LATEST NEWS

बसंत के मौसम में घूमने जाएं भारत की ये 6 जगहें, लगती हैं अधिक खूबसूरत

Visit these 6 places of India in spring season, they look more beautiful. सर्दियां खत्म होने वाली हैं तो क्यों न बसंत मौसम की छुट्टियों में कहीं घूमने जाया जाए? अगर आप भी ऐसा ही सोच रहे हैं तो भारत की कुछ जगह घूमने के लिए बेस्ट हैं. भारत के अधिकांश जगहों पर सर्दी धीरे-धीरे खत्म होने लगी है और बसंत का मौसम लगभग आने ही वाला है. भारत में सर्दी और गर्मी के बीच के मौसम को बसंत ऋतु कहा जाता है. ऐसे में अक्सर लोग गर्मी का मौसम आने से पहले ही घूमने का प्लान बना लेते हैं क्योंकि बसंत का मौसम अधिक समय तक नहीं रहता.अगर आप भी बसंत के मौसम में घूमने जाना चाहते हैं तो हम आपको कुछ ऐसी जगहें बता रहे हैं जो आपके लिए बेस्ट रहेंगी. इन जगहों में से आप अपने मुताबिक स्थान चुनें कि आप मौसम का लुत्फ उठाने जाना चाहते हैं या फिर खिलते हुए फूलों को देखने जाना चाहते हैं. कश्मीर धरती के स्वर्ग के रूप में फेमस कश्मीर का मौसम बसंत (मार्च से मई की शुरुआत तक) के मौसम में काफी अच्छा रहता है. इस दौरान आप कश्मीर के साथ-साथ श्रीनगर के इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन में खिलते हुए ट्यूलिप आपका दिल जीत लेंगे. मुन्नार (केरल) अपने चाय बागानों और हरी-भरी हरियाली के लिए फेमस, मुन्नार बसंत मौसम के दौरान स्वर्ग में बदल जाता है. इस मौसम में यहां का तापमान 19 डिग्री सेल्सियस से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है. आप यहां पहाड़ों के साथ-साथ हरियाली का मजा ले सकते हैं. शिलांग (मेघालय)  ईस्ट स्कॉटलैंड के रूप में जाना जाने वाला शिलांग बसंत ऋतु में काफी अच्छा रहकता है. जब यहां पर रोडोडेंड्रोन और ऑर्किड फूल खिलते हैं पूरा शहर काफी सुंदर दिखने लगता है. कूर्ग (कर्नाटक)  भारत का स्कॉटलैंड कहा जाने वाला कूर्ग अपने कॉफी बागानों और धुंध भरी पहाड़ियों के लिए फेमस है. बसंत के दौरान यहां की पहाड़ियां कॉफी के फूलों की सुगंध और कॉफी की झाड़ियों को ढंकने वाले सफेद फूलों से काफी अच्छी लगती है. गुलमर्ग (कश्मीर) गुलमर्ग में अप्रैल से जून के आसपास आना चाहिए. यह वो मौसम होता है जब यात्रियों को हरे-भरे घास के मैदान और बर्फ से ढकी हुई पहाड़ियां देखने मिलती हैं. बसंत ऋतु में बर्फ पिघलना शुरू हो जाती है जिससे रंग-बिरंगे फूलों का कालीन बिछा हुआ नजर आता है. ऊटी (तमिलनाडु)  नीलगिरि पहाड़ियों में बसा, ऊटी एक फेमस हिल स्टेशन है जो अपने अच्छे मौसम और राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है. बसंत ऋतु में यहां के वनस्पति उद्यानों में रंग भरती है जिसमें रोडोडेंड्रोन, ऑर्किड और गुलाब जैसे फूल पूरी तरह खिल जाते हैं

सरकार की उपलब्धियों से लेकर विकसित भारत के रोडमैप तक, पढ़ें वित्त मंत्री के संबोधन की बड़ी बातें

From the achievements of the government to the roadmap of developed India, read the important points of the Finance Minister’s address. नई दिल्ली । केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को संसद में अंतरिम बजट पेश किया। इस दौरान बजट भाषण के दौरान उन्होंने बीते 10 वर्षों की सरकार की उपलब्धियां गिनाईं और विकसित भारत के लिए सरकार का रोडमैप भी बताया। आइए जानते हैं उनके भाषण की अहम बातें.. जन कल्याणकारी योजनाएं और विकास के बूते हम लोगों तक पहुंचे उन्होंने कहा कि 10 वर्ष में अर्थव्यवस्था में काफी विकास हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इसने तरक्की की है। जब वे प्रधानमंत्री बने, तब कई चुनौतियां मौजूद थीं। सबका साथ, सबका विकास के मंत्र के साथ सरकार ने इन चुनौतियों का सामना किया। जन कल्याणकारी योजनाएं और विकास के बूते हम लोगों तक पहुंचे। देश को नया उद्देश्य और नई आशा मिली। जनता ने सरकार को फिर बड़े जनादेश के साथ चुना। हमने दोगुनी चुनौतियों को स्वीकार किया और सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के मंत्र के साथ काम किया। हमने सामाजिक और भौगोलिक समावेश के साथ काम किया। ‘सबका प्रयास’ के मंत्र के साथ हमने कोरोना के दौर का सामना किया और अमृतकाल में प्रवेश किया। इसके नतीजतन हमारा युवा देश के पास अब बड़ी आकांक्षाएं, उम्मीदें हैं।80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दिया गयासीतारमण ने कहा कि पिछले 10 साल में हमने सबके लिए आवास, हर घर जल, सबके लिए बैंक खाते जैसे कामों को रिकॉर्ड समय में पूरा किया। 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दिया गया। अन्नदाताओं की उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया गया। पारदर्शिता के साथ संसाधनों का वितरण किया गया है। हम असमानता दूर करने का प्रयास किया है, ताकि सामाजिक परिवर्तन लाया जा सके। प्रधानमंत्री के मुताबिक गरीब, महिलाएं, युवा और अन्नदाता, ये ही चार जातियां हैं, जिन पर हमारा फोकस है। उनकी जरूरतें, उनकी आकांक्षाएं हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं। 25 करोड़ लोगों को विविध तरह की गरीबी से बाहर निकाला उन्होंने कहा कि गरीब का कल्याण, देश का कल्याण, हम इस मंत्र के साथ काम कर रहे हैं। ‘सबका साथ’ के उद्देश्य के साथ हमने 25 करोड़ लोगों को विविध तरह की गरीबी से बाहर निकाला है। भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने के लिए काम कर रहे हैं।बड़ी योजनाओं की प्रभावी तरीके से और स समय पूरा किया जा रहा वित्त मंत्री ने कहा कि लोग अच्छे से रह रहे हैं और अच्छी आमदनी कर रहे हैं। बड़ी योजनाओं की प्रभावी तरीके से और ससमय पूरा किया जा रहा है। जीएसटी ने एक देश, एक मार्केट और एक टैक्स की धारणा को मजबूत किया है। गिफ्टी आईएफएससी ने वैश्विक वित्तीय निवेश का रास्ता खोला है। अमृतकाल अमृतकाल के लिए सरकार ऐसी आर्थिक नीतियों को अपनाएं जो टिकाऊ विकास, सभी के लिए अवसरों, क्षमता विकास पर केंद्रित रहेंगी। रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के साथ हम सुधारों का अगला चरण शुरू करेंगे। समय पर आर्थिक मदद, प्रासंगिक प्रौद्योगिकी, MSME को सशक्त बनाने जैसे पहुलओं पर नई नीतियों के जरिए काम होगा। हम ऊर्जा सुरक्षा पर भी काम करेंगे। तकनीक नई तकनीकों से कारोबार को मदद मिल रही है। लालबहादुर शास्त्री ने जय जवान, जय किसान का नारा दिया था। अटलजी ने जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान का नारा दिया था। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे और विस्तार देते हुए जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान का नारा दिया है। प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दिलचस्पी रखने वालों के लिए यह स्वर्णिम दौर है। एक लाख करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त या कम ब्याज दर पर कोष वितरित किया जाएगा। इससे दीर्घकालिक वित्तीय मदद दी जाएगी। इससे निजी क्षेत्र को मदद मिलेगी। रेलवे तीन रेलवे कॉरिडोर ऊर्जा, खनिज और सीमेंट के लिए बनाए जाएंगे। पीएम गति शक्ति के तहत इनकी पहचान की गई है। इससे लागत कम होगी और सामान की आवाजाही सुगम होगी। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से विकास दर बढ़ाने में मदद मिलेगी। 40 हजार सामान्य बोगियों को वंदे भारत के पैमानों के अनुरूप विकसित किया जाएगा ताकि यात्रियों की सुरक्षा और सहूलियत को बढ़ाया जा सके। विमानन अब देश में 149 विमानतल हैं। टियर-2 और टियर-3 शहरों को ‘उड़ान’ के तहत विस्तार दिया जा रहा है। देश की विमानन कंपनियां एक हजार नए विमान खरीद रही हैं।

बेटियों का जहां सम्मान, वह घर स्वर्ग समान

Where daughters are respected, that home is like heaven. डॉ. केशव पाण्डेय (अतिथि संपादक) हिंदू परिवार में जब किसी कन्या का जन्म होता है तो अक्सर कहा जाता है, बधाई हो! आपके घर में लक्ष्मी आई है। शास्त्रों में तो यह भी कहा गया है कि बेटी का जन्म पुण्यवान के घर ही होता है। कन्या को न सिर्फ देवी कहा जाता है बल्कि देवी की तरह पूजा भी जाता। लेकिन समाज में ऐसे दानव मौजूद हैं जिनके कारण देवियों के रूप में पूजी जाने वाली बेटियां असुरक्षित हैं। राष्ट्रीय बालिका दिवस पर जानते हैं बालिकाओं की वास्तविक स्थिति और हालात के साथ उनके प्रति होने वाले अपराधों की वास्तविकता। 24 जनवरी को प्रतिवर्ष राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। महिला बाल विकास मंत्रालय ने पहली बार 2008 में इस दिवस को मनाने की शुरूआत की थी। इस बार 17वां दिवस है। सवाल उठता है कि आखिर 24 जनवरी को ही यह दिवस क्यों मनाया जाता है? तो इसकी एक खास वजह है। इस दिन का नाता देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़ा है। इंदिरा गांधी ने 24 जनवरी 1966 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। देश की बेटी के सर्वोच्च पद तक पहुंचने की उपलब्धि को प्रतिवर्ष याद करने के साथ ही महिलाओं को सशक्त बनाने और जागरूकता लाने के उद्देश्य से 24 जनवरी का दिन महत्वपूर्ण माना गया। बालिकाओं व महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों से उन्हें बचाने और उनके सामने आने वाली चुनौतियों व अधिकारों के संरक्षण के लिए जागरूक करना भी इसका मुख्य उद्देश्य है।कारण स्पष्ट है कि हर साल 60 हजार सें अधिक बच्चे गायब हो जाते हैं, जिनमें बालिकाओं का प्रतिशत अधिक होता है। देश में बालिकाओं के कुछ जोखिम, उल्लंघन और कमजोरियां हैं। जिनका सामना उन्हें केवल इसलिए करना पड़ता है, क्योंकि वे लड़की हैं।यही वजह है कि बालिकाओं की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भी 19 दिसम्बर 2011 को प्रति वर्ष 11 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने की घोषणा की। यह न केवल लैंगिक समानता को बढ़ावा देता है, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षित वातावरण के उनके अधिकारों को सुनिश्चित करता है।देश में दो-दो बालिका दिवस मनाए जाने और भारत सरकार के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसी व्यापक प्रचारित योजना के बावजूद भारत में अन्तरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय संकल्पों का लक्ष्य करीब नहीं आ पा रहा है।आज भी इंदिरा गॉधी जैसी कुछ भारतीय महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर शक्तिशाली आवाज उठा रही हैं। भारत ने विश्व को कल्पना चावला जैसी अंतरिक्ष यात्री दी हैं। आज भारत की बेटियां न केवल फाइटर प्लेन चला रही हैं बल्कि युद्ध के मोर्चे पर भी तैनात हैं। चन्द्रयान-3 की सफलता में भी भारत की बेटियों का महत्वपूर्ण योगदान है। बावजूद इसके भारतीय समाज में पितृ सत्तात्मक विचारों, मानदंडों, परंपराओं और संरचनाओं के कारण ज्यादातर बालिकाएं अपने कई अधिकारों का पूरी तरह से उपभोग नहीं कर पा रही हैं। लैंगिक भेदभाव, सामाजिक मानदंडों और प्रथाओं के प्रचलन के कारण, बालिकाओं को बाल विवाह, किशोर गर्भावस्था, घरेलू काम, खराब शिक्षा और स्वास्थ्य, यौन शोषण और हिंसा की संभावनाओं का सामना करना पड़ता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार भारत का कुल लिंगानुपात बढ़कर 1020 कन्या हो गया है। लेकिन यह लैंगिक तरक्की सुविधाभोगी और कथित पढ़े-लिखे जागरूक शहरियों के घरों में नहीं बल्कि ग्रामीण इलाकों में हुई है। शहरों में आज भी प्रति हजार बालकों पर बालिकाओं की संख्या 985 ही है। मतलब यह कि शहरों में जहां गर्भावस्था में भ्रूण परीक्षण की सुविधाएं हैं, वहां बालिका भ्रूण अब भी सुरक्षित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र में लिंगानुपात संतोषजनक है तो वहां चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है। यही वजह है नवजात से लेकर पॉंच साल से कम बच्चों की मृत्यु दर अधिक है। इनमें बालिकाओं का प्रतिशत सर्वाधिक है। इसी सर्वेक्षण के मुताबिक अब भी 18 साल से पहले 23 प्रतिशत किशोरों का विवाह हो जाता है जिनमें बालिकाएं ही अधिक होती हैं। बाल विवाह के कारण 15 से लेकर 19 साल उम्र की 6.8 प्रतिशत बेटियां गर्भवती या माताएं पाईं गईं।अपराध की बात करें तो नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार वर्ष 2022 में कुल 83,350 बच्चे गुम हुए। जिनमें 62,946 बालिकाएं थीं। इन गुमशुदा बालिकाओं में 1,665 का कहीं पता नहीं चला। ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2022 में बच्चों के खिलाफ अपराध के कुल 1 लाख 62 हजार 449 मामले दर्ज हुए । जबकि 2021 में 1,49,404 मामले दर्ज हुए थे। एक साल के अंदर यह वृद्धि 8.7 प्रतिशत थी। पॉस्को एक्ट के तहत यौन अपराध के 39.7 प्रतिशत मामले दर्ज हुए। सबसे ज्यादा 20 हजार 762 मामले महाराष्ट्र में दर्ज किए गए। राज्य बाल शोषण के मामले में मध्य प्रदेश में 20 हजार 415 अपराध दर्ज हैं, इनका देश में तीसरा नंबर है। महिलाओं के प्रति अपराध में प्रदेश के हालात ठीक नहीं हैं। सन् 2021 में बालिकाओं से बलात्कार के 37 हजार 511 मामले दर्ज हुये थे। जो 2022 में बढ़कर 38 हजार 30 हो गये। यौन हमलों की संख्या में 3.1 प्रतिशत तथा यौन उत्पीड़न में दशमल शून्य 4 की वृद्धि दर्ज की गयी। महिला पहलवानों द्वारा गत वर्ष लगाया गया यौन उत्पीड़न का मामला लोग भूले नहीं होंगे। पहलवानों ने सरकार पर व्यभिचारी को बचाने का आरोप लगाया था। लड़कियों के खिलाफ अत्याचार करने वालों को राजनीतिक आधार पर माफ करना या उनको बचाना घोर सामाजिक अपराध भी है।इस तरह के आरोप देश के लिए श्राप के समान हैं। हमारा देश तब तक पूरी तरह से विकसित नहीं होगा जब तक कि बालक और बालिकाओं दोनों को उनकी पूरी क्षमता तक पहुंचने के लिए समान रूप से अवसर नहीं दिये जाते। प्रत्येक बच्चा अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचने का हकदार है, लेकिन उनके जीवन में और उनकी देखभाल करने वालों के जीवन में लैंगिक असमानताएं इस वास्तविकता में बाधा डालती हैं। शिक्षा, जीवन कौशल, खेल और बहुत कुछ के साथ निवेश करके और उन्हें सशक्त बनाकर लड़कियों के महत्व को बढ़ाना महत्वपूर्ण है।लड़कियों के महत्व में वृद्धि करके हम सामूहिक रूप से विशिष्ट परिणामों की उपलब्धि में योगदान दे सकते हैं, कुछ अल्पकालिक व अन्य मध्यम अवधि जैसे बाल विवाह को समाप्त करना … Read more

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह पूर्व रोशनी से जगमगा उठी अयोध्या नगरी

Ayodhya city illuminated with lights before Ram Mandir consecration ceremony अयोध्या में दिवाली जैसा माहौल… प्राण प्रतिष्ठा समारोह से पहले रोशनी से नहाए राज सदन, पुराने मंदिर अयोध्या ! अयोध्या के पूर्व राजा का भव्य आवास राज सदन, विभिन्न मंदिर और यहां अन्य इमारतें राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के मद्देनजर रोशनी से जगमगा उठी है, जिससे इस मंदिर नगरी में दिवाली उत्सव जैसा माहौल बन गया है। प्राचीन ‘अयोध्या नगरी’ को आकर्षक ढंग से सजाया गया है खासतौर से राम पथ और धर्म पथ की साज-सज्जा देखने लायक है। अयोध्या की गलियों में ‘राम आएंगे’ और ‘अवध में राम आए हैं” जैसी गीतों की गूंज सुनायी दे रही है और मंदिर शहर की इमारतें भगवा ध्वज से पटी पड़ी हैं।‘प्राण प्रतिष्ठा’ के दिन शहर में चकाचौंध रहने की उम्मीद है क्योंकि कई मकान, मंदिर और अन्य इमारतें रोशनी से नहायी हैं। अयोध्या के शाही परिवार का घर रहा राज सदन रोशनी से जगमग है। सैकड़ों लोग, स्थानीय निवासी और दर्शक शनिवार देर रात तक इसके सुशोभित द्वार ‘लक्ष्मीद्वार’ के सामने तस्वीरें या सेल्फी लेने के लिए उमड़ पड़े। प्रवेश द्वार के शीर्ष पर भगवान राम की धनुष और बाण लिए तस्वीर लगायी गयी है और ‘जय श्री राम’ के नारे गूंज रहे। प्रवेश द्वार के मेहराब के नीचे एक झूमर लगाया गया है। यह साज-सज्जा नजदीकी राम पथ से गुजरने वाले लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। अयोध्या में 22 जनवरी को दिवाली उत्सव या संभवतः उससे बड़े पैमाने पर उत्सव मनाएँ जाने की उम्मीद है। बेगमपुरा इलाके में कई महीनों पहले खुला लॉज प्रभाराज पैलेस शुक्रवार रात को रोशनी से जगमग हो उठा। अयोध्या में रामलला प्राण प्रतिष्ठा समारोह 22 जनवरी को होगा और इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहेंगे।

संस्कृति, सभ्यता और शिल्प का प्रतिमान “ममेत्रि“ 

Model of culture, civilization and craft “Mametri” मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा का स्थापना दिवस आज भारत के संघीय इतिहास में 21 जनवरी की तारीख का खास महत्व है। 1972 में इसी दिन मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा के रूप में तीन नये राज्यों का उदय हुआ। पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा  यानी “ममेत्रि“ को अस्तित्व में आए पांच दशक हो गए हैं। इन तीनों प्रदेशों की संस्कृति, सभ्यता, रहन, सहन, तीज-त्योहार और  शिल्प लोगों को खासा आकर्षित करता है। गीत-नृत्य और संगीत की तो बात ही निराली है। तीनों राज्यों के स्थापना दिवस पर करते हैं वहां की संस्कृति,सभ्यता और प्रकृति के दर्शन।  डॉ. केशव पाण्डेय अतिथि संपादक ममेत्रि में सबसे पहले बात करते हैं मणिपुर की, छोटा सा अनोखा और अलौलिक राज्य मणिपुर रंगों से जीवंत है और प्राचीन परंपराओं और समृद्ध संस्कृतिक प्रतिमानों का मिश्रण है। राज्य का इतिहास और रीति-रिवाज दुनिया के  लोगों को आकर्षित करती है। आस्था और अंधविश्वास हमेशा विदेशियों को मंत्रमुग्ध करते रहे हैं। कला और संस्कृति के क्षेत्र में, राज्य का सबसे अच्छा प्रतिनिधित्व इसके शास्त्रीय और लोक नृत्य रूपों द्वारा किया जाता है। रासलीला- मणिपुरी शास्त्रीय नृत्य का प्रतीक, राधा-कृष्ण के दिव्य और शाश्वत प्रेम के माध्यम से बुना गया है। यह सुंदर नृत्य कृष्ण और राधा के उदात्त और पारलौकिक प्रेम और भगवान कृष्ण के प्रति गोपी की भक्ति को प्रकट करता है।  त्योहारों की बात करें तो मन में मिठास घुल जाती है। लाई हराओबा एक वासंतिक त्योहार है, जो शांति और समृद्धि के तौर पर पारंपरिक और प्रतीकात्मक नृत्य का प्रतीक है। विविध और रंगीन आदिवासी लोक नृत्य आदिवासी जीवन शैली की प्रकृति, सृजन और सौंदर्यवाद की अभिव्यक्ति हैं। लुई-नगाई-नी जैसे आदिवासी त्योहारों में रंगीन वेशभूषा, नृत्य चाल और अद्वितीय अनुष्ठान बेहद राजसी और आकर्षक होते हैं जो आने वाले पर्यटकों का मन मोह लेते हैं।  मणिपुर के डोल जात्रा, रथ जात्रा, लाई-हरोबा, रामजन आईडी, कुट, गैंग-नगाई, चुम्फा, चेइराओबा, हेइक्रू हिडोंगबा, लुई-नगाई-नी और क्वाक जात्रा प्रमुख त्यौहार हैं। इन्नाफी और फानेक महिलाओं के लिए सबसे आम मणिपुरी पारंपरिक पोशाक हैं। मीताई महिलाएं एक कपड़ा सिलती हैं जिसे कनाप फानेक कहा जाता है। जिस पर अनेक सुंदर डिज़ाइन होते हैं। ’लाई-फी’ और ’चिन-फी’ अन्य मणिपुरी पारंपरिक पोशाक हैं। सफेद पगड़ी पुरुषों की पसंद है। खमेन चत्पा उच्च वर्ग के पुरुषों द्वारा पहना जाता है। मणिपुर में नृत्य संस्कृति का एक अभिन्न अंग है, और दर्शकों के लिए, यह अपनी गीतात्मक सुंदरता और लय के कारण एक आनंद की अनुभूति है। कहा जाता है कि राजा खुयोई तोमपोक कला और संस्कृति के बहुत बड़े प्रेमी थे और उन्होंने दूसरी शताब्दी ईस्वी में मणिपुरी नृत्य का विकास किया था। 15वीं शताब्दी में वैष्णववाद की शुरुआत के बाद, नृत्य शैली परिचित और बहुत आम होने लगी। रास लीला और राधा-कृष्ण की प्रेम की कहानी सबसे प्रसिद्ध नृत्य शैली है। नुपा पाला यानी कार्तल चोलोम या झांझ नृत्य के नाम से भी जाना जाता है। पंगु चोलोम देवताओं को बुलाने के आव्हान के लिए किया जाता है। यह मणिपुरी सांकृतना संस्कृति की आत्मा है। इशेई गीत का दूसरा रूप है जो पेना नामक संगीत वाद्ययंत्र की मदद से बजाया जाता है। मेघालय : प्राकृतिक सुंदरता का खजाना   प्राकृतिक रूप से मनोरम मेघालय में अनेक गुफ़ाएँ, पर्वत शिखर, बाग़, झील-रिज़ॉर्ट स्थल, ख़ूबसूरत दृश्यावलियाँ, गर्म पानी के सोते और जलप्रपात हैं। प्रमुख पर्यटक स्थल हैं-शिलांग, उमियाम, चेरापूँजी, मॉसिनराम, जाक्रीयम, माईरांग, जोवाई, नार्तियांग, थदलाशीन, तुरा, सीजू और बलपाक्रम राष्ट्रीय उद्यान। मेघालय में ‘का पांबलांग-नोंगक्रेम’ खासियों का एक प्रमुख धार्मिक त्योहार है। पांच दिवसीय यह त्योहार शिलांग से लगभग 11 किमी की दूरी पर स्थित ’स्मित’ नामक गांव में मनाया जाता है। ’शाद सुक मिनसीम’ खासियों का महत्वपूर्ण त्योहार है। जबकि ’बेहदीनखलम जयंतिया’ आदिवासियों का महत्वपूर्ण त्योहार है। गारो आदिवासी सलजोंग (सूर्य देवता) नामक देवता के सम्मान में अक्टूबर-नवंबर में ’वांगला’ नामक त्योहार मनाते हैं। मेघालय के लोग मेहमान नवाज़, खुशमिजाज़ और मिलनसार माने जाते हैं। परंपरागत रूप से, खासी मानते हैं कि उनका धर्म ईश्वर प्रदत्त है और एक सर्वोच्च ईश्वर, निर्माता ’यू ब्लेईनोंगथॉ’ के विश्वास पर आधारित है। खासी धार्मिक प्रवृति के लोग हैं जिन्हें अपने जीवन से असीम प्रेम है। मौजूदा परिवेश में तीनों राज्य वक्त के साथ कदमताल कर रहे हैं और प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहे हैं। त्रिपुरा : लोक संस्कृति की समृद्ध विरासत   भारत का तीसरा सबसे छोटा राज्य है त्रिपुरा। अगरतला इसकी राजधानी है। त्रिपुरा में बंगाली और मणिपुरी समुदायों के साथ-साथ 19 आदिवासी समुदाय हैं। जो त्रिपुरा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में योगदान करते हैं। यहां की संस्कृति उस संस्कृति और परंपरा का मिश्रण है जिसका ये समुदाय पालन करते हैं। अपनी संस्कृति और परंपरा में समृद्ध है यह राज्य। प्रत्येक जनजाति की अपनी सांस्कृतिक गतिविधियाँ हैं। उनके पास अपना विशिष्ट नृत्य और संगीत है, जो मुख्य रूप से लोक प्रकृति का है। लोक गीत और नृत्य शादियों, धार्मिक और अन्य त्योहारों जैसे अवसरों पर किए जाते हैं। बिज़ू नृत्य, लेबांग बूमनी नृत्य, गरिया नृत्य, हाई हक नृत्य, झूम नृत्य आदि त्रिपुरा के कुछ महत्वपूर्ण नृत्य और गीत रूप हैं। यह अनेक मेलों और त्योहारों की भूमि भी है। आदिवासी समुदाय साल भर अलग-अलग त्योहार मनाता है। बुइसू या बिसु, गरिया और गजन महोत्सव, होजागिरी, खारची त्यौहार, केर त्यौहार जैसे त्यौहार त्रिपुरा के आदिवासियों द्वारा मनाए जाते हैं। उसी के अनुरूप अन्य गैर आदिवासी समुदाय दुर्गा पूजा, दिवाली, होली और कई अन्य त्योहारों को बहुत हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। त्रिपुरा का खान-पान आदिवासी भोजन का प्रतिनिधित्व करता है। व्यंजनों का सबसे महत्वपूर्ण घटक बेरमा है। यह मूल रूप से किण्वित सूखी पुथी मछली है। त्रिपुरा का खाना मुख्यतः बिना तेल के बनाया जाता है। त्रिपुरा अपने बांस और बेंत उत्पादों, हथकरघा और आभूषण उत्पादों के लिए जाना जाता है। त्रिपुरा के लोगों में शिल्पकला का विशेष कौशल है। यहां कई लघु कुटीर उद्योग हैं और अधिकांश लोग विभिन्न प्रकार के हथकरघा और हस्तशिल्प निर्माण में लगे हुए हैं। बांस और बेंत के उत्पाद, पारंपरिक वस्त्र और आभूषण, और अन्य प्रकार के शिल्प निर्माण कला और शिल्प उद्योग की कुछ गतिविधियाँ हैं जिनमें त्रिपुरा के लोग शामिल हैं। 19वीं सदी के मध्य में ईसाईयत के आगमन और उसके साथ जुड़ी नैतिकता ने अनेक जनजातीय और सामुदायिक संस्थाओं … Read more

देश की तकदीर और तस्वीर बदलते युवा ,राष्ट्रीय युवा दिवस आज

Youth changing the fate and image of the countryNational Youth Day today युवा शक्ति की प्रतिभा का दुनिया लोहा मान रही है। डॉ. केशव पाण्डेय (अतिथि संपादक) भारत की पावन धरा से निकले युवाओं ने विश्व में अपना परचम लहराया है। भारतवर्ष की धरती के कण-कण में देश प्रेम भरा है। देश की गौरवशाली परंपरा, प्रेम, सद्भाव, एकता और सहयोग का विश्व में डंका बज रहा है। युवा शक्ति की प्रतिभा का दुनिया लोहा मान रही है। भविष्य में भारत ही विश्व को दिशा प्रदान करने वाला देश होगा और यह सब संभव होगा युवा शक्ति की सोच और उसके दृढ़ इच्छा शक्ति के बल पर। क्योंकि सदियों से ही देश के युवाओं ने भारतीय संस्कृति और सभ्यता को विश्व में स्थापित करने का काम किया है। राष्ट्रीय युवा दिवस पर मौजूदा परिवेश में समझिये स्वामी विवेकानंद का जीवन मूल्य। 12 जनवरी को युग प्रवर्तक, ओजस्वी विचारक और युवाओं के प्रेरणास्त्रोत “स्वामी विवेकानंद” की पावन जयंती को प्रति वर्ष “राष्ट्रीय युवा दिवस” के रूप में मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति को विश्व में स्थापित करने वाले महान आध्यात्मिक गुरु, समाज सुधारक और युवाओं के प्रेरणा स्त्रोत स्वामी विवेकानंदजी की जयंती देश में अपना महत्व रखती है। विवेकानंद जी ने कहा था कि देश का भविष्य पूर्णतः उस देश के युवाओं के सुविचारों और सुदृढ़ कंधो पर निर्भर करता है। उन्हीं से होकर ही किसी देश का विकास क्रम आगे बढ़ता है। देश के युवा जिस आचरण के होंगे, देश भी उसी का अनुगमन करेगा। अतः समयानुसार देश के युवाओं का सही मार्गदर्शन जरूरी है। उन्हीं के आचरण को युवाओं के जीवन में उतारने के लिए 1984 में भारत सरकार द्वारा स्वामी विवेकानंद जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की थी। 1985 से हर साल इसे मनाया जा रहा है। इस बार 40वां उत्सव है। इस युवा दिवस का उद्देश्य स्वामी विवेकानंद के विचार और आदर्शों के महत्व को बढ़ावा देना है। हर वर्ष यह दिवस एक विशेष थीम पर मनाया जाता है। युवा दिवस राष्ट्र के ऐसे युवाओं को समर्पित है, जो भारत को बेहतर भविष्य देने की क्षमता रखते हैं और इसके लिए कार्य करते हैं। वर्ष 2024 में राष्ट्रीय युवा दिवस की थीम “इट्स ऑल इन द माइंड“ यानी सब कुछ आपके दिमाग में है रखी गई है। सरल भाषा में कहा जाए तो यदि किसी युवा ने कुछ करने की ठान ली है तो फिर पूरा करने से उसे कोई रोक नहीं सकता।12 जनवरी 1863 में कलकत्ता में जन्में नरेंद्र दत्त 25 साल की उम्र में ही सांसारिक मोह माया को त्याग कर सन्यास धारण कर स्वामी विवेकानंद बने। वे वेदांत के विख्यात और प्रभावी आध्यात्मिक गुरु थे।स्वामी विवेकानंद के विचार, दर्शन और अध्यापन भारत की महान सांस्कृतिक और पारंपरिक संपत्ति हैं। उनका दर्शन, जीवन, कार्य एवं उनके आदर्श भारतीय युवकों के लिए प्रेरणास्त्रोत रहे हैं। स्वामीजी एक महान इंसान ही नहीं, वरन एक युग पुरूष थे, जिन्होंने हमेशा देश की ऐतिहासिक परंपरा को सुदृढ़ बनाने और सही नेतृत्व करने के लिए युवा शक्ति पर विश्वास किया।उनका मानना था कि भारत को विकासित राष्ट्र बनाने के लिए युवाओं की अनन्त ऊर्जा को जागृत कर उन्हे विभिन्न कार्य क्षेत्रों में प्रयोग कर सफलता प्राप्त करने के लिए एक निश्चित चुनौती का पीछा करना अनिवार्य है। जो उन्हें निरंतर सफलता के मार्ग की ओर अग्रसर करती रहेगी। क्योंकि युवाओं का देश कहे जाने वाले भारत में युवा शब्द से ही उत्साह, स्फूर्ति और सक्रियता जैसे गुणों का बोध होता है। उन्हांने शारीरिक बल नहीं बल्कि मानसिक बल को युवा शक्ति का केन्द्र माना। उनका मानना था कि युवा होने की परिपूर्णता उसमें है, जिसमें बिना रुके और बिना थके संघर्ष करने का जज्बा हो। उन्होंने युवाओं के दिल में अपने कार्य करने के लिए जो आग फूंकी वो आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा स्त्रोत है।हिंदू धर्म की विचारधाराओं को पुनर्जीवित करने के साथ ही औपनिवेशिक ब्रिटिश शासन के दौरान देश में राष्ट्रवादी उत्साह पैदा किया। इससे वे दुनिया भर में लोकप्रिय हुए।स्वामी विवेकानंद को धर्म, दर्शन, इतिहास, कला, सामाजिक विज्ञान और साहित्य का ज्ञाता कहा जाता है। शिक्षा के साथ ही वे भारतीय शास्त्रीय संगीत का भी ज्ञान रखते थे। उनके विचार और कार्य आज के समय में भी युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने युवाओं को खुद पर विश्वास करना सिखाया। क्योंकि जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते तब तक आप भगवान पर विश्वास नहीं कर सकते।11 सितंबर 1893 में अमेरिका में आयेजित धर्म संसद में विवेकानंद ने भाषण देते हुए हिंदी में कहा अमेरिका के भाइयों और बहनों… उनके यह कहते ही आर्ट इंस्टीट्यूट ऑफ शिकागो में पूरे दो मिनट तक तालियां बजती रहीं। इसे भारत के इतिहास में गर्व और सम्मान की घटना के तौर पर जाना जाता है। देश का हर युवा स्वामी विवेकानंद के दार्शनिक विचारों व भाषणों को सुनने के बाद प्रभावित हुए बगैर नहीं रह सकता है। उन्होंने भारत को विश्व मंच से अपने भाषणों के द्वारा गौरान्वित किया था। आध्यात्म चिंतन, देशप्रेम को सही अर्थों में समझाया। उन्होंने कहा था कि भारत युवाओं का देश है और इस देश के युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत स्वामी जी के अलावा और कोई नहीं हो सकता है।युवा वह है, जो देश का भविष्य बदलने की क्षमता रखता है। जिसके अंदर नेतृत्व करने की क्षमता हो, लोगों को सही मार्ग पर लाने का काम करने वाला ही युवा कहलाता है। स्वामी जी कहते थे युवा वो होता है, जो बिना अतीत की चिंता किए अपने भविष्य के लक्ष्यों की दिशा में काम करता है। हर इंसान को कभी न कभी अकेले ही शुरूआत करनी होती है, इसलिए किसी भी काम को करने से घबराना नहीं चाहिए। अगर आपकी नीयत साफ, इरादे स्पष्ट और हांसले बुलंद हैं, तो आपके साथ अपने आप ही लोग जुड़ने लगते हैं। युवा जब ठान लेता है, तो कुछ भी कर सकता है। ऊर्जा से भरा युवा देश के हर कोने में मौजूद है। कोई पहाड़ों से निकलने वाले छोटे झरनों से बिजली बना रहा है, कोई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल दुनिया का सबसे ऊॅचा रेलवे पुल बनाकर इतिहास रच रहा है। अपनी ऊर्जा का सकारात्मक उपयोग करके लोगों का भला … Read more

विमान नए नियम आने के बाद पायलट भरेंगे खुशी की उड़ान

विमान नए नियम आने के बाद पायलट भरेंगे खुशी की उड़ान डीजीसीए ने उड़ान ड्यूटी अवधि को 13 घंटे से घटाकर 10 घंटे किया भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता विमानन बाजार  बेंगलुरु। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने फ्लाइट क्रू दल के लिए अनिवार्य साप्ताहिक आराम की अवधि को 36 घंटों से बढ़ाकर 48 घंटे कर दिया है। इस बारे में पायलट की थकान को लेकर मंत्रालय को काफी समय से शिकायतें मिल रही थीं। दरअसल, पायलट के बीच थकान को लेकर बढ़ती चिंताओं को देखते हुए डीजीसीए ने नवंबर 2023 में उनके लिए आराम के अधिक समय सहित फ्लाइट क्रू दल के ड्यूटी समय को नियंत्रित करने वाले मानदंडों में विभिन्न बदलावों का प्रस्ताव रखा था।  डीजीसीए ने रात में काम करने वाले पायलटों के लिए अधिकतम उड़ान ड्यूटी अवधि को 13 घंटे से घटाकर 10 घंटे कर दिया है। साथ ही रात के संचालन के दौरान उड़ानों लैंडिंग की संख्या छह से घटाकर दो तक सीमित कर दी। नए नियम अमेरिका-यूरोपीय के नियमों से मेल खाते हैंनागरिक उड्डयन महानिदेशालय के संशोधित नियम अमेरिका और यूरोपीय संघ के नियमों से मेल खाते हैं। वहीं, नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ये परिवर्तन अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के मुताबिक हैं, यह सुनिश्चित करेंगे कि भारत के पास आवश्यक शस्त्रागार हो, क्योंकि यह भविष्य में सबसे बड़े घरेलू विमानन बाजार का खिताब हासिल करने के लिए तैयार है।

22 जनवरी को होगा राम मंदिर का उद्घाटन, इससे पहले गर्भ गृह की फोटो आई सामने.

The inauguration of the Ram Temple will take place on January 22, and before this, a photo of the sanctum sanctorum has been revealed. अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य जोरों पर है। जिसका उद्घाटन आने वाले नए साल यानी साल 2024 में 22 जनवरी को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाएगा। The construction work of the Ram Temple in Ayodhya is in full swing. Its inauguration is set to take place on January 22, 2024, by the Prime Minister of the country, Narendra Modi, in the upcoming new year.” इसके प्राण प्रतिष्ठा समारोह की तैयारी भी तेज हो चुकी है। मंदिर के लोकार्पण को लेकर पुलिस अलर्ट मोड पर है। जगह-जगह सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। वहीं, आने वाले श्रद्धालुओं के लिए उचित व्यवस्था की जा रही है। इसी बीच मंदिर के गर्भगृह की पहली तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई है। बता दें कि इन तस्वीरों को विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष और महासचिव चंपत राय ने अपने ऑफिशियल पेज एक्स (ट्वीटर पहले) पर शेयर किया है। महासचिव ने लिखी ये बातेंदरअसल, राम मंदिर ट्रस्च के महासचिव चंपत राय ने फोटोज शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, “भगवान श्री रामलला का गर्भ गृह स्थान लगभग तैयार हो चुका है। हाल ही में लाइटिंग और फिटिंग का काम भी पूरा कर लिया गया है। जिसकी कुछ तस्वीरें साझा कर रहा हूं।” इस तस्वीरों में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि दीवार और गुंबद पर शानदार नकाशी की गई है जो भक्तों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। कितना प्रतिशत कार्य हो चुका है पूरा?मंदिर के निर्माण कार्य को लेकर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने बताया कि 95% कार्य पूरा कर लिया गया है और बाकी के कार्य 31 दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। बता दें कि 22 जनवरी को मंदिर परिसर समेत पूरे शहर में बड़ी-बड़ी स्क्रीन लगाई जाएगी। जिसका सीधा लाइव प्रसारण किया जाएगा। इस दौरान भजन, हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का भी प्रसारण होगा। इस भव्य समारोह के लिए स्पेशल ट्रेनें भी चलाई जाएगी ताकि भक्तों को किसी प्रकार की परेशानी न उठानी पड़े। वहीं, मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए पुजारी को ट्रेनिंग भी दी जा रही है। राम भक्त इस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस दौरान देश ही नहीं, बल्कि पूरे विश्वभर से श्रद्धालु पहुंचेंगे।

भ्रष्टाचार दुःख का कारण, दंड ही इसका निवारण.

Corruption is the cause of sorrow; punishment is the solution to its elimination. काटनी होगीं भ्रष्टाचार की मजबूत होती जडेमहिला असिस्टेंट इंजीनियर करोड़ों के भ्रष्टाचार में फंसी…नगर निगम का अफसर रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा …महिला सब इंस्पेक्टर का रिश्वत लेने का वीडियो वायरल…बाबू ने मांगी रिश्वत… रिश्वत लेने और भ्रष्टचार से जुड़े अनेक मामलों की ऐसी खबरें आए दिन समाचार-पत्रों की प्रमुख हेडलाइंस होती हैं। जिन्हें पढ़कर और सुनकर लगता है कि मानों आज भ्रष्ट आचरण वाले अधिकारी और कर्मचारी नियम विरुद्ध कार्य कर बनाई व्यवस्था को ध्वस्त कर तंत्र को दीमक की तरह चाट रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस पर पढ़िए मौजूदा परिवेश में जड़ जमाते भ्रष्टाचार की हकीकत को दर्शाती खास रिपोर्ट। डॉ. केशव पाण्डेय अंतराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस आज भ्रष्टाचार@भ्रष्ट+आचार : भ्रष्ट यानी बुरा या बिगड़ा हुअ…आचार का मतलब आचरण… अर्थात भ्रष्टचार का शाब्दिक अर्थ है वह आचरण जो किसी भी प्रकार से अनैतिक और अनुचित हो। जब कोई न्याय व्यवस्था के मान्य नियमों के विरुद्ध जाकर अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए गलत आचरण करने लगता है तो वह व्यक्ति भ्रष्टाचारी कहलाता है।मौजूदा दौर में भ्रष्टाचार एक जटिल सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक समस्या है, जो सभी देशों को प्रभावित करती है। भ्रष्टाचार लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर आर्थिक विकास को धीमा करता है और सरकारी अस्थिरता में योगदान देता है।भ्रष्टाचार वर्तमान में एक नासूर बनकर समाज को खोखला करता जा रहा है। धर्म का नाम लेकर लोग अधर्म को बढ़ावा दे रहे हैं। दोषी व अपराधी धन के प्रभाव में स्वच्छंद घूम रहे हैं। धन-बल का प्रदर्शन, लूट-पाट, तस्करी आदि आम बात हो गई है। भ्रष्टाचार का समाज और राष्ट्र में व्यापक असर हो रहा है।भ्रष्टाचार ऐसा अनैतिक आचरण है, जिसमें व्यक्ति खुद की छोटी इच्छाओं की पूर्ति हेतु देश को संकट में डालने से परहेज नहीं करता है। देश के भ्रष्ट नेताओं द्वारा किया गया घोटाला ही भ्रष्टाचार नहीं है अपितु एक ग्वाले द्वारा दूध में पानी मिलाना भी भ्रष्टाचार का स्वरूप है।सोने की चिड़िया कहे जाने वाले देश में आज भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत होती जा रही हैं। दुनियाभर में पीढ़ियों के सामने भ्रष्टाचार एक सबसे बड़ी चुनौती है। यही चुनौती दुनिया भर के लोगों की समृद्धि और स्थिरता को खतरे में डाल रही है। क्योंकि आज अधिकांश लोग अवैध तरीकों से धन अर्जित करने की चाह में भ्रष्टाचार कर रहे हैं और निजी लाभ के लिए देश की संपत्ति का शोषण। यह देश की उन्नति के पथ पर सबसे बड़ा बाधक तत्व है। व्यक्ति के व्यक्तित्व में दोष निहित होने पर देश में भ्रष्टाचार की मात्रा बढ़ रही है।यही वजह है कि भ्रष्टाचार का समाज के हर पहलू पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है और यह संघर्ष और अस्थिरता के साथ गहराई से जुड़ रहा है। जो सामाजिक और आर्थिक विकास को खतरे में डालकर लोकतांत्रिक संस्थानों और कानून के शासन को कमजोर कर रहा है।भ्रष्टाचार न केवल संघर्ष का कारण बनता है, बल्कि अक्सर इसके मूल कारणों में से एक है। यह कानून के शासन को कमजोर करके, गरीबी को बदतर बनाकर, संसाधनों के अवैध उपयोग को सुविधाजनक बनाकर और सशस्त्र संघर्ष के लिए वित्तपोषण प्रदान करके संघर्ष को बढ़ावा देता है और शांति प्रक्रियाओं को रोकता है।हैरान करने वाली बात यह है कि देश का दिल कहे जाने वाला मध्य प्रदेश भ्रष्टाचार के मामले में चौथे नंबर पर है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में 2022 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 294 मामले पंजीबद्ध हुए थे।प्रदेश में रिश्वत लेने के मामले सबसे ज्यादा हैं। इनमें लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू के पास 257 मामले आए। ट्रेप के मामले में भी प्रदेश तीसरे पायदान पर है। अनुपातहीन संपत्ति के मामले में भी पिछले वर्ष 2022 में 17 मामले दर्ज हुए थे। इस मामले में प्रदेश का पांचवा नंबर है।भ्रष्टाचार के बढ़ते संकट को दृष्टिगत रखते हुए संयुक्त राष्ट्र भ्रष्टाचार विरोधी और शांति, सुरक्षा और विकास के बीच महत्वपूर्ण संबंध को उजागर करना चाहता है। इसके मूल में यह धारणा है कि इस अपराध से निपटना हर किसी का अधिकार और जिम्मेदारी है। प्रत्येक व्यक्ति और संस्था के सहयोग और भागीदारी से ही हम इस अपराध के नकारात्मक प्रभाव पर काबू पा सकते हैं। राज्य, सरकारी अधिकारी, सिविल सेवक, कानून प्रवर्तन अधिकारी, मीडिया प्रतिनिधि, निजी क्षेत्र, नागरिक समाज, शिक्षाविद, जनता और युवा सभी को समान रूप से भ्रष्टाचार के खिलाफ दुनिया को एकजुट करने में भूमिका निभानी होगी।क्योंकि भ्रष्टाचार वह दीमक है जो अंदर ही अंदर देश को खोखला कर रहा है। यह व्यक्ति के व्यक्तित्व का आईना है जो यह दिखाता है व्यक्ति लोभ, असंतुष्टि, आदत और मनसा जैसे विकारों के वजह से कैसे मौके का फायदा उठा सकता है।भ्रष्टाचार होने का प्रमुख कारण देश का लचीला कानून है। पैसे के दम पर ज्यादातर भ्रष्टाचारी बाइज्जत बरी हो जाते हैं, अपराधी को दण्ड का भय नहीं होता है। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि भ्रष्टाचारियों को कठोर से कठोर दंड मिले।यदि सतत विकास लक्ष्यों में निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करना है तो भ्रष्टाचार को रोकना, पारदर्शिता को बढ़ावा देना और संस्थानों को मजबूत करना महत्वपूर्ण है। कह सकते हैं कि समाज व राष्ट्र की उन्नति और लोगों की तरक्की के लिए भ्रष्टाचार की मजबूत होती जड़ों को समूल काटना होगा।

चाइना के यूरिया से भारत बनेगा आत्मानिर्भर ,जानिए पूरी कहानी.

India will become self-reliant in urea production with China’s assistance – learn the entire story. नई दिल्ली: चाइना से आया यूरिया, बोरी पे लिखा आत्मानिर्भर भारत, जानिए पूरी कहानी – यूरिया की एक बोरी की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। यह बोरी का फोटो दुनिया की सबसे बड़ी सहकारी कंपनी इफको (इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड) का है। इस फोटो में यूरिया की बोरी पर एक ओर लिखा है ‘सशक्त किसान-आत्मनिर्भर भारत’ और वही दूसरी ओर इस खाद का उद्गम स्थल चाइना को बताया गया है। इसी भ्रम को लेकर इस बोरी की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। इसी बीच इफको के एमडी डॉ. यूएस अवस्थी ने इस वायरल फोटो पर टिप्पणी की हैं। डॉ. अवस्थी ने इस वायरल की जा रही फोटो को भ्रामक बताते हुए कहा कि ऐसा करने वाले लोगो के पास समझ का अभाव हैं। वैसे आजकल एआई के समय में तकनीकी तौर पर देखा जाए तो बहुत हद तक डॉ. अवस्थी की बात सही भी हैं। भारत में 30 मिलियन टन यूरिया उत्पादन की क्षमता है, जिसमें से 90% उत्पादन क्षमता का उपयोग किया जाता है। यूरिया की बाकि जरूरतो के लिए उर्वरक कंपनियां दूसरे देशों से आयात करती हैं। ये जानना जरूरी हैं कि भारत अभी तक आत्मनिर्भर नहीं हैं लेकिन भारत सरकार 2025-26 तक य़ूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर होने की कोशिश कर रहा हैं। आत्मनिर्भर भारत-सशक्त किसान‘ का नाराआत्मनिर्भर भारत-सशक्त किसान’ का नारा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश की आर्थिक विकास योजनाओं के लिए इस नारे का इस्तेमाल किया और इसे लोकप्रिय बनाया। ‘आत्मनिर्भर भारत’ की प्रमुख कड़ी है आत्मनिर्भर किसान। श्री नरेंद्र मोदी ने ‘सशक्त और समृद्ध किसान, आत्मनिर्भर भारत’ की पहचान बताई है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत, देश के कृषि क्षेत्र को मज़बूत करने के लिए कई प्रयास किए गए हैं। इन प्रयासों से देश के किसान लाभान्वित हो रहे हैं और सशक्त भारत के निर्माण में अपना योगदान दे रहे हैं। दरअसल, भारत लंबे समय से खेती-किसानी में अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए रासायिन‍क उर्वरकों का दूसरे देशों से आयात कर रहे हैं। जिसमें यूरिया का आयात सबसे अधिक है। भारत आजादी के 75 साल बाद भी हम उर्वरकों के उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर नहीं हो सका हैं. लेकिन, अब उस रास्ते पर चल रहे हैं जिसमें आयात को कम करने और घरेलू उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। काफी हद तक इसमें सफलता भी मिली है। सरकार कृषि क्षेत्र की मांग को पूरा करने के लिए साल दर साल मजबूरी में खाद का आयात कर रही है।

सीएम के सलाहकार और पूर्व आईएएस केसरी अडानी की कंपनी में बने एडवाइजर.

Advisors to the Chief Minister and former IAS officer Kesari Adani are appointed as advisors in Adani’s company. भोपाल। मप्र के सीनियर रिटायर्ड आईएएस अधिकारी आईसीपी केशरी ने अडानी ग्रुप ज्वाइन कर लिया है। वह ग्रुप के एनर्जी सेक्टर को देखेंगे और वहां एडवाइजर की भूमिका में रहेंगे। केशरी ने ग्रुप ज्वाइन कर लिया है। केशरी का शासकीय अधिकारी के तौर पर एनर्जी सेक्टर में करीब दस साल का अनुभव रहा है और वह इस विभाग में प्रमुख सचिव, एसीएस स्तर के अधिकारी रहे हैं। केंद्र में भी उन्होंने इस सेक्टर में काम किया है। केशरी के रिटायरमेंट के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें दिसंबर 2022 में मीडिया सलाहकार के तौर पर नियुक्त किया था। करीब एक साल इस पद पर काम करने के बाद उन्होंने हाल ही में आचार संहिता लगने के पहले 30 नवंबर को यह पद त्याग दिया था और इसके बाद ग्रुप में ज्वाइनिंग की उनकी प्रक्रिया शुरू हो गई थी। केशरी 1988 बैच के अधिकारी है और एनर्जी सेक्टर में उनके काम का लंबा अनुभव रहा है। केंद्र में प्रतिनियुक्ति के दौरान करीब साढ़े पांच साल तक वह ऊर्जा मंत्रालय में ज्वाइंट सेक्रेटरी (थर्मल) रहे। ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव और मप्र भवन, नई दिल्ली के आवासीय आयुक्त रहे आईसीपी केशरी बाद में मुख्य सचिव के वेतनमान पर पदोन्नत के बाद अपर मुख्य सचिव, ऊर्जा भी रहे।केशरी आईएएस एमपी के साथ मप्र, छग और केंद्र में ग्रासरूट एंड पॉलिसी लेवल का अनुभवी अधिकारी बताया है। खासकर इन्फ्रा-पॉवर, रोड, एरिगेसन सेक्टर में। साथ ही लिखा है ज्वाइन्ड एनर्जी ग्रुप।

भारतीय नौसेना दिवस आज, जानें इस दिन का इतिहास

Indian Navy Day 2023: आज के समय में दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेनाओं में भारतीय सेना का नाम लिया जाता है। इसके पीछे की वजह है कि, भारत की तीनों सेनाएं थल, वायु और जल सेना हर तरफ से देश की सुरक्षा में तत्पर है। अगर इतिहास के पन्नों को उठा कर देखें तो भारत की सेनाओं ने हर जगह दुश्मनों को पस्त किया है। यही वजह है कि दुश्मन की सेना, भारतीय सेना के नाम से थर-थर कांपती है। जिस तरह से जमीन और हवा में भारतीय सेना के सैनिक मुस्तैद रहते हैं, ठीक उसी तरह से देश की सुरक्षा में जल सेना का भी बड़ा हाथ है। भारतीय नौसेना के जवान, जिन्हें हम जल प्रहरी कह सकते हैं, वह जल मार्ग की सुरक्षा में मुस्तैद रहते हैं। ऐसे में उनके इसी योगदान को सलाम करने के लिए हम 4 दिसंबर के दिन नौसेना दिवस मनाते हैं। इस दिन को मनाने की शुरुआत तब से हुई थी, जब 1971 में भारत पाक के युद्ध में भारतीय जल सेना ने देश को जीत दिलाई। इसी एतिहासिक दिन हर साल नोसेना दिवस मनाया जाता है। दुनिया की टॉप 10 नौसेना में से एक है भारतीय नौसेना भारतीय नौसेना दुनिया की टॉप 10 नौसेना में से एक है और इसका स्थान सातवें नंबर पर आता है. यह दक्षिण एशिया की सबसे शक्तिशाली नौसेना है. भारतीय शस्त्र सेना में तीन प्रभाग होते हैं- भारतीय थल सेना, वायुसेना और नौसेना. भारतीय थल सेना हमारी धरती की रक्षा करती है. नौसेना पानी में रक्षा करती है और वायुसेना आकाश में हमारी रक्षा करती है. आधुनिक भारतीय नौसेना की नींव 17वीं शताब्दी में रखी है. ईस्ट इंडिया कंपनी ने समुद्री सेना के रूप में ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की और 1934 में रॉयल इंडियन नेवी की स्थापना हुई. न झुकने दिया तिरंगे को, न युद्ध कभी ये हारे हैं,भारत माता तेरे वीरों ने दुश्मन चुन-चुन के मारे हैं।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet