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पाकिस्तानी सेना छोड़ने के बाद भी वर्दी पहनता रहा तहव्वुर राणा, ISI और लश्कर संग बैठकें, खुले राज

नई दिल्ली राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के मुख्य साजिशकर्ता तहव्वुर हुसैन राणा से पूछताछ कर रही है। अब तक के सवाल-जवाब में कई सारे नए खुलासे हुए हैं। पता चला कि पाकिस्तानी सेना का मेडिकल कोर छोड़ने के बाद भी वह लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े लोगों से मिलते वक्त सैन्य वर्दी पहना रहता था। रिपोर्ट के अनुसार, राणा पाकिस्तान में पंजाब प्रांत के चिचावटनी गांव का रहने वाला है और उसके पिता स्कूल प्रिंसिपल थे। तहव्वुर राणा को लेकर तीन भाई हैं। उसका एक भाई पाकिस्तानी सेना में साइकोलॉजिस्ट है, जबकि दूसरा पत्रकार है। उसने कैडेट कॉलेज हसनाबदल में पढ़ाई की, जहां उसकी मुलाकात डेविड कोलमैन हेडली (दाऊद सईद गिलानी) से हुई, जो 26/11 हमलों से जुड़ा है और फिलहाल अमेरिकी जेल में बंद है। तहव्वुर हुसैन राणा साल 1997 में अपनी पत्नी समरज राणा अख्तर के साथ कनाडा चला गया, जो डॉक्टर है। यहां उसने इमिग्रेशन कंसल्टेंसी शुरू की और बाद में हलाल मांस का कारोबार करने लगा। कंसल्टेंसी ही उसकी आतंकी गतिविधियों का मुखौटा बनी, जिसमें हेडली ने सलाहकार की भूमिका निभाई। मीडिया ने सूत्रों के हवाले से बताया कि मेडिकल डिग्री रखने वाला राणा ने सर्विस छोड़ने के बाद भी सैन्य वर्दी पहनता था। यूनिफॉर्म में उसने आतंकी शिविरों का दौरा किया और लश्कर-ए-तैयबा व आईएसआई से जुड़े गुटों के संपर्क में रहा। तहव्वुर राणा ग्लोबल आतंकी साजिद मिर के भी टच में था, जो भारत का मोस्ट वांटेड भगोड़ा है। मिर ने ही 26/11 हमलों के दौरान मुंबई के चबाड हाउस पर हमले की साजिश रची थी, जिसमें 6 बंधकों की मौत हुई थी। तहव्वुर राणा का मेजर इकबाल से कनेक्शन अमेरिका ने साजिद मिर की गिरफ्तारी के लिए 50 लाख डॉलर का इनाम रखा है। साल 2022 में भारत ने संयुक्त राष्ट्र को एक ऑडियो सौंपा था, जिसमें मिर हमलावरों से बातचीत करता सुनाई देता है। एनआईए सूत्रों के अनुसार, तहव्वुर राणा पाकिस्तानी सेना की वर्दी पहनकर मेजर इकबाल से मिला था, जो एक संदिग्ध ISI अधिकारी है। इकबाल पर हेडली की ओर से टोही मिशनों के लिए फंड देने, निगरानी रखने और निर्देश देने का आरोप है। रिपोर्ट में कहा गया कि हेडली ने 2010 में मृत्युदंड से बचने के लिए अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उसने उस व्यक्ति के साथ 20 से अधिक ईमेल शेयर करने का खुलासा किया, जिसे वह चौधरी खान के नाम से जानता था और जिसका मेजर इकबाल उपनाम था।

’90 दिनों के भीतर बिल पर फैसला लेना जरूरी’, पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति के लिए समय सीमा तय की

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट का राज्यपाल के मामले में फैसला शुक्रवार को ऑनलाइन अपलोड हो गया है। इस फैसले में पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने निर्धारित किया है कि राष्ट्रपति को राज्यपाल की तरफ से उनके विचार के लिए आरक्षित विधेयकों पर संदर्भ प्राप्त होने की तिथि से तीन महीने की अवधि के भीतर निर्णय लेना चाहिए। शीर्ष अदालत की तरफ से तमिलनाडु के राज्यपाल आर एन रवि की तरफ से राष्ट्रपति के विचार के लिए रोके गए और आरक्षित किए गए 10 विधेयकों को मंजूरी देने और राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों पर कार्रवाई करने के लिए सभी राज्यपालों के लिए समयसीमा निर्धारित की थी। फैसला करने के चार दिन बाद, 415 पृष्ठों का निर्णय शुक्रवार को रात 10.54 बजे शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। देरी पर राज्य को देनी होगी जानकारी शीर्ष अदालत ने कहा कि हम गृह मंत्रालय की तरफ से निर्धारित समय-सीमा को अपनाना उचित समझते हैं… और निर्धारित करते हैं कि राष्ट्रपति को राज्यपाल की तरफ से उनके विचार के लिए आरक्षित विधेयकों पर संदर्भ प्राप्त होने की तिथि से तीन महीने की अवधि के भीतर निर्णय लेना आवश्यक है। इस अवधि से परे किसी भी देरी के मामले में, उचित कारणों को दर्ज करना होगा और संबंधित राज्य को सूचित करना होगा। राज्यों को भी सहयोगात्मक होना चाहिए और उठाए जा सकने वाले प्रश्नों के उत्तर देकर सहयोग करना चाहिए और केंद्र सरकार द्वारा दिए गए सुझावों पर शीघ्रता से विचार करना चाहिए।’ अनुच्छेद 200 का किया गया जिक्र जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने 8 अप्रैल को राष्ट्रपति के विचार के लिए दूसरे चरण में 10 विधेयकों को आरक्षित करने के फैसले को अवैध और कानून की दृष्टि से त्रुटिपूर्ण करार देते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा था कि जहां राज्यपाल किसी विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रखता है और राष्ट्रपति उस पर अपनी सहमति नहीं देते हैं, तो राज्य सरकार के लिए इस न्यायालय के समक्ष ऐसी कार्रवाई करने का अधिकार खुला रहेगा। संविधान का अनुच्छेद 200 राज्यपाल को अपने समक्ष प्रस्तुत विधेयकों पर अपनी सहमति देने, सहमति नहीं देने या राष्ट्रपति के विचार के लिए उसे आरक्षित रखने का अधिकार देता है।

रंग-बिरंगी कैंडी, जूस, चॉकलेट आदि में इस्तेमाल किए जाने वाला आर्टिफिशियल फूड कलर बच्चों के लिए बेहद खतरनाक

उत्तराखंड आज की इस दुनियां में प्रचलित रंग-बिरंगी खाने की चीजें सभी को मोह रही है। विशेष तौर पर ये चीजें बच्चों को खाने में बेहद पसंद आ रही है। लेकिन इन रंग-बिरंगी कैंडी, जूस, चॉकलेट आदि में इस्तेमाल किए जाने वाला आर्टिफिशियल फूड कलर बच्चों के लिए बेहद खतरनाक है। ऐसे में बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।       आपको बताते चलें कि रंग-बिरंगी कैंडी, जूस, चॉकलेट,स्नैक्स आदि चीजों में Red 40, Yellow 5, Yellow 6 और Blue 1 जैसे आर्टिफिशियल फूड कलर मिलाए जाते हैं। जिससे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं जैसे कि अधिक चमड़ी रोग, अस्थमा, नींद में कमी, पेट दर्द, डायरिया और ट्यूमर का सामना करना पड़ सकता है। कुछ रिसर्च बताती हैं कि ये रंग बच्चों के ब्रेन फंक्शन और बिहेवियर को सीधे प्रभावित कर सकते हैं। यह बदलाव धीरे-धीरे होते हैं और पेरेंट्स अक्सर इसे नखरे या टेम्परामेंट समझ कर टाल देते हैं। जानिए कैसे बचाएं बच्चों को? बाजार से खरीदारी करते समय हर पैक्ड फूड का लेबल ध्यान से पढ़ें। अगर उसमें E Numbers (जैसे E102, E110, E129) या फूड कलर लिखा हो, तो उसे अवॉइड करें। बच्चों को घर का बना ताजा खाना ही दें फल, सब्जी, दाल, दूध और होममेड स्नैक्स बच्चों के लिए सबसे सेफ और हेल्दी होते हैं। इसलिए अपने बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए उन्हें घर का बना हुआ ताजा व शुद्द भोजन ही दें। इन सब्जियों व फलों से बनाएं रंगीन खाना चुकंदर (Beetroot), अनार        लाल रंग हल्दी, केसर                            पीला रंग पालक,धनिया,पुदीना                 हरा रंग जामुन, ब्लूबेरी                         बैंगनी रंग इन प्राकृतिक रंगों से ना सिर्फ खाना सुंदर दिखेगा, बल्कि बच्चों को पौष्टिक तत्व भी मिलेंगे।  

किश्तवाड़ में आतंकियों के खिलाफ सेना का बड़ा ऑपरेशन, आर्मी का एक जवान शहीद, जैश कमांडर समेत तीन दहशतगर्द ढेर

किश्तवाड़  जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में कम से कम तीन आतंकियों के मारे जाने की खबर है। चातरी के नैदगाम के जंगलों में हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने जैश कमांडर सैफुल्लाह, फरमान और बाशा को मार गिराया है। मुठभेड़ वाली जगहों से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद हुआ है। वहीं, अभी भी सुरक्षाबलों का सर्च ऑपरेशन जारी है। जम्मू के अखनूर सेक्टर में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान भारतीय सेना का एक जूनियर कमीशंड ऑफिसर (JCO) शहीद हो गया। जानकारी के अनुसार, यह जवान बीती रात आतंकियों से लोहा लेते हुए गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसे तुरंत इलाज के लिए सैन्य अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। रिपोर्ट्स के अनुसार, सुरक्षाबलों ने उधमपुर और किश्तवाड़ जिलों में आतंकियों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया है। इस दौरान सूचना मिली कि सीमा पार से आए आतंकवादी इन इलाकों में छिपे हुए हैं। लेकिन, तब सुरक्षाबलों के हाथ सफलता नहीं लगी थी। इसके बाद तीनों पर 5-5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया। पता चला कि जैश-ए-मोहम्‍मद के कमांडर सैफुल्‍लाह समेत अन्‍य आतंकवादियों के किश्‍तवाड़ जिले के छत्रू जंगल में छिपे हुए हैं। इसके बाद सेना ने पुलिस के साथ मिलकर ज्‍वाइंट सर्च ऑपरेशन चलाया और आतंकी सैफुल्‍लाह को उसके दो अन्‍य साथियों के साथ ढेर कर दिया गया। बताया जा रहा है कि शुक्रवार देर रात दो आतंकवादी मारे गए थे। वहीं शनिवार सुबह एक आतंकवादी मारा गया। इस आपरेशन में आर्मी और पारा कमांडो, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस शामिल थी। एक आतंकवादी की अभी भी तलाश जारी है। घने जंगलों का फायदा उठाकर आतंकी अकसर घुसपैठ और हमले की कोशिश करते हैं। इसलिए यह अभियान घने जंगलों में ही चलाया गया था। सेना ने आतंकियों का पता लगाने के लिए हेलिकॉप्टर और ड्रोन भी उतारे थे। इलाके में हाई अलर्ट घोषित सेना की जम्मू स्थित व्हाइट नाइट कोर्प्स ने बयान जारी कर बताया कि खराब और प्रतिकूल मौसम के बावजूद ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। मुठभेड़ के दौरान एक एके-47 और एक एम4 राइफल समेत भारी मात्रा में गोला-बारूद और युद्ध सामग्री बरामद की गई है। फिलहाल किश्तवाड़ में ऑपरेशन जारी है और इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। सेना और अन्य सुरक्षाबलों की टीमें पूरे क्षेत्र में तलाशी अभियान चला रही हैं ताकि किसी भी अन्य आतंकी को पकड़ा जा सके या मार गिराया जा सके। सेना की इस कार्रवाई को जम्मू-कश्मीर में आतंक के खिलाफ एक बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मुठभेड़ वाली जगहों से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद हुआ है। उधमपुर और किश्तवाड़ जिलों में आतंकियों के खिलाफ सुरक्षाबलों ने बड़ा अभियान चलाया है। खुफिया जानकारी से पता चला है कि सीमा पार से आए आतंकवादी इन इलाकों में छिपे हुए हैं। सुरक्षाबलों को पता चला कि उधमपुर के बसंतगढ़ तीन आतंकवादी एक ग्रामीण के घर में घुस गए और जबरन उसके घर से खाने का सामान, मोबाइल फैन, बैग, जूते और छाता लेकर भाग गए। वहीं 3 अप्रैल को भी मजालता ब्लॉक में आतंकवादियों ने एक परिवार को बंधक बना लिा और फिर उनका मोबाइल फोन लेकर भाग गए। 23 मार्च को पहली बार आतंकवादी हीरानगर के सानियाल में देखे गए थे। इसके बाद सुरक्षाबलों ने इस इलाके की तलाशी शुरू कर दी। 27 मार्च को सूफैन के जंगलों में हुई मुठभेड़ में दो आतंकवादी मार गिराए गए। वहीं चार पुलिसकर्मी शहीद हो गए। इसी बीच आतंकवादियों की घुसपैठ कराने के लिए पाकिस्तानी सेना ने अखनूर में सीजफायर का उल्लंघन किया। जवानों ने पाकिस्तान की इस कोशिश को नाकाम कर दिया। वहीं गोलीबारी में एक जेसीओ बुरी तरह घायल हो गया। उन्हें हेलिकॉप्टर से अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन जान नहीं बचाई जा सकी। 23 मार्च को पहली बार आतंकवादी हीरानगर के सानियाल में देखे गए थे। इसके बाद सुरक्षाबलों ने इस इलाके की तलाशी शुरू कर दी। 27 मार्च को सूफैन के जंगलों में हुई मुठभेड़ में दो आतंकवादी मार गिराए गए। वहीं चार पुलिसकर्मी शहीद हो गए। वहीं शुक्रवार देर रात को आतंकवादियों की घुसपैठ कराने के लिए पाकिस्तानी सेना ने अखनूर में सीजफायर का उल्लंघन किया। जवानों ने पाकिस्तान की इस कोशिश को नाकाम कर दिया। वहीं गोलीबारी में एक जेसीओ बुरी तरह घायल हो गया। उन्हें हेलिकॉप्टर से अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन जान नहीं बचाई जा सकी। अधिकारियों के मुताबिक, सतर्क जवानों ने शुक्रवार देर रात केरी भट्टल क्षेत्र में अग्रिम वन क्षेत्र में एक नाले के पास भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों के एक समूह को देखा और उन्हें चुनौती दी, जिसके बाद भीषण गोलीबारी हुई जो काफी देर तक जारी रही। अधिकारियों ने बताया कि मुठभेड़ में एक जेसीओ घायल हो गए और बाद में उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने बताया कि पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई है और अतिरिक्त बल तैनात किया गया है तथा अंतिम रिपोर्ट मिलने तक तलाश अभियान जारी था। इसी क्षेत्र में 11 फरवरी को आतंकवादियों द्वारा किए गए एक विस्फोट में एक कैप्टन सहित दो सैन्यकर्मी शहीद हो गए थे तथा एक अन्य घायल हो गया था। यह ताजा घटना भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू- कश्मीर के पुंछ जिले में सीमा प्रबंधन से संबंधित मुद्दों पर चर्चा के लिए ब्रिगेड कमांडर स्तर की फ्लैग मीटिंग के दो दिन बाद हुई है। सीमा पार से गोलीबारी की लगभग एक दर्जन घटनाओं और एक आईईडी हमले के बाद तनाव कम करने के प्रयास में यह फरवरी के बाद से दूसरी ऐसी बैठक थी। भारतीय सेना ने सीमा पार से होने वाली आतंकवादी गतिविधियों और संघर्ष विराम उल्लंघन को लेकर अपने समकक्षों के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

पहाड़ों के बीच प्रगति का सेतु ‘अंजी खड्ड’

श्रीनगर जब घाटियां गहरी होती हैं और पहाड़ रास्ता रोकते हैं, तब इंसान के सपने ऊंचे हो जाते हैं। कश्मीर के दिल तक पहुंचने के इन्हीं ऊंचे सपनों ने फिर से एक नई कहानी को जन्म दिया है। ये कहानी एक पुल की है जो सिर्फ लोहे और केबल से नहीं, हिम्मत और हुनर से भी बना है। ये कहानी है भारत के पहले केबल-स्टेड रेलवे ब्रिज- अंजी खड्ड ब्रिज की जो जम्मू-कश्मीर की चुनौतीपूर्ण घाटियों के बीच, अंजी नदी की गहरी खाई को पाटता है। कटरा और रियासी के बीच कनेक्टिविटी को एक नया आयाम देने जा रहा यह अद्भुत संरचना भारतीय इंजीनियरिंग के आत्मविश्वास और कौशल की मिसाल है। यह ब्रिज उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है जो कटरा-बनिहाल रेल खंड में बनाया गया है। ऊबड़-खाबड़ रास्ते और कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ जैसी सभी सीमाओं को पार कर यह ब्रिज घाटी को देश के बाकी हिस्सों से और मजबूती के साथ जोड़ रहा है। आकर्षक डिजाईन के साथ बने इस ब्रिज का निर्माण कार्य सिर्फ 11 महीने में ही पूरा कर लिया गया है जो नदी तल से 331 मीटर ऊंचाई पर स्थित है जबकि नीव से 193 मीटर ऊंचा एक मजबूत सेंट्रल पायलन पर टिका हुआ है, जो इसकी पूरी संरचना को संतुलन में रखता है। अंजी खड्ड ब्रिज, चिनाब ब्रिज के बाद भारत का दूसरा सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज भी है। इस ब्रिज को 96 केबलों के सहारे बनाया गया है जिनका कुल वजन 849 मीट्रिक टन और  कुल लंबाई 653 किलोमीटर है। 725 मीटर लम्बे इस ब्रिज की संरचना में 8,215 मीट्रिक टन स्टील का इस्तेमाल किया गया है। मौजूदा आवश्यकताओं के मद्देनजर बने इस ब्रिज से जम्मू-कश्मीर के विकास के तार जुड़े हुए हैं। यह ब्रिज घाटी के दूर-दराज इलाकों मेंं बसे गांवों और कस्बों का बड़े शहरों के साथ सीधा संपर्क स्थापित करता है जिससे विकासशील जगहों पर चिकित्सा, शिक्षा और अन्य सुविधाओं की उपलब्धता आसान हो जाएगी।  बेहतर कनेक्टिविटी के वजह से स्थानीय लोगों लिए रोज़गार के नए अवसरो का सृजन होगा साथ ही घाटी में व्यापार और पर्यटन को भी जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। ●    पुल की कुल लंबाई: 725 मीटर ●    नदी के तल से ऊंचाई: 331 मीटर ●    सेंट्रल पायलन की ऊंचाई: 193 मीटर ●    केबल की संख्या: 96 ●    केबल का कुल वजन: 849 मीट्रिक टन ●    केबल की कुल लंबाई: 653 किलोमीटर ●    निर्माण में कुल स्टील का इस्तेमाल:  8,215 मीट्रिक टन

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से मुठभेड़ में घायल जवान हुए शहीद, सैन्य कार्रवाई में दो और आतंकी ढेर

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर में घुसपैठियों के साथ मुठभेड़ में घायल हुए सेना के एक जवान ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. शुक्रवार की देर रात, सीमा पार से भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ कर रहे घुसपैठियों को सेना ने अखनूर सेक्टर के केरी बटाल इलाके में पकड़ लिया था, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई थी. सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, इलाके को पूरी तरह से घेर लिया गया और अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है. भारतीय सेना की 16वीं कोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि “किश्तवाड़ के छत्रू इलाके में खराब मौसम के बावजूद चल रहे ऑपरेशन में सेना ने दो और पाकिस्तानी घुसपैठियों को मार गिराया है. ऑपरेशन के दौरान भारी मात्रा में युद्ध सामग्री बरामद की गई है, जिसमें एक AK राइफल और एक M4 राइफल शामिल है.” दो और घुसपैठियों को किया गया ढेर जम्मू-कश्मीर में घुसपैठियों के बढ़ते खतरों के चलते भारतीय सेना और अन्य सुरक्षा बल क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा चुके हैं. नियंत्रण रेखा के पास ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां घुसपैठियों द्वारा घुसपैठ की कोशिशें की जाती रही हैं. आपरेशन के पहले दिन एक घुसपैठिये को किया गया ढेर सेना ने इससे पहले बताया था कि खुफिया जानकारी के आधार पर, 09 अप्रैल को किश्तवाड़ के छत्रू जंगल में जेके पुलिस के साथ एक संयुक्त तलाशी और विनाश अभियान शुरू किया गया. उसी दिन देर शाम (घुसपैठियों से) संपर्क स्थापित किया गया था. घुसपैठियों को प्रभावी ढंग से घेर लिया गया और गोलीबारी शुरू हो गई. अब तक एक घुसपैठियों को मार गिराया गया है. प्रतिकूल इलाके और प्रतिकूल मौसम के बावजूद, हमारे बहादुर सैनिकों द्वारा अथक अभियान जारी है.”  

पार्टनर का नाम पासपोर्ट में जोड़ने के लिए मैरिज सर्टिफिकेट की टेंशन नहीं, बदले पासपोर्ट के नियम

नई दिल्ली अगर आप शादी के बाद अपने पार्टनर का नाम पासपोर्ट में जोड़ना चाहते हैं, तो अब आपको मैरिज सर्टिफिकेट की टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। विदेश मंत्रालय ने इस नियम को पहले से कहीं अधिक आसान बना दिया है, जिससे लाखों लोगों को बड़ी राहत मिली है। पहले पासपोर्ट में पति या पत्नी का नाम जोड़ने के लिए मैरिज सर्टिफिकेट जमा करना अनिवार्य था। यह प्रक्रिया खासकर उन राज्यों में मुश्किल भरी हो जाती थी, जहां शादी के बाद प्रमाण पत्र बनवाना आम चलन में नहीं है—जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश। अब विदेश मंत्रालय ने इस बाध्यता को खत्म करते हुए, स्व-घोषणा पत्र को मान्यता दे दी है। यानी अब आपको सिर्फ एक आसान फॉर्म भरकर, कुछ जरूरी जानकारियों और फ़ोटो के साथ पासपोर्ट में अपने जीवनसाथी का नाम जुड़वाने की सुविधा मिल जाएगी। Annexure J बनेगा अब आपका सहारा नई व्यवस्था के तहत, Annexure J नामक एक डॉक्यूमेंट पेश किया गया है, जिसमें आप दोनों की संयुक्त तस्वीर, और आपके साइनेचर के साथ कुछ बुनियादी जानकारियां शामिल होंगी। यह फॉर्म एक डिक्लेरेशन के रूप में काम करेगा और यही दस्तावेज पासपोर्ट अथॉरिटी के लिए शादी का प्रमाण माना जाएगा।

ऐतिहासिक होगा पल, दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल से गुजरेगी वंदे भारत, 19 अप्रैल को पीएम मोदी दिखाएंगे हरी झंडी

जम्मू कश्मीर कश्मीर घाटी में पहली बार वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की रफ्तार गूंजेगी। 19 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्री माता वैष्णो देवी कटरा से श्रीनगर तक चलने वाली इस हाई-टेक ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। ये सेवा हाल ही में पूरी हुई उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक परियोजना के तहत शुरू हो रही है, जो दशकों से इस क्षेत्र को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने की कोशिश का नतीजा है। 19 अप्रैल को होगी शुरुआत इस ऐतिहासिक मौके पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और कई अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहेंगे। इस वक्त कश्मीर में रेल सेवा केवल बारामुला से संगलदान तक सीमित है। कटरा तक आने वाली लंबी दूरी की ट्रेनें वहीं रुक जाती हैं। लेकिन अब ये वंदे भारत एक्सप्रेस कटरा से सीधे श्रीनगर और बारामुला तक जाएगी, जिससे आम जनता और सैलानियों को पहली बार कश्मीर घाटी तक सीधी ट्रेन सुविधा मिलेगी। जल्द ही ये सेवा जम्मू तक भी बढ़ाई जाएगी, जैसे ही स्टेशन का काम पूरा होगा। ढाई घंटे में पूरा करेगी सफर करीब 150 किलोमीटर की दूरी को यह ट्रेन महज 2 घंटे 30 मिनट में तय करेगी। इस सफर की सबसे खास बात होगी दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल चिनाब ब्रिज भी इस रास्ते में होगा। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी इस पुल का भी दौरा करेंगे और वहां से कटरा आकर ट्रेन सेवा को जनता को समर्पित करेंगे और एक जनसभा को संबोधित करेंगे। गौरतलब है कि उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक परियोजना के तहत बनी 272 किलोमीटर लंबी रेल लाइन जम्मू-कश्मीर में पर्यटन को बढ़ावा देने और पूरे देश से इस इलाके को जोड़ने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

एयरफोर्स के लिए 70 एचटीटी-40 ट्रेनर एयरक्राफ्ट की डील हुई, ट्रेनर एयरक्राफ्ट लीज पर लेने का विचार

नई दिल्ली  इंडियन एयरफोर्स के पास फाइटर एयरक्राफ्ट के साथ ही ट्रेनर एयरक्राफ्ट की भी कमी है। जिसे दूर करने के लिए हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से ट्रेनर एयरक्राफ्ट खरीदने की डील साइन हुई है और ये ट्रेनर एयरक्राफ्ट इस साल सितंबर से मिलने की उम्मीद है। ट्रेनर एयरक्राफ्ट की कमी पूरी करने के लिए एयरफोर्स ट्रेनर एयरक्राफ्ट को लीज पर लेने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। रक्षा मंत्रालय की तरफ से रक्षा मामलों की संसदीय कमेटी को यह जानकारी दी गई है। संसदीय कमिटी ने जब रक्षा मंत्रालय से एयरफोर्स के ट्रेनर एयरक्राफ्ट और सिमुलेटर की संख्या के बारे में पूछा तो रक्षा मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा कि एयरफोर्स के पास जो ट्रेनर एयरक्राफ्ट हैं उनमें बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट, इंटरमीडिएट जेट ट्रेनर और एडवांस्ड जेट ट्रेनर हैं। सभी मॉर्डन एयरक्राफ्ट के सिमुलेटर्स हैं। एयरफोर्स के पास ट्रेनिंग के लिए कुल 14 सिमुलेटर उपलब्ध हैं। बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट लीज पर लेने का विकल्प रक्षा मंत्रालय ने बताया कि वर्तमान में एयरफोर्स के पास ट्रेनर एयरक्राफ्ट की कमी है। इस कमी को पूरा करने के लिए HAL के साथ 70 एचटीटी-40 इंडिजिनियस ट्रेनर एयरक्राफ्ट की डील साइन हुई है। जिसकी डिलवरी इस साल सितंबर से होनी है। जब ये ट्रेनर एयरक्राफ्ट एयरफोर्स में ऑपरेशनलाइज हो जाएंगे उसके बाद 36 अतिरिक्त एचटीटी-40 लिए जाएंगे। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि एयरफोर्स बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट लीज पर लेने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। अभी ट्रेनर एयरक्राफ्ट की संख्या करीब 260 करीब दो साल पहले कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी ने एयरफोर्स के लिए 70 HTT-40 बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट लेने को मंजूरी दी थी। तब कहा गया था कि छह साल में ये सभी 70 ट्रेनर एयरक्राफ्ट एयरफोर्स को मिल जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक एयरफोर्स के पास अभी ट्रेनर एयरक्राफ्ट की संख्या करीब 260 है जबकि स्वीकृत संख्या 388 है। एयरफोर्स के पास ट्रेनर एयरक्राफ्ट के तौर पर 75 एयरक्राफ्ट पीसी-7 मार्क-2 बेसिक ट्रेनर हैं। 86 किरण मार्क-1 और मार्क 1 ए हैं जो इंटमीडिएट जेट ट्रेनर हैं। 99 हॉक मार्क-132 एडवांस्ड जेट ट्रेनर हैं और 42 किरण मार्क टू हैं। प्रोफेशनल मिलिट्री एजुकेशन का पूरा प्रोग्राम एयरफोर्स की तरफ से संसदीय कमेटी को बताया गया कि एयरफोर्स तकनीकी रूप से संवेदनशील सेवा है। इसलिए एयर वॉरियर्स की ट्रेनिंग और स्किल डिवेलपमेंट मानव संसाधन विकास का अहम हिस्सा है। इसके लिए सर्विस से जुड़े कोर्स में प्रोफेशनल मिलिट्री एजुकेशन का पूरा प्रोग्राम है। एयरफोर्स की तरफ से बताया गया कि ट्रेनिंग में सिमुलेटर के इस्तेमाल पर काफी जोर दिया गया है। अब जो अधिकतर सिमुलेटर एयरफोर्स में शामिल किए जा रहे हैं वे स्वदेशी सोर्स से हैं।

वैश्विक चुनौतियों के बावजूद 2024-25 में भारत का निर्यात रिकॉर्ड 820 बिलियन डॉलर अधिक

नई दिल्ली वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक बाजारों में आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद, भारत का माल और सेवा निर्यात वित्त वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 820 बिलियन डॉलर को पार कर गया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 778 बिलियन डॉलर के इसी आंकड़े से करीब 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। उभरते व्यापार परिदृश्य पर चर्चा करने के लिए केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री (सीआईएम) पीयूष गोयल द्वारा निर्यात संवर्धन परिषदों और उद्योग निकायों के साथ आयोजित बैठक में ये आंकड़े सामने आए। बैठक में निर्यात संवर्धन परिषदों, उद्योग निकायों और वाणिज्य और संबंधित मंत्रालयों के अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान केंद्रीय उद्योग मंत्री गोयल ने लाल सागर संकट, खाड़ी क्षेत्र में इजरायल-हमास संघर्ष, रूस-यूक्रेन संघर्ष के लगातार बने रहने और कुछ विकसित अर्थव्यवस्थाओं में धीमी वृद्धि सहित कई प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद निर्यात में सर्वकालिक उच्च उपलब्धि के लिए निर्यातकों की सराहना की। उन्होंने निर्यातकों के प्रयासों की भी सराहना की। बैठक में सीआईएम गोयल ने निर्यातकों को पारस्परिक रूप से लाभकारी बहु-क्षेत्रीय द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के लिए अमेरिका के साथ चल रही चर्चाओं के बारे में भी जानकारी दी। वार्ता की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की, जो फरवरी 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपनी बैठक में बीटीए पर सहमत होने वाले पहले वैश्विक नेताओं में से एक थे। पीयूष गोयल ने निर्यातकों को आश्वासन दिया कि सरकार वैश्विक व्यापार वातावरण में हाल के बदलावों को सफलतापूर्वक नेविगेट करने में सक्षम बनाने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करने के लिए काम करेगी। उन्होंने कहा कि देश सक्रिय तरीके से काम कर रहा है और ऐसे समाधान तलाश रहा है जो राष्ट्र के सर्वोत्तम हित में हों। केंद्रीय उद्योग मंत्री ने निर्यातकों से कहा कि वे घबराएं नहीं और वर्तमान परिदृश्य में सकारात्मक पहलुओं पर ध्यान दें। उन्होंने आश्वासन दिया कि टीम देश के लिए सही परिणाम सुनिश्चित करने के लिए तेजी से काम कर रही है। पीयूष गोयल ने कहा कि विभिन्न देश टैरिफ लगाने के मामले में अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं। हालांकि, जहां तक ​​भारत का सवाल है, विनिर्माण में वृद्धि और अतिरिक्त नौकरियों के सृजन की संभावना है, क्योंकि देश ग्लोबल सप्लाई चेन में बड़े प्लेयर्स को आकर्षित कर सकता है, क्योंकि भारत खुद को एक भरोसेमंद और विश्वसनीय भागीदार के रूप में स्थापित करने में सक्षम रहा है। इसके अलावा, बैठक में विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाली विभिन्न निर्यात संवर्धन परिषदों ने वैश्विक व्यापार में उभरती चुनौतियों के मद्देनजर अपने विचार और दृष्टिकोण प्रस्तुत किए।

1000 किलो का बम और 100 किमी है रेंज, ‘गौरव’ के सफल ट्रायल से कांप उठे दुश्मन

नई दिल्ली रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने एक और कारनामा कर दिखाया है। 8 से 10 अप्रैल के बीच लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम (LRGB) ‘गौरव’ का सफल रिलीज ट्रायल पूरा हुआ। यह परीक्षण भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 एमकेआई विमान से किया गया। ट्रायल के दौरान, इस हथियार को अलग-अलग कई स्टेशनों पर ले जाया गया और एक द्वीप पर मौजूद जमीन के टारगेट को निशाना बनाया गया। इस तरह करीब 100 किलोमीटर की रेंज के साथ पिनपॉइंट एक्यूरेसी को हासिल कर लिया गया, जो इसकी प्रभावशाली क्षमता को दर्शाता है। ‘गौरव’ 1000 किलोग्राम वर्ग का ग्लाइड बम है। इसे अनुसंधान केंद्र इमारत, आयुध अनुसंधान व विकास प्रतिष्ठान और एकीकृत परीक्षण रेंज, चांदीपुर की ओर से डिजाइन और डेवलप किया गया है। यह पूरी तरह स्वदेशी है और भारतीय वायुसेना की सटीक हमले की जरूरतों को पूरा करता है। इस ट्रायल को अडानी डिफेंस और भारत फोर्ज जैसी इंडस्ट्रीज ने सपोर्ट किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, वायुसेना और इंडस्ट्री को बधाई दी, इसे स्वदेशी डिफेंस टेक्नोलॉजी में बड़ा कदम बताया। यह सफलता भारत की आत्मनिर्भरता और सैन्य ताकत को और मजबूत करती है। लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम गौरव की खासियत – 1. एलआरजीबी ‘गौरव’ की खासियत यह है कि इसके पंख इसे ग्लाइड करने में मदद करते हैं, जिससे यह काफी घातक हो जाता है। 2. यह 100 किलोमीटर से ज्यादा की रेंज हासिल कर सकता है, खासकर हाई एल्टिट्यूड (40,000 फीट से ज्यादा) से लॉन्च करने पर। 3. इस बम में हाइब्रिड नेविगेशन सिस्टम है, जो नेविगेशन सिस्टम और जीपीएस डेटा का कॉम्बिनेशन यूज करता है। इससे यह लंबी दूरी तक टारगेट को सटीकता से हिट कर सकता है। 4. यह बंकर, हार्ड स्ट्रक्चर, और एयरफील्ड जैसे टारगेट्स को नष्ट करने में भी सक्षम है। 5. ‘गौरव’ के जरिए वायुसेना के विमान दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम से दूर रहकर हमला कर सकते हैं, जिससे उनकी सेफ्टी बढ़ती है।

एक मिनट में पूरा होगा एक घंटे का सफर, दुनिया का सबसे ऊंचा पुल बना रहा चीन

चीन चीन अपने इंजीनियरिंग मार्वल के एक और नमूने को जल्द ही पूरी दुनिया के सामने पेश करने जा रहा है। दरअसल चीन इन दिनों दुनिया के सबसे ऊंचे पुल का निर्माण करवा रहा है और इसे इसी साल खोला भी जा सकता है। इस पुल का नाम हुआजियांग ग्रैंड कैन्यन ब्रिज रखा गया है और बनने से पहले ही यह चर्चा का विषय बन गया है। हाल ही में पुल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है जिसे देखकर लोग अपनी सांसें रोकने को मजबूर हो रहे हैं। यह पुल देश के ग्रामीण इलाकों में संपर्क स्थापित करने के अलावा प्रमुख पर्यटक आकर्षण भी होगा। द मेट्रो के मुताबिक इस पुल को बनाने में लगभग 280 मिलियन डॉलर खर्च किए गए हैं। पुल की लंबाई की बात करें तो यह लगभग एक मील लंबा और एफिल टॉवर से लगभग 200 मीटर ऊंचा है। सबसे खास बात यह कि पुल के जरिए एक घंटे का रास्ता महज एक मिनट में तय किया जा सकेगा जिसे लोग चमत्कार का नाम भी दे रहे हैं। वहीं चीन ने इस पुल का निर्माण महज तीन साल पहले यानी 2022 में शुरू किया था और यह इस साल जून से खुलने के लिए भी तैयार है। ‘सुपर प्रोजेक्ट’ इसके बारे में जानकारी देते हुए चीनी राजनीतिज्ञ झांग शेंगलिन ने बताया, “यह सुपर प्रोजेक्ट चीन की इंजीनियरिंग क्षमताओं को दुनिया के सामने पेश करेगी और गुइझोउ के विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल बनने के लक्ष्य को बढ़ावा देगी।” उन्होंने बताया कि इसके स्टील के ढांचे का वजन लगभग 22,000 मीट्रिक टन है जो तीन एफिल टावरों के बराबर है और इसे सिर्फ दो महीनों में स्थापित कर दिया गया था। वहीं चीफ इंजीनियर ली झाओ ने कहा है कि वह इसका हिस्सा बनकर गौरवान्वित महसूस करते है। उन्होंने कहा, “मेरे काम को आकार लेते देखना, पुल को दिन-ब-दिन बढ़ते देखना और आखिरकार घाटी के ऊपर ऊंचा खड़ा होना मुझे उपलब्धि और गर्व की अनुभूति देता है।”

अब चीन ने दिया ऐसा झटका कि हिल गई US डिफेंस इंडस्ट्री, ट्रंप डाल-डाल तो जिनपिंग पात-पात

नई दिल्ली दुनिया की दो बड़ी महाशक्तियों अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका ने जहां चीनी सामानों के आयात पर टैरिफ बढ़ाते-बढ़ाते 145 फीसदी तक पहुंचा दिया है, वहीं चीन ने भी पलटवार करते हुए अमेरिकी सामानों के आयात पर कुल 125 फीसदी तक का टैक्स लगा दिया है। इसके साथ ही चीन ने हॉलीवुड फिल्मों और रेयर अर्थ मिनरल्स यानी दुर्लभ खनिजों पर भी बड़ा दांव चल दिया है। बीजिंग ने एक तरफ हॉलीवुड फिल्मों की रिलीज को कम करने का फैसला किया है तो दूसरी तरफ अमेरिकी रक्षा उद्योग को सप्लाई किए जाने वाले दुर्लभ खनिजों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। चीन द्वारा दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर प्रतिबंध से अमेरिकी डिफेंस इंडस्ट्री में खलबली मच गई है क्योंकि ये खनिज अमेरिकी लड़ाकू विमानों और अमेरिकी वायु सेना की अगली पीढ़ी के बेड़े की रीढ़ हैं। बता दें कि बोइंग से लेकर फाइटर जेट, F-47 और F-22 और अमेरिकी लड़ाकू विमानों का नेक्स्ट जेनरेशन एयर डोमिनेंस (NGAD) कार्यक्रम चीन द्वारा सप्लाई किए जाने वाले सामानों पर ज्यादा निर्भर है। किन-किन दुर्लभ खनिजों पर बैन? चीन ने जिन दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर बैन लगाया है, उनमें डिस्प्रोसियम, सैमरियम, गैडोलीनियम, टेरबियम, ल्यूटेटियम, स्कैंडियम और यिट्रियम शामिल हैं। बता दें कि डिस्प्रोसियम उच्च तापमान वाले मैग्नेट में उपयोग किया जाता है। चूंकि जेट इंजन और इस तरह की चीजों को उच्च तापमान वाले मैग्नेट की दरकार होती है इसलिए डिस्प्रोसियम का इस्तेमाल किया जाता है। यह खनिज तत्व उच्च तापमान पर भी मैग्नेट का चुंबकीय गुण बनाए रखने में सहायक होता है। इसी तरह यिट्रियम उच्च तापमान वाले जेट इंजन कोटिंग्स, हाई फ्रीक्वेंसी वाले रडार सिस्टम और सटीक लेजर के लिए जरूरी है। यह विमान के इंजन को उड़ान के बीच में पिघलने से रोकता है और टर्बाइन ब्लेड पर थर्मल बैरियर कोटिंग की सुविधा देता है। इसके अलावा टाइटेनियम, टंगस्टन और नियोबियम जैसे मेटल्स लड़ाकू विमानों को हीट रेसिस्टेन्ट बनाने, उसकी संरचना को आकार देने और स्टील्थ कोटिंग्स में मददगार होते हैं। डिफेंस इंडस्ट्री के अलावा और कहां इस्तेमाल? मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि ये दुर्लभ खनिज डिफेंस इंडस्ट्री के अलावा कम्प्यूटर, चिप निर्माण और इलेक्ट्रिकल वाहनों के निर्माण लिए भी जरूरी हैं। गैलियम रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के निर्माण में सहायक है। इसका इस्तेमाल AI और उपग्रह एवं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में इस्तेमाल होने वाले सेमीकंडक्टर्स और माइक्रोचिप्स में भी जरूरी है। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अमेरिका में ऐसे दुर्लभ खनिजों का 70 फीसदी हिस्सा चीन से आयात होकर आता है। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि चीन के अलावा रूस और ईरान भी ऐसे खनिजों के भंडार पर नियंत्रण रखते हैं। कोलोराडो स्कूल ऑफ माइंस में प्रोफेसर टॉम ब्रैडी के मुताबिक, “ये मिनरल्स निश्चित रूप से चीन के तरकश में ऐसे तीर हैं जो ट्रंप लगातार बढ़ते टैरिफ का जवाब दे सकते हैं।”

12 संगठनों ने अलगाववाद से तोड़ा नाता, पीएम मोदी के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ सपने की जीत: अमित शाह

नई दिल्ली कश्मीर घाटी में अलगाववादी संगठन हुर्रियत को बड़ा झटका लगा है। जम्मू-कश्मीर मास मूवमेंट ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से खुद को अलग कर लिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसकी जानकारी खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए दी। उन्होंने दावा किया कि अब 12 संगठनों ने अलगाववाद से नाता तोड़ लिया है। इसके साथ ही उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के दृष्टिकोण की जीत बताया। गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”मोदी सरकार के तहत जम्मू-कश्मीर में एकता की भावना व्याप्त है। हुर्रियत से जुड़े एक अन्य संगठन जम्मू-कश्मीर मास मूवमेंट ने अलगाववाद को खारिज करते हुए भारत की एकता के लिए पूरी प्रतिबद्धता जताई है। मैं उनके इस कदम का तहे दिल से स्वागत करता हूं।” उन्होंने आगे बताया, ”अब तक हुर्रियत से जुड़े 12 संगठन अलगाववाद से अलग हो चुके हैं और भारत के संविधान पर भरोसा जता रहे हैं।” अमित शाह ने कहा कि यह प्रधानमंत्री मोदी के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के सपने की जीत है। इससे पहले घाटी में तीन बड़े संगठनों ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से नाता तोड़ लिया था। गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए लिखा था, ”जम्मू-कश्मीर इस्लामिक पॉलिटिकल पार्टी, जम्मू कश्मीर मुस्लिम डेमोक्रेटिक लीग और कश्मीर फ्रीडम फ्रंट जैसे तीन और संगठनों ने हुर्रियत से खुद को अलग कर लिया है। यह घाटी के लोगों में भारत के संविधान के प्रति विश्वास का एक प्रमुख प्रदर्शन है। पीएम मोदी का एकजुट और शक्तिशाली भारत का सपना आज और भी मजबूत हो गया है, क्योंकि अब तक 11 ऐसे संगठनों ने अलगाववाद को त्याग दिया है और इसके लिए अटूट समर्थन की घोषणा की है।” कुछ दिनों पहले गृह मंत्री अमित शाह जम्मू-कश्मीर के दौरे पर थे, जहां उन्होंने शहीद डीएसपी हुमायूं मुजम्मिल भट के परिवारवालों से मुलाकात भी की थी। उन्होंने इस मुलाकात की फोटो शेयर करते हुए लिखा था, ”जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीएसपी हुमायूं मुजम्मिल भट ने 2023 में जम्मू-कश्मीर के कोकरनाग में आतंकवादियों के खिलाफ एक ऑपरेशन में सर्वोच्च बलिदान देकर वीरता और देशभक्ति की अमर मिसाल कायम की। आज श्रीनगर में शहीद के परिवार से मुलाकात की और अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त की।”

अजित पवार ने कहा- अब तहव्वुर राणा बताएगा, कौन है 26/11 हमलों का मास्टरमाइंड

पुणे महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख अजित पवार ने 26/11 मुंबई आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर राणा को भारत लाए जाने पर कहा कि उस हमले के पीछे का मास्टरमाइंड कौन है? अजित पवार ने शुक्रवार को पुणे में मीडिया से बात करते हुए कहा, “जब 26/11 हमला हुआ था, तब हम भी मुंबई में थे। उस दौरान हमने घटनास्थल का भी जायजा लिया था। हमने यह पता लगाने की कोशिश की थी कि घटना के पीछे का असली मास्टरमाइंड कौन था। अब हमने तहव्वुर राणा को पकड़ लिया है और वह बताएगा कि घटना के पीछे का असली कारण क्या था और इसके पीछे का मास्टरमाइंड कौन है, जिसने उसे इस तरह की घटना को अंजाम देने का निर्देश दिया था।” तहव्वुर हुसैन राणा को गुरुवार शाम अमेरिका से भारत लाया गया। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने नई दिल्ली के आईजीआई हवाई अड्डे पर पहुंचते ही उसे हिरासत में लिया। इसके बाद राणा को पटियाला हाउस स्थित एनआईए की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 18 दिन की हिरासत में भेज दिया गया। एनआईए अब राणा से 2008 के मुंबई हमलों की साजिश के बारे में विस्तार से पूछताछ करेगी, जिसमें 166 लोग मारे गए थे और 238 लोग घायल हुए थे। राणा को लॉस एंजेलिस से एनआईए और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) की टीमों के साथ एक विशेष विमान से भारत लाया गया। अमेरिका में राणा ने अपने प्रत्यर्पण को रोकने के लिए कई कानूनी कोशिश की, जिसमें अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में आपातकालीन याचिका भी शामिल थी। हालांकि, सभी याचिकाएं खारिज होने के बाद प्रत्यर्पण संभव हो सका। भारत के विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ मिलकर इस प्रक्रिया को पूरा किया। मिडिया ने राणा के प्रत्यर्पण के लिए वर्षों तक प्रयास किए। एजेंसी ने अमेरिका की एफबीआई, न्याय विभाग (यूएसडीओजे) और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर काम किया। राणा पर आरोप है कि उसने मुंबई हमलों की साजिश में अहम भूमिका निभाई थी।

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