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इस वजह से गौतम गंभीर के नाम के ऐलान में हो रही है देरी, BCCI और गंभीर के बीच सैलरी पर नहीं बन रही बात!

मुंबई  भारतीय क्रिकेट टीम ने 17 साल बाद टी-20 वर्ल्ड कप जीता। इस ऐतिहासिक जीत के बाद भारतीय टीम में क्रांतिकारी बदलाव हुए। विराट कोहली, रोहित शर्मा और रविंद्र जडेजा ने टी-20 फॉर्मेट से संन्यास ले लिया। राहुल द्रविड़ बतौर कोच अपना कार्यकाल खत्म कर गए। अब नए कोच के लिए गौतम गंभीर का नाम लगभग तय है, लेकिन फिर भी अब तक उनके नाम का ऐलान नहीं हुआ है। बाएं हाथ के पूर्व ओपनर को ईडन गार्डन्स में कोलकाता नाइटराइडर्स के लिए एक विदाई वीडियो शूट करते हुए भी देखा गया था। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि चीजें इतनी स्पष्ट हैं तो बीसीसीआई आखिर उनके नाम का ऐलान क्या नहीं कर रहा? आखिर किस बात का इंतजार किया जा रहा है?द्रविड़ से ज्यादा होगी सैलरी  गौतम गंभीर और बीसीसीआई के बीच अब तक सैलरी पर बात नहीं बन पाई है। वेतन वार्ता अंतिम चरण में हैं। जैसे ही गंभीर की सैलरी तय हो जाएगी, भारतीय क्रिकेट बोर्ड उनके नाम की घोषणा कर देगा। भारतीय क्रिकेट टीम (मेंस) के मुख्य कोच की सैलरी को लेकर बीसीसीआई ने विकल्प खुले रखे हैं। इसके लिए आवेदकों को आमंत्रित करने वाले विज्ञापन में यह उल्लेख किया गया था कि ‘पारिश्रमिक बातचीत योग्य’ है और अनुभव के अनुरूप होगा। गंभीर को पिछले कोच राहुल द्रविड़ की तुलना में ज्यादा वेतन मिलने की उम्मीद है। राहुल द्रविड़ को सालाना लगभग 12 करोड़ रुपये मिलते थे। भारतीय क्रिकेट में होगा पहला असाइनमेंट यह नेशनल लेवल पर गौतम गंभीर का पहला असाइनमेंट होगा। इससे पहले वह कभी भी किसी टीम के हेड कोच के रूप में नहीं जुड़े हैं। उनका एकमात्र कोचिंग अनुभव आईपीएल में रहा है, जहां वह पिछले साल कोलकाता नाइटराइडर्स में जाने से पहले दो सीजन के लिए लखनऊ सुपर जायंट्स के मेंटॉर थे और दोनों ही बार टीम प्लेऑफ तक पहुंची थी। मगर बतौर कप्तान कोलकाता नाइटराइडर्स को 2012 और 2014 का फाइनल जिताने वाले गंभीर साल 2024 में बतौर मेंटॉर जुड़े और टीम को 10 साल बाद आईपीएल चैंपियन बनाया। फिलहाल लक्ष्मण अंतरिम कोच जिम्बाब्वे में पांच मैच की टी-20 सीरीज खेल रही भारतीय टीम फिलहाल एनसीए प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण के मार्गदर्शन में खेल रही है। बीसीसीआई सचिव जय शाह ने पुष्टि की है कि भारत नए हेड कोच के साथ वाइट बॉल फॉर्मेट सीरीज के लिए श्रीलंका की यात्रा करेगा। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि भारतीय बोर्ड जल्द ही टीम के सहयोगी स्टाफ के लिए आवेदन मंगवाएगा क्योंकि बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौड़, गेंदबाजी कोच पारस म्हाम्ब्रे और फील्डिंग कोच टी दिलीप का कार्यकाल यूएसए और वेस्टइंडीज में टी-20 विश्व कप के बाद समाप्त हो गया था।

पश्चिमी देश रूस के साथ भारत के बढ़ते संबंधों से असंतुष्ट, चीन दोनों के करीबी रिश्तों को खतरे के रूप में नहीं देखता – ग्लोबल टाइम्स

बीजिंग पीएम मोदी के रूस दौरे पर पड़ोसी चीन का बयान सामने आया है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी की इस रूस यात्रा को पश्चिमी देश  आशंका के साथ देख रहे हैं। वह यह उम्मीद कर रहे हैं कि चीन के साथ रूस के बढ़ते संबंध संभावित रूप से भारत और रूस के संबंधों में तनाव पैदा कर सकते हैं। इससे नई दिल्ली को लेकर पश्चिम का नजरिया उजागर हो रहा है। कुछ अमेरिकी मीडिया आउटलेट्स ने इस संबंध में दावा किया है कि मोदी की रूस यात्रा यह सुनिश्चित करने के लिए है कि रूस अब चीन के और करीब न जा पाए। रूस- भारत के करीबी रिश्तों को खतरे की तरह नहीं देखता चीन ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि पश्चिम भारत के रूस के साथ गहरे होते संबंधों से अधिक चिंतित है, जबकि चीन, भारत और रूस के करीबी संबंधों को खतरे के रूप में नहीं देखता है, जबकि पश्चिमी देश रूस के साथ भारत के बढ़ते संबंधों से असंतुष्ट हैं। रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर चीन को अमेरिका और पश्चिम से दबाव और आलोचना का सामना करना पड़ा है तो उसके विपरीत भारत को रूस की निंदा न करने या प्रतिबंध न लगाने को लेकर कम आलोचना का सामना करना पड़ा। इसकी बजाय भारत ने रूस से संबंध बनाए रखे और रूस से तेल खरीदकर उसे यूरोपीय देशों को बेचकर खूब लाभ कमाया है। दबाव के बाद भी रूस आए पीएम मोदी टाइम्स ने लिखा कि पश्चिमी दबाव के बावजूद भी भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीसरे कार्यकाल को शुरू करने के बाद पहली द्विपक्षीय विदेश यात्रा के लिए रूस गए। विश्लेषकों के अनुसार, उनके इस कदम का उद्देश्य न केवल रूस के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करना है, बल्कि अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के दबाव से निपटने में भारत की ताकत को भी बढ़ाना है। भारत की विदेश नीति तारीफ के योग्य टाइम्स ने लिखा कि वर्तमान में पश्चिमी देश भारत, चीन और रूस के बीच कलह करवाने का प्रयास कर रहा है। पश्चिम और रूस दोनों के साथ भारत के संबंध एक जटिल अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य को दर्शाते हैं, जो इस कठिन वैश्विक माहौल में संतुलन तलाश करने की कोशिश कर रहे हैं और इसके साथ-साथ में अपने हितों को भी साधने की कोशिश कर रहे हैं। पश्चिम उम्मीद कर रहा था कि भारत उनके साथ गठबंधन करके रूस के खिलाफ खड़ा है लेकिन ऐसा नहीं है, इसके लिए पश्चिम ने भारत पर दबाव बनाने की भी कोशिश की लेकिन वह सफल नहीं हो पाया। भारत की विदेश नीति किसी भी पक्ष में पूरी तरह न झुककर अपने हितों को साधने की है। यह दोनों तरफ संतुलन बनाए रखने का प्रयास करती है।  

अदालत ने कहा समलैंगिक विवाह मामले में याचिकाओं पर खुले मंच पर सुनवाई नहीं होगी

नई दिल्ली  समलैंगिक विवाह को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत ने एक बड़ा फैसला लिया है। दरअसल, अदालत ने पिछले वर्ष इस मामले में सुनवाई की थी। अदालत ने उस दौरान समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने से इनकार कर दिया था। अब अदालत का कहना है कि इस मामले में याचिकाओं पर खुले मंच पर सुनवाई नहीं होगी। अलग चैंबर में होगी मामले की सुनवाई इससे पहले मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षा में पांच न्यायाधीशों की पीठ ने 17 अक्तूबर को समलैंगिक विवाह को कानूनी तौर पर वैधता देने से इनकार कर दिया था। पांच न्यायाधीशों की पीठ में मुख्य न्यायाधीश के अलावा न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति हिमा कोहली, न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा भी शामिल थे। शीर्ष अदालत में 10 जुलाई को एक अलग चैंबर में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने से इनकार करने वाले फैसले की समीक्षा की मांग वाली याचिका पर सुनवाई होगी। ‘विधायी मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती अदालत’ वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी और एनके कौल ने अदालत में इस मामले पर जोर डालते हुए अनुरोध किया था कि मुख्य न्यायाधीश को खुले मंच पर याचिकाओं की समीक्षा करनी चाहिए। इसके जवाब में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले में संविधान पीठ द्वारा समीक्षा की जाएगी और इसे चैंबर में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। पीठ ने कहा कि समलैंगिकों के पास वैधानिक प्रावधानों के तहत विवाह करने का हक है। अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह की अनुमति सिर्फ कानून के जरिए ही दी जा सकती है और कोर्ट द्वारा विधायी मामलों में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। मामले से जुड़ी 21 याचिकाओं पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में पांच न्यायाधीशों की पीठ ने समलैंगिक मामलों से जुड़ी 21 याचिकाओं पर सुनवाई की। पीठ ने समलैंगिक विवाह को विशेष विवाह अधिनियम में शामिल करने से इनकार किया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ऐसे मामलों में कानून में बदलाव लाना, संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है। प्रधान न्यायाधीश ने केंद्र, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि समलैंगिक समुदाय के साथ भेदभाव नहीं किया जाए।  

हाथरस कांड में भोले बाबा का जिक्र ही नहीं, SDM समेत 6 अफसर सस्‍पेंड, 10 पाइंट में समझिए SIT रिपोर्ट

हाथरस  यूपी के हाथरस में 2 जुलाई को सत्‍संग के दौरान मची भगदड़ में 121 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। हादसे के एक हफ्ते के भीतर एसआईटी की 300 पन्‍नों की जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। मंगलवार को यह रिपोर्ट मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के सामने पेश की गई। रिपोर्ट में भोले बाबा के नाम का जिक्र तक नहीं है। आयोजकों और अफसरों को जिम्‍मेदार माना गया है। योगी सरकार ने कड़ी कार्रवाई करते हुए सिकंदरामऊ के एसडीएम, सीओ और तहसीलदार समेत छह लोगों को सस्‍पेंड कर दिया है। इनमें चौकी इंचार्ज कचौरा और चौकी इंचार्ज पोरा भी शामिल हैं। एसआईटी रिपोर्ट में कहा गया है कि आयोजक मुख्‍य जिम्‍मेदार हैं। स्‍थानीय प्रशासन की भी जवाबदेही तय की गई हे। दो सदस्‍यीय जांच समिति ने कहा कि हादसे के पीछे साजिश से इन्‍कार नहीं किया जा सकता है। गहन जांच की जरूरत है। आयोजकों की लापरवाही से हाथरस दुर्घटना हुई है। भीड़ को आमंत्रण देकर पर्याप्त इंतज़ाम नहीं किया गया। स्थानीय पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने आयोजन को गंभीरता से नहीं लिया। साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों को समुचित जानकारी नहीं दी। जांच समिति ने कार्यक्रम आयोजक तथा तहसील स्तरीय पुलिस व प्रशासन को भी दोषी पाया है। स्थानीय एसडीएम, सीओ, तहसीलदार, इंस्पेक्टर, चौकी इंचार्ज द्वारा अपने दायित्व  का निर्वहन करने में लापरवाही के जिम्मेदार हैं। उप जिला मजिस्ट्रेट सिकन्दराराऊ द्वारा बिना कार्यक्रम स्थल का मुआयना किये आयोजन की अनुमति प्रदान कर दी गई और वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत भी नहीं कराया। आयोजकों ने तथ्यों को छिपाकर कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति ली। अनुमति के लिए लागू शर्तों का अनुपालन नहीं किया गया। आयोजकों द्वारा अप्रत्याशित भीड़ को आमंत्रित कर पर्याप्त एवं सुचारु व्यवस्था नहीं की गई। न ही कार्यक्रम के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा दी गई अनुमति की शर्तों का पालन किया गया। आयोजक मंडल से जुड़े लोग अव्यवस्था फैलाने के दोषी पाए गए हैं। इनके द्वारा जिन लोगों को बिना विधिवत पुलिस वेरिफिकेशन के जोड़ा गया, उनसे अव्यवस्था फैली। आयोजक मंडल द्वारा पुलिस के साथ दुर्व्यवहार किया गया। स्थानीय पुलिस को कार्यक्रम स्थल पर निरीक्षण से रोकने का प्रयास किया गया। सत्संगकर्ता और भीड़ को  बिना सुरक्षा प्रबंध के आपस में मिलने की छूट दी गई। भारी भीड़ के दृष्टिगत यहां किसी प्रकार की बैरीकेटिंग अथवा पैसेज की व्यवस्था नहीं बनाई गई थी और दुर्घटना घटित होने पर आयोजक मंडल के सदस्य घटना स्थल से भाग गए। ये अधिकारी सस्‍पेंड हुए रावेंद्र कुमार उपजिलाधिकारी सिकंदराराऊ , आनंद कुमार सीओ सिकंदराराऊ, सुशील कुमार तहसीलदार सिकंदराराऊ, आशीष कुमार प्रभारी निरीक्षक थाना सिकंदराराऊ, कचौरा चौकी प्रभारी मनवीर सिंह।     एसआईटी ने प्रारंभिक जांच में चश्मदीद गवाहों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर दुर्घटना के लिए कार्यक्रम आयोजकों को मुख्य रूप से जिम्मेदार माना है।     जांच समिति ने अब तक हुई जांच और कार्यवाही के आधार पर हादसे के पीछे किसी बड़ी साजिश से भी इन्‍कार नहीं किया है और गहन जांच की जरूरत बताई है।     जांच समिति ने कार्यक्रम आयोजक और तहसील स्तरीय पुलिस व प्रशासन को भी दोषी पाया है। स्थानीय एसडीएम, सीओ, तहसीलदार, इंस्पेक्टर, चौकी इंचार्ज द्वारा अपने दायित्व का निर्वहन करने में लापरवाही के जिम्मेदार हैं।     उप जिला मजिस्ट्रेट सिकन्दराराऊ द्वारा बिना कार्यक्रम स्थल का मुआयना किये आयोजन की अनुमति प्रदान कर दी गई और वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत भी नहीं कराया।     अधिकारियों द्वारा कार्यक्रम को गंभीरता से नहीं लिया गया और वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत भी नहीं कराया गया। एसआईटी ने संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति की है।     उप जिला मजिस्ट्रेट सिकन्दराराऊ, पुलिस क्षेत्राधिकारी सिकन्दराराऊ, थानाध्यक्ष सिकन्दराराऊ, तहसीलदार सिकन्दराराऊ, चौकी इन्चार्ज कचौरा एवं चौकी इन्चार्ज पोरा को निलंबित कर दिया गया है।     आयोजकों ने तथ्यों को छिपाकर कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति ली। अनुमति के लिए लागू शर्तों का अनुपालन नहीं किया गया। आयोजकों द्वारा अप्रत्याशित भीड़ को आमंत्रित कर पर्याप्त एवं सुचारु व्यवस्था नहीं की गई। न ही कार्यक्रम के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा दी गई अनुमति की शर्तों का पालन किया गया।     आयोजक मंडल से जुड़े लोग अव्यवस्था फैलाने के दोषी पाए गए हैं। इनके द्वारा जिन लोगों को बिना विधिवत पुलिस वेरिफिकेशन के जोड़ा गया, उनसे अव्यवस्था फैली।     आयोजक मंडल द्वारा पुलिस के साथ दुर्व्यवहार किया गया। स्थानीय पुलिस को कार्यक्रम स्थल पर निरीक्षण से रोकने का प्रयास किया गया।     सत्संगकर्ता और भीड़ को बिना सुरक्षा प्रबंध के आपस में मिलने की छूट दी गई। भारी भीड़ के दृष्टिगत यहां किसी प्रकार की बैरीकेटिंग अथवा पैसेज की व्यवस्था नहीं बनाई गई थी और दुर्घटना घटित होने पर आयोजक मंडल के सदस्य घटना स्थल से भाग गए।     एसआईटी में शामिल रहे ये अफसर     यूपी के सूचना निदेशक शिशिर ने बताया कि एसआईटी ने राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। हालांकि, उन्होंने रिपोर्ट के बारे में विस्तार से नहीं बताया। घटना के पीछे की वजहों की जांच के लिए गठित एसआईटी में आगरा जोन की अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) अनुपम कुलश्रेष्ठ और अलीगढ़ मंडल आयुक्त शामिल थे। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश बृजेश कुमार श्रीवास्तव, सेवानिवृत्त आईपीएस हेमंत राव और सेवानिवृत्त आईपीएस भवेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में एक अलग न्यायिक आयोग भी हाथरस भगदड़ मामले की जांच कर रहा है।

दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी अमेरिका पर फिर से मंदी के बादल मंडरा रहे, कोरोना महामारी के बाद सबसे तेज गिरावट

न्यूयॉर्क दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी अमेरिका पर फिर से मंदी के बादल मंडरा रहे हैं। जून में देश में सर्विसेज एक्टिविटी में कोरोना महामारी शुरू होने के बाद सबसे तेज गिरावट रही। देश का आईएसएम सर्विसेज पीएमआई इंडेक्स बीते महीने पांच अंक गिरकार 48.8 पर आ गया है। इसके 52.5 रहने की उम्मीद की जा रही थी। बिजनस एक्टिविटी इंडेक्स में गिरावट के कारण ऐसा हुआ। यह इंडेक्स जून में 11.6 अंक की गिरावट के साथ अप्रैल 2020 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। पिछले 30 साल में सर्विस एक्टिविटी में इस तरह की गिरावट केवल मंदी के समय देखी गई है। इसी तरह नए ऑर्डर में 2022 के बाद पहली बार गिरावट आई है। जानकारों का कहना है कि ये मंदी के संकेत हो सकते हैं। इस बीच लेबर मार्केट में भी कमजोरी दिख रही है। कोरोना काल में अमेरिका ने स्टीम्यूलस दिया था लेकिन अब उसका असर घटता दिख रहा है। इस बीच देश में पिछले 20 महीनों में 19 बार मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में गिरावट आई है। यह महामंदी के बाद के इसका सबसे लंबा दौर है। अतीत में में मंदी के दौर में ही सर्विसेज और मैन्यूफैक्चरिंग इंडेक्स में गिरावट आई है। इससे साफ है कि अमेरिका की इकॉनमी में तेजी से गिरावट आ रही है जो मंदी का संकेत है। उधर अमेरिकी सरकार का खर्च मई में 6.5 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया और बजट डेफिसिट जीडीपी का 6.2 फीसदी हो गया है। बड़े आर्थिक संकट में ही ऐसा होता आया है। अमेरिका का कर्ज अमेरिका का कर्ज नए रेकॉर्ड पर पहुंच गया है। अप्रैल के आंकड़ों के मुताबिक फेडरल गवर्नमेंट का कर्ज 34.6 अरब डॉलर पहुंच चुका है जो उसकी जीडीपी का करीब 125% है। पिछले चार साल में देश का कर्ज 47 फीसदी यानी करीब 11 ट्रिलियन डॉलर बढ़ा है। हर टैक्सपेयर पर करीब 267,000 डॉलर यानी करीब 2,21,75,778 रुपये का कर्ज है। अगर यही रफ्तार रही तो अमेरिका का कर्ज 2025 तक 40 ट्रिलियन पहुंचने का अनुमान है। अगर फेड रिजर्व ब्याज दरों में कटौती नहीं करता है तो इस कर्ज पर अमेरिका को सालाना 1.6 ट्रिलियन डॉलर ब्याज देना होगा। माना जा रहा है कि इस साल पहली बार अमेरिका का इंटरेस्ट पेमेंट उसके डिफेंस बजट और मेडिकेयर खर्च से ऊपर पहुंच जाएगा।

मोहन यादव सरकार का बड़ा फैसला, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग का मुख्यालय भोपाल से उज्जैन शिफ्ट

भोपाल मध्य प्रदेश का धार्मिक मुख्यालय अब उज्जैन होगा. सिंहस्थ से पहले मोहन यादव सरकार ने ये बड़ा फैसला लिया है. धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग का मुख्यालय भोपाल से उज्जैन शिफ्ट किया जाएगा.मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना संचालक भी उज्जैन स्थानांतरित किया गया है. वर्तमान में धार्मिक न्यास विभाग संचालनालय सतपुड़ा भवन से संचालित हो रहा था. मुख्यालय के संचालक सहित पूरा स्टाफ़ उज्जैन में बैठेगा. धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग ने अधिसूचना प्रकाशित की है. वर्तमान में धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग राजधानी भोपाल स्थित संचालनालय सतपुड़ा भवन से संचालित किया जा रहा है. लेकिन, अब यह विभाग भोपाल से संचालित नहीं होगा. धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग अब उज्जैन स्थित सिंहस्थ मेला प्राधिकरण के भवन से संचालित किया जाएगा. मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का संचालन भी उज्जैन से आपको बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार का धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग प्रदेश में बुजुर्गों को तीर्थ दर्शन कराने के साथ-साथ विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक मेले का आयोजन करता है. इसी विभाग के अंतर्गत मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का संचालन भी किया जा रहा है. जिसके चलते मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना संचालक को भी उज्जैन स्थानांतरित करने का फैसला किया है. सिंहस्थ की रूपरेखा उज्जैन से तय होगी सरकार के इस फैसले के बाद धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग मुख्यालय के संचालक सहित पूरा स्टाफ उज्जैन में भी बैठेगा. इसके चलते प्रदेश के धार्मिक आयोजन उज्जैन से ही निर्धारित किए जाएंगे. इसके अलावा सिंहस्थ की तैयारियों की रूपरेखा भी यहीं से तय होगी. 2028 के सिंहस्थ के आयोजन को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बड़ा फैसला लिया है. शासन ने धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग भोपाल से उज्जैन शिफ्ट किया मध्य प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक मेले आयोजित करने और बुजुर्गों को तीर्थ दर्शन कराने वाला शासन का धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग अब भोपाल की जगह उज्जैन से संचालित होगा , मध्य प्रदेश के राजपत्र में इसका नोटिफिकेशन यानि गजट नोटिफिकेशन जारी हो गया है। सतपुड़ा भवन भोपाल की जगह सिंहस्थ मेला प्राधिकरण भवन उज्जैन से होगा संचालित नोटिफिकेशन के मुताबिक अब धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग के संचालक, विभागाध्यक्ष तथा संचालक मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना सतपुड़ा भवन भोपाल को वर्तमान पदस्थ अमले सहित उज्जैन स्थानांतरित किया जाता है , अब से ये विभाग उज्जैन में सिंहस्थ मेला प्राधिकरण के भवन में संचालित होगा।

MP के 18 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, इन दो सिस्टम के एक्टिव होने से बने हालात

भोपाल मध्यप्रदेश में साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन गुजरने की वजह से इन दिनों बारिश का स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव है। पिछले 4 दिन से ग्वालियर-चंबल में तेज बारिश का दौर चल रहा है। IMD, भोपाल की सीनियर वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया, पिछले 48 घंटे में प्रदेश के 30 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई। नार्थ-ईस्ट राजस्थान के ऊपर और साउथ राजस्थान के ऊपर साइक्लोनिक सर्कुलेशन एक्टिव है। वहीं, मानसून ट्रफ और नीचे आई है। यह प्रदेश में रायसेन, मंडला होते हुए गुजर रही है। इन सिस्टम की वजह से पूरे प्रदेश में तेज बारिश हो रही है। यह दौर अगले एक सप्ताह तक बना रहेगा। 18 जिलों के लिए हाई अलर्ट मौसम विभाग ने सोमवार की शाम को जारी किए अपने अलर्ट में बताया है कि मध्यप्रदेश के पश्चिमी जिलों में भारी से अति भारी बारिश की संभावना है. 9 जुलाई से 11 जुलाई के बीच मध्यप्रदेश के 18 जिलों में अति भारी बारिश होने का अनुमान है. मॉनसून के दो नए सिस्टम एक साथ एक्टिव होने से प्रदेश में भारी बारिश हो सकती है.         इन जिलों के लिए अलर्ट जारी आईएमडी की मानें तो पश्चिमी मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा बारिश होने की संभावना है. ऐसे में श्योपुर, शिवपुरी, छिंदवाड़ा, बैतूल, सिवनी, टीकमगढ़, सागर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बुरहानपुर, खरगोन, जबलपुर, शाजापुर, राजगढ़, अशोकनगर, गुना, श्योपुरकलां और निवाड़ी, पन्ना, सतना, दमोह, कटनी समेत कई जिलों के लिए अलर्ट जारी किया गया है. भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर की बात की जाए तो यहां हल्की और मध्यम बारिश हो सकती है. ग्वालियर-चंबल में बारिश का दौर जारी ग्वालियर चंबल की बात करें तो यहां बीते एक हफ्ते से तेज और रुक-रुककर बारिश हो रही है. सोमवार को एक दर्जन से ज्यादा जिलों में भारी बारिश हुई. ग्वालियर में कई कॉलोनियों में पानी भर गया तो यहां एक जगह सड़क धंसने से रास्ता बंद हो गया. भारी बारिश से भिंड जिले में आधा दर्जन से अधिक गांव में बाढ़ जैसे हालात हैं. लोग परेशानियों से घिरे हुए हैं. पानी के तेज बहाव से गोहद क्षेत्र के कई रास्ते बंद हो चुके हैं. कई लोग जान जोखिम में डालकर पुलियों और रपटों को पार कर रहे हैं. सबसे बुरा हाल शिवपुरी जिले का है यहां पर भारी बारिश से लोग अभी से परेशान हैं. मुरैना में भी निचली बस्तियों में पानी भर गया. बैतूल जिले के भीमपुर ब्लॉक में जोरदार बारिश हुई. इस बारिश के बाद पहाड़ी नदी में अचानक बाढ़ आ जाने से लकड़ी बीनने गई एक महिला बीच नदी में फंस गई. उज्जैन में भी सोमवार की शाम आफत की बारिश हुई. मौसम विभाग का अलर्ट मौसम विभाग ने पश्चिमी मध्यप्रदेश के ज्यादातर जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए सतर्क रहने को कहा है. इसके साथ ही पूर्वी मध्यप्रदेश के लिए भी अलर्ट जारी किया गया है. पूर्वी मध्य प्रदेश में 10 और 11 जुलाई 2024 को अलग-अलग स्थानों पर भारी (64.5-115.5 मिलीमीटर) से बहुत भारी वर्षा (115.5-204.4 मिलीमीटर) होने की संभावना जताई है. इधर पश्चिम मध्य प्रदेश में 11 जुलाई 2024 को अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी (115.5-204.4 मिलीमीटर) वर्षा होने की संभावना जताई है.

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पीड़ित महिला की समस्या सुनने के बाद संभव मदद दिलाने का आश्वासन दिया, पति का इलाज कराने के दिए आदेश

छिंदवाड़ा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव सोमवार को छिंदवाड़ा जिले की अमरवाड़ा विधानसभा के दौरे पर थे. इस दौरान एक पीड़ित महिला ने रास्ते में मुख्यमंत्री का काफिला रुकवा लिया. यह देख CM ने संवेदनशीलता दिखाते हुए वाहन से उतरकर पीड़ित महिला की समस्या सुनी और कैंसर से पीड़ित पति का इलाज करवाने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया. दरअसल, जिला नरसिंहपुर के सुरवारी गांव की निवासी आरती बाई के पति दशरथ सिंह सुरवारी को जीभ का कैंसर है. महिला ने मुख्यमंत्री को बताया कि वो पिछले 6 माह से पति का इलाज करवा रही है. अब उसकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई है, घर में खाने को नहीं बचा है. पति का इलाज कराना संभव नहीं हो पा रहा है. पीड़ित महिला की समस्या सुनने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने महिला को हर संभव मदद दिलाने का आश्वासन दिया. साथ ही पीड़ित महिला के पति का इलाज कराने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए. वहीं, अमरवाड़ा विधानसभा उपचुनाव प्रचार के दौरान CM यादव ने अमरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और युवाओं से आत्मीय मुलाकात की. इस दौरान बुजुर्ग महिला ने मुख्यमंत्री को अमरवाड़ा विधानसभा उपचुनाव में जीत का आशीर्वाद दिया.  

बालाघाट में जवानों ने मुठभेड़ में 14 लाख का इनामी नक्सली ढेर, कई राज्यों में फैलाई थी दहशत

बालाघाट  प्रदेश के बालाघाट जिले में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में सोमवार को 14 लाख रुपये का इनामी नक्सली मारा गया। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।नक्सल विरोधी अभियान के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) जयदीप प्रसाद ने भोपाल में संवाददाताओं को बताया कि यह मुठभेड़ हट्टा थाना अंतर्गत कठियाटोला वन क्षेत्र में हुई। वह मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में नक्सली गतिविधियों में संलिप्त था और वह उकास केबी डिवीजन का एसीएम था. उसके पास से 315 बोर की राइफल और वायरलेस सेट बरामद किया गया है. नक्सल विरोधी अभियान के एडीजी जयदीप प्रसाद के मुताबिक, हॉकफोर्स को सूचना मिली थी की बालाघाट के हट्‌टा थाना क्षेत्र के गोदरी पुलिस चौकी के ग्राम कोठियाटोला जंगल क्षेत्र में जीआरबी और केबी डिवीजन के नक्सलियों की गतिविधि है. वे सादे कपड़ों में राशन और दैनिक उपयोग की सामग्री एकत्र करने के लिए कोठियाटोला गांव पहुंच रहे हैं. इस सूचना पर हॉकफोर्स ने जंगल में सघन सर्च अभियान चलाया. इसी दौरान कोठियाटोला गांव में सादे कपड़ों में जा रहे 10-12 नक्सलियों को पूछताछ के लिए आवाज लगाई. इस दौरान संदिग्ध नक्सलियों द्वारा हॉकफोर्स पर अंधाधुंध फायरिंग की गई. आत्मरक्षा करते हुए हॉकफोर्स के जवानों ने जवाबी फायरिंग की. इस दौरान नक्सली घने जंगल और पहाड़ की आड़ लेकर भाग गए. बाद में सर्चिंग के दौरान एक नक्सली का शव बरामद हुआ, जिसकी शिनाख्त केबी डिवीजन के खूंखार एसीएम सोहन उर्फ उकास उर्फ आयतु के रूप में की गई. मध्य प्रदेश में दर्ज हैं 8 आपराधिक मामले नक्सली सोहन उर्फ उकास उर्फ आयतु साल 2013 से प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) में शामिल होकर छत्तीसगढ़ की कई घटनाओं में शामिल रहा है. संगठन के प्रभाव क्षेत्र में विस्तार के लिए अपनाई गई नीति को अंजाम देने के लिए इसे केन्द्रीय कमेटी के सदस्य रहे दीपक उर्फ मिलिंद तेलतुम्बड़े के सहयोगी की महत्वपूर्ण भूमिका दी. साल 2019 में एम.एम.सी. जोन में भेजा गया था. इससे पहले हुई अन्य मुठभेड़ों में यह शामिल रहा था. मध्य प्रदेश में उसके खिलाफ 8 आपराधिक मामले दर्ज हैं. उन्होंने बताया कि राज्य पुलिस की हॉक फोर्स को सूचना मिली थी कि कुछ नक्सली राशन और दैनिक उपयोग की सामग्री लेने के लिए काठियाटोली गांव पहुंचे हैं। अधिकारी ने बताया कि तलाशी अभियान के दौरान हॉक फोर्स ने जंगल में 10-12 नक्सलियों के एक समूह को पूछताछ के लिए आवाज़ लगाई, लेकिन उन्होंने गोलीबारी शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि जब पुलिस ने जवाबी गोलीबारी की तो घने जंगल और पहाड़ियों में छुपे नक्सली मौके से भाग निकले। अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने बाद में सोहन उर्फ उकास उर्फ आयुतु का शव बरामद कर लिया। उन्होंने बताया कि गोलीबारी में घायल हुए अन्य लोगों की तलाश जारी है। उन्होंने बताया कि पड़ोसी छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का निवासी आयतु आईईडी बनाने में विशेषज्ञ था और मध्य प्रदेश में उसके खिलाफ आठ मामले दर्ज थे। अधिकारी ने बताया कि मृतक नक्सली मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में सक्रिय था और उस पर 14 लाख रुपये का इनाम था। उन्होंने बताया कि पुलिस ने मृतक के पास से 315 बोर की एक राइफल और एक वायरलेस सेट बरामद किया है। अधिकारी ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में मध्य प्रदेश में कम से कम 19 नक्सलियों को मार गिराया गया, जिन पर तीन राज्यों में कुल 3.14 करोड़ रुपये का इनाम था।

खंडवा में पकड़े गए आतंकियों को लेकर एटीएस का बड़ा खुलासा, पूछताछ में फैजान के खुलासे

खंडवा मध्यप्रदेश के खंडवा से गिरफ्तार इंडियन मुजाहिदीन के फैजान शेख से एटीएस की पूछताछ में हैरान करने वाले खुलासे हो रहे हैं. रिमांड के दौरान उसके मोबाइल से आर्मी एरिया समेत सुरक्षाबलों के अफसरों और उनके परिवार के भी फोटो मिले हैं. इसके साथ ही फैज़ान ने यह भी बताया कि वो भड़काऊ नारों से युवकों के मन में ज़हर भरता था. बता दें कि गुरुवार 7 अप्रैल को एटीएस ने तड़के कार्रवाई करते हुए खंडवा से फैज़ान शेख को गिरफ्तार किया था. आज मंगलवार तक की एटीएस को कोर्ट से रिमांड मिली है. रिमांड में पूछताछ के दौरान फैज़ान ने बताया कि वो अक्टूबर 2016 में भोपाल जेल ब्रेक के बाद मारे गए सिमी आतंकियों की मौत का बदला लेना चाहता था और इसलिए सुरक्षाबलों पर हमले की तैयारी कर रहा था. फैजान का इरादा लोन वुल्फ अटैक का था लेकिन वो चाहता था कि उसके अलावा और भी लोग उसकी विचारधारा से जुड़ें, इसलिए वो इलाके के युवकों का कट्टरपंथी नारों और साहित्य से ब्रेनवॉश करने में भी जुटा था. फैज़ान के पास से एटीएस ने 4 मोबाइल फोन भी जब्त किए थे. उनकी जांच के दौरान उनमें सुरक्षाबलों के अफसर और उनके परिवार के फोटो मिले हैं. साथ ही में आर्मी एरिया के वीडियो भी हैं. हालांकि, एटीएस अधिकारियों की मानें तो सुरक्षाबलों के परिवार के बारे में ज्यादा जानकारी जुटा पाने में फैज़ान को सफलता नहीं मिल सकी थी और इसके पहले ही वो एटीएस के रेडार पर आ गया था. तभी से उसकी हर गतिविधि ट्रेस होती रही और आखिरकार 7 अप्रैल को फैजान शेख खंडवा से गिरफ्तार कर लिया गया.  

रूसी सेना में फिलहाल 40 भारतीय सेवा दे रहे, जंग लड़ रहे भारतीयों को जल्द डिस्चार्ज करेगा रूस

मॉस्को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय अमेरिका के दो दिवसीय दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की. खबर है कि यूक्रेन जंग के लिए रूस की सेना में शामिल किए गए भारतीयों की अब सुरक्षित वापसी होगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को मॉस्को पहुंचने के बाद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के समक्ष यह मुद्दा उठाया था. इसके बाद भारतीय सैनिकों की वापसी पर सहमति बनी है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, रूसी सेना में फिलहाल 30 से 40 भारतीय सेवा दे रहे हैं. इससे पहले कई रिपोर्ट्स में कहा गया था कि ये भारतीय वतन लौटना चाहते हैं लेकिन रूसी सेना छोड़कर स्वदेश वापसी इनके लिए मुमकिन नहीं है. रूसी सेना में भर्ती इन भारतीयों की वतन वापसी के लिए भारत सरकार ने कई तरह के राजनयिक प्रयास किए लेकिन रूस की ओर से किसी तरह का आश्वासन नहीं दिया गया. ऐसे में पीएम मोदी के रूस दौरे के दौरान रूसी सेना में भर्ती इन भारतीयों की सुरक्षित वापसी बड़ी प्राथमिकता थी. बता दें कि रूस और यूक्रेन जंग में दो भारतीयों की मौत हुई थी. इसके बाद भारत ने रूस से वहां की सेना में भर्ती भारतीयों को वापस भेजने की मांग की थी. मोदी को पुतिन ने बताया था परम मित्र दो दिवसीय दौरे पर मॉस्को पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपना ‘परम मित्र’ बताया था. पुतिन ने पीएम मोदी का स्वागत करते हुए कहा था कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, परम मित्र आपका हार्दिक स्वागत है. आपको देखकर मुझे बड़ी खुशी हुई. (हमारे बीच) औपचारिक बातचीत कल होने वाली है. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को निमंत्रण भेजा था, जहां दोनों नेता मंगलवार को भारत-रूस के बीच 22वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में बैठक करेंगे. इस द्विपक्षीय बातचीत में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होनी है. इससे पहले आज जब दोनों नेता मिले तो उनकी करीबी दोस्ती भी साफ नजर आई. पुतिन के निमंत्रण पर रूस पहुंचे हैं पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करीब पांच साल में पहली बार रूस पहुंचे हैं. यह तीसरे कार्यकाल की उनकी दूसरी विदेश यात्रा है. प्रधानमंत्री सोमवार को भारतीय समयानुसार शाम पांच बजे मॉस्को पहुंचे थे. यहां वणुकोवो-II इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री का रूस के प्रथम डिप्टी प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव ने स्वागत किया था. इस दौरान उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया था. प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच आधिकारिक बातचीत आज होगी. इससे पहले भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर अपना रुख साफ करते हुए कहा था कि मौजूदा स्थिति का हल युद्ध के मैदान में नहीं निकाला जा सकता. यूक्रेन के खिलाफ जंग लड़ रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित घर वापसी पीएम मोदी के प्रमुख एजेंडे में शामिल था.  

आतंकवादीयों ने पहले फेंका ग्रेनेड, फिर 12 मिनट तक अंधाधुंध फायरिंग… शहीद हुए 5 जवान, जानें हुआ क्या?

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के कठुआ में हुए आतंकी हमले में पांच जवान शहीद हुए हैं जबकि पांच जवान घायल हुए हैं. आतंकियों की खोजबीन के लिए सेना का सर्च ऑपरेशन जारी है. इस बीच सूत्रों के हवाले से पता चला है कि आतंकियों ने इस हमले को अंजाम देने से पहले इलाके की रेकी की थी. यह हमला ऐसे समय पर किया गया, जब सुरक्षाबल कठुआ के बडनोटा में तलाशी अभियान चला रहे थे. तभी आतंकियों ने घात लगाकर हमला किया. सूत्रों का कहना है कि बडनोटा गांव में रोड कनेक्टिविटी सही नहीं है. यहां वाहन दस से पंद्रह किलोमीटर प्रतिघंटा से अधिक की रफ्तार पर वाहन नहीं चला सकते. लोकल गाइड ने आतंकियों को दिया खाना और छिपने में की मदद सूत्रों का कहना है कि कच्ची सड़क होने की वजह से सेना के वाहन धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं. दो से तीन आतंकी और कुछ स्थानीय गाइड पहाड़ियों के ऊपर हैं. आंतकियों ने पहले सेना के वाहनों पर ग्रेनेड फेंके और फिर फायरिंग की. यहां पहले हुए हमलों की तरह ड्राइवर को भी निशाना बनाया गया. सूत्रों का कहना है कि इलाके में रेकी के लिए स्थानीय गाइड ने आतंकियों की मदद की थी. इन गाइडों ने आतंकियों को खाना भी मुहैया कराया था और उन्हें पनाह दी थी. हमले को अंजाम देने के बाद इन स्थानीय गाइड ने आतंकियों को छिपने में भी मदद की थी. हमले में पाकिस्तानी आतंकी थे शामिल सूत्रों का कहना है कि इस हमले में पाकिस्तानी आतंकी शामिल थे. इन आतंकियों के पास अमेरिका में बने M4 कार्बाइन राइफल, एक्सप्लोसिव डिवाइस और अन्य हथियार हैं. ऐसा भी लग रहा है कि आतंकी हमले के बाद बचकल भाग निकलने में कामयाब रहे. हमले में 2-3 आतंकी हो सकते हैं शामिल देर रात तक सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों को कोई सफलता नहीं मिल सकी. सर्च ऑपरेशन जारी है. जंगल के अंदर आतंकी हमले की सटीक जगह का पता लगाया जा चुका है. सूत्रों के मुताबिक हमले में 2 से 3 आतंकी शामिल हो सकते हैं. उम्मीद है कि आतंकियों के साथ उनके स्थानीय समर्थक भी थे, जिन्होंने उन्हें रास्ता बताने में मदद की. आतंकियों का मकसद ज्यादा से ज्यादा जवानों को हताहत करने का था. वह अपने साथ अत्याधुनिक हथियार लेकर आए थे. पैरा कमांडो चला रहे सर्च ऑपरेशन तैनात सेना के पैरा कमांडो (एसपीएल फोर्स) को कठुआ के दूरदराज के माचिन्डी-मल्हार क्षेत्र में हवाई मार्ग से उतारा गया है. उन्हें काउंटर ऑपरेशन में तैनात किया गया है. ताकि उन आतंकवादियों के खिलाफ समय पर प्रभावी काउंटर ऑपरेशन सुनिश्चित किया जा सके. जो आतंकवादी भाग रहे हैं और क्षेत्र से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं. उनपर शिकंजा कसने की तैयारी है. राजौरी में सेना के शिविर पर आतंकी हमला जम्मू कश्मीर के राजौरी में दो दिन पहले ही भारतीय सेना के शिविर पर आतंकवादी हमले का मामला सामने आया था. इस अटैक में आर्मी का एक जवान घायल हो गया था. आतंकवादियों ने सेना के शिविर पर गोलीबारी की थी. इस दौरान सतर्क सुरक्षा चौकी पर तैनात जवान भी ने आतंकवादियों पर गोलीबारी की थी. घटना के वक्त सेना का जवान घायल हो गया था. आतंकवादी अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे थे. दूसरी ओर इस हमले के कुछ घंटों बाद ही चिनिगाम गांव में गोलीबारी की एक और घटना हुई थी. सेना को लश्कर ग्रुप के बारे में खुफिया जानकारी मिली थी, जिसके बाद सुरक्षा बल उस क्षेत्र में पहुंच गए थे. दोनों तरफ से गोलीबारी हुई थी.  सेना को कुलगाम के इलाके में आतंकियों की मौजूदगी के बारे में खुफिया इनपुट मिला था. इसके बाद सुरक्षाबलों ने इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया. इस दौरान सेना के जवानों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई थी. कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रविंद्र शर्मा और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की है। रविंद्र शर्मा ने कहा कि, यह एक दुखद घटना है कि कठुआ के इलाके में हमारे चार जवान शहीद हो गए और 6 के घायल होने की जानकारी है। इस तरह की स्थिति जम्मू सूबे के हर जिले में है। सरकार आतंकवाद खत्म करने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन डोडा, राजौरी, कठुआ जैसे इलाके भी आतंकवाद से ग्रस्त होते जा रहे हैं। यह एक दुखद घटना है, सरकार को गंभीरता से देखना होगा। चुनाव के बाद अचानक इस तरह की स्थिति बनना चिंता का विषय है। सरकार को कठोर कदम उठाने होंगे और बताना होगा कि इस तरह के गंभीर हालत क्यों हो रहे हैं। इस घटना पर डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी के चेयरमैन और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने भी ट्वीट करते हुए कहा, कठुआ में सेना के वाहन पर हुए आतंकी हमले में चार जवानों की शहादत और छह जवानों के घायल होने की खबर बेहद दुखद और निंदनीय है। जम्मू प्रांत में आतंकवाद का बढ़ना बेहद चिंताजनक है। हमारी संवेदनाएं घायल जवानों और उनके परिवारों के साथ हैं। सरकार को आतंकवाद से निपटने और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए। सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी है। फिलहाल इलाके में सुरक्षाबलों की तरफ से सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। बीते दो माह में सेना के वाहन पर यह दूसरा आतंकी हमला है। अधिकारियों ने कहा कि आतंकियों ने सेना की गाड़ी पर ग्रेनेड फेंके और इसके बाद फायरिंग शुरू कर दी। सेना के जवान रूटीन पेट्रोलिंग पर थे। इसी दौरान आतंकियों ने सेना की गाड़ी पर दोपहर करीब 3.30 बजे हमला कर दिया।  

पाकिस्तान डिफॉल्ट होने की दहलीज पर पहुंचने का एक मात्र कारण चीन का कर्ज

वियनतियाने  चीन का एक और पड़ोसी देश कर्ज के भारी-भरकम बोझ से कराह रहा है। नौबत यहां तक आ गई है कि यह देश अब डिफॉल्ट होने जा रहा है। इस देश के डिफॉल्ट होने की दहलीज पर पहुंचने का एक मात्र कारण चीन का कर्ज है। चीन ने इस देश को भारी मात्रा में कर्ज दिया है। अब यह देश चीन के अलावा बाकी दुनिया से लिए गए कर्ज को लौटाने में सक्षम नहीं है और ऋण पुर्नगठन की मांग कर रहा है। हालांकि, चीन ने पहले की तरह अपना पल्ला झाड़ लिया है और कह रहा है कि वह मदद के लिए तैयार है। इससे पहले चीनी कर्ज से श्रीलंका डिफॉल्ट हो चुका है और पाकिस्तान उस दहलीज पर पहुंच कर बार-बार खुद को बचा रहा है। लाओस का कर्ज भुगतान दोगुना हुआ चीनी कर्ज से तबाह होने वाले इस देश का नाम लाओस है। लाओस चीन का पड़ोसी देश है। पिछले साल ही चीन ने लाओस तक रेल लाइन का उद्घाटन किया था। अब लाओस अपने चीन प्रेम की सजा भुगत रहा है। हालांकि, चीन का कहना है कि वह पड़ोसी लाओस को उसके भारी कर्ज के बोझ को कम करने में मदद कर रहा है। इस बीच लाओस ने खुलासा किया है कि उसका बाहरी पुनर्भुगतान लगभग दोगुना हो गया है। ऐसे में वह डिफॉल्ट को रोकने के लिए और अधिक ऋण स्थगन चाहता है। हालांकि, लाओस को कर्ज देने वाली पार्टियां इसके लिए तैयार नहीं हैं। लाओस के कर्ज पर चीन ने क्या कहा चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मंगलवार को सवालों के लिखित जवाब में कहा कि बीजिंग ने लाओस सहित विकासशील देशों के साथ “पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग” किया है, जिसमें आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए मजबूत समर्थन शामिल है। उन्होंने कहा, “साथ ही, वह संबंधित देशों को उनके कर्ज के बोझ को कम करने में मदद करने के लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा है।” लाओस पर चीन का सबसे ज्यादा कर्ज चीन अब तक लाओस का सबसे बड़ा लेनदार है, जो बाहरी सरकारी कर्ज में 10.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का लगभग आधा हिस्सा वहन करता है। पिछले साल के अंत में इस छोटे से देश पर कुल सार्वजनिक और सार्वजनिक रूप से गारंटीकृत कर्ज 13.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जो इसके सकल घरेलू उत्पाद का 108 प्रतिशत था। लाओस के कर्ज ने बढ़ाई छोटे देशों की चिंता कम्युनिस्ट शासित लाओस चीन के साथ हाई-स्पीड रेल लाइन शुरू करने के बाद चर्चा में आया है, जिसकी लागत इस चारों ओर से जमीन से घिरे देश को लगभग 6 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। कई लोग इस विकास को बुनियादी ढांचे में वृद्धि की शुरुआत के रूप में देखते हैं जो दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को सीधे दक्षिण पूर्व एशिया से जोड़ता है। हालांकि, इस विकास बाकी छोटे देशों के लिए ऋण में वृद्धि की चिंताएं बढ़ा दी हैं। विश्व बैंक ने लाओस को दी चेतावनी पिछले साल लाओस का बाहरी ऋण भुगतान 950 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था, जिससे देश को मूलधन और ब्याज भुगतान में 670 मिलियन अमेरिकी डॉलर का भुगतान करना पड़ा। विश्व बैंक ने पहले कहा है कि इस तरह के कदमों से हाल के वर्षों में अस्थायी राहत मिली है। देश के ऋण मुद्दे तब सामने आए हैं जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का प्रशासन विकासशील देशों को चीन के आर्थिक प्रभाव का विस्तार करने के प्रयासों के लिए एक विकल्प प्रदान करना चाहता है। वाशिंगटन ने अक्सर बीजिंग के प्रयासों को “ऋण-जाल कूटनीति” के रूप में पेश किया है क्योंकि श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे देश पुनर्भुगतान से जूझ रहे हैं।

पहली ही बारिश में डूबी मुंबई, डूबी सड़कें, घरों में भी घुसा पानी, मौसम विभाग ने जारी किया बड़ा अपडेट

 मुंबई मुंबई में बारिश ने आफत मचाई हुई है. जलभराव की वजह से लोकल ट्रेनें तो कैंसल हुई हीं, कई विमान सेवाओं  भी एडवायजरी जारी कर दी है. इस बीच मौसम विभाग चेता रहा है कि शहर को फिलहाल इससे राहत मिलने वाली नहीं. लेकिन क्या वजह है जो देश की आर्थिक राजधानी कहलाता मुंबई हर बारिश पानी में डूब जाता है, वो भी कुछ घंटों की बारिश में? इसके पीछे अतिक्रमण या शहर की बसाहट कम, बल्कि कुदरती स्ट्रक्चर ज्यादा जिम्मेदार है. दो दशक पहले हुआ था बड़ा नुकसान जुलाई 20025 में मुंबई में तेज बारिश से सबसे बड़ा नुकसान हुआ. 26 जुलाई को चौबीस घंटों के भीतर 9 सौ मिलीमीटर से ज्यादा पानी बरसा. ये वहां पूरी जुलाई की बारिश जितना था. इससे शहर के रास्ते बंद हो गए. बसें, ट्रेनों से लेकर हवाई जहाज थम गए. इस दौरान पानी में फंसने या डूबने से 1094 जानें चली गईं, जबकि लगभग साढ़े 5 सौ करोड़ का नुकसान हुआ. उस मानसून ने शहर की ताकत एक झटके में खींच ली. इसके बाद से लगातार प्लानिंग हो रही है. यहां तक कि महाराष्ट्र इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन ने जापानी कंपनी द जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी के साथ मिलकर अंडरग्राउंड रिवर प्रोजेक्ट पर काम की बात की. इसमें नदियों से जोड़कर ऐसा सिस्टम बनाया जाएगा कि ओवरफ्लो होने पर पानी दूसरी जगह जमा हो जाए और बाद में काम आ सके. क्यों होती रही नदियों पर बात ये शहर केवल अरब सागर से ही घिरा हुआ नहीं, बल्कि यहां चार-चार नदियां भी हैं- मीठी, दहिसर, ओशिवारा और पोयसर. नदियों के अलावा यहां चार क्रीक हैं. ये सब मिलकर लगभग 21 मिलियन की आबादी वाले शहर को मानसून के मौसम में काफी खतरनाक बना देते हैं. मसलन, मीठी नदी की बात करें तो पूरे मुंबई को घेरती इस नदी की ज्यादातर जगहों पर चौड़ाई केवल 10 मीटर है. ऐसे में थोड़ी बारिश में ही पानी ओवरफ्लो का खतरा रहता है. आसपास घनी बसाहट है, जिसपर तुरंत इसका असर होगा. मुंबई की टोपोग्राफी भी अलग समंदर किनारे बसा ये शहर कई जगहों पर काफी नीचे बसा हुआ है, जबकि कई जगहें काफी ऊंचाई पर हैं. बता दें कि मुंबई सात द्वीपों के मिलने से बना हुआ है, ऐसे में उसका आकार देश के ज्यादातर शहरों से काफी अलग, कुछ-कुछ तलेदार प्लेट की तरह है. बारिश शुरू होते ही पानी अपने-आप नीचे की तरफ आकर जमा होने लगता है. ऐसे कुछ इलाके हैं- सायन, अंधेरी सबवे, मिलान सबवे और खार. ये हिस्से कुछ घंटों के पानी से भी डूबने लगते हैं. पानी के निकासी की अलग है व्यवस्था शहर का ड्रेनेज सिस्टम इस तरह का है कि पानी समंदर में खाली होता जाए. लेकिन भारी बारिश के दौरान, जब समुद्र का स्तर बढ़ता है, ड्रेन्स के गेट बंद कर दिए जाते हैं ताकि पानी वापस शहर में लौटकर तबाही न मचा दे. भारी बारिश के दौरान ऊंची लहरें बचेखुचे ड्रेनेज सिस्टम को भी रोक देती हैं. इस सिस्टम के दोबारा काम पर लौटने में पानी घटने के बाद लगभग 6 घंटे लग जाते हैं. इस दौरान पानी भरा ही रहता है. भारत समेत दुनिया के ज्यादातर शहरों में बारिश होने पर आधे से ज्यादा पानी जमीन में समा जाता है. वहीं मुंबई में लगभग 90 प्रतिशत पानी ड्रेन्स के जरिए निकलता है. इससे भी ड्रेनेज पर काफी बोझ रहता है. एक वजह अतिक्रमण भी आर्थिक राजधानी होने की वजह से यहां देश के कोने-कोने से लोग आते रहते हैं. इतने लोगों के रहने के लिए वैसी प्लानिंग नहीं. बड़ी आबादी निचले हिस्सों में बसी हुई है, जो पानी के लिए संवेदनशील हैं. यहां पर पानी के बाहर निकलने या जमीन में जाने की वैसी व्यवस्था नहीं. यही वजह है हल्की बारिश में भी कई इलाकों में पानी भर जाता है. कैसे मिल सकता है छुटकारा पिछले कुछ समय से मुंबई में जापान की मदद से अंडरग्राउंड डिस्चार्ज चैनल की बात हो रही है. ये प्रोजेक्ट जापान ने अपने शहर टोक्यो में भी तैयार किया. असल में टोक्यो में साढ़े 3 करोड़ से ज्यादा आबादी हमेशा बाढ़ के खतरे में जीती आई. जापान के मौसम विभाग की मानें तो ये शहर समुद्र तल से नीचे जा चुका है. अपने लोगों और इंफ्रा को बचाने के लिए जापान ने अंडरग्राउंड चैनल बनाया. बाढ़ का पानी या अतिरिक्त पानी इस चैनल में गिरता है, जहां से पंप के जरिए उसे वहां की ईडो नदी में छोड़ा जाता है. मुंबई को स्पंज सिटी की तरह डेवलप करने की भी बात हो रही है. स्पंज सिटी वो कंसेप्ट है, जिसमें शहर स्पंज की तरह काम करे यानी पानी डलते ही अंदर सूख जाए. इसके तहत शहर को ऐसे डिजाइन किया जाएगा कि पानी तुरंत ही जमीन में चला जाए और ड्रेनेज पर भार न पड़े. इसमें ग्रीन स्पेस बढ़ाया जाएगा.  

अंतरिक्ष में फंसी नहीं हैं सुनीता विलियम्स, वापसी के लिए दो और स्पेसक्राफ्ट भी तैयार

वाशिंगटन बोइंग के स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान के थ्रस्टर में खराबी के बाद इसका धरती पर वापसी का मिशन रोक दिया गया है। इसके बाद यान के साथ गए नासा के एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स और बैरी विल्मोर अंतरिक्ष स्पेस स्टेशन (ISS) पर फंस गए हैं। दोनों अंतरिक्ष यात्री बीते महीने 5 जून को अंतरिक्ष के लिए रवाना हुए थे। अंतरिक्ष में उनका मिशन केवल एक सप्ताह के लिए ही था, लेकिन एक महीने से भी ज्यादा समय बीत चुका है और अभी तक उनकी वापसी के बारे में कोई अपडेट नहीं है। नासा के इंजीनियर स्टारलाइनर की समस्या को ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं, इस दौरान दोनों एस्ट्रोनॉट स्पेस स्टेशन पर दूसरे यात्रियों के साथ रहना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या दोनों अंतरिक्ष यात्रियों की धरती पर वापसी कब होगी और क्या नासा को इसके लिए रेस्क्यू मिशन शुरू करने की जरूरत है। अंतरिक्ष में फंसी नहीं हैं सुनीता विलियम्स इन सवालों का जवाब अंतरिक्ष प्रणालियों और मिशनों के विशेषज्ञ पैट्रिक विनिंग ने दिया है। पैट्रिक जॉन्स हॉपकिंस एप्लाइड फिजिक्स लैब में नेशनल सिक्योरिटी स्पेस के लिए मिशन एरिया एग्जीक्यूटिव के रूप में काम करते हैं। उन्होंने बताया कि दोनों अंतरिक्ष यात्रियों के लिए रेस्क्यू अभियान की बात करना अनावश्यक है। इसकी वजह बताते हुए वे कहते हैं कि पहले तो यह समझना होगा कि स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट में सवार होकर आईएसएस पर पहुंचे अंतरिक्ष यात्री फंसे नहीं है। न ही आईएसएस पर पहले से मौजूद सात दूसरे अंतरिक्ष यात्री ही फंसे हुए हैं। वापसी के लिए दो और स्पेसक्राफ्ट भी पैट्रिक ने बताया कि स्टारलाइनर अपने यात्रियों के साथ पृथ्वी पर लौटने में सक्षम है। इसके अलावा आईएसएस पर डॉक किए दो अन्य अंतरिक्ष यान भी अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी पर वापस ले आने में सक्षम हैं। इनमें एक स्पेसएक्स का ड्रैगन एंडेवर और सोयुज MS-25 क्रू शिप शामिल है। स्टारलाइनर के थ्रस्टर में खराबी और एक अप्रत्याशित हीलियम लीक की रिपोर्ट के बाद नासा की टीम अंतरिक्ष यान का डेटा इकठ्ठा कर रही है, जिसके चलते स्पेसक्राफ्ट की वापसी में देरी की गई है। यहां हमें याद रखने की जरूरत है कि अंतरिक्ष में जाना कठिन है। वहीं, मानव अंतरिक्ष उड़ान तो और भी कठिन है। स्टारलाइनर के डिजाइन में कई बैकअप सिस्टम हैं, जिसने आईएसएस पर इसके पहुंचने को सफल बनाया, लेकिन बैकअप सिस्टम के साथ भी अप्रत्याशित स्थितियों को समझना महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि नासा अधिक डेटा एकत्र कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि रेस्क्यू मिशन आम तौर पर सेना चलाती है, जैसे कि अगर कोई स्पेसक्रॉफ्ट लॉन्च के समय समुद्र में गिर जाए। लेकिन यहां मामला अलग है, अमेरिकी सेना के पास अंतरिक्ष में मिशन चलाने की क्षमता नहीं है। फिलहाल तो इस मामले में रेस्क्यू की जरूरत भी नहीं है। प्रोटोकॉल बदलने की जरूरत? स्टारलाइनर में आई समस्या के बाद भविष्य के आपातकाली प्रोटोकॉल को बदलने के सवाल पर पैट्रिक ने कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता है। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि नासा और बोइंग जमीनी परीक्षण प्रक्रियाओं और दृष्टिकोणों पर कड़ी नज़र रखेंगे। सभी अंतरिक्ष यान डेवलपर्स ‘उड़ान भरते समय परीक्षण’ करने का बहुत प्रयास करते हैं ताकि लॉन्च से पहले अंतरिक्ष प्रणालियों पर असामान्य स्थितियों का पता लगाया जा सके। यह स्पष्ट है कि बोइंग का परीक्षण कार्यक्रम वर्तमान स्थितियों को पकड़ने में अपर्याप्त था। यही कारण है कि अधिक ऑन-ऑर्बिट परीक्षण डेटा एकत्र किया जाना चाहिए।

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