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भारतीय सेना ने डीएमए को भेजी सिफारिशें, 50 पर्सेंट से ज्यादा अग्निवीरों को परमानेंट करनेका प्रस्ताव

नई दिल्ली भारतीय सेना ने सिफारिश की है कि अग्निवीर अगर वीरगति (killed in action) को प्राप्त होते हैं तो उनके परिवार को जीवन निर्वहन के लिए पेंशन जैसी मदद दी जाए। साथ ही सेना ने यह भी सिफारिश की है कि 50 पर्सेंट या इससे ज्यादा अग्निवीरों को परमानेंट किया जाए। अभी अग्निपथ स्कीम के तहत अधिकतम 25 पर्सेंट अग्निवीरों को ही परमानेंट करने का प्रावधान है। सेना ने करीब चार महीने तक अपनी सभी यूनिट से अग्निपथ स्कीम और अग्निवीरों को लेकर फीडबैक लिया और सेना के भीतर ही पूरा सर्वे कराया। सेना ने कुछ दिनों पहले ही फीडबैक और सर्वे के आधार पर अपनी सिफारिशें डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स यानी डीएमए को भेजी हैं। डीएमए प्रमुख चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ हैं। सूत्रों के मुताबिक सिफारिश में कहा गया है कि अगर अग्निवीर वीरगति को प्राप्त होते हैं तो उनके परिवार को subsistence allowance (जीवन निर्वाह भत्ता) दिया जाना चाहिए। अभी नहीं है ऐसा कोई प्रावधान एक अधिकारी के मुताबिक यह एक तरह से पेंशन ही है। सिफारिश में यह भी कहा गया है कि अगर देश की रक्षा के लिए काम करते हुए अग्निवीर डिसएबल्ड (विकलांग) होते हैं तो उन्हें भी एक्स ग्रेशिया (आर्थिक मदद) दिया जाना चाहिए। अभी अग्निपथ स्कीम में अग्निवीर के लिए इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है। सेना की सिफारिश है कि हर बैच में कम से कम 50 पर्सेंट अग्निवीरों को परमानेंट किया जाना चाहिए। इसके साथ ही टेक्निकल आर्म में अग्निवीरों की अधिकतम ऐज बढ़ाने की भी सिफारिश की गई है। सूत्रों के मुताबिक सेना की तरफ से अग्निवीर का कार्यकाल चार साल से बढ़ाने जैसी कोई सिफारिश नहीं की गई है। जून 2022 में लई गई थी स्कीम भारतीय सेना में अग्निपथ स्कीम जून 2022 में लागू की गई और इसके साथ ही पुराने भर्ती सिस्टम को पूरी तरह खत्म कर दिया गया। सेना में जितनी भी भर्ती हो रही हैं वह सब अग्निपथ स्कीम के तहत अग्निवीरों की हो रही हैं। स्कीम लागू होने के साथ ही इसे लेकर सवाल भी उठने लगे और इसका विरोध भी होने लगा। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि सरकार में आने पर वे अग्निपथ स्कीम को खत्म कर पुराने भर्ती सिस्टम को लागू करेंगे। विपक्ष को नहीं पसंद सरकार की नई स्कीम पहले संसद सत्र में इंडिया गठबंधन ने अग्निपथ स्कीम का विरोध किया और अग्निवीर और रेगुलर सैनिकों के बीच भेदभाव का मसला उठाया। कई रिटायर्ड ऑफिसर कह चुके हैं कि अग्निपथ स्कीम सेना की ऑपरेशनल क्षमता और युद्ध लड़ने की योग्यता को कम करेगी। पूर्व नेवी चीफ एडमिरल केबी सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि ‘अग्निपथ स्कीम लाने के पीछे मोटिव सिर्फ पेंशन बिल घटाना था। जबकि तथ्य यह है कि यह स्कीम कॉम्बेट इफेक्टिवनेस को कम करेगी और ये तथ्य नैशनल सिक्योरिटी को समझने वाले सभी लोग जानते हैं’।

जून 2024 वैश्विक स्तर पर इस बार सबसे ज्यादा गर्म रहा, लगातार 12वां महीना तापमान सामान्य से 1.5 डिग्री अधिक दर्ज

नई दिल्ली  जलवायु परिवर्तन का असर पूरी दुनिया पर पड़ता दिखाई दे रहा है। कहीं गर्मी तो कहीं बारिश का तांडव देखा जा सकता है। तापमान ने तो सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इस गर्मी में पारा भारत में अब तक 50 डिग्री के पार जा चुका है। इस बीच, यूरोपीय संघ (ईयू) की जलवायु एजेंसी कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (सी3एस) ने बताया कि पिछले महीने पांच महाद्वीपों में लाखों लोगों को चिलचिलाती गर्मी का सामना करना पड़ा। साथ ही इस बात की पुष्टि की कि जून अब तक का सबसे गर्म महीना था। 1.5 डिग्री की लिमिट को पार करने के करीब दुनिया बड़े पैमाने पर जलवायु परिवर्तन के संकट को टालने के लिए विशेषज्ञों द्वारा निर्धारित 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार करने के कगार पर खड़ी है। जून इस तय सीमा के करीब पहुंचने का लगातार 12वां महीना है। सी3एस के वैज्ञानिकों के मुताबिक, पिछले साल जून के बाद से हर महीना रिकॉर्ड पर सबसे गर्म महीना रहा है। जनवरी भी अब तक की सबसे गर्म गौरतलब है, इस साल जनवरी में बढ़ता तापमान औद्योगिक काल (1850 से 1900) से पहले की तुलना में 1.66 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा था, जो इसे अब तक की सबसे गर्म जनवरी बनाता है। बता दें कि कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस यूरोपियन यूनियन के अर्थ ऑब्जरवेशन प्रोग्राम का हिस्सा है। जनवरी 2024 के दौरान सतह के पास हवा का औसत वैश्विक तापमान 13.14 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था, जो 1991 से 2020 के दरमियान जनवरी माह में दर्ज औसत तापमान से करीब 0.7 डिग्री सेल्सियस ज्यादा है।  रिकॉर्ड तोड़ने वाली गर्मी सिर्फ़ ज़मीन तक ही सीमित नहीं है। जून 2024 में समुद्री सतह का तापमान भी अब तक का सबसे ज़्यादा दर्ज किया गया। नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) ने बताया कि वैश्विक महासागर सतह तापमान विसंगति उनके जलवायु रिकॉर्ड में सबसे ज़्यादा थी, जिसने ध्रुवीय बर्फ़ पिघलने की ख़तरनाक दर में योगदान दिया। अंटार्कटिक समुद्री बर्फ़ कवरेज ऐतिहासिक रूप से कम हो गई है, जो वैश्विक समुद्री स्तरों और पारिस्थितिकी तंत्रों के लिए गंभीर निहितार्थ पैदा करने वाली प्रवृत्ति को जारी रखती है। समुद्री बर्फ़ में गिरावट, जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों का एक स्पष्ट संकेतक है। ग्लोबल वार्मिंगजिससे मौसम का मिजाज और समुद्री जीवन प्रभावित हो रहा है। अभूतपूर्व तापमान ने वैश्विक नेताओं और पर्यावरण संगठनों के बीच कार्रवाई के लिए नए सिरे से आह्वान किया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने आगे के नुकसान को कम करने के लिए मजबूत जलवायु नीतियों की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अल नीनो की स्थिति के बने रहने से आने वाले महीनों में उच्च तापमान बना रह सकता है, जिससे संभवतः 2024 रिकॉर्ड पर सबसे गर्म वर्षों में से एक बन सकता है। चल रहे गर्मी की लहर संयुक्त राज्य अमेरिका से लेकर दक्षिणी यूरोप और चीन तक महाद्वीपों में मौसम संबंधी गंभीर घटनाओं पर एक अध्ययन से यह पता चलता है कि किस प्रकार गंभीर मौसम संबंधी घटनाएं लगातार और तीव्र होती जा रही हैं तथा जलवायु परिवर्तन के परिणामस्वरूप अब उनकी संभावना 50 गुना अधिक हो गई है। कुल मिलाकर, जून का महीना इतिहास में सबसे गर्म महीना होने का रिकॉर्ड तोड़ता है, जो जलवायु परिवर्तन की बढ़ती गति और इसके व्यापक प्रभावों की एक स्पष्ट याद दिलाता है। जैसे-जैसे वैश्विक तापमान बढ़ता जा रहा है, प्रभावी जलवायु समाधानों की आवश्यकता और भी अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को रोकने और भविष्य की पीढ़ियों के लिए ग्रह की सुरक्षा के लिए संधारणीय प्रथाओं को लागू करने के प्रयासों को तेज करना चाहिए।

भारत से सस्ती है कंगाल पाकिस्तान में मोबाइल सेवा, जानिए बाकी देशों में कितना है मिनिमम रिचार्ज

नई दिल्ली रिलायंस जियो, एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने मोबाइल टैरिफ में भारी बढ़ोतरी की है। इससे महंगाई से जूझ रहे आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। एनालिस्ट्स का कहना है कि इससे शहरी इलाकों में टेलिकॉम सर्विसेज पर खर्च वित्त वर्ष 2025 में कुल घरेलू खर्च का 2.8 फीसदी हो जाएगा। ग्रामीण परिवारों के लिए यह 4.5 फीसदी से बढ़कर 4.7 फीसदी हो जाएगा लेकिन सरकार और टेलिकॉम रेगुलेटर ट्राई (TRAI) ने कहा है कि टेलिकॉम कंपनियां टैरिफ फिक्स करने के लिए स्वतंत्र हैं और उनका इस मामले में हस्तक्षेप करने का कोई इरादा नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि भारत में मोबाइल टैरिफ अब भी दुनिया के अधिकांश देशों से सस्ता है। दूसरी ओर आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में मोबाइल टैरिफ भारत से सस्ता है। हालिया बढ़ोतरी के बाद रिलायंस जियो का मिनिमम सर्विस चार्ज 139 रुपए से बढ़कर 189 रुपए हो गया है। इसमें 28 दिन की वैलिडिटी और दो जीबी डेटा शामिल है। इसी तरह एयरटेल और वोडाफोन आइडिया का भी मिनिमम सर्विस चार्ज 179 रुपए से बढ़कर 199 रुपए हो गया है लेकिन सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में महीनेभर के लिए अनलिमिटेड वॉयस और 18 जीबी डेटा के लिए आपको 1.89 डॉलर यानी करीब 157 रुपए खर्च करने पड़ते हैं। यह रेट सरकारी कंपनी बीएसएनएल का है। बीएसएनएल पहले एक प्राइस रेगुलेटर की तरह काम करता था। इससे प्राइवेट कंपनियां टैरिफ बढ़ाने से बचती थीं। लेकिन कंपनी 4-जी और 5-जी सर्विसेज के मामले में निजी कंपनियों के साथ होड़ करने की स्थिति में नहीं है। पाकिस्तान में सस्ती है सेवा सरकार ने कई देशों में मोबाइल टैरिफ के बारे में डिटेल जानकारी देते हुए भारत से उनकी तुलना की है। इन आंकड़ों के मुताबिक चीन में मिनिमम सर्विस के लिए यूजर्स को 8.84 डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं। अफगानिस्तान में यह राशि 4.77 डॉलर, भूटान में 4.62 डॉलर, बांग्लादेश में 3.24 डॉलर और नेपाल में 2.75 डॉलर है यानी इन देशों में मोबाइल टैरिफ भारत से महंगा है। वहीं पाकिस्तान में मोबाइल यूजर्स को अपनी सर्विस बनाए रखने के लिए मिनिमम 1.39 डॉलर खर्च करने पड़ते हैं यानी पाकिस्तान में मोबाइल टैरिफ भारत से सस्ता है। अमेरिका में मिनिमम मोबाइल रिचार्ज प्लान 49 डॉलर यानी करीब 4000 रुपए का है। इसी तरह ऑस्ट्रेलिया में इसके लिए यूजर्स को 20.1 डॉलर, साउथ अफ्रीका में 15.8 डॉलर, यूके में 12.5 डॉलर, रूस में 6.55 डॉलर, ब्राजील में 6.06 डॉलर, इंडोनेशिया में 3.29 डॉलर, मिस्र में 2.55 डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। भारत में टेलिकॉम कंपनियों ने प्रति यूजर औसत राजस्व (ARPU) बढ़ाने के लिए टैरिफ में बढ़ोतरी की है। उन्होंने महंगे 5G स्पेक्ट्रम खरीदने के लिए बहुत ज्यादा पैसे चुकाए हैं लेकिन अभी तक बहुत कम मोनेटाइजेशन हुआ है। यह नवंबर 2021 के बाद मोबाइल टैरिफ में पहली बड़ी बढ़ोतरी है। सरकार का दखल नहीं, बाजार के हिसाब से होती हैं तय संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग ने इसे लेकर शुक्रवार को एक बयान जारी किया. बयान में दूरसंचार विभाग ने कहा कि अभी घरेलू बाजार में 1 सरकारी कंपनी और 3 प्राइवेट कंपनियां काम कर रही हैं. मोबाइल सेवाओं का बाजार अब डिमांड और सप्लाई के हिसाब से काम करता है. मोबाइल कंपनियां नियामक ट्राई द्वारा तय किए गए ढांचे के तहत दरें तय करती हैं. सरकार फ्री मार्केट के निर्णयों में दखल नहीं देती है. टैरिफ में बदलाव की ट्राई करता है निगरानी बयान के अनुसार, टेलीकॉम कंपनियों के द्वारा दरों में की जाने वाली बढ़ोतरी की ट्राई निगरानी करता है और देखता है कि ये बदलाव तय दायरे में रहें. दूरसंचार विभाग ने साथ ही ये भी जोड़ा कि बीते 2 सालों से देश में मोबाइल टैरिफ में कोई बदलाव नहीं हुआ था, जबकि उस दौरान टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स ने देश में 5जी सेवाएं शुरू करने पर भारी निवेश किया. उसी का परिणाम है कि आज देश में औसत मोबाइल स्पीड बढ़कर 100 एमबीपीएस के स्तर पर पहुंच गई है और मोबाइल स्पीड के मामले में देश की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग अक्टूबर 2022 के 111 से छलांग लगाकर 15 पर पहुंच गई है. टेलीकॉम कंपनियों ने इतना महंगा किया प्लान तीनों प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइिडया ने इस महीने से अपने प्लान को महंगा किया है. दूरसंचार कंपनियों ने मोबाइल टैरिफ में 11 से 25 फीसदी तक की बढ़ोतरी की है. सबसे पहले रिलायंस जियो ने टैरिफ बढ़ाने का ऐलान किया था. उसके बाद भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने भी टैरिफ बढ़ाने का ऐलान किया. टैरिफ बढ़ने से मोबाइल उपभोक्ताओं पर हजारों करोड़ रुपये का बोझ बढ़ने का अनुमान है. विपक्षी पार्टियां इस बात को मुद्दा बना रही हैं. वहीं सरकार ने ताजे बयान में सफाई देते हुए दोहराया है कि अभी भी भारत में मोबाइल सेवाओं की दरें दुनिया के प्रमुख देशों की तुलना में कम हैं. दूरसंचार विभाग ने अपनी बात रखने के लिए इंटरनेशनल टेलीकॉम यूनियन के द्वारा जारी आंकड़ों को आधार बनाया है. आईटीयू के आंकड़ों में न्यूनतम मोबाइल, वॉयस और डेटा के बास्केट (140 मिनट, 70 एसएमएस और 2 जीबी डेटा) की दरें बताई गई हैं. डेटा पिछले साल यानी 2023 के हिसाब से है. प्रमुख देशों में मोबाइल सेवाओं की दरें आंकड़ों के अनुसार, मिनिमम सेवाओं के लिए चीन में उपभोक्ता 8.84 डॉलर खर्च कर रहे हैं. इसी तरह अफगानिस्तान में 4.77 डॉलर, भूटान में 4.62 डॉलर, बांग्लादेश में 3.24 डॉलर, नेपाल में 2.75 डॉलर और पाकिस्तान में 1.39 डॉलर खर्च करना पड़ रहा है. प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की दरों को देखें तो वे अमेरिका में 49 डॉलर, ऑस्ट्रेलिया में 20.1 डॉलर, दक्षिण अफ्रीका में 15.8 डॉलर, ब्रिटेन में 12.5 डॉलर, रूस में 6.55 डॉलर, ब्राजील में 6.06 डॉलर, इंडोनेशिया में 3.29 डॉलर और मिस्र में 2.55 डॉलर हैं. भारत के मामले में यह दर 1.89 डॉलर है, जिसमें उपभोक्ताओं को अनलिमिटेड वॉयस कॉल के साथ 18 जीबी डेटा का लाभ मिल रहा है.

सऊदी प्रिंस के महल में पर्यटक रातें गुजार सकेंगे और शाही जिंदगी का अनुभव लेंगे

रियाद कच्चे तेल की सप्लाई से अर्थव्यवस्था को चलाने वाले सऊदी अरब के आगे संकट खड़ा है। दुनिया भर में जिस तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों का विकल्प बढ़ रहा है, उससे कच्चे तेल की डिमांड में कमी आ सकती है। ऐसी स्थिति सऊदी अरब, कुवैत, कतर जैसे देशों के लिए चिंता की बात है। सऊदी अरब ने तो इसकी काट भी खोजना शुरू कर दिया है और उस पर तेजी से काम भी कर रहा है। इसके तहत उसने खेल के आयोजनों को बढ़ावा दिया है तो वहीं मनोरंजन के कार्यक्रम भी करा रहा है। यही नहीं पर्यटन को भी सऊदी अरब बढ़ावा देने पर काम कर रहा है। अब पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से सऊदी अरब अपने शासक रहे सऊद बिल अब्दुलअजीज के महल को भी किराये पर देगा। इस महल में पर्यटक रातें गुजार सकेंगे। 3 लाख 65 हजार वर्ग फुट का यह विशाल महल आधुनिक सऊदी अरब के दूसरे शासक सऊद बिन अब्दुलअजीज का घर हुआ करता था। रेड पैलेस के नाम से विख्यात इस महल को 1940 में तत्कालीन क्राउन प्रिंस के लिए तैयार किया गया था। अब इसे अल्ट्रा लग्जरी होटल के तौर पर विकसित किया जा रहा है। इस महल में ठहर कर लोगों को सऊदी अरब की शाही जिंदगी के अनुभव मिल सकेंगे। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार महल को नया रूप बुटीक ग्रुप दे रहा है, जो एक बिल्डर कंपनी है। दशकों तक यह महल शासक का आवास होता था और फिर सरकार का इसे मुख्यालय बना दिया गया था। अब यह एक होटल के तौर पर विकसित होगा। इसके कुल 70 कमरों में पर्यटक रुकेंगे। इससे लोगों को न सिर्फ ठहरने का मौका मिलेगा बल्कि सऊदी अरब की शाही जिंदगी के भी दीदार हो सकेंगे। इसके अलावा इस होटल में सऊदी अरब के शाही परिवार के पसंदीदा व्यंजन परोसे जाएंगे। इस तरह रहने से लेकर खाने तक में लोगों को सऊदी अरब की शाही लाइफस्टाइल का अनुभव कराया जाएगा। इस महल में स्पा सेंटर भी खुलेंगे, जहां सऊदी की पारंपरिक थेरेपी मिलेंगी। सऊदी अरब के इतिहास और संस्कृति को भी बताएगा महल बुटीक ग्रुप का कहना है कि सऊदी अरब में यह अपनी तरह का पहला प्रयोग है। हालांकि इसमें रहने की कीमत काफी ज्यादा होगी। बुटीक ग्रुप के सीईओ मार्क डी. कॉसिनिस ने कहा, ‘यह रॉयल जिंदगी को जीने का एक अनुभव होगा। यहां आपको हर वह चीज मिलेगी, जो सऊदी अरब की शाही जिंदगी में रही है।’ इसके अलावा इस महल में रहकर लोगों को सऊदी अरब की इतिहास और संस्कृति को भी समझने में मदद मिलेगी।  

चीन, जापान और साउथ कोरिया 2028 तक बुक, 30 साल में 50,000 से अधिक जहाजों की जरूरत

नई दिल्ली  भारत और एशिया के दूसरे सबसे बड़े रईस गौतम अडानी (Gautam Adani) अब जहाज निर्माण यानी शिपबिल्डिंग में उतरने की योजना बना रहे हैं। गुजरात के मुंद्रा में अडानी ग्रुप (Adani Group) के फ्लैगशिप पोर्ट पर जहाज बनाने का काम शुरू हो सकता है। इसकी वजह यह है कि चीन, जापान और दक्षिण कोरिया में अधिकांश यार्ड कम से कम 2028 तक पूरी तरह बुक हैं। यही वजह है कि दुनिया में जहाज ऑपरेट करने वाली बड़ी कंपनियों को शिपबिल्डिंग के लिए वैकल्पिक जगहों की तलाश है। इनमें भारत भी शामिल है। इस मौके का फायदा उठाने के लिए अडानी ग्रुप शिपबिल्डिंग में उतरने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। अडानी ग्रुप देश का सबसे बड़ा पोर्ट ऑपरेटर है। मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 में भारत को शीर्ष 10 शिपबिल्डर बनाने और मैरीटाइम अमृत काल विजन में 2047 तक शीर्ष पांच में शामिल होने का लक्ष्य रखा गया है। अडानी ग्रुप का प्लान देश की इस योजना में फिट बैठता है। दुनिया में कमर्शियल शिपबिल्डिंग मार्केट में भारत की हिस्सेदारी महज 0.05% है। दुनिया में कमर्शियल जहाज बनाने वाले देशों की लिस्ट में भारत 20वें स्थान पर है। देश की कुल विदेशी माल-ढुलाई आवश्यकताओं में भारतीय स्वामित्व वाले और भारतीय झंडे वाले जहाजों का हिस्सा लगभग 5% है। अडानी की जहाज निर्माण योजना को मुंद्रा बंदरगाह के लिए 45,000 करोड़ रुपये की विस्तार योजना में शामिल कर लिया गया है। इस योजना को हाल में पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी मिली है। 62 अरब डॉलर का मार्केट अडानी ग्रुप ऐसे समय जहाज निर्माण में उतरने की तैयारी कर रहा है जब ग्लोबल शिपिंग इंडस्ट्री डीकार्बनाइजेशन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए धीरे-धीरे ग्रीन शिप की ओर बढ़ रही है। एक अनुमान के अनुसार मौजूदा बेड़े को बदलने के लिए अगले 30 वर्षों में 50,000 से अधिक जहाजों का निर्माण किया जाना है। अडानी ग्रुप ने इस बारे में भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं दिया। केपीएमजी की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2047 तक भारत का कमर्शियल शिपबिल्डिंग मार्केट 62 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। साथ ही इससे जुड़े सहायक उद्योग के 37 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे 1.2 करोड़ लोगों को नौकरी मिलने की उम्मीद है। केपीएमजी के अनुसार मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और अमृत काल विजन लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए भारतीय शिपयार्ड्स के सालाना उत्पादन को 2030 तक 0.072 मिलियन ग्रॉस टन से बढ़ाकर 0.33 मिलियन ग्रॉस टन और 2047 तक 11.31 मिलियन ग्रॉस टन तक बढ़ाने की आवश्यकता है। साल 2047 तक घरेलू कार्गो क्षमता में वृद्धि के अलावा भारतीय विदेशी कार्गो की न्यूनतम 5% ढुलाई प्राप्त करने के लिए, अतिरिक्त बेड़े की क्षमता की आवश्यकता है। इसके परिणामस्वरूप घरेलू जहाज निर्माण की मांग अगले 23 वर्षों में 59.74 मिलियन ग्रॉस टन होने का अनुमान है। इनमें पुराने जहाजों का रिप्लेसमेंट भी शामिल है। क्या है एडवांटेज जानकारों का कहना है कि किसी नई कंपनी को इस सेक्टर में काफी समय लग सकता है लेकिन अडानी ग्रुप के लिए परिस्थितियां आसान हैं। उसके पास इसके लिए जमनी और और पर्यावरणीय मंजूरी है। हैवी इंजीनियरिंग में अडानी ग्रुप का यह पहला कदम होगा। एसईजेड का दर्जा मिलने से अडानी ग्रुप को अनेक वित्तीय और टैक्स चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी। इन चुनौतियों के कारण स्थानीय कंपनियां चीन की शिपबिल्डिंग कंपनियों के साथ होड़ करने में असमर्थ है। भारत में आठ सरकारी यार्ड और करीब 20 निजी यार्ड हैं। लार्सन एंड टुब्रो चेन्नई के पास कट्टुपल्ली में एक यार्ड ऑपरेट करती है।  

अमरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में उप-चुनाव के लिये मतदान कल, सुबह 7 बजे से होगा मतदान

भोपाल अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री राजेश कौल ने बताया है कि छिंदवाड़ा जिले के अमरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र (अजजा) में उप-चुनाव के लिये 10 जुलाई को मतदान होगा। मतदान सुबह 7 से शाम 6 बजे तक होगा। विधानसभा क्षेत्र में कुल 2 लाख 57 हजार 866 मतदाता हैं। इनमें से एक लाख 29 हजार 372 पुरूष, एक लाख 28 हजार 492 महिला और दो अन्य मतदाता हैं। कुल 332 मतदान केन्द्र बनाये गये हैं। शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिए 62 सेक्टर अधिकारी (रिजर्व सहित) केन्द्रीय पुलिस बल की 3 कंपनियां और जिला पुलिस बल की ड्यूटी लगाई गई है। कुल 1485 मतदान कर्मी की ड्यूटी लगाई गई है। कुल 10 मतदान केन्द्र महिला प्रबंधकीय बूथ हैं। कुल 53 मेडिकल ऑफिसर की ड्यूटी लगाई गई है। मतदान कराने के लिये मतदान दल सभी मतदान केन्द्रों में पहुँच गये हैं। मतगणना 13 जुलाई को होगी। शांतिपूर्ण मतदान कराने के लिये सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। मतदाता जब मतदान करने जाएं तो मतदाता सूचना पर्ची के साथ 13 फोटो युक्त दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज जरूर लेकर जायें।  क्यूआर कोड युक्त मतदाता सूचना पर्ची से मतदाता अपने मतदान केन्द्र का नाम, पता, क्रमांक, निर्वाचक नामावली में मतदाता क्रमांक राज्य और जिले का हेल्प लाइन नम्बर जैसी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कर सकेंगे, लेकिन मतदान के लिए एक फोटोयुक्त  दस्तावेज जरूरी होगा। यदि किसी मतदाता के पास मतदाता सूचना पर्ची नहीं है और उसका नाम मतदाता सूची में दर्ज है, तो 13 फोटोयुक्त वैकल्पिक दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज दिखाकर मतदाता अपना मतदान कर सकेंगे। यह हैं 13 वैकल्पिक दस्तावेज फोटोयुक्त वोटर आईडी कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड, दिव्यांग यूनिक आईडी कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, मनरेगा जॉब कार्ड, पेंशन दस्तावेज (फोटो सहित), पासपोर्ट, पासबुक (फोटो सहित बैंक/डाकघर द्वारा जारी), फोटोयुक्त सर्विस पहचान पत्र (केन्द्र/राज्य सरकार/सार्वजनिक उपक्रम/पब्लिक लिमिटेड कंपनियों द्वारा जारी), सांसद, विधायक  को जारी आधिकारिक पहचान पत्र, एनपीआर के अंतर्गत आरजीआई द्वारा जारी स्मार्ट कार्ड, स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड (श्रम मंत्रालय की योजना के अंतर्गत जारी) में से कोई भी एक दस्तावेज दिखाकर मतदान कर सकते हैं।  

ओम बिरला ने कहा- विधानसभा की तर्ज पर नगर निगमों में सदन को चलाने के लिए प्रक्रिया निर्धारित की जाना चाहिए

इंदौर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को इंदौर नगर निगम मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि लोकसभा और विधानसभा की तर्ज पर नगर निगमों में सदन को चलाने के लिए प्रक्रिया निर्धारित की जाना चाहिए। एक घंटे का शून्य काल हो, जिसमें विविध मुद्दे उठाए जा सकें। पानी, बिजली, सीवरेज जैसे मुद्दों पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाए जाएं। ऐसे प्रयास किए जाने चाहिए, जिससे सदन पूरे दिन चल सके। सकारात्मक रूप से जनता से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा होनी चाहिए। जितना सुंदर इंदौर नगर निगम का सभागृह है, उतनी ही सुंदर इसकी कार्रवाई भी होना चाहिए। इस सदन को ऐसे आदर्श स्थापित करना चाहिए ताकि प्रदेश के अन्य नगरीय निकाय यहां आकर देखें और सीखें कि नगर निगम सदन की कार्रवाई कैसे चलती है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, निगमायुक्त शिवम वर्मा, सांसद शंकर लालवानी, महापौर परिषद सदस्य और पार्षदों के साथ-साथ निगम के अधिकारी भी मौजूद थे। जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ी चुनौती बिरला ने कहा कि जलवायु परिवर्तन देश ही नहीं, विश्व में सबसे बड़ी चुनौती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक पेड़ मां के नाम अभियान के माध्यम से दुनिया को दिशा दी है। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जो 51 लाख पौधे रोपने का संकल्प लिया है, वह पूरे देश के लिए प्रेरणा का काम करेगा। उम्र में छोटे हैं लेकिन मैंने उनसे बहुत सीखा है कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि बिरला लोकतंत्र के मंदिर के रखवाले हैं। वह उम्र में भले ही मुझसे छोटे हैं, लेकिन मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा है। हमने लोकसभा में गंभीरता, पवित्रता, निष्पक्षता देखी है। सांसदों का आचरण भी देखा है। हमने देखा है कि जब भी कोई सांसद बोलते हैं तो कोई शोर नहीं करता, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान कुछ विपक्षियों ने जमकर हंगामा मचाया। विजयवर्गीय ने बिरला से कहा कि आप हेड मास्टर हैं। आप सासंदों को बताएं कि वे सदन में कैसा व्यवहार करें। आप उनके लिए आदर्श हैं। आपका गुस्सा क्षणिक होता है। जहां जरूरत होती है, आप गुस्सा दिखाते हैं और जहां जरूरत होती है, मुस्कुरा देते हैं। सांसद आपके चेहरे को देखकर समझ जाते हैं कि आप क्या चाहते हैं। सांसदों को यह समझना चाहिए कि वे लोकतंत्र के सबसे बड़े सदन में बैठे हैं। उन्हें पूरा देश देखता है। नगरीय निकाय के सदन उन्हीं से सीखते हैं।

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित, भारत के लोगों को किया इसे समर्पित

मॉस्को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मंगलवार को रूस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल द फर्स्ट-कॉल’ से सम्मानित किया गया। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता के बाद ग्रैंड क्रेमलिन पैलेस में आयोजित एक समारोह के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को देश का सर्वोच्च राजकीय सम्मान प्रदान किया। उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री को रूस और भारत के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी के साथ रूसी और भारतीय लोगों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को विकसित करने में उत्कृष्ट कार्यों के लिए यह पुरस्कार दिया गया है। समारोह की शुरुआत में पुतिन ने कहा, “प्रिय प्रधानमंत्री जी, प्रिय मित्र, आपको ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द फर्स्ट-कॉल’ से सम्मानित करना हमारे देश और यहां के लोगों के बीच मित्रता और आपसी समझ को मजबूत करने में आपके महत्वपूर्ण योगदान के लिए आपके प्रति रूस की कृतज्ञता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि आपने हमेशा हमारे देश के साथ संपर्क बढ़ाने की वकालत की है, यहां तक ​​कि जब आप गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब भी आपने रूसी क्षेत्रों, इस मामले में आस्ट्राखान क्षेत्र के साथ सिस्टर-सिटी संबंध स्थापित करने की पहल की थी। रूसी राष्ट्रपति ने अपने भाषण में उल्लेख किया कि 10 वर्षों तक भारत के प्रधानमंत्री होने के नाते, आपने वास्तव में यह कोशिश की कि रूस-भारत संबंधों विशेषकर रणनीतिक साझेदारी बेहतर हो और आपने इसे हासिल कर लिया है। आपके सहयोग से, व्यापार, आर्थिक और सैन्य-तकनीकी क्षेत्रों, परमाणु और हाइड्रोकार्बन ऊर्जा, उच्च प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष में सबसे बड़ी रूसी-भारतीय परियोजनाएं सफलतापूर्वक सुचारू रूप से चलाई जा रही है। अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में रूस-भारत सहयोग के लिए एक स्थिर आधार निर्माण करने में आपके योगदान को कम करके आंकना मुश्किल है। बता दें कि इस ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द फर्स्ट-कॉल’ सम्मान के लिए जो चीजें दी जाती हैं, उसमें एक बैज, एक स्टार, एक ऑर्डर चेन और एक ऑर्डर रिबन होता है। वहीं, युद्ध क्षेत्र में पराक्रम दिखाने वाले को दिए जाने वाले ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द फर्स्ट-कॉल’ सम्मान के तहत एक बैज और स्टार के साथ तलवारें दी जाती है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस सम्मान को ग्रहण करने के बाद कहा, “ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल प्राप्त करने पर सम्मानित महसूस कर रहा हूं। मैं इसे भारत के लोगों को समर्पित करता हूं।” इस सम्मान की स्थापना ज़ार पीटर-एक ने 1699 के आसपास की थी और यह रूस के सबसे पुराने पुरस्कारों में से एक है। इसे 1918 में समाप्त कर दिया गया था और 1998 में रूस के राष्ट्रपति के आदेश पर फिर से इसे बहाल किया गया था। ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द फर्स्ट-कॉलेड’ को प्रमुख सरकारी और सार्वजनिक हस्तियों, सैन्य नेताओं, विज्ञान, संस्कृति, कला और अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के उत्कृष्ट योगदान और उनकी असाधारण सेवाओं के लिए दिया जाता है। जो रूस की समृद्धि, महानता और गौरव में योगदान करते हैं। साथ ही जो देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता को सुनिश्चित करते हैं। यह मॉस्को के साथ संबंधों को विकसित करने में दिए गए उत्कृष्ट योगदान के लिए विदेशी सरकारों के प्रमुखों और नेताओं को भी दिया जाता है।

अमेरिका के टाइम्स स्क्वायर पर भारतीय समुदाय के लोगों ने तिरंगा हाथ में थामकर पीएम मोदी के तीसरे कार्यकाल में जश्न मनाया

न्यूयॉर्क भारत में तीसरी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने से पूरी दुनिया के भारतवंशियों में जबरदस्त उत्साह है। अमेरिका के न्यूयॉर्क में टाइम्स स्क्वायर पर भारतीय समुदाय के लोगों ने तिरंगा हाथ में थामकर पीएम मोदी के तीसरे कार्यकाल में भारत के उत्थान और प्रगति का जश्न मनाया। इस दौरान भारतवंशियों ने टाइम्स स्क्वायर पर ‘भारत माता की जय’ और ‘मोदी-मोदी’ के नारे भी लगाए। इस बैठक का आयोजन इंडियन माइनॉरिटीज फाउंडेशन (आईएमएफ) और द यूनिटी ऑफ फेथ फाउंडेशन, भारत (टीयूएफएफ भारत) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था। इसके लिए न्यूयॉर्क में एक राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जहां अलग अलग धर्मों के नेताओं ने मोदी सरकार 3.0 को लेकर चर्चा की। बैठक का विषय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सभी समुदायों, विशेष रूप से अल्पसंख्यकों के लिए समावेशी विकास और समान अवसर था। बैठक में राज्यसभा सांसद और आईएमएफ के संयोजक सतनाम सिंह संधू, आईएमएफ की सह-संस्थापक प्रोफेसर हिमानी सूद और टीयूएफएफ के सह-संस्थापक अन्ना बॉर्नहोल्ट और डॉ समंदर तलवार शामिल हुए। बैठक में धर्मगुरुओं ने भारत में विभिन्न समुदायों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की सराहना की। इसके अलावा, भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था पर संतोष व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू की गई नीतियों की सराहना की गई। धर्मगुरुओं ने इस बात पर प्रकाश डाला कि सभी भारतीय नागरिकों, चाहे उनका धार्मिक सम्बन्ध कुछ भी हो, को मोदी सरकार की नीतियों से लाभ हुआ है, जिसने इस अवधि में 25 करोड़ (250 मिलियन) से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का लक्ष्य भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के बीच सामाजिक समानता पैदा करना है। प्रधानमंत्री मोदी की सरकार के तहत देश में तुष्टीकरण की राजनीति की जगह समावेशी विकास को प्राथमिकता दी गई है। राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस के बाद 47वीं स्ट्रीट से फादर डफी स्क्वायर तक रैली निकाली गई, जिसमें भारत की वैभवशाली भावना का जश्न मनाया गया। बाद में, टाइम्स स्क्वायर में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सदस्यों, विभिन्न धर्मों के नेताओं, प्रवासी भारतीयों, दिग्गज कंपनियों, समाजसेवकों, शिक्षाविदों, अमेरिकी राजनेताओं और विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने उपस्थिति दर्ज कराई। यह कार्यक्रम प्रतिष्ठित न्यूयॉर्क शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में भारत के वैश्विक उदय और मोदी 3.0 के जश्न का प्रतीक था।

सीएम योगी ने मोहर्रम के मौके पर अस्त्र रहित जुलूस निकालने का आह्वान किया था, इसका मुस्लिम जमात ने किया स्वागत

बरेली ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने मोहर्रम के मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश का स्वागत किया है। दरअसल, सीएम योगी ने मोहर्रम के मौके पर अस्त्र रहित जुलूस निकालने का आह्वान किया था। इसी पर अब मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि मोहर्रम का महीना शुरू हो चुका है। यह इस्लामिक साल का पहला महीना है। मैं सभी मुस्लिम भाइयों-बहनों को नए साल की शुभकामाएं देता हूं। मैं मोहर्रम के मौके पर जुलूस निकालने वाले लोगों से अपील करता हूं कि वो लोग असलहे का उपयोग ना करें। इस्लाम हमें शांति का पैगाम देता है। अल्लाह ने पूरी दुनिया को शांति का पैगाम दिया है। अगर आप में से कोई भी अपने जुलूस में असलहा का इस्तेमाल करेगा, तो इससे हिंसा की तस्वीर लोगों के बीच में पेश होगी। इसलिए मैं आप लोगों से अपील करता हूं कि ऐसा करने से बचें। ऐसा करने से कट्टरपंथी सोच उभरकर सामने आती है। हमें ऐसा करने से बचना चाहिए। हम सभी को इस्लाम की मंशा को समझना होगा। पैगंबर के पैगाम को आप लोग समझिए और हथियार का प्रदर्शन आप लोग कहीं पर किसी भी जुलूस में ना करें। उन्होंने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने जो फरमान जारी किया है, मैं उसका समर्थन करता हूं। उन्होंने बिल्कुल सही आदेश दिया है। यह आदेश उनका अधिकार है और इस्लाम भी हमें अमन और शांति कायम करने के लिए कहता है कि हथियार का प्रदर्शन ना किया जाए। किसी पर शक ना किया जाए। किसी भी व्यक्ति को कोई काम करने के लिए बाध्य ना किया जाए। इस्लाम एक प्रकार से हमें जीवन जीने का संस्कार सिखाता है। प्यार मोहब्बत के साथ अल्लाह का पैगाम पूरी दुनिया में फैलाया जाए। बता दें कि इसी महीने कांवड़ यात्रा और मोहर्रम भी है। इसको लेकर यूपी प्रशासन अलर्ट मोड पर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐसे में जुलूस और यात्रा में किसी तरह के हथियार के प्रदर्शन पर रोक लगा दी है।

BCCI ने किया ऐलान, भारतीय टीम के नए हेड कोच होंगे गौतम गंभीर

नई दिल्ली पूर्व दिग्गज सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर टीम इंडिया के नए हेड कोच नियुक्त किए गए हैं। बीसीसीआई ने मंगलवार को इसकी घोषणा की। टी20 वर्ल्ड कप 2024 के बाद राहुल द्रविड़ का कार्यकाल समाप्त हो गया। गंभीर श्रीलंका दौरे से कमान संभालेंगे, जो इस महीने के अंत में शुरू होना है। भारतीय टीम दौरे पर तीन वनडे और तीन टी20 मैच खेलेगी। गंभीर का नेशनल लेवल पर यह पहला असाइनमेंट होगा। वह अभी तक किसी टीम के मुख्य कोच के नहीं रहे हैं। उनका कोचिंग अनुभव आईपीएल में रहा है। उनकी मेंटोरशिप में केकेआर ने आईपीएल 2024 ट्रॉफी अपने नाम की थी। वह उससे पहले दो सीजन लखनऊ सुपर जायंट्स (एलएसजी) के मेंटोर थे। गंभीर का कार्यकाल करीब साढ़े तीन साल का होगा। वह साल 2027 तक इस पद पर रहेंगे। बीसीसीआई सचिव जय शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, ”मुझे बेहद खुशी है कि गौतम गंभीर को भारतीय क्रिकेट टीम के नए मुख्य कोच के रूप में नियुक्त किया गया है। आधुनिक समय में क्रिकेट काफी तेजी से विकसित हुआ है और गौतम ने इस बदलते परिदृश्य को काफी नजदीक से देखा है। अपने पूरे करियर में कई तरह की भूमिकाओं में बेहतरीन प्रदर्शन करने के बाद मुझे पूरा भरोसा है कि गौतम भारतीय क्रिकेट को आगे बढ़ाने के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति हैं। टीम इंडिया के लिए उनका स्पष्ट दृष्टिकोण और उनके विशाल अनुभव ने उन्हें इस रोमांचक कोचिंग भूमिका को संभालने के लिए पूरी तरह से तैयार कर दिया है। बीसीसीआई इस नई यात्रा पर उनके साथ है।” बीसीसीआई जल्द ही भारतीय टीम के सपोर्ट स्टाफ के लिए आवेदन आमंत्रित करेगा क्योंकि बैटिंग कोच विक्रम राठौर, बॉलिंग कोच पारस महाम्ब्रे और फील्डिंग कोच टी दिलीप का कार्यकाल टी20 वर्ल्ड कप के बाद खत्म हो गया है।आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद बीसीसीआई गंभीर को सपोर्ट स्टाफ चुनने की छूट मिल सकती है।  शुभमन गिल की अगुवाई में युवा भारतीय टीम फिलहाल जिम्बाब्वे दौरे पर है। जिम्बाब्वे टी20 सीरीज में नेशनल क्रिकेट एकेडमी (एनसीए) प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण भारत के अंतरिम कोच की भूमिका निभा रहे हैं। गंभीर टी20 वर्ल्ड कप 2007 और वनडे वर्ल्ड कप 2011 जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने वनडे वर्ल्ड कप फाइनल में 97 रनों की यादगार पारी खेली थी। वह भारत के लिए 58 टेस्ट (4154 रन), 147 वनडे (5238) और 37 टी20 इंटरनेशनल (932 रन) मैच खेल चुके हैं। उन्होंने अपने करियर में 20 इंटरनेशल सेंचुरी लगाई और 61 अर्धशतकीय पारियां खेलीं। गंभीर ने 157 आईपीएल मैचों में 4218 रन बनाए। उनकी कप्तानी में केकेआर ने 2012 और 2014 में खिताब जीता था।  

मरीन लाइंस का मुंबादेवी और चर्नी रोड का नाम बदलकर गिरगांव किया जाएगा, मुंबई के 7 रेलवे स्टेशनों के नाम बदलने का प्रस्ताव मंजूर

महाराष्ट्र महाराष्ट्र विधान परिषद ने मुंबई लोकल ट्रेन नेटवर्क पर 7 स्टेशनों के नामों को बदलने का प्रस्ताव पारित कर दिया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना, भाजपा और उपमुख्यमंत्री अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी की महायुति सरकार अब केंद्र सरकार की स्वीकृति के लिए नए नामों को उसके पास भेजेगी। राज्य के संसदीय कार्य मंत्री चंद्रकांत पाटिल द्वारा पेश प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। मुंबई लोकल ट्रेन नेटवर्क पर ज्यादातर स्टेशन के नाम अंग्रेजी में हैं और ऐसी दलील दी जाती है कि वे औपनिवेशिक विरासत को दर्शाते हैं। प्रस्ताव के अनुसार करी रोड स्टेशन का नाम बदलकर लालबाग, सैंडहर्स्ट रोड का डोंगरी, मरीन लाइंस का मुंबादेवी और चर्नी रोड का नाम बदलकर गिरगांव किया जाएगा। सैंडहर्स्ट रोड का नाम मध्य लाइन के साथ ही हार्बर लाइन पर भी बदला जाएगा। अन्य स्टेशन में से कॉटन ग्रीन स्टेशन का नाम बदलकर कलाचौकी, डॉकयार्ड रोड का मझगांव और किंग सर्किल का नाम बदलकर तीर्थांकर पार्श्वनाथ किया जाएगा। मुंबई में पहले भी स्टेशन के नाम बदले गए हैं जैसे कि ऐतिहासिक स्टेशन विक्टोरिया टर्मिनल का नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल और एलफिन्स्टन रोड का नाम बदलकर प्रभादेवी किया गया था। इस बीच विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे ने छत्रपति संभाजीनगर शहर में हवाई अड्डे का नाम बदलने के संबंध में एक सवाल उठाया। इस हवाई अड्डे को अब भी औरंगाबाद हवाई अड्डा कहा जाता है। उपाध्यक्ष नीलम गोरहे ने यह कहते हुए चर्चा के लिए दानवे की मांग ठुकरा दी कि संबंधित मंत्री उनके इस सवाल पर बाद में जवाब दे सकते हैं। महाराष्ट्र सरकार ने पहले भी मराठावाड़ा क्षेत्र में औरंगाबाद और उस्मानाबाद जिलों का नाम बदलकर क्रमश: संभाजीनगर और धाराशिव किया था। माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए के दलों ने राष्ट्रवाद का दांव चलते हुए नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।  

लोगों को ये बात पता ही नहीं है कि देश में सहमति से सेक्स संबंध बनाने की उम्र अब 16 साल नहीं बल्कि 18 साल है: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली लड़का और लड़की के बीच सहमति से सेक्स संबंध बनाने की उम्र को लेकर सुप्रीम कोर्ट (SC) ने मंगलवार को बेहद अहम टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अधिकतर लोगों को ये बात पता ही नहीं है कि देश में सहमति से सेक्स संबंध बनाने की उम्र अब 16 साल नहीं बल्कि 18 साल है। उच्चतम न्यायालय ने कहा, “आम जनता को इस बात की जानकारी नहीं है कि लड़की के साथ यौन संबंध बनाने की सहमति की उम्र 16 वर्ष से बढ़ाकर 18 वर्ष कर दी गई है।” एमपी सरकार की याचिका खारिज बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति पीवी संजय कुमार की पीठ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पोस्को एक्ट) के तहत एक मामले में आरोपी को बरी करने के खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार की अपील पर सुनवाई कर रही थी। हालांकि शीर्ष अदालत ने एमपी सरकार की याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति खन्ना ने मामले का निपटारा करने से पहले टिप्पणी करते हुए कहा, “अभी भी इस बारे में जागरूकता नहीं है कि सहमति की आयु 16 से बढ़ाकर 18 कर दी गई है।” वर्ष 2012 में भारत में सहमति से विवाह करने की आयु सीमा को 16 वर्ष से बढ़ाकर 18 वर्ष कर दिया गया था, जिसके बाद POSCO अधिनियम लागू हुआ और उसके बाद भारतीय दंड संहिता (IPC) में संशोधन किया गया। मुकदमा अक्सर पुरुष साथी के खिलाफ चलाया जाता है सहमति से सेक्स संबंध बनाने वाली लड़कियों से जुड़े POCSO मामलों में जब मुकदमे की कार्यवाही शुरू होती है तो कई समस्याएं आती हैं जिन्हें न्यायपालिका के कई सदस्यों द्वारा चिन्हित भी किया गया है। क्योंकि युवा लड़कियों के बीच सहमति से बनाए गए रोमांटिक और यौन संबंधों के कारण अक्सर पुरुष साथी के खिलाफ मुकदमा चलाया जाता है। कई बार, जब तक मुकदमा शुरू होता है, तब तक दंपति शादीशुदा हो चुके होते हैं और उनके बच्चे भी हो चुके होते हैं, जिससे आगे और भी समस्याएं खड़ी हो जाती हैं। क्योंकि अगर उस को सजा दी जाती है तो इसका मतलब होगा कि महिला और बच्चे को खुद की देखभाल करने के लिए छोड़ दिया जाएगा। भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने दिसंबर 2022 में कहा था कि अधिनियम के तहत सहमति की वर्तमान आयु ऐसे मामलों से निपटने वाले न्यायाधीशों के लिए कठिन प्रश्न खड़ी करती है, और इस मुद्दे को लेकर बढ़ती चिंता पर विधायिका को विचार करने की आवश्यकता है। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी ने भी उसी वर्ष की शुरुआत में यही राय व्यक्त की थी। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने पिछले वर्ष केंद्र सरकार से यौन संबंध के लिए सहमति की आयु को घटाकर 16 वर्ष करने का आग्रह किया था, ताकि सहमति से यौन संबंध बनाने वाले “किशोरों के साथ हो रहे अन्याय” का निवारण किया जा सके। हालांकि, पिछले वर्ष सितंबर में न्यायमूर्ति रितु राज अवस्थी की अध्यक्षता में 22वें विधि आयोग ने यह विचार व्यक्त किया था कि सहमति की मौजूदा आयु 18 वर्ष से छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए।  

घाटी में धारा 370 हटाने के बाद काफी समय तक यहां शांति रही, लेकिन हाल के महीनों में मामला अलग हुआ

जम्मू पिछले कुछ दिनों से जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के अलग-अलग इलाकों में आतंकवादी हमले हो रहे हैं. सोमवार को कठुआ में हुए आतंकी हमले में सेना के 5 जवानों के शहीद हुए हैं. अब सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि जम्मू में आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए जैश गुट OGW (ओवर ग्राउंड वर्कर्स) प्लान के तहत काम कर रहा है. इस प्लान के तहत लोकल सपोर्ट लेकर भारतीय सुरक्षा बलों पर ‘सरप्राइज अटैक’ किया जा रहा है. खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी में सामने आया है कि जैश ने सुरक्षा बलों के मूवमेंट की जानकारी, हथियारों और बाकी लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए मुखबिरों और ओवर ग्राउंड वर्कर्स को एक्टिव करने का फरमान दिया था. कहां-कहां एक्टिव हैं जैश के आतंकी? साउथ पीर पंजाल जम्मू का इलाका है, जहां जैश के आतंकी सबसे ज्यादा है एक्टिव हैं. इंटरनेशनल बॉर्डर के उस पार “मसरूर बड़ा भाई” है, जो जैश का सबसे बड़ा लॉन्च पैड है. कुछ महीने पहले इस इलाके से घुसपैठ हुई थी. आतंकी कठुआ, सांबा और हीरानगर के इलाके में मौजूद ‘चोर गली’ का इस्तेमाल इनफिल्ट्रेशन के लिए करते हैं. ‘चोर गली’ इंटरनेशल बॉर्डर पर मौजूद एक जगह है, जो जंगलों और नदी-नालों से घिरी हुई है. इस इलाके में ISI और पाक रेंजर्स की शह पर आतंकियों की घुसपैट होती है. सूत्रों के मुताबिक कठुआ, सांबा, आरएसपुरा, अरनिया और अब्दुलिया सेक्टर के सामने पाकिस्तान की सीमा के उस पार जैश का सबसे बड़ा लॉंचिंग पैड ‘मसरूर बड़ा भाई’ मौजूद है. इसके अलावा ‘सुकमल’, ‘चपराल’ और लूनी में मौजूद लॉन्चिंग पैड के आस-पास सीमा पार आतंकियों का मूवमेंट पिछले कुछ दिनों में सुरक्षा बलों ने नोटिस किया गया था. नेशनल हाइवे से भाग निकलते हैं आतंकी सुरक्षा महकमे के सूत्रों के मुताबिक, ये सारे घुसपैठ के अड्डे इंटरनेशनल बॉर्डर (IB) के काफी नजदीक हैं. आतंकी इस इलाके से घुसपैठ करने की कोशिश इसलिए करते हैं क्योंकि यहां से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद नेशनल हाइवे का इस्तेमाल करके कहीं भी भाग सकते हैं. इसके साथ ही इन रास्तों के इस्तेमाल करके सरप्राइज अटैक करने के बाद जंगलों छिपा जा सकता है. कहां है ‘मसरूर बड़ा भाई’ ? यह जगह सांबा रीजन के कठुआ-हीरानगर सेक्टर में पहारपुर के पास बीएसएफ की बॉर्डर आउटपोस्ट (BOP) के दूसरी तरफ स्थित है. इस इलाके में लंबे वक्त से आतंकी घुसपैठ हो रही है. यह जगह इंटरनेशनल बॉर्डर से सिर्फ 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. जम्मू-कश्मीर में कई चीजें बदलती दिख रही हैं. धारा 370 हटाने के बाद काफी समय तक यहां शांति रही, लेकिन हाल के महीनों में मामला अलग हुआ. कश्मीर तो फिर भी शांत है, लेकिन जम्मू दहशतगर्दों का नया ठौर बनता दिख रहा है. वे नागरिकों, तीर्थयात्रियों समेत सेना पर भी घात लगाकर हमले कर रहे हैं. ताजा हमला कठुआ में हुआ. ये वही इलाका है, जो कश्मीर के सबसे अस्थिर दौर में आतंकियों की पनाहगाह बना हुआ था. लेकिन ऐसा क्या हुआ है, जो आतंकी एक बार फिर जम्मू की तरफ मुड़ रहे हैं. हमले को लेकर कई चौंकानेवाली बातें आ रही हैं. माना जा रहा है कि आतंकियों को लोकल शख्स ने ही गाइड किया होगा, वरना घटनास्थल से बचकर निकल सकना आसान नहीं. अटैक की जिम्मेदारी आतंकी संगठन कश्मीर टाइगर्स ने ली है. ये शैडो संगठन है, जो जैश-ए-मोहम्मद के लिए काम करता है. ये उन्हीं 7 आतंकियों का ग्रुप बताया जा रहा है जिनमें से 3 को डोडा में सुरक्षा बलों ने मार गिराया था. कठुआ क्यों बन रहा टारगेट नब्बे के दौरान कठुआ आतंकियों का बड़ा ठिकाना हुआ करता था, जहां से वे पूरे जम्मू-कश्मीर पर निशाना साधते. अब एक बार फिर ऐसा दिख रहा है. दरअसल इस जिले की बनावट ऐसी है कि यहां छिपना-छिपाना आसान है. जंगलों से सटे क्षेत्र में हमले के बाद आतंकी गायब हो सकते हैं, जैसा ताजा केस में दिख रहा है. लेकिन एक बड़ी वजह और भी है, जो है इसकी जिओग्राफी. जिले के एक तरफ पाकिस्तान की सीमा सटती है, तो दूसरी तरफ हिमाचल और पंजाब हैं. कठुआ उधमपुर, सांबा और डोडा जिलों से भी लगा हुआ है. नब्बे के दशक में यहां सुरक्षा बलों का बेस भी हुआ करता था ताकि आतंक पर रोक लगाई जा सके. क्या-क्या हो चुका जिले में सोमवार को हुआ हमला कठुआ में दूसरा बड़ा अटैक है. 11 जून को हीरानगर के एक गांव में एक सुरक्षाकर्मी समेत दो आतंकी मारे गए थे. वहीं महीनेभर के भीतर जम्मू में यह सातवां अटैक है. इसकी शुरुआत 9 जून को हुई, जब टैररिस्ट्स ने रियासी में श्रद्धालुओं की बस को टारगेट किया था. दो दिनों के हीरानगर में हमला हुआ. 12 जून को डोडा में दो अटैक हुए थे. इसके बाद 26 जून को घटना दोहराई गई. पिछले साल जम्मू में 40 से ज्यादा हमले साफ दिख रहा है कि कश्मीर में तो शांति है, लेकिन आतंकवादी जम्मू को घेर रहे हैं. इसके पीछे एक बड़ी वजह ये है कि धारा 370 हटने के बाद से घाटी में सुरक्षाबल भारी संख्या में बना हुआ है. वहां सेंध लगाना बेहद मुश्किल है. शायद इसी वजह से पाकिस्तान स्थित आतंकी जम्मू को निशाना बनाने की कोशिश में हैं. बता दें कि साल 2023 में भी ऐसी कोशिश हुई थी, जब जम्मू में 43 टैरर अटैक दर्ज किए गए. मॉनसून में बढ़ जाती है आतंकी गतिविधि! बरसात में मामला और संवेदनशील हो जाता है. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, तेज बारिश के दौरान मॉनिटरिंग सिस्टम पर असर होता है, जैसे फेंसिंग और इंफ्रारेड लाइट्स कमजोर या खराब हो जाती हैं. इसका फायदा आतंकी उठाते हैं और सीमा पार से आकर आतंक मचा जाते हैं. आबादी भी हो सकती है एक वजह कश्मीर की तुलना में जम्मू की डेमोग्राफी अलग है. यहां हिंदू-मुस्लिम प्रतिशत 60:40 का मान सकते हैं. ऐसे में टैररिस्ट जानकर जिले को निशाना बना रहे हैं ताकि सांप्रदायिक भावनाएं उकसाकर दंगों जैसे हालात पैदा कर सकें. इससे उनकी आवाजाही और आसान हो जाएगी. होने वाले हैं विधानसभा चुनाव आर्टिकल 370 हटने के बाद से पहली बार यहां विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. जल्द ही इनकी तारीख फाइनल हो जाएगी. आतंकवादी गुट इसलिए भी क्षेत्र … Read more

नमो भारत ट्रेन का मोदीनगर नॉर्थ स्टेशन से मेरठ साउथ स्टेशन तक संचालन जल्द शुरू होगा, 42 KM का सफर चंद मिनटों में

नई दिल्ली नमो भारत ट्रेन जल्द ही साहिबाबाद से मेरठ तक दौड़ती दिखेगी और इसमें यात्रा के बाद घंटों का सफर चंद मिनटों में पूरा हो जाएगा। नमो भारत ट्रेन का मोदीनगर नॉर्थ स्टेशन से मेरठ साउथ स्टेशन तक संचालन जल्द शुरू किया जाएगा। एनसीआरटीसी प्रबंध निदेशक शलभ गोयल ने सोमवार को मेरठ साउथ स्टेशन से लेकर सराय काले खां स्टेशन दिल्ली तक आरआरटीएस कॉरिडोर के निरीक्षण के दौरान यह बात कही। गोयल ने कहा कि मेरठ साउथ स्टेशन तैयार हो चुका है और जल्द यहां नमो भारत का संचालन शुरू होगा। तैयारियों को परखते हुए पार्किंग का भी जायजा लिया। उन्होंने कहा कि इसी स्टेशन से मेरठ मेट्रो की शुरुआत होगी, जो मेरठ साउथ से मोदीपुरम तक मेरठवासियों के जीवन को आरामदायक बनाएगी। इस स्टेशन में तीन प्लैटफॉर्म बनाए गए हैं, जिनमें से दो प्लैटफॉर्म नमो भारत ट्रेनों के लिए और एक प्लैटफॉर्म मेरठ मेट्रो के लिए होगा। नमो भारत में सफर के बाद लोग कुछ ही मिनटों में मेरठ साउथ से गाजियाबाद तक पहुंच सकेंगे। वर्तमान में मोदीनगर नॉर्थ से मेरठ साउथ स्टेशन के बीच नमो भारत ट्रेनों का ट्रायल रन जारी है। इसके बाद उन्होंने मोदीनगर नॉर्थ से साहिबाबाद तक कॉरिडोर का जायजा लिया। स्वच्छता बढ़ाने पर जोर एनसीआरटीसी के एमडी शलभ गोयल ने यात्रियों के साथ यात्री केंद्रित सुविधा और सुरक्षा जैसे पुश बटन, पीएसडी और इनसाइड स्ट्रेचर स्पेस और ट्रेन की तीव्र रफ्तार का अनुभव किया। इसके साथ स्टेशनों की स्वच्छता की सराहना करते हुए अधिकारियों से कहा कि स्वच्छता के स्तर को दिनों दिन बेहतर से बेहतर बनाने के लिए कदम उठाते रहना चाहिए। वर्तमान में साहिबाबाद से मोदीनगर नॉर्थ तक 34 किमी के सेक्शन में 8 स्टेशनों पर नमो भारत ट्रेनों का संचालन जारी है। मोदीनगर नॉर्थ से आगे मेरठ साउथ तक नमो भारत सेवाएं शुरू होने के बाद आरआरटीएस के परिचालित सेक्शन की लंबाई 42 किलोमीटर हो जाएगी।  

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