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उत्तराखंड में आगामी 30 अप्रैल से चारधाम यात्रा का शुभारंभ होने जा रहा है, इसे लेकर प्रशासन अलर्ट

देहरादून उत्तराखंड में आगामी 30 अप्रैल से चारधाम यात्रा का शुभारंभ होने जा रहा है। चारधाम यात्रियों को किसी तरह की असुविधा न हो, इसे लेकर प्रशासन अलर्ट है। सीएम पुष्कर सिंह धामी खुद नियमित तौर पर तैयारियों का जायजा ले रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि चारधाम यात्रा को सुगम, सुरक्षित और श्रद्धालुओं के लिए सुलभ बनाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि यात्रा की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं और इसे और बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सीएम धामी ने देहरादून में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में चार धाम यात्रा की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि उत्तराखंड आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को बिना किसी परेशानी के चार धाम के दर्शन कराए जाएं। इसके लिए यात्रा से जुड़े सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ लगातार संवाद किया जा रहा है।” उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। यात्रा मार्गों की मरम्मत, स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था, और यातायात प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि चारधाम यात्रा उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस यात्रा को और सरल बनाने के लिए अगर कोई अतिरिक्त कार्य करने की आवश्यकता होगी, तो उसे तत्काल पूरा किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए कि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की कमी न रहे और श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव प्रदान किया जाए। सीएम धामी ने चारधाम यात्रा को सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक जागरूकता से जोड़ते हुए कहा कि उत्तराखंड सरकार का संकल्प है कि राज्य में आने वाला हर व्यक्ति यहां की संस्कृति और आतिथ्य को अनुभव करे। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर ने भारतीय संविधान के निर्माण में ऐतिहासिक योगदान दिया और सामाजिक समानता के लिए अथक प्रयास किए। सीएम ने कहा, “डॉ. अंबेडकर ने कई चुनौतियों का सामना करते हुए देश को एक मजबूत संवैधानिक ढांचा दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके सपनों को साकार करने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं। बाबा साहेब के विचार दोनों ही देश की एकता और अखंडता को मजबूत करते हैं।” उन्होंने बताया कि 20 अप्रैल से 25 अप्रैल तक पूरे उत्तराखंड में डॉ. अंबेडकर को सम्मानित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें सांस्कृतिक आयोजन, सेमिनार, और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं। सीएम ने लोगों से अपील की कि वे इन आयोजनों में हिस्सा लें और बाबा साहेब के विचारों को अपने जीवन में अपनाएं। चारधाम यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में भी उत्साह देखा जा रहा है। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले पंजीकरण कराएं और सभी दिशा-निर्देशों का पालन करें ताकि यात्रा सुचारू रूप से संपन्न हो सके।

देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 676.3 बिलियन डॉलर पर पहुंचा, जानें गोल्ड रिजर्व का क्या है हाल

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह में 10.8 बिलियन डॉलर बढ़कर 676.3 बिलियन डॉलर हो गया है। यह लगातार पांचवां सप्ताह है जब देश के फॉरेक्स रिजर्व में बढ़ोतरी हुई है। इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (Foreign Currency Assets) में 9 बिलियन डॉलर की बढ़त रही, जो अब 574.08 बिलियन डॉलर हो गई हैं। इसके अलावा भारत का गोल्ड रिजर्व (सोने का भंडार) भी 1.5 बिलियन डॉलर बढ़कर 79.36 बिलियन डॉलर हो गया। इसी तरह, विशेष आहरण अधिकार (SDR) भी 186 मिलियन डॉलर बढ़कर 18.36 बिलियन डॉलर तक पहुंच गए। आरबीआई के अनुसार, पिछले हफ्तों में विदेशी मुद्रा बाजार में उनके हस्तक्षेप और मुद्रा के दोबारा मूल्यांकन (Revaluation) से फॉरेक्स रिजर्व में सुधार आया है। सितंबर 2024 में भारत का फॉरेक्स रिजर्व 704.88 बिलियन डॉलर के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा था। मजबूत फॉरेक्स रिजर्व से भारतीय रुपये को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले स्थिर रखने में मदद मिलती है, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत है। अगर फॉरेक्स रिजर्व ज्यादा होता है, तो जरूरत पड़ने पर RBI डॉलर बेचकर रुपये को गिरने से बचा सकता है। वहीं, वाणिज्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2025 में भारत का व्यापार घाटा घटकर 14.05 बिलियन डॉलर रह गया, जो पिछले तीन सालों में सबसे कम है। इसका कारण है कि इस दौरान भारत का निर्यात लगभग स्थिर रहा और आयात में गिरावट आई। यह दिखाता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। टैरिफ वॉर के बीच बढ़ा फॉरेक्स रिजर्व हफ्तेभर में 10.9 डॉलर की यह वृद्धि एक ऐसे समय में हुई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगाए गए टैरिफ के प्रति करेंसी मार्केट की प्रतिक्रियाओं के मद्देनजर वैश्विक स्तर पर डॉलर में भारी गिरावट आई है. बीते दिन यह यूरो के मुकाबले यह तीन साल के निचले स्तर पर पहुंच गया. डॉलर खरीदने के साथ-साथ आरबीआई के रखे गए गैर-डॉलर परिसंपत्तियों का वैल्यूएशन बढ़ने के चलते भी देश का फॉरेक्स रिजर्व बढ़ा है. विदेशी मुद्रा संपत्तियाें में भी हुई वृद्धि विदेशी मुद्रा संपत्तियां (Foreign Currency Assets) भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा हैं. रिजर्व बैंक की डेटा के मुताबिक, 4 अप्रैल को खत्म हुए हफ्ते में FCA 9.1 अरब डॉलर बढ़कर 574.09 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. इसमें विदेशी मुद्रा भंडार में रखी गई यूरो, पाउंड और येन जैसी दूसरी  फॉरेन करेंसी के मूल्य में घट-बढ़ का प्रभाव शामिल होता है. भारत का गोल्ड रिजर्व भी बढ़ा आरबीआई की दी जानकारी के मुताबिक, सप्ताह के दौरान देश का स्वर्ण भंडार भी 1.567 मिलियन डॉलर बढ़कर 79.36 बिलियन डॉलर हो गया है. विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 186 मिलियन डॉलर बढ़कर 18.362 बिलियन डॉलर हुआ. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में देश का आरक्षित विदेशी मुद्रा भंडार 4.6 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.46 अरब डॉलर हो गया. पाकिस्तान के फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व में भी आई तेजी दुनिया में ट्रंप के टैरिफ वॉर से मची उथल-पुथल के बीच पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में भी तेजी आई है. स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) के विदेशी मुद्रा भंडार में 2.3 करोड़ अमेरिकी डॉलर का उछाल आया है. इसी के साथ पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 15.75 अरब डॉलर हो गया है.  

हमें दूसरों की पूजा के तरीकों से कोई विरोध नहीं है, जब तक कि यह इस देश की संस्कृति के खिलाफ न हो- दत्तात्रेय होसबाले

नई दिल्ली  भारत में नए मंदिर-मस्जिद विवाद तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसा कोई सप्ताह नहीं जाता जब किसी नए शहर में मंदिर के नीचे मस्जिद होने का दावा सामने न आए और तनाव बढ़ जाए। हालात इतने नाजुक हो गए हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) भी इससे चिंतित दिखाई दे रहा है। RSS ने पहले अयोध्या, मथुरा और काशी जैसे बड़े मंदिर-मस्जिद विवादों में ही हिंदू पक्ष के दावों का समर्थन किया था। RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कई बार मस्जिदों के नीचे मंदिरों की खोज को रोकने की अपील की है। अब संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भी इसी तरह की चिंता जताई है। होसबाले ने पूछा है कि अगर हम 30,000 मस्जिदों को खोदना शुरू कर दें, यह दावा करते हुए कि वे मंदिरों को तोड़कर बनाई गई हैं, तो भारत किस दिशा में जाएगा? उन्होंने RSS की कन्नड़ साप्ताहिक पत्रिका ‘विक्रमा’ को दिए एक इंटरव्यू में पूछा, ‘क्या इससे समाज में और अधिक शत्रुता और नाराजगी नहीं पैदा होगी? क्या हमें एक समाज के रूप में आगे बढ़ना चाहिए या अतीत में फंसे रहना चाहिए? कथित तौर पर नष्ट किए गए मंदिरों को पुनः प्राप्त करने के लिए हमें इतिहास में कितना पीछे जाना चाहिए?’ राम मंदिर आंदोलन पर भी बोले होसबाले RSS के शताब्दी वर्ष के मौके पर हुए इस इंटरव्यू में होसबाले ने कई विषयों पर संगठन के विचार स्पष्ट किए। इनमें से कई विचार भारतीय जनता पार्टी (BJP) और संघ से जुड़े अन्य संगठनों के विचारों से मेल नहीं खाते हैं। मस्जिदों के नीचे मंदिरों की खोज पर होसबाले ने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन RSS ने शुरू नहीं किया था। RSS के स्वयंसेवक सांस्कृतिक महत्व के कारण इस आंदोलन में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा, ‘उस समय, विश्व हिंदू परिषद और धार्मिक नेताओं ने तीन मंदिरों का उल्लेख किया था। अगर कुछ RSS स्वयंसेवक इन तीन मंदिरों को फिर से प्राप्त करने के प्रयासों में शामिल होना चाहते थे, तो RSS ने इसका विरोध नहीं किया। लेकिन अब स्थिति बहुत अलग है।’ संघ को भी सता रही दुश्मनी और नफरत की चिंता उन्होंने पूछा, ‘देश में 30,000 मस्जिदों के नीचे मंदिरों के दावे हैं। अगर हम इतिहास को पलटने के लिए उन सभी को खोदना शुरू कर दें, तो क्या इससे समाज में और अधिक दुश्मनी और नफरत नहीं पैदा होगी?’ होसबाले ने कहा कि मस्जिदों के नीचे मंदिरों की खोज करने से हम अस्पृश्यता को खत्म करने, युवाओं में जीवन मूल्यों को स्थापित करने, संस्कृति की रक्षा करने और भाषाओं को संरक्षित करने जैसे अधिक महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान देने से वंचित रह जाएंगे। ‘हिंदू धर्म की जड़ों को जगाने से दूर होगी चिंता’ उन्होंने कहा, ‘जब मंदिरों की बात आती है, तो क्या किसी इमारत में जो अब एक मस्जिद है, कोई दिव्यता है? क्या हमें इमारत में हिंदू धर्म की तलाश करनी चाहिए, या हमें उन लोगों में हिंदू धर्म को जगाना चाहिए जो खुद को हिंदू नहीं मानते हैं? इमारतों में हिंदू धर्म के अवशेषों की खोज करने के बजाय, अगर हम समाज में हिंदू धर्म की जड़ों को जगाते हैं, तो मस्जिद का मुद्दा अपने आप हल हो जाएगा।’ भारतीय मुसलमानों के लिए संघ का संदेश होसबाले ने दावा किया कि भारत में लोग एक ही नस्ल के हैं और हिंदू धर्म अनिवार्य रूप से मानवतावाद है। उन्होंने कहा, ‘भारतीय मुसलमानों ने अपनी धार्मिक प्रथाओं को बदल दिया होगा, लेकिन उन्हें अपनी राष्ट्रीय और सांस्कृतिक जड़ों को नहीं छोड़ना चाहिए। यह RSS का रुख है।’ हालांकि, उन्होंने कहा कि मुसलमानों या ईसाइयों को हिंदू होने के लिए अपना धर्म छोड़ने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हमें दूसरों की पूजा के तरीकों से कोई विरोध नहीं है, जब तक कि यह इस देश की संस्कृति के खिलाफ न हो।’ होसबाले ने कहा कि RSS ने हमेशा शिक्षा के माध्यम के रूप में अपनी मातृभाषा को बढ़ावा दिया है। ‘हम मानते हैं कि बच्चों के लिए सीखना आसान और अधिक स्वाभाविक है जब उन्हें उनकी मातृभाषा में पढ़ाया जा रहा हो।’ उन्होंने कहा कि शिक्षा में क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने को न केवल एक व्यक्तिगत स्वतंत्रता के रूप में देखा जाना चाहिए, बल्कि संस्कृतियों को संरक्षित करने के साधन के रूप में भी देखा जाना चाहिए। ‘अंग्रेजी के प्रति आकर्षण समझ में आता है। लेकिन हमें एक स्थायी समाधान की आवश्यकता है।’ भाषा विवाद पर भी बोले संघ के नेता होसबाले ने ऐसी आर्थिक योजनाएं बनाने का भी आह्वान किया जो क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षित लोगों के लिए नौकरियां प्रदान करें। उन्होंने कहा, ‘बुजुर्गों, न्यायाधीशों, शिक्षा विशेषज्ञों, लेखकों, राजनेताओं और धार्मिक नेताओं को इस पर सकारात्मक रुख अपनाना चाहिए। तीन-भाषा फॉर्मूले का उचित कार्यान्वयन 95% समस्या का समाधान कर सकता है। समस्याएं तब पैदा होती हैं जब भाषा का राजनीतिकरण किया जाता है। हमारे देश ने हजारों वर्षों से भाषाई विविधता के भीतर एकता बनाए रखी है।’ सियासी दलों को लेकर संघ के नेता ने कही बड़ी बात होसबाले ने कहा कि यह गलत है कि किसी विशेष राजनीतिक समूह से संबंधित लोगों को देशभक्त के रूप में पहचाना जाए और दूसरों को गद्दार कहा जाए। ‘देशभक्ति और राष्ट्रवाद सामान्य लक्षण हैं।’ उन्होंने कहा, ‘देश में कई राजनीतिक दलों का अस्तित्व इसकी एकता में बाधा नहीं है। हालांकि, राष्ट्रवादी दृष्टिकोण से, हम सभी को कुछ सार्वभौमिक सिद्धांतों का पालन करना चाहिए।’ होसबाले से पूछा गया कि क्या RSS का केवल एक राजनीतिक दल का समर्थन करना एक समस्या है। उन्होंने कहा कि यह मानना गलत है कि RSS केवल एक राजनीतिक दल का समर्थन करता है। उन्होंने कहा, ‘स्वयंसेवक किसी भी सामाजिक या राजनीतिक व्यवस्था में काम करने के लिए स्वतंत्र हैं। स्वयंसेवक स्वाभाविक रूप से उन दलों के साथ जुड़ते हैं जिनके RSS के साथ संबंध हैं।’ उन्होंने कहा कि ‘अन्य दलों को स्वयंसेवकों को RSS और उनकी पार्टी दोनों का हिस्सा बनने की अनुमति देनी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि RSS के स्वयंसेवकों के अल्पसंख्यकों, जाति, एकता, धर्मांतरण और अनुच्छेद 370 जैसे मुद्दों पर कुछ विश्वास हैं, जो उनके लिए ऐसी पार्टी में काम करना मुश्किल बना देंगे जो इन सिद्धांतों के खिलाफ है। ‘जबकि कई राजनीतिक दलों ने खुले तौर पर RSS … Read more

देश में पहली बार ऐसा हुआ है कि राज्यपाल या राष्ट्र्पति की मंजूरी के बिना कोई विधेयक कानून बना

नई दिल्ली देश में पहली बार ऐसा हुआ है कि राज्यपाल या राष्ट्र्पति की मंजूरी के बिना कोई विधेयक कानून बन चुका है। ये ऐतिहासिक घटना सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद हुई, जिसमें तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि द्वारा विधेयकों को मंजूरी न दिए जाने के मामले में सुनवाई हो रही थी। न्यायमूर्ति एसबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि इन विधेयकों को उस तारीख से मंजूरी दी गई मानी जाएगी, जिस दिन इसे फिर से पेश किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने की थी टिप्पणी पीठ ने टिप्पणी की कि राज्यपाल ने विधेयकों को पहली बार में मंजूरी नहीं दी। जब इसे दोबारा भेजा गया, तो अब राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित नहीं किया जा सकता। बता दें कि इसके पहले सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल के रवैये पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि विधेयकों में मुद्दों को खोजने में उन्हें तीन साल क्यों लगे। बता दें कि तमिलनाडु की सरकार और राज्यपाल के बीच गतिरोध लंबे समय से चला आ रहा है। तमिलनाडु की विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को राज्यपाल की मंजूरी नहीं मिल पा रही थी। विधेयकों को लौटाने के बाद इन्हें दोबारा पारित कर राज्यपाल के पास भेजा गया था, फिर भी ये बिल मंजूरी के बिना लटके हुए थे। 10 विधेयक बन गए कानून इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। राज्य सरकार ने राज्यपाल पर जानबूझकर विधेयकों में देरी करने और विकास को बाधित करने का आरोप लगाया था। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 10 विधेयक बिना राज्यपाल या राष्ट्रपति की मंजूरी के कानून बन गए है। इन विधेयकों में राज्य द्वारा संचालित विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की नियुक्ति पर संशोधित नियम शामिल हैं। स्टालिन सरकार ने इसे भारतीय राज्यों के लिए एक बड़ी जीत बताते हुए अदालत का धन्यवाद दिया है।  

मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिले में वक्फ संशोधन कानून के विरोध में भड़की हिंसा, तीन लोगों की मौत, 110 गिरफ्तार

कोलकाता पश्चिम बंगाल के कई जिलों में वक्फ कानून के खिलाफ उग्र प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिले में वक्फ संशोधन कानून के विरोध के दौरान हिंसा भड़क गई। इस हिंसा में तीन लोगों लोगों की मौत हो गई है। जानकारी के अनुसार, जिले के शमशेरगंज में एक घर से पिता-पुत्र की रक्तरंजित लाश बरामद हुई है। उनके शरीर पर अनेक जगहों पर जख्म के निशान हैं। वहीं, सूती में यह किशोर की गोली लगने से मौत हो गई है। अब तक 110 लोगों की गिरफ्तारी मुर्शिदाबाद में भड़की हिंसा के सिलसिले में 110 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। शुक्रवार को हिंसा के दौरान पुलिस वैन सहित कई वाहनों में आग लगा दी गई। सुरक्षा बलों पर पथराव किया गया और सड़कें ब्लॉक कर दी गईं। हिंसा की घटना में 15 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए हैं तथा अनेक लोग जख्मी हुए हैं।   केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने कहा है कि मुर्शिदाबाद में हालात बेकाबू हैं। स्थिति काफी गंभीर है और यह राज्य प्रशासन के नियंत्रण के बाहर है। हिंसा ग्रस्त इलाकों में केंद्रीय बल की तैनाती की मांग को लेकर अधिकारी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। दो न्यायाधीशों की विशेष बेंच में इस पर शाम में सुनवाई होगी। वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सभी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। दूसरी ओर पुलिस ने लोगों को किसी प्रकार के उकसावे पर ध्यान नहीं देने को कहा है। बंगाल में नहीं लागू किया जाएगा वक्फ कानून मुर्शिदाबाद समेत राज्य के अन्य हिस्सों में फैली हिंसा के बीच सीएम ममता बनर्जी ने लोगों से शांति स्थापित करने की अपील की है। सीएम ममता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि हम वक्फ कानून के पक्ष में नहीं है। पश्चिम बंगाल में वक्फ कानून लागू नहीं होगा फिर दंगा किस बात का। सीएम ममता ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि सभी धर्मों के लोगों से मेरी विनम्र अपील है कि कृपया शांत रहें, संयमित रहें। धर्म के नाम पर कोई भी गलत हरकत न करें। हर इंसान की जान कीमती है, राजनीति करने के लिए दंगे न भड़काएं। जो लोग दंगे भड़का रहे हैं, वे समाज को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में सरकारी स्कूल के शिक्षकों के 44,000 पद समाप्त कर दिए, निजी क्षेत्र के हवाले शिक्षा व्यवस्था

लाहौर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में शिक्षा विभाग ने ‘निजी क्षेत्र को आउटसोर्सिंग कैंपेन’ के तहत सरकारी स्कूल के शिक्षकों के 44,000 पद समाप्त कर दिए। शिक्षकों का कहना है कि इस फैसले से युवाओं में बेरोजगारी बढ़ेगी, जो पहले से ही निजी क्षेत्र में वेतन कटौती, नौकरी छूटने और छंटनी के कारण परेशान हो रहे हैं। पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग के विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, अब निजी क्षेत्र के मालिकों पर निर्भर होगा कि वे अपनी नीति के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति करें। स्कूल शिक्षिका हुमैरा ने कहा, “निजी क्षेत्र पहले से ही कर्मचारियों की संख्या में कटौती कर रहा है, रखे गए लोगों के वेतन में कटौती कर रहा है। लाखों कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है। वे इसका कारण बताते हैं कि व्यापार में घाटे के कारण उन्हें न्यूनतम कटौती करनी पड़ रही है।” हुमैरा ने कहा, “यह देखना चौंकाने वाला है कि सरकार संस्थानों का निजीकरण कर रही है। मैं एक निजी स्कूल में शिक्षिका के रूप में काम करती हूं। मैं जानती हूं कि यह कितना कठिन है। हम पर अधिक काम का बोझ डाला जा रहा है। हमें चेतावनी दी जा रही है कि अगर हम आधे वेतन पर दोगुना काम नहीं करेंगे तो हमारी छंटनी कर दी जाएगी, और यह भी नहीं भूलना चाहिए कि हमें समय पर भुगतान भी नहीं किया जाता है।” पंजाब शिक्षा विभाग का यह ताजा फैसला ऐसे समय में आया, जब हजारों युवा ग्रेजुएट सरकारी क्षेत्र के संस्थानों में भर्ती प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे थे। शिक्षक संघ सरकार से मांग कर रहे हैं कि वह भर्ती शुरू करे और रिक्त पदों को भरे, जो पिछले सात वर्षों से लंबित हैं। पंजाब प्रांत के सरकारी स्कूलों में 2018 में आखिरी भर्ती अभियान के बाद से कम से कम 1,00,000 शिक्षकों की कमी है। सरकारी स्कूल के शिक्षक मिशाल ने कहा, “सरकारी स्कूलों में 100,000 या उससे अधिक शिक्षकों की कमी ने छात्रों की शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। और अब, 44,000 नौकरियों के खत्म होने से समग्र शिक्षा प्रणाली पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।” आंकड़े बताते हैं कि 2021-22 में पाकिस्तान में कम से कम 26.2 मिलियन बच्चे स्कूल नहीं जा रहे थे। इसके अलावा, 2023 के लिए पाकिस्तान की बेरोजगारी दर 5.41 प्रतिशत थी। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में कम से कम 4.5 मिलियन लोग बेरोज़गार हैं, जबकि 2024 के दौरान बेरोजगारी दर बढ़कर कम से कम 6.3 प्रतिशत हो गई है।

कॉलेज छात्रों को ले जा रही बस पलटी, एक छात्रा की मौत, 23 अन्य घायल

कुपवाड़ा उत्तर कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में उस वक्त मातम पसर गया जब छात्रों से भरी एक कॉलेज बस हादसे का शिकार हो गई। कॉलेज छात्रों को ले जा रही एक बस वोधपोरा इलाके में पलट गई। इस हादसे में एक छात्रा की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 23 अन्य छात्र बुरी तरह घायल हो गए। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि बस का ड्राइवर संतुलन खो बैठा, जिससे वाहन अचानक पलट गया। हादसे के तुरंत बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोगों में घबराहट फैल गई। सूचना मिलते ही स्थानीय लोग, पुलिस और मेडिकल टीम मौके पर पहुंची और सभी घायलों को फौरन हंदवाड़ा के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल प्रशासन ने एक छात्रा की मौत की पुष्टि की है, जबकि बाकी घायलों का इलाज चल रहा है। इनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस ने हादसे को लेकर मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है कि क्या तकनीकी खराबी या लापरवाही इसकी वजह बनी। हादसे की खबर जैसे ही छात्रों के परिवारों तक पहुंची, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

तेज रफ्तार कार सड़क से उतरकर गहरी खाई में गिरने के बाद नदी में समा गई, एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत

देवप्रयाग उत्तराखंड के टिहरी जिले में स्थित देवप्रयाग में तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर नदी में गिर गई। इस हादसे में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि कार सड़क से उतरकर गहरी खाई में गिरने के बाद नदी में समा गई, जिसके कारण यह घातक दुर्घटना हुई। अधिकारियों के अनुसार, दुर्घटना के समय कार में छह लोग सवार थे। एक महिला को मलबे से बचाकर इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाकी पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में घायल महिला का अस्पताल में इलाज जारी है। स्थानीय लोगों से सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) को भी मौके पर बुलाया गया। एसडीआरएफ ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बचाव अभियान शुरू किया। टीमों ने क्षतिग्रस्त कार को नदी से बाहर निकालने के लिए क्रेन और अन्य भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया, लेकिन दुर्गम इलाके के कारण इस प्रक्रिया में कई घंटे लग गए। अधिकारियों ने बताया कि वाहन में फंसे सभी शवों को निकाल लिया गया है। एसडीआरएफ के एक अधिकारी ने बताया, “कार को बाहर निकाल लिया गया है। इसमें कई घंटे लगे। शवों को भी निकाल लिया गया है। पुलिस जांच कर रही है कि दुर्घटना कैसे हुई।” पुलिस के अनुसार, सभी पांचों मृतक एक ही परिवार के बताए जा रहे हैं। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए नजदीकी अस्पताल भेज दिया गया है। हालांकि, दुर्घटना के वास्तविक कारण की अभी भी जांच की जा रही है। प्रारंभिक रिपोर्ट से पता चलता है कि तेज गति के कारण चालक ने वाहन पर से नियंत्रण खो दिया, जिस कारण कार नदी में गिर गई और पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। अधिकारियों के अनुसार, मृतकों के रिश्तेदार भी दुर्घटना स्थल पर पहुंच गए।

नागपुर की एल्युमीनियम फॉयल बनाने वाली फैक्ट्री में हुआ बड़ा हादसा, आग लगने से 5 लोगों की मौत

नागपुर महाराष्ट्र के नागपुर में मौजूद एल्युमीनियम फैक्ट्री में अचानक आग लग गई। इस लोग इस आग की चपेट में आ गए। खबरों की मानें तो इस हादसे में 5 लोगों की मौत हो गई है। वहीं, चार लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है। इस घटना से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। 9 लोग आग में झुलसे मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नागपुर जिले की एल्युमीनियम फैक्ट्री अचानक से आग की चपेट में आ गई। इस आग में 9 लोग बुरी तरह से झुलस गए। इनमें से 3 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं 6 गंभीर रूप से घायल थे। घायलों को इलाज के लिए नजदीकी मेडिकल कॉलेज भेजा गया। इस दौरान 2 अन्य लोगों ने भी दम तोड़ दिया। 4 घायलों की हालत अभी भी गंभीर बताई जा रही है। विस्फोट के बाद लगी आग नागपुर ग्रामीण के एसपी हर्ष पोद्दार ने बताया कि उमरेर में स्थित एल्युमीनियम फैक्ट्री में भयंकर विस्फोट हुआ। इसी दौरान फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। इस हादसे में 5 लोगों की जान चली गई है। मृतकों में मौजूद 2 लोगों ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। वहीं 3 मृतकों का पहले कुछ पता नहीं चला। हालांकि बाद में उनके शवों की भी शिनाख्त हो गई है। कई घंटे बाद बुझी आग मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो यह हादसा बीती शाम तकरीबन 7 बजे का है। फैक्ट्री में अचानक विस्फोट हुआ। धमाका इतना तेज था कि इसकी आवाज कई किलोमीटर तक सुनने को मिली। हादसे की सूचना पुलिस को दी गई। वहीं फायर ब्रिगेड ने मौके पर पहुंच कर आग बुझाना शुरू कर दिया। कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया है।

IRCTC ने तत्काल टिकट बुकिंग के टाइम की वायरल अफवाहों पर लगाया विराम

नई दिल्ली सोशल मीडिया पर अगर आप भी देख रहे हैं कि ट्रेन की तत्काल टिकट बुकिंग के समय में बदलाव हुआ है, तो ठहरिए! ऐसी खबरों की सच्चाई जानना जरूरी है, वरना अगली बार स्टेशन पहुंचने पर हाथ मलते रह जाएंगे। IRCTC ने खुद सामने आकर इन वायरल अफवाहों पर विराम लगा दिया है और बताया है कि तत्काल और प्रीमियम तत्काल टिकट बुकिंग की टाइमिंग में कोई फेरबदल नहीं हुआ है। IRCTC  ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। IRCTC ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर एक पोस्ट साझा करते हुए बताया कि बुकिंग टाइमिंग को लेकर सोशल मीडिया पर जो भी पोस्ट वायरल हो रही हैं, वे भ्रामक और गलत हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तत्काल या प्रीमियम तत्काल टिकट बुकिंग के समय में कोई बदलाव प्रस्तावित नहीं है, न ही एजेंट्स के लिए बुकिंग समय में कोई फेरबदल किया गया है।     Some posts are circulating on Social Media channels mentioning about different timings for Tatkal and Premium Tatkal tickets.     No such change in timings is currently proposed in the Tatkal or Premium Tatkal booking timings for AC or Non-AC classes.     The permitted booking… pic.twitter.com/bTsgpMVFEZ — IRCTC (@IRCTCofficial) April 11, 2025     AC क्लास की तत्काल टिकट की बुकिंग यात्रा से एक दिन पहले सुबह 10 बजे शुरू होती है।     नॉन एसी क्लास के लिए, यह बुकिंग यात्रा से एक दिन पहले सुबह 11 बजे उपलब्ध होती है।     तत्काल टिकटों पर सामान्य से अधिक शुल्क वसूला जाता है।     यह सुविधा कुछ चुनिंदा ट्रेनों के लिए ही उपलब्ध है।     टिकट बुक करते समय यात्री को “तत्काल” विकल्प चुनना होता है। तत्काल सेवा क्यों है खास? यह सेवा उन यात्रियों के लिए शुरू की गई थी जिनकी यात्रा की योजना अचानक बनती है और उन्हें जल्दी में ट्रेन की सीट की जरूरत होती है। यह एक सुविधा है, न कि आम टिकट की तरह बुकिंग का तरीका। यदि आप यात्रा की योजना बना रहे हैं और टिकट के समय को लेकर असमंजस में हैं, तो सोशल मीडिया पर वायरल खबरों से सावधान रहें। बुकिंग से जुड़ी हर जानकारी के लिए IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट या सोशल मीडिया हैंडल पर ही भरोसा करें।  

तेहरान ने कहा चर्चा केवल परमाणु मुद्दों पर होगी, ईरान और अमेरिका को ओमान में ‘अप्रत्यक्ष उच्च स्तरीय वार्ता’ कर रहे हैं

मस्कट ईरान और अमेरिका शनिवार को ओमान में ‘अप्रत्यक्ष उच्च स्तरीय वार्ता’ कर रहे हैं। तेहरान ने जोर देकर कहा है कि चर्चा केवल परमाणु मुद्दों पर होगी। ईरानी मीडिया ने शनिवार को बताया कि यह वार्ता ओमानी विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी की मध्यस्थता में होगी। ईरान की तस्नीम समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, “ईरान ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि वह इन वार्ताओं में धमकियों को स्वीकार नहीं करेगा।” ईरानी विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ वार्ता एक समझौते तक पहुंच सकती है, बशर्ते कि वाशिंगटन ‘आवश्यक और पर्याप्त’ राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रदर्शन करे। अराघची मस्कट वार्ता में देश के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। मध्य पूर्व के लिए अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ अमेरिकी प्रतिनिधि होंगे। आईआरएनए समाचार एजेंसी ने शनिवार को अराघची के हवाले से कहा, “यदि दूसरा पक्ष समान स्तर के दृष्टिकोण के साथ वार्ता की मेज पर आता है, तो यह एक मौका होगा जो बातचीत के लिए एक मार्ग निर्धारित करेगा।” अराघची यह बात कहते रहे हैं कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से ‘शांतिपूर्ण और वैध’ है। उनका यह भी कहना है कि ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों के बारे में किसी भी मौजूदा अस्पष्टता को हल करने के लिए तैयार है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मार्च के अंत में मिडिया दिए एक इंटरव्यू में धमकी दी कि यदि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत करने से इनकार करता है तो वह उस पर ‘अभूतपूर्व सैन्य हमले’ करेंगे। ईरान ने 2015 में विश्व शक्तियों के साथ परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसे औपचारिक रूप से ज्वाइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (जेसीपीओए) के रूप में जाना जाता है। जेसीपीओए को ईरान परमाणु समझौता या ईरान डील के नाम से भी जाना जाता है। इसके तहत प्रतिबंधों में राहत और अन्य प्रावधानों के बदले में ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने पर राजी हुआ था। इस समझौते को 14 जुलाई 2015 को वियना में ईरान, पी5+1 (संयुक्त राष्ट्र के पांच स्थायी सदस्य- चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका- प्लस जर्मनी) और यूरोपीय संघ के बीच अंतिम रूप दिया गया। अमेरिका ने 2018 में समझौते से खुद को अलग कर लिया और ‘अधिकतम दबाव’ की नीति के तहत प्रतिबंध लगा दिए। जेसीपीओए को फिर से लागू करने के लिए बातचीत अप्रैल 2021 में ऑस्ट्रिया के वियना में शुरू हुई। हालांकि कोई विशेष सफलता नहीं हो पाई।

मणिपुर के हिंसा प्रभावित इलाके में फिर दरिंदगी, रेप के बाद नाबालिग की हत्या

मणिपुर मणिपुर के चुराचंदपुर जिले में ‘मानसिक रूप से अक्षम’ एक नाबालिग लड़की के साथ कथित तौर पर बलात्कार किया गया और उसकी हत्या कर दी गई। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि लड़की का शव जिले के थानलोन उप-मंडल के एक जंगल में मिला। उन्होंने बताया, ‘लड़की जांगफाई इलाके के एक जंगल में जलाऊ लकड़ी लेने गई थी। जब वह वापस नहीं लौटी तो उसके पिता को चिंता हुई और वह अपनी बच्ची को ढूंढ़ने जंगल में गए।’ अधिकारियों ने बताया कि लड़की का शव मिला। उसके कपड़े फटे हुए थे और शरीर पर चोट के निशान थे। पुलिस ने मामले में एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है और जांच जारी है। चुराचंदपुर जिले में एक महीने से भी कम समय में नाबालिग लड़कियों के यौन उत्पीड़न से जुड़ी यह तीसरी घटना है। इस महीने की शुरुआत में चुराचंदपुर जिले में एक नाबालिग लड़के ने 10 वर्षीय लड़की का यौन उत्पीड़न किया था। पिछले महीने चुराचांदपुर जिले में आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों के एक राहत शिविर के पास नौ वर्षीय लड़की का शव पाया गया था। लड़की के गर्दन पर चोट के निशान थे और शरीर पर खून था। उसके माता-पिता और ‘ज़ोमी मदर्स एसोसिएशन’ सहित नागरिक संस्थाओं ने आरोप लगाया था कि लड़की का यौन उत्पीड़न करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई।

ट्रंप प्रशासन ने अवैध रूप से रह रहे लोगों को चेतावनी देते हुए कहा, आज आखिरी दिन, रजिस्टर हो या भुगतो

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन यूएस में रहने वाले विदेश नागरिकों पर और सख्ती बरतने जा रहा है। अवैध प्रवासियों को देश से बाहर निकालने के अपने अभियान के तहत अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के सचिव क्रिस्टी नोएम ने 30 दिनों से ज्यादा समय से अमेरिका में रह रहे लोगों को एलियन रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत खुद को रजिस्टर कराने का कहा है। उन्होंने अवैध रूप से रह रहे लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि 11 अप्रैल रजिस्टर कराने की आखिरी तारीख है। अगर वह आदेश को नहीं मानते हैं तो परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें। इससे पहले अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने विदेशी नागरिकों के लिए एक प्रेस रिलीज जारी करके कहा था कि ऐसे सभी विदेशी नागरिकों, जो 30 दिन से ज्यादा समय से अमेरिका में रह रहे हैं उन्हें सरकार के साथ एलियन एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है। अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो इसे अपराध माना जाएगा और कानून के अनुसार इसके लिए उन पर जुर्माना या जेल भेजा जा सकता है। इतना ही नहीं जरूरत पड़ने पर उनका वीजा रद्द कर उन्हें डिपोर्ट भी किया जा सकता है। नोएम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और मेरे पास अमेरिका में रह रहे सभी अवैध प्रवासियों के लिए बस एक ही संदेश है कि अभी चले जाओ.. यदि आप अभी चले जाते हैं तो आपको वापस लौटने और अपनी स्वतंत्रता आनंद लेने के साथ-साथ अमेरिकी सपने को जीने का एक नया अवसर मिल सकता है। अगर नहीं, तो यकीन मानिए आपको गिरफ्तार किया जाएगा, जुर्माना लगाया जाएगा, निर्वासित किया जाएगा और आप फिर कभी भी हमारे देश में वापस नहीं आ पाएंगे। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने भी नोएम की बात को दोहराते हुए कहा कि आज आखिरी दिन है। राष्ट्रपति ट्रंप और नोएम पहले ही अपनी बात को साफ कर चुके हैं। सभी लोगों को 11 अप्रैल तक अपने आप को सरकार के साथ एलियन रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत रजिस्टर करा लेना चाहिए नहीं तो.. इसके परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए। लैविट के मुताबिक 11 अप्रैल या उसके बाद आने वाले लोगों को आगामी 30 दिनों के अंदर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को पूरा करना होगा। वैध रूप से रह रहे भारतीयों पर क्या होगा असर? अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग भी रह रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक जो लोग अमेरिका में वैध वीजा लेकर प्रवेश करते हैं उनके पास ग्रीन कार्ड, रोजगार दस्तावेज, बॉर्डर पार करने का कार्ड या l-94 रिकॉर्ड होता है। ऐसे में वह पहले से ही सरकार के साथ पंजीकृत हैं उन्हें इस प्रक्रिया से कोई फर्क नहीं पडेगा। हालांकि ट्र्ंप प्रशासन के मुताबिक ऐसे लोगों को चौबीसों घंटे अपने साथ अपने ऐसे दस्तावेज रखने होंगे। इतना ही नहीं ऐसे नागरिकों के बच्चों को भी अपने 14वें जन्मदिन के 30 दिनों के भीतर अपना रजिस्ट्रेशन कराना और अपने फिंगरप्रिंट देने होंगे।

राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों में प्री प्राइमरी शिक्षकों के 6297 पदों को भरने की मंजूरी दी, र्ती इसी महीने होगी शुरू

शिमला नियम व विवादों की उधेड़बुन में फंसी प्री प्राइमरी शिक्षक भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों में प्री प्राइमरी शिक्षकों के 6297 पदों को भरने की मंजूरी दे दी है। प्री नर्सरी कक्षाओं वाले स्कूलों में भर्ती किए जाने वाले शिक्षकों को सरकार ने प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा प्रशिक्षक का पदनाम दिया है। इसी महीने इसके लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। भर्तियों को लेकर अब कोई विवाद नहीं हिमाचल प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक निगम के माध्यम से यह भर्तियां की जाएगी। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की अध्यक्षता में बीते रोज आयोजित समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया है। बैठक में भर्तियों के मामले पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि भर्तियों को लेकर कोर्ट ने जो रोक लगाई थी वह हट गई है। अब इसमें कोई विवाद नहीं है। इलेक्ट्रानिक निगम ने बताया कि कंपनियों का चयन कर लिया गया है। विभाग से अधिकारिक आदेश आने का इंतजार है। आदेश आते ही वह इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर देंगे। शिक्षा मंत्री ने प्रक्रिया शुरू कराने के दिए निर्देश  शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली को निर्देश दिए हैं कि इसके लिए प्रक्रिया जल्द शुरू करवाए। अब प्रारंभिक शिक्षा विभाग स्कूल वाइज वैकेंसी देगा। बुधवार को सरकारी अवकाश खत्म होते ही इसके लिए फाइल मूवमेंट शुरू हो जाएगी। इस महीने के अंतिम सप्ताह तक इसके लिए आवेदन मांग लिए जाएंगे। हालांकि यह भर्तियां कंपनियों के माध्यम से ही करवाई जाएगी। दो साल का डिप्लोमा होगा अनिवार्य इस भर्ती में नर्सरी टीचर एजुकेशन डिप्लोमा, प्री स्कूल एजुकेशन या अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन प्रोग्राम में दो साल का डिप्लोमा जरूरी है। यह डिप्लोमा नेशनल काउंसिल फार टीचर एजुकेशन से मान्यता प्राप्त संस्थान से हासिल किया हुआ होना चाहिए। आवेदकों के डिप्लोमा और अन्य कागजातों की जांच स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डिवेलपमेंट कारपोरेशन करेगा। जो भी शिक्षक नियुक्त होंगे, प्रारंभिक शिक्षा विभाग पर उनका कोई दायित्व नहीं होगा। 12वीं कक्षा में 50 प्रतिशत अंक होने चाहिए। एससी/एसटी/ओबीसी/पीडब्ल्यूडी उम्मीदवारों के लिए योग्यता अंकों में पांच प्रतिशत की छूट रहेगी। 21 से 45 वर्ष की आयु वाले इसके लिए पात्र होंगे। उम्मीदवारों को वास्तविक हिमाचली होना आवश्यक रहेगा। जयराम सरकार में शुरू हुई थी प्रक्रिया, विवादों में फंसी रही पूर्व जयराम सरकार ने इसके लिए सबसे पहले भर्ती की प्रक्रिया शुरू की थी। मामला विवादों में उलझ गया। उसके बाद चुनावी आचार संहित लगने के चलते प्रक्रिया रूक गई। सत्ता परिवर्तन के बाद नए सिरे से प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन मामला कोर्ट पहुंचा और प्रक्रिया रोकनी पड़ी। 10 हजार होगा पारिश्रमिक, बिना सरकार की अनुमति के नहीं निकाले जा सकेंगे विद्यालयवार रिक्तियां प्रारंभिक शिक्षा निदेशक निर्धारित करेंगे। करों और सेवा प्रदाता शुल्क सहित 10 हजार का मासिक पारिश्रमिक तय किया गया है। इसमें एजेंसी चार्जेज, जीएसटी, अन्य खर्च भी शामिल हैं। प्रत्येक जिले में प्राथमिक शिक्षा के उपनिदेशक के समग्र नियंत्रण में रहते हुए प्रशिक्षक स्कूल के सबसे वरिष्ठ शिक्षक की देखरेख में काम करेंगे। सरकार की मंजूरी के बिना किसी भी प्रशिक्षक को वियोजन से मुक्त नहीं किया जा सकेगा। नामांकन भिन्नता या प्रशासनिक कारणों से प्राथमिक शिक्षा निदेशक के परामर्श से स्थानांतरण हो सकेंगे।

वक्फ संशोधन कानून बंगाल में लागू ही नहीं होगा, फिर बवाल क्यों? हिंसा के बीच वक्फ कानून को लेकर हमलावर ममता

कोलकाता वक्फ संशोधन कानून को लेकर पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में फैली हिंसा और तनाव के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को साफ शब्दों में कहा कि जब यह कानून राज्य में लागू ही नहीं होगा तो फिर हिंसा क्यों हो रही है? उन्होंने राज्यवासियों से शांति बनाए रखने की अपील की है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “जिस कानून की बात हो रही है, वह केंद्र सरकार ने बनाया है, राज्य सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं। हमने उस कानून का समर्थन नहीं किया और यह बंगाल में लागू नहीं होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग इस मुद्दे को लेकर लोगों को भड़का रहे हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। धर्म के नाम पर गुमराह किया जा रहा: ममता बनर्जी ममता ने अपने संदेश में कुछ राजनीतिक दलों पर धर्म के नाम पर राजनीति करने और लोगों को गुमराह करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा, “कुछ पार्टियां धार्मिक भावनाओं का दुरुपयोग कर राजनीतिक फायदा उठाना चाहती हैं। लेकिन धर्म का असली मतलब है इंसानियत, करुणा, सभ्यता और आपसी भाईचारा।” मुख्यमंत्री ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की। उनकी इस अपील से ठीक पहले राज्य के पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार और कानून-व्यवस्था के एडीजी जावेद शमीम ने भी लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की। जावेद शमीम ने कहा कि कई जगहों पर गलत जानकारी की फैक्ट्री चल रही है, जिनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो रही है। उन्होंने बताया कि जो भी लोग हिंसा या उकसावे में शामिल हैं, उन्हें चिन्हित कर गिरफ्तार किया जा रहा है। पहले भी कर चुकी हैं वक्फ कानून का विरोध तृणमूल कांग्रेस शुरू से ही वक्फ संशोधन बिल का विरोध करती आई है। संसद की संयुक्त समिति में तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने इसका कड़ा विरोध किया था, वहीं सुप्रीम कोर्ट में इस कानून के खिलाफ याचिका तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा ने किया। कुछ दिन पहले ममता बनर्जी ने साफ कहा था कि बंगाल में किसी को वक्फ संपत्ति हथियाने नहीं दी जाएगी। उन्होंने अल्पसंख्यकों को भरोसा दिलाते हुए कहा था, “जब तक दीदी हैं, आपकी संपत्ति कोई नहीं ले सकेगा।”

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