पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने नर्सिंग परीक्षा का परिणाम शीघ्र जारी करने के संबंध में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को लिखा पत्र।
Former Chief Minister Digvijay Singh wrote a letter to Chief Minister Dr. Mohan Yadav
Former Chief Minister Digvijay Singh wrote a letter to Chief Minister Dr. Mohan Yadav
Bhajanlal government closed another scheme of Gehlot
Narendra Modi ‘completely helpless’: Rahul Gandhi attacks Center over NEET-PG
Why are questions being raised on the role of Minister Sarang in the nursing scam
Farmers’ loan waived off in Telangana, Rahul Gandhi said – he did what he said
Joint press conference of former leader of opposition in Madhya Pradesh Assembly
रायपुर. छत्तीसगढ़ के रायपुर दक्षिण विधानसभा सीट से विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने पिछले दिनों सोमवार को विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह को उन्होंने इस्तीफा सौंपा। हालांकि वो मंत्री पद पर छह महीने तक बने रहेंगे। अब इस मामले में विपक्ष ने सवाल उठाया है। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बृजमोहन अग्रवाल को तत्काल बर्खास्त करें? अग्रवाल सांसद का चुनाव जीतने के बाद विधायक पद से इस्तीफा दे दिये हैं। दीपक बैज ने कहा कि नैतिकता का तकाजा है कि वो विधायक के साथ ही मंत्री पद से भी इस्तीफा दे देते, लेकिन उन्होंने मंत्री पद के लालच में सारी नैतिकताओं को किनारे कर दिया। संवैधानिक प्रावधानों की आड़ लेकर मंत्री पद पर बने रहना सही नहीं है। इससे सिद्ध होता है कि बीजेपी नेता सत्ता और पद लोलुपता होते हैं। सत्ता में बने रहना ही उनके लिये सब कुछ होता है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बैज ने कहा कि कांग्रेस राज्यपाल से भी मांग करती है कि यदि बृजमोहन मंत्री पद से खुद इस्तीफा नहीं देते है या मुख्यमंत्री उनको नहीं हटाते हैं तो राज्यपाल स्वयं उनको मंत्री पद से बर्खास्त कर एक नजीर प्रस्तुत करें। राज्य में संवैधानिक नैतिकता की रक्षा का दायित्व राज्यपाल के पास ही है। राज्य की जनता उनसे अपेक्षा कर रही है कि वो बृजमोहन को तत्काल बर्खास्त करें। ली चुटकी, कहा- यह सब बीजेपी में ही संभव प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कोई सांसद पद पर तत्काल निर्वाचित व्यक्ति यह कहकर मंत्री पद नहीं छोड़ रहा है कि वह छह महीने तक मंत्री बना रह सकता है। यह सब बीजेपी में ही संभव है। भाजपा और मुख्यमंत्री बताये कि क्या वह भी अग्रवाल के इस निर्णय के साथ है या राजनैतिक सुचिता को देखते हुये मुख्यमंत्री उन्हें बर्खास्त करेंगे। ‘बृजमोहन के मामले में स्थितियां अलग’ बैज ने कहा कि कोई व्यक्ति बिना विधानमंडल का सदस्य रहते हुये भी छह महीने तक मंत्री पद धारित कर सकता है। उसे छह महीने के अंदर सदन का सदस्य निर्वाचित होना होता है, लेकिन बृजमोहन के मामले में स्थितियां अलग हैं। उन्होंने सांसद निर्वाचित होने के बाद विधायक पद से इस्तीफा दिया है। यहां पर छह महीने के अंदर सदस्य के निर्वाचन की अपेक्षा वाली बात लागू नहीं होती है। ऐसे में संवैधानिक प्रावधानों की आड़ लेकर मंत्री पद पर बने रहना उचित नहीं है।
Rahul Gandhi will leave Wayanad seat
नई दिल्ली कांग्रेस ने रविवार को कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की सत्यनिष्ठा और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) को आयोजित करने के तौर तरीके ‘‘गंभीर सवालों’’ के घेरे में हैं। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मैं 2014 और 2019 के बीच संसद की स्वास्थ्य और परिवार कल्याण संबंधी स्थायी समिति का सदस्य था। मैं उस समय नीट के लिए मिलने वाले व्यापक समर्थन को याद करता हूं। लेकिन ऐसे सांसद भी थे, विशेष रूप से तमिलनाडु से जिन्होंने चिंता जताई थी कि नीट से सीबीएसई के छात्रों को लाभ मिलेगा और दूसरे बोर्ड एवं स्कूलों से आने वाले विद्यार्थियों को नुकसान पहुंचेगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मुझे अब लगता है कि इस सीबीएसई संबंधी मुद्दे पर उचित विश्लेषण की जरूरत है। क्या नीट भेदभावपूर्ण है? क्या गरीब तबके के विद्यार्थियों को अवसरों से वंचित किया जा रहा है? महाराष्ट्र जैसे अन्य राज्यों ने भी नीट को लेकर गंभीर संदेह व्यक्त किया है।’’ रमेश ने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की सत्यनिष्ठा और नीट को जिस तरह से डिजाइन और आयोजित किया जाता है उसके तरीकों पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कांग्रेस महासचिव ने दावा किया कि पिछले दशक में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने अपना पेशेवर रवैया स्वयं खत्म कर दिया है।उन्होंने कहा, ‘‘उम्मीद है कि नई स्थायी समितियां गठित होने पर नीट, एनटीए और एनसीईआरटी की गहन समीक्षा करेगी। इसे सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।’’ नीट परीक्षा पांच मई को 4,750 केंद्रों पर आयोजित की गई थी और इसमें करीब 24 लाख अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। परिणाम 14 जून को घोषित होने की उम्मीद थी, लेकिन उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पहले ही पूरा हो जाने के कारण परिणाम चार जून को घोषित कर दिए गए। बिहार में प्रश्नपत्र लीक होने तथा इस प्रतिष्ठित परीक्षा में अन्य अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। केंद्र और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि उन्होंने एमबीबीएस और ऐसे अन्य पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए परीक्षा देने वाले 1,563 उम्मीदवारों को दिए गए कृपांक रद्द कर दिए हैं। इस संबंध में केंद्र ने कहा है कि उनके पास या तो दोबारा परीक्षा देने या समय की हानि के लिए दिए गए कृपांक को छोड़ने का विकल्प होगा। कांग्रेस ने शुक्रवार को इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘‘चुप्पी’’ को लेकर सवाल उठाया था और कहा था कि केवल उच्चतम न्यायालय की निगरानी वाली जांच ही लाखों युवा छात्रों के भविष्य की रक्षा कर सकती है।
Ladli sisters, Mohan government gave a big shock
‘No one takes RSS seriously’…, Congress
रोहतक कांग्रेस नेता दीपेंदर हुड्डा हरियाणा की रोहतक लोकसभा सीट से चुनाव जीत गए हैं। अब उन्हें राज्यसभा से इस्तीफा देना होगा, जिस पर दोबारा चुनाव होगा। इस तरह कांग्रेस को लोकसभा की एक सीट मिल गई है, लेकिन राज्यसभा में एक सीट छिनने का भी खतरा है। इसकी वजह यह है कि हरियाणा विधानसभा के ज्यादातर सदस्य भाजपा के पक्ष में हैं। इसके अलावा क्रॉस वोटिंग भी हो सकती है। ऐसी स्थिति में हुड्डा की यह सीट भाजपा के खाते में जा सकती है। दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी के विधायक और कुछ निर्दलीय क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। ऐसा हुआ तो फिर कांग्रेस के लिए जीत संभव नहीं होगी। दीपेंदर हुड्डा 2020 में राज्यसभा पहुंचे थे और उनका कार्यकाल 2026 तक के लिए था। मौजूदा स्थिति में भाजपा मजबूत दिखती है। उसके अपने विधायकों के अलावा जेजेपी का एक गुट, कुछ निर्दलीय और एक विधायक वाली पार्टियां उसके पक्ष में हैं। नियम के अनुसार यदि कोई राज्यसभा का सांसद लोकसभा के लिए चुना जाता है तो फिर उसे अपनी सीट छोड़नी होती है। ऐसे में रोहतक से जीत के बाद दीपेंदर हुड्डा की राज्यसभा सीट खाली हो गई है। अब चुनाव आयोग को राज्यसभा सीट पर उपचुनाव के लिए नोटिफिकेशन जारी करना होगा। नियम के मुताबिक 6 महीने के भीतर ही चुनाव हो जाना चाहिए। माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव से पहले इस सीट पर इलेक्शन हो सकता है। कांग्रेस एक विधायक वरुण चौधरी अब अंबाला लोकसभा सीट से सांसद चुने गए हैं। इस तरह विधानसभा की संख्या 87 ही रह गई है। यहां बहुमत का आंकड़ा 44 ही है। वहीं जेजेपी के कुल 10 विधायक हैं, लेकिन खेमेबाजी है। दो विधायकों ने खुलकर भाजपा का साथ दिया है। उसके एक विधायक देवेंदर सिंह बबली तो कांग्रेस का लोकसभा चुनाव में समर्थन कर चुके हैं। इसके अलावा एक अन्य विधायक रामकुमार गौतम भी जेजेपी लीडरशिप से नाराज हैं। राज्य में कांग्रेस के 29 विधायक हैं और उसे तीन का समर्थन हासिल है। इस तरह विपक्ष की संख्या राज्य में 32 है। जेजेपी के कुछ और विधायक कर सकते हैं क्रॉस वोटिंग वहीं भाजपा के 41 विधायक हैं और गोपाल कांडा एवं नयनपाल रावत का उसे समर्थन हासिल है। इनोलो के इकलौते विधायक अभय चौटाला और निर्दलीय बलराज कुंडू अब तक भाजपा के खिलाफ ही रहे हैं। लेकिन जेजेपी के कुछ और विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। बता दें कि राज्यसभा में विधायक किसी भी कैंडिडेट को वोट कर सकते हैं और उन पर कोई दल ऐक्शन भी नहीं ले सकता। ऐसे ही एक मामले में फैसला सुनाते हुए 22 अगस्त, 2006 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि विधायक यदि राज्यसभा में दूसरे दल के नेता को वोट करता है तो उसकी मेंबरशिप खारिज नहीं हो सकती।
BJP declared Kamlesh Shah as its candidate for Amarwara by-election?
politics heats up before Rahul Gandhi’s visit to Kerala