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यूपी के अमरोहा में आज राहुल – अखिलेश की संयुक्त जनसभा

Joint public meeting of Rahul-Akhilesh today in Amroha, UP अमरोहा। कांग्रेस व सपा की प्रदेश में पहली संयुक्त सभा शनिवार को अमरोहा के मिनी स्टेडियम में दोपहर 2 बजे होगी । लोकसभा चुनाव में यह पहला मौका होगा जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी व सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव मिलकर जनसभा को संबोधित करेंगे । दोनों नेता प्रत्याशी के पक्ष में माहौल बनाने के साथ ही विपक्षी गठबंधन आइएनडीआइ की ताकत दिखाने का प्रयास भी करेंगे । अमरोहा चुनावी शोरगुल में जनसभाओं का क्रम जारी है। जिले में शनिवार को अमरोहा नगर में सपा कांग्रेस गठबंधन की चुनावी सभा है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। सपा जिला अध्यक्ष मस्तराम यादव ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव व कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी शनिवार दोपहर 1:40 बजे डिडौली कोतवाली क्षेत्र में बबूगढ़ – जोया बाइपास पर गांव हुसैनपुर में बनाए गए। हेलीपेड पर पहुंचेंगे । कार द्वारा वहां से दोनों नेता दोपहर 2 बजे नगर कोतवाली क्षेत्र में स्थित मिनी स्टेडियम में पहुंच कर प्रत्याशी कुंवर दानिश अली के समर्थन में जनसभा को संबोधित करेंगे। जनसभा के लिए यहां का आगमन होगा बंद उसके बाद 3:20 बजे दोनों नेता जन सभा स्थल से कार द्वारा हेलीपैड पहुंचेंगे तथा 3:30 गाजियाबाद के हिडन एयरपोर्ट के लिए रवाना होंगे । बताया कि इस दौरान बंबूगढ़ बाईपास से रवाना होने से पहले जनसभा स्थल तक पहुंचाने के लिए लगभग 5 किलोमीटर दूरी के लिए वाहनों का आवागमन बंद कर दिया जाएगा

ग्राउंड रिपोर्ट: अरुण यादव के गृह क्षेत्र में भाजपा के गजेंद्र, कांग्रेस के पोरलाल में कड़ी टक्कर

Ground Report: Tough fight between BJP’s Gajendra and Congress’s Porlal in Arun Yadav’s home constituency. भोपाल। परिसीमन से पहले खरगौन लोकसभा सीट सामान्य थी, तब कभी भाजपा जीतती थी, कभी कांग्रेस। 2008 के परिसीमन के बाद यह सीट आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित हुई, तब से यहां भाजपा काबिज है। 2009 से पहले लोकसभा सीट के लिए हुए उप चुनाव में कांग्रेस के अरुण यादव ने भाजपा के कृष्ण मुरारी मोघे को 1 लाख 18 हजार से ज्यादा मतों के अंतर हराकर जीत दर्ज की थी। इसके बाद सीट आरक्षित हो गई। तब से यहां कांग्रेस नहीं जीती। 2019 में भाजपा के गजेंद्र पटेल ने कांग्रेस के डॉ गोविंद मुजाल्दे को 2 लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया था। भाजपा की ओर से गजेंद्र फिर मैदान में हैं। वे पार्टी नेतृत्व के नजदीक हैं। कोरोना कॉल में सक्रिय रहकर उन्होंने अच्छी लोकप्रियता हासिल की थी। कांग्रेस ने पिछली बार की तरह इस बार भी नया चेहरा मैदान में उतारा है। पिछली बार क्षेत्र में लोकप्रिय एक डाक्टर को मौका दिया गया था जबकि इस बार 20 साल से आदिवासियों के बीच काम करने वाले युवा पोरलाल खरते पर दांव लगाया गया है। खरते आदिवासी युवा संगठन जयस से भी जुड़े हैं।लोगों से बातचीत करने पर जो तस्वीर उभरती है, उसके अनुसार देश की तरह खरगौन में भी माहौल भाजपा के पक्ष में है। क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और अयोध्या में राम मंदिर लहर का असर है। खरगौन में हिंदू- मुस्लिम के बीच ध्रुवीकरण भी होता है। यह भाजपा के पक्ष में जाता है। भाजपा प्रत्याशी गजेंद्र पटेल के खिलाफ कोई एंटी इंकम्बैंसी देखने को नहीं मिलती। इसका मतलब यह कतई नहीं कि कांग्रेस मुकाबले में ही नहीं है। कांग्रेस के पोरलाल आदिवासी युवाओं में खासे लोकप्रिय हैं। भाजपा प्रत्याशी पटेल भिलाला आदिवासी हैं और कांग्रेस के खरते बरेला। क्षेत्र में भिलाला 4 लाख के आसपास हैं और बरेला इनसे 2 लाख ज्यादा लगभग 6 लाख। क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की तादाद भी 2 लाख के आसपास है। यह कांग्रेस के पक्का वोट बैंक है। विधानसभा क्षेत्रों में भी कांग्रेस को बढ़त है। क्षेत्र में भाजपा का संगठन मजबूत है जबकि कांग्रेस बिखरी हुई। कांग्रेस के विधायक वैसा काम नहीं कर रहे जैसा करना चाहिए। अरुण यादव और उनके भाई सचिन यादव खरगौन के साथ अन्य क्षेत्रों में भी सक्रिय हैं। खरगौन में मोदी, मंदिर, हिंदू- मुस्लिम मुद्दा खरगौन लोकसभा क्षेत्र में मुस्लिमों की तादाद काफी है। यहां सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली घटनाएं भी हो चुकी हैं। इसलिए लोकसभा के इस चुनाव में अयोध्या में राम मंदिर और हिंदू- मुस्लिम राजनीति को मुद्दे के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकप्रिय हैं ही, उनके नेतृत्व में भारत विश्व की ताकत बन रहा है, यह बात लोगों तक पहुंचाई जा रही है। भाजपा की केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा कराए गए काम गिनाए जा रहे हैं। कश्मीर में धारा 370 का प्रचार कर यह बताया जा रहा है कि भारत अब पाक में घुसकर मार करने लगा है। दूसरी तरफ कांग्रेस केंद्र सरकार की नाकामियां गिना रही है। धर्म और हिंदू-मुस्लिम की राजनीति कर लोगों को बांटने का आरोप भाजपा पर लगाया जा रहा है। महंगाई रोकने और बेराजगारी दूर करने में केंद्र को असफल बताया जा रहा है। कांग्रेस के घोषणा पत्र में शामिल 5 न्याय और 24 गारंटियां बताई जा रही हैं। लोकसभा क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर हुए काम और समस्याएं भी चुनाव का मुद्दा हैं। विधानसभा में कांग्रेस की भाजपा पर बढ़त खरगौन ऐसा लोकसभा क्षेत्र है जहां विधानसभा में ताकत के लिहाज से कांग्रेस को भाजपा पर बढ़त हासिल है। क्षेत्र की 8 लोकसभा सीटों में से 5 पर कांग्रेस का कब्जा है जबकि भाजपा के पास सिर्फ 3 विधानसभा सीटें हैं। चार माह पहले हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 5 सीटों में 31 हजार 578 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी जबकि भाजपा का 3 सीटों में जीत का अंतर 33 हजार 126 वोट का था। इस लिहाज से भाजपा को कांग्रेेस पर लगभग 2 हजार वोटों की बढ़त हासिल है। यह अंतर लोकसभा चुनाव में कोई मायने नहीं रखता। भाजपा के गजेंद्र पटेल और पोरलाल खरते के बीच मुकाबले को देखकर भी लगता है कि विधानसभा की तरह कांटे की टक्कर हो सकती है। ध्यान देने की बात यह है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को एक भी सीट नहीं मिली थी। विधानसभा की 6 सीटें कांग्रेस ने जीती थीं और 2 सीटें निर्दलियों के खाते में गई थीं। लेकिन चार माह बाद हुए 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के गजेंद्र पटेल 2 लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत गए थे। वजह साफ है विधानसभा और लोकसभा चुनाव के मुद्दों में फर्क होता है और मतदाताओं के रुख में भी। दो जिलों तक फैला है खरगौन लोकसभा क्षेत् रनिमाड़ अंचल की खरगौन लोकसभा सीट का भौगोलिक क्षेत्र दो जिलों में फैला है। इसके तहत खरगौन और बड़वानी जिले की 4-4 विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें खरगौन जिले की चार विधानसभा सीटें महेश्वर, कसरावद, खरगौन और भगवानपुरा हैं और बड़वानी जिले की सेंधवा, पानसेमल, बड़वानी और राजपुर। खरगौन जिले की 2 सीटों कसरावद और भगवानपुरा में कांग्रेस का कब्जा है और दो सीटों महेश्वर और खरगौन में भाजपा का। बड़वानी जिले की तीन विधानसभा सीटें सेंधवा, बड़वानी और राजपुर कांग्रेस के पास हैं जबकि भाजपा के पास सिर्फ एक पानसेमल। जहां तक खरगौन लोकसभा सीट के राजनीतिक मिजाज का सवाल है तो 1991 से अब तक हुए 9 चुनावों में कांग्रेस सिर्फ 2 बार जीती है जबकि 7 बार भाजपा ने जीत का पताका फहराया है। इससे पता चलता है कि यहां के मतदाता विधानसभा और लोकसभा चुनाव में अलग-अलग मतदान करते हैं। विधानसभा में वह कांग्रेस को ज्यादा सीटें देता है तो लोकसभा चुनाव में भाजपा को जिता देता है। जातीय-सामाजिक समीकरणों में भी बराबरी खरगौन लोकसभा क्षेत्र के जातीय और सामाजिक समीकरणों के लिहाज से भी भाजपा और कांग्रेस में बराबरी का मुकाबला है। आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित इस सीट में सर्वाधिक मतदाता भिलाला और बारेला हैं। भाजपा के दिलीप पटेल भिलाला और कांग्रेस के पोरलाल बारेला समाज से हैं। क्षेत्र में भिलाला लगभग 4 लाख और बारेला … Read more

छह महीने में आलोक की दो करोड़ बढ़ी प्रॉपर्टी, जमा रकम हुई तीन गुना

Alok’s property increased by Rs 2 crore in six months, deposit amount tripled भोपाल। छह महीने पहले उत्तर विधानसभा क्षेत्र से विधानसभा का चुनाव लड़ने वाले आलोक शर्मा ने गुरुवार को लोकसभा सीट के लिए नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार आलोक की प्रॉपर्टी 6 महीने में 2 करोड़ बढ़ी है। उन्होंने 6 करोड़ 17 लाख रुपए की प्रॉपर्टी बताई है। इसके पहले, विधानसभा चुनाव में उन्होंने 4 करोड़ 44 लाख रुपए की प्रॉपर्टी होने की जानकारी दी थी। हालांकि, कांग्रेस उम्मीदवार अरुण श्रीवास्तव 12 करोड़ की प्रॉपर्टी के आसामी हैं। नामांकन में आलोक ने खुद और पत्नी की प्रॉपर्टी की जानकारी दी गई है। उनकी चल संपत्ति 2 करोड़ 30 लाख है। वहीं, अचल संपत्ति में रसूलिया पठार, परवलिया सड़क, धामनिया, खजूरी सड़क में 7.76 एकड़ जमीन, लाउखेड़ी में 2 प्लाट, गुफा मंदिर के पास मकान शामिल हैं। इसकी कुल कीमत 6 करोड़ 17 लाख रुपए बताई गई है। बैंक में जमा नगदी हुई तीन गुना, पत्नी की घटीआयोग को दी गई जानकारी में एक करोड़ 90 लाख की चल और 4 करोड़ 54 लाख रुपए की अचल संपत्ति बताई थी। तब बैंक में 38 लाख 53 हजार और पत्नी के अकाउंट में 22 लाख 72 हजार रुपए जमा थे। वर्तमान में उनके खाते में 91 लाख 69 हजार रुपए और पत्नी के अकाउंट में 16 लाख 86 हजार रुपए जमा हैं। – आलोक पर चार केसकोतवाली, तलैया, गौतम नगर, बहादुरपुर अशोक नगर थाने में केस दर्ज हैं, जबकि तीन भोपाल और एक अशोकनगर कोर्ट में प्रकरण लंबित चल रहा है। इधर आचार संहिता उल्लंघन के भी तीन केस आलोक पर दर्ज किए गए हैं। यह भी दी जानकारीखुद की आय – 527250, पत्नी 335254कुल संपत्ति- खुद 5 करोड़ 2 लाख और पत्नी- एक करोड़ 15 लाख कुल 6 करोड़ 17 लाख कैश इन हैंड- 50 हजार और पत्नी 90 हजारकैश इन बैंक- खुद- 91 लाख 69 हजार 195 और पत्नी 16 लाख 86 हजार 400 रुपएवाहन- मारुति स्विफ्ट, बलेनो, जेसीबी, एलएंडटी वाहनशस्त्र – एक रिवाल्वर, एक रायफलकर्ज देनदारी – 6887350 रुपएगहने- खुद 150 ग्राम सोना, पत्नी 550 ग्राम सोना, साढ़े पांच किलो चांदी के बर्तन आदि। शैक्षणिक योग्यता – बीकॉमकृषिरसूलिया पठार में चार एकड़ जमीनआय के स्त्रोत – कृषि और किराये से आय

ग्राउंड रिपोर्ट: भाजपा के लिए कब्जा बरकरार रखना कठिन, भूरिया दे रहे कड़ी टक्कर

Ground report: It is difficult for BJP to retain control, Bhuria is giving tough competition लोकसभा सीट- रतलाम: प्रत्याशी- अनीता नागर सिंह चौहान भाजपा, कांतिलाल भूरिया कांग्रेस रतलाम में भाजपा मजबूत, झाबुआ में कांग्रेस को बढ़त- अलीराजपुर में अनीता- भूरिया में बराबरी का मुकाबला भोपाल। रतलाम संभवत: पहला ऐसा लोकसभा क्षेत्र है, जहां से भाजपा ने प्रदेश सरकार के मंत्री नागर सिंह चौहान की पत्नी अनीता चौहान को टिकट दिया है। नरेंद्र मोदी-अमित शाह के युग में इस तरह परिवार में दो लोगों को टिकट देने की पंरपरा नहीं है। पार्टी के कई बड़े नेताओं के बेटे और परिजन टिकट का इंतजार ही कर रहे हैं। नियम तोड़ने की वजह है रतलाम सीट, जो कांग्रेस से ज्यादा कांतिलाल भूरिया का गढ़ है। भाजपा नेतृत्व किसी भी हालत में इस सीट पर कब्जा बरकरार रखना चाहता है। पहले सीट का नाम झाबुआ था लेकिन 2008 में हुए परिसीमन के बाद नाम बदलकर रतलाम कर दिया गया। इसके बाद हुए चार चुनावों में से दो बार कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया जीते और दो बार भाजपा। इनमें से एक बार कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए स्व दिलीप सिंह भूिरया जीते और दूसरी बार 2019 के चुनाव में जीएस डामोर ने जीत दर्ज की। भाजपा ने कांतिलाल भूिरया को हराने वाले डामोर का टिकट ठीक उसी तरह काट दिया जैसे गुना-शिवपुरी में ज्योतिरािदत्य सिंधिया को हराने वाले सांसद केपी सिंह यादव का काटा गया।भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही अनीता नागर सिंह चौहान भिलाला आदिवासी हैं जबकि कांतिलाल भूिरया भील आदिवासी। क्षेत्र में भील समाज की तादाद िभलाला से काफी ज्यादा है। इसके अलावा झाबुआ में ईसाई मिशनियों का काम भी काफी है। दो से ढाई लाख आदिवासी धर्म परिवर्तन कर चुके हैं। इसका सीधा लाभ कांग्रेस के भूिरया को मिलता है। दूसरी तरफ क्षेत्र में संघ का काम भी अच्छा है। रतलाम में विधायक चेतन कश्यप के कारण भाजपा को ताकत मिलती है। लोगों से बातचीत करने पर पता चलता है कि झाबुआ जिले के झाबुआ, थांदला और पेटलावद में कांग्रेस की स्थिति अच्छी है लेकिन पेटलावद कांग्रेस के हाथ से निकल सकता है। रतलाम जिले की तीन सीटों में से सैलाना और रतलाम ग्रामीण में कांग्रेस- भाजपा के बीच अच्छी टक्कर है जबकि रतलाम शहर में भाजपा बढ़त में बताई जाती है। अलीराजपुर िजले के जोबट में कांग्रेस की स्थिति अच्छी है जबकि अलीराजपुर में भाजपा मजबूत दिखती है। कुल मिलाकर रतलाम में भाजपा- कांग्रेस के बीच कडा मुकाबला देखने को मिल रहा है। भाजपा-कांग्रेस लड़ रहे विकास के मुद्दे पर चुनाव रतलाम चूंकि आदिवासी बाहुल्य सीट है, इसलिए यहां राम मंदिर और हिंदू-मुस्िलम से जुड़े मुद्दों का ज्यादा असर नहीं है। यहां चुनाव का पहला मुद्दा आदिवासी विकास है। भाजपा और कांग्रेस दोनों बता रहे हैं कि उन्होंने इस वर्ग के लिए क्या-क्या किया है। भाजपा की अनीता केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा कराए गए काम गिना रही हैं तो कांतिलाल अपने कार्यकाल में किए कामों का प्रचार कर रहे हैं। शहरी इलाकों में जरूर राम मंदिर, धारा 370, भोजशाला जैसे मुद्दों का असर देखने को मिल रहा है। यही वजह है कि रतलाम शहर और ग्रामीण क्षेत्र में भाजपा को ज्यादा फायदा होता दिख रहा है। यहां कांग्रेस बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की आय दोगुनी न होने जैसे मुद्दे उठा रही है। कांग्रेस घोषणा पत्र में किए वादों का भी प्रचार कर रही है। भाजपा के पास न मुद्दों की कमी है और नेताओं की। इसलिए उसका प्रचार ज्यादा व्यवस्थित और तेज दिखाई पड़ रहा है। विधानसभा में कांग्रेस पर भाजपा को मामूली बढ़त रतलाम लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली 8 विधानसभा सीटों के लिए 4 माह पहले हुए चुनाव में भाजपा को कांग्रेस पर मामूली बढ़त हािसल है। क्षेत्र की तीन विधानसभा सीटें कांग्रेस जीती जबकि भाजपा के खाते में 4 सीटें गई हैं। एक सीट सैलाना में भारत आदिवासी पार्टी ने जीत कर सबको चौंका दिया था। इस तरह विधानसभा में ताकत के लिहाज से भाजपा-कांग्रेस में बहुत ज्यादा फर्क नहीं है। भाजपा ने चार विधानसभा सीटें 1 लाख 4 हजार 402 वोटों के अंतर से जीती हैं जबकि कांग्रेस की तीन सीटों में जीत का अंतर 55 हजार 808 वोट रहा है। सैलाना में भारत आदिवासी पार्टी 4 हजार 618 वोटों के अंतर से जीतने में सफल रही है। लोकसभा चुनाव की दृष्टि से यह अंतर इतना ज्यादा नहीं है कि इसे कवर न किया जा सके। हालांकि 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने क्षेत्र की 8 में से 5 सीटें जीती थीं और भाजपा सिर्फ 3 में सिमट गई थी। बावजूद इसके 2019 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस नहीं जीत सकी थी। रतलाम में तीन जिलों की विधानसभा सीटें रतलाम लोकसभा सीट का भौगोलिक एरिया तीन जिलों तक फैला है। ये जिले झाबुआ, रतलाम और अलीराजपुर हैं। लोकसभा क्षेत्र में झाबुआ जिले की तीन विधानसभा सीटें झाबुआ, थांदला, जोबट और रतलाम जिले की भी तीन रतलाम ग्रामीण, रतलाम शहर और सैलाना आती हैं। अलीराजपुर की दो विधानसभा सीटें जोबट और अलीराजपुर भी इसी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं। इनमें से झाबुआ जिले की 2 और अलीराजपुर की एक सीट कांग्रेस के पास हैं जबकि रतलाम जिले की 2 और झाबुआ-अलीराजपुर की एक-एक सीट पर भाजपा का कब्जा है। जहां तक सीट के राजनीतिक मिजाज का सवाल है तो यहां कांग्रेस ज्यादा जीती है। जब सीट का नाम झाबुआ था तब कांग्रेस के दिलीप सिंह भूरिया यहां जीतते थे लेकिन परिसीमन के बाद जब सीट का नाम रतलाम हो गया तब वे भाजपा में चले गए। इसके बाद 2009 के पहले चुनाव में कांतिलाल ने दिलीप सिंह को हरा दिया जबकि 2014 में दिलीप ने कांतिलाल को हरा कर जीत दर्ज की। दिलीप सिंह के निधन के बाद 2015 के उप चुनाव में भाजपा ने उनकी बेटी निर्मला भूरिया को टिकट दिया लेकिन वे कांतिलाल से हार गईं। सामाजिक, जातीय आधार पर होता रहा मतदान रतलाम लोकसभा सीट के कई हिस्सों में जातीय और सामाजिक आधार पर मतदान होता रहा है। इस बार भी ऐसा हो सकता है। जैसे अनीता नागर सिंह चौहान को आदिवासियों में भिलाला समाज का पूरा वोट मिलेगा और कांतिलाल भूरिया को भील समाज का। इन दोनों समाजों के वोट यहां ज्यादा हैं। झाबुआ जिले में ईसाई मिशनरियों का बड़ा नेटवर्क है। इनके प्रयास … Read more

आरोप: भाजपा कांग्रेस नेताओं पर ED / CBI का दबाव डाल कर आपने पालें में कर रहें है:पूर्व सीएम कमलनाथ

Allegation: BJP is trying to keep Congress leaders in its fold by putting pressure of ED/CBI: Former CM Kamal Nath पूर्व सीएम कमलनाथ ने भाजपा पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भाजपा लगातार कांग्रेस के नेताओं पर दबाव डाल रही है और जो दबाव में नहीं आता, उसके ऊपर छापेमारी की जा रही है। मैं इस तरह की कार्रवाई की कड़ी निंदा करता हूं। छिंदवाड़ा । प्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ ने भाजपा पर बड़ा आरोप लगाते हुए अपने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा कि भारतीय जनता पार्टी लगातार कांग्रेस के नेताओं पर दबाव डाल रही है और जो दबाव में नहीं आता, उसके ऊपर छापेमारी और दूसरी कार्रवाई कर रही है। कांग्रेस के आदिवासी विधायक नीलेश उइके पर इस तरह का दबाव डाला गया, लेकिन वे इसके आगे नहीं झुके तो उनके ऊपर छापे डाले गए। उनके आवास, निर्माणाधीन भवन, खेत खलिहान और अन्य स्थानों पर जिस तरह से छापेमारी की कार्रवाई की गई और घंटों तक तलाशी के बाद कुछ नहीं मिला, उससे स्पष्ट है कि भारतीय जनता पार्टी प्रशासन का दुरुपयोग कर कांग्रेस नेता और कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न कर रही है। मैं इस तरह की कार्रवाई की कड़ी निंदा करता हूँ और पार्टी के सभी कार्यकर्ता नीलेश उइके साथ हैं।उन्होंने कहा कि मैं पार्टी के कार्यकर्ताओं का आह्वान करता हूं कि इस तरह के दमन और उत्पीड़न से भयभीत न हों और पूरी तरह एकजुट होकर जनता के सामने जाएं। छिंदवाड़ा की जनता इस तरह के अत्याचार को बर्दाश्त नहीं करेगी। मुझे आशा ही नहीं, पूर्ण विश्वास है कि जीत सत्य की ही होगी।

मंडी सीट से कंगना रनौत को टक्कर देंगे विक्रमादित्य सिंह

Vikramaditya Singh will contest against Kangana Ranaut from Mandi seat शिमला । प्रतिभा सिंह ने कहा है कि पार्टी हाईकमान इस सीट से किसी बुवा को उतरना चाहती है। ऐसे में विक्रमादित्य सिंह का नाम आगे किया गया है। जल्द इसकी आधिकारिक घोषणा भी कर दी जाएगी। हिमाचल की मंडी लोकसभा सीट से कांग्रेस विक्रमादित्य सिंह को टिकट देने जा रही है। इस बात का ऐलान उनकी मां और मंडी सीट से मौजूदा सांसद प्रतिभा सिंह ने किया है। उन्होंने कहा है कि पार्टी हाईकमान इस सीट से किसी युवा को उतरना चाहती है। ऐसे में विक्रमादित्य सिंह का नाम आगे किया गया है। जल्द इसकी आधिकारिक घोषणा भी कर दी जाएगी। प्रतिभा सिंह से हिमाचल की सीटों पर उम्मीदवार को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने बताया कि इसके लिए 2-3 नाम शॉर्ट लिस्ट किए गए हैं। अब ये पार्टी आलाकमान पर निर्भर करता है कि वह किसे चुनते हैं। वही मंडी सीट के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि सभी नेता ये मानते हैं कि इस बार पार्टी को किसी युवा नेता को यहां टिकट देना चाहिए। ऐसे में विक्रमादित्य सिंह के नाम पर सहमति बनी है। सभी नामों का आधिकारिक ऐलान जल्द कर दिया जाएगा। इससे पहले हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भी इस बात के संकेत दे चुके हैं कि पार्टी इस बार मंडी से विक्रमादित्य को मौका दे सकती है। उन्होंने कहा है कि मंडी से इस बार कोई युवा नेता ही चुनावी मैदान में उतरेगा ये तय है। बता दें, बीजेपी ने इस सीट से बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत को उम्मीदवार बनाया है। इसके बाद से ही ये सीट लगातार चर्चा में बनी हुई है। पिछले कुछ दिनों से विक्रमादित्य सिंह और कंगना रनौत के बीच जुबानी जंग भी काफी तेज होती नजर आ रही है जिसके बाद से ही अटकलों का बाजार गर्म है। राज्यसभा चुनाव के बाद से बढ़े तनाव को कम करने की कोशिश विक्रमादित्य सिंह को मंडी से उम्मीदवार बनाने की एक बड़ी वजह ये भी मानी जा रही है कि पार्टी आलाकमान इस एक कदम के जरिए राज्यसभा चुनाव के बाद पार्टी के भीतर बढ़े तनाव औ गुटबाजी को कम करना चाहती है। इस राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के 6 बागी विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी जिससे बीजेपी उम्मीदवार को जीत हासिल हुई थी। फिलहाल ये 6 बागी विधायक बीजेपी में शामिल हो गए हैं और इन 6 सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए भी बीजेपी ने इन नेताओं को ही उम्मीदवार बनाया है। विक्रमादित्य सिंह ने दिया था इस्तीफा राज्यसभा चुनाव के बाद विक्रमादित्य सिंह ने भी मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने इस्तीफा देते हुए उनके खेमे के विधायकों की अनदेखी का आरोप लगाया था। इसके साथ उन्होंने ये भी कहा था कि पूरा चुनाव उनके पिता वीरभद्र सिंह के नाम पर हुआ लेकिन भारी मन के साथ कहना पड़ रहा है कि जिस व्यक्ति की वजह से हिमाचल में कांग्रेस की सरकार बनी उसकी मूर्ती लगाने के लिए ही शिमला मॉल रोड मपर जमीन नहीं मिली।

70 करोड़ लोगों के पास जितना धन, उतना हिंदुस्तान में 22 लोगों के पास संपत्ति : राहुल गांधी

22 people in India have as much wealth as 70 crore people: Rahul Gandhi बस्तर में जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, लाखों लोग कोरोना के कारण मरे। हर प्रदेश से गरीब लोग घर वापस लौटे। दिल्ली (केंद्र) की सरकार ने कोई मदद नहीं की, किसी की भी मदद नहीं की। नपं मुख्यालय के लालबहादुर शास्त्री स्टेडियम में दोपहर 12 बजे से कार्यक्रम 15 हजार की आबादी वाले बस्तर को 2008 में मिला नगर पंचायत का दर्जा कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी भी एक साल पहले 13 अप्रैल को बस्तर दौरे पर आई थीं छत्‍तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव के पहले चरण में सिर्फ बस्‍तर लोकसभा सीट पर चुनाव हो रहा है। यहां कांग्रेस ने पूर्व मंत्री कवासी लखमा को प्रत्‍याशी बनाता है। लखमा के समर्थन में ही शनिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की दंतेवाड़ा जिले के गीदम में सभा का आयोजन हुआ। सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पीएम मोदी की सरकार पर जमकर आरोप लगाए। साथ ही कांग्रेस की सरकार बनने पर जनता के लिए कांग्रेस के वादों को याद दिलाया। उन्‍होंने अपने भाषण में कहा, लाखों लोग कोरोना के कारण मरे। हर प्रदेश से गरीब लोग घर वापस लौटे। दिल्ली (केंद्र) की सरकार ने कोई मदद नहीं की, किसी की भी मदद नहीं की। पूरा का पूरा फायदा 2-3 अरबपतियों को दे देते हैं। हिंदुस्तान में 22 लोग हैं जिनके पास उतना ही धन है जितना 70 करोड़ हिंदुस्तानी लोगों के पास है। पीएम मोदी 24 घंटा इन 22-25 लोगों की मदद करते रहते हैं। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, हिंदुस्तान के सब बेरोज़गार युवाओं को सरकार ये अधिकार देगी कि एक साल के लिए निजी कंपनी में, PSUs में, सरकारी कार्यालयों में हिंदुस्तान के बेरोज़गार युवाओं को एक साल की नौकरी मिलेगी जिसमें उनका प्रशिक्षण होगा और 1 साल में उनके बैंक अकाउंट में 1 लाख रुपये दिए जाएंगे। अगर उन्होंने अच्छा काम किया तो उन्हीं संस्थाओं में उन्हें पक्की नौकरी मिलेगी। चुनावी सभा में राहुल गांधी ने बस्‍तर के विकास के लिए लोगों से कांग्रेस प्रत्‍याशी कवासी लखमा को वोट देने की अपील की। कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा, बस्तर में कांग्रेस हमेशा से मज़बूत रही है। भाजपा नेता 10 साल में उन्होंने क्या किया उसपर चर्चा नहीं कर रहे। उनका चुनाव प्रचार भी मुद्दों से हटकर जज़्बाती मुद्दों पर, धर्म, मंदिर-मस्जिद पर केंद्रित है। हम छत्तीसगढ़ की सभी 11 सीटों पर अच्छा प्रदर्शन करेंगे। सभा के एक दिन पहले शुक्रवार शाम को पार्टी के छत्तीसगढ़ प्रभारी सचिन पायलट, पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज, लोकसभा चुनाव संचालन समिति के संयोजक व बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल के साथ बस्तर पहुंचे और सभा स्थल में तैयारियों का अवलोकन किया। बस्तर को 2008 में मिला नगर पंचायत का दर्जाबस्तर जिले का मुख्यालय जगदलपुर है तो बस्तर से 18 किलोमीटर दूर है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित बस्तर आजादी से पहले रियासतकालीन राजधानी रही थी। लगभग 15 हजार की आबादी वाले बस्तर को 2008 में नगर पंचायत का दर्जा मिला था। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों आठ अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चुनावी जनसभा भी इसी बस्तर विकासखंड के ग्राम छोटे आमाबाल में हुई थी। बस्तर से लगभग 20 किलोमीटर दूर है। कांग्रेस ने भी राहुल गांधी की चुनावी जनसभा के लिए इसी विकासखंड को चुना है। निरीक्षण के दौरान धनेन्द्र साहू, मोहन मरकाम, राजमन बेंजाम, मलकीत सिंह, मिथलेश आदि भी उपस्थित थे। प्रियंका भी इसी दिन आई थींराहुल गांधी की बहन कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी भी एक साल पहले 13 अप्रैल को बस्तर दौरे पर आई थीं। वह जगदलपुर में आयोजित कांग्रेस के भरोसे के सम्मेलन में शामिल हुई थीं। प्रियंका गांधी के दौरे के ठीक साल भर बाद इसी तारीख को बस्तर दौरे पर आ रहे हैं।

छिंदवाड़ा में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की जन सभा

Public meeting of BJP National President JP Nadda in Chhindwara लोकसभा चुनाव 2024 : छिंदवाड़ा से बंटी विवेक साहू को चुनाव मैदान में उतारा है। छिंदवाड़ा। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा शुक्रवार को सीधी व छिंदवाड़ा में भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में चुनावी सभा करेंगे। छिंदवाड़ा के दशहरा मैदान में संबोधित कर रहे हैं। छिंदवाड़ा से बंटी विवेक साहू को चुनाव मैदान में उतारा है।

लोकसभा चुनाव 2024 : ग्राउंड रिपोर्ट: राजगढ़ लोकसभा

Lok Sabha Elections 2024 : Ground Report : Rajgarh Lok Sabha भोपाल। भाजपा के रोडमल नागर ने 2019 के लोकसभा चुनाव में उस स्थिति में सवा 4 लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी, जब 2018 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को सिर्फ 2 विधानसभा सीटें मिली थी। चार माह पहले 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 8 में से 6 विधानसभा सीटें जीती हैं फिर भी रोडमल पिछली जैसी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। जबकि पिछली बार की तुलना में भाजपा के पक्ष में ज्यादा माहौल है। वजह कांग्रेस की ओर से दिग्विजय सिंह का मैदान में होना है। राजगढ़ दिग्विजय का गृह क्षेत्र है। वे यहां से 1991 में भाजपा के स्व प्यारेलाल खंडेलवाल को हराकर सांसद बने थे। इसके बाद लगातार 10 साल तक वे प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। दिग्विजय को अच्छा राजनीतिक प्रबंधक माना जाता है। पुराने संबंधों को ताजा करने के लिए उन्होंने हर विधानसभा क्षेत्र में पदयात्रा की। इस दौरान वे हर दिन 20 किमी चले और जिस गांव में रात हो गई, वहीं डेरा डाल दिया। अपने पुराने मित्रों, परिचितों के परिजनों से संबंध ताजा किए। गांव के लोगों ने सामूहिक कलेक्शन कर भोजन की व्यवस्था की। दिग्विजय और उनकी पत्नी अमृता राय ने आईटी सेल को एक्टिव कर दिया है। एक अभियान ज्यादा नामांकन भराने का भी चल रहा है ताकि ईवीएम की बजाय मत पत्रों के जरिए मतदान हो। विधायक बेटे जयवर्धन सिंह ने राघौगढ़ और चाचौड़ा में डेरा डाल रखा है। दिग्विजय के समर्थन में समूची कांग्रेस एकजुट है, बस उनके अनुज लक्ष्मण सिंह प्रचार अभियान से दूरी बनाए दिख रहे हैं। दूसरी तरफ भाजपा भी शांत नहीं है। उसका फोकस विधानसभा सम्मेलनों और बूथ मैनेजमेंट में ज्यादा है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव सहित कई नेता इनमें हिस्सा ले चुके हैं। भाजपा की ओर से तीसरी बार चुनाव लड़ रहे रोडमल के खिलाफ एंटी इन्कम्बैंसी देखने को मिल रही है। पार्टी के अंदर और बाहर उनसे नाराजगी भी है। इसके लिए वे कई बार माफी मांग चुके हैं। चूंकि दिग्विजय सिंह चुनाव लड़ रहे हैं, इसलिए भाजपा के साथ संघ, बजरंग दल और विहिप सहित सभी संगठन उनके खिलाफ एकजुट हैं। राजगढ़ में दिग्विजय का चुनाव लड़ना ही मुद्दाराजगढ़ लोकसभा सीट में दिग्विजय सिंह चुनाव लड़ रहे हैं, इसलिए भाजपा और कांग्रेस के लिए वे खुद मुद्दा हैं। उनकी वजह से ही कांग्रेस एकजुट है। दूसरी तरफ समूचा संघ अपने अनुषांगिक संगठनों के साथ मैदान में उतर गया है। दिग्विजय के कारण राजगढ़ में राम मंदिर, हिंदू-मुस्लिम, मंदिर-मस्जिद के मुद्दे को सबसे ज्यादा हवा दी जा रही है। आखिर, दिग्वजय को कहना पड़ा कि राम मंदिर के लिए उन्होंने शिवराज सिंह चौहान से भी ज्यादा चंदा दिया है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की प्रतिक्रिया थी कि वे अपना चंदा वापस ले लें। इसके अलावा भाजपा केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा कराए गए काम गिना रही है तो दिग्विजय अपने कार्यकाल में कराए काम बता रहे हैं। भाजपा सरकार की गलत नीतियों के कारण बढ़ी महंगाई और बेरोजगारी को मुद्दा बना रहे हैं। यह भी बता रहे हैं कि देश में तानाशाही है और जांच एजेंसिया भाजपा का एजेंट बनकर काम कर रही हैं। 8 में से 6 विधानसभा सीटों में भाजपा का कब्जाविधानसभा में ताकत के लिहाज से भाजपा को अच्छी बढ़त है। पार्टी का क्षेत्र की 8 विधानसभा सीटों में से 6 पर कब्जा है। ये विधानसभा सीटें चाचौड़ा, नरसिंहगढ़, ब्यावरा, राजगढ़, खिलचीपुर और सारंगपुर हैं। कांग्रेस सिर्फ दो विधानसभा सीटों राघौगढ़ और सुसनेर में ही जीत दर्ज कर सकी थी। 2018 के विधानसभा चुनाव में स्थिति इसके उलट थी। तब कांग्रेस ने 5 और भाजपा ने 2 सीटें जीती थीं। एक सीट निर्दलीय के खाते में गई थी। इसके बाद हुए 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 4 लाख 31 हजार से ज्यादा वोटों से चुनाव जीता था। इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 6 सीटें 1 लाख 78 हजार 967 वोटों के अंतर से जीती हैं जबकि कांग्रेेस का दो सीटों में जीत का अंतर महज 17 हजार 150 है। इस लिहाज से इस बार भी भाजपा की जीत बड़ी होना चाहिए लेकिन मुकाबला देखकर ऐसा लगता नहीं है। दिग्विजय द्वारा भाजपा को कड़ी टक्कर मिल रही है। तीन जिलों को मिलाकर बना गुना लोकसभा क्षेत्रप्रदेश की राजगढ़ लोकसभा सीट का भौगोलिक एरिया तीन जिलों तक फैला है। इसके तहत तीन अंचल भी आ आते हैं। इसमें गुना जिले की दो विधानसभा सीटें चाचौड़ा और राघौगढ़ हैं। गुना को ग्वालियर अंचल का हिस्सा माना जाता है। राजगढ़ जिले की 5 विधानसभा सीटें नरसिंहगढ़, ब्यावरा, राजगढ़, खिलचीपुर और सारंगपुर हैं। यह मध्य भारत अंचल का हिस्सा है। सातवीं विधानसभा सीट सुसनेर आगर मालवा जिले की है जो मालवा अंचल के तहत आती है। राजगढ़ में विधानसभा में ताकत के लिहाज से भले भाजपा बढ़त में है। पिछले दो लोकसभा चुनाव भाजपा के रोडमल नागर ने जीते भी हैं, लेकिन इस सीट का मिजाज भाजपाई नहीं है। 1991 में यहां कांग्रेस के दिग्विजय सिंह जीते तो 1996, 1998 और 1999 में लगातार दिग्विजय के अनुज लक्ष्मण सिंह ने कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की। इसके बाद लक्ष्मण भाजपा में शामिल हो गए और 2004 का लोकसभा चुनाव भाजपा के  टिकट पर जीते। लेकिन 2009 में कांग्रेस के नारायण सिंह अमलावे ने उन्हें हरा दिया। इसके बाद भाजपा ने लक्ष्मण सिंह का टिकट काट दिया तो वे फिर कांग्रेस में शामिल हो गए। समाजों को देखकर तैनात किए जा रहे नेतालोकसभा चुनाव में आमतौर पर राजगढ़ क्षेत्र में जातिगत आधार पर मतदान नहीं होता। बावजूद इसके भाजपा और कांग्रेस द्वारा समाजों की बहुलता को देखकर नेताओं को प्रचार के लिए तैनात किया जा रहा है। क्षेत्र में सबसे ज्यादा मतदाता सोंधिया, दांगी और गुर्जर समाज के हैं। इसके बाद ब्राह्मण, यादव और मीना समाज आते हैं। अनुसूचित जाति-जनजाति के मतदाताओं की तादाद भी कम नहीं है। भाजपा के पास हर प्रमुख जाति के विधायक जीत कर आए हैं। उन्होंने मोर्चा संभाल रखा है। कांग्रेस के नेता भले विधायक नहीं हैं लेकिन जातिगत आधार पर उन्हें भी मैदान में उतार रखा गया है। ब्राह्मण मतदाताओं का रुझान भाजपा की ओर है और अजा-जजा वर्ग का कांग्रेस की ओर। शेष सभी जातियां भाजपा- कांग्रेस के … Read more

सांसद विवेक तन्खा ने कहा, देश में मानवीय अधिकारों का हनन हो रहा है, यह तानाशाही है, मैं ऐसे प्रजातंत्र में नहीं रहना चाहता

MP Vivek Tankha said, human rights are being violated in the country, this is a dictatorship, I do not want to live in such a democracy. भोपाल। कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने कहा कि देश में मानवीय अधिकारों का हनन हो रहा है। यह तानाशाही है। मैं ऐसे प्रजातंत्र में नहीं रहना चाहता। उन्होंने कहा कि संवैधानिक न्याय को लेकर मैं खुद पीड़ित हूं। संसद में जिस प्रकार से कानून बना रहे हैं, वह प्रजातांत्रिक नहीं है। छोटी-छोटी बातों को लेकर (संभवत: राज्यसभा के सभापति) खफा हो जाते हैं। संसद नियम से नहीं चलता है। यह बात वाइस प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर भी कहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को जगह नहीं दिया जाता है, न हीं बोलने का मौका दिया जाता है, न ही विरोध करने का मौका दिया जाता है। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आज मंगलवार को राज्यसभा सांसद समेत कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह समेत अन्य नेताओं ने एक साथ प्रेस कांफ्रेंस कर रहे थे। इसी दौरान सांसद तन्खा ने भी यह बातें कही। उन्होंने कहा कि 100 दिन सदन चलाने का नियम है, लेकिन विपक्ष को मौका रखने का नहीं ही मिलता। विपक्ष के बोलने पर सांसदों को निलंबित किया जाता है। वाइस प्रेसिडेंट ऑफ़ इंडिया को पत्र लिखा था। उसके सुझाव कांग्रेस पार्टी ने अपने न्याय पत्र में रखे हैं। हफ्ते में एक दिन विपक्ष को बोलने का मौका लोकसभा या सदन में दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की बात कि जाए तो 3 करोड़ केस पेंडिंग हैं। गरीबों को न्याय नहीं मिल पाता जजों की कमी है। भाजपा इसलिए खुश है कि न्यायपालिका में न्याय की जगह बेल ना मिले। स्थिति यह है कि सुप्रीम कोर्ट में बेल के केस जाने लगे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने संजय सिंह को बेल दी थी अब अरविंद केजरीवाल भी सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। सांसद तन्खा ने कहा कि देश में ऐसे लोगों को जज बनना चाहिए, जो निष्पक्ष होना चाहिए। ईमानदार और निष्पक्ष जज का नाम भेज दो तो उसका नाम रोक दिया जाता है। इनकम टैक्स, ईडी, सीबीआई के लाॅ में संशोधन करने की जरूरत है। कांग्रेस के साथ भी यही हुआ। कांग्रेस पार्टी को अपील के लिए जाने पर पूरा पैसा जमा करने के लिए कहा जाता है, जबकि 20 से 30 % जमा कर खाते को फ्रिज से हटाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट जाने के बाद इनकम टैक्स 3,560 करोड़ के टैक्स के मामले को रिलैक्सेशन देती है। उन्होनंे कहा कि टैक्स भरने के लिए एनजीओ और अन्य लोगों को समय दिया, लेकिन कांग्रेस को समय नहीं दिया गया। जबकि 31 मार्च तक रिटर्न भरने का समय था। तन्खा ने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों को डरा धमका की कॉलर पकड़ के बाहर निकाला जा रहा हैं। लोकतात्रिक संस्थान को बचाने के लिए संस्थाओं को भी क्योर करना पड़ेगा।

लोकसभा चुनाव 2024: ग्राउंड रिपोर्ट ग्वालियर संसदीय क्षेत्र से, सहारा समाचार टीम

Lok Sabha Elections 2024: Ground report from Gwalior parliamentary constituency, Sahara News Team ग्वालियर। ग्वालियर की लोकसभा सीट शुरू से ही काफी अहम रही है, क्योंकि विजयाराजे सिंधिया सहित राजघराने का हर सदस्य राजनीति से जुड़ा रहा। पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने भी अपनी राजनीतिक करियर की शुरुआत यहीं से की थी। कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार की घोषणा अभी हाल ही में की है, जबकि भाजपा पहले ही कर चुकी थी, लेकिन खास बात यह है कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने ही ऐसे उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, जो हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में हार चुके हैं। भाजपा ने भारत सिंह कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया है। उन्हें विवेक नारायण शेजवलकर के स्थान पर मैदान में उतारा गया है। भारत सिंह कुशवाहा अभी हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में ग्वालियर ग्रामीण से चुनाव हारे थे। दूसरी तरफ कांग्रेस ने प्रवीण पाठक को उम्मीदवार बनाया है, जो विधानसभा चुनाव में ग्वालियर दक्षिण से पराजित हुए थे। दोनों उम्मीदवार पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा की कुशवाह समाज के साढ़े तीन लाख वोटरों पर नजर है। वहीं वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के करीबी होने का भी लाभ भारत सिंह कुशवाहा को मिला है। जबकि कांग्रेस ने प्रवीण पाठक को उम्मीदवार बनाकर शहर के वोटरों को साधने की कोशिश की है। क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र से कांग्रेस को विश्वास है कि विधानसभा चुनाव जीत दिलाने वाले लोकसभा में भी सहयोग करेंगे। इसलिए भाजपा को है जीत की उम्मीदग्वालियर लोकसभा क्षेत्र में सिंधिया परिवार के अलावा ठाकुर क्षत्रिय वोटर की अहम भूमिका रही है और 19 लोकसभा चुनाव में से सिंधिया परिवार के सदस्यों ने 8 बार जीत दर्ज की है। जबकि इसमें भी ठाकुर क्षत्रिय वोटर ने सहयोग किया है। इस बार भी ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में हैं और नरेंद्र सिंह तोमर के समर्थक को ही उम्मीदवार बनाया गया हैं। यहां से माधवराव सिंधिया कांग्रेस और मध्य प्रदेश विकास कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर पांच बार निर्वाचित हुए, जबकि भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर यशोधरा राजे सिंधिया दो बार यहां से निर्वाचित हुईं। इसके अलावा विजयाराजे सिंधिया भी एक बार यहां से चुनाव जीती हैं। कांग्रेस ने अंतिम बार 2004 में जीत दर्ज की थी। जब रामसेवक सिंह निर्वाचित हुए थे। यह बात अलग है कि सवाल पूछने के बदले पैसे लेने के आरोप में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था लोकसभा चुनाव में दोनों नए चहरेलोकसभा चुनाव की दृष्टि से देखा जाए तो इस बार कांग्रेस व भाजपा दोनों ने ही नए चेहरे मैदान में उतारे हैं। दोनों के समीकरण भी एक समान हैं। क्योंकि विधानसभा चुनाव हारने के तुरंत बाद ही दोनों अपने लिए लोकसभा के लिए वोट मांग रहे हैं। भारत सिंह कुशवाहा राममंदिर और हमारा परिवार मोदी परिवार को लेकर आगे चल रहे हैं। वहीं प्रवीण पाठक लोकतंत्र बचाओ के साथ ही राहुल गांधी की यात्राओं में उठाए गए मुद्दों का वोटर के सामने रख रहे हैं। जातीय समीकरणभाजपा ने ग्वालियर में अपनी जीत के लिए जातिगत समीकरण पर दांव खेला है। इस संसदीय क्षेत्र से पूर्व मंत्री भारत सिंह कुशवाह को अपना उम्मीद्वार बनाया है। तकरीबन साढ़े तीन लाख कुशवाह वोटर के सहारे भाजपा जनाधार मजबूत करेगी। जबकि कांग्रेस ब्राह्मण व क्षत्रिय के गणित लेकर चल रही है। प्रवीण पाठक का मानना है कि 19.59 प्रतिशत अनुसूचित जाति और 5.5 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के वोटर हैं, जिनका कांग्रेस पर पूरा भरोसा है। जबकि ब्राह्मण समाज के 18 प्रतिशत से ज्यादा वोटर पर भी उन्हें पूरा विश्वास है। वहीं 25 प्रतिशत से ज्यादा पिछड़ा वर्ग भी कांग्रेस का समर्थन देगा। क्योंकि इसका प्रभाव विधानसभा चुनावो में देखने को मिला है। इस जातीय समीकरण के कारण ही भाजपा के द्वारा पूरी ताकत लगाने के बाद भी आधी सीटें विधानसभा की तीने में सफलता मिली थी। ग्वालियर संसदीय सीट में 8 विधानसभाग्वालियर संसदीय क्षेत्र में आने वाली आठ विधानसभाओं में से कांग्रेस व भाजपा के पास चार-चार विधायक हैं। यदि विधानसभा चुनाव का ट्रेंड रहता है तो भाजपा व कांग्रेस के बीच मुकाबला काफी कड़ा होगा और हार जीत का अंतर बड़ा नहीं होगा। इस क्षेत्र में विधानसभा चुनाव में भाजपा को 6 लाख 96 हजार 246 वोट मिले हैं, जबकि कांग्रेस को 6 लाख 82 हजार 233 वोट मिले हैं। इस हिसाब से मुकाबला कड़ा है। इसके अनुसार भाजपा को 14 हजार 13 वोट ही अधिक मिले हैं। ग्रामीण क्षेत्र की तीन सीटें कांग्रेस के पास हैं, जबकि भाजपा के पास दो सीट हैं। कांग्रेस ग्रामीण क्षेत्र में ज्यादा मजबूत है। वोट भी अधिक मिला है, लेकिन शहरी मतदाताओं के बीच भाजपा मजबूत है। शहर में तीन सीटे हैं, जिनमें कांग्रेस के पास एक सीट है। पोहरी विधानसभा में कांग्रेस प्रत्याशी ने 49 हजार 481 वोट से भाजपा के मंत्री को हराया था। जबकि भाजपा भितरवार और ग्वालियर विधानसभा में मजबूत है। इन विधानसभा को भाजपा ने बड़े अंतर से जीता था। डबरा, ग्वालियर दक्षिण व करैरा में मुकाबले करीबी रहे हैं। ग्वालियर संसदीय चुनाव में मुद्देइस संसदीय सीट की खास बात यह रही है कि यहां विकास के कोई मुद्दे नहीं रहे हैं। चाहे माधव राव सिंधिया ने विकास के नाम पर वोट मांगे हों। उस समय व्यक्ति के चेहरे पर लोगों ने वोट दिया था। क्योंकि मुद्दे विधानसभा चुनावो में ही इतने उठ जाते हैं कि लोकसभा में लोग सिर्फ चेहरे देखते हैं। यहां ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के मुद्दे को लेकर ही वोटिंग होती रही है। इस बार प्रवीण पाठक शहर से और भारत सिंह कुशवाह ग्रामीण क्षेत्र से आते हैं। भाजपा हमेशा शहरी क्षेत्र से उम्मीदवार बनाती रही है और लगातार जीतती रही है। इस बार ग्रामीण क्षेत्र से भाजपा ने और शहरी क्षेत्र से कांग्रेस ने टिकिट दिया। यही सबसे बड़ा मुद्दा रहेगा, लेकिन यह मुद्दा कितना कारगर रहेगा यह तो चुनाव बाद ही मालुम होगा। क्योंकि माहौल इस समय भाजपा के पक्ष में है।

लोकतंत्र को नोटतंत्र के जरिए खरीदना चाह रहे नकुलनाथ : विजयवर्गीय

Nakulnath wants to buy democracy through demonetization: Vijayvargiya भोपाल। कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं का चरित्र ही रहा है कि वह जनमत पर भरोसा नहीं करते। यही कार्य छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस और कांग्रेस के लोकसभा प्रत्याशी नकुलनाथ कर रहे हैं। कांग्रेस छिंदवाड़ा में लोकतंत्र को नोटतंत्र के जरिए खरीदने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस सोचती है अब भी बांटो और राज करो चलेगा। कांग्रेस ने पहले देश बांटकर राज किया, अब छिंदवाड़ा को अपना गढ़ समझने वाले नकुलनाथ पैसा बांटकर राज करना चाहते हैं। मतदाता भगवान है और भगवान को खरीदने की सोचने वाली कांग्रेस रंगे हाथ पकड़ी गई है। यह बात प्रदेश शासन के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने छिंदवाड़ा में जिला कांग्रेस महामंत्री गिरीश साहू के बिसापुर गांव में रूपए बांटते पकड़े जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कही। विजयवर्गीय ने कहा कि न्याय-पत्र के झूठे वादे चले नहीं तो सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेता पैसों से बोली लगाकर लोकतंत्र के भगवान को खरीदने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं। भाजपा इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग पहुंचकर शिकायत दर्ज करायेगी और कांग्रेस और नकुलनाथ के ठिकानों की जांच करने की मांग करेगी। कांग्रेस का लोकतंत्र पर विश्वास ही नहीं: मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि कांग्रेस पार्टी धनबल के आधार पर चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है। नोट बांटने का खुलासा होने से यह सिद्ध हो गया है कि कांग्रेस ने अपनी हार स्वीकार कर ली है और वह लोगों को पैसों का लालच देकर खरीदने में जुटी है। कांग्रेस का लोकतंत्र पर विश्वास ही नहीं है। कांग्रेस पार्टी पहले नोट देकर वोट खरीदने का प्रयास करती है, जब चुनाव हार जाती है तो ईवीएम पर ठीकरा फोड़ती है।

‘मोदी आराम करने के लिए नहीं पैदा हुआ…’; पीएम ने करौली में कांग्रेस पर किया करारा वार

‘Modi was not born to rest…’; PM attacks Congress in Karauli राहुल गांधी की बीकानेर में सभा के बाद करौली-धौलपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा हुई। इसमें मोदी ने ईआरसीपी, किसान सम्मान निधि सहित अन्य योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ईआरसीपी का बड़ा लाभ करौली-धौलपुर को भी मिलेगा। यह इसलिए हल हुआ, क्योंकि हरियाणा में भी हमारी सरकार है और केंद्र में भी हम बैठे हैं। राजस्थान में लोकसभा चुनावों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को करौली-धौलपुर लोकसभा पहुंचे। बीजेपी ने यहां इंदू देवी जाटव को अपना प्रत्याशी बनाया है। उन्होंने कहा कि मैं गुजरात से आता हूं, पानी की दिक्कतों को भली भांति समझता हूं। हम हाथ जोड़कर बैठे नहीं रहते। मोदी बोले, कांग्रेस ने पानी में पैसा कमाने का काम किया। बीजेपी ने उसे जवाबदेही मानकर पूरा किया। मोदी ने कहा कि आने वाले सम में यहां घर-घर पानी पहुंचेगा, यह मोदी की गारंटी है। कांग्रेस ने नौकरियों में भी लूट के मौके तलाशे। कांग्रेस के राज में पेपर लीक इंडस्ट्री तैयार हो गई। मोदी ने गारंटी दी कि मोदी की सरकार आएगी तो पेपर लीक माफिया जेल जाएंगे। मोदी ने पूछा कि बताइए कि मोदी की गारंटी पूरी हो रही है कि नहीं। पीएम मोदी ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि मोदी आराम करने के लिए नहीं पैदा हुआ है। मैं काम करने के लिए पैदा हुआ हूं। पीएम मोदी ने इंडी अलायंस पर हमला बोलते हुए कहा कि ये लोग मोदी को कितनी गालियां दे दें, लेकिन जिन्होंने भ्रष्टाचार किया है उन्हें जेल जाना ही पड़ेगा। यह मोदी की गारंटी है। मोदी ने का कहा कि करौली-धौलपुर की यह धरती भक्ति और शक्ति की धरती है। यह उस बृज का क्षेत्र है, जहां की रज भी सर पर धारण करते हैं। यहां आपका यह आर्शीवाद देश के लिए बड़ा संदेश है। चार जून को क्या परिणाम होगा, वह आज करौली में स्पष्ट दिख रहा है। करौली बता रहा है, चार जून 400 पार। पूरा राजस्थान कह रहा है…फिर एक बार मोदी सरकार। 2024 का लोकसभा चुनाव, कौन सांसद बनेगा या कौन नहीं बन सकता है, इसके लिए नहीं है। यह चुनाव विकसित भारत को नई ऊर्जा देने का चुनाव है। समस्याओं के आगे कांग्रेस ने हाथ खड़े कर दिए। कांग्रेस दशकों को तक गरीबी हटाओ का नारा देती रही, लेकिन मोदी ने 10 साल में 25 करोड़ लोगों को गरीबी की रेखा से बाहर निकालने का काम किया है। पीएम ने इन योजनाओं का किया जिक्रपीएम मोदी ने किसान सम्मान निधि का जिक्र करते हुए कहा कि करौली-धौलपुर के सवा तीन लाख किसानों के खातों में 700 करोड़ रुपये से अधिक भेजे गए हैं। करौली में 80 हजार से ज्यादा किसानों को पशुओं के लिए डेढ़ लाख से ज्यादा टीके मुफ्त टीके उपलब्ध करवाए हैं। राजस्थान में मोटा अनाज होता है। पहले मोटा अनाज पैदा करने वाले किसानों को कोई पूछता नहीं था। हमने दुनिया को बताया कि हमारा मोटा अनाज सुपर फूड है। आज वही मोटा अनाज श्री अन्न के रूप में जाना जा रहा है। पिछले वर्ष अमेरिका में व्हाइट हाऊस में मुझे निमंत्रण मिला। वहां भोज में सब कुछ वेजिटेरियन था और वहां हमारा मोटा अनाज भी था। इससे राजस्थान के किसानों को बहुत बड़ा लाभ होने जा रहा है। एनडीए सरकार की तमाम योजनाओं का जिक्र किया, जिसमें पक्के घर, शौचालय और उज्ज्वला सिलेंडर की बात कही। उन्होंने कहा कि अब हम देश में तीन करोड़ लखपति दीदी बनाने का काम कर रहे हैं। मोदी ने पूछा कि यह काम पहले होने चाहिए थे कि नहीं होने चाहिए थे।

मंडला में बोले अमित शाह- रामनवमी को 500 वर्ष बाद रामलला अपने घर में मनाएंगे जन्मदिन

Amit Shah said in Mandla – After 500 years of Ram Navami, Ram Lalla will celebrate his birthday in his home. मध्य प्रदेश के मंडला में परिवारवाद, आदिवासी कल्याण, गरीबी उन्मूलन, केंद्र की योजनाओं से बदलती भारत की तस्वीर जैसे विषयों पर केंद्रित रहा भाषण। मंडला। मध्य प्रदेश के आदिवासी अंचल मंडला में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि इस रामनवमी को पांच सौ वर्षों बाद श्रीरामलला अपने घर में जन्मदिन मनाएंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण कार्य को 55 वर्षों तक लटकाती रही, लेकिन हमारे मोदी जी रामलला को उनके घर ले आए। शाह ने आदिवासी विकास, सरकारी योजनाओं से मिल रहे लाभ, विपक्षी गठबंधन की परिवारवाद की राजनीति तथा पीएम मोदी के विकसित भारत की परिकल्पना आदि विषयों पर अपना भाषण केंद्रित रखा। शाह ने कहा कि हमारी सरकार ने डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड के एक लाख करोड़ रुपये उन जिलों में खर्च किए जहां खदानें हैं। आदिवासी अंचलों में इस राशि से केंद्र सरकार ने विकास कार्य किए जबकि विपक्ष की सरकारों ने देश के पैसे को डायनेस्टी मैनेजमेंट फंड बना दिया था। सभा के दौरान शाह ने मंडला से भाजपा के प्रत्याशी व केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते के द्वारा कराए गए विकास कार्यों को गिनाने के बाद कहा कि फग्गन सिंह को इन सब कामों के लिए वोट नहीं देना है। मोदी जी महान भारत की रचना करने वाले हैं, उसके लिए फग्गन सिंह को वोट देना है। इस वाक्य को मंडला के प्रत्याशी ओमकार सिंह मरकाम सहित कई कांग्रेस नेताओं ने इंटरनेट मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर शेयर करते हुए कमेंट किया कि शाह भी फग्गन सिंह को वोट देने से मना कर रहे हैं। 10 वर्ष में 25 करोड़ गरीबों को गरीबी रेखा से बाहर निकालने का काम मोदी जी ने किया।

प्रधानमंत्री ने दावा किया था कि…’, महाकौशल और विंध्य में PM मोदी पर जमकर बरसे जीतू पटवारी

Prime Minister had claimed that…’, Jitu Patwari lashed out at PM Modi in Mahakaushal and Vindhya पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने आदिवासियों से वादा किया कि यदि केंद्र में गठबंधन की सरकार आई तो जिस बच्चे ने ग्रेजुएशन कर लिया है, उसे 8 हजार 500 रुपये हर महीने दिए जाएंगे. मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी (Jitu Patwari) बुधवार (10 अप्रैल) को महाकौशल और विंध्य क्षेत्र के दौरे पर थे. इस दौरान तेज आंधी के बीच पीसीसी चीफ जीतू पटवारी केंद्र और प्रदेश की बीजेपी सरकार पर जमकर बरसे. आमसभा के दौरान जीतू पटवारी ने आदिवासियों से पांच वादे भी किए. इस दौरान वह शिवराज सिंह चौहान पर भी निशाना साधा. उन्होंने आदिवासी समाज की महिलाओं से पूछा कि शिवराज सिंह चौहान ने लाड़ली बहनों से 3000 रुपये का वादा किया था, मिल रहे हैं क्या, जिस पर पंडाल में उपस्थित महिलाएं बोली नहीं मिल रहे हैं. पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने जनसभा के दौरान पंडाल में उपस्थित जनसमूह से कहा कि एक तरफ है कांग्रेस के फुंदेलाल मार्को यहां से चुनाव लड़ रहे हैं. वह यहां यहां से विधायक भी हैं, जो सदैव आपके बीच रहते हैं. दूसरी तरफ हैं बीजेपी की सांसद हिमाद्री, जो यहां से जीतकर गईं तो दूसरी बार नहीं आईं. उन्होंने पूछा कि क्या किसी की मौत-मैयत में बैठने आईं, शादी विवाह में आईं, इस पर लोग बोले नहीं आईं. पटवारी ने पूछा कि सांसद निधि का पांच साल में 50 करोड़ मिलता है, आपके गांव में 4-5 पर लाख का काम तो करा दिया होगा, इसपर लोगों बोले नहीं कराया है. 30 रुपये लीटर पेट्रोल का था वादाजीतू पटवारी ने पूछा तो फिर सांसद आपने बनाया, जब गांव में नहीं आईं, सुख-दुख में नहीं आईं तो उन्हें वोट मिलना चाहिए. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि 2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी ने कहा था कि ‘बहुत हुई महंगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार’, नरेंद्र मोदी ने दावा किया था कि पेट्रोल के दाम 30 रुपये लीटर हो जाएगा. पीएम मोदी ने दो करोड़ नौकरी देने का वादा किया था, क्या आपके बच्चों को नौकरी मिली? 8 हजार 500 देने का वादापीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने वादा किया कि यदि केंद्र में गठबंधन की सरकार आई तो जिस बच्चे ने ग्रेजुएशन कर लिया है, उसे 8 हजार 500 रुपये हर महीने दिए जाएंगे. इसके साथ ही महिलाओं के खाते में भी 8 हजार 500 रुपये दिए जाएंगे. जीतू पटवारी ने कहा कि मेरा वीडियो बनाकर रख लेना. जीतू पटवारी ने आगे कहा कि एक साल में 30 लाख नौकरी देंगे. जीतू पटवारी ने शिवराज सिंह चौहान पर तंज कसते हुए कहा कि शिवराज ने झांसा दिया था, जबकि राहुल गांधी सच्ची बात करते हैं.

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