया जाएगा। तीसरा, कोई भी मनमाना बिल सरकार लेकर आएगी और कोई सांसद आवाज उठाएगा तो मार्शल से उसे बाहर फिंकवा दिया जाएगा।’ संजय सिंह ने आगे कहा, ‘मैं टीडीपी और जेडीयू जैसे दलों से अनुरोध करूंगा कि आप लोग स्पीकर बनाइए। यह आपके दल, संविधान और देश के लोकतंत्र के हित में है। यह संसदीय परंपराओं के हक में है। अगर इस कदम में BJP समर्थन नहीं करती है तो INDIA गठबंधन के दलों को समर्थन देने के बारे में विचार करना चाहिए। यदि डीडीपी बीजेपी के समर्थन के बिना अपना उम्मीदवार मैदान में उतारती है तो इंडिया गठबंधन की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होगी।’ राज्यसभा सांसद ने यह कहते हुए भी एनडीए के सहयोगी दलों पर तंज कसा कि उन्हें मोदी जी ने कोई खास जिम्मेदारी नहीं दी और ‘झुनझुना’ मंत्रालय थमा दिया।  

खुद को काम में झोंकने की प्रवृत्ति हमारे लिए सामान्य होनी चाहिए: अभिनेत्री-सांसद कंगना रनौत

शाह, जयशंकर समेत केंद्र में नई सरकार के विभिन्न मंत्रियों ने कार्यभार संभाला खुद को काम में झोंकने की प्रवृत्ति हमारे लिए सामान्य होनी चाहिए: अभिनेत्री-सांसद कंगना रनौत संख्या बल के आधार पर एक-दूसरे को नीचा दिखाने की जरूरत नहीं: संसदीय कार्यमंत्री रीजीजू नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीसरी मंत्रिपरिषद में शामिल किए गए मंत्रियों में अमित शाह, डॉ. एस जयशंकर, किरन रिजिजू और सर्बानंद सोनोवाल समेत विभिन्न मंत्रियों ने अपने-अपने कार्यभार संभाल लिए हैं। अमित शाह समेत कई मंत्रियों ने मंगलवार को कार्यभार संभालने के बाद अपने विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकें कीं। आज कार्यभार ग्रहण करने वाले मंत्रियों में जगत प्रकाश नड्डा, मनोहर लाल, अर्जुन राम मेघवाल, ज्योतिरादित्य सिंधिया, शिवराज सिंह चौहान, गिरिराज सिंह और अश्विनी वैष्णव भी शामिल हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रधानमंत्री की सिफारिश पर कल नई सरकार के मंत्रियों के विभागों की अधिसूचना जारी की। रविवार को प्रधानमंत्री, उनकी सरकार के 30 नए कैबिनेट मंत्रियों, पांच राज्य मंत्रियों (स्वतंत्र प्रभार) और 36 राज्य मंत्रियों को शपथ दिलायी गयी थी। शाह ने लगातार दूसरी बार केन्द्रीय गृह मंत्री का कार्यभार संभाला है। शाह गृह मंत्रालय के नार्थ ब्लॉक स्थित कार्यालय में कार्यभार संभालने से पहले सुबह साढे दस बजे यहां चाणक्यपुरी स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक गये। उन्होंने वहां शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके साथ गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और गृह सचिव अजय कुमार भल्ला भी थे। नड्डा को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय का कार्यभार भी संभाला। विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने आज विदेश मंत्रालय का कार्यभार संभाला। उन्होंने मंत्रालय में पहली बार राज्य मंत्री का पदभार संभालने वाले गोंडा (उत्तर प्रदेश) के सांसद कीर्तिवर्धन सिंह तथा पवित्र मार्ग़ेरीटा का मंत्रालय में स्वागत किया। मार्गेरीटा को कपड़ा मंत्रालय में राज्य मंत्री की भी जिम्मेदारी दी गयी है। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने अपना कार्यभार संभालने के बाद कहा कि देशवासियों ने चुनाव के माध्यम से सत्ता पक्ष तथा विपक्ष की भूमिका तय कर दी है। उन्होंने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री के तौर पर उनकी कोशिश रहेगी कि विपक्ष को साथ लेकर संसद को सुचारू रूप से चलाया जाये। सोनोवाल को पुन: बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय विभाग दिया गया है। उन्होंने मंत्रालय का कार्यभार संभाला और अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा जनता की सेवा की सोच के साथ मंत्रालय के लक्ष्य एवं उद्देश्यों को पूरा करने के प्रति टीम भावना से काम करने पर बल दिया। शिवराज सिंह चौहान ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय, अर्जुन राम मेघवाल ने कानून मंत्री (स्वतंत्र प्रभाव) एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री, माधवराव सिंधिया ने दूरसंचार मंत्री, अश्विन वैष्णव ने रेल और सूचना प्रसारण मंत्री, मनोहर लाल ने शहरी विकास एवं बिजली मंत्री, प्रताप राव गणपत राव जाधव और श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने स्वास्थ्य मंत्रालय में राज्य मंत्री तथा एल मुरुगन ने संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री का पदभार संभाला। कैबिनेट मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने संस्कृति मंत्रालय का कार्यभार संभालने के बाद अधिकारियों को संबोधित किया। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के कैबिनेट मंत्री बनाए गए डा मनसुख मंडाविया और इसी मंत्रालय में राज्य मंत्री शोभा करांदलाजे ने भी कार्य भार सभाल लिया है। गिरिराज सिंह ने कपड़ा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली है। कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डा जितेंद्र सिंह ने भी अपने कार्यालय में जा कर कार्यभार ग्रहण किया और कुछ पत्रावलियों पर हस्ताक्षर किए।   खुद को काम में झोंकने की प्रवृत्ति हमारे लिए सामान्य होनी चाहिए: अभिनेत्री-सांसद कंगना रनौत अभिनेत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद कंगना रनौत ने मंगलवार को ‘खुद को काम में झोंक देने की प्रवृत्ति’ को सामान्य बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भारतीय आलसी नहीं हो सकते, क्योंकि देश को अभी विकसित राष्ट्र बनाना है। कंगना रनौत ने ‘इंस्टाग्राम स्टोरी’ में अपने विचार साझा किए, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सोमवार को अपना तीसरा कार्यकाल शुरू करने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के कर्मियों को दिए गए संबोधन का एक वीडियो क्लिप पोस्ट किया। इस वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी को कहते सुना जा सकता है, ‘मेरा हर क्षण देश के लिए है।’ मोदी ने कहा कि उन्होंने 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए चौबीस घंटे काम करने का वादा किया है। अपने पोस्ट में कंगना रनौत ने कहा कि ‘वीकेंड’ (सप्ताहांत) की अवधारणा कुछ और नहीं बल्कि ‘पश्चिमी मानसिकता’ है। अपनी पोस्ट के कैप्शन में कंगना ने लिखा, ‘हमें जुनूनी कार्य संस्कृति को सामान्य रूप से अपनाना होगा और सप्ताहांत का इंतजार करना तथा सोमवार के बारे में ‘मीम’ को लेकर शिकायत करना रोकना होगा। यह सब पश्चिमी मानसिकता वाले लोगों का छलावा है। हम अभी तक विकसित राष्ट्र नहीं हैं, और हम काम को लेकर बिल्कुल भी आलसी नहीं हो सकते।’ बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और लंबे समय से मोदी समर्थक रहीं रनौत हिमाचल प्रदेश के मंडी से पहली बार लोकसभा चुनाव जीती हैं। उन्होंने छह बार मुख्यमंत्री रह चुके वीरभद्र सिंह और राज्य कांग्रेस प्रमुख प्रतिभा सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह को हराया है।   संख्या बल के आधार पर एक-दूसरे को नीचा दिखाने की जरूरत नहीं: संसदीय कार्यमंत्री रीजीजू  केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने मंगलवार को कहा कि वह संसद की कार्यवाही के सुचारू संचालन के लिए सभी को साथ लेकर चलने की पूरी कोशिश करेंगे। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संख्या बल के आधार पर संसद में एक-दूसरे को नीचा दिखाने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। रीजीजू ने अपने पूर्ववर्ती प्रह्लाद जोशी और राज्य मंत्रियों अर्जुन राम मेघवाल और एल मुरुगन की मौजूदगी में संसदीय कार्य मंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा, ‘‘हमें संख्या बल के आधार पर एक-दूसरे को नीचा दिखाने की जरूरत नहीं है। लोग संसद के बाहर बाहुबल का इस्तेमाल करते हैं लेकिन सदन के अंदर हमें अच्छी बहस करनी चाहिए और मुखरता से अपनी बात रखनी चाहिए।’’ रीजीजू ने सभी राजनीतिक दलों से संसद की गरिमा बनाए रखने में योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा, ‘‘मैं यहां सकारात्मक भाव से आया हूं। हम सभी को साथ लेकर चलने और संसद … Read more

जेपी नड्डा ने स्वास्थ्य मंत्री का पद संभाला, अधिकारियों से 100 दिन के एजेंडे पर ध्यान देने को कहा

मेघवाल ने किये ‘राष्ट्रीय मुकदमा नीति’ पर हस्ताक्षर जेपी नड्डा ने स्वास्थ्य मंत्री का पद संभाला, अधिकारियों से 100 दिन के एजेंडे पर ध्यान देने को कहा गजेंद्र सिंह शेखावत ने संस्कृति और पर्यटन मंत्री के रूप में प्रभार संभाला नई दिल्ली  केन्द्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने आज यहां कार्यभार ग्रहण किया और पहले दस्तावेज के रूप में ‘राष्ट्रीय मुकदमा नीति’ पर हस्ताक्षर किये। शास्त्री भवन स्थित विधि एवं न्याय मंत्रालय में मध्याह्न करीब 12 बजे कार्यभार ग्रहण करने के बाद श्री मेघवाल ने कामकाज की शुरुआत का शगुन करते हुए राष्ट्रीय मुकदमा नीति के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किये। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ज़ोर ईज़ ऑफ लिविंग यानी जीवन की सुगमता पर है। कानून मंत्रालय ने इसी को ध्यान में रखते हुए पुराने अप्रासंगिक हो चुके 1500 से अधिक कानूनों को निरस्त कर दिया है तथा आगे और भी ऐसे कानून हटाएंगे। श्री मेघवाल ने कहा कि मोदी सरकार ने आम जनों के जीवन की सुगमता को ध्यान में रख कर ही अंग्रेज़ों के ज़माने की भारतीय दंड संहिता, आपराधिक प्रक्रिया संहिता एवं साक्ष्य अधिनियम को समाप्त करके नये कानून -भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम बनायेे हैं। इनके बारे में जागरूकता फैलाने की दिशा में काम करना होगा। जजों के चयन की कॉलेजियम प्रक्रिया को खत्म करने की पुरानी मांग के बारे में पूछे जाने पर श्री मेघवाल ने कहा कि इसे लेकर कोई शिकायत नहीं है और सभी व्यवस्थाएं कानून एवं संविधान सम्मत हैं। राजस्थान के बीकानेर से तीसरी बार निर्वाचित होने वाले भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी श्री मेघवाल 70 वर्ष के हैं। उन्हें इस बार केन्द्रीय मंत्रिपरिषद में विधि एवं न्याय विभाग में स्वतंत्र प्रभार वाला राज्य मंत्री तथा संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया था। इससे पहले भी वे इन दोनों पदों के साथ संस्कृति मंत्रालय में भी राज्यमंत्री थे। जेपी नड्डा ने स्वास्थ्य मंत्री का पद संभाला, अधिकारियों से 100 दिन के एजेंडे पर ध्यान देने को कहा  भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का पदभार संभाल लिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ लेने के एक दिन बाद सोमवार को नड्डा को स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ-साथ रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय भी आवंटित किया गया। पिछली मोदी सरकार में दोनों मंत्रालयों का कार्यभार मनसुख मांडविया के पास था। नड्डा ने कार्यभार संभालने के बाद स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल और प्रतापराव जाधव के साथ स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत की। ऐसा माना जा रहा है कि नड्डा ने अधिकारियों से पहले 100 दिनों के लिए सरकार के एजेंडे पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। अधिकारियों से 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों को आयुष्मान भारत योजना के दायरे में लाने को कहा गया है। नड्डा ने मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय संभाला था, उसके बाद 2019 में उन्हें भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष का पद सौंपा गया और जनवरी 2020 में अमित शाह के केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में नियुक्त होने के बाद नड्डा को पूर्ण रूप से पार्टी अध्यक्ष बना दिया गया। भाजपा अध्यक्ष के रूप में नड्डा का कार्यकाल जनवरी में समाप्त हो चुका है। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए उनके कार्यकाल में छह महीने का विस्तार दिया गया था। भाजपा अध्यक्ष के रूप में नड्डा का कार्यकाल जून में समाप्त हो रहा है। नड्डा (63) ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। वह 1991 में भाजपा की युवा शाखा भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के अध्यक्ष बने। नड्डा के पास कानून की डिग्री है। उन्होंने भाजपा में कई प्रमुख पदों पर काम किया और कई राज्यों में पार्टी के चुनाव अभियान का नेतृत्व भी किया। नड्डा ने अपने गृह राज्य हिमाचल प्रदेश में भाजपा सरकारों में मंत्री के रूप में भी काम किया। वह वर्ष 2012 में राज्यसभा के लिए चुने गए और 2014 में अमित शाह के पार्टी अध्यक्ष बनने पर उन्हें भाजपा संसदीय बोर्ड का सदस्य बनाया गया। इस बीच, शिवसेना सांसद प्रतापराव जाधव ने स्वास्थ्य राज्य मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। उन्हें आयुष मंत्रालय भी (स्वतंत्र प्रभार) आवंटित किया गया है। 64 वर्षीय जाधव ने महाराष्ट्र के बुलढाणा लोकसभा क्षेत्र से लगातार चौथी बार जीत दर्ज की है। अपना दल (एस) की अनुप्रिया पटेल ने भी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री का कार्यभार संभाला। उन्हें रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री भी नियुक्त किया गया है। पटेल (43) ने 2016 से 2019 तक स्वास्थ्य राज्य मंत्री और 2021 से मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया था। लोकसभा चुनाव 2024 में पटेल ने उत्तर प्रदेश की मिर्जापुर संसदीय सीट पर समाजवादी पार्टी के रमेश चंद बिंद को 37,810 मतों के अंतर से हराया था।   गजेंद्र सिंह शेखावत ने संस्कृति और पर्यटन मंत्री के रूप में प्रभार संभाला भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता गजेंद्र सिंह शेखावत ने मंगलवार को केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री के रूप में कामकाज संभाला। संस्कृति मंत्री के रूप में कामकाज संभालने के बाद उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि उनका मंत्रालय ‘विकसित भारत’ बनाने की दिशा में योगदान देगा। उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘इंडिया से भारत’ बनाने के क्रम में हम अपने औपनिवेशिक आवरण को हटाने तथा अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को पुनः स्थापित करने की दिशा में बड़े कदम उठा रहे हैं। इस अत्यंत सुंदर संस्कृति मंत्रालय का कार्यभार संभालते हुए, मैं अपने देश और विश्व में भारतीयता की जीवंतता को संरक्षित, सुरक्षित रखने और बढ़ावा देने का अवसर पाकर कृतज्ञ और गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं।’’ शेखावत ने कहा, ‘‘हमारे देश की बढ़ती ‘सॉफ्ट पॉवर’ इसकी समृद्ध सांस्कृतिक संरचना और कला, संगीत, नृत्य, वस्त्र आदि के रूप में इसकी असंख्य अभिव्यक्तियों में निहित है। आइए इस अमृतकाल में इसे मजबूत बनाने के लिए मिलकर काम करें और विकसित भारत बनाने के लिए संस्कृति को एक मजबूत सूत्र में पिरोएं।’’ उन्होंने बाद में पर्यटन … Read more

यूपी में मोदी-योगी मैजिक फेल, इन बूथों पर 10 वोट भी नहीं ला सका ‘कमल’

Modi-Yogi magic failed in UP, 'Kamal' could not even get 10 votes at these booths

Modi-Yogi magic failed in UP, ‘Kamal’ could not even get 10 votes at these booths लोकसभा चुनाव में इस बार बेहद चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं। मेरठ-हापुड़ लोकसभा क्षेत्र की अगर कैंट विधानसभा क्षेत्र को छोड़ दें तो अन्य चार विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा को गठबंधन से सपा प्रत्याशी के समक्ष हार का सामना करना पड़ा है। बात किठौर विधानसभा क्षेत्र की करें तो यहां पूर्व में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा मात्र 2180 मतों से हार गई थी। मेरठ। मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली किठौर विधानसभा क्षेत्र राजनीति चर्चाओं में हमेशा रहा है। इस बार लोकसभा चुनाव में भाजपा यहां 16,737 मतों से गठबंधन से सपा के प्रत्याशी से पीछे रही। जबकि अभी दो साल पहले 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में यहां सपा प्रत्याशी से भाजपा बेहद करीबी मुकाबले में मात्र 2,180 मतों से हार गई थी। अब मात्र दो साल में ही भाजपा ने यहां करीब 14 हजार मत गवाएं हैं। भाजपा प्रत्याशी को 16737 मत मिले है। कई बूथों पर भाजपा को 10 से भी कम मत मिलेलोकसभा चुनाव में इस बार बेहद चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं। मेरठ-हापुड़ लोकसभा क्षेत्र की अगर कैंट विधानसभा क्षेत्र को छोड़ दें तो अन्य चार विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा को गठबंधन से सपा प्रत्याशी के समक्ष हार का सामना करना पड़ा है। बात किठौर विधानसभा क्षेत्र की करें तो यहां पूर्व में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा मात्र 2,180 मतों से हार गई थी। लोकसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां सिसौली गांव में जनसभा कर माहौल बनाने का खूब प्रयास किया, लेकिन बेअसर रहा। इस विधान सभा क्षेत्र के तमाम गांवों में सपा का पीडीए (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) ने भी खूब रंग जमाया। यही परिणाम रहा कि मुस्लिम, दलित और पिछड़े वर्ग बहुल गांवों में गठबंधन प्रत्याशी के लिए खूब वोट हुआ। 109 बूथों पर सैकड़ा भी नहीं लगा सकी भाजपाकिठौर विधानसभा क्षेत्र में हुए मतदान की समीक्षा करते तो सामने आता है कि विस क्षेत्र के कुल 395 बूथों में से 109 बूथों पर भाजपा को 100 से कम वोट मिले। जबकि गठबंधन से सपा प्रत्याशी इस विधानसभा क्षेत्र में मात्र 63 बूथों पर सैंकड़ा नहीं लगा सकी। इस विधानसभा में सबसे खराब स्थिति बसपा की रहीं। यहां बसपा प्रत्याशी को 322 बूथों पर 100 से कम वोट प्राप्त हुए। मात्र 73 ही ऐसे बूथ थे जहां बसपा को 100 से अधिक मत प्राप्त हो सके।

‘नीतीश कुमार से बेहतर PM कौन हो सकता है’, JDU एमएलसी खालिद अनवर का बयान

'Who can be a better PM than Nitish Kuma

‘Who can be a better PM than Nitish Kumar’, JDU MLC Khalid Anwar’s statement चुनाव नतीजों के बीच जेडीयू के एमएलसी खालिद अनवर ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार से बेहतर पीएम कौन हो सकता है. जेडीयू बिहार में बीजेपी की सहयोगी है.

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