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छिंदवाड़ा जैसा जिला विश्व में कहीं नहीं है, जो प्यार आपने मुझे दिया है, वही नकुलनाथ को दीजिए

There is no district like Chhindwara anywhere in the world, give the same love you have given me to Nakulnath. भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि देश व प्रदेश की जनता ने जब स्किल इंडिया का नाम भी नहीं सुना था, तब से छिन्दवाड़ा में स्किल सेन्टर संचालित हो रहे हैं। इन सेन्टरों से प्रशिक्षण प्राप्त कर युवा निरंतर रोजगार से जुड़ रहे हैं। प्रदेश ही नहीं बल्कि देश में सर्वाधिक स्किल सेन्टरों वाला जिला हमारा है। जब यह सुनता हूं तो मेरी छाती गर्व से चौड़ी होती है। कभी लोग पूछते थे कौन सा छिन्दवाड़ा आज उसी छिन्दवाड़ा का नाम देश ही नहीं विदेशों में जाना जाता है और इसका सबसे बड़ा श्रेय मैं अपने जिले की जनता को देता हूं। यह बात पूर्व मुख्यमंत्री नाथ ने चौरई विधानसभा क्षेत्र में आयोजित दो जनसभाओं में कही। चौरई एवं चांद में आयोजित जनसभाओं में उमड़े जनसैलाब को सम्बोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री नाथ ने कहा कि मैंने तो कभी घोषणाएं नहीं की, किन्तु जो सपना हमने देखा था उसे साकार करने के लिये मैं निरंतर कार्यरत हूं, ताकि जो शेष है वह भी पूरा हो सके और मेरे जिले की आने वाली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित हो। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले किए गए वादे आज तक भाजपा पूरे नहीं कर पाई है, यह बात मत भूलिएगा। क्या कहा था 450 रुपए में सिलेण्डर देंगे, सस्ती दरों पर बिजली देंगे, माताओं बहनों को आत्मनिर्भर बनाने के िलए कम ब्याज दरों पर लोन देंगे, ये सब झूठ साबित हुए हैं।

कलेक्टर भिंड विधायक के इशारे पर कर रहे हैं काम, निर्वाचन आयोग से शिकायत

Collector is working on the instructions of Bhind MLA, complaint to Election Commission भोपाल।  पूर्व नेता-प्रतिपक्ष डॉ गोविन्द सिंह ने कहा है कि निर्वाचन आयोग से कलेक्टर भिण्ड संजीव श्रीवास्तव की भाजपा के पक्ष में कार्य करने की अनेक शिकायतें करने के बाद कोई कार्यवाही नहीं हुई, जिससे उनके हौसले बुलंद है। लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी के पक्ष में श्रीवास्तव द्वारा चुनाव प्रभावित कर रहें है। नेता – प्रतिपक्ष डॉ सिंह का आरोप है कि भिण्ड जिले में सिन्ध नदी से रेत (बालू) का अवैध उत्खनन भाजपा के नेताओं से मिलकर लहार थाने के माध्यम से प्रतिदिन सैकड़ों ट्रक उप्र में ले जाकर बेची जा रही है। रेत माफियाओं के लठेतों द्वारा इन्ट्री के नाम से प्रति ट्रक 10 हजार व प्रति ट्रेक्टर ट्राली 2 हजार रूपये वसूल की जा रही है। जिसका उदाहरण भिण्ड नगर में रेत माफियाओं के लठैतो को इन्ट्री फीस न देने पर 3 अप्रैल 24 को 26 वर्षीय नवयुवक शिवमसिंह तोमर की गोली मारकर हत्या कर दी गई। उन्होंने कहा है कि लहार क्षेत्र के स्थानीय विधायक के सजातीय थाना प्रभारियों की पदस्थापना कर दी गई है। इन थाना प्रभारियों की रिश्तेदारियां भाजपा के नेताओं से है। जिससे पुलिस के माध्यम से मतदाताओं में भय बनाया जा रहा है। चुनाव को प्रभावित करने हेतु क्षेत्र के काग्रेस कार्यकर्ताओं पर असत्य अपराध पंजीबद्ध कराना प्रारंभ कर दिया है। काग्रेस कार्यकर्ताओं पर काग्रेस पार्टी छोड़कर भाजपा की सदस्यता लेने का दबाव डाला जा रहा है।  दांगी सहकारी संस्थाओं को बनाया खरीदी केंद्र वरिष्ठ नेता सिंह का कहना है कि कलेक्टर भिण्ड संजीव श्रीवास्तव ने स्थानीय विधायक के आदेश से जिन सहकारी संस्थाओं को मप्र में उत्कृष्ठ होने से सम्मानित किया गया उन्हें गेहूँ, सरसों आदि अनाजों का खरीदी केन्द्र नहीं बनाया। इसकी वजह यह है कि इन संस्थाओं पर कांग्रेस पार्टी के निर्वाचित अध्यक्ष है। यह भिण्ड जिले की सर्वोत्तम संस्थाएं है। बीजेपी विधायक के इशारे पर अनेकों ऐसी संस्थाओं को खरीदी केन्द्र बनाया, जिनके कर्मचारियों पर गबन तथा संस्था की राशि वसूली होने के साथ-2 लाखों रूपये के घाटे में चल रही है।

मैदानी खबर: बालाघाट में भारती और सम्राट का खेल बिगाड़ने कंकर उतरे

Field news: In Balaghat, stones came to spoil the game of Bharti and Samrat बालाघाट में हमेशा की तरह मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही संभावित है लेकिन इनका खेल बिगाड़ने बसपा ने भी मजबूत प्रत्याशी मैदान में उतार दिया है। सांसद ढाल सिंह बिसेन का टिकट काट कर भाजपा ने पार्षद भारती पारधी को मैदान में उतारा है जबकि कांग्रेस ने जिला पंचायत अध्यक्ष सम्राट सरसवार पर भरोसा किया है। क्षेत्र के तेजतर्रार समाजवादी नेता कंकर मुंजारे बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। देश, प्रदेश की तरह बालाघाट में माहौल भाजपा के पक्ष दिख रहा है लेकिन कई मसलों पर पार्टी का विरोध भी है।  भोपाल। महाकौशल अंचल की बालाघाट लोकसभा सीट का 2019 का चुनाव ढाल सिंह बिसेन ने लगभग ढाई लाख वोटों के अंतर से जीता था। बालाघाट में भाजपा की यह अब तक की सबसे बड़ी जीत थी लेकिन पार्टी ने अपने इस सांसद का टिकट काट कर नगर पालिका की पार्षद भारती पारधी को दे दिया। प्रत्याशी घोषित होते ही लगाए गए पहले बैनर से ही ढाल सिंह बिसेन का फोटो गायब था। बिसेन की टिप्पणी थी, लीजिए अभी से मेरी फोटो हट गई। ऐसे में ढाल सिंह से ईमानदारी से काम की उम्मीद कैसे की जा सकती है। प्रचार अभियान से वे दूरी बनाए दिख भी रहे हैं। बालाघाट भाजपा के कद्दावर नेता गौरीशंकर बिसेन काम तो कर रहे हैं लेकिन पूरी ताकत से नहीं क्योंकि वे अपनी बेटी के लिए टिकट मांग रहे थे लेकिन मिला नहीं। बावजूद इसके माहौल भाजपा के पक्ष में ज्यादा दिख रहा है।  कांग्रेस के सम्राट सरसवार भी कमजोर प्रत्याशी नहीं हैं। वे जिला पंचायत अध्यक्ष हैं और उनके पिता विधायक रहे हैं। इस नाते उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि भी है। बालाघाट की विधायक अनुभा मुंजारे उस स्थिति में भी कांग्रेस का पूरी ताकत से प्रचार कर रही हैं जब उनके पति कंकर मुंजारे बसपा के टिकट पर मैदान में हैं। इस चुनाव में पति-पत्नी में ऐसे मतभेद हुए कि कंकर मुंजारे अपना घर छोड़कर एक झोपड़ी में रहने पहुंच गए हैं। पहले उन्होंने पत्नी अनुभा से कहा था कि वे घर छोड़कर चली जाएं क्योंकि मेरे घर में रहकर वे मेरे खिलाफ प्रचार नहीं कर सकतीं। विधानसभा की पूर्व उपाध्यक्ष हिना कांवरे भी कांग्रेस के लिए मेहनत कर रही हैं। लिहाजा हार- जीत भाजपा-कांग्रेस के बीच ही तय है लेकिन कंकर मुंजारे के कारण मुकाबला तीन कोणीय दिखाई पड़ रहा है।  प्रदेश सरकार के मंत्री प्रहलाद पटेल 1999 में बालाघाट से सांसद रहे हैं। उन्होंने क्षेत्र में डेरा डाल रखा है। उनके प्रयास से जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा लिल्हारे और एक अन्य नेता नगपुरे ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है। क्षेत्र में लोधी मतदाताओं की तादाद अच्छी खासी है, वे इस समाज को साधने की कोिशश कर रहे हैं। कंकर मुंजारे और सामाजिक कारणों से यह वर्ग भाजपा से कटा दिखाई पड़ रहा है। वैसे भी आमतौर पर इस सीट में जातीय आधार पर भी वोट पड़ते हैं। इसे ध्यान में रखकर पार्टियां टिकट देती हैं और जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश भी होती है। चर्चा यह भी है कि जातीय समीकरणों के तहत भाजपा ने रणनीति के तहत कंकर मुंजारे को चुनाव लड़ाने में भूमिका निभाई है ताकि लोधी मतदाता कांग्रेस के पक्ष में एकमुश्त न जा सके। किसानों में धान का समर्थन मूल्य भी मुद्दा बालाघाट संसदीय क्षेत्र में राष्ट्रीय और प्रादेशिक मुद्दों के साथ स्थानीय मुद्दों पर भी चुनाव लड़ा जा रहा है। कांग्रेस ने यहां किसान कर्जमाफी और धान के समर्थन मूल्य को मुद्दा बना दिया है। भाजपा प्रत्याशी और अन्य नेता प्रचार के लिए पहुंचते हैं तो किसान पूछते हैं कि धान का समर्थन मूल्य 3100 रुपए करने की घोषणा का क्या हुआ। इसे लेकर एक किसान ने भाजपा की भारती पारधी की गाड़ी ही रोक ली थी। कांग्रेस किसानों का कर्ज माफ करने का वादा करती है और महिलाओं के बीच बताती है कि लाड़ली बहनों को 3 हजार रुपए मासिक देने का वादा किया गया था, वह भी पूरा नहीं हुआ। भाजपा राम लहर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे के साथ केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं को गिना रही है। कांग्रेस की ओर से घोषणा पत्र में किए गए वादे बताए जा रहे हैं। 5 न्याय और 24 गारंटियों का प्रचार किया जा रहा है। विधानसभा में भाजपा-कांग्रेस की ताकत बराबर विधानसभा में सदस्यता के लिहाज से भाजपा और कांग्रेस की ताकत लगभग बराबर है। क्षेत्र की 8 विधानसभा सीटों में दोनों दलों के पास 4-4 हैं। 4 माह पहले हुए विधानसभा चुनाव में लांजी, कटंगी, बरघाट और सिवनी भाजपा ने जीती थीं जबकि बैहर, परसवाड़ा, बालाघाट और बारासिवनी में कांग्रेस का कब्जा है। कांग्रेस ने चार सीटें 56 हजार 697 वोटों के अंतर से जीती है जबकि भाजपा की जीत का अंतर 60 हजार 203 वोटों का रहा है। इस दृष्टि से भाजपा की बढ़त महज 3 हजार 506 वोटों की ही है। लोकसभा चुनाव में इस अंतर को कवर करना कठिन नहीं है। 2018 के विधानसभा चुनाव में भी नतीजे लगभग इसी तरह के थे लेकिन भाजपा ने ढाई लाख वोटों के अंतर से लोकसभा चुनाव जीत लिया था। इसकी वजह राष्ट्रीय स्तर भाजपा के पक्ष में बना माहौल रहा है। यह माहौल इस चुनाव में भी देखने को मिल रहा है। दो जिलों तक फैला है बालाघाट लोकसभा क्षेत्र महाकौशल की बालाघाट लोकसभा सीट का भौगोलिक क्षेत्र दो जिलों तक फैला है। इसके तहत बालाघाट जिले की 6 एवं सिवनी जिलेकी 2 विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें बालाघाट जिले की बैहर, लांजी, परसवाड़ा, बालाघाट, वारासिवनी, कटंगी और सिवनी जिले की दो विधानसभा सीटें बरघाट, सिवनी शामिल हैं। जहां तक बालाघाट सीट के राजनीतिक मिजाज का सवाल है तो 1991 और 1996 में यहां से कांग्रेस के विश्वेश्वर भगत जीते थे। इसके बाद से लगातार भाजपा का कब्जा है। दो बार गौरीशंकर बिसेन और एक बार प्रहलाद पटेल बालाघाट से सांसद रहे हैं। केडी देशमुख, बोध सिंह भगत और ढाल सिंह बिसेने भी एक-एक बार चुनाव जीते हैं। आमतौर पर बालाघाट में हार-जीत का अंतर एक लाख से कम रहा है लेकिन 2019 में पहली बार भाजपा ने लगभग ढाई लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। यह रिकार्ड टूटता … Read more

कांग्रेस को एक और झटका, मुरैना से पूर्व विधायक अजब सिंह कुशवाह बीजेपी में होंगे शामिल

Another blow to Congress, former MLA from Morena Ajab Singh Kushwaha will join BJP. मुरैना ! मामचौन गांव में आयोजित हो रही बीजेपी की सभा में अजब सिंह कुशवाह बीजेपी में शामिल हो सकते हैं.मुरैना से कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक अजब सिंह कुशवाह आज अपने सैंकड़ों समर्थकों के साथ बीजेपी में शामिल होंगे. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव उन्हें बीजेपी की सदस्यता दिलाएंगे. सीएम मोहन यादव बीजेपी प्रत्याशी के समर्थन में आम सभा को संबोधित करने के लिए मुरैना पहुंच रहे हैं. पहाड़गढ़ जनपद के मामचौन गांव में आयोजित हो रही बीजेपी की इस सभा में अजब सिंह कुशवाह बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. कुशवाह कांग्रेस के टिकट पर सुमावली विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं. बीजेपी के टिकट पर भी सुमावली से चुनावी जंग लड़ चुके थे.

ग्राउंड रिपोर्ट: जबलपुर में भाजपा के आशीष लैंड लार्ड, कांग्रेस के दिनेश मांग रहे ‘एक नोट-एक वोट’

Ground report: BJP’s Ashish Land Lord, Congress’s Dinesh are demanding ‘one note-one vote’ in Jabalpur भोपाल। जबलपुर लोकसभा सीट में भाजपा-कांग्रेस के बीच मुकाबला तो है लेकिन पलड़ा भाजपा का भारी है। ऐसा पहली बार नहीं है, भाजपा यहां लगातार जीत भी दर्ज करती आ रही है। 1991 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के श्रवण पटेल पहली बार मामूली अंतर 6 हजार 722 वोटों के अंतर से भाजपा के बापूराव परांजपे को हरा कर चुनाव जीते थे। इसके बाद से सीट पर भाजपा का कब्जा है और कांग्रेस एक अदद जीत के लिए तरस रही है। 1996 और 1998 के दो चुनाव बापूराव परांजपे ने जीते और 1999 में जयश्री बनर्जी ने जीत दर्ज की। इसके बाद 2004, 2009, 2014 और 2019 में भाजपा की ओर से लगातार राकेश सिंह ने कमल खिलाया। राकेश सिंह ने पिछला चुनाव साढ़े 4 लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीता। मौजूदा माहौल देखकर कहा जा रहा है कि जीत का यह आंकड़ा और बढ़ने वाला है। लगातार चार जीत दर्ज करने वाले राकेश सिंह इस बार जबलपुर से मैदान में नहीं हैं। पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर वे विधानसभा का चुनाव लड़े थे और इस समय राज्य सरकार में पीडब्ल्यूडी मंत्री हैं। उनके स्थान पर भाजपा ने बिल्कुल नए चेहरे आशीष दुबे को प्रत्याशी बनाया है। वे तीन बार से विधानसभा का टिकट मांग रहे थे लेकिन मिला नहीं। उन्होंने ज्यादा संगठन में काम किया है और अब लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। अपनी छवि के कारण आशीष भाजपा की पसंद बने हैं। वे कभी विवादों में नहीं रहे। उनकी बेदाग और निर्विवाद छवि है। आशीष की पारिवारिक पृष्ठभूमि भाजपाई है। उनकी गिनती जबलपुर के लैंड लार्ड के तौर पर होती है। कांग्रेस के दिनेश यादव भी पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। वे प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री हैं। इससे पहले वे पार्षद और नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष रहे हैं। कांग्रेस की ओर से वे महापौर का चुनाव भी लड़ चुके हैं। उनकी छवि भी अच्छी है लेकिन वे भाजपा के आशीष से काफी पिछड़ते दिखाई पड़ रहे हैं। जबलपुर में भाजपा जैसी जीत दर्ज करती है, उसे देखकर स्पष्ट है कि यहां जातीय और सामाजिक गणित फेल हो जाते हैं। बावजूद इसके कांग्रेस को जातीय आधार पर ही वोट मिलने की संभावना है। भाजपा द्वारा कराए गए काम बने चुनाव का मुद्दाजबलपुर प्रदेश का महानगर है, इसलिए यहां राष्ट्रीय और प्रादेशिक मुद्दो ंका खासा असर है। इसके साथ यहां सरकार द्वारा कराए गए काम भी मुद्दा बने हुए हैं। गांव-गांव तक सड़कों की कनेक्टिविटी अच्छी हुई है। सड़कों का जाल बिछा है। 4-5 फ्लाई ओवर बन कर तैयार हुए हैं। एक बड़ा फ्लाई ओवर बन रहा है। अन्य क्षेत्रों में भी केंद्र और राज्य सरकार ने काफी काम किए है। भाजपा मोदी और राम लहर के साथ इन कामों को मुद्दा बना रही है। भाजपा के आशीष पारिवारिक संबंधों का हवाला देकर भी समर्थन मांग रहे हैं। कांग्रेस अपनी 19 माह की सरकार के कार्यों को गिना रही है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस किस तरह सभी किसानों का कर्ज माफ करने जा रही थी लेकिन भाजपा ने इसे रोक दिया। केंद्र एवं राज्य सरकार की महंगाई और रोजगार को लेकर नाकामिंया भी बताई जा रही है। कांग्रेस के 5 न्याय और 24 गारंटियों का प्रचार प्रसार किया जा रहा है। कांग्रेस के दिनेश को यादव समाज से भी काफी उम्मीद है। विधानसभा में भाजपा को हासिल है बड़ी बढ़तप्रदेश की कई अन्य सीटों की तरह जबलपुर में भी भाजपा को विधानसभा में बड़ी बढ़त हासिल है। लोकसभा क्षेत्र की 8 में से 7 विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है जबकि कांग्रेस के पास सिर्फ एक सीट है। 4 माह पहले हुए चुनाव में भाजपा ने पाटन, बरगी, जबलपुर उत्तर, जबलपुर कैंट, जबलपुर पश्चिम, पनागर और सिहोरा विधानसभा क्षेत्रों में बड़े अंतर से जीत दर्ज की है जबकि कांग्रेस सिर्फ जबलपुर पूर्व सीट ही जीत सकी है। जबलपुर पूर्व में कांग्रेस के लखन घनघोरिया 27 हजार 741 वोटों के अंतर से जीते हैं जबकि सातों सीटों में भाजपा की जीत का अंतर 2 लाख 36 हजार 359 वोट है। साफ है कि भाजपा को विधानसभा चुनाव से ही 2 लाख से ज्यादा वोटों की बढ़त हासिल है। कांग्रेस के लिए इस अंतर को पाटना बड़ी चुनौती है। जबलपुर जिले को मिलाकर बनी लोकसभा सीटजबलपुर लोकसभा सीट का भाैगोलिक एरिया बाहर नहीं गया। इसके तहत आने वाली सभी 8 विधानसभा सीटें जबलपुर जिले की ही हैं। जातीय आधार पर जरूर हर विधानसभा सीट की अलग-अलग स्थिति है। किसी सीट में दलित और आदिवासी ज्यादा हैं तो किसी में पिछड़े और ब्राह्मण। कुल मिलाकर दबदबा भाजपा का ही है। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया था। तब भाजपा और कांग्रेस को बराबर 4-4 सीटें मिली थीं। बावजूद इसके 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा के राकेश सिंह 4 लाख 54 हजार 744 वोटों के बड़े अंतर से जीते थे। अब तो विधानसभा में भी भाजपा का पलड़ा भारी है। माहौल भी भाजपा का है। ऐसे में यदि भाजपा के जीत का अंतर और बढ़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है तो गलत नहीं है। वैसे भी जबलपुर में भाजपा की जीत का अंतर हर चुनाव में बढ़ता ही गया है। क्षेत्र में ब्राह्मण, दलित, पिछड़े वर्ग का दबदबाजबलपुर लोकसभा सीट में आमतौर पर जातीय आधार पर मतदान नहीं होता। सामाजिक समीकरण फेल होने की वजह से यहां हार-जीत का अंतर ज्यादा होता है। लोकसभा क्षेत्र में ब्राह्मण, पिछड़ा वर्ग और दलित वर्ग के मतदाताओं का दबदबा है। ब्राह्मण एकमुश्त भाजपा के खाते में जा सकते हैं जबकि पिछड़े वर्ग का एक हिस्सा कांग्रेस को मिल सकता है। भाजपा प्रत्याशी ब्राह्मण और कांग्रेस प्रत्याशी पिछड़े वर्ग से हैं। क्षेत्र में मुस्लिम और आदिवासी वर्ग के मतदाताओं की तादाद भी काफी है। इनमें मुस्लिम का अधिकांश वोट कांग्रेस के पक्ष में जा सकता है जबकि दलित और आदिवासी मतों में बंटवारा होगा। हालांकि इनका ज्यादा हिस्सा भी भाजपा के पक्ष में ज्यादा जाने की संभावना है। क्षेत्र के वैश्य, क्षत्रिय एवं अन्य जाितयों में भाजपा का दबदबा देखने को मिल रहा है।

प्रदेश की बची 3 सीटों पर कांग्रेस ने उतारे प्रत्याशी, ग्वालियर, मुरैना और खंडवा से किसे मिला टिकट

Congress fielded candidates on the remaining 3 seats of the state, who got the ticket from Gwalior, Morena and Khandwa? लोकसभा चुनाव 2024: मध्य प्रदेश में लंबे इंतजार के बाद शनिवार को कांग्रेस ने बची हुई 3 सीटों पर भी प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं. ग्वालियर, मुरैना और खंडवा सीट पर उम्मीदवार उतारे गए हैं. अब मध्य प्रदेश की सभी लोकसभा सीटों पर मुकाबले की तस्वीर साफ हो गई है. कांग्रेस ने मध्य प्रदेश की बची हुई 3 लोकसभा सीटों पर भी प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं. मुरैना से पूर्व विधायक सत्यपाल सिंह सिकरवार नीटू को टिकट दिया गया है. ग्वालियर से पूर्व विधायक प्रवीण पाठक को मैदान में उतारा गया है, जबकि खंडवा से नरेंद्र पटेल को प्रत्याशी बनाया गया है. खण्डवा से पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव को टिकट नहीं दिया गया है.कांग्रेस ने अब मध्य प्रदेश की सभी 28 सीटों पर प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं, बाकी एक सीट पर इंडिया गठबंधन के खजुराहो लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी ने मीरा यादव को प्रत्याशी बनाया, लेकिन एक दिन पहले उनका नामांकन फॉर्म रिजेक्ट हो गया. फिलहाल मध्य प्रदेश की सभी लोकसभा सीटों पर मुकाबले की तस्वीर साफ हो गई है. इधर, भाजपा पहले ही राज्य की 29 लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी उतार चुकी है. ग्वालियर लोकसभा सीटग्वालियर लोकसभा सीट से कांग्रेस ने पूर्व विधायक प्रवीण पाठक को टिकट दिया है. पाठक पहली बार 2018 ग्वालियर दक्षिण सीट से चुनाव में पहलीबार जीतकर विधानसभा पहुंचे थे. इस चुनाव में उन्होंने भाजपा के पूर्व मंत्री नारायण सिंह कुशवाह को हराया था. हालांकि, 2023 में हुए विधानसभा चुनाव प्रवीण पाठक को हार का सामना करना पड़ा. उन्हें पूर्व प्रतिद्वंदी नारायण सिंह कुशवाह ने हराया था.

आज भोपाल में इंडिया गठबंधन की पहली बैठक, प्रदेश में कांग्रेस की जीत के लिए बनेगा प्लान

First meeting of India alliance in Bhopal today, plan will be made for the victory of Congress in the state. लोकसभा चुनाव से पहले रणनीति बनाने के लिए इंडिया गठबंधन की एमपी इकाई भोपाल में पहली बैठक करने जा रही. ये बैठक भोपाल कांग्रेस पार्टी के कार्यालय पर होगी.भोपाल ! आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए इंडिया महागठबंधन की बैठक मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आज यानी 6 अप्रैल हो होगी. इंडिया गठबंधन की प्रदेश में ये पहली बैठक है, जो प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में सुबह 10 बजे होगी. इस बैठक में कई दिग्गज नेता शामिल होंगे. बैठक के बाद सामूहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी आयोजित होगी.बताया जा रहा है कि इस बैठक में प्रदेश में होने वाले 4 चरणों में चुनाव को लेकर रणनीति बनाई जाएगी. कांग्रेस की कोशिश रहेगी कि गठबंधन के सभी दल अपने-अपने प्रभाव क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशियों के लिए काम करें. इंडिया गठबंधन को झटका, कांग्रेस अकेलीवहीं कांग्रेस ने गठबंधन के सहयोगी समाजवादी पार्टी के लिए खजुराहो सीट भी छोड़ी थी, लेकिन यहां पर शुक्रवार को सपा प्रत्याशी मीरा यादव का नामांकन निरस्त हो गया है. जो इंडिया गठबंधन के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है. यानी अब गठबंधन के लिए 29 में से 28 सीटें बची हैं. इन सभी से कांग्रेस के प्रत्याशी मैदान में हैं. कांग्रेस इस कोशिश में है कि अब सभी दल कांग्रेस के लिए अभियान चलाएं. इन्हीं सब मुद्दों पर बैठक में विचार किया जाएगा। ये दिग्गज बैठक में रहेंगे मौजूदइंडिया गठबंधन से संबद्ध मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी,आम आदमी पार्टी की प्रदेशाध्यक्ष रानी अग्रवाल, समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मनोज यादव, मार्क्सवादी कम्युनिष्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह, शैलेन्द्र शैली, भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी के राज्य सचिव अरविंद श्रीवास्तव, समानता दल के प्रदेश अध्यक्ष महेश कुशवाहा और इंडिया डेमोक्रिटिक पार्टी के अध्यक्ष अजय सिंह,एनसीपी (शरद पंवार) के अध्यक्ष राजू भटनागर, राजद के प्रदेश अध्यक्ष मोनू यादव शनिवार बैठक में रहेंगें मौजूद. गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने प्रदेश में बहुत तगड़ा प्रदर्शन किया है. जिसे भाजपा लोकसभा चुनाव में भी दोहराना चाहती है. वहीं कांग्रेस विधानसभा चुनाव की हार को पीछे छोड़कर लोकसभा चुनाव में जुटी है. लेकिन कांग्रेस की 3 सीटें अभी भी फंसी हैं, जहां पार्टी ने प्रत्याशियों का ऐलान नहीं किया है.

विदिशा संसदीय क्षेत्र में 3 दशक में बहुत कुछ कबाड़ा हो चुका है, उसे ठीक करना है

A lot of junk has happened in Vidisha parliamentary constituency in last 3 decades, it has to be rectified. विदिशा-रायसेन लोकसभा से कांग्रेस प्रत्याशी प्रतापभानु शर्मा से ‘पुष्पेन्द्र अहिरवार’ का ‘चुनावी साक्षात्कार’ ये भी बोले शर्मा? पुष्पेन्द्र अहिरवार.भोपाल/विदिशा। विदिशा-रायसेन संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी ने दो बार सांसद रहे प्रतापभानु शर्मा को फिर से प्रत्याशी बनाकर उतारा है। यह सीट आजादी के बाद से ही कांग्रेस के लिए मुश्किल भरी रही है। यहां कुल 15 लोकसभा चुनाव में से कांग्रेस दो बार जीतने में कामयाब रही। यह सीट पर अटल विहारी वाजपेयी और रामनाथ गोयनका, जैसी शंखसियत को संसद भेज चुकी है। इस सीट से शिवराज सिंह चौहान भी जननेता के रूप में अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहे हैं। हालही में तथाकथित राजनैतिक वनवास खत्म कर शिवराज सिंह चौहान फिर से मैदान में हैं। उनके मुकाबले के लिए कांग्रेस से पूर्व सांसद प्रतापभानु शर्मा हैं। शर्मा इस सीट पर 33 साल बाद चुनावी मैदान में उतरे हैं। वे 1980 और 1984 में सांसद चुने गए थे। अब वादाखिलाफी बहुत हो चुकी है। इसके चलते बदलाव बेहद जरूरी है। विदिशा संसदीय क्षेत्र में 3 दशक में बहुत कुछ कबाड़ा हो चुका है। उसको ठीक करने के लिए प्रताप भानू को फिर हथियार उठाने पड़ंेगे। वे हरिभूमि और आईएनएच चैनल के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी से ‘चुनावी संवाद’ कार्यक्रम में अपनी बात रख रहे थे। उनसे सीधी बात सवाल: आप लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं, आपकी क्या है चुनावी रणनीति?जवाब: मैं कांग्रेस पार्टी का अिधकृत प्रत्याशी हूं। पूरी दमखम से चुनाव लड़ रहा हूं और जीतूंगा भी। भाजपा ने जिस प्रत्याशी को मेरे सामने उतारा है, उन्होंने अपने संसदीय और मुख्यमंत्रित्व काल में ऐसा कुछ भी नहीं किया, जिसका उल्लेख किया जाए। उनकी कथनी और करनी में कितना अंतर है, यह जनता समझ चुकी है। लोकल मुद्दे इतने हो गए हैं कि उसका कोई सही प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा है। बेतवा नदी की शुद्धि के लिए शिवराज ने 20 साल पहले कहा था, जो आज तक नहीं हुआ। उद्योग आएंगे, वे भी नहीं आए। मनमोहन सिंह के कार्यकाल में यहां की सांसद सुषमा स्वराज को रेल कारखाना दिया था, जिसका अिस्तत्व नहीं दिख रहा। रोजगार का मुद्दा वहीं का वहीं है। किसानों को फसल के दाम नहीं मिल रहे। महंगाई का मुद्दा तो बना ही हुआ है। ये सब स्थानीय मुद्दे हैं जिनसे लोग परेशान हैं। सवाल: जब शिवराज के प्यादे चुनाव जीत जाते हैं तो अब वजीर खुद मैदान में हैं, कैसे आप जीतेंगे?जवाब: क्षेत्र की जनता जनार्दन को समझने की जरूरत है। 30 साल के सांसद या मुख्यमंत्री के रूप में शिवराज ने हमारे क्षेत्र को क्या दिया। नौजवाब को रोजगार के लिए कितने उद्योग लगाए। नेता तो आते-जाते रहते हैं, लेकिन जनता तो वहीं की वहीं खड़ी है। जनता के आशीर्वाद से हम जीतेंगे। नेता तो स्वार्थ की सौदेबाजी करते रहते हैं। भाजपा ने तो ‘दलबदल सेल’ खोल दिया है, यह कितना शर्मनाक है। भ्रष्टाचार के आवरण में भाजपा ढकी हुई है। लोगों को लालच देकर खरीद रही है। हो सकता है कि शशांक भार्गव हारने के बाद टेंशन आए हों तो वे भाजपा में फोटो खिंचाने चले गए। 50 साल के अनुभव से कह सकता हूं कि जिस तरह की गंदी राजनीति चल रही है, ऐसी कभी नहीं हुई। जब जनता ने ही तय कर लिया कि हमें बदलाव लाना है तो नेताओं के आने-जाने से कुछ नहीं होगा। सवाल: विधानसभा चुनाव के दौरान भी उतना ही आत्मविश्वास था, जितना आज है, इतना आत्मविश्वास कहां से लाते हैं?जवाब: हम वक्त की कसौटी पर खरे उतरे हैं। क्षेत्र की कसौटी पर खरे उतरे हैं। मप्र में हमारी सरकार रही है। अभी हमारा प्रयास सरकार बनाने का था, लेकिन किसी कारणवश नहीं बना पाए। इसके कई कारण रहे हैं। प्रत्याशियों ने कई शिकायतें की। सबसे ज्यादा ईवीएम की शिकायतें की, जिनपर चुनाव आयोग मौन रहा है। परिणामों में हेराफेरी की शिकायतें भी आई हैं। यह सब आपने भी देखा है। ईवीएम पर नजर रखना बहुत जरूरी है। क्योंकि पूरा खेल और हेराफेरी इसी से संभव है। ईवीएम का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर उठ रहा है, यह हमें कहने की जरूरत नहीं है। सवाल: उसी ईवीएम से ही चुनाव हो रहे हैं तो आपके लिए गुंजाइश कहां बची है?जवाब: ईवीएम पर कड़ी निगाह रखेंगे। अब ईवीएम में हेराफेरी बिल्कुल नहीं होने देंगे। यदि हुआ तो उसके लिए कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। अब हाथ पर हाथ धरे कांग्रेस नहीं बैठे रहेगी। क्योंकि अब नेता और जनता इस बात को अच्छी से समझ चुकी है। पार्टी ने चुनाव आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट में मुद्दे उठाए हैं। आगे भी लड़ाई लड़ंेगे। हमने चुनाव आयोग से कहा है कि ईवीएम से परिणाम दे रहे हैं, उसके साथ वीवीपेट की पर्ची की भी काउंटिंग की जाए, भले ही दो दिन लग जाएं, तभी परिणाम आएं। इससे डिजीटल टेक्नोलॉजी के दुरुपयोग को लेकर लोगों में जो शंका है, वह दूर हो जाएगी। अगर मैं कांग्रेस को वोट दे रहा हूं, वो हमें नहीं मिल रहा है तो यह हमारे मताधिकार का हनन है। सवाल: आपके नेता तो पार्टी छोड़ रहे हैं, फिर कैसे जीत रहे हैं आप?जवाब: देखिए, भाजपा सारे साम-दाम-दंड अपनाकर हमारे नेताओं को तोड़ रही है। ईडी, सीबीआई का डर दिखाया जा रहा है। यह भाजपा का छलकपट जनता देख रही है, वही इसका इस बार जवाब देगी। मेरा मानना है कि इस चुनाव के बाद दलबदलुओं की कोई औकात नहीं रहेगी। कोई 17 हजार कार्यकर्ता या नेता भाजपा में नहीं गए। मेरा दावा है कि भाजपा इन 17 हजार लोगों की लिस्ट प्रकाशित करे, तभी सच्चाई सामने आएगी। कुछ लोग पद या कमाने के लालच से सौदेबाजी करके गए हैं। यदि इस बार दिल्ली में सरकार बदली तो यही जाने वाले नेता उल्टी नाक से पांव रगड़ेंगे, ये मेरा दावा है। सवाल: शिवराज 10 लाख वोटों से जीतने का दावा कर रहे हैं तो आपका क्या होगा?जवाब: उनकी हवाहवाई बात करने की, घोषणावीर होने की पुरानी आदत है। मेरा दावा है कि वे 1 लाख से ज्यादा वोटों से हारेंगे। मप्र का इतिहास देख लीजिए कोई 10 लाख मतों से नहीं जीता। इसी से अंदाजा लगा लीजिए यह कितनी फर्जी … Read more

“एक वोट, एक नोट” अभियान ,जीतू पटवारी ने किया शुभारंभ

“One Vote, One Note” campaign launched by Jitu Patwari न्यू मार्केट इलाके में जीतू पटवारी की अगुआई में कांग्रेसियों ने व्यापारियों, ठेला व्यवसायियों के पास पहुंचकर चंदा जुटाया। भोपाल सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी अरुण श्रीवास्तव के लिए मांगा समर्थन।कांग्रेस ने चुनाव लड़ने के लिए जनता से मांगा चंदा, वोट के साथ नोट देने की भी अपील भोपाल ! आयकर विभाग द्वारा कांग्रेस को दिया गया करोड़ों रुपये की वसूली का नोटिस और पार्टी के फ्रीज किए गए खातों के विरोध में रविवार को कांग्रेस ने अनूठे ढंग से प्रदर्शन किया। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी कांग्रेसियों के साथ बड़ी संख्या में कांग्रेसी शहर के न्यू मार्केट, रोशनपुरा चौराहा पहुंचे और लोगों से चुनाव के लिए ‘एक वोट, एक नोट’ देने की अपील की। पटवारी सहित भोपाल लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी अरुण श्रीवास्तव ने भी ठेले संचालकों व दुकान मालिकों से चंदा मांगा। पटवारी ने पहली बार नींबू पानी पिलाने वाले से 10 रुपये का चंदा लिया। इसके बाद न्यू मार्केट में जगह-जगह लगे खाद्य पदार्थों से चंदा मांग रहे हैं। उन्हें कोई 10 तो कोई 20, 50 रुपये चंदा दे रहे हैं। कांग्रेसियों के साथ न्यू मार्केट के कुछ कांग्रेस समर्थक व्यापारी भी इस मुहिम में शामिल हुए और चंदा एकत्र किया। भाजपा को सबक सिखाएगी जनता – जीतूइस मौके पर कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इशारे पर कांग्रेसियों व अन्य पार्टियों के नेताओं के घर ईडी, सीबीआइ भेज दी जाती हैं। कभी भाजपा के नेताओं घर ये एजेंसियों क्यों नहीं जाती हैं? कांग्रेस को आम जनता पर भरोसा है। लोकसभा चुनाव में जनता ही भाजपा को सबक सिखाएगी। कांग्रेस का इस तरह का विरोध प्रदर्शन हर लोकसभा चुनाव क्षेत्र में चलेगा। कांग्रेस के खाते फ्रीज किए जा रहे हैं। हमारे पास चुनाव लड़ने के लिए फंड नहीं है। प्रदेश व देश में सत्ताधारी भाजपा के पास करोड़ों रुपये हैं। वह लोकतंत्र की हत्या कर रही है। धन व बाहुबल का उपयोग चुनाव जीतने के लिए भाजपा करती आई है।

व्यक्ति विशेष को बचाने के लिए रैली नहीं,ये लोकतंत्र बचाओ रैली है, INDIA गठबंधन

This is not a rally to save a particular person, this is a rally to save democracy, INDIAतमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और झारखंड के मुख्यमंत्री चंपई सोरेन भी इस रैली में शामिल होंगे। नई दिल्ली। दिल्ली के रामलीला मैदान में आज विपक्षी दल बड़ा शक्ति प्रदर्शन कर रहा है। रैली में I.N.D.I.A गुट के 28 दलों के नेता शामिल हुए। रैली में सभी का ध्यान अरविंद केजरीवाली की पत्नी सुनीता केजरीवाल के संबोधन पर था। INDIA गठबंधन की ‘महारैली’ को संबोधित करते हुए अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने मेरे पति को जेल में डाल दिया, क्या प्रधानमंत्री ने ये सही किया है। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल एक सच्चे देश भक्त और ईमानदार व्यक्ति हैं? उन्होंने जनता से पूछा कि क्या केजरीवाल जी को इस्तीफा देना चाहिए? सुनीता केजरीवाल ने आगे कहा कि कि अरविंद केजरीवाल शेर हैं और वे ज्यादा दिन के लिए जेल में नहीं रहेंगे। रामलीला मैदान में भाजपा पर भड़की सुनीता केजरीवाल, ‘आपके अरविंद शेर हैं, ज्यादा दिन जेल में नहीं रहेंगे’ देश मुश्किल हालात से गुजर रहा – महबूबा मुफ्तीमहारैली’ को संबोधित करते हुए PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा कि आज देश बहुत मुश्किल हालात से गुजर रहा है। देश में ऐसा हाल है कि ना कोई वकील, ना कोई दलील, ना कोई कार्रवाई, सीधा जेल। शायद कलयुग का अमृत काल इसी को कहते हैं कि आप बिना कुछ पूछे लोगों को जेल में डाल देते हैं। हमने जम्मू-कश्मीर में पिछले 5 साल तक यही देखा है, जब आप संविधान और कानून का उल्लंघन करते हैं तो वो देशहित में नहीं होता, बल्कि देशद्रोह होता है। ये लोकतंत्र बचाओ रैली ,कांग्रेसकांग्रेस ने कहा कि ‘लोकतंत्र बचाओ रैली’ का उद्देश्य किसी व्यक्ति की रक्षा करना नहीं, बल्कि संविधान और लोकतंत्र को बचाना है। इस महारैली में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी मौजूद थे। इनके अलावा झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन, अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल, शिवसेना प्रमुख (UBT) उद्धव ठाकरे, सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रेयन, लेफ्ट नेता सीताराम येचुरी, एनसीपी (पवार) शरद पवार सहित कई दिग्गज नेता मौजूद हुए। व्यक्ति विशेष को बचाने के लिए रैली नहीं ,कांग्रेस इधर कांग्रेस की ओर से ये साफ कर दिया गया है कि रामलीला मैदान में आज होने वाली संयुक्त मेगा रैली लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए है, न कि किसी व्यक्ति विशेष को बचाने के लिए की गई है। वहीं पंजाब के मंत्री और आप नेता बलबीर सिंह ने कहा है कि आज दिल्ली के रामलीला मैदान में ऐतिहासिक रैली होने जा रही है। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल अपने लिए नहीं, बल्कि देश के 140 भारतीयों के लिए लड़ रहे हैं। रैली में शामिल होंगे ये विपक्षी नेताआज रामलीला मैदान में होने वाली संयुक्त विपक्ष रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, शरद पवार, अखिलेश यादव, उद्धव ठाकरे से लेकर तेजस्वी यादव जैसे नेता शामिल होंगे। इसके अलावा तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और झारखंड के मुख्यमंत्री चंपई सोरेन भी इस रैली में शामिल होंगे। खास बात ये है कि इस रैली में अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल भी शामिल होंगी और अरविंद केजरीवाल का संदेश पढ़ सकती है। मोदी सरकार के खिलाफ इससे पहले विपक्षी दलों ने संयुक्त रैली 17 मार्च को मुंबई के शिवाजी पार्क में की थी। देश तानाशाही की ओर जा रहा – उद्धव ठाकरेरैली को संबोधित करते हुए सबसे पहले उद्धव ठाकरे ने कहा कि कल्पना सोरेन और सुनीता केजरीवाल, आप दोनों चिंता मत करो, सिर्फ हम ही नहीं पूरा देश आपके साथ है। कुछ दिन पहले आशंका थी कि क्या हमारा देश तानाशाही की ओर चल रहा है? लेकिन अब ये आशंका नहीं, सच्चाई है। भाजपा को लग रहा होगा कि अरविंद केजरीवाल और हेमंत सोरेन को गिरफ्तार करने से लोग डर जाएंगे लेकिन उन्होंने अपने देशवासियों को कभी पहचाना नहीं। लोकतंत्र व संविधान बचाने की लड़ाईकांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश ने संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में शनिवार को कहा कि रैली में विपक्षी गठबंधन के सभी 28 घटक दल भाग लेंगे। जयराम रमेश ने कहा कि यह लोकतंत्र और संविधान बचाने की लड़ाई है, इसलिए इसे ‘लोकतंत्र बचाओ रैली’ नाम दिया गया है। यह रैली एक पार्टी की रैली नहीं है। वहीं दूसरी ओर आम आदमी पार्टी रामलीली मैदान में होने वाली रैली को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ED द्वारा की गई गिरफ्तारी के खिलाफ विपक्ष का जमावड़ा बता रही है।

हर्षोल्लास के साथ मनाई गई रंग पंचमी, दिग्विजय सिंह ने जमकर उढ़ाया रंग-गुलाल

Rang Panchami celebrated with great enthusiasm, Digvijay Singh spread colors with gusto होली के पांचवे दिन रंग पंचमी मनाया जाता है. इस दिन लोग जमकर रंग गुलाल खेलते हैं और एक-दूसरे से मिलकर पुराने गिले शिकवे दूर करते हैं. वहीं राजधानी भोपाल में भी हर्षोल्लास के साथ रंग पंचमी मनाई गई. पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह भी प्रोग्राम में शामिल हुए और जमकर रंग-गुलाल खेला. भोपाल। मध्य प्रदेश में होली के त्योहार के बाद सबसे ज्यादा हर्ष और उल्लास से मनाया जाने वाला पर्व रंग पंचमी है. जो होली से पांच दिन बाद मनाया जाता है. रंग पंचमी पर राजधानी भोपाल के साथ-साथ मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर में सबसे ज्यादा धूमधाम से रंग पंचमी मनाई जाती है. शनिवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद इंदौर में रंग पंचमी के मौके पर निकलने वाली गैर में शामिल हुए हैं. ऐसा करने वाले वह पहले मुख्यमंत्री हैं, जो उज्जैन के गेर में शामिल हुए हैं. राजधानी भोपाल में भी रंग पंचमी जमकर मनाई गई. भोपाल में निकलने वाले जुलूस में पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह शामिल हुए. भोपाल में धूमधाम से मनाई गई रंगपंचमीइंदौर के बाद सबसे ज्यादा रंग पंचमी का त्योहार अगर कहीं मनाया जाता है, तो वह राजधानी भोपाल और इंदौर में मनाया जाता है. यहां आज के दिन स्थानीय अवकाश घोषित किया जाता है. भोपाल में आज चौक बाजार में सुबह 10:00 बजे से ही रंग पंचमी मनाने की शुरुआत हो गई थी. इस रंग पंचमी के मौके पर लोग भूत पिशाच और अन्य तरह के कपड़े पहन कर शामिल हुए. चौक बाजार में निकलने वाले इस रंग पंचमी के जुलूस में पुराने शहर के अलावा नए शहर के लोगों ने भी पहुंचकर जुलूस का हिस्सा बने. भोपाल के पुराने शहर में 6 टैंकरों से रंग बरसाया गया. जिसका भोपाल के लोगों ने जमकर लुफ्त उठाया. भोपाल में रंग पंचमी का जुलूस लोहा बाजार, छोटे भैया कॉर्नर, जनकपुरी सिंधी मार्केट, भवानी चौक, लखेरा पूरा, पीपल चौक, चिंतामणि चौक और इतवारा चौराहे से जैन मंदिर मंगलवार गणपति चौक घोड़ा नक्कास होते हुए हनुमान जी की मड़िया पर समाप्त हुआ. पंचमी के प्रोग्राम में शामिल हुए दिग्विजय सिंहकाफी संख्या में राजधानी में अलग-अलग हिस्सों से लोग रंग पंचमी के जुलूस में शामिल होने के लिए पहुंचते हैं. इसके साथ ही यहां की जाने वाली विशेष व्यवस्था में टैंकरों से लोगों के ऊपर रंग बरसाने का काम हिंदू उत्सव समिति के सहयोग से किया जाता है. जिला प्रशासन भी इसके लिए विशेष सहयोग करता है. लोगों में भाईचारा बढ़ाने के लिए, लोग होली के बाद एक बार फिर से एक दूसरे के साथ मिलजुल कर रंग गुलाल का आनंद उठा सके, इसलिए यहां पंचमी के जुलूस को निकाला जाता है. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सभी को रंग पंचमी की शुभकामनाएं दी.

कांग्रेस को लग सकता है बड़ा झटका, सीएम मोहन से मिलने पहुंचे विधायक कमलेश शाह

Congress may face a big blow, MLA Kamlesh Shah arrives to meet CM Mohan लोकसभा चुनाव 2024 : छिंदवाड़ा में कांग्रेस को बड़ा झटका लग सकता है. अमरवाड़ा विधायक कमलेश शाह शुक्रवार को सीएम मोहन यादव से मिलने के लिए भोपाल पहुंचे हैं.कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा में कांग्रेस को बड़ा झटका लग सकता है. मुख्यमंत्री निवास में सीएम डॉ. मोहन यादव से मुलाकात करने अमरवाडा विधानसभा के विधायक कमलेश शाह भोपाल पहुंचे हैं. वे आज बीजेपी में शामिल हो सकते हैं.

शिवराज मामा को निपटाने में लगे हैं CM मोहन यादव ,नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार

CM Mohan Yadav is busy in settling Shivraj uncle, Leader of Opposition Umang Singhar दोनों के बीच कबड्डी चल रही…MP में नेता प्रतिपक्ष का बयान मंडला ! नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, शिवराज मामा अभी बड़े परेशान हैं. अभी मोहन यादव शिवराज मामा की कबड्डी चल रही है. CM मोहन यादव, शिवराज मामा को निपटाने में लगे हैं. एक-दूसरे की फाइल ढूंढने-छानने में लगे हैं. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव मंडला में कांग्रेस प्रत्याशी ओंकार सिंह मरकाम के पक्ष में जनसभा करने पहुंचे. इस दौरान नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी और BJP पर जमकर हमला किया. वहीं, नेता प्रतिपक्ष ने मंच से कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज चौहान के बीच कबड्डी चल रही है. दोनों एक दूसरे को निपटाने में लगे हुए हैं.  नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने कहा, कोई घोटाले छिपाने के लिए वल्लभ भवन में आग लगवा रहा है तो कोई नए घोटाले तैयार कर रहा है. इसके साथ ही उन्होंने पिछले दिनों महाकाल में भस्म आरती के दौरान लगी आग को लेकर भी तंज करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री उज्जैन से ही आते हैं लेकिन महाकाल के गर्भगृह में ही आग लग गई. यह प्रकोप महाकाल बाबा उज्जैन से देना ही चालू कर रहे हैं. जीतू पटवारी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी पर जमकर हमला बोला और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 के पहले जो भी वादे किए थे, उनमें से एक भी नहीं किया . साथ ही मंडला लोकसभा क्षेत्र के भाजपा प्रत्याशी और केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते पर भी आरोपों की झड़ी लगा दी.

MP कांग्रेस को एक और झटका, दो पूर्व विधायकों ने थामा भाजपा का दामन, पूर्व सांसद रामलखन सिंह ने भी ली बीजेपी की सदस्यता

Another blow to MP Congress, two former MLAs joined BJP, former MP Ramlakhan Singh also took membership of BJP. मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा ने इन नेताओं को पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस मौके पर भाजपा के न्यू ज्वाइनिंग कमेटी के संयोजक नरोत्तम मिश्रा भी रहे मौजूद। भोपाल। लोकसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच कांग्रेस में भगदड़ का दौर जारी है। इसी बीच गुरुवार को मध्य प्रदेश में कांग्रेस को एक और झटका लगा। पूर्व सांसद डा राम लखन सिंह के साथ पूर्व विधायक नीलेश अवस्थी, अजय यादव के साथ अन्य कांग्रेस नेताओं ने भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा के प्रदेश कार्यालय में न्यू ज्वाइनिंग कमेटी के संयोजक डा. नरोत्तम मिश्रा की उपस्थिति में मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव व भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष वी डी शर्मा ने रामलखन सिंह, नीलेश अवस्थी व अजय यादव को भाजपा की सदस्यता दिलाई। इस अवसर पर जबलपुर संभाग के कई कांग्रेस पदाधिकारियों ने भी भाजपा की सदस्यता ली।

दीपक सक्सेना के घर पहुंच विजयवर्गीय CM मोहन ने बंद कमरे में की गुफ्तगू

Vijayvargiya CM Mohan reached Deepak Saxena’s house and chatted in a closed room. बुधवार को भाजपा प्रत्याशी विवेक बंटी साहू की नामांकन रैली के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव नगरी प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय मंत्री प्रहलाद पटेल और अन्य नेताओं ने पूर्व मंत्री दीपक सक्सेना से मुलकात की। छिंदवाड़ा। लोकसभा चुनाव में पूर्व मंत्री दीपक सक्सेना का गृह ग्राम रौहना राजनीति का केंद्र बन चुका है। बुधवार को भाजपा प्रत्याशी विवेक बंटी साहू की नामांकन रैली के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव नगरी प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय मंत्री प्रहलाद पटेल और अन्य नेता मौजूद रहे। पूर्व मंत्री दीपक सक्सेना ने काफी देर तक मुख्यमंत्री मोहन यादव से चर्चा की। बीते दिनों पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ भी रोहना गए थे और काफी देर तक चर्चा की थी। दीपक सक्सेना ने हाल ही में कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दिया था। जिसके बाद से ही उनकी स्थिति स्पष्ट नहीं है

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