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सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि हत्या, रेप और आतंक के केस के आधार पर भी दोषी की किसी संपत्ति को तोड़ा जा नहीं सकती

नई दिल्ली देशभर में चल रहे बुलडोजर एक्शन के खिलाफ दाखिल जमीयत उलेमा ए हिंद की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है. इस मामले की सुनवाई जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस के वी विश्वनाथन की बेंच कर रही है. पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर कार्रवाई  पर रोक लगाते हुए कहा था कि सिर्फ सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण को हटाने की ही छूट होगी. इस मामले में यूपी, एमपी और राजस्थान की ओर से सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता पेश हुए. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई में पूछा कि क्या दोषी करार देने पर भी किसी की संपत्ति तोड़ी जा सकती है? जिस पर एसजी तुषार ने कहा कि नहीं, यहां तक कि हत्या, रेप और आतंक के केस के आधार पर भी नहीं. मेरे कुछ सुझाव हैं, नोटिस को रजिस्टर्ड एडी से भेजा जाए. हम सबके लिए गाइडलाइन जारी करेंगे सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम एक धर्मनिरपेक्ष देश हैं, हम सब नागरिकों के लिए गाइडलाइन जारी करेंगे. अवैध निर्माण हिंदू, मुस्लिम कोई भी कर सकता है. हमारे निर्देश सभी के लिए होंगे, चाहे वे किसी भी धर्म या समुदाय के हों. बेशक, अतिक्रमण के लिए हमने कहा है कि अगर यह सार्वजनिक सड़क या फुटपाथ या जल निकाय या रेलवे लाइन क्षेत्र पर है, तो हमने स्पष्ट कर दिया है. अगर सड़क के बीच में कोई धार्मिक संरचना है, चाहे वह गुरुद्वारा हो या दरगाह या मंदिर, यह सार्वजनिक बाधा नहीं बन सकती. जस्टिस गवई ने कहा कि चाहे मंदिर हो, दरगाह हो,  उसे जाना ही होगा क्योंकि ⁠सार्वजनिक सुरक्षा सर्वोपरि है. जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने हाल ही में यूपी, मध्य प्रदेश और राजस्थान में हुई घटनाओं का हवाला देते हुए बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इस याचिका में जमीयत ने अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया है। याचिका में सरकार को आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाने से रोकने की मांग की गई है. जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि यदि  2 संरचनाओं में उल्लंघन हुआ है और केवल 1 के खिलाफ कार्रवाई की जाती है और आप पाते हैं कि पृष्ठभूमि में कोई अपराध है. यह समझौता करने योग्य या गैर समझौता करने योग्य अपराध हो सकता है. यदि आप शुरू में किसी व्यक्ति की जांच कर रहे हैं और आपको जल्द ही उसका आपराधिक इतिहास पता चलता है तो? दो गलतियां एक सही नहीं बनाती हैं. इस बारे में हमारी सहायता करें. न्यायिक निगरानी होनी चाहिए जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि इसके लिए कुछ समाधान तो खोजना ही होगा, कुछ न्यायिक निगरानी होनी चाहिए. एसजी तुषार मेहता ने कहा कि मैं यूपी, एमपी, राजस्थान की ओर से पेश हुआ हूं. हमने पहले भी कहा है. हमने यूपी मामले में पहले ही हलफनामा दाखिल कर दिया था कि सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति किसी मामले में आरोपी है, किसी संपत्ति को गिराने का आधार नहीं हो सकता. नगर निगम कानून, नगर नियोजन नियमों का उल्लंघन होना चाहिए. साथ ही कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए. नोटिस जारी किए जाने चाहिए, पक्षों की बात सुनी जानी चाहिए. हम यह स्पष्ट करते हैं कि सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति किसी मामले में आरोपी है या यहां तक ​​कि बलात्कार, हत्या या आतंकवाद में भी दोषी है, उसे गिराने का आधार नहीं माना जा सकता. कानून किसी खास धर्म के लिए नहीं… इस मामले में जो भी नियम बनाए जाएं, उन्हें पूरे भारत में लागू किया जाना चाहिए. ⁠जब ​​याचिकाकर्ता कहते हैं कि चुनिंदा तरीके से निशाना बनाया जा रहा है. मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है, तो इसमें कुछ संवेदनशीलताएं शामिल हैं. अदालत को आरोपों से बाहर आना चाहिए और तय करना चाहिए कि क्या सही है और क्या गलत. जस्टिस गवई ने कहा कि हम सभी के लिए कानून बनाएंगे, किसी खास धर्म के लिए नहीं. अवैध निर्माणों को सभी धर्मों से अलग किया जाना चाहिए. नोटिस की सही सर्विस होनी चाहिए, पंजीकृत ए.डी. के माध्यम से नोटिस हो. नोटिस चिपकाने की यह प्रक्रिया चले, डिजिटल रिकॉर्ड होना चाहिए. इससे अधिकारी भी सुरक्षित रहेंगे, हमारे पास भारत से पर्याप्त विशेषज्ञ है. एसजी ने कहा कि ऐसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ बुलडोजर मामले बहुत कम होंगे, ये मामले दो फीसदी होंगे. लेकिन बिल्डरों से जुड़े इस तरह के मामले बहुत हैं. जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि जब तक नगर निगम के अधिकारी इन पर फैसला नहीं ले लेते, तब तक कोई अर्ध न्यायिक निगरानी भी नहीं है. ये मामला दो फीसदी का नहीं है. आंकड़े बताते हैं कि साढ़े चार लाख मामले तोड़फोड़ के हैं. हिंदू-मुस्लिम की बात क्यों आती है? सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने सुनवाई के दौरान कहा कि हिंदू-मुस्लिम की बात क्यो आती है. वे हमेशा अदालत में जा सकते हैं  इसमें भेदभाव कहां है. जस्टिस विश्वनाथ ने कहा कि इसके लिए कुछ समाधान खोजना होगा. जैसे न्यायिक निरीक्षण किया जाए. इसपर SG ने कहा कोर्ट मीडिया में प्रचारित कुछ घटनाओं को छोड़कर इसके लिए एक सामान्य कानून बनाए जाने पर विचार करें. तुषार मेहता ने कहा कि मैं यूपी, एमपी, राजस्थान  की ओर से पेश हुआ हूं. हमने पहले भी कहा है, हमने यूपी मामले में पहले ही हलफनामा दाखिल कर दिया था कि सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति किसी मामले में आरोपी है, किसी संपत्ति को गिराने का आधार नहीं हो सकता. ⁠नगर निगम कानून, नगर नियोजन नियमों का उल्लंघन होना चाहिए. ⁠साथ ही कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए. ⁠नोटिस जारी किए जाने चाहिए. ⁠पक्षों की बात सुनी जानी चाहिए. ⁠हम यह स्पष्ट करते हैं कि सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति किसी मामले में आरोपी है या यहां तक ​​कि बलात्कार, हत्या या आतंकवाद में भी दोषी है, उसे गिराने का आधार नहीं माना जा सकता. तुषार मेहता ने आगे कहा कि⁠ जो भी नियम बनाए जाएं, उन्हें पूरे भारत में लागू किया जाना चाहिए. ⁠जब ​​याचिकाकर्ता कहते हैं कि चुनिंदा तरीके से निशाना बनाया जा रहा है. ⁠मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है, तो इसमें कुछ संवेदनशीलताएं शामिल हैं. ⁠अदालत को आरोपों से बाहर आना चाहिए.⁠ तय करना चाहिए कि क्या सही है और क्या गलत.  ⁠जस्टिस गवई ने कहा कि हम एक धर्मनिरपेक्ष देश हैं. ⁠हम सभी के … Read more

धोखे से चली गोली से गोविंदा जख्मी, लोडेड रिवॉल्वर से सुबह 4.45 बजे कैसे हुआ हादसा?

मुंबई बॉलीवुड एक्टर गोविंदा घायल हो गए हैं। लाइसेंसी रिवॉल्वर साफ करते समय उनके घुटने में गोली लग गई। उन्हें इलाज के लिए नजदीकी हॉस्पिटल ले जाया गया। घटना मंगलवार सुबह करीब 5 बजे की है। पुलिस ने जब्त की रिवॉल्वर कहा जा रहा है कि अभिनेता आईसीयू में भर्ती है। उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। मुंबई पुलिस के मुताबिक, गोविंदा की बंदूक से गलती से गोली चली, जो उनके पैर में लग गई। गोली उनके घुटनों के पास लगी है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर रिवॉल्वर जब्त कर ली है और मामले की जांच शुरू कर दी है। कैसे हुई घटना? गोविंदा के मैनेजर शशि सिन्हा ने बयान जारी कर कहा कि गोविंदा कोलकाता जाने की तैयारी कर रहे थे. उनकी पत्नी सुनीता कोलकाता में हैं. वह अलमारी में अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर रख रहे थे कि तभी उनके हाथ से रिवॉल्वर नीचे गिर गई और गोली उनके पैर में लग गई. डॉक्टर ने अब गोविंदा के पैर से गोली निकाल ली है और उनकी हालत ठीक है. वह अभी अस्पताल में ही हैं. सिन्हा ने बताया कि गोविंदा ने उन्हें खुद कॉल कर गोली लगने की जानकारी दी. गोविंदा की बेटी टीना इस समय अस्पताल में मौजूद है. उन्हें अगले दो दिनों तक अस्पताल में ही ऑब्जर्वेशन में रखा जाएगा. ICU में भर्ती हैं गोविंदा गोविंदा को गोली लगते ही, उनके घर के पास क्रिटिकेयर हॉस्पिटल ले जाया गया. गोविंदा के पैर से गोली निकाल दी गई है और उन्हें ICU में रखा गया है. फिलहाल गोविंदा की हालत स्थिर बताई जा रही है. गोविंदा के मैनेजर ने ये भी बताया कि गोविंदा के साथ जब ये हादसा हुआ तब उनकी पत्नी सुनीता घर पर नहीं थीं. वो कोलकाता में थीं. जानकारी मिलते ही सुनीता मुंबई के लिए रवाना हो गई हैं और कुछ ही देर में वो मुंबई पहुंच जाएंगी. फिलहाल गोविंदा की बेटी टीना, हॉस्पिटल में उनके साथ हैं. सिन्हा ने बताया कि गोविंदा ने उन्हें खुद कॉल कर के गोली लगने की जानकारी दी थी. गोविंदा 90s के दौर में बॉलीवुड के सबसे बड़े स्टार्स में से एक थे. उन्होंने ‘दूल्हे राजा’, ‘हीरो नंबर 1’ और ‘कुली नंबर 1’ जैसी कई आइकॉनिक कॉमेडी फिल्मों में काम किया है. अपनी यादगार कॉमेडी और डांस के लिए पॉपुलर गोविंदा ने इसी साल पॉलिटिक्स में दोबारा एंट्री ली थी. मार्च में गोविंदा ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना पार्टी जॉइन की थी. घटना के समय मुंबई में नहीं थी पत्नी सुनीता इस घटना के समय गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा मुंबई में नहीं थी. वह अब मुंबई लौट रही हैं. उन्हें बता दिया गया है कि अगले दो घंटे में उन्हें मुंबई पहुंच जाना चाहिए. गोविंदा की मौजूदा हालत से उन्हें वाकिफ करा दिया गया है. इससे पहले मुंबई पुलिस ने भी बताया था कि गोविंदा की लाइसेंसी रिवॉल्वर से गलती से गोली चल गई थी, जो उनके पैर में जा लगी. गोविंदा बाहर जाने की तैयारी कर रहे थे. गोली उनके घुटनों के पास लगी. उनका इलाज मुंबई के Criti Care अस्पताल में चल रहा है. बता दें कि कॉमेडी फिल्मों और डांस स्टाइल के लिए लोकप्रिय गोविंदा इस साल मार्च में ही एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हुए थे.

सभी की सहभागिता से स्थानीय पौष्टिक आहार, पोषण जागरूकता गतिविधियों में छत्तीसगढ़ देश में तीसरे स्थान पर

राष्ट्रीय पोषण माह 2024: पोषण जागरूकता गतिविधियों में छत्तीसगढ़ देश में तीसरे स्थान पर वजन त्यौहार के दौरान 23 लाख बच्चों का वृद्धि मापन किया गया सभी की सहभागिता से स्थानीय पौष्टिक आहार, स्वस्थ्य जीवनशैली, पोषण के साथ पढ़ाई का संदेश जनसमुदाय तक पहुंचाने में मिली बड़ी सफलता रायपुर छत्तीसगढ़ में 01 सितम्बर से 30 सितम्बर तक जन आंदोलन के रूप में 7वां राष्ट्रीय पोषण माह आयोजित किया गया। इस दौरान गांवों से लेकर राज्यस्तर तक सुपोषण, बच्चों में व्याप्त कुपोषण एवं किशोरी बालिकाओं, गर्भवती एवं शिशुवती महिलाओं में एनीमिया के संबंध में जागरूकता के लिए स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न गतिविधियों का संचालन किया गया। इस अभियान में हर वर्ग के लोगों की सक्रिय सहभागिता रही। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पोषण माह के प्रारंभ में सुपोषित छत्तीसगढ़ बनाने के लिए राज्य के समस्त जनप्रतिनिधि, पंचायती राज संस्था के प्रतिनिधियों महिला स्व-सहायता समूहों, प्रबुद्ध वर्ग, विद्यार्थी वर्ग, सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों के निकायों के प्रतिनिधि एवं समस्त जनसमुदाय से सक्रिय सहभागिता की अपील की थी। पोषण माह की गतिविधियों में महिलाओं और बच्चों को पोषण के प्रति जागरूक करने के लिए है जन प्रतिनिधियों, पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों, महिला स्वसहायता समूह, प्रबुद्ध नागरिकों, विद्यार्थियों और स्थानीय जन समुदाय का भरपूर सहयोग मिला। पोषण माह का शुभारम्भ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं विभागीय मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े द्वारा पोस्टर व वीडियो का विमोचन, पोषण रथ को हरी झंडी दिखाकर एवं पोषण शपथ दिलवाकर किया गया था। पोषण जागरूकता गतिविधियों में छत्तीसगढ़ देश में तीसरे स्थान पर विभागीय अमलों सहित सम्पूर्ण पोषण माह में जनप्रतिनिधियों, पंचायतीराज संस्थाओं, के प्रतिनिधि, स्व-सहायता समूह के सदस्यों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। महिला एवं बाल विकास विभाग श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के कुशल नेतृत्व, श्रीमती शम्मी आबिदी सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रभावी मार्गदर्शन और श्रीमती तुलिका प्रजापति, संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग के सतत् प्रोत्साहन से राष्ट्रीय पोषण माह 2024 में छत्तीसगढ़ ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 01 करोड़ 33 लाख से ज्यादा गतिविधियों का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ ने इसमें पूरे देश में तृतीय स्थान प्राप्त किया। प्रदेश में कुल गतिविधि संख्या के आधार पर 8.77 लाख गतिविधि आयोजित कर जिला दुर्ग प्रथम, 8.70 लाख गतिविधि आयोजित कर जशपुर द्वितीय, 8.44 लाख गतिविधि आयोजित कर रायपुर तृतीय, 7.92 लाख गतिविधि आयोजित कर गरियाबंद चतुर्थ एवं 7.70 लाख गतिविधि आयोजित कर बलरामपुर पांचवें स्थान पर रहें। प्रति आंगनबाड़ी औसत गतिविधि संख्या के आधार पर जिला क्रमशः दुर्ग प्रथम, गरियाबंद द्वितीय, रायपुर तृतीय, धमतरी चतुर्थ एवं कबीरधाम पांचवे स्थान पर रहें। 23 लाख बच्चों का वृद्धि मापन किया गया महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा पोषण माह के दौरान एक विशेष अभियान के रूप में वजन त्यौहार का आयोजन किया गया, जिसमें समुदाय के सभी 0 से 06 वर्ष के बच्चों का वजन एवं ऊंचाई लेकर वृद्धि मापन किया गया। इस अभियान में लगभग 23 लाख बच्चों का वृद्धि मापन किया गया। राष्ट्रीय पोषण माह 2024 की मुख्य थीम एनीमिया, वृद्धि निगरानी, पूरक पोषण आहार, पोषण भी पढ़ाई भी, बेहतर प्रशासन, पारदर्शिता और कुशल सेवा वितरण के लिए प्रौद्योगिकी का आयोजन और समग्र पोषण रखी गई थी। भारत शासन द्वारा प्रेषित थीम के आधार पर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा पूरे माह के लिए प्रतिदिन राज्य, जिला, विकासखण्ड, और आंगनबाड़ी केन्द्र स्तर पर आयोजित की जाने वाली गतिविधियांे के लिए रोड मैप के रूप में दिनांकवार गतिविधि कैलेंडर तैयार किया गया। जिसके आधार पर व्यापक पैमाने पर थीम आधारित गतिविधियों का आयोजन किया गया। एनीमिया कैम्प, स्वास्थ्य जांच शिविर, पोषण संबंधी जागरूकता, भाषण एवं निबंध प्रतियोगिता जैसी गतिविधियां आयोजित की गई- महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से एनीमिया कैम्प, एनीमिया जागरूकता गतिविधियां, वीएचएसएनडी दिवस का आयोजन, आईवायसीएफ गतिविधियां, स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित शालाओं एवं आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित छात्रावासों में छात्रों द्वारा पोषण संबंधी जागरूकता के लिए शपथ, व्यंजन प्रतियोगिता, व्यंजन प्रदर्शनी, भाषण प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता, खेल भी पढ़ाई भी, पोषण भी पढ़ाई भी, पोषण चौपाल, खेल खेल में पोषण ज्ञान प्राप्त करने संबंधी गतिविधियों का आयोजन किया गया। कृषि विभाग के सहयोग से मिलेट आधारित पौष्टिक भोजन संबंधी जागरूकता शिविर, प्रदर्शनी, जैविक उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने हेतु प्रचार-प्रसार इत्यादि गतिविधियां आयोजित की गई। लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी विभाग द्वारा जल संरक्षण एवं सुरक्षित पेयजल के उपयोग, वेस्ट वाटर के उचित निपटान के संबंध में जागरूकता प्रसार संबंधी उल्लेखनीय कार्य किया गया। वन विभाग द्वारा एक पेड़ मॉं के नाम अभियान अंतर्गत विशेष सहयोग देते हुए वृहत वृक्षारोपण का कार्य किया गया। आयुष विभाग द्वारा राज्य, जिला, विकासखंड एवं आंगनबाड़ी स्तर पर व्यापक पैमाने पर कुपोषण एवं एनीमिया की रोकथाम के लिए स्वस्थ जीवनशैली, पौष्टिक आहार, योग गतिविधियां का प्रचार-प्रसार एवं आयोजन किया गया। खाद्य विभाग के सहयोग से सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत संचालित उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से जन समुदाय के मध्य पौष्टिक आहार के सेवन के संबंध में प्रचार प्रसार किया गया। ग्राम पंचायतों में पोषण विषय पर विशेष चर्चा की गई। पोषण माह के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ अन्य सहयोगी विभागों द्वारा सक्रिय रूप से सहभागिता दी गई एवं सभी विभागों द्वारा समन्वित रूप से पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय पौष्टिक आहार, स्वस्थ्य जीवनशैली, पोषण के साथ पढ़ाई का संदेश जनसमुदाय तक पहुंचाया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है स्वच्छ भारत मिशन ने स्वच्छता के लिए दुनिया के सबसे बड़े जन-आंदोलन को जन्म दिया

ग्रामीण क्षेत्रों में जन-आंदोलन बना “स्वच्छता ही सेवा अभियान” : मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वच्छ भारत मिशन ने स्वच्छता अभियान में किए गए कई उल्लेखनीय कार्य और नवाचार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है स्वच्छ भारत मिशन ने स्वच्छता के लिए दुनिया के सबसे बड़े जन-आंदोलन को जन्म दिया भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वच्छ भारत मिशन ने स्वच्छता के लिए दुनिया के सबसे बड़े जन-आंदोलन को जन्म दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के लिए ग्रामीणों को जागरूक करना इस मिशन की एक प्रमुख सफलता रही। मध्यप्रदेश ने ग्रामीण स्वच्छता में कई विशिष्ट उपलब्धियां हासिल की है। प्रदेश में 70 लाख से अधिक शौचालयों का निर्माण कर संपूर्ण रूप से खुले में शौच से मुक्त घोषित किया जा चुका है। मिशन के दूसरे चरण में प्रत्येक ग्राम की ओडीएफ की स्थिति को निरंतर रखते हुए ठोस एवं तरल अपशिष्ट का निपटान भी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 155वीं जयंती एवं स्वच्छ भारत मिशन की 10 वीं वर्षगांठ पर स्वच्छता के दृष्टिकोण को शासकीय एवं सामुदायिक प्रयासों से जन-जन तक पहुंचाने के लिए “स्वच्छता ही सेवा” अभियान पखवाड़ा 17 सितंबर से प्रारंभ किया गया, जो 2 अक्टूबर गांधी जयंती पर समारोह के साथ सम्पन्न होगा। जन-भागीदारी से लोगों को किया जागरूक स्वच्छता ही सेवा अभियान में जन-भागीदारी सुनिश्चित करने के लिये कई जन-प्रतिनिधि, शासकीय अधिकारी-कर्मचारी, आम नागरिकों ने एकजुटता दिखाई। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने छिंदवाड़ा जिले के छिंदी ग्राम से “स्वच्छता साथी-वॉश ऑन व्हील सेवा” का शुभारंभ किया। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने रीवा में स्वच्छता संवाद कार्यक्रम में सम्मिलित होकर स्वस्थ भारत, स्वच्छ भारत के उद्देश्य को साकार करने के लिए प्रेरित किया। राज्य के सभी मंत्री, सांसद, विधायकों ने अपने क्षेत्रों में विभिन्न गतिविधियों में शामिल होकर संपूर्ण स्वच्छता के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य करने का संदेश पहुंचाया। स्वच्छता शपथ के साथ हुईं स्वच्छता चौपालें स्वच्छता शपथ, स्वच्छता चौपाल, स्वच्छता रैली, स्वच्छता के लिये श्रमदान स्वच्छता संवाद, प्रतियोगिताएँ, खेल लीग, एक पेड़ माँ के नाम, घर-घर जागरूकता इत्यादि गतिविधियों के माध्यम से स्वच्छता में जन-भागीदारी की गतिविधियां की गई, जिसमें 40 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया। स्वच्छता लक्षित इकाइयों का चिन्हांकन अभियान मेंऐसे स्थान जहां कूड़े-कचरे का ढेर था, उन स्थानों का चिन्हांकन कर स्वच्छ स्थानों में परिवर्तित किया गया। ऐसी 19 हजार 742 स्वच्छता लक्षित इकाइयों को 12 लाख 77 हज़ार लोगों की जन-भागीदारी से स्वच्छ साईट में परिवर्तित किया गया, जिससे खुले में पड़े 10 हजार 681 टन कचरे का सुरक्षित निपटान हुआ। अब तक 333 टन से अधिक प्लास्टिक कचरे का जन-भागीदारी से संग्रहण किया जाकर सुरक्षित निपटान किया गया है। ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधित बनाकर 400 से अधिक ग्रामों को मॉडल श्रेणी में ओडीएफ़ प्लस घोषित किया जा चुका है। सफाई सुरक्षा मित्रों के योगदान को दी गई मान्यता अभियान का विशेष पहलू यह रहा कि सफाई कर्मियों और सफ़ाई मित्रों के योगदान को मान्यता दी गई। उनके स्वास्थ्य एवं सम्मान के लिए 1549 सफाई मित्र सुरक्षा शिविरों का आयोजन किया गया, जिसमें 42 हजार 466 सफ़ाई मित्रों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं 24 हजार 655 सफ़ाई मित्रों को सुरक्षा उपकरणों एवं पीपीई किट का वितरण किया गया। नर्मदा नदी के किनारे 776 ग्राम ओडीएफ प्लस मॉडल घोषित नर्मदा नदी के किनारे बसे 884 ग्रामों में घाटों की साफ़-सफ़ाई, आस-पास के क्षेत्र को प्लास्टिक फ्री बनाये जाने एवं सिंगल यूज्ड प्लास्टिक कचरे का संग्रहण का कार्य किया जा रहा है। नर्मदा नदी किनारे के 776 ग्राम तथा पर्यटन महत्व वाले सभी 117 ग्राम ओडीएफ प्लस मॉडल घोषित हो चुके हैं। आगे की राह प्रदेश के सभी ग्रामों में 2 अक्टूबर को विशेष ग्राम सभाओं का अयोजन होगा। इसमें स्वच्छता पखवाड़े में हासिल उपलब्धियों से ग्रामवासियों को अवगत कराया जाएगा तथा स्वच्छता परिसंपतियो का शिलान्यास और कचरा वाहनों का लोकार्पण किया जायेगा।  

मोदी सरकार ने अपने कर्मचारियों को नवरात्रि से पहले देगी महंगाई भत्ता का तोहफा, यहां जाने कितनी बढ़कर आएगी सैलरी

नई दिल्ली  केंद्र सरकार के कर्मचारी अक्टूबर 2024 में महंगाई भत्ता (DA) में बकी घोषणा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन उम्मीद है कि सरकार दिवाली से पहले 3% से 4% तक की डीए बढ़ोतरी की घोषणा करेगी। यह बढ़ोतरी 1 जुलाई 2024 से लागू मानी जाएगी, जिससे कर्मचारियों की सैलरी में बढ़ोतरी होगी। साथ ही जुलाई से लागू डीए का एरियर भी सैलरी के साथ आएगा। सैलरी में कितनी होगी बढ़ोतरी? अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹18,000 प्रति माह है, तो 3% बढ़ोतरी से उसकी सैलरी ₹540 मंथली बढ़ेगी। अगर डीए 4% बढ़ता है तो सैलरी में मंथली ₹720 रुपये बढ़ जाएंगे। उदाहरण के लिए अगर किसी की कुल सैलरी ₹30,000 है और उसमें से ₹18,000 बेसिक पे है, तो मौजूदा 50% डीए के अनुसार उसे ₹9,000 महंगाई भत्ता मिलता है। 3% बढ़ोतरी के बाद यह ₹9,540 हो जाएगा और 4% बढ़ोतरी पर ₹9,720 हो जाएगा। DA और DR: क्या फर्क है? डीए सरकारी कर्मचारियों को दिया जाता है जबकि डीआर यानी महंगाई राहत पेंशनर्स की पेंशन में जुड़कर मिलता है। दोनों में ही साल में दो बार—जनवरी और जुलाई में रिवीजन होता है। हालांकि, सरकार कभी भी इसका ऐलान करें लेकिन ये जनवरी और जुलाई से ही लागू माने जाते हैं। इस बार की डीए और डीआर की बढ़ोतरी से एक करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स को फायदा होगा। डीए कैसे तय होता है? महंगाई भत्ते की बढ़ोतरी का ऐलान ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI) के आधार पर किया जाता है। पिछले 12 महीनों के औसत के आधार पर केंद्र सरकार डीए रिवाइज करती है, जिसका ऐलान आमतौर पर मार्च और सितंबर में किया जाता है। 8वां वेतन आयोग: कर्मचारियों की बढ़ी उम्मीदें 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें जनवरी 2016 से लागू हुई थीं और अब 10 साल पूरे होने जा रहे हैं। हालांकि, 8वें वेतन आयोग की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन कर्मचारी इसके जल्द गठन की उम्मीद कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 8वें वेतन आयोग से न्यूनतम वेतन ₹34,560 हो सकता है, जबकि पेंशन भी बढ़कर ₹17,280 हो सकती है। सरकार ने अभी तक 8वें वेतन आयोग पर कोई निर्णय नहीं लिया है, लेकिन कर्मचारियों को उम्मीद है कि इसकी घोषणा जल्द की जाएगी।

मध्य प्रदेश के पुलिसकर्मियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों की जान बचाई, यमराज को भी दिखया रेड सिग्नल!

भोपाल  मध्य प्रदेश में पुलिस वाले कानून व्यवस्था को संभालने के साथ ही जरूरतमंदों की मदद के लिए भी हमेशा तैयार रहते हैं। हाल ही में कई घटनाओं में पुलिसकर्मियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों की जान बचाई है। फिर चाहे वो किसी विधायक को हार्ट अटैक आने पर CPR देना हो, या सड़क किनारे बेहोश हुए एक बुजुर्ग की जान बचाना हो, एमपी पुलिस ने मानवता की मिसाल पेश की है। यहां तक की मौका आने पर उन्होंने सांप तक को सीपीआर देकर नया जीवनदान दिया है। आईए जानते हैं वो बड़ी पांच घटनाएं जहां पुलिस कर्मी देव दूत बनकर यमराज के पास से बचा लाए लोगों की जान विधायक को दिया नया जीवन सितंबर 2024 में राऊ विधानसभा से बीजेपी विधायक मधु वर्मा को हार्ट अटैक आ गया था। उनके पीएसओ अरुण भदौरिया ने तुरंत अपनी ट्रेनिंग का इस्तेमाल करते हुए उन्हें CPR दिया और अस्पताल पहुंचाया। समय पर मदद मिलने की वजह से उनकी जान बच गई। इसके बाद लोगों ने अरुण भदौरिया की जमकर तारीफ की। सीएम मोहन ने भी उन्हे सराहा। चलती एक्टिवा पर बच्ची के पापा को आ गया था अटैक अगस्त 2024 में इंदौर में भी ऐसी ही एक घटना घटी। एक शख्स को चलती एक्टिवा पर अटैक आ गया। उनकी 14 साल की बेटी ने लोगों से मदद की गुहार लगाई। तभी वहां से गुजर रहे एक कॉन्स्टेबल ने युवक को CPR देकर उसकी जान बचाई। पुलिस वाले अंकल ने साहस के साथ बच्ची के पापा को नया जीवन दिया। आरपीएफ जवान नहीं होता तो हो जाती अनहोनी नवंबर 2023 में जबलपुर में विधानसभा चुनाव के दौरान एक मतदान कर्मी को दिल का दौरा पड़ गया। आरपीएफ के जवानों ने तुरंत उसे CPR दिया और उसकी जान बचाई। यदि आरपीएफ के जवान समय पर मदद के लिए नहीं आते तो शायद बड़ी अनहोनी भी हो सकती थी। बुजुर्ग के लिए देवदूत बनकर आई लेडी सूबेदार साल 2022 में ग्वालियर में एक महिला ट्रैफिक सूबेदार ने सड़क किनारे बेहोश हुए एक बुजुर्ग को CPR देकर उसकी जान बचाई थी। इसके बाद सूबेदार सोनम पाराशर ने बुजुर्ग को अस्पताल में भर्ती भी करवाया था। सांप को सीपीआर देकर दिया जीवन दान अक्टूबर 2023 में नर्मदापुरम के सेमरी हरचंद कस्बे में पुलिस कांस्टेबल अतुल शर्मा ने एक सांप को सीपीआर देकर उसकी जान बचाई। सांप पाइप लाइन में फंसकर बेहोश हो गया था। अतुल शर्मा 2008 से काम कर रहे हैं और अब तक सैकड़ों सांपों का रेस्क्यू कर चुके हैं। काबिले तारीफ है ये जज्बा इसे लेकर एक प्रशंसक ने कहा कि मध्य प्रदेश पुलिस सिर्फ कानून व्यवस्था ही नहीं संभालती, बल्कि ज़रूरतमंदों की मदद के लिए भी हमेशा तैयार रहती है। पुलिसकर्मियों का यह जज़्बा काबिले तारीफ है।

सिएटल में वेश्यावृत्ति के धंधे में आया उछाल, अब लगेगी नशीली दवाओं पर लगाम

 सिएटल अमेरिका को सपनों का देश कहा जाता है, जहां की लाइफस्टाइल, जॉब्स और ग्लैमर दुनियाभर के लोगों को आकर्षित करती हैं. लेकिन इस चमक-दमक के पीछे की सच्चाई अक्सर दुनिया की नजरों से दूर रहती है. कुछ ऐसी ही कहानी है सिएटल शहर की एक बदनाम गली की, जो वेश्यावृत्ति का केंद्र बन चुकी है. डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, सिएटल की इस गली को ‘द ब्लेड’ के नाम से जाना जाता है, जहां हर रात महिलाएं कम कपड़ों में ग्राहकों को लुभाने के लिए सड़कों पर खड़ी नजर आती हैं. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस गली के पास ही दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियां जैसे अमेजन और एप्पल के ऑफिस भी मौजूद हैं. लेकिन इसके बावजूद, इस इलाके में वेश्यावृत्ति का धंधा तेजी से फैल रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस गली में हर दिन लगभग 300 लोग आते हैं, और करीब 60 महिलाएं इस व्यापार में शामिल होती हैं. कोविड-19 महामारी के दौरान हालात और भी बिगड़ गए, जब क्लब और बार बंद हो गए और महिलाओं को मजबूरन सड़कों का रुख करना पड़ा. स्थानीय दुकानदार डटन क्लार्क के मुताबिक-कोविड के बाद हालात बेहद खराब हो गए हैं. पिछले साल इस गली में हर वक्त 50-60 महिलाएं खड़ी रहती थीं, जो ग्राहकों की तलाश में रहती थीं. सबसे दर्दनाक बात यह है कि इन महिलाओं में से कई की उम्र बेहद कम होती है. रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि यहां आने वाले ग्राहकों में से एक तिहाई लोग आसपास की बड़ी टेक कंपनियों में काम करने वाले प्रोफेशनल्स होते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस गली में वेश्यावृत्ति के साथ-साथ अपराध भी बढ़ गए हैं. जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है. यहां की घटनाओं ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है.अब यह गली सिर्फ वेश्यावृत्ति का केंद्र नहीं, बल्कि बढ़ते अपराधों की वजह से भी चर्चा में है. जिसने स्थानीय निवासियों की जिंदगी को मुश्किल बना दिया है. अब लगेगी नशीली दवाओं पर लगाम  सिएटल सिटी में  दो नए विधेयक पारित किए। इनका उद्देश्य सार्वजनिक रूप से नशीली दवाओं के उपयोग, बिक्री और वेश्यावृत्ति पर लगाम लगाना है।पहले विधेयक में यह प्रावधान है कि अब नशीलों दवाओं के सौदागरों के सिएटल शहर के मुख्य भाग स्टे आउट ऑफ ड्रग एरिया में प्रवेश करना प्रतिबंधित होगा। द सिएटल टाइम्स की एक खबर के अनुसार, नशीली दवाओं से संबंधित विधेयक लाने का प्रस्ताव काउंसिल सदस्य बॉब केटल ने किया। इसे सिटी अटॉर्नी एन डेविसन ने पेश किया। यह विधेयक 8 से 1 के अंतर से पारित हुआ। काउंसिल सदस्य टैमी मोरालेस ने इसके खिलाफ मतदान किया। दूसरा विधयेक उत्तरी सिएटल में ऑरोरा एवेन्यू से संबंधित है। यह जगह वेश्यावृत्ति और आवारागर्दी के लिए बदनाम है। इसमें कहा गया है कि सेक्स वर्कर को यहां से दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। काउंसिल सदस्य कैथी मूर का यह विधेयक भी 8 से 1 के अंतर से पारित हुआ। काउंसिल सदस्य टैमी मोरालेस ने इस विधेयक के खिलाफ भी मतदान किया। उल्लेखनीय है कि सिएटल वाशिंगटन राज्य का एक प्रमुख शहर है। यह प्रमुख बंदरगाह है। यह प्रशांत महासागर और लेक वौशिंग्टन के बीच स्थित है। कनाडा की सीमा यहां से मात्र 160 किलोमीटर दूर है। अप्रैल 2009 में यहां की आबादी लगभग 61,700 थी।  

सीबीएसई 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाएं, एग्जाम रूम में CCTV कैमरों से न सिर्फ नजर रखी जाएगी, बल्कि रिकॉर्डिंग सेव भी रखी जाएंगी.

 नई दिल्ली सीबीएसई 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाएं 2025 15 फरवरी में शुरू हो सकते हैं, जो अप्रैल तक चलेंगे. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) आगामी बोर्ड परीक्षा (CBSE Board Exam 2025) की डेटशीट दिसंबर में जारी कर सकता है. इससे पहले सीबीएसई ने बोर्ड परीक्षा को लेकर जरूरी निर्देश जारी किए हैं. अगले साल बोर्ड परीक्षा कड़े पहरे में होने वाली है. एग्जाम रूम में CCTV कैमरों से न सिर्फ नजर रखी जाएगी, बल्कि रिकॉर्डिंग सेव भी रखी जाएंगी. सीबीएसई ने हाल ही में एक नोटिस जारी कर इसकी सूचना दी है. सीबीएसई द्वारा जारी नोटिस में स्कूलों को हर एग्जाम रूम में सीसीटीवी कैमरे लगाने को लेकर जरूरी निर्देश दिए हैं. बोर्ड ने सभी स्कूलों से कहा है कि उनके सभी एग्जाम रूम में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगे होने चाहिए. यह निर्देश सभी सीबीएसई स्कूलों के प्रिंसिपल्स और हेडमास्टर्स को भेजा गया है. बाद में भी इस्तेमाल की जा सकती है CCTV रिकॉर्डिंग नोटिस में साफ-साफ लिखा है कि मैट्रिक (10वीं) और इंटरमीडिएट (12वीं) बोर्ड परीक्षाएं केवल उन्हीं कमरों में होगी जहां सीसीटीवी कैमरे लगे होंगे. परीक्षा के दौरान रिकॉर्डिंग की जाएगी जिसे स्कूलों को कम से कम दो महीने तक संभालक रखना होगा. ताकि जरूरत पड़ने पर बोर्ड उन रिकॉर्डिंग्स की जांच कर सके. हालांकि रिकॉर्डिंग केवल अधिकृत लोग ही देख सकेंगे. बिना CCTV कैमरे के स्कूल नहीं करा सकेंगे परीक्षा सीबीएसई ने आगे कहा कि कैमरों में पैन, टिल्ट और जूम की सुविधा होनी चाहिए ताकि किसी भी क्षेत्र या छात्र पर नजर रखी जा सके. अगर किसी स्कूल में सीसीटीवी कैमरों नहीं लगे हैं, तो उस स्कूल को परीक्षा केंद्र नहीं माना जाएगा. 44 लाख छात्र देंगे बोर्ड परीक्षा सीबीएसई के मुताबिक 2024 में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा में करीब 44 लाख छात्र बैठेंगे. इतनी बड़ी संख्या छात्रों की परीक्षा सुचारू और शुचिता पूर्ण ढंग से कराने के लिए सीबीएसई ने यह कदम उठाया है. हर परीक्षा केंद्र में 240 छात्रों के लिए एक व्यक्ति खासतौर पर निगरानी रखने के लिए नियुक्त किया जाएगा. इसकी जानकारी छात्रों और अभिभावकों को भी देने को कहा गया है.  

पड़ोसी देश पाकिस्तान ऐसे आर्थिक संकट में घिरा की 6 मंत्रालय ही बंद और डेढ़ लाख नौकरियां खत्म

 इस्लामाबाद पड़ोसी देश पाकिस्तान ऐसे आर्थिक संकट में घिर गया है कि अब उसने डेढ़ लाख सरकारी नौकरियां समाप्त कर दी हैं। इसके अलावा 6 मंत्रालयों को ही भंग कर दिया है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि सरकारी खर्च को रोका जा सके। यही नहीं दो मंत्रालयों का अन्य विभागों के साथ विलय कर दिया गया है। आईएमएफ से 7 अरब डॉलर की लोन डील के तहत पाकिस्तान सरकार ने ये कदम उठाए हैं। पाकिस्तान लगातार संकट के दौर से गुजर रहा है और आईएमएफ से लोन की एक किस्त मिलने के बाद भी उसका संकट समाप्त नहीं हुआ है। अब वह एक और राउंड का लोन लेने के लिए जुगत भिड़ा रहा है। आईएमएफ ने पाकिस्तान के लिए मंजूर लोन की पहली किस्त 26 सितंबर को जारी की थी। इसके तहत 1 अरब डॉलर का पैकेज घोषित किया गया है। आईएमएफ ने इसके साथ ही पाकिस्तान सरकार को आदेश दिया है कि वह अपने खर्च घटाएं, टैक्स में इजाफा करे, कृषि और रियल एस्टेट जैसे सेक्टरों में पर भी टैक्स लगाया जाए। इसके अलावा सब्सिडी खत्म की जाए और कुछ योजनाओं को भी सीमित किया जाए। अमेरिका से लौटे पाकिस्तानी वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने कहा कि आईएमएफ के साथ डील हो गई है। यह हमारी आखिरी डील होगी। हमें इसके तहत कुछ नीतियों को लागू करना होगा। उन्होंने कहा कि इसी के तहत हम सरकारी खर्चों में भी कटौती कर रहे हैं। 6 मंत्रालयों को बंद किया जाएगा और दो का विलय किया जाएगा। इसके अलावा अलग-अलग मंत्रालयों के डेढ़ लाख सरकारी पदों को समाप्त किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम टैक्स में भी इजाफे के प्रयास करेंगे। बीते साल 3 लाख अतिरिक्त टैक्सपेयर जुड़े हैं। इस साल अब तक 7 लाख से ज्यादा नए टैक्सपेयर जुड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि टैक्स के नियमों को सख्त किया जाएगा। जो लोग टैक्स नहीं भरेंगे, उन्हें संपत्ति और वाहन खरीदने की परमिशन नहीं होगी। औरंगजेब ने कहा कि पाकिस्तान को यदि जी-20 का हिस्सा बनना है तो फिर अर्थव्यवस्था को मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि अब तो हमारा एक्सपोर्ट भी बढ़ रहा है।

लॉकडाउन के दौरान चंद्रमा के तापमान में 8-10 केल्विन की असामान्य गिरावट देखी गई

नई दिल्ली/बेंगलुरु भारतीय शोधकर्ताओं ने पाया है कि 2020 के वैश्विक कोविड लॉकडाउन का चंद्रमा तक प्रभाव पड़ा था। पीयर-रिव्यू मंथली नोटिस ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी: लेटर्स में एक स्टडी प्रकाशित हुई थी। हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया को पता चला है कि अप्रैल-मई 2020 के सबसे सख्त लॉकडाउन के दौरान चंद्रमा की सतह के तापमान में असामान्य गिरावट देखी गई थी। फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी (पीआरएल) के के दुर्गा प्रसाद और जी अंबिली ने 2017 और 2023 के बीच चंद्रमा के निकटवर्ती भाग पर छह विभिन्न स्थानों – ओशनस प्रोसेलारम के दो स्थान, मेरे सेरेनिटैटिस, मेयर इम्ब्रियम, मेयर ट्रैंक्विलिटैटिस और मेरे क्रिसियम पर रात्रि के समय सतह के तापमान का विश्लेषण किया। पीआरएल के निदेशक अनिल भारद्वाज ने कहा कि यह हमारे समूह का एक महत्वपूर्ण कार्य है। यह काफी अद्वितीय है। कैसे की स्टडी? नासा के चंद्रयान (Lunar Reconnaissance Orbiter) के आंकड़ों का उपयोग करते हुए, शोधकर्ताओं ने पाया कि लॉकडाउन के महीनों में चंद्रमा के तापमान में अन्य वर्षों की तुलना में लगातार 8-10 डिग्री कम (8-10 केल्विन) हो गया था। प्रसाद ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि हमने वास्तव में 12 सालों का डेटा विश्लेषण किया था, लेकिन अध्ययन में समानता बनाए रखने के लिए हमने सात सालों (2017 से 2023) का डेटा इस्तेमाल किया,लॉकडाउन वाले साल 2020 से पहले के तीन साल और उसके बाद के तीन साल। शोधकर्ताओं का मानना है कि लॉकडाउन के दौरान पृथ्वी से निकलने वाले विकिरण (Radiation) में कमी के कारण चंद्रमा का तापमान कम हुआ। चूंकि मानवीय गतिविधियों में काफी कमी आई थी, ग्रीनहाउस गैसों और वायुमंडलीय कणों (Aerosols) का उत्सर्जन भी कम हो गया, जिसके कारण पृथ्वी के वायुमंडल में कम गर्मी फंसी और वापस निकली। तापमान में काफी बदलाव शोधकर्ताओं ने विभिन्न स्थानों और वर्षों में तापमान में काफी बदलाव भी देखा। सबसे कम कुल तापमान 2020 में साइट-2 पर 96.2 K था, जबकि सबसे कम तापमानों में सबसे अधिक 2022 में साइट-1 पर 143.8 K था। आमतौर पर, 2020 में अधिकांश स्थानों पर सबसे ठंडा तापमान देखा गया, जबकि 2021 और 2022 में जब पृथ्वी पर मानवीय गतिविधियां फिर से शुरू हुईं, तब एक उल्लेखनीय तापमान बढ़ने का रुझान देखा गया। के दुर्गा प्रसाद ने समझाया कि चंद्रमा पृथ्वी के विकिरण के चिन्ह का एक प्रवर्धक (Amplifier) के रूप में कार्य करता है। इस अनूठी वैश्विक घटना ने हमें यह देखने का एक दुर्लभ अवसर प्रदान किया कि पृथ्वी पर मानवीय गतिविधियों में बदलाव हमारे निकटतम खगोलीय पड़ोसी को कैसे प्रभावित कर सकता है।शोध पत्र में लिखा है कि चूंकि कोविड लॉकडाउन के दौरान चंद्रमा के रात्रि के समय सतह के तापमान में असामान्य कमी देखी गई है, इसलिए अन्य संभावित कारकों जैसे सौर गतिविधि और मौसमी प्रवाह विविधता के प्रभावों की भी जांच की गई है। परिणाम दर्शाते हैं कि इन कारकों में से किसी का भी अवलोकित हस्ताक्षर(Observed Signature) पर कोई प्रभाव नहीं है, इस प्रकार यह हमारे निष्कर्षों का समर्थन है कि यह केवल कोविड लॉकडाउन के कारण है।

नक्सलियों की अब नहीं खैर 200 किमी के दायरे में इजराइली ड्रोन करेंगे जासूसी

जगदलपुर  बारिश के दौरान बस्तर में विजिबिलिटी कम हो जाती है और पहुंच विहीन क्षेत्र में पहुंचना मुश्किल होता है। इसलिए पुलिस के ऑपरेशन मानसून को ज्यादा आक्रामक और सफल बनाए रखने के लिए पुलिस माओवादियों की गतिविधि को यूएवी से नजर रखने की तैयारी कर रही हैं। जो नक्सल क्षेत्र के 200 किलोमीटर के दायरे में निगरानी रखेगा। साथ ही सेटेलाइट रडार से भी नजर रखने की योजना सुरक्षा बलों ने बना ली है। बता दें कि पिछले कुछ सालों से एनटीआरओ का बेस बस्तर में बनाए जाने के बाद बड़े ड्रोन से माओवादियों की गतिविधि भी कैद हो रहा है। बताया जा रहा है कि रडार का कनेक्शन सीधे सेंट्रल मॉनिटरिंग कंट्रोल रुम से होगा और नक्सल क्षेत्रों में लगे रडार अपनी तस्वीरों को सेन्ट्रल मॉनिटरिंग रूम को भेजेगा। जिसके बाद इनपुट के आधार पर नक्सल ऑपरेशन को चलाया जाएगा। इधर नक्सल क्षेत्र में यूएवी 15 हजार फीट की ऊंचाई से नजर बनाये रखेगा और बारिश में जंगल के भीतर माओवादियों के इमेज को कैप्चर भी करेगा। वहीं सुरक्षा बल अब हर तरीके से माओवादियों पर अंकुश लगाने की तैयारी कर रहा है। इससे पहले भी जनवरी महीने से लगातार पुलिस को अत्याधुनिक संसाधनों की मदद से माओवादियों की एग्जैक्ट लोकेशन मिली जिससे ऑपरेशन सफल हुए हैं। बताया जाता है कि बस्तर में लगातार हो रही बारिश को देखते हुए आसमान से नजर रखी जा रही है। रात के समय नक्सलियों के मूवमेंट और उनके ठिकानों को चिन्हाकिंत करने की क्षमता होने के कारण इसका उपयोग किया जा रहा है। नक्सल आपरेशन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि सीधे टारगेट पाॅइंट को कवर करने में काफी मदद मिल रही है। नक्सली गतिविधियों पर अंकुश लगाने में योजना में कारगार साबित हो रहा है। बता दें कि पहले यह ड्रोन को दुर्ग-भिलाई के नंदनी स्थित सेंटर से उड़ान भरता था। इसके बाद में जगदलपुर शिफ्ट किया गया था। इसकी उपयोगिता को देखते हुए जम्मू और कश्मीर में पत्थरबाजी एवं आतंकवादियों से निपटने के लिए कश्मीर ले जाया गया था। 15000 फीट की ऊंचाई से निगहबानी रिमोट से उड़ान भरने वाला ईंधन चलित अत्याधिक ड्रोन एक बार में 8-10 घंटे तक उड़ान भर सकता है। वहीं करीब 1000-15000 फीट की उचांई से जंगल के अंदर की गतिविधियों को देख सकता है। इससे मिले इमेज और फ्रीक्वेंसी को कैप्चर करने के बाद नक्शे से संबंधित इलाके चिन्हाकिंत किए जा रहे हैं। सटीक जानकारी देने की क्षमता को देखते हुए राज्य के बार्डर और इसके आसपास के इलाकों को कवर किया जा रहा है। बताया जाता है कि उत्तर और दक्षिण बस्तर में नक्सलियों की गतिविधियों को देखते हुए इसका उपयोग किया जा रहा है।  

रिपोर्ट में खुलासा- भारत की जनसंख्या 144 करोड़ पार, 14 साल तक के उम्र की आबादी 35 करोड़

नई दिल्ली  भारत की जनसंख्या साल 2024 में 1,441.7 हो गई है और अगर जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार इसी तरह की रही, तो अगले 77 सालों में भारत की आबादी दोगुनी हो जाएगी. यह सूचना सामने आई है यूनाइडेट नेशन की रिपोर्ट से. यूनाइटेड नेशन पॉपुलेशन फंड की नवीनतम रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तो कई सावधान करने वाले आंकड़े मौजूद हैं. यूनाइटेड नेशन पॉपुलेशन फंड संयुक्त राष्ट्र की यौन और प्रजनन स्वास्थ्य एजेंसी है, जो लोगों को जनसंख्या वृद्धि और उससे उत्पन्न चुनौतियों के बारे में शिक्षित करती है. आखिर किस तरह भारत की आबादी अगले 77 साल में दोगुनी हो जाएगी इस जानने के लिए कुछ आंकड़ों को भी जानना बहुत जरूरी है. भारत की कुल आबादी का 68.7% 15-64 साल की आयुवर्ग का पॉपुलेशन फंड की रिपोर्ट के अनुसार भारत की कुल आबादी का 68.7% 15-64 साल की आयुवर्ग का है. 0-14 साल की आबादी का प्रतिशत 24.2 प्रतिशत है, जबकि 7.1 प्रतिशत आबादी 65 साल से अधिक आयुवर्ग के लोगों की है. इसमें 10-19 साल की आबादी 17 प्रतिशत है, जबकि 10-24 साल की आबादी 26 प्रतिशत है. कुल आबादी में एक महिला की औसत आयु 74 वर्ष और पुरुष की 71 साल है, वहीं एक महिला पर कुल प्रजनन दर 2 है, यानी औसतन एक महिला दो बच्चों को जन्म देती है. भारत की आबादी अगले 77 सालों में दोगुनी हो जाएगी यूनाइटेड नेशन पॉपुलेशन फंड की रिपोर्ट को अगर सच मानें तो आंकड़े यह कहते हैं कि भारत की आबादी अगले 77 सालों में दोगुनी हो जाएगी. हालांकि भारत में प्रजनन दर में गिरावट आई है, लेकिन जो आबादी है वो धीरे-धीरे बड़ी हो रही है और लड़कियां प्रजनन की उम्र में प्रवेश करती जाती हैं, इसलिए प्रजनन दर कम होने के बावजूद भी जनसंख्या वृद्धि जारी रहती है. भारत की जनसंख्या में वृद्धि की एक और बड़ी वजह मृत्यु दर में कमी आना है. संस्थागत प्रसव यानी डाॅक्टर्स की देखरेख में प्रसव की संख्या में वृद्धि होने की वजह से भी जनसंख्या में वृद्धि दर्ज हो रही है. संस्थागत प्रसव के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत में साल 2004 से 2020 के बीच 89 प्रतिशत प्रसव कुशल और ट्रेंड लोगों की देखरेख में हुए हैं. इसका परिणाम यह हुआ है कि प्रति एक लाख बच्चों पर 103 बच्चों की मौत प्रसव के दौरान हो रही है. यह आंकड़ा पहले के आंकड़ों से बेहतर है. बात अगर परिवार नियोजन की करें, तो देश में 15-49 साल की 78 प्रतिशत महिलाएं परिवार नियोजन के आधुनिक तरीके अपनाती हैं. वहीं अगर किसी भी तरीके की बात करें तो 51 प्रतिशत महिलाएं परिवार नियोजन के तरीकों को अपना रही हैं. वहीं विवाहित और विवाह योग्य महिलाओं में यह आंकड़ा 68 प्रतिशत का है. परिवार नियोजन के आधुनिक तरीकों से संतुष्टि की अगर बात करें तो यह 78 प्रतिशत है. 103 वर्ष पहले 1 करोड़ 39 लाख लोग थे जानकारी के अनुसार, 103 वर्ष पहले मध्यप्रदेश की जनसंख्या 1 करोड़ 39 लाख थी। अब हर साल 15 लाख से ज्यादा लोग राज्य में बढ़ रहे हैं। यही आंकड़ा धीरे-धीरे बढ़ते हुए 8 करोड़ 45 लाख से अधिक हो गया है। अब एमपी की मौजूदा जनसंख्या की तुलना थाईलैंड, फ्रांस, इटली और साउथ अफ्रीका जैसे देशों की कुल आबादी से की जाए तो भी मध्यप्रदेश ही आगे है। इन चार देशों को पीछे छोड़ा आपको बता दें कि थाईलैंड की आबादी 7 करोड़ 17 हजार, फ्रांस की जनसंख्या 6 करोड़ 8 हजार, इटली की आबादी 5 करोड़ 89 हजार और साउथ अफ्रीका की पॉपुलेशन 5 करोड़ 99 हजार के आसपास है। मतलब अपना मध्यप्रदेश इन देशों से आगे निकल चुका है। आबादी बढ़ने की रफ्तार यही रही तो इस बात की पूरी संभावना है कि मध्यप्रदेश की जनसंख्या अगले डेढ़ दशक में 10 करोड़ से भी ज्यादा हो जाएगी। क्या कहते हैं प्रदेश और देश के आंकड़े     प्रदेश में 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों की संख्या भी बढ़ रही है। 2011 की जनगणना के मुताबिक तब प्रदेश में उम्रदराज लोगों की आबादी कुल जनसंख्या में 7.5 फीसदी थी, जो 2021 में बढ़कर 8.5 प्रतिशत हो गई।     वर्ष 2011 में राज्य में 52 फीसदी यानी 3.76 करोड़ पुरुष और 48 प्रतिशत यानी 3.50 करोड़ महिलाएं थीं। 10 वर्ष बाद यानी 2021 में पुरुषों का प्रतिशत 51.6, जबकि महिलाओं का 48.4 हो गया।     मध्यप्रदेश में टू चाइल्ड पॉलिसी मतलब ‘हम दो, हमारे दो’ का नियम वर्ष 2001 से 2005 तक माना गया। इसमें तीसरा बच्चा होने पर व्यक्ति सरकारी नौकरी के लिए पात्र नहीं होता था। बाद में विवाद हुआ तो सरकार ने इसे हटा दिया।     देश की बात करें तो भारत ने इसी साल आबादी के मामले में चीन को पीछे छोड़ा है। UNFPA की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की जनसंख्या 77 वर्षों में दोगुनी हो गई है। यानी अब 144 करोड़ 17 लाख से ज्यादा भारतीय हैं।     UNFPA की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की कुल आबादी का 24 प्रतिशत हिस्सा 0 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों का है। 15 से 64 वर्ष आयुवर्ग की आबादी सबसे ज्यादा 64 फीसदी है। जनसंख्या वृद्धि और चुनौतियां ये आंकड़े इस बात के प्रमाण हैं कि देश में जनसंख्या वृद्धि कई तरह की चुनौतियों को पेश कर सकते हैं. जनसंख्या के लिहाज से भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश है, चीन को भारत ने अप्रैल 2023 में ही पीछे छोड़ दिया था. वहीं क्षेत्रफल की बात करें तो भारत सातवें नंबर पर है. विश्व की कुल आबादी का 17.76 प्रतिशत भारत में रहता है, जबकि विश्व के कुल क्षेत्रफल का मात्र 2. 4 प्रतिशत भारत के हिस्से में है. इस वजह से कई तरह की चुनौतियों हमारे सामने खड़ी हैं, जिसमें रोजगार की समस्या, संसाधनों की समस्या, गरीबी की समस्या और पर्यावरण से जुड़ी समस्याएं स्पष्ट तौर पर सामने नजर आ रही हैं. सेक्सुअल हेल्थ में भारत 30 साल में सबसे बेहतर UNFPA की इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में सेक्सुअल और रिप्रोडक्टिव हेल्थ 30 सालों के सबसे बेहतर स्तर पर है। यही कारण है कि डिलीवरी के दौरान होने वाली मौतों की संख्या में भी गिरावट आई … Read more

अमेरिका के ग्रोसरी स्टोर में लगी राउंड्स वेंडिंग मशीन, पैसे डालो और बुलेट्स निकालो…

 टेक्सास अमेरिका में गन वायलेंस की वारदातें दुनिया में किसी अन्य देश की तुलना में सबसे अधिक होती हैं. लेकिन इस तथ्य के बावजूद कई अमेरिकी शहरों में दूध और अंडों की तरह बंदूक की गोलियों को आसानी से खरीदा जा सकेगा. इसके लिए बकायदा कई ग्रोसरी स्टोर्स में वेंडिंग मशीनें लगाई गई हैं. इन मशीनों से आप कभी भी किसी भी समय आसानी से बंदूक की गोलियां खरीद सकेंगे. अमेरिका के अलाबामा से लेकर ओकलाहोमा और टेक्सास के ग्रोसरी स्टोर में बुलेट्स खरीदने के लिए दूध की वेंडिंग मशीनों के बगल में इन बंदूक की गोलियों वाली वेंडिंग मशीनों को देखा जा सकता है. फिलहाल ये वेंडिंग मशीनें ओकलाहोमा, टेक्सास और अलाबामा इन तीन शहरों के किराने स्टोर्स पर ही देखने को मिलेंगी. इन्हीं एटीएम की तरह ही आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है. अमेरिकन राउंड्स (American Rounds) नाम की कंपनी इन वेंडिंग मशीनों को ग्रोसरी स्टोर में लगा रही है. कंपनी का कहना है कि इन मशीनों में एक आइडेंटिफिकेशन स्कैनर और फेशियल रिकग्निशन सॉफ्टवेयर लगा है, जो खरीदार की उम्र वेरिफाई करता है. इसके बाद ही आप आसानी से इन मशीनों से बुलेट्स खरीद सकेंगे. वेंडिंग मशीनों से आराम से निकाल सकेंगे बुलेट्स कंपनी का कहना है कि एज वेरिफिकेशन टेक्नोलॉजी (Age Verification Technology) का मतलब है कि इस तरीके से गोलियां खरीदना ऑनलाइन खरीदारी से अधिक सुरक्षित हैं क्योंकि इसके लिए आपको अपनी उम्र का प्रमाणपत्र रिटेल स्टोर को देना पड़ता है. कंपनी का कहना है कि 21 साल से अधिक उम्र वाले कस्टमर्स इन वेंडिंग मशीनों से आसानी से गोलियां खरीद सकते हैं. हमारे ऑटोमैटिक बुलेट डिस्पेंसर 24/7 उपलब्ध हैं. आपको स्टोर पर घंटों और लंबी लाइनों में नहीं इंतजार नहीं करना पड़ेगा. किसी भी समय पर आप गोलियां खरीद सकते हैं. इन वेंडिंग मशीनों में इनबिल्ट AI टेक्नोलॉजी, कार्ड स्कैनिंग क्षमता और चेहरे की पहचान करने वाले सॉफ्टवेयर लगे हैं. अमेरिकन राउंड्स के सीईओ ग्रांट मैगर्स ने बताया कि फिलहाल चार राज्यों में ऐसी आठ मशीनें इंस्टॉल की गई हैं या फिलहाल इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया में हैं. हमारे पास लगभग नौ राज्यों से AARM (ऑटोमेटेड एमो रिटेल मशीन) के लिए 200 से ज्यादा स्टोर रिक्वेस्ट आए हैं और ये संख्या हर दिन बढ़ रही है. लेकिन विरोध क्यों… अमेरिका की कई ग्रोसरी स्टोर पर लगाई जा रही इन वेंडिंग मशीन का विरोध भी हो रहा है. इसकी वजह है कि अमेरिका में लगातार मास शूटिंग की घटनाएं बढ़ी हैं. 2024 में ही अब तक मास शूटिंग की इस तरह की 15 घटनाएं हो चुकी हैं. ऐसे में लोगों का कहना है कि इस तरह से खुलेआम किराने के स्टोर पर गोलियां मिलने से शूटिंग की घटनाएं और बढ़ेंगी.  

Reliance Jio का IPO अगले साल, कंपनी का वैल्यूएशन 9.35 लाख करोड़ रुपये से अधिक

मुंबई देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज को लेकर बड़ी खबर आई है. विदेशी ब्रोकरेज फर्म जेफरीज (Jefferies) ने गुरुवार 11 जुलाई को एक रिपोर्ट में मुकेश अंबानी के जियो को लेकर प्लान का खुलासा किया है. जेफरीज के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज की टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो इंफोकॉम (Reliance Jio IPO) का आईपीओ अगले साल आ सकता है. ये एक मेगा IPO होगा. इसमें कंपनी की वैल्यूएशन 9.35 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है. ये आंकलन आज के डॉलर भाव (एक डॉलर- 83.49 रुपये) के आधार पर निकाला गया है. कब आएगा रिलायंस जियो का IPO? रिपोर्ट के मुताबिक साल 2025 में रिलायंस जियो 112 अरब डॉलर के वैल्यूएशन पर सूचीबद्ध हो सकता है और इससे RIL के शेयर में 7 से 15 फीसदी तक उछाल आ सकता है. इसके अलावा, जेफरीज ने कहा कि पूरा रिलायंस जियो का पूरा आईपीओ ऑफर-फॉर-सेल (OFS) हो सकता है, जिसके जरिए माइनॉरिटी शेयरधारक कंपनी के शेयरों में अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक जियो के आईपीओ की धमाकेदार लिस्टिंग हो सकती है. इस बीच कंपनी ने मोबाइल टैरिफ में बढ़ोतरी के साथ ही अपने 5G कारोबार को भुनाने की दिशा में आगे बढ़ी है. जानकारों के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज की अगले महीने संभावित AGM में जियो की आईपीओ के बारे में तस्वीर साफ हो सकती है. ये हो सकता है कंपनी का प्लान लिस्टिंग के बाद जियो टेलीकॉम में रिलायंस की हिस्सेदारी घटकर 33.3% रह जाएगी. जबकि जियो फाइनेंशियल के मामले में रिलायंस की हिस्सेदारी लिस्टिंग पर 45.8% थी. जियो में 33.7% माइनोरिटी स्टेक के साथ रिलायंस इसमें 10% को लिस्ट करके आईपीओ की जरूरत को भी पूरा कर सकता है. RIL के शेयरों में तेजी की संभावना इस बीच ब्रोकरेज ने रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के शेयरों पर ‘Buy’ की रेटिंग बरकरार रखी है और इसका टारगेट प्राइस 3,580 रुपये प्रति शेयर तय किया है. यह बुधवार के बंद भाव से करीब 13 प्रतिशत ज्यादा है, वहीं इस साल अब तक रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में करीब 22 फीसदी की तेजी आ चुकी है. ब्रोकरेज ने कहा कि इस बात की संभावना है कि रिलायंस पहले स्पिन-ऑफ प्रक्रिया के जरिए जियो को अलग करे और फिर प्राइस डिस्कवरी सिस्टम के जरिए इसे शेयर बाजार में लिस्ट कराए. घरेलू और विदेशी दोनों निवेशक स्पिन-ऑफ के जरिए ही जियो की लिस्टिंग के पक्ष में हैं. इससे पहले अगस्त 2023 में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपनी फाइनेंशियल सर्विस यूनिट, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज को इसी तरह स्पिन-ऑफ करके प्राइस डिस्कवरी सिस्टम के जरिए शेयर बाजार में लिस्ट कराया था.

देशभर में कुल 37.9 प्रतिशत महिलाएं फैमिली प्लानिंग का आपरेशन कराती हैं, पुरुष मात्र 0.3 प्रतिशत

नई दिल्ली  नसबंदी कराने वालों की संख्या स्त्री और पुरुष दोनों में ही कम है, जबकि इस ऑपरेशन का कोई भी निगेटिव असर संबंधित व्यक्ति के शरीर पर नहीं पड़ता है. नसबंदी कराने के मामले में कनाडा के पुरुष सबसे आगे हैं, यहां 21.7 प्रतिशत पुरुष नसबंदी कराते हैं, जबकि महिलाओं की बात करें तो डोमिनिकन रिपब्लिक सबसे आगे है, यहां की 47 प्रतिशत महिलाएं नसबंदी कराती हैं. जनसंख्या देश के लिए बड़ी समस्या बन सकती है, इस बात को देश के दूरदर्शी नेताओं ने पहले ही समझ लिया था, यही वजह थी कि भारत विश्व में पहला ऐसा देश बना जिसने 1952 में ही परिवार नियोजन की शुरुआत की. आजादी के वक्त भारत की जनसंख्या मात्र 36 करोड़ थी जो आज के समय में 144 करोड़ को पार कर गई है. आजादी के बाद आरए गोपालस्वामी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी जिसमें यह कहा गया था कि जो स्थिति है उसमें प्रत्येक वर्ष देश की आबादी में 5 लाख नए लोग जुड़ जाएंगे. इसी रिपोर्ट के आधार पर देश में परिवार नियोजन की शुरुआत हुई. परिवार को सीमित करने के लिए कई तरीकों का ईजाद हुआ, जिनमें कुछ पुराने तरीके हैं और कुछ आधुनिक. इन तरीकों में से आपको किसे अपनना है यह आपकी मर्जी पर निर्भर है. सामान्यतौर पर परिवार नियोजन के लिए गोलियां, कंडोम या इसी तरह के अन्य अवरोधक उपकरण और नसबंदी या बंध्याकरण की शामिल है. कई लोग प्राकृतिक परिवार नियोजन का भी सहारा लेते हैं. नसबंदी के फायदे क्या हैं? Sterilization या नसबंदी एक सर्जरी है और जिसके जरिए एक स्त्री या पुरुष को प्रजनन करने से रोका जाता है. इसे परिवार नियोजन का सबसे सफल और कारगर उपाय माना जाता है. बावजूद इसके नसबंदी कराने वालों की संख्या स्त्री और पुरुष दोनों में ही कम है, जबकि इस ऑपरेशन का कोई भी निगेटिव असर संबंधित व्यक्ति के शरीर पर नहीं पड़ता है. नसबंदी कराने के मामले में कनाडा के पुरुष सबसे आगे हैं, यहां 21.7 प्रतिशत पुरुष नसबंदी कराते हैं, जबकि महिलाओं की बात करें तो डोमिनिकन रिपब्लिक सबसे आगे है, यहां की 47 प्रतिशत महिलाएं नसबंदी कराती हैं. क्या कहते हैं नसबंदी के आंकड़े NFHS-5 के आंकड़े बताते हैं कि पुरुष नसबंदी काफी कम कराते हैं, जबकि महिलाएं यह सर्जरी ज्यादा कराती हैं. देशभर में कुल 37.9 प्रतिशत महिलाएं फैमिली प्लानिंग का आॅपरेशन कराती हैं, जबकि पुरुषों में संख्या 0.3 प्रतिशत का है. वहीं बात अगर NFHS-4 की करें तो उसमें भी आंकड़ा 0.3 प्रतिशत का ही था, यानी कि पुरुषों की रुचि नसंबंदी में जरा भी नहीं बढ़ी है. क्या कहते हैं झारखंड के आंकड़े झारखंड के आंकड़ों को अगर देखें तो शहरी इलाकों में 37.3 प्रतिशत महिलाएं सर्जरी कराती हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा 37.4 का है. एनएफएचएस 4 में यह आंकड़ा 31.1 था. उस लिहाज से इसे उत्साहित करने वाला आंकड़ा माना जा सकता है. वहीं पुरुषों की अगर बात करें तो आंकड़े में मामूली परिवर्तन दिखता है. शहरी इलाकों में 0.4 प्रतिशत पुरुष नसबंदी कराते हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह 0.2 प्रतिशत है और कुल 0.3 प्रतिशत है. एनएफएचएस 4 में भी यह आंकड़ा 0.2 प्रतिशत ही था. यह आंकड़े यह बताते हैं कि नसबंदी को लेकर पुरुषों में कोई उत्साह नहीं है और वे परिवार नियोजन के इस तरीके को पसंद नहीं करते हैं. बिहार के पुरुषों को पसंद नहीं नसबंदी बिहार के शहरी पुरुषों की अगर बात करें तो मात्र 0.2 प्रतिशत ही नसबंदी कराते हैं, जबकि ग्रामीण पुरुषों में यह संख्या संख्या 0.1 प्रतिशत है. वहीं कुल आंकड़ा 0.1 प्रतिशत का ही है. जबकि अगर एनएफएचएस 4 की बात करें तो यह संख्या 0.0 प्रतिशत की दिखती है. झारखंड के मुकाबले में बिहार की महिलाएं भी नसबंदी और परिवार नियोजन के तरीकों पर कम भरोसा करती दिखती हैं. आंकड़े कहते हैं कि बिहार की मात्र 34.8 प्रतिशत महिलाएं बंध्याकरण कराती हैं, एनएफएचएस4 में आंकड़ा 20.7 का था. परिवार नियोजन के किसी भी तरीकों को अपनाने के मामले में भी बिहार पीछे है, यहां मात्र 55.8 प्रतिशत लोग ही इसका सहारा लेते हैं. एनएफएचएस 4 में आंकड़ा 24.1 प्रतिशत का था. क्या कहते हैं डाॅक्टर स्त्री रोग विशेषज्ञ डाॅ पुष्पा पांडेय कहती हैं कि हमारे देश में पुरुष नसबंदी में रुचि नहीं लेते हैं उनके अंदर एक डर है कि यह उनकी मर्दानगी को प्रभावित कर सकता है. जबकि सच्चाई इससे बिलकुल अलग है. नसबंदी का इन बातों से कोई लेना-देना नहीं है. पुरुषों की सर्जरी बहुत आसान भी होती है, बावजूद इसके इतने साल बाद भी उन्हें इसके लिए प्रोत्साहित नहीं किया जा सका है. महिलाओं में यह ऑपरेशन ज्यादा कठिन है, क्योंकि ज्यादातर महिलाएं डिलीवरी के समय तो यह सर्जरी कराती नहीं है, ऐसे में दोबारा उनका पेट खोलकर सर्जरी करना पड़ता है. यह कठिन प्रक्रिया है और इसमें समय भी ज्यादा लगता है. जबकि पुरुषों की सर्जरी बहुत ही आसान होती है, उन्हें रिकवरी में 24 घंटे लगते हैं और महिलाओं को 15 से 20 दिन. पुरुष नसबंदी की क्या है सच्चाई परिवार नियोजन कार्यक्रम से जुड़ी से गुंजन खलखो बताती है कि अगर केवल झारखंड की बात करें तो हमारी जो अपेक्षित उपलब्धि है उसके तहत पूरे झारखंड में प्रतिवर्ष हम 95 लाख स्त्री और पुरुष की नसबंदी करते हैं. इसमें पुरुषों की संख्या महज 1800 से दो हजार के बीच होती है. पुरुष सर्जरी क्यों नहीं कराते हैं उनमें जागरूकता का कितना अभाव है, यह बात तो है, लेकिन जरूरी यह है कि हम उन्हें प्रोत्साहित करें. अगर उनके मन में कोई भय या शंका है तो उसका निराकरण करें, आंकड़ों के आधार पर निगेटिव बात करना उचित नहीं है. इसका कारण यह है कि परिवार नियोजन के जो कार्यक्रम देश और राज्य में चलाए जा रहे हैं उनका प्रभाव बहुत ही पाॅजिटिव है. आज देश के शहरी इलाकों में टोटल फर्टिलिटी रेट दो से भी नीचे आ गया है हां ग्रामीण इलाकों में ही टोटल फर्टिलिटी रेट दो से ज्यादा है. कुल आंकड़ों मे यह दो से कम है. पुरुष बंध्याकरण इसलिए भी नहीं कराते हैं क्योंकि आज के समय में परिवार नियोजन के कई तरीके मौजूद हैं, जो ज्यादा आधुनिक और सहज हैं. … Read more

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