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हुड्डा का संकेत, कांग्रेस बना सकती है कुमारी शैलजा को हरियाणा का CM

चंडीगढ़. हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 के लिए मतगणना से पहले मुख्यमंत्री के नाम की चर्चा तेज हो चुकी है। तमाम एग्जिट पोल में राज्य में कांग्रेस की सरकार बनाने का अनुमान लगाया है। इस बीच कांग्रेस में खेमेबाजी शुरू हो चुकी है। हरियाणा कांग्रेस में कई नामों की चर्चा चल रही है। इस बच, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने विश्वास जताया है कि उनकी पार्टी राज्य में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगी। साथ ही उन्होंने कहा है कि आलाकमान तय करेगा कि हरियाणा का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। एग्जिट पोल्स की बात करें तो 90 सीटों में से 50-58 सीटों पर कांग्रेस के खाते में जाती दिख रही हैं। हरियाणा में बहुमत के लिए सिर्फ 46 सीटों की आवश्यक्ता है। वहीं, यहां भाजपा जीत की हैट्रिक लगाने से दूर होती नजर आ रही है। भाजपा को 20-28 सीटों से संतोष करना पड़ सकता है। 2019 के विधानसभा चुनाव में भगवा पार्टी 40 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। हरियाणा में मुख्यमंत्री पद की दौड़ में कुमारी शैलजा का नाम भी उछाला जा रहे है। न्यूज-18 की रिपोर्ट के मुताबिक उनके बारे में जब कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि राजनीति ऐसी चीज है कि कोई भी आकांक्षा रख सकता है। उन्होंने कहा कि हालांकि एक प्रक्रिया होती है। विधायक अपनी राय देंगे और आलाकमान फैसला करेगा। हुड्डा ने कहा, “मुख्यमंत्री पद पर सभी का अधिकार होता है। यह लोकतंत्र है। आलाकमान जो भी फैसला करेगा, हम उसे स्वीकार करेंगे।” भूपेंद्र हुड्डा ने कहा, “कुमारी शैलजा हमारी वरिष्ठ नेता हैं।” इससे पहले कांग्रेस के लिए एक प्रमुख दलित चेहरा और पांच बार सांसद रहीं कुमारी शैलजा ने गुरुवार को संकेत दिया कि मुख्यमंत्री पद के लिए शीर्ष नेताओं द्वारा उनके नाम पर विचार किए जाने की संभावना है। समाचार एजेंसी एएनआई ने उनके हवाले से कहा, “मुझे लगता है कि जिन नामों पर मुख्यमंत्री पद के लिए चर्चा होगी उनमें से एक मैं भी रहूंगी।”उन्होंने कहा कि आलाकमान कोई भी फैसला लेने से पहले वरिष्ठता और पार्टी में योगदान को ध्यान में रखेगा। आरको बता दें कि हरियाणा में सभी 90 विधानसभा क्षेत्रों के लिए मतदान शनिवार को संपन्न हुआ। भाजपा अपने 10 साल के शासन को फिर से हासिल करने का लक्ष्य लेकर चल रही है, जबकि कांग्रेस सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रही है। सी-वोटर के अनुसार, कांग्रेस को 50-58 सीटें जीतने का अनुमान है, जबकि भाजपा को 20-28 सीटें जीतने की उम्मीद है। एग्जिट पोल में जेजेपी+ को 0-2 सीटें और इनेलो गठबंधन और आप को कोई सीट नहीं मिलने का अनुमान है। अन्य के खाते में 10-14 सीटें जा सकती हैं। पीपुल्स पल्स एग्जिट पोल सर्वे ने भविष्यवाणी की है कि कांग्रेस 49 सीटें जीत सकती है, जबकि इसने भाजपा को 24 सीटें दी हैं। इसने जेजेपी+ को एक सीट और इनेलो+ तथा आप को कोई सीट नहीं मिलने की भविष्यवाणी की है। सर्वे में अन्य को 16 सीटें मिलने की उम्मीद है।

भोपाल के जहांगीराबाद में 16 साल से कैद महिला का शरीर बन गया था हड्डियों का ढांचा, पुलिस ने किया रेस्क्यू

भोपाल. शहर के जहांगीराबाद इलाके में सोलह साल से घर में कैद एक विवाहित महिला का शनिवार को भोपाल पुलिस ने रेस्क्यू किया। महिला को ससुराल वालों ने वर्ष 2008 से उसे कैद रखे थे और उसके बाहर जाने व मायके पक्ष के लोगों से मिलने पर पाबंदी लगा रखी थी। पीड़िता के पिता ने महिला थाना पुलिस को एक आवेदन देकर मदद मांगी थी। इसके बाद पुलिस तुरंत सक्रिय हुई और जहांगीराबाद के कोली मोहल्ले में पहुंची। पुलिस ने घर के भीतर पहुंचकर देखा तो पाया कि महिला बेहद कमजोर अवस्था में पलंग पर पड़ी थी। वह ठीक से बोलने की स्थिति में भी नहीं थी। पुलिस ने महिला को रेस्क्यू कर उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। पिता ने की थी शिकायत पुलिस के अनुसार महिला थाना में किशन लाल साहू निवासी जिला नरसिंहपुर ने आकर शिकायती दिया था। उसमें उन्होंने बताया कि उनकी पुत्री रानू साहू का विवाह 2006 में किया गया था। वर्ष 2008 के बाद से ससुराल वालों ने पुत्री को उनसे मिलने नही दिया है। पुत्री के बेटे और बेटी को भी उससे दूर कर कहीं भेज दिया गया है। ससुराल पक्ष पर कड़ी कार्रवाई की मांग फरियादी पिता ने पत्र में यह भी लिखा कि ससुराल में उनकी पुत्री को प्रताड़ित किया जा रहा है। उसकी हालत खराब होने के बारे में पड़ोसियों से सूचना मिली। उन्होंने पुलिस से गुहार लगाई कि पुत्री का घर से रेस्क्यू कर घर से रेस्क्यू किया जाकर उपचार दिलाया जाए एवं ससुराल पक्ष के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। मामले की शिकायत मिलने के बाद महिला थाना पुलिस ने जहांगीराबाद पुलिस स्टाफ की मदद से महिला रानू को रेस्क्यू किया गया। बेहद कमजोर हालत में मिली महिला पलंग पर पड़ी रानू की हालत देखकर पुलिस भी दंग रह गई। 16 बरस से घर में कैद रानू बेहद कमजोर हालत में थी। चमड़ी हड्डियों से चिपक गई थी। वह बोलने की स्थिति में भी नही थी। उसकी गंभीर हालत देख पुलिस ने उसे स्वजन के साथ अस्पताल भेजकर भर्ती कराया।

खंडवा: महिला की नर्मदा नदी के खेड़ीघाट पर साड़ी बांधकर करवाई डिलेवरी

खंडवा. इंदौर-इच्छापुर सड़क मार्ग पर मोरटक्का में नर्मदा नदी के खेड़ीघाट पर महिला का प्रसव साड़ी की आड़ में करवाना पड़ा। वायरल हो रहे वीडियो में स्थानीय महिलाओं द्वारा प्रसव करवाने का उल्लेख करते हुए महिला स्वास्थ्यकर्मी पर सहयोग नहीं करने के आरोप लगाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सूचना पर नर्स को वहां भेजा गया था, उसने प्रसव करवाया और महिला तथा नवजात को स्वास्थ्य केंद्र लाकर इलाज किया गया। दोनों स्वस्थ हैं। महिला की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। महिला को प्रसव पीड़ा हुई तो तखत पर लेट गई बताया जाता है महिला और उसका पति खेड़ीघाट पर ही रहकर गुजर-बसर करते हैं। शनिवार सुबह से पति काम पर गया हुआ था। घाट पर महिला को प्रसव पीड़ा हुई तो वहीं तखत पर लेट गई। वहां मौजूद आसपास की महिलाओं ने उसकी मदद की। सूचना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को दी गई। एएनएम ने कहा- प्रसव हो चुका था एएनएम मंजुला भालेराव ने बताया कि सूचना पर मौके पर पहुंची तो सामान्य प्रसव हो चुका था। प्राथमिक चिकित्सा के बाद स्वास्थ्य केंद्र लाकर नवजात का टीकाकरण व दोनों का उपचार किया गया। लापरवाही जैसी कोई बात नहीं है। इस दौरान स्वास्थ्य केंद्र पर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

भारत और बांग्लादेश की तीन मैच की टी20 सीरीज ग्वालियर में आज से होगी शुरू, 3 प्लेयर कर सकते हैं डेब्यू

ग्वालियर भारत और बांग्लादेश के बीच कल से ग्वालियर में शुरू होने वाली तीन मैच की टी20 सीरीज में अपनी तेज गेंदबाजी के कारण क्रिकेट जगत का ध्यान खींचने वाले मयंक यादव की फॉर्म और फिटनेस की परीक्षा होगी जबकि अन्य युवा खिलाड़ियों के पास भी अपनी चमक बिखेरने का यह शानदार मौका होगा। मयंक ने इस साल के शुरू में इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के दौरान लगातार 150 किमी की रफ्तार से गेंदबाजी करके लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा था लेकिन पसलियों में खिंचाव के कारण उन्हें टूर्नामेंट के बीच से ही हटना पड़ा था। मयंक के अलावा ये भी कर सकते हैं डेब्यू अमूमन किसी भी खिलाड़ी को राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने के लिए घरेलू क्रिकेट में अपनी फिटनेस साबित करनी पड़ती है लेकिन 22 वर्षीय मयंक को उनके विशेष कौशल के कारण भारतीय टीम में जगह दी गई है। बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज में उनकी फॉर्म और फिटनेस की परीक्षा होगी। अभी यह देखना होगा कि उन्होंने जिस सटीकता और नियंत्रण के साथ आईपीएल में गेंदबाजी की थी, वह उसी की तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गेंदबाजी कर सकते हैं या नहीं। मयंक के अलावा बांग्लादेश के खिलाफ इस सीरीज में दिल्ली के तेज गेंदबाज हर्षित राणा और ऑलराउंडर नीतीश कुमार को भी भारत की तरफ से पदार्पण का मौका मिल सकता है। अभिषेक शर्मा के पास है बेहतरीन मौका न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज को देखते हुए शुभमन गिल, ऋषभ पंत, यशस्वी जायसवाल, मोहम्मद सिराज और अक्षर पटेल को बांग्लादेश के खिलाफ टी20 सीरीज से विश्राम दिया गया है। कप्तान सूर्यकुमार यादव और ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या टीम में शामिल दो बड़े नाम हैं। उनके अलावा टी20 विश्व कप की विजेता टीम में शामिल रहे शिवम दुबे और अर्शदीप सिंह को भी इस सीरीज के लिए टीम में चुना गया है। सीनियर खिलाड़ियों को विश्राम दिए जाने के कारण अभिषेक शर्मा जैसे खिलाड़ियों के पास अपना कौशल दिखाने का यह बेहतरीन मौका है। अभिषेक ने जिंबॉब्वे के खिलाफ शतक लगाया था। बांग्लादेश के खिलाफ उनके साथ संजू सैमसन पारी की शुरुआत कर सकते हैं। पराग नहीं दिखा पाए आईपीएल जैसी फॉर्म रियान पराग को जुलाई के बाद भारत की तरफ से छह टी20 मैच में खेलने का मौका मिला है लेकिन वह इनमें आईपीएल जैसी फॉर्म नहीं दिखा पाए। स्पिनर वरुण चक्रवर्ती भी इस सीरीज से वापसी करेंगे। रवि बिश्नोई टीम में शामिल दूसरे विशेषज्ञ स्पिनर हैं। रिजर्व विकेटकीपर के रूप में चुने गए जितेश शर्मा ने जून में आईपीएल के बाद कोई मैच नहीं खेला है। उन्हें अभी तक जिन नौ टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में खेलने का मौका मिला है उनमें वह अपना जलवा दिखाने में नाकाम रहे हैं। भारतीय टीम बांग्लादेश के खिलाफ इन तीन मैच के बाद अगले महीने दक्षिण अफ्रीका में चार टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलेगी। उस सीरीज के लिए भी भारत के सीनियर खिलाड़ी उपलब्ध नहीं रहेंगे क्योंकि तब भारतीय टीम टेस्ट सीरीज खेलने के लिए ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर होगी। ग्वालियर में 14 साल के बाद ऐसा होगा जहां तक बांग्लादेश का सवाल है तो उसे अपने स्टार ऑलराउंडर शाकिब अल हसन के बिना खेलने की आदत डालनी होगी। शाकिब ने पिछले महीने टेस्ट और टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की थी। भारत ने टेस्ट सीरीज में बांग्लादेश को दोनों मैच में हराया था लेकिन उसकी टी20 टीम के अधिकतर खिलाड़ी उस टीम का हिस्सा नहीं थे। यह मैच श्रीमंत माधवराव सिंधिया स्टेडियम में खेला जाएगा जिससे ग्वालियर में 14 साल के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की भी वापसी होगी। इस शहर में आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच वनडे के रूप में 2010 में खेला गया था। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले गए इस मैच में सचिन तेंदुलकर वनडे में दोहरा शतक जड़ने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बने थे। भारत: सूर्यकुमार यादव (कप्तान), अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), रिंकू सिंह, हार्दिक पांड्या, रियान पराग, नितीश कुमार रेड्डी, शिवम दुबे, वॉशिंगटन सुंदर, रवि बिश्नोई, वरुण चक्रवर्ती, जितेश शर्मा (विकेटकीपर), अर्शदीप सिंह, हर्षित राणा, मयंक यादव। बांग्लादेश: नजमुल हुसैन शंटो (कप्तान), तंजीद हसन तमीम, परवेज हुसैन एमोन, तौहीद हृदोय, महमूद उल्लाह, लिटन कुमेर दास, जेकर अली अनिक, मेहदी हसन मिराज, महेदी हसन, रिशाद हुसैन, मुस्तफिजुर रहमान, तस्कीन अहमद, शोरफुल इस्लाम , तंजीम हसन साकिब, रकीबुल हसन।

गाजा की मस्जिद पर की इजरायल ने Air Strike, 18 लोगों की मौत; युद्ध की पहली वर्षगांठ मनाने जुटे थे लोग

गाजा. गाजा पर इजरायल के हमले आज भी जारी हैं। रविवार को सुबह-सुबह एक मस्जिद पर हुई भीषण बमबारी में 18 से अधिक लोगों के मारे जाने की खबर है। फिलिस्तीनी समाचार एजेंसी वफा ने इसकी जानकारी दी है। इस हमले में दर्जनों लोग घायल हो गए हैं। इजरायल का दावा है कि यहां हमास का कमांड सेंटर था। आपको बता दें कि बीते साल 7 अक्तूबर से दोनों देशों के बीच युद्ध जारी है। इसकी पहली बरसी से ठीक पहले मध्य गाजा पट्टी के डेर अल-बला में अल-अक्सा अस्पताल के पास मौजूद मस्जिद पर हमला हुआ है। प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि हताहतों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि मस्जिद का इस्तेमाल विस्थापित लोगों को रखने के लिए किया जा रहा था। इजरायली सेना ने एक बयान में कहा कि उसने हमास के आतंकवादियों पर एक सटीक हमला किया है। वे डेर अल बलाह के क्षेत्र में ‘शुहादा अल-अक्सा’ मस्जिद के रूप में काम करने वाली एक संरचना में लगे एक कमांड और कंट्रोल सेंटर के भीतर काम कर रहे थे। इससे पहले हमास की सशस्त्र शाखा अल-कस्साम ब्रिगेड ने वेस्ट बैंक के शहर तुलकरम पर एक इजरायली हमले में अपने एक प्रमुख कमांडर जही यासर अब्द अल-रजेक औफी के साथ सात अन्य लड़ाकों की मौत की पुष्टि की थी। हमास ने शुक्रवार को एक बयान में यह बातें कही। हमास की सशस्त्र शाखा अल-क़स्साम ब्रिगेड ने कहा कि इज़रायल को अपने आपराधिक कृत्यों की कीमत चुकानी होगी। इजरायल रक्षा बलों (आईडीएफ) ने गुरुवार रात घोषणा की कि उसने हमास नेटवर्क के प्रमुख कमांडर औफी को मार गिराया है। आईडीएफ ने एक बयान में कहा कि औफी ने 02 सितंबर को अटेरेट में कार बम विस्फोट की योजना बनाई और उसका नेतृत्व किया था। फिलिस्तीन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक संक्षिप्त बयान में कहा कि गुरुवार को वेस्ट बैंक में तुलकरम शरणार्थी शिविर को निशाना बनाकर किए गए एक इज़रायली हवाई हमले में कम से कम 18 फिलिस्तीनी मारे गए और कई अन्य घायल हो गए थे। आपको बता दें कि इजरायली-फिलिस्तीनी संघर्ष में की शुरुआत में 1200 लोग मारे गए और लगभग 250 लोगों को बंधक बना लिया गया था। वहीं, गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, गाजा पर इजरायल के हमले के बाद 42,000 फिलिस्तीनी मारे गए हैं। इन हमलों ने लगभग 23 लाख लोगों को विस्थापित कर दिया है। फिलिस्तीन के लोग भूख का संकट से जूझ रहे हैं।

दंतेवाड़ा जैविक कृषि जिला बनने की ओर अग्रसर, जैविक कृषि की मिसाल बनेगा

दंतेवाड़ा  जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग के द्वारा आकांक्षी जिला दंतेवाड़ा को जैविक जिला बनाने की ओर वृहद स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों में प्रमुख रूप से जिले के किसानों को जैविक खेती की विभिन्न तकनीकों से अवगत कराया जा रहा है। किसानों को रासायनिक खेती को छोड़ कर जैविक खेती की ओर अग्रसर करना एवं किसानों का जैविक प्रमाणीकरण इत्यादि गतिविधियां शामिल है। गौरतलब है कि दंतेवाड़ा जिले में रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों का प्रचार-प्रसार और विक्रय प्रतिबंधित किया गया है। इसके अतिरिक्त वृहद क्षेत्र प्रमाणीकरण अंतर्गत जिले के 110 गांव के 10 हजार 264 किसानों के 65 हजार 279 हेक्टेयर भूमि का जैविक प्रमाणीकरण किया जा चुका है जो कि देश में सबसे बड़ा क्षेत्र है। जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि के लिए जिला प्रशासन के अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की मंशा के अनुरूप मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य के सभी आकांक्षी जिले लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। गौरतलब है कि दंतेवाड़ा जिले में वर्तमान में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए जिले के 220 ग्रामों में तीन चरणों में कृषक खेत पाठशाला का आयोजन के साथ-साथ जैविक कार्यकर्ताओं के माध्यम से तकनीकी सहयोग किसानों को दिया जा रहा है। इसके साथ-साथ जैविक किसानों को विभिन्न जगहों पर अभ्यास भ्रमण एवं उनके लिए आवासीय प्रशिक्षणों का आयोजन भी किया जा रहा है। कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने दंतेवाड़ा में लोक सुराज अभियान में अधिकारियों को इसके लिए कार्य योजना बनाने को कहा। उन्होंने अभियान के दौरान पूरनतराई नर्सरी में चल रहे कृषकों के प्रशिक्षण सत्र को भी संबोधित किया। उन्होंने क्षेत्र में सिंचाई क्षमता को बढ़ाने के लिए 14 करोड़ 84 लाख की तीन सिंचाई योजनाओं की घोषणा की। इसमें फूलपाड़ जलाशय, दंतेवाड़ा व्यपवर्तन तथा कुंदेली योजना शामिल है। किसान अपनी आधी भूमि में खेती करें, एक तिहाई भूमि में पशुपालन तथा एक तिहाई भूमि में फल-फूल की खेती करें। उन्होंने कहा कि आपको नवाचार अपनाना चाहिए। आंध्र में अमरूद की बहुत माँग है नई वैरायटी के अमरूद का उत्पादन कर आप अच्छा लाभ कमा सकते हैं। लीची भी अच्छा फायदा देती है। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा खाद-बीज के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण दिया जाता है। पंप के लिए अनुदान दिया जाता है। कृषि उपकरणों के लिए अनुदान दिए जाते हैं तो इसे अपनाने के लिए किसानों को आगे आना चाहिए।

31 अक्टूबर या 1 नवंबर, कब मनाई जाएगी दीपावली कन्फ्यूजन जारी ? ज्योतिषी ने दूर किया भ्रम

 हर साल की तरह इस साल भी दिवाली का त्योहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाएगा, लेकिन इस बार तिथि की शुरुआत और समापन के बीच त्योहार मनाने की तारीखों को लेकर असमंजस खड़ी हो गई है. हिंदू धर्म के बड़े त्योहारों में से एक दिवाली को प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है. इसकी तैयारी महीनों पहले शुरू हो जाती है. इस दिन भगवान श्रीराम 14 वर्ष के वनवास के बाद वापिस अयोध्या आए थे, लेकिन इस बार दिवाली 31 अक्टूबर को मनाई जाएगी या फिर 1 नवंबर को इसको लेकर बड़ी असमंजस बनी हुई है. सनातन धर्म के पर्वों की तिथियों को लेकर अक्सर मतभेद रहता है. देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग पंचांगों के अनुसार ज्योतिर्विद पर्वों की तिथियों का निर्धारण कर देते हैं. ऐसा ही कुछ इस बार दीपावली के पर्व पर भी हुआ है. काशी में जहां एक ओर दीपोत्सव का पर्व 31 अक्टूबर तय हो गया है तो वहीं अयोध्या सहित पश्चिम यूपी में 1 नवंबर को दिवाली के मनाने की बात सामने आ रही है. तो आइए जानते हैं कि ज्योतिष और धर्म शास्त्र के मुताबिक, दीपावली का यह महत्वपूर्ण पर्व कब मनाया जाएगा. काशी के ज्योतिष ने दिवाली की तिथि को लेकर क्या कहा काशी के ज्योतिष ऋषि द्विवेदी ने बताया कि सनातन धर्म में कार्तिक अमावस्या को दीपोत्सव या दीपावली मनाया जाता है. जिसका सभी पर्वों में अपना एक विशिष्ट स्थान है. वहीं, कार्तिक अमावस्या इस बार दो दिन है. इस बार कार्तिक अमावस्या तिथि 31 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 12 मिनट से लग रही है जो अगले दिन 1 नवंबर को सायं 5 बजकर 13 मिनट तक रहेगी. देखा जाए तो इस बार दीपावली की तिथि के निर्णय ने लोगों में संशय प्रकट कर दिया है. ज्योतिष ऋषि द्विवेदी ऐसे संदर्भ में धर्म सिंधु का निर्णय सर्वोपरि माना जाता है. जिसके अनुसार कहा गया है कि “पूर्वत्रैव प्रदोष व्याप्तौ लक्ष्मीपूजनादौ पूर्वा अभ्यंग स्नान दौ परा” अर्थात यदि कार्तिक अमावस्या दो दिन हो तो उसमें पूर्व दिन लेना चाहिए. कारण है कि अमावस्या प्रदोष और रात्रि व्यापिनी में होनी चाहिए जो कि इस बार 31 अक्टूबर की अमावस्या प्रदोष और रात्रि में ही मिलेगी. इसलिए, दीपावली शास्त्रानुसार 31 अक्टूबर को मनाना शास्त्र संवत है. क्योंकि 1 अक्टूबर को रात्रि काल में अमावस्या नहीं मिल रही है इसलिए उस 1 नवंबर को दीपावली मनाना शास्त्र संवत नहीं है. उन्होंने आगे यह चुनौती भी दी कि जो लोग 1 नवंबर को दीपावली मनाने का दावा कर रहें हैं उन्हें शास्त्र की आज्ञा को प्रकट करना चाहिए. वाराणसी ज्योतिषाचार्य श्रीधर पांडेय का पक्ष वहीं, वाराणसी के ज्योतिषाचार्य श्रीधर पांडेय ने बताया कि दीपावली की पूजा अमावस्या में होती है और अमावस्या की रात्रि महाकाली की रात्रि होती है. 31 अक्टूबर 2024 को दोपहर 3 बजकर 12 मिनट के बाद अमावस्या लग रही है जो अगले दिन 1 नवंबर को शाम 5 बजकर 14 मिनट तक रहेगी. इसलिए, दीपावली का मान 31 अक्टूबर को ही है. दीपावली के पर्व पर महारात्रि में अमावस्या मिलनी चाहिए और इसमें उदया तिथि की मान्यता नहीं होती है. ज्योतिषाचार्य श्रीधर पांडेय माना जाता है कि अमावस्या की काली रात में माता लक्ष्मी धरती पर भ्रमण करती हैं. उस समय जो लोग अपने घरों और दरवाजे पर दीपक जलाते हैं और महानिशा काल में पूजन करते हैं, उन पर मां लक्ष्मी की कृपा होती है. कई जगहों पर उदया तिथि का तर्क देकर दीपावली को 1 नवंबर को मनाने का प्रचार अपने-अपने पंचांग के मुताबिक किया जा रहा है जो सरासर गलत और भ्रमित करने वाला है. धर्म शास्त्रों के अनुसार, 31 अक्टूबर की रात्रि ही दीपावली मनाई जाएगी. ज्योतिष उमंग नाथ शर्मा का तथ्य वाराणसी के एक अन्य ज्योतिष उमंग नाथ शर्मा ने बताया कि 31 अक्टूबर को ही दीपावली मनाई जाएगी. क्योंकि, रात्रि में अमावस्या का मिलना आवश्यक होता है और काशी से जितने भी पंचांग निकलते हैं उनकी गणित शास्त्रीय विधि से पूर्ण रहती है. सिंधु ग्रंथ में संदेहास्पद तिथि और पर्व को नक्षत्र और तिथि के अनुसार तय किया जाता है कि कब और किस दिन पर्व मनाए जाएंगे. निर्णय सिंधु के आधार पर पूर्ण रूप से दीपावली का पर्व 31 अक्टूबर को ही मनाई जाएगी. पूर्वांचल की तुलना में पश्चिम में सूर्योदय का समय भिन्न होता है जिसकी वजह से उदया तिथि के अनुसार चलने वाले कई जगहों पर 1 नवंबर को दीपावली मनाने की बात सामने आ रही है. जो शास्त्र संवत नहीं है. प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताई दीपावली की तिथि वहीं, काशी विद्वत परिषद के महामंत्री और बी.एच.यू संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के प्रो. रामनारायण द्विवेदी के अनुसार 31 अक्टूबर को पूर्णकालिक प्रदोष व्यापिनी अमावस्या मिलने के कारण और धर्मसिंधु ग्रंथ के अनुसार यदि ये खास अमावस्या जिस दिन प्राप्त होती है उसी दिन दीपोत्सव मनाने के विधान शास्त्रों में बताए गए हैं. प्रो. रामनारायण द्विवेदी श्री काशी विद्वत परिषद तिथि पर्व निर्णय के अनुसार भी, 31 अक्टूबर को ही दीपावली मनाई जाएगी. दरअसल, 1 नवंबर को अमावस्या पूर्णकालिक प्रदोष व्यापिनी से न मिलकर अंशकालिक ही मिल रही है जिस वजह से जो शास्त्र संवत नहीं है. इसलिए दीपावली का पर्व 31 अक्टूबर को मनाना ही शास्त्र संवत है. काशी के सभी पंचांगकारों ने 31 अक्टूबर को ही दीपोत्सव मनाने का विधान लिखा है. दीपावली का पर्व प्रदोष काल का ही पर्व होता है. इसलिए इसमें उदया तिथि के गृहीत का विधान नहीं है. यह है दिवाली का शुभ मुहूर्त  इस बार तारीख के साथ ही दिवाली के शुभ मुहूर्त को लेकर भी असमंजस है. ऐसे में दिवाली का पहला शुभ मुहूर्त प्रदोष काल में शाम 5 बजकर 36 मिनट से लेकर रात के 8 बजकर 11 मिनट तक रहेगा. वहीं वृषभ काल में शुभ मुहूर्त शाम के 6 बजकर 20 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 15 मिनट तक रहेगा. इस समय में लक्ष्मी पूजन करना शुभ होगा. 

बैंक अकाउंट या इंश्योरेंस, नॉमिनी नहीं है तो फंस सकता है पैसा, आज ही करें ये काम

नई दिल्ली  रोहित (बदला हुआ नाम) एक प्राइवेट कंपनी में सीनियर पोस्ट पर थे। उन्होंने 30 लाख रुपये का लाइफ इंश्योरेंस कराया था। साथ ही वे शेयर मार्केट में भी पैसे निवेश करते थे। एक दुर्घटना में उनका निधन हो गया। जब उनके पिता इंश्योरेंस की रकम लेने बीमा कंपनी पहुंचे तो उन्हें पैसा नहीं मिला। कारण था कि रोहित ने अपने इंश्योरेंस में नॉमिनी का नाम नहीं लिखवाया था। इसी प्रकार उन्हें शेयर का भी पैसा भी नहीं मिला, क्योंकि उसमें भी कोई नॉमिनी नहीं था। बाद में उन्हें एक वकील की मदद लेनी पड़ी। कोर्ट-कचहरी के काफी चक्कर लगाने के बाद उन्हें अपने बेटे की रकम मिली। इसमें पैसा और समय दोनों खर्च हुए। परेशानी हुई वह अलग। कौन होता है नॉमिनी? नॉमिनी वह शख्स होता है जो अकाउंट होल्डर की मृत्यु के बाद अकाउंट से उसके पैसे को निकाल सके। यह शख्स परिवार का सदस्य या दोस्त या जानकार, कोई भी हो सकता है। अकाउंट होल्डर जब चाहे, अपने अकाउंट से नॉमिनी का नाम बदल सकता है। काफी लोग नॉमिनी के तौर पर किसी संस्था का भी नाम लिखवा देते हैं। नॉमिनी वसीयतनामे से बिल्कुल अलग है। वसीयतनामे में वह शख्स अकाउंट होल्डर की संपत्ति का मालिक हो जाता है, जबकि नॉमिनी जरूरी नहीं कि मालिक हो। संपति का मालिक नहीं होता नॉमिनी नॉमिनी अकाउंट होल्डर की संपत्ति का मालिक नहीं, बल्कि केयरटेकर होता है। नॉमिनी अगर अकाउंट होल्डर की संपत्ति का कानूनी तौर पर अकेला वारिस है तो वह उस संपत्ति को अपने पास रख सकता है। वहीं अगर कानूनी वारिस नहीं है तो उसकी जिम्मेदारी है कि वह उस संपत्ति को मृतक के कानूनी वारिसों में बांट दे। अकाउंट होल्डर की मृत्यु के बाद बैंक या दूसरे वित्तीय संस्थान अकाउंट में जमा रकम नॉमिनी को दे देते हैं। इसके बाद नॉमिनी की जिम्मेदारी है कि वह उस रकम को मृतक के वारिसों तक पहुंचाए। अगर वह रकम उन्हें नहीं पहुंचाता है तो यह मामला नॉमिनी और मृतक के वारिसों के बीच का हो जाता है। यहां बैंक की कोई भूमिका नहीं रहती। कब जुड़वाएं नॉमिनी? बैंक अकाउंट, पॉलिसी, इंश्योरेंस, डीमैट अकाउंट, लॉकर, एफडी आदि में नॉमिनी का नाम जरूर लिखवाना चाहिए। वैसे तो नॉमिनी के तौर पर किसी भी शख्स का नाम लिखवा सकते हैं। लेकिन जानकार कहते हैं कि अकाउंट होल्डर के निधन के बाद परिवार के लोग कानूनी चक्कर में न पड़ें, इससे बेहतर है कि उसी शख्स का नाम लिखवाएं जो कानूनी वारिस हो। अगर अकाउंट खुलवा लिया है और नॉमिनी का नाम नहीं लिखवाया है तो अब भी नाम लिखवा सकते हैं। अकाउंट में एक से ज्यादा नॉमिनी का भी नाम लिखवा सकते हैं। नॉमिनी न होने पर पड़ सकते हैं ये चक्कर     बैंक या इंश्योरेंस कंपनी मृतक की रकम को उसके परिवार के किसी भी सदस्य को नहीं देगी। बैंक लीगल वारिस के लिए कोर्ट की तरफ से जारी पेपर मांग सकता है।     कई बार कोई दूर का रिश्तेदार या अनजान शख्स भी खुद काे मृतक का वारिस घोषित कर देता है। ऐसे में मामला और उलझ जाता है।     अगर परिवार के सदस्यों में आपसी कलह हो जाए तो मामला कोर्ट तक चला जाता है। इसका फैसला होने में 6 महीने या कई साल तक लग सकते हैं।     परिवार के लोग किसी कानूनी चक्कर में न फंसें, इसलिए आज ही अपने अकाउंट में कानूनी वारिस का नाम नॉमिनी के तौर पर लिखवाएं।

दुनिया की सबसे लंबी खजाना खोज का अंत, मिला सोने का उल्लू

पेरिस  दुनिया की सबसे लंबी खजाना खोज का अंत हो गया। फ्रांस की एक घोषणा के बाद ऐसा लगता है कि 31 साल बाद दफन सोने के उल्लू की मूर्ति अंततः खोज ली गई है। तीन दशकों पहले फ्रांस में मायावी सुनहरे उल्लू की मूर्ति की खोज शुरू हुई थी। 1993 में यह शुरू हुई, जिसने दुनिया भर के हजारों प्रतिभागियों को मोहित कर लिया। प्रत्येक ने 11 मुश्किल पहेलियों की एक सीरीज को समझने की कोशिश की, जो उल्लू की दफन कांस्य की मूर्ति तक ले जा सकती थी। यह कोई प्राचीन खजाना नहीं है। बल्कि प्रतियोगिता के तहत रखा गया था। खजाने की खोज को ‘गोल्डन आउल’ के नाम से जाना जाता है। पहेली निर्माता मैक्स वैलेन्टिन के दिमाग की यह उपज थी। फ्रांस में कहीं उन्होंने इसे दफना दिया था। इससे जुड़े जटिल सुराग 1993 में प्रकाशित एक पुस्तक में थे। खजाना खोज की आधिकारिक चैटलाइन पर किताब के चित्रकार माइकल बेकर ने गुरुवार सुबह एक पोस्ट में कहा, ‘हम पुष्टि करते हैं कि गोल्डन उल्लू की प्रतिकृति कल रात खोदी गई थी, और साथ ही ऑनलाइन प्रणाली पर इसका सॉल्यूशन भेज दिया गया है। इसलिए अब किसी भी स्थान के लिए यात्रा करना और वहां जाकर खुदाई करना व्यर्थ है।’ जीतने वाले को मिलेगा सोने का उल्लू पहेली सुलझाने वाले को अंतिम पुरस्कार के रूप में एक असली सोने का उल्लू मिलना था। इसकी कीमत 1 करोड़ 38 लाख थी। उल्लू कहां पर दफन था इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई है। न ही इसके खोजने वाले के बारे में बताया गया है। खजाना खोजने वालों के बीच यह चर्चा का विषय बन गया है। खजाना खोजियों ने सोशल मीडिया पर अपने रिएक्शन देने शुरू कर दिए। एक शख्स ने लिखा, ‘अंततः मुक्ति मिली।’ दूसरे ने मजाक में कहा, ‘मुझे नहीं लगा था कि यह देखने के लिए मैं जिंदा रहूंगा।’ कहां छिपा था जवाब इस खोज में हजारों लोगों ने हिस्सा लिया। इस पूरे खेल ने किताबों, मैग्जीन और इससे जुड़ी वेबसाइटों को जन्म दिया। 2009 में वैलेन्टिन की मौत हो गई। बाद में बेकर ने इस पूरी प्रतियोगिता की जिम्मेदारी ली। हालांकि कुछ खजाना खोजी इस बात को लेकर डरे हैं कि इसकी खोज मेटल डिटेक्टर से की गई होगी। नियमों के तहत खजाना खोजने वाले को यह दिखाना होगा कि पहेलियों को उसने सही ढंग से हल किया है। न कि वह उसे सिर्फ संयोग से मिल गया। मूल रूप से दबे हुए उल्लू के बारे में बेकर को भी नहीं पता था। इसका जवाब वैलेंटाइन के परिवार के पास एक सीलबंद लिफाफे में था।

येरुशलम में 35 एकड़ जमीन के टुकड़ा जिसका ताल्लुक तीन-तीन धर्मों से है, जिसका कब्ज़ा पाने तीसरे विश्व युद्व के मुहाने पर ….

येरुशलम हिज्बुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह की मौत के बाद पूरी दुनिया की निगाहें अब इजरायल और फिलिस्तीन पर लगी हैं. क्या इजरायल अब लेबनान पर जमीनी हमला करेगा? क्या ईरान इजरायल पर पलट वार करेगा? और क्या इस बीच सारी दुनिया दो हिस्सों में बंट जाएगी? दरअसल, ये मसला ही कुछ ऐसा है कि इसे सुलझाना आसान नहीं है. क्योंकि इस मसले की जड़ में 35 एकड़ जमीन का एक टुकड़ा है. 35 एकड़ जमीन के लिए जंग ये पूरी दुनिया कुल 95 अरब 29 करोड़ 60 लाख एकड़ जमीन पर बसी है. जिस पर दुनिया भर के लगभग 8 अरब इंसान बसते हैं. इस 95 अरब 29 करोड़ 60 लाख एकड़ जमीन में से सिर्फ 35 एकड़ जमीन का एक ऐसा टुकड़ा है, जिसके लिए बरसों से जंग लड़ी जा रही है. जिस जंग में हजारों जानें जा चुकी हैं. लेकिन आज भी दुनिया की कुल 95 अरब 29 करोड़ 60 लाख एकड़ जमीन में से इस 35 एकड़ जमीन के मालिकाना हक को लेकर कोई फैसला नहीं हो पाया. हमास का हमला और उसके जवाब में इजरायल की जोरदार बमबारी. जी हां, आप माने या ना मानें लेकिन सिर्फ 35 एकड़ जमीन के एक टुकड़े की वजह से इजरायल और फिलिस्तीन के बीच बरसों से ये जंग जारी है.  संयुक्त राष्ट्र के अधीन है पूरी जगह इस जंग को समझने के लिए पहले 35 एकड़ इस जमीन की पूरी सच्चाई को समझना जरूरी है. येरुशलम में 35 एकड़ जमीन के टुकड़े पर एक ऐसी जगह है, जिसका ताल्लुक तीन-तीन धर्मों से है. इस जगह को यहूदी हर-हवाइयत या फिर टेंपल माउंट कहते हैं. जबकि मुस्लिम इसे हरम-अल-शरीफ बुलाते हैं. कभी इस जगह पर फिलिस्तीन का कब्जा हुआ करता था. बाद में इजरायल ने इसे अपने कब्जे में लिया. लेकिन इसके बावजूद आज की सच्चाई ये है कि 35 एकड़ जमीन पर बसे टेंपल माउंट या हरम अल शरीफ ना तो इजरायल के कब्जे में है और ना ही फिलिस्तीन के. बल्कि ये पूरी जगह संयुक्त राष्ट्र के अधीन है.  761 सालों तक था मुस्लिम पक्ष का कब्जा 35 एकड़ जमीन का ये वो टुकड़ा है, जिस पर सैकड़ों साल पहले ईसाइयों का कब्जा हुआ करता था. लेकिन 1187 में यहां मुसलमानों का कब्जा हुआ और तब से लेकर 1948 तक मुसलमानों का ही कब्जा था. लेकिन फिर 1948 में इजरायल का जन्म हुआ और उसके बाद से ही जमीन के इस टुकड़े को लेकर जब-तब झगड़ा शुरू हो गया. आईए जान लेते हैं कि आखिर 35 एकड़ जमीन के इस टुकड़े पर ऐसा क्या है, जिसके लिए सदियों से यहूदी, ईसाई और मुस्लिम लड़ते रहे हैं.  मुस्लिमों का दावा मुस्लिम मान्यताओं के मुताबिक मक्का और मदीना के बाद हरम-अल-शरीफ उनके लिए तीसरी सबसे पाक जगह है. मुस्लिम धर्म ग्रंथ कुरान के मुताबिक आखिरी पैगंबर मोहम्मद मक्का से उड़ते हुए घोड़े पर सवार होकर हरम अल शरीफ पहुंचे थे. और यहीं से वो जन्नत गए. इसी मान्यता के मुताबिक तब येरुशलम में मौजूद उसी हरम अल शरीफ पर एक मजसिद बनी थी. जिसका नाम अल अक्सा मस्जिद है. मान्यता है कि ये मस्जिद ठीक उसी जगह पर बनी है, जहां येरुशलम पहुंचने के बाद पैगंबर मोहम्मद ने अपने पांव रखे थे. अल अक्सा मस्जिद के करीब ही एक सुनहरे गुंबद वाली इमारत है. इसे डोम ऑफ द रॉक कहा जाता है. मुस्लिम मान्यता के मुताबिक ये वही जगह है, जहां से पैगंबर मोहम्मद जन्नत गए थे. जाहिर है इसी वजह से अल अक्सा मस्जिद और डोम ऑफ द रॉक मुसलमानों के लिए बेहद पवित्र जगह है. इसीलिए वो इस जगह पर अपना दावा ठोंकते हैं. यहूदियों का दावा यहूदियों की मान्यता है येरुशलम में 35 एकड़ की उसी जमीन पर उनका टेंपल माउंट है. यानी वो जगह जहां उनके ईश्वर ने मिट्टी रखी थी. जिससे आदम का जन्म हुआ था. यहूदियों की मान्यता है कि ये वही जगह है, जहां अब्राहम से खुदा ने कुर्बानी मांगी थी. अब्राहम के दो बेटे थे. एक इस्माइल और दूसरा इसहाक. अब्राहम ने खुदा की राय में इसहाक को कुर्बान करने का फैसला किया. लेकिन यहूदी मान्यताओं के मुताबिक तभी फरिश्ते ने इसहाक की जगह एक भेड़ को रख दिया था. जिस जगह पर ये घटना हुई, उसका नाम टेंपल माउंट है. यहूदियों के धार्मिक ग्रंथ हिबू बाइबल में इसका जिक्र है. बाद में इसहाक को एक बेटा हुआ. जिसका नाम जैकब था. जैकब का एक और नाम था इसरायल. इसहाक के बेटे इसरायल के बाद में 12 बेटे हुए. उनके नाम थे टुवेल्व ट्राइब्स ऑफ इजरायल. यहूदियों की मान्यता के मुताबिक, इन्हीं कबीलों की पीढ़ियों ने आगे चल कर यहूदी देश बनाया. शुरुआत में उसका नाम लैंड ऑफ इजरायल रखा. 1948 में इजरायल की दावेदारी का आधार यही लैंड ऑफ इजरायल बना.  होली ऑफ होलीज का एक हिस्सा है वेस्टर्न वॉल  लैंड ऑफ इजरायल पर यहूदियों ने एक टेंपल बनाया. जिसका नाम फर्स्ट टेंपल था. इसे इजरायल के राजा किंग सोलोमन ने बनाया था. बाद में ये टेंपल दुश्मन देशों ने नष्ट कर दिया. कुछ सौ साल बाद यहूदियों ने उसी जगह फिर एक टेंपल बनाया. इसका नाम सेकंड टेंपल था. इस सेकंड टेंपल के अंदरुनी हिस्से को होली ऑफ होलीज़ कहा गया. यहूदियों के मुताबिक ये वो पाक जगह थी, जहां सिर्फ खास पुजारियों की छोड़ कर खुद यहूदियों को भी जाने की इजाजत नहीं थी. यही वजह है कि इस सेकंड टेंपल की होली ऑफ होलीज वाली जगह खुद यहूदियों ने भी नहीं देखी.  लेकिन 1970 में रोमन ने इसे भी तोड़ दिया. लेकिन इस टेंपल की एक दीवार बची रह गई. ये दीवार आज भी सलामत है. इसी दीवार को यहूदी वेस्टर्न वॉल कहते हैं. यहूदी इस वेस्टर्न वॉल को होली ऑफ होलीज के एक आहाते का हिस्सा मानते हैं. मगर चूंकि होली ऑफ होलीज के अंदर जाने की इजाजत खुद यहूदियों को भी नहीं थी, इसीलिए वो पक्के तौर पर ये नहीं जानते कि वो अंदरुनी जगह असल में ठीक किस जगह पर है? लेकिन इसके बावजूद वेस्टर्न वॉल की वजह से यहूदियों के लिए ये जगह बेहद पवित्र है. ईसाइयों का दावा ईसाइयों की मान्यता है कि ईसा मसीह ने इसी 35 एकड़ की जमीन से उपदेश … Read more

साइबर फ्रॉड पर नकेल के लिए सरकार का बड़ा एक्शन,काटे गए 1.77 करोड़ मोबाइल कनेक्शन , 45 लाख स्पूफ कॉल किए गए ब्लॉक

नई दिल्ली  केंद्र ने  बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित उपकरणों का उपयोग करके अब तक 1.77 करोड़ मोबाइल कनेक्शन काट दिए गए हैं। इसके अंतर्गत वह मोबाइल कनेक्शन काटे गए हैं। इनमें नकली या जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया था। इसके अलावा, चार दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) ने दूरसंचार विभाग (डीओटी) के सहयोग से एक उन्नत प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू किया है। इसके तहत अब तक 45 लाख फर्जी अंतर्राष्ट्रीय कॉलों को भारतीय दूरसंचार नेटवर्क में आने से रोका गया है। संचार मंत्रालय ने कहा, अगले चरण में एक केंद्रीकृत प्रणाली शामिल होगी, जो सभी टीएसपी में शेष बची फर्जी कॉलों को समाप्त कर देगी, इसके शीघ्र ही चालू होने की उम्मीद है। वहीं दूरसंचार विभाग ने एक उन्नत प्रणाली शुरू की है। इसके तहत भारतीय दूरसंचार उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले आने वाली अंतर्राष्ट्रीय फर्जी कॉलों की पहचान करने और उन्हें ब्लॉक करने के लिए तैयार की गई है। इस व्यवस्था को दो चरणों में लागू किया जा रहा है। पहला चरण टीएसपी स्तर पर लागू किया जा रहा है। इसके तहत अपने ग्राहकों के फोन नंबर से आने वाली फर्जी कॉल को रोका जा सकेगा। दूसरा चरण केंद्रीय स्तर पर लागू किया जा रहा है। इसके तहत दूसरे टीएसपी के ग्राहकों के फोन नंबर से आने वाली फर्जी कॉल को रोका जा सकेगा। 1.77 करोड़ मोबाइल कनेक्शनों पर कार्रवाई के तहत केंद्र ने देश के साइबर अपराध हॉटस्पॉट/जिलों में साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 33.48 लाख मोबाइल कनेक्शन काट दिए और 49,930 मोबाइल हैंडसेट ब्लॉक कर दिए। एक व्यक्ति के लिए निर्धारित सीमा से अधिक मोबाइल कनेक्शन वाले लगभग 77.61 लाख कनेक्शन काट दिए गए हैं और साइबर अपराध या धोखाधड़ी गतिविधियों में शामिल 2.29 लाख मोबाइल फोन ब्लॉक कर दिए गए हैं। चोरी/खोए हुए 21.03 लाख मोबाइल फोन में से लगभग 12.02 लाख का पता लगा लिया गया है। साथ ही डीओटी और टीएसपी ने एसएमएस भेजने में शामिल लगभग 20,000 संस्थाओं, 32,000 एसएमएस हेडर और 2 लाख एसएमएस टेम्पलेट को काट दिया है। मंत्रालय ने बताया, बैंकों और पेमेंट वॉलेट्स ने करीब 11 लाख खातों को फ्रीज कर दिया है, जो फर्जी/जाली दस्तावेजों के आधार पर लिए गए डिस्कनेक्ट मोबाइल कनेक्शन से जुड़े थे।व्हाट्सएप ने करीब 11 लाख व्हाट्सएप प्रोफाइल/खातों को बंद कर दिया है, जो फर्जी या जाली दस्तावेजों के आधार पर लिए गए डिस्कनेक्टेड मोबाइल कनेक्शन से जुड़े थे। दूरसंचार विभाग ने बताया कि अब तक 71,000 पॉइंट ऑफ सेल (सिम एजेंट) को ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है और कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 365 एफआईआर दर्ज की गई हैं।  

अमित शाह नक्सल प्रभावित राज्यों के साथ नई दिल्ली में जल करेंगे बैठक, बड़े ऑपरेशन की तैयारी में मोदी सरकार

नई दिल्ली मोदी सरकार में हुए लगातार प्रहार से सिमटते जा रहे नक्सलवाद पर अब अंतिम प्रहार की तैयारी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को नक्सल प्रभावित राज्यों के साथ नई दिल्ली में बैठक करने जा रहे हैं। इन क्षेत्रों में जनकल्याणकारी योजनाओं में तेजी लाकर इन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास के साथ ही सरकार 2026 तक देश को नक्सलमुक्त करने के लिए बड़े ऑपरेशन की रूपरेखा बना सकती है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के विरुद्ध अभी हुई बड़ी कार्रवाई के बीच नक्सली भागकर अन्य राज्यों में शरण न ले सकें, इसे लेकर भी राज्यों को सतर्क और सक्रिय करने की रणनीति अपनाई जा सकती है। अभी ताजा घटनाक्रम है कि छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों ने 32 नक्सलियों को ढेर कर दिया है। इस साल मारे गए 193 नक्सली राज्य में इस वर्ष लगभग 193 नक्सली मारे जा चुके हैं। सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं, सभी प्रभावित राज्यों में लगातार हुई नक्सलरोधी कार्रवाई का ही परिणाम है कि मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड जैसे राज्यों में नक्सली गतिविधियों पर लगभग विराम लग चुका है। बाकी के राज्यों छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध प्रदेश, तेलंगाना आदि में भी यह खात्मे की कगार पर हैं। उल्लेखनीय है कि अगस्त में रायपुर में हुई बैठक में गृह मंत्री शाह ने 2026 तक देश को नक्सलमुक्त करने का संकल्प दोहराते हुए कहा था कि अब नक्सलवाद पर अंतिम प्रहार की रणनीति बनाने की आवश्यकता है। साथ ही कहा था कि नक्सलियों के पास अभी बहुत कम समय बचा है, वह चाहें तो आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौट सकते हैं। डीजीपी और मुख्य सचिवों को सौंपा जाएगा जिम्मा सूत्रों के अनुसार, सोमवार को गृह मंत्री द्वारा की जा रही बैठक इसी अंतिम रणनीति को अमल में लाने की तैयारी के लिए है। इसमें नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक सहित केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, केंद्रीय सुरक्षा व खुफिया एजेंसियों के शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे। बताया गया है कि इन सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से आग्रह किया जाएगा कि वह राजनीतिक पहलू को किनारे कर पूरी इच्छाशक्ति के साथ नक्सलवाद के खात्मे में लगें। सुरक्षा बलों द्वारा नक्सलियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की नियमित निगरानी का जिम्मा राज्यों के पुलिस महानिदेशकों को सौंपा जा सकता है, जबकि मुख्य सचिवों से अपेक्षा रहेगी कि वह नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सरकार की विकास योजनाओं को तेजी से धरातल पर उतारने के प्रयास में जुटें, ताकि इन क्षेत्रों के निवासियों को सरकार की योजनाओं का लाभ मिले और वहां नक्लियों को फिर से पैर पसाने का अवसर न मिले। राज्यों को किया जा सकता है सतर्क महत्वपूर्ण यह भी है कि छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों ने गत दिवस ही नक्सलियों पर कड़ी कार्रवाई की है। भय के कारण यह नक्सली अन्य राज्यों में शरण न पा सकें, इसलिए भी अन्य राज्यों को सतर्क किया जा सकता है। गृह मंत्रालय द्वारा राज्यों से कहा जा सकता है कि अब अंतिम प्रहार के रूप में सभी राज्य मिलकर बड़ा ऑपरेशन शुरू करें, ताकि देश को इस बड़ी और पुरानी समस्या से निजात दिलाई जा सके।

दिल्ली में नमो भारत का सफर करने के लिए हो जाए तैयार, जल्द ही नमो भारत ट्रेन का परिचालन शुरू हो जाएगा

नई दिल्ली दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर पर जल्द ही नमो भारत ट्रेन का परिचालन शुरू हो जाएगा। इसके लिए साहिबाबाद से दिल्ली के न्यू अशोक नगर के बीच इसका ट्रायल रन शुरू कर दिया गया है। अगले वर्ष जून तक 82 किलोमीटर लंबे दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर पर इस ट्रेन का परिचालन शुरू करने का लक्ष्य है। इससे एक घंटे से भी कम समय में दिल्ली से मेरठ की यात्रा संभव हो सकेगी। वर्तमान में नमो भारत ट्रेन रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) के साहिबाबाद स्टेशन से मेरठ साउथ तक 42 किलोमीटर के खंड में संचालित है। साहिबाबाद से न्यू अशोक नगर तक नमो भारत ट्रेन चलने से आरआरटीएस के संचालित खंड की लंबाई बढ़कर 54 किलोमीटर हो जाएगी, जिसमें 11 स्टेशन होंगे। दिल्ली में न्यू अशोक नगर, आनंद विहार और सराय काले खां तीन आरआरटीएस स्टेशन हैं। ट्रेन को मैन्युअल तरीके से चलाया राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) के प्रबंध निदेशक शलभ गोयल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थिति में शनिवार को ट्रायल रन की शुरुआत हुई। सिविल स्ट्रक्चर की जांच के लिए ट्रेन को मैन्युअल तरीके से चलाया गया। ट्रैक, सिग्नलिंग, प्लेटफार्म स्क्रीन डोर (पीएसडी) और ओवरहेड बिजली आपूर्ति आदि की भी जांच होगी। अगले कुछ माह में ट्रेन के हाई-स्पीड टेस्ट सहित अन्य जांच पूरी की जाएगी। नमो ट्रेन से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य साहिबाबाद से न्यू अशोक नगर इस खंड की लंबाईः लगभग 12 किमी आनंद विहार और न्यू अशोक नगर दो आरआरटीएस स्टेशन हैं। आनंद विहार आरआरटीएस स्टेशन सबसे ज्यादा भीड़ वाला स्टेशन होगा। इस स्टेशन से दो मेट्रो लाइनों (ब्लू और पिंक), आनंद विहार रेलवे स्टेशन और दिल्ली व कौशांबी (उत्तर प्रदेश) दो आईएसबीटी जुड़ेंगे। इसे मल्टी-मॉडल इंटीग्रेशन के मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। न्यू अशोक नगर आरआरटीएस स्टेशन से न्यू अशोक नगर मेट्रो स्टेशन 100 मीटर से भी कम दूरी पर स्थित है। दोनों को फुटओवर ब्रिज (एफओबी) से जोड़ा जाएगा। आरआरटीएस स्टेशन पर पहुंचने के लिए चिल्ला गांव व मयूर विहार एक्सटेंशन की ओर से और प्राचीन शिव मंदिर के पास से दो एफओबी होंगे।  

उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा- प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिये तेजी से काम हो रहा है

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिये तेजी से काम हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार का प्रयास स्वास्थ्य के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को देश का शीर्ष राज्य बनाना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़क, बिजली, पेयजल और सिंचाई के क्षेत्र में अभूतपूर्व गति से काम हुये हैं। कृषि के क्षेत्र में प्रदेश सात वर्षों से देश का सिरमौर बना हुआ है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने जबलपुर के मझौली में 10 करोड़ रुपये लागत के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के नवीन भवन का भूमिपूजन किया। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि आयुष्मान योजना से लाखों गरीबों ने अच्छे अस्पतालों में अपना निःशुल्क उपचार कराया है। आयुष्मान कार्डधारियों को अपने उपचार के लिये अब किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, उनका इलाज सरकार करा रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने 70 वर्ष से अधिक की आयु के प्रत्येक बुजुर्ग को आयुष्मान योजना का लाभ देने का निर्णय लिया है। इसके दायरे में इनकम टैक्स चुकाने वाले और सेवा निवृत्त शासकीय अधिकारी-कर्मचारी भी आयेंगे, अमीर या गरीब का कोई भेद नहीं रहेगा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाटन का 100 बिस्तर अस्पताल में होगा उन्नयन उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाटन का 100 बिस्तर अस्पताल में उन्नयन कर इसे सिविल अस्पताल बनाने और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कटंगी के नवीन भवन के निर्माण की घोषणा की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में नये बने चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक स्टॉफ की पदस्थापना भी जल्द की जायेगी। सरकार का प्रयास है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ज़िला अस्पताल स्तर की सुविधाएँ देने के प्रयास किये जा रहे हैं ताकि लोगों को निकट स्थित केंद्र में ही स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हों और जिला अस्पताल जाने की जरूरत न पड़े। सांसद श्री आशीष दुबे, विधायक श्री अजय विश्नोई स्थानीय जन प्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री ने मातृ-शक्ति के खातों में अंतरित किये 1574 करोड़ रूपए: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वीरांगना रानी दुर्गावती की 500वीं जयंती का दिन शौर्य और बलिदान के स्मरण, नारी सशक्तिकरण एवं सम्मान का दिन है। रानी दुर्गावती अदम्य साहस और वीरता की प्रतीक थीं। उनके जीवित रहते कभी भी मुगल, पठान, सुल्तान या अन्य कोई भी आक्रांता गोंडवाना की तरफ आँख उठाकर नहीं देख सका। रानी दुर्गावती ने अंतिम श्वांस तक अपने राज्य को आक्रांताओं से सुरक्षित रखा और उसकी सुरक्षा करते हुए हंसते-हंसते प्राणोत्सर्ग कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके शौर्य और बलिदान को पुन: स्मरण करने के लिये सिंग्रामपुर में जनजातीय क्षेत्रों में विकास की नई इबारत लिखने के लिये केबिनेट करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। मुझे बेहद प्रसन्नता है कि वीरांगना रानी दुर्गावती की पहली राजधानी से आज लाड़ली बहना योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और प्रधानमंत्री उज्जवला गैस योजना में हितग्राहियों के खाते में सिंगल क्लिक से 1934 करोड़ 71 लाख रुपये की राशि अंतरित की गई है। साथ ही 70 वर्ष से अधिक उम्र के वृद्धजनों के लिए आयुष्मान कार्ड योजना का शुभारंभ और क्षेत्र के विकास के लिये 5 करोड़ 47 लाख रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण/भूमि-पूजन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को दमोह जिले के ग्राम सिंग्रामपुर में महिला सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन में उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, श्री राजेन्द्र शुक्ल सहित मंत्रि-परिषद के सभी सदस्य मौजूद रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नारी सम्मान सर्वोपरि है। सभी वर्ग की महिलाओं के लिये अनेक हितग्राही और स्व-रोजगार मूलक योजनाएँ प्रभावी रूप से संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2024-25 में लाड़ली बहना योजना में 18 हजार 984 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। मुझे यह जानकर खुशी हुई कि सिर्फ दमोह जिले में ही ढाई लाख लाड़ली बहनों को योजना का लाभ मिल रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने बहनों को लखपति बनाने की योजना लागू की है। प्रधानमंत्री ने ‘एक देश-एक चुनाव’ की घोषणा की है। अब लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भी महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। इस व्यवस्था से बहनों के महत्व का एहसास होगा। हमारी बहनें सत्ता के साथ सुव्यवस्था और विकास लायेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नारी सशक्तिकरण के लिये आज से नवरात्रि तक विभिन्न गतिविधियाँ संचालित की जायेंगी, जिसमें मॉर्शल ऑर्ट, सायबर टेक्नोलॉजी का प्रशिक्षण भी शामिल है। इन गतिविधियों से नारी को आत्म-निर्भर और जागरूक बनाया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बुंदेलखण्ड क्षेत्र के किसानों के लिये प्रधानमंत्री श्री मोदी ने केन-बेतवा परियोजना की बड़ी सौगात दी है। आने वाले समय में पूरे क्षेत्र के किसानों के खेतों में पानी पहुँचेगा और अच्छी फसल होगी। यह क्षेत्र कृषि उत्पादन में पंजाब और हरियाणा को भी पीछे छोड़ेगा। मुख्यमंत्री ने किसानों से आह्वान किया कि वे अपनी कृषि भूमि किसी भी स्थिति में न बेचें। केन-बेतवा नदी परियोजना से आने वाला समय किसानों के लिये स्वर्णिम होगा। उन्होंने कहा कि किसानों को जीरो प्रतिशत पर फसल ऋण उपलब्ध कराने का निर्णय आज कैबिनेट में लिया गया है। राज्य सरकार किसानों के कल्याण के लिये दृढ़ संकल्पित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे गौरवशाली इतिहास से भावी पीढ़ी को परिचित करवाने के लिये भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के मध्यप्रदेश में जहाँ-जहाँ चरण पड़े हैं, उन स्थानों को तीर्थ-स्थल के रूप में विकसित किया जायेगा। हमारी सरकार ने सभी त्यौहारों को पूरे उत्साह के साथ मनाने का निर्णय लिया है। हाल ही में रक्षाबंधन और श्रीकृष्ण जन्माष्मी पूरे प्रदेश में धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। अब आने वाला दशहरा पर्व भी हम उत्साह एवं उमंग के साथ मनायेंगे। राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि दशहरा पर्व पर सभी जिलों में शस्त्र-पूजन किया जायेगा। इसमें मैं स्वयं और पूरे मंत्री-मण्डल के साथ सांसद और विधायक अपने-अपने क्षेत्र में शस्त्र-पूजन करेंगे। दमोह को दी अनेक सौगातें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दमोह में पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए दमोह को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दमोह में रानी दमयंती संग्रहालय के उन्नयन, वीरांगना रानी दुर्गावती की प्राचीन राजधानी सिंग्रामपुर में स्वास्थ्य केंद्र, शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने दूसरे चरण में सीएम राइज स्कूल बनाने, हाई-मास्क लाइट और स्ट्रीट लाइट व्यवस्था, रानी दुर्गावती की याद में मंगल भवन का निर्माण करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सिंचाई एवं पेयजल व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने और जल-संरक्षण के लिए स्टॉप डेम और चेक डैम बनाए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सागर में आयोजित रीजनल इण्डस्ट्री कॉन्क्लेव में 23 हजार करोड़ के औद्योगिक निवेश पर सहमति हुई है। इससे बुंदेलखण्ड में औद्योगिक निवेश से विकास के साथ बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।

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