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भारत समेत G4 देशों ने संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में मुस्लिम देश के आरक्षण के प्रस्‍ताव को खारिज कर दिया

वॉशिंगटन  भारत समेत जी 4 देशों ने संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में मुस्लिम देश के आरक्षण के प्रस्‍ताव को खारिज कर दिया है। जी 4 देशों ने धार्मिक आधार पर स्‍थायी सदस्‍यता देने के किसी भी प्रस्‍ताव को संयुक्‍त राष्‍ट्र के नियमों के खिलाफ बताया। संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर लंबे समय से मांग चल रही है। भारत समेत जी 4 के देशों ब्राजील, जर्मनी और जापान ने तुर्की के राष्‍ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान, पाकिस्‍तानी पीएम शहबाज शरीफ और सऊदी प्रिंस मोहम्‍मद बिन सलमान के इस्‍लामिक सपने को तोड़ दिया है। संयुक्‍त राष्‍ट्र में भारत के स्‍थायी प्रतिनिधि पी हारिश ने मंगलवार को जी4 देशों की ओर से कहा कि धर्म के आधार पर सुरक्षा परिषद में प्रतिन‍िध‍ित्‍व मंजूर नहीं है। भारतीय प्रतिनिधि ने तुर्की या उसके इस्‍लामिक दुनिया का खलीफा बनने का सपना देख रहे राष्‍ट्रपति एर्दोगान का नाम नहीं लिया। इससे पहले पिछले महीने तुर्की के राष्‍ट्रपति एर्दोगान ने मांग की थी कि सुरक्षा परिषद में एक इस्‍लामिक देश को भी स्‍थायी सदस्‍यता दी जाए। भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्‍तान या सऊदी के नेतृत्‍व वाले इस्‍लामिक संगठन ओआईसी का भी नाम नहीं लिया। इन दोनों ने मांग की थी कि ‘इस्‍लामिक उम्‍मा’ को भी सुरक्षा परिषद के सभी वर्गो में सदस्‍यता दी जाए। हारिश ने कहा कि धार्मिक फैक्‍टर को लाने से सुरक्षा परिषद के अंदर सुधारों को लेकर चल रही प्रक्रिया में और ज्‍यादा जटिलता आ जाएगी। तुर्की के राष्‍ट्रपति ने खेला इस्‍लामिक कार्ड हारिश ने जी4 देशों की ओर से संयुक्‍त राष्‍ट्र के अंदर सुधारों को लेकर एक अंतरसरकारी वार्ता के दौरान यह बयान दिया। उन्‍होंने भारत के प्रतिनिधि होने के नाते जोर देकर कहा कि मुस्लिम आरक्षण क्षेत्रीय प्रतिनिध‍ित्‍व के सिद्धांत को कमजोर करेगा जिसे संयुक्‍त राष्‍ट्र ने स्‍वीकार किया है। तुर्की के ऑटोमन साम्राज्‍य को फिर से लाने की कोशिश में लगे एर्दोगान ने एक इफ्तार पार्टी में पिछले महीने कहा था, ‘संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के अंदर वीटो पावर के साथ एक इस्‍लामिक देश का होना न केवल आवश्‍यकता है, बल्कि एक दायित्‍व भी है।’ जी4 देशों का यह समूह सकारात्‍मक और आशावादी सोच वाले तथा सुधार समर्थक देशों का समूह है जो कई साल सुरक्षा परिषद के स्‍थायी सदस्‍यों की संख्‍या को बढ़ाने पर जोर दे रहा है। हारिश ने कहा कि जी4 एक सिफारिशी ग्रुप है जो सार्थक सुधार के लिए काम कर रहा है और किसी खास सुझाव को नहीं देता है कि किसे स्‍थायी सदस्‍य बनाया जाए। जी4 इसे संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा पर छोड़ता है। उन्‍होंने कहा कि महासभा को लोकतांत्रिक आधार पर सुरक्षा परिषद में सुधार करके नए स्‍थायी सदस्‍य को शामिल करना चाहिए। सुरक्षा पर‍िषद में सुधार का जी4 प्रस्‍ताव हारिश ने यह भी कहा कि जी4 देशों का मानना है कि सुरक्षा परिषद के सदस्‍यों की संख्‍या को बढ़ाना चाहिए और क्षेत्रीय प्रतिनिध‍ित्‍व को देना चाहिए। भारत ने कहा कि सुरक्षा परिषद के सदस्‍यों की संख्‍या को 15 से 25 या 26 करना चाहिए। जी4 के प्रस्‍ताव के मुताबिक सुरक्षा परिषद में स्‍थायी सदस्‍यों की संख्‍या को बढ़ाकर 5 से 11 करना चाहिए, वहीं अस्‍थायी सदस्‍यों की संख्‍या को 10 से बढ़ाकर 14 या 15 करनी चाहिए। उन्‍होंने कहा कि 6 नए स्‍थायी सदस्‍यों में प्रत्‍येक को एशिया-प्रशांत, लैट‍िन अमेरिका, कैरेबियाई देश और पूर्वी यूरोप को एक-एक सीट दी जाए। वहीं अफ्रीका को कम से कम एक या दो सीट दी जाए। भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्‍तान को भी जमकर फटकार लगाई जो सुरक्षा परिषद में सुधार का विरोध कर रहा है। पाकिस्‍तान स्‍थायी सदस्‍यता दिए जाने का विरोध कर रहा है ताकि भारत को रोका जा सके। पाकिस्‍तान इस्‍लामिक उम्‍मा को भी भड़काने का काम कर रहा है। अगर धर्म के आधार पर देखें तो चीन जहां आंशिक रूप से वामपंथी देश है, वहीं बाकी 4 स्‍थायी सदस्‍य ईसाई बहुल देश अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और रूस हैं।

मुस्लिम धर्म गुरुओं के साथ सीएम ममता की बैठक, बोली- भाजपा समाज को बांट रही

  कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बुधवार को मौलवियों और मुस्लिम धर्म गुरुओं के साथ बैठक करेंगी। यह बैठक वक्फ संशोधन अधिनियम के संबंध में हो रही है। बैठक कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में होगी। स्टेडियम के बाहर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। इस दौरान ममता ने कहा कि उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति में सभी धर्मों के लोगों ने भूमिका निभाई है, लेकिन संविधान को कमजोर करने के प्रयास जारी है। भाजपा समाज को बांटने का काम कर रही है। उन्होंने बड़ा दावा करते हुए कहा कि मुर्शिदाबाद में सांप्रदायिक हिंसा पूर्व नियोजित थी। ममता ने कहा कि भाजपा ने रामनवमी के दौरान दंगे कराने की योजना बनाई थी, लेकिन वह विफल रही। मैं लोगों को विभाजित नहीं होने दूंगी। मैं एकता चाहती हूं। मैं समाज को एकसाथ लेकर चलने में विश्वास रखती हूं। हम भाजपा को केंद्र की सत्ता से बेदखल करने के बाद उसके लाए गए सभी जनविरोधी विधेयकों को वापस लेंगे। उन्होंने कहा कि सभी धर्मगुरु लोगों के पास जाएं और उन्हें एकता का संदेश दें। हमें साथ मिलकर रहना है। सभी का साथ रहना बहुत जरूरी है। वक्फ कानून के खिलाफ लड़ाई में टीएमसी सबसे आगे रही उन्होंने कहा कि मुर्शिदाबाद जिले के कुछ इलाकों में वक्फ कानून को लेकर कुछ हिंसक घटनाएं हुईं। अगर टीएमसी वक्फ हिंसा में शामिल होती, जैसा कि विपक्ष दावा कर रहा है, तो उसके नेताओं के घरों पर हमला नहीं होता। संसद में वक्फ कानून के खिलाफ लड़ाई में टीएमसी सबसे आगे रही। भाजपा की ओर से पाले जा रहे कुछ मीडिया घराने बंगाल को बदनाम करने के लिए अन्य राज्यों में हुई हिंसा के वीडियो प्रसारित कर रहे हैं। पीएम मोदी और शाह को घेरा उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी को अमित शाह पर लगाम लगानी चाहिए। मैं प्रधानमंत्री मोदी से अपील करती हूं कि वे किसी भी अत्याचारी कानून को अनुमति न दें और अपने गृह मंत्री पर नियंत्रण रखें। ‘अगर आपको कुछ कहना है, तो मेरे सामने आकर कहें, मेरे पीछे नहीं’ पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कहा, ‘केंद्र को जवाब देना चाहिए कि कितने युवाओं को नौकरी मिली है? दवाओं, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि की गई है, लेकिन कुछ ‘गोदी मीडिया’ केवल बंगाल के खिलाफ बोलते हैं। अगर आपको कुछ कहना है, तो मेरे सामने आकर कहें, मेरे पीछे नहीं। भाजपा की ओर से वित्तपोषित कुछ मीडिया चैनल बंगाल के फर्जी वीडियो दिखाते हैं। हमने उन्हें पकड़ा। उन्होंने कर्नाटक, यूपी, बिहार और राजस्थान के आठ वीडियो दिखाए और बंगाल को बदनाम करने की कोशिश की। उन्हें शर्म आनी चाहिए।’

कटरा से श्रीनगर वंदे भारत ट्रेन के लिए करना होगा और इंतजार, 19 अप्रैल को नहीं होगा उद्घाटन, रेलवे ने क्यों लिया फैसला?

श्रीनगर कश्मीर में दौड़ने वाली पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के लिए लोगों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा। यह ट्रेन कटरा से कश्मीर पर चलनी प्रस्तावित है। इस ट्रेन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 19 अप्रैल को करना था। लेकिन फिलहाल इसका उद्घाटन टल गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि प्रधानमंत्री की कश्मीर यात्रा टल गई है। नई तारीख के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं आई है। बता दें कि पीएम मोदी का 19 अप्रैल को कश्मीर दौरा प्रस्तावित था। उन्हें यहां कटरा से कश्मीर के चलने वाली वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखानी थी। साथ ही उन्हें उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) के कटरा-संगलदान सेक्शन के अंतिम भाग का भी उद्घाटन करना था। यह 272 किलोमीटर लंबा प्रोजेक्ट है। पीएम मोदी का कश्मीर दौरान टलने के बाद इन दोनों उद्घाटनों को भी फिलहाल रोक दिया गया है। चिनाब आर्च ब्रिज से गुजरती ट्रेन उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) खंड में चिनाब रेलवे पुल भी शामिल है। यह दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज है। इससे नई दिल्ली और कश्मीर के बीच कटरा के रास्ते सीधी रेल कनेक्टिविटी हो जाएगी। जनवरी में हुआ था ट्रायल भारतीय रेलवे ने 23 जनवरी को श्री माता वैष्णो देवी कटरा (SVDK) रेलवे स्टेशन से श्रीनगर रेलवे स्टेशन के लिए पहली वंदे भारत ट्रेन का ट्रायल रन किया था। यह ट्रेन चिनाब पुल के अलावा अंजी खड्ड पुल से भी होकर गुजरेगी। अंजी खड्ड पुल भारत का पहला केबल-आधारित रेलवे पुल है। क्यों रद्द हुआ पीएम का दौरा? पीएम मोदी का प्रस्तावित दौरा रद्द क्यों हुआ, इसके बारे में कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है। हालांकि कुछ सूत्रों ने बताया है कि मौसम विभाग के अनुसार 18 और 19 अप्रैल को कटरा और उसके आस पास के क्षेत्रों में मौसम खराब रहेगा और भारी बारिश की संभावना है। ऐसे में पीएम मोदी के इस दौरे को रद्द किया गया है। क्या है इस ट्रेन में खास?     साल भर आरामदायक यात्रा के लिए कोच में तापमान नियंत्रण की व्यवस्था होगी।     आरामदायक सीटों के साथ-साथ एग्जीक्यूटिव क्लास में 180 डिग्री घूमने वाली सीटें भी होंगी।     यात्रा के दौरान वाई-फाई, मनोरंजन और चार्जिंग पोर्ट की सुविधा मिलेगी।     सुरक्षा के लिए CCTV कैमरे, ऑटोमेटिक दरवाजे और बायो-वैक्यूम टॉयलेट होंगे। समय की होगी बचत अभी कटरा से श्रीनगर जाने में सड़क से 6 से 7 घंटे लगते हैं। यह समय मौसम और ट्रैफिक पर भी निर्भर करता है। कटरा, वैष्णो देवी मंदिर जाने के लिए बेस है। लेकिन, वंदे भारत एक्सप्रेस से यह यात्रा सिर्फ 3 घंटे में पूरी हो जाएगी। यह ट्रेन लगभग 272 किलोमीटर का सफर तय करेगी। इस दौरान यात्री देश के सबसे खूबसूरत और मुश्किल रास्तों से गुजरेंगे। यह यात्रा प्रकृति के सुंदर नजारों और आधुनिक इंजीनियरिंग का एक शानदार मिश्रण होगी। इससे यात्रा यादगार और सुविधाजनक बनेगी।

नाशिक के अवैध दरगाह पर चला बुलडोजर

नाशिक  नाशिक के अवैध दरगाह पर बुलडोजर चल गया है। आज सुबह-सुबह प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर दरदगाह के अवैध हिस्सों को जमींदोज कर दिया। कार्रवाई के दौरान जिला प्रशासन ने काफी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की थी। इस दौरान दरगाह की तरफ जाने वाली सड़कों को सील कर दिया गया था। दरगाह के आसपास तीनों तरफ के सड़क पर पुलिस तैनात की गई है और किसी भी बाहरी व्यक्ति या गाड़ी को अंदर आने नहीं दिया गया। पुलिस वैन लगाकर सड़क को बैरिकेड किया गया। दरगाह कमेटी का कहना है कि पीर बाबा की यह दरगाह 350 साल पुरानी है। वहीं सकल हिंदू समाज ने इसे ध्वस्त कर यहां हनुमान मंदिर बनाए जाने की मांग की है। बता दें कि महाराष्ट्र के नासिक में अवैध दरगाह निर्माण हटाने को लेकर मंगलवार की रात इसको लेकर बवाल हो गया था। शहर के काटे गली इलाके में रात के समय पथराव की घटना हुई थी। इसमें 31 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। 57 संदिग्ध बाइकों जब्त की गई हैं। पुलिस ने 15 लोगों को अरेस्ट किया है। बताया जाता है कि दरगाह को लेकर फैली अफवाह के चलते भीड़ भड़क गई, जिसके बाद बिजली कट होने का फायदा उठाकर भीड़ ने पथराव कर दिया। जिस वक्त बवाल हुआ तब भीड़ की संख्या 400 से ज्यादा थी और रात में 500 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का उपयोग किया. जिसके बाद भीड़ तितर-बितर हुई। बताया जा रहा है कि नगर निगम के नोटिस के बाद एक टीम दरगाह पर हुए अवैध निर्माण को हटाने पहुंची थी। इसी बीच अफवाह फैल गई कि दरगाह की ढहाया जा रहा है। इसी पर भीड़ उग्र हो गई और पथराव कर दिया। भीड़ द्वारा की गई पथराव की घटना में 2 सहायक पुलिस आयुक्त समेत 31 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। पथराव करने वाली भीड़ में से 15 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। क्या है पूरा मामला ? नगर निगम ने नाशिक के काठे गली सिग्नल क्षेत्र में सातपीर दरगाह को नोटिस जारी किया था। निगम ने 15 दिन के भीतर अतिक्रमण हटाने पर कार्रवाई की बात कही थी। नोटिस में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार सातपीर दरगाह अनधिकृत है। निगम की ओर से दरगाह की दीवार पर यह नोटिस लगा दिया गया था। इसके बाद भी मुस्लिम पत्र मानने को राजी नहीं है। बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर की गई थी याचिका सातपीर दरगाह ट्रस्ट की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि यह दरगाह अनधिकृत है। इसके बाद नगर निगम ने नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर सभी अनधिकृत निर्माण हटाने के निर्देश दिए थे।

अमेरिका में ग्रीन कार्ड और H-1B वीजा के नियम सख्त, , हमेशा अपनी जेब में रखना होगा पहचान पत्र

नई दिल्ली अमेरिका जाना और वहां रहना अब दोनों ही मुश्किल हो चुका है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इमिग्रेशन यानी अप्रवासन नीति में एक बड़ा बदलाव किया है। अब अमेरिका में रहने वाले सभी प्रवासियों को हमेशा अपनी जेब में पहचान पत्र साथ रखना होगा। ये नियम जिन लोगों के लिए अनिवार्य किया गया है, वो हैं कानूनी तौर पर रहने वाले, काम करने वाले और स्टूडेंट्स हैं। आइए-समझते हैं कि अमेरिका में अब प्रवासियों के लिए किस तरह की चुनौतियां बढ़ गई हैं। आइए-इसे समझते हैं। अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने यह फैसला लिया है। यह फैसला एक कोर्ट के उस आदेश के बाद आया है, जिसमें ट्रंप के समय के एक नियम को फिर से लागू करने की बात कही गई थी। यह नियम कहता है कि जो लोग गैरकानूनी तरीके से अमेरिका में रह रहे हैं, उन्हें सरकार के पास अपना नाम दर्ज कराना होगा। अब यह नियम नए सिरे से लागू होने जा रहा है। 18 साल से ज्यादा उम्र के सभी गैर अमेरिकियों पर लागू इस नए नियम के अनुसार, 18 साल या उससे ज्यादा उम्र के हर गैर नागरिक को हर समय अपना पहचान पत्र साथ रखना होगा। DHS ने साफ कहा है कि इस नियम को सख्ती से लागू किया जाएगा और इसका उल्लंघन करने पर कोई रियायत नहीं दी जाएगी। यह नियम 11 अप्रैल से लागू हो गया है। DHS ने यह भी कहा है कि वे इस नियम पर और ज्यादा ध्यान देंगे और इसे सख्ती से लागू करेंगे। एलियन कानून क्या इस नियम के पीछे है यह बदलाव 20 जनवरी को दस्तखत किए गए एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर ‘प्रोटेक्टिंग द अमेरिकन पीपल अगेंस्ट इन्वेजन’ के बाद हुआ है। इस ऑर्डर में DHS को एलियन रजिस्ट्रेशन एक्ट को लागू करने का निर्देश दिया गया है, जिसे लंबे समय से अनदेखा किया जा रहा था। जरूरी कागजात नहीं हैं तो क्या करना होगा नए नियम मुख्य रूप से उन लोगों पर लागू होते हैं जिनके पास अमेरिका में रहने के लिए जरूरी कागजात नहीं हैं। ऐसे सभी गैर-नागरिक जो 14 साल या उससे ज्यादा उम्र के हैं और 30 दिनों से ज्यादा समय से अमेरिका में रह रहे हैं, उन्हें फॉर्म जी-325आर भरकर सरकार के पास अपना नाम दर्ज कराना होगा। इमिग्रेंट्स के बच्चों को भी 14 साल के होने के 30 दिनों के अंदर दोबारा रजिस्ट्रेशन कराना होगा और अपने फिंगरप्रिंट देने होंगे। पता बदलने पर नए पते की जानकारी देनी होगी इसके अलावा, जो लोग 11 अप्रैल के बाद अमेरिका आ रहे हैं, उन्हें आने के 30 दिनों के अंदर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। अगर कोई अपना पता बदलता है, तो उसे 10 दिनों के अंदर DHS को नए पते की जानकारी देनी होगी। इस नियम का पालन न करने पर 5,000 डॉलर तक का जुर्माना लग सकता है। इन लोगों पर नहीं होगा ट्रंप का ये सख्त नियम हालांकि, यह नियम उन लोगों पर लागू नहीं होता है जिनके पास पहले से ही वैलिड वीजा है। जैसे कि स्टूडेंट वीजा या वर्क वीजा पर रहने वाले लोग, या जिनके पास ग्रीन कार्ड , एम्प्लॉयमेंट डॉक्यूमेंटेशन या आई-94 एडमिशन रिकॉर्ड है। माना जाता है कि इन लोगों ने रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पहले ही पूरी कर ली है। उदाहरण के लिए, जो भारतीय नागरिक वैलिड वीजा या ग्रीन कार्ड के साथ अमेरिका में रह रहे हैं, उन्हें नए नियम के तहत रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं है। हालांकि, उन्हें हर समय अपने पहचान पत्र साथ रखने होंगे और अधिकारियों द्वारा मांगे जाने पर उन्हें दिखाना होगा। 7 लाख भारतीय गैर कानूनी तौर पर अमेरिका में रह रहे DHS के आंकड़ों के अनुसार, 2022 तक लगभग 2.2 लाख भारतीय गैरकानूनी रूप से अमेरिका में रह रहे थे। हालांकि, प्यू रिसर्च सेंटर जैसे अन्य संगठनों का अनुमान है कि यह संख्या 7 लाख तक हो सकती है, जबकि माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट का अनुमान है कि यह आंकड़ा लगभग 3.75 लाख है। अमेरिका में एक पायदान और बढ़ा निगरानी का स्तर यह नया नियम अमेरिका में रहने वाले इमिग्रेंट समुदाय के लिए बहुत महत्वपूर्ण होने वाला है। खासकर उन लोगों के लिए जिनके पास कानूनी तौर पर रहने की अनुमति नहीं है। इससे उनके लिए कागजात और निगरानी का एक और स्तर जुड़ जाएगा, जो पहले से ही एक जटिल प्रवासी व्यवस्था है। इस नीति से प्राइवेसी, नागरिक अधिकारों और देश भर में प्रवासी समुदायों पर व्यापक प्रभाव को लेकर बहस छिड़ सकती है।

आरपीएफ ढूंढगा सफर के दौरान चोरी या गुम हुआ फोन

नई दिल्ली यदि आप ट्रेन में यात्रा कर रहे हैं और आपका मोबाइल फोन खो गया है या चोरी हो गया है, तो अब चिंता करने की आवश्यकता नहीं है. रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने दूरसंचार विभाग के साथ मिलकर आपके खोए हुए मोबाइल फोन को खोजने के लिए उपाय किए हैं. RPF ने दूरसंचार विभाग के सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर (CEIR) पोर्टल के साथ एक सफल सहयोग स्थापित किया है. इस संबंध में डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा की है. एक्स पर बताया गया है कि यदि रेलवे स्टेशन या ट्रेन में फोन चोरी या गुम हो जाता है, तो इसे आरपीएफ और संचार एप की सहायता से ट्रेस किया जा सकता है. इसके अलावा, यदि फोन नहीं मिलता है, तो इस एप के माध्यम से फोन को ब्लॉक भी किया जा सकता है. इस एप का नाम संचार साथी है, और यह पहल नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) में एक पायलट प्रोग्राम की सफलता के बाद शुरू की गई है. अब भारतीय रेल द्वारा इस पहल को पूरे देश में लागू करने से करोड़ों रेल यात्रियों को लाभ होगा. आम आदमी इस तरह से फोन कर सकेंगे ब्लॉक संचार साथी एक सरकारी एप्लिकेशन है, जिसे केंद्र सरकार के दूरसंचार विभाग ने जनवरी 2023 में पेश किया. इस एप के माध्यम से उपयोगकर्ता मोबाइल से साइबर धोखाधड़ी या फर्जी कॉल्स की शिकायत कर सकते हैं. इसके अलावा, यह एप चोरी या खोए हुए फोन का पता लगाने और उसे ब्लॉक करने की सुविधा भी प्रदान करता है. इससे पहले, सरकार ने 2023 में संचार साथी पोर्टल की शुरुआत की थी, जिसके जरिए लोग धोखाधड़ी कॉल्स और संदेशों की शिकायत कर सकते हैं. उपयोगकर्ता खोए हुए मोबाइल में लगे सिम को भी ब्लॉक कर सकते हैं और अपने आधार कार्ड से जुड़े मोबाइल नंबर की स्थिति की जांच कर सकते हैं. आप संचार साथी एप को वेबसाइट पर उपलब्ध क्यूआर कोड को स्कैन करके डाउनलोड कर सकते हैं. इसके अतिरिक्त, आप सीधे प्ले स्टोर या एप्पल स्टोर पर जाकर भी इसे प्राप्त कर सकते हैं. एप डाउनलोड करने के बाद, आपको अपना मोबाइल नंबर दर्ज करके लॉगिन करना होगा, जिसके बाद आप इसके विभिन्न फीचर्स का उपयोग कर सकेंगे. यदि ट्रेन में यात्रा के दौरान आपका फोन चोरी हो जाता है या खो जाता है, तो आप किसी अन्य फोन पर संचार साथी एप डाउनलोड करके अपने फोन को खोज सकते हैं और उसे ब्लॉक भी कर सकते हैं. रेलवे स्टेशन या ट्रेन में फोन चोरी होने की स्थिति में, आपको आरपीएफ को सूचित करना होगा, जिसके बाद आरपीएफ संचार साथी एप की सहायता से फोन की जानकारी प्राप्त करेगी. शिकायत के लिए यात्रियों के पास रहेंगे ये भी विकल्प यात्री खोए हुए मोबाइल फोन की रिपोर्ट रेल मदद एप या 139 नंबर पर कर सकते हैं. यदि वे एफआईआर दर्ज नहीं कराना चाहते, तो सीईआईआर पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करने का विकल्प भी उपलब्ध है. सीईआईआर पोर्टल पर पंजीकरण करने पर आरपीएफ की जोनल साइबर सेल शिकायत को दर्ज करेगी और आवश्यक जानकारी भरने के बाद डिवाइस को ब्लॉक कर देगी. यदि खोए हुए फोन के साथ सिम कार्ड भी मिल जाता है, तो उपयोगकर्ता को निकटतम आरपीएफ पोस्ट पर लौटाने की सलाह दी जाएगी. इसके बाद, असली उपयोगकर्ता आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करके अपना फोन वापस प्राप्त कर सकता है. फोन मिलने के बाद, शिकायतकर्ता सीईआईआर पोर्टल के माध्यम से फोन को अनब्लॉक करने का अनुरोध कर सकता है, जिसमें RPF से सहायता भी प्राप्त होगी.

रूस में जन्म दर हर साल गिर रही, 1800 के बाद सबसे कम बच्चे पैदा हुए, चीन और जापान भी इस समस्या से जूझ रहे

मॉस्को  रूस में जन्म दर में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। रूस की जनसंख्या में गिरावट इतनी ज्यादा है कि पिछले करीब 200 वर्षों के रेकॉर्ड टूट गए हैं। कम बच्चे पैदा होने की वजह से रूस में जनसंख्या घट रही है और सरकार के सामने ये गंभीर चुनौती बनती जा रही है। यूक्रेन के साथ युद्ध में उलझी रूस की व्लादिमीर पुतिन सरकार की हालिया वर्षों में जन्म दर को बढ़ाने की कई कोशिशों के बावजूद इस दिशा में कोई खास फायदा नहीं हुआ है। रूस की आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है, इससे देश में काम करने वाले घटते जा रहे हैं। मॉस्को टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रोस्टेट नाम की सरकारी एजेंसी ने जनसंख्या के नए आंकड़े जारी किए हैं। आंकड़े बताते हैं कि इस साल जनवरी और फरवरी रूस में सिर्फ 1,95,400 बच्चे पैदा हुए। यह आंकड़ा पिछले साल के इन महीनों के मुकाबले तीन फीसदी कम है। फरवरी महीने में तो और ज्यादा गिरावट आई। फरवरी में जन्म दर 7.6% तक गिर गई और सिर्फ 90,500 बच्चे पैदा हुए। जनसांख्यिकी विशेषज्ञ अलेक्सी का कहना है कि 2025 की पहली तिमाही में रूस की जन्म दर 1800 के दशक के बाद सबसे कम है। लगातार कम हो रही रूसी आबादी अलेक्सी का इस साल मार्च में 95,000 से 96,000 बच्चे पैदा होने का अनुमान है। इस तरह पहली तिमाही में कुल 293,000 से 294,000 बच्चे पैदा हुए। अलेक्सी का कहना है कि 2025 की पहली तिमाही में पिछले 200 सालों में सबसे कम बच्चे पैदा हुए। हालांकि रोस्टेट ने अभी तक मार्च महीने के आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए हैं। रूस में बीते साल, 2024 में 12.22 लाख बच्चे पैदा हुए थे। यह 1999 के बाद सबसे कम आंकड़ा है। इस साल ये आंकड़ा और भी कम हो सकता है। रूस में बीते एक दशक में 2014 के मुकाबले जन्म दर में एक तिहाई की कमी आ गई है। साल 2016 से 2024 के बीच ही रूस की जनसंख्या में 30 लाख से ज्यादा की कमी आ चुकी है। अभी और बढ़ेगा रूस में संकट! रोस्टेट के अनुसार, रूस में जन्म दर में गिरावट आने वाले वर्षों में भी जारी रहेगी। अगले दो साल यानी 2027 तक यह आंकड़ा 11.4 लाख तक गिर सकता है। 2030 के बाद थोड़ी रिकवरी हो सकती है लेकिन 2045 तक भी जन्म दर 2014 से पहले के मुकाबले 25% कम रहेगी। साफ है कि हालिया समय में रूस इससे बाहर नहीं आ पाएगा। एक्सपर्ट का कहना है कि अगर मौतों की संख्या हर साल 18 लाख के आसपास स्थिर होती है तो भी रूस की जनसंख्या में हर साल 5 लाख की कमी आएगी। रोस्टेट के अनुसार, 2046 तक रूस की जनसंख्या 13.88 करोड़ तक गिर सकती है। यहं तक कि जनसंख्या 13 करोड़ तक भी गिर सकती है। यह आंकड़ा 1897 के रूसी साम्राज्य की आबादी के बराबर होगा।

रूस ने भारत की वर्षों से चली आ रही संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद की स्‍थायी सदस्‍यता मांग का खुलकर समर्थन किया

नई दिल्ली/ मास्‍को  भारत और रूस की राजनयिक दोस्‍ती के 78 साल पूरे हो गए हैं। शीत युद्ध से लेकर पाकिस्‍तान युद्ध तक रूस ने भारत के साथ दोस्‍ती निभाई है। अब एक बार फिर से रूस ने भारत की वर्षों से चली आ रही मांग का खुलकर समर्थन किया है। रूस ने संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को स्‍थायी सदस्‍यता देने की मांग को फिर से दोहराया है। साथ ही रूस ने भारत के साथ आने वाले वर्षों में भी अच्‍छे रिश्‍ते बरकरार रखने की उम्‍मीद जताई है। रूस के विदेश मंत्रालय ने अपने संदेश में दोनों देशों के बीच राजनयिक रिश्‍ते स्‍थापित होने के 78 साल पूरे होने की बधाई दी। इस बीच स्‍लोवाकिया ने भी भारत की संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में स्‍थायी सदस्‍यता का समर्थन किया है। टेलिग्राम पर दिए अपने संदेश में रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम भारत के साथ रणनीतिक भागीदारी को और मजबूत करना चाहते हैं। रूसी मंत्रालय ने कहा कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक संवाद मजबूत बना रहेगा और दोनों देशों के नेताओं के बीच मुलाकातों का दौर जारी रहेगा। साल 2024 में पीएम मोदी और रूसी राष्‍ट्रपति पुतिन के बीच दो शिखर सम्‍मेलन हुए थे। इस साल भी पुतिन भारत आने वाले हैं। रूस ने विक्‍ट्री डे परेड में पीएम मोदी को न्‍योता दिया था। इसमें हिस्‍सा लेने के लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर जा रहे हैं। भारत और रूस बढ़ाएं दोस्‍ती रूसी विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच व्‍यापार लगातार तेजी से बढ़ रहा है और यह 60 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इसके अलावा दोनों देश परमाणु ऊर्जा पर भी सहयोग कर रहे हैं और तमिलनाडु के कुंडनकुलम में परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगाया जा रहा है। रूस ने कहा कि दोनों देशों को रक्षा, स्‍पेस, तकनीक और सांस्‍कृतिक आदान-प्रदान को जारी रखना चाहिए ताकि एक बहुध्रुवीय दुनिया को बनाया जा सके। यह वैश्विक प्रशासन में ग्‍लोबल साऊथ की भागीदारी को बढ़ाएगा। सुरक्षा परिषद की दावेदारी में कहां फंसा पेंच? संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में स्‍थायी सदस्‍यता के लिए कई साल से भारत मांग कर रहा है। यह दुनिया का सबसे शक्तिशाली निकाय है लेकिन दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश भारत इसका स्‍थायी सदस्‍य नहीं है। साल 1945 में बनाए गए संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा पर‍िषद 15 सदस्‍य हैं और इसमें केवल 5 ही स्‍थायी सदस्‍य हैं। ये देश हैं- अमेरिका, रूस, फ्रांस, चीन और ब्रिटेन। 10 गैर अस्‍थायी सदस्‍य होते हैं जिन्‍हें दो साल के लिए चुना जाता है। स्‍थायी सदस्‍यों के पास वीटो पावर होता है लेकिन अस्‍थायी सदस्‍यों के पास यह ताकत नहीं होती है। भारत को रूस, अमेरिका, फ्रांस समेत दुनिया के कई ताकतवर देशों का समर्थन हासिल है लेकिन नई दिल्‍ली की राह में सबसे बड़ी बाधा चीन बना हुआ है। चीन नहीं चाहता है कि एशिया में उसके एकाधिकार को भारत चुनौती दे। इसी वजह से चीन सुरक्षा परिषद में एशिया से अकेले प्रतिनिधित्‍व करना चाहता है।  

30 अप्रैल से शुरू होगी चारधाम यात्रा, घर से करना चाहते हैं पूजा तो ऐसे करें बुकिंग

देहरादून इस वर्ष चारधाम की यात्रा 30 अप्रैल 2025, अक्षय तृतीया के दिन से शुरू होने जा रही है. अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट सुबह 10 बकर 30 मिनट पर खोले जाएंगे.  वहीं, केदारनाथ धाम के कपाट भक्तों के लिए 2 मई 2025, शुक्रवार को सुबह 7 बजे तक खुलेंगे. इसके अलावा, बद्रीनाथ धाम के कपाट 4 मई 2025, रविवार के दिन खुलेंगे. चारधाम यात्रा की तारीखों का निर्धारण महाशिवरात्रि के अवसर पर धार्मिक विद्वानों के द्वारा किया गया था. चारधाम यात्रा में हर साल लाखों श्रद्धालुओं जाते हैं. भक्त इन पवित्र धामों में जाकर मां गंगा, मां यमुना, भगवान केदारनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन करते हैं. चारधाम यात्रा के लिए गाइडलाइंस जारी, यात्रा से पहले ऐसे करें तैयारी केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमनोत्री चारधाम यात्रा 30 अप्रैल से शुरू हो रही है. वहीं लोगों ने इस साल दर्शन के लिए रिकॉर्ड तोड़ रजिस्ट्रेशन कराए हैं. चारधाम यात्रा के सभी तीर्थस्थल हिमालयी क्षेत्र में है जिसकी ऊंचाई समुद्र तल से 2700 मीटर से भी अधिक है. इन स्थानों पर यात्रीगण अत्यधिक ठण्ड, कम आर्द्रता, अत्यधिक अल्ट्रा वॉइलेट रेडिएशन, कम हवा का दबाव और कम ऑक्सीजन की मात्रा से प्रभावित हो सकते हैं. इसलिए समय-समय पर तीर्थ यात्रियों के सुगम एवं सुरक्षित यात्रा हेतु दिशा निर्देश (Health Advisory) जारी किए जाते हैं. उत्तराखंड टूरिज्म (उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड) की तरफ से चारधाम यात्रा का रजिस्ट्रेशन कराने वाले लोगों के लिए कुछ दिशा निर्देश भेजे गए हैं जिन्हें सभी को फॉलो करना चाहिए. यात्रा शुरू करने से पहले सभी को योजना बनाना, तैयारी करना, पैकिंग करना काफी जरूरी होता है. इसकी आप एक लिस्ट बना सकते हैं. योजना बनाना – अपनी यात्रा की योजना कम से कम 7 दिनों के लिए बनाएं, वातावरण के अनुरूप अपना कंफर्टेबल समय चुनें. – ब्रेक ले लेकर ट्रेक करें. ट्रेक के हर एक घंटे बाद या ऑटोमोबाइल चढ़ाई के हर 2 घंटे बाद, 5-10 मिनट का ब्रेक लें. तैयारी करना – रोजाना 5-10 मिनट के लिए ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें. – रोजाना 20-30 मिनट टहलें – यदि यात्री की आयु 55 साल से अधिक है या वह हृदय रोग, अस्थमा, हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज से ग्रस्त है तो यात्रा से पहले फिटनेस चैक करने के लिए स्वास्थ्य परीक्षण कराएं.  पैकिंग करना – गर्म कपड़े ऊनी स्वेटर, थर्मल, पफर जैकेट, दस्ताने, मोजे रखना न भूलें. – बारिश से बचाव के रेनकोट, छाता भी रखें. – स्वास्थ्य जांच उपकरण पल्स ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर. – पहले से मोजूद स्थितियों (हृदय रोग, अस्थमा, हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज) वाले यात्री सभी जरूरी दवा, टेस्टिंग इक्युपमेंट और डॉक्टर के नंबर साथ में रखें. कृपया अपनी यात्रा से पहले मौसम रिपोर्ट की जांच करें और ध्यान दें कि ठंडे तापमान के लिए आपके पास पर्याप्त गर्म कपड़े हों. अगर आपके डॉक्टर यात्रा न करने की सलाह देते हैं, तो कृपया यात्रा न करें. चार धाम तक कैसे पहुंचे? चारधाम यात्रा या तो हरिद्वार या देहरादून से शुरू होती है. यात्रा शुरू करने के दो तरीके हैं- सड़क और हेलीकाप्टर द्वारा. 1. सड़क मार्ग से सड़क मार्ग से चार धाम यात्रा हरिद्वार, दिल्ली, ऋषिकेश,और देहरादून से शुरू कर सकते हैं. हरिद्वार रेलवे स्टेशन इन पवित्र स्थानों से सबसे निकट रेलवे स्टेशन है. हरिद्वार सड़क और रेल नेटवर्क के माध्यम से दिल्ली और अन्य प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है. राज्य परिवहन और निजी बसें इन पवित्र तीर्थ स्थलों के लिए उपलब्ध हैं. 2. हेलीकॉप्टर हेलीपैड, देहरादून से चार धाम के लिए हेलीकाप्टर सेवा उपलब्ध है. हेलीकॉप्टर सेवा देहरादून से खरसाली तक है, जो यमुनोत्री मंदिर से लगभग 6 किमी. दूर है. हरसिल हेलीपैड गंगोत्री मंदिर के लिए निकटतम हेलिपैड है, जो मंदिर से 25 किमी. दूर स्थित है. बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम के हेलिपैड भी मंदिर के पास स्थित हैं. चार धाम यात्रा की पूजा का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कैसे करें बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम के लिए ऑनलाइन पूजा का रजिस्ट्रेशन 10 अप्रैल से शुरू हो चुका है. जो श्रद्धालु घर बैठे केदारनाथ धाम और बदरीनाथ धाम में पूजा करवाना चाहते हैं, वह बदरी केदार मंदिर समिति की वेबसाइट https://badrinathkedarath.gov.in पर जाकर ऑनलाइन बुकिंग करवा सकते है. ऑनलाइन पूजा करवाने वाले लोगों के नाम से न सिर्फ पूजा की जाएगी बल्कि उन श्रद्धालुओं को उनके एड्रेस पर केदारनाथ और बदरीनाथ धाम का प्रसाद भी भेजा जाएगा. जानिए कौन-कौन सी पूजा हो सकती है ऑनलाइन बदरीनाथ धाम में ब्रह्म मुहूर्त में होने वाला महाभिषेक और अभिषेक पूजा के साथ ही वेद पाठ, गीता पाठ, विष्णु सहस्रनामावली, सायंकालीन स्वर्ण आरती, चांदी आरती, गीत गोविंद पाठ के साथ ही शयन आरती भी शामिल है. इसी तरह केदारनाथ धाम में षोडशोपचार पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और सायंकालीन आरती के लिए आनलाइन बुकिंग की जाती है. चार धाम यात्रा का महत्व चार धाम यात्रा श्रद्धालुओं को चार महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों पर ले जाती है: यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ. ये हिमालय स्थल धार्मिक महत्व रखते हैं और हर साल लाखों तीर्थयात्री यहां आते हैं. यमुनोत्री– तीर्थयात्रा यमुनोत्री मंदिर से शुरू होती है, जो देवी यमुना को समर्पित है. मंदिर तक पहुंचने के लिए तीर्थयात्रियों को जानकी चट्टी से 6 किमी. की पैदल यात्रा करनी पड़ती है. उसके बाद टिहरी गढ़वाल के महाराजा प्रताप शाह द्वारा निर्मित यह मंदिर एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक स्थल है. गंगोत्री– दूसरी यात्रा है गंगोत्री, जो गंगा नदी को समर्पित है. 3,048 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर उन लोगों के लिए भक्ति का स्थान है जो पवित्र नदी का सम्मान करना चाहते हैं. केदारनाथ– तीसरी यात्रा केदारनाथ की है. भारत के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है केदारनाथ. 3,584 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर हिमालय से घिरा हुआ है. मान्यताओं के अनुसार, मंदिर मूल रूप से पांडवों द्वारा बनाया गया था और बाद में आदि शंकराचार्य द्वारा इसको दोबारा बनवाया गया था. बद्रीनाथ- अंतिम यात्रा बद्रीनाथ धाम की है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है. इसमें बद्रीनारायण की 3.3 मीटर ऊंची काले पत्थर की मूर्ति है और यह वैदिक युग की है.  

नेकां और भाजपा दोनों एक दूसरे का रणनीतिक रूप से साथ दे रही हैं, वक्फ बिल समर्थन देने का लगाया आरोप: इल्तिजा मुफ्ती

श्रीनगर वक्फ बिल जम्मू कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां)और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी(पीडीपी) के बीच वाकयुद्ध तेज होता जा रहा है। मंगलवार को पीडीपी की नेता इल्तिजा मुफ्ती ने नेकां पर भाजपा का वक्फ अधिनियम पर साथ देने का आरोप लगाते हुए कहा कि नेकां और भाजपा दोनों एक दूसरे का रणनीतिक रूप से साथ दे रही हैं, सिर्फ दिखावे के लिए एक दूसरे के खिलाफ नजर आती हैं। नेकां प्रवक्ता तनवीर सादिक ने भी पलटवार करते हुए कहा कि सभी जानते हैं कि सत्ता के लिए कौन भाजपा की गोद में बैठा था, हमने कभी भी जम्मू कश्मीर के हितों के साथ कुर्सी के लिए समझौता नहीं किया। नेकां-भाजपा की आपस में सांठ-गांठ: इल्तिजा पत्रकारों के साथ बातचीत में इल्तिजा मुफ्ती ने कहा कि भाजपा और नेकां दोनों की आपस में सांठ-गांठ हैं। दोनों एक दूसरे का विरोध सिर्फ दिखावे के लिए और एक दूसरे को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के लिए करते हैं। असलियत मं दोनों एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि नेकां को सिर्फ सत्ता से मतलब है कि इसके लिए वह कुछ भी कर सकती है। मुस्लिम औकाफ ट्रस्ट पर पूछा सवाल इल्तिजा मुफ्ती ने कहा कि नेकां केा जम्मू कश्मीर और इसके लोगों से कोई मतलब नहीं है। सभी जानते हैं कि नेकां के शासनकाल में मुस्लिम औकाफ ट्रस्ट में क्या क्या हुआ है, पीडीपी संस्थापक स्व मुफ्ती मोहम्मद सईद ने इसे नेकां की चंगुल से मुक्त कराकर इसके कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही लायी है। इल्तिजा ने वक्फ बिल पर नेकां को घेरा इल्तिजा मुफ्ती कहा कि एक तरफ नेकां के सदस्य सदन में वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ हंगामा करते हैं और दूसरी तरफ नेकां अध्यक्ष डॉ फारूक अब्दुल्ला वक्फ संशोधन बिल के मुद्दे पर स्पीकर को सही ठहराते हैं। एक तरफ वह कहते हैं कि यह मामला अदालत में विचाराधीन है, इसलिए इस पर प्रदेश विधानसभा में चर्चा नहीं हो सकती और दूसरी तरफ अनुच्छेद 370 के मामले पर वह ऐसा नहीं करते। इल्तिजा ने कहा कि कर्नाटक और तमिलनाडु वक्फ अधिनियम के खिलाफ प्रस्ताव लेकर आए हैं, जम्मू कश्मीर नहीं। जब जम्मू कश्मीर विधानसभा के सत्र मं वक्फ बिल पर हंगामा हो रहा था, मुख्यमंत्री ट्यूलिप गार्डन में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के साथ टहल रहे थे। पांच अगस्त 2019 और उसके बाद केंद्र सरकार ने जो कुछ जम्मू कश्मीर मे किया है, नेकां उसे सामान्य बनाने, उसे न्यायोचित्त साबित करने का प्रयास कर रही हे। नेकां ने भी इल्तिजा पर किया पलटवार नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता तनवीर सादिक ने दैनिक जागरण के साथ फोन पर कहा कि इल्तिजा मुफ्ती को पहले पीडीपी और इसके नेताओं का इतिहास अच्छी तरह से जान लेना चाहिए। पीडीपी ने ही भाजपा को जम्मू कश्मीर में सत्ता तक पहुंचाया और जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने के लिए भाजपा का मौका दिया। तनवीर सादिक ने कहा कि पीडीपी ने ही सत्ता के लिए भाजपा का साथ दिया है। पीडीपी के नेता ही सत्ता के लिए भाजपा की गोद में बैठे हैं,नेकां नहीं। उन्होंने कहा कि पीडीपी- भाजपा गठबंधन सरकार के समय, जब महबूबा मुफ्ती मुख्यमंत्री थीं तो उनके कैबिनेट मंत्री जो भाजपा से जुड़े हुऐ थे, अपनी वाहन पर जम्मू कश्मीर राज्य का ध्वज नहीं लगाते थे, 13 जुलाई को शहीदी दिवस के अधिकारिक समारोह से वह गायब रहते थे, लेकिन पीडीपी सत्ता के लिए चुप रहती थी। उन्होंने कहा कि केंद्र ने जो कानून लाया है, वह मुस्लिम औकाफ ट्रस्ट कश्मीर पर लागू नहीं होता। वक्फ बोर्ड और मुस्लिम औकाफ ट्रस्ट दोनों अलग अलग हैं। बेहतर है कि इल्तिजा मुफ्ती पहले अपना होमवर्क अच्छी तरह से पूरा कर लिया करें।

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती दोस्ती से भारत की बल्ले-बल्ले, पाकिस्तान की बढ़ जाएगी टेंशन?

नई दिल्ली ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु वार्ता का पहला दौर समाप्त हो चुका है। दोनों पक्षों ने कहा है कि जल्द ही वार्ता के दूसरे दौर की तारीख व स्थल भी तय किया जाएगा। इस बीच ईरान के आयातुल्लाह अली खामनेई ने भी वार्ता को अपना समर्थन दे दिया है। ऐसे में भारत भी इन सारी गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं। इस महीने के अंत में ब्रिक्स संगठन के विदेश मंत्रियों के सम्मेलन विदेश मंत्री एस जयशंकर की ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अर्घची के साथ मुलाकात भी संभव है। यही नहीं अगर सब कुछ ठीक रहा तो जुलाई, 2025 में होने वाली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (ब्राजील) में पीएम नरेन्द्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियान के साथ बैठक कराने को लेकर भी दोनों देशों के अधिकारियों के बीच संपर्क है। ईरान को लेकर कड़ा रवैया अख्तियार कर सकते हैं ट्रंप सूत्रों ने बताया कि, “ट्रंप प्रशासन ने दोबारा सत्ता में आने के कुछ ही दिनों बाद चाबहार को लेकर भारत की विकास सहायता पर भी परोक्ष तौर पर पाबंदी लगाने का संकेत दिया था। यह चिंता की बात थी क्योंकि पूर्व की बाइडन सरकार ने जब ईरान पर प्रतिबंध लगाया था तो चाबहार को उससे अलग रखा था। ऐसे में भारत को इस बात की आशंका थी कि ईरान को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कड़ा रवैया अख्तियार कर सकते हैं। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच सीधी वार्ता की शुरूआत ने माहौल बदल दिया है।” ईरान के दक्षिणी पश्चिमी तट पर स्थित चाबहार पोर्ट भारत की अभी तक की सबसे महत्वाकांक्षी योजना है। इसके जरिए भारत ना सिर्फ पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में चीन की तरफ से निर्मित ग्वादर बंदरगाह को चुनौती पेश करने की मंशा रखता है बल्कि भारतीय उत्पादों को मध्य एशियाई व यूरोपीय बाजार में भेजने के लिए इसका इस्तेमाल करना चाहता है। ईरान के साथ तेल आपूर्ति को लेकर भारत की बातचीत जारी वर्ष 2016 में भारत और ईरान के बीच तब 8 अरब डॉलर के निवेश को लेकर समझौता हुआ था। मई, 2024 में भारत व ईरान के बीच चाबहार पोर्ट पर एक और टर्मिनल के निर्माण के लिए समझौता हुआ था। अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से इसकी प्रगति बहुत उल्लेखनीय नहीं है। भारत की तेल कंपनियों के सूत्रों ने भी बताया है कि ईरान के साथ तेल आपूर्ति को लेकर बातचीत जारी है। वैसे यह तभी संभव होगा जब अमेरिकी सरकार की तरफ से ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाये जाए। ऐसा पूर्व में जुलाई, 2015 में बराक ओबामा की सरकार ने किया था। तब भारतीय कंपनियों ने अमेरिकी प्रतिबंध हटने के तकरीबन एक हफ्ते के भीतर ही पहला तेल सौदा कर लिया था। इस बार प्रतिबंध बहुत लंबा खींच गया है। पिछले कुछ समय से दोनों देशों के पेट्रोलियम सेक्टर में कोई खास संपर्क नहीं है। अब वह संपर्क फिर से स्थापित किया जा रहा है। कभी ईरान भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता देश होता था तेल कंपनियों के सूत्रों का कहना है कि “जिस तरह से वैश्विक हालात अनिश्चित व अस्थिरत हैं उसमें भारत ईरान जैसे एक पुराने भरोसेमंद तेल आपूर्तिकर्ता देश के साथ निश्चित तौर पर कारोबार बढ़ाना चाहेगा।” कभी ईरान भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता देश होता था। वर्ष 2018-19 में भारत ने ईरान से 12 अरब डॉलर मूल्य के कच्चे तेल की खरीद की थी। अमेरिकी प्रतिबंध ने ईरान के पेट्रोलियम सेक्टर में बड़ी भूमिका निभाने की सोच रहे भारतीय कंपनियों के मंसूबों पर भी पानी फेर दिया है। अमेरिका व ईरान के बीच संबंधों में सुधार भारतीय कंपनियों को फिर से अपनी निवेश योजनाओं को आगे बढ़ाने का मौका दे सकता है।

यमन की राजधानी सना के पश्चिमी इलाके में एक सिरेमिक फैक्ट्री पर अमेरिकी हवाई हमला, 123 नागरिकों की मौत

सना हूती नियंत्रण वाले स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि मार्च के मध्य से यमन में अमेरिकी सेना ने फिर से हवाई हमले शुरू किए हैं। इन हमलों में अब तक 123 आम लोगों की मौत हो चुकी है और 247 लोग घायल हुए हैं। घायलों में ज्यादातर महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। यह बयान रविवार देर रात तब जारी किया गया, जब यमन की राजधानी सना के पश्चिमी इलाके में एक सिरेमिक फैक्ट्री पर अमेरिकी हवाई हमला हुआ। इस हमले में 7 लोगों की मौत हो गई और 29 लोग घायल हो गए। 9 अप्रैल को स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया था कि ताजा अमेरिकी हवाई हमलों में 107 लोगों की जान गई है और 223 लोग घायल हुए हैं। हूती समूह आम तौर पर अपने लड़ाकों की मौत की जानकारी नहीं देता। हालांकि, अमेरिकी सेना का कहना है कि इन हमलों में कई हूती नेता मारे गए हैं, लेकिन हूती समूह ने इस दावे को गलत बताया है। यह जानकारी सिन्हुआ समाचार एजेंसी ने दी है। रविवार को हूती समूह ने कहा कि उन्होंने एक और अमेरिकी एमक्यू-9 ड्रोन मार गिराया है। नवंबर 2023 से अब तक यह 19वां ड्रोन है जिसे उन्होंने गिराया है। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारेया ने हूती के अल-मसीरा टीवी पर कहा कि यमन के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में हज्जाह प्रांत के हवाई क्षेत्र में दुश्मन के खिलाफ कार्रवाई करते समय अमेरिका का एक एमक्यू-9 ड्रोन मार गिराया गया। सारेया ने बताया कि ड्रोन को एक स्थानीय स्तर पर निर्मित हुई सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल से गिराया गया। उन्होंने यह भी कहा कि “अमेरिका के लगातार हमलों” से हूती समूह की सैन्य ताकत पर कोई असर नहीं पड़ा है। बयान में कहा गया कि हूती समूह फिलिस्तीनी लोगों का समर्थन करता है और उसकी गतिविधियां तब तक चलती रहेंगी जब तक गाजा पर इजरायली हमला खत्म नहीं होता और घेराबंदी हटा नहीं ली जाती। अमेरिका ने 15 मार्च को हूती लड़ाकों के खिलाफ फिर से हवाई हमले शुरू कर दिए। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का मकसद हूती समूह को लाल सागर में इजरायली और अमेरिकी जहाजों पर हमले करने से रोकना है। उत्तरी यमन के विशाल क्षेत्रों पर नियंत्रण रखने वाले हूती गाजा पट्टी में इजरायली बमबारी के तहत फिलिस्तीनियों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए नवंबर 2023 से इजरायली ठिकानों पर हमला कर रहे हैं।

व्हाइट हाउस के नीतिगत बदलावों को नहीं माना, तो उसका टैक्स-छूट स्टेटस भी छीन लिया जाएगा, ‘टैक्स छूट भी कर देंगे खत्म’

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को एक और धमकी दी है। उन्होंने मंगलवार को कहा कि अगर उसने व्हाइट हाउस के नीतिगत बदलावों को नहीं माना, तो उसका टैक्स-छूट स्टेटस भी छीन लिया जाएगा। इससे पहले, ट्रंप ने यूनिवर्सिटी को मिलने वाली 2.2 बिलियन डॉलर की फंडिंग को रोक दिया था, क्योंकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने कैंपस को नियंत्रण में लाने के प्लान का विरोध किया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया, ‘शायद हार्वर्ड को अपनी टैक्स छूट वाली स्थिति खो देनी चाहिए और इसे एक पॉलिटिकल यूनिट की तरह टैक्स के दायरे में लाना चाहिए। अगर यह राजनीतिक, वैचारिक और आतंकवादी प्रेरित/समर्थन करने वाली ‘बीमारी’ को बढ़ावा देता रहा?’ उन्होंने कहा कि याद रखें, टैक्स छूट की स्थिति पूरी तरह से सार्वजनिक हित में कार्य करने पर निर्भर है! यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ जब विश्वविद्यालय ने सोमवार को कहा था कि वह परिसर में आंदोलन संबंधी सक्रियता को सीमित करने की ट्रंप प्रशासन की मांगों का पालन नहीं करेगा। ट्रंप प्रशासन ने शुक्रवार को हार्वर्ड को लिखे पत्र में व्यापाक सरकारी और नेतृत्व सुधारों की मांग रखी, जिसके तहत हार्वर्ड को योग्यता-आधारित प्रवेश और नियुक्ति नीतियां बनानी होंगी। इसमें चेहरे पर पहने जाने वाले मास्क पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। यह मांग फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने के लिए की गई प्रतीत होती है। यूनिवर्सिटी का क्या है बयान हार्वर्ड के अध्यक्ष एलन गार्बर ने अपने पत्र में कहा, ‘ये मांगें विश्वविद्यालय के प्रथम संशोधन अधिकारों का उल्लंघन करती हैं। टाइटल 6 के तहत सरकार के अधिकार की सीमाओं को पार करती हैं।’ उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार को (चाहे कोई भी पार्टी सत्ता में हो) यह निर्देश नहीं देना चाहिए कि निजी विश्वविद्यालय क्या पढ़ा सकते हैं, किसे एडमिशन दे सकते हैं और किसे नियुक्त कर सकते हैं। साथ ही, अध्ययन और जांच के किन क्षेत्रों को आगे बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने यहूदी-विरोधी भावना को दूर करने के लिए कई सुधार किए हैं।

मॉनसून को लेकर मौसम विभाग ने दिया बड़ा अपडेट

नई दिल्ली गर्मी ने भले ही इस बार जल्दी दस्तक दे दी हो लेकिन मॉनसून को लेकर मौसम विभाग ने बड़ा अपडेट दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने मंगलवार को इसे लेकर अच्छी खबर दी है। IMD ने कहा है कि इस बार मॉनसून में सामान्य से ज्यादा बारिश होगी। इससे किसानों और आम लोगों को राहत मिलेगी। IMD के प्रमुख मृत्युंजय महापात्रा ने कहा कि इस पूरे मॉनसून सीजन में अल नीनो की स्थिति नहीं बनेगी। भारत में मॉनसून के चार महीनों यानी जून से सितंबर में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। इस मॉनसून जमकर बारिश के आसार मौसम विभाग का अनुमान है कि इस बार बारिश का आंकड़ा 87 सेंटीमीटर के दीर्घकालिक औसत का 105 फीसदी रहेगा। आईएमडी चीफ मृत्युंजय महापात्रा ने कहा कि अल नीनो की स्थिति, जो भारतीय उपमहाद्वीप में सामान्य से कम मॉनसून बारिश से जुड़ी है, इस बार विकसित होने की संभावना नहीं है। मौसम विभाग की ओर से ये भविष्यवाणी ऐसे समय में आई है जब देश के कई हिस्से भीषण गर्मी से जूझ रहे हैं। IMD ने बारिश को लेकर दी खुशखबरी मॉनसून में बारिश का असर सीधे खेती पर पड़ता है। अच्छा मॉनसून रहना भारत के कृषि क्षेत्र के लिए बहुत जरूरी है। लगभग 42.3 फीसदी आबादी की आजीविका इसी पर निर्भर है। यह देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 18.2 फीसदी का योगदान करता है। देश के 52 फीसदी कृषि क्षेत्र में बारिश से ही सिंचाई होती है। यह देशभर में पीने के पानी और बिजली उत्पादन के लिए जलाशयों को भरने के लिए भी महत्वपूर्ण है। जानिए कब होगी मॉनसून की एंट्री हालांकि, सामान्य बारिश का मतलब यह नहीं है कि देश में हर जगह और हर समय एक जैसी बारिश होगी। मौसम विभाग के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश में बदलाव हो रहा है। जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि बारिश के दिनों की संख्या कम हो रही है। लेकिन कम समय में भारी बारिश की घटनाएं बढ़ रही हैं। इससे बार-बार सूखा और बाढ़ आ रही है। भारत में मानसून आमतौर पर 1 जून के आसपास केरल के दक्षिणी सिरे पर आता है। यह मध्य सितंबर में वापस चला जाता है। इस मॉनसून उम्मीद से ज्यादा बारिश का अनुमान IMD के अनुसार, सामान्य बारिश का मतलब है कि चार महीने के मॉनसून सीजन में 87 सेंटीमीटर की औसत बारिश का 96 फीसदी से 104 फीसदी तक बारिश होना। यह औसत पिछले 50 सालों के आंकड़ों पर आधारित है। सीधे शब्दों में कहें तो, IMD का कहना है कि इस बार मॉनसून अच्छा रहेगा। किसानों को फायदा होगा और पानी की समस्या भी कम होगी। हालांकि, हमें जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले बदलावों के लिए तैयार रहना होगा। बारिश कभी भी एक जैसी नहीं होती, इसलिए हमें पानी का सही तरीके से इस्तेमाल करना होगा।

वर्षों के इंतजार के बाद सफदरजंग अस्पताल ने मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी की

नई दिल्ली वर्षों के इंतजार के बाद सफदरजंग अस्पताल ने मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया के तहत हाल ही में ईओआई (एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट) जारी किया है। इसके तहत सार्वजनिक क्षेत्र की एक कंपनी को इसके निर्माण की जिम्मेदारी दी जाएगी। अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि करीब 800 करोड़ की लागत से करीब एक हजार बेड वाला मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर बनाया जाएगा। यह प्रोजेक्ट करीब तीन साल में पूरा होगा। यह सेंटर बनकर तैयार हो जाने पर सफदरजंग अस्पताल में महिलाओं और बच्चों को बेहतर इलाज की सुविधा मिल सकेगी। बाल रोग के लिए करीब 650 बेड आवंटित सफदरजंग अस्पताल के स्त्री रोग और बाल रोग विभाग में मरीजों का काफी दबाव रहता है। इस समय अस्पताल में स्त्री रोग, बाल रोग और बाल शल्य चिकित्सा के लिए करीब 650 बेड आवंटित हैं। इस अस्पताल में रोजाना 60 से ज्यादा गर्भवती महिलाओं का प्रसव होता है।   दिल्ली सरकार के अस्पतालों के अलावा एनसीआर के अस्पतालों से हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए इस अस्पताल में भेजा जाता है। इसके अलावा स्त्री रोग से जुड़ी अन्य गंभीर बीमारियों का भी इलाज होता है। इस वजह से एक बेड पर दो महिला मरीजों को रहने को मजबूर होना पड़ता है। इस वजह से इस अस्पताल में लंबे समय से जच्चा-बच्चा देखभाल केंद्र के निर्माण की जरूरत महसूस की जा रही थी। वर्ष 2014 में इस अस्पताल के विस्तार के लिए पहले चरण की परियोजना पूरी होने के बाद दूसरे चरण में इस केंद्र के निर्माण की घोषणा की गई थी। पहले चरण में 800 बिस्तरों वाला सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक और वर्ष 2018 में 500 बिस्तरों वाला इमरजेंसी ब्लॉक बनकर तैयार हुआ था। केयर सेंटर की परियोजना लंबित रही इसके बाद मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर की परियोजना लंबित रही। वर्ष 2022 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से संबंधित स्थायी संसदीय समिति की रिपोर्ट में इस परियोजना को जल्द लागू करने की सिफारिश की गई। फिर अक्तूबर 2022 में अस्पताल प्रशासन ने परियोजना का प्रस्ताव तैयार कर फाइल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी, लेकिन तब तकनीकी कारणों से परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी नहीं मिल सकी। इसके बाद परियोजना में संशोधन कर दोबारा फाइल भेजी गई। अस्पताल प्रशासन के अनुसार अब इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार से सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। इसके अलावा चालू वित्त वर्ष के केंद्रीय बजट में मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर, छात्रावास और एक ऑडिटोरियम के निर्माण के लिए 238.50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसलिए अब अस्पताल प्रशासन ने ईओआई जारी कर इस सेंटर के निर्माण के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से आवेदन मांगे हैं। जल्द ही इसके निर्माण की जिम्मेदारी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी को सौंपी जाएगी। वह कंपनी डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार कर वित्त विभाग से अंतिम मंजूरी प्राप्त करेगी और किसी निजी क्षेत्र की कंपनी को टेंडर आवंटित कर निर्माण कार्य कराएगी। इस भवन को तोड़कर किया जाएगा निर्माण पुराने इमरजेंसी ब्लॉक भवन को तोड़कर बहुमंजिला मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर का निर्माण किया जाएगा। अस्पताल प्रशासन ने 1200-1400 बेड का सेंटर बनाने की योजना बनाई थी लेकिन जगह की उपलब्धता के अनुसार इस सेंटर में करीब एक हजार बेड होंगे। इसमें एक ही छत के नीचे महिलाओं और बच्चों के इलाज और जांच की अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी।

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