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राष्ट्रपति के हिमाचल दौरे से पहले बम की धमकी से हड़कंप, अब नए सिरे से सुरक्षा व्यवस्था का होगा निर्धारण

मंडी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में प्रस्तावित दौरे से ठीक पहले बम की धमकी भरे ईमेल ने सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है। ईमेल में उपायुक्त कार्यालय परिसर को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। इससे पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा हुआ है। राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे को देखते हुए अब सुरक्षा व्यवस्था को नए सिरे से तय करने की तैयारी शुरू हो गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मुसात मई को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी ) मंडी के दौरे पर आने वाली हैं। वह दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का उद्घाटन करेंगी। इस कार्यक्रम में देश-विदेश से विज्ञानिक, शोधार्थी, प्रोफेसर और छात्र भाग लेंगे। ऐसे में राष्ट्रपति के आगमन को लेकर पहले से ही जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां तैयारियों में जुटी थीं। बम की धमकी से सक्रिय हुईं केंद्रीय एजेंसियां बम की धमकी मिलने के बाद स्थानीय पुलिस के साथ-साथ खुफिया और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं। ईमेल की जांच के लिए साइबर सेल को लगाया गया है, ताकि यह पता चल सके कि ईमेल किसने और कहां से भेजा। केंद्रीय सुरक्षा बलों ने भी मंडी में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है। आइबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) और राष्ट्रपति से सुरक्षा से जुड़े अधिकारी अब दौरे से पहले हर पहलू पर नजर बनाए हुए हैं। अब सुरक्षा व्यवस्था का होगा नए सिरे से निर्धारण इस घटनाक्रम के बाद मंडी में राष्ट्रपति के दौरे को लेकर पहले से बनी सुरक्षा रणनीति की फिर से समीक्षा की जा रही है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय बलों के वरिष्ठ अधिकारी अब आइआइटी मंडी सहित आसपास के सभी क्षेत्रों की नए सिरे से सुरक्षा समीक्षा करेंगे। कार्यक्रम स्थल, राष्ट्रपति के ठहरने की व्यवस्था, रास्ते और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की योजना पर काम किया जा रहा है। राष्ट्रपति का करीब दो से तीन घंटे तक आइआइटी मंडी में रुकने का कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।

PM मोदी और ट्रंप के बीच अच्छे संबंध, मुक्त द्विपक्षीय व्यापार समझौते से भारत को होगा फायदा: मार्क मोबियस

 नई दिल्ली विश्व व्यापार व्यवस्था के भविष्य को लेकर तेज हो रही बहस के बीच दिग्गज वैश्विक निवेशक मार्क मोबियस ने बुधवार को कहा कि अमेरिका के साथ मुक्त द्विपक्षीय व्यापार समझौते से निश्चित रूप से भारत को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच अच्छे संबंध हैं। उभरते बाजारों (ईएम) के लिए मोबियस ईएम ऑपर्च्युनिटीज फंड चलाने वाले अरबपति निवेशक ने मिडिया से कहा कि विश्व अर्थव्यवस्था में कुछ संकट आएगा, लेकिन अगले कुछ महीनों में ट्रंप कई देशों के साथ व्यापार समझौते करना शुरू कर देंगे और इससे बाजार ‘शांत’ हो जाएगा। साथ ही बड़ी मंदी की संभावना खत्म हो जाएगी। मोबियस के अनुसार, ”भारत में क्वालिटी कंट्रोल इंस्पेक्शन एजेंसी जैसी कई गैर-टैरिफ बाधाएं हैं।” उन्होंने कहा, “यह सबसे अच्छा होगा अगर भारत उन सभी बाधाओं को खत्म कर दे और अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौता कर ले।” भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण पर हस्ताक्षर करने के लिए काम कर रहे हैं ताकि 2025 की निर्धारित समय सीमा से पहले टैरिफ कम किया जा सके। इस समझौते के संदर्भ की शर्तें पहले ही तय की जा चुकी हैं। अगर व्यापार सौदा समय-सीमा के भीतर पूरा हो जाता है, तो दोनों देशों को लाभ होगा। मोबियस के अनुसार, ”पूरी तरह से मुक्त व्यापार वातावरण सबसे अच्छा होगा, लेकिन अधिकांश देश, विशेष रूप से चीन, विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों का पालन करने और पारस्परिक व्यापारिक समझ का पालन करने के लिए तैयार नहीं हैं।” उन्होंने कहा, “अमेरिका दुनिया भर के देशों से रेसिप्रोसिटी की मांग कर रहा है ताकि व्यापार असंतुलन को दूर किया जा सके और सभी देशों में मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहित किया जा सके।” व्हाइट हाउस फैक्ट शीट के अनुसार, ”चीन को अब अपने प्रतिशोधी टैरिफ के परिणामस्वरूप अमेरिका में आयात पर 245 प्रतिशत तक टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है। यह तब हुआ जब बीजिंग ने अपनी एयरलाइनों को चीनी सामानों पर 145 प्रतिशत टैरिफ लगाने के अमेरिकी फैसले के जवाब में बोइंग जेट की कोई और डिलीवरी नहीं लेने का आदेश दिया।” व्हाइट हाउस के अनुसार, ”अमेरिकी राष्ट्रपति चीन के साथ व्यापार समझौता करने के लिए तैयार हैं, लेकिन बीजिंग को पहला कदम उठाना चाहिए।”

वक्फ पर सर्वोच्च न्यायालय में बहस, सीजीआई ने कहा अनुच्छेद 26 धर्मनिरपेक्ष है और ये सभी समुदायों पर लागू होता है

नई दिल्ली वक्फ कानून को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस अहम मामले में वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अपनी दलीलें रखनी शुरू कीं। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने बहस की शुरुआत की, जिसके बाद अभिषेक मनु सिंघवी ने अपनी दलीलें पेश कीं। सिब्बल ने अनुच्छेद 26 का जिक्र किया। फिर कहा अगर मुझे वक्फ बनाना है तो मुझे सबूत देना होगा कि मैं 5 साल से इस्लाम का पालन कर रहा हूं, अगर में मुस्लिम ही जन्मा हूं तो मैं ऐसा क्यों करूंगा? मेरा पर्सनल लॉ यहां पर लागू होगा। अगर वक्फ बनाने वाला कागजात देता है तो वक्फ कायम रहेगा। इस पर सीजीआई ने कहा अनुच्छेद 26 धर्मनिरपेक्ष है और ये सभी समुदायों पर लागू होता है। वहीं, अधिवक्ता सिंघवी ने कोर्ट के समक्ष कहा कि देशभर में करीब आठ लाख वक्फ संपत्तियां हैं, जिनमें से चार लाख से अधिक संपत्तियां ‘वक्फ बाई यूजर’ के तौर पर दर्ज हैं। उन्होंने इस बात को लेकर चिंता जताई कि वक्फ अधिनियम में किए गए संशोधन के बाद इन संपत्तियों पर खतरा उत्पन्न हो गया है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने कहा कि जब वे दिल्ली हाईकोर्ट में थे, तब उन्हें बताया गया था कि वह जमीन वक्फ संपत्ति है। उन्होंने कहा, “हमें गलत मत समझिए, हम यह नहीं कह रहे हैं कि सभी वक्फ बाई यूजर संपत्तियां गलत हैं।” बहस के दौरान सिंघवी ने यह भी कहा कि उन्हें यह तक सुनने में आया है कि संसद भवन की जमीन भी वक्फ की है। उन्होंने कोर्ट से पूछा कि क्या अयोध्या केस में जो फैसले दिए गए, वे इस मामले में लागू नहीं होते? उन्होंने संशोधित वक्फ अधिनियम पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की और कहा कि जब तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक संशोधन लागू नहीं किया जाना चाहिए। इस बीच, अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने भी कहा कि अधिनियम की धारा 3(आर) के तीन पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। खासकर इस बात पर कि ‘इस्लाम का पालन करना’ यदि आवश्यक धार्मिक अभ्यास माना जाता है, तो इसका प्रभाव नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर भी पड़ सकता है। अहमदी ने कहा कि यह अस्पष्टता पैदा करता है ।

ट्रंप प्रशासन ने US ने रद्द किया F-1 वीजा तो भारतीय छात्र ने खोल दिया मोर्चा, अदालत में घसीटा

न्यूयॉर्क संयुक्त राज्य अमेरिका के मिशिगन के सरकारी विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले एक भारतीय समेत चार एशियाई छात्रों ने अपने छात्र आव्रजन दर्जे को गलत तरीके से समाप्त किए जाने के बाद अमेरिका से संभावित निर्वासन के खिलाफ ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। भारत के चिन्मय देवरे, चीन के जियांगयुन बु और कियुई यांग और नेपाल के योगेश जोशी ने शुक्रवार को ‘डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी’ (DHS) और आव्रजन अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। चारों छात्रों ने मुकदमा दायर करके आरोप लगाया है कि ‘छात्र एवं विनिमय आगंतुक सूचना प्रणाली’ (SEVIS) में उनके छात्र आव्रजन दर्जे को ‘पर्याप्त नोटिस और स्पष्टीकरण के बिना’ अवैध रूप से समाप्त कर दिया गया। SEVIS एक ऐसा आंकड़ा है जो अमेरिका में गैर-प्रवासी छात्रों और शैक्षणिक विनिमय के तहत आने वाले छात्रों (विनिमय आगंतुक) के बारे में जानकारी एकत्र करता है। बिना कारण रद्द किया गया F-1 छात्र वीजा छात्रों का प्रतिनिधित्व कर रहे मिशिगन के ‘अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन’ ने कहा है कि उन्होंने उन छात्रों की ओर से एक संघीय मुकदमा दायर करके एक आपतकालीन निषेधाज्ञा जारी करने का अनुरोध किया है, जिनकी F-1 छात्र आव्रजन स्थिति को ट्रंप प्रशासन द्वारा बिना किसी वैध कारण और बिना किसी नोटिस के अवैध रूप से और अचानक समाप्त कर दिया गया है।एसीएलयू ने कहा कि मुकदमे में अदालत से इन छात्रों की स्थिति को बहाल करने के लिए कहा गया है ताकि वे अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें और हिरासत और निर्वासन के जोखिम का सामना करने से बच सकें। न अपराध किया, न दोषी ठहराया गया, फिर क्यों ऐक्शन? अदालत में की गई शिकायत में कहा गया है, “उनमें से किसी पर भी अमेरिका में किसी भी अपराध का आरोप नहीं लगाया गया है, न ही उन्हें दोषी ठहराया गया है। किसी ने भी किसी आव्रजन कानून का उल्लंघन नहीं किया है। न ही वे किसी राजनीतिक मुद्दे को लेकर परिसर में विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रहे हैं।” इस शिकायत में डीएचएस सचिव क्रिस्टी नोएम, कार्यकारी आईसीई निदेशक टॉड लियोन्स और आईसीई डेट्रॉयट फील्ड ऑफिस निदेशक रॉबर्ट लिंच का नाम शामिल है। इसी प्रकार के मुकदमे न्यू हैम्पशायर, इंडियाना और कैलिफोर्निया जैसे राज्यों समेत देशभर में दायर किये गए हैं। बता दें कि कुछ दिनों पहले ही इसी तरह के एक मामले में अमेरिकी जज ने ट्रंप प्रशासन को 21 वर्षीय भारतीय स्नातक कृष लाल इस्सरदासानी को निर्वासित करने से अस्थायी रूप से रोक दिया था, जिसका छात्र वीजा रद्द कर दिया गया था। कृष मई में स्नातक होने वाले हैं।

भविष्य संवारने का सपना लेकर दुबई गए 3 भारतीयों पर पाकिस्तानियों ने किया तलवार से हमला, दो की मौत

दुबई विदेश जाकर मेहनत करके अपने परिवार का भविष्य संवारने का सपना लेकर दुबई गए तेलंगाना के तीन भारतीय नागरिकों पर एक खौफनाक हमला हुआ है, जिसने पूरे राज्य को सदमे में डाल दिया है। 11 अप्रैल को दुबई की एक बेकरी में हुई इस घटना में दो भारतीयों की जान चली गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल है। बताया जा रहा है कि हमलावर ने धार्मिक नारे लगाते हुए बेकरी में घुसकर तलवार से हमला कर दिया। क्या है पूरा मामला? इस हमले में तेलंगाना के निर्मल जिले के सौन गांव निवासी 35 वर्षीय अश्तापु प्रेमसागर की मौके पर ही मौत हो गई। उनके साथ काम कर रहे निजामाबाद के श्रीनिवास भी जान गंवा बैठे। तीसरे युवक सागर को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हमले की खबर मिलते ही पीड़ितों के परिवारों में कोहराम मच गया है। हमलावर पर गंभीर आरोप परिजनों का आरोप है कि हमला एक पाकिस्तानी नागरिक ने किया, जो धार्मिक नारे लगाते हुए तलवार के साथ बेकरी में घुसा और तीनों भारतीयों पर बेरहमी से वार कर दिया। इस हमले के पीछे की मंशा की जांच की जा रही है।  परिजनों की अपील प्रेमसागर के चाचा ए. पोशेट्टी ने बताया कि वह पिछले 5-6 साल से दुबई में काम कर रहे थे और परिवार की एकमात्र आर्थिक मदद थे। उनकी पत्नी और दो छोटे बच्चे हैं, जिनका अब भविष्य अधर में लटक गया है। परिजन सरकार से पार्थिव शरीर भारत लाने और आर्थिक सहायता देने की अपील कर रहे हैं। केंद्र सरकार का रुख इस दर्दनाक घटना की पुष्टि खुद केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने की है। उन्होंने बताया कि इस हमले से उन्हें गहरा आघात पहुंचा है और उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बात की है। जयशंकर ने पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद और पार्थिव शरीर भारत लाने का भरोसा दिया है। गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने भी बयान जारी करते हुए कहा कि गृह मंत्रालय विदेश मंत्रालय के संपर्क में है और दुबई पुलिस से त्वरित जांच की मांग की गई है। दुबई स्थित भारतीय दूतावास ने स्थानीय अधिकारियों से संपर्क किया है और जल्द से जल्द जांच पूरी कर हमलावर को सजा दिलाने की मांग की है। मंत्रालय पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है।  

जम्मू के शहीदी चौक में ही रोक, प्रदर्शनकारियों और पुलिस में हुई झड़प, जम्मू में माहौल तनावपूर्ण

जम्मू सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ई.डी.) द्वारा हाल ही में दायर आरोपपत्र के प्रकाश में मोदी सरकार की प्रतिशोध और धमकी की राजनीति के खिलाफ आज जम्मू कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पी.सी.सी.) ने जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के जम्मू में जोरदार प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा के साथ-साथ कांग्रेस के दिग्गज नेता और कार्यकर्ता शामिल थे। तारिक हमीद कर्रा का कहना है कि उन्होंने यह प्रोटेस्ट कांग्रेस ऑफिस से लेकर ई.डी. के दफ्तर गांधीनगर तक जाना था लेकिन उन्हें पुलिस ने जम्मू के शहीदी चौक में ही रोक दिया। इस प्रदर्शन में पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की झड़प भी हुई।

नॉर्थ कोरिया में महिलाओं के कपड़ों से लेकर उनके हेयरस्टाइल तक पर सरकार का नियंत्रण, सेनेटरी पैड्स तक बैन!

नई दिल्ली दुनिया में कई देश हैं जहां कानून सख्त होते हैं, लेकिन कुछ मुल्क ऐसे भी हैं जहां के नियम-कायदे सुनकर आप दंग रह जाएंगे। ऐसा ही एक देश है नॉर्थ कोरिया, जहां तानाशाह किम जोंग उन का एकछत्र राज चलता है। यहां के अजीबो-गरीब नियमों ने पूरी दुनिया को चौंका रखा है। लेकिन सबसे हैरानी की बात ये है कि इस देश में महिलाओं को पीरियड्स के दौरान इस्तेमाल होने वाले सेनेटरी पैड्स तक से वंचित रखा गया है। नॉर्थ कोरिया में इन सामान्य स्वास्थ्य उत्पादों का इस्तेमाल करना गैरकानूनी है। महिलाएं क्या करती हैं पीरियड्स के दौरान? जहां दुनिया के दूसरे देशों में महिलाएं सेनेटरी नैपकिन, टैंपून, मेंस्ट्रुअल कप और पीरियड पैंटी जैसी सुविधाओं से लैस हैं, वहीं नॉर्थ कोरिया की महिलाएं अब भी पुराने ज़माने की परंपराओं का पालन करने को मजबूर हैं। यहां महिलाएं पीरियड्स के वक्त धुले हुए कपड़े या री-यूजेबल पैड्स का इस्तेमाल करती हैं, क्योंकि वहां सैनिटरी नैपकिन की न तो बिक्री होती है और न ही इसे मंगाने की इजाज़त है। किम जोंग उन के अजीब कानून नॉर्थ कोरिया में सिर्फ यही नहीं, बल्कि महिलाओं के कपड़ों से लेकर उनके हेयरस्टाइल तक पर सरकार का नियंत्रण है। महिलाएं स्कर्ट या ट्राउज़र्स पहन सकती हैं, लेकिन उसकी लंबाई घुटनों से ऊपर नहीं होनी चाहिए। नीली जींस पहनना अपराध है। वहां के नागरिक सिर्फ तीन सरकारी टीवी चैनल ही देख सकते हैं। बाइबल रखना या किसी धर्म का सार्वजनिक रूप से पालन करना सख्त मना है- और अगर कोई ऐसा करता पाया गया, तो उसे मौत तक की सजा दी जा सकती है। कंडोम की बिक्री और इस्तेमाल पर भी पूरी तरह प्रतिबंध है।  

वक्फ बोर्ड में हिंदुओं की एंट्री कर दी गई है, यह संविधान के आर्टिकल 26 का उल्लंघन है, जज ने कहा-आपकी दिक्कत क्या

नई दिल्ली वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ दायर 70 से अधिक याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। मुस्लिम पक्ष की ओर से दलीलें देते हुए कपिल सिब्बल ने ऐक्ट पर सवाल उठाए हैं और कहा कि वक्फ बोर्ड में हिंदुओं की एंट्री कर दी गई है, यह संविधान के आर्टिकल 26 का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि आर्टिकल 26 धार्मिक संस्थानों के संचालन की स्वायत्तता देता है। अब नया वक्फ ऐक्ट उस स्वायत्तता को छीनने वाला है। कपिल सिब्बल ने कहा कि अब तक वक्फ काउंसिल और बोर्ड के मेंबर मुसलमान ही होते थे, लेकिन अब हिंदुओं की भी इनमें एंट्री होगी। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि आपकी दिक्कत क्या है। कपिल सिब्बल ने कहा कि यह तो संसद में बनाए कानून के जरिए मूलभूत अधिकार छीनने जैसा है। चीफ जस्टिस ने यह भी कहा कि कुल 2 पदेन सदस्य ही गैर-मुसलमान हो सकते हैं। इस पर कपिल सिब्बल ने कहा, ‘नहीं-नहीं, ऐसा नहीं है। यह कहा गया है कि न्यूनतम गैर-मुस्लिम पदेन सदस्यों की संख्या 2 रहेगी। आर्टिकल 26 के अनुसार सभी सदस्य मुसलमान ही होने चाहिए, लेकिन अब नए ऐक्ट के अनुसार 22 में से 10 ही मुसलमान होंगे।’ यही नहीं कपिल सिब्बल ने कहा कि यह तो एक तरह से सदस्यों को मनोनीत करके वक्फ बोर्ड पर ही कब्जा जमाने जैसा होगा। उन्होंने 1995 के वक्फ ऐक्ट का हवाला दिया और कहा कि तब तय हुआ था कि बोर्ड के सारे सदस्य मुस्लिम ही होंगे। यही नहीं कपिल सिब्बल ने वक्फ बोर्ड को लेकर कलेक्टर की पावर पर भी सवाल उठाए। कलेक्टर की पावर पर बिफरे कपिल सिब्बल, बोले- इससे मनमानी होगी कपिल सिब्बल ने कहा, ‘कलेक्टर को यह ताकत दी गई है कि वह तय करें कि कोई संपत्ति वक्फ की है या नहीं। यदि कोई विवाद हुआ तो यह शख्स सरकार का प्रतिनिधि होगा। इसके अलावा मामले में यही व्यक्ति जज की भूमिका भी अदा करेगा। यह तो असंवैधानिक हुआ। यह कानून यह भी कहता है कि जब तक कलेक्टर की ओर से तय नहीं किया जाता, तब तक किसी भी संपत्ति को वक्फ की प्रॉपर्टी नहीं माना जाएगा।’ इस बीच बेंच में शामिल जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि आप हिंदुओं की एंट्री पर आर्टिकल 26 के नाम पर आपत्ति जता रहे हैं। लेकिन यहां कन्फ्यूज होने की जरूरत नहीं है। आर्टिकल 26 में प्रशासन की बात है। उसमें जरूरी धार्मिक मान्यताओं के बारे में कुछ नहीं कहा गया है। इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि ऐसी व्यवस्था की गई है कि सदस्यों के नॉमिनेशन के जरिए बोर्ड पर ही कब्जा जमा लिया जाए। सीनियर वकील ने यह भी कहा कि नया ऐक्ट कहते हैं कि किसी संपत्ति को वक्फ तभी माना जाएगा, जब उसकी वक्फ डीड हो। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि परेशानी क्या है? सिब्बल ने कहा कि वक्फ बाई यूजर की अवधारणा है। मान लीजिए कि मेरे पास संपत्ति है और मेरे कोई संतान नहीं है। फिर मुझे रजिस्ट्रेशन कराने की क्या जरूरत है। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि रजिस्ट्रेशन से तो हेल्प ही मिलेगी। इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि वक्फ बाई यूजर तो अब खत्म कर दिया गया है। अयोध्या के फैसले से यह पता चलता है। इस पर जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि फर्जी दावों को रोकने के लिए वक्फ डीड की बात कही गई है। इस पर सिब्बल ने कहा कि यह इतना आसान नहीं है। वक्फ की संपत्तियां सैकड़ों साल पुरानी हैं। वे तो 300 साल पुरानी संपत्ति की भी वक्फ डीड मांग लेंगे। असल में यही समस्या है।

ट्रंप ने चीन के पड़ोसी देश उत्तर कोरिया को दी चेतावनी, भेजे B-1B दो सुपरसोनिक बमवर्षक विमान, किया प्रदर्शन

वाशिंगटन अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध और गहरा गया है क्योंकि अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के 125% जवाबी शुल्क पर नाराजगी जाहिर करते हुए उस पर 100 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया है। यानी चीन पर अब कुल 245 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान वाइट हाउस ने किया है। इस बीच, ट्रंप ने चीन के पड़ोसी देश उत्तर कोरिया को भी चेतावनी दी है। हालांकि, यह चेतावनी टैरिफ से जुड़ी नहीं है। नई चेतावनी जारी करते हुए अमेरिका ने दक्षिण कोरिया में दो सुपरसोनिक बमवर्षक विमान भी भेजे हैं, जिसने उत्तर कोरिया से सटे और उसके दुश्मन देश दक्षिण कोरिया के आसमान में अपना प्रदर्शन किया है। मंगलवार को इस क्षेत्र में अमेरिका के इस कदम को एक शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, वैश्विक शांति दूत का सपना देख रहे ट्रंप उत्तर कोरिया को पूर्ण रूप से परमाणु मुक्त देश बनाना चाहते हैं और परमाणु निरस्त्रीकरण के अपने पुराने लक्ष्य को आगे बढ़ाना चाहते हैं लेकिन उत्तर कोरिया का तानाशाह किम जोंग उन लगातार परमाणु हथियारों का विस्तार कर रहा है। मंगलवार को अमेरिका ने दो सुपरसोनिक बमवर्षक विमान भेजकर दक्षिण कोरिया के साथ न केवल संयुक्त युद्धाभ्यास किया बल्कि उत्तर कोरिया को ये चेतावनी भी जारी की कि अगर उसने अपने मंसूबों पर लगाम नहीं लगाया तो अमेरिका उस पर ताबड़तोड़ हमले कर सकता है। क्या है सुपरसोनिक बमवर्षक विमान B-1B दक्षिण कोरिया में तैनात अमेरिकी वायु सेना मुख्यालय के अनुसार, सुपरसोनिक B-1B बमवर्षकों की एक जोड़ी ने पश्चिमी दक्षिण कोरिया के हवाई क्षेत्र में दो अमेरिकी F-16 लड़ाकू विमानों और दो दक्षिण कोरियाई F-35A स्टील्थ लड़ाकू विमानों के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास किया है। इस सुपरसोनिक बमवर्षक विमान को लांसर के नाम से भी जाना जाता है। यह अमेरिकी वायु सेना के भंडार में पारंपरिक हथियारों से लैस सबसे बड़ा बमवर्षक विमान है, जो 75,000 पाउंड तक के बम और मिसाइल ले जा सकता है। यह अंतरमहाद्वीपीय उड़ान भरने और हमले को अंजाम देने में सक्षम है। यह ध्वनि की गति से भी तेज मैक 1.2 की गति से यात्रा कर सकता है, इसीलिए इसे सुपरसोनिक बॉम्बर कहा जाता है। हालांकि, लांसर को 2007 से परमाणु हमले मिशन के लिए सुसज्जित नहीं किया गया है,लेकिन यह दुनिया में कहीं भी, किसी भी समय, किसी भी विरोधी के खिलाफ बड़ी मात्रा में सटीक और गैर-सटीक हथियार तेजी से पहुंचाने में सक्षम है। नॉर्थ कोरिया के पास कितने परमाणु हथियार? बता दें कि परमाणु हथियार संपन्न 9 देशों में उत्तर कोरिया भी एक देश है। उत्तर कोरिया ने 2006 में पहला परमाणु परीक्षण किया था। माना जा रहा है कि उसके पास 50 परमाणु हथियार हैं। किम जोंग उन लगातार परमाणु हथियार बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। हाल ही में उत्तर कोरिया ने बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया था, जो अमेरिका की मुख्य भूमि तक पहुंचने में सक्षम है। अमेरिका का संकल्प सिर्फ एक सपना: किम यो जोंग पिछले हफ्ते ही किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने अपने देश को परमाणु हथियार मुक्त बनाने संबंधी संकल्प को लेकर अमेरिका और उसके एशियाई सहयोगियों पर निशाना साधा था और उन देशों के इस संकल्प को एक सपना करार दिया था। पिछले सप्ताह अमेरिका ने दक्षिण कोरिया और जापान के शीर्ष राजनयिकों की बैठक में उत्तर कोरिया को परमाणु हथियार मुक्त बनाने की प्रतिबद्धता पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया गया था। इसी पर उत्तर कोरिया की शीर्ष विदेश नीति अधिकारी किम यो जोंग ने यह प्रतिक्रिया दी है। किम यो जोंग ने कहा था कि परमाणु हथियारों का विस्तार व संरक्षण उत्तर कोरिया के संविधान में शामिल है। उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया को परमाणु हथियार मुक्त बनाने संबंधी कोई भी बाहरी चर्चा एक बहुत शत्रुतापूर्ण कृत्य और देश की संप्रभुता को नकारने के समान है। सरकारी मीडिया में प्रकाशित व प्रसारित बयान में उन्होंने कहा, “यदि अमेरिका और उसकी अधीनस्थ ताकतें ‘परमाणु निरस्त्रीकरण’ पर जोर देती रहेंगी… तो इससे उत्तर कोरिया को ही फायदा होगा, जो आत्मरक्षा के लिए सबसे मजबूत परमाणु हथियार के निर्माण की आकांक्षा रखता है।” उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया की परमाणु हथियार स्थिति को “किसी भी भौतिक शक्ति या चालाकी से कभी भी पलटा नहीं जा सकता।”

टू-व्हीलर गाड़ी के साथ कंपनी की ओर से दो हेलमेट का प्रावधान, जानिए गडकरी ने क्या बताया

मुंबई केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सड़क पर लोगों की सेफ्टी और एक्सीडेंट को रोकने के लिए नया मास्टर प्लान बनाया है। उन्होंने एक टीवी प्रोग्राम के दौरान एक्सीडेंट को रोकने के लिए अपने मास्टर प्लान के बारे में खुलकर बताया। उनके इस प्लान में नए टू-व्हीलर के साथ 2 हेलमेट देना अनिवार्य होगा। वहीं, अब रोड पर सब मेंडेटरी प्रीकास्ट होगा। उन्होंने ये भी कहा कि रोड अब फैक्टरी में बनेगा। गडकरी ने बताया कि सिर्फ स्कूल के सामने हर साल 10 हजार बच्चे रोड एक्सीडेंट में मर जाते हैं। ये बड़ी चिंता का विषय है। इसे रोकने के लिए ही उन्होंने बड़ी तैयार की है। चलिए उनके मास्टर प्लान के बारे में विस्तार से जानते हैं। टू-व्हीलर के साथ 2 हेलमेट मिलेंगे गडकरी ने कहा कि जो भी टू-व्हीलर खरीदता है कंपनी उसे किसी अच्छी कंपनी के दो ISI स्टैंडर्ड वाले हेलमेट भी देगी, ताकी गाड़ी पर चलने वाले दोनों लोग हेलमेट पहनें। उन्होंने कहा कि रोड सेफ्टी में हम लंबे समय से काफी काम कर चुके हैं उसके बाद भी अभी सफलता नहीं मिली है। सिर्फ स्कूल के सामने ही हर साल 10 हजार बच्चों की मौत हो जाती है। जबकि, हर साल 1 लाख 80 हजार मौत रोड एक्सीडेंट में होती हैं। ऐसे में हम रोड सेफ्टी ऑडिट कर रहे हैं। ब्लैक स्पॉट का पता लगा रहे हैं। राहवीर योजना जल्द होगी लागू उन्होंने आगे बताया कि हमने एक राहवीर योजना भी तैयार की है। इस योजना में जिसका एक्सीडेंट होता है और उसे लेकर कोई अस्पताल आता है और उसकी जान बचाता है। तब हम उसे 25 हजार रुपए का अवॉर्ड देंगे। साथ ही, जो अस्पताल में एडमिट होगा उसको मैक्सिमम 7 दिन का खर्च या 1.50 लाख रुपए की सहायता देंगे और उसकी जान बचाने की कोशिश करेंगे। यदि लोग एक्सीडेंट होने वाले व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने का काम करते हैं तब हम हर साल 50 हजार लोगों की जान बचा सकते हैं। रोड पर सब मेंडेटरी प्रीकास्ट होगा गडकरी ने बताया कि अब रोड पर सब मेंडेटरी प्रीकास्ट होगा। यानी रोड अब फैक्टरी में बनेगा। अभी रोड के बीच में जो वैरियर होते हैं लोग उन्हें कूदकर आगे जाते हैं, जिससे एक्सीडेंट होते हैं। ऐसे में अब इन वैरिएट की ऊंचाई को 3 फीट तक बढ़ाया जाएगा। इसके दोनों तरफ एक मीटर की दूसरी रखी जाएगी जिसमें काली मिट्टी डालकर प्लांट लगाए जाएंगे। ऐसे में कोई इसे कूदकर पार नहीं कर पाएगा। उन्होंने कहा कि हम मलेशिया से नई टेक्नोलॉजी लाए हैं जिससे हजारों-करोड़ रुपए बच रहे हैं। जैसे तमिलनाडु के चेन्नई में मेट्रो बन रही हैं। उनका 70-75 हजार करोड़ रुपए कैबिनेट नोट आया था। ऐसे में हमने मलेशिया में इस्तेमाल होने वाली टेक्नोलॉजी से दो पिलर की दूरी को 120 मीटर कर दिया। जबकि पहले ये 30 मीट की होती थी। यानी 3 पिलर को कॉस्ट को बचाया गया। वहीं, ऊपर का बीम स्टील की जगह स्टील फाइबर में कास्ट होगा। साथ ही, प्रीकास्ट से पॉल्यूशन को कम करने में भी मदद मिलेगी। रोड एक्‍सीडेंट में 1.80 लाख मौतें इस दौरान उन्‍होंने कहा कि हम रोड सेफ्टी को लेकर काम कर रहे हैं, लेकिन जितनी सफलता मिलनी चाहिए थी, उतनी नहीं मिली है. उन्‍होंने बताया कि हर साल 10 हजार बच्‍चों की स्‍कूलों के सामने होने वाले एक्‍सीडेंट में मौत हो जाती है. उन्‍होंने बताया कि इसे लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ बुधवार को एक बैठक है. गडकरी ने बताया कि देश में हर साल एक लाख 80 हजार मौतें रोड एक्‍सीडेंट में होती हैं.  उन्‍होंने बताया कि हम रोड सेफ्टी ऑडिट कर रहे हैं और ब्‍लैक स्‍पॉट को बेहतर कर रहे हैं. राहवीर योजना को लेकर दी जानकारी इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार राहवीर योजना भी लेकर आ रही है, जिसमें एक्‍सीडेंट होने के बादा यदि कोई उस व्‍यक्ति को अस्‍पताल लेकर जाता है तो हम उसे 25 हजार रुपये का अवार्ड देंगे. साथ ही एडिमट होने वाले शख्‍स को सात दिन का खर्चा या डेढ लाख रुपये हम देंगे और उस शख्‍स की जान बचाने की कोशिश करेंगे. उन्‍होंने कहा कि यदि एक्‍सीडेंट के बाद घायल को तुरंत अस्‍पताल में भर्ती कराया जाए तो 50 हजार लोगों की जान बच सकती है.

औद्योगिक क्षेत्र बसाने के लिए पेड़ों की कटाई शुरू की गई थी, जिसके विरोध में लोग उतरे, भड़का सुप्रीम कोर्ट, दिए सख्त आदेश

नई दिल्ली हैदराबाद यूनिवर्सिटी परिसर के पास स्थित 400 एकड़ भूमि से पेड़ों को काटने पर सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने बुधवार को सुनवाई करते हुए कहा कि यहां पर पूर्व की स्थिति को बहाल करना होगा। यह इलाका जंगल जैसा है और इसे हैदराबाद का फेफड़ा कहा जाता है। पिछले दिनों यहां औद्योगिक क्षेत्र बसाने के लिए पेड़ों की कटाई शुरू की गई थी, जिसके विरोध में लोग उतर आए थे। इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर हुआ था, जिसमें जंगल के कटने से पशु और पक्षी भाग रहे थे। यह मार्मिक वीडियो देखकर हर कोई परेशान था और मांग की जा रही थी कि पर्यावरण का संरक्षण करना चाहिए। ऐसे पेड़ों को खत्म नहीं करना चाहिए। इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी अर्जी दाखिल हुई तो अदालत ने पुरानी स्थिति ही बहाल करने का आदेश दिया। उच्चतम न्यायालय ने तेलंगाना सरकार से कहा कि आपको 100 एकड़ जमीन पर पूर्व की स्थिति बहाल करने के लिए योजना बनानी होगी। बेंच ने पेड़ों की कटाई में तेलंगाना सरकार की ‘जल्दबाजी’ पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि पर्यावरण को जो नुकसान पहुंचाया गया है हम उससे चिंतित हैं। बेंच ने कहा कि वीडियो में पशुओं को आश्रय की तलाश में भागते हुए देखकर स्तब्ध हैं। न्यायालय ने तेलंगाना से कहा, आप देखिए कि जंगली जानवरों की सुरक्षा कैसे की जाएगी। कोर्ट ने तेलंगाना के वन्यजीव वार्डन को वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया। बेंच ने कहा कि यह चिंताजनक है कि इस तरह पेड़ों को काटा जा रहा है और पशु-पक्षी अपने आश्रय़ के लिए भाग रहे हैं। बता दें कि हैदराबाद में यूनिवर्सिटी के पास स्थित कांचा गाचीबोवली इलाके में जंगल सरीखी 400 एकड़ भूमि है। इस इलाके में करीब 700 से अधिक प्रजातियों के पेड़ और पौधे हैं। इसके अलावा 200 से ज्यादा प्रजातियों के पक्षियों का भी यह वन क्षेत्र आश्रय है। पिछले दिनों जब इस जंगल पर कुल्हाड़ी चली तो वन्य जीव प्रेमियों समेत आम नागरिकों ने भी आपत्ति जताई। यही नहीं सोशल मीडिया पर भी इस पेड़ कटाई के वीडियो तेजी से वायरल हुए और हैदाराबाद समेत देश भर में गुस्सा देखा गया। दरअसल यहां तेलंगाना स्टेट इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन को जमीन आवंटित की गई थी। इसके खिलाफ छात्र और पर्यावरणविद मिलकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। कॉरपोरेशन इस भूमि की नीलामी करके एक आईटी पार्क विकसित करना चाहता था।

मुगल ‘वंशज’ ने संयुक्त राष्ट्र प्रमुख को लिखा पत्र, औरंगजेब के मकबरे की सुरक्षा सुनिश्चित कीजिए

मुंबई मुगल साम्राज्य के अंतिम सम्राट बहादुर शाह जफर के वंशज होने का दावा करने वाले याकूब हबीबुद्दीन तुसी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (पूर्व में औरंगाबाद) में स्थित औरंगजेब की कब्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। यह मांग उस हिंसा के लगभग एक महीने बाद सामने आई है, जो नागपुर में औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग वाली एक रैली के दौरान भड़क उठी थी। याकूब तुसी खुद को औरंगजेब की कब्र वाली वक्फ संपत्ति का मुतवल्ली भी बताते हैं। उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि यह कब्र एक राष्ट्रीय महत्व का स्मारक है और इसे प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत संरक्षित किया गया है। उन्होंने पत्र में लिखा, “उक्त अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, संरक्षित स्मारक के पास या आसपास कोई अनधिकृत निर्माण, परिवर्तन, विनाश या उत्खनन नहीं किया जा सकता, और ऐसा कोई भी कार्य अवैध माना जाएगा और कानून के तहत दंडनीय होगा।” नागपुर में हिंसा और विवाद की पृष्ठभूमि यह मामला तब और सुर्खियों में आया जब 17 मार्च को नागपुर में औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग को लेकर एक रैली के दौरान हिंसा भड़क गई। इस दौरान कुछ समूहों ने कब्र को हटाने की मांग की, और अफवाहें फैलीं कि एक समुदाय की पवित्र पुस्तक को जलाया गया, जिसके बाद पुलिस पर पथराव हुआ। इस घटना के बाद अब तक 92 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस विवाद को और हवा तब मिली जब समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने औरंगजेब को “क्रूर शासक” नहीं मानने और उसके शासनकाल में कई मंदिरों के निर्माण का दावा किया। हालांकि, बाद में उन्होंने अपने बयानों को गलत समझे जाने का हवाला देते हुए वापस ले लिया। इसके बावजूद, भाजपा सांसद उदयनराजे भोसले ने कब्र को ध्वस्त करने की मांग उठाई और औरंगजेब को “चोर और लुटेरा” करार दिया। संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग याकूब तुसी ने अपने पत्र में संयुक्त राष्ट्र महासचिव से इस मामले पर संज्ञान लेने और भारत सरकार तथा पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) को निर्देश देने की अपील की है कि औरंगजेब की कब्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार पूर्ण कानूनी संरक्षण, सुरक्षा और संरक्षण प्रदान किया जाए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत ने यूनेस्को की विश्व सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर संरक्षण संधि, 1972 पर हस्ताक्षर किए हैं, और ऐसे स्मारकों का विनाश या उपेक्षा अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का उल्लंघन होगा। तुसी ने अपने पत्र में कहा, “फिल्मों, मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से ऐतिहासिक तथ्यों का गलत चित्रण करके जनता की भावनाओं को भड़काया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप अनुचित विरोध, नफरत अभियान और प्रतीकात्मक आक्रामकता जैसे कि पुतले जलाने की घटनाएं हो रही हैं।” उन्होंने कब्र की स्थिति पर चिंता जताते हुए वहां सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की मांग भी की। औरंगजेब की कब्र और उसका ऐतिहासिक महत्व औरंगजेब 1658 से 1707 तक मुगल साम्राज्य का छठा सम्राट था। उसकी खुलदाबाद में एक साधारण कब्र है, जो अन्य मुगल सम्राटों की भव्य मकबरों जैसे ताजमहल या हुमायूं के मकबरे से बिल्कुल अलग है। औरंगजेब ने अपनी इच्छा के अनुसार, अपने आध्यात्मिक गुरु शेख जैनुद्दीन शिराजी के दरगाह के पास एक साधारण कब्र में दफन होने का निर्देश दिया था। उसकी कब्र को लॉर्ड कर्जन ने बाद में संगमरमर से ढकवाया और इसके चारों ओर एक जालीदार स्क्रीन बनवाई।

नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर चार्जशीट हुई दायर, आरोपियों को नंबर 1 और 2 दिया

नई दिल्ली नेशनल हेराल्ड केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत कई नेताओं के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दिया है. इस केस में ED ने आरोपियों पर 988 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया है. वहीं कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के पति और बिजनेसमैन रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ गुरुग्राम लैंड डील केस में बुधवार को दूसरी बार पूछताछ हो रही है. पिछले दो दिनों में ये कांग्रेस के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों की दूसरी बड़ी कार्रवाई है. नेशनल हेराल्ड केस की चार्जशीट में सोनिया गांधी को आरोपी नंबर 1 और राहुल गांधी को आरोपी नंबर 2 बनाया गया है. इनके अलावा सुमन दुबे, सैम पित्रोदा, यंग इंडियन (कंपनी), डॉटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड और सुनील भंडारी को भी आरोपी बनाया गया है. इस मामले में अगली सुनवाई 25 अप्रैल 2025 को होगी, जिसमें कोर्ट चार्जशीट पर संज्ञान ले सकता है. कोर्ट ने इस मामले पर 26 जून 2014 को संज्ञान लिया था. बता दें कि 26 मई 2014 को केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बन चुकी थी. लेकिन इससे पहले बीजेपी नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने 2012 में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में शिकायत दर्ज की, जिसमें आरोप लगाया गया कि सोनिया और राहुल गांधी ने YIL (यंग इंडिया लिमिटेड) के माध्यम से AJL (Associated Journals Limited) की 2000 करोड़ रुपये की संपत्तियों (दिल्ली, मुंबई, लखनऊ में प्राइम प्रॉपर्टी, जैसे हेराल्ड हाउस) को धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए हड़प लिया. ED का दावा है कि यह एक आपराधिक साजिश थी, जिसमें 988 करोड़ रुपये की अवैध कमाई शामिल थी. जांच में फर्जी किराया, बनावटी विज्ञापन, और फर्जी डोनेशन के जरिए 85 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की हेराफेरी का खुलासा हुआ. यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत जांच के दायरे में है. ED की चार्जशीट में आरोप लगाए गए हैं कि वर्ष 2010 में एक आपराधिक साज़िश के तहत AJL की लगभग 2000 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अवैध रूप से हड़पने की योजना बनाई गई. बताया गया है कि AJL के 99% शेयर महज 50 लाख रुपये में ‘यंग इंडियन’ नाम की निजी कंपनी को ट्रांसफर कर दिए गए. इस मामले में राहुल गांधी और सोनिया गांधी की भूमिका अहम थी. ‘यंग इंडियन’ में सोनिया गांधी और राहुल गांधी की कुल 76% हिस्सेदारी थी. बाकी 24% शेयर मोतीलाल वोहरा और ऑस्कर फर्नांडीस के पास थे, जो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे. AICC (अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी) ने AJL को पहले 90.21 करोड़ रुपये का लोन दिया था, जिसे बाद में 9.02 करोड़ रुपये के शेयरों में बदलकर यंग इंडियन को मात्र 50 लाख रुपये में दे दिया गया. चार्जशीट में लिखा गया है कि ‘यंग इंडियन’ नाम की कंपनी को एक गैर-लाभकारी संस्था के तौर पर ‘Section 25 कंपनी’ के रूप में रजिस्टर्ड किया गया था. जांच में पाया गया कि यंग इंडियन कोई सामाजिक या चैरिटेबल काम नहीं करती है. ईडी ने 20 नवंबर 2023 को AJL की लगभग 752 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अटैच किया. आरोप है कि ये संपत्तियां मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए हड़पी गई थीं. बता दें कि यह पहला मामला है जिसमें सोनिया और राहुल गांधी को किसी चार्जशीट में औपचारिक रूप से आरोपी बनाया गया है. केस- गुरुग्राम लैंड डील, आरोपी-रॉबर्ट वाड्रा ये केस 2008 का है. तब हरियाणा में कांग्रेस की सरकार थी और भूपेंद्र सिंह हुड्डा राज्य के मुख्यमंत्री थे. फरवरी 2008 में ही रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव (सेक्टर 83) में 3.5 एकड़ जमीन ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से खरीदी. ये डील 7.5 करोड़ रुपये में हुई थी. आरोप है कि इस जमीन का म्यूटेशन घंटों में ही पूरा करवा लिया गया था. इसके बाद, मार्च 2008 में, हरियाणा सरकार ने स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी को इस जमीन पर व्यावसायिक कॉलोनी विकसित करने का लाइसेंस (लेटर ऑफ इंटेंट) जारी किया.  बाद में स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी ने हुड्डा के प्रभाव से कॉलोनी के विकास के लिए कमर्शियल लाइसेंस हासिल करने के बाद इस जमीन को जून 2008 में 58 करोड़ रुपये की कीमत पर डीएलएफ यूनिवर्सल लिमिटेड को बेच दिया. इस मामले में सितंबर 2018 में, गुरुग्राम के खेड़की दौला पुलिस स्टेशन में वाड्रा, तत्कालीन सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा, डीएलएफ और ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज के खिलाफ एक FIR दर्ज की गई थी. नूह के रहने वाले शिकायतकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र शर्मा ने आरोप लगाया कि इस सौदे में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और 50 करोड़ का भ्रष्टाचार हुआ. केस- बीकानेर लैंड डील, आरोपी- रॉबर्ट वाड्रा यह पूरा मामला बीकानेर के कोलायत क्षेत्र में 275 बीघा जमीन खरीद-फरोख्त से जुड़ा हुआ है. इस मामले की जांच ईडी में चल रही है. इस जमीन को बीकानेर के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज के विस्थापित लोगों को अलॉट की किया जाना था. लेकिन इसे गलत तरीके से खरीदा गया. बीकानेर लैंड डील मामले में जोधपुर कोर्ट में सुनवाई चल रही है. यह मामला रॉबर्ट और उनकी मां मॉरिन वाड्रा से जुड़ा है, जिसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है. मामला वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड और बिचौलिए महेश नागर की याचिका से संबंधित है.  

चीन ने भी जवाबी ऐक्शन लेते हुए चीनी आयात पर टैरिफ 125 फीसदी तक कर दिया तो अमेरिका ने भी इसमें इजाफा किया

वॉशिंगटन अमेरिका ने चीनी सामान के आयात पर 245 पर्सेंट के टैरिफ का ऐलान किया है। अब तक यह 145 फीसदी लग रहा था, लेकिन जब चीन ने भी जवाबी ऐक्शन लेते हुए चीनी आयात पर टैरिफ 125 फीसदी तक कर दिया तो अमेरिका ने भी इसमें इजाफा किया है। वाइट हाउस की ओर से मंगलवार देर रात यह जानकारी दी गई है कि चीनी सामान के आयात पर अब 245 फीसदी का टैरिफ लगेगा। अब तक चीन पर 145 पर्सेंट का टैरिफ लगाया जा रहा था, लेकिन मंगलवार को इसमें एक साथ 100 पर्सेंट का इजाफा कर दिया गया। अमेरिका की ओऱ से यह फैसला बेहद सख्त है, जबकि उसने भारत समेत तमाम देशों पर लगाए टैरिफ को 90 दिनों के लिए रोक लिया है। माना जा रहा है कि इस अवधि में अमेरिका के साथ अन्य देश ट्रेड डील कर सकते हैं। भारत और अमेरिका के बीच तो बैकचैनल से ट्रेड डील पर मंथन भी शुरू हो गया है। चर्चा है कि इसके लिए मई से मीटिंग्स का दौर भी शुरू हो सकता है। चीन को लेकर अमेरिका का रुख है कि वह टैरिफ का जवाब टैरिफ से दे रहा है, जबकि उसे अपनी गलती माननी चाहिए। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अमेरिका दूसरे देशों के सामान पर कम टैक्स लगता है, जबकि उसके एक्सपोर्ट पर चीन, भारत समेत कई देश मोटा टैक्स वसूलते हैं। ट्रंप प्रशासन बोला- 75 देशों ने हमसे डील के लिए संपर्क किया इसी के जवाब में उन्होंने टैरिफ वॉर शुरू किया है। बता दें कि वाइट हाउस का कहना है कि चीन का रुख अड़ियल है, जबकि दुनिया के करीब 75 देशों ने ट्रेड डील के लिए उससे संपर्क किया है। इसी कारण से उसने कई देशों पर टैरिफ को 90 दिनों के लिए टाल दिया है और तब तक किसी सहमति तक पहुंचने की कोशिश हो रही है। इस अवधि में 10 पर्सेंट का बेसिक टैरिफ ही लगेगा। बता दें कि भारत पर भी अमेरिका 26 फीसदी टैरिफ लगाया था, जिसे फिलहाल होल्ड पर रखा दिया है। इसी का असर है कि भारतीय शेयर मार्केट में अब उत्साह है और कई दिनों की गिरावट के बाद तेजी का दौर देखा जा रहा है।

देश को मिलेगा नया मुख्य न्यायाधीश, 14 मई को CJI के रूप में लेंगे शपथ

नई दिल्ली  जस्टिस बीआर गवई देश के अगले मुख्य न्यायाधीश होंगे। वर्तमान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) संजीव खन्ना ने बुधवार (16 अप्रैल) को आधिकारिक तौर पर जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई को अपना उत्तराधिकारी बनाने की सिफारिश कर दी। CJI ने उनके नाम को मंजूरी के लिए केंद्रीय कानून मंत्रालय को भेज दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस बीआर गवई 14 मई को मुख्य न्यायाधीश के पद की शपथ लेंगे। मौजूदा चीफ जस्टिस संजीव खन्ना 13 मई को रिटायर होंगे। जस्टिस गवई भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ लेंगे। 64 वर्षीय जस्टिस खन्ना ने भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में छह महीने का कार्यकाल पूरा किया है। जस्टिस गवई के 14 मई को शपथ लेने की उम्मीद है। जस्टिस गवई का शीर्ष अदालत के जज के रूप में छह महीने का कार्यकाल होगा। परंपरा के अनुसार, वर्मतान मुख्य न्यायाधीश अपना उत्तराधिकारी नामित करते हुए केंद्रीय कानून मंत्रालय को एक प्रस्ताव भेजता है। मंत्रालय ने पहले मुख्य न्यायाधीश से उनके उत्तराधिकारी के नाम का प्रस्ताव मांगा था। जस्टिस गवई लगभग छह महीने तक भारत के मुख्य न्यायाधीश रहेंगे क्योंकि वे नवंबर में रिटायर होने वाले हैं। जस्टिस केजी बालकृष्णन के बाद वे मुख्य न्यायाधीश का पद संभालने वाले दूसरे दलित होंगे। उन्हें 2007 में देश के शीर्ष न्यायिक पद पर प्रमोट किया गया था। जस्टिस गवई का 6 महीने का कार्यकाल होगा और वह 23 नवंबर, 2025 को सेवानिवृत्त होंगे। वह मई 2019 में ही सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे और संयोग है कि इसी महीने में शीर्ष अदालत के चीफ जस्टिस हो जाएंगे। बीते साल 11 नवंबर को सीजेआई खन्ना ने पदभार संभाला था। उन्होंने केंद्रीय कानून मंत्रालय के समक्ष जस्टिस बीआर गवई के नाम की सिफारिश भेजी है। सुप्रीम कोर्ट के जज के लिए रिटायरमेंट की उम्र 70 साल है। महाराष्ट्र के अमरावती जिले में जस्टिस बीआर गवई का जन्म 24 नवंबर, 1960 को हुआ था। वह बॉम्बे हाई कोर्ट का हिस्सा 14 नवंबर 2003 को बने थे, जब उन्हें अतिरिक्त जज की जिम्मेदारी मिली थी। इसके बाद नवंबर 2005 में ही वह हाई कोर्ट के स्थायी जज बन गए थे। जस्टिस गवई सुप्रीम कोर्ट के कई अहम फैसलों का हिस्सा रहे हैं। इसके अलावा कई संवैधानिक बेचों में उन्हें शामिल किया गया है। आर्टिकल 370 हटाए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं की जिस 5 मेंबर वाली संवैधानिक बेंच ने सुनवाई की थी, उसका एक हिस्सा जस्टिस गवई भी थे। इसके अलावा राजनीतिक फंडिंग के लिए लाई गई इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को खारिज करने वाली बेंच का भी वह हिस्सा थे। यही नहीं नोटबंदी के खिलाफ दायर अर्जियों पर सुनवाई करने वाली बेंच में भी वह शामिल थे। 24 नवंबर, 1960 को अमरावती में जन्मे गवई ने 16 मार्च, 1985 को एक वकील के रूप में नामांकन कराया। शुरुआत में उन्होंने 1987 तक दिवंगत बार राजा एस भोंसले, पूर्व महाधिवक्ता और हाई कोर्ट के जज के अधीन काम किया। फिर उन्होंने 1987 से 1990 तक बॉम्बे हाई कोर्ट में स्वतंत्र रूप से प्रेक्टिस किया। 1990 के बाद उन्होंने मुख्य रूप से बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ में संवैधानिक और प्रशासनिक कानून पर ध्यान केंद्रित करते हुए प्रेक्टिस किया। उन्होंने नागपुर नगर निगम, अमरावती नगर निगम और अमरावती यूनिवर्सिटी के लिए स्थायी वकील के रूप में कार्य किया। उन्हें 14 नवंबर, 2003 को हाई कोर्ट के अतिरिक्त जज के रूप में नियुक्त किया गया था। फिर 12 नवंबर, 2005 को बॉम्बे हाई कोर्ट के स्थायी जज के रूप में नियुक्ति की गई थी। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने मुंबई में मुख्य सीट और नागपुर, औरंगाबाद और पणजी में बेंचों में विभिन्न मामलों की अध्यक्षता की। उन्हें 24 मई, 2019 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय के जज के पद पर प्रमोट किया गया। उनकी रिटायरमेंट की तारीख 23 नवंबर, 2025 निर्धारित है।

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