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वन एवं पर्यावरण स्वीकृति हुई आसान, केंद्र ने किया वन एवं पर्यावरण नियमों में संशोधन.

Approval for forest and environment became easier as the central government made amendments to the forest and environmental regulations. उदित नारायण,    भोपाल। केंद्र सरकार ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों को सरल कर दिया है ताकि बड़े प्रोजेक्ट के क्लीयरेंस जल्द से जल्द मिल सके। नए संशोधन के तहत अब कंसलटेंट वन और पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए सीधे तकनीकी कमेटी को फॉरेस्ट और पर्यावरण  के लिए अपना प्रस्ताव भेज सकेंगे। यानी अब सिया कमेटी की भूमिका को निष्प्रभावी बना दिया गया है।  केंद्र सरकार ने वैज्ञानिक डेटा संचालित तरीके से हितधारकों और तकनीकी मूल्यांकन को और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए, मंत्रालय ने जीआईएस, एडवांस डेटा एनालिटिक्स आदि जैसी उभरती तकनीकी परिवेश के दायरे का विस्तार किया है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के नियमों में संशोधन करते हुए कठिन और जटिल प्रक्रियाओं को सरल बनाने की कोशिश की है। अब से, सभी नए प्रस्ताव चाहे किसी भी प्रकार के हों, प्रारंभिक जांच के लिए सदस्य सचिव (एमएस), एसईएसी ( स्टेट  एक्सपर्ट अप्रैज़ल कमेटी ) को प्रस्तुत किए जाएंगे। परिवेश पोर्टल पर ही संबंधित एसईआईएए को स्पष्ट सिफारिशें करने के लिए विशेषज्ञ समिति (एसईएसी) द्वारा जांच और आगे विचार किया जाएगा। नए संस्करण ने अब एमएस, एसईएसी को उपरोक्त ओएम में उल्लिखित प्रक्रिया के अनुसार मानक टीओआर जारी करने में सक्षम बना दिया है। क्या थी पुरानी व्यवस्था संशोधन के पहले तक व्यवस्था यह थी कि प्रोजेक्ट के कंसलटेंट को अपने प्रस्ताव को पहले सिया कमेटी के किंतु-परंतु बिंदुओं के सवालों जवाबों से गुजरना पड़ता था। इसके कारण प्रस्ताव को वन और पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए काफी समय तक इंतजार करना पड़ता था। कई बार ऐसा भी हुआ कि सरकारी प्रोजेक्ट भी सिया कमेटी के समक्ष ही महीना और वर्षों तक लंबित रहे। इन समस्याओं को लेकर कई बार भारत सरकार केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को शिकायत भी कई गई और इस शिकायत के आधार पर नया संशोधन आदेश जारी किया गया है।

भारतीय जनता पार्टी नए व समर्पित कार्यकुशल लोगों को जिम्मेदारी देने में अग्रिम. 

The Bharatiya Janata Party is ahead in entrusting responsibilities to new and dedicated Party Workers. अनुपम सचान, सहारा समाचार   भोपाल..जब विधानसभा का चुनाव किसी मुख्यमंत्री के नाम के बगैर लड़ा जा रहा था तब यह चर्चा रही कि क्या इस बार भाजपा अपना मुख्यमंत्री कोई नया चेहरा लेकर आएगी मोहन यादव का मुख्यमंत्री पद पर आसीन होना, देश को व प्रदेश को कई संदेश देता है. एक तो यह कि भाजपा एक अनुशासित पार्टी है जिसका कोई भी कार्यकर्ता किसी भी पद तक अपने सम्मान एवं परिश्रम के आधार पर दायित्व पा सकता है भारतीय जनता पार्टी नए व समर्पित कार्यकुशल लोगों को जिम्मेदारी देने में अग्रिम है छत्तीसगढ़ के लिए चुने गए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जिन्होंने सरपंच बनने से लेकर लोकसभा और अब प्रदेश में मुख्य के पद को संभाला है यही संदेश देता है राजस्थान के लिए चुने गए मुख्य मंत्री भजन लाल शर्मा जो राजस्थान विधान सभा सांगानेर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं  जब द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति पद को संभाला तब भी देश को यही संदेश मिला था राजनीति सत्ता का अहंकार नहीं सेवा का माध्यम है मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह की जो मृदुल छवि थी. वह छवि बरक़रार है और जैसा कुशल नेतृत्व उन्होंने किया, उसके प्रशंसक कम नहीं हैं यही उम्मीद अब प्रदेश की जनता करती है एबीवीपी से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करके वह संघटन में दी सेवाओं के अनुभव एवं उच्च शिक्षा मंत्री के बाद अब मोहन यादव मध्यप्रदेश को अपने विशिष्ट कौशल से देश प्रदेश को संपन्नता वह सुशासन से धड़कता हृदय देश बनाने में कोई कमी नहीं रखेंगे। भारत अब अच्छे से महसूस करता है कि यदि केंद्र में प्रखर राष्ट्रप्रेमी शासक आसीन हो तो प्रदेश में भी लीक से हटकर साम्प्रदायिक जातिवादी और क्षेत्रीय मानसिकता से ऊपर उठकर मुख्यमंत्री चुना जाता है। तुष्टीकरण की राजनीति से देश अब मुक्त हो चला है और युवाओं को राजनीति में आकर काम करना एक अच्छा विकल्प दिखने लगा है।

एसबीआई मैराथन में बरेली के उप निरीक्षक गोहे ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।

In the SBI Marathon, Inspector Gohe from Bareilly secured the second position. धूम्रपान के प्रति जागरूकता के लिए आयोजित थी प्रतियोगिता बैतूल आमला निवासी है गोहे रायसेन/आमला (हरिप्रसाद गोहे) विभिन्न प्रतिस्पर्धा के खिलाड़ी हों या धावक अपनी मेहनत के दम पर विजय लक्ष्य प्राप्ति की ओर अग्रसर होता है । जिसका यहीं उद्देश्य होता है उसे सफलता मिले । बतादे प्रतियोगिता में जो बेहतर खेल का प्रदर्शन करता है सफलता उसे ही मिलती है आपको बतादे रायसेन जिला के बरैली थाने में पदस्थ उपनिरीक्षक रामप्रसाद गोहे ने अपने पुलिस पदेन कर्तव्य निर्वहन के साथ साथ धावक के रूप में अपने ग्रह जिला बैतूल राजधानी भोपाल सहित अन्य प्रांतों में कुशल एवं सफल धावक के रूप में अपनी अमिट पहचान बनाई है। उन्होंने विभिन्न प्रतियोगिता में भाग ले पुरुस्कार जीते हैं । गोहे का विजय अभियान बदस्तूर जारी है ।मेडल दे किया सम्मानित मिली जानकारी अनुसार रायसेन जिला के बरेली थाना में पदस्थ 53 वर्षीय उप निरीक्षक रामप्रसाद गोहे ने हाल ही में भोपाल के मोतीलाल नेहरू स्टेडियम में एस. बी.आई. द्वारा आयोजित मैराथन दौड़ में बतौर धावक के रूप में भाग लेकर द्वितीय स्थान प्राप्त किया । उपरोक्त सफलता पर पुरुस्कार एवं मेडल उप प्रबंधक निदेशक भोपाल शार्किल विनोद कुमार मिश्रा एवं मुख्य अतिथि मध्य प्रदेश की पहली बेटी भावना डेहरिया माउंट एवरेस्ट शिखर को फतेह करने वाली बेटी की गरिमामय उपस्थिति में गोहे को पुरुस्कार एवं मेडल दे सम्मानित किया गया । पेशर बन बढ़ाया मनोबल 10/12/2023 को उपनिरीक्षक थाना बरेली को रन भोपाल रन में पेशर 10 कि.मी. समय 90 मिनिट का बनाया गया था, जिसमें पेशर राम प्रसाद गोहे ने सीनियर धावक, युवा धावक महिला एवं पुरुष धावक का दौड़ते-दौड़ते मनोवल बढ़ाते हुये पेशर की अहम भूमिका निभाते हुए 10 कि.मी. मैराथन की दूरी लाल परेड ग्राउड़ से प्रारंभा होकर बिरला मंदिर ताजुल मज्जिद होकर वापस टी.टी. नगर स्टेडियम में सफलतम मैराथन दौड पुरी की , जो दौड़ सुबह 6 बजे प्रारम्भ लाल परैड ग्राउन्ड से होकर टी.टी. नगर स्टेडियम भोपल में समाप्त हुई । जागरूकता के लिए यह रन ऑर्गल डोनेशन और धूम्रपान के प्रति जागरूकता के लिएआयोजित हुई थी। देश विदेश के धावक थे शामिल दौड में भोपाल और देश समेत केनिया, यू.ए.एस., जर्मनी, नाजीरिया और यूके से आये धावकों ने भाग लिया। उपनीरिक्षक द्वारा सफलतम 10 किमी. की दूरी पेशर के रूप में पूरी की। इस उपलब्धी पर मेजर जनरल टी.पी.एस. रावत एवं अंकिता श्रीवास्तव रन भोपाल रन द्वारा पुरस्कार एवं मैडल दिया गया।उक्त उपलब्धी पर जिला कलेक्टर रायसेन श्री अरविंद कुमार दुवे, पुलिस अधिक्षक श्री विकास सेहवाल रायसेन, अतिरिक्त पुलिस अधिक्षक रायसेन जिला खेल अधिकारी श्री जलद चतुर्वेदी रायसेन, ए.डी.ओ.पी. श्री सुरेश दामले, थाना प्रभारी श्री सुधीर अरजरिया सहित पुलिस स्टॉप, रविन्द्र जरारिया खेल अधिकारी एवं बरेली नगर के गणमान्य नागरिक एवं यूवा खिलाड़ियों ने बधाई प्रेषित की ।

सेमीफाइनल में पहुंची स्प्रेडिंग स्माइल,कार्वी क्लब और महाकाल बोरी।

Spreading Smile, Karvi Club, and Mahakal Bori have reached the semifinals. आमला । रेल्वे इंस्टीट्यूट और एपीएल समिति तथा नगरपालिका के संयुक्त तत्वधान में जिला स्तरीय टेनिस बाल क्रिकेट प्रतियोगिता के 9 वे दिन तीन क्वार्टर फाइनल मैच खेले गए। जिसमे पहला मैच स्प्रेडिंग स्माइल और रेड रोज सारणी के बीच खेला गया।इस रोमांचक मैच में अंतिम ओवर में 90 रन का लक्ष्य हासिल कर 3 विकेट से मैच जीतकर स्प्रेडिंग स्माइल ने सेमीफाइनल में प्रवेश किया.दूसरे मैच में रघुकुल और कार्वी क्लब के बीच खेला गया जो मैच 37 रनों से एकतरफा जीत दर्ज कर के कार्वी क्लब सेमीफाइनल में पहुंचने वाली दूसरी टीम बनी।तीसरा मैच टेमनी आठनेर और महाकाल बोरी के बीच हुआ बोरी क्लब ने 8 ओवरों में 88 रन बनाए जिस लक्ष्य को हासिल करने उतरी टेमनी क्लब ने अपना पहला विकेट शून्य रन पर ही खो दिया।इसके बाद रोहित बल्लेबाजी करने आए जिसने 36 महत्वपूर्ण रन बनाए लेकिन अंतिम ओवरों तक मैच गया जिसमे महाकाल बोरी ने 10 रनों से मैच जीतकर सेमीफाइनल में पहुंचने वाली तीसरी टीम बनी।अब बुधवार तीसरा क्वार्टर फाइनल खेला जाएगा जिसमे से चौथी टीम सेमीफाइनल में प्रवेश करेगी।आमला प्रीमियर लीग समिति के संरक्षक चंदन सिंग मानू ने बताया की आने वाले दो दिनों में बहुत रोमांचक मैच होने वाले है जिसमे जिले के सबसे अच्छे खिलाड़ी इस प्रतियोगिता में शामिल होगे ।

नौ दिन से जारी सियासी उथल-पुथल पर लगा विराम, भजन लाल शर्मा होंगे राजस्थान के मुख्यमंत्री।

The political turmoil that has been ongoing for nine days has come to a halt, and Bhajan Lal Sharma will be the Chief Minister of Rajasthan. भाजपा विधायक दल की बैठक में भजनलाल शर्मा के नाम पर सर्वसम्मति से लगी मुहर। राजस्थान में भी बने दो उप मुख्यमंत्री, दीया कुमारी और प्रेमचंद्र बैरवा के नाम का एलान। अजमेर से विधायक वासुदेव देवनानी को राजस्थान विधानसभा का स्पीकर चुना गया। संतोष सिंह तोमर जयपुर। राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के लिए जारी सस्पेंस आखिरकार खत्म हो गया। तीन दिसंबर को विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से कई नामों को लेकर चर्चा चल रही थी। इस बीच भाजपा ने पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की और विधायक दल की बैठक में सांगानेर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचे भजनलाल शर्मा के नाम पर मुहर लगी। राजस्थान के लिए भी दो उप मुख्यमंत्री के नाम का भी एलान किया गया है। उप मुख्यमंत्री के लिए विधाधर नगर सीट से विधायक दीया कुमारी और विधायक प्रेमचंद्र बैरवा का नाम फायनल कर दिया गया है। इसके साथ ही अजमेर से विधायक वासुदेव देवनानी को राजस्थान विधानसभा का स्पीकर चुन लिया गया है। इससे पहले पार्टी ने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, सरोज पांडे और विनोद तावड़े को बतौर पर्यवेक्षक जयपुर भेजा था। हम आपको याद दिला दें कि राजस्थान में करणपुर विधानसभा सीट को छोड़कर बाकी सभी 199 सीटों पर 25 नवंबर को चुनाव कराए गए थे। इसके नतीजे 3 दिसंबर को आए। राजस्थान विधानसभा चुनाव के सियासी घमासान में कांग्रेस को पछाड़ कर भाजपा ने 115 सीटें जीतीं। वहीं कांग्रेस को 69 सीटें ही मिल सकीं। इसके अलावा 15 सीटें अन्य के खाते में गईं हैं। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को मनाने में लगा समय इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की थी। वसुंधरा ने चुनावी नजीतों के बाद पार्टी के कई विधायकों को डिनर पार्टी दी थी, जिसे दबाव की राजनीति के तौर पर देखा गया था। इसके साथ ही वसुंधरा राजे के समर्थक विधायक वसुंधरा राजे को पुनः राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाने के लिए प्रयासरत थे। पार्टी नेतृत्व को उन्हें मनाने के लिए भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ी है। हालांकि, नड्डा से मुलाकात के बाद वसुंधरा के सुर बदले-बदले नजर आए थे और उन्होंने खुद को पार्टी का अनुशासित कार्यकर्ता बताया था। विधायक दल की बैठक में चुना गया नेता इसके बाद पार्टी ने राज्य के लिए केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, सरोज पांडे और विनोद तावड़े के रूप में पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर दी थी। उन्हें राज्य में मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी सस्पेंस पर विराम लगाने और विधायक दल का नेता चुनने के लिए सभी की सहमति बनाने का जिम्मा सौंपा गया था। इसके बाद मंगलवार को हुई विधायक दल की बैठक में भजनलाल शर्मा को चुना गया। विधायक बने सांसदों के इस्तीफे ने बढ़ा दी थी सरगर्मी इससे पहले राजस्थान के राजसमंद की सांसद दीया कुमारी, जयपुर के सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़, राज्यसभा सदस्य किरोड़ी लाल मीणा और अलवर के सांसद बाबा बालक नाथ ने विधानसभा चुनाव जीतने के बाद लोकसभा सांसद के पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से अटकलें लगाई जाने लगी थीं कि पार्टी वसुंधरा के अलावा किसी दूसरे चेहरे पर दांव खेल सकती है। मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ के बाद राजस्थान में भी चौंकाया इससे पहले भाजपा ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर मोहन यादव के नाम पर मुहर लगाकर सभी चौंका दिया था। मोहन यादव उज्जैन दक्षिण विधानसभा सीट से विधायक हैं। यह भी तय किया गया कि मध्य प्रदेश में दो उपमुख्यमंत्री भी होंगे। इनके लिए जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला का चुना गया। जगदीश देवड़ा मल्हारगढ़ और राजेंद्र शुक्ला रीवा से विधायक हैं। इसके अलावा स्पीकर पद के लिए नरेंद्र सिंह तोमर के नाम का एलान किया गया था। वहीं, छत्तीसगढ़ में भाजपा ने विष्णुदेव साय को मुख्यमंत्री के लिए चुनकर सियासी गलियारे में हलचल मचा दी थी। इसके साथ ही यह भी बताया गया कि राज्य में दो डिप्टी सीएम होंगे और पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह स्पीकर हो सकते हैं। इसी तरह से भाजपा शीश नेतृत्व ने राजस्थान में भी सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाकर फिर एक बार सभी को चौंका दिया है।

15 दिसंबर के बाद होगा मप्र कांग्रेस विधायक दल के नेता का चयन.

The selection of the leader of the Madhya Pradesh Congress Legislative Party will take place after December 15. पार्टी नेता चाहते हैं कि कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश जाए कि सभी एकजुट हैं, इसलिए आम सहमति के आधार पर निर्णय पर जोर दिया जा रहा है। भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस विधायक दल के नेता का चयन 15 दिसंबर के बाद होगा। इसके लिए विधायक दल की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें केंद्रीय पर्यवेक्षक उपस्थित रहेंगे। पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, विधायक दल के मुख्य सचेतक रहे रामनिवास रावत, पूर्व मंत्री बाला बच्चन और उमंग सिंघार के नाम दावेदारों में प्रमुखता से सामने आए हैं। 66 सीटों पर जीती कांग्रेस230 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 66 उम्मीदवार चुनाव जीतकर पहुंचे हैं। दल का नेता विधायक चुनेंगे। इसके लिए विधायक दल की बैठक होगी। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों का कहना है कि केंद्रीय संगठन से विधायक दल के नेता का चयन करने के लिए पर्यवेक्षक भेजने का अनुरोध किया है। एकजुटता का संदेश देना चाहते हैंदरअसल, पार्टी नेता चाहते हैं कि कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश जाए कि सभी एकजुट हैं, इसलिए आम सहमति के आधार पर निर्णय पर जोर दिया जा रहा है। विधायक दल के नेता के लिए नेता प्रतिपक्ष के लिए पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। विंध्य अंचल में वैसे भी पार्टी की स्थिति कमजोर है। इस बार केवल पांच सीटें ही पार्टी जीत सकी है। उधर, जातीय समीकरणों के हिसाब से ओबीसी वर्ग से आने वाले रामनिवास रावत और आदिवासी वर्ग से बाला बच्चन और उमंग सिंघार के नाम भी दावेदारों में हैं। कमल नाथ प्रदेश संगठन में करेंगे परिवर्तनउधर, लोकसभा चुनाव को देखते हुए कमल नाथ अभी प्रदेश अध्यक्ष बने रहेंगे पर उनकी टीम यानी प्रदेश कांग्रेस संगठन में परिवर्तन होगा। दरअसल, विधानसभा चुनाव में कई पदाधिकारियों के निष्क्रिय रहने की शिकायतें हैं। पार्टी अध्यक्ष को संगठन की रचना और आगामी दिशा तय करने के लिए अधिकृत किया गया है।वहीं, प्रदेश कांग्रेस ने सभी चुनाव जीतने व हारने वाले उम्मीदवारों से संगठन की रिपोर्ट मांगी है। दरअसल, कुछ उम्मीदवारों ने संगठन का साथ नहीं मिलने और भितरघात की शिकायत की है। इसके अतिरिक्त जिला प्रभारी, संगठन मंत्री और पर्यवेक्षकों से भी चुनाव में संगठन पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर जानकारी मांगी गई है।

भजनलाल शर्मा होंगे राजस्थान के नए मुख्यमंत्री, सांगानेर सीट से हैं विधायक

Bhajan Lal Sharma will be the new Chief Minister of Rajasthan. He is a legislator from the Sanganer constituency. जयपुर! राजस्थान के नए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा होंगे। भाजपा की तरफ से विधायक दल की बैठक के बाद उनके नाम का एलान किया है। रक्षामंत्री राजस्थान सिंह व पार्टी के दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में उनके नाम की घोषणा की गई। राजस्थान के नए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा होंगे। भाजपा की तरफ से विधायक दल की बैठक के बाद उनके नाम का एलान किया है। रक्षामंत्री राजस्थान सिंह व पार्टी के दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में उनके नाम की घोषणा की गई। भजन लाल शर्मा एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं जो वर्तमान में राजस्थान के मुख्यमंत्री और राजस्थान विधान सभा के सदस्य के रूप में सांगानेर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं । वह चार बार भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महासचिव भी रहे । 2023 के राजस्थान विधान सभा चुनाव के बाद , उन्हें सांगानेर विधानसभा क्षेत्र से विधायक के रूप में चुना गया। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के उम्मीदवार पुष्पेंद्र भारद्वाज को 48,081 वोटों के अंतर से हराकर अपना स्थान सुरक्षित किया।

मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष चुने गए केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर।

Narendra Singh Tomar, the Union Minister, has been elected as the Speaker of the Madhya Pradesh Legislative Assembly. संतोष सिंह तोमर भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकार गठन को लेकर भोपाल में सोमवार को चली कई घंटों की बैठक के बाद पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष बनाने पर सहमति बनी है। ऐसे में अब पूर्व केंद्रीय मंत्री नए विधानसभा अध्यक्ष का पद संभालेंगे। भाजपा विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर मुहर लगी है। हालांकि इससे पहले नरेंद्र सिंह तोमर को मुख्यमंत्री की रेस में गिना जा रहा था, लेकिन अब पूरी तरह से मध्य प्रदेश की सियासी तस्वीर साफ हो चुकी है। नरेंद्र सिंह तोमर को बीजेपी ने इस बार दिमनी विधानसभा सीट से टिकट दिया था। जहां उन्होंने 24 हजार से अधिक वोटों के अंतर से बड़ी जीत दर्ज की है। विधानसभा के अध्यक्ष होंगे पूर्व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह पूर्व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को भाजपा ने विधानसभा का अध्यक्ष बनाने का फैसला किया है। श्री तोमर दिमनी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर आए हैं। उन्होंने अपने सबसे निकटतम प्रतिद्वंदी बसपा के प्रत्याशी को 24461 वोटों के अंतर से मात दी है। नरेंद्र सिंह तोमर को 79137 वोट मिले हैं। श्री तोमर केंद्र की मोदी सरकार में कृषि मंत्रालय समेत कई अन्य मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। साफ-सुथरी छवि वाले नेता होने के नाते नरेंद्र सिंह तोमर को इस विधानसभा का स्पीकर चुना गया है।   छात्र जीवन से शुरू किया राजनीतिक सफर मध्य प्रदेश के नए स्पीकर चुने गए पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता नरेंद्र सिंह तोमर का जन्म मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के ओरेठी गांव में 12 जून 1957 को हुआ। श्री तोमर एक राजपूत क्षत्रीय परिवार से आते हैं। उन्होंने जीवाजी यूनिवर्सिटी से स्नातक तक की शिक्षा हासिल की हुई है। स्नातक की पढ़ाई के दौरान तोमर महाविद्यालय में छात्र संघ के अध्यक्ष भी रहे। इसके साथ ही वो ग्वालियर नगर निगम के पार्षद पद पर भी चुने गए, जिसके बाद वह पूरी तरह से राजनीति में सक्रिय हो गए। वर्ष 1977 में भाजपा ने उन्हें युवा मोर्चा का मंडल अध्यक्ष बना दिया। इसके बाद वर्ष 1984 में युवा मोर्चा के प्रदेश मंत्री बने और वर्ष 1991 में प्रदेश अध्यक्ष बने। वर्ष 2006 में नरेंद्र सिंह तोमर को फिर एक बार मध्य प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष चुना गया। इस राजनेतिक सफर के दौरान वे राज्यसभा सांसद भी रहे हैं। ग्वालियर से लड़ा था पहला विधानसभा चुनाव नरेंद्र सिंह तोमर ने अपना पहला विधानसभा चुनाव वर्ष 1993 ग्वालियर सीट से लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। इसके बाद वर्ष 1998 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी अशोक कुमार शर्मा को 26 हजार से अधिक वोटों के अंतर मात देकर विधानसभा में पहला कदम रखा था। इस दौरान उनको 50 हजार वोट मिले थे। उन्होंने अपना दूसरा विधानसभा का चुनाव वर्ष 2003 में लड़ा था, जिसमें उनको 63 हजार 592 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी बालेन्दु शुक्ला को 29 हजार 452 वोट मिले। तोमर ने यह चुनाव 34 हजार 140 वोटों के अंतर से जीता था। वर्ष 2003 से लेकर वर्ष 2007 तक श्री तोमर मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के पद पर रहे। 2009 से लगातार चुने गए लोकसभा के सांसद साल 2009 में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर पहली बार मुरैना से लोकसभा सदस्य निर्वाचित हुए थे। मुरैना संसदीय क्षेत्र से लोकसभा सदस्य निर्वाचित होने से पहले वो राज्यसभा के सदस्य थे। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी रामनिवास रावत को 1 लाख 97 वोटों से हराया था। वहीं, साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें ग्वालियर से टिकट दिया। इस दौरान उन्होंने 26 हजार से अधिक वोटों से जीत हासिल की। नरेंद्र सिंह तोमर केंद्र सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री, पंचायती राज मंत्री, खान मंत्री और संसदीय मामलों के मंत्री रहे हैं। इसके बाद वर्ष 2019 में उन्हें फिर एक बार मुरैना लोकसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारा गया और इस बार भी वोटों के बड़े अंतर से चुनाव जीतकर लगातार तीसरी बार लोकसभा में पहुंचे। जिसके बाद वो ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्रालय में रहे और उन्हें कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय का प्रभार दिया गया।

सर्दी के मौसम में तेजी से फैलता है इन्फ्लूएंजा वायरस.

 The influenza virus spreads rapidly during the cold weather. फ्लू इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होता है, जो नाक, गला और फेफड़ों को संक्रमित करता है। The flu is caused by the influenza virus, which infects the nose, throat, and lungs. Manish Trivedi, Sub-Editor, Sahara Samachaar. ठंड के मौसम में बीमारियों का खतरा अधिक होता है। इस मौसम में कई मौसमी बीमारियों जैसे सर्दी-खांसी और फ्लू का खतरा अधिक रहता है। फ्लू इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होता है, जो नाक, गला और फेफड़ों को संक्रमित करता है। ठंड के मौसम में बीमारियों का खतरा अधिक होता है। इस मौसम में इन्फ्लूएंजा वायरस अधिक सक्रिय रहता है। सर्दी में ठंडी हवाएं और गिरता तापमान सबसे ज्यादा परेशान करता है। इस मौसम में कई मौसमी बीमारियों जैसे सर्दी-खांसी और फ्लू का खतरा अधिक रहता है। इस मौसम में फ्लू लोगों को बेहद प्रभावित करता है। मेडिसिन विभाग के सह प्राध्यापक डा. अशोक ठाकुर ने बताया कि फ्लू इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होता है, जो नाक, गला और फेफड़ों को संक्रमित करता है। जब फ्लू से पीड़ित लोग खांसते, छींकते या आपस में बात करते हैं तो ये वायरस हवा के जरिए एक-दूसरे में फैलने लगता है। यह वायरस सबसे आसानी से फैल जाता है। कोविड के प्रोटोकाल का पालन करना चाहिए इससे बचाव के लिए हमें कोविड की तरह प्रोटोकाल का पालन करना चाहिए। जैसे मास्क लगाकर रखें, बार-बार हाथ धोएं, भीड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। खासकर घर में यदि कोई व्यक्ति बीमार है, तो उससे दूरी बनाकर रखना चाहिए। इस मौसम में सबसे अधिक समस्या सांस के मरीज को होती है। उन्हें अपना विशेष तौर पर ध्यान रखने की आवश्यकता है। ऐसे में खानपान में ठंडी चीजों को नहीं खाना चाहिए। जिन लोगों की जिस भी तरह के खाने से एलर्जी है, उसे खाने से बचना चाहिए।सर्दी में मौसमी बीमारियों से बचाव करने के लिए टीका लगना जरूरी है। फ्लू से बचाव के लिए नियमित रूप से साबुन से अपने हाथ धोएं या फिर सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें। हाथों को अपनी आंखें, नाक, या मुंह को छूने से बचें।

भाजपा से ज्यादा कांग्रेस ने बनाए प्रकोष्ठ, बांटे 500 से अधिक पद.

Congress has formed more committees than BJP, distributing more than 500 positions. भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस के 40 से अधिक प्रकोष्ठ और बांटे गए 500 से अधिक पद भी विधानसभा चुनाव में कोई कमाल नहीं दिखा पाए। विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने नए प्रकोष्ठों की झड़ी लगा दी थी कांग्रेस ने अपने पार्टी संविधान से अलग हटकर करीब 40 से अधिक प्रकोष्ठ बनाये हैं। चुनाव से पहले संगठन में नियुक्ति रेवड़ी की तरह बांटी गई। इतना ही नहीं इनमें अध्यक्ष, संयोजक और कार्यकारी अध्यक्ष जैसे पदों पर थोकबंद नियुक्तियां भी की गई थीं। लेकिन ये सभी प्रकोष्ठ चुनाव में कोई खास कमाल नहीं दिखा पाए। खास बात है कि प्रकोष्ठ बनाने में कांग्रेस ने तो भाजपा को भी पीछे कर दिया। वहीं चुनाव से पहले कांग्रेस ने सचिव, महासचिव और उपाध्यक्ष जैसे 500 से अधिक पदाधिकारी भी बनाए थे लेकिन वे भी चुनाव में पूरी तरह से बेअसर साबित हुए। कांग्रेस ने हर वर्ग को साधने के लिए प्रकोष्ठ का सहारा लिया था। इसके लिए पार्टी ने पुजारी से लेकर मेकेनिक जेसे प्रकोष्ठ का गठन किया था। इसके साथ ही आउटसोर्स, शिक्षक, केश शिल्पी, डॉक्टर, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, सद्भावना कोमी एकता और परिवहन जेसे कई अन्य प्रकोष्ठ भी बनाए गए थे। कांग्रेस कार्यालय में लगातार अलग-अलग प्रकोष्ठ और विभागों के सम्मेलन भी किए थे। प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ खुद इन्हें संबोधित करते थे। 105 महासचिव, उपाध्यक्षों की संख्या 50

पचमढ़ी से भी सर्द रहा राजगढ़, पारा 8 डिग्री पर, भोपाल सामान्य के करीब.

Rajgarh is colder than Pachmarhi, with the temperature at around 8 degrees Celsius, while Bhopal is close to normal. भोपाल। प्रदेशभर में रात के वक्त सर्दी का असर बढ़ रहा है। रविवार-सोमवार की रात पचमढ़ी, ग्वालियर और राजगढ़ की रात सबसे ठंडी रही। प्रदेश में सबसे ज्यादा सर्द रात राजगढ़ में रही। यह पचमढ़ी से भी ठंडी दर्ज हुई है। यहां न्यूनतम पारा 8.4 डिग्री रहा, जबकि पचमढ़ी में तापमान 9.2 डिग्री, ग्वालियर में 9.8 डिग्री रहा। भोपाल में रात का पारा आधा डिग्री बढ़कर 12 डिग्री पर आ गया। यह सामान्य से केवल दशमलव दो डिग्री अधिक है। वहीं, इंदौर में 14.6 डिग्री, उज्जैन में 13.2 डिग्री और जबलपुर में तापमान 12 डिग्री दर्ज किया गया। उमरिया, नौगांव, दतिया भी सर्द रहे। प्रदेश में रात के तापमान में लगातार गिरावट होने से कई शहरों में कोहरे का असर भी बढ़ गया है। इससे ग्रामीण अंचलों में दृश्यता पर भी असर रहा। रविवार को ज्यादातर शहरों में तापमान 25-26 डिग्री के आसपास रहा। भोपाल में अलसुबह कोहरे का असर बढऩे से विजिबिलिटी 500 मीटर पर सिमट गई, जो सुबह 8 बजे के बाद 1000 मीटर पर पहुंची। शहर में बदली हवा से बढ़ा सर्दी का अहसासराजधानी में बीते एक सप्ताह से अधिक समय से मौसम का मिजाज बदला रहा। तीन दिन से मौसम साफ हो रहा है, जिससे प्रदेश में हवाओं का रुख बदलने लगा है। सोमवार को शहर में आने वाली हवाओं का रुख उत्तरी रहने से दिन में भी मामूली ठंडक घुली रही। मौसम विशेषज्ञ एके शुक्ला के अनुसार अभी तापमान में और गिरावट होगी। अब हवाओं का रुख उत्तरी हो रहा है, जिससे सर्दी बढ़ेगी। शीतलहर और तीव्र शीतलहर के लिए एक से डेढ़ सप्ताह का इंतजार करना पड़ सकता है। कहां कितना गिरा पारासोमवार को प्रदेश में सबसे अधिक रात के तापामन में गिरावट दतिया में 2.3 की रही। रात का पारा 10.5 डिग्री रहा, जो नॉर्मल से एक डिग्री अधिक है। भोपाल, गुना, रायसेन, बैतूल, छिंदवाड़ा, जबलपुर, खजुराहो, मंडला, रीवा, सतना, सीधी, मलाजखंड आदि में रात का पारा 11 से 12 डिग्री के बीच पहुंच गया है। इन शहरों में पारे में औसतन एक डिग्री की गिरावट रही।

नतीजे के आठवें दिन मिला प्रदेश को नया मुख्यमंत्री, मोहन यादव के नाम पर लगी मुहर.

On the eighth day of the results, the state got a new Chief Minister, with the seal of approval on the name of Mohan Yadav. भोपाल। भारतीय जनता पार्टी ने आठ दिन मंथन करने के बाद सबको चौंका दिया है। बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में सोमवार को नवनिर्वाचित विधायकों ने नए मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव के नाम पर मोहर लगाई। यादव उज्जैन दक्षिण से विधायक हैं। इसके अलावा जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला उपमुख्यमंत्री होंगे। केंद्र में कृषि मंत्री रहे नरेंद्र सिंह तोमर स्पीकर होंगे। हालांकि उप मुख्यमंत्री और स्पीकर के नाम की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है। विधायक दल की बैठक में पर्यवेक्षक मनोहर लाल खट्टर, डॉ. के. लक्ष्मण और आशा लकड़ा मौजूद रहे। सीएम शिवराज सिंह ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा, जिसका सभी विधायकों ने समर्थन किया। मोहन यादव को भरोसा नहीं हुआ तो पहले खड़े नहीं हुए। बाद में खड़े होकर हाथ जोड़े। मोहन यादव उज्जैन दक्षिण से विधायक हैं और ओबीसी वर्ग से आते हैं। जगदीश देवड़ा मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ से विधायक हैं। देवड़ा एससी वर्ग से आते हैं। जबकि राजेन्द्र शुक्ला रीवा सीट से विधायक हैं और ब्राह्मण वर्ग से आते हैं। आठ दिन की कवायत, 15 मिनट में तय हुआ सीएमभाजपा प्रदेश कार्यालय पर शाम 4.11 बजे विधायक दल की बैठक शुरू हुई थी। मात्र 15 मिनट में नए मुख्यमंत्री बनाने की सारी प्रक्रिया पूरी कर ली गई। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने विधायक दल की बैठक की जानकारी दी। पर्यवेक्षक और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर खट्टर ने 6 मिनट के भाषण में सिर्फ इतना कहा कि भाजपा एक अनुशासित पार्टी है। केंद्रीय नेतृत्व के फैसले को सभी को स्वीकार करना चाहिए। यह परंपरा है। जिसके बाद सीएम के नाम का ऐलान कर दिया गया। शिवराज ने दिया इस्तीफा, मोहन ने पेश किया सरकार का प्रस्तावनए सीएम के नाम का ऐलान होने के बाद शिवराज सिंह चौहान राजभवन पहुंचे। जहां उन्होंने राज्यपाल मंगुभाई पटेल को सीएम पद से अपना इस्तीफा सौंपा। उनका इस्तीफा तत्काल मंजूर भी हो गया। शिवराज सिंह ने नए सीएम को बधाई भी दी। उन्होंने कहा मध्यप्रदेश को नया मुख्यमंत्री मिल गया है। उन्हें बहुत बहुत बधाई, उनका अभिनंदन। इधर कुछ देर बाद मोहन यादव राजभवन पहुंचे। यहां उन्होंने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया। इस दौरान उनके साथ शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र सिंह तोमर, कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल और वीडी शर्मा मौजूद रहे। साथ ही तीनों पर्यवेक्षक मनोहर लाल कट्टर, डॉ के. लक्ष्मण और आशा लकड़ा भी साथ रहे। विधायकों का फोटो सेशन हुआ, रेस में थे कई नामबीजेपी विधायक दल की बैठक से पहले सभी नवनिर्वाचित विधायकों का फोटो सेशन हुआ। जिसमें मोहन यादव आगे से तीसरी पंक्ति में बैठे थे। फोटो सेशन के बाद बैठक शुरू हुई। जिसमें सीएम के रूप में मोहन यादव के नाम का ऐलान हो गया। एमपी सीएम पद की रेस में कई दिग्गज नाम शामिल थे। जिसमें प्रह्लाद पटेल, नरेंद्र सिंह तोमर, वीडी शर्मा, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कैलाश विजयवर्गीय जैसे कई नाम शामिल थे। जिसमें केंद्रीय मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बीजेपी ने सबको चौंकाते हुए मोहन यादव को नया मुख्यमंत्री बनाया है। भाजपा का तंत्र ऐसा, छोटे से छोटे कार्यकर्ता को बड़ी जवाबदारी : यादवनए सीएम मोहन यादव ने कहा कि भाजपा का तंत्र ही ऐसा है कि छोटे से छोटे कार्यकर्ता को बड़ी जवाबदारी मिलती है। हमारी ट्रेनिंग भी ऐसी होती है कि पार्टी जो काम दे दे उसको बहुत सहजता से लेते हैं। मैं तो पीछे की पंक्ति में बैठकर अपना काम कर रहा था। अचानक घोषणा हुई। मैं सबका आभार मानता हूं। विकास के काम को आगे बढ़ाना ही मेरी प्राथमिकता होगी। यादव ने कहा कि मैं पार्टी का एक छोटा सा कार्यकर्ता हूं। प्यार और सहयोग के लिए पार्टी की स्टेट लीडरशिप और केंद्रीय लीडरशिप का बहुत बहुत धन्यवाद। मैं अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह से निभाऊंगा। 6 दिसंबर को रात 11 बजे 15 मिनट में तय हो गया था नामबताया जा रहा है कि यादव का मुख्यमंत्री के लिए नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा के नई दिल्ली स्थित निवास पर 6 दिसंबर को रात 11 बजे ही तय हो गया था। इस दौरान केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव भी वहां मौजूद थे। भूपेंद्र यादव ने ही डॉ. मोहन यादव की रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को दी थी। इसके बाद तीन दौर की बैठक में डॉ. यादव का नाम तय किया गया। वे संघ के करीबी माने जाते हैं। बीजेपी ने ओबीसी चेहरे के तौर पर मोहन यादव को आगे किया है।भाजपा के एक नेता ने बताया कि 6 दिसंबर को मोहन यादव सड़क मार्ग से भोपाल से उज्जैन जा रहे थे। शाम करीब 7 बजे जब वे आष्टा पहुंचे, तब उन्हें तत्काल दिल्ली आने के लिए गया। डॉ. यादव वापस भोपाल आए और रात 9 बजे की फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे। उनकी नड्डा से केवल 15 मिनट की मुलाकात हुई। वे अगले दिन यानी 7 दिसंबर को सुबह भोपाल लौट आए। तब यह कयास लगाए जा रहे थे कि डॉ. यादव को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है।

बीजेपी-कांग्रेस के 96 विधायक चुनाव हारे, सभी को एमएलए रेस्ट हाउस के फ्लेट छोड़ना होंगे.

Ninety-six legislators from both the BJP and Congress lost the elections; all of them will have to vacate their flats in the MLA Rest House. 24 विधायकों को बंगले खाली छोड़ना होगा, 10 दिन में बंगले छोड़ने का नोटिस जारी. Twenty-four legislators will have to vacate their bungalows; a notice for vacating the bungalows within ten days has been issued. भोपाल। मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव हारे पूर्व मंत्रियों और विधायकों को 10 दिन में बंगला खाली करना होगा। इसके लिए विधानसभा की ओर से 130 विधायकों को बंगले खाली करने के नोटिस जारी कर दिए गए हैं। ताकि चुनाव जीतकर आए विधायकों को अध्यक्षीय पूल के बंगले आवंटित किए जा सकें। अभी चुनाव जीतने के बाद अधिकांश विधायकों को आवास नहीं मिला है। आवास नहीं मिलने से कई नेता होटल या फिर रिश्तेदार के घरों पर रुके हुए हैं। प्रदेश में 15वीं विधानसभा के विघटित होने और 16वीं विधानसभा के गठन की अधिसूचना के बाद यह कार्रवाई शुरू की गई है। यह सामान्य प्रक्रिया है, पर अधिकतर देखने में आया है कि हारे हुए विधायक बंगले खाली करने में अपनी ओर से पहल कम ही करते हैं। बीजेपी-कांग्रेस के 96 विधायक चुनाव हार गए हैं। वहीं, 34 विधायक ऐसे हैं जिनके दोनों दलों में टिकट कटे थे। उन्हें अब बंगला खाली करना होगा। इधर, गृह विभाग ने शासन स्तर पर बी टाइप-14 और सी टाइप- 8 बंगलें खाली कराए जाने की सूची तैयार की है। इसका फैसला नई सरकार के गठन के बाद होगा। विधानसभा में अध्यक्षीय पूल के 34 बंगले हैं। इनमें से 22 विधायकी का चुनाव हार गए। 2 के टिकट कट गए। इस तरह 24 विधायकों से बंगले खाली छोड़ना होगा। 24 के अलावा 96 वे ऐसे सदस्य हैं जिनकी चुनाव हारने की वजह से विधायकी चली गई है। उनसे भी एमएलए रेस्ट हाउस में मिले आवास 10 दिन में खाली कराए जाना है। चुनाव हार चुके विधायक बाला, सिंघार सहित कई के रहेंगे सुरक्षित

230 में से 175 विधायकों ने ही कराया पंजीयन, 55 अभी भी लापता.

Out of 230, 175 legislators have completed the registration, while 55 are still missing. भोपाल। सोलहवीं विधानसभा के नवनिर्वाचित सदस्य कैलाश विजयवर्गीय, राकेश सिंह, रीति पाठक, कुंवर विजय शाह एवं सुशील तिवारी विधानसभा पहुंचे। उन्होंने प्रमुख सचिव अवधेश प्रताप सिंह से कक्ष में चर्चा की। प्रमुख सचिव ने नव निर्वाचित सदस्यों का स्वागत किया। इसके बाद सदस्यों ने स्वागत कक्ष पहुंचकर निर्वाचन प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर नवीन विधानसभा गठन संबंधी समस्त आवश्यकताएं पूर्ण कीं। सोमवार को 25 सदस्यों का विधानसभा पहुंचे। अब तक कुल 175 सदस्य विधानसभा पहुंचे चुके हैं। 230 विधानसभा सदस्यों में से अभी भी 55 पंजीयन से वंचित हैं। रविवार को आने वाले अन्य सदस्यों में जय सिंह मरावी, दिलीप जायसवाल, राधारविंद्र सिंह, मनोज पटेल, अशोक ईश्वरदास रोहाणी, धीरेंद्र बहादुर सिंह एवं गायत्री राजे पवांर विधानसभा पहुंचे थे। सोमवार को अन्य आने वाले सदस्यों में महेंद्र यादव, माधव सिंह, हरदीप सिंह डंग, चिंतामणि मालवीय, प्रणय पांडे, मुकेश टंडन, आशीष गोविंद शर्मा, तेज बहादुर सिंह, नरेंद्र सिंह कुशवाह, बाला बच्चन, निर्मला भूरिया, महादेव वर्मा (मधु वर्मा), अमर सिंह यादव, मालिनी गौड़, बालकृष्ण पाटीदार, मोंटू सोलंकी, सेना महेश पटेल, हरिबाबू राय, राजेश सोनकर एवं गोलू शुक्ला ने विधानसभा पहुंचकर अपने निर्वाचन प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण कीं।

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